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नरगिस के लिए आसान नहीं संजीदा किरदार निभाना

अमरीकन मॉडल और अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने बालीवुड में फिल्म ‘‘रॉक स्टार’’ से कदम रखा था. उसके बाद से वह ‘‘मद्रास कैफे’’, ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’, ‘मैं तेरा हीरो’ जैसी फिल्में कर चुकी हैं. सफल फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ के रिलीज होने के पूरे दो साल बाद वह फिल्म ‘‘अजहर’’ में नजर आयी. मगर इस फिल्म ने बाक्स आफिस पर पानी नहीं मांगा. यह एक अलग बात है कि फिल्म ‘‘अजहर’’ करते समय इसके कई दृश्यों ने उन्हे काफी प्रभावित किया था.
बहरहाल, फिल्म ‘‘अजहर’’ के रिलीज से दो दिन पहले जब नरगिस फाखरी से खास मुलाकात हुई थी, तो ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बात करते हुए नरगिस फाखरी ने इस बात का जिक्र किया था कि किस किरदार ने उनकी जिंदगी पर क्या असर डाला.

‘‘सरिता’’ पत्रिका से नरगिस फाखरी ने कहा था-‘‘फिल्म ‘रॉक स्टार’ के किरदार ने मेरी जिंदगी पर असर किया. यह एक दुःखद कहानी थी. इसके जो इमोशन थे, उनका मुझ पर प्रभाव पड़ा था. पर इसका मेरी निजी जिंदगी पर किस हद तक असर हुआ था, यह कहना मुश्किल है. इसके साथ ही फिल्म ‘मद्रास कैफे’ जैसी संजीदा व गंभीर फिल्म ने भी असर किया. फिल्म ‘अजहर’ करते समय कुछ दृश्यों ने मुझे प्रभावित किया. क्योंकि मुझे भी पता था कि यह सत्य घटनाक्रम है.’’

जब कोई किरदार आपकी निजी जिंदगी पर प्रभाव डालता है, तो उससे खुद को हटाने के लिए क्या प्रयास करती हैं? मेरे इस सवाल पर नरगिस फाखरी ने कहा था-‘‘यह बहुत कठिन होता है. ‘रॉक स्टार’ के समय मैं अपने परिवार से दूर मुंबई में थी. फिल्म में दुःखद किरदार था. तो उस समय खुद को अलग करना बहुत कठिन था क्योंकि हम ऐसी स्थिति में अपने दोस्तों से बातें करते हैं. पर उस वक्त मेरा यहां कोई दोस्त भी नहीं था. जब मैं फिल्म ‘मद्रास कैफे’ कर रही थी,त ब भी बहुत तकलीफ हुई थी. ऐसे समय हम योगा और मेडीटेशन का सहारा लेते हैं. ‘अजहर’ से ध्यान हटाना असान रहा. क्योंकि ‘अजहर’ की शूटिंग खत्म होते ही मैने कॉमेडी फिल्म ‘हाउसफुल 3’ की शूटिंग करनी शुरू कर दी थी.’’

जॉनी बावेजा का सेक्स स्कैंडल या पब्लिसिटी स्टंट

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर फिल्म अभिनेता हरमन बावेजा के भाई, अभिनेता व निर्माता जॉनी बावेजा का सेक्स स्कैंडल वाला वीडियो वायरल हुआ है. मजेदार बात यह है कि इस वीडियो को मेरे साथ साथ कई पत्रकारों के पास ‘ईमेल’ से भेजा भी गया. जबकि जॉनी बावेजा की तरफ से कहा जा रहा है कि यह वीडियो किसी ने चोरी करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है. इस वीडियो में नजर आ रहा है कि किस तरह बेडरूम के अंदर एक अनजालन लड़की के संग जबरदस्ती सेक्स संबंध बनाने का प्रयास कर रहे हैं.

इस वीडियो के वायरल होने के बाद से जॉनी बावेजा सफाई देते हुए कहते फिर रहे हैं-‘‘मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि यह फुटेज कैसे लीक हुआ. इस वीडियो में मेरा ही चेहरा है, मगर यह वीडियो सोशल मीडिया पर कैसे वायरल हुआ, यह बात मेरी समझ से परे है. क्योंकि यह वीडियो देखकर मैं खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं. वास्तव में मैं एक फिल्म कर रहा हूं. उसी फिल्म के एक सीन के रिहर्सल का यह वीडियो है. जो कि बहुत ही ज्यादा निजी वीडियो है.’

सूत्रों की माने तो यह जॉनी बावेजा का खुद का पब्लिसिटी स्टंट है. उन्होने खुद ही इस तरह का सेक्स स्कैंडल नजर आने वाला वीडियो फिल्माने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल किया. फिर ईमेल से कुछ पत्रकारों तक भिजवाया और अब अनजान बनकर सफाई देते फिर रहे हैं. क्या जॉनी बावेजा हर किसी को मूर्ख और खुद को अति बुद्धिमान समझते हैं? उधर बौलीवुड में सवाल उठाया जा रहा है कि मशहूर फिल्मकार हैरी बावेजा के बेटे जॉनी बावेजा के पास क्या खुद को सुर्खियों में लाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था?

एटीएम कार्ड होल्डर्स के लिए खुशखबरी

हममें से ज्यादातर लोग एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और जिनका बैंक में खाता होता है उनके पास एटीएम भी होता ही है. लेकिन एटीएम का एक और फायदा है. ये वो जानकारी है जो आपके बेहद काम की है. यदि किसी भी सरकारी या गैर सरकारी बैंक का एटीएम आपके पास है तो आपका उस बैंक में अपने आप ही दुर्घटना बीमा हो गया है. ये बीमा 25,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का होता है. इस योजना को शुरु हुई कई साल हो गए हैं लेकिन 90-95% लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं है क्योंकि बैंक कभी खुद ये जानकारी ग्राहकों को नहीं देते हैं.

इस स्कीम के मुताबिक आंशिक विकलांगता से लेकर मृत्यु होने तक अलग अलग तरह के मुआवजे का प्रावधान दिया गया है. इसके लिए एटीएम धारक को कोई पैसा भी जमा नहीं कराना होता है. बस यदि आपके पास एटीएम है तो उस बैंक में ऑटोमैटिक दुर्घटना बीमा का फायदा आपको मिल सकता है. नियम ये है कि अगर एटीएम धारक की किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है तो उसके घरवालों को उस बैंक से मुआवजा मिलेगा. ये योजना बैंक के ग्राहकों के लिए ही होती है लेकिन बैंक कभी भी इस बात की जानकारी ग्राहक को नहीं देते.

