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ऐसे पाएं डिफरैंट लुक

आप अपनी मेकअप किट में उपलब्ध प्रोडक्ट्स से भी डिफरैंट मेकअप कर सकती हैं. आइए जानें, ला लियोना की मेकअप ऐक्सपर्ट अरुणा ढाका से मेकअप के कुछ नए ट्रिक्स:

ग्लौसी मेकअप

फेस: मेकअप करने से पहले स्क्रबिंग और क्लींजिंग जरूर करें. अगर आप ने पहले से फेशियल करा रखा है, तो सिर्फ क्लीनिंग करें. आप का फेस ड्राई न लगे और मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहे, इस के लिए किसी अच्छी कंपनी का मौइश्चराइजर लगाएं. महिलाएं मौइश्चराइजर या कोई भी ब्यूटी प्रोडक्ट हाथों में रब कर लगाती हैं, जबकि इसे लगाने का भी एक तरीका होता है. हाथों में रब करने के बजाय उसे फेस पर लगा कर मिक्स करें. इस से फेस पर वह सही तरह से अप्लाई भी होगा और लगेगा भी कम.

अब फेस पर ग्लौसी फिनिशिंग के लिए स्ट्रोक क्रीम लगाएं. स्ट्रोक क्रीम लगाने के बाद ब्रश से फाउंडेशन लगा कर मिक्स करें. कभी उंगलियों से फाउंडेशन सैट न करें. इस के लिए हमेशा ब्रश या गीले स्पौंज का प्रयोग करें. इस के बाद ट्रांसपैरेंट पाउडर लगाएं. इसे लगाने का सही तरीका है पफ से प्रोडक्ट ले कर हाथ पर थपथपाएं और फिर चेहरे पर लगाएं. अंत में चेहरे को स्मूद लुक देने के लिए प्रैसिंग पाउडर लगाएं और ब्रश से अच्छी तरह मिक्स करें.

आई मेकअप: नौर्मल आई मेकअप तो सभी करती हैं, पर पार्टी में थोड़ा डिफरैंट व स्टाइलिश दिखना है, तो स्मोकी आई मेकअप करें. स्मोकी आई मेकअप करने से पहले आंखों पर आईप्राइमर अप्लाई करें. यह आईशैडो को ब्लौक करता है. इसे लगाने के 1-2 मिनट बाद आईब्रोज की शेपिंग करें. आजकल मोटी आईब्रोज का फैशन इन है. वैसे भी जब तक आईब्रोज को उभारा नहीं जाता तब तक आई मेकअप अट्रैक्टिव नहीं लगता. आईब्रो पैंसिल से आईब्रोज को डार्क करते हुए एक शेप दें. ध्यान रहे एक ही जगह पर ज्यादा न घिसें. कुछ महिलाएं ऐसा भी करती हैं कि जिस स्थान पर उन की आईब्रो कम होती है वहां ज्यादा घिसती हैं. यह गलत है. एक ही जगह घिसने के बजाय पूरी आईब्रो पर एक समान लगाएं.

आईब्रोज की शेपिंग के बाद आंखों को हाईलाइट करने के लिए आईब्रोज के नीचे फाउंडेशन की एक पतली लाइन लगाएं. अब आंखों पर लाइनर लगाएं. लाइनर पतला नहीं, बल्कि मोटा होना चाहिए ताकि आंखों पर स्मोकी इफैक्ट आ सके. लाइनर लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आगे के पौइंट को छोड़ दें. इस के बाद ब्रश से एजेज को स्मज करें यानी लाइनर को जल्दीजल्दी स्मज करें, क्योंकि जैल लाइनर जल्दी सूख जाता है. इस के बाद चौकलेटी शेड का आईशैडो लगा कर ब्रश से ब्लैंडिंग करें. अब आईशैडो पाउडर लगाएं. यह बेस को लौक करता है. अगर कहीं पर एजेज आ जाएं तो गोल्डन शैडो से स्मज करें. इस के बाद आंखों में काजल लगाएं. काजल अंदर की तरफ न लगाएं, बल्कि बाहर की तरफ फ्रंट ऐंड बैक स्टाइल में लगाएं. इस से आंखों में पानी नहीं आता. अगर आंखों में पानी आ जाए तो आंखों के किनारों पर इयरबड लगाएं. यह पानी सोख लेता है. आई मेकअप में काजल और लाइनर जितना ज्यादा ब्लैक होगा मेकअप उतना ही अट्रैक्टिव लगेगा. इसीलिए काजल के ऊपर जैल लाइनर लगाएं.

लिप: आंखों पर आप स्मोकी मेकअप कर रही हैं, तो लिप्स पर हलकी ग्लौसी लिपस्टिक लगाएं. यह आप को सैक्सी लुक देगी. इस के लिए लिपलाइनर से लिप की आउटलाइनिंग करें. इस के बाद आप चाहें तो लिपलाइनर से ही पूरे लिप पर लिपस्टिक लगा सकती हैं या फिर ड्रैस से मैचिंग लिपस्टिक का चुनाव कर सकती हैं.

पार्टी मेकअप

फेस: फेसवाश करने के बाद उस पर अच्छी क्वालिटी का मौइश्चराइजर लगाएं. मौइश्चराइजर के बाद प्राइमर लगाएं. आंखों के नीचे के डार्कसर्कल्स को मेकअप से आसानी से छिपाया जा सकता है. अगर आप की आंखों के नीचे डार्कसर्कल्स हैं, तो उन्हें कंसीलर से कंसील करें. कभी फाउंडेशन को अंडरआई न लगाएं. प्रोडक्ट लगाने के बाद स्पौंज से मिक्स करें. इस के बाद यलो और कैसिनो टोन क्रीम मिक्स कर के फेस पर लगाएं और ब्रश से ही डैब करें. अब ट्रांसपैरेंट पाउडर लगाएं. फिर चेहरे को स्मूद लुक देने के लिए प्रैसिंग पाउडर लगाएं.

आई मेकअप: आई मेकअप शुरू करने के लिए आंखों पर आई बेस लगाएं. इस के बाद जैल लाइनर से बेस बनाएं. अब शौकेट एरिया पर शैडो से ‘वी’ शेप बनाएं और मर्ज करें. फिर ब्लैक लाइनर के ऊपर पिगमैंट लगाएं.

जैल लाइनर से आई शेपिंग करें. एजेज को हमेशा शार्प रखें. अगर आईब्रोज पतली हैं तो हाईलाइटर से हाईलाइट करें. अब आईलैशेज को लैश कर्लर से कर्ल करें. फिर जिगजैग स्टाइल में मसकारा लगाएं. अगर आप की आईलैशेज छोटी हैं तो आर्टिफिशियल आईलैशेज लगाएं. फिर से मर्ज करने के लिए शैडो लगाएं. अंत में गोल्डन ग्लिटर आंखों पर लगाएं.

लिप: लिपस्टिक लगाने से पहले लिप्स पर मौइश्चराइजर लगाएं. आप चाहें तो वैसलीन भी लगा सकती हैं. लेकिन वैसलीन के ऊपर ही लिपस्टिक न लगाएं. कौटन से वैसलीन साफ करने के बाद ही लिपस्टिक लगाएं.  

टिप्स

  1. कभी मेकअप में फेयर स्किन को और भी ज्यादा फेयर दिखाने की कोशिश न करें. इस से मेकअप सही नहीं लगता. फेयर स्किन के लिए बेस हमेशा टोन टु टोन रखें.
  2. सांवले रंग को गोरा करने के लिए यलो टोन का प्रयोग करें.
  3. टोन अप ऐंड डाउन करना हो तो क्रीम कंसीलर का प्रयोग करें.
  4. आई मेकअप के लिए हमेशा जैल लाइनर का इस्तेमाल करें.
  5. प्रोडक्ट को कभी भी हाथों में रब न करें. इस से प्रोडक्ट बरबाद होता है. प्रोडक्ट लगाने के लिए ब्रश का इस्तेमाल करें.

घूरना तकलीफ देता है

हमारे देश में सड़क हो या सिनेमाघर, बाजार हो या दफ्तर कुछ नजरें हर वक्त महिलाओं और लड़कियों का पीछा करती हैं. चौकचौराहे पर बैठे लड़के आतीजाती महिलाओं को तब तक घूरते रहते हैं जब तक वे उन की नजरों से ओझल नहीं हो जातीं. सरेराह महिलाओं को एक वस्तु समझ कर जब पुरुष घूरते हैं, फबतियां कसते हैं तो वे इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाते कि उन की गंदी नजरों का सामना करने वाली लड़की के दिलोदिमाग पर क्या गुजर रही होगी. दरअसल, महिलाएं जिसे घूरना कहती हैं पुरुष उसे निहारना कहते हैं. लेकिन पुरुषों का वह निहारना महिलाओं को लगता है जैसे वे बदन पर गड़ी आंखों से बलात्कार कर रहे हों.

हाल ही में प्रदर्शित फिल्म ‘फितूर’ में भी जब आदित्य राय कपूर कैटरीना को देखता है तो वह कहती है, ‘‘घूरना बंद करो.’’ पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘वूमन औफ वर्थ कौन्क्लेव’ में पत्रकार रवीश कुमार के साथ ‘हम जिस तरह से देखने के आदी हैं’ विषय पर चर्चा हुई. इस चर्चा में रवीश कुमार ने कहा, ‘‘लड़की देखी जाती है, लड़की देखना सिखाया जाता है. राह चलती लड़की को हजार तरह की निगाहों से गुजरना पड़ता है. किस ने लड़कों को इस तरह देखना सिखाया? कोई घर में बड़े हो रहे लड़कों को क्यों नहीं सिखाता कि लड़कियों को किस तरह देखना है? क्या इस में कहीं पारिवारिक परिवेश जिम्मेदार होता है? क्या परिवारों में लड़कों को लड़कियों के मुकाबले अतिरिक्त छूट मिलती है?’’

इस ताड़ने, देखने, घूरने, ताकने को कैसे रोका जा सकता है आदि सवालों के जवाब इस कौन्क्लेव तलाशे गए. ‘हम जिस तरह से देखने आदी हैं’ विषय पर अभिनेत्री शबाना आजमी का कहना था कि इस समस्या की जड़ में पितृसत्तात्मक मानसिकता है, जहां पुरुषों को महिलाओं से बेहतर दिखाया जाता है. एक पुरुष सिर्फ अपनी मां को अच्छी निगाह से यानी सम्मान की नजर से देखता है. लेकिन वह घर से बाहर की महिलाओं को मां, बहन, बेटी की नजर से नहीं देखता.

दरअसल, निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे सुर्खियों में जरूर आए, लेकिन आखिरकार जो मुद्दा उभर कर सामने आया, वह यही है कि महिलाओं को आज भी सुरक्षा की जरूरत है. आज की युवती, आज की महिला पहननेओढ़ने, घूमनेफिरने की आजादी चाहती है. आज भी अगर वह मर्द के द्वारा तय किए गए दायरे में है तो सुरक्षित है और अगर वह शराब, सिगरेट पीए, मिनी स्कर्ट पहन कर सड़क पर निकले तो फौरन उसे लूज कैरेक्टर का दर्जा दे दिया जाता है. कहा जाता है कि वह खुद को औब्जैक्टिफाई कर रही है. उस के लिए कहा जाता है कि वह ऐसा कर के पुरुषों को आकर्षित कर रही है. निर्भया कांड के बाद जो स्लोगन सामने आया वह है ‘शिफ्ट द ब्लेम शिफ्ट द गेन’. शबाना आजमी ने आगे कहा कि जहां तक फिल्मों में महिलाओं की कामुकता को दिखाने की बात है तो उस के लिए फिल्मों में महिलाओं की कामुकता को दिखाने का तरीका बदलना चाहिए, क्योंकि कामुकता और अश्लीलता के बीच एक महीन रेखा है. कामुकता को जिस तरह दिखाया जाता है, वह कैमरे के घूमने पर निर्भर करता है न कि इस बात पर कि आप किस तरह के कपड़े पहनते हैं या कैसे नृत्य करते हैं.

इसी विषय पर सेफ्टीपिन की सहसंस्थापक कल्पना विश्वनाथ का कहना है, ‘‘हम लोगों ने एक अभियान चलाया था, ‘घूरना तकलीफ देता है’ घूरने और देखने में फर्क होता है. पुरुष घूरने के लिए महिलाओं की पोशाक को दोष देते हैं. हमारे समाज में सारे नियंत्रण महिलाओं पर ही लगाए जाते हैं कि ऐसे कपड़े पहनें, शाम के बाद घर से बाहर न निकलें वगैरह. समाज महिलाओं की आजादी पर पहरा लगा रहा है. हम औरतों की सुरक्षा की बात करते हैं उन के अधिकारों की नहीं. जरूरत है कि समाज में सैक्सुअलिटी पर खुल कर बात की जाए, घर में लड़कों के साथ हर विषय पर खुल कर बात की जाए ताकि वे समझ सकें कि महिलाओं के साथ कैसे पेश आना चाहिए. टकटकी लगाए देखने में सीधा संबंध सैक्सुअल आजादी से है.’’ ‘‘जहां तक घूरने की और थाने में रिपोर्ट करने का सवाल है तो इस की रिपोर्ट शायद ही कभी होती है, क्योंकि कोई भी महिला पुलिस के पास जा कर रिपोर्ट करने और फिर अपराध को साबित करने के झंझट में नहीं पड़ना चाहती. जबकि घूरना, टकटकी लगाए देखना कानूनन गलत है. कानून पुरुष व महिला को बराबर अधिकार देता है, लेकिन भारतीय समाज की संस्कृति में असमानता है. आज की महिला एक आजाद इनसान की तरह जीना चाहती है,’’ यह कहना है वकील, शोधकर्ता तथा मानवाधिकार एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर का.

इस अवसर पर राजनेता बलिकेश नारायण सिंह देव ने कहा कि समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है. लड़कों को घर से बाहर महिलाओं के साथ कैसे पेश आना चाहिए, यह वे अपने घर के पुरुषों से ही सीखते हैं कि वे कैसे उन की मां, भाभी, बहन के साथ व्यवहार करते हैं. आज जरूरत लड़कों को लड़कियों की तरह पालने की है ताकि वे महिलाओं का सम्मान करना सीख सकें.

घूरना अपमान निहारना सम्मान

‘‘घूरना अपराध है लेकिन देखना सौंदर्य का सम्मान,’’ पिछले दिनों जनता दल के राज्यसभा के सांसद केसी त्यागी ने महिलाओं को ले कर यह विवादित बयान दिया. उन के अनुसार, देश के प्राचीन कवियों ने भी महिलाओं के सौंदर्य का वर्णन किया है और वे संसद भवन में बैठने वाली फिल्म अदाकारा सांसदों को अकसर देखते रहते हैं. इस के जवाब में बीजेपी महिला मोरचा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्या लज्जारानी गर्ग ने कहा, ‘‘यह बयान त्यागी और उन के दल की मानसिकता को दर्शाता है. देश में प्राचीनकाल से ही महिलाओं को मां के रूप में देखा गया है और मां के शरीर की सुंदरता नहीं बल्कि उस का स्नेह देखा जाता है.’’

जब जनप्रतिनिधि ही इस तरह की टिप्पणी करते हैं तो महिलाओं का सम्मान करने की इन की दावेदारी पर सवालिया निशान लग जाता है.

