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चेहरा देख कर कैसे पता करें कि पति या बौयफ्रैंड किसी और के साथ इन्वोल्व है

पर्थ में पश्चिमी आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय में एआरसी सेंटर औफ एक्सीलैंस इन काग्निशन एंड इट्स डिसऔर्डर के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया गया है कि महिलाएं पुरुष के चेहरे के कुछ खास लक्षणों को देख कर उस के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का अंदाजा लगा सकती हैं.

बायोलौजी लेटर्स जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च को डा. गिलियन रोड्स ने अपनी टीम के साथ मिल कर किया है. रिसर्च में शामिल महिलाओं को पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गईं और उन से इन पुरुषों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने की संभावना के बारे में पूछा गया. इन तस्वीरों में शामिल पुरुषों के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

 

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रिसर्च के नतीजे काफी दिलचस्प रहे. महिलाओं के अनुमानों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि उन्होंने जिन पुरुषों को चीटर बताया वह सच में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर कर रहे थे. हालांकि, रिसर्च कर्ताओं का कहना है कि ये नतीजे शुरुआती हैं और अभी और जांच की जरूरत है.

आइए जाने ऐसे कौन से चीजे हैं. जिन से पति या बौयफ्रैंड के अफेयर का पता चलता है. क्यों न ऐसे स्किल को हम भी डेवलप करें.

वह अपने लुक्स को ले कर पहले से ज्यादा सेंसिटिव हो गया हो तो दाल में कुछ काला है

अगर वह पहले आप के बारबार कहने पर भी खुद का ध्यान नहीं रखते थे और बेपरवाह से घूमते रहते थे लेकिन कुछ दिनों से उन के व्यवहार में अचानक से कुछ चेंज आ गया हो तो समझ लीजिए खतरे की घंटी बज चुकी है.

जब कोई व्यक्ति किसी के प्यार में होता है, तो वह अपनी पसंद भूल कर दूसरे के मुताबिक खुद को ढालने लगता है. इस में कपड़े पहनने से ले कर एक्सरसाइज करने और हेल्दी खाने, घर पर कम रुकना जैसे बदलाव शामिल हो सकते हैं.

अगर पहले उसे 2 -2 दिन तक शेव करने का होश नहीं रहता था औफिस में भी 1-2 दिन छोड़ कर शेव करता था पर अचानक से वह छुट्टी वाले दिन भी शेव करें तो इस का मतलब वह खुद पर धयान रख रहा है. लेकिन आप के लिए इसे हजम करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

अपने हेयर स्टाइल को उन्होंने चेंज किया हो, अपना शैम्पू चेंज किया हो और बालो में सीरम आदि भी लगाना शुरू किया हो, तो इस की वजह कुछ और भी हो सकती है.

अकसर अब आप उन्हें शीशे के सामने खुद को निहारते हुए देखें तो समझ जाएं कहानी कुछ और ही बन रही है.

आजकल उन्होंने परफ्यूम लगाना शुरू कर दिया हो, कई कंपनी के परफ्यूम वे लगाने लगे जो जोकि पहले कभी नहीं लगते थे. या फिर किसी और परफ्यूम की खुशबू उन में से आने लगे तो वजह बड़ी भी हो सकती है. हो सकता है कि उन का वक्त आजकल किसी और के साथ बीत रहा हो.

अगर उन की बौडी पर कोई बाल आदि मिले तो पूछताछ करनी तो बनती है भले ही आप श्योर न हो लेकिन पूछताझ कर के उन के झूठ को पकड़ने की कोशिश तो की ही जा सकती है अगर कुछ गलत कर रहे हैं.

अपनी बौडी पर टाइम लगाने लगे तो अलर्ट हो जाइए

अब ये आप को पता करना है कि वो किसी काम्पिटीशन की तैयारी करने के लिए सब कर रहे हैं या फिर किसी लड़की को इम्प्रेस करने की तैयारी हैं.

पहले से बहुत ज्यादा डाइट कान्शियस हो गए हो और अपना खाना डाइट के अनुसार खाना शुरू कर दिया हो. यहां तक की डायटीशियन से मिल कर अपना डाइट चार्ट बनवाया हो वो भी आप से चोरी छिपे. जबकि पहले आप के लाख कहने पर भी वे कुछ भी अनहैल्थी खा ले लेते थे.

जिम में जाना शुरू कर दिया हो, तो हो सकता है ये किसी से मिलने के लिए ही वहां जाते हों. इसलिए अपने आंख कान खुले ही रखें.

बौडी लेंग्वेज से दिल का हाल चेहरे पर आ जाता है

बौडी लेंग्वेज एक ऐसा तरीका है जिस से दिल का हाल चेहरे पर आ जाता है और आप उन्हें पकड़ सकते हैं.

आप के लाख कोशिश करने पर भी वे आप से नजरे चुराने लगें. आप की आंखों में आंखें डाल कर बात करने से हिचकिचाने लगें. इधरउधर देखने लगें, उन की आंखों में एक अपराधबोध नजर आए तो समझ जाएं कि वह किसी गलत रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं.

यदि आप दोनों के बात करते वक़्त वो आप के चेहरे की तरफ देख भी नहीं पा रहा है, तो इस का मतलब यही निकलता है कि शायद वो आप को धोखा दे रहा है.

उन की भावनाएं आप के लिए बदलीबदली से लगती हो चेहरे पर वो पहले वाला प्यार नजर आना बंद हो जाए और एक बेरुखी और ख़ामोशी सी छा जाए तो मामला गड़बड़ है.

मूड स्विंग होने लगे तो नोट करें

अगर आप का साथी अचानक से हे बहुत मूडी हो गया हो, कभी एकदम से खुश नजर आए तो कभी अचानक बेवजह नाराज हो जाए, तो समझ लीजिए आप के आलावा भी कुछ और चल रहा है.

अकेले में बैठ कर मुसकराना भी बेवजह नहीं है, इसे समझें और जल्द ही इस मुसकराहट की तह तक जाएं.

आप उन के कदमों में स्प्रिंग और उन के होठों पर सीटी बजती हुई देखते हैं. फिर अचानक, वे खाने की मेज पर उदास हो जाते हैं. वे हंस रहे होते हैं और चुटकुले सुना रहे होते हैं, और फिर अचानक, उन के फोन पर कोई संदेश आता है, और पूरा माहौल बदल जाता है. वे अचानक चिड़चिड़े हो जाते हैं और अकेले रहना चाहते हैं. उन के रवैये और अनिश्चित मूड में यह अचानक बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि आप का साथी आप को धोखा दे रहा है.

यदि वह किसी झूठ को छिपाने की कोशिश कर रहा है तो वह अपनी बात को जस्टिफाई करने के लिए बेतुके उदहारण देगा जिस का कोई सेन्स नहीं है.

अगर पार्टनर आप को धोखा दे रहा है तो किसी और के धोखे के बारे बात करने पर वह उस टौपिक से बचेगा और ज्यादा कुरेदने पर नाराज़ हो कर चला जाएगा.Community-verified icon

अगस्त माह का तीसरा सप्ताह कैसा रहा बौलीवुड का कारोबारः बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा

2024 में पूरे साढ़े 8 माह तक बौलीवुड में एक भी फिल्म ऐसी नहीं रही, जो कि बौक्स औफिस पर अपनी लागत वसूल कर पाई हो. लेकिन अगस्त माह के तीसरे सप्ताह यानी कि 15 अगस्त को प्रदर्शित निर्देशक अमर कौशिक की फिल्म ‘‘स्त्री 2’’ के निर्माताओं से मिले आंकड़ों के अनुसार बौक्स औफिस पर जो कमाई की, उसे देख कर तो यही कहा जा सकता है कि ‘बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा’. यूं तो इस बार निर्माताओं ने एक दिन पहले गुरूवार को ही फिल्म रिलीज की थी, जिस से उन की फिल्म को 15 अगस्त, 17 अगस्त, 18 अगस्त और 19 अगस्त की छुट्टी का फायदा मिल जाए.

बहरहाल, 15 अगस्त से 22 अगस्त के बीच ‘स्त्री 2’ ने 290 करोड़ रूपए कमा लिए हैं. ‘स्त्री 2’ को मिली यह सफलता सही मयानों में आश्चर्य चकित करने वाली ही है क्योंकि फिल्म की कहानी गड़बड़ है. फिल्म हौरर कौमेडी है, पर यह डराती बिलकुल नहीं है. इस के गाने अच्छे नहीं हैं, एक गाना अच्छा है पर वह फिल्म में काट कर सिर्फ एक मिनट का ही रखा गया है.

फिल्म के कलाकारों का अभिनय भी औसत दर्जे का है लेकिन खबरें गरम हैं कि इस फिल्म की सफलता का श्रेय राजकुमार राव खुद लेते हुए अब अपनी कीमत दोगुनी करते हुए 30 करोड़ रूपए मांगने लगे हैं. जिस पर लोग हैरान हैं. बौलीवुड के ही अंदर चर्चाएं गरम हैं कि राज कुमार राव को अपनी हद में रहना चाहिए. 2018 में ‘स्त्री’ की सफलता के बाद वह लगातार 15 असफल फिल्में दे चुके हैं. अब पूरे 6 वर्ष बाद उन की फिल्म ‘स्त्री 2’ को सफलता मिली है.

बौलीवुड के लोग तो खुल कर कह रहे हैं कि एक माह बाद ही राज कुमार राव की एक अन्य फिल्म ‘‘विक्की विद्या का वह वाला वीडियो’ रिलीज होने वाली है. वह इसे भी सफलता दिलवा कर दिखा दें. ज्ञातब्य है कि यह फिल्म पिछले डेढ़ वर्षों से रिलीज का इंतजार कर रही है. ‘स्त्री 2’ की सफलता से सब से ज्यादा गदगद इस की पीआर टीम है. उस का दावा है कि सोशल मीडिया के प्रचार के चलते ही इस फिल्म को सफलता मिली है. हमें भी याद रखना चाहिए कि ‘स्त्री 2’ का निर्माण मुकेश अंबानी की कंपनी ‘जियो स्टूडियो’ ने दिनेश वीजन के साथ मिल कर किया है. निर्माता तो दावा कर रहे हैं कि उन की फिल्म 2500 करोड़ कमाने वाली है.

15 अगस्त को ‘स्त्री 2’ अकेले रिलीज हुई हो, ऐसा भी नहीं था. 15 अगस्त के दिन 4 दिन की छुट्टियों का फायदा उठाने के लिए अक्षय कुमार की फिल्म ‘‘खेल खेल में’’ व जौन अब्राहम की फिल्म ‘‘वेदा’’ के साथ ही दक्षिण की हिंदी में डब हो कर फिल्म ‘‘डबल स्मार्ट’ भी रिलीज हुई थी.

पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनी फिल्म ‘‘डबल स्मार्ट’’ में राम पेाथीनेनी, संजय दत्त और काव्या थापर की अहम भूमिकाएं हैं. यह फिल्म 4 दिन बाद ही थिएटर से बाहर हो गई और इस फिल्म ने महज 6 हजार रूपए ही कमाए.

निखिल अडवाणी, जौन अब्राहम और जी स्टूडियो निर्मित तथा निखिल अडवाणी निर्देशित फिल्म ‘‘वेदा’’ में जौन अब्राहम, शरवरी वाघ और अभिषेक बनर्जी की अहम भूमिकांए हैं. इस एक्शन प्रधान फिल्म ने बौक्स औफिस पर 8 दिन मे सिर्फ साढ़े 17 करोड़़ रूपए ही कमाए. इस में से निर्माता की जेब में केवल 7 करोड़ रूपए ही आएंगे. फिल्म का बजट बताने के लिए कोई भी निर्माता तैयार नहीं है. हम याद दिला दें कि फिल्म ‘वेदा’ के ट्रेलर लांच के मौके पर जब एक पत्रकार ने जौन अब्राहम से सवाल किया था कि वह हमेशा एक्शन फिल्में ही क्यों करते हैं. तब जौन अब्राहम ने उस पत्रकार को इडिएट कहा था और दावा किया था कि ‘वेदा’ एक्शन नहीं है, इमोशनल फिल्म है.

इतना ही नहीं जौन अब्राहम ने उस पत्रकार को धमकाते हुए कहा था कि उन्हें उस का चेहरा याद रहेगा और उन की फिल्म तीन दिन में सौ करोड़ कमा लेगी. उस के बाद वह उन से निपटेंगे. अफसोस ‘नौ मन तेल ही नहीं हुआ, तो राधा कैसे नाचती..’ अब तो जौन अब्राहम मुंह छिपाए घर में कैद हो गए हैं.

अगस्त माह के तीसरे सप्ताह, यानी कि 15 अगस्त के ही दिन अति घमंडी और सरकार परस्त अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म ‘‘खेल खेल में’’ भी रिलीज हुई. इस फिल्म के ट्रेलर रिलीज समारोह में अक्षय कुमार ने पत्रकारों व अपने ‘तथा कथित’ फैन्स की मौजूदगी में फिल्म पर बात करने की बजाय कहा था कि वह जो कुछ हैं अपने दम पर हैं. वह अपनी कमाई का ही खाते हैं. वह किसी के पास मांगने नहीं जाते. फिल्म पर बात नहीं की थी. क्योंकि ‘खेल खेल में’ एक स्पेनिश फिल्म ‘‘परफैक्ट स्ट्रेंजर’’ की 28वीं रीमेक हैं. इस का 25 देशों में रीमेक पहले ही हो चुका था. ‘परफैक्ट स्ट्रेंजर’ की रीमेक मलयालम फिल्म में मोहन लाल ने अभिनय किया था. जबकि कन्नड़ में भी इस का रीमेक हुआ था. यह सभी सफल फिल्में थी. मगर अक्षय कुमार के अभिनय से सजी और मुदस्सर अजीज निर्देशित फिल्म ‘‘खेल खेल में’’ ने 8 दिन के अंदर महज 19 करोड़ रूपए ही कमाए. इस में से लगभग 9 करोड़ रूपए ही निर्माता की जेब में जाएंगे.

इस तरह यह फिल्म बुरी तरह से असफल हो गई. अब बौलीवुड का एक तबका कह रहा है कि अक्षय कुमार ने कहा था कि वह किसी के पास मांगने नहीं जाते तो अब दर्शकों ने भी कह दिया कि वह उन से नहीं कहते कि वह अभिनय करें या उन के लिए फिल्म बनाएं.

इस सप्ताह की सब से बड़ी खासियत यह है कि एक भी निर्माता अपनी फिल्म की लागत बताने को तैयार नहीं है.

योगी के सुशासन पर बड़ा सवाल उठाती हैं महिलाओं के प्रति बढ़ती आपराधिक घटनाएं

राजधानी लखनऊ सहित तमाम बड़े शहरों में इंटरनेट के जरिये एस्कोर्ट सर्विस का धंधा जम कर चल रहा है. एक तरफ योगी सरकार धार्मिक पर्यटन को खूब बढ़ावा दे रही है और इस के लिए अनेक शहरों के सौंदर्यीकरण पर पानी की तरह अरबों रुपए बहाए जा रहे हैं, मगर इसी के समानांतर पूरे प्रदेश में सैक्स के लिए औरतों को बेचनेखरीदने का धंधा भी चरम पर है. पर्यटकों से ले कर तमाम बेरोजगार युवा इस अपराध के दलदल में उतर चुके हैं. वे इंटरनेट के जरिये जिस्म के सौदागरों के संपर्क में हैं. ये दलाल वाट्सएप कौल आते ही इन्हें लड़कियों के फोटो और रेट उपलब्ध करा देते हैं.

 

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हैरानी की बात है योगी सरकार की पुलिस को भनक तक नहीं लगती जबकि तमाम नामचीन होटलों, रेस्टोरेंट, बार, स्पा पार्लर, ब्यूटी पार्लर और ओयो होटलों में जिस्म का धंधा जोरों से चल रहा है. सोशल साइट्स पर एक दर्जन से भी ज्यादा वेबसाइट सक्रिय हैं. हैरत की बात है कि साइबर अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण करने का दावा करने वाली साइबर क्राइम सेल पुलिस मामले के संज्ञान से कोसों दूर है.

लड़कियों की खरीदफरोख्त सिर्फ उत्तर प्रदेश में नहीं हो रही, बल्कि भाजपा के राज में यह धंधा पूरे देश में बहुत तेजी से बढ़ रहा है. हजारों लड़कियां नेपाल से ला कर बेची जा रही हैं. बिहार, झारखंड की लड़कियों का अपहरण कर उन्हें इस धंधे में जबरन उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है. देह की दलाली और बलात्कार की घटनाओं में भाजपा के नेता भी शामिल हैं. 23 अगस्त 2024, हिंदुस्तान अखबार की खबर – ‘भाजपा नेता के बारात घर में किशोरी से रेप’.

मामला आगरा शहर का है. ताल फिरोज खां (सदर) में 21 अगस्त की रात भाजपा के पूर्व महामंत्री प्रेमचंद कुशवाह के बारात घर में एक दलित किशोरी के साथ गैंगरेप हुआ. नाबालिग बच्ची को जिंदा दफनाने की तैयारी थी. लेकिन समय रहते कुछ लोगों के पहुंच जाने पर उस की जान बच गई. खबर एक अखबार के भीतरी पन्नों में सिमट कर रह गई. भाजपा नेता का ड्राइवर और उस का भतीजा इस कांड में शामिल हैं. घटना के बाद सदर थाने में 3 घंटे हंगामा चला. मगर पुलिस की हिम्मत नहीं पड़ी कि प्रेमचंद कुशवाह की गर्दन पकड़ सके या उस के भतीजे की. सिर्फ ड्राइवर के खिलाफ केस दर्ज कर पोक्सो के तहत जेल भेजा गया.

बच्ची के घरवालों का कहना है कि उन की बेटी पास की दुकान से सामान लेने गई थी. जब वह काफी देर तक नहीं लौटी तो परिजन उस को ढूंढने निकले. एक व्यक्ति ने बताया कि उस ने बच्ची को प्रेमचंद कुशवाह के माधव मैरिज होम के पास देखा था. जब बच्ची के परिजन मैरिज होम के अंदर देखने के लिए जाने लगे तो प्रेमचंद और उस के भतीजे ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया. तब वे पीछे की दीवार फांद कर अंदर घुसे तो देखा बच्ची वहां बदहवास हालत में पड़ी है. पास ही एक गहरा गड्ढा खुदा हुआ था, जिस में उस को दफनाने की तैयारी थी.

थाने पर रिपोर्ट दर्ज करने में हीलाहवाली हुई. बच्ची का मैडिकल कराने के लिए पुलिस तैयार नहीं थी. काफी होहल्ले के बाद दूसरे दिन पुलिस ने मेडिकल कराया और केस दर्ज किया मगर सिर्फ ड्राइवर के खिलाफ. ये है योगी की पुलिस और योगी सरकार के अपराध मुक्त प्रदेश का खोखला दावा.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस घटना पर कहा, “यूपी में महिला सुरक्षा का हाल बेहाल है. आगरा में दुष्कर्म की घटना अति निन्दनीय है. सरकार दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे.” मगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो सिर्फ खबरों में चमकने के लिए, खुद को सब से बेस्ट मुख्यमंत्री साबित करने के लिए महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी बड़ीबड़ी बातें करते हैं. मंचों से अपराधियों को ललकारते हैं. कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हैं, पुलिस अधिकारियों को टाइट करते हुए कहते हैं – महिला संबंधी अपराधों पर शतप्रतिशत लगाएं अंकुश, मगर उन की पुलिस संगीन से संगीन मामले की एफआईआर दर्ज करने में भी हीलाहवाली करती है.

भाजपा सरकार धर्म का कितना भी पाठ पढ़ाए, मंदिरों में घंटेघडियाल बजवाए, मगर वह यह नहीं समझ रही कि इस से इंसान का नैतिक विकास नहीं हो सकता. जब तक कानून का डंडा मजबूत न हो और पुलिस अपराधियों पर सख्त न हो, अपराध नहीं रुकेंगे. दूसरा इस देश में बेरोजगार नकारा लोगों का जमावड़ा नितप्रति बढ़ता जा रहा है. खाली दिमाग शैतान का घर, यूं ही नहीं कही गई है. ऊर्जा से भरे युवा की शक्ति को यदि काम में नहीं लगाया जाएगा, उस को रोजगार से नहीं जोड़ा जाएगा तो वह अपनी ऊर्जा गलत जगहों पर ही निकालेगा. इसका उदाहरण हाल ही में लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में ताज होटल के पास देख चुके हैं जब भारी बारिश से जलमग्न सड़कों पर युवा भीड़ लगा कर पानी में एक युवती को चलती बाइक से नीचे खींच कर उस के साथ गलत हरकतें करते कैमरे में कैद हुए थे.

इंसान के नैतिक पतन की पराकाष्ठा यह है कि नोएडा में एक पुरुष पोस्टमार्टम हाउस में लाशों के बीच महिला से जबरन सैक्स संबंध बनाने की कोशिश करता पकड़ा गया. लोगों का कहना है कि मोर्चरी में तो महिला लाशों के साथ भी हैवानियत का गंदा खेल खेला जाता है और उन को रोकने वाले आंखों पर पट्टी चढ़ाए बैठे रहते हैं.

23 अगस्त 2024 को पायनियर की खबर है – ‘लाशों के बीच महिला से अश्लीलता’. इस का एक वीडियो सामने आने के बाद यह खुलासा हुआ कि नोएडा सैक्टर – 94 में पोस्टमार्टम हाउस में रखे शवों के बीच एक युवक एक महिला के साथ अश्लील हरकत कर रहा है. युवक वहां का सफाई कर्मी है. इस मामले में नोएडा थाना सैक्टर – 126 में जब सीएमओ सुनील कुमार शर्मा द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई तो पुलिस ने शिकायत को अज्ञात व्यक्ति के नाम पर दर्ज किया.

महिलाओं की सुरक्षा को ले कर अति चिंतित नजर आने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं, ‘महिलाओं से तय समय से ज्यादा औफिस में काम नहीं लिया जाएगा और उत्तर प्रदेश की पुलिस रात ज्यादा होने पर महिलाओं को उन के घर तक छोड़ के आएगी.’ परंतु जहां महिलाओं के साथ होने वाले बर्बर अपराधों पर भी पुलिस केस दर्ज नहीं करना चाहती, आरोपी की पूरी पहचान होने के बाद भी केस किसी अज्ञात व्यक्ति के नाम पर दर्ज करती है, ऐसी पुलिस से महिलाओं की सेफ्टी की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

योगी आदित्यनाथ द्वारा बारबार अपराधों के संबंध में और खासतौर पर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के संबंध में समीक्षा बैठकें करना और अधिकारियों की क्लास लगाना यह इंगित करता है भले गोदी मीडिया के जरिये प्रदेश को अपराध मुक्त घोषित करने की कोशिशें हो रही हों, मगर सत्यता यह है कि प्रदेश में अपराध का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर महिलाएं न तो घर में सुरक्षित हैं, न सड़क पर न दफ्तरों में या अन्य जगहों पर.

भाजपा सरकार में पितृसत्तात्मक सोच का विकास हुआ है. महिलाओं को फिर पैर की जूती समझा जाने लगा है. उन की जान की कोई कीमत नहीं है. उन्हें कहीं भी मार डाला जाए, उन का बलात्कार हो जाए, सामूहिक बलात्कार हो जाए, दहेज के नाम पर जला दी जाए, लड़की पैदा करने का दोष मढ़ कर कत्ल कर दी जाए, मगर इन बर्बर कृत्यों पर योगी की पुलिस कोई सख्त एक्शन नहीं लेती, उलटे हर मामले को हलके में ले कर रफादफा करने में लग जाती है, ताकि प्रदेश को अपराधमुक्त घोषित करने के सरकार के दावे को पुख्ता किया जा सके.

सिर्फ एक दिन के अखबार को पढ़ लीजिए, महिलाओं के साथ बर्बरता की आठ से दस खबरें मिल जाएंगी. 23 अगस्त 2024 की एक खबर पर और नजर डालिए. यह पुरुष की बर्बरता का खौफनाक उदाहरण है. गाजियाबाद में मसूरी क्षेत्र के मदरसा रोड पर एक आदमी अपनी पत्नी के मुंह पर तकिया रख कर तब तक बैठा रहा जब तक उस की मौत नहीं हो गई. शाहनवाज नाम के इस दरिंदे की शादी 2016 में रुखसार से हुई थी और उस के दो बच्चे हुए. इस में पहली बेटी अलीशा उम्र 7 साल और बेटा उजैर उम्र 5 साल का है. बच्चों के सामने इस दरिंदे ने अपनी पत्नी को शक के कारण मौत के घाट उतार दिया और उस की लाश दफनाने के दो दिन बाद उस के मायके वालों को खबर की.

5 साल के बच्चे उजैर ने अपनी मां की हत्या पिता द्वारा किए जाने का सच अपने मामा को बताया, तब सारा खुलासा हुआ. रुखसार अपने भाइयों की इकलौती बहन थी, जिसे शाहनवाज आएदिन पीटा करता था और अंततः उस ने उसे खत्म ही कर दिया. इस मामले में पुलिस ने शाहनवाज के खिलाफ हत्या का मामला तो दर्ज कर लिया मगर लाश को कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम कराने के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रही है.

लखनऊ में ठाकुरगंज स्थित एक निजी मैडिकल कालेज में नर्सिंग की छात्रा से पार्किंग में एक शोहदे ने छेड़छाड़ की. छात्रा ने विरोध किया तो शोहदे ने उस को बालों से पकड़ कर उठा कर जमीन पर पटक दिया और जबरन उस के साथ गलत हरकत करने लगा. यह छात्रा पार्किंग से अपनी स्कूटी निकाल रही थी जब उस के ऊपर यह बर्बर अटैक हुआ. लड़की ने शोर मचाया तब कुछ लोगों के पहुंचने पर शोहदा उसे छोड़ कर भागा. पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि कई जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. आरोपी की पहचान आसानी से हो सकती थी. पर इतनी कवायद योगी की पुलिस क्यों करेगी जबकि ऊपर से आदेश है कि प्रदेश में क्राइम का ग्राफ नीचे रखना है.

इसी दिन चिनहट में एक महिला सिपाही से एक रिटायर सैन्य कर्मी ने अश्लील हरकत की और उस पर शादी करने का दबाव बनाया. इस रिटायर सैन्य कर्मी ने करीब 12 नम्बरों का इस्तेमाल कर के महिला सिपाही को मैसेज भेजे. पुलिस बताए कि उस के पास 12 सिम कहां से आए?

इसी दिन आशियाना क्षेत्र की मार्किट में एक नैशनल ला यूनिवर्सिटी की छात्रा से एक शोहदे ने छेड़छाड़ की जब वह मार्केट से कुछ खरीदारी कर रही थे. शोहदा काले रंग की बाइक पर उस का पीछा कर रहा था. विरोध करने पर उस ने लड़की को भद्दी गालियां दीं और निकल भागा. अगर यह लड़की मार्किट में न हो कर किसी सुनसान सड़क पर होती तो न जाने उस के साथ क्या घटना घट जाती.

