Download App

रेल यूनियनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

रेलवे की विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने 11 जुलाई से देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है. कर्मचारियों की मांगों में नई पेंशन योजना तथा 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों की समीक्षा शामिल है.

ऑल इंडिया रेलवेमैन फेडरेशन (एआईआरएफ) के महासचिव एस. गोपाल मिश्रा ने कहा, ‘हम कल रेलवे को यह सूचना देंगे कि हमारी अनिश्चितकालीन हड़ताल 11 जुलाई को सुबह छह बजे से शुरू होगी.’ उन्होंने दावा किया कि सरकार के रवैये के कारण यह हड़ताल अपरिहार्य है. उन्होंने छह महीने पहले अपनी मांगें सरकार के सामने रखी थीं जिन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है यद्यपि उन्होंने अपनी हड़ताल को अप्रैल में टाल भी दिया था.

रेलवे के देशभर में करीब 13 लाख कर्मचारी हैं और कोई भी हड़ताल देशभर में रेलगाड़ियों के परिचालन को प्रभावित करेगी एवं इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. रेलवे के कर्मचारी संगठन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों, नयी पेंशन योजना की समीक्षा के साथ रिक्त पदों पर नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं.

यूरो कप 2016: टूर्नामेंट के 10 नए नियम

फुटबॉल के नए नियमों के साथ यूरो कप 2016 की शुरुआत हो गई. इस टूर्नामेंट में 24 टीमें 6 ग्रुपों में खेलेंगी. इस बार फ्रांस तीसरी बार यूरो कप की मेजबानी कर रहा है. फाइनल मैच 11 जुलाई को खेला जाएगा.

पहला मैच फ्रांस और रोमानिया के बीच खेला गया. फ्रांस को यह जीत मैच के आखिरी मिनटों में दिमित्री पाएत के गोल की वजह से मिली. मैच के 89वें मिनट में दिमित्री ने गोलपोस्ट से 20 यार्ड दूर टॉप कॉर्नर पर दौड़ते हुए बाएं पैर से यह गोल दागा. फर्स्ट हाफ तक दोनों टीमों की ओर से कोई गोल नहीं हुआ था.

इस बार 24 टीमें खेल रही हैं टूर्नामेंट

इस बार 15वीं यूरोपियन फुटबॉल चैम्पियनशिप में पहली बार 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं. पहले इसमें यूरोप की 16 टीमें खेलती थीं. वर्ल्ड कप के बाद फुटबॉल के दूसरे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी फ्रांस कर रहा है. एक महीने तक चलने वाली चैम्पियनशिप में 10 मैदानों पर 51 मुकाबले खेले जाएंगे. स्पेन टीम पिछले दो बार की चैम्पियन के रूप में हिस्सा लेगी. यूरो कप की प्राइज मनी 2271 करोड़ रुपए है. विनर टीम को 204 करोड़ मिलते हैं.

कुछ इस तरह है टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल

ग्रुप मैच :22 जून तक होंगे, 13 दिन में होंगे 36 मैच

नॉकआउट :25, 26, 27 को होंगे, 3 दिन में 8 मैच

क्वार्टर फाइनल :30 जून से 3 जुलाई

सेमीफाइनल :6 और 7 जुलाई

फाइनल :11 जुलाई

ये हैं फुटबाल के 10 नए नियम

जानबूझकर फाउल करने वाला प्लेयर जाएगा मैदान से बाहर

1. पेनल्टी

अब खेल के दौरान मिलने वाली पेनल्टी को पास कर साथी प्लेयर को नहीं दिया जा सकेगा. ऐसा करने वाले को यलो कार्ड मिलेगा. साथ ही विपक्षी टीम को फ्री किक भी मिलेगी. पेनल्टी शूट से पहले अगर गोलकीपर लाइन से आगे आया तो उसे भी यलो कार्ड दिखाया दिया जाएगा.

2. बड़ा फाउल करने वाला खिलाड़ी बाहर

अपने गोलपोस्ट के करीब डी में फाउल करने वाले प्लेयर को अब रेफरी सीधे मैदान से बाहर भेज देगा. बॉल कंट्रोल करने के दौरान हुए फाउल में रेफरी जेब से यलो कार्ड निकालेगा.

3. रेड कार्ड

रेफरी अब मैच खेल शुरू होने से पहले भी किसी प्लेयर को रेड कार्ड दिखा सकते हैं. इसके बावजूद टीम 11 प्लेयर्स के साथ ही फील्ड में उतरेगी. किसी और खिलाड़ी के साथ.

4. इंजरी टाइम

पहले प्लेयर को चोट लगने पर पिच से बाहर जाना पड़ता था. ठीक होने पर रेफरी उसे भीतर आने का इशारा करता था. अब वह 20 सेकंड तक पिच पर रह सकता है. फिजियो की हेल्प से ठीक होने पर तुरंत खेल सकता है.

5. बिना जूतों के

खेल के दौरान जूते के लेस खुलने पर प्लेयर्स को अगले स्टॉप का इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब प्लेयर बिना जूतों और शिन गाडर्स के भी अपना खेल खेलना जारी रख सकते हैं.

6. थ्रो

प्रोफेशनल फुटबॉल में पहले रेफरी गलत थ्रो पर सीटी नहीं बजाता था. लेकिन अब यह नियम सख्ती से लागू होगा. प्लेयर्स को दोनों हाथ से सिर के पीछे से बॉल लाते हुए थ्रो करना होगा. बॉल सिर के ऊपर ही छूटनी चाहिए.

7. फ्री किक

फ्री किक लेने वाली टीम के अटैकिंग प्लेयर अब तक गोलकीपर के सामने होते थे. फ्री किक मिस होने पर इनमें से कोई एक गोल कर देता था. लेकिन अब फ्री किक के दौरान अटैकिंग प्लेयर गोलकीपर के सामने खड़े नहीं होंगे.

8. साइड पास-बैक पास को मंजूरी

अब तक मैच शुरू होने पर बॉल को सिर्फ आगे बढ़ाने का नियम था. लेकिन अब बॉल को साइड पास और बैक पास करने की मंजूरी भी मिल गई है.

9. ड्रिंक्स ब्रेक

रेफरी के पास ड्रिंक्स ब्रेक का समय बढ़ाने की आजादी थी. रेफरी आगे भी ऐसा कर सकेंगे, लेकिन अब उन्हें सेकंड का भी हिसाब रखना होगा. यह समय बाद में एक्स्ट्रा टाइम में शामिल किया जाएगा.

10. अंडरवियर कलर

अब तक प्लेयर्स को टीम के निक्कर के नीचे अपनी मर्जी का अंडरवियर पहनने की इजाजत थी. लेकिन अब प्लेयर्स को टीम के निक्कर के कलर का अंडरवियर पहनना होगा.

