तुझे दिल से अपने निकाल कर

मैंने ख्वाहिशों को सुला दिया

तू लौट कर भी ना आ सके

मैंने आशियाँ ही जला दिया

 

चुभने लगे थे आंख में

जो ख्वाब तूने दिखाये थे

ये तो शुक्र है के सहर ने फ़िर

मुझे असलियत से मिला दिया

 

तेरा प्यार था के फरेब था

मुझे आज तक ना पता चला

कभी रो दिये तो हंसा दिया

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