जानें किस स्थिति में कितना मिल सकता है मुआवजा

अगर आपके पास साधारण एटीएम है तो 1 लाख रुपये तक का मुआवजा परिवार वालों को मिलेगा और अगर कार्ड मास्टरकार्ड है तो ये मुआवजा 2 लाख रुपये तक हो सकता है. आंशिक विकलांगता की सूची में अगर एक हाथ या एक पैर खराब होता है तो बैंक से 50,000 रुपये का मुआवजा मिल सकता है. वहीं दोनों हाथ या दोनों पैर खराब होने की सूरत में भी 1 लाख रुपये का मुआवजा एटीएम धारक को मिल सकता है.

अलग-अलग एटीएम टाइप पर अलग-अलग बीमा राशि

मास्टर कार्ड धारक को 50 हजार रुपये का बीमा और क्लासिक एटीएम पर 1 लाख रुपये तक का बीमा होता है. सभी वीजा कार्ड पर 2 लाख रुपये का बीमा और मास्टर मित्र कार्ड पर 25 हजार रुपये का बीमा होता है. वहीं प्लैटिनम कार्ड पर 2 लाख रुपये और मास्टर प्लैटिनम कार्ड पर 5 लाख रुपये तक का बीमा आपको बैंक से मिल सकता है.

 

फेसबुक: मुट्ठी में जहां

नेहा सोचती थी कि अगर वह फेसबुक से जुड़ेगी तो उस की पर्सनल लाइफ सब के सामने उजागर हो जाएगी. इसी कारण उसे फेसबुक पसंद न था बल्कि उस के फ्रैंड्स उसे फेसबुक से जुड़ने को कहते तो वह इसे टाइम वेस्ट बताती.
नेहा पढ़ाई में अपने अन्य फै्रंड्स के मुकाबले काफी होशियार थी. एक बार उन्हें डिफरैंट प्रोजैक्ट्स पर काम करने को मिला. नेहा ने अपनी सोच के अनुसार प्रोजैक्ट पर अच्छा काम किया, लेकिन उस में उस का सिर्फ अपना ही नजरिया था. उस के बाकी सभी फ्रैंड्स ने अपने विचारों के साथसाथ उस में फेसबुक के माध्यम से मिली बाकी लोगों की राय भी जोड़ दी. जिस कारण वे नेहा से बाजी मार ले गए. नेहा भूल गई थी कि रिसर्च वर्क में सिर्फ अपनी राय ही काम नहीं आती बल्कि अलगअलग विचारों को जोड़ना ज्यादा अच्छा रहता है.

नेहा जैसे अधिकांश युवा यही सोचते हैं कि फेसबुक सिर्फ चैटिंग व फोटोज अपलोड करने का माध्यम है, लेकिन ऐसा नहीं है. फेसबुक तो आज एक ऐसा सोशल प्लेटफौर्म बन गया है, जहां आप मस्ती करने के साथसाथ अपना व दूसरों का भी ज्ञान बढ़ा सकते हैं. यहां तक कि आपदाओं के समय भी सोशल नैटवर्क के जरिए एक बड़ा प्लेटफौर्म तैयार किया जा सकता है.

क्यों खास है फेसबुक

अपनों से जोड़े रखे

यूथ पर आजकल पढ़ाई व जौब का इतना अधिक तनाव है कि वे हर रोज किसी से मिलने के लिए समय नहीं निकाल पाते. ऐसे में अगर हमारा अधिक दिन तक किसी से संपर्क टूटता है तो रिलेशन में दूरियां न चाहते हुए भी बन जाती हैं. ऐसे में सोशल मीडिया हमें अपनों से जोड़े रखता है. भले ही हम कितने ही बिजी क्यों न हों, लेकिन फेसबुक के लिए समय तो निकाल ही लेते हैं, जिस के जरिए हम अपने करीबियों का हालचाल पूछ सकते हैं. यहां तक कि उन के जीवन में क्या कुछ खास चल रहा है इस की जानकारी भी फेसबुक पर उन के द्वारा अपलोड किए फोटोज से मिल जाती है.

एक प्रौब्लम, हजार सौल्यूशन

अपनी प्रौब्लम खुद ही झेलते रहने से जहां तनाव पैदा होता है, वहीं प्रौब्लम का सही सौल्यूशन भी नहीं मिल पाता. ऐसे में फेसबुक पर जहां आप की फ्रैंडलिस्ट में ढेरों फ्रैंड्स जुड़े होते हैं, आप अपनी  प्रौब्लम जिसे आप काफी दिन से झेल रहे हैं को फेसबुक के माध्यम से साझा भी कर सकते हैं. जैसे अगर आप की प्रौब्लम है कि आप डाइटिंग करने के बावजूद अपना वजन नहीं घटा पा रहे हैं, जिस से आप का कौन्फिडैंस लूज हो रहा तो ऐसे में आप को फै्रंड्स के ढेरों सुझाव मिल जाएंगे. हो सकता है कि आप को इस प्रौब्लम पर डाइटीशियन की सलाह भी मिल जाए जो आप के काफी काम आए. फेसबुक सिर्फ मस्ती का साधन नहीं बल्कि प्रौब्लम्स का बैस्ट सौल्यूशन मिलने में भी काफी मददगार है.

दूरदराज रहने वालों से भी लिंक

आज टैक्नोलौजी ने दूरियों को नजदीकियों में बदल दिया है. अब हमें टैक्नोलौजी इस बात का एहसास ही नहीं होने देती कि हमारे भाईबहन हम से दूर विदेश में हैं, क्योंकि जब भी हमें उन की याद सताती है तो हम औनलाइन हो कर न सिर्फ उन से चैटिंग कर सकते हैं बल्कि फेसबुक के वीडियो कौलिंग फीचर के जरिए एकदूसरे को देख भी सकते हैं. हमारे फेस ऐक्सप्रैशंस हमारे मन की फीलिंग्स को साफ दर्शा देते हैं. इस तरह फेसबुक के जरिए हमारी एकदूसरे से कनैक्टिविटी भी बनी रहती है.