क्यों घूरते हैं पुरुष महिलाओं को

एक ब्रिटिश रिसर्च के अनुसार, हर इनसान में विपरीत सैक्स को घूरने की फितरत होती है. इनसान चाह कर भी यह आदत छोड़ नहीं पाता, क्योंकि विपरीत सैक्स को निहारने या घूरने में जो आनंद या सुख मिलता है वह वैसा ही होता है जैसा किसी भूखे को भोजन और प्यासे को पानी मिलने के बाद होता है. विपरीत सैक्स पर नजर पड़ते ही शरीर में हारमोनल प्रतिक्रिया होती है और आनंदित होने का एहसास होता है. पुरुषों के अंदर मौजूद टैस्टोस्टेरौन नामक हारमोन उन में महिलाओं के प्रति अट्रैक्शन उत्पन्न करता है, जिस के चलते वे कई बार विपरीत सैक्स की तरफ ज्यादा देखते हैं या कहें घूरते हैं. लेकिन जब पुरुषों की घूरती नजरें जिस्म को भेदने वाली होती हैं तो लड़कियां घबरा जाती हैं. इस से उन के आत्मविश्वास में गिरावट आ सकती हैं, दिमागी सक्रियता में भी कमी हो सकती है. सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के अनुसार, महिलाओं को जब लंबे समय तक पुरुषों द्वारा घूरा जाता है तो वे खुद को फिगर के आधार पर मूल्यांकन करना शुरू कर देती हैं. और वे शर्मिंदगी महसूस करने लगती हैं

हस्तियां भी नहीं छोड़तीं मौका

ऐसा नहीं है कि सिर्फ आम पुरुष ही महिलाओं को घूरते हैं. ऐसा बड़ी हस्तियां भी करती हैं, जिन में किसी देश के राष्ट्रपति, खिलाड़ी भी शामिल होते हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इटली में हुए जी-8 के सम्मेलन में लड़कियों को घूरते पाए गए. ऐसी ही कुछ हरकत फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलेस सरकोजी ने भी की. वे जी-8 सम्मेलन में हिस्सा लेने आई ब्राजील की महिला डैलिगेट को घूरते नजर आए. इसी तरह तिरछी नजर से अमेरिकी चीयर गर्ल पर नजरें गड़ाने वालों में जानेमाने फुटबौलर डैविड बेकहम भी हैं

जिंदगी का कितना वक्त घूरने में बरबाद

ब्रिटिश संस्था कोडक लैंस विजल द्वारा 18 से 50 की उम्र के 3 हजार लोगों की राय को आधार बना कर किए गए एक शोध के अनुसार, पुरुष अपनी जिंदगी का पूरा 1 साल लड़कियों को घूरने में बरबाद कर देते हैं. शोध के अनुसार, एक पुरुष प्रतिदिन औसतन 1-2 नहीं बल्कि अलगअलग 10 लड़कियों को घूरता है. प्रतिदिन पुरुष 2-4 मिनट नहीं बल्कि औसतन पूरे 43 मिनट लड़कियों या महिलाओं को मुड़मुड़ कर घूरने या आंखें फाड़ कर ताड़ने में खर्च करता है. ब्रिटिश रिसर्च के अनुसार, इस आदत को पुरुष चाह कर भी छोड़ नहीं पाते. जहां तक लड़कियों की बात है तो उन में घूरने की आदत लड़कों के मुकाबले कम होती है. रिसर्च के मुताबिक, लड़कियां या महिलाएं औसतन जिंदगी के पूरे 6 महीने और रोजाना औसतन करीब 20 मिनट घूरने में खर्च करती हैं.

घूरते समय क्या देखते हैं लड़के

अमेरिका की यूनिवर्सिटी औफ नेब्रास्का लिनकोलन के अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, आई ट्रैकिंग तकनीक के जरीए जाना गया है कि लड़के लड़कियों को घूरते समय उन के चेहरे के बजाय उन की बौडी और उन की फिगर को ज्यादा देर तक देखते हैं. इस स्टडी के मुताबिक मर्द ज्यादातर उन महिलाओं को घूरने में अपना अधिकांश वक्त बिताते हैं जिन की कमर औसतन पतली हो या उन की ब्रैस्ट का साइज बड़ा हो. आप को जान कर हैरानी होगी कि महिलाएं भी दूसरी महिलाओं को पुरुषों वाली नजर से घूरती हैं यानी वे भी चेहरे के बजाय ब्रैस्ट व कमर के आसपास के हिस्से को घूरने में ज्यादा समय देती हैं.

प्रतिदिन 10 मिनट महिलाओं को देखना स्वास्थ्यवर्धक

एक ओर जहां भारत में महिलाओं को घूरने को अपराध की श्रेणी में रखा जाता है, वहीं न्यू इंगलैंड जर्नल औफ मैडिसिन के एक सर्वे के अनुसार प्रतिदिन महिलाओं को 10 मिनट तक देखना पुरुषों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा है. सुगठित महिला को मात्र 10 मिनट तक देखने से एक पुरुष उतनी उर्जा खर्च कर देता है जितनी 30 मिनट के ऐरोबिक्स व्यायाम में खर्च होती है. शोध में जिन लोगों ने प्रतिदिन 10 मिनट महिलाओं को देखा उन की टैस्टिंग पल्स रेट कम धीमी पाई गई. उन का रक्तचाप भी अन्य लोगों की तुलना में कम था. डाक्टरों के अनुसार, यौन उत्साह से हृदय के पंपिंग की गति तेज हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार होता है. है न कमाल की बात. लेकिन भारत में सुंदर कन्या को घूरने का साहस न करें, क्योंकि यहां घूरना अपराध है.

जब अक्षय ने कहा-जो नाम कमाया था, वह गंवा दिया…

अक्षय कुमार ने अपनी फ़िल्म 'हाउसफुल 3' का प्रचार करते हुए कहा कि इस फ़िल्म के साथ अपना नाम गंवा दिया है. मगर अक्षय ने यह बात गभीरता से नहीं, बल्कि हंसी मज़ाक़ में कही क्योंकि फ़िल्म भी कॉमिडी है.

गंभीर फिल्मों के बाद कर रहे कॉमिडी

अक्षय कुमार बेबी, गब्बर इज़ बैक, एयरलिफ्ट जैसी गंभीर फिल्में करने के बाद कॉमिडी में वापसी कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि अक्षय पर इस कॉमिडी का बुखार जमकर चढ़ा हुआ है जो फ़िल्म के प्रचार के दौरान भी नज़र आ रहा है और वह न सिर्फ फ़िल्म के दूसरे सदस्यों से मज़ाक़ और छेड़खानी कर रहे हैं बल्कि खुद का भी मज़ाक उड़ा रहे हैं.

लेकिन उन्होंने गंभीरता से भी एक बात कही…

यही वजह है कि हाउसफुल 3 के प्रचार के दौरान अक्षय ने कहा कि 'डेढ़ महीने पहले एयरलिफ्ट के प्रचार के दौरान सीरियस होकर खड़ा था और फ़िल्म प्रमोट कर रहा था और आज हंसी मज़ाक कर रहा हूं. जो भी नाम कमाया था, सब गंवा रहा हूं.' मगर अक्षय ने एक बात गंभीरता से कही कि पिछले दिनों बेबी या एयरलिफ्ट जैसी फिल्में करने के दौरान मैं बहुत सीरियस हो गया था.

अब हाउसफुल 3 करने के बाद हल्का महसूस कर रहा हूं और काफ़ी अच्छा लग रहा है. इस फ़िल्म के दौरान उन गंभीर किरदारों से बाहर निकला. दिल खोलकर मज़े किये और इतनी बदमाशी की कि हर सीन के दो दो टेक दिए. पहले टेक में जो दिल में आया, वह किया और दूसरे टेक में वैसा अभिनय किया जैसा निर्देशक चाहते थे.

 

उत्तर प्रदेश में सोलर पंप सिंचाई को बढ़ावा

तजरबेकार माहिरों ने साबित कर दिया?है कि सोलर पंप से सिंचाई कर के खेती की लागत में कमी की जा सकती है. इस के अलावा सोलर पंप का इस्तेमाल बिजली व डीजल आदि की किल्लत से निबटने व खराब हो रहे पर्यावरण को बचाने का आसान तरीका है. इसलिए उत्तर प्रदेश की सरकार सोलर पंप से सिंचाई करने को बढ़ावा दे रही?है.खेतों में सिंचाई करने वाले आम सोलर पंप हलके व भारी 2 तरह के होते हैं. ये सरफेस यानी सतही सोलर पंप और दूसरे जमीन के भीतर से पानी निकालने वाले समरसेबल सोलर पंप होते हैं.

