आजमगढ़ लोकसभा चुनाव को लेकर भोजपुरी के गायक दो अलग अलग खेमे में बंट गये हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके और बिहार में भोजपुरी गाने और फिल्में जनमानस का हिस्सा हो गई हैं. ज्यादातर भोजपुरी के गायक ही भोजपुरी फिल्मों के हीरो भी बनते हैं और सफल भी होते हैं. भोजपुरी फिल्मों में जातीय आधार पर एक खेमेबंदी रही है. पहले यहां पर सवर्ण विरादरी का प्रभाव था पर दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के आने के बाद पिछड़ी जातियों के कलाकारों ने भोजपुरी फिल्मों पर अपना प्रभाव जमाना शुरू किया उसके बाद एक के बाद एक कलाकार और गायक यहां पर पिछडी जातियों के उभरे. इनमें दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के भाई विजय लाल यादव के अलावा खेसारी लाल यादव, प्रवेश लाल यादव जैसे कलाकार प्रमुख हैं.

भोजपुरी कलाकारों में पिछड़ी जातियों की यह बिरादरी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल यानि राजद की समर्थक रही हैं. बिहार में लालू प्रसाद यादव ने हमेशा ही भोजपुरी कलाकारों का साथ दिया. उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी ने भोजपुरी कलाकारों का साथ दिया. विजय लाल यादव खुलकर समाजवादी पार्टी के साथ थे. उनके भाई दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ भी समाजवादी पार्टी का चुनाव प्रचार करते थे. समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में ही दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को यश भारती सम्मान मिला था.

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भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी ने भी समाजवादी पार्टी से ही अपना राजनीतिक सफर शुरू किया. बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की आजमगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा ने दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ का चुनाव मैदान में उतारा तो सबसे बड़ी मुश्किल यह हो गई कि उनकी अपनी ही बिरादरी उनके खिलाफ हो गई हैं. भाई विजय लाल यादव तो खुले मंच से दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ की आलोचना कर ही रहे हैं. दूसरे कलाकारों में कुछ दबी जुबान से तो कुछ खुल कर दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’  का विरोध कर रहे हैं.

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