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Sleeping Facts : अधूरी नींद सेहत के लिए है खतरे का संकेत, जानें कैसे

Diseases Due To Sleeping Less : हैल्दी रहने के लिए जितना पौषटिक आहार लेना जरूरी है. उतना ही लाइफस्टाइल को स्वस्थ बनाना भी आवश्यक है. इस के लिए सही दिनचर्या के साथसाथ व्यायाम और भरपूर नींद लेनी चाहिए. हालांकि कई लोग अपने बिजी लाइफ शेड्यूल के चलते पूरी नींद नहीं ले पाते है, जिस की वजह से उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

दरअसल, कई अध्ययनों में पाया गया है कि जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो इस से उस के शरीर में कई बीमारियां पैदा होने लगती हैं. इस के अलावा उसे घबराहट, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और अग्रेसिव नेचर की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है. इसलिए जरूरी है कि हर व्यक्ति रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लें.

तो आइए अब जानते हैं भरपूर नींद (Diseases Due To Sleeping Less) न लेने से होने वाले बीमारियों के बारे में.

नींद की कमी से जन्म लेती है ये समस्याएं

  • आप को बता दें कि ये बात कई अध्ययनों में साबित हुई है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद लेता है. उसे दिल की बीमारियां, स्ट्रोक, कैंसर और डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है.
  • इस के अलावा भरपूर नींद (Diseases Due To Sleeping Less) न लेने से ब्रेन टिश्यू पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, जिस से दिमाग के साथसाथ सोचने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.
  • नींद की कमी से शरीर में एक्टिवनेस की कमी भी हो सकती है.
  • वहीं जो व्यक्ति भरपूर नींद नहीं लेता है उसे हर सुबह उठने पर थका हुआ महसूस होता है. इस के अलावा उसे कभीकभी कमजोरी भी महसूस होती है. इसी वजह से दिनभर वो चिड़चिड़ा रहता है और उस का मूड भी सही नहीं रहता. जिस का असर उस के काम पर भी पड़ता है.
  • इस के अलावा भरपूर नींद (Diseases Due To Sleeping Less) नहीं लेने से मानसिक स्थिति पर भी खासा असर पड़ता है.

इन उपायों का करें पालन

अगर आप को भी अच्छी नींद नहीं आती है या आप भरपूर नींद नहीं ले पाते है. तो उन उपायों को जरूर अपनाएं.

  • रूटीन बनाएं

अच्छी नींद लेने के लिए एक रूटीन बनाएं. इस के लिए हर रात एक ही समय पर सोएं और सुबह भी एक ही समय पर उठें. इस आदत को हफ्तेभर अपनाने से ही आप को अच्छा महसूस होगा.

  • इलेक्ट्रौनिक गैजेट से बनाएं दूरी

अच्छी नींद लेने के लिए सोने से करीब एक घंटे पहले टीवी, कंप्यूटर और स्मार्ट फोन जैसे इलेक्ट्रौनिक गैजेट से दूरी बना लें.

  • भारी भोजन करने से बचें

सोने से पहले हल्काफुल्का भोजन ही करें और तलाभुना खाना नहीं खाएं.

  • व्यायाम करें

इस के अलावा सोने से 10 मिनट पहले ब्रीदिंग एक्सरसाइज या व्यायाम जरूर करें. इस से आप को नींद तो अच्छी आएगी ही. साथी ही आप को मानसिक शांति भी मिलेगी.

अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें.

ठंड में शरीर में हो जाती है Vitamin D की कमी, तो इन फूड्स का करें सेवन

Vitamin D Deficiency: ठंड के मौसम में ज्यादातार लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है, जिस से उन की हड्डियां तो कमजोर होती ही हैं. साथ ही शरीर के अलगअलग हिस्सों में भी दर्द होने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी डाइट में उन चीजों को शामिल करें, जो बौडी में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सके.

सर्दियों के मौसम में कुछ लोगों की हड्डियां कमजोर होने लगती है. इस के अलावा उन के शरीर के अलगअलग हिस्सों में भी दर्द की समस्या होने लगती है. आमतौर पर इस की वजह बौडी में विटामिन डी की कमी को माना जाता है.

दरअसल, सूरज की किरणों को विटामिन डी का मुख्य स्त्रोत माना जाता है और सर्दियों में धूप न के बराबर निकलती है, जिस से शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है. ऐसे में जरूरी है कि शरीर में विटामिन डी की कमी पूरा करने के लिए लोग अपनी डाइट में उन फूड्स को शामिल करें. जो बौडी में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सके. तो आइए जानते हैं उन फूड्स (Vitamin D rich foods in winter) के बारे में, जो शरीर को अच्छी मात्रा में विटामिन डी दे सकते हैं.

विटामिन डी से भरपूर है ये फूड्स

  • मशरूम

मशरूम को विटामिन डी का एक अच्छा स्रोत माना जाता है, क्योंकि इस में विटामिन डी2 और विटामिन डी3 की उच्च मात्रा होती है. इसलिए सर्दियों के मौसम में मशरूम जरूर खाना चाहिए.

  • अंडे

जिन लोगों के शरीर में विटामिन डी (Vitamin D rich foods in winter) की कमी है या जिन की हड्डियां कमजोर हो रही हैं उन्हें तो अपनी डाइट में अंडे को जरूर शामिल करना चाहिए. अंडे में विटामिन डी के साथसाथ फैट्स, प्रोटीन और अमीनो एसिड्स की भी भरपूर मात्रा होती है.

  • चीज

चीज में भी विटामिन डी की उच्च मात्रा होती है. इसलिए ठंड के मौसम में चीज को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. रोजाना कुछ मात्रा में चीज खाने से शरीर को विटामिन डी मिलता रहेगा और हड्डियों में भी मजबूती आ जाएगी.

  • फोर्टिफाइड फूड्स

इस के अलावा विटामिन डी (Vitamin D rich foods in winter) की कमी को दूर करने के लिए आप आपने भोजन में विटामिन डी फोर्टिफाइड दूध, जूस, सीरियल्स और ओटमील आदि को भी शामिर कर सकते हैं. इन से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल जाता है.

अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें.

Mamata Banerjee Birthday : दक्षिणपंथी राजनीति को चैलेंज करती ममता बनर्जी

Mamata Banerjee Birthday : राजनीतिक हलकों में काफी समय तक ममता बनर्जी को बखेड़ा खड़ा करने वाली अपरिपक्व नेता के तौर पर देखा जाता रहा. उन के बारे में ऐसी राय बनी रही कि उन्हें बड़े परिपक्व नेताओं के बीच नहीं बुलाया जाना चाहिए. पता नहीं कब, कहां, क्या बवाल मचा दें. मगर आज दीदी की चर्चा राष्ट्रस्तर पर है. उन के बगैर विपक्षी एकता या विपक्षी गठबंधन की बात करना ही बेमानी है.

2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 18 जुलाई को जब बेंगलुरु में विपक्षी जमावड़े में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की उपस्थिति ने ‘विपक्षी एकता मंच’ में जान फूंकी, तो भाजपा रक्षात्मक मोड़ में आ गई. इस पर दीदी ने चुटकी ली कि, ‘भाजपा एक गिलास नहीं पलट सकती, मेरी सरकार क्या पलटेगी?’

बेंगलुरु में विपक्षी एकता मंच पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी को इतना एक्टिव देख कर ही एनडीए ने छोटेछोटे क्षेत्रीय दलों को जोड़ने की कोशिश में शीर्षासन शुरू किया था. भाजपा जानती है कि दीदी की दादागीरी शुरू हुई तो मुकाबला कठिन होगा. दीदी की ताकत का अंदाजा इंडिया गठबंधन को भी खूब है.