व्हाट्सऐप से पीछे क्यों चल रहा है वीचैट?

फेसबुक और व्हाट्सऐप के बारे में हर स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों ने सुना होगा. फेसबुक मैसेंजर भी लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है. लेकिन अगर वही सवाल आप वीचैट के बारे में पूछेंगे, तो लोग उसके बारे में शायद ही जानते होंगे.

दुनिया भर में 76 करोड़ से भी ज्यादा लोग वीचैट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसके बाद भी मैसेजिंग की दुनिया में व्हाट्सऐप बेताज बादशाह है.

व्हाट्सऐप के 100 करोड़ से वो बहुत पीछे नहीं है. अपने स्मार्टफोन पर मानो सभी लोग व्हाट्सऐप को जगह जरूर देते हैं, लेकिन वीचैट के लिए वो जगह बनाना मुश्किल हो रहा है.

चीन के अंदर वीचैट बेझिझक पहले स्थान पर है, लेकिन कई वजहों से वो दुनिया भर में अपनी छाप नहीं बना पा रहा है.

वर्ष 2012 में जब वीचैट अलग-अलग देशों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था, तो हर कहीं किसी न किसी चैट ऐप ने अपनी जगह बना ली थी.

अमरीका में व्हाट्सऐप, इंडोनेशिया में ब्लैकबेरी मैसेंजर और भारत में भी व्हाट्सऐप काफी पसंद किया जाने लगा था.

वीचैट ने चीन पर ध्यान देकर दूसरे देशों में वैसे ही प्रोडक्ट लांच नहीं किए. जैसे कि चीन में अगर आप वीचैट इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसने कई गेमिंग कंपनियों के साथ करार किया है, जिससे कि आप गेम भी खेल सकते हैं. ऐसा दूसरे देशों में नहीं किया गया है.

उसके मुकाबले व्हाट्सऐप ने टेक्स्ट और वॉइस पर ध्यान दिया और जल्दी ही वीडियो कॉलिंग लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. वीचैट इस मामले में पीछे नहीं रहा है, लेकिन फिर भी वो मात खा गया.

मैसेजिंग के बाजार में एक बार किसी कंपनी ने ग्राहकों का दिल जीत लिया तो उसके बाद उसे हटाना बहुत मुश्किल होता है. आपके सभी दोस्त अगर व्हाट्सऐप पर होंगे तो आपके वीचैट पसंद करने से कुछ नहीं होगा.

ब्लैकबेरी मैसेंजर के साथ शुरुआत में ऐसा ही हुआ था, लेकिन बाद में कंपनी की हालत खराब हो गई. मैसेंजर तब सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ तब नहीं मिलता था. ब्लैकबेरी ने उसे बदलने की कोशिश की पर तब तक काफ़ी देर हो चुकी था.

होंडा की तीन बाइक इस साल होगी भारत में लॉन्च

होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया इस साल कुछ नए प्रोडक्ट्स बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने हाल ही में होंडा नवी को लॉन्च किया है जिसे बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. 2016 दिल्ली ऑटो एक्सपो में भी कंपनी ने उन प्रोडक्ट्स को शोकेस किया था जिसे इस साल लॉन्च किया जा सकता है. आइए, एक नजर डालते हैं साल 2016 में लॉन्च होने वाल होंडा की तीन बाइक पर.

1. होंडा अफ्रीका ट्विन

होंडा अफ्रीका ट्विन को 2016 दिल्ली ऑटो एक्सपो के दौरान शोकेस किया गया था. होंडा की ये मशहूर बाइक जल्द ही भारत में लॉन्च कर दी जाएगी. इस बाइक को सबसे पहले 1989 में लॉन्च किया गया था. तब इसे एक्सआर750 के नाम से जाना जाता था. साल 2003 में कंपनी ने इस बाइक का प्रोडक्शन बंद कर दिया था. अब कंपनी इस मशहूर बाइक को एक बार फिर लेकर आने वाली है. होंडा अफ्रीका ट्विन में 998 सीसी, पैरालल ट्विन इंजन लगा है जो 94 बीएचपी का पावर और 98Nm का टॉर्क देता है. भारत में जो मॉडल लॉन्च किया जाएगा उसे 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से लैस होगी. कंपनी इस बाइक को भारत में असेंबल करेगी. इस बाइक का मुकाबला सुजुकी वी-स्टॉर्म 1000, ट्रायंफ टाइगर 800 सीरीज और कावासाकी वर्सेस से होगा.

लॉन्च का अनुमानित समय: नवंबर 2016

अनुमानित कीमत: 13 लाख रुपये से लेकर 14 लाख रुपये के बीच

2. होंडा सीबीआर 300आर

होंडा सीबीआर 300आर जल्द ही होंडा सीबीआर 250आर को रिप्लेस करेगी. इस बाइक में 286 सीसी, सिंगल सिलिंडर, 4-स्ट्रोक इंजन लगा है जो 30 बीएचपी का पावर देगा. इस इंजन को 6-स्पीड ट्रांसमिशन से लैस किया गया है. होंडा सीबीआर 300आर ब्लैक, रेड, पर्ल व्हाइट/रेड/ब्लू, मैट ब्लैक मेटालिक येलो कलर में उपलब्ध होगी.

लॉन्च का अनुमानित समय: 2016 के अंत तक

अनुमानित कीमत: 2.5 लाख रुपये से लेकर 2.8 लाख रुपये तक

3. होंडा पीसीएक्स 125

होंडा पीसीएक्स 125 को 2014 दिल्ली ऑटो एक्सपो में शोकेस किया गया था. होंडा इस प्रीमियम स्कूटर को जल्द ही भारत में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. होंडा पीसीएक्स 125 में स्मार्ट नेविगेशन, स्मार्ट पावर और थेफ्ट प्रूफ सिस्टम जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इस प्रीमियम स्कूटर में 125 सीसी, लिक्विड कूल्ड इंजन लगा होगा. इसके अलावा स्कूटर को इंजन स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम और वी-मैटिक ट्रांसमिशन से लैस किया जाएगा.

लॉन्च का अनुमानित समय: साल के अंत तक

अनुमानित कीमत: 85,000 रुपये

तो ऐसे होगी ‘ब्लैक मनी’ की ‘घर वापसी’

स्विट्जरलैंड ने चोरी के आंकड़ों के आधार पर दूसरे देशों को उनके नागरिकों के बैंक खातों के बारे में सूचना देने संबंधी नियमों को सरल करने की घोषणा की है. इस कदम से भारत को कालेधन के खिलाफ लड़ाई में बड़ी मदद मिलेगी.

