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जिस्म का बाजार, इजाजत का इंतजार

जिस्म का कारोबार भले ही महानगरों से निकल कर छोटे कसबों तक पांव पसार चुका हो मगर वह कानूनी बाधा आज तक पार नहीं कर सका है. जिस्म के बाजार को आज भी कानून की इजाजत का इंतजार है. हालांकि गैरकानूनी होने के बावजूद इस कारोबार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं.

भारत के रैडलाइट एरिया में रह कर जिस्म का सौदा करने वाली महिलाओं की कुल आबादी 30 लाख से भी अधिक है. यही कारण है कि अब ये सैक्स वर्कर्स का दरजा पाने की मांग को बुलंद कर रहे हैं. हमारा कानून इन्हें मुजरा या नाचगाने की इजाजत तो देता है मगर जिस्म बेचने की नहीं. यानी कानून कोठे खोलने की इजाजत तो देता है मगर वेश्यालय चलाने की नहीं.

आजादी से पहले अंगरेज सैनिकों की सैक्स संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरे हिंदुस्तान में जगहजगह वेश्यालय बना दिए गए थे. उन में यूरोपीय देशों की वेश्याओं को भी ला कर रखा गया था. आजादी के साथ ही कुछ वेश्याएं वापस यूरोप लौट गईं लेकिन तब तक भारतीय महिलाओं का एक बड़ा तबका जिस्म के इस कारोबार का हिस्सा बन चुका था. भारतीय संस्कृति इस की इजाजत नहीं देती थी. नतीजतन, 1956 में अनैतिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत इसे अपराध की श्रेणी में शामिल कर लिया गया, हालांकि उन्हें नाचगाने और मुजरे आदि की इजाजत थी. लेकिन देहव्यापार में लिप्त महिलाओं के पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई. इन के लिए एक खास इलाका निर्धारित कर दिया गया जिसे आज रैडलाइट एरिया के नाम से जाना जाता है.

वक्त के साथ कानूनी बंदिशों पर पेट की आग हावी होती गई. दिन में महफिलें सजतीं और रात में जिस्म का बाजार गुलजार होने लगा. कानूनी बंदिशें जिस्म के कारोबार की अंत्येष्टि करने में नाकाम रहीं. हर सौदे की रकम का एक हिस्सा कानून के पहरेदारों की खाली जेबें भरता. अब आलम यह है कि 30 लाख से भी अधिक वेश्याएं इन बाजारों में नारकीय जिंदगी जी रही हैं.

इतना ही नहीं, एशिया के सब से बड़े रैडलाइट एरिया का तमगा भी भारत के कोलकाता स्थित सोनागाछी के नाम से दर्ज हो चुका है. वहीं, मुंबई का कमाठीपुरा भी विश्व के टौप 10 रैडलाइट एरियाओं में शुमार हो चुका है.

ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर जिस्म का बाजार इतना फलफूल रहा है तो फिर जिस्म के सौदागरों की हालत बदतर क्यों है. यही सवाल जब राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमार मंगलम के समक्ष आया तो उन्होंने वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता देने की वकालत कर डाली. हालांकि बयान पर सियासी बवाल होने के बाद उन्होंने पहले तो इसे निजी बयान करार दिया और बाद में बयान से ही पलट गईं. यहां से एक नई बहस का जन्म हुआ.

पहले भी गरमाया था मामला

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रैडलाइट एरिया जीबी रोड में बसर करने वाली यौनकर्मियों का एक प्रतिनिधि मंडल 2 साल पहले दिल्ली महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष बरखा सिंह से मिला था. यौनकर्मियों ने वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता देने की मांग की थी. उन की मांग पर बरखा सिंह ने भी इसे कानूनी दरजा देने की वकालत की थी. उस दौरान शोर तो खूब मचा लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका. बरखा आज भी इसे जायज मानती हैं.

