Lust Stories 3 Review: 'लस्ट स्टोरीज 3' में वैसे तो 4 अलगअलग कहानियां हैं मगर विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित चौथी कहानी का जिक्र शुरू में इसलिए करना बेहतर होगा कि यह कहानी पूरी फिल्म के उस मूल को समझाती है जिस में अकसर कामुकता दिखाना मतलब भोंडापन दिखाना नहीं होता. सैटअप 80 के दशक के हैदराबाद का लिया हुआ है. पूरी तरह मुसलिम ओरिएंटेड कहानी है. इस में सायरा (अदिति राव हैदरी) एक लिटरेचर टीचर है, जो अपने सुस्त और क्लिनिकल पति बदरू (सिद्धार्थ) से परेशान हो कर खुद अपनी इरोटिक किताब लिखने लगती है.
दिलचस्प यह कि इस में सायरा अपनी क्लास स्टूडैंट्स को मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की कहानी सुनाती है. और समझाती है कि ऐसा नहीं है कि कामुकता एक्सप्रेस नहीं की जा सकती, मसलन इसे सही भाव और शब्दों के चयन से एक्सप्रेस किया जाए तो ज्यादा इंटिमेसी देती है. विशाल ने इस कहानी को बहुत ही रंगीन और नाटकीय अंदाज में पेश किया है. यह बात पूरी फिल्म पर अप्लाई होती है. सिनेमा में कामुकता दिखाने का हुनर बहुत कम लोगों के पास है. जब भी परदे पर 'वासना' की बात आती है, तो निर्देशक या तो हाथ जोड़ कर दूर खड़े हो जाते हैं, या फिर ऐसा भोंडापन परोसते हैं कि सिर चकरा जाए. 'लस्ट स्टोरीज' इस इस लिहाज से सैक्स की फिलौसफी को छूने की कोशिश करती है न कि सैक्स को.
फिल्म में 4 बड़े निर्देशकों ने अपनीअपनी कहानियों पर काम किया है. विशाल भारद्वाज का जिक्र आ चुका है, इस के अलावा विक्रमादित्य मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा हैं. कुछ कहानियां बढ़िया हैं, तो कुछ सिर्फ समय बरबाद करती हैं. फिल्म की शुरुआत होती है विक्रमादित्य मोटवाने की कहानी से. कहानी 2 ऐसी पत्नियों (राधिका आप्टे व कोंकणा सेन) की है जो अपनी सुस्त सैक्स लाइफ से ऊब चुकी हैं. वे इसे तोड़ने के लिए एकदूसरे के पतियों (विजय वर्मा व अभिषेक बनर्जी) को स्वाइप करने की प्लानिंग करती हैं.
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