लखनऊ सिविल कोर्ट की तीसरी मंजिल से एक महिला अधिवक्ता ने फेसबुक लाइव कर के छलांग लगा दी और मर गई. फेसबुक लाइव कर के उस ने कहा था, “मेरे जिंदा रहते किसी ने बात नहीं सुनी. अब मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार ससुराल में करा देना.”

32 साल की अधिवक्ता माया रावत की शादी इटौंजा में रहने वाले सतीश से हुई थी. 10 साल से दोनों के बीच मुकदमा चल रहा है. मगर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा था. माया रावत बीमार भी थी. मानसिक और शारीरिक समस्याओं ने उसे घेर लिया था. उस के इलाज में छोटे भाई ने डेढ़ लाख रुपया खर्च कर दिया था. मगर माया इस बात से ज्यादा व्यथित थी कि 10 साल से वह अदालत के चक्कर काट रही है मगर इंसाफ नहीं मिल रहा है. पुलिस, अदालत, सरकार सब को माया कटघरे में खड़ा कर गई.

लखनऊ पीजीआई थाना क्षेत्र में वृन्दावन योजना सैक्टर 7 में रहने वाले विशाल गौतम को घर लौटने पर उस की पत्नी प्रियंका फंदे पर झूलती मिली. दरअसल विशाल के मातापिता और बहन चाहते थे कि विशाल और उस की पत्नी प्रियंका वह घर खाली कर दें. सास शीला देवी आएदिन बहु प्रियंका से झगड़ा करती थी. विशाल का कहना है कि उस दिन उन्होंने अपने जमाई प्रताप सिंह वर्मा को फ़ोन करके घर बुलाया जिस ने उस की पत्नी के साथ मारपीट की और फिर पूरे परिवार ने उस की ह्त्या कर उस का शव फंदे पर लटका कर उसे फांसी का रूप देने की कोशिश की. विशाल को शक तब हुआ जब उसने पत्नी के गले में कसा हुआ दुपट्टा देखा जो कि उस की बहन सविता का था. आखिर प्रियंका सविता के दुपट्टे से क्यों फांसी लगाती? खैर मामला दर्ज हो चुका है मगर गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई है.

कोलकाता में एक ट्रेनी डाक्टर की दुर्दांत ह्त्या के बाद पूरे देश में डाक्टरों की हड़ताल और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने और सुनवाई शुरू करने की बड़ीबड़ी खबरों के बीच देश भर में औरतों के साथ होने वाली भयावह घटनाओं की कहीं कोई चर्चा नहीं होती. जिन ख़बरों की चर्चा ऊपर हुई वह मात्र एक दिन की और एक शहर की खबरें हैं. देश भर में प्रतिदिन हजारों महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो रहे हैं और खबरें अखबारों के किसी कोने में दब कर रह जाती हैं. कुछ दिन बाद पुलिस आरोपी से पैसे खा कर मामला रफा दफा कर देती है.

प्रतिदिन लगभग 90 बलात्कार यानी हर घंटे 4 और हर 15 मिनट पर देश में एक बलात्कार की घटना घट रही हैं. कितनों में कार्रवाई होती हैं? कितने आरोपियों को सजा हो पाती है? शायद पांच परसेंट को भी नहीं. जबतक देश में महिलाओं के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं से निपटने के लिए मजबूत क़ानून नहीं होगा, कानून का पालन कराने वाले मजबूत इच्छाशक्ति वाले पुलिसकर्मी नहीं होंगे, सरकार की नीयत महिलाओं को इन्साफ दिलाने की नहीं होगी, तब तक भाजपा महिलाओं की हितैषी होने का कितना ही ढोल पीटे, सच इस का बिलकुल उलट ही होगा.

इंडियन यूथ में बढ़ता कोरियन और चाइनीज ड्रामा का क्रेज़, जानें क्या है सी और के ड्रामा

K-Drama का मतलब है साउथ कोरिया में बनाए जा रहे रोमांटिक ड्रामा सीरीज. वहीं C-Drama में चीन के युवाओं की खुशनुमा जिंदगी को दिखाया जाता है. दो अलगअलग देशों के यूथ की लाइफ में ऐसा क्या है कि भारतीय यूथ में उसे देखने की दीवानगी बढ़ती ही चली गई.

 

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ड्रामाज में मिलाया जाने वाला मिर्च मसाला

आमतौर पर इन दोनों देशों की ड्रामा सीरीज टीनएज और यूथ की लवलाइफ, कैरियर, फैमिली रिलेशन पर आधारित होती हैं और 25 एपिसोड्स तक खत्म हो जाती हैं. लिव इन रिलेशनिशप, वन नाइट स्टैंड, वाइन कल्चर, मिडिल क्लास पेरैंटिंग,  भारत जैसी डिवोर्स, कैरियर ओरिएंटेड वुमन, बड़ी कंपनियों के कल्चर, अमीरगरीब के बीच के प्यार को ले कर बुनी जाती है.

ट्रेंडी और यूथ ओरिएंटेड टच का भी कमाल

लेकिन कुछ मामलों में इन का कौंसेप्ट बिल्कुल ट्रेंडी और कैची है, जो यूथ को हुक करना जानता है जैसे इन की SciFi यानी साइंस फिक्शन बेस्ड ड्रामाज, जिस में दूसरे एलियन से प्यार दिखाया जाता है, कुछ गेम्स डिवाइसेस या गेम्स कल्चर को ले कर भी बनते हैं, जिस में ऐक्टर्स को नए गेम को बनाते, उस पर रिसर्च करते और उसे यूज करते दिखाया जाता है.

इतना ही नहीं कम उम्र में अपनी कंपनी या अपना बिजनेस शुरू करने के प्लौट पर कहानियां बुनी गई हैं. इन ड्रामाज का यूथ में स्टार्टअप के प्रति आकर्षण दिखाया है. वे अपने पेरैंट्स की तरह ट्रेडिशनल जौब्स करने की बजाय कुछ नया और अपना काम करने में यकीन रखते हैं.

कब और कैसे भारतीय युवाओं के दिमाग में दीमक की तरह फैला

K-Drama और C-Drama दोनों बहुत ही पुरानी संस्कृति से भारत भूमि पर आए, ठीक उसी तरह जैसे मध्यकालीन युग में आक्रमणकारी भारत आए. मध्यकालीन बर्बर आक्रमणकारियों और K-Drama और C-Drama के बीच यह समानता है कि दोनों का इरादा लूटने का ही रहा, अंतर यह था कि एक मारकाट कर लूटता गया और दूसरा प्यार बरसा कर लूट रहा है.

Statista की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2023 में हुए एक सर्वे में शामिल 29 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे K-Drama से भलीभांति परिचित हैं. इस सर्वे में 15 से 59 साल के 1600 लोगों ने भाग लिया.

एक अनुमान के अनुसार लौकडाउन के दिनों में ही वेब सीरीज की तरह ही युवाओं को इन ड्रामाज की लत लगी. अंतर बस यही था कि वेब सीरीज देखनेवालों में ज्यादातर 25 साल से ऊपर के लोग थे तो इन ड्रामाज को देखने वाले ज्यादातर इस एज ग्रुप
(25 से 30 साल) के नीचे वाले लोग थे.

 

कब और कैसे भारतीय युवाओं के दिमाग में दीमक की तरह फैला

K-Drama और C-Drama दोनों बहुत ही पुरानी संस्कृति से भारत भूमि पर आए, ठीक उसी तरह जैसे मध्यकालीन युग में आक्रमणकारी भारत आए. मध्यकालीन बर्बर आक्रमणकारियों और K-Drama और C-Drama के बीच यह समानता है कि दोनों का इरादा लूटने का ही रहा, अंतर यह था कि एक मारकाट कर लूटता गया और दूसरा प्यार बरसाकर लूट रहा है. Statista की एक रिपोर्ट के अनुसार,भारत में साल 2023 में हुए एक सर्वे में शामिल 29 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे K-Drama से भलीभांति परिचित हैं. इस सर्वे में 15 से 59 साल के 1600 लोगों ने भाग लिया.

एक अनुमान के अनुसार लौकडाउन के दिनों में ही वेबसीरीज की तरह युवाओं की इसकी लत लगी. अंतर बस यही था कि वेबसीरीज देखनेवालों में ज्यादातर 25 साल से ऊपर के लोग थे तो इन ड्रामाज को देखनेवालों ज्यादातर इस एजग्रुप (25 से 30 साल) के नीचे वाले लोग थे.

तेजी से बढ़त बनाने की वजह

इन ड्रामाज में से कई ओटीटीज पर फ्री हैं. कुछ यूट्यूब पर भी फ्री में मिल रहे हैं. इन में से कई पौपुलर ड्रामाज हिंदी में डब्ड हैं या फिर इंग्लिश सबटाइटल्स के साथ मौजूद हैं. वैसे तो ये दोनों देशों के ड्रामाज भारत के सीरियल्स की तुलना में कम एपिसोड्स के होते हैं, जो 25 एपिसोड तक खत्म हो जाते हैं खासकर दक्षिण कोरिया में बने ड्रामा. हालांकि चीन के कुछ ड्रामाज 100 एपिसोड तक लंबे होते हैं.

Statista की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 26 देशों में किए गए सर्वे में शामिल 41 प्रतिशत लोगों ने माना कि कोरियन ड्रामाज उन के देश में बहुत मशहूर हैं. एक आंकड़े के मुताबिक, साल 2019 से 2020 के बीच भारत में नेटफ्लिक्स पर k-dramas देखने वालों की संख्या में 370 प्रतिशत की बढ़त देखी गई.

K-Drama देखने के लिए लोग इन OTT प्लेटफौर्म्स का रुख करते हैं, viki, Routen viki या Netflix पर जाते हैं तो c-drama देखने के लिए MX Player, Amazon Mini, YouTube जैसे प्लेटफौर्म्स पर मंडराते हैं.

उत्तर कोरिया में नहीं देख सकते ये रोमांटिक ड्रामा

हालांकि उत्तर कोरिया में दक्षिणी कोरिया के ड्रामाज देखने की सख्त मनाही है और पकड़े जाने पर सजा भी दी जाती है. साउथ कोरिया के एक रिसर्च ग्रुप ने एक वीडियो फुटैज जारी किया, जो वहां के उन टीनजर्स की थी, जिन्हें ये ड्रामाज और फिल्में देखने और उस को बांटने के लिए 12 साल की कड़ी मेहनत करने की सख्त सजा दी गई थी. इन यूथ्स की उम्र 16 साल थी और सजा देते वक्त यह कहा गया गया कि दोनों उस विदेशी कल्चर से प्रभावित हैं, जो उन का भविष्य खराब कर सकती है.

वैसे कुल मिला कर कहा जाए, तो इन ड्रामाज की सब से अच्छी बात है कि इस में हिंसा नहीं दिखाया जाता है, कुछ मार्शल आर्ट्स पर भी ड्रामाज हैं लेकिन फिर भी वह साउथ इंडियन मूवीज या हौलीवुड की तुलना में न के बराबर हैं.

सच कहा जाए तो इस तरह के ड्रामाज में कई ऐसे वैल्यूज हैं जो भटके हुए टीनएजर्स और यूथ को पौजिटिव मैसेज देते हैं जैसे फैमिली वैल्यूज, कैरियर को ले कर सचेत होना, नौकरी के भरोसे रहने के बजाय अपना बिजनेस या स्टार्टअप शुरू कर अपने सपनों को पूरा करना, घर में पेरैंट्स की भागीदारी को कम करना और गर्लफ्रैंड से जीभर कर रोमांस करना.

मेरे पति शराबी हैं जिस कारण वे ठीक से सैक्स नहीं कर पाते

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सवाल :

मेरी शादी को 6 महीने हुए हैं और मुझे हमेशा से एक ऐसा लाइफ पार्टनर चाहिए था जो मुझे समझे, मेरी केयर करे और मेरी फिजिकल नीड्स को अच्छे से सैटिस्फाई कर पाए. शादी के बाद मुझे पता चला कि मेरे पति अकसर काम से घर लौटते हुए अपने दोस्तों के साथ शराब पीते हैं. मैं ने कई बार उन्हें समझाया कि अब शादी हो चुकी है, शराब नहीं पीनी चाहिए लेकिन वे मेरी बिलकुल नहीं सुनते जिस वजह से हमारी कई बार लड़ाई भी हो जाती है. जब वे शराब पी कर घर लौटते हैं तो सिर्फ खाना खा कर सो जाते हैं. न वे मुझ से बात करते और न ही कभी मेरे साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते. सैक्स के समय भी वे इतने नशे में होते हैं कि उन से ठीक से सैक्स तक नहीं किया जाता और ऐसे में वे मेरी फिजिकल नीड्स कभी सैटिस्फाई नहीं कर पाते. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब :

शराब अपने साथ कई ऐसी बीमारियां ले कर आती है जो बसाबसाया घर उजाड़ कर रख देती है. कहा जाता है कि शुरुआत में इंसान शराब को पीता है लेकिन धीरेधीरे शराब इंसान को पीने लग जाती है और उसे इस बात की खबर तक नहीं लगती कि कब उसे शराब की आदत लग जाती है.

आप को अपने पति को बैठा कर अच्छे से समझाना चाहिए कि उन्हें अब थोड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि उन के घर उन की पत्नी बैठी है जो उन का इंतजार कर रही है. आप उन से यह बातें तब कीजिए जब वे बिलकुल नशे में न हों.