डिप्रैशन से भी नजात

युवाओं की जिंदगी में ब्रेकअप आम बात हो गई है, लेकिन ब्रेकअप जैसी स्थिति से उबरने में उन्हें लंबा समय लग जाता है. इस दौरान उन्हें महसूस होता है जैसे उन की जिंदगी थम सी गई है. ऐसी स्थिति में फेसबुक उन का अच्छा दोस्त साबित होता है.अत: ऐसे में अकेले रहने से अच्छा है फेसबुक से जुड़ना. उस पर नएनए दोस्त बनाएं. हो सकता है कि आप का कोई ऐसा दोस्त बन जाए जो आप को उस दर्द से बाहर निकालने में मददगार हो.जब आप खुद को इस तरह व्यस्त रखेंगे तो आप को पुरानी बातें भूलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा और आप की जिंदगी फिर से सामान्य हो जाएगी.

जीवनसाथी मिलना भी संभव

जिस फै्रंड से आप फेसबुक के जरिए लंबे समय से जुड़े हुए हैं, वही फै्रंड जब आप को खुद से भी ज्यादा प्यारा लगने लगे तो जिंदगी रंगीन हो जाती है. ऐसा ही कुछ इश्ति के साथ भी हुआ. उसे फेसबुक पर एक युवक ने फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. दिखने में वह काफी हैंडसम  लग रहा था, इसलिए इश्ति ने उस का औफर ऐक्सैप्ट कर लिया. शुरुआत में दोनों के बीच बहुत कम बातें होती थीं, लेकिन धीरेधीरे दोनों एकदूसरे की जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बन गए. यहां तक कि उन्होंने एकदूसरे की खूबियों को जान कर शादी का फैसला भी ले लिया यानी उन की फेसबुक की दोस्ती ने उन की जिंदगी में खुशियां भर दीं. इश्ति अकेली ऐसी युवती नहीं है बल्कि उस जैसी और भी कई युवतियां हैं जिन्हें फेसबुक के जरिए अपना हमसफर मिला है.

फेसबुक करता है ग्रूमिंग

अगर आप काफी सिंपल लुक वाली युवती हैं और आप को ड्रैस, मेकअप आदि की जरा भी सैंस नहीं है जिस कारण आप अटै्रक्टिव नहीं दिख पातीं तो ऐसे में फेसबुक आप की ग्रूमिंग करता है. जब आप अपनी जैसी फिजीक वाली युवती के फोटो फेसबुक पर देखती हैं, जिन में उस ने भले ही सिंपल से कपड़े पहने हों, लेकिन उस के साथ ऐक्सैसरीज का कौंबिनेशन साथ में डिफरैंट हेयरस्टाइल बनाया हुआ हो, जिस से उस का लुक बिलकुल अलग लग रहा हो और उसे ढेरों लाइक्स भी मिले हों, तो ऐसे में आप भी उस से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएंगी. इस तरह फेसबुक आप को खुद को बदलने का मौका देता है.

लाइक्स से बढ़े कौन्फिडैंस

ह्यूमन नेचर होता ही ऐसा है जब हमें किसी की तारीफ मिल जाती है तो हम फूले नहीं समाते और उस से हमारा कौन्फिडैंस भी बढ़ता है. जैसे अगर हम ने कोई नई ड्रैस खरीदी और उसे पहन कर किसी पार्टी में जा रहे हैं तो हम मन ही मन यह सोच कर परेशान हो जाते हैं कि हम अच्छे दिख रहे हैं कि नहीं. लेकिन अगर हम उस ड्रैस को पहन कर फोटो शूट कर के उसे फेसबुक पर अपलोड करें और फिर लाइक्स का इंतजार करें तो अंदाजा लग जाएगा कि इस ड्रैस में हम अच्छे लग रहे हैं कि नहीं. इस से आप का कौन्फिडैंस खुद ब खुद बढ़ जाएगा.

गुड कैरियर औपर्च्युनिटी भी

भले ही आप अपनी फील्ड के बारे में सबकुछ जानते हों, लेकिन जब तक आप के हुनर के बारे में लोगों को पता नहीं चलेगा, तब तक आप को गुड कैरियर औपर्च्युनिटी नहीं मिल पाएगी. इसलिए आप अपने कैरियर व अपनी क्षमताओं के बारे में फेसबुक पर बताएं. जैसे आप लेख लिखते हैं तो उन्हें अपने फै्रंड्स के साथ शेयर करें. हो सकता है कि आप के लेख को कोई ऐसा व्यक्ति पढ़ ले जिस से आप के कैरियर को नई दिशा मिल जाए. जैसे निशा को मिली. स्टार प्लस पर ‘निशा और उस के कजिन’ सीरियल के डायरैक्टर ने उसे देखते ही ऐक्ंिटग के लिए बुला लिया. उस समय उस को अंदाजा भी नहीं था कि फेसबुक से उस के कैरियर को नई दिशा मिलेगी.

इन्फौर्मेशन कलैक्शन का जरिया भी

आप की अगर किसी नए शहर में नौकरी लगी है और आप यही सोच कर परेशान हैं कि कैसे वहां खानेपीने की व्यवस्था होगी, किस जगह ठहरा जाए, रूम कैसे मिलेगा, तो ऐसे में आप को परेशान होने की जरूरत नहीं, बल्कि आप अपनी पोस्ट में डाल दें कि आप को फलां शहर के बारे में जानकारी चाहिए. हो सकता है कि आप की फ्रैंडलिस्ट में कोई ऐसा फैं्रड हो जो वहां का ही रहने वाला हो, जिस से आप को बहुत महत्त्वपूर्ण जानकारी मिल जाए और वहां जाने पर वह आप के काम आए.

सरप्राइज का जरिया भी

अगर आप अपने फ्रैंड से बहुत दूर हैं और उसे उस के बर्थडे पर गिफ्ट नहीं दे पा रहे हैं तो उसे फेसबुक के जरिए सरप्राइज दें. आप दोनों ने जो पल साथसाथ बिताए उस का कोलाज बना कर उस के बर्थडे वाले दिन उसे फेसबुक पर पोस्ट करें. आप के इस यूनीक गिफ्ट को देख कर वह खुशी से फूला नहीं समाएगा.