चोरी के आंकड़ों के आधार पर स्विस अधिकारी अन्य देशों को कर मामलों में सहयोग करेंगे, बशर्ते ये सूचना सामान्य प्रशासनिक सहयोग चैनल या सार्वजनिक सूत्रों के जरिए जुटाई गई हो. स्विस संघीय परिषद ने इस प्रस्ताव को ऐसे समय स्वीकार किया है जबकि भारत विदेशों में अपने नागरिकों के जमा धन को वापस लाने का प्रयास कर रहा है. गौरतलब है कि इसी सप्ताह पीएम नरेंद्र मोदी तथा स्विस राष्ट्रपति जोहान श्नाइडर अम्मान के बीच हुई बैठक में भी काले धन का मुद्दा उठा था.

स्विट्जरलैंड सरकार ने कहा कि चोरी के आंकड़ों के आधार पर 'व्यवहार' को सुगम किया जाएगा. एक बयान में सरकार ने कहा कि यदि किसी दूसरे देश द्वारा सामान्य प्रशासनिक सहयोग चैनल या सार्वजनिक सूत्रों के आधार पर जुटाए गए चोरी के आंकड़ों के आधार पर आग्रह किया जाएगा, तो यह संभव होगा.

हालांकि, प्रशासनिक सहयोग उस स्थिति में संभव नहीं होगा जबकि कोई देश सक्रिय तरीके से प्रशासनिक सहयोग प्रक्रिया के बाहर से चोरी के आंकड़े जुटाएगा. इस बारे में संघीय परिषद ने कर प्रशासनिक सहयोग कानून में संशोधन को स्वीकार किया. इस विधेयक पर स्विस संसद में इसी साल विचार किया जाएगा.

स्विट्जरलैंड की पहचान बैंकिंग गोपनीयता के लिए रही है. उस पर लगातार काले धन के प्रवाह पर अंकुश लगाने के लिए अन्य देशों का दबाव पड रहा है. वर्ष 2013 में संघीय परिषद ने प्रशासनिक सहयोग व्यवहार को चोरी के आंकड़ों के मामले में आसान करने का सुझाव दिया था, लेकिन उस समय इस प्रस्ताव को ज्यादातर दलों और व्यापारिक संगठनों ने ठुकरा दिया था.

औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

पूंजी वस्तु उत्पादन तथा विनिर्माण क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन के कारण औद्योगिक उत्पादन अप्रैल माह में एक साल पहले की तुलना में 0.8% घट गया. औद्योगिक उत्पादन में तीन महीने में यह पहली गिरावट है. इसके साथ ही उद्योग मंडलों ने मांग बढ़ाने के लिये सरकार से सकारात्मक उपाय करने को कहा है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. आंकड़ों के अनुसार पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में अप्रैल महीने में 24.9% की गिरावट आयी जबकि पिछले साल इसी महीने इसमें 5.5% की वृद्धि हुई थी.

सूचकांक में 75% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाला विनिर्माण क्षेत्र में इस साल अप्रैल में 3.1% की गिरावट आयी जबकि पिछले साल इसी महीने में इसमें 3.9% की वृद्धि हुई थी.

ताजा आंकड़ों में मार्च की औद्योगिक वृद्धि संशोधित कर 0.3% कर दी गयी है. प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर मार्च की औद्योगिक वृद्धि 0.1% बतायी गयी थी. इस साल जनवरी में आईआईपी में 1.6% की गिरावट दर्ज की गयी थी. उद्योग मंडल एसोचैम ने सरकार से आपूर्ति स्थिति के मामले में सक्रियता से कदम उठाने तथा उद्योग को वृद्धि की गति बनाये रखने में मदद का आह्वान किया है.

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेन्द्र कुमार पंत ने कहा कि सरकार का निवेश को गति देना तथा विनिर्माण आधार बढ़ाने के प्रयासों में कुछ और समय लगेगा. उन्होंने कहा, ‘निवेश में हाल-फिलहाल वृद्धि की संभावना कम है और सरकार (केंद्र तथा राज्य) 16% हिस्सेदारी के साथ निवेश बढ़ाने को लेकर क्षमता सीमित है.

कुल मिलाकर उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन आलोच्य महीने में 1.2% घटा जबकि एक वर्ष पूर्व इसी महीने में इसमें 2.8% की वृद्धि हुई थी. इसमें गिरावट मांग में कमजोरी के संकेत हैं. उपभोक्ता गैर-टिकाउ खंड में उत्पादन में इस साल अप्रैल में 9.7% की गिरावट दर्ज की गयी जबकि एक वर्ष पूर्व इसी महीने में इसमें 3.7% की वृद्धि दर्ज की गयी थी.

आंकड़ों के अनुसार हालांकि उपभोक्ता टिकाउ क्षेत्र में इस वर्ष में अप्रैल में 11.8% की वृद्धि हुई जो एक वर्ष पूर्व इसी महीने में 1.3% की वृद्धि से अधिक है. बिजली उत्पादन में आलोच्य महीने में 14.6% की वृद्धि हुई जबकि एक वर्ष पूर्व इसी महीने में इसमें मामूली 0.5% की गिरावट दर्ज की गयी थी. खनन क्षेत्र में कुछ सुधार दिखा और इसमें इस वर्ष अप्रैल में 1.4% की वृद्धि हुई जबकि एक वर्ष पूर्व इसी महीने में 0.6% की गिरावट दर्ज की गयी थी.

 

रियो ओलंपिक के बाद संन्यास लेगा ये निशानेबाज

भारत के एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता दिग्गज निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने संन्यास लेने की घोषणा कर दी है. बिंद्रा ने अपने ट्विटर हैंडल के ज़रिये साफ़ कर दिया कि वे रियो ओलंपिक के बाद कॅरियर से संन्यास ले लेंगे. बिंद्रा के लिए इस बार का रियो ओलंपिक इसलिए भी बेहद ख़ास होगा क्योंकि करियर को अलविदा कहने से पहले वे खेलों के इस महाकुंभ के उद्घाटन समारोह में बतौर भारत के ध्वजवाहक मौजूद रहेंगे.  

बीजिंग ओलंपिक 2008 के स्वर्ण पदक विजेता 33 साल के बिंद्रा ने कहा कि उनका 20 साल लंबा खेल करियर विशेष रहा. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, '20 साल का मेरा खेल कॅरियर 8 अगस्त को खत्म होगा, यह विशेष रहा.'

रियो ओलंपिक के पांच अगस्त को होने वाले उद्घाटन समारोह के लिए भारतीय दल के ध्वजवाहक चुने गए बिंद्रा ने इसे 'सर्वोच्च' सम्मान करार दिया. उन्होंने कहा, 'ओलंपिक खेलों में ध्वजवाहक होना किसी भी खिलाड़ी के लिए सर्वोच्च सम्मान होता है. मैं आभारी हूं कि मुझे इस सम्मान के लायक समझा गया.' बिंद्रा ने कहा, 'मुझे यकीन है कि जब हम रियो ओलंपिक स्टेडियम में मार्च करेंगे, तो हमें एक अरब से अधिक लोगों का समर्थन मिलेगा.'