वे कहती हैं, ‘‘आज जिस्मफरोशी का एक नया रूप सामने आ चुका है. एक फोन पर कौलगर्ल आप के बिस्तर पर होती है और बिस्तर से उठते ही वह एक सभ्य समाज का हिस्सा बन जाती है. वहीं, रैडलाइट एरिया में रहने वाली महिलाओं को सिर्फ इसलिए हेय दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि वे बदनाम गली में रहती हैं. आज फिल्मों की कई हीरोइनें भी इस धंधे में पकड़ी जाती हैं. इसलिए वेश्याओं के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए इसे कानूनी दरजा दिया जाना जरूरी है.’’

मुखर हो रही है मांग

देहव्यापार को वैध और यौनकर्मियों को सैक्सवर्कर का दरजा देने की मांग कोई नई नहीं है. यौनकर्मियों का एक बड़ा तबका वर्षों से इस के लिए आवाज बुलंद करता आ रहा है मगर नैतिकता के शोर में यह आवाज हर बार दबाई जाती रही है.

भारतीय समाज में देहव्यापार का चलन कोई नई बात नहीं है. संस्कृत नाटक मृच्छकटिकम् में इस का उल्लेख नगर वधू के रूप में मिलता है. दक्षिण भारत की देवदासी प्रथा भी इसी का एक रूप है जिस की इजाजत धर्म भी देता था.

महिला एवं बाल विकास विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 लाख यौनकर्मियों में से 35 प्रतिशत वेश्याएं ऐसी हैं जो 18 वर्ष की उम्र से पहले ही इस धंधे से जुड़ गई थीं. इन में से अधिकांश वे महिलाएं हैं जो सैक्सवर्कर का दरजा चाहती हैं.

कुछ वर्ष पहले कोलकाता, आसनसोल के लच्छीपुर, मुंबई आदि शहरों में इन महिलाओं ने रैली निकाल कर आंदोलन भी किए. कई महानगरों में आयोजित सम्मेलनों के मंच से भी इसे कानूनी मांग देने की आवाज मुखर हुई. लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. सभ्य समाज के विरोध ने इस आंदोलन को कभी अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया. नतीजतन, व्यापक पैमाने पर शुरू हुआ आंदोलन चकलाघरों की दहलीज तक ही सिमट गया.

दुकानदारी की चिंता

देहव्यापार को कानूनी दरजा देने की मांग का चौतरफा विरोध भी होता रहा है. कई सामाजिक संगठन खुल कर इस का विरोध करते आ रहे हैं. दिलचस्प पहलू यह है कि इन में कई ऐसे संगठन भी शामिल हैं जो वर्षों से यौनकर्मियों की दशा सुधारने के लिए काम करने का दंभ भरते नहीं थकते. इस के लिए हर साल उन्हें सरकार की ओर से अनुदान के रूप में मोटी राशि मिलती है.

कई संगठन राजधानी के ऐसे पौश इलाकों में दफ्तर खोले बैठे हैं जहां आम आदमी किराए का कमरा तक लेने की कल्पना नहीं कर सकता. हालांकि कुछ संगठन बेहतर काम भी कर रहे हैं. उन्होंने पुलिस की मदद से कई बार वेश्यालयों में लाई गई लड़कियों को मुक्त भी कराया है. अगर वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता मिलती है तो समाज सुधार के नाम पर दुकानदारी कर रहे सैकड़ों संगठनों की दुकानें स्वत: ही बंद हो जाएंगी. यही कारण है कि विरोध करने वालों में ये संगठन सब से आगे हैं.

कानूनी मान्यता के नुकसान

– हर आदमी की पहुंच में होने के चलते विकृत मानसिकता को मिलेगा बढ़ावा.

– वेश्यालयों में पकड़े जाने का डर खत्म होने से नैतिकता के मूल्यों का पतन होगा.

– खुलेआम ऐयाशी की इजाजत से बिखर सकते हैं परिवार.

– युवा पीढ़ी के भटकाव का मार्ग प्रशस्त होगा.

– सामाजिक बुराई महामारी का रूप भी ले सकती है.

रामदेव बोले, कई महिलाएं कर चुकी हैं मुझे प्रपोज

एक सामान्य पुरुष की तरह योगगुरु और खरबपति व्यवसायी रामदेव ने आखिरकार जता ही दिया कि कई महिलाएं उन पर भी मरती हैं और उन्हें प्रपोज भी कर चुकी हैं. रामदेव अकसर दिलचस्प बातें करते हैं और यह उन की खूबी है कि छिपा जाने वाली बातें भी कोई और कहे, इस के पहले खुद ही उजागर कर देते हैं.