बिजनैस प्रमोशन का जरिया

फेसबुक के माध्यम से आप अपने बिजनैस को प्रमोट भी कर सकते हैं. जैसे अगर आप ने टिफिन सिस्टम शुरू किया है और आप के पास अपने नए बिजनैस का प्रचार करने के लिए पैसे नहीं हैं तो आप फेसबुक पर शब्दों और इमेज के माध्यम से अपना छोटा सा विज्ञापन तैयार कर लोगों तक अपने प्रौडक्ट या बिजनैस की इन्फौर्मेशन पहुंचा सकते हैं. इस से निश्चित ही आप को बिजनैस में फायदा होगा.

औनलाइन विज्ञापनों की भरमार से न हों परेशान

नैटसर्फिंग आज हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. बैडरूम तक इंटरनैट अपनी पैठ बना चुका है. इंटरनैट की दुनिया से आज कोई भी अनजान नहीं है, चाहे वह स्टूडैंट हो, किसान हो, गृहिणी हो या फिर रिकशा चालक. विभिन्न देशीविदेशी कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने इंटरनैट बाजार के लिए भारत में एक बड़ा प्लेटफौर्म तैयार किया है. यह सुविधा आज सहज ही सब के लिए उपलब्ध है. एक सर्वे के अनुसार 18 से 30 वर्ष की उम्र के 60% से भी ज्यादा युवा अपने कीमती 3-4 घंटे इंटरनैट सर्फिंग, चैटिंग, व्हाट्सऐप, यूट्यूब इंस्टाग्राम, गूगल और अन्य इंटरनैट से जुड़ी साइट्स पर बिताते हैं, जिस में ज्यादातर समय विभिन्न एजेंसियों से जुड़े औनलाइन विज्ञापनों को देखने में बीतता है. हैरानी की बात है कि हम इन की लगातार अनदेखी करते हैं.

नैटसर्फिंग के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन के किसी कोने में, पौपअप बौक्स के साथ दिखने वाले ये विज्ञापन किसी हद तक आप को परेशान कर सकते हैं. सवाल यह है कि हम सभी इसे फुजूल की सिरदर्दी समझते तो हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कभी भी इस से छुटकारा पाने की तरकीब नहीं सोचते. ऐसे लाखों नैटसर्फर हैं जो इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं और मुसीबत भी इतनी बड़ी कि अगर एक बार स्क्रीन पर दिखने वाले किसी विज्ञापन को क्लिक कर दिया तो फिर परेशानियां शुरू. ये नैटऐड लगातार आप का पीछा करते रहते हैं जब तक कि आप खीज कर अपना सिस्टम शट डाउन न कर दें.

क्या है नैटऐड

‘सेवनैट ऐड’ यह एक ऐसा ट्रर्म है जिसे जानना हमारे लिए बेहद जरूरी है. गूगल क्रोम या फिर इंटरनैट ऐक्सप्लोरर और मोजिला फायरफौक्स खोलते ही हमारे ब्राउजर में जो विज्ञापन दिखाई देते हैं उन्हें सेवनैट ऐड कहते हैं. यही सेवनैट ऐक्सटैंशन हमारे ब्राउजर में ढेर सारे अनवांटेड ऐड्स के लिए जिम्मेदार हैं. ये ब्राउजर ऐक्सटैंशन किसी विशेष वैबसाइट के जरिए विज्ञापन को प्रमोट करने के लिए पौपअप का प्रयोग करते हैं. इन विज्ञापनों के जरिए मोटी कमाई के लिए वैबट्रैफिक के इस्तेमाल से सेवनैट ऐड को एक टूल के रूप में प्रयोग किया जाता है. सेवनैट जैसे हजारों ब्राउजर ऐक्सटैंशन हैं, जो लगातार विज्ञापनों के माध्यम से न केवल आप की जेब ढीली करते रहते हैं बल्कि आप को मानसिक परेशानियां भी देते हैं. ऐसे ब्राउजर डैवलप ही सिर्फ इसलिए किए जाते हैं कि उन के जरिए विज्ञापन प्रचारितप्रसारित कर पैसे बनाए जाएं. इन का उद्देश्य सिर्फ यही नहीं बल्कि ऐसे अनवांटेड ब्राउजर ऐक्सटैंशन आप के ब्राउजिंग बिहेवियर की न केवल पड़ताल करते हैं बल्कि आप के इंटरनैट इस्तेमाल करने के घंटों, साइट्स की चौइस, आप के द्वारा मोस्ट सर्फिंग वैबसाइट्स आदि की चुपके से जासूसी भी करते हैं, मतलब विज्ञापन के बहाने आप की सर्फिंग हैबिट पर चोरीछिपे निगरानी भी रखते हैं.

कहां होती है चूक

अपनी इंटरनैट हैबिट के चलते कई बार हम बिना सोचेसमझे जिज्ञासावश ऐसे कई पौपअप बौक्स को क्लिक कर देते हैं जो बाद में परेशानी का सबब बनते हैं. दरअसल, ब्राउजर पर हमें अंडरलाइन कीवर्ड दिखते हैं जिन में पौपअप विज्ञापन और अन्य अनचाहे विज्ञापन जुड़े होते हैं. ये पौपअप विभिन्न बड़ी कंपनियों के ब्रैंड, औफर, डील्स और कूपन आदि से ले कर जावा और फ्लैश प्लेयर तक औफर करते हैं. दरअसल, जैसे ही आप इन पौपअप्स पर एक बार क्लिक करते हैं, आप को अपने सिस्टम पर मीडिया प्लेयर, जावा फ्लैश प्लेयर आदि अपडेट करने के औप्शन दिए जाते हैं और आप उन्हें जानने और देखने के चक्कर में बस, उसे फौलो करते जाते हैं. सारी समस्या यहीं से शुरू होती है.

करें ऐडब्लौक ऐक्सटैंशन का प्रयोग

लगभग सभी बड़े ब्राउजर्स के लिए ऐड ब्लौक करने वाला ऐक्सटैंशन उपलब्ध है. इन ऐक्सटैंशन के माध्यम से हम वैबसाइट पर दिखाए जाने वाले ऐड को न केवल डिटैक्ट कर सकते हैं बल्कि उन्हें रिमूव भी कर सकते हैं. हालांकि विज्ञापनों को रिमूव करते वक्त आप को वैबसाइट देखने में कुछ परेशानी आ सकती है पर आप फिक्र न करें. उन्हें रिमूव जरूर करें. पर शर्त यह है कि आप के पास इन विज्ञापनों को ब्लौक करने वाला ऐक्सटैंशन कोड मौजूद हो. यहां कुछ लोकप्रिय ऐडब्लौक ऐक्सटैंशन दिए जा रहे हैं, जिन का उपयोग कर आप इन समस्याओं से बच सकते हैं :

–       इंटरनैट ऐक्सप्लोरर-ऐडब्लौक प्लस.