किसानों की सहूलियत के लिए उत्तर प्रदेश का खेती महकमा साढ़े 7 हार्सपावर के आम सिंचाई पंप पर 50 फीसदी या 10 हजार रुपए, जो कम हो छूट देता?है, लेकिन सोलर पंप की खरीद पर उस से भी ज्यादा 75 फीसदी तक की?छूट दी जा रही?है. इस में 30 फीसदी केंद्र व 45 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार का रहता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान सोलर पंप खरीद कर लगा सकें और बिजली व डीजल का खर्च बचा सकें. उत्तर प्रदेश नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण यानी नेडा इस काम में कृषि विभाग की मदद कर रहा?है. पिछले साल गंवई इलाकों में पीने के पानी के 200 व खेतों में सिंचाई के लिए 900 सोलर पंप लगाए गए थे. इस साल 5 हजार नए सोलर पंप लगाने का मकसद तय किया गया है.

मेरठ मंडल में तैनात कृषि अधिकारी ने बताया कि 1800 वाट के 2 हार्सपावर के सरफेस सोलर पंप की कीमत तकरीबन 2 लाख, 41 हजार रुपए है. छूट के बाद घटा कर इस में से किसान को सिर्फ एकचौथाई यानी 60,245 रुपए देने पड़ते हैं. इसी तरह 3000 वाट के 3 हार्सपावर के समरसेबल सोलर पंप की कीमत 6 लाख, 89 हजार रुपए है. इस में किसान को महज 1,17,200 रुपए देने पड़ते हैं. 4800 वाट के 5 हार्सपावर के समरसेबल सोलर पंप की कीमत 5 लाख, 31 हजार रुपए है. इस में छूट की दर 50 फीसदी है. इसलिए किसान को 2,65,600 रुपए देने पड़ते हैं.

इस स्कीम में भ्रष्टाचार को दूर रखने की गरज से इंतजाम को साफसुथरा बनाया गया?है. इस योजना में औनलाइन पंजीकरण कराया जाता?है. ज्यादा जानकारी के लिए किसान अपने इलाके के उप कृषि निदेशक से इस बारे में संपर्क कर सकते?हैं. छोटीबड़ी बहुत सी कंपनियां सोलर पंप बनाती?हैं. नाबार्ड ने 19 कंपनियों को चुना है, जो सोलर पंपों की मरम्मत व रखरखाव वगैरह के लिए सर्विस सेंटर चला रही हैं. सोलर पंप के बारे में जानकारी के लिए इच्छुक किसान इस पते पर भी संपर्क कर सकते?हैं:

तकनीकी निदेशक, कविता सोलर एनर्जी प्रा. लि., 231 न्यू डिफेंस कालोनी, निकट रेलवे स्टेशन, मुरादनगर, गाजियाबाद : 201206 उत्तर प्रदेश.

राजन ने बिल्डरों से कहा ‘कम करो कीमतें’

नीतिगत दरों में कटौती के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों के पाले में गेंद डालते हुए उनसे मकानों के दाम कम करने को कहा ताकि ज्यादा लोग संपत्ति खरीदने के लिये प्रोत्साहित हों. आवासीय परियोजनाओं की कम मांग के साथ डेवलपरों के पास बिना बिके मकानों की बढ़ती संख्या के बीच राजन ने यह बात कही है.

वाई बी चव्हाण स्मृति व्याख्यानमाला में राजन ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि अब जब ब्याज दरें नीचे आ रही है, लोग कर्ज के लिये आगे आएंगे और खरीदारी बढ़ेगी और मुझे यह भी उम्मीद है कि कीमतों में इस रूप से समायोजन होगी जिससे लोग मकान खरीदने के लिये प्रोत्साहित होंगे.' रिजर्व बैंक पिछले वर्ष जनवरी से ब्याज दरों में 1.5 प्रतिशत की कटौती कर चुका है और इस महीने की शुरुआत में रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया जो पांच साल का न्यूनतम स्तर है.

वहीं दूसरी तरफ बैंकों ने ग्राहकों को उतना लाभ नहीं दिया जितना कि रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर में कटौती की. राजन के अनुसार ब्याज दरों के अलावा प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत सस्ते मकान के लिये कर्ज जैसे उपायों से उन्हें विश्वास है कि कर्ज के मोर्चे पर चिंताओं का समाधान किया गया है. उन्होंने डेवलपरों के कर्ज के मामले में उन्होंने ऋण लेने वालों की तरफ से पारदर्शिता की वकालत की.

सनट्रैकर : सौर ऊर्जा से दिन भर सिंचाई

सुबह शाम

इन दिनों खेती में लगने वाली लागत लगातार बढ़ती चली जा रही है. खेती में सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कोई कम नहीं होता?है. नहरों व दूसरे कई साधनों से सिंचाई करने के अलावा लोग निजी नलकूपों से?भी सिंचाई करते?हैं. नलकूपों से सिंचाई करने पर डीजल बहुत खर्च होता?है और प्रदूषण भी फैलता?है.

इसी समस्या का हल है सौरचालित वाटर पंपिंग सेट, जो कि सिर्फ धूप की रोशनी से चलता?है. इस समय बाजार में आ रहे ज्यादातर पंपिंग सेट सीधे सौरपैनल से जुड़े होते?हैं और डीसी मोटर चालित पंप होते?हैं. इन पंपों में यह खराबी होती है कि जब सूर्य की दिशा बदलने लगती है तो रोशनी कम होने पर ये सेट कम पानी देने लगते हैं. यानी दिन भर समान रूप से पानी नहीं निकल पाता?है और सिंचाई करने में दिक्कत हो जाती है.इस समस्या के समाधान के लिए भोपाल (मध्य प्रदेश) स्थिति केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने सनट्रैक्टर के नाम से एक यंत्र ईजाद किया है. यह यंत्र इस समस्या के हल के लिए पूरी तरह से कारगर सिद्ध हो रहा?है. बस जरूरत है इसे  अपनाने की.

क्या है सनट्रैकर : सौरऊर्जा संयत्र की कूवत बढ़ाने के लिए एक सूक्ष्म नियंत्रक आधारित सनट्रैकर विकसित किया गया है, जो 2.4 किलोवाट के सौरपैनल को सूर्य की दिशा में घुमाने क कूवत रखता है. इस से सूर्य की रोशनी दिन भर सामान रूप से सौरऊर्जा संयंत्र को मिलती रहती है, नतीजतन पूरे दिन किसी भी समय सिंचाई का काम तेज गति से किया जा सकता है.

सनट्रैक के अंदर की तकनीक : इस ट्रैकिंग सिस्टम के खास भाग हैं वर्म गियर स्टेपर, मोटर स्टेपर, मोटर ड्राइव व सूक्ष्म नियंत्रक. स्टेपर मोटर और उस के संचालक का संचालन एक प्रोग्राम सूक्ष्म नियंत्रक के साथ नियंत्रित किया जाता है. सौरपैनल को सूर्य की दिशा में घुमाने के लिए इस में खास बंदोबस्त किया गया?है.

खास फायदे

* इस पैनल से बिना ट्रैकर वाले पैनल के मुकाबले 21 फीसदी ज्यादा बिजली पैदा होती है. इस के द्वारा वाटर पंप लगातार भरपूर पानी देता है.

* इस समय 2 हार्स पावर से ले कर 5 हार्स पावर तक के सोलर वाटर पंप मौजूद हैं, जिन की कीमत सवा 2 लाख रुपए से सवा 5 लाख रुपए तक?है. अलगअलग प्रदेशों में इस के लिए अलगअलग अनुदान दिए जाते हैं. उत्तर प्रदेश में ‘उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण’ और ‘कृषि विभाग’ द्वारा मिल कर 5 हार्स पावर के पंप के लिए 50 फीसदी और 2 और 3 हार्स पावर के पंपों के लिए 75 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है. इतने अनुदान के बाद भी सोलर वाटर पंप पर काफी खर्च आता?है. इतना खर्च करने के बावजूद इस का सही लाभ नहीं मिल पाता है. ऐसे में सनट्रैकर सिंचाई के लिहाज से बेहद कारगर साबित हो सकता?है.