बकौल रामदेव, एक विदेशी युवती तो उन पर इस हद तक फिदा थी कि अपना सबकुछ उन्हें देने की बात कह रही थी. रामदेव उस का अभिप्राय समझ नहीं पाए या समझ कर घबरा गए, इसलिए उन्होंने सलाह दी कि जो भी देना हो, ट्रस्ट में दे दो. लेकिन वह महिला जो देना चाहती थी उस में किसी तरह की हिस्साबांटी नहीं हो सकती थी. महिलाएं आखिर क्यों बाबा को प्रपोज करती हैं, इस सवाल का जवाब कठिन नहीं कि उन के पास अकूत दौलत और सेहतमंद व्यक्तित्व है इसलिए.

राष्ट्रपति के निशाने पर स्वच्छ भारत अभियान

पहली दिसंबर को पहली दफा जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुजरात के साबरमती आश्रम पहुंचे तो वे तकरीबन गांधीजी जैसी वेशभूषा में थे. वहां उन्होंने एक अहम बात कही जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर निशाना साधती लगी. बकौल प्रणब मुखर्जी, असल गंदगी गलियों में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में है.

गंदगी के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संदेश यह दे डाला कि सड़क का कचरा तो झाड़ुओं से हट जाएगा पर कट्टरवाद का जो कीचड़ दिलोदिमाग में जमा हुआ है वह किसी झाड़ू से साफ नहीं होने वाला. राष्ट्रपति की तारीफ में अकसर कसीदे गढ़ते रहने वाले नरेंद्र मोदी के पास शायद ही इस मशवरे का कोई जवाब हो, इसलिए उन्हें अभी सहिष्णु बने रहने में ही भलाई नजर आ रही है.

इस साल इन 8 गैजेट्स का यूजर्स को है इंतजार

नए साल के साथ ही कई नई चीजें हमारा इंतजार कर रही हैं, तो कई चीजों का इंतजार हमें भी है. जी हां! यहाँ बात हो रही है उन कमाल के गैजेट्स की जिनका यूजर्स को बेसब्री से इन्तजार है. यह गैजेट्स साल 2016 में लॉन्च होंगे.

वैसे तो हर साल ही टेक्नोलॉजी की दुनिया में कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. हर साल ही कुछ नए और बेहद कमाल के गैजेट्स बाजार में धमाल मचाते हैं. आइये देखते हैं 2016 में लॉन्च होने वाले कुछ शानदार गैजेट्स, जिनका यूजर्स को है इन्तजार-

1. माइक्रोसॉफ्ट होलोलेंस
माइक्रोसॉफ्ट होलोलेंस एक ऐसा डिवाइस है जिसने वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी टेक्नोलॉजी को साथ ला दिया है. इसकी कीमत $300 यानि लगभग 2 लाख रुपये होगी.

2. सोनी वीआर हेडसेट
वीआर हेडसेट की लिस्ट में एक और नाम है सोनी के प्लेस्टेशन वीआर का. कंपनी ने इसे लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर ली है. यह डिवाइस सोनी के प्लेस्टेशन 4 साथ काम करेगा.

3. एचटीसी वीआर हेडसेट
एचटीसी वाइव भी एक तरह का वर्चुअल रियलिटी पर आधारित हेडसेट है. एचटीसी ने अपने इस हेडसेट के लिए वाल्व गेमिंग कंपनी के साथ मिलकर काम किया है. हालांकि यह हेडसेट इसी साल 2015 में लॉन्च होना था, लेकिन अब यह 2016 में लॉन्च किया जाएगा.

4. वीआर आधारित ओकुलुस रिफ्ट
साल 2016 वर्चुअल रियलिटी स्पेस के लिए काफी बढ़िया रहेगा. उम्मीद है कि फेसबुक वीआर सिस्टम ओकुलुस रिफ्ट भी अगले साल जल्द ही मार्केट में होगा. यह एक तरह का वीआर हेडसेट होगा जिसे कनेक्ट करने के लिए कंप्यूटर की आवश्यकता होगी और यह एक एक्सबॉक्स कंट्रोलर के जरिए काम करेगा.