–       क्रोमियम (गूगल क्रोम)-ऐडब्लौक, ऐडब्लौक प्लस, यूबीब्लौक.

–       आइसकैट (फायरफौक्स), गूजिला (सीमौंकी)- ऐडब्लौक प्लस, ऐडब्लौक एज.

–       सफारी-ऐडब्लौक, यू ब्लौक.

कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय हमें हमेशा औनलाइन ऐक्टिविटीज पर ध्यान देना चाहिए, साथ ही जब कुछ इंस्टौल कर रहे हों तो और भी अलर्ट रहने की जरूरत है. हमेशा औफिशियल वैबसाइट से ही डाउनलोड करने की आदत डालें. कोशिश यह करें कि इंस्टौलेशन के समय ऐडवांस और कस्टमाइजेशन बटन ही हमारी पहली प्राथमिकता हो, तभी हम नैट वायरस से अपने सिस्टम को बचा पाएंगे और बिना ऐड वैबसाइट विजिटिंग का भी लुफ्त उठा पाएंगे.         

इन स्टैप्स को फौलो करें :

–       कभी भूल कर भी ब्राउजर पर दिखने वाले पौपअप्स को क्लिक न करें.

–       अपने कंप्यूटर पर किसी भी सौफ्टवेयर को इंस्टौल करने से पहले ऐंड यूजर लाइसैंस एग्रीमैंट को एक बार जरूर पढ़ें.

–       इंस्टौलेशन के दौरान कभी भी जल्दबाजी न दिखाएं, मतलब नैक्स्ट बटन पर जल्दी क्लिक न करें. इस से अनवांटेड ब्राउजर भी इस्तेमाल होने के चांस रहते हैं.

–       यदि इंस्टौलर आप को कोई ऐडवांस या कस्टम औप्शन बटन औफर करता है, तो उसे क्लिक कर के पता करें कि इंस्टौलेशन की प्रक्रिया के दौरान कोई अन्य फालतू या अनचाहा सौफ्टवेयर तो इंस्टौल नहीं हो गया.

–       बहुत सी साइट्स सिर्फ विज्ञापनों से होने वाली आमदनी के लिए ही औनलाइन रहती हैं. यदि आप अकसर किसी को विजिट करते हैं तो उसे  ऐडब्लौकर व्हाइट लिस्ट में शामिल करें. इस से आप के उस साइट पर विजिट करने के बावजूद, उस की आमदनी रुक जाएगी. ऐडब्लौकर वैबसाइट से एक साधारण क्लिक के जरिए ऐडब्लौकर को डाउनलोड किया जा सकता है.

फ्रेंच ओपन: पेस-हिंगिस ने जीता मिक्स डबल्स खिताब

भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस और स्विट्जरलैंड की उनकी जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस ने फ्रेंच ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीतकर करियर स्लैम पूरा किया.

फाइनल में दो भारतीय पेस और सानिया मिर्जा आमने सामने थे. टाई-ब्रेकर में गए मुकाबले में पेस-हिंगिस ने भारत की सानिया मिर्जा और क्रोएशिया के इवान डॉडिग की जोड़ी को 4-6, 6-4 और 10-8 से हराया. ये पेस का 18वां ग्रैंड स्लैम खिताब है. मैच के पहले सेट से ही दोनों भारतीय खिलाड़ी एक-दूसरे को जोरदार टक्कर देते दिखे. पहले सेट में एक पल 4-4 की बराबरी पर मैच चला गया. यहां सानिया-डॉडिग की जोड़ी ने लगातार दो गेम जीते और सेट 4-6 से अपने नाम किया.

दूसरे सेट में पेस का सर्व शानदार रहा और वापसी करते हुए पेस-हिंगिस की जोड़ी ने 5-3 की बढ़त बना ली और सेट 6-4 से जीत लिया. टाई-ब्रेकर में भी मुकाबला बराबरी का देखा गया. यहां पेस-हिंगिस और सानिया-डॉडिग के टाई-ब्रेकर 5-5 की बराबरी पर स्कोर गया. पेस-हिंगिस ने टाई-ब्रेकर को 10 के मुक़ाबले 8 प्वाइंट्स से जीता और चैंपियन बन गए.

पेस और हिंगिस ने पिछले साल विंबलडन और यूएस ओपन के अलावा इस साल के शुरू में ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब भी जीता था और इस तरह से वे करियर स्लैम पूरा करने में सफल रहे.

पेस ने अपने कॅरियर में पहली बार फ्रेंच ओपन का मिश्रित युगल का खिताब जीता. यह उनका ग्रैंडस्लैम में ओवरआल दसवां खिताब है. वह अब कुल 18 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं जिनमें आठ पुरूष युगल के खिताब शामिल हैं.

फ्रेंच ओपन में वर्ष 2012 की मिश्रित युगल चैंपियन सानिया और पेस ने गुरुवार रात सेमीफाइनल मुकाबले जीतकर दो भारतीयों के बीच मुकाबले की नींव रखी थी. पेस ने इस जीत से ओलंपिक में मिश्रित युगल में सानिया का जोड़ीदार बनने के अपने दावे को भी मजबूत कर दिया है.

पेस पुरुष युगल में पहले ही कॅरियर स्लैम पूरा कर चुके थे और अब उन्होंने मिश्रित युगल में भी यह कारनामा करके भारतीय खेलों में नया इतिहास रचा. उन्होंने अपना यह खिताब अपने पिता और पूर्व हाकी खिलाड़ी वेस पेस को समर्पित किया.

पेस ने कहा कि कॅरियर ग्रैंडस्लैम एक व्यक्ति को समर्पित है और वह मेरे पिताजी हैं. मैं आपसे प्यार करता हूं और मुझे जिंदगी में सब कुछ देने के लिये आपका आभार. उन्होंने अपनी साथी हिंगिस और प्रतिद्वंद्वी टीम की भी तारीफ की. पेस ने कहा कि यह कोर्ट आपके (हिंगिस के) साथ साझा करके वास्तव में खुशी हो रही है. आप (सानिया और डॉडिग) बेजोड़ चैंपियन हो. जिस तरह से आप यहां तक पहुंचे वह अविश्वसनीय है.

