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iOS10: कुछ फीचर्स अच्‍छे तो कुछ बुरे भी

इस साल हुए WWDC सम्मेलन में, एप्‍पल iOS 10 को प्रदर्शित किया गया, जिसे अब तक इस कम्‍पनी का सबसे बड़ा आईओएस माना गया है. हर साल की तरह, एप्‍पल ने इस लेटेस्‍ट ओएस को आईफोन 7 और 7 प्‍लस के बाद, आम जनता के लिए उपलब्‍ध करवाया.

जैसाकि हर तकनीक में होता है कि उसके कुछ अच्‍छे फीचर्स होते हैं और कुछ बुरे फीचर्स भी होते हैं. आइए जानते हैं iOS 10 के अच्‍छे और बेकार फीचर्स के बारे में:

विजेट, रिवैम्‍पड नोटिफिकेशन सेंटर और कंट्रोल सेंटर

iOS 10 के बारे में अच्‍छे फीचर्स की बात करें तो इसके नोटिफिकेशन बहुत रिच हैं और ऊपर दिए गए बाकी के फीचर्स भी काफी अलग और यूजरफ्रैंडली हैं. आपको स्‍क्रीन को अनलॉक करने की जरूरत नहीं होती है, आप डायरेक्‍ट ही इमेज को देख सकते हैं और टेक्‍स्‍ट को पढ़ सकते हैं और रिप्‍लाई बैक कर सकते हैं. राइट साइड स्‍वाइप करने पर विजेट आते हैं जैसे- मौसम, समाचार, म्‍यूजिक, फोटो, रिमाइंडर्स आदि.

आई मैसेज एप

आईमैसेज एप बहुत ही फनी है. आप इसमें इमेज को भेजने के साथ-साथ उसमें एनीमेटेड बैकग्राउंड के साथ भी एड कर सकते हैं.  

इम्‍प्रूव फोटो एप और मेमोरी

इस ओएस में इम्‍प्रूव फोटो एप और मेमोरी को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है.

स्‍मार्टर सिरी

सिरी, थर्ड पार्टी डेवलपर्स के लिए ओपन फीचर है. साधारण शब्‍दों में, आप सिरी से व्‍हाट्सएप को संदेश भेजने का इंस्‍ट्रक्‍शन भी दे सकते हैं.

डिलेटेबल स्‍टॉक एप्‍स

आप कुछ ऐसी एप को हटा सकते हैं जिन्‍हें आपके द्वारा यूज नहीं किया जाता है. बाकी के ओएस में ऐसा संभव नहीं होता है, लेकिन इसमें ऐसा है.

अनलॉक करने के लिए स्‍लाइड करें –

अलविदा फीचर

एप्‍पल ने इस फीचर को हटा दिया और ओएस10 से स्‍लाइड करके अनलॉक करने की विधि समाप्‍त कर दी. अब आपको होम टू ओपन पर प्रेस करके फोन को अनलॉक करना होगा. कई यूजर्स को ये पसंद नहीं आया.

बेकार म्‍यूजिक एप

एप्‍पल ने इस ओएस में एक एप को लांच किया है जिसे यूजर्स ने खासा पसंद नहीं किया है. उनका कहना है कि इसे फॉन्‍ट बहुत बड़े है जो इसे बेकार बनाते हैं. बहुत ज्‍यादा बैट्री की खपत

इस आईओएस में डिवाइस के रन कराने से बैट्री की खपत बहुत ज्‍यादा होती है. हालांकि, एप्‍पल ने इस पर काम किया है लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है.

रेज टू वेक फीचर में दिक्‍कत

आईओएस 10 के रेज टू वेक फीचर में काफी दिक्‍कत आ रही है. यूजर्स को इसे शुरू करने में ही समस्‍या आ रही है. इसके खिलाफ कई शिकायतें भी हो चुकी हैं. ब्रिकिंग इश्‍यू एप्‍पल के यूजर्स ने इस ओएस में ब्रिक्रिंग इश्‍यू को भी समस्‍याग्रस्‍त बताया है. इसलिए, हम आपको अपनी डिवाइस को अपडेट करने से पहले उसका बैकअप लेने की सलाह देते हैं.

