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शहर में डाले डेरे, बेखौफ हुए चेन लुटेरे

जयपुर में पुलिस की ढिलाई से चेन खींचने वाले गिरोहों की भरमार हो गई है. तकरीबन 15 साल पहले शहर में चेन खींचने की वारदातें करने वाले इंदर सिंधी और विनोद लांबा के 2 गिरोह थे, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस की कड़ी कार्यवाही की कमी के चलते सरेराह चेन खींचने वालों की तादाद लगातार बढ़ती ही गई. इस के चलते शहर में आज 2 दर्जन से ज्यादा चेन खींचने वाले गिरोह बन गए हैं. यही वजह है कि महज पिछले 5 महीनों में ही चेन खींचने वाले 60 से ज्यादा वारदातें कर शहर से तकरीबन 60 लाख रुपए की कीमत की चेन लूट ले गए हैं. चेन खींचने की लगातार बढ़ती वारदातों को देखते हुए पिछले दिनों पुलिस कमिश्नर खुद गश्त पर निकले, लेकिन गश्त ढीली पड़ने के साथ ही चेन खींचने वाले गिरोह फिर से हरकत में आ जाते हैं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि तकरीबन 15 साल पहले शहर में केवल इंदर सिंधी और विनोद लांबा के गिरोह ही इस तरह की वारदातों को अंजाम देते थे. हर वारदात के बाद पुलिस इन दोनों शातिर गिरोह की लोकेशन को ही सब से पहले ट्रेस किया करती थी.

इस के बाद खानाबदोश परिवारों के कुछ नौजवान शहर में चेन तोड़ने लगे, लेकिन पुलिस की ढिलाई और अनदेखी के चलते आज शहर की गलीगली में चेन खींचने वाले गिरोह बन गए हैं और ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

लगाते चोरी की धारा

सूत्रों ने बताया कि ऐसे गिरोह खड़े होने के पीछे पुलिस का काम करने का तरीका बड़ी वजह है. पुलिस ने अपना रिकौर्ड अच्छा रखने के चक्कर में चेन खींचने की वारदातों को लूट की  धाराओं में दर्ज करने के बजाय चोरी की धाराओं में ही दर्ज करने का सिस्टम बना लिया है. शिकार लोग फौजदारी धाराओं के इस खेल को इतना समझते नहीं हैं. इस वजह से चेन तोड़ने का अपराध ज्यादा आसान लगने लग गया है. दूसरे अपराधों से जुड़े कई अपराधी भी इस के चलते चेन खींचने वाले अपराधी बन गए हैं. इस के अलावा आदतन चेन खींचने को चोरी की धारा के चलते जमानत मिलने में आसानी हो गई है. जमानत पर जेल से बाहर आने के साथ ही ये अपराधी फिर से अपने धंधे में जुट जाते हैं.

नाकाम रहती है नाकाबंदी

चैन खींचने वाले शातिर हर वारदात से पहले इलाके की रेकी कर के ही इस को अंजाम देते हैं. फिर वे अपने शिकार को टारगेट करते हैं. मसलन, कोई औरत रोज मंदिर जाती है, तो उस के आनेजाने का समय नोट किया जाता है. साथ ही, उस के साथ जाने वाले लोग कहां तक उस के साथ जाते हैं, इसे भी ध्यान में रखा जाता है. चेन तोड़ने वाले गिरोहों द्वारा वारदात करने से पहले एक रूपरेखा तैयार की जाती है कि चेन किस जगह से तोड़नी है और वहां से निकलने के लिए किस रास्ते से वे आसानी से भागने में कामयाब हो सकते हैं. यही वजह है कि वारदात के बाद पुलिस नाकाबंदी के दौरान आज तक एक भी चेन खींचने वाला नहीं पकड़ा गया है. इस के पीछे पुलिस की लापरवाही को ही खास वजह माना गया है. पुलिस चेन खींचने वाले की लोकेशन पर निगाह रखने में नाकाम रहती है.

इस से चेन चोरों का हौसला बढ़ जाता है.

महीनों काचैन

पकड़ में आए कुछ चेन खींचने वालों ने बताया कि जिस चेन को वे तोड़ते हैं, वह कम से कम डेढ़ से 3 तोले के बीच होती है. 3 तोले चेन की कीमत 80 से 90 हजार रुपए बैठती है. ऐसे में वे चेन को बेचने सुनार के पास जाते हैं, तो उन्हें अच्छाखासा पैसा मिल जाता है. महज कुछ पल की मेहनत के बाद उन्हें दोढ़ाई महीने तक काम की चिंता नहीं रहती. पैसा पूरा होने के बाद दूसरे टारगेट पर निशाना साधने निकल जाते हैं. वकील बीएस चौहान का कहना है कि पुलिस को चेन खींचने के मामलों को लूट की धाराओं में ही दर्ज करना चाहिए. आईपीसी की धारा 309 में 10 साल की सजा का प्रावधान है, वहीं चोरी की आईपीसी की धारा 379 में महज 3 साल की सजा का प्रावधान है.