दोनों टीमों ने शुरू से ही एक दूसरे को कड़ी चुनौती दी. पहले सेट में लगातार नौ गेम तक उन्होंने अपनी सर्विस बचाये रखी. सानिया और डॉडिग को आखिर में दसवें गेम में ब्रेक प्वाइंट का एक मौका मिला जिसे वे भुनाने में सफल रहे.

लिएंडर पेस के खाते में इस जीत के साथ ही 10 मिक्स्ड डबल्स करियर खिताब हो गए हैं. सानिया 3 मिक्स्ड डबल्स खिताब जीत चुकी हैं, लेकिन यहां वो जीतने में नाकाम रही. सानिया ने 2014 में यूएस ओपन में मिक्स्ड डबल्स ग्रैंड स्लैम का खिताब अपने जोड़ीदार ब्राज़ील के ब्रूनो सुआरेज के साथ जीता था.

कुत्तों के ठाट निराले

स्मार्ट दिखने की चाह सिर्फ इंसानों में ही नहीं होती बल्कि कुत्ते, जो बहुत ही वफादार होते हैं पर बोल नहीं सकते, भी मन ही मन सोचते होंगे कि काश, हम भी अच्छेअच्छे कपड़े पहन कर खूबसूरत दिखते. जब हम सड़कों से गुजरें तो लोग हमें पलट कर देखने पर मजबूर हो जाएं. यहां तक कि जब हमारा शो हो और हम रैंप पर चलें तो लोग ‘वाह क्या कुत्ता है, ऐसा कुत्ता और ऐसी ब्रीड हम ने आज तक नहीं देखी’ कहने पर मजबूर हो उठें.

ऐसी तमन्ना सिर्फ इंसान के मन में ही नहीं बल्कि जानवरों के मन में भी होती है बस, फर्क इतना होता है कि वे अपने मन की बात किसी को बोल कर बता नहीं पाते. कुछ कुत्ते तो इतने खुशनसीब होते हैं कि उन्हें ऐसा मालिक मिल जाता है जो उन्हें पूरे ठाटबाट से रखता है. मालिक उन्हें सिर्फ खानपान ही लाजवाब नहीं देते बल्कि उन्हें फिट व हिट रखने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते. ए वन कपड़े पहनाने में भी पीछे नहीं रहते. ऐसे मालिकों के घर आ कर कुत्ते भी फूले नहीं समाते.

आज घरों में अच्छी से अच्छी ब्रीड का कुत्ता रखना स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है. तभी तो लोग इन्हें खरीदने के लिए लाखों रुपए तक खर्च करने लगे हैं. लाखों कहें तो कम होगा, आज तो अगर उन्हें बेहतर ब्रीड का कुत्ता करोड़ों में भी मिले तो भी वे उसे खरीदने से गुरेज नहीं करते.

कब हुई शुरुआत

कुत्तों के प्रति लोगों की दीवानगी व स्नेह और एक से बढ़ कर एक नस्ल के कुत्तों और उन के टैलेंट से लोगों को रूबरू करवाने के लिए न्यूयार्क में वेस्टमिंस्टर कैनल डौग शो की शुरुआत 1877 में हुई. इस के बाद तो यह शो इतना पौपुलर हो गया कि दुनियाभर के लोग इस के दीवाने हो गए.

अब तो मालिक अपने कुत्ते को इस शो में हिस्सा दिलवाने के लिए हरसंभव कोशिश करते हैं. उन्हें ट्रेनिंग तो बचपन से ही देते हैं लेकिन शो में अच्छा प्रदर्शन करें, इस के लिए पुरजोर प्रैक्टिस भी करवाते हैं.

क्या है वेस्टमिंस्टर डौग शो

यह डौग शो न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित किया जाता है, जिस में दुनियाभर के टौप रैंक्ड कुत्तों, जो ब्रीड वाइज तो बैस्ट हैं ही, दक्ष व आज्ञाकारी भी होते हैं, को ही इन्वाइट किया जाता है.

जिन कुत्तों को यहां इन्वाइट किया जाता है उन के मालिकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता. उन्हें लगता है कि अगर उन का कुत्ता जीत गया तो उस के साथसाथ उन का भी नाम होगा.

समय के साथ हुए बदलाव

2014 से पहले तक सिर्फ ब्रीड के आधार पर ही विजेता घोषित किया जाता था. लेकिन समय के साथ इस शो में परिवर्तन आया और 2014 में वेस्टमिंस्टर में मास्टर्स ऐगिलिटी चैंपियनशिप जोड़ी गई यानी कुत्तों की दक्षता को भी महत्त्व दिया जाने लगा. इस साल तो इस शो में मास्टर्स ओबीडीऐंस चैंपियनशिप को भी जोड़ा गया यानी वह कुत्ता कितना आज्ञाकारी है, इस के भी उन्हें मार्क्स मिलने लगे.

कैसे घोषित होता है विजेता

यह शो हर साल फरवरी में 2 दिन के लिए आयोजित किया जाता है. पहले चरण में अपनी ब्रीड के कुत्तों से मुकाबला किया जाता है और फिर जो अपनी ब्रीड में बैस्ट होता है, वह अपनेअपने ग्रुप को लीड करता है. कुल 7 ग्रुप होते हैं और जो इन में बैस्ट होते हैं वे ही फाइनल के लिए परफौर्म करते हैं. फाइनल में जो अपनी दक्षता और आज्ञाकारी रवैए को दिखाने में सक्षम होता है, वह विजेता बनता है.

2016 का विजेता

2016 के डौग शो के जज डा. रिचर्ड मीन ने जीसीएच वीजेके-माइस्ट गार्बोनिटास कैलिफोर्निया जर्नी को विजेता घोषित किया, जिस की ब्रीड पौइंटर (जरमन शैफर्ड) है और ग्रुप स्पोर्टिंग है. इस की औनर वैलेरि आकिंसन ऐंड ऐलिस मैनिंग ऐंड वाई वोन हैसर हैं.

दर्शकों के लिए नया

दर्शक कुत्तों को न सिर्फ मुकाबला करते हुए देखते हैं बल्कि प्रतियोगिता के शुरू होने से पहले कुत्ते का मालिक जब उसे लुक वाइज मस्त दिखाने के लिए टौप क्लास कपड़े पहनाता है तब भी दर्शक उसे देख पाते हैं.