ममता ने 2011 में बंगाल के लोगों का दिल एक नारे से जीत लिया था- मां, माटी और मानुष. इस नारे के 3 शब्दों- ‘मां’ यानी मातृशक्ति, माटी यानी बंगाल की भूमि और मानुष यानी बंगाल के लोग, इन 3 को ममता ने अपने दिल के करीब बता कर बंगाल का दिल जीत लिया था.

ममता बनर्जी हमेशा बंगाल के लोगों के हितों पर बात करती हैं. इसी का परिणाम है कि लोग उन्हें हर चुनाव में विजयी बनाते हैं. ममता हमेशा जमीन से जुड़ी नेता रही हैं. अपने लोगों के लिए वे खुली किताब की तरह हैं. सफेद सूती साड़ी, पैर में रबड़ की चप्पल, कंधे पर पर्स की जगह सूती कपड़े का झोला टांगे ममता को अपनी मां के घर से पैदल निकलते जिस ने भी देखा वह उसी पल उन के व्यक्तित्व का कायल हो गया.

ममता हमेशा बंगाल के लोगों के बीच रहीं. राजनीति में आने के बाद भी वे बेहद साधारण से उस घर में रहती रहीं जिस की छत टिन की है और जिस के बगल से एक खुली नहर बहती है, जहां मच्छरों का बसेरा है. उन का सब से ज्यादा जुड़ाव अपनी मां गायत्री देवी से था, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं.

ममता जब भी अपने कालीघाट स्थित उस घर से काम के लिए निकलती थीं तो उन की मां उन्हें बाहर तक छोड़ने के लिए आया करतीं थीं. ममता अपनी गरदन घुमातीं और तब तक अपनी मां को देखा करतीं जब तक कि वे उन की आंखों से ओझल न हो जातीं. मां के घर के भीतर चले जाने के बाद ही वे कार में बैठती थीं. बंगाल के लोगों के लिए यह नजारा आम था. मां के प्रति ममता का वह प्रेम जनता के दिलों में उन के लिए एक स्थाई जगह बना चुका है.

ममता ने बंगाल की जनता के लिए अपने शासनकाल में अनगिनत कल्याणकारी योजनाएं चलाईं. इस का फायदा आम लोगों तक पहुंचा, जिस के चलते बंगाल के लोगों का भरोसा ममता बनर्जी पर कायम हुआ. ममता ने अपने राज्य में कभी हिंदूमुसलिम में भेद नहीं किया. बंगाल का मुसलमान ममता पर आंख मूंद कर भरोसा करता है. उसे पता है कि ममता हैं तो वे सुरक्षित हैं. कोई भी चुनाव हो, ममता के लिए मुसलमानों का एकतरफा वोट पड़ता है. ममता ने समयसमय पर मुसलमानों के हित में कई फैसले लिए हैं.

ममता का जुझारू तेवर

बंगाल के लोगों को ममता बनर्जी का जुझारू तेवर पंसद आता है. ममता आम लोगों के हितों के लिए जुझारू तरीके से लड़ती हैं. इस के चलते ही लोग ममता को चाहते हैं और उन्हें ही चुनते हैं.

भाजपा को घेरने और टोकने का कोई मौका ममता छोड़ती नहीं हैं. हाल ही में कोलकाता की एक जनसभा में उन्होंने केंद्र सरकार के रवैए को उजागर करते हुए कहा, ‘सुनने में आ रहा है कि अब हमें साल 2024 तक फंड नहीं मिलेगा. ऐसा हुआ तो जरूरत पड़ने पर मैं आंचल फैला कर बंगाल की माताओं के सामने भीख मांग लूंगी, लेकिन भीख मांगने दिल्ली (केंद्र सरकार के पास) कभी नहीं जाऊंगी.

उन के सियासी कैरियर में चिंता और गिरावट का दौर पिछले लोकसभा चुनाव में उस वक्त आया था जब भाजपा पश्चिम बंगाल में 42 में से 18 सीटें ले गई थी. हालांकि इस के बाद हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जोरदार वापसी हुई थी लेकिन दक्षिणपंथ के पसरते पांव देख उन्हें चिंता हुई थी कि कैसे भगवा रथ रोका जाए. चुनावी विश्लेषणों से एक बात आईने की तरह साफ़ हुई थी कि टीएमसी का वोट तो ज्यों का त्यों है पर वामदलों और कांग्रेस का वोट भाजपा में शिफ्ट हो रहा है.

इस शिफ्टिंग को रोकने को ममता ने वामदलों और कांग्रेस से हाथ मिला लेना बेहतर समझा और इंडिया गठबंधन में सभी के साथ हो लीं. जाहिर है उन्हें वामदलों के मुकाबले भाजपा बड़ा खतरा लगी जो पश्चिम बंगाल का माहौल बिगाड़ने में भी कामयाब हो रही थी. यह खतरा कितना टला, यह तो इस साल के लोकसभा चुनाव नतीजे बताएंगे लेकिन ममता के लिए सुकून देने वाली बात यह है कि पंचायत चुनावों में वोटरों ने भाजपा को नकारते उन्हें स्वीकारा है.

यह ममता की जीवटता ही कही जाएगी कि उन्होंने वामदलों को एक झटके में पश्चिम बंगाल से उखाड़ फेंका जो अपने उसूल छोड़ने लगे थे लेकिन वोटर को उन का विकल्प नहीं सूझ रहा था. ऐसे में ममता पश्चिम बंगाल के लोगों को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रही थीं कि एक विचार ऐसा भी है जो कांग्रेस और वामदल दोनों का प्रतिनिधित्व करता है और किसी एक विचारधारा के पीछे अंधा हो कर नहीं चलता. अब उन्हें यह साबित करना है कि कट्टर हिंदुत्व की राजनीति से पश्चिम बंगाल को कैसे दूर रखें.

इस के लिए जरूरत पड़ी तो वे लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में उदारता दिखाएंगी और कम से कम पर राजी हो जाएंगी हालांकि इस में टीएमसी का थोड़ा नुकसान है लेकिन ज्यादा नुकसान और बड़े खतरे से बचने को इस के अलावा कोई और रास्ता भी उन के पास नहीं.

सवाल: भाग 1- सुरैया की खुशी बनी अनवर के लिए परेशानी का सबब

लेखक- शेख विकार अहमद

सुबह से ही सुरैया का जी मिचलारहा था, इसीलिए सुबह 6 बजे

उठ कर दोनों बड़े लड़कों का टिफिन तैयार कर उन्हें कालेज भेजने के बाद वह हमेशा की तरह अपने रोजाना के कामों में नहीं लग पाई थी. कुछ अनमनी सी वह बिस्तर पर आ कर लेट गई. काफी देर इंतजार करने के बाद अनवर ने उसे आवाज दी थी. वे सम?ा गए थे कि उस की तबीयत कुछ नासाज है.

अनवर एक सम?ादार पति और जिम्मेदार पिता थे. वे जानते थे कि सुरैया फजर की नमाज पढ़ने के बाद से जो रसोई में घुसती है तो उसे समय का ध्यान ही नहीं रहता. एक के बाद एक अपना बिस्तर छोड़ उस पर हुक्म पर हुक्म फरमाता जाता है. बेचारी, सब का खयाल रखतेरखते ही निढाल हो जाती है.

अनवर का भरापूरा परिवार था.