बरामदगी नहीं हो पाती

कई मामलों में पुलिस चेन खींचने वालों को पकड़ लेती है, मगर उन से बरामदगी नहीं कर पाती है. पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद चेन खींचने वाले सुनार के पास जा कर उसे गलवा देते हैं.  हालांकि कई सुनारों को भी गिरफ्तार किया है, लेकिन यह भी नाकाफी है. बरामदगी नहीं होने और सुबूत नहीं मिल पाने से चोरों को सजा में राहत मिल जाती है.

मुहिम से पकड़ में आएंगे

चेन खींचने की वारदातों ने आम आदमी का चैन छीन लिया है. टोंक फाटक कालोनी की रहने वाली साक्षी शर्मा का कहना है कि चेन खींचने वालों को पकड़ने की मुहिम चलानी चाहिए. इस में एक महिला कांस्टेबल को चेन पहना कर सुबह की सैर पर भेजना चाहिए, ताकि बदमाशों को रंगे हाथों दबोचा जा सके. महेश नगर इलाके में रहने वाली सोनाली शर्मा का कहना है कि पुलिस सुबह के समय नियमित रूप से गश्त करे, ताकि सुबह की सैर और मंदिर जाते समय चेन तोड़ने की वारदातों पर रोक लगाई जा सके.

ऐसे हो सकता है बचाव

चेन खींचने की वारदातों के लिए पुलिस को जन सहयोग से जगहजगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए, ताकि किसी तरह का भी अपराध होता है, तो वारदात करने वाले बदमाश उस में तसवीर के रूप में कैद हो जाएं. जितने भी कैमरे लगाए जाएं, वे नाइटविजन वाले होने चाहिए, ताकि रात में भी अपराधियों का चेहरा पूरी तरह से साफ नजर आए. साथ ही, कैमरों की मौनीटरिंग रोजाना हो और इस के लिए पुलिस वाले रोजाना अपडेट लेते रहें. संदिग्ध लगने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जाए. पुलिस के कुछ जवानों को भीड़ भरे बाजार और यातायात के बीच से मोटरसाइकिल चलाने की ट्रेनिंग देनी चाहिए, ताकि वे बदमाशों को पकड़ने का हुनर सीख सकें. इस के लिए किसी गैरसरकारी संस्था की मदद भी ली जा सकती है.

औरतें ये सावधानियां बरतें

* साड़ी या सूट इस तरह पहनें कि गले से चेन दिखाई नहीं दे.

* सुबह की सैर व मंदिर जाते समय निगाह रखें कि कोई उन का पीछा तो नहीं कर रहा है.

* वारदात के बाद बदमाशों का गाड़ी नंबर जरूर देखें और उसे याद रखें.

* असली गहने पहनने से अच्छा है कि नकली गहने पहन कर अपना शौक पूरा कर लें.

* किसी अनजान को घर के आसपास घूमता देख तुरंत पुलिस को सूचना दें.

कमजोरों पर भारी पड़ता तलाक तलाक तलाक

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ इलाके की रहने वाली रेहाना की शादी 16 साल की उम्र में लखनऊ के परवेज से हो गई थी. रेहाना का परिवार गांव में रहता था. वह वहां के रहनसहन की आदी थी. 5वीं जमात तक पढ़ी रेहाना को पढ़नेलिखने का शौक था. उस के वालिद ने आगे स्कूल भेजने से बेहतर उस की शादी करना मुनासिब समझा. रेहाना को समझा दिया गया कि निकाह के बाद लखनऊ जाना, तो वहां पढ़ने के लिए अच्छेअच्छे स्कूल मिलेंगे.

रेहाना निकाह के बाद लखनऊ आ गई. वहां पर उस ने अपनी पढ़ाई की बात की, तो किसी ने उस की बात को तवज्जुह नहीं दी. धीरेधीरे वह रोजमर्रा की जिंदगी में उलझ गई. शादी के सालभर बाद ही रेहाना को एक बच्चा भी हो गया. रेहाना का पति नौकरी करने विदेश चला गया. अब वह कुछ दिन लखनऊ रहती, तो कुछ दिन मायके हैदरगढ़ चली जाती. इस बीच ससुराल में उस का कुछ मनमुटाव भी होने लगा. यह बात विदेश में नौकरी करने गए रेहाना के पति परवेज को भी पता चली, तो वह उसी को जिम्मेदार ठहराने लगा. रेहाना को यह पता नहीं था कि परवेज के मन में क्या है?

एक दिन फोन पर बात करते ही दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. गुस्से में आ कर परवेज ने रेहाना को ‘तलाक तलाक तलाक’ कह कर तलाक दे दिया.इस बात की जानकारी रेहाना के मायके और ससुराल वालों को भी हुई. उन लोगों ने बात को संभालने के बजाय दोनों का अलगाव कराने का फैसला कर लिया. निकाह के 4 साल के अंदर ही 20 साल की रेहाना तलाकशुदा औरत बन कर ही मायके में रह कर मेहनतमजदूरी कर के अपना पेट पालने को मजबूर हो रही है.

यह केवल रेहाना की बात नहीं है. गांवों और कसबों में रहने वाली कमजोर परिवार की बहुत सारी मुसलिम लड़कियां इस तरह की परेशानियों से गुजर रही हैं. कुछ सालों में उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवकसबों में रहने वाली लड़कियों के मातापिता उन की शादी शहरों में करने लगे हैं, ताकि वे सुखी जिंदगी गुजरबसर कर सकें. शादी के समय अपनी अच्छी माली हालत बताने वाले लड़कों के परिवार शादी के बाद लड़कों को नौकरी करने किसी और देश या शहर भेज देते हैं, जहां पर वे नौकरी करते हैं. घर में उन का रहना कम होने लगता है.पतिपत्नी के अलग रहने से दोनों के बीच दूरियां बढ़ती जाती हैं. एक समय ऐसा आता है कि ये दूरियां तनाव, लड़ाईझगड़े में बदल जाती हैं. फोन, ह्वाट्सऐप और सोशल मीडिया के बढ़ते चलन से बातबात पर तलाक देने की घटनाएं बढ़ गई हैं. छोटीछोटी बातचीत और लड़ाईझगड़े में ये मर्द अपनी औरतों को तलाक देने लगे हैं. मुसलिम तलाक कानून 3 तलाक को ले कर पसोपेश की हालत में है. ऐसे में इस का खमियाजा औरतों को उठाना पड़ता है.

आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में महिला शरीआ अदालतों में 235 तलाक के मामले आए थे. इन में से 66 फीसदी मामलों में बातचीत करतेकरते मुंहजबानी तलाक ही लिया गया था. जिन औरतों को तलाक मिला, उन में से 90 फीसदी से ज्यादा औरतें इस तरह के तलाक से खुश नहीं हैं. मुसलिम समाज में आज भी 55 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही कर दी जाती है. इन में से आधी औरतों के पास निकाहनामा नहीं होता है. मुसलिम समुदाय में इस तरह के तलाक की अहम वजह किसी और से शादी भी होती है. 90 फीसदी औरतें अपने पतियों की दूसरी शादी के खिलाफ हैं. मुसलिम समाज में घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े हैं. औरतें बातबात पर तलाक के डर से अपनी बात किसी से कहने में डरती हैं. उन को लगता है कि इस से उन का पति उन को तलाक दे देगा. तलाक के डर से वे मारपीट को चुपचाप सहती रहती हैं.

छोटी छोटी वजहें

बातबात पर तलाक देने के मामलों को देखा जाए, तो बहुत छोटीछोटी वजहें सामने आती हैं. रेहाना ने बताया कि उस के पति ने लड़ाईझगड़ा शुरू करने से पहले कहा था कि तुम को खाना बनाना नहीं आता. जब भी तुम गोश्त बनाती हो, उस में तेल ज्यादा रहता है. उस को खाने के बाद हमारे घर वालों का पेट खराब हो जाएगा. वे बीमार हो जाएंगे. जब तुम घर के लोगों के लिए खाना तक नहीं बना सकती हो, तो तुम्हारे साथ निकाह कर के रहने का क्या फायदा? इस के बाद ही उस ने तलाक दे कर रेहाना को छोड़ दिया. दरअसल, मुसलिम कानून में औरतों के बजाय आदमियों को ज्यादा हक दिए गए हैं. ऐसे में औरतें हमेशा अपने को असुरक्षित महसूस करती हैं. आदमियों को लगता है कि 3 बार तलाक कहने से उन को बीवी से छुटकारा मिल जाएगा. एक बार तलाक हो जाने के बाद कोई भी औरत की बात को सही नहीं मानता. ऐसे में आदमियों के हौसले बढ़ते जाते हैं.

समाज के दूसरे तबकों को देख कर मुसलिम बिरादरी की लड़कियां भी फैशनेबल पोशाक में रहना चाहती हैं. जब वे ऐसा करती हैं, तो उन के समाज के कट्टरवादी लोग एतराज करते हैं. यहीं से औरतों का विरोध होने लगता है.

20 साल की फरहाना ने बताया कि उस ने इंटर तक की पढ़ाई पूरी की थी. शादी के बाद वह अपनी सहेलियों से मिलती, तो वे सब फैशन से रहती थीं. एक बार उस ने भी फैशनेबल पोशाक पहन ली. इस से उस की सास नाराज हो गईं और इस बात की शिकायत उस के पति को कर दी, जिस के बाद मारपीट से शुरू हुई कहानी तलाक तक पहुंच गई. इस तरह के हालात का सामना कर रही रजिया ने बताया कि उस का तलाक इसलिए हो गया, क्योंकि अपनी ननद की शादी में उस ने कपड़ों और गहनों की खरीदारी की थी. यह बात ननद की ससुराल वालों को पसंद नहीं आई. ननद की ससुराल वालों की शिकायत पर उसे तलाक दे दिया.

पहले भारतीय समाज में शादी टूटने की घटनाएं कम होती थीं. हाल के कुछ सालों में ये घटनाएं बढ़ चुकी हैं. शादी टूटने की सब से ज्यादा घटनाएं मुसलिम बिरादरी में बढ़ रही हैं. महज 10 सालों के अंदर शादी टूटने की घटनाएं 3 गुना ज्यादा बढ़ गई हैं. छोटेबड़े सभी शहरों में एकजैसे हालात हैं. देश में सब से ज्यादा तलाक मुंबई में होते हैं. एक साल में मुंबई में औसतन 11 हजार, दिल्ली में 8 हजार और लखनऊ में 3 हजार तलाक होते हैं. दिल्ली में हर साल फैमिली कोर्ट में 15 हजार से ज्यादा अर्जियां तलाक के लिए डाली जाती हैं. केरल, पंजाब और हरियाणा में तलाक के मामले तेजी से बढ़े हैं. वहां हर साल 3 से 6 हजार तलाक के केस फाइल होते हैं.

तलाक की कहानी

मुसलिम तबके में किसी आदमी को अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए तलाक शब्द को कहने का हक हासिल है. 3 बार तलाक शब्द को दोहरा कर वह पत्नी को तलाक दे सकता है. मुसलिम धर्म के जानकार मानते हैं कि इस तरह बातबात पर तलाक लेना सही नहीं है. तलाक शब्द को एकसाथ ही 3 बार में नहीं बोला जा सकता है. एक महीने में एक बार ही तलाक बोला जा सकता है. इस से पतिपत्नी को तलाक लेने में 3 महीने तक का समय मिल जाता है.

सही बात यह है कि लोग इस बात का पालन नहीं करना चाहते. लोग एक बार में ही तलाक शब्द को 3 बार में बोल कर तलाक लेना पसंद करते हैं. मुसलिम तबके के लोग भी इस बात को ज्यादा प्रचारित नहीं करना चाहते कि तलाक को किस तरह से देना होता है. मर्द इस भ्रम को बनाए रखना चाहते हैं, जिस से वे औरतों का शोषण कर सकें. कम पढ़ीलिखी लड़की इस तरह के दबाव में आ कर टूट जाती है. वह 3 बार कहे गए तलाक को ही सही मान लेती है. वह इस को अपनी किस्मत मान कर समझौता कर लेती है. कम उम्र में तलाक होने से औरतें जिंदगीभर दुख भोगती रहती हैं. इस में से कई दिमागी बीमारियों का शिकार हो कर टूट जाती हैं.

रेहाना कहती है, ‘‘तलाक देने के तरीकों से मुसलिम औरत हमेशा नुकसान में रहती है. जब तक 3 तलाक को सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, तब तक मर्द मनमानी करते रहेंगे.’’ तलाक को ले कर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुझाव दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के साथ ही शादी में दिए गए स्त्रीधन और मिलने वाले सामान की पूरी लिस्ट भी बनाई जाए. इस के बाद भी अभी तक इस बात पर अमल नहीं किया गया है. अगर 3 तलाक के गलत इस्तेमाल से शादियों को टूटने से बचाना है, तो सुप्रीम कोर्ट की बात को मानना ही पडे़गा. मर्दों को लगता है कि अगर तलाक देने के तरीके में कोई रुकावट आएगी, तो उन की मनमानी पर असर पड़ेगा, जिस से वे औरत को आसानी से तलाक दे कर दूसरी शादी नहीं कर सकेंगे.

सोशल साइटें बनीं सौतन

पिछले 4-5 सालों में सोशल साइटों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिस में आदमी और औरत दोनों ही अलगअलग दोस्त बनाते हैं. सब से बड़ा जरीया फेसबुक और ह्वाट्सऐप हैं. पहले यह लत शहरों तक ही सिमटी थी, पर अब मोबाइल फोन, फेसबुक और ह्वाट्सऐप गांवकसबों तक पहुंच गए हैं. बातबात पर तलाक के मामलों को अलग कर के देखा जाए, तो सोशल साइटें तलाक की अहम वजहें बन रही हैं. स्कूल में पढ़ाने वाली सलमा फेसबुक और वाट्सऐप दोनों का इस्तेमाल करती थीं. वे जब स्कूल से वापस आतीं, तो कुछ देर सोशल साइट्स पर बिताती थीं. एक बार उन के पति ने उन का फोन देखा तो पता चला कि सलमा रात को किसी मर्द दोस्त से चैटिंग कर रही थी. पति ने इस बात को ले कर पहले झगड़ा शुरू किया और बाद में सलमा को तलाक दे दिया. मुसलिम बिरादरी में अभी भी औरतों पर तमाम तरह की पाबंदी हैं. ऐसे में सोशल साइटें सौतन बन गई हैं. बातबात पर होने वाले तलाक में फेसबुक और ह्वाट्सऐप की बातों को सुबूत की तरह से पेश किया जाने लगा है. 50 फीसदी से ज्यादा लोग अपने साथी के अकाउंट पर नजर रखते हैं. 60 फीसदी लोग यह चाहते है कि उन की पत्नी अपने मोबाइल फोन में किसी तरह का पासवर्ड लौक न लगाएं.

30 फीसदी लोगों में फेसबुक और वाट्सऐप को ले कर हफ्ते में एक बार झगड़ा जरूर होता है. सोशल साइटों ने शादीशुदा जिंदगी में परेशानी खड़ी कर दी है. इस का सब से ज्यादा असर मुसलिम बिरादरी पर पड़ रहा है. अब मुसलिम बिरादरी भी इन मामलों को ले कर जागरूक होने लगी है. 3 तलाक कानून से उस की परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ती जा रही हैं.                                 

मुसलिम देश भी हैं परेशान

भारत में 3 तलाक भले ही चल रहा हो, पर मुसलिम देशों में इस पर बैन लगाया जाना शुरू हो गया है. पाकिस्तान में 3 तलाक को बंद कर दिया गया है. मुसलिम देशों में गुस्से, नशे और जोश में दिए गए तलाक को सही नहीं माना जाता है. अलगअलग देशों में तलाक को ले कर अलगअलग कानून हैं. मुसलिम देशों में औरतों की हालत बेहद खराब है. यूरोपीय देशों में मुसलिम जोड़ों के लिए अलग कानून है. 3 तलाक को वहां भी अच्छा नहीं माना जाता है. इस को रोकने के वहां भी अलगअलग कानून बने हैं. उन देशों में रहने वालों के माली और सामाजिक हालात भारत से अलग हैं. ऐसे में भारत में 3 तलाक को ले कर ज्यादा जागरूकता नहीं है. भारत में तमाम औरतों ने अपने संगठन बना कर 3 तलाक  का विरोध करना शुरू किया है. इस से समाज में जागरूकता तो आ रही है, पर अभी भी बड़ा हिस्सा 3 तलाक को सही मानता है. आपसी विरोधऔर सहमति के बीच 3 तलाक का प्रचलन जारी रहने से औरतों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सब से ज्यादा परेशानी गांवकसबों में रहने वाली औरतों के सामने आती है. कम पढ़ीलिखी गरीब औरतें अपनी शिकायत तक सही से नहीं करा पाती हैं. 3 तलाक ने इस तरह की औरतों की जिंदगी को बरबाद कर दिया है.

हार के बाद भी पंटर के लिए खास थी ये सीरीज

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोटिंग इन दिनों भारत में हैं. पंटर के नाम से मशहूर इस बल्लेबाज ने खुलासा किया कि 2001 में भारत के साथ खेली गई टेस्ट सीरीज उनके करियर की सबसे यादगार सीरीज में शुमार है. हालांकि यह सीरीज भारत ने जीती थी.

भारत ने 2001 में हुई ये सीरीज ऑस्ट्रेलिया से जीती थी जिसके बारे में पोंटिंग ने कहा, '2001 की सीरीज उन सीरीज में सबसे यादगर थी जिसमें मैं खेला. हम सीरीज हार गए लेकिन सीरीज के दौरान क्रिकेट का स्तर और जिस जज्बे के साथ यह खेली गई और पूरी सीरीज के दौरान दर्शकों की मौजूदगी अविश्वसनीय थी.'

उन्होंने कहा, 'जब आप (कमेंटेटर) हर्षा भोगले से पूछो कि उनका सबसे यादगदार टेस्ट कौन सा है. मुझे यकीन है कि कोलकाता टेस्ट टॉप में शामिल होगा. फॉलोआन के बाद (वीवीएस) लक्ष्मण के 280 रन, (राहुल) द्रविड़ के 180 रन. भारत ने कुछ सौ रन की बढ़त बनाने के बाद पारी घोषित की और उनके पास हमें आउट करने के लिए एक सत्र से कुछ अधिक का समय था और उन्होंने ऐसा कर दिया.'

भारत ने की थी शानदार वापसी

पोंटिंग ने कहा, 'यह हमारा सबसे गौरवांवित लम्हा नहीं था लेकिन निश्चित तौर पर भारतीय क्रिकेट का सबसे गौरवांवित लम्हा था. फिर तीसरा टेस्ट (चेन्नई में) भी भारत ने जीतकर सीरीज जीत ली. यादगार सीरीज. ऑस्ट्रेलिया ने मुंबई में पहले टेस्ट में भारत को 10 विकेट से हराया था लेकिन मेजबान टीम ने कोलकाता और चेन्नई में अगले दो टेस्ट जीतकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की थी.'

लक्ष्मण ने फॉलोआन के बाद कोलकाता टेस्ट में 281 रन की पारी खेली और द्रविड़ के साथ पूरा दिन क्रीज पर टिके रहे. इस बीच पोंटिंग ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली सीरीज शानदार होगी क्योंकि क्रिकेट की ये दो बड़ी टीमें काफी प्रतिस्पर्धी हैं और जब ये एक दूसरे के आमने-सामने होंगी तो इन्हें देखना बेहतरीन होगा.

उनके पास वर्ल्ड क्लास हाशिम, डिविलियर्स और डुमिनी हैं

पोंटिंग ने कहा, 'मेरे कहने का मतलब है कि दोनों टीमों ने फिलहाल बराबरी की हैं. दोनों के पास अच्छा तेज गेंदबाजी आक्रमण है, मिशेल स्टार्क (ऑस्ट्रेलिया के) लाल गेंद के साथ अपने खेल को नए स्तर पर ले गए हैं. दक्षिण अफ्रीका के नजरिए से लगता है कि डेल स्टेन ने एक बार फिर लय हासिल कर ली है जो शानदार है.'

उन्होंने कहा, 'उनके पास हाशिम अमला, एबी डिविलियर्स, जेपी डुमनी हैं जो वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं.' दक्षिण अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच वनडे और तीन टेस्ट की सीरीज खेलनी है. पहला वनडे 30 सितंबर को खेला जाएगा.

4G के बाद जल्द ही आएगा 5G

भारत को बाकी दुनिया के देशों के साथ 5जी मिलने की संभावना है. दूरसंचार सचिव जेएस दीपक ने बुधवार को कहा कि हम इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में इस बात की संभावना है कि देश को 5जी शेष दुनिया के साथ मिले.

दीपक ने कहा, ‘हमें 2जी शेष दुनिया से 25 साल बाद मिला, कम से कम विकसित दुनिया से. इसी तरह हमें 3जी उस समय मिला जबकि एक दशक पहले यह अमेरिका और यूरोप पहुंच चुका है. इसी तरह 4जी उसे वैश्विक रूप से पेश किए जाने के पांच वर्ष बाद हमारे पास पहुंचा. 5जी के मामले में ऐसी संभावना है कि यह हमें शेष दुनिया के साथ ही मिलेगा’

उन्होंने कहा कि 5जी की शुरुआत शेष दुनिया और भारत में साथ-साथ हो सकती है. इससे हमें पहले से चल रहे अंतर को पाटने में मदद मिलेगी. ऐसा भी संभव है कि भारत एक कदम आगे बढ़ते हुए कुछ क्षेत्रों में अग्रणी स्थान हासिल करे, क्योंकि हम कनेक्टेड उपकरणों तथा मशीनों के साथ आईओटी में प्रवेश कर रहे हैं.

दीपक ने पहली आईओटी इंडिया कांग्रेस के उद्घाटन के बाद ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आईओटी से अगले पांच-छह साल में कनेक्टेड उपकरणों की संख्या 50 अरब हो जाएगी. इससे भारत को कम से कम 15 अरब डालर के कारोबारी अवसर मिलेंगे. इस सम्मेलन में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रिकॉर्ड किए वीडियो संदेश में कहा कि आईओटी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कनेक्टेड उपकरण आज समय की जरूरत हैं.

फोन को हैक होने से ऐसे बचाएं

आजकल हर कोई अपना हर काम स्‍मार्टफोन पर ही करता है. ऐसे में उसके कई पर्सनल डेटा और बैंक सम्‍बंधी जानकारियां भी फोन में ही मौजूद रहती हैं.

कई बार लोगों का डेटा चोरी हो जाता है और वो बड़ी मुश्किल में फंस जाते हैं. अगर आप अपने स्‍मार्टफोन को सुरक्षित बनाएं रखना चाहते हैं और उसे हैकिंग से बचाना चाहते हैं तो ये 5 टिप्‍स अपनाएं –

न करें निजी डेटा शेयर

सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि आप किसी पर भी भरोसा न करें. आपके सामने अगर कोई जानकारी आती है जो कि आपसे आपका निजी डेटा मांगती है तो उसे नकारने में कोताही न बरतें.

पासवर्ड सेव न रखें

कभी भी अपनी किसी भी डिवाइस में पासवर्ड को सेव न रखें. यह आपके लिए समस्‍या का कारण बन सकता है.

एप को लॉक

अपनी सभी एप को लॉक रखें, खासकर उनको, जिन पर आपकी व्‍यक्तिगत बातचीत होती हो.

डेटा वाइप करें

अपने निजी डेटा या तस्‍वीरों को समय-समय पर वाइप करते रहें या उन्‍हें किसी पीडी में सेव करते रहें.

पब्लिक वाई-फाई

पब्लिक वाई-फाई का इस्‍तेमाल न करें. इससे आपकी गुप्‍त जानकारी लीक हो सकती है.

FIFA क्वालीफायर: नेमार ने दिलाई ब्राजील को जीत

नेमार के विजयी गोल के दम पर ब्राजील ने कोलंबिया को विश्व कप 2018 फुटबॉल क्वालीफाइंग दौर के मैच में 2-1 से हरा दिया. पांच बार की विश्व कप विजेता ब्राजील के आठ मैचों में 15 अंक हैं और वह अंक तालिका में शीर्ष पर चल रही उरुग्वे से एक अंक पीछे है.

बार्सिलोना के सुपरस्टार नेमार ने 74वें मिनट में गोल किया. नेमार के लिए यह गोल इसलिए भी खास रहा, क्योंकि कोलंबिया के खिलाफ 2014 विश्व कप मैच में उन्हें चोट लगी थी. डिफेंडर जोआओ मिरांडा ने मैच के दूसरे मिनट में ही गोल कर कोलंबिया को झटका दे दिया.

इसके बाद बराबरी को कोशिशों में लगी कोलंबिया के हाथ निराशा लगी. लेकिन मैच के 36वें मिनट में ब्राजील के माक्विन्होस ने आत्मघाती गोल कर कोलंबिया को 1-1 से बराबरी पर ला दिया.

कावानी ने दागे दो गोल

विश्व कप क्वालीफायर के एक अन्य मैच में उरुग्वे ने पराग्वे को 4-0 से मात दी. उरुग्वे के लिए एडिंसन कावानी ने दो गोल किए. लुइस सुआरेज और क्रिस्टियन रोडिग्वेज ने भी एक-एक गोल किए.

अर्जेटीना ने ड्रॉ खेला

कप्तान लियोन मेसी के बिना खेल रही अर्जेंटीना की टीम वेनेजुएला के खिलाफ दो गोल से पिछड़ने के बाद मैच ड्रॉ कराने में कामयाब रही.

बेलारूस ने फ्रांस को थामा

यूरो कप उपविजेता फ्रांस की विश्व कप के क्वालीफायर मैचों में शुरुआत खराब रही. फ्रांस और बेलारूस के बीच मैच गोलरहित ड्रॉ रहा.

अब लाइसेंस रखने के झंझट से छुटकारा

अब आपको वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) अपने साथ रखने की जरूरत नहीं होगी. डिजिलॉकर के जरिए आप इसका ऑनलाइन इस्तेमाल कर सकते हैं. डिजिलॉकर को सड़क परिवहन मंत्रालय की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रणाली से जोड़ दिया गया है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस एकीकरण की शुरुआत की और कहा कि नागरिक हवाई अड्डों पर भी वैध पहचान पत्र के रूप में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.

डिजिटल ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन पंजीकरण दस्तावेज नागरिकों के मोबाइल फोन में डिजिलॉकर मोबाइल एप के जरिए उपलब्ध होंगे. ट्रेफिक पुलिस व अन्य प्रवर्तन एजेंसियां इसके जरिए मौके पर ही सत्यापन कर सकेंगी यानी ये सत्यापन के लिए वैध दस्तावेज होंगे. सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा, इस प्रणाली से केवल भ्रष्टाचार ही दूर नहीं होगा बल्कि यह प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा. नागरिक हवाई अड्डों पर इसका इस्तेमाल वैध पहचान दस्तावेज के रूप में कर सकेंगे.

गडकरी ने इस पहल को परिवहन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण बताया जहां 19.5 करोड़ वाहन पंजीबद्ध हैं जबकि 10 करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस हैं. वहीं एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि इस सिस्टम में परिवहन से जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध होंगे. वहीं इसकी मदद से यूजर्स लाइसेंस रिन्युअल जैसी 20 से 30 अलग अलग सर्विस का भी फायदा उठा सकते हैं. अधिकारी के मुताबिक इस एप से जुड़ी सबसे बड़ी मुश्किल डेटा सिक्‍योरिटी की थी. लेकिन इस एप में सभी बातों का ख्याल रखा गया है.

इस एप्पल वॉच में बहुत कुछ है खास

सैन फांसिस्को में एप्पल के नए वॉच 'सीरीज 2' को लॉन्च किया गया. एप्पल के सीईओ टॉम कुक ने इसे लॉन्च किया. कंपनी का कहना है कि यह नए सिरे से डिजाईन की गई है. यह स्विमिंग प्रूफ वॉच है,  साथ ही यह जीपीएस सिस्टम से भी लैस है.

एप्पल वॉच 'सीरीज 2'  की खासियत

– यह पूरी तरह से वॉटर प्रूफ वॉच है. इसे पहनकर स्विमिंग की जा सकती है. यह15 मीटर गहरे पानी तक का प्रेशर सह सकती है.

– इस वॉच से स्वीमिंग करते हुए कितनी कैलोरी खर्च हुई उसका हिसाब रखा जा सकेगा

– इसमें बिल्ट इन जीपीएस फीचर है. वॉकिंग और रनिंग में सुविधा के लिए बिल्ट-इन जीपीएस एड किया गया है.

– एप्पल वॉच के लिए नया ऐप पोकिमॉन गो लोगों को एंटरटेन करेगा.

– OS 3 पर रन करने वाली ऐपल वॉच सीरीज 3 को कई सारे वैरियंट्स में लॉन्च किया गया है.

अबकी बार ‘फ्लैक्सी फेयर’ की मार

हवाई यात्रा मे लागू होने वाले ‘फ्लैक्सी फेयर’ को रेल के सफर में लागू कर केन्द्र सरकार रेल के सफर को हवाई जहाज के सफर का अनुभव कराना चाहती है. बिना टैक्स का रेल बजट पेश कर वाहवाही लूटने वाले रेलमंत्री सुरेश प्रभु को जब साल भर रेल के टिकट बढाने है तो रेल बजट बेमानी हो जाता है. 7 वें वेतनमान का लाभ तो केवल कुछ प्रतिशत सरकारी नौकरों को ही मिलने वाला है. केन्द्र सरकार इसका बोझ सभी पर डालना चाहती है.

‘फ्लैक्सी फेयर’ इसकी पहली सीढी है. जिसे भारतीय रेलवे फिलहाल राजधानी, शताब्दी और दुरंतों में लागू कर रही है. धीरे धीरे यह ‘फ्लैक्सी फेयर’ सभी ट्रेनों में लागू होगा. यह ठीक वैसे ही धीरे धीरे किया जायेगा जैसे केन्द्र सरकार रसोई गैस यानि एलपीजी सब्सिडी को लेकर कर रही है. एलपीजी सब्सिडी में केन्द्र सरकार ने सबसे पहले जनता से सब्सिडी छोडने की अपील की. अब 10 लाख सालाना कमाई वालों की सब्सिडी वापस लेने की योजना है. इसके बाद 5 लाख सालाना कमाई वालों की एलपीजी सब्सिडी वापस की जायेगी. धीरे धीरे सरकार एलपीजी सब्सिडी को खत्म कर देगी.

ट्रेनों के टिकट में ‘फ्लैक्सी फेयर’ की मार केवल मध्यम वर्ग पर पड रही है. एक्जक्यूटिव क्लास और एसी सेकेंड और फर्स्ट क्लास में यात्रा करने वालों पर ‘फ्लैक्सी फेयर’ का बोझ नहीं डाला गया है. ‘फ्लैक्सी फेयर’ का मतलब यह होता है कि ट्रेन में जैसे जैसे सीटे कम होंगी वैसे वैसे उनका किराया बढेगा. मतलब यह है कि जो टिकट पहले 100 रूपये में मिला वही बाद में 150 रूपये हो जायेगा. 9 सितबंर से लागू इस योजना का भार पहले बुक हो चुकी टिकट पर नहीं पड़ेगा. टिकट की गणना इस प्रकार होगी कि अगर किसी ट्रेन में 100 सीटे हैं, तो 10 सीटों का किराया सामान्य होगा. इसके बाद हर 10 सीट पर यह रेट बढ़ता जायेगा. यह अधिक से अधिक डेढ गुना हो सकता है.

रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने ‘फ्लैक्सी फेयर’ योजना को लागू कर दिया है. सरकार का दावा है कि इससे रेलवे को घाटे से उबारने का मौका मिलेगा. सरकार का तर्क है कि ‘फ्लैक्सी फेयर’ योजना प्रीमियम ट्रेनों में लागू की गई है. यह कहते हुये सरकार भूल जाती है कि राजधानी, शताब्दी और दुरंतों जैसी ट्रेने  हर शहर से होकर गुजरती हैं जिससे आम लोग इसमें सफर करते हैं. ऐसे में यह कहना गलत है कि ‘फ्लैक्सी फेयर’ का प्रभाव आम जनता पर नही पड़ेगा.

सरकार जब रेल बजट पेश करती है तो वाहवाही के लिये वह कोई टैक्स नहीं बढ़ाती. इसके बाद पूरे साल किसी न किसी बहाने रेलयात्री पर खर्च का बोझ डाला जाता है. अब यह सवाल भी उठने लगा है कि जब रेल बजट का कोई मतलब नहीं है तो इसे पेश क्यों किया जाता है ? रेल बजट को बंद होना चाहिये और इसे मुख्य बजट का ही हिस्सा बना देना चाहिये.

‘जब तक’ में दिखेगा धोनी और साक्षी का रोमांस

बॉलीवुड की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘एमएस धोनी-द अनटोल्ट स्टोरी’ का ऑडिंयस बड़ी बेसब्री से इंतज़ार  कर रही है. अभी  कुछ ही दिनों पहले इस फिल्म का नया गाना ‘कौन तुझे’ में धोनी और उनकी एक्स गर्लफ्रेंड प्रियंका झा के रोमांस को दर्शाया गया था! पर अब आप  सभी जानना चाहते होंगे धोनी और उनकी पत्नी साक्षी की लव स्टोरी के बारे में.

द अनटोल्ड स्टोरी के ट्रेलर ने आते ही साथ धूम मचा दी है. ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर बने अब तक के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं,  फिल्म के ट्रेलर को और अब तक रिलीज़ हुए गानों को भी शानदार रेस्पांस मिल रहा है. कैप्टन कूल माही के व्यक्तित्व का जादू पूरे देश में है. उनकी फैन फॉलोविंग करोड़ों में  है. इस कारण से ही एमएसडी के ट्रेलर और गानों को उनके दर्शकों ने हाथोंहाथ ले लिया है.

धोनी के चाहने वाले ये देखना चाहते हैं की आखिर धोनी और साक्षी कैसे, कहां और कब मिले, कैसे शुरू हुई इनके प्यार की कहानी, किसने किसको कैसे प्रपोज़ किया होगा..कैसे धोनी साक्षी की ख़ूबसूरती के कायल हो गए होंगे..आप के इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा इस फिल्म के  अगले गाने 'जब तक' में. जिसमे धोनी और साक्षी के प्यार को दर्शाया जायेगा.. साक्षी का किरदार जो इस फिल्म मैं कियारा आडवाणी ने निभाया है, सुशांत के साथ रोमांस करती नजर आयेंगी! 'जब तक' गाने मे कैसे ये प्यार परवान चढ़ा, ये सभी कुछ देखेंगे आप.

फिल्म के ट्रेलर ने जहां रिलीज होने से पहले ही कई रिकॉर्ड बना लिए थे, वहीं इस फिल्म का गाना "बेसबरियां " और ‘कौन तुझे" सुपर डुपर हिट हो चुका है. यह फिल्म भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जीवनी पर आधारित है और इस साल की बहुप्रतीक्षित फिल्म है.

 

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