इस शो के लिए कुत्तों के मालिक अपनेअपने कुत्ते की ट्रेनिंग और ग्रूमिंग पर हजारों डौलर खर्च करते हैं. इस शो का टिकट वेस्टमिंस्टर कैनल क्लब वैबसाइट से खरीदा जा सकता है.

1 करोड़ का कोरियन डोसा

सुन कर आप को भले ही अजीब लगे लेकिन यह हकीकत है. अभी हाल ही में चीन से 1 करोड़ रुपए का कोरियन डोसा भारत लाया गया.

नहींनहीं, यह खाने वाला डोसा नहीं बल्कि कोरियन डोसा मस्टिफ नस्ल का कुत्ता है, जिस की कीमत औडी एस6 और अच्छेखासे स्पेस वाले विला से भी ज्यादा है.

इस नस्ल के कुत्ते की खासीयत इस की लटकी हुई बौडी और बड़ीबड़ी आंखें हैं. इस की सूंघने की क्षमता भी बहुत जबरदस्त है. इस कुत्ते की उम्र भले ही 7 से 12 वर्ष के बीच होती है, लेकिन यह इतना वफादार व स्वभाव से इतना शांत होता है कि हर किसी को इस से प्यार हो जाए. इस के चेहरे की मासूमियत पर हर कोई फिदा हो जाता है.

सतीश एस इस नस्ल के कुत्ते को भारत लाने वाले पहले व्यक्ति हैं. वे बेंगलुरु में इंडियन डौग ब्रीडर एसोसिएशन के प्रधान हैं. उन्हें इस नस्ल के कुत्ते की कई वर्षों से तलाश थी जो अब जा कर पूरी हुई.

2016 का डौग शो

इस बार डौग शो में 2,752 कुत्तों की ऐंट्री हुई, जिस में 199 ब्रीड्स शो के लिए चुने गए. इस बार सब से ज्यादा लैब्राडोर रिट्रीवर्स (51), गोल्डन रिट्रीवर्स (50) और फ्रैंच बुलडौग्स (48) ब्रीड्स को ही प्रवेश मिला, साथ ही इस शो में 7 नई ब्रीड्स देखने को मिलीं.

वेस्टमिंस्टर में भाग लेने वाले कुछ शानदार कुत्ते

लोकी

ब्रीड – लिओनबर्गर.

उम्र – 3 साल.

कैटेगिरी – बैस्ट औफ ब्रीड.

पसंदीदा जगह – मैनहटन के वाटर 4 डौग्स में वंडरफुल पूल में समय बिताना.

हौबी – बिल्लियों के साथ छिपनछिपाई खेलना.

ऐक्सपर्ट – स्विमिंग में.

इसे अपने वाटर बाउल में सोना पसंद है.

 

हीरो

ब्रीड – डोबरमन पिंस्चर.

उम्र – 5 साल.

कैटेगिरी – औल अमेरिकन.

पसंदीदा जगह – ब्रौड चैनल पार्क में स्थित बौलपार्क और बीच.

हौबी – इसे चेस बौल खेलना बहुत अच्छा लगता है.

निकनेम मंकी पस है, क्योंकि यह बहुत ही शरारती है.

 

किंदरा

ब्रीड – स्टैफोर्डशेयर बुल टैरियर.

उम्र – 17 महीने.

कैटेगिरी – बैस्ट औफ ब्रीड.

पसंदीदा जगह – इसे अपने घर के कौर्नर पर स्थित ब्यूटी पार्लर को देखना बहुत पसंद है.

हौबी – जितना मरजी नहला लो.

ऐक्सपर्ट – हाई फाइव्स देने में.

इस की सूंघने की शक्ति बहुत तेज है. अगर इस की पसंदीदा चीज बर्फ के अंदर भी छिपा दें तो जब तक इस की नाक उस की पहचान नहीं कर लेती तब तक यह वहां से बाहर नहीं आते.

विजय माल्या की राह पर अब जेपी ग्रुप

उद्योगपति विजय माल्या के डिफॉल्टर होने के बाद अब जेपी ग्रुप भी मुश्किल में है. जानकारी के मुताबिक कर्ज के दबाव की वजह से जेपी ग्रुप ने बैंकों के 4,460 करोड़ रुपये का पेमेंट डिफॉल्ट कर दिया है. इस 4,460 करोड़ की रकम में करीब 2905 करोड़ रुपये का लोन और करीब 1558 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है.

डिफॉल्ट की गई इस रकम में जयप्रकाश एसोसिएट्स पर करीब 2183 करोड़, जयप्रकाश पावर वेंचर्स पर करीब 688 करोड़ और जेपी सीमेंट पर करीब 34 करोड़ रुपये का कर्ज है. सूत्रों के मुताबिक जयप्रकाश एसोसिएट्स को बकाया कुल लोन के 837 करोड़ रुपये भी चुकाने हैं. जबकि जयप्रकाश पावर वेंचर को 152 करोड़ रुपये और जेपी सीमेंट को 63 करोड़ रुपये चुकाने हैं.

इसके अलावा जेपी इन्फ्राटेक पर 193 करोड़. जेपी आगरा विकास लिमिटेड पर 3 करोड़ और प्रयागराज पावर के साथ प्रयागराज पावर जेनरेशन लिमिटेड पर 308 करोड़ रुपये का ब्याज बकाया है. दरअसल जेपी ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी जेपी एसोसिएट्स को 2015-16 में बड़ा घाटा हुआ है.

जेपी एसोसिएट्स को 2015-16 में 3345 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. साल 2014-15 में भी कंपनी को 1735 करोड़ का घाटा हुआ था. अब देखना यह है कि बैंक और सरकार इस समूह के खिलाफ क्या कदम उठाती है.

 

दुनिया के महानतम मुक्केबाज मोहम्मद अली का निधन

74 साल के दिग्गज मुक्केबाज़ 'द ग्रेट' मोहम्मद अली नहीं रहे. फीनिक्स इलाके के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांसें ली. गौरतलब है कि वह सांस की तकलीफ की वजह से अस्पताल में भर्ती थे. उनके परिवार के एक करीबी सूत्र ने यह जानकारी साझा की थी कि उनकी हालत बहुत ही ज्यादा गंभीर है और उन्हें सांस लेने में बहुत ही ज्यादा परेशानी हो रही है. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार अली को पार्किनसन की बीमारी भी थी जिसने उनकी सांस लेने की समस्या को और ज्यादा गंभीर बना दिया था.