5. एपल की नई जनरेशन वाली वॉच
एपल वॉच ने भले ही कई यूजर्स की उम्मीद को पूरा न किया हो लेकिन एपल की वॉच 2 से लोगों को कई उम्मीदें हैं. कहा जा रहा है कि इसमें एक इंटीग्रेटेड कैमरा भी हो सकता है. अब इस वॉच में और क्या होगा व ये यूजर्स को कितना भाएगी ये तो इसके लॉन्च होने के बाद ही पता चलेगा.

6. एपल का छोटे डिस्प्ले वाला iPhone
एपल के iPhone 7 और 7 प्लस के अलावा कंपनी इन दिनों अपने नए छोटे डिस्प्ले वाले फोन को लेकर भी चर्चाओं में है. कहा जा रहा है कंपनी अपना कचोटे डिस्प्ले वाला नया iPhone 6C इस साल लॉन्च कर सकती है.

7. सैमसंग गैलेक्सी एस सीरीज की नई जेनरेशन
सैमसंग ने अपने एस सीरीज में शानदार डिजाईन पेश कर स्मार्टफोन यूजर्स को अपनी ओर आकर्षक किया और कई बड़े ब्रैंड को टक्कर दी. इसी के साथ गैलेक्सी एस 7 और एस 7 एज से लोगों की उम्मीद कई गुना बढ़ गयी है. उम्मीद कि साल 2016 में कंपनी के पास यूजर्स कुछ और बढ़ा और कमाल का होगा.

8. iPhone की नई जनरेशन
उम्मीद की जा रही है कि एपल की नई जेनरेशन का फोन iPhone 7 और 7 प्लस हो सकता है. कहा जा रहा है कि इस नई जेनरेशन के इस फोन में एक टच सेंसिटिव होम बटन होगा. 

इस तरह आप बचा सकते हैं मोबाइल इंटरनेट डाटा..!

स्मार्टफोन हो और उसमें इंटरनेट न हो तो अनेक काम रुक जाते हैं, लेकिन इंटरनेट होने पर भी अगर आपको शिकायत रहती है कि हम तो इंटरनेट का इतना इस्तेमाल भी नहीं करते, फिर भी इंटरनेट डाटा प्लान बहुत जल्दी समाप्त हो जाता है, तो चलिए आज हम आपको इस बारे में जानकारी दिए देते हैं ताकि आप अपना इंटरनेट डाटा सेव कर सकें.

मोबाइल इंटरनेट डाटा यूज की उचित सेटिंग न होने से भी यह समस्या आती है. इसके लिए आप पांच तरीके अपनाकर अपने स्मार्टफोन के डाटा प्लान को बचा सकते हैं.

1. ‘रिसट्रिक्ट बैकग्राउंट डाटा' रखें ऑन
अगर आपका स्मार्टफोन स्टैंडबाय मोड है तो अधिकांश ऐप्स इंटरनेट डाटा को यूज करते रहते हैं. इसे रोकने के लिए स्मार्टफोन की नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर ‘रिसट्रिक्ट बैकग्राउंट डाटा' ऑप्शन को ऑन कर दें. इससे आपका मोबाइल इंटरनेट डाटा का उपयोग तभी करेगा, जब आप डाटा ऑन करेंगे अथवा स्मार्टफोन वाई-फाई से कनेक्ट होगा. अनेक ऐप्स जैसे वॉट्सएप, ई-मेल, मैसेंजर आदि बैकग्राउंट में इंटरनेट डाटा यूज करते रहते हैं, जिससे उनके नोटीफिकेशन मिल सकें.

2. डाटा सेविंग ब्राउजर/ऐप उपयोग करें
आजकल बहुत सारे ब्राउजर (जैसेकि मिनी ओपेरो आदि) वेबसाइट्स को कम्प्रेस्ड करके खोलते हैं और डाटा कम यूज होता है. कोशिश करें कि ऐड फ्री ऐप्स को ही चुने, चाहे उसके लिए कीमत ही क्यों न चुकानी पड़ें.

