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तो अब टकराएंगी ‘डिअर जिंदगी’ और ‘कहानी 2’

नोट बंदी के साइड इफेक्ट्स से बौलीवुड कुछ ज्यादा ही परेशान नजर आ रहा है. जहां एक तरफ ‘रॉक ऑन 2’ जैसी फिल्म की बाक्स आफिस पर बुरी गति हुई. तो वही फिल्म ‘‘बादशाहो’’ की शूटिंग टल गयी है. तो वहीं अब खबरें गर्म हैं कि आलिया भट्ट व शाहरुख खान की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘डिअर जिंदगी’ अब 25 नवबंर की बजाय 2 दिसंबर को प्रदर्शित की जाएगी. परिणामतः अब जयंतलीलाल गाडा निर्मित तथा विद्या बालन व अर्जुन रामपाल के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘कहानी 2’’ की टक्कर होना स्वाभाविक है. इस टकराव के ही चलते अब करण जौहर व महेश भट्ट कैंप के साथ जयंतीलाल गाडा के झगड़े भी होने लगे हैं.

वास्तव में पहले ‘डिअर जिंदगी’ और ‘कहानी 2’ एक साथ प्रदर्शित होनी थी. लेकिन करण जौहर व महेश भट्ट के साथ जयंती लाल गाडा की एक बैठक हुई थी. इस बैठक में आम सहमति से यह तय किया गया था कि 25 नवंबर को आलिया भट्ट व शाहरुख खान की ‘‘डिअर जिंदगी’’ प्रदर्शित होगी तथा 2 दिसंबर को विद्या बालन की ‘कहानी 2’ प्रदर्शित होगी. जयंतीलाल गाड़ा ने अपनी फिल्म ‘‘कहानी 2’’ का प्रमोशन भी इसी हिसाग से शुरू किया.

लेकिन अब अचानक करण जोहर व महेश भट्ट कैंप से खबर आयी है कि वह भी ‘डिअर जिंदगी’ को 2 दिसंबर को ही प्रदर्शित करेंगे. सूत्र बता रहे हैं कि इससे जयंतीलाल गाड़ा काफी नाराज हैं. एक सूत्र दावा कर रहा है कि इस बात को लेकर कल ही करण जोहर व महेश भट्ट के साथ जयंतीलाल गाड़ा की लंबी झड़प हो चुकी है. कुछ लोग मानते हैं कि नोटबंदी के अलावा जिस तरह से स्टूडियो सिस्टम असफल हो रहा है, वैसे हालात में जयंती लाल गाडा जैसे लोगों से नाराजगी मोल लेना एक निर्माता के लिए भविष्य में नुकसान का सबक भी बन सकता है.

सूत्रों की माने तो जयंतीलाल गाड़ा का मानना है कि जब उन्होंने पहले बातचीत कर अपनी फिल्म ‘कहानी 2’ के प्रदर्शन की तारीख 25 नवंबर से दो दिसंबर की थी, तो अब ‘डिअर जिंदगी’ को 25 नवंबर को ही प्रदर्शित करना चाहिए. यदि वह तारीख बदलना चाहते हैं, तो उन्हे चाहिए कि ‘डिअर जिंदगी’ को 9 दिसंबर को प्रदर्शित करें.

बौलीवुड से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि यदि करण जोहर व महेश भट्ट कैंप ने जिद करके ‘डिअर जिंदगी’ को 2 दिसंबर को ही ‘कहानी 2’ के साथ प्रदर्शित की, तो जयंतीलाल गाडा व करण जोहर के बीच तलवारे खिंच जाएंगी.

बौलीवुड से जुड़े सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि ‘डिअर जिंदगी’ और ‘कहानी 2’ दोनों फिल्में एक साथ दो दिसंबर को प्रदर्शित हुईं, तो इसका सबसे ज्यादा खामियाजा ‘डिअर जिंदगी’ को ही भुगतना पड़ेगा. जो कि शाहरुख खान के लिए सबसे ज्यादा नुकसान दायक साबित होगा. जबकि कुछ लोग मानकर चल रहे हैं कि मामला बराबरी का ही है. आलिया भट्ट की पिछली फिल्में ‘‘उड़ता पंजाब’’ व ‘‘शानदार’’ ने बाक्स आफिस पर कमाल नहीं किया था. तो वहीं शाहरुख खान की ‘दिलवाले’ और ‘फैन’ बुरी तरह से मात खा चुकी हैं. जबकि विद्या बालन की भी कुछ फिल्में असफल रही हैं.