पिछले कुछ सालों में अली को कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया. इससे पहले उन्हें 2015 के शुरू में पेशाब संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. अली तीन बार विश्व चैंपियन रहे हैं. 1964 में पहली बार यह खिताब जीतने के बाद वह 1974 और फिर 1978 में विश्व चैंपियन बने.

पार्किंसन की वजह से सांस लेना था मुश्किल

उनके परिजनों ने उनकी हालत के बारे में बताया था कि पिछली बार जब वह अस्पताल गए थे तब की तुलना में इस बार उनकी समस्या अधिक गंभीर थी. इन लोगों ने बताया कि अली सांस लेने में तकलीफ की समस्या से जूझ रहे थे. जो पार्किंसन की उनकी बीमारी के कारण अधिक जटिल हो गई थी.

1980 में बीमारी का पता चला था

1980 के दशक में उनकी इस बीमारी का पता चला था. अली के एक प्रवक्ता बाब गुनेल ने गुरुवार के शुरू में एक प्रेस रिलीज भेजकर बताया था कि इस पूर्व हैवीवेट चैंपियन के सांस की तकलीफ के कारण एक अज्ञात अस्पताल में इलाज चल रहा था.

पहले हालत सुधरने का था दावा

गुनेल ने कहा था कि इस 74 साल मुक्केबाज की स्थिति ठीक हो रही थी. लेकिन उन्हें कुछ समय अस्पताल में बिताना पड़ रहा था. पिछले कुछ सालों में अली को कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया. इससे पहले उन्हें 2015 के शुरू में पेशाब संबंधी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

अजीत जोगी के जाने का जश्न

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्गज कांग्रेसी अजीत जोगी के कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने के एलान पर राजनीति मे दखल और दिलचस्पी रखने वालों को कोई खास हैरानी नहीं हुई है. उल्टे लोगों को हैरानी इस बात की हो रही थी कि जोगी कांग्रेस छोडने के लिए किस खास मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं या उनके मन में कहीं यह उम्मीद बाकी थी कि सोनिया गांधी की बेरुखी और अनदेखी उन्हें एक सबक सीखने भर की है.

2 जून को जब जोगी ने अलग पार्टी बनाने की घोषणा की, तो रायपुर के कांग्रेस कार्यालय मे आतिशबाजी की गई और कांग्रेसियों ने एक दूसरे के मुंह भी मीठे कराये. इससे सहज समझा जा सकता है छत्तीसगढ़ कांग्रेस उन्हें लेकर किस तरह आजिज़ थी. एक जमाने मे बगैर सोनिया गांधी का फोटो देखे दिन की शुरुआत न करने वाले जोगी की बगावत की वजह सोनिया की अनदेखी और प्रदेश कांग्रेस मुखिया भूपेश बघेल से मरने मारने की हद तक बढ़ गई दुश्मनी है.

गौरतलब है कि अब से कोई 4 महीने पहले एक औडियो टेप उजागर हुआ था, जिसमे अजीत जोगी का विधायक बेटा अमित जोगी मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद से एक उपचुनाव के बाबत सौदेबाजी कर रहा था. प्रदेश कांग्रेस ने इसकी शिकायत आलाकमान से की तो अमित को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, वैसे भी जोगी रमन सिंह के मिठास भरे रिश्ते हमेशा ही चर्चाओं मे रहे हैं. बेटे का निष्कासन रुकवाने जोगी ने सोनिया और राहुल से गुहार लगाई, लेकिन कोई असर नहीं हुआ तो आखिरकार जोगी ने वही फैसला लिया, जो अब तक दिग्गज असंतुष्ट कांग्रेसी लेते रहे हैं, वह है एक अलग पार्टी बनाने का.

लेकिन जोगी की की जमीन और जड़ें ममता बनर्जी या शरद यादव जितनी गहरी और मजबूत नहीं हैं. उनकी ताकत आम आदमी नहीं, बल्कि सोनिया की कृपा हुआ करती थी, जिसके चलते उन्हें इस सूबे का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया था, पर वे कुछ खास कर नहीं पाये, लिहाजा जनता ने उन्हे ठेंगा दिखा दिया. जबकि छत्तीसगढ़ की गिनती कांग्रेस के मजबूत गढ़ों में होती थी, जिस पर एक दफा भाजपा काबिज हुई, तो कांग्रेस उसे फिर हिला नहीं पाई. इधर भूपेश बघेल और टी एस सिंहदेव जैसे दर्जनो नेताओं का दुखड़ा यह था की मेहनत हम करते हैं और श्रेय जोगी ले जाते हैं, पर जब सौदेबाजी उजागर हुई, तो जोगी विरोधी और पीड़ित कांग्रेसी एकजुट हो गए. अब यह इस गुट को साबित करना है कि जोगी की वजह से जनता कांग्रेस को वोट नहीं देती थी.

जोगी को लग यह रहा है कि वे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को हाशिये पर ढकेल बड़ी ताकत बन जाएंगे, तो यह उनकी खुशफहमी ही है, क्योंकि उनके साथ 2-4 प्रभावशाली लोग ही हैं. अलावा इसके उनके असली आदिवासी होने का मामला अभी अदालत में चल रहा है. सुदूर इलाकों बस्तर और रायगढ़ तरफ उनकी पूछ ना के बराबर है. अमित जोगी की इमेज भी बहुत अच्छी  नहीं है, जो चर्चित जग्गी हत्याकांड का आरोपी है. छग कांग्रेस के एक वजनदार नेता ने फोन पर इस प्रतिनिधि को बताया अभी कुछ दिन जोगी का हल्ला रहेगा, लेकिन 4-6 महीने बाद वे घर बैठ जाएंगे, क्योकि तब तक उनका खासा पैसा खर्च हो चुका होगा. हां भाजपा उनकी मदद करे तो थोड़ी परेशानी पार्टी को हो सकती है, लेकिन उससे ज्यादा नुकसान भाजपा को होगा, क्योकि जो आदमी राजनीति मे इज्जतदार मुकाम देने वाली सोनिया गांधी का नहीं हुआ, वह किसी और का क्या होगा. बहरहाल जो भी हो, दुर्दिनों से गुजर रही कांग्रेस को एक और हल्का ही सही झटका तो लगा ही है.    

 

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