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खास तकनीक से बनेगा टोक्यो ओलंपिक मेडल

2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में ओलंपिक खेल होने वाला है. इन खेलों के मेडल बनाने के लिए जापान एक अनोखा तरीका अपना रहा है.

सूत्रों के मुताबिक जापान ओलंपिक मेडल के लिए पुराने इलेक्टॉनिक उपकरणों, जिनमें स्मार्टफोन भी शामिल हैं को रिसाइकल करने की योजना बना रहा है. ओलंपिक खेलों के लिए बनाए जाने वाले गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल पूरी तरह दान में दिए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बनाए जाएंगे.

इसका अर्थ यह है कि नए मेडल बनाने के लिए जापान को खदानों की जरूरत नहीं होगी. बल्कि वह लगातार बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से ही मेडल बना लेगा.

खेलों की आयोजन समिति ने जापानी कंपनियों से ऐसे आइडिया देने के लिए कहा है जिससे लोगों को इस काम के लिए डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. अगर यह योजना कारगर हो जाती है तो मेडल्स बनाने के लिए खान से धातु निकालने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी या बहुत कम हो जाएगी.

किसानों ने बनाई खुद की कंपनी

इसे किसानों को बिचौलियों से बचाने की मुहिम कहें या उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की योजना, लेकिन जो भी हो, अब किसानों के अच्छे दिन आने शुरू हो जाएंगे यानी किसान यहां अपनी फसल बेच सकेगा. फसल के मूल्य के साथ कंपनी को जो भी लाभ होगा, किसान उसे आपस में बांट लेंगे.

नाबार्ड के सहयोग से बनी इस कंपनी का नाम ‘बदायूं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ रखा गया है. कृषि के संस्थागत विकास से किसानों की माली हालत सुधारने के लिए केंद्र सरकार कृषि उत्पादक संगठन द्वारा इस योजना में बोआई से ले कर फसल बेचने तक जितना फायदा होगा, उसे किसानों में बांटा जाएगा.

यह जानकारी देते हुए नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक सुधीर सक्सेना ने बताया कि यह कंपनी शेयर आधारित है. इस में 500 से 1 हजार किसान शामिल किए जाएंगे.

कंपनी बन जाने से किसानों को खाद बीज के साथ-साथ कीटनाशक भी सीधे कंपनी से खरीदने का अधिकार मिल जाएगा और वे फसल की बिक्री सीधे कर सकेंगे. कंपनी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन और रख-रखाव में खर्च होने वाली धनराशि नाबार्ड द्वारा 3 सालों तक वहन की जाएगी.

पंकज स्नूकर विश्व चैंपियनशिप में बॉन्ज जीतने वाले पहले भारतीय

पंकज आडवाणी प्रतिष्ठित सैंगसोम 6 रेड स्नूकर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. उन्होंने सेमीफाइनल में चीन के डिंग जुनहुई के खिलाफ शिकस्त के बाद कांस्य पदक हासिल किया.

क्वार्टर फाइनल में आडवाणी को वॉकओवर मिला था क्योंकि माइकल होल्ट निजी कारणों से प्रतियोगिता से हट गए थे. जुनहुई ने आडवाणी को 7-4 :0-37, 68-0, 73-0, 41-26, 49-15, 7-57, 0-57, 67-0, 57-0, 20-34, 69-9 से हराया.

आडवाणी ने अपने प्रदर्शन पर कहा, "इस चैंपियनशिप में इस तरह की प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए पहला पदक जीतना दर्शाता है कि आपने अच्छा प्रदर्शन किया है. मैं इस टूर्नामेंट के लिए बाहरी व्यक्ति था और इतनी आगे तक आना काफी अच्छा लगता है."

उन्होंने कहा, "डिंग शानदार खिलाड़ी है. मैंने ग्रुप चरण में उसे हराया था लेकिन आज वह बेहतर खिलाड़ी था. मैं उन्हें फाइनल के लिए शुभकामनाएं देता हूं."

बिना आधार नहीं मिलेगा रेल टिकट

रेल टिकट रिजर्व कराते वक्त सीनियर सिटीजंस के लिए जल्द ही आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि इसकी शुरुआत इसी साल दिसंबर से हो सकती है.