* सिंचाई की लागत में कमी आती?है.

* दिन भर सिंचाई वाले पानी की आपूर्ति होने से दूसरों को भाड़े पर पानी दे कर कमाई की जा सकती है.

* इस से प्रदूषण पर लगाम लगेगी.

कहां से मिलेगा : सनट्रैकर यंत्र को केंद्रीय कृषि आभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल (मध्य प्रदेश) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. इस के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए इसे ईजाद करने वाली टीम के डा. आरसी सिंह से उन के कार्यालय के फोन नंबरों

0755-2521117,2521118 पर संपर्क किया जा सकता?है. वैसे डा. सिंह का कहना?है कि इस यंत्र के लिए दिल्ली व गाजियाबाद की एक फर्म को तय कर दिया गया है, जिस के जरीए देश के किसी भी हिस्से से इसे हासिल किया जा सकता?है.

पत्र या ई मेल के जरीए संस्थान के निदेशक से?भी संपर्क किया जा सकता है.

पता : निदेशक, केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, नवी बाग, बैरसिया रोड, भोपाल (मध्य प्रदेश), 462038.           

सौर ऊर्जा से लहलहा रही फसलें

सौर ऊर्जा की अहमियत को अब पढ़ेलिखे लोगों के साथसाथ छोटे किसान व तमाम आम लोग भी समझने लगे हैं. राजस्थान में हजारों किसान सौर ऊर्जा का भरपूर फायदा ले रहे हैं. ऐसे किसानों का मानना?है कि वाकई यह पैट्रोलडीजल वगैरह का बेहतर उपाय?है. सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने से किसानों के लिए सोलर ऊर्जा पैनल व पंपसेट लगाना और भी आसान हो गया है.

सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के इस काम में सैकड़ों कंपनियां व एजेंसियां लगी हुई हैं. जो किसान सब्सिडी पाना चाहते?हैं, वे अपने प्रदेश व जिले के कृषि व उद्यानिकी विभाग में आवेदन कर के सब्सिडी के साथ सौर ऊर्जा प्लांट लगवा सकते हैं. इस के अलावा घरों की छतों पर भी सौर ऊर्जा प्लांट लगवा कर पूरे घर को रोशन किया जा सकता है.

सोलर प्लांट से मिली कामयाबी

जयपुर जिले की चाकसू तहसील के रहने वाले किसान रामकेश को जब कृषि सुपरवाइजर कैलाश जाट ने सौर ऊर्जा प्लांट के बारे में जानकारी दी, तो वह खुश हो गया.

रामकेश ने अपने खेत पर खेततलाई तो बनवा रखी थी, लेकिन बिजली विभाग में 3 साल पहले आवेदन लगाने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा था. ऐसे में कृषि सुपरवाइजर के बताए अनुसार उसे सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने में फायदा नजर आया, तो उस ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की ठानी.

कृषि सुपरवाइजर ने उसे सोलर प्लांट पर मिलने वाली तमाम जानकारी मुहैया कराई, तो रामकेश ने सोलर प्लांट के लिए कृषि व उद्यानिकी विभाग में औनलाइन फार्म जमा करा दिया. कुछ ही समय बाद रामकेश का चयन सोलर प्लांट लगाने के लिए हो गया. उस ने 3 हजार वाट व 3 हार्सपावर के सोलर पंपसेट के लिए सोलर कंपनी के नाम 85 हजार रुपए का बैंक ड्राफ्ट जमा करा दिया.

3 साल पहले लगाए गए सोलर पंपसेट से आज रामकेश की इलाके में जागरूक व कामयाब किसान के तौर पर पहचान है. रामकेश के हरेभरे खेतों में लहलहाती फसल को देख कर आज हर कोई सोलर पंपसेट लगाने की तमन्ना रखता है. रामकेश ऐसे लोगों को?भरपूर मदद भी करता?है. अब तो रामकेश ने अपने खेत में बोरिंग भी करवा ली है, जिस से सोलर पंपसेट का वह भरपूर फायदा ले रहा?है.

मौजूद सोलर प्लांट

सरकार किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए हर साल अपना टारगेट तय करती?है. वह इस के लिए कंपनियों का चुनाव करती है. ये कंपनियां अनुदान के आधार पर सोलर प्लांट लगाती हैं. वहीं सैकड़ों कंपनियां खुले में भी इस काम में लगी हुई हैं. कंपनियां व उन के प्रतिनिधियों से कोई भी व्यक्ति सोलर प्लांट लगवा सकता है. ये कंपनियां भी सरकार से अनुदानित कंपनियों के बराबर ही सोलर प्लांट लगाने की कीमत वसूल करती हैं.

यहां सोलर प्लांट लगाने के काम में लगी कंपनियों की जानकारी दी जा रही है. कोई भी किसान सीधे कंपनियों से संपर्क कर के घर या खेतों पर सोलर प्लांट लगवा सकता हैं.

राजस्थान में सौर ऊर्जा पंप सेट के लिए टारगेट तय

सौर ऊर्जा पर आधारित पंप परियोजना में साल 2015-16 के जिलेवार टारगेट भी तय किए जा चुके?हैं. सरकार ने पात्रता रखने वाले किसानों को तुरंत इस योजना का फायदा दिलाने के लिए कहा?है.

उद्यानिकी विभाग?द्वारा जारी गाइडलाइन में साल 2014-15 में लाटरी से चुने गए किसानों को प्राथमिकता के आधार पर फायदा पहुंचाने की बात कही गई है. समूचे प्रदेश में 4,702 पंपसेट लगाने का?टारगेट तय किया गया?है.

ऐसे मिलेगा अनुदान का फायदा

नए निर्देश के अनुसार, विद्युत कनेक्शन लौटाने वाले किसानों को पूरा अनुदान देय होगा. साथ ही जिन किसानों के विद्युत कनेक्शन नहीं हैं और डिस्कौम की वरीयता सूची में भी नहीं हैं, इस के लिए उन को 60 फीसदी अनुदान मिलेगा.

गौरतलब है कि पूर्व में इस तरह का नियम नहीं था. हकदार किसानों को 75 फीसदी अनुदान दिया जाता था. लेकिन अब सरकार ने सभी किसानों को सोलर पंप योजना के लाभ से जोड़ने के लिए यह फैसला लिया है.

उद्यानिकी विभाग द्वारा जारी सोलर पंप के टारगेट में इस साल नहरी किसानों का भी खास खयाल रखा गया?है. इंदिरा गांधी नहर परियोजना लाभान्वित बीकानेर जिले के लिए 600, जैसलमेर के लिए 205, श्रीगंगानगर के लिए 538 और हनुमानगढ़ के लिए 173 सौर ऊर्जा पंपसेटों का टारगेट रखा गया है. इस के अलावा जयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में बागबानी फसल के बढ़ते दायरे को देखते हुए सोलर पंप के टारगेट पहले से बढ़ा कर रखे गए हैं.

सेटेलाइट से भी जुड़ेंगे सौर ऊर्जा प्लांट

सोलर ऊर्जा का डाटा संग्रहित करने व संयंत्र की मौनिटरिंग के लिए उद्यानिकी विभाग अब प्रदेश में नई व्यवस्था लागू करने जा रहा?है. इस के तहत किसान के खेत में लगे संयंत्र को अब सेटेलाइट से जोड़ा जाएगा. इस से सौर ऊर्जा संयंत्र पंप की निगरानी भी हो सकेगी, साथ ही संयंत्र से जुड़ी किसान की समस्या का शिकायत से पहले ही समाधान संभव हो सकेगा.

गौरतलब है कि प्रदेश में सोलर सिंचाई पंप योजना को ले कर किसानों का रुझान साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है. सोलर पंप को सेटेलाइन से जोड़ने के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इस से संयंत्र से जुड़ी हर पल की जानकारी विभाग और संयंत्र लगाने वाली कंपनी के पास मुहैया हो सकेगी. गौरतलब है कि सौर ऊर्जा के मेगा प्रोजेक्ट में रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा?है. किसान के खेत में लगने वाले सोलर पंपसेट में इस तकनीक का प्रयोग प्रदेश में पहली बार होगा.