अब युवी की हो सकती है टीम इंडिया में एंट्री

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के लिए टीम इंडिया में गौतम गंभीर की वापसी के साथ ही सिक्सर किंग युवराज सिंह के लिए एक अच्छी खबर आई है. टीम इंडिया की टेस्ट टीम में दो साल बाद सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर की वापसी हुई तो और अब लग रहा है कि वनडे टीम में युवराज सिंह भी वापसी कर सकते हैं.

बेंगलुरु के नेशनल क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में हुए फिटनेस टेस्ट में दोनों क्रिकेटरों ने टेस्ट पास कर लिया है. आने वाले समय में टीम इंडिया को कई घरेलू सीरीज खेलनी हैं ऐसे में बोर्ड कुछ क्रिकेटरों का बैक-अप तैयार कर रहे हैं.

टीम इंडिया इस समय न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेल रही है और इसके बाद दोनों टीमों के बीच 5 मैचों की वनडे सीरीज खेली जानी है. युवराज आखिरी बार दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ साल 2013 में वनडे मैच खेले थे. हालांकि इस साल वो टी-20 टीम में वापसी करने में सफल रहे थे.

इसके साथ ही युवराज की शादी की तारीख भी तय हो गई है. युवराज की शादी इसी साल 30 नवंबर को उनके होमटाउन में होगी.

‘इंडिया फोबिया’ का शिकार पाकिस्तान

अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान लगातार ‘प्रोपगेंडा वार’ चला रहा है, और भारत, जो इस क्षेत्र और विश्व की बड़ी ताकतों में से एक है, आतंकी गुटों का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिशों में लगा है. वाकई इन आतंकी गुटों ने इस पूरे इलाके को दोजख बना रखा है.

अफगान हुक्मरान लगातार पाकिस्तान से यह गुजारिश करते रहे हैं कि वह हक्कानी नेटवर्क, तालिबान और आईएस जैसे वहशी गुटों का साथ देना बंद करे. मगर वह इसे अनसुना करता रहा है. ऐसा लगता है कि इस्लामाबाद की मंशा इनका खाद-पानी बंद करने की है ही नहीं, अलबत्ता वह अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ आरोप-प्रत्यारोप और ‘प्रोपगेंडा वार’ में उलझा हुआ है. यह नीति पाकिस्तान की सेहत के लिए ठीक नहीं. दुष्प्रचार ऐसा कि उसने अपने यहां भी जंगी माहौल बना रखा है.

इस काम में उसकी फौज के आला अधिकारी जुटे हुए हैं, जो सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर बेसिर-पैर की खबरें परोस रहे हैं, ताकि अवाम को झांसा दिया जा सके और उनके बीच अपनी बिगड़ती छवि दुरुस्त की जा सके. इस ‘प्रोपगेंडा’ पर फौज अच्छी-खासी रकम खर्च कर रही है. अवाम को बताया जा रहा है कि पाकिस्तान पर हमला किया जा सकता है.

पाकिस्तानी मीडिया ने ऐसी रिपोर्ट भी दिखाई है कि ईरान के चाबहार के रास्ते भारत अपनी फौज अफगानिस्तान भेजेगा, और अफगान व भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान के खिलाफ आपस में साझेदारी कर ली है. हालांकि ये तमाम खबरें झूठी हैं. पाकिस्तानी सेना अपनी जम्हूरी हुकूमत और बाशिंदों को गुमराह कर सकती है, मगर अनुभवी मुल्कों को बेवकूफ नहीं बना सकती. अब अमेरिका भी यह मानने लगा है कि इस्लामाबाद ने दहशतगर्दों का बखूबी इस्तेमाल किया है.

दरअसल, पाकिस्तान ‘इंडिया-फोबिया’ का शिकार है. साथ ही, उसे उन इलाकों को भी खोने का डर है, जिन पर उसने बंदूक के जरिये कब्जा करा है. इसलिए पाकिस्तानी अफसरान अपने लोगों के सामने भारत व अफगानिस्तान को दुश्मन के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि इसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं.

बांग्लादेश की एक अधूरी कहानी

बांग्लादेश के आर्थिक विकास की कहानी अपने आप में प्रेरणादायी है, और इसकी तस्दीक पूरी दुनिया कर रही है. जाहिर है, इसको लेकर आशंका जताने वाले गलत साबित हुए हैं. लेकिन ठीक यही बात बांग्लादेश अपने लोकतंत्र की तरक्की के बारे में नहीं कह सकता. एक वक्त था, जब लोकतंत्र के नाम पर बांग्लादेश में चारों तरफ गड़बड़ियां फैली हुई थीं.

मसलन, बात-बात पर हड़ताल हो जाती और मासूम लोगों के कत्ल होते रहते थे. साल 2014 के आम चुनाव को नाकाम करने की बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की हिंसक कोशिशों का भी खुलकर विरोध किया गया. उस चुनाव में 153 सांसद इसी वजह से निर्विरोध जीत गए थे और 2015 में पार्टी ने आम चुनाव की सालगिरह पर भी जमकर हंगामा काटा था. लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह बिल्कुल उल्टी दिशा में मुड़ गए हैं.

लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि उसमें मुखालिफ जमातों और आवाजों को भरपूर इज्जत मिली होती है. मगर अफसोस, आज बहुत कम लोग इस बात को लेकर संजीदा हैं कि बांग्लादेश की मौजूदा सियासत में विरोध की आवाज के लिए कोई जगह नहीं रह गई है. विरोधी पार्टियों के नेताओं को धमकाना, उनके ऊपर बेहूदा आरोपों के तहत मुकदमे लादना और फिर मनमाने तरीके से उन्हें गिरफ्तार करना, मीडिया पर दबाव बनाना आदि अच्छे सियासी माहौल के लक्षण नहीं हैं.

इसमें कोई दोराय नहीं कि लोकतंत्र के बगैर भी माली तरक्की की कई नजीरें दुनिया में मौजूद हैं. लेकिन वे विकास अयूब और मार्कोस की तरह टिकाऊ नहीं रहे हैं. हाल के दिनों में लोकतंत्र और विकास को असंगत ठहराने की प्रवृत्ति देखने को मिली है. ऐसी सोच वालों की दलील है कि मुल्क की माली तरक्की के लिए लोकतंत्र को हाशिये पर रखा जा सकता है. लेकिन इस नजरिये की खामियों को देखने के लिए किसी को राजनीति विज्ञानी होने की जरूरत नहीं है. हम तो यही उम्मीद करेंगे कि बांग्लादेश इस झांसे में न आए. तमाम तरह की चुनौतियों के लिए बांग्लादेश को और अधिक राजनीतिक विस्तार व परिपक्वता की दरकार है.

फ्लिपकार्ट में निवेश कर सकता है वॉलमार्ट

रिटेल सेक्‍टर में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट भारतीय ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी फ्लिपकार्ट में एक छोटी हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक अरब डॉलर का निवेश कर सकती है. दोनों कंपनियां इस संबंध में बातचीत कर रही हैं. वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट आपस में गठबंधन करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. वॉलमार्ट ने ईमेल के माध्यम से इस संबंध में पूछे गए प्रश्न पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. इसी तरह फ्लिपकार्ट ने भी इस संबंध में कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है.

जून में वॉलमार्ट ने चीन की दूसरी सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी जेडी डॉट कॉम में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी. गौरतलब है कि चीन में भी भारत की तरह ई-कॉमर्स क्षेत्र बढ़ रहा है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट के साथ आने से अमेजन को कड़ी टक्कर देने में मदद मिलेगी.

ईबे पर 75 प्रतिशत तक छूट

त्यौहारी मौसम में ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनी ईबे डॉट इन ने विभिन्न श्रेणी के उत्पादों पर 75 प्रतिशत तक छूट देने की घोषणा की है.

– कंपनी ने बताया कि अपने लाउडेस्ट दिवाली एवर ऑफर के तहत वह विभिन्न श्रेणियों में 75 प्रतिशत की छूट की पेशकश की है.

– यह योजना 31 अक्‍टूबर तक चलेगी.

– इलेक्‍ट्रॉनिक श्रेणी में 53 प्रतिशत, परिधान में 75 प्रतिशत और घरेलू साजसज्जा के सामान की श्रेणी में 50 प्रतिशत तक छूट मिलेगी.

– कंपनी इस योजना के तहत दस करोड़ उत्पादों को अपने मंच पर उपलब्ध करा रही है.

किराए की कोख पर कानून का पहरा

किराए की कोख पर कानून बना कर सरकार ने औरतों के शरीर पर उन के अपने हक को एक बार फिर कम किया है. गर्भपात पर नियंत्रण, अल्ट्रासाउंड पर कंट्रोल, शरीर दिखाने को अश्लीलता कहना आदि औरतों के निजी हकों को कम करना है और किसी समाज और सरकार को मूलभूत तौर पर इस तरह के कानून एक जैंडर के लिए बनाने का खुद को हक देना गलत है.

जरा गिनती कर के बताइए कि इस प्रकार के कितने कानून आदमियों के बारे में हैं? क्या दौड़ने की गति सीमा तय करने वाला कोई कानून आदमियों परलागू होता है? क्या अपने सिक्स पैक बनाने पर कानून बनाएगी सरकार? आदमी सिर्फ लंगोट पहने कहीं भी घूम सकते हैं पर औरतें नहीं.

कोख को किराए पर देने पर कानून में चाहे कहा जाए कि यह औरतों की सुरक्षा के लिए है ताकि उन का व्यापार न किया जाए पर इस बहाने उन की एक आय पर अंकुश लगा है. औरत की कोख आराम से जीवन में 10-12 बच्चे जन सकती है. अगर उसे सही मुआवजा मिले तो कोख में किसी और के भू्रण को रखने में क्या हरज है? यह कोई जोरजबरदस्ती का मामला नहीं है. यह बलात्कार भी नहीं है.

यह तो टैस्ट ट्यूब बेबी वाला मामला है, जिस में पुरुष शुक्राणु और महिला एग को बाहर लैब में फर्टिलाइज किया जाता है और फिर किसी तीसरी की कोख में डाला जाता है. किराए पर कोख देने वाली को पता भी नहीं होता कि यह बच्चा है किस का.

ठीक है इस तरह का काम धंधे का रूप ले चुका है पर बहुत काम हैं जो धंधे की शक्ल ले चुके हैं. धर्मांध मानते हैं कि विवाह के जोड़े ऊपर वाला बनाता है पर कोनकोने में विवाह बिचौलिए दिख जाएंगे. धर्मांध कहते हैं कि ईश्वर सब कुछ जानता है पर हर गली के नुक्कड़ पर धर्म का धंधा करने वाली दुकानें दिख जाएंगी, जो जोरशोर से ढोलनगाड़े पीट रही होंगी कि और ग्राहक आएं.

न्याय दिलाना अदालतों और समाज का काम है पर वकालत का धंधा चमक रहा है. मौत होने पर दाह का धंधा भी चमक रहा है. अमेरिका में तो अब रोना रोया जा रहा है कि कौफिन बनाने वालों का धंधा कम हो रहा है, क्योंकि लोग मुरदों को जलाने लगे हैं. इन मुरदों को जलाने के लिए दुकानें खुली हैं और 1-2 मामले तो ऐसे भी वहां मिले हैं, जिन में अधूरी जली लाशें फेंक दी गईं ताकि ईंधन बचाया जा सके.

इन सब पर कानून नहीं पर औरत की निजी कोख पर कानून. यह अनैतिक है. उतना ही अनैतिक जितना कि कल कहा जाए कि कोई मां अपने बच्चे को आया को सौंप नहीं सकती, क्योंकि बच्चे को पालना तो मां का काम है किराए की औरत का नहीं.

पासवर्ड भेजने का जरिया बनेंगे इंसानी शरीर

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के कंप्यूटर साइंटिस्ट्स और इलेक्ट्रिकल इंजिनियर्स ने एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जो इंसान के शरीर के जरिए सिक्यॉर पासवर्ड भेज सकता है. इन पासवर्ड्स को किसी डिवाइस के फिंगरप्रिंट सेंसर या टचपैड द्वारा जेनरेट किए जाने वाले लो फ्रिक्वेंसी ट्रांसमिशंस के जरिए भेजा जाता है.

यूनिवर्सिटी के छात्र मेरहदाद हेसार ने बताया, 'अगर मुझे इलेक्ट्रॉनिक स्मार्ट लॉक की मदद से कोई दरवाजा खोलना है तो मुझे एक हाथ से हत्था छूना होगा और दूसरे हाथ से अपने फोन का फिंगरप्रिंट सेंसर. इससे यह डिवाइस मेरे फिंगरप्रिंट के डेटा को मेरे शरीर से होते हुए हत्थे में लगे रिसीवर को भेज देगा और दरवाजा खुल जाएगा.