रेलवे को लग रहा है कि इसे लागू करने से सीनियर सिटीजंस के नाम पर अवैध तरीके से रेल किराए में छूट लेने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी. आईआरसीटीसी के सूत्रों का कहना है कि आधार कार्ड को फिलहाल सभी यात्रियों की बजाय फिलहाल वरिष्ठ नागरिकों पर ही लागू किया जाएगा.

इसकी एक वजह यह भी है कि सिर्फ उम्र भरने के साथ ही कम्प्यूटर से खुद ही सीनियर सिटीजन को रेल किराए में छूट मिल जाती है. इसका फायदा कई बार ऐसे लोग भी उठा लेते हैं, जो इस दायरे में नहीं आते.

तो भारत आना चाहता है माल्या

सरकारी बैंकों के करीब 9000 करोड़ के लोन डिफॉल्टर कारोबारी विजय माल्या ने भारत आने की इच्छा जताई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पटियाला कोर्ट में माल्या के वकील ने कहा कि वह समन का जवाब देने भारत आना चाहते हैं. माल्या ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की है.

माल्या के वकील ने ट्रायल कोर्ट को बताया है कि वह भारत आना चाहते हैं पर उनका पासपोर्ट भारतीय अधिकारियों ने जब्त कर लिया है. साल 2000 के FERA उल्लंघन केस में माल्या की तरफ से व्यक्तिगत पेशी की छूट की मांग की गई है.

पिछले हफ्ते मुंबई की चीफ मेट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के मालिक माल्या के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया था. माल्या के अलावा उनके चीफ एग्जिक्युटिव संजय अग्रवाल के खिलाफ भी गैर जमानती वॉरंट जारी किया गया था.

हजारों करोड़ का लोन नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टर कारोबारी माल्या पर शिकंजा कसता जा रहा है. इस महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी विजय माल्या पर बड़ी कार्रवाई की. ईडी ने माल्या की 6630 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली है.

इस संपत्ति में माल्या का एक मॉल, फार्महाउस और उनके मालिकाना हक वाले शेयर शामिल हैं. ईडी ने जिन संपत्तियों को अटैच किया है वे मुंबई और बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों में हैं. गौरतलब है कि माल्या इस साल मार्च में देश छोड़कर लंदन फरार हो गए हैं. सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है.

दिल के ऑपरेशन ने गेल को जीना सिखाया

जीवन का लुत्फ उठाने के लिए पहचाने जाने वाले वेस्ट इंडीज के आक्रामक सलामी बल्लेबाज क्रिस गेल ने खुलासा किया कि ऑस्ट्रेलिया में 2005 में दिल के आपरेशन के बाद उन्होंने जिंदगी का लुत्फ उठाना शुरू किया.

वर्ष 2005 में वेस्ट इंडीज के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दिल में छेद के उपचार के लिए गेल का आपरेशन हुआ था और बहुत से लोगों को यह बात पता नहीं था. उनके माता-पिता को भी सर्जरी होने के बाद इस बारे में जानकारी दी गई थी.

सर्जरी के बाद गेल एडिलेड में तीसरे और अंतिम टेस्ट में नहीं खेल पाए थे और उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के बाद ही उन्हें जीवन की अहमियत पता चली. गेल ने अपनी आत्मकथा 'सिक्स मशीन' के लॉन्च के दौरान कहा, 'किसी को नहीं पता कि ऑस्ट्रेलिया में उपचार के दौरान मुझे दिल में छेद के बारे में पता चला, मेरे माता-पिता को भी नहीं. मुझे सर्जरी कराने के लिए बाध्य होना पड़ा और मैंने ऑपरेशन के बाद ही अपने माता-पिता को सूचना दी.'

उन्होंने कहा, 'उस समय मैंने जीवन की अहमियत पहचानी. यह मेरे लिए जीवन बदलने वाला लम्हा था. इसके बाद मैंने अपने जीवन का पूरा लुत्फ उठाने का फैसला किया और अब भी ऐसा कर रहा हूं.'