जब वे शराब पी कर आएं तो उन से बिलकुल लड़ाई न करें बल्कि आप ऐसा कर सकते हैं कि कुछ दिनों के लिए उन से बात करनी बिलकुल बंद कर दें ताकी उन्हें आप की चुप्पी से फर्क पड़े और वे सोचने पर मजबूर हो जाएं कि वे जो कर रहे हैं बिलकुल गलत कर रहे हैं.

आप उन से काम से 3-4 दिन की छुट्टी लेने को कहें और उन के साथ कहीं बाहर घूमने का प्लान करें जहां सिर्फ आप दोनों हो और एक अच्छा क्वालिटी टाइम स्पैंड हो सके. इस दौरान आप उन्हें अपने दिल की बात बताएं कि शराब के कारण आप उन से दूर होती जा रही हैं और अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह रिश्ता किसी काम का नहीं रहेगा बल्कि सिर्फ नाम का रह जाएगा.

आप उन्हें घर में ऐसा माहौल दीजिए कि उन्हें घर आने की जल्दी रहे. जब वे आएं तब आप सुंदर कपड़े पहन कर उन का फैवरिट खाना तैयार रखें और उन्हें कौल कर के बताएं कि आज आप उन के लिए उन का फैवरिट खाना बनाया है ताकि उन्हें लगे कि आप उन के बारे में काफी सोचती हैं.

काम के बीचबीच में उन्हें कौल कीजिए जिस से कि आप दोनों एकदूसरे से जुङे रहें. ऐसा करने से वे आप के बारे में सोचने लगेंगे और हो सकता है कि धीरे धीरे शराब को छोड़ दें.

जितना हो सके उन के साथ क्वालिटी टाइम स्पैंड करें और उन को एक ऐसी लाइफ दिखाएं कि उन के मन में शराब के लिए खुद नफरत पैदा हो और वे यह सोचने पर मजबूर हो जाएं कि असली सुख घर में ही है.

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जम्मू कश्मीर चुनाव : भाजपा की रणनीति चित करने जा रही राहुल गांधी-फारुक अब्दुल्ला की जोड़ी

भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी की सत्ता आने के बाद जिस तरह जम्मू कश्मीर को और आवाम को दर्द ही दर्द मिला है क्या उसे कोई भूल सकता है ? यहां तक कि नागरिक अधिकार अधिकार नहीं रहे और बंदूक के साए में अब देश के सब से बड़े न्यायालय के आदेश के बाद चुनाव होने जा रहे हैं. यह एक ऐसा रास्ता है जो लोकतांत्रिक मृग मरीचिका का आभास देता है. मगर सितंबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनाव की जो रणनीति कांग्रेस बना रही है उस में नरेंद्र मोदी और अमित शाह का पूरा खेल बिगड़ता दिखाई दे रहा है.

 

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भाजपा किसी भी हालत में यहां सत्ता में आती नहीं दिखाई देती. जिस का आगाज लोकसभा चुनाव में भी परिणाम के रूप में हमारे सामने है. इधर फारूक अब्दुल्ला ने जिस तरह सामने आ कर मोर्चा संभाला है और विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी की रणनीति चारों खाने चित हो चुकी है.

कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी श्रीनगर पहुंचे हैं. खरगे ने जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई और केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वादों को ‘जुमला’ करार दिया.

खरगे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ श्रीनगर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनावों की जमीनी स्तर की तैयारियों के बारे में जानकारी ली. खरगे ने कहा, ‘इंडिया’ गठबंधन ने एक तानाशाह को पूर्ण बहुमत के साथ (केंद्र में) सत्ता में आने से रोका है. यह ‘इंडिया’ की सब से बड़ी सफलता है.’

उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने राज्य का दर्जा बहाल करने की पहल की है. हम इस दिशा में काम करने का वादा करते हैं.” उन्होंने कहा राहुल गांधी की जम्मू कश्मीर में चुनाव पूर्व गठबंधन बनाने में रुचि है. राहुल गांधी अन्य पार्टियों के साथ मिल कर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं.

दरअसल भाजपा लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद चिंतित है, क्योंकि वे जिन विधेयकों को पारित कराना चाहते थे उस में करारी मात मिली.

जम्मू-कश्मीर : पूर्ण राज्य का दर्जा

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के श्रीनगर दौरे से राजनीति में एक गरमाहट आ गई है. राहुल गांधी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की प्राथमिकता है. यह उन की पार्टी का लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को उन के लोकतांत्रिक अधिकार वापस मिलें.” उन्होंने कहा, “कांग्रेस और ‘इंडिया’ की प्राथमिकता है कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए. हमें उम्मीद थी कि चुनाव से पहले ऐसा कर दिया जाएगा, लेकिन चुनाव घोषित हो गए. हम उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार बहाल किए जाएंगे. आजादी के बाद यह पहली बार है कि कोई राज्य केंद्र शासित प्रदेश बन गया है.”

यहां कोई विधान परिषद, कोई पंचायत या नगर पालिका नहीं है. लोगों को लोकतंत्र से दूर रखा गया है. खरगे कहा, सुप्रीम कोर्ट के 30 सितंबर तक चुनाव कराने के निर्देश के कारण ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा की गई है.

आगे कहा, चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर के लोगों से किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है. कुल मिला कर कांग्रेस नेताओं में जिस तरह जम्मू कश्मीर में मोर्चाबंदी की है उस से नरेंद्र मोदी अमित शाह के मंसूबे ध्वस्त होंगे ऐसा प्रतीत होता है.

फारूक अब्दुल्ला और कांग्रेस

जम्मू कश्मीर में जो नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं उस से साफ दिखाई दे रहा है कि फारूक अब्दुल्ला जो जम्मू कश्मीर के सब से बड़े नेता और चेहरे हैं ने कांग्रेस के साथ चुनाव मिल कर लड़ने का ऐलान कर दिया है और यह गठबंधन अगर बन जाता है तो उन की सरकार बनने की पूरी संभावना है क्योंकि इन के सामने सारे नेता बौने हैं. वहीं राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन का अब समय आ गया है दिखाई देता है.

जम्मू कश्मीर में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्तूबर, यानी 3 चरणों में चुनाव होंगे. नतीजे 4 अक्तूबर को घोषित किए जाएंगे. फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘कांग्रेस के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के (एमवाई) तारिगामी भी हमारे साथ हैं.

उन्होंने आगे कहा, “मुझे उम्मीद है कि हमें लोगों का साथ मिलेगा और हम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भारी बहुमत से जीतेंगे. इस के पहले राहुल गांधी ने आश्वासन दिया था -जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जा को बहाल करना कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन की प्राथमिकता है. अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि सभी शक्तियों के साथ पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा.

अब्दुल्ला ने‌ कहा, “राज्य का दर्जा हम सभी के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है. इस का हम से वादा किया गया है. इस राज्य ने बुरे दिन देखे हैं और हमें उम्मीद है कि इसे पूरी शक्तियों के साथ बहाल किया जाएगा. इस के लिए हम ‘इंडिया’ गुट के साथ एकजुट हैं.”

महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि चुनाव पूर्व या चुनाव बाद गठबंधन में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी की मौजूदगी से भी नैशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने इनकार नहीं किया है. कुल मिला कर जो चक्रव्यूह चुनावी सामने आ रहे हैं उस में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पूरी योजना धरी की धरी रह जाने की संभावना है.

अविवाहित युवती हूं सेफ सैक्स के लिए क्या करूं ?

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सवाल :

मेरी उम्र 26 साल है और मेरे घर वाले शादी का रिश्ता ढूंढ़ रहे हैं. मैं हमेशा से अपने पढ़ाई के लिए काफी गंभीर रही हूं। इसी वजह से मैं ने आजतक स्कूल या कालेज में कभी कोई बौयफ्रैंड नहीं बनाया. मेरी कई फ्रैंड्स हैं जिन की शादी हो चुकी है और कुछ के तो बौयफ्रैंड्स भी रह चुके हैं. मेरी फ्रैंड्स जब भी मुझ से मिलती हैं तो वे अपनी सैक्स लाइफ के बारे में बातें करती हैं पर मैं हमेशा खामोश रहती हूं. मेरा बहुत मन करता है सैक्स करने का लेकिन डर लगता है. मैं चाहती हूं कि जिस से भी मेरी शादी हो मैं सिर्फ उसी के साथ सैक्स करूं. मैं हमेशा सैक्स को ले कर काफी चिंतित रही हूं क्योंकि मुझे हमेशा से ऐसा लगता है कि सैक्स को हमेशा ऐसे करना चाहिए जिस से कि हम दोनों को कभी कोई परेशानी न हो. मुझे बताएं कि सेफ सैक्स के लिए किनकिन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है?

जवाब :

सैक्स एक ऐसा टौनिक है जो दोनों पार्टनर्स को एकदूसरे के करीब लाता है. शादी के बाद आप पहली बार सैक्स करेंगी इसलिए आप को बहुत सी बातों का खयाल रखना चाहिए. जैसाकि आप ने बताया कि आप का कोई बौयफ्रैंड नहीं रहा और आप ने आजतक कभी सैक्स का आनंद नहीं लिया है तो सैक्स को ले कर आप को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.

सैक्स को हमेशा पूरी फील के साथ ऐंजौय करना चाहिए। अगर आप सैक्स के दौरान खुद को स्ट्रैस में रखेंगी या फिर इस बारे में ज्यादा सोचेंगी तो औप सैक्स को कभी ऐंजौय नहीं कर पाएंगी. अपनी पूरी बौडी को फ्री छोड़ कर और दिमाग को बिलकुल स्ट्रैसफी रख कर ही सैक्स को अच्छे से फील किया जा सकता है.

आप को इस बात का खास खयाल रखना चाहिए कि सैक्स के दौरान आप या आप के पार्टनर को कुछ ऐसा नहीं करना है जिस से कि आप दोनों के प्राइवेट पार्ट्स को कोई नुकसान पहुंचे. अकसर ऐसा देखा गया है कि सैक्स के दौरान हम कुछ ऐसी चीजें करते हैं जिस से कि हमारे पार्टनर को आनंद मिलने की बजाय दर्द होने लगता है। तो खुद भी और अपने पार्टनर से भी कहें कि वह सैक्स के दौरान मजा दे नकि सजा।

अगर आप को कभी सैक्स के दौरान ऐसा लगे कि आप के पार्टनर कुछ ऐसा कर रहे हैं जिस में आप बिलकुल सहज नहीं हैं तो आप अपने पार्टनर को साफसाफ बोल कर मना कर सकती हैं.

सैक्स में हमेशा जरूरी है कि एकदूसरे की भावनाओं का खयाल रखना. आप को अपने पार्टनर से सैक्स संबंधित बात करने में शरमाना बिलकुल भी नहीं चाहिए। आप के पार्टनर को भी अच्छा लगेगा कि आप उन से अपनी फीलिंग्स शेयर कर पा रही हैं.

सैक्स करने से पहले आप को अपने पार्टनर के साथ रोमांस करना चाहिए ताकि आप दोनों एकदूसरे के साथ सहज हो पाएं. रोमांस करने से रिश्ता और भी ज्यादा गहरा बन जाता है. शुरुआत हमेशा धीरेधीरे होनी चाहिए जिस से कि दोनों सैक्स का भरपूर आनंद उठा पाएं.

अच्छा तो यही है कि संसर्ग से पहले फोरप्ले का आनंद उठाएं। चुंबन, एकदूसरे के अंगों को सहलाने के साथ पोजीशन बदलबदल कर सैक्स करने से आनंद को कई गुणा तक बढ़ाया जा सकता है।

याद रखें, सैक्स कुदरत का दिया एक अनमोल तोहफा है। इसलिए सैक्स को खूब ऐंजौय करें, मगर ऐहतियात के साथ.

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उड़ान : आखिर जिंदगी से ऐसा क्या चाहती थी कांता

‘‘मैं ने कह दिया न कि मैं तुम्हारे उस गिरिराज से शादी नहीं करूंगी. सब कहते हैं कि वह दिखने में मुझ से छोटा लगता है. फिर वह करता भी क्या है… लोगों की गाडि़यों की साफसफाई ही न?’’ कांता ने दोटूक शब्दों में कह दिया.

‘‘उस से नहीं करेगी, तो क्या किसी नवाब से शादी करेगी? अरी, तू बिरादरी में हमारी नाक कटाने पर क्यों तुली है. तू सोचती है कि तेरे कहने से हम तय की हुई शादी तोड़ देंगे? इस भुलावे में मत रहना.

‘‘मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि मैं शादियांसगाइयां वगैरह जोड़तीतोड़ती रहूं. अभी तो मेरे पास शादी के लिए दोदो लड़कियां और बैठी हैं,’’ पत्नी देवकी को बोलते देख कर पति मुरारी भी पास आ गया था.

कांता के छोटे भाईबहन, जो बाप की रेहड़ी के पास खड़े हो कर सुबहसुबह कुछ पैसा कमाने के जुगाड़ में प्रैस कर रहे थे, भी वहां आ गए थे.

मुरारी ने बेटी कांता को सुनाते हुए अपनी पत्नी देवकी से कहा, ‘‘कह दे अपनी छोरी से, इतना हल्ला न मचाए. ब्यूटीपार्लर में काम क्या करने लगी है, अपनेआप को हेमामालिनी समझने लगी है. ज्यादा बोलेगी, तो घर से बाहर कर दूंगा. ज्यादा चबरचबर करना मुझे अच्छा नहीं लगता है.’’

मां के सामने तो कांता शायद थोड़ी देर बाद चुप भी हो जाती, पर उन दोनों की तकरार में बाप के आते ही वह गुस्से में आ गई और बोली, ‘‘अच्छा बापू, यह तुम कह रहे हो. शाम को शराब पी कर जो तमाशा तुम करते हो, वह याद नहीं है तुम्हें?

‘‘अभी कल शाम को ही तो तुम ने मुझ से शराब के लिए 20 रुपए लिए थे. तुम्हें तो अपनी शराब से ही फुरसत नहीं है. मैं अपना कमाती हूं. मुझे तो यहां पर रहते हुए भी शर्म आती है. कुछ ज्यादा पैसा मिलने लगे, तो मैं खुद ही यहां से कहीं दूर चली जाऊंगी.’’

जब से कांता ब्यूटीपार्लर में नौकरी करने जाने लगी थी, तब से उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे.

वैसे, गलीगली में खुल गए ब्यूटीपार्लर इन्हीं झुग्गीझोंपडि़यों की लड़कियों के बल पर ही चल रहे हैं. इन से जितना मरजी काम ले लो. ये खुश भी रहती हैं और ग्राहक की जीहुजूरी भी खूब कर लेती हैं.

कांता ब्यूटीपार्लर में पिछले 6 महीने से काम कर रही है. शुरूशुरू में वहां की मालकिन अलका मैडम ने उस से बस मसाज वगैरह का काम ही कराया था, पर अब तो वह भौंहों की कटाईछंटाई और बाल भी काट लेती है.

कांता बातूनी है और टैलीविजन पर आने वाले गानों के साथ सारासारा दिन गुनगुनाती रहती है. जब से उस की नौकरी लगी है, तब से छुट्टी वाले दिन भी वह छुट्टी नहीं करती है. जिस दिन दूसरी लड़कियां नहीं आतीं, उस दिन भी अकेली कांता के दम पर ब्यूटीपार्लर खुला रहता है.

अलका मैडम कांता से बहुत खुश हैं और वह उन की इतनी भरोसेमंद हो गई है कि वे अपना कैश बौक्स भी उसे सौंप जाती हैं.

पर आज सुबह से ही कांता का मूड खराब था. चहकने से सुबह की शुरुआत करने वाली कांता आज गुमसुम थी. ब्यूटीपार्लर पहुंच कर न तो उस ने अपने नए तरीके से बाल बनाए थे, न ही अलका मैडम से कहा था, ‘मैडम, जब तक कोई ग्राहक नहीं आता, तब तक मैं आप के बालों में मेहंदी लगा दूं या फेसियल कर दूं…’

कांता की चुप्पी को तोड़ने के लिए अलका मैडम ने ही पूछ लिया, ‘‘क्या हुआ कांता?’’

1-2 बार पूछने पर कांता ने सारी रामकहानी अलका मैडम को सुना दी और लगी रोने. रोतेरोते उस ने कहा, ‘‘मैडम, आप मुझे अपने घर में क्यों नहीं रख लेतीं? बदले में मुझ से अपने घर का कुछ भी काम करा लेना. घर वालों को कुछ तो मजा चखा दूं. मैं अपने साथ जोरजबरदस्ती बरदाश्त नहीं करूंगी.’’

‘‘ठीक है, पर मुझे सोचने के लिए थोड़ा सा समय तो दे. और सुन, यह मत भूलना कि मांबाप बच्चों का बुरा नहीं चाहते हैं. उन के नजरिए को भी समझने की कोशिश कर. दूसरों के कहने पर क्यों जाती है. क्या तू ने अपना मंगेतर देखा है?’’ अलका मैडम ने पूछा.

‘‘हां देखा था, अपनी सगाई वाले दिन. लेकिन मुझे उस का चेहरा जरा भी याद नहीं है.’’

अभी वे दोनों बातें कर ही रही थीं कि साफसफाई करने वाली शीला ने कहा, ‘‘बाहर कोई लड़का कांता को पूछ रहा है.

‘‘लड़का…’’ कांता चौंकी, ‘‘कहीं गिरिराज तो नहीं?’’

‘‘मैं किसी गिरिराज को नहीं पहचानती,’’ शीला ने जवाब दिया.

‘‘जो भी है, उस से कह दो कि यह औरतों का ब्यूटीपार्लर है, मैं लड़कों के बाल नहीं काटती,’’ कांता बोली.

‘‘अरे, इतनी देर में उस से मिल क्यों नहीं लेती?’’ अलका मैडम ने कहा.

कांता बाहर आई, तो उस ने देखा कि सीढि़यों पर एक खूबसूरत सा नौजवान चश्मा लगाए, जींसजैकेट पहने खड़ा था.

‘कौन है यह? शायद किसी ग्राहक के लिए मुझे लेने या समय तय करने के लिए आया हो,’ कांता ने सोचा और बोली, ‘‘आप को जोकुछ पूछना है, अंदर आ कर मैडम से पूछ लो.’’

‘‘मैं तो आप ही के पास आया हूं,’’ वह नौजवान मुसकराते हुए बोला, ‘‘कहीं बैठाओगी नहीं?’’

‘‘मैं तुम… आप को पहचानती नहीं,’’ कांता ने सकपकाते हुए कहा.

‘‘मैं गिरिराज हूं.’’

‘‘हाय…’’ कांता झेंपी, ‘‘तुम… मेरा मतलब आप यहां?’’ थोड़ी देर तक तो उस से कुछ बोला नहीं गया. पहले वह जमीन की तरफ देखती रही, फिर आंख उठा कर उस ने उस नौजवान की तरफ देखा, तो वह भी एकटक उस की ही तरफ देख रहा था.

कांता फिर झेंप गई. बातूनी होने पर भी उस से बोल नहीं फूट रहे थे, तभी बाहर का हालचाल जानने के लिए अलका मैडम भी बाहर निकलीं.

कांता की पीठ अलका मैडम की तरफ थी और वह उन के रास्ते में खड़ी थी. रास्ता रुका देख कर गिरिराज ने कांता की बांह पकड़ कर एक तरफ खींचते हुए कहा, ‘‘देखो, ये मैडम जाना चाहती हैं. तुम एक तरफ हट जाओ.’’

गिरिराज के हाथ की छुअन के रोमांच पर कांता मन ही मन खुश होते हुए भी ऊपर से गुस्सा कर बोली, ‘‘तुम मुझे हाथ लगाने वाले कौन होते हो?’’

इसी बीच अलका मैडम वापस अंदर चली गईं.

‘‘अरे, अभी तक नहीं पहचाना? मैं गिरिराज हूं, तुम्हारा गिरिराज. मां और बाबूजी कल तुम्हारे यहां शादी की तारीख तय करने के लिए गए थे.

‘‘मैं ने उन से कह दिया था कि मुझ से बिना पूछे कोई तारीख पक्की मत कर आना. सोचा था कि तुम से मिल कर ही तारीख तय करूंगा.

‘‘इसी बहाने एकदो बार मिल तो लेंगे. चलो, छुट्टी ले लो. चाहे तो शाहरुख खान की नई फिल्म देख लेंगे या फिर किसी रैस्टोरैंट में पिज्जा खिला लाऊं?’’ गिरिराज ने अपनी बात रखी.

कांता के मन में लड्डू फूट रहे थे. अच्छा हुआ कि वह सुबह गुस्से में अलका मैडम के घर रहने नहीं पहुंच गई.

‘‘मैं घर पर तो बता कर के नहीं आई हूं,’’ कांता ने नरम होते हुए कहा.

‘‘तो क्या हुआ? चोरीछिपे मिलने  का मजा ही कुछ और है. और फिर मेरे साथ चलने में तुम्हें कैसी हिचक? देखती नहीं, सब फिल्मों में हीरोहीरोइन मांबाप को बिना बताए ही घूमते हैं, गाते हैं, नाचते हैं,’’ गिरिराज बोला.

कांता ने इतरा कर बालों को पीछे फेंका और तिरछी नजर से उसे देखते हुए बोली, ‘‘मैं जरा बालों को ठीक कर आऊं, तब तक तुम अलका मैडम से जाने की इजाजत ले लो,’’ फिर जातेजाते वह रुकते हुए बोली, ‘‘तुम… आप कुछ ठंडागरम लेंगे?’’

‘‘वैसे तो जब से आया हूं, तुम्हारे रूप को पी ही रहा हूं, फिर भी तुम जो पिला दोगी, पी लूंगा. पीने के लिए ही तो आया हूं.’’

कांता के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे. नशे की सी हालत में वह लड़खड़ा कर गिरने ही वाली थी कि गिरिराज ने उसे लपक कर अपनी बांहों में समेट लिया.

उधर ब्यूटीपार्लर के टैलीविजन पर एक प्यार भरा गीत आ रहा था, ‘मुझ को अपने गले लगा लो ऐ मेरे हमराही…’ और इधर गिरिराज कांता को संभालते हुए मानो गा रहा था, ‘आ, गले लग जा…’

जैसे ही वे दोनों अंदर पहुंचे, सबकुछ समझते हुए अलका मैडम ने उन के बोलने से पहले ही कहा, ‘‘हांहां जाओ, मौज करो. पर मुझे अपनी शादी में बुलाना मत भूलना.’’

‘‘मैडम, क्यों इतनी जल्दी आप हमें शादी की चक्की में पीस देना चाहती हैं. हमें कुछ दिन और मौजमजा कर लेने दीजिए, तब तक छुट्टी मनाने के लिए आप की इजाजत की जरूरत पड़ती रहेगी,’’ गिरिराज ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं.’’

‘‘शुक्रिया मैडम.’’

कांता देख रही थी कि वह जिसे छोटा सा समझ रही थी, वह तो पुराना अमिताभ बच्चन निकला. क्या बढि़या अंदाज में मैडम से बात कर रहा था. कांता सोच रही थी, ‘मां जो तारीख कहेंगी, उसी तारीख के लिए मैं हामी भर दूंगी. तब तक मेरा हीरो इधर आता ही रहेगा.’

गिरिराज कांता को देख रहा था और कांता गिरिराज को. हालांकि उन्होंने बाहर जाने के लिए सीढि़यों से पैर नीचे रखे थे, मगर उन्हें लग रहा था कि वे दोनों उड़ रहे हैं.

ऐसा तो नहीं सोचा था : आजादी का दर्द

ममता नींद में थी. उस का जीवनसाथी बृज अब उस का नहीं रहा, इस का इल्म उसे नहीं था. आजाद जीवन प्यारा था उसे. अब भी पूरी आजादी चाहिए थी. नहीं रहना चाहती थी किसी के संग वह.

‘‘फोन की घंटी बज रही है, उठो.’’ सुबह का समय है, सर्दी के दिन हैं. इस समय गरमगरम रजाई से निकल कर फोन उठाना एक आफत का काम है. मोबाइल में सिग्नल नदारद रहते हैं, तब पुराना लैंडलाइन फोन ही काम आता है. पति को सोता देख कर ? झल्लाती हुई ममता को ही उठ कर फोन उठाना पड़ा. हालांकि ममता को मालूम था, आज रविवार की सुबह बच्चों का ही फोन होगा, लेकिन किस का होगा, यह तो फोन उठाने पर ही मालूम होगा.

ममता ने फोन उठाया और बातों में मशगूल हो गई. पुत्री सुकन्या का फोन था. बृजमोहन भी उठ कर आ गए, फिर पुत्री और दामाद से उन की भी बातें हुईं. आखिर घूमफिर कर वही बातें होती हैं, क्या हाल है? बच्चे कैसे हैं? छुट्टी में इंडिया आओगे? आज कौन सी दालसब्जी बनी है या बनेगी? मौसम का क्या हाल है? पड़ोसियों की शिकायत, सब यहीकुछ.

सुकन्या को भी पड़ोसियों की बातें सुनने में मजा आता था. ममता भी वही बातें दोहराती, सारी पड़ोसनें जलती हैं. पूरा एक घंटा ममता और बृजमोहन का व्यतीत हो गया. सुबह 6 से 7 बज गए.

ममता और बृजमोहन के 3 बच्चे, सब से बड़ी बेटी सुकन्या, फिर दो छोटे बेटे गौरव और सौरभ. सभी अमेरिका में सैटल हैं. सभी शादीशुदा अपने बच्चों के साथ अमेरिका के विभिन्न शहरों में बसे हुए हैं.

सुकन्या खूबसूरत थी, एक पारिवारिक विवाह में दूर के रिश्ते में अमेरिका में बसे लड़के को पहली नजर में भा गई और फिर विवाह के बाद अमेरिका चली गई. कुछ समय बाद दोनों बेटे भी अमेरिका में सैटल हो गए.

अब ममता और बृजमोहन दिल्ली में अकेले एक तिमंजिला मकान में रह रहे हैं. आर्थिक रूप से संपन्न बृजमोहन की कपड़े की दुकान थी, जो वे आज भी चला रहे हैं. कभीकभी बच्चे मिलने आ जाते हैं और कभी वे बच्चों के पास मिलने चले जाते हैं. अब बिना किसी बंधन के अकेले रहने का सुख भी बहुत है. ममता कुछ नखरैल अधिक हो गई, जब आर्थिक संपन्नता हो, तब चिंता किस बात की.

बृजमोहन का हर सुबह कालोनी के पार्क में जाना दिनचर्या का हिस्सा है. अकेले समय भी काटना है, पार्क के रखरखाव में अकसर खर्च करते. इस से पार्क के क्लब में होने वाले समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि का तमगा मिल जाता.

 

पार्क के क्लब में एक समारोह था. शुरुआत में एक धार्मिक क्रिया की जा रही थी. ‘‘सब को नमस्कार,’’ समारोह स्थल में घुसते ही बृजमोहन ने आवाज दी.

‘‘नमस्कार, सेठजी,’’ पंडितजी भी धार्मिक क्रिया करते हुए बीच में बोल पड़े. वहां मौजूद लोगों में से कुछ मुसकरा दिए और कुछ की भृकुटि तन गईं, वे बुदबुदाने लगे, ‘यह क्या, सेठ होगा अपने घर में. यहां सब बराबर हैं. चंदा ज्यादा देता है, इस का यह मतलब तो नहीं कि धार्मिक क्रिया में विघ्न डालेगा. धार्मिक क्रिया के बाद बात नहीं कर सकता?’

पंडितजी को चंदा चाहिए, पत्थर की प्रतिमा से तो चंदा मिलेगा नहीं, देना सेठ को ही है, अब उस की कुछ तो जीहुजूरी बनती ही है.

‘‘सेठजी, वार्षिक आयोजन के कुछ ही दिन शेष हैं, पूरे क्लब को लाइट्स से रोशन करना है.’’

‘‘समझ हो गया, पंडितजी. लाइट्स मेरी तरफ से. अभी ताजेताजे डौलर आए हैं. डौलर भी महंगा है.’’

 

बृजमोहन सब को यह जताना चाहते थे कि बेटे ने कल ही डौलरों की एक खेप भेजी है, उस के बेटे कितना खयाल रखते हैं.

‘‘सेठजी, भंडारा भी हर रोज होगा.’’

‘‘पंडितजी, मेरी जेब काट लो, सबकुछ मेरे से करवाओगे. भंडारे का नहीं दूंगा. लाइट्स लगवा रहा हूं, वह क्या कम है?’’ बृजमोहन ने दोटूक मना कर दिया. पैसों के बड़े पक्के इंसान थे. पाईपाई का हिसाब रखते थे.

‘‘सेठजी, क्लब में हर शाम कीर्तन भी होगा.’’

‘‘पंडितजी, करो कीर्तन, आप का काम है. मैं तो कीर्तन करूंगा नहीं.’’ बृजमोहन ने आरती में सुर लगाया.

‘‘तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता…’’ फिर पंडितजी बोले, ‘‘सेठजी, माता रानी से डरो, तुम ही भरता हो, कीर्तन के बाद प्रसाद भी बांटना है,’’ पंडितजी उन की जेब ढीली करवाने पर तुले थे.

‘‘कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे…’’ पंडितजी आगे बोले, ‘‘सेठजी, और डौलर आएंगे, प्रसाद का प्रबंध तो आप के जिम्मे है.’’ पंडित भी कौन से कम होते हैं, उन को हजार तरीके आते हैं.

 

‘‘पंडितजी, आखिरी दिन प्रसाद मेरी तरफ से. आप भी क्या याद करेंगे पंडितजी, किस रईस से पाला पड़ा है.’’

धार्मिक क्रिया की समाप्ति के बाद पंडितजी ने मुंह ही मुंह में खुद से कहा, ‘इन की जेब से पैसे निकलवाने का मतलब एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने के बराबर है.’

क्लब में पंडित और दूसरे लोगों से कुछ बातचीत, कुछ गपशप लगाने के बाद बृजमोहन घर वापस आए और नाश्ता करने के बाद कालोनी के कैंपस में चक्कर लगाने चले गए. शाम के समय एकएक कर के बेटों के फोन आए. ममता ने विशेष हिदायत दी.

‘‘चलो कोटपैंट पहन लो, रविवार यानी छुट्टी के दिन घर पर डिनर नहीं करना है,’’ ममता ने और्डर दे दिया.

हर रविवार शाम को मौल घूम कर रैस्टोरैंट में डिनर करना उन की आदत थी. सिर्फ 2 जनें, उम्र सत्तर के करीब, खुद कार चला कर मौल जाते हैं. वापस लौटते समय कार ट्रैफिक सिग्नल पर बंद हो गई. ग्रीन लाइट हुई, तब स्टार्ट करने में दिक्कत हुई. पीछे खड़े वाहनों ने दबादब हौर्न बजाने चालू कर दिए.

‘‘देखो, इस खटारा को बदल दो. एक बार बंद हो जाए तो स्टार्ट ही नहीं होती है. हमारी लाइन में सब के पास चमचमाती लेटैस्ट कारें हैं, बड़ी वाली और हम खटारा ले कर घूम रहे हैं. मैं पड़ोस में और हंसी नहीं उड़वा सकती हूं. देखो, अगले हफ्ते वार्षिक समारोह आरंभ हो रहा है, नई कार घर में आनी चाहिए और वह भी बड़ी वाली.’’

बृजमोहन दुनिया के आगे अपनी जेब सिल कर रखते थे, परंतु परमप्रिय ममता के आगे सदा खुली रहती थी. बिलकुल चूंचपड़ नहीं करते थे.

जब चारपांच सैल्फ मारने पर कार स्टार्ट हुई, बृजमोहन ने पक्का वाला प्रौमिस कर दिया, ‘‘बिलकुल ममता, इस बार बड़ी वाली कार खरीदते हैं.’’

 

पंद्रह वर्षों से बच्चों से अलग रह रहे ममता और बृजमोहन को अकेले रहने में रस आने लगा था. न बच्चों की चिकचिक, न कोई बंधन, जो दिल में हो, करो. संपूर्ण आजादी में रह रहे दंपती को किसी का दखल पसंद नहीं था.

बृजमोहन और ममता बेफिक्र आजादी के संग अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. आराम से सुबह उठना, पार्क में सुबह की सैर करना उन की दिनचर्या थी. ममता अपनी किटी पार्टी में मस्त रहती. बृजमोहन आराम से 11 बजे दुकान जाने के लिए निकलते थे. उन के बच्चे उन को डौलर भेजते थे, फिर भी अपनी दुकान बंद नहीं की. आरामपरस्त होने के कारण उन की दुकानदारी कम हो गई थी, किंतु उन को इस की कोई चिंता नहीं थी. एक पुराना विश्वासपात्र नौकर था. वह ही दुकान संभालता था. पड़ोस के दुकानदार उसे कहते, ‘असली मालिक तो तू ही है. देख लियो, मरने पर दुकान तेरे नाम लिख कर जाएगा.’

 

नौकर भी हंस देता. मजाक पर कोई टैक्स नहीं लगता है. एक बात पक्की है, बृजमोहन दुकान को अपने साथ बांध कर ले जाएंगे. नौकर अपने मालिक की हर रग से वाकिफ था.

हर जगह सुपर मार्केट और स्टोर खुलने से महल्ले की छोटी परचून की दुकानों का कामधंधा गिरने लगा. आज की युवा पीढ़ी हर छोटे से बड़ा सामान औनलाइन खरीदती है. ऊपर से इन सुपर स्टोर्स ने छोटी दुकानों का धंधा लगभग चौपट ही कर दिया है. इसी कारण बृजमोहन के मकान के करीब एक परचून की दुकान बंद हो गई.

एक शाम बृजमोहन अपनी दुकान से वापस लौटे तो उस परचून के मालिक ने बृजमोहन को लपक कर पकड़ लिया.

‘‘सेठजी, नमस्कार.’’

‘‘नमस्कार, तू ठीक है, तू ने दुकान बंद क्यों कर रखी है. पहले तो रात के 10 बजे तक दुकान खोलता था?’’

‘‘अब क्या बताऊं सेठजी, इन औनलाइन और सुपर स्टोर्स की वजह से धंधा चौपट हो गया. दुकान बंद कर दी है. सारा स्टौक खरीद रेट पर बेच रहा हूं. खरीद लो, आप का फायदा ही सोच रहा हूं.’’

बृजमोहन ने सस्ते में दो महीने का राशन खरीद लिया.’’

ममता राशन समेटने में लग गई, ‘‘किस ने कहा था, उस की दुकान खरीद लो. 2 महीने का राशन जमा हो गया है.

हम 2 जनें हैं, हमारे से अधिक तो चूहे खा जाएंगे. असली मौज तो उन की लगेगी,’’ ममता ने तुनक कर कहा.

‘‘हे अर्धांगिनी, आधे दाम पर सारा सामान खरीदा है, थोड़ा चूहे खा भी जाएंगे, तब भी शुद्ध लाभ ही होगा. खाने दो चूहों को, अब क्या करें, ऐसा सौदा हर रोज नहीं मिलता.’’

‘‘हम 2 जनें हैं, कितना खाएंगे? चूहों की मौज रहेगी.’’

ममता बृजमोहन की कंजूसी पर परेशान रहती थी, जब डौलर बच्चे भेजते हैं तब आराम से बुढ़ापे में ऐश से रहें. इसी कारण ममता टोकाटाकी करती थी, जिस से बृजमोहन परेशान हो जाता था.

सस्ता राशन खरीद कर बृजमोहन अपनी ताल खुद ठोंक रहा था. उधर ममता इस बात पर परेशान थी कि कामवाली बाई 2 दिनों से नहीं आ रही है. सारा राशन कौन संभालेगा. किसी नए नौकर को घर में कैसे घुसा ले? खैर, कामवाली बाई 2 दिन की छुट्टी बोल गई, एक हफ्ते बाद आई. एक सप्ताह तक ममता का भेजा एकदम फ्राई ही रहा.

बृजमोहन को इस का यह लाभ मिला कि ममता नई कार खरीदना भूल गई.

 

बच्चों से फोन पर बात कर के ममता का भेजा खुश हो गया. वे कुशलमंगल हैं. इधर अपनी कामवाली बाई का नहीं आना वह भूल सी गई.

दोनों का जीवन सरलता से बीत रहा था. दिन बीतते गए लेकिन उम्र का तकाजा था जो कभी नहीं सोचा था, वह हो गया.

एक रात नींद में बृजमोहन को बेचैनी महसूस हुई और इस से पहले वे पास लेटी ममता को हाथ लगाते या फिर आवाज दे कर पुकारते, उन की जीवनलीला समाप्त हो गई. थोड़ी नींद खुली, थोड़ी तड़पन हुई और फिर जीवनसाथी को छोड़ दूसरे लोक की सैर को निकल पड़े.

 

ममता ने यह कभी नहीं सोचा था. अभी तो वह नींद में थी. उस का जीवनसाथी अब उस का नहीं रहा, इस का इल्म उस को नहीं था. सत्तर की उम्र में रात को दोतीन बार नींद खुलती है, करवट बदल कर देखा, बृजमोहन सो रहे हैं, बस इतना पूछा ‘सो रहे हो?’ बिना कोई उत्तर सुने फिर आंखें बंद कर लेती, यही हर रात की कहानी थी.

ममता सुबह उठी, नित्यक्रिया से निबट कर चाय बनाई और बृजमोहन को आवाज दी, ‘‘उठो.’’  बृजमोहन नहीं उठे. ममता ने उन को हाथ लगाया. बृजमोहन का मुंह खुला था, कोई सांस नहीं. उस का कलेजा धक से थम गया.

‘‘बृज, क्या हुआ, बृज?’’ लेकिन बृज का शरीर अकड़ गया था. बदहवास ममता घर से बाहर आई और पड़ोस का दरवाजा खटखटाया. बदहवास ममता को देख पड़ोसी माथुर घबरा गए, ‘‘क्या हुआ भाभीजी?’’

‘‘भाईसाहब, इन को देखो, मालूम नहीं क्या हुआ है, बोल ही नहीं रहे हैं.’’

माथुर तुरंत ममता के संग हो लिए. बृज को देखते ही माथुर ने तुरंत अस्पताल फोन कर के एंबुलैंस को बुलाया. अस्पताल जाना मात्र औपचारिकता थी. तुरंत ईसीजी कर के आईसीयू में डाल दिया गया.

 

अस्पताल के वेटिंगरूम में अकेली बैठी ममता आंसुओं में डूबी सोच रही थी, ऐसा नहीं सोचा था, बृज की यह हालत होगी और मैं अकेली कुछ करने में भी असमर्थ हूं. कोई साथ नहीं है. 3 बच्चे हैं, 2 बहुएं, 1 दामाद, 6 पोते, पोतियां, नाति, नातिने इस दुख की घड़ी में कोई साथ नहीं है. अकेली किस को पुकारे. बच्चे बाहर विदेश में सैटल हैं. खुश थी कि बूढ़ाबूढ़ी पिछले 15 वर्षों से बिना रोकटोक के आनंद से जी रहे थे.

 

बृज को हार्टअटैक हुआ था और चुपचाप चल बसा. अस्पताल ने पूरा एक दिन रोक लिया और रात को उस की मृत्यु घोषित की. पड़ोसी माथुर ने अस्पताल में दो चक्कर लगा कर चायखाना ममता को दिया.

दो पड़ोसी और भी ममता से हालचाल पूछने आ गए. नहीं था तो कोई अपना. जिस आजादी को वह अपनी जीत समझती थी, वह आज पराजय थी. ममता ने बच्चों को सूचना दी. बच्चे सात समुंदर पार से सिर्फ सांत्वना ही दे सकते थे. कोई इस संकट की घड़ी में उस की मदद के लिए सात समुंदर पार से उड़ कर आ नहीं सकता था. पड़ोसी अवश्य उन के संग खड़े थे. पड़ोसियों संग रोतीबिलखती ममता घर आ गई.

ममता ने बच्चों को फोन किया. बड़े बेटे गौरव ने आने का तुरंत कार्यक्रम बनाया. किसी भी हालत में वह 2 दिनों से पहले नहीं आ सकता था.

ममता और बृजमोहन, दोनों की बहनें शहर में रहती थीं, वे ममता के पास पहुंचीं और सांत्वना दी.

रात के अंधेरे में ममता अपने बिस्तर पर लेटे रोती जा रही थी. ऐसा तो नहीं सोचा था. ऐसा समय अचानक से आ जाएगा और कोई अपना साथ नहीं होगा. बहनें भी सिर्फ दिखावे के आंसू बहा रही थीं.

ममता चिल्लाए जा रही थी, ‘‘इतना बड़ा परिवार है, बच्चे पास नहीं. भाई, बहन, कोई सगा नहीं. क्या जमाना आ गया है? मुसीबत की घड़ी में सिर्फ नाममात्र का दिखावा. हिम्मत देने वाला कोई बच्चा भी नहीं है. ऐसा तो नहीं सोचा था. आगे का जीवन कैसे कटेगा?’’

रात के सन्नाटे में ममता की आवाज बहनों के कानों में पड़ रही थी, लेकिन वे मन ही मन मुसकरा रही थीं, यहां अकेले रह कर खूब मजे लिए. हम पर रोब झाड़ती थी कि बच्चे डौलर भेज रहे हैं. डौलर के साथ रहो. कितनी बार कहा था, बच्चों के साथ अमेरिका रह लो लेकिन आजाद जीवन प्यारा था. हम क्या करें? हमारा नाता तो केवल श्मशान तक है. उस के बाद इस नखरैल के साथ कौन रहेगा? बुढ़ापे में भी पूरी आजादी चाहिए. बच्चों संग नहीं रहना. हर किसी पर रोब झाड़ना है.

 

तीसरे दिन उस का बेटा गौरव अमेरिका से आया. उस की बहू और परिवार का अन्य सदस्य नहीं आया. सीधे एयरपोर्ट से अस्पताल. मृत देह को श्मशान ले जा कर अंतिम संस्कार किया. घर पहुंच कर ममता से कहा-

‘‘चलो मां, मेरे साथ चलो. मैं टिकट ले कर आया हूं. तुम्हारा वीजा अभी एक महीने तक वैध है. वहां बढ़ जाएगा.’’

‘‘क्रिया यहां कर ले, फिर चलती हूं.’’ ममता की आंखों से गंगाजमुना बह रही थी. वह बस यही बुदबुदा रही थी, ‘ऐसा तो नहीं सोचा था. आजादी चली जाएगी. अकेली रह जाऊंगी. मालूम नहीं, अमेरिका में बच्चे कैसा व्यवहार करेंगे.’

 

 

 

 

 हिप्पोक्रेट को सबक : नासमझ शिकारी के शिकार होने की कहानी

नेहा की शादी में हैसियत से ज्यादा खर्च हुआ तो उस के पिता भारी कर्ज में डूब गए. बावजूद इस के एक दिन नेहा ने पिता की संपत्ति में बंटवारे का कानूनी नोटिस भिजवा दिया. बेटी की इस हरकत से पिता सतीश राय सन्न रह गए.

 

उस शिकार की कोई कीमत नहीं, जो आसानी से पकड़ में आ जाए. ऐसे शिकार को पकड़ कर तो शिकारी भी खुद को लज्जित महसूस करता है. गुलदारनी जब तक शिकार का जबरदस्त पीछा कर के उस के गले को अपने जबड़ों में न दबोच ले, उसे शिकार करने में मजा नहीं आता. इस के बाद जब वह उस शिकार की गरदन को अपने पैने दांतों से भींच कर और खींच कर पेड़ पर ले जाती है तो गर्व से उस का सीना कई गुना चौड़ा हो जाता है. यह शान होती है बेखौफ गुलदारनी की.

 

नेहा का एलएलबी करने का यही उद्देश्य था कि वह बेखौफ हो कर जिए. वह वकालत के माध्यम से अपने विरोधियों को कटघरे में खड़ा कर सके. वह चाहती तो ज्यादातर लड़कियों की तरह बीटीसी या बीएड का प्रोफैशनल कोर्स कर के किसी स्कूल में मास्टरनी बन सकती थी लेकिन उस की फितरत में यह नहीं था. उस के अंदर तो चालाकी कूटकूट कर भरी हुई थी. आसान जिंदगी जीना उस की फितरत में नहीं था. ऐसा लगता था जैसे चालाकी के बिना नेहा जिंदा ही नहीं रह सकती. जो काम वह बिना चालाकी के कर सकती थी, उस में भी वह चालाकी दिखाने से बाज नहीं आती थी.

 

कालेज लाइफ से नेहा ऐसी ही थी. जराजरा सी बात पर वह अपने विरोधियों की शिकायत ले कर प्रिंसिपल औफिस पहुंच जाया करती थी. घर में वह अपने छोटे भाई नीरज की एक न चलने देती थी. मम्मीपापा को तो जैसे उस ने अपनी मुट्ठी में कैद कर रखा था. अपनी जिद से वह घर में अपनी सारी मांगें मनवा लेती थी.

 

जब नेहा शादी के लायक सयानी हुई तो उस के लिए योग्य लड़का तलाश किया जाने लगा. इस में भी उस की पूरा दखल रहा. उस ने नामी वकील के नामी वकील लड़के को पसंद किया. जब दहेज की बात आई तो लड़के वालों ने बस इतना कहा, ‘‘हमें दहेज में कुछ नहीं चाहिए, बस बरातियों की दावत अच्छे से कर देना.’’

 

यह सुन कर नेहा ने अपने पापा से बिफरते हुए कहा, ‘‘पापा, मुझे लगता है कि मेरे ससुराल वाले बेवकूफ हैं. बिना दहेज के क्या मैं खाली हाथ ससुराल जाऊंगी?’’

 

‘‘नेहा, तुम्हें कौन खाली हाथ ससुराल भेज रहा है? कुदरत का दिया हमारे पास सबकुछ है. हम अपनी बेटी को वह सबकुछ देंगे जो एक बेटी को शादी के समय दिया जाता है,’’ पापा ने कहा.

 

‘‘और हां पापा, गाड़ी मुझे कम से कम 20 लाख वाली चाहिए. आखिर आप की वकील बेटी की भी तो कोई शान है. वह शान किसी भी सूरत में कम नहीं होनी चाहिए.’’

 

‘‘बिलकुल नेहा बेटा, कार के शोरूम में तुम मेरे साथ चलना, जिस गाड़ी पर तुम हाथ रख दोगी, वह गाड़ी तुम्हारी. आखिर हमारी एक ही तो बेटी है जिसे हम ने इतने नाजों से पाला है. अगर हम उस की ख्वाहिशें अब पूरी नहीं करेंगे तो कब करेंगे?’’

 

‘‘ओह, माई गुड डैड,’’ यह कहते हुए नेहा ने प्यार से अपनी बांहें अपने पापा के गले में डाल दीं.

 

नेहा के पापा सतीश राय ने नेहा की शादी में अपने वजूद से ज्यादा खर्च कर डाला. नेहा की मम्मी कहती रही, ‘‘नेहा के पापा, शादी में इतना अनापशनाप खर्च मत करो. बुढ़ापे का शरीर है कर्ज कहां से चुकाओगे?’’

 

लेकिन सतीश राय तो ऐसे लगते थे जैसे अपनी लाड़ली बिटिया की सारी ख्वाहिशें इसी अवसर पर पूरी कर डालना चाहते हों. शादी का 30 लाख का बजट 40 लाख के पार पहुंच गया. नेहा की ख्वाहिशें सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती ही जा रही थी.

 

आखिरकार नेहा की शादी का काम पूरा हुआ. वह खूब सारे दहेज और चमचमाती गाड़ी में बैठ कर शान से अपनी ससुराल पहुंच गई. नेहा के पापा सतीश राय और भाई नीरज ने राहत की सांस ली. इस शादी के बाद वे 12 लाख के कर्ज के तले दब चुके थे. उन की शहर में अच्छी प्रतिष्ठा के कारण इतना कर्ज मिल भी गया था. लेकिन कर्ज तो कर्ज होता है और उसे एक दिन चुकाना ही पड़ता है. कर्ज देने वाला जब मांगने पर उतारू होता है तो फिर वह किसी बात का लिहाज नहीं करता. सरेआम पगड़ी उछालता है.

 

 

सतीश और नीरज को लगता था कि वे 2-3 साल में व्यापार में अतिरिक्त प्रयास कर के सारा कर्ज चुका देंगे, लेकिन कर्ज ऐसी चीज होता है जो उतरने का नाम ही नहीं लेता.

 

नेहा ससुराल में ठाट के साथ रह रही थी. उस के पति नकुल और ससुर की तो अच्छी आमदनी थी ही, नेहा के ससुर ने उस का केबिन भी अपने पास ही खुलवा लिया था. नेहा के पास अपने पति और ससुर की बदौलत अच्छे केस आने लगे थे.

 

नेहा की एक ननद थी विभा, वह भी शादी के लायक हो गई थी. उस के लिए भी लड़का तलाश किया जा रहा था. लड़का मिलते ही शादी तय हो गई. विभा सुसंस्कारित लड़की थी. महत्त्वाकांक्षा उस के आसपास भी नहीं फटकती थी. नकुल अपनी बहन विभा की शादी भी ऐसे ही ठाटबाट से करना चाहता था जैसे उस की खुद की शादी हुई थी. विभा की ससुराल वालों की भी कोई डिमांड नहीं थी. विभा नेहा के बिलकुल उलट थी, उस ने अपने भाई और पिता पर किसी भी चीज के लिए कोई दबाव नहीं बनाया.

 

 

विभा जानती थी कि मांबाप अपनी बेटी की शादी में अपनी हैसियत से ज्यादा ही खर्च करते हैं. लेकिन उसे क्या पता था कि उस की भाभी नेहा उस की शादी में होने वाले हर खर्च में अड़ंगा डाल रही थी. नेहा को विभा की शादी में खर्च हो रहा एकएक पैसा खटक रहा था. उस का बस चलता तो वह विभा की शादी में एक भी पैसा खर्च न होने देती. जितना बजट था उस से कम में ही विभा की शादी हो गई. इस के लिए सब नेहा की तारीफ कर रहे थे लेकिन विभा अपनी भाभी नेहा की चालाकी ताड़ गई थी. नेहा ने आवश्यक चीजों पर भी खर्च नहीं होने दिया था. इस का परिणाम यह हुआ कि विभा को ससुराल में पहुंचते ही महिलाओं के कितने ही उलाहने सुनने को मिले. विभा चुपचाप सब झेल गई. वह जानती थी कि यह सब उस की भाभी नेहा के लालच के कारण हुआ.

 

उधर नेहा को लग रहा था कि भैयादूज और रक्षाबंधन के त्योहार कुछ फीके चल रहे हैं. उसे इस बात से कोई लेनादेना नहीं था कि कर्ज के कारण उस के भाई नीरज का हाथ तंग है. जब इस बार नीरज ने नेहा को रक्षाबंधन पर 2100 शगुन में दिए तो इतने कम पैसे देख कर वह बिफर पड़ी, ‘‘नीरज, तुझे शर्म नहीं आती, इकलौती बहन की रक्षाबंधन पर इस तरह बेइज्जती करने में. जितने का तुम ने शगुन दिया है. इस से ज्यादा का तो मैं अपनी कार में पैट्रोल डलवा कर आई हूं. इतनी संपत्ति का मालिक बन बैठा है और बहन को शगुन के नाम पर भीख सी पकड़ा देता है. यह मत भूल इस जायदाद में मेरा भी आधा हिस्सा है.’’

 

 

नेहा के मम्मीपापा ने अपनी लाड़ली बिटिया को खूब समझाया. शगुन भी तुरतफुरत में 11,000 कर दिया. लेकिन नेहा का दिमाग शांत ही नहीं हो रहा था. उस को लगता था कि नीरज ने जानबूझ कर उस का अपमान किया है और नेहा को अपमान कहां बरदाश्त?

 

नेहा कानून की जानकार तो थी ही. वह अपने भाई नीरज को अच्छा सबक सिखाना चाहती थी. उस ने संपत्ति में हिंदू बेटी के अधिकार की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी. इस की भनक उस ने अपने ससुराल वालों को भी न लगने दी.

 

नेहा के पापा को जैसे ही नेहा की ओर से संपत्ति के बंटवारे का नोटिस मिला, उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन की जबान तालू से लग गई. उन को नेहा से यह उम्मीद तो कतई नहीं थी कि वह उन के जिंदा रहते, उन की जायदाद में आधा मालिकाना हक का दावा ठोकेगी.

 

जब नेहा को किसी प्रकार बात करने के लिए राजी किया गया तो वह बोली, ‘‘पापा, मैं संपत्ति में अपना अधिकार ही तो मांग रही हूं. भारत का कानून हिंदू बेटी को प्रौपर्टी में बराबर का हक प्रदान करता है. मैं वही तो मांग रही हूं.’’

 

‘‘लेकिन नेहा, यह तो सोचो कि हम ने तुम्हारी शादी में तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने के लिए इतना खर्च कर दिया कि अभी भी हम कर्ज तले डूबे हैं.’’

 

‘‘तो क्या पापा, आप मुझे पालने और मेरी पढ़ाई पर होने वाले खर्च का भी एहसान दिखाओगे. यह तो हर मांबाप का कर्तव्य होता है कि वह अपनी संतान को पढ़ाए और अच्छे घर में उस की शादी करे. इस में कौन सी एहसान की बात है?’’

 

‘‘लेकिन नेहा, यह तो सोच कि आधी प्रौपर्टी तुम्हें मिलने के बाद तुम्हारे भाई नीरज के पास बचेगा ही क्या? यह तो सोच वह तेरा भाई है और हर समय तेरी मदद के लिए खड़ा रहता है.’’