3. यूज करें वेबसाइट्स का मोबाइल वर्जन
जब हम कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो मोबाइल टेक्स्ट व फोटो को डाउनलोड करता है. जब हम वेबसाइट को डेस्कटॉप लुक में खोलेंते हैं तो इससे अधिक डाटा यूज होता है. अतः डाटा बचाने के लिए सदैव मोबाइल को ही देखें. किसी वेबसाइट के मोबाइल वर्जन के न होने पर ब्राउजर के ‘टेक्स्ट ओनली' ऑप्शन को स्लेट करें, ताकि इमेज डाउनलोड न हो

4. क्लियर न करें कैश को
अनेक यूजर्स इंटरनल मेमोरी को बढ़ाने के लिए कैश क्लियर कर देते हैं पर डाटा बचाने के लिए ऐसा न करें. कैश डाटा को स्टोर करके रखता है इसलिए दुबारा से कोई वेबसाइट या ऐप खोलने पर कुछ चीजों को पुनः डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती व डाटा बच जाता है. याद रखें कि टास्क मैनेजर आदि क्लिनिंग ऐप्स कैश क्लियर कर देते हैं.

5. इन्हें भी आजमाएं
प्रयास करें कि रात में डाटा कनेक्शन को बंद रखें. डाटा लिमिट को सेट करके रखें ताकि डाटा इस्तेमाल की जानकारी मिलती रहे. स्मार्टफोन डाटा यूज ऑप्शन में जाकर चैक करें कि कौन-सा ऐप अधिक डाटा यूज कर रहा है, उसे आवश्यकता न होने पर अनइंस्टॉल भी किया जा सकता हैं.

1 अप्रैल से लागू होंगे आयकर विभाग के 8 नए नियम

आयकर विभाग के नए नियम एक अप्रेल से लागू होने जा रहे हैं. इसके तहत आपको कैश डिपॉजिट्स, शेयर्स-म्यूचुअल फंड खरीदना, इम्मूवेबल प्रॉपर्टी की परचेज, फिक्स डिपॉजिट्स और फॉरेन करेंसी के लेनदेन जैसे बड़ी ट्रांजैक्शंस की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी.

यह हो रहे हैं बदलाव

1. तय लिमिट से ज्यादा पैसा बैंक, कंपनी या वकील-सीए जैसे प्रोफेशनल को देने पर इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी. इसके लिए फॉर्म 16ए भरना होगा.

2. 30 लाख रुपए से ज्यादा की इम्मूवेबल प्रॉपर्टी की सेल-परचेज की जानकारी रजिस्ट्रार ऑफिस को देनी होगी.

3. किसी सर्विस के बदले किसी प्रोफेशनल को 2 लाख रुपए से ज्यादा के भुगतान की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी.

4. अगर आपके बैंक खाते में एक साल में 10 लाख रुपए से ज्यादा कैश जमा होता है तो बैंक इसकी जानकारी आईटी विभाग को देगा. एफडी के लिए भी लिमिट 10 लाख रुपए तय की गई है, हालांकि एफडी के रिन्युअल पर यह नियम लागू नहीं होगा.

5. क्रेडिट कार्ड से बिल पेमेंट के एवज में बैंक को साल में एक लाख या ज्यादा कैश पेमेंट या दूसरे मीडियम से 10 लाख या ज्यादा पेमेंट हुआ तो आईटी डिपार्टमेंट के पास इंफॉर्मेशन पहुंचेगी.

6. साल में 10 लाख रुपए या इससे ज्यादा कैश से बैंक ड्राफ्ट बनवाने पर बैंक इसकी जानकारी सरकार को देगा.

7. एक साल में यदि किसी व्यक्ति के करंट अकाउंट में 50 लाख रुपए या इससे ज्यादा की जमा या विड्रॉअल होता है तो इसकी जानकारी बैंक आईटी विभाग को देगा.

8. अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी के शेयर, म्युचुअल फंड, बॉन्ड या डिबेंचर में साल में 10 लाख रुपए या इससे ज्यादा का निवेश करता है तो कंपनी यह जानकारी आयकर विभाग को देगी.

अब सिर्फ 32 रुपये में मिलेगा सेट टॉप बॉक्स

देश में अब घरेलू सेट टॉप बॉक्स बहुत ही सस्ती कीमत पर मिलने वाले हैं. इसके अलावा घरेलू कैस लाइसेंस भी बहुत कम कीमत उपलब्ध करवाया जाएगा. घरेलू विनिर्माताओं को सशर्त पहुंच प्रणाली (कैस) के लिए देश में ही विकसित समाधान उपलब्ध कराए जाने से सेट-टॉप-बॉक्स और सस्ता हो जाएगा.

खबर है कि अब घरेलू कैस लाइसेंस करीब 32 रुपये या 0.5 डॉलर में प्रदान किया जाएगा, जबकि मौजूदा बाजार लागत दो-तीन डॉलर प्रति लाइसेंस है. सेट-टॉप-बॉक्स की औसत लागत 800 से 1200 रुपये तक आती है.

इस देसी कैस का विकास सरकारी संस्था सी-डैक ने बेंगलुरू की कंपनी बायडिजाइन के साथ मिलकर की है. अधिकारियों का कहना है कि डवलपर भारतीय कैस को सभी घरेलू सेट-टॉप-बाक्स विनिर्माताओं और परिचालकों को 0.5 डॉलर प्रति लाइसेंस तक की कीमत पर उपलब्ध कराएंगे.

परियोजना की लागत 29.99 करोड़ रुपए है जिसमें से इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 19.79 करोड़ रुपए का योगदान करेगी, जबकि शेष राशि का भुगतान बायडिजाइन करेगी. अधिकारी ने कहा कि यह परियोजना शीघ्र ही वाणिज्यिक कार्यान्वयन के लिए शुरू की जाएगी.

बैंकों के पैसों पर खड़ा रियल एस्टेट

सरकार अर्थव्यवस्था को आसानी से आगे बढ़ाने के लिए बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए है. सरकार बैंकों पर गैर निष्पादित संपत्ति को कम करने पर जोर दे रही है और साथ ही, उस ने बैंकों को कुछ क्षेत्रों के लिए ऋण देने में कोताही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में बैंक द्विविधा की स्थिति में हैं. बैंकों का पैसा छोटे और सामान्य कारोबारियों अथवा जनसामान्य के पास नहीं है बल्कि बैंकों का पैसा रियल एस्टेट में फंसा हुआ है. इस क्षेत्र में उन के करीब 62 हजार करोड़ रुपए फंसे हुए हैं.

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के हवाले से आई खबरों के अनुसार, डैवलपरों ने बड़ीबड़ी अट्टालिकाएं खड़ी तो कर दी हैं लेकिन उन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. क्रिसिल ने एक अध्ययन कराया है जिस में 25 शीर्ष भवन निर्माताओं को शामिल किया गया है. इन निर्माताओं का रियलिटी क्षेत्र के 95 फीसदी कारोबार पर कब्जा है.

अध्ययन में कहा गया है कि इस क्षेत्र पर बैंकों का 61,500 करोड़ रुपए का कर्ज शेष पड़ा हुआ है. बिल्डरों ने भवन तो खड़े कर लिए हैं लेकिन उन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. उन का कहना है कि एक बहुमंजिला भवन खड़ा करने में करीब 5 साल का वक्त लगता है लेकिन मंदी के कारण उन्हें ग्राहक मिलने पर लगभग इतना ही समय और लग रहा है.

इस से बिल्डरों को बैंकों का कर्ज लौटाने में दिक्कत हो रही है. भुगतान में देरी होगी तो उस का ब्याज उसी दर से बढ़ता रहेगा, जिस से बिल्डरों को नुकसान होगा. लेकिन यह भी तय है कि बिल्डर ने 5 साल पहले जिस दर पर भवन बनाया था उस से कई गुना ज्यादा दर पर वह उस भवन को बेचेगा, इसलिए नुकसान नहीं है.

जीवन की मुसकान

मेरे दोनों बेटों को वायरल हो गया था. इसी बीच, मेरे पति को भी वायरल हो गया. उन्हें बहुत तेज बुखार के साथ इतनी कमजोरी आ गई कि वे ठीक से उठबैठ भी नहीं पा रहे थे. उन्हें डाक्टर को दिखाया. डाक्टर ने कहा कि उन्हें फौरन ऐडमिट करवाना पड़ेगा. हम घर वापस आ गए.

दोनों बच्चे बीमार थे, उन्हें देखूं या पति को देखूं. इतने में एक रिश्तेदार डाक्टर का ध्यान आया. उन का नर्सिंगहोम भी है. फोन करने पर वे घर आ गए. उन्होंने भी फौरन ऐडमिट करवाने के लिए कहा. उन से जब मैं ने कहा कि दोनों बच्चे बिस्तर पर हैं. उन्हें कैसे ऐडमिट करवाऊं? आप कुछ दवा दे दें तो…उन्होंने बड़ी रुखाई से जवाब दिया कि या तो बच्चों को देख लो या पति को बचा लो. यह कह कर वे वापस चले गए.

मैं बहुत परेशान थी कि क्या करूं. इतने में एक पड़ोसी आए और वे हमें एक पास के ही नर्सिंगहोम में ले गए. डाक्टर ने मेरे पति को चैक किया. पड़ोसी मेरी स्थिति को देख व सुन कर बहुत विनम्रता से बोले, ‘‘भाभीजी, आप गुप्ताजी को हमारे पास सिर्फ 24 घंटे के लिए छोड़ दीजिए. आप को कुछ नहीं करना पड़ेगा. आप आराम से बच्चों की देखभाल कीजिए. मेरी नर्सें गुप्ताजी की देखभाल कर लेंगी.’’

उन की नम्रताभरी बात मेरे दिल को छू गई और मैं ने अपने पति को निश्चिंत हो कर ऐडमिट करवा दिया. वे 24 घंटे में काफी स्वस्थ हो गए थे.

– आशा गुप्ता, जयपुर (राज.)

*

मैं जहां भी जाता हूं, अपना बैग साथ ले कर जाता हूं. मैं उस में आवश्यकता की हर चीज रखता हूं, जैसे-वोटर कार्ड, राशन कार्ड, लाइसैंस कार्ड, आधार कार्ड आदि. कई लोगों ने मुझे टोका भी कि इतनी चीजें एकसाथ नहीं रखनी चाहिए. बस, समझदारी यही की कि उन सब चीजों को मैं हमेशा बैग की गुप्त जेब में ही रखता था जोकि मैं ने बनवा रखी थी.

एक शाम सब्जी मंडी की पार्किंग में बाइक खड़ी कर के मैं मंडी में गया. बैग साथ लेना जरूरी नहीं समझा. बाइक में ही छोड़ गया. यह मेरी भूल थी. जब वापस आया तो देखा कि बैग गायब था. मेरे होश उड़ गए. चारों ओर ढूंढ़ा, पूछताछ की पर बैग नहीं मिला. उस में जरूरी कागजात तो नहीं थे पर जरूरी कार्ड थे. बैग पर मेरा नाम, पता था पर चुराने वाले से वापसी की उम्मीद नहीं थी.

काफी खोजबीन के बाद मैं मंडी के पिछवाड़े गया जहां लोग बेकार की चीजें फेंकते थे. बैग वहां फटा हुआ मिला. मैं उस ओर लपका, उसे खोला, गुप्त जेब खंगाली. मेरे सभी कार्ड सुरक्षित मिल गए.

– अनिल कुमार झा, बूंदी (राज.)

मुझ को मधुमास मिले

तेरे श्रीमुख से फूल झरे

फूलों से आंगन महका

मन शीतल करती सुवास

आधार यही जीवन का

फूलों से कुछ रस ले कर

बैठा हूं मैं मधु रच कर

मेरे जीवन की शक्ति यही

जाना न कभी मुझ को तज कर

तेरे अधरों पर जब हास खिले

तब मुझ को मधुमास मिले

तुम छीनना न ये उत्सव

मेरा न कभी विश्वास हिले

प्रियंवदे! प्रियंवदे!!

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