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फेसबुक पर खुद ही सिंक नहीं होंगे PHOTOS

स्मार्टफोन पर अगर आप फेसबुक ऐप इस्तेमाल करते हैं तो फोटो का बैकअप खुद ही हो जाता है. लेकिन फेसबुक ने अब अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है और अगर आपने उसके मोमेंट्स ऐप को डाउनलोड नहीं किया तो ऐसे फोटो डिलीट हो जाएंगे.

अगर फेसबुक की बात मानें तो लगेगा जैसे आपके पास कोई विकल्प नहीं है.

एंड्राइड स्मार्टफोन के लिए मोमेंट्स को डाउनलोड कर सकते हैं. लेकिन दूसरे ऐप से भी आप काम चला सकते हैं. आइये आपको इसका तरीका बताते हैं.

एवरएल्बम

अगर स्मार्टफोन में जगह नहीं है तो एवरएल्बम उसको पहचान जाएगा और डिवाइस से उसे डिलीट करके उसके क्लाउड बैकअप का विकल्प देता है. लेकिन जो फोटो ऑनलाइन स्टोर किये जाएंगे उनके रेसोलुशन को कम कर दिया जाएगा.

अगर फोटो को उसके अपने रेसोलुशन में चाहिए तो उसके लिए हर महीने करीब 650 रुपये लगेंगे जो काफी महंगा है.

शूबॉक्स

एवरएल्बम की तरह ही शूबॉक्स पर आप जितने भी फोटो चाहें रेसोलुशन कम कर के स्टोर कर सकते हैं. लेकिन अगर फोटो को उनके अपने रेसोलुशन में स्टोर करना है तो एवरएल्बम के मुकाबले आधी कीमत पर काम हो जाएगा.

यहां पर अपने वीडियो भी आप स्टोर कर सकते हैं. कंपनी का दावा है कि फोटो को एन्क्रिप्ट करके रखा जाता है और जो एन्क्रिप्शन बैंक इस्तेमाल करते हैं वही शूबॉक्स भी इस्तेमाल करता है.

गूगल फोटोज, ड्रॉपबॉक्स, माइक्रोसॉफ्ट वन ड्राइव जैसे विकल्प भी हैं आपके पास.

कुछ लोग फ्री लिमिट का इस्तेमाल करने के लिए इन सभी पर एक अकाउंट बना लेते हैं. लेकिन ध्यान रखिये कि एक ही फोटो एक से ज्यादा ऐप पर स्टोर करने से आप जगह बर्बाद कर रहे हैं.

पुराने फोटो को किसी एक या दो ऐप पर स्टोर कर दीजिये और उसके बाद उसके ऑटो सिंक फीचर को बंद कर दीजिये. उसके बाद एक नए ऐप पर अपने अभी के फोटो स्टोर कर सकते हैं.

कोई भी फोटो ऐप चुनने के पहले एक बात का ध्यान रखिये कि एक बार आपने उसे चुन लिए उसके बाद उसे बदलना बहुत मुश्किल होता है. इसलिए अपनी जरूरत के हिसाब से ऐसे ऐप को चुन कर ही इस्तेमाल करना शुरू कीजिये. शुरुआत में फ्री ऐप इस्तेमाल करके देख लीजिए और अगर जरूरत हो तो फिर पैसे देकर ये सर्विस ले सकते हैं.

गूगल और एप्पल की राह पर अलीबाबा

गूगल और एप्पल को टक्कर देने के लिए चीन के अरबपति उद्योगपति जैक मा की कंपनी अलीबाबा ने भी स्मार्ट कार की शुरुआत की है. चीन की ई-कामर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड अब कार उद्योग में भी उतर चुकी है.

अलीबाबा कंपनी का ऑपरेटिंग सिस्टम 'युन' अब फोन और स्मार्टवॉच के अलावा कार के डैशबोर्ड से भी जुड़ेगा, जिससे कार में टच स्क्रीन और एडवांस रियर व्यू मिरर की सुविधा मिलेगी. अलीबाबा ने युन का इस्तेमाल चीन की कार निर्माता कंपनी एसएआईसी मोटर कार्प के साथ मिलकर रोएवे आरएक्स5एसयूवी कार के डैशबोर्ड में किया है.

इस कार को बुधवार को चीन के बाजार में बिक्री के लिए उतारा गया. अवसर पर जैक मा ने कहा, हमारा मानना है कि भविष्य में 80 फीसदी कारें सिर्फ परिवहन के लिए ही इस्तेमाल नहीं होंगी. बल्कि कार का इस्तेमाल एक रोबोट की तरह रोजमर्रा के कामों के लिए किया जाएगा.

यह है खूबी

रोएवे आरएक्स5एसयूवी कार का डैशबोर्ड युन ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से चलेगा. इस स्मार्ट कार के डैशबोर्ड से कार चालक पार्किंग के लिए जगह बुक करा सकता है, कॉफी के लिए आर्डर दे सकता है. उसे इसके लिए अलीपे सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा.

कार की कीमत

इस कार की शुरुआती कीमत 148,800 युआन यानि लगभग 14,82,237 रुपये है. सस्ती कार के लिए जैक मा ने एसएआईसी के अध्यक्ष चेन हांग का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि कार की कीमत अंचभित करती है.

गूगल, एप्पल को टक्कर देने की तैयारी

गूगल का एंड्राइड ऑटो और एप्पल के कारप्ले सिस्टम का कारों को स्मार्ट बनाने के लिए तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन चीन में इन पर बैन है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार बाजार है. अलीबाबा की नजर इस बाजार पर है. आईएचएस ऑटोमोटिव के आंकड़ों के मुताबिक स्मार्ट कारों का बाजार हर साल 19 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और साल 2021 तक यह 4.5बिलियन डॉलर का हो जाएगा.

2015 से हो रहा था काम

अलीबाबा ने जुलाई 2014 में चीन के जाने-माने मोबाइल मैंपिग सर्विस ऑटो नेवी होल्डिंग्स लिमिटेड को 1.5 बिलियन डॉलर में खरीदा था. अलीबाबा और एसएआईसी पिछले कुछ सालों से मिलकर स्मार्ट कार पर काम कर रही हैं. एसएआईसी ने मार्च 2015 में अलीबाबा के साथ एक बिलियन युआन फंड लगभग 10069180141 की लागत से स्मार्ट कार पर काम करना शुरू किया था.

बड़े पैमाने पर एप्पल और गूगल सिस्टम का इस्तेमाल

आईएचएस ऑटोमोटिव के मुताबिक एप्पल का कार प्ले और गूगल का एंड्राइड ऑटो सिस्टम कार कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है. एप्पल का कार प्ले ऑपरेटिंग सिस्टम इस समय 40 से अधिक ऑटो कंपनियां कर रही हैं. जिससे आईफोन को कार के डैशबोर्ड से जोड़ा जा सकता है. इसमें मैप, संगीत सुनने की सुविधा होती है. जबकि गूगल एंड्राइड ऑटो सिस्टम को लगभग 17 कार कंपनियां जैसे शेरवले, होंडा, हुंडई और मर्सिडीज बेंज जैसी कंपनियां कर रही हैं. इसमें वैज ट्रैफिक और नेविगेशन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है.

अमेरिकी बाजार में उतरने की कवायद

चीन में एप्पल और गूगल पर बैन की वजह से अलीबाबा के यून सिस्टम को फायदा हो सकता है. अलीबाबा टेक्नोलॉजी कमिटी के प्रमुख वांग जिआन के मुताबिक, युन ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए कुछ और कार निर्माता कंपनियों से बात चल रही है. कंपनी इस सिस्टम को अमेरिका में भी प्रमाण दिलाने के लिए काम कर रही है.

विदेशी कार कंपनियां नहीं करेंगी इस्तेमाल

शंघाई में आईएचएस ऑटोमोटिव के विश्लेषक माइकल लियु ने कहा, युन ऑपरेटिंग सिस्टम का चीन में स्मार्ट कारों में इस्तेमाल होगा. लेकिन विदेशी कार कंपनियां अगले कुछ सालों तक अलीबाबा के ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल अपनी कारों में नहीं करेंगी.

बेटियां होती हैं दिल के करीब

रांची के हेसाग स्थित ओल्ड एज होम, ‘अपना घर’ में रहने वाली सुदामा देवी की अंतिम यात्रा ने लोगों की आंखें नम कर दीं, जब उन्हें मुखाग्नि उन के बेटे ने नहीं वरन मुंहबोली बेटी, सुनीता देवी ने शमशान घाट पहुंच कर दी.

आज से करीब 20 साल पहले सुनीता देवी को ‘अपना घर’ की सिस्टर ने गेट के बाहर दर्द से कराहते हुए पाया था. सिस्टर ने उन्हें अपने यहां पनाह दे दी. बाद में 58 वर्षीया सुदामा देवी ने बताया कि उन के अपने बेटे ने उन्हें घर से निकाल दिया. तब कोई और शख्स उन्हें इस ओल्ड एज होम की देहरी तक छोड़ कर गया और फिर सुदामा देवी इसी ओल्ड एज होम में रहने लगीं, जहां पहले से 20 बुजुर्ग महिलाएं रहती थीं. सुदामा देवी पहले तो उदास और गुमसुम रहतीं पर धीरेधीरे दूसरी महिलाओं से बातें करने लगीं और ओल्ड एज को ही अपना परिवार मानने लगीं. यहीं पर सुनीता देवी नाम की लड़की अक्सर उन से मिलने आती थी. उस ने सुदामा देवी को अपनी मां माना था. दोनों एकदूसरे से इतनी जुड़ गई थीं कि इस पराई बिटिया ने स्वयं बढ़ कर मृत मां को मुखाग्नि दी और एक बेटे द्वारा किए जाने वाले सारे रीतिरिवाज भी निभाए.

जिस वृद्ध लाचार महिला को सगे बेटों ने घर से निकाल दिया, उसे ही एक पराई बिटिया ने अपनों से बढ़ कर मान दिया और अंतिम समय तक साथ निभाया. वास्तव में यह घटना पुत्र की कृतघ्नता और पराई बेटी की मानवीयता का सुंदर उदाहरण है.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक इस समय देश में कुल आबादी का करीब 8 से 9 फीसदी हिस्सा बुजुर्गों का है. पिछले एक दशक में भारत में वृद्धों की आबादी 39.3% की दर से बढ़ी है. पर अफसोस की बात यह है कि इन बुजुर्गों के जीवन में अकेलापन और अपनों के अत्याचार की समस्या भी लगातार बढ़ रही है.

गैर सरकारी संगठन, ‘हेल्पएज इंडिया’ द्वारा 8 राज्यों के 12 शहरों में किए गए सर्वेक्षण बताते हैं कि भारत में करीब 50% बुजुर्ग अत्याचार के शिकार हो रहे हैं. जिन में पुरुष बुर्जुर्गों के देखे महिलाओं पर ज्यादा अत्याचार होते हैं. जहां 48% बुजुर्ग पुरुष अपनों के अत्याचार के शिकार होते हैं वहीं बुजुर्ग महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा 52% है.

सर्वेक्षण के मुताबिक सब से कड़वी सच्चाई यह है कि इन बुजुर्गों पर अत्याचार करने वाले कोई और नहीं वरन परिवार के लोग और सगेसंबंधी ही होते हैं. खासतौर पर बेटेबहू ज्यादा जुल्म ढाते हैं. 60% से ज्यादा मामलों में बेटे किसी न किसी रूप में बुजुर्गों पर अत्याचार के मामलों में 41% गालीगलौच, 33% बेइज्जती करने की घटनाएं शामिल थीं.

सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि 64% पीडि़त बुजुर्गों को पुलिस हेल्पलाइन और इस से निपटने वाली प्रणाली के बारे में जानकारी थी पर लोकलाज के भय से केवल 12% ने ही इस का सहारा लिया. 53% लोगों ने अपने सगेसंबंधियों को जुल्म के बारे में बताया. वृद्धा सास के प्रति एक बहू के निष्ठुर और बर्बरतापूर्ण व्यवहार की झलक लोगों ने देखी. जब हाल ही में यू.पी. के बिजनौर से एक दिल दहलाने वाला वीडियो वायरल हुआ. 1 मिनट के इस वीडियो में 70 साल की एक वृद्ध बीमार और अशक्त महिला को उस की बहू द्वारा बड़ी बेरहमी के साथ मारने का प्रयास करते देखा जा सकता था.

वीडियो में पहले बहू अपनी सास को हाथों से पीटती दिखती है. फिर पत्थर से वह वृद्धा के सिर पर चोट मारती है. इस के बाद कपड़े से गला घोंट कर मारने का प्रयास भी करती है. एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा इस वीडियो को फेसबुक पर अपलोड किया गया और तब पुलिस ने इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 307 के अंतर्गत उस बहू के खिलाफ केस दर्ज कर लिया.

इसी तरह का एक और ताजा मामला साउथ ईस्ट दिल्ली का है. कालकाजी इलाके के एक बेटे ने बुजुर्ग मांबाप के घर की बिजली और पानी का कनैक्शन काट दिया. पिता जब बेटे के पास शिकायत करने पहुंचा तो बेटेबहू ने मिल कर उन्हें पीट दिया. वहीं संगम विहार क्षेत्र में भी इसी तरह की घटना हुई. एक बेटे ने बुजुर्ग बाप को इतना पीटा कि उन के बाएं पैर की हड्डी टूट गई.

जिसे बांहों में भर कर मांबाप प्यारदुलार से चूमते हैं, जिस के बढ़ते कदमों को देख बलिहारी जाते हैं, जिस की हर ख्वाहिश पूरी करने को जीजान से जुट जाते हैं, उसी बेटे के हाथों बुढ़ापे में जब मांबाप को मार खानी पड़े तो जरा सोचिए क्या गुजरेगी उन के दिल पर.

बेटी होती है दिल के ज्यादा करीब

यह हमारी सामाजिक व्यवस्था की विसंगति है कि ज्यादातर घरों में लोग बेटे के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं. उन के पैदा होने से ले कर उन के लालन, पालन, करियर व हर चीज में बेटे को बेटियों के देखे ज्यादा अटैंशन व केयर दी जाती है. मगर जब बाद में वही बेटा अपने दायित्त्वों से हाथ झाड़ लेता है तो आंसू बहाते हैं. हाल ही में जब 12वीं के नतीजे घोषित हुए तो हर साल की तरह फिर से लड़कियों ने अपना परचम लहराया. सिर्फ सीबीएससी ही नहीं विभिन्न राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं में भी लड़कियां लड़कों से आगे थीं.

पर अफसोस, हम अकसर अपने घरों में बेटी की पढ़ाई में कोताही कर बेटों को ही पढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक 52.2% लड़कियां बीच में ही अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ देती हैं. जबकि बेटों को आगे बढ़ाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है. नतीजा यह होता है कि कई दफा बेटे सिर्फ पढ़ाई और करियर में ही नहीं, जिंदगी की दौड़ में भी आगे निकलने के प्रयास में अपने मांबाप को बोझ समझने लगते हैं और इस बोझ को किसी ओल्ड एज होम या कहीं और उतार कर आगे बढ़ जाते हैं.

पर क्या आप जानते हैं, अकसर उपेक्षित छोड़ दी गई लड़कियां मांबाप के ज्यादा करीब और उन के प्रति ज्यादा जिम्मेदार होती हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह बात स्वीकारी थी कि एक बेटी मांबाप के लिए 5 बेटों से बढ़ कर होती है.

अमेरिकन सोशियोलौजिकल एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा हाल ही में जारी एक अध्ययन के मुताबिक, जब बात केयर करने की आती है तो बेटियां बेटों के देखे दोगुनी मात्रा में मांबाप का खयाल रखती हैं. इस अध्ययन में 50 साल से अधिक उम्र के 26,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. पाया गया कि बेटियां औसतन प्रतिमाह 12.3 घंटे का वक्त अपने बुजुर्ग अभिभावकों की देखभाल में लगाती हैं, जबकि पुत्र महज 5.6 घंटे ही इस काम में व्यतीत करते हैं. बेटियों को इस काम में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. जैसे जौब, बच्चे वगैरह, मगर बेटों के मामले में केवल यही बात मायने रखती है कि कोई और सहयोगी है या नहीं.

अध्ययनकर्ता एंजेलिना कैरिर्गोयावा के मुताबिक बेटे मांबाप की देखभाल की जिम्मेदारी उठाना कम कर देते हैं, तब जब कि उन की बहन मौजूद हो. इस के विपरीत बेटियां अपने अभिभावक की और भी ज्यादा देखभाल करने लगती हैं जब उन का भाई होता है. यानि ज्यादातर बेटे मांबाप के प्रति अपनी जिम्मेदारियां बहनों को पास करने में माहिर होते हैं.

यही नहीं, एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल की उम्र के बाद बेटियां अपने मांबाप से बहुत कम रुपयों की मांग करती हैं, जबकि बेटों के साथ ऐसा नहीं. सर्वे में पाया गया है कि 41% युवा पुरुष अपने मांबाप से खर्च करने के लिए पैसे लेते हैं, जबकि अभिभावक के साथ रहने वाली सिर्फ 31% युवा लड़कियां ही ऐसा करती हैं.

करीब 60% बेटियां मांबाप को भावनात्मक संबल देती हैं. छोटीछोटी बातों से उन का खयाल रखती हैं, जैसे फोन करना, उन के पास जाना, बैठ कर बातें करना जबकि 50% से भी कम लड़के ऐसा करते हैं.

शायद यही वजह है कि लोग भी अब बेटों के देखे बेटियां प्रेफर करने लगे हैं. हाल ही में कार्लसन स्कूल औफ मैनेजमैंट व रुटजर्स बिजनेस स्कूल में किए गए रिसर्च के मुताबिक अभिभावकों की पहली पसंद बेटे नहीं वरन बेटियां बनती जा रही हैं. इस रिसर्च में 60% लोगों ने अपनी भावी संतान के रूप में एक बेटी की ही कल्पना की.

कानूनी सहायता

हाल ही का एक मामला है, जिस में दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके के एक बुजुर्ग महेश कुमार द्वारा अपने बड़े बेटे और बहू के खिलाफ केस दर्ज कराया गया कि उन के बेटेबहू उन्हें और उन की बीमार पत्नी को मानसिक रूप से प्रताडि़त करते है. महेश कुमार ने आरोप लगाया कि बेटा उस दुकान पर कब्जा जमाना चाहता है जो कानूनी रूप से उन के अधिकार में है. बाद में मेंटीनेंस और वेलफेयर औफ पेरैंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत इस केस का फैसला महेश कुमार के हक में हुआ.

कुनाल मदान, एडवोकेट, के एम ए लॉ फर्म ,कहते हैं कि वर्ष 2007 में मिनिस्ट्री औफ सोशल जस्टिस एंड एंप्लौयमेंट, गर्वनमेंट औफ इंडिया द्वारा शुरू किए गए इस एक्ट के तहत बुजुर्ग अपने बच्चों से मेंटीनेंस की मांग कर सकते हैं. मेंटीनेंस की रकम उन के लिविंग स्टैंडर्ड के आधार पर तय होती है. इस की सहायता से बुजुर्ग आसा से, जल्दी और कम खर्च में अपना हक पा सकते हैं. जबकि काफी लोगों को इस की जानकारी नहीं. इस के अलावा सीआरपीसी के सेक्शन 125 के अंतर्गत भी मेंटीनेंस की मांग की जा सकती है.

देश में बुजुर्गों और असहायों की हिफाजत के लिए नए सख्त कानून बनाने की मांग की जाती रही है. सेक्शन 498ए में भी संशोधन की मांग उठी है. जिस में सिर्फ बहुओं की प्रताड़ना के खिलाफ सजा का प्रावधान है. बुजुर्गों के साथ घरेलू हिंसा को ले कर कोई सख्त, स्पष्ट या विशेष कानून देश में नहीं है.

यही नहीं, कानून पर अमल के मामले में भी हमारी व्यवस्था सुस्त है. कानूनी कार्यवाहियां एक अंतहीन बोझ और कई बार यातना की तरह पीडि़तों को ही परेशान करने लगती है. ऐसे में लोग केस करने से भी डरते हैं तो कुछ लोगों को जमाना क्या कहेगा की परवाह. ऐसा करने से रोकती है.

जरूरी है कि कानून पर अमल के तरीकों में बदलाव आए ताकि जल्दी से जल्दी बुजुर्गों को राहत मिले और दोषी सजा पाए. यही नहीं कानूनी चुस्ती के साथ सामाजिक व्यवस्था में भी सुधार आवश्यक है. यह बात भी काफी मायने रखती है कि बच्चों का पालनपोषण कैसे हुआ है. उन्हें सामाजिक मूल्यों व संस्कारों से कितना नवाजा गया है.

दादा ने किया चौंकाने वाला खुलासा

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने एक बात का खुलासा करके सबकों चौंका दिया है. क्रिकेट सलाहकार समिति के प्रमुख सदस्य और टीम इंडिया के प्रमुख कोच चुनने में अहम भूमिका अदा करने वाले सौरव गांगुली ने इस बात की पुष्टि की है कि रवि शास्त्री को भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच की भूमिका अदा करने की पेशकश की गई थी.

गौरतलब है कि अनिल कुंबले को भारतीय टीम का मुख्य कोच चुने जाने के बाद रवि शास्त्री और सलाहकार समिति के प्रमुख सदस्य गांगुली के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है. शास्त्री ने आरोप लगाया था कि जिस वक्त उनका साक्षात्कार लिया गया उस वक्त वहां गांगुली मौजूद नहीं थे. जिसके बाद गांगुली ने पलटवार करते हुए शास्त्री को कहा था कि उन्हें वहां खुद मौजूद होना चाहिए था ना कि उस वक्त बैंकॉक में छुट्टियां मनाने जाना चाहिए था.

इस तरह ग्राहकों को लूट रहा है बीएसएनएल

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानि ट्राई की लाख कोशिशों के बाद मोबाइल कंपनियां उपभोक्ताओं को इंटरनेट की सही स्पीड नहीं दे पा रही है. केन्द्र सरकार के प्रयासों के बाद भी काल ड्राप का मसला हल नहीं हुआ है. इंटरनेट डेटा और फोन बैलेंस की आड में प्रीपेड मोबाइल धारक करोड़ों उपभोक्ताओं को मोबाइल कंपनियों की ठगी का शिकार होना पड़ रहा है. मोबाइल इटरनेट प्लान के नाम पर केवल प्राइवेट कंपनियां ही नहीं, भारतीय दूरसंचार निगम यानि बीएसएनएल भी सबसे आगे है. जो प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ता बीएसएनएल के नेटवर्क का प्रयोग कर रहे हैं, उनको सचेत रहने की जरुरत है. बीएसएनएल नेटवर्क का प्रयोग करने वाले उपभोक्ता का इंटरनेट प्लान जब खत्म हो जाता है तो उसका इंटरनेट फोन के बैलेंस से चलने लगता है. कई बार यह बैलेंस खत्म होने के बाद भी चलता है. जब उपभोक्ता रिचार्ज कराता है तो बैलेंस कट जाता है.

उपभोक्ता का फोन बैलेंस जब खत्म हो जाता है तो वह अपना इंटरनेट रिचार्ज कराता है. तब इस इंटरनेट रिचार्ज के बाद उसका इंटरनेट नहीं चलता और वह कस्टमर केयर पर बात करता है तो उसे बताया जाता है कि फोन बैलेंस खत्म हो गया है. ऐसे में पहले उसे फोन का बैलेंस डलवाना पड़ेगा. ऐसे में उपभोक्ता को इंटरनेट रिचार्ज और बैलेंस रिचार्ज के लिये एक साथ मजबूर होना पड़ता है.

बीएसएनएल की ठगी का यह हाल है कि जब तक इंटरनेट डेटा रिचार्ज पर चलता है उसकी स्पीड काफी धीमी रहती है. जैसे ही इंटरनेट रिचार्ज खत्म होता है और इंटरनेट फोन बैलेंस पर चलने लगता है उसकी गति तेज हो जाती है. यही नहीं इंटरनेट रिचार्ज के मुकाबले बैलेंस रिजार्च पर इंटरनेट मंहगा चलता है. ऐसे में उपभोक्ता को अनजाने में मंहगी दर में इंटरनेट का भुगतान करना पडता है. बीएसएनएल इस पूरे मसले पर खुद को गलत साबित करने की जगह पर उपभोक्ता को ही सलाह देता है कि वह जागरुक उपभोक्ता नहीं है.

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानि ट्राई अब मोबाइल इंटरनेट की गति और सेवाओं को लेकर सेवा गुणवत्ता के नियम बनाने की तैयारी में है. इसके लिये ट्राई जल्द ही वायरलेस डेटा की सेवा गुणवता के मानक तय करते हुये परामर्श पत्र जारी करेगी. ट्राई ने माईस्पीड एप तैयार किया है. इससे इंटरनेट की स्पीड को देखा जा सकेगा. मोबाइल कंपनियां 3 जी में अधिकतम 7.1 एमबीपीएस स्पीड देने का दावा करती है. वास्तव में वह उपभोताओं को 100 केबीपीएस से भी कम गति देती है. यह एक एमबीपीएस से भी 12 गुना कम होती है. कंपनियो के द्वारा कम स्पीड देने से इंटरनेट से होने वाले काम प्रभवित करते है. इससे डेटा ज्यादा खर्च होता है. एक काम के लिये उपभोक्ता को बारबार कोशिश करनी पडती है. यही नहीं मोबाइल कंपनियों के कस्टमर केयर सही तरह से उपभोक्ता की शिकायत नहीं सुनते और लंबे समय तक उपभोक्ता को इंतजार करना पडता है.

केन्द्र सरकार के तमाम प्रयासों के बाद मोबाइल कंपनियों ने काल ड्राप से लेकर इंटरनेट सुविधाओं को देने तक में कोई सुधार नहीं किया है. जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया प्रोग्राम को सफलता नहीं मिल रही है. मोबाइल कंपनियां इन सुविधाओं के न देने के लिये अलग अलग तरह के बहाने बनाती हैं. मोबाइल कंपनियों ने काल ड्राप के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है. जिससे वह फैसला आने तक बचे हुये हैं. देश में कामकाज के लिये इंटरनेट को बढ़ावा दिया जा रहा है. केन्द्र सरकार तमाम सार्वजिनक जगहों पर इंटरनेट की फ्री वाईफाई सुविधा दे रही है. दूसरी तरफ मोबाइल कंपनियां छोटे प्रीपेड उपभोक्ता के साथ छोटी छोटी ठगी करके उनका शोषण कर रही हैं, जो केन्द्र सरकार की छवि को भी प्रभावित कर रहा है.                  

लालू ने कहा, आ लौट के आजा मेरे मीत

‘अइबे त आव. आदत सुधर के रहे पड़ी. हमार नीति ह, जीओ औ जीने दो. रिलायंस वाला जीओ नहीं. रिलायंस वाला जीओ का मतलब होता है, एक आदमी जीओ और बाकी सब मरो.’ अपनी पार्टी राजद के 20वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित जलसे में लालू यादव ने पार्टी छोड़ कर भागने वालों को दुबारा पार्टी में शामिल होने का खुला न्यौता दिया. खास बात यह रही कि न्यौता के साथ-साथ उन्होंने धमकी भी दे डाली. उन्होंने साफ कहा कि जिसे राजद में वापस आना है वह आ सकते हैं, पर आने के पहले अपनी आदतों को        सुधार लें. पुरानी आदतों को सुधरने के बाद ही राजद में जगह मिलेगी.

5 जुलाई 1997 को जनता दल से अलग होकर लालू ने नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी. उसके बाद साल 2005 तक बिहार पर राजद ने राज किया था. सरकार गंवाने के बाद लालू की पार्टी में उठापटक शुरू हो गई थी. जिस दल ने 16 सालों तक सरकार की मलाईयां काटी, उसका सत्ता से दूर होना उसके लिए परेशानी का सबब बन गया था. 5 सालों तक तो राजद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दुबारा सत्ता पाने का इंतजार किया, पर जब साल 2010 में एक बार फिर नीतीश की सरकार बन गई, तो राजद के नेताओं का सब्र का बांध टूट गया.

सबसे पहले साल 2009 में आम चुनाव से पहले लालू के ‘दुलारे’ साले साधु यादव ने अपने जीजा और राजद दोनों से कन्नी कटा लिया था. राजद छोड़ उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और कांग्रेस के टिकट पर गोपालगंज से लोकसभा का चुनाव लड़ा, पर कामयाबी नहीं मिल सकी. छोटे साले सुभाष यादव ने भी बुरे दिनों में लालू से किनारा कर लिया. उसके बाद उन्होंने कई दलों में जाने की बातचीत की, पर कोई बातचीत परवान नहीं चढ़ सकी. फिलहाल वह सियासत से दूर पटना के विधायक कौलोनी के अपने मकान में आराम की जिंदगी गुजार रहे हैं. उसके पहले लालू के करीबी श्याम रजक ने लालू पर यह आरोप लगा कर उनका साथ छोड़ दिया था कि लालू यादव उन्हें जातिसूचक बातों से बेइज्जत करते रहते हैं.

लालू और उनकी पार्टी राजद को सबसे बड़ा झटका फरवरी 2014 में लगा था, जब उनकी पार्टी के 13 विधायकों ने उन्हें टाटा-बाय-बाय कर दिया और तब उनके प्रतिद्वंद्वी रहे नीतीश कुमार के खेमे में जा बैठे थे. सम्राट चौधरी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, ललित यादव, रामलपण राम, अनिरूद्ध कुमार, जावेद अंसारी जैसे कद्दावर नेताओं ने लालू का साथ छोड़ दिया था. इन नेताओं का आरोप था कि लालू ने राजद को कांग्रेस की बी-टीम बना कर रख दिया है. इस झटके से लालू उबर भी नहीं पाए थे कि उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और लालू के आंख-कान माने जाने वाले रामकृपाल यादव ने उनके ‘लालटेन’ छोड़ कर भाजपा  का ‘कमल’ थाम लिया था.

 साल 2015 में राजद के सीनियर लीडर और लालू के संघर्ष के साथी रघुनाथ झा ने भी राजद को छोड़ कर समाजवादी पार्टी का झंडा उठा लिया था. इस तरह लालू के कई करीबी और भरोसेमंद नेता बारी-बारी राजद के डगमग जहाज को छोड़ कर सियासत की नई नैया पर सवार होते गए. अब जब 10 सालों के बाद नीतीश के साथ मिल कर लालू दुबारा सत्ता में लौटे हैं तो उन्हें अपने पुराने दोस्तों और नेताओं की याद आने लगी है. तभी तो राजद के 20वें स्थापना दिवस के मौके पर उन्होंने आपने पुराने साथियों को घर वापसी को खुला न्यौता दे डाला है. अब देखना यह है कि लालू के न्यौते का उनके पुराने करीबियों पर कब तक, कैसा और कितना असर हो पाता है?

बदले-बदले से दिखने वाले लालू को अब अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी खासा ख्याल आने लगा है. तभी तो उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकत्ताओं की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उन्होंने कहा कि जो अफसर राजद कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनेंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री नीतीश के साथ बात करके अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रभुनाथ सिंह ने ठीक ही कहा था कि कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है. आगे उन्होंने कहा कि बोर्ड और निगम का अध्यक्ष बनने की लालच में पार्टी कार्यालय में बायोडाटा जमा करने वाले कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए लालू ने कहा कि हर किसी को खुश नहीं किया जा सकता है. गौरतलब है कि राजद के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह ने अपने तकरीर में अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि राजद कार्यकर्ताओं को कई अफसर बेइज्जत करते रहते हैं. सरकार में शामिल सभी दलों में सबसे बड़ा दल होने के बाद भी राजद को दरकिनार कर रखा गया है. इससे कार्यकर्ताओं को मनोबल टूट रहा है.

इस मौके पर उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर भी जम कर तीर चलाए. उन्होंने कहा कि अडानी का 2000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया गया. रिलायंस को फायदा पहुंचाया जा रहा है. मोदी सरकार को अमीरों की सरकार करार देते हुए लालू ने कहा कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है. लालू ने अपने कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि भाजपा सकरकार आरक्षण को खत्म करने की साजिश में लगी हुई है. देश को तोड़ने में लगी हुई है. उन्होंने कड़े लहजे में कहा- ऐ भाजपा वालों, लालू के शरीर के खून का हर कतरा आरक्षण को खत्म करने की साजिश रचने वालों को कामयाब नहीं होने देगा.

रामविलास का चिप उड़ा

रामविलास पासवान ने पिछले दिनों ये यह कह कर लालू को बौखला दिया है कि स्कूली पढ़ाई के दौरान लालू यादव 5 बार मैट्रिक की परीक्षा में फेल हुए थे. इसके जबाब में उन्होंने रामविलास की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि रामविलास पासवान  के दिमाग का चिप उड़ गया है. हमेशा अंट-शंट बोलते रहते हैं. रामविलास के बजाए जीतनराम मांझी को केंद्र में मंत्री बनाना चाहिए था, क्योंकि मांझी पासवान से ज्यादा प्रतिभा वाले नेता हैं. प्रधानमंत्री को उनकी बातों पर विचार करना चाहिए.

जब कोच कुंबले पड़े मुश्किल में

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले के कैरेबियाई दौरे की शुरूआत अच्छी नहीं रही क्योंकि एयरलाइन्स की गलती से उनका बैग लंदन में ही छूट गया था लेकिन ब्रिटिश एयरवेज ने तत्परता दिखाकर आज उनका सामान सुरक्षित सेंट कीट्स पहुंचा दिया.

टीम इंडिया जब सेंट कीट्स पहुंची, कुंबले ने हवाई अड्डे से ट्विटर पर फोटो साझा किया लेकिन उन्हें बाद में पता चला कि उनका बैग ही नहीं पहुंचा है. ब्रिटिश एयरवेज ने भी इसकी पुष्टि की थी और भारतीय कोच से बाकायदा माफी भी मांगी थी.

इस एयरलाइन्स ने हालांकि ट्वीट करके बताया कि सामान सेंट कीट्स पहुंचा दिया गया है जहां बासेटेरे में भारतीय टीम को वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड अध्यक्ष एकादश के खिलाफ दो दिवसीय अभ्यास मैच खेलना है.

ब्रिटिश एयरवेज ने फिर से रोचक अंदाज में ट्वीट किया, ‘‘अनिल कुंबले हमें यह ‘घोषित’ करते हुए खुशी हो रही है कि आपके बैग की सफल ‘डिलीवरी’ कर दी गयी है. श्रृंखला के लिये शुभकामनाएं. ’’ यह पहला अवसर नहीं है जबकि ब्रिटिश एयरवेज ने किसी भारतीय क्रिकेटर से माफी मांगी हो. पिछले साल नवंबर में दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपने परिवार के एक सदस्य की टिकट कन्फर्म नहीं होने और सामान गलत स्थान पर पहुंचा देने के लिये एयरलाइन्स की खिंचाई की थी.

यही नहीं इस घटना के बाद ब्रिटिश एयरवेज ने ट्विटर पर तेंदुलकर का पूरा नाम पूछ दिया था जिस पर भारतीय क्रिकेट प्रेमियों ने कड़ी प्रतिक्रिया की थी.

कॉल ड्रॉप की समस्या से जल्द मिलेगा छुटकारा

कॉल ड्रॉप की समस्या जारी रहने के बीच नए दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि इस मुद्दे को सुलझाना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है. सितंबर तक मेगा स्पेक्ट्रम नीलामी पूरी होने पर अगले 4-5 महीनों में इसमें गुणवत्तापरक सुधार की उम्मीद है.

सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा, 'हमारी शीर्ष प्राथमिकता कॉल ड्रॉप का समाधान है. हमें 4-5 महीने में गुणवत्तापरक सुधार की अपेक्षा है. हम जल्द ही स्पेक्ट्रम की नीलामी करने जा रहे हैं. उम्मीद है कि सितंबर के आखिर तक यह होगी, जिससे कॉल ड्रॉप की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी.'

दूरसंचार नियामक ट्राई के आंकड़ों के अनुसार कॉल ड्रॉप की समस्या वित्त वर्ष 2015 के आखिर में दोगुनी हो गई जबकि जनवरी मार्च तिमाही में उद्योग औसत बदतर होकर 12.5 प्रतिशत हो गया जो मार्च 2014 में 2जी नेटवर्क पर 6.01 प्रतिशत था. सिन्हा ने कहा, 'स्पेक्ट्रम नीलामी का कुल आरक्षित मूल्य लगभग 5.66 लाख करोड़ रुपये रहना अनुमानित है. हम इसे पारदर्शी तरीके से करेंगे.' सरकार को 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोली मिली है. बोली पूरी होने के बाद ही में पता चलेगा कि सरकार को कितनी राशि मिलने जा रही है.'

विंबलडन में बड़ा उलटफेर, फेडरर बाहर

कनाडा के पुरुष टेनिस खिलाड़ी मिलोस राओनिक ने कड़े मुकाबले में पूर्व विश्व नंबर-1 खिलाड़ी स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर को हरा कर साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विंबलडन के पुरुष एकल के फाइनल में प्रवेश कर लिया.

राओनिक पहली बार विंबलडन के फाइनल में पहुंचे हैं. सेन्टर कोर्ट पर खेले गए मुकाबले में सातवीं वरीय राओनिक ने तीसरी वरीय फेडरर को 6-3, 6-7(3-7), 4-6, 7-5, 6-3 से शिकस्त दी. यह मुकाबला तीन घंटे 24 मिनट तक चला.

राओनिक ने पहला सेट अपने नाम किया, लेकिन फेडरर ने जबरदस्त जोर लागते हुए अगले दो सेट में जीत कर वापसी की.

इसके बाद अगले दो सेटों में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार टेनिस से दर्शकों का मनोरंजन किया. फेडरर हार नहीं मानने वाले थे और पूरा जोर लगा रहे थे, वाबजूद इसके राओनिक ने फेडरर से चौथा सेट जीत 2-2 से बराबरी कर ली.

पांचवें और निर्णायक सेट में फेडरर कुछ खास नहीं कर पाए और राओनिक ने 6-3 से यह सेट जीत पहली बार विंबलडन के फाइनल में प्रवेश किया.

17 ग्रैंड स्लैम हासिल करने वाले फेडरर को इस साल अपने पहले ग्रैंड स्लैम का इंतजार है. उन्होंने इस साल इससे पहले आस्ट्रेलियन ओपन में हिस्सा लिया था जिसमें वह सेमीफाइनल से बाहर हो गए थे. फ्रेंच ओपन में चोटिल होने के कारण उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था. विंबलडन में उनका यह सपना अधूरा रह गया.

2012 के बाद से यह दिग्गज खिलाड़ी एक भी ग्रैंड स्लैम हासिल नहीं कर पाया है. 2012 में उन्होंने विंबलडन पर ही कब्जा जमाया था.

फेडरर को मात देने वाले राओनिक फाइनल में चेक गणराज्य के थॉमस बर्डिच और ब्रिटेन के एंडी मरे के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेंगे.

तो क्या भारत पर लग जाएगा व्यापारिक बैन…?

अमेरिका ने पॉल्ट्री मीट, अंडों और पिग्स के आयात पर लगाई गई पाबंदियों के विवाद में जीत हासिल करने के बाद विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से भारत पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है. डब्ल्यूटीओ ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. डब्ल्यूटीओ की ओर से जारी किए गए अजेंडा के मुताबिक अमेरिका ने 19 जुलाई को भारत से मुआवजा हासिल करने के दावे के लिए 19 जुलाई को मीटिंग किए जाने का अनुरोध किया है.

अजेंडा में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यायल ने इससे पहले कहा था कि यदि भारत पाबंदियों को हटा लेता है तो यूएस की ओर से पॉल्ट्री मीट का निर्यात 300 मिलियन डॉलर के स्तर को पार कर जाएगा. यही नहीं भारत के खानपान में सुधार और क्रय शक्ति में इजाफे के चलते यह लगातार बढ़ता जाएगा.

अमेरिका ने इस मामले में पिछले साल जून में जीत हासिल की थी, जब डब्ल्यूटीओ के अपीलीय प्राधिकरण ने भारतीय पाबंदियों को भेदभावपूर्ण करार दिया था. डब्ल्यूटीओ ने कहा था कि भारत की ओर से बर्ड फ्लू को खतरा बताते हुए आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात अप्रमाणित तथ्यों पर आधारित है.

डब्ल्यूटीओ ने इस फैसले को मानने के लिए भारत को 12 महीने का वक्त दिया था.

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