बिंद्रा इस साल पांचवीं बार ओलंपिक में हिस्सा लेंगे. वह आठ अगस्त को पुरुष 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चुनौती पेश करेंगे. बिंद्रा ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारत के एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता हैं. बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक खेलों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल की थी. गौरतलब है कि बिंद्रा रियो खेलों में भारतीय दल का सद्भावना दूत भी है.

ऐसे जीता था स्वर्ण

क्वालीफाइंग मुकाबले में 596 अंक हासिल करने के बाद बिंद्रा ने जबर्दस्त मानसिक एकाग्रता का परिचय दिया और अंतिम दौर में 104.5 का स्कोर किया. उन्होंने कुल 700.5 अंकों के साथ स्वर्ण पर निशाना साधने में कामयाबी हासिल की. बिंद्रा ने क्वालीफाइंग मुकाबले में चौथा स्थान हासिल किया था, जबकि उनके प्रतियोगी गगन नारंग बहुत करीबी अंतर से फाइनल में पहुंच पाने से वंचित रह गए. वे नौवें स्थान पर रहे थे. अभिनव बिंद्रा एयर राफल निशानेबाजी में वर्ष 2006 में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं.

एक नज़र करियर पर

28 सितंबर 1983 को देहरादून में जन्मे अभिनव 1998 के राष्ट्रमंडलीय खेलों के सबसे युवा निशानेबाज थे. एमबीए कर चुके अभिनव फ्यूचरिस्टिक कम्पनी के सीईओ भी हैं. चंडीगढ में रहते हुए बिंद्रा ने 15 साल की उम्र से ही निशानेबाजी में हाथ आज़माना शुरू कर दिया था.

साल 2000 में अभिनव सिडनी ओलिम्पिक के सबसे युवा निशानेबाज बने थे, लेकिन अनुभव के लिहाज से यह उनका पहला ओलिम्पिक था.

साल 2001 के म्यूनिख कप में उन्होंने कांस्य पदक जीता. इसी साल मैनचेस्टर में वे 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहे.

साल 2004 में एथेंस ओलिम्पिक में अभिनव ने रिकॉर्ड तो कायम किया, लेकिन पदक जीतने से चूक गए.

साल 2008 के बीजिंग ओलिम्पिक में बिंद्रा का निशाना सीधे सोने के पदक पर लगा.

साल 2009 में अभिनव बिंद्रा को सन भारत सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

साल 2014 राष्ट्रमण्डल खेल में अभिनव ने स्वर्ण पदक जीता.

पासवर्ड याद रखने का झंझट अब और नहीं!

कई लोग अलग-अलग अकाउंट के पासवर्ड को याद नहीं रख पाते और कुछ दिन अकाउंट इस्तेमाल न करने पर पासवर्ड भूल जाते हैं. ऐसे में कुछ एप और वेबसाइट के जरिए न सिर्फ सभी सोशल अकाउंट के पासवर्ड को सुरक्षित रखा जा सकता है बल्कि ये खुद आपके लिए ऐसे पासवर्ड देंगे जिन्हें याद रखना किसी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होगा. हालांकि यूजर इन पासवर्ड को बिना याद किए अपने अकाउंट को लॉग-इन कर सकते हैं.

लास्टपास 

लास्टपास एक ऐसा टूल है जिसके जरिए यूजर को पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं होगी. इस टूल का इस्तेमाल वेबसाइट और एप दोनों प्लेटफॉर्म पर किया जा सकता है. लास्टपास ईमेल से लेकर सभी सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड को सुरक्षित रखता है. उदाहरण के लिए अगर यूजर फेसबुक खोलने के लिए जैसे ही ईमेल एड्रेस डालेंगे तो यह अपने आप फेसबुक पासवर्ड सबमिट कर देगा. इस टूल का इस्तेमाल करने वाले यूजर तो अपने सोशल अकाउंट में पासवर्ड याद किए बिना लॉग-इन कर सकते हैं लेकिन कोई और व्यक्ति इससे उनका अकाउंट नहीं खोल पाएगा क्योंकि लास्टपास मास्टर पासवर्ड का इस्तेमाल करता है.

ऐसे रहता है अकाउंट सुरक्षित

लास्टपास में अकाउंट बनाने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड सेव करने होंगे. उदाहरण के लिए फेसबुक, ट्विटर, गूगल और ईमेल के पासवर्ड इस साइट पर सेव कर दिए तो इन अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए सिर्फ ईमेल एड्रेस सबमिट करना होगा. इसके बाद लास्टपास अपने आप सक्रिय हो जाता है. इसमें मास्टर पासवर्ड से लॉग-इन करने का विकल्प दिया जाता है. इस मास्टर पासवर्ड के बाद सभी सोशल मीडिया अकाउंट बिना पासवर्ड के लॉग-इन हो सकते हैं.

वन टाइम पासवर्ड की सुविधा

लास्टपास की पासवर्ड मैनेजमेंट सुविधा उसी कंप्यूटर या फोन पर काम करती है जहां यूजर ने लास्टपास को अनुमित दी है. अगर उनके कंप्यूटर पर कोई उनका अकाउंट लॉग-इन करता है तो उसे लास्टपास का मास्टर पासवर्ड डालना होगा. आपका मास्टर पासवर्ड किसी और को पता न चले इसलिए यह वेबसाइट वन टाइम पासवर्ड की सुविधा भी देता है. इसके जरिए बेहद कठिन पासवर्ड आपके फोन नंबर पर मैसेज किया जाएगा. इस पासवर्ड को सबमिट करने के बाद ही सोशल मीडिया अकाउंट में लॉग-इन किया जा सकता है. वन टाइम पासवर्ड कुछ देर के लिए ही काम करता है. दोबारा लॉग-इन करने के लिए नया पासवर्ड फोन नंबर पर मैसेज के जरिए भेजा जाएगा.

ऐसे करें इस्तेमाल

लास्टपास का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले lastpass.com  पर जाएं. यहां अपना अकाउंट रजिस्टर करें और एक मास्टर पासवर्ड चुनें जो आपके सभी अकाउंट में लॉग-इन करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसके बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड यहां दाहिने तरफ दिए गए ‘एड साइट’ के विकल्प पर जाएं. यहां उन साइटों का यूआरएल एड्रेस और पासवर्ड सबमिट करें जिन्हें इसके साथ इस्तेमाल करना चाहते हैं. इसके बाद लास्टपास को गूगल क्रोम में बुकमार्क एड कर सकते हैं. LastPass को फोन में गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. वन टाइम पासवर्ड की सुविधा के लिए दाहिने और दिए गए टूल के विकल्प पर जा सकते हैं. यहां ‘वनटाइम पासवर्ड’ का ऑप्शन दिया गया है. इस विकल्प पर जाकर वन टाइम पासवर्ड फीचर को एक्टिवेट करा सकते हैं.

