BJP Organizational Reshuffle: भाजपा ने आखिरकार अपने IT सेल के सबसे बड़े चेहरे  को हटाने का फैसला कर लिया है. नितिन नवीन की नई टीम में राम माधव और स्मृति ईरानी की वापसी हुई है जबकि बीएल संतोष संगठन महामंत्री बने रहेंगे. पार्टी इसे संगठनात्मक फेरबदल कह रही है लेकिन हकीकत कुछ और है. पिछले 2 साल में लगातार प्रधानमंत्री की छवि का ग्राफ नीचे गिरा है. जिस नैरेटिव मशीन को बनाने में अमित मालवीय ने 10 साल मेहनत की थी वही मशीन अब बैकफायर कर रही है और यह नुकसान जेन जी ने किया है जो अब अमित मालवीय की मुट्ठी से निकल चुकी है.

अमित मालवीय को हटाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह जेन जी है. 2024 के बाद से देश की राजनीति में 18 से 28 साल के वोटर सबसे बड़ा फैक्टर बन गए हैं. ये वो पीढ़ी है जो अखबार नहीं पढ़ती, टीवी डिबेट नहीं देखती, मन्दिरबाजी में नहीं फंसती, गुरुओं के और नेताओं के प्रवचन नहीं सुनती. यह पीढ़ी इंस्टाग्राम रील, यूट्यूब शॉर्ट्स और ट्विटर के थ्रेड से तय करती है कि सच क्या है और यहीं पर अमित मालवीय की पूरी रणनीति फेल हो गई.

अमित मालवीय आज भी 2014 वाले मॉडल पर चल रहे थे. 2014 वाला मॉडल यह था कि एक मैसेज बनाओ, उसे 10 लाख व्हाट्सएप ग्रुप में फॉरवर्ड करो, 2000 ट्रोल अकाउंट से ट्रेंड करवाओ और टीवी पर 8 बजे डिबेट में किसी मुद्दे को देशभक्ति और किसी को एंटीनेशनल का सर्टिफिकेट दिलवा दो लेकिन जेन Z ने इस फॉर्मूले को पकड़ लिया. जेनजी को पता चल गया कि कौन सी खबर फेक है, कौन सा वीडियो AI से बना है और कौन सा हैशटैग 3 घंटे में 50 हजार बॉट से चलाया गया है. पेपर लीक के मुद्दे पर जब युवा सड़क पर उतरे तो IT सेल के पास जवाब में सिर्फ भारत-पाकिस्तान और हिन्दू मुस्लिम वाले मीम थे. नतीजा, बरगलाने की जगह उल्टा एक्सपोजर हुआ.

अमित मालवीय की इस नैतिक और राजनैतिक गिरावट का सबसे बुरा असर प्रधानमंत्री की छवि पर पड़ा. 2014 से 2022 तक अमित मालवीय ने जो 56 इंच, विकास पुरुष और विश्वगुरु वाला ग्राफ बनाया था वह ग्राफ भरभरा कर नीचे गिर गया. हर भाषण के 10 क्लिप, हर विदेश यात्रा की 50 फोटो, हर योजना का इन्फोग्राफिक ये सब इसी फैक्ट्री से निकलता था लेकिन 2023-2025 में यह गुब्बारा फट गया. मणिपुर, महंगाई, पेपर लीक और चुनावी बॉन्ड जैसे हर मुद्दे पर IT सेल ने डिफेंसिव ट्वीट किए लेकिन जेन Z ने इन पर रिएक्ट करना ही बंद कर दिया जिससे एलगोरिदम ने अमित मालवीय को खडेड़ कर बाहर कर दिया.

आज स्थिति ये है कि प्रधानमंत्री के पुराने भाषणों के क्लिप खुद उनके खिलाफ मीम बन रहे हैं. 10 साल तक जिस मजबूत नेता की इमेज गढ़ी गई थी वो अब गायब नेता और इवेंट मैनेजर के तंज में बदल चुकी है. रही सही कसर जुलाई के जंतर मंतर प्रोटेस्ट में पूरी हो गई और अमित मालवीय की पूरी मेहनत धरी की धरी रह गई.

अब इस खाली जगह को भरने के लिए स्मृति ईरानी और राम माधव आये है. स्मृति ईरानी का ट्रैक रिकॉर्ड नैरेटिव चलाने का अच्छा रहा है. टीवी सीरियल से राजनीति तक और राजनीति से ट्विटर वार तक वो फ्रेमिंग करना जानती हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या 2026 की जेन Z वही ऑडियंस है जो 2014 में थी? जेन Z व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फॉरवर्ड मैसेज को 2 सेकंड में फेक टैग कर देती है. जेनजी AI से बना वीडियो पहचान लेती है. राष्ट्रवाद के नाम पर बेरोजगारी को इग्नोर नहीं करती. अब कोई उन्हें पुराने ढर्रे का फेक नेरेटिव नहीं थमा सकता क्योंकि यह पीढ़ी गूगल पर 30 सेकंड में सोर्स चेक कर लेती है.

बीजेपी IT सेल का असली संकट ये है कि उसने पिछले 10 साल में सूचना की जगह प्रोपगैंडा को तरजीह दी है. हर आलोचना को देशद्रोह, हर सवाल को टुकड़े-टुकड़े गैंग कहकर दबाने की कोशिश हुई लेकिन इंटरनेट का नियम है, जितना दबाओगे, उतना वायरल होगा. आज युवा गोदी मीडिया और IT सेल जैसे शब्द खुद इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्हें समझ आ गया है कि कौन सी खबर स्पॉन्सर्ड है और कौन सी सच है इसलिए अमित मालवीय का जाना कोई मामूली बात नहीं है. यह एक पूरे दौर के अंत का संकेत है. वो दौर जब आप 2 करोड़ के बजट से ट्रेंड खरीदकर जनता की राय बना सकते थे. अब वो दौर है जब जनता खुद कंटेंट बना रही है, फैक्ट चेक कर रही है और सवाल पूछ रही है.

स्मृति ईरानी कितनी भी अच्छी स्पीकर हों, राम माधव कितने भी स्ट्रेटेजिस्ट हों लेकिन अगर उनके पास नौकरी, शिक्षा, महंगाई जैसे जमीनी मुद्दों पर जवाब नहीं होगा तो कोई भी IT सेल प्रधानमंत्री की बची खुची छवि को नहीं बचा पाएगा. जेन Z बेवकूफ नहीं है. उसे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं चाहिए. उसे नौकरी, संवाद और जवाबदेही चाहिए और जब तक बीजेपी ये नहीं समझेगी, IT सेल के इंचार्ज बदलते रहेंगे और प्रधानमंत्री का ग्राफ नीचे गिरता ही रहेगा. BJP Organizational Reshuffle

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...