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..इसलिए सही से चार्ज नहीं होता आपका फोन

कई बार ऐसा होता है कि फोन को चार्जिंग पर लगाने के बाद भी फोन सही से चार्ज नहीं करता है. अगर ऐसा है तो जरूरी नहीं कि आपका फोन खराब हो गया हो या उसकी बैट्री वीक हो गई हो.

कई बार बहुत छोटी सी वजह के कारण भी फोन चार्ज नहीं हो पाता है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आपका फोन सही से चार्ज नहीं हो रहा है तो आपको सबसे पहले किन बातों का ध्‍यान रखना

धूल या लिंट हटाएं

अगर आपका फोन सारा वक्‍त आपकी जींस या पॉकेट में रहता है तो उसमें लिंट या डस्‍ट जाने के चांसेस काफी ज्‍यादा रहते हैं. इसलिए, किसी फाइन ब्रश से मोबाइल के चार्जर प्‍वाइंट को साफ कर लें. क्‍योंकि लिंट या धूल, पोर्ट को ब्‍लॉक कर देते हैं जिससे फोन सही तरीके से चार्ज नहीं हो पाता है.

केबल बदलें

अगर आपको फोन चार्ज करने में दिक्‍कत आ रही है तो केबल को बदल दें. इससे फर्क पड़ेगा. कई बार लम्‍बे समय तक फोन के साथ आने वाली केबल को इस्‍तेमाल करने से भी दिक्‍कत आने लगती है.

एडाप्‍टर

धूल हटा दी, केबल भी चेंज करके देख ली, लेकिन फोन अभी भी चार्ज नहीं हो रहा है तो अपने चार्जर के एडाप्‍टर को बदल लें और किसी अन्‍य एडाप्‍टर से चार्ज करके देखें.

बैट्री

किसी भी फोन की बैट्री की एक लिमिट होती है ऐसे में आपका फोन पुराना होने की स्थि‍ति में बैट्री की समस्‍या हो सकती है. बैट्री को बदल कर देखें, अगर फोन सही से बैकअप दे रहा है तो साफ है कि आपको फोन में नई बैट्री लगानी होगी.

सही चार्जिंग सोर्स

कभी भी कहीं भी अपने चार्जर को बेकार से वायर के साथ जोड़कर फोन चार्ज न करें. फोन को चार्जिंग पर हमेशा वॉल सॉकेट से ही लगाएं, इससे वो प्रॉपर तरीके से चार्ज हो पाएगा.

बैट्री को कैलीब्रेट करें

कुछ मामलों में, फोन का बैट्री लेवल सही शो नहीं करता है. ऐसे में आपको चार्ज करने के बाद देखना चाहिए कि फोन कितने समय तक चल जाता है.

पानी की समस्‍या

कई बार फोन में पानी गिर जाने से फोन चार्ज करना बंद कर देता है. ऐसे में आपको फोन को खोलकर सुखा देना चाहिए, हो सके तो बैट्री को भी बदल देना चाहिए. इससे फोन में नमी नहीं आएगी और वो सही से चार्ज करने लगेगा.

डिवाइस बंद कर दें

अगर आपका फोन चार्ज नहीं होता है या धीमे चार्ज होता है तो उसे स्‍वीच ऑफ करके चार्ज करें. इससे वो फुल चार्ज हो जाएगा और आपको अंदाजा भी हो जाएगी कि इसे चार्ज करने में पहले के मुकाबले कितना समय लग रहा है.

रोल बैक

नया एंड्रायड वर्जन या सॉफ्टवेयर, बैट्री लाइफ के साथ हैवॉक को क्रिएट करता है. विशेषकर, पुरानी डिवाइस, नए सॉफ्टवेयर का लाभ उठाने के लिए ऑप्‍टीमाइज नहीं होती हैं. ऐसे में आप एंड्रायड के सॉफ्टवेयर को रोल बैक कर सकते हैं जिससे फास्‍ट चार्जिंग दुबारा होने लगेगी.

रियो में जीतो मेडल और बनों करोड़पति

रियो ओलंपिक में पदक जीतने पर उत्तराखंड सरकार अपने खिलाड़ियों पर जमकर धनवर्षा करने की तैयारी में है. खेल नीति के अनुसार स्वर्ण पदक जीतने पर डेढ़ करोड़ रुपये का पुरस्कार खेल विभाग देगा. वहीं खिलाड़ियों के लिए खेल विभाग बड़ी घोषणा भी कर सकता है.

प्रदेश में साल 2014 में खेल नीति लागू होने के बाद खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने पर मिलने वाली पुरस्कार राशि को बढ़ा दिया गया था. खेल नीति लागू होने के बाद यह पहला ओलंपिक है, इसमें उत्तराखंड के एक साथ चार खिलाड़ी अपना जलवा बिखेरने को तैयार हैं. मनीष रावत, नितेंद्र सिंह रावत और गुरमीत सिंह एथलेटिक्स में अपना दम दिखाएंगे.

वहीं वंदना कटारिया हॉकी टीम में जलवा बिखेरेंगी. ओलंपिक के लिए टिकट हासिल कर देश भर में उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों पर ओलंपिक के बाद खेल विभाग धनवर्षा करेगा. वहीं पदक जीतने पर 50 लाख रुपये से अधिक का ईनाम खिलाड़ियों को मिलेगा.

खेल विभाग की मानें तो ओलंपिक के बाद प्रदेश लौटने पर चारों खिलाड़ियों का विशेष सम्मान होगा. वहीं सूत्रों की मानें तो पदक विजेता खिलाड़ी के लिए राज्य सरकार कोई बड़ी घोषणा भी करने की तैयारी में है. हालांकि यह घोषणा क्या होगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी जा रही.

उपनिदेशक खेल अजय अग्रवाल ने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाला उत्तराखंड के खिलाड़ी के लिए भी पुरस्कार का प्रारूप खेल नीति में रखा गया है. अगर कोई खिलाड़ी स्वर्ण, रजत, कांस्य जीतता है, तो उसको पदक के अनुसार पुरस्कार दिया जाएगा.

टीम में खेलें तो भी व्यक्तिगत के बराबर पुरस्कार

खेल विभाग ने ओलंपिक सहित अन्य प्रतियोगिताओं में व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए 50 लाख रुपये से अधिक का ईनाम रखा है. वहीं टीम प्रतिस्पर्धा जैसे हॉकी, फुटबाल सहित अन्य खेलों में भारतीय टीम में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने वाले प्रदेश के एक खिलाड़ी को भी व्यक्तिगत के बराबर पुरस्कार दिया जाएगा.

ये है ओलंपिक खिलाड़ी का पुरस्कार

पदक व्यक्तिगत/टीम स्पर्धा           पुरस्कार

स्वर्ण                                          15000000

रजत                                          10000000

कांस्य                                           5000000

प्रतिभाग                                         500000

तारीफ में ना करें कंजूसी

लड़कियों के बीच कितनी भी अच्छी दोस्ती क्यों ना हो, वे एकदूसरे से कितनी भी बातें शेयर क्यों ना करतीं हों, लेकिन जब बारी आती है तारीफ करने की तो ‘‘ठीक है, अच्छी है, ओकेओके है.’’ कह कर बात बदल देती हैं. अगर कभी उन की फ्रैंड उन से ज्यादा अच्छी ड्रैस पहन कर आ जाए तो मन ही मन ईर्ष्या करने लगती हैं कि आखिर इस की ड्रैस मुझ से अच्छी कैसे हो सकती है. जरूर किसी ने गिफ्ट दिया होगा. उस की तारीफ करने की बजाय उस में कमियां निकालना शुरू कर देती हैं.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ लड़कियां ही एकदूसरे की तारीफ नहीं करतीं, बल्कि आज के समय में हम सब तारीफ में कंजूसी करते हैं. किसी की कोई चीज अच्छी लगती है तो उस की तारीफ तो नहीं करते लेकिन उस के बारे में सारी चीजें पूछ लेते हैं कि कहां से खरीदा है, कितने का खरीदा है.

दरअसल हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि हम सोचते हैं कि अगर हम ने सामने वाले की तारीफ की तो वह खुद को हम से सुपीरियर ना समझने लगे.

लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. आप किसी की तारीफ में भले ही दो शब्द कहते हों लेकिन आप के इस दो शब्द से सामने वाले का कौंफिडैंस बढ़ता है और वह चीजों को और भी अच्छे से करने का प्रयास करने लगता है. मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि तारीफ से किसी भी इंसान का जीवन बदला जा सकता है और तारीफ करने वाला भी सुखद अनुभव करता है. किसी की तारीफ करना यह बताता है कि आप का नजरिया पौजेटिव है और आप दूसरों को देख कर ईर्ष्या नहीं करते. जब आप किसी की तारीफ करते हैं तो सामने वाले की नजरों में आप के लिए सम्मान और भी ज्यादा बढ़ जाता है. साधारण सी बात है लोग भी उन्हीं के साथ रहना पसंद करते हैं और उन्हीं पर विश्वास करते हैं जिन के साथ से उन्हें खुशी मिलती है.

तारीफ करने के हैं कई फायदे

– तारीफ करने से आप के बीच एक रिलेशन डेवलप होता है जिस से सामने वाले के अंदर यह विश्वास पैदा होता है कि आप उसे जो भी सुझाव देंगे सही होगा.

– लोग आप से बातें छुपाते नहीं, बल्कि बताना पसंद करने लगते हैं.

– आप की पौजिटिव पर्सनाल्टी से खुश होते हैं और आप के साथ रहना पसंद करते हैं.

– किसी के लिए आप के दिमाग में निगेटिव विचार नहीं आता और आप हैप्पी हैप्पी फील करते हैं.

– जब करें तारीफ तब इन बातों का भी ध्यान रखें.

– आप को पता है कि उस व्यक्ति से काम निकल सकता है इसलिए उस की तारीफ न करें और हां तारीफ के बदले किसी काम या मदद की अपेक्षा ना रखें.

– तारीफ करते समय अपनी सीमा, दूसरे व्यक्ति की सहजता का ध्यान रखें, ऐसी कोई बात ना कहें जिस से सामने वाले को बुरा लगे.

– जब कोई आप की तारीफ करे तो बदल में आप भी तारीफ ना करें. ऐसा करने से लगता है कि आप बदले में सामने वाले की तारीफ कर रहे हैं. बल्कि जब कोई तारीफ करे तो उसे मुसकरा कर धन्यवाद करें.

– जिस चीज के लिए आप की तारीफ की जा रही है उस की कीमत ना बताने लगें कि आप ने उसे कहां से और कितने में खरीदा है.

– अगर कोई तारीफ ना करे तो खुद से अपनी तारीफ ना करने लगें. आप का ऐसा व्यवहार सामने वाले को अजीब लग सकता है.

– तारीफ में बनावटीपन ना हो बल्कि खुल कर ईमानदारी से तारीफ करें.

क्यों उत्साहित हैं तनिष्ठा चटर्जी

बौलीवुड अदाकारा तनिष्ठा चटर्जी का एक पैर भारत में दूसरा पैर विदेश में रहता है. इसकी मूल वजह उनकी फिल्में हैं. तनिष्ठा चटर्जी बौलीवुड की उन अभिनेत्रियों में से हैं, जो कि हौलीवुड फिल्मों में अभिनय करने के अलावा बौलीवुड की उन फिल्मों में अभिनय कर रही हैं, जिनके वर्ल्ड प्रीमियर विदेश में किसी न किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में पहले होते रहते हैं. अब तक ‘पाच्र्ड’ सहित उनकी कई बौलीवुड फिल्मों के वर्ल्ड प्रीमियर विदेशी धरती पर वहां के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में हो चुके हैं, पर यह फिल्में भारत में अब तक रिलीज नहीं हुई हैं.

अब खबर है कि एक बार फिर तनिष्ठा चटर्जी सितंबर माह में जापान के टोरंटो शहर जा रही हैं. इस बार वह भारतीय मूल के हौलीवुड स्टार देव पटेल व हौलीवुड कलाकारों निकोल किडमैन व रूनी मारा के अभिनय से सजी अपनी हौलीवुड फिल्म ‘‘लायन’’ के लिए टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का हिस्सा बनने वाली हैं. इससे तनिष्ठा चटर्जी बहुत उत्साहित हैं.

हौलीवुड फिल्म ‘‘लायन’’ ऐसी फिल्म है, जिसका कुछ हिस्सा भारत के कलकत्ता शहर में फिल्माया गया था. कलकत्ता में शूटिंग के दौरान निकोल किडमैन नहीं आ पाई थी. कलकत्ता में इस फिल्म के लिए तनिष्ठा चटर्जी व देव पटेल ने शूटिंग की थी. तो अब टोरंटो में तनिष्ठा चटर्जी पहली बार निकोल किडमैन से मुलाकात करेंगी. खुद तनिष्ठा चटर्जी कहती हैं-‘‘मैं बहुत खुश और उत्साहित हूं कि सितंबर माह में टोरंटो में फिल्म ‘लायन’ के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान मेरी मुलाकात व गपशप निकोल किडमैन से हो सकेगी.’’     

फिल्म ‘‘लायन’’ की चर्चा करते हुए तनिष्ठा चटर्जी ने आगे कहा-‘‘मैं आस्ट्रेलिया में अपनी एक फिल्म की शूटिंग कर रही थी, तभी फिल्म ‘लायन’ के निर्देशक गर्थ डाविस का ईमेल आया था, जिसमें उन्होंने मेरे अभिनय की तारीफ करते हुए फिल्म ‘लायन’ से जुड़ने का आफर दिया था. मेरा किरदार फिल्म का अहम हिस्सा है. किरदार को लेकर  कुछ कह नहीं सकती. मैने अपने किरदार के बारे में बताया, तो फिल्म का रहस्य खुल जाएगा.’’

अक्षय कुमार ने कबूला सबसे बड़ा सच

फिल्म हो या टीवी सीरियल, हर माध्यम में लेखक की भूमिका अहम होती है. मगर बौलीवुड में लेखक को कोई महत्व ही नहीं दिया जाता. एक फिल्म के सफल होने का सारा श्रेय फिल्म में अभिनय करने वाले कलाकार ही बटोर लेते हैं. इन कलाकारों का मानना है कि सब कुछ वही करते हैं. जबकि सबसे बड़ा सच यह है कि यदि फिल्म की कहानी अच्छी न हो, पटकथा अच्छी न लिखी गयी हो, तो फिल्म का निर्देशक व कलाकार की सारी मेहनत बेकार हो जाती है.पर इस सच को स्वीकार करने का साहस कोई कलाकार या निर्देशक नहीं दिखाता. मगर दो दिन पहले 12 अगस्त को प्रदर्शित हो रही अपनी फिल्म ‘‘रूस्तम’’ के प्रचार के मद्देनजर मीडिया से बात करते हुए अक्षय कुमार ने इस सच को अपरोक्ष रूप से स्वीकार किया.

वास्तव में जब कुछ पत्रकारों ने अक्षय कुमार से सवाल किया कि फिल्म ‘‘रूस्तम’’ में उन्होंने एक देशभक्त इंसान, पत्नी से प्यार करने वाला तथा हत्यारे का किरदार निभाया है. इस तरह के किरदार को निभाना उनके लिए कितना कठिन था. इस सवाल पर अक्षय कुमार ने कहा-‘‘एक कलाकार के तौर पर इस तरह के किरदार निभाना मेरे लिए कभी भी मुश्किल नहीं होता. हम तो वही कैमरे के सामने अभिनय करते हैं, जो कि फिल्म की पटकथा में लिखा होता है. मगर यह काम पटकथा लिखने वाले लेखक के लिए जरुर कठिन होता है. मुझे तो सिर्फ अभिनय करना होता है.’’

छवि बिगाड़ती ‘रेप पॉलिटिक्स’

‘रेप पॉलिटिक्स’ ने उत्तर प्रदेश की छवि को फिर से बिगाडने का काम शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर में हाईवे पर गाडी को रोक कर मां-बेटी के साथ रेप की घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को गर्म कर दिया है. दिल्ली में लोकसभा से लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक राजनीतिक बयानबाजी से तेज हो गई है. राज्यसभा में जब बसपा नेता मायावती ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध का मुद्दा उठाया और प्रदेश की समाजवादी सरकार को बर्खास्त करने की मांग शुरू कर दी. मायावती का जवाब देती सपा नेता अभिनेत्री जया बच्चन ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध पर राजनीति नहीं होनी चाहिये. बुलन्दशहर रेप कांड को समाजवादी नेता और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खां ने राजनीति से प्रेरित बताकर राजधानी लखनऊ में रेप पर विवाद को हवा दी तो भाजपा के प्रवक्ता आईपी सिंह ने आग में घी डालने का काम किया.

महिलाओं के खिलाफ अपराध को बहुत ही संवेदनशील होकर देखने की जरूरत होती है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुलदंशहर प्रकरण को बहुत तेजी से हल करने का काम किया. उनकी मंशा को समझते हुये पुलिस विभाग के आला अफसर मौके पर गये. यह बात सही है कि पुलिस अगर हाईवे पर पेट्रोलिंग सही से करती तो ऐसे अपराध न होते. पुलिस की कमी है कि वह गश्त को सही तरह से अंजाम नहीं देती. अपराध के खिलाफ होने वाले मुकदमो में पहले लेवल में ही गंभीर नहीं होती है. ऐसे में अपराध होने की दशा में सरकार की छवि खराब होती है. उत्तर प्रदेश के बदांयू कांड को लोग अभी भूले नहीं है. पेड पर लटकी लडकियों की लाश ने प्रदेश सरकार दबाव में आ गई थी.

नेताओं को अपराध के खिलाफ आवाज उठाते समय अपने बयानों को समझबूझ कर बोलना चाहिये. कई बार नेता ऐसे बयान मामलों को हल्का करने के लिये देते है तो कई बार खुद को चर्चा में लाने के लिये ऐसे बयानों का सहारा लेते है. मीडिया भी ऐसे बयानों को हवा देने का काम करती है. इन सबका प्रभाव प्रदेश की छवि पर पडता है. दूसरे राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में पर्यटक बहुत कम आते है. उसके बाद हाईवे पर होने वाली घटनायें उनको डराने का काम करती है. पर्यटक ही नहीं दूसरे तमाम लोग अब परिवार के साथ रात में सफर करने से बचते है. प्रदेश के ऐसे हालात ठीक नहीं होते है. अपराध का राजनीति हल नहीं हो सकता. अपराध एक तरह की सामाजिक बीमारी है. इसको कानून व्यवस्था और जागरूकता के बल पर ही रोका जा सकता है.

उत्तर प्रदेश बहुत ही शांत और सुखद सफर वाला प्रदेश है. हाइवे पर ऐसी घटनाओं को रोकना चाहिये. इस मुद्दे पर राजनीति न करके ठोस कदम उठाने चाहिये. जो लोग सत्ता में हैं उनकी जिम्मेदारी ज्यादा होती है पर दूसरे नेताओं को भी राजनीति न करने का ख्याल रखना चाहिये. नेताओं के गैर जिम्मेदारी भरे बयान प्रदेश की छवि को खराब करते हैं. राजनीति में कुठिंत बयानबाजी को रोकना चाहिये. ऐसे बयानों को मीडिया भी प्रचारित करने से रोके तो यह बंद हो सकते है. रेप का शिकार मांबेटी अपनी परेशानियों में जूझ रही है. बेटी बीमार है. रेप की शिकार नाबालिग लडकियां मानसिक बीमारी का शिकार हो जाती हैं. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि समाज के लोग भी जागरूक हो और महिलाओं के खिलाफ एकजुट प्रयास करें. अपराधी को कानून सजा से सामाजिक बहिष्कार भी हो.                          

जानें अभी भी कैसे पाएं फ्री Windows 10 अपडेट

पिछले सप्ताह ही माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 10 को अपडेट करने की अंतिम तारीख थी, इसके यूजर को इसका फ्री अपडेट नहीं मिलेगा. इस बीच कंपनी ने अपने कई यूजर्स जो अबतक अपडेट नहीं तकर पाएं हैं उन्हें बड़ी राहत दी है.

माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 7 और विंडोज 8.1 यूजर्स के लिए ‘फ्री अपग्रेड ऑफर एक्सटेंशन’ का ऐलान किया है. सामान्य लोगों के लिए ये अपडेट बंद हो जाने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने एक्सटेंशन के साथ एक लूपहोल शुरु किया है जिसकी मदद से आपको फ्री में विंडोज 10 का अपडेट मिल सकेगा.

इस अपडेट के लिए यूजर को माइक्रोसॉफ्ट की hidden away accessibility site से EXE फाइल डाउनलोड करना होगा. इसके बाद विंडोज 10 अपडेट होना शुरु हो जाएगा. माइक्रोसॉफ्ट की ओर से अब तक ये नहीं बताया गया है कि ये एक्टेंशन का समय कब खत्म होगा. कंपनी ने बताया कि जब भी ये अपडेट एक्सटेंशन बंद किया जाएगा इसका हम औपचारिक ऐलान करेंगे.

खबर है कि माइक्रोसॉफ्ट अपनी एनीवर्सरी के मौके पर फ्री विंडोज 10 अपडेट दे रही है. जिसमें कोर्टाना का भी अपडेटेड वर्जन मिलेगा.

ओला और ऊबर को टक्कर देगा ‘उटू’

ओला और ऊबर के दखल वाले ऐप बेस्ड कैब मार्केट में लगता है कि कॉम्पिटिशन नए दौर में दाखिल होने जा रहा है. एयरसेल के फाउंडर सी. शिवशंकरन ने अपने नए वेंचर को कामयाब बनाने के लिए ड्राइवरों को घर देने की पेशकश की है. सी. शिवशंकरन के इस वेंचर के साथ अरबपति बिजनसमैन अजय पीरामल भी जुड़ रहे हैं.

ऐप बेस्ड कैब मार्केट में ड्राइवरों को इंसेटिव देने के मामले में ओला और ऊबर पहले ही सुर्खियां बटोर रहे थे लेकिन हाई परफॉर्मेंस वाले ड्राइवरों को घर देने की पेशकश से कैब मार्केट में आने वाले नए तूफान का अंदाजा लगाया जा सकता है. कैब ड्राइवरों को कैश इंसेटिव की जगह घर देने की बात को अब तक का सबसे आकर्षक ऑफर माना जा रहा है.

सी. शिवशंकरन कहते हैं, 'मैं चाहता हूं कि मेरे ड्राइवर अमीर हों. यह कुछ ऐसा है जिसे आप अमीर होने का पैमाना कह सकते हैं और उटू ने ड्राइवरों के लिए यही पेशकश की है.'

कैब मार्केट में 'उटू' ने दो महीने पहले ही दस्तक दी है और अभी इसने बाजार में अपनी सर्विस ठीक से लॉन्च भी नहीं की है. कंपनी का पहला टारगेट चेन्नई है. चेन्नई में 'उटू' को पहले से सेटल ओला और तेजी से बढ़ रहे ऊबर से मुकाबला करना है. इस सिलसिले में 'उटू' चेन्नई के बाहरी इलाकों में भी बाजार तलाश रही है. 'उटू' की गाड़ियों के बोनट पर कंपनी का लोगो देखा जा सकता है और उसके ड्राइवर वर्दी पहनते हैं. शहर की सड़कों पर 'उटू' की गाड़ियां दिखने लगी हैं.

कंपनी ने वादा किया है कि वह बिना एयरबैग सुरक्षा वाली एक भी कार सड़क पर नहीं उतारेगी. इसके अलावा वह ऐसे प्राइस मॉडल पर भी काम कर रही है जो सर्ज प्राइसिंग को खारिज करता हो. 

अब ईडन गार्डन में लॉर्ड्स सा नजारा

क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान की तर्ज पर ऐतिहासिक मैदानों में शुमार भारत के ईडन गार्डन क्रिकेट स्टेडियम में भी घंटी लगाई जाएगी. बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इस बात की घोषणा की है.

लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर गेंदबाजों की गैलरी के बाहर एक घंटी लटकी है, जिसे मैच की शुरुआत के समय बजाया जाता है. उस घंटी को बजाने के लिए आमंत्रण मिलना काफी सम्मान की बात मानी जाती है और गांगुली को 2014 में यह सौभाग्य हासिल हुआ था.

भारत के सफलतम कप्तानों में शुमार गांगुली ने संवाददाता सम्मेलन में बताया, "हां, हम इस तरह की घंटी ईडन में लगाने जा रहे हैं. हर सुबह यह दोनों टीमों के किसी खिलाड़ी या किसी पूर्व खिलाड़ी द्वारा बजाई जाएगी। यह घंटी आयात की जाएगी और सितंबर में यहां लगाई जाएगी."

स्टेडियम में फैन जोन भी बनाया जाएगा, जहां बच्चे खेल सकें और अपने परिवार के साथ वक्त बिता सकें. इसकी शुरुआत सितंबर में भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले टेस्ट मैच से होगी.

बिना इंटरनेट किसी की भी ट्वीट करें रीट्वीट

आजकल ट्विटर सोशल मिडिया पर अपनी राय रखने का सबसे अच्छा माध्यम बना हुआ है. पर अपडेटेड और एक्टिव रहने के लिए आपको ऑनलाइन रहना भी जरुरी है. पर अगर आप अपने किसी दोस्त अथवा खास हस्ती के सभी ट्वीट को ऑनलाइन हुए बिना भी रीट्वीट कर पाएं तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है. जी हां अब एक ऐसा तरीका निकाला गया है जिससे आप ट्विटर के लिए आए राउंडटीम टूल के जरिए बिना ऑनलाइन हुए भी किसी भी अकाउंट के सभी ट्वीट को ऑटो रीट्वीट कर सकते है.

यूजर को किन ट्वीट को रीट्वीट करना है यह फैसला यूजर पर निर्भर करता है. अगर आप बिना ऑनलाइन आए ही अमिताभ बच्चन या किसी और हस्ती के अकाउंट से होने वाली ट्वीट को रीट्वीट करना चाहते हैं तो यह यह टूल इसे संभव बना देता है.

इस टूल का सबसे बड़ा फायदा है कि इंटरनेट न होने पर भी यूजर अपने अकाउंट से रीट्वीट कर सकता है. लेकिन इसमें एक परेशानी ये हो सकती है यदि आपने किसी ऐसे अकाउंट के ट्वीट रीट्वीट करने के लिए सेट किए हैं जो नकारात्मक ट्वीट अधिक करता है तो आपके अकाउंट से भी वे ट्वीट रीट्वीट हो जाएंगे. हालांकि राउंडटीम पर इससे बचने का उपाय भी दिया गया है.

राउंडटीम को ऐसे करें इस्तेमाल

इसका यूज करने के लिए राउंडटीम डॉट सीओ पर जाएं. इस वेबसइट पर दाएं ओर ट्विटर के साथ अकाउंट को रजिस्टर करने का विकल्प दिया गया है. यहां क्लिक करने के बाद एक नया पेज ओपन होगा जहां यूजर को अपना ट्विटर अकाउंट लॉग-इन करना होता है.

अकाउंट लॉग-इन करने के बाद एक नया पेज ओपन जहां फॉलोवर और लिस्ट समेत 5 विकल्प दिए जाते हैं. यदि आप किसी व्यक्ति के ट्वीट रीटवीट करना चाहते हैं तो फॉलोड के विकल्प पर प्लस के निशान के आगे क्लिक करें. यहां उस व्यक्ति का ट्विटर हैंडल सबमिट करें.

यदि आप किसी हैशटैग में आने वाले ट्वीट को रीट्वीट करना चाहते हैं तो इस विकल्प में हैशटैग भी सबमिट कर सकते हैं. यहां हर घंटे किसी खास कीवर्ड या ट्विटर अकाउंट के कितने ट्वीट रीट्वीट करना चाहते हैं, यह भी तय किया जा सकता है.

इसके लिए वहां क्लिक करें जहां रीट्वीट करने के लिए किसी यूजर का हैंडल या हैशटैग शामिल किया गया है. इसे क्लिक करते ही एक नया बॉक्स ओपन होगा. इस बॉक्स में आप यह भी तय कर सकते हैं कि उस हैशटैग या ट्विटर अकाउंट के कितने ट्वीट एक घंटे में रीट्वीट करने है.

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