जबकि  बौलीवुड का एक धड़ा मानता है कि आम लोगो में शाहरुख खन को लेकर गुस्सा है, जबकि विद्या बालन के साथ लोग अभी भी जुड़े हुए हैं. इसलिए फिल्म ‘‘कहानी 2’’ को फायदा मिलेगा.

घर बैठे पता करें चालू एटीएम के बारे में

8 नवंबर की रात सरकार ने 500-1000 के नोट बंद करने का ऐलान कर दिया. आज 6 दिन बाद भी बैंकों के सामने कैश निकालने के लिए लंबी कतार लग रही है.

एटीएम पर लोग कैश निकालने के लिए काफी मशक्कत कर रहे हैं. कई ऐसे भी एटीएम है जो काम ही नहीं कर रहे हैं.

नोट वाले एटीएम तलाशना लोगों के लिए इस वक्त बड़ी परेशानी साबित हो रही है. आपकी इस परेशानी को थोडा़ आसान बनाने के लिए हम आपकी मदद कर रहे हैं. आप इंटरनेट की मदद से एटीएम तलाश सकते हैं. जो आपके लिए काफी आसान होगा.

इस वक्त आप सोशल मीडिया पर कुछ खास हैशटैग जो ट्विटर और फेसबुक पर एक्टिव हैं जिससे मदद से आप आस-पास के ऐसे एटीएम की जानकारी ले सकते हैं जिसमें कैश भी हो और कतार भी लंबी ना हो.

आप इन दोनों प्लेटफॉर्म पर #WorkingATMs, #ATMsWithCash, और #ATMsNearYou हैशटैग का इस्तेमाल करें. इस हैशटैग का हमने इस्तेमाल किया और इसमें एक यूजर्स औरों की मदद के लिए ऐसे एटीएम की जानकारी दे रहे हैं जहां आप की कैश की परेशानी दूर हो सकती है.

इसके अलावा आप क्राउडसोर्स वेबसाइट जैसे ATMSearch पर जा कर अपनी लोकेशन डालकर भी एटीएम से जुड़ी जानकारी पा सकते हैं.

ये पहली बार नहीं है इससे पहले चेन्नई बाढ़ में भी सोशल मीडिया ने लोगों की बड़ी मदद की थी. प्राकृतिक आपदाओं में भी सोशल मीडिया आम लोगों की मदद के लिए सामने आता है. हालांकि सोशल मीडिया से मिली इस जानकारी को आप एकबार खुद से जांच लें. ये आप के लिए बेहतर होगा.

नोटबंदी से परेशान दिखीं विद्या बालन

देश में बड़े नोटों पर लगी पाबंदी से केवल गरीब तबका ही परेशान नहीं है. फिल्म अभिनेत्री विद्या बालन जैसे लोग भी परेशान दिखे. विद्या बालन ने कहा कि जिस दिन नोट पाबंदी की घोषणा हुई वह फिल्म के प्रमोशन से वापस लौट रही थी. टोल प्लाजा पर टोल टैक्स देने के लिये उनके पास पैसे नहीं थे. ऐसे में उनको बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा.

जब विद्या यह पूछा गया कि नोट पाबंदी का प्रभाव फिल्म के बिजनेस पर पड़ेगा या नहीं? तो विद्या ने कहा ‘कहानी -2‘ 2 दिसम्बर को सिनेमाहाल में पहुंचेगी. मैं उम्मीद करती हूं कि तब तक हालात सुधर जायेंगे. विद्या ने इस बात से सहमति जताई की इस पांबदी को असर मनोरंजन जगत पर पड़ सकता है. दर्शक सोचविचार कर ही सिनेमा हाल तक जायेंगे.

फिल्मों में लगने वाले कालेधन के सवाल पर विद्या ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि अब फिल्मों में बहुत कालाधन लगता है. अब लोग बहुत ट्रांसपैरेंसी से काम करते हैं. ज्यादातर भुगतान चेक से होता है. बहुत शातिर व्यक्ति ही कालेधन से फिल्म बनाने की सोच सकता है. विद्या ने यह जरूर कहा कि वह सरकार के इस फैसले के साथ हैं. सरकार को यह उपाय जरूर करने चाहिये जिससे लोग कम परेशान हो.

फिल्म ‘कहानी-2’ के प्रचार के लिये लखनऊ आईं विद्या बालन को नोट पर लगी पाबंदी के सवालों ने बेहद परेशान किया. विद्या बालन उत्तर प्रदेश सरकार में समाजवादी पेंशन योजना की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं, ऐसे में उनके लिये इन सवालों का जबाव देना मुश्किल काम था.

निर्देशक सुजाय घोष की फिल्म ‘कहानी-2’ में दुर्गारानी सिंह की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री विद्या बालन नवाबों के शहर लखनऊ आई थी. विद्या बालन ने बताया कि इसमें कहानी-1 की पूरी पावरफुल टीम है तथा साथ में अर्जुन रामपाल भी हैं.  36 वर्षीय दुर्गारानी सिंह की भूमिका में विद्या बालन अपहरण व मर्डर के लिए जानी जाती हैं. विद्या बालन ने बताया ‘मैंने सुजाय घोष की इस फिल्म में एक और नए कैरेक्टर को जीवंत करने का प्रयास किया है. पूरी फिल्म में मैंने बहुत एन्जाय किया है’. विद्या बालन ने कहा कि ‘कहानी-2’  का सिक्वयल दूसरे सिक्वयल से अलग है. इसकी कहानी फिल्म कहानी से पूरी तरह से अलग है.

नोटबंदी पर फेल हुआ मोदी का दांव

पांच सौ और हजार के नोटों को बंद करने के सात दिनों के बाद भी आम जनता की परेशानियां बदस्तूर जारी हैं. शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देशभर में करीब दो लाख एटीएम मशीनों को सुचारू रूप से संचालित होने में तीन हफ्तों का समय लग सकता है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक भाषण देते हुए जनता से 50 दिनों तक मुश्किलें बर्दाश्त करने का आह्वान किया. काला धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि से आने के कारण वे जनता की दिक्कतों को समझ रहे हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कालेधन की समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम जरूरी हैं और मोदी सरकार से जनता को उम्मीदें भी हैं. परंतु, किसी भी बड़ी पहल को अमलीजामा पहनाने से पहले उससे जुड़े तमाम पहलुओं पर समुचित तैयारी भी आवश्यक है. पुराने बड़े नोटों की वापसी और उनकी जगह नये बड़े नोट लाने के निर्णय के बाद से बैंकों में भारी भीड़ है. एटीएम मशीनें लगभग ठप हैं.

नगदी की कमी का असर रोजमर्रा के लेन-देन और खरीद-बिक्री पर पड़ा है. इस संकट की मार सबसे अधिक आम लोगों को झेलना पड़ रही है. देश की आबादी का बड़ा हिस्सा सामान्यतः नगदी से काम चलाता है. कार्डों और स्मार्ट फोन के जरिये होनेवाला विनिमय बड़े शहरों तक ही है. देश के अनेक क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं भी संतोषजनक नहीं हैं.

ऐसे में सरकार को ऐसे उपाय करने चाहिए थे कि अफरातफरी के हालात न पैदा हो सकें. कम-से-कम बैंकों और एटीएम मशीनों तक पर्याप्त नगदी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए थी. इस परेशानी को दूर करने को प्राथमिकता देने की जरूरत है. हटाये गये बड़े नोट नगदी का 86 फीसदी भाग हैं. इससे बैंकिंग तंत्र पर भारी दबाव स्वाभाविक है. वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, शनिवार दोपहर तक बैंकों में सात करोड़ से अधिक बार लेन-देन हुआ है.

अगले कई दिनों तक ऐसे ही हालात बने रहेंगे. आकलनों के अनुसार, बैंकों में 30 बिलियन डॉलर से अधिक जमा कराया जा चुका है. इस धन को निकालने की जल्दी भी होगी. एटीएम मशीनों को नये नोट देने लायक बनाने में भी समय लगेगा. बहरहाल, सरकार और बैंकिंग तंत्र की ओर से स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयासों का भरोसा दिया जा रहा है जिनके नतीजे आगामी कुछ दिनों में दिखने लगेंगे.

500-1000 नोट बैन से सस्ती होगी ईएमआई

500-1000 के नोट बंद होने से जहां देश के ज्यादातर लोग परेशान हैं वहीं आर्थिक मोर्चे पर इसके क्या क्या फायदे होने वाले हैं ये सामने आने लगा है. एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा है कि 500-1000 के नोट बंद होने से ईएमआई घट सकती हैं. यानी आप जो लोन लेते हैं इसके ऊपर ब्याज दरें घट सकती हैं जिससे आपको सस्ती ईएमआई का फायदा मिलने लगेगा.

एसबीआई की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने बताया कि नोटबंदी के बाद अब तक यानी 9 नवंबर से 12 तक एसबीआई में 1 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है और इसमें से 80 हजार करोड़ रुपये डिपॉजिट हैं और बाकी कैश निकाला गया है या एक्सचेंज किया जा चुका है. बैंक इस समय काफी व्यस्त हैं और पूरी रकम का सही आकलन अभी तक नहीं किया जा सका है. बैंकों पर ट्रांजेक्शन का दबाव कम होने के बाद एकदम सही आंकड़ा बताया जा सकेगा.

नोटबंदी से कैसे घटेंगी लोन की ईएमआई?

एसबीआई चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि आने वाले क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई द्वारा नीतिगत दरें कम होने की पूरी उम्मीद है क्योंकि नोटबंदी से बैंकिंग सिस्टम में बहुत लिक्विडिटी यानी कैश आ चुका है और बैंकों के पास ज्यादा पैसा रहने से वो भी अपनी ब्याज दरें कम कर पाएंगे. तो आने वाले वक्त में 500-1000 रुपये के नोट बंद होने का अच्छा असर आपके लोन की ईएमआई बंद होने के रूप में सामने आ सकता है.

नोटबंदी से रियल एस्टेट सेक्टर को तो घाटा होगा लेकिन इसका असली फायदा ग्राहकों को होगा क्योंकि प्रॉपर्टी की कीमतें गिरेंगी. ग्राहकों को सस्ती कीमतों पर घर और फ्लैट मिलने लगेंगे. ऐसा होगा क्योंकि काले धन का बहुत बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में आता था और इसकी वजह से बिल्डर घरों की कीमतें बढ़ाते जा रहे थे पर अब काले धन के लिए सारे रास्ते बंद होने के बाद रियलटी सेक्टर को कीमतें कम करने का रास्ता अपनाना ही पड़ेगा. यानी घर सस्ते होंगे और लोगों का घर खरीदने का सपना कम कीमत में पूरा हो पाएगा.

बैंकों में कब तक कम होगी भीड़?

बैंक 50 दिनों में अपना सारा काम पूरा कर पाएंगे. अभी एटीएम से ज्यादा पैसा नहीं निकल पा रहा है इसकी वजह से बैंकों में ज्यादा भीड़ आ रही है और जब एटीएम से पैसा आना शुरू हो जाएगा तो बैंकों की भीड़ कम होती जाएगी.

एटीएम के सेंसर बदलने पड़ेंगे और एटीएम में नई करेंसी के निकलने के कैलिब्रेशन करने में जितना समय लगेगा उतनी ही देर लगेगी. जैसे ही एटीएम नए नोट निकालने के लिए तैयार हो जाएंगें लोगों की दिक्कतें भी कम होती जाएंगी और इसके साथ बैंकों में आने वाली भीड़ भी कम होगी.

दिसंबर से भी पहले ही एसबीआई अपने सारे एटीएम को नई करेंसी के लिए तैयार कर देगा और पूरी उम्मीद है कि दिसंबर से पहले ही सारे एटीएम से 500 और 2000 रुपये के नोट निकला जा सकेंगे.

लोगों की दिक्कतