Partition 1947: 14 अगस्त 2026 को ‘बंटवारा 1947’ रिलीज हुई और इस फ़िल्म के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया. आरएसएस ने आईटी सेल के जरिये अपना पुराना राग अलापना शुरू कर दिया कि भारत के बंटवारे के लिए जवाहरलाल नेहरू और उनकी कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है अगर बंटवारा नहीं होता तो हिन्दुओं को अखंड भारत मिल जाता. आरएसएस का नेरेटिव असल में बेहद भौंडा और इतिहास की समझ से कोसों दूर नजर आता है. सवाल यह है कि क्या बंटवारे के लिए नेहरू या उनकी कांग्रेस जिम्मेदार हैं? अगर बंटवारा नहीं होता तो क्या होता?
‘बंटवारा 1947’ फ़िल्म की कहानी भारत के विभाजन के उस दौर की है, जब देश आजादी के साथ-साथ भयानक हिंसा, डर और पलायन से गुजर रहा था. फिल्म में सनी देओल का किरदार सिकंदर मिर्जा ने निभाया है. सनी देओल ऐसे हालात में फंसे लोगों के बीच खड़े दिखाई देते है, जहां धर्म के नाम पर इंसान एक-दूसरे के दुश्मन बनते जा रहे हैं. एक परिवार और उसके आसपास के लोगों की जिंदगी अचानक बदल जाती है. घर छूटते हैं, रिश्ते बिखरते हैं और लोग अपनी जान बचाने के लिए अनजान जगहों की ओर भागने को मजबूर होते हैं. फ़िल्म कि कहानी सिर्फ हिंदू-मुस्लिम टकराव की नहीं है बल्कि उस हिंसा के बीच बची हुई इंसानियत की है जहां कुछ लोग नफरत के माहौल में भी दूसरे इंसान को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं. फिल्म इसी सवाल को सामने रखती है कि जब सत्ता और धर्म की राजनीति समाज को बांट देती है, तब आम इंसान के सामने अपने घर, परिवार, पहचान और इंसानियत में से क्या बचाने का विकल्प रह जाता है?
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