किफायत से घूमें भोपाल

अनिरुद्ध, तेजस और नक्षत्र तीनों सोच रहे थे कि इस बार छुट्टियों में किसी ऐसे स्थान पर घूमने जाएं जहां कम खर्च हो और यात्रा रोमांचक और ज्ञानवर्धक भी हो. तरहतरह के आइडियाज तीनों ने पेश किए, लेकिन कोई आइडिया बोरिंग था तो कोई ज्यादा खर्चीला. इस चर्चा से वे रोमांचित और उत्साहित जरूर हुए थे. अभी तीनों इस बात पर चर्चा कर ही रह थे कि नक्षत्र की नजर अचानक सैंटर टेबल पर रखी पत्रिका सरिता के नए पर्यटन विशेषांक पर पड़ी तो वह एकदम उछल पड़ा और बोला, ‘‘क्यों न हम इस बार कहीं पहाड़ी पर्यटन स्थल पर घूमने चलें?’’

‘‘फिर वही बात, घूमनेफिरने में पैसा और समय ज्यादा खर्च होता है और यह हम लोग पहले ही तय कर चुके हैं कि पैसा खर्च नहीं करना है,’’ बगैर नक्षत्र की मनशा जाने तेजस बोल पड़ा. वह आगे और बोलता इस से पहले ही नक्षत्र ने समझाया, ‘‘अरे यार, मैं तो अपना भोपाल घूमने की बात कर रहा हूं टूरिस्टों की तरह.’’ ‘‘आइडिया अच्छा है,’’ अनिरुद्ध बोला, ‘‘पर सबकुछ तो हमारा देखा हुआ है.’’

‘‘नहीं है सबकुछ देखा हुआ,’’ नक्षत्र जैसे चुनौती देते हुए बोला, ‘‘हम ने पूरा भोपाल कहां देखा है. सभी दोचार जगह गए हैं और वह भी काफी पहले, जब पर्यटन के बारे में हम कुछ जानतेसमझते नहीं थे. अब हम सैलानियों की तरह घूमेंगे तो देखना एक अलग अनुभव होगा,’’ अपनी बात में दम लाते हुए नक्षत्र बोला, ‘‘और इस में पैसा भी ज्यादा खर्च नहीं होगा.’’

थोड़ी सी चर्चा के बाद तीनों इस प्रस्ताव पर सहमत हुए और तय किया कि वे लो फ्लोर बस से घूमेंगे और पैसे बचाने के लिए स्नैक्स और खाना घर से ले जाएंगे.

आइडिया सर्वसम्मति से पास हो गया तो तीनों ने कम खर्च में अपना शहर भोपाल घूमने के लिए बजट बनाना शुरू कर दिया.

‘‘मेरे खयाल से 500-500 रुपए इकट्ठा कर लेते हैं तो आराम से घूम लेंगे,’’ तेजस बोला.

‘‘500-500 रुपए, आखिर इतना खर्च कहां होगा. जब खाना घर से ले जाएंगे और लो फ्लोर बस से घूमेंगे तो पैसे तो बहुत कम खर्च होंगे, वे भी सिर्फ किराए में…’’नक्षत्र अपनी बात पूरी कर पाता इस से पहले ही अनिरुद्ध बोल पड़ा, ‘‘और बाकी आइसक्रीम में…’’

तीनों हंस पड़े. उन्हें समझ आ गया था कि वाकई खर्च कुछ खास नहीं होगा और लुत्फ काफी उठाया जाएगा. इस के बाद प्लान तैयार हो गया और कितना खर्च आएगा इस का हिसाब लगा लिया गया. 100 रुपए हर रोज हर व्यक्ति के हिसाब से खर्च होगा. अनिरुद्ध ने डायरी में बाकायदा इस का ब्योरा लिखा और रूट भी तय कर लिया. तीनों ने अपनेअपने घर जब छुट्टियां बिताने का यह आइडिया बताया तो उन के मम्मीपापा को भी बहुत अच्छा लगा सो उन्होंने झट इजाजत और पैसों के साथसाथ नसीहतें भी दे डालीं कि संभल कर घूमना, किसी से लड़ाईझगड़ा मत करना, अच्छे से पर्यटन स्थल देखना, वहां का इतिहास और उस जगह का महत्त्व समझना. दूसरे दिन तीनों तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक सुबह 6 बजे न्यू मार्केट के बस स्टौप पर इकट्ठा हुए. तीनों के हाथ में टिफिन और पानी की बोतलें थीं. अनिरुद्ध दूरबीन और तेजस अपना स्मार्टफोन लाया था, तो नक्षत्र के हाथ में डायरी और पैन था.

‘‘यहां से हम बस से स्टेशन जाएंगे और वहां से बुदनी तक पैसेंजर ट्रेन में चलेंगे, जिस में किराया सिर्फ 10 रुपए है,’’ अनिरुद्ध ने उत्साहित हो कर बताया, ‘‘इस तरह 30 रुपए में हम भीमबैठका पहुंच जाएंगे. हालांकि बुदनी से 5-7 किलोमीटर तक पैदल परेड करनी पड़ेगी.’’

पैदल चलना उन के लिए अब फिक्र की नहीं बल्कि खुशी की बात थी. 300 रुपए में 3 लोगों को भोपाल के सभी पर्यटन स्थल घूमने थे. ट्रेन में आराम से जगह मिल गई तो तीनों भीमबैठका के बारे में बातें करने लगे. नक्षत्र ने किंवदंतियों  के आधार पर बताया कि महाभारत में जिक्र है कि पांडवों का ताकतवर पहलवान भाई भीम यहां बैठा करता था इसलिए इस जगह का नाम भीमबैठका पड़ा.

यों ही बातें करते 50 मिनट का सफर कट गया, उन्हें पता भी नहीं चला. बुदनी स्टेशन उतरे तो तीनों को नया अनुभव हुआ. यह छोटा सा स्टेशन था, जिस में कोई खास चहलपहल यानी भीड़भाड़ नहीं थी. चारों तरफ कच्चेपक्के मकान और खेतखलिहान देख मन खुश हो गया. 8 बजे गए थे और अब धूप पड़ने लगी थी लिहाजा, एहतियात बरतते हुए तीनों ने अपनीअपनी कैप लगाई और गौगल्स भी पहन लिए. स्टेशन से बाहर आ कर पैदल चलना शुरू किया तो इन्हें लगा मानो वे किसी दूसरी दुनिया में आ गए हों. स्टेशन से आधा किलोमीटर चलने के बाद ही खेतखलिहानों की शृंखला शुरू हो गई. अनिरुद्ध ने बताया कि यहां  बहुत घने जंगल हैं और कभीकभी जंगली जानवर भी दिख जाते हैं. जंगल देख रोमांचित हो रहे नक्षत्र ने आम के पेड़ों पर लटकते हुए कच्चे आम देखे तो खुद को रोक नहीं पाया और पत्थर मार कर आम तोड़े. तीनों यह देख कर हैरान थे कि जो कच्चे आम यहां से महज 35 किलोमीटर दूर 20 रुपए किलो बिक रहे हैं वे यहां पेड़ों के नीचे ऐसे ही बिखरे पड़े हैं और इन्हें उठानेतोड़ने पर कोई एतराज भी नहीं जताता. मन तो हुआ कि थैला भर कर घर ले चलें पर ढोएंगे कैसे? अत: दोचार ही रखे.