आमतौर पर सेंसर जो सिग्नल पैदा करता है, उसमें वह आपकी उंगली के इनपुट रिसीव करता है. मगर इंजिनियर्स द्वारा इजाद किए गए तरीके से इन सिग्नल्स को किसी अन्य डिवाइस के लिए पासवर्ड के तौर ट्रांसमिट किया जा सकता है. स्मार्टफोन में एंटर किए जाने वाले डेटा को यूजर के शरीर से होते हुए रिसीवर तक भेजा जाता है.

इस तरीके को बहुत सिक्यॉर माना जा रहा है, क्योंकि वाई-फाई या ब्लूटूथ जैसी रेडियो वेव से भेजे जाने वाले इस तरह के कोड्स को हैक किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रफेसर श्याम गोलाकोटा ने कहा, 'फिंगरप्रिंट सेंसर को अब तक इनपुट डिवाइस के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, मगर हमने पहली बार दिखाया है कि इसकी मदद से अन्य इन्फर्मेशन भी भेजी जा सकती है.'

डेटा को एनकोड और ट्रांसमिट करने के लिए फिंगर को एक सीक्वेंस में स्कैन किया जाता है. टीम ने लैपटॉप के टचपैड्स पर 50 बिट्स प्रति सेकंड और फिंगरप्रिंट सेंसर्स की मदद से 25 बिट्स प्रति सेकंड के रेट से डेटा सेंड करने में कामयाबी पाई. इससे कुछ ही सेकंड्स में पासवर्ड को शरीर से होते हुए रिसीवर को भेजा जा सकता है.

10 अलग-अलग लोगों पर किए गए टेस्ट में रिसर्चर्स को अलग-अलग कद, वजन और बॉडी टाइप के बावजूद सफलता से ट्रांसमिशन करने में कामयाबी मिली. इस सिस्टम ने तब भी काम किया, जब टेस्ट में शामिल हुए लोग चल रह थे या कोई हरकत कर रहे थे.

यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग डॉक्टरल स्टूडेंट विक्रम अय्यर ने कहा, 'हमने दिखाया कि ये विभिन्न अवस्थाओं में काम कर सकता है- खड़े होने पर, बैठे रहने पर या सोते हुए भी. हम आपके शरीर पर कहीं भी स्ट्रॉन्ग सिग्नल पा सकते हैं. रिसीवर टांग पर हो, छाती पर या फिर हाथ पर; यह सफलता से काम करेगा.'

कोलकाता टेस्ट के रंग में पड़ सकता है भंग, अश्विन के खेलने पर संशय

भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में बड़ा झटका लग सकता है. भारतीय टीम प्रबंधन अपने स्टार ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन के उंगली के दर्द की वजह से परेशान है.

अश्विन को कानपुर में हुए पहले टेस्ट मैच के दौरान भी दर्द की शिकायत थी, इसके बावजूद उन्होंने वहां 10 विकेट लेते हुए टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अश्विन के दाएं हाथ के बीच की उंगली में ‘कॉर्न’ हो गया था, जिसका उन्होंने उपचार कराया था. कानपुर टेस्ट के कुछ दिनों पहले से इसमें वापस दर्द शुरू हो गया था.

भारतीय टीम प्रबंधन ने इसी के चलते विकल्प के रूप में ईशांत शर्मा की जगह हरियाणा के ऑफ स्पिनर जयंत यादव को टीम में शामिल किया है. अश्विन ने पहले टेस्ट के दौरान भी स्वीकारा था कि वे उंगली के दर्द से जूझ रहे हैं.

अब चीफ कोच कुंबले भले ही यह कह रहे हो कि टीम के सभी 15 सदस्य पूरी तरह फिट है, लेकिन अश्विन का दर्द बहुत ज्यादा बढ़ गया तो युवा जयंत यादव को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जा सकता है.

यादव के साथ फायदा यह है कि वे भी अच्छी बल्लेबाजी कर लेते हैं. ऑस्ट्रेलिया के हाल के दौरे में भारत ‘ए’ की तरफ से उन्होंने 2 चार-दिनी मुकाबलों में 85 रन बनाने के अलावा 7 विकेट लिए थे.

वे 42 प्रथम श्रेणी मैचों में 29.70 की औसत से 117 विकेट लेने के अलावा 28.14 की औसत से 1548 रन बना चुके हैं जिनमें 2 शतक भी शामिल है.