ऐसे होगी सिस्टम की मौनिटरिंग

सोलर ऊर्जा संयंत्र के माहिरों के अनुसार संयंत्र के मौड्यूल व कंट्रोलर में एक चिप लगाई जाएगी. इस से सेटेलाइट हर पंप से जुड़ सकेगा. यह चिप आरएफआईडी यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन तकनीक से लैस होगी. इस से संयंत्र से जुड़ी तमाम जानकारी कंपनी को उपलब्ध होती रहेगी. इस से संयंत्र की ट्रेकिंग भी संभव है.

सेटेलाइट से सेंसर संयंत्र की निगरानी कंपनी और विभागीय स्तर पर होगी. इस के लिए जिला स्तर पर डाटा सेंटर बनाए जाएंगे. डाटा संग्रहण के लिए मोबाइल नेटवर्क होना बेहद जरूरी होगा. डाटा एक्सिस करने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा और संग्रहित डाटा के आधार पर ही भविष्य की योजना बनाई जाएगी.  

रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित होंगे सोलर प्लांट

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से रिमोट सेंसिंग तकनीक आधारित सोलर सिंचाई पंप लगाने के निर्देश मिले हैं. साल 2015-16 में स्थापित होने वाले तमाम संयंत्र इस तकनीक से लैस होंगे. प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत यह कवायद शुरू की गई है. इस के तहत जवाहरलाल नेहरू सोलर मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए जारी गाइडलाइन में सोलर पंप संयंत्र को रिमोट सेंसिंग तकनीक से जोड़ने का प्रावधान किया गया?है. इस के तहत उद्यान विभाग इस वित्तीय वर्ष में उन्हीं कंपनियों को अहमियत देगा, जो रिमोट सेंसिंग तकनीक आधारित संयंत्र की आपूर्ति किसान को कर सकें.

-एसपी सिंह, उद्यानिकी आयुक्त, जयपुर

सोलर प्लांट लगाने वाली जयपुर में स्थित कंपनियां व संपर्क नंबर :

श्री राधेश्याम सौर सेवा :08048016637.

न्यू जर्सी निगम :07053137627.

जैनटेक प्राइवेट लिमिटेड :09643206106.

न्यू लाइट आफ इंजीनियर्स : 08046050766.

नीधीशवार्म पावर कारपोरेशन : 9873148460.

गीता इलेक्ट्रोनिक्स : 09643007989.

चरम सीमा संचार : 08048105644.

एम पावर ग्रीन प्रा. लिमिटेड : 08045317354.

ग्रीन मोर ऊर्जा उत्पाद प्रा. लिमिटेड : 09643338086.

राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स उपकरण प्रा. लिमिटेड : 08043051759.

कांपैक्ट व्यापार सेवाएं :08042984205.

सोनीपत में किसान मेला

हरियाणा के सोनीपत शहर की अनाज मंडी में ‘कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण’ (आत्मा) द्वारा कराए गए किसान मेले में लगभग 500 किसानों ने भाग लिया. किसानों के मनोरंजन के लिए हरियाणवी कलाकारों द्वारा रागिनी भी सुनाई गई. मेले की योजना डा. वीडी आर्य, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर की देखरेख में डा. देवेंद्र सिंह, डिविजन आफिसर एग्रीकल्चर ने तैयार की. मंच संचालन कृषि विकास अधिकारी जय भगवान गहलावत ने किया.

मेले में अपनेअपने क्षेत्र के माहिर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन के हित की अनेक जानकारियां दीं. साथ ही, उन्होंने किसानों की समस्याओं को भी सुलझाया. डा. जेके नंदन ने बताया कि किसानों को धानगेहूं की खेती की ओर रुख न कर के सब्जी की खेती की तरफ बढ़ना चाहिए. इस से उन्हें ज्यादा मुनाफा मिलेगा. जहां पारंपरिक खेती करने से साल में किसान 2 फसलें ले पाता है, वहीं किसान सब्जी की खेती करे, तो पूरे साल सब्जियों की फसल से अच्छी आमदनी ले सकता है.

उन्होंने आगे बताया कि किसान विदेशी सब्जियां जैसे ब्रोकली वगैरह की खेती करें तो उस से और भी ज्यादा मुनाफा मिलेगा. वे फूलों की खेती करें, प्याज की खेती करें, खासकर बिना मौसम वाली सब्जी पैदा करें, साथ ही वे बेबीकार्न की खेती भी करें. बेबीकार्न की खेती के 2 फायदे हैं. पहले बेबीकार्न बेचें फिर खड़ी फसल से हरा चारा लें. पशु विशेषज्ञ डा. बीएस रांगी ने भी किसानों, पशुपालकों को कई सुझाव दिए. उन्होंने बताया कि पशुपालकों को अपने पशुओं का दूध कैसे बढ़ाना चाहिए. इस पर उन का विभाग मदद करता है. आज के समय में सब से ज्यादा दूध देने वाली भैंस की नस्ल मुर्रा है. मुर्रा नस्ल का बीज हर पशु संस्थान में मिलता है. मात्र 100 रुपए में मुर्रा नस्ल का बीज घर जा कर भी दिया जाता है. पशुपालन विभाग पशुओं का साल में 4 बार टीकाकरण करता है. कई किसान सोचते हैं कि इस से पशु का दूध कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है.

सामान्य किसान अगर डेरी लगाना चाहता है और वह कम से कम 5 देशी गायों से डेरी शुरू करता है, तो 50 फीसदी की सब्सिडी सरकार देती है. इस सिलसिले में अपने क्षेत्र के पशुपालन विभाग से मिलें. समयसमय पर पशु विभाग किसानों के लिए कैंप का आयोजन भी करते हैं. इस का लाभ भी किसानों को उठाना चाहिए. पशुपालन विभाग द्वारा मात्र 100 रुपए में पशु बीमा होता है, जिस की बीमित राशि 50 हजार है. यह बीमा 3 साल के लिए होता है.

डा. राजेंद्र काजल जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने किसानों को अनेक जानकारियां दी. कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि बीज बोने से पहले बीजोपचार जरूर करें. जिस तरीके से हम अपने बच्चों का टीकाकरण करवाते हैं, उसी तरह से फसल का टीकाकरण होता है. बीजोपचार करने से फसल में 60 फीसदी बीमारी तो वैसे ही नहीं लगती है, इस से खर्चा भी घटेगा और फायदा ज्यादा मिलेगा . साथ ही फसल में खाद व पानी संतुलित मात्रा में दें.

बैंक अधिकारियों ने भी किसानों के लिए चलाई जा रहीं कई स्कीमों के बारे में बताया. उन्होंने खासतौर पर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि जमीन के क्षेत्रफल के अनुसार के्रडिट कार्ड की लिमिट तय की जाती है.

के्रडिट कार्ड बनवाने के साथ ही किसानों का बैंक में खाता खोला जाता है, जिस के तहत बैंक पासबुक व चैकबुक भी किसानों को दी जाती है. किसान बैंक से अपनी जमीन के अनुसार 50 हजार से ले कर 50 लाख रुपए तक लोन ले सकते हैं और खेती की मशीनें खरीद सकते हैं, कोल्ड स्टोर लगा सकते हैं या पशुशाला खोल सकते हैं. मधुमक्खीपालन, मुरगीपालन या मछलीपालन जैसे कामों के लिए भी किसानों को लोन दिया जाता है. उन्हें बच्चों की पढ़ाई के लिए भी लोन दिया जाता है. किसान इन सब का फायदा उठा सकते हैं. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि बैंक से किसान ने जिस काम के लिए कर्ज लिया है, उसे उसी काम में लगाए और समय से बैंक के लोन की किस्त चुकता करता रहे. ऐसा न करने पर बैंक किसान को डिफाल्टर घोषित कर सकता है.