पैदल चलने का मजा, जोश और लुत्फ 2 किलोमीटर तक ही कायम रहा. थकहार कर तेजस ने पहल की, ‘‘भाइयो, थोड़ा सुस्ता लें.’’

बाकी दोनों भी यही चाहते थे पर झेंप की वजह से कह नहीं पा रहे थे. लेकिन कहीं बैठ कर सुस्ताने के बजाय तीनों ने लिफ्ट ले कर भीमबैठका जाना बेहतर समझा. हाईवे पर फर्राटे से वाहन आजा रहे थे. थोड़ी कोशिश के बाद एक ट्रक वाले ने लिफ्ट दे दी तो तीनों खुशी से झूम उठे. 15 मिनट बाद ही वे भीमबैठका में थे. तय हुआ था कि भीमबैठका में ही नाश्ता करेंगे, लेकिन वहां उतरते ही तीनों सुधबुध खो बैठे. इतनी खूबसूरत जगह और हरियाली उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी, इस पर यहां से वहां कूदतेफांदते बंदर देख कर तो वे खानापीना और थकान भूल गए और सीधे अंदर जा पहुंचे.

पुरातत्त्व विभाग के बोर्ड और कर्मचारियों से उन्हें पता चला कि भीमबैठका के कई शैलचित्र तो 12 हजार साल पुराने हैं. चट्टानों पर बारीकी से उकेरे गए चित्र उन्हें समझ नहीं आए, लेकिन एक कर्मचारी की बातों से मालूम हुआ कि ये तिरछीआड़ी रेखाएं और आकृतियां दरअसल आदिमानव की भाषा है और ये प्रागैतिहासिक काल की हैं. जैसेजैसे वे अंदर बढ़ते जा रहे थे, वैसेवैसे ठंड और बढ़ती जा रही थी. इस वक्त इक्कादुक्का पर्यटक ही उन्हें नजर आए. इसी दौरान इन्हें यह भी पता चला कि यह विंध्य पर्वतमाला की शृंखला का एक हिस्सा है. कुछ चित्र देख कर तीनों ने अंदाजा लगाया कि प्राचीन मानव का रहनसहन कैसा रहा होगा. जानकारी के लिहाज से उन के लिए यह नई और रोमांचित कर देने वाली बात थी. फिर तीनों ने नाश्ता किया और पर्यटन विभाग के होटल के बाहर लगे कूलर से बोतलों में ठंडा पानी भरा. हालांकि उन का यहां से जाने का दिल नहीं कर रहा था पर वक्त कम था इसलिए गुफाएं देख कर वे सड़क पर आ गए और अगले पड़ाव भोजपुर के मंदिर का रुख किया. तरीका वही लिफ्ट लेने का अपनाया, लेकिन इस बार किसी ने लिफ्ट नहीं दी तो वे औबेदुल्लागंज से आ रही एक यात्री बस में सवार हो गए, जिस के कंडक्टर ने स्कूली बच्चे समझ पैसों के लिए उन से ज्यादा झिकझिक नहीं की. कैशियर और मैनेजर बने अनिरुद्ध ने अपने हिसाब से 30 रुपए कंडक्टर को थमा दिए तो उस ने हंसते हुए चुपचाप रख लिए. वह समझ गया था कि लड़के शरीफ हैं और घूमनेफिरने की गरज से निकले हैं.

भोजपुर मंदिर के बारे में तीनों ने बहुत कुछ सुना था पर यहां आने का उन का यह पहला मौका था. सड़क पर उतर कर पैदल चलना पड़ा लेकिन इस बार थकान नहीं हुई, क्योंकि यहां चहलपहल ज्यादा थी और ज्यादा लंबा भी नहीं चलना पड़ा. भोजपुर गांव में दाखिल होते ही पैरों में मानो जान आ गई. मंदिर का विशाल प्रांगण हैरान कर देने वाला था. ऊपर चढ़ते वक्त गांव वालों ने बताया था कि मंदिर के पीछे एक बगीचा भी है और नदी भी बहती है. नदी का नाम सुनते ही तीनों का नहाने का मन हुआ पर घर वालों की नसीहत याद आ गई तो उन्होंने यह इरादा भी खारिज कर दिया जो खतरनाक भी साबित हो सकता था. यहीं उन्हें पता चला कि यह शंकर मंदिर भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और इसे पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है. गर्भगृह में झांक कर देखा तो विशाल शिवलिंग देख कर वे हैरान रह गए, जिस की ऊंचाई 2.1 मीटर और परिधि 5.1 मीटर है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने इसे बनवाया था और उन्हीं के नाम पर भोपाल का नाम पड़ा था जो पहले भोजपाल था.

मंदिर के पीछे दर्शनीय बगीचे में बैठ तीनों थोड़ा सुस्ताए और फिर भोपाल की तरफ रुख किया. अब सूरज सिर पर था. बाकी भोपाल घूमने के लिए 6-7 घंटे ही बचे थे, पर वे निश्चिंत थे कि अब शहर के काफी पास आ गए हैं. नीचे आ कर एक टपरीनुमा होटल में इन्होंने चाय पी और मुख्य सड़क पर आ कर मिनी बस में बैठ कर अपनी रोमांचक यात्रा के तीसरे पड़ाव अरेरा पहाड़ी पर बने बिड़ला मंदिर जा पहुंचे जो पहले तीनों ने अपने परिवारों के साथ देखा था, लेकिन अकेले आ कर घूमने का मजा ही और था. यहां उन्होंने भीमबैठका और भोजपुर की तरह मोबाइल से खूब फोटो खींचे और सैिल्फयां भी लीं.