क्रिकेट का हर फैन फिलहाल इस टेस्ट मैच के रंग में रंगा नजर आ रहा है, लेकिन लगता है अब इस रंग में भंग भी पड़ सकता है.

दरअसल, इस टेस्ट मैच के मजे में पानी फिरने की आशंका है. मौसम विभाग ने मैच के पहले चार दिन बारिश होने की संभवना जताई है. मौसम विभाग की इस आशंका के साथ ही कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में 30 सितम्बर को होने वाले भारत और न्यूजीलैंड के दूसरे टेस्ट मैच पर बारिश का खतरा मंडराने लगा है.

दोनो देशों की क्रिकेट टीमों के बीच तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला का दूसरा टेस्ट मैच कोलकाता में खेला जाएगा और मौसम विभाग ने मैच के पहले चार दिन बारिश होने की संभवना जताई है.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहला टेस्ट मैच कानपुर में खेला गया था, जिसमें मेजबान टीम ने कीवी टीम को मात दी थी.

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितम्बर से शुरू हो रहे दूसरे टेस्ट मैच के दौरान दो दिनों तक तेज हवाएं चलने और बारिश होने का अनुमान है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 30 सितम्बर और एक अक्टूबर को खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच के दैरान बारिश दोनों टीमों के लिए बाधा बन सकती है. इसके साथ ही मैच के तीसरे और चौथे दिन भी बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है.

कानपुर में खेले गए तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला के पहले टेस्ट मैच में जीत हासिल कर भारतीय टीम ने कीवी टीम पर 1-0 की बढ़त बनाई हुई है.

इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए जरूरी होगा ई-अकाउंट

इंश्योरेंस रेग्युलेटरी ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 1 अक्टूबर से इलेक्ट्रॉनिक इंश्योरेंस अकाउंट रखना अनिवार्य कर दिया है. इस अकाउंट को खोलने और ई-पॉलिसी खरीदने के बारे में फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ईश्वर नारायणन यहां दे रहे हैं महत्वपूर्ण जानकारी.

ई-इंश्योरेंस की शुरुआत दो वर्ष पहले हुई थी, लेकिन ई-इंश्योरेंस अकाउंट को अभी अनिवार्य किया गया है. इसका मकसद आपके इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को कंसॉलिडेट करना और क्लेम का प्रोसेस आसान बनाना है. यह अकाउंट खोलने के लिए कोई अतिरिक्त कॉस्ट नहीं है. अकाउंट खोलने के बाद आपकी सभी इंश्योरेंस पॉलिसीज एक स्थान पर उपलब्ध होंगी. आप क्लेम करने या कोई शिकायत दर्ज कराने के लिए पॉलिसी को कभी भी एक्सेस कर सकते हैं. आपको इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी के ऑफिस में खुद जाने की जरूरत नहीं होगी.

शिकायत का निपटारा रिपॉजिटरी की ओर से बनाए गए ग्रिवेंसेज सेल की ओर से किया जाएगा. इस सिस्टम में डेटा भी पूरी तरह गोपनीय रहेगा. इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा फायदा KYC का होगा, जिससे एक विश्वसनीय और बड़ा डेटाबेस बनेगा, जिसमें कस्टमर की इंश्योरेंस हिस्ट्री के साथ उसके क्लेम की डिटेल्स भी होंगी.

कैसे खोलें अकाउंट

सबसे पहले इंश्योरेंस रिपॉजिटरी चुनें. आप IRDAI की ओर से अधिकृत पांच रिपॉजिटरी- CAMS रिपॉजिटरी सर्विसेज, कार्वी इंश्योरेंस रिपॉजिटरी, सेंट्रल इंश्योरेंस रिपॉजिटरी, NSDL डेटाबेस मैनेजमेंट और SHCIL प्रॉजेक्ट्स में से किसी एक को चुन सकते हैं.

इसके बाद रिपॉजिटरी की वेबसाइट पर लॉग इन कर ऐप्लिकेशन फॉर्म भरें. फॉर्म के साथ KYC डॉक्युमेंट्स अटैच करें और उन्हें ऑनलाइन जमा करें. अकाउंट खोलने के लिए आधार कार्ड और परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) कार्ड अनिवार्य हैं. इसके अलावा ऐड्रेस प्रूफ के लिए आप रजिस्टर्ड लीज और सेल के लिए लाइसेंस अग्रीमेंट, आधार लेटर, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य डॉक्युमेंट्स जमा कर सकते हैं.