एडीसी शिव प्रसाद शर्मा ने किसानों को शुभकामनाएं दी.

अंत में कृषि वैज्ञानिकों ने महिला किसानों व पुरुष किसानों की 2 टीमें बनाईं और उन से अलगअलग कृषि से संबंधित सवालजवाब किए. महिलाओं की बातें सुन कर ऐसा लग रहा था कि हरियाणा की महिला किसान पुरुषों से पीछे नहीं हैं. उन्हें खेतीकिसानी की हर तरह की जानकारी थी. विजेताओं को पुरस्कार भी दिए गए.

खास स्टाल

मेले में लगे स्टालों में बीज उत्पादक व कीटनाशक कंपनियों में नुजिवीडू सीड्स, श्रीराम फर्टिलाइजर्स एंड कैमिकल, महिंद्रा एंड महिंद्रा लि., एग्री बिजनेस, एग्रो सीड्स, संपूर्ण एग्री वेंचर्स प्रा. लि., भारत इंसेक्टिसाइड्स लि., सल्फर मिल्स लि., क्राप कैमिकल्स इंडिया लि., रैलीज इंडिया लि., पीएल इंडस्ट्रीज लि., एरीज एग्रो लि., बायर क्राप सांइस लि., एसपी इंडिया जैसी अनेक छोटीबड़ी कंपनियां शामिल थीं. दिल्ली प्रेस से प्रकाशित कृषि पत्रिका ‘फार्म एन फूड’ के स्टाल पर भी किसानों की भीड़ देखने को मिली.

नए बजट से किसानों को राहत या उन्हें लुभाने का नया अंदाज

साल 2015-16 का बजट गांव, गरीब व किसानों के लिए है, ऐसा कहा जा रहा है. वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण व की गई घोषणाओं से हट कर कुछ नया करने की झलक मिलती है. उदाहरण के तौर पर पिछले साल खेती के लिए कुल तय रकम 25 हजार करोड़ रुपए को इस बार बढ़ा कर 44 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है.

अपना इंतजाम पक्का

बजट के अनुसार इस साल सरकारी खर्च में होने वाली बढ़ोतरी के मद्देनजर सेवा कर में कृषि सेस का उपकर लगा कर सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने का तो पक्का इंतजाम कर लिया है, लेकिन किसानों की आमदनी अगले 5 सालों में बढ़ कर दोगुनी होने की बात की गई है. ऐसी बातें तो पहले भी कही जा चुकी हैं. गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह हर साल महंगाई भत्ते व सालाना बढ़ोतरी के जरीए करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है. बेशक गांव व गरीबों के नाम पर चली बहुत सी स्कीमों में पानी की तरह पैसा बहाया जाता रहा है, लेकिन किसानों की आमदनी बढ़ाने का ऐसा कोई तरीका अभी तक नहीं निकाला गया है.

यह बात आज किसी से छिपी नहीं है कि ऊपर से चला पैसा, घपले, घोटालों  गड़बड़ी के कारण नीचे गांवगरीब तक पूरा नहीं पहुंचता. ज्यादातर सरकारी कर्मचारी निकम्मे हैं व भ्रष्ट हैं. वे गांव, गरीब व किसानों के फायदे की ज्यादातर बातों की जानकारी छिपा कर रखते हैं. लिहाजा ज्यादातर विकास योजनाओं की किसानों को खबर तक नहीं दी जाती. अकसर मक्कार, असरदार, दबंग नेता आपस में बंदरबांट कर लेते हैं और गरीब किसानों को मिलने वाली छूट, कर्ज व दूसरी सुविधाएं हड़प जाते हैं. यही वजह है कि सरकार की तरफ से चल रही कोशिशों के बावजूद छोटे किसान परेशान हैं.

हाल में की गई आर्थिक समीक्षा के मुताबिक राशन, रसोई गैस, रेल व बिजली आदि में गरीबों को सालाना 1 लाख करोड़ रुपए की भारी छूट दी जा रही है, लेकिन इस का बड़ा हिस्सा आज भी अमीरों के खाते में जा रहा है. काफी हद तक गरीबों के हक छीने जा रहे हैं. लिहाजा इस पर सख्ती से नकेल कसना बेहद जरूरी है.

बदलाव जरूरी

गांवों में खुशहाली लाने के लिए सिर्फ बजट में अरबोंखरबों की रकम खर्च के लिए रख देना ही काफी नहीं है. खेती, बागबानी व उस से जुड़े दूसरे विभागों के बुनियादी ढांचे और काम करने के तरीकों में सुधार करना भी जरूरी है. इस के लिए कड़े व सही कदम उठाना भी लाजिम है, वरना कोई नतीजा नहीं निकलेगा. बजट से पहले की आर्थिक समीक्षा में साफ कहा गया है कि पिछले साल यूरिया पर दी गई कुल छूट 50,300 करोड़ रुपए थी, लेकिन इस में से सिर्फ 35 फीसदी 17,500 करोड़ रुपए की छूट ही छोटे किसानों के हिस्से में आई, जबकि कुल छूट का करीब 2 तिहाई हिस्सा दूसरे ले गए. छोटे किसानों की लूट का यह सिलसिला बंद होना बेहद जरूरी है.

कड़े कदम

यूरिया पर दी जा रही सारी छूट सीधे किसानों को उन के बैंक खातों में दी जानी चाहिए. साथ ही साथ यूरिया की बिक्री को खुला कर दिया जाए तो खास बोआई के वक्त होने वाली यूरिया की कमी व कालाबाजारी खत्म हो सकती है और किसानों को बेवजह होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है. अब यह भी तय किया जाना चाहिए कि अपनी जोत के मुताबिक एक किसान कितनी बोरी छूट वाली यूरिया खरीद सकता है. साथ ही खरीदार की पहचान के लिए बायोमैट्रिक पहचान प्रणाली लागू होनी चाहिए. इस के अलावा मसला सिर्फ यूरिया में छूट की लूट का ही नहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति में झोल का भी है.

कई खास फसलों की सरकारी खरीद नीति पर भी नए सिरे से गौर किया जाना चाहिए, क्योंकि कम से कम दाम तय करने का फायदा भी छोटे किसानों को पूरा नहीं मिल रहा है. यदि किसी उपज का बाजार भाव नीचे गिर कर उस के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रहे तो सरकार को उस की कम से कम 50 फीसदी भरपाई करनी चाहिए.

नई तकनीक

आजकल स्मार्ट फोन का जमाना है. अमीर देशों में किसान मोबाइल फोन से ट्यूबवैल चलाने व बंद करने और कीड़ेमार दवा के छिड़काव व दूसरे कामों में औटोमैटिक उड़ने वाले ड्रोन का इस्तेमाल बखूबी कर रहे हैं, लेकिन हमारे देश में अभी ये सारी तकनीकें व मशीनें महंगी होने से हर किसान के बस की नहीं हैं. इन पर कोई छूट नहीं दी गई है. दूसरी सब से बड़ी व जरूरी बात यह है कि तेल, गैस, सोने व विमानईंधन आदि पर अमीरों को बंट रही गैर जरूरी सब्सिडी का बोझ घटा कर किसानों को सस्ते ब्याज पर कर्ज मुहैया कराया जाए, ताकि वे खुदकुशी करने पर मजबूर न हों. यदि गुरबत की वजह से किसानों की जमीनें बिकने की नौबत आती रही तो वे खेती कैसे करेंगे? सरकार की नीयत वाकई किसानों को राहत पहुंचाने व उन की आमदनी बढ़ाने की है तो कम से म  इतना जरूर किया जाना चाहिए कि गांव और खेती के नाम पर बंट रही सरकारी सब्सिडी का फायदा गरीब व जरूरतमंद किसानों को ही मिले, अमीरों को नहीं. मंडी में लगने वाले टैक्स कम व बिचौलिए कम से कम हों ताकि किसानों की उपज सीधे उपभोक्ताओं को मिले. तभी किसानों की आमदनी बढ़ेगी.

