समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव कहते हैं कि आगरा पार्टी के लिये शुभ होता है. आम जनमानस में भी आगरा की छवि ‘प्रेम नगरी’ की है. सपा ने आगरा में राष्ट्रीय सम्मेलन के बहाने पार्टी में एकता को दिखाने का प्रयास किया था. अखिलेश यादव को उम्मीद थी कि पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव इसमें हिस्सा ले लेंगे तो ‘सपा में सुलह’ दिखाई दे जायेगी.

राष्ट्रीय सम्मेलन के आखिरी वक्त तक अखिलेश यादव के समर्थक यह मैसेज फैलाते रहे कि मुलायम सिंह यादव सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. मुलायम सिंह यादव भी लखनऊ एयरपोर्ट तक जाने के बाद भी राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आगरा तक नहीं जा पाये. चाचा शिवपाल यादव ने सोशल मीडिया पर अखिलेश को बधाई देकर अपने कर्तव्य की ‘इतिश्री‘ कर दी.

आगरा की उपलब्धि के नाम पर राष्ट्रीय सम्मेलन में समाजवादियों ने अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया. ‘सपा में सुलह’ के हालात पहले जैसे ही बने हैं. मुलायम भाई शिवपाल यादव को छोड़कर बेटे अखिलेश के साथ ‘एकला’ चलने को तैयार नहीं है. अखिलेश यादव के आसपास वही लोग हैं जो लखनऊ में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के समय थे. मुलायम के कुछ करीबी लोग अपने बेटे बेटियों को पार्टी में स्थापित करने के लोभ में अखिलेश के साथ हैं और वह अपने को हाशिये पर अनुभव कर रहे हैं. राष्ट्रीय सम्मेलन में आजम खां का छलका दर्द इसका गवाह है. मुलायम चाहते थे कि भाई शिवपाल राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आगरा चलें. शिवपाल ही नहीं मुलायम की बहू अपर्णा यादव भी इस सम्मेलन से दूर रहीं.

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