2 जवान लड़के थे जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. 10वीं में पढ़ने वाली एक लड़की भी थी. यद्यपि सुरैया बच्चों की सगी मां नहीं थी मगर उस के व्यवहार को देख कर कोई सोच भी नहीं सकता कि वह सौतेली मां है. 6 साल पहले जब अनवर की पहली बीवी का इंतकाल हुआ था तब उन के मन में बच्चों के लिए सौतेली मां लाने का इरादा बिलकुल नहीं था.

3 साल पहले की बात है. उन की अम्मा इस कदर बीमार पड़ीं कि खाट पकड़ ली. उस समय अम्मा ने अनवर को पास बुला कर कहा था, ‘मु?ो नहीं लगता कि अब मैं इस बीमारी से उबर पाऊंगी. तुम्हारी लड़की अब जवान हो रही है. उसे ऐसी उम्र में मां की सख्त जरूरत होगी. मेरे मरने से पहले तुम्हें शादी करनी होगी.’

मां की बातों का अनवर के दिल व दिमाग पर गहरा असर हुआ और उन्होंने उन का दिल रखने के लिए शादी करना कुबूल कर लिया. वैसे, दिल से वे कतई राजी न थे. उस समय उन का बड़ा लड़का 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था. अब जब बेटे शादी करने लायक हो रहे हैं तो खुद का विवाह करना अनवर को उचित नहीं लग रहा था मगर जब अम्मा ने बेटी सुमैया का वास्ता दिया तो उन्हें भी एहसास हुआ कि अम्मा जो कह रही हैं वह सच है. आखिर, लड़की के सब से करीब उस की मां ही तो होती है. अब तक तो अम्मा मां की कमी को किसी हद तक पूरा करने की कोशिश करती आई थीं. अगर अम्मा को सचमुच कुछ हो गया तो उस का क्या होगा.

बेटी की खातिर शादी के लिए उन्होंने हां कर दी और फिर उन की इस रजामंदी का अम्मा पर ऐसा असर हुआ कि उन की बीमारी ही भाग गई. वे खाट से ऐसे उठीं जैसे उन में नई जान फूंक दी गई हो. अनवर की शादी सुरैया से हो गई. सुरैया का पहला तलाक हो चुका था. कुछ दिनों तक वे अपने बच्चों और उन की सौतेली मां के नए रिश्ते को काफी गौर से परखने की कोशिश करते रहे. उन का सौतेली मां को ले कर मन में जो डर बना हुआ था वह गलत साबित हुआ. सुरैया एक अच्छी मां साबित हुई. इतनी अच्छी कि बच्चे अपनी सगी मां की मौत का गम भी जल्दी ही भूल गए.

सुरैया की बच्चों के लिए मुहब्बत देख कर अनवर मन ही मन बहुत खुश थे. वे अकसर सुरैया को खुश करने के लिए बच्चों का जिक्र ‘तुम्हारे बच्चे’ कह कर ही करते ताकि उसे भी यह याद न रहे कि वह बच्चों की सगी मां नहीं है.

आज जब अनवर को लगा कि सुरैया की तबीयत ठीक नहीं है तो उन्होंने उसे जगाना उचित नहीं सम?ा और औफिस जाने से पहले यह जानने के लिए कि अगर वह जाग रही हो तो तबीयत के बारे में पूछ लिया जाए, उन्होंने उसे आवाज दी थी. सुरैया जैसे हड़बड़ा कर उठी. उठते ही उस ने घड़ी की तरफ देख कर कहा, ‘‘हाय, साढ़े 7 बज गए. आप ने जगाया क्यों नहीं मु?ो.’’

‘‘कोई बात नहीं. लगता है आज

आप की तबीयत ठीक नहीं है,’’ अनवर ने कहा.

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं. बस, जरा जी मिचला रहा था. मैं अभी लंच तैयार किए देती हूं.’’

नौकर कहीं लूट कर न ले जाएं जेवर, सोसाइटी इस मामले में रहे सतर्क

साल के अंतिम दिन हरियाणा के रोहतक शहर के सैक्टर-14 में एक घर में काम करने वाली नौकरानी ने 10 लाख रुपए और 65 लाख रुपए के जेवर चुरा लिए. इस चोरी को अंजाम देने से पहले उस ने घर के मालिक और उन की पत्नी को दूध में बेहोश होने की दवा दी. दंपती बेहोश हो गए. इस के बाद वह आसानी से सारा सामान ले कर भाग गई.

घर पर झाड़ूपोछा करने वाली यह नेपाली महिला कल्पना इस परिवार के साथ ही रहती थी. महिला को दिल्ली की एक कंपनी से 10 दिन पहले ही एजेंट द्वारा काम पर रखा गया था. दम्पति के बेटे बहू घर में मौजूद नहीं थे. 28 दिसंबर की रात 8:30 बजे मौका देख कर कल्पना ने खाने के बाद वृद्ध दंपति को दूध पिलाया. इस में एक नशीला पदार्थ था. दोनों दूध पीकर बेहोश हो गए. तब कल्पना ने जेवर और कैश पर हाथ साफ़ किया और रफूचक्कर हो गई.

इसी तरह टीवी अभिनेत्री नेहा पेंडसे को भी अपने घर से छह लाख रुपए के गहने चोरी होने का पता चला. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए अभिनेत्री के नौकर को गिरफ्तार किया है. यह चोरी बांद्रा पश्चिम में अरेटो बिल्डिंग की 23वीं मंजिल पर उन के फ्लैट में हुई.

28 दिसंबर को नेहा के पति शार्दुल ने पाया कि 4 साल पहले शादी के उपहार के रूप में मिला एक सोने का कंगन और हीरे से जड़ी अंगूठी गायब थी. शार्दुल आमतौर पर इस आभूषण को बाहर पहनते थे. उस दिन घर लौटने पर उन्होंने इसे घर के नौकर सुमित कुमार को सौंप दिया जिस ने इसे बेडरूम की अलमारी में रख दिया.

सुमित अन्य घरेलू नौकरों के साथ परिसर में रहता है. घटना के दिन शार्दुल बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे तभी उन्हें अलमारी से गहने गायब होने का पता चला. घर के सभी नौकरों से पूछताछ करने पर भी किसी को गायब सामान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उस समय नौकर सुमित घर पर नहीं था और जब सुमित से संपर्क किया गया तो उस ने कोलाबा में अपनी मौसी के घर पर होने का दावा किया. शक के आधार पर पुलिस ने नौकर सुमित को गिरफ्तार कर लिया.

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाले इंजीनियर के घर भी गत 23 दिसंबर को चोरी हो गई थी. पुलिस ने घर की नौकरानी समेत छह चोरों को गिरफ्तार किया. इन के कब्जे से चोरी का 27 लाख रुपए कैश और सोने के जेवरात बरामद कर लिए गए.

दरअसल महेश्वरी प्रसाद नाम के इंजीनियर के घर चोरी का तानाबाना उन की ही 10 वर्ष पुरानी नौकरानी ने बुना था. अलमारी में जरूरत से ज्यादा कैश और जेवर देख उस के मन में लालच आ गया था. उस ने अपने बेटे और दामाद को साथ मिला कर गांव के 3 अन्य युवकों को गिरोह में शामिल किया और एक माह पहले रेकी करवाई. बाद में पुलिस ने इन 6 चोरों के पास से 27 लाख रुपए कैश, सोने की तीन अंगूठियां, एक चेन और चोरी के रुपये से खरीदे गए 3 आईफोन बरामद किए.

