NALSAR University: मामला शुरू हुआ 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के दीक्षांत समारोह से. यूनिवर्सिटी ने अपने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का फैसला किया. गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के हाथों लॉ स्टूडेंट्स को डिग्रियां दी जानी थीं. लेकिन यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए विश्वविद्यालय से मुख्य अतिथि के नाम पर पुनर्विचार करने की मांग की.

छात्रों की आपत्ति का आधार मुख्य रूप से जस्टिस सूर्यकांत द्वारा 15 मई 2026 को की गई एक टिप्पणी और जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को लेकर उनके सार्वजनिक रुख से था. दरअसल जस्टिस सूर्यकांत ने ही देश के बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कह कर सम्बोधित किया था, जिसके बाद युवाओं की एकजुटता, कॉकरोच जनता पार्टी का गठन, दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक और ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ जेन-जी का जबरदस्त धरना प्रदर्शन, उनकी मांगों के समर्थन में समाजसेवी और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का 34 दिन का आमरण अनशन और आंदोलन से उपजे भारी दबाव में मोदी सरकार द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा लिए जाने तक पूरी कहानी के मूल में जस्टिस सूर्यकांत द्वारा उच्चारित शब्द 'कॉकरोच' ही था.

मामला यहीं तक नहीं रुका. देश भर से जंतर मंतर पर जुटे छात्र-छात्राओं और युवाओं पर पुलिस लाठीचार्ज, हिंसा और गोलीबारी के खिलाफ जब मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष आया तो उन्होंने यह कहकर याचिकाकर्ता को दुत्कार दिया कि इस सब के लिए उनके पास टाइम नहीं है. उन्होंने उन वीडियो तक को देखने से इंकार कर कर दिया, जिनमें पुलिस द्वारा बड़ी बेदर्दी से बच्चों को कील लगी लाठियों से पीटा गया था, लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स में पुलिस अधिकारी द्वारा डंडा घुसाने के दृश्य थे, बच्चों पर पैलेट गन चला कर जख्मी करने की फुटेज थीं, मगर जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें देखने तक से साफ़ मना कर दिया यह कह कर कि उनके पास इसके लिए टाइम नहीं है. यह वही सुप्रीम कोर्ट हैं जहां 2014 से पहले न्याय की कुर्सियों पर बैठे जज इस तरह के मामलों में खुद ही संज्ञान ले लिया करते थे. समन जारी कर दिया करते थे. राज्यों के डीजीपी और मुख्य सचिव तक को तलब कर लेते थे.

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