पेड़ की छाया में बैठ कर तीनों ने लंच किया तो उस का स्वाद ही कुछ और लगा, जिस की वजह तेज भूख और रोज की तरह  हट कर खाने का मजा और मौका था. यहां से इस तिकड़ी ने रुख किया पुराने भोपाल का और बस से जा पहुंचे सीधे ताज उल मसजिद, जो देश की सब से बड़ी मसजिद है. शाहजहां द्वारा निर्मित गुलाबी रंग की इस मसजिद की नक्काशी देख वे हैरान रह गए. पुराने भोपाल में जल्द ही तीनों ने गोहर महल और शौकत महल भी देख डाले, क्योंकि अब उन्हें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय पहुंचने की जल्दी थी जो अपनेआप में अनूठा संग्रहालय है. तेजस को इतना पता था कि संग्रहालय में आएदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, पर यहां पहुंच कर उन्हें पता चला कि श्यामला हिल्स पर बना यह संग्रहालय कोई 200 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिस में देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई मूर्तियों को रखा गया है. मानव संग्रहालय के नाम से जाने जाने वाले इस संग्रहालय में जनजातीय जीवन से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण और उपयोगी जानकारियां उन्हें मिलीं.

संग्रहालय घूमने में थोड़ा वक्त लगा पर कई जगह आदिवासी मूर्तियां देख तीनों को लगा मानो ये अभी बोल पड़ेंगी. इतनी सजीव मूर्तियां उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थीं. जगहजगह बने कौटेज में बैठ कर वे सुस्ताए और फोटो भी खींचे.

यहीं कैंटीन में तीनों ने चायनाश्ता किया और यहां से बागणगंगा रोड स्थित पुरातत्त्व संग्रहालय देखने भारत भवन जा पहुंचे, जो दुनिया भर में मशहूर है. 1982 में निर्मित भारत भवन दरअसल सास्ंकृतिक, साहित्यिक और रचनात्मक कलाओं का केंद्र है. भारत भवन का नाम आएदिन अखबारों में छपता रहता है, क्योंकि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं. अंदर घूम कर पता चला कि अलगअलग हिस्सों व प्रकोष्ठों के नाम भी अलगअलग हैं, जैसे रूपांकर, रंगमंडल बागर्थ और अनहद.

इसे प्रसिद्ध वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया था, यह भी इन्होंने पहली बार जाना. बाहर जातेजाते तीनों की नजर एक पुस्तकालय पर पड़ी, जिस में विभिन्न साहित्यिक पुस्तकें थीं.

वीआईपी रोड आ कर उन्हें महसूस हुआ कि क्यों उन के शहर को झीलों और तालाबों का शहर कहा जाता है. शाम हो चली थी और यह उन का आखिरी पड़ाव था, इसलिए अब वे बेफिक्री से जू जाने वाली इस रोड पर चल रहे थे. यह रास्ता एयरपोर्ट भी जाता है. पशुपक्षियों के स्वच्छंद विचरण के लिए मशहूर वन विहार वे स्कूल की तरफ से पहले भी 3 बार आ चुके थे. कुछ देर किनारे खड़े हो कर उन्होेंने तालाब को निहारा तो मन झूम उठा, क्योंकि इस भीषण गरमी में भी तालाब में पानी बहुत था और नावें और मोटरबोट चल रही थीं. शाम के वक्त की भीड़भाड़ और चाटखोमचे वाले माहौल को और मस्त बनाने में लगे थे.

अब शाम के 7 बज चुके थे, तीनों का मारे थकान के बुरा हाल था, लेकिन घूमने की इच्छा खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. अत: उन्होंने तय किया कि अब बोट क्लब की ओर चला जाए.

अनिरुद्ध ने मन ही मन हिसाब लगाते हुए बताया कि अभी 80 रुपए और बचे हैं तो तेजस और नक्षत्र की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतने कम पैसों में उन्होंने भोपाल भ्रमण कर लिया है और उस के बाद भी कुछ पैसे बच गए हैं. वे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा विकसित पिकनिक  स्पौट सैरसपाटा नहीं गए, क्योंकि वहां अकसर जाते रहते थे. सैरसपाटा में बच्चों के मनोरंजन के तमाम साधन मौजूद हैं, झूले, रेलगाड़ी और रैस्टोरैंट आदि.

‘‘चलो, बचे हुए पैसों से बोट क्लब पर आइसक्रीम खाएंगे, जिस से गला तर हो जाए,’’ नक्षत्र ने प्रस्ताव रखा तो तुरंत दोनों ने उस पर हामी भर दी. पैदल ही तीनों बोट क्लब पहुंचे तो वहां भी खासी चहलपहल थी. तीनों ने वहां आइस्क्रीम खाई और अपनेअपने घर जाने से पहले एकदूसरे को गुडबाय कहा. तीनों ही घर जा कर मम्मीपापा को दिन भर की कहानी बताने के लिए बेचैन थे. नक्षत्र ने दूसरे दिन जो कुछ भी पर्यटन स्थलों के बारे में नोट किया था उसे तेजस और अनिरुद्ध के व्हाट्सऐप नंबर पर शेयर किया तो तेजस ने फोटो साझा किए. यह उन तीनों का अब तक का एक यादगार टूर था, जिसे उन्होंने खुद प्लान किया था और मात्र 100 रुपए में पूरा भोपाल घूम लिया था.        

जब जाना हो सैरसपाटे पर

गरमी की लंबी छुट्टियों में घर पर बोर होने से ज्यादा मन होता है, कहीं घूमने जाने का, जिस से न केवल चेंज मिलता है बल्कि जानकारी भी बढ़ती है और आत्मविश्वास भी. अमूमन जब आप सैरसपाटे पर जाते हैं तो आप की तैयारी मम्मी करती हैं, लेकिन कोशिश करें कि आप खुद ही तैयारी करें व घर से बैग पैक करने से ले कर वहां ऐंजौय करने तक सारी जिम्मेदारी खुद ही निभाएं. साथ ही जहां जाएं वहां कुछ खास बातों का भी विशेष ध्यान रखें ताकि सैरसपाटे को ऐंजौय कर सकें. यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं जिन्हें ध्यान में रख कर आप सैरसपाटे को न केवल ऐंजौय कर सकते हैं बल्कि यादगार भी बना सकते हैं.

ऐसे करें तैयारी

–       अपने डैस्टिनेशन को ध्यान में रखते हुए तैयारी करें. वहां कैसा मौसम है, उसी हिसाब से कपड़े पैक करें. ध्यान रहे कपड़े अधिक न हों. अगर ज्यादा दिन के लिए सैरसपाटे पर जा रहे हैं, तो ज्यादा कपड़े रखने से अच्छा होगा साबुन की टिकिया साथ रखें ताकि कपड़े वहीं धोसुखा कर पहन सकें. ज्यादा वजन सैरसपाटे में बाधक बनता है.

–       अपने बैग में रोजमर्रा का सामान अवश्य रखें ताकि आप को वहां परेशान न होना पड़े.

–       अपने साथ कुछ किताबें व एक डायरी अवश्य रखें. किताबें इसलिए कि स्टूडैंट लगें व डायरी इसलिए कि हर जगह जाने पर वहां की जानकारी नोट कर सकें. इस से कहीं भी मदद मिलने में आसानी रहती है.