गेल ने साथ ही कहा कि पिता बनने के बाद वह इंसान के रुप में परिपक्व हो गए हैं. उन्होंने कहा, 'निश्चित तौर पर पारिवारिक व्यक्ति होना नई चुनौती है लेकिन अब मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैं खूबसूरत बेटी का पिता हूं. यह बिलकुल अलग अहसास है.'

गेल ने कहा कि उनका बचपन बहुत मुश्किलों से गुजरा है. उन्होंने कहा कि स्कूल की फीस भरने के लिए वह पुरानी बोतलें बेचा करते थे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह वक्त उनके जीवन के सबसे मजेदार दिनों में शुमार है और वह किसी भी कीमत पर उन्हें बदलना नहीं चाहेंगे.

अपनी आत्मकथा के बारे में गेल ने कहा कि यह उनके चरित्र का बिलकुल अलग पहलू पेश करेगी. इस मौके पर मौजूद भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने गेल को क्रिकेट का सच्चा दूत बताया. उन्होंने कहा, 'क्रिस गेल मैदान के अंदर और बाहर मनोरंजन करने वाला व्यक्ति है, मजे करने वाला इंसान. वह क्रिकेट का सच्चा दूत है.'

मैदान पर अपनी बातचीत का खुलासा करते हुए सहवाग ने कहा, 'जब हम बात करते हैं तो हम छक्के जड़ने पर चर्चा करना पसंद करते हैं और किस तरह गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त किया जाए विशेषकर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को.'

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि गेल ने अपनी प्रतिभा से क्रिकेट के खेल को और अधिक लोकप्रिय बनाया है. उन्होंने कहा, 'क्रिस गेल किंगस्टन से अधिक कानपुर में लोकप्रिय है, वह जमैका से अधिक जालंधर में लोकप्रिय हैं. उसने खेल को लोकप्रिय किया है और युवाओं को बल्ला थामने के लिए आकर्षित किया है.'

स्क्रीन लॉक करके भी चला सकते हैं यू ट्यूब वीडियो

अगर आप अपनी स्‍क्रीन को लॉक कर देते हैं तो डिफॉल्‍ट यूट्यूब एप का ऑडियो अपने आप बंद हो जाता है. हालांकि, इस डिफॉल्‍ट ऐप में इस समस्‍या की सेटिंग करना मुश्किल है लेकिन आपको हम ऐसी ट्रिक बताने जा रहे हैं जिसके माध्‍यम से आप लॉक स्‍क्रीन में भी यूट्यूब वीडियो को प्‍ले कर सकते हैं.

इसके अलावा, इसके समाधान के लिए, कम्‍पनी अक्‍टूबर में यूट्यूब रेड को लांच करेगा. पर अगर आप अभी ही लॉक स्‍क्रीन में वीडियो देखना चाहते हैं तो ट्राई करें इन स्‍टेप को –

स्‍टेप – 1 : सबसे पहले अपने एंड्रायड फोन में गूगल प्‍ले से मोजिला फायरफॉक्‍स एप को डाउनलोड करें.

स्‍टेप – 2 : इंस्‍टॉल करने के बाद, फायरफॉक्‍स को ओपन करें और इसमें जाकर यूट्यूब को खोलें.

स्‍टेप – 3 : आप जिस वीडियो को देखना चाहते हैं उसे ओपन करें.

स्‍टेप – 4 : आपका चयनित वीडियो अपने आप शुरू हो जाएगा. अब आप एप से बार निकल जाएं और अपनी स्‍क्रीन को ऑफ कर दें, लेकिन वीडियो चलता रहेगा.

फोन को फटने से ऐसे बचाएं

पिछले कुछ समय से फोन के ब्‍लास्‍ट होने की घटनाएं काफी सुनने में आ रही हैं. हाल ही में, रिलायंस जियो लाइफ वाटर 1 में भी धमाके की खबर सुनने को मिली है.

इन खबरों से अक्‍सर स्‍मार्टफोन यूजर्स को डर लगने लगता है और वो इसे डर-डर कर इस्‍तेमाल करने लगते हैं. आइए जानते हैं कि आप फोन को फटने से बचाने के लिए क्‍या सावधानियां बरतें-

यूएसबी चार्जिंग

यूएसबी चार्जिंग से आपका फोन जल्‍दी से चार्ज नहीं हो पाता है लेकिन यह फोन को हीट होने से बचाता है और इसमें आग लगने या ब्‍लास्‍ट होने के चांसेंस भी न के बराबर हो जाते हैं.

हॉट एरिया में न रखें

कभी भी अपनी डिवाइस को हॉट एरिया में न रखें, इससे फोन का तापमान बढ़ जाता है और उसके बाद उसे यूज करने पर खतरा हो सकता है.

ओवरचार्जिंग

कभी भी फोन को ओवरचार्ज न करें. ओवरचार्ज करने से फोन में खराबी आ सकती है, साथ ही उसके तापमान में बढ़ोत्‍तरी होने के कारण वह ब्‍लास्‍ट भी कर सकता है.

कवर को हटाएं

फोन को चार्ज करने के दौरान कवर को निकाल दें.

चार्जिंग के दौरान बात न करें

फोन को जब भी चार्ज करें तो उसका इस्‍तेमाल न करें. इससे फोन आग नहीं पकड़ेगा.

ओरिजनल बैट्री और चार्जर

कभी भी फोन में लोकल चार्जर या बैट्री का इस्‍तेमाल न करें. हमेशा ओरिजनल प्रोडक्‍ट का इस्‍तेमाल करें.

लो बैट्री न रखें

फोन में लो बैट्री न होने दें. हमेशा फोन को चार्जिंग पर लगाने के बाद कम से कम 30 प्रतिशत तक चार्ज होने दें.

रियो पैरालंपिक: भारत ने रचा इतिहास, जीता गोल्ड और ब्रॉन्ज

रियो में चल रहे पैरालंपिक खेलों में भारत ने इतिहास रचा है. हाई जंप इवेंट में भारत ने गोल्ड और ब्रॉन्ज पदक पर कब्जा जमाया है. तमिलनाडु के मरियप्पन थांगावेलू और उत्तरप्रदेश के वरूण भाटी ने रियो पैरालंपिक खेलों में गोल्ड और ब्रॉन्ज पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया.

मरियप्‍पन थांगावेलू ने 1.89 मी. की जंप लगाते हुए सोना जीता. ऊंची कूद में मरियप्पन थांगावेलू ने गोल्ड पर कब्जा जमाते हुए इतिहास रच दिया है तो वहीं. जबकि भाटी ने 1.86 मी. की जंप लगाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. वह मुरलीकांत पेटकर (स्वीमिंग 1972 हेजवर्ग) और देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक, एथेंस 2004 ) के बाद गोल्ड जीतने वाले तीसरे भारतीय हैं.

दोनों भारतीय खिलाडि़यों ने रियो पैरालंपिक में गोल्ड और कांस्‍य पदक जीतकर करोड़ों हिंदुस्तानियों को झूमने का मौका दे दिया है. जबकि रजत पदक अमेरिका के सैम ग्रेवी को मिला. उधर, भारत के ही संदीप भाला फेंक कांस्य जीतने से चूक गए और वह चौथे स्थान पर रहे.

थांगावेलू और भाटी की इस सफलता के बाद अभी तक के सभी पैरालंपिक खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई है जिसमें 3 स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य शामिल है.

मरियप्‍पन और भाटी की दर्द भरी कहानी

हाई जम्प टी-42 वर्ग में पदक जीतने वाले इन एथलीट्स का सफर बहुत कष्टदायक रहा है.

20 वर्षीय मरियप्पन तमिलनाडु के सालेम से 50 किलोमीटर दूर स्थित गांव पेरियावदगम्पति के रहने वाले हैं. वे जब 5 वर्ष के थे और स्कूल जा रहे थे तब गलत ढंग से मुड़ी बस ने उन्हें कुचल दिया था. यह बस उनके दाएं पैर पर से गुजरी थी जिससे उनका पैर घुटने के नीचे पूरी तरह खराब हो गया था.

इसके बावजूद मरियप्पन ने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपने को साकार किया. उनकी पहली स्पर्धा ऐसी थी जिसमें उन्हें सामान्य वर्ग में उतरना पड़ा और उन्होंने वहां भी रजत पदक जीता. इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

मरियप्पन ने मार्च में ट्यूतनीशिया में आईपीसी ग्रांप्रि में 1.78 मीटर की छलांग लगाकर पैरालंपिक के लिए ए-क्वालीफिकेशन हासिल किया. इसकी पात्रता 1.60 मीटर थी. उसी वक्त लग गया था कि यदि उन्होंने प्रदर्शन दोहराया तो वे रियो में पदक अवश्य जीतेंगे.

उत्तरप्रदेश के भाटी जब बहुत छोटे थे तभी पोलियो के कारण उनका एक पैर खराब हो गया था. इसके बावजूद भाटी ने हिम्मत नहीं हारी और आगे चलकर चैंपियन एथलीट बने. 21 वर्षीय भाटी ने 2014 के इंचियोन पैरा एशियाई खेलों में पांचवां स्थान हासिल किया. उन्होंने 2014 में ही चाइना ओपन में गोल्ड मेडल जीता था.

बार बार देखोः लचर पटकथा, लचर निर्देशन

इस फिल्म के प्रमोशन के समय कटरीना कैफ और सिद्धार्थ मल्होत्रा दोनों ने दावा किया था कि यह फिल्म आज की युवा पीढ़ी के लिए है. आज की युवा पीढ़ी इस फिल्म के साथ रिलेट करेगी. मगर फिल्म खत्म होने पर जब एक युवा जोड़ा सिनेमा घर से बारह निकल रहा था, तो इस जोड़े में नाराजगी व गुस्से का भाव था. युवा लड़की अपने साथ वाले युवक से कह रही थी-‘‘आप हर बार मुझे इतनी घटिया फिल्में दिखाने क्यों लाते हैं. पिछली बार ‘मोहनजो दाड़ो’ में फंसाया था. इस बार ‘बार बार देखो’ में फंसा दिया.’’

एक अच्छे विषय का किस तरह एक पटकथा लेखक व निर्देशक कबाड़ा कर सकता है, इसका सबसे सटीक उदाहरण है नित्य मेहरा निर्देशित फिल्म ‘‘बार बार देखो”. फिल्म ‘‘बार बार देखो’’ एक अच्छे विषय पर बनी तर्कहीन व अति घटिया फिल्म है. या यूं कहें कि बंदर (फिल्म की निर्देशक नित्या मेहरा) के हाथ में उस्तरा (अच्छा विषय).

फिल्म की कहानी के केंद्र में दिया कपूर (कटरीना कैफ) और जय (सिद्धार्थ मल्होत्रा) हैं. दोनों का जन्म लगभग एक ही दिन हुआ. दोनों बचपन से दोस्त हैं. दिया मशहूर उद्योगपति कपूर (राम कपूर) की बेटी हैं, तो वहीं जय, मिसेस शर्मा (सारिका) का बेटा है. जय विश्वविद्यालय में गणित विषय का प्रोफेसर है, उसकी तमन्ना लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जाकर गणित पढ़ाने के अलावा गणित विषय में कुछ बड़ा काम करने की है. जय तो शादी के नाम से ही डरता है. जबकि  दिया एक अच्छी पेंटर है. उसे परिवार में यकीन है.

दिया एक प्रेमिका के साथ साथ अच्छी पत्नी, अच्छी गृहिणी व अच्छी मां भी बनना चाहती है. दिया के पिता कपूर एक दिन जय को समझाते हैं कि उसे क्या करना चाहिए. वह उसे समझाते हैं कि वह कैंब्रिज जाने का विचार छोड़ दे. जय को अपनी मां और दिया के पिता के दबाव में शादी के लिए हां कह देता है. शादी की तैयारी शुरू हो जाती है. मेहमान आ जाते हैं. शादी से दो दिन पहले जय, दिया से कैंब्रिज जाने के लिए झगड़ता है और फिर शराब पीकर सो जाता है.

जय सोते हुए एक यात्रा पर निकलता है. इस यात्रा में वह देखता है कि उसकी व दिया की शादी हो गयी है. वह हनीमून के लिए थाईलैंड के होटल में दस दिन से है. फिर वह देखता है कि उसकी शादी को दो साल हो गए और वह वह एक बच्चे अर्जुन का पिता बन गया. फिर देखता है कि वह 46 साल का हो गया और अपने करियर में इस तरह मशगूल रहा कि दिया व बच्चे की तरफ ध्यान नहीं दिया. अब दिया उसे तलाक देकर निखिल नंदा से शादी करने वाली है. जबकि उसे गणित पढ़ाने के लिए हावर्ड विश्वविद्यालय में मौका मिला है. फिर वह देखता है कि वह 70 साल का हो गया है. जब उसकी मां की मौत हुई है, मां की मौत पर दिया अपने पति निखिल नंदा के साथ आई है. उसका बेटा अर्जुन और बेटी भी है. वगैरह वगैरह..तब वह कहता है कि अब मैं सारा गुणाभाग सही कर लूंगा. फिर गणित के कुछ सूत्र हल करता है. और देखता है कि अब वह सामान्य जय बन चुका है. और वह देखता है कि एक अच्छा पति व पिता बनकर दिया व अर्जुन के साथ है.

फिर नींद खुलती है, तो वह खुद को पुराना वाला जय पाता है. यानी कि वर्तमान में लौट आया है. उसकी समझ में नहीं आता कि उसके साथ क्या हुआ. पर उसे अहसास हो चुका हौता है कि करियर के साथ प्यार, शादी, पत्नी, बच्चे व परिवार को भी महत्व देना चाहिए.

फिल्म में मुद्दा अच्छा उठाया गया, मगर फिल्म का जो संदेश है, वह किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता. फिल्म का पूरा लबोलबाब तो इंसान की प्रतिभा को कुचलने की है. यह गलत है. लड़का हो या लड़की, सभी को अपने अंदर की प्रतिभा को आसमान देने की  छूट होनी ही चाहिए. इस स्तर पर यह फिल्म पहले ही दर्शकों के दिलो दिमाग में अपना स्थान खो देती है.

फिल्म में जिस तरह से जय का किरदार भविष्य की यात्रा पर निकलता है, वह कहीं से भी हजम नहीं होता. सब कुछ बहुत बचकाना लगता है. फिल्म में जय एक वैदिक गणितज्ञ है. वह हर बात को तर्क की कसौटी पर कसता है. ऐसे इंसान की सोच को एक पंडित की शादी के सात फेरों की बात कैसे बदल सकती है? हर शंका पर कई सवाल करने वाले जय के जीवन मूल्य एक झटके में कैसे बदल सकते हैं? यह फिल्म कोई पुनर्जन्म की कहानी नही है. यह अति लचर कथा, अति लचर पटकथा व अति लचर निर्देशन से सजी फिल्म है. इंटरवल के बाद तो फिल्म बहुत सूखी सी हो जाती है. फिल्म का अंत तो सबसे ज्यादा घटिया है. फिल्म के कुछ संवाद जरुर अच्छे हैं. फिल्म का संगीत भी प्रभावशाली नही है.

सिनेमा के परदे पर सिद्धार्थ मल्होत्रा और कटरीना कैफ की जोड़ी अच्छी जमी है. दोनों ने अपनी तरफ से अच्छी परफॅार्मेंस देने का प्रयास किया है. लेकिन कोई भी दर्षक सिद्धार्थ मल्होत्रा व कटरीना कैफ के अधेड़ उम्र वाले लुक को पसंद नही करेगा और न ही दखेना चाहेगा. फिल्म में राम कपूर या सारिका के लिए करने को कुछ था ही नहीं. इनकी प्रतिभा को जाया किया गया. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दर्शक महज ‘काला चश्मा’ गाना देखने के लिए ढाई घंटे का समय व अपनी गाढ़ी कमाई को फूंकना पसंद करेगा?

करण जोहर, फरहान अख्तर और रितेश सिद्धवानी निर्मित तथा नित्या मेहरा निर्देशित फिल्म ‘‘बार बार देखो’’ की पटकथा नित्या मेहरा ने  अनवब पाल व श्री राव के साथ मिलकर लिखी है. कैमरामैन रवि चंद्रन हैं. कलाकार हैं-कटरीना कैफ, सिद्धार्थ मल्होत्रा, राम कपूर, सारिका, रजित कपूर, राजन जोशी, ताहा शाह व सयानी गुप्ता.

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