आप रिपॉजिटरी की ओर से नियुक्त 'अप्रूव्ड पर्सन' यानी पॉइंट ऑफ सेल (PoS) के पास भी डॉक्युमेंट्स जमा कर सकते हैं. इसके बाद रिपॉजिटरी डॉक्युमेंट्स की जांच करेगी और इलेक्ट्रॉनिक अकाउंट खोलने के लिए अपने सिस्टम में डेटा दर्ज करेगी. ऐप्लिकेशन फॉर्म जमा करने के सात दिनों के अंदर ई-इंश्योरेंस अकाउंट खोला जाएगा. अकाउंट खुलने के बाद आपको लॉग इन आईडी और पासवर्ड के साथ एक वेलकम किट भेजी जाएगी. अब आप रिपॉजिटरी की वेबसाइट पर लॉग इन कर अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं.

ई-इंश्योरेंस पॉलिसी कैसे खरीदें

अगर आपने ऑथराइज्ड इंश्योरेंस रिपॉजिटरी की वेबसाइट के जरिए ई-इंश्योरेंस अकाउंट खोला है तो आपको पॉलिसी ऑनलाइन या व्यक्तिगत तौर पर खरीदने के लिए इंश्योरेंस कंपनी को अपना ई-अकाउंट नंबर बताना होगा. रिपॉजिटरीज को कस्टमर्स को पॉलिसीज बेचने की अनुमति नहीं है.

अगर आपने इंश्योरेंस कंपनी के जरिए अकाउंट खोला है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पॉलिसी खरीदने से जुड़ी सभी प्रोसेसिंग और अन्य एक्टिविटीज कंपनी की ओर से ही पूरी की जाएंगी.

अकाउंट खोलने के बाद आप लॉग इन कर प्रीमियम चुका सकते हैं. ऑनलाइन शॉपिंग और बैंकिंग की वजह से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का अब काफी इस्तेमाल हो रहा है. इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट करने के लिए आपको अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों की वेबसाइट्स पर जाने की जरूरत नहीं होगी और आप अपने ई-अकाउंट के साथ ये पेमेंट आसानी से कर सकते हैं.

फिजिकल पॉलिसी को ई-पॉलिसी में बदलना

ये रूल केवल नई पॉलिसी के लिए लागू होंगे और मौजूदा पॉलिसीज को फिजिकल फॉर्म में रखा जा सकता है. हालांकि, अगर आप अपनी फिजिकल पॉलिसीज को कन्वर्ट करना चाहते हैं तो आप इसके लिए फॉर्म भर सकते हैं. ई-इंश्योरेंस अकाउंट से इंश्योरेंस पॉलिसीज डिजिटल फॉर्म में तुरंत जारी की जा सकेंगी और इससे पॉलिसी जारी करने में देरी या पॉलिसी न मिलने जैसी समस्याएं नहीं होंगी.

जीएसटी के तहत मंथली रिटर्न होगा अनिवार्य

कर विभाग ने जीएसटी (GST) रिटर्न व रिफंड पर नियमों व उनके प्रारूप के दो और मसौदे जारी किए. इसके तहत करदाता द्वारा करों, ब्याज व शुल्कों के रिफंड का दावा करने के लिए मासिक रिटर्न भरना होगा और तय प्रक्रिया का पालन करना होगा.

भागीदारों को उक्त मसौदा नियमों पर टिप्पणी के लिए कल तक का समय दिया गया है. इन नियमों को वस्तु व सेवा कर (GST) परिषद की 30 सितंबर को होने वाली दूसरी बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा. सरकार जीएसटी का कार्यान्वयन एक अप्रैल 2017 से करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

रिफंड के नियमों के तहत प्रत्येक पंजीकृत करदाता को एक तय फार्म (जीएसटीआर-3) में मासिक रिटर्न दाखिल करना होगा. इसी तरह प्रत्येक पंजीकृत करदाता द्वारा सालाना रिटर्न इलेक्ट्रोनिक रूप से दाखिल करने का प्रावधान है. नियम के अनुसार कराधान के दायरे में आने वाले हर उस व्यक्ति को सालाना रिटर्न दाखिल करनी होगी जिसका कुल कारोबार किसी वित्त वर्ष में एक करोड़ रुपए से अधिक है.

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