 

‘‘मदद… पापा, आप? इसे मदद कहते हो. भूल गए आप कि उस ने रक्षाबंधन पर मुझे शगुन में क्या दिया था. क्या मेरी औकात अब 2100 की रह गई है? मैं पहले ही बता चुकी हूं कि इस से ज्यादा का तो मैं अपनी कार में तेल डलवा लेती हूं, मिठाई के डब्बे का खर्च अलग. और अगर नीरज रिश्ते नहीं निभा सकता तो न निभाए, मुझे कौन से रिश्ते निभाने और बेइज्जती करवाने की पड़ी है. अगर वह अपनी बहन का सम्मान नहीं कर सकता तो भुगते. आप क्यों परेशान होते हैं, आप के लिए तो ऐसा ही नीरज और ऐसी ही मैं. वैसे भी आप के पैर अब कब्र में लटक रहे हैं, मेरा हिस्सा मुझे दे कर चिंतामुक्त हो जाइए.’’

 

नेहा का अंतिम वाक्य सतीश राय को कांटे की तरह चुभा. कोई भी संतान अपने बाप को इतनी कड़वी बात कैसे कह सकती है? नेहा से आगे बात करना अपनेआप को और जलील करवाना ही था. उन्होंने फोन काट दिया. उम्र का तकाजा कह रहा था कि कोई ठोस निर्णय करना ही पड़ेगा. वकील कानून की भाषा में होशियार हो सकता है, अनुभव में नहीं.

 

नेहा ने एक वकील कर लिया जिस ने पहले तो आधा हिस्सा दिलवाने में चूंचूं की पर जब नेहा अड़ गई तो नोटिस भेज दिया गया. 10-12 तारीखों और गवाहियों  के बाद औरग्यूमैंट हुए तो नेहा की तरफ से वकील ने आधी प्रौपर्टी की मांग की तो दूसरे वकील ने कहा कि उन के मुवक्किल यह एक फैमिली सैटलमैंट में करने को तैयार है

 

जज साहब समझदार थे. उन्होंने मान लिया और 2 माह बाद फैसले के लिए बुलाया.

 

 

अदालत जब अपना निर्णय नेहा के पक्ष में सुना रही थी तभी सतीश राय ने अदालत से निवेदन किया, ‘‘जज साहब, फैमिली सैटलमैंट के अनुसार नेहा को मेरी प्रौपर्टी का आधा हिस्सा मिल गया है. मेरा अदालत से निवेदन है कि मेरी और मेरी पत्नी के बुढ़ापे को देखते हुए साल में 6 महीने मेरी बेटी नेहा हमारी देखभाल करे. यह संतान का अपने बुजुर्ग मातापिता के प्रति कर्तव्य है. इसलिए मैं ने अपने पास कुछ नहीं रखा है.’’

 

जज साहब ने कहा, ‘‘अदालत यह फैसला लेती है कि बुजुर्ग मातापिता की सेवा करने का अधिकार जितना बेटे का है उतना ही बेटी का भी. नेहा को आधी प्रौपर्टी मिल चुकी है तो आज से ठीक 6 महीने बाद नेहा 6 महीने तक अपने बुजुर्ग मातापिता की सेवा करेगी और इस में किसी प्रकार की कोई कोताही न बरती जाए. यह बात सैटलमैंट में जोड़ दी जाए.’’

 

 

जज साहब ने बातोंबातों में स्पष्ट कर दिया कि नेहा अगर यह नहीं मानती तो वे मामले को महीनों के लिए टाल देंगे. फैमिली सैटलमैंट में यह लिखवा लिया गया.

 

भाई के वकील ने जज साहब से यह भी कह दिया था कि पुश्तैनी संपत्ति होने पर भी नेहा केवल एकतिहाई की हिस्सेदार है क्योंकि अभी पिता जिंदा हैं. जज ने उसी बूते पर फैमिली सैटलमैंट कराया ताकि पिता के मरने के बाद फिर मुकदमेबाजी न हो.

 

नेहा ने कभी अपने सासससुर की सेवा तो की नहीं थी, मांबाप की सेवा करना तो उस की कल्पना में भी नहीं था. वह तो बस अपने पापा की आधी प्रौपर्टी की मालकिन बन अपना रुतबा बढ़ाना चाहती थी.

 

नदी के उफनते पानी को देख कर जितना डर लगता है उतना नदी में कूदने से नहीं. नेहा को हरदम यही डर सताने लगा कि घर में पहले से ही 2 बुजुर्ग हैं जिन की देखभाल ठीक से नहीं हो पाती, 2 और बुजुर्गों के आने से घर का क्या हाल होगा. किसी बुजुर्ग की सेवा करना किसी बच्चे को पालने से कम नहीं होता. उन को समय पर दवाई देना, उन के लिए नाश्तापानी तैयार करना, बीमार होने पर उन को टौयलेट तक ले जाना, उन को नहलाना, कपड़े बदलना वगैरा.

 

 

4 बुजुर्गों की सेवा की बात सोच कर ही नेहा सिहर उठती. मानसिक तनाव सिरदर्द और बेचैनी पैदा करता. छोटीछोटी बातों को ले कर वह हर किसी से झगड़ने लगती. अपने पति नकुल से तो उस की खटपट इतनी बढ़ गई कि वह अलग कमरे में जा कर सोने लगी. नकुल उस को जितना समझता, वह उतनी ही चिड़चिड़ी, परेशान और उग्र हो उठती.

 

नकुल ने नेहा को समझाते हुए कहा, ‘‘नेहा, तुम्हारी यह बड़ी गलती है कि तुम ने हम से बिना सलाहमशविरा किए अपने पिता की प्रौपर्टी में आधा हिस्सा मांग लिया. तुम ने यह नहीं सोचा कि तुम्हारी ससुराल की प्रौपर्टी में तो तुम्हारा 100 प्रतिशत हिस्सा है ही. नेहा यह सबकुछ तुम्हारा ही तो है. लेकिन अगर तुम्हारी तरह मेरी बहन और तुम्हारी ननद विभा भी ऐसे ही हमारी प्रौपर्टी पर आधे का दावा ठोंक दे तब क्या होगा? हम तो कहीं के भी नहीं रहेंगे.’’

 

लेकिन नेहा खुद को इतनी बड़ी चतुर सुजान समझती थी कि जैसे सारा कानून उस ने खरीद कर अपनी जेब में रख लिया हो.

 

जब विभा को यह पूरी खबर मिली कि कैसे उस की भाभी नेहा ने अपने बुजुर्ग मातापिता की आधी प्रौपर्टी अधिकार के नाम पर हथिया ली है तो उसे वे सब बातें भी याद आने लगीं कि नेहा भाभी ने किस तरह से उस की शादी में होने वाले खर्च में कटौती करवाई थी और इसी कारण उसे ससुराल में महिलाओं के कैसे ताने सुनने पड़े थे जबकि नेहा भाभी ने अपनी शादी में अपनी ख्वाहिशें पूरी करने के लिए अपने पापा और भाई को कर्जे में डुबो दिया था जिस से वे अभी तक उबर भी नहीं पाए थे कि उन की अधिकार के नाम पर आधी संपत्ति हड़प ली.

 

जब विभा ने अपने पति आकाश से इस संबंध में बात की तो आकाश ने बड़ी सम?ादारी दिखाते हुए कहा, ‘‘विभा, रिश्तों में थोड़ाबहुत ऊंचनीच चलता रहता है. नेहा ने जो कुछ किया वह उन की व्यक्तिगत सोच का मामला है.

 

 

हम ने तो तुम्हारे परिवार वालों से कभी कुछ नहीं मांगा और न ही हमें कोई शिकायत है. हम तो अपने दम पर कमाने और आगे बढ़ने में विश्वास करते हैं. किसी के देने से आज तक किसी का पेट भरा है क्या? हम चैन से जीते हैं और सुख की नींद सोते हैं. हम ने तो यह सुना है कि नेहा को नींद की गोलियों का सहारा लेना पड़ रहा है.’’

 

‘‘लेकिन आकाश, यह तो नेहा की पूरी हिप्पोक्रेसी है कि वह खुद तो कानून और अधिकार के नाम पर सबकुछ छीन लेना चाहती है और दूसरों को कुछ देना ही नहीं चाहती. ससुराल की सारी प्रौपर्टी उस की और मायके से भी आधी प्रौपर्टी ले ली. क्या नेहा जैसी हिप्पोक्रेट को सबक नहीं सिखाया जाना चाहिए?’’

 

‘‘मैं समझ नहीं तुम नेहा को क्या सबक सिखाना चाहती हो?’’ आकाश ने पूछा.

 

‘‘देखो आकाश, मुझे अपने मायके की प्रौपर्टी का रत्तीभर भी लालच नहीं. लेकिन नेहा भाभी ने जिस तरह से अपने बुजुर्ग मातापिता और युवा भाई को परेशान कर के रखा हुआ है वह मुझ से देखा नहीं जाता.’’

 

‘‘मतलब, तुम यह चाहती हो कि तुम भी आधी प्रौपर्टी पाने के लिए अपने पापा को नोटिस भेजो.’’

 

‘‘बिलकुल आकाश, तुम ने सही सोचा. ऐसा करने पर ही नेहा भाभी की अक्ल ठिकाने आएगी.’’

 

‘‘लेकिन ऐसा करने पर तो तुम्हारा सम्मान अपने मातापिता और भाई की नजरों में खत्म हो जाएगा.’’

 

‘‘आकाश, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. जिस प्रौपर्टी पर मैं मात्र दावा ठोंकने जा रही हूं, वह उस प्रौपर्टी से बहुत ज्यादा है जो नेहा भाभी ने अपने मांबाप से हथियाई है. निश्चित मानो आकाश, लालची नेहा भाभी कोर्ट का नोटिसभर देख कर बौखला जाएगी. मेरा इरादा प्रौपर्टी लेने का कतई नहीं है, बस एक घमंडी हिप्पोक्रेट को सबक सिखाना है. उस ने अपने लालच और घमंड के कारण कितने लोगों को बेवजह परेशानी में डाल दिया है. अब तो कर्ज में डूबे बेचारे नीरज की शादी होनी भी मुश्किल हो रही है.’’

 

 

आखिर आकाश विभा का साथ देने के लिए इसलिए तैयार हो गया कि उस के मन में कोई कपट नहीं था.

 

जैसे ही विभा का नोटिस उस के मम्मीपापा को मिला सारे घर में कुहराम मच गया. कोई विभा पर यह आरोप भी नहीं लगा सकता था कि उस ने यह नोटिस क्यों भिजवाया. जब नेहा ने ऐसा किया था तो किसी ने उस का कोई मुखर विरोध नहीं किया था. अब उन्हें अपनी करनी को भरना था.

 

उधर 6 महीने पूरे होने को थे और नेहा के मम्मीपापा बोरियाबिस्तर बांध कर उस के घर आने को तैयार बैठे थे. नेहा को अब कुछ समझ में नहीं आ रहा था. ऐसा लगता था जैसे उस की सोचनेसमझने की शक्ति जवाब देने लगी हो.

 

मुसीबतों पर मुसीबत. नकुल उसे मनोचिकित्सक के पास ले कर गए. मनोचिकित्सक ने साफसाफ बता दिया, ‘‘नकुल, नेहा इस से ज्यादा तनाव

 

नहीं ? झेल सकती है. दवाएं एक हद तक ही काम करती हैं. नेहा का मानसिक तनाव कम करने के लिए जल्दी कुछ करो.’’

 

 

नकुल को सारी बातें समझ में आ रही थीं. उन्होंने ही समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए पहल की. वह खुद एक अच्छे वकील थे. वह जानते थे कि कई समस्याओं का हल कोर्टकचहरी के चक्कर काटने के बजाय आपस में मिलबैठ कर निकाला जा सकता है.

 

उन्होंने अपने सासससुर और साले के साथ बैठ कर बातें कीं. नेहा को उन की प्रौपर्टी वापस करने के लिए राजी किया. नीरज की उस का कर्ज उतारने में मदद की.

 

इस के बाद अपनी बहन विभा और बहनोई आकाश से बात की. विभा ने बात शुरू होने से पहले ही अपने भाई नकुल की खुशियां दोगुनी करते हुए कहा, ‘‘भैया नकुल, मैं ने प्रौपर्टी पर दावे का नोटिस वापस ले लिया है, यह देखो.’’

 

नकुल की आंखों में खुशी के आंसू छलछला आए थे. उन्होंने रोंआसे होते हुए कहा, ‘‘फिर पगली तुम ने ऐसा किया ही क्यों था?’’

 

‘‘भैया, अगर मैं ऐसा नहीं करती तो यह सारी समस्याएं कैसे खत्म होतीं. नेहा भाभी का घमंड, लालच और हिप्पोक्रेसी कैसे खत्म होती. कानून तो भैया हमारी रक्षा के लिए है, हमें सब बातों को ध्यान में रख कर कानूनों का सदुपयोग करना चाहिए.’’

 

नेहा को भी यह बात अच्छे से समझ में आ गई थी कि उस से बहुत बड़ी गलती हो गई थी. ऐसे ही सब एकदूसरे से प्रौपर्टी मांगने लगें तो हर घर में महाभारत और मुकदमेबाजी हो. हिंदू बेटियों को ससुराल में प्रौपर्टी का अधिकार खुद ही मिल जाता है. मायके में कोई वारिस न हो तो बेटी ही प्रौपर्टी की वारिस होती है. फिर यह उछाड़पछाड़ क्यों?

 

गुलदारनी जिस भारीभरकम शिकार को ले कर बड़े घमंड के साथ पेड़ पर चढ़ी थी वह इतनी जोर से गिरा कि गुलदारनी उसे बचाने के चक्कर में जख्मी हो गई. उसे समझ में आ गया था कि बहुत भारी शिकार जानलेवा भी साबित हो जाते हैं.

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