Nuclear Bomb Acciden: 11 मार्च 1957 को अमेरिकी वायुसेना का B-47 स्ट्रैटोजेट बॉम्बर फ्लोरिडा के होमस्टेड एयरबेस से इंग्लैंड के लिए उड़ान भर रहा था. मौसम साफ था. कोल्ड वॉर का दौर चल रहा था. रूस से तनाव के चलते अमेरिका हर वक्त 10-12 परमाणु बम से लदे विमान हवा में रखता था. इस विमान में भी एक मार्क-6 बम लदा था. बम में यूरेनियम कोर तो नहीं था लेकिन 4000 पाउंड का TNT वाला विस्फोटक जरूर था. नियम ये था कि उड़ान के बीच में ही बम को सेफ मोड से आर्म मोड में किया जाता था ताकि लैंडिंग के समय गलती से फट न जाए.
सुबह करीब 9:30 बजे हुआ ये कि विमान के नेविगेटर कप्तान ब्रूस कुलका ने बम बे में लगे एक पिन को चेक करने के लिए हाथ डाला. पिन पुरानी थी. जैसे ही उसने उसे छुआ, पिन टूट गई और बम बे का दरवाजा खुल गया. 7600 पाउंड का बम सीधे 15,000 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरने लगा. पायलट कप्तान अर्ल कूल्सन ने तुरंत रेडियो पर चिल्लाकर कहा हमने बम गिरा दिया. ग्राउंड कंट्रोल पहले समझा कि मजाक है लेकिन रडार पर बम नीचे जाता दिख रहा था.
बम जाकर गिरा मार्स ब्लफ के फ्लोरेंस काउंटी में एक वाल्टर ग्रेग के पिछवाड़े में. ठीक उस वक्त ग्रेग परिवार नाश्ता कर रहा था. उनकी 6 साल की बेटी हेलेन ग्रेग किचन में थी. बम जमीन से टकराते ही 4000 पाउंड TNT फट गया. आवाज इतनी तेज थी कि 10 मील दूर तक सुनाई दी. जमीन में 35 फीट चौड़ा और 20 फीट गहरा गड्ढा बन गया. घर की छत उड़ गई. दीवारें ढह गईं. हेलेन ग्रेग के चेहरे और पैरों पर कांच के टुकड़े लगे जबकि वह बम फटने वाली जगह से दो किलोमीटर की दूरी पर थे. उनके मां, पिता और दादी भी जख्मी हुए. मुर्गियां मर गईं. कार पलट गई लेकिन गनीमत ये थी कि बम में यूरेनियम कोर नहीं था. अगर कोर लगा होता तो मार्स ब्लफ नाम का गांव ही मिट जाता. हिरोशिमा जितना नुकसान हो सकता था.
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