सिंचाई विभाग में जोनल इंजीनियर के पद पर झांसी में तैनात यह इंजीनियर 20 दिसंबर को ड्यूटी पर चले गए थे जबकि उन की पत्नी पूनम सुशांत गोल्फ सिटी में रह रही थी. उन की नौकरानी अनुराधा 23 दिसंबर को काम कर के लौटते समय अंदर के दरवाजे खुले छोड़ आई थी. रात करीब पौने दो बजे 3 युवक मकान में दाखिल हुए और अंदर के दरवाजे व अलमारी तोड़कर लौकर में रखे 35 लाख रुपए और सोनेचांदी के जेवर समेट लिए.

इस तरह नौकरनौकरानी द्वारा घर के कीमती सामानों की चोरी के मामले अकसर सामने आते रहते हैं. आज कल संयुक्त परिवारों का ज़माना नहीं रहा. ज्यादातर लोग एकल परिवारों में रहते हैं. ऐसे में कुछ बुजुर्ग या युवा महिलाओं को भी कई दफा घर में अकेला रहना होता है. ये अपराधियों के इजी टारगेट बन जाते हैं. अपराधी अमूमन घर में काम करने वाले सर्वेंट ही होते हैं क्योंकि उन्हें घर की सारी जानकारी होती है.

बहुत सी सोसाइटीज में सुरक्षा के लिए बाहर चौकीदार बैठे होते हैं. मगर उन्हें घर के अंदर की जानकारी नहीं होती. वैसे ज्यादातर साधारण मोहल्लों में सुरक्षा की कोई व्यवस्था ही नहीं होती. हादसा होने के बाद पुलिस का दरवाजा खटखटाने से बेहतर है कि आप कुछ गलत होने ही न दें और पहले से सावधान रहें. यह काम अकेला इंसान नहीं कर सकता.

बेहतर यह होगा कि यह औप्शन म्युनिसिपल कारपोरेशन या पंचायत आदि के पास होना चाहिए कि अगर किसी भी महल्ले में कोई सोसाइटी बन जाती है जैसे रेजिडेंशल वेलफेयर एसोसिएशन या सुधार समिति वगैरह तो फिर वहां रहने वालों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उस एसोसिएशन/ समिति पर सौंपी जानी चाहिए. यानी सभी मिल कर अपने महल्ले में एक सुधार समिति बना लें जिस में शामिल होने के लिए हर रेजिडेंट एक निश्चित धन राशि दें. इस तरह रुपए दे कर कोई भी रेजिडेंट उस समिति का सदस्य बन जाए.

इस एसोसिएशन या समिति का एक कम्पलसरी काम यह होना चाहिए कि वह उन बुजुर्गों और अकेलों की सुरक्षा भी करेगा जो इस के मेंबर है. इस सुधार समिति को सिर्फ घर के बाहर तक ही नहीं बल्कि घर के अंदर आने की भी अनुमति दी जानी चाहिए.

मान लीजिए आप घर में अकेले रहते हो और नौकरानी काम करने आती है तो चौकीदार उस पर नजर रखेगा. अगर चौकीदार को डर लग रहा है या उसे घर की नौकरानी पर शक हो रहा है तो वह आप के घर का दरवाजा खुलवा कर चेक कर सकता है.

यह भी किया जा सकता है कि सोसाइटी के कुछ रूल बना दिए जाएं. मसलन किसी घर में महिला अकेली है तो वह चौकीदार को कह सकती हैं कि एक बार रात में या दिन में उसे आ कर देख ले कि वह सही है या नहीं. इस तरह रोज डिस्टर्ब करने के लिए वह परमिशन देगी. ऐसे में चौकीदार किसी निश्चित समय पर जाकर रोज चेक कर सकेगा कि महिला सलामत है या नहीं.

इस तरह आप को कोई एसोसिएशन मिल जाएगा जहां जा कर आप अपने साथ हुए हादसे के खिलाफ हल्ला मचा सकते हो. सुधार समिति आप के लिए काम करेगी और आप की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी. यह भूल जाएं कि पुलिस वाला आप को बचा सकता. यह काम रेसिडेंट्स को खुद ही करना होगा.

Conjunctivitis : आंखों के सामान्य रोग से कैसे बचें ?

आंख संबंधी बीमारियों में से एक है कंजक्टिवाइटिस. यह एक सामान्य संक्रामक रोग है. यदि इस का समय पर उपचार न किया जाए तो इस से आंखों की रोशनी भी जा सकती है. कंजक्टिवाइटिस को साधारण बोलचाल की भाषा में ‘आंख आना’ भी कहते हैं. वैसे तो यह रोग कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात के बाद इस के होने का खतरा अधिक रहता है. कंजक्टिवाइटिस हर आयुवर्ग वालों को हो सकता है.

कंजक्टिवाइटिस के कई प्रकार होते हैं…

यह बैक्टीरियल और वायरल इंफैक्शन से भी हो सकता है. बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस पहले एक आंख में होती है फिर दूसरी आंख इस की चपेट में आती है. इस के विपरीत वायरल इन्फैक्शन से उत्पन्न कंजक्टिवाइटिस एकसाथ दोनों आंखों में भी हो सकता है.

कंजक्टिवाइटिस धूल, मिट्टी, कैमिकल, धुआं और शैंपू की एलर्जी के कारण भी होता है.

कंजक्टिवाइटिस के कुछ लक्षण प्रमुख हैं-

  • आंखें लाल होना,
  • उन में सूजन,
  • दर्द और खुजली होना,
  • आंखों से निरंतर चिपचिपा पानी निकलते रहना,
  • धुंधला दिखाई देना,
  • सोने के बाद उठने पर पलकें चिपक जाना.
  • शुरुआत में ये लक्षण दोनों में से किसी एक आंख में दिखाई देते हैं, लेकिन धीरेधीरे दूसरी आंख में भी नजर आने लगते हैं.

इस बीमारी का प्रकोप 1 से 2 सप्ताह तक रहता है. यदि सावधानी बरती जाए तो बिना उपचार के ही 15 दिन में यह बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन इस में सफाई और सावधानी बरतना हर किसी के बस की बात नहीं है. इसलिए बेहतर होगा कि नेत्र चिकित्सक से परामर्श ले कर दवा डालें.

  • कंजक्टिवाइटिस होने पर आंखों में दवा सावधानी से डालें.
  • यदि घर में एक से अधिक सदस्यों को यह बीमारी है तो सभी एक ही ड्रौपर से दवा न डालें और न ही इसे आंखों से छुआएं.
  • इसी प्रकार संक्रमित व्यक्ति का तौलिया, रूमाल, तकिया आदि भी इस्तेमाल न करें.
  • इस बीमारी में आंखों में खुजली होती है, लेकिन आंखें खुजलानी नहीं चाहिए.
  • बारबार मसलने से आंखों के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है. यदि सावधानी नहीं बरती गई तो आंखों के भीतर घाव भी हो सकते हैं.

कंजक्टिवाइटिस होने पर सावधानी और सतर्कता बरतनी जरूरी है….