–       अपना बस या ट्रेन का टिकट पहले ही संभाल कर रख लें और उसे बैग में ऐसी जगह रखें ताकि निकाल कर दिखाने में आसानी रहे. अपना स्कूलकालेज का आईकार्ड या फिर आधार कार्ड भी पहचान के लिए साथ अवश्य रखें.

–       यदि आप के पास कैमरा है तो साथ रखें या फिर स्मार्टफोन है तो उसे भी बतौर कैमरा इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही स्मार्टफोन या डिजिटल कैमरे का चार्जर रखना न भूलें. यदि आप के पास स्मार्टफोन या कैमरा नहीं है तो अपने किसी परिचित से अरेंज कर साथ ले जाएं ताकि सैरसपाटे का हर पल यादगार बना सकें. बाद में कैमरा व स्मार्टफोन लौटाते समय फोटो कंप्यूटर में डाउनलोड करना न भूलें.

–       अपने बैग में मोटी चादर अवश्य रखें ताकि कहीं भी आराम करने के लिए बिछा कर बैठ सकें.

–       आप जहां जा रहे हैं वहां की विस्तृत जानकारी, दर्शनीय स्थल, ऐतिहासिक स्थल आदि नैट पर सर्च कर लें. साथ ही यह जानकारी भी रखें कि कम से कम खर्च में कैसे

इन जगहों पर जा कर सैरसपाटे का आनंद ले सकते हैं. मसलन, लोकल बस, ट्रेन आदि की जानकारी, किराया व अन्य सुविधाएं.

–       अगर कोई दवा लेते हैं या जिस की आप को जरूरत पड़ती है उसे साथ रखें. अगर सफर में उलटी आना या जी मिचलाना जैसी समस्याएं आप के साथ होती हैं तो चटपटी गोली साथ रखें.

हिल डैस्टिनेशन पर जाना हो तो

–       सैरसपाटे के लिए यदि आप पहाड़ी इलाके में जा रहे हैं तो वहां के मौसम के अनुसार कपड़े ले जाएं. ध्यान रहे, पहाड़ी इलाकों पर जाते समय एकाध गरम कपड़ा जैसे स्वैटरजैकेट अवश्य ले जाएं, क्योंकि वहां गरमी के मौसम में भी कभीकभी रातें अधिक ठंडी होती हैं.

–       अगर आप के पास बरसाती है तो उसे साथ रखें, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में कभी भी अचानक बरसात हो सकती है. ऐसे में बरसाती आप के काम आएगी. वैसे ऐसी चीजें इन स्थानों पर किराए पर भी मिल जाती हैं पर उस से आप का बजट बिगड़ेगा.

–       ऐसे इलाकों में सैरसपाटे पर जाते समय सामान की पैकिंग पहले पन्नी के अंदर करें और बाद में बैग में रखें. इस से सामान सुरक्षित रहेगा व बरसात में गीला भी नहीं होगा साथ ही नमी से भी बचेगा.

–       इन इलाकों में जाते समय यदि खाने में ड्राइफू्रट्स साथ रख सकें तो अच्छा रहेगा. सूखे मेवे ठंड में गरमी का एहसास कराते हैं.

–       पहाड़ी इलाकों में सैरसपाटे पर जाते समय फ्लैट जूते पहनें. स्पोर्ट्स शूज यहां के लिए सब से उपयोगी रहते हैं.

समुद्री इलाकों में जाएं तो

–       अगर आप सैरसपाटे के लिए समुद्री इलाकों की तरफ जा रहे हैं तो कपड़ों में लड़के निकर, टीशर्ट भी रखें. लड़कियां अपनी सुविधानुसार स्विमिंग सूट, निकर, शौर्ट्स आदि रख सकती हैं. साथ में तौलिया व अपने अंत:वस्त्रों का सैट भी अवश्य रखें.

–  बीच पर जाएं तो अपने साथ कम से कम सामान ले जाएं. फ्लैट चप्पल या फ्लिपफ्लौप ऐसे इलाकों के लिए ज्यादा कंफर्टेबल रहते हैं.

–  समुद्र का पानी खारा होने के कारण पीने लायक नहीं होता इसलिए वहां मिनरल वाटर साथ ले जाएं. भूखे न रहें. नमकीनबिस्कुट आदि खाते रहें व पानी की कमी भी न होने दें.

–  बीच पर नहाते समय समुद्र में ज्यादा आगे न जाएं. लहरों से खेलना खतरनाक हो सकता है. सैल्फी लेते समय भी इस बात का ध्यान रखें.

गरम प्रदेशों में जा रहे हैं तो

–       अगर आप गरम मैदानी इलाकों में सैरसपाटे पर जा रहे हैं तो पैकिंग में टोपी और धूप का चश्मा रखना न भूलें. टोपी जहां सिर को तेज धूप से बचाएगी, वहीं चश्मा आंखों को सेफ रखेगा.

–       ऐसे इलाकों में सैरसपाटे के लिए शाम के समय जाएं तो अच्छा रहेगा. दिन में किसी ठंडी जगह पर आराम करें.

–       अगर संगीत प्रेमी हैं तो अपने साथ कोई हलका वाद्ययंत्र जैसे गिटार आदि रख सकते हैं. इस से सैरसपाटे में आप का मजा और भी बढ़ जाएगा.

–       अगर आप गरमी सहन नहीं कर पाते या नकसीर आने की समस्या है तो उस की दवा साथ रखें.

कुछ सामान्य बातें

–       जिस भी स्थान पर जाएं, वहां फोटोग्राफ अवश्य लें. उस जगह पर लगे निर्देशों का पालन भी अवश्य करें.

–   सैल्फी लेते समय सजग रहें और खतरनाक अंदाज न अपनाएं जैसे पहाड़ी पर या समुद्र में काफी आगे जा कर, बसट्रेन में लटक कर या छत पर चढ़ कर सैल्फी लेना जीवन के साथ खिलवाड़ है.

–  प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाना न भूलें. आप वहां की लोकल संस्कृति से रूबरू हो जानकारी हासिल कर सकते हैं.

–  सस्ता कमरा, धर्मशाला आदि आप के रहने का खर्च कम करेंगे. अगर वहां किसी दोस्त का घर है तो उस के साथ प्रोग्राम बनाएं.

–       पहाड़ी नदियों में बिना सोचेसमझे न उतरें. इन की गहराई का अंदाजा नहीं लगता.

–       अठखेलियों से हर जगह बचें. अपने सामान का स्वयं ध्यान रखें.

–       ऐतिहासिक स्थानों पर घूमने जाते समय ध्यान रखें कि इमारतों की दीवारों आदि पर नाम न लिखें, जिस तख्ती पर उस स्थान का ब्योरा लिखा रहता है उस का फोटो अवश्य लें. यह बाद में ज्ञान बढ़ाने के काम आएगा.                   

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें