India's National Security: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की की इस्लामी तिकड़ी भारत के लिए सीधा खतरा तो नहीं है लेकिन यह वैचारिक स्तर पर एक चुनौती जरूर बन रही है. तीनों देशों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी धर्म है. साथ ही सत्ता, पैसा और भारत विरोधी नैरेटिव भी है. जब कोई देश खुद को इस्लाम का ठेकेदार घोषित करता है तो उसके विदेश नीति के फैसले भी उसी आइडियोलॉजी से चलने लगते हैं. अब सवाल यह है कि इस तिकड़ी में भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
पाकिस्तान भारत के लिए सबसे पुराना खतरा है. यहां धर्म को स्टेट पॉलिसी बना दिया गया है. पाकिस्तान की सेना और ISI 30 साल से कश्मीर और भारत के अंदर आतंकी नेटवर्क चलाते आ रहे हैं. गहराई से देखें तो ये लड़ाई हिंदू बनाम मुस्लिम नहीं है बल्कि ये एक फेल हो चुके देश की सेना का अपने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोध को जिंदा रखने का धंधा है.
पाकिस्तान की इकॉनमी टूट चुकी है, यह मुल्क IMF के कर्ज पर चल रहा है. ऐसे में सऊदी और तुर्की से उसे पैसा और कूटनीतिक सहारा हासिल करते रहने की मजबूरी है. सऊदी उसे तेल उधार देता है, तुर्की उसे सस्ती तकनीक बेचता है. अकेले पाकिस्तान भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सकता लेकिन जब पाकिस्तान को बाहर से फंडिंग और हथियार मिलेंगे तो सीमा पर घुसपैठ और आतंक की घटनाएं बढ़ेंगी. भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यही है.
सऊदी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, साथ ही यह 1 करोड़ भारतीयों को रोजगार देने वाला देश भी है इसलिए सऊदी का पाकिस्तान के करीब जाना भारत के लिए चिंता का विषय तो है लेकिन खतरा दूसरे रूप में भी है. सऊदी की विदेश नीति में वहाबी इस्लाम को दुनिया भर में फैलाना भी शामिल है. ये धर्म नहीं, एक आइडियोलॉजी का निर्यात है. पिछले 40 साल में सऊदी के पैसों से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हजारों मदरसे, मस्जिद खड़े हुए हैं. साथ ही सऊदी OIC यानी इस्लामी देशों के संगठन के जरिए कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव पास करवाता रहा है. जब तक तेल का खेल है तब तक सऊदी भारत से दुश्मनी नहीं लेगा लेकिन पाकिस्तान और तुर्की जैसे भारत विरोधी देशों के साथ खड़े होने से भारत के साथ व्यापार और सुरक्षा दोनों के लिए यह कोई बेहतर संकेत नहीं है.
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