  • यदि संभव हो तो स्कूल, कालेज, औफिस आदि से छुट्टी ले लें, ताकि अन्य लोग इस की चपेट में आने से बच सकें.
  • बीमारी पूरी तरह ठीक होने तक दिन में हर 2 घंटे में एक बार साफ पानी से अपनी आंखें धोएं.
  • यदि आंखों में दर्द हो तो डाक्टर द्वारा दी गई दवा या ड्रौप का इस्तेमाल करें.
  • चाहें तो कपड़े को हलका गरम कर के आंखों पर रख कर सिंकाई कर सकते हैं.
  • चूंकि इस बीमारी से आंखों में खुजली और जलन होती है और पानी भी निकलता है. अत: आंखों को धोने, पोंछने, खुजलाने के बाद अपने हाथ साबुन से अवश्य धोएं.
  • जब भी घर से बाहर निकलें काला चश्मा अवश्य पहनें, ताकि तेज रोशनी की चुभन आंखों में महसूस न हो.
  • साथ ही यह ध्यान रहे कि दूसरे व्यक्ति आप के चश्मे का इस्तेमाल न करें.
  • कंजक्टिवाइटिस से पीडि़त व्यक्ति दिन में बारबार अपने हाथों को साबुन से धोएं.
  • यदि आप कौंटैक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं, तो बेहतर होगा कि बीमारी ठीक होने तक उस के बजाय चश्मा पहनें.
  • यदि आंखों की पलकें आपस में चिपक गई हों तो रूई को गीला कर के धीरेधीरे साफ करें.
  • कंजक्टिवाइटिस के दौरान किसी भी तरह के कौस्मैटिक्स का इस्तेमाल करने से बचें.
  • यदि आप खेलने, तैराकी करने व मौर्निंगवौक का शौक रखते हैं तो ठीक होने तक ये सब न करना ही ठीक है.
  • इस दौरान सामाजिक मेलमिलाप से भी बचना चाहिए. खासतौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति से हाथ न मिलाएं अन्यथा उसे भी इस का संक्रमण हो सकता है.

बचत : बढ़ती उम्र में खुद को रखें आर्थिक रूप से मजबूत

हमारा शरीर मशीन की तरह है. बढ़ती उम्र के साथ इस की कार्यक्षमता घटती है. कई तरह की बीमारियां इस को लगने लगती है. शरीर की एक कार्यक्षमता होती है. यही वजह है कि तय उम्र के बाद इस को रिटायर मान लिया जाता है. सरकारी नौकरी में 60 साल को रिटायरमैंट की उम्र माना जाता है. सरकारी नौकरियों में सामाजिक सुरक्षा के लिए पैंशन इसलिए दी जाती थी कि जिस से बढ़ती उम्र में खुद को आर्थिक रूप से मजबूत रखा जा सके. भारत में सरकारी नौकरियों का ढांचा ब्रिटिश हुकूमत के समय तैयार हुआ था, जिस में नौकरों की सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखा गया था. आजादी के कुछ दिनों के बाद ही सरकार ने इस में कटौती शुरू कर दी और पैंशन बंद करने की योजना लागू कर दी.

पैंशन एक निधि या कोष को कहते हैं, जिस में किसी कर्मचारी के नौकरी के सालों के दौरान पैसा जोड़ा जाता है, ताकि कर्मचारी को नौकरी से रिटायर होने के बाद भी एक तय रकम हर माह पैंशन के रूप में मिलती रहे. यह बढ़ती उम्र में आर्थिक सुरक्षा देने का सब से बड़ा जरिया होती है.

ब्रिटिश हुकूमत आजाद भारत की हुकूमत से अधिक उदार थी. वह आज से अधिक कर्मचारियों का ध्यान रखती थी. आजाद भारत में पैंशन योजना को खत्म करने की तमाम योजनाएं चल रही हैं. भारत में बड़ी आबादी प्राइवेट नौकरी करती है. इस के भी 2 हिस्से हैं. संगठित सैक्टर और असंगठित सैक्टर. संगठित सैक्टर में तय वेतन, बोनस, भत्ते, हैल्थ स्कीम और बीमा जैसी सुविधाएं होती हैं. असंगठित सैक्टर में काम और दाम की नीति से काम किया जाता है.

पैंशन का नहीं रहा भरोसा

बढ़ती उम्र में आर्थिक सुरक्षा के हिसाब से देखें तो सरकारी सेवाएं आज भी बेहतर होती हैं. भले ही वहां पैंशन खत्म हो रही हो पर उन के वेतन अधिक होने से बोनस,ग्रैच्युटी और दूसरे पैसों को अगर बचा कर रखा जाए तो बढ़ती उम्र में आर्थिक रूप से सुरक्षित रहा जा सकता है. वहीं, संगठित सैक्टर में नौकरी करने वाले भी अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं.

इस की सबसे बड़ी वजह यह है

कि जैसेजैसे वेतन बढ़ता है, कंपनी को कर्मचारी बो?ा लगने लगता है. उसे लगता है कि बढ़ती उम्र में कार्यक्षमता घट रही है. बढ़ती बेरोजगारी के दौर में नएनए लोगों को कम वेतन में रखा जा सकता है. ऐसे में रिटायरमैट के पहले ही कर्मचारियों को हटा दिया जा रहा है. उन को बोनस, ग्रैच्युटी या भत्तों के रूप में इतना नहीं मिलता कि जिस से वे बढ़ती उम्र में खुद को मजबूत रख सकें.

प्राइवेट सैक्टर में मिलने वाला वेतन इतना कम होता है कि कर्मचारी बहुत प्रयास के बाद भी लंबीचौड़ी बचत नहीं कर पाता है. महंगाई बढ़ने के कारण बचत करना बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसे में प्राइवेट कर्मचारियों के लिए रिटायरमैंट के बाद जीवनयापन करना बेहद मुश्किल हो जाता है. देश की एक बड़ी आबादी ऐसी है जिस को रिटायरमैंट के बाद सरकार या किसी संस्था से मदद नहीं मिलती. ऐसे में व्यक्ति के लिए सब से अहम यह हो जाता है कि वह खुद को मजबूत रखने की हरसंभव कोशिश करे. कम वेतन वालों के लिए महंगाई के दौर में यह करना बेहद मुश्किल काम है. लेकिन फिर भी बचत ही एकमात्र रास्ता होता है.

खुद का फंड बनाएं

प्राइवेट सैक्टर में काम करने वालों को अपनी योग्यता के अनुसार कम उम्र में ही जौब प्रोफाइल बदलते रहना चाहिए, जिस से कि आप की कीमत बनी रहे और आप को वेतन भी अधिक मिल सके. कंपनी अगर आप की कद्र नहीं कर रही तो कंपनी के प्रति ईमानदार बने रहने के चक्कर में न रहें. अपने वेतन से हर माह एक ऐसी बचत करें जिस का उपयोग किसी भी हालत में आप बुढ़ापे में ही करें.

इस के लिए बैंक, जीवन बीमा और डाकघरों की पैंशन योजनाओं में निवेश कर सकते हैं. निवेश प्राइवेट सैक्टर में कभी भी न करें. वहां पैसा डूब जाने का खतरा रहता है. प्रौपर्टी में भी इस पैसे का निवेश न करें. कई बार प्रौपर्टी में किया गया निवेश भी समय पर नहीं मिलता. अपने रिटायरमैंट के बाद की योजना नौकरी करने के पहले माह से ही शुरू कर दें. इस फंड का उपयोग रिटायरमैंट के बाद ही करें.

बच्चों की पढ़ाई, शादी और दूसरी जरूरतों में अपनी आर्थिक हालत के अनुसार ही खर्च करें. बहुत अधिक कर्ज ले कर ये काम न करें. जीवन से ले कर मरने तक बहुत सारा काम दिखावे के लिए करना पड़ता है. यह न करें. अगर अपनी कमाई आप इस पर खर्च कर देंगे तो अपनी जरूरत के समय आप को दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जबकि दूसरे पर निर्भर रहना ठीक नहीं होता.