खेती को बढ़ावा देने और किसानों के भले की बहुत सी बातें इस से पहले भी बजट के दौरान बढ़ाचढ़ा कर की जाती रही हैं. बात तो तब है जबकि किसानों को माली हिफाजत मिले. खेती में उन का जोखिम घटे और उन की जानकारी व आमदनी बढ़े. इस के लिए रिसर्च स्टेशनों में हो रही खोजबीन व तकनीकी जानकारी का कारगर प्रचारप्रसार मुफ्त व्हाटसऐप वगैरह के जरीए चालू करना होगा. खेतीकिसानी से जुड़ी सारी सहूलियतें किसानों को एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें बेवजह इधरउधर धक्के न खाने पड़ें. छोटी व किफायती मशीनों के इस्तेमाल पर खास जोर दिया जाना चाहिए, ताकि कम जोत वाले किसानों का समय, धन व मेहनत बचे और वे भी ज्यादा पैदावार ले कर अपनी माली हालत सुधार सकें.

फूड प्रोसेसिंग

खेती से ज्यादा कमाई करना आज भी ज्यादातर किसानों के लिए एक चुनौती है. इस के लिए खास मुहिम चला कर गांवों में ही मौके बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि किसान खुद तकनीक सीख कर फूड प्रोसेसिंग की अपनी इकाई लगा सकें और अपनी उपज से तैयार माल बना कर उस की कीमत बढ़ा सकें. ऐसा करना मुश्किल नहीं है.

मसले सुलझें

हर साल चीनीमिलों पर गन्ने की कीमतों का अरबोंखरबों रुपए का बकाया, दलहन व तिलहन की पैदावार में पिछड़ापन, पूरा प्रसंस्करण न होने से करीब 40 फीसदी अनाजों, फलों व सब्जियों की बरबादी और अधिक पैदावार होने पर किसानों को उन की उपज की वाजिब कीमत न मिलने जैसे मसले हल होने जरूरी हैं. तभी किसान कर्ज के जाल व सूद की मार से उबर कर चैन की सांस ले सकते हैं और उन के सपने सच हो सकते हैं. जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए खासतौर पर तकनीकी जानकारी, सस्ती मशीनें, औजार, बेहतर बीज व आर्थिक मदद दी जाए, ताकि किसानों को उन की उपज की कीमत ज्यादा मिले. इस के लिए सभी राज्य सरकारों को भी अब बिना देर किए आगे आना चाहिए, वरना केंद्र सरकार का बजट किसानों का हो कर भी कारगर सुधार नहीं कर पाएगा.      

असर दिखना जरूरी है

गांवों व खेती की दशा सुधारने के लिए केंद्र व राज्यों की सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व धन की कमी नहीं है. आजकल देश में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मनरेगा, डिजिटल साक्षरता, डेरी योजना, मिट्टी की जांच व बीजों की परख, फसल बीमा योजना व कृषि उन्नति योजना आदि चल रही हैं, लेकिन इन के फायदों के साथसाथ तमाम अनसुलझे सवाल भी मौजूद हैं. भोलेभाले किसान भारीभरकम बजट का हिसाब भले ही न जानते हों, लेकिन सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बहुत अच्छी तरह से समझते हैं. लिहाजा उन के मसलों पर ध्यान देना जरूरी है. खेती में बढ़ती लागत पर काबू पाना जरूरी है. किसानों के कर्ज पर गौर करना भी जरूरी है. साथ ही सरकारी योजनाओं का असर दिखना भी बेहद जरूरी है, ताकि गांवों, गरीबों व किसानों के हालात सुधर सकें और उन की तसवीर बदल कर बेहतर हो सके.

किसानों की पहुंच में हमारे कृषि यंत्र

भारत में आज भी लाखों किसान ऐसे हैं जिन की पहुंच कृषि यंत्रों तक नहीं है. बड़े किसान तो इन मशीनों का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन छोटी जोत वाले किसान पुराने तरीके अपनाते हैं या किराए पर मशीनों से अपनी खेती का काम कराते हैं.

ऐसी स्थिति में खेती की मशीनों को छोटे किसानों तक पहुंचाना एक मुश्किल भरा काम है.

आज हरित क्रांति का दौर है. ऐसे समय में किसानों की पहुंच कृषि यंत्रों तक होनी चाहिए, जिस से वे कम समय और कम लागत में अपनी फसल से अच्छा मुनाफा ले सकें.

सरकार भी किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देती है, जिस का फायदा किसान उठा रहे हैं और अनेक छोटेबड़े मशीन निर्माता किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेती से जुड़ी मशीनें बना रहे हैं.

इसी बाबत हमारी बात बलविंदर सिंह से हुई, जो किसानों की जरूरत को ध्यान में रख कर कई तरह के कृषि यंत्रों को बना रहे हैं, जिन्हें आम किसान भी आसानी से खरीद कर अपनी खेती की पैदावार बढ़ा सकते हैं. इस के साथ ही दूसरे किसानों का खेती का काम कर के भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.

‘मघर सिंह भजन सिंह एंड संस’ के मालिक बलविंदर सिंह ने बताया कि हम 1952 से कृषि की मशीनें बना रहे हैं और हमारे नाम से ही मशीनें बिक जाती हैं. मशीनों की कीमत ऐसी कि किसान आसानी से खरीद सकें, हमारी बनाई मशीनों की कीमत 10 हजार रुपए से शुरू होती है.

उन्होंने आगे बताया कि वे लगभग 10-12 तरह की मशीनें बना रहे हैं, जिन में कल्टीवेटर, सीडड्रिल, ट्रौली, ग्रास कटर, डिस्क प्लग, डिस्क हैरो व टैंकर आदि हैं.

कल्टीवेटर है खास : बलविंदर सिंह का कहना है कि हमारे बनाए कल्टीवेटर की खासी मांग है. हम 2 तरह के कल्टीवेटर बनाते हैं. पहला कल्टीवेटर सिंगल स्प्रिंग वाला है, जिस का वजन 9 से 13 टन तक होता?है, जिस में हैवी ड्यूटी पाइपों का इस्तेमाल किया गया है. दूसरा कल्टीवेटर पडलर है. इस के द्वारा खेत तैयार करने पर समय और पानी की बचत होती है.

ट्रैक्टर ट्रौली : हमारी कंपनी सिंगल जैक व डबल जैक वाली ट्रौली बनाती है. ट्रौली को जैक की मदद से अपनी जरूरत के अनुसार उठाया या झुकाया जा सकता?है. सिंगल जैक वाली ट्रौली का साइज 10×13 फुट व डबल जैक वाली ट्रौली का साइज 13×18 फुट है.

ग्रास कटर : स्टब मास्टर के नाम से मशहूर ग्रास कटर का वजन लगभग 315 किलोग्राम है, जिस की कार्य क्षमता 5 फुट एरिया तक है.

डिस्क हैरो : इस हैरो का साइज 7×7 से ले कर 11×11 फुट तक है. यह मजबूत एंगलों से बना है और डिस्क का साइज 24 इंच है.

टैंकर : 1500 लीटर से ले कर 4 हजार लीटर तक टैंक भी हमारी कंपनी द्वारा बनाए जाते हैं, जिन्हें पानी के टैंकर या तेल के टैंकर वगैरह के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

बलबिंदर सिंह ने बताया कि हमारी मशीन की पहुंच पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार व राजस्थान जैसे अनेक राज्यों में है. हम मशीनें उच्च क्वालिटी के मैटीरियल से बनाते हैं. खुद अपनी निगरानी में मशीनों का निर्माण कराते हैं. किसान हमारी मशीनों का इस्तेमाल कर के मुनाफे में ही रहेंगे.

अगर आप भी इन की मशीनों से जुड़ी ज्यादा जानकारी चाहते हैं, तो बलबिंदर सिंह के फोन नंबर 09815099844 और गुरपाल सिंह के नंबर 08146806669 पर बात कर सकते हैं. इस के अलावा इन की फैक्टरी ‘मघर सिंह भजन सिंह एंड संस’ के नंबर 0161-5057844 पर भी जानकारी ले सकते हैं.

 

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