आज के समय में अगर आप को अकेले किसी ओल्डएज होम में रहना पड़े तो हर माह 15 हजार से 25 हजार रुपए का खर्च आता है. छोटी से छोटी बीमारी में भी बढ़े खर्च करने पड़ते हैं. जरूरत इस बात की है कि अपना मकान अपने पास रखें जिस से आप को कोई घर से निकाल न सके. इतना पैसा पास रखें कि जिस से बीमार होने पर अपना इलाज करा सकें.

खुद को ऐक्टिव रखें

आर्थिक रूप से मजबूत रखने के लिए रिटायरमैंट शब्द को भूल जाएं. कोशिश करें कि अपने अंदर इस तरह की क्षमता बढ़ाएं जिस से आप की आर्थिक इनकम होती रहे. बहुत सारे ऐसे काम होते हैं, जैसे आप अखबार और पत्रिकाएं बेचने का काम कर सकते हैं. इस में कोई बुराई भी नहीं होती और कमाई भी हो जाती है. अगर आप को बागबानी का शौक है तो कई घरों में आप इस काम को कर सकते हैं. अगर आप बच्चों को पढ़ा सकते हैं तो वह काम कर सकते हैं. दुकानों में आप कुछ घंटों के लिए पार्टटाइम जौब कर सकते हैं. इस से 2 लाभ होंगे, एक तो आप खुद को ऐक्टिव रख सकेंगे, दूसरे, आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे.

शहरों में रह रहे बहुत सारे लोग गांव से आते हैं. जब वे गांव छोड़ते हैं तो अपने खेत और जमीन बेच देते हैं. ऐसा न करें. रिटायरमैंट के बाद यही खेत, जमीन आप के काम आ सकती है. यहां पर बागवानी और खेती कर सकते हैं. गांव में आज भी कम पैसे में जीवन गुजरबसर किया जा सकता है. आप रिटायरमैंट के बाद अपने घर में रहेंगे तो बच्चे भी आप की कद्र करेंगे और प्यार देंगे. वे आप के पास छुट्टियां गुजारने आएंगे. अगर आप उन के ही पास रहेंगे तो उन की आजादी में खलल होगा और उन का आप के प्रति मोह घटने लगेगा. ऐसे में आप के लिए ठीक नहीं होगा. आर्थिक रूप से जितना कम से कम आप दूसरे पर निर्भर रहेंगे उतना ही अच्छा रहेगा. इस का सब से बड़ा रास्ता यह है कि जीवन में अंत समय तक ऐक्टिव रहें.

हैल्दी रहें, बीमारियों से बचें

ऐक्टिव रहने के लिए जरूरी है कि आप बीमारियों से बचे रहें. अगर आप बीमार रहेंगे तो अधिकतर पैसा दवा और डाक्टर पर खर्च होगा. हैल्दी रहने पर यह पैसा बचेगा. और यह आप को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा. कई बार बीमारियों में ज्यादा खर्च होता है. इस के लिए ‘मेडिडक्लेम पौलिसी’ जरूर लें. बड़ी बीमारियों में यह काम आती है. 40 साल के बाद ही शरीर की क्षमता घटने लगती है. इस उम्र से ही अपनी हैल्थ का ध्यान रखें. ऐक्सरसाइज और डाइट का सब से अधिक ध्यान रखना जरूरी होता है. अगर आप नियमित ऐक्सरसाइज करेंगे और हैल्दी डाइट लेंगे तो बीमारियों से बचे रहेंगे. इस से इलाज का खर्च बचेगा.

हैल्थ को भी एक तरह से वैल्थ ही माना जाता है. इस की वजह यह है कि अगर आप अस्पताल और इलाज से दूर रहते हैं तो वह पैसा बचता है. हैल्दी रहने से आप ऐक्टिव रह कर अधिक से अधिक समय तक खुद की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं. यह आप की आर्थिक मदद करती है. इस तरह खुद को स्वस्थ रख कर भी बढ़ती उम्र में आप आर्थिक रूप से मजबूत रह सकते हैं. इस कारण अपनी हैल्थ का ध्यान रखें. कोई बीमारी शुरू हो, उस के पहले ही इलाज और केयर करें. बढ़ती उम्र में मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहें. तनाव वाले काम न करें. शरीर पर अतिरिक्त बो?ा न डालें. समाज में लोगों से सहयोगी स्वभाव में रहें, जिस से जरूरत होने पर लोग आप की मदद कर सके.

Winter Skin Care : रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

सर्दियों में त्वचा और बालों से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस मौसम में खुद की ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.

सर्दियों में शरीर के उन भागों का खयाल रखना जरूरी होता है, जो 2 हिस्सों को जोड़ते हैं. जैसे कुहनियां और घुटने. सर्दियों में यहां की त्वचा काली और रूखी हो जाती है. शरीर के इन भागों पर डैड स्किन की एक परत भी तैयार हो जाती है, जिसे हटा कर उस हिस्से की सफाई करना एक चैलेंज हो जाता है. इन भागों की नियमित देखभाल से आप की सर्दियां खुशगवार गुजरेंगी.

कुहनियों के कालेपन से छुटकारा

दादीमां का नुसखा: सिरका और ग्लिसरीन को बराबर मात्रा में मिला कर इसे प्रभावित जगह लगाएं और फिर थोड़ी देर तक हलकी मसाज करने के बाद पानी से धो लें. दिन में 2 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं. कुछ ही दिनों में पाएं बेदाग और कोमल कुहनियां और घुटने.

इस के अलावा पके चावल से बने स्टार्च का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. नहाने से पहले प्रभावित भाग में स्टार्च लगाएं और फिर 15 मिनट बाद कुनकुने पानी से धो लें. इस प्रक्रिया को कुछ दिनों तक रोज दोहराएं.

ऐक्सपर्ट की राय: मुंबई की फेमस डर्मेटोलौजिस्ट रिंकी कपूर के मुताबिक कुहनियों पर जमी डैड स्किन की परत को हटाने के लिए दिन में 1-2 बार माइल्ड स्क्रब की मदद से मसाज करें. दिन में 2-3 बार सेरामाइड युक्त मौइश्चराइजर लगाएं. इस के अलावा त्वचा के रूखेपन को दूर करने के लिए रोजाना नहाने के पानी में 2-3 बूंदें रोज औयल, शैल औयल और औलिव औयल मिलाएं.

जरूरी टिप: कुहनियों और घुटनों की मौइश्चराइजर से 5 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करें.

बचाएं एडि़यों को फटने से

एडि़यां फटने की वजह से कई बार पैरों से खून आने और दर्द रहने की समस्या भी देखी जाती है. एडि़यों की त्वचा ड्राई होने की वजह से ये फटने लगती हैं.

दादीमां का नुसखा:

1 बड़ा चम्मच ग्लिसरीन में 2 बड़े चम्मच गुलाबजल और 1/2 चम्मच नीबू का रस मिला कर इसे एडि़यों पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें. ग्लिसरीन और गुलाबजल का मिश्रण एडि़यों को मौइश्चराइज तो करता ही है साथ ही दर्द से भी राहत देता है. अगर आप रोजाना इस उपाय को दोहराएंगी, तो आप की एडि़यां नहीं फटेंगी.

1 बड़ा चम्मच ओटमील को पीस कर इस में जोजोबा का तेल मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना कर उसे फटी एडि़यों पर लगाएं. 1/2 घंटा लगा रहने के बाद ठंडे पानी से धो लें.

ऐक्सपर्ट की राय: डा. रिंकी बताती हैं कि फटी एडि़यों के लिए मैडिकेटेड क्रीम का इस्तेमाल करना जरूरी होता है, इसलिए यूरिया और लेक्टिक ऐसिड युक्त क्रीम का इस्तेमाल करें. घर में बनाया घी भी फटी एडि़यों में लगा सकती हैं. सर्दियों की शुरुआत होते ही घी लगाना शुरू कर दें. इस से एडि़यों की नर्माहट बनी रहेगी और वे फटेंगी नहीं.

जरूरी टिप: अगर आप की एडि़यां फट रही हैं तो पैरों में हमेशा मोजे पहने रहें. पैरों को धूल से बचाएं और दिन में 2-3 बार पैरों में मौइश्चराइज करें.

होंठों का रखें खास खयाल

अगर आप सर्दियों में रूखे होंठों से परेशान होती हैं, तो आप को जरूरत है सही सलाह की.

दादीमां का नुसखा: नीबू के रस और गुलाबजल को मिला कर रोज रात को सोने से पहले होंठों में लगाएं. इस प्रक्रिया से होंठों का रूखापन तो दूर होगा ही उन की रंगत भी बनी रहेगी.

इस के अलावा सोने से पहले ग्लिसरीन, गुलाबजल और केसर को मिला कर होंठों पर लगा सकती हैं. कुछ ही दिनों में आप को फर्क दिखाई देने लगेगा.

ऐक्सपर्ट की राय: ऐसे लिप बाम, जिस में बीज वैक्स, सेरामाइड और पैट्रोलियम जैली हो, इस्तेमाल करें. ऐसा लिप बाम नहीं लगाना चाहिए, जिस में कलर और फ्रैगरैंस हो. यह होंठों को और ड्राई बना देता है.

जरूरी टिप: सर्दियों में कभी भी होंठों को रूखा न छोड़ें. हमेशा फटे होंठों पर पैट्रोलियम जैली, ग्लिसरीन और नारियल या जैतून का तेल लगाएं. अगर सर्दियों में आप के होंठ ज्यादा रूखे रहते हैं, तो मैट लिपस्टिक लगाने से बचें. उस की जगह जैली बेस्ड लिपस्टिक लगाएं.

नाजुक अंगों की हो खास देखभाल

सर्दियों में शरीर के नाजुक अंगों की भी खास देखभाल की जरूरत पड़ती है. खासतौर पर महिलाओं को, जिन्हें मासिकधर्म की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में वैजाइनल एरिया में रूखेपन की वजह से रैश आना आम बात होती है.

दादीमां का नुसखा: वैजाइनल एरिया या जांघों के अंदरूनी हिस्सों की सफाई के लिए 1 मग पानी में नमक घोलें और उस पानी से नाजुक हिस्सों को धोएं. नमक एक प्राकृतिक ऐंटीसैप्टिक है, जो रूखी त्वचा को मुलायम बनाएगा.

जांघों के अंदरूनी भागों की कोमलता बनाए रखने के लिए आप नारियल तेल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

ऐक्सपर्ट की राय: जिन्हें वैजाइनल एरिया में इचिंग की शिकायत हो, उन्हें वैजाइनल वाश इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उस जगह के पीएच स्तर को बिगाड़ सकता है. इन नाजुक अंगों के लिए सेरामाइड और स्वेलाइन युक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. ध्यान रहे कि जिस भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रही हों, उस में स्टेराइड न हो.

जरूरी टिप: सर्दियों में टाइट पैंट पहनने से बचें. ऐसे कपड़े पहनने से त्वचा को औक्सीजन नहीं मिल पाती और वह और भी रूखी हो जाती है. इस के अलावा इन अंगों को गरम पानी के बजाय ठंडे पानी से धोएं. वैजाइनल एरिया की सफाई में कतई कोताही न बरतें.

पतिपत्नी के बीच जब हो जाए किसी तीसरे की एंट्री तो क्या करें

वर्षों पहले गीतकार संतोष आनंद ने फिल्म ‘प्रेम रोग’ में सवाल उठाया था, मोहब्बत है क्या चीज़ हम को बताओ. ये किस ने शुरू की हमें भी सुनाओ….’ आज तक इस सवाल का जवाब हमें नहीं मिला. तभी तो कई बार शादी के बाद भी इंसान किसी तीसरे के प्यार में पड़ जाता है. यह प्यार अचानक या किसी मकसद से या सोच समझ कर नहीं होता.

आज की व्यस्त दिनचर्या में वैसे भी इस तरह किसी तीसरे का मिलना आसान नहीं. मगर जब अनजाने ही कोई आंखों को भाने लगे तो दिल में कुछ उथलपुथल होने लग जाती है. इंसान धीरेधीरे अपने जीवन में उस तीसरे का भी आदी होने लगता है. मगर जब यह हकीकत जीवन साथी के सामने आए तो मामला उलझ सकता है.

तभी तो 18वीं सदी के मशहूर शायर मीर तक़ी मीर ने फ़रमाया था, “इश्क़ इक ‘मीर’ भारी पत्थर है…
मीर ने इश्क़ को भारी पत्थर कहा तो 20वीं सदी के एक और शायर अकबर इलाहाबादी ने इसे कुछ ऐसे परिभाषित किया…

“इश्क़ नाज़ुक मिज़ाज है बेहद, अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता…”

जाहिर है यह प्यार किसी को भारी पत्थर लगा तो किसी को नाज़ुक मिज़ाज, किसी ने मोहब्बत में ख़ुदा देखा तो किसी को दुश्मन नजर आया.

मगर प्यार की हकीकत केवल शायराना अंदाज से नहीं समझी जा सकती. इस प्यार या इश्क के जज्बातों के पीछे कहीं न कहीं साइंस काम कर रहा है. दरअसल किसी के प्रति यह आकर्षण आप के दिमाग का केमिकल लोचा भर है. इसलिए इसे ले कर ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए. मोहब्बत होती है तो खुद से हो जाती है और न होनी हो तो लाख कोशिशें करते रहिए छू कर भी न गुजरेगी आप को.

तभी तो चचा ग़ालिब कह गए- इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’ के लगाए न लगे और बुझाए न बुझे.

क्या कहता है साइंस जब होता है प्यार

जब आप किसी के प्यार में पड़ते हैं तो दिमाग न्यूरो केमिकल प्रोसेस से गुजरता हुआ शरीर में एड्रेनल, डोपामाइन, सेरोटोनिन, टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन रिलीज करता है. वैसे तो हमारी बौडी में ये सारे केमिकल्स नौर्मली रिलीज होते ही रहते हैं लेकिन प्यार में पड़ने पर इन की रिलीजिंग स्पीड बढ़ जाती है. यही वजह है कि जब व्यक्ति अपने लव्ड वन के साथ हो तो वह अलग तरह का एक्साइटमेंट, हैप्पीनेस और इमोशन्स फील करता है.

इस मामले में न्यूरोपेप्टाइड औक्सीटोसिन नाम का केमिकल भी प्यार का एहसास कराने में अहम साबित होता है क्योंकि इस को बौन्डिंग हार्मोन कहा जाता है. यह आप के मन में दूसरों से जुड़ाव पैदा करता है.

सताती है उस की याद

ऐसा कोई भी शख्स नहीं होगा जिसे कभी किसी व्यक्ति की याद ने सताया न हो. भले ही वह इंसान शादीशुदा ही क्यों न हो मगर इस के बावजूद वह किसी तीसरे से दिल से जुड़ जाता है. ऐसे में उस शख्स के दूर होने पर उसे मिसिंग की फीलिंग आती है और इस से वह दुखी या स्ट्रेस्ड आउट महसूस करता है. यह बात वह संकोच वश किसी से शेयर भी नहीं कर पाता. जबकि दूर होने की वजह से उस की सैडनेस बढ़ जाती है.

वैसे भी आप जिस के प्रति आकर्षित हैं जब वह दूर होता है तो हैपी हार्मोन को तेजी से रिलीज करने वाला प्रोसेस स्लो हो जाता है. इस वजह से आप दुख, स्ट्रेस, एंग्जायटी और इनसिक्योर फील करने लगते हैं. यह बौडी का केमिकल फ्लो में आए बदलाव पर रिएक्शन होता है.

इस की वजह से आप अपने जीवनसाथी के प्रति उदासीन से हो जाते हैं और उसे इस बात का अहसास होने लगता है कि आप की जिंदगी में कोई और भी है. ऐसे में परिस्थितियां जटिल होने लगती हैं मगर फिर भी आप उस तीसरे का मोह नहीं त्याग पाते. क्योंकि वह तीसरा इंसान आप के जीवन में एक अलग तरह का रोमांच और खुशियां ले कर आता है. उस की कुछ खासियतें आप को अपनी तरफ खींचती हैं. आप अपने जीवन साथी को धोखा देना नहीं चाहते मगर फिर भी उस तीसरे की यादों से अलग भी नहीं हो पाते. आप ये जुगत भिड़ाने के प्रयासों में लगे रहते हैं कि उस तीसरे से बारबार आप का सामना हो.

नई रिलेशनशिप में आती है ज्यादा प्रौब्लम

एक स्टडी में यह भी सामने आया है किपुराने रिलेशनशिप्स में किसी से दूरी उतनी इफैक्ट नहीं करती मगर किसी नए रिश्ते में दूरी बढ़ने पर उदासी काफी प्रबल होती है. मतलब यह कि शादीशुदा इंसान जब अपने पार्टनर से कुछ समय के लिए दूर होता है तो उस के मन पर खास असर नहीं होता मगर जिस से हाल फिलहाल रिश्ता जुड़ा है उस का दूर जाना आप को ज्यादा इफैक्ट करता है. यह आप के चेहरे से नजर आने लगता है. आप परेशान रहने लगते हैं. वहीं जब रिश्ता पुराना हो यानी पतिपत्नी का हो तो उस में एक स्थिरता और सुरक्षा का भाव होता है.

औब्सेसिव लव डिसऔर्डर से बचें

जब प्यार का जुनून ‘मानसिक बीमारी’ बन जाए तो ऐसा प्यार जानलेवा होता है. जैसा कि फिल्म डर में शारुख खान का किरदार था. इस में नायिका पर जबरदस्ती का प्यार थोपा जा रहा था, ‘तू हां कर या न कर तू है मेरी क…क…किरन’. ऐसे प्यार को आप औब्सेसिव लव डिसऔर्डर कह सकते हैं.

अमरीकी हैल्थ वेबसाइट ‘हैल्थलाइन’ के मुताबिक़ “औब्सेसिव लव डिसऔर्डर (OLD) एक तरह की ‘साइकोलौजिकल कंडीशन’ है जिस में लोग किसी एक शख़्स पर असामान्य रूप से मुग्ध हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वो उस से प्यार करते हैं. उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उस शख्स पर सिर्फ उन का हक है और उसे भी बदले में उन से प्यार करना चाहिए. अगर दूसरा शख्स शादीशुदा है या उन से प्यार नहीं करता तो वो इसे स्वीकार नहीं कर पाते. वो दूसरे शख्स और उस की भावनाओं पर पूरी तरह काबू पाना चाहते हैं.”

असल ज़िंदगी में भी ऐसे लोग प्यार में ठुकराया जाना स्वीकार नहीं कर पाते और न कहे जाने के बाद अजीबोगरीब हरकतें करने लगते हैं.

बहुत से जुनूनी आशिक तथाकथित प्रेमिका को यह कह कर धमकाते हैं कि ठुकरा के मेरा प्यार तू मेरी मोहब्बत का इन्तकाम देखेगी. किसी शादीशुदा से इस तरह जुनून भरा प्यार करने का नतीजा हिंसा, हत्या या आत्महत्या के रूप में नजर आता है. इसे औब्सेसिव लव डिसऔर्डर कहते हैं. ऐसे प्यार करने वाले शख्स से हमेशा बच कर रहें. क्योंकि ऐसा प्यार न सिर्फ आप की शादीशुदा जिंदगी बर्बाद करेगा बल्कि आप की जिंदगी भी जा सकती है.

प्यार सुकून का नाम है. जब तक सुकून मिले तब तक उस में रहिए वरना जिंदगी में आगे बढ़ने से हिचकिचाइए नहीं.

Winter Special : सर्दियों में क्यों खाना चाहिए अखरोट ? जानें इसके अनगिनत फायदे

Benefits of Walnuts in Winter : सर्द‍ियों के मौसम में शीत लहर की चपेट में आने से कई लोगों को सर्दी-जुकाम, बुखार और सिर दर्द आदि की परेशानी होने लगती है. इसके अलावा खफ और संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी सेहत का ध्यान रखें. तो आइए जानते है एक ऐसे उपाय के बारे में जिसके नियमित सेवन से ठंड के मौसम में भी आप कई बीमारियों की चपेट में आने से बच सकते हैं.

दरअसल विंटर में अखरोट खाने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं, क्योंकि इसमें कई पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है. इसके अलावा इसमें विटामिन और मिनरल्स के साथ-साथ प्रोटीन की भी उच्च मात्रा होती है. इसलिए ठंड में अखरोट का सेवन करना बहुत ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. तो आइए जानते हैं प्रतिदिन सुबह खाली पेट 4 से 5 अखरोट (Benefits of Walnuts in Winter) खाने के लाभकारी फायदों के बारे में.

अखरोट खाने के फायदे

  • स्किन रहती है मुलायम

सर्दियों में रोजाना सुबह अखरोट (Benefits of Walnuts in Winter) खाने से शरीर को गर्माहट मिलती है, जिससे त्वचा सूखती नहीं है और स्किन में नमी बनी रहती है. इसके अलावा जो लोग प्रतिदिन अखरोट खाते है उनकी त्वचा पर झुर्रियां भी कम आती है और लंबे समय तक उनकी स्किन कोमल रहती है.

  • दिमाग के लिए है फायदेमंद

आपको बता दें कि रोजाना अखरोट (Benefits of Walnuts in Winter) खाने से दिमाग तेज होता है. दरअसल अखरोट में विटामिन E  के साथ-साथ ओमेगा 3, फैटी एसिड और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. जो दिमाग को हेल्दी रखने के साथ-साथ दिमाग में रक्त संचार को भी बढ़ाते है. इसके अलावा अखरोट के सेवन से दिमाग की कार्यक्षमता में भी सुधार आता है, जिससे स्मृति शक्ति बढ़ती है और तनाव कम होने लगता है.

  • वजन कम करने में है असरदार

सर्दियों में कई लोगों का वजन भी बढ़ने लगता है. ऐसे में जो लोग बढ़ते वजन की समस्या से परेशान है. उन्हें तो अपनी डाइट में अखरोट (Benefits of Walnuts in Winter) को जरूर शामिल करना चाहिए. दरअसल अखरोट में हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पेट भरा भरा रहता है. ऐसे में इसे खाने के बाद भूख कम लगने लगती है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है.

Disclaimer : लेख में लेख में दी गई सलाह केवल सामान्य जानकारी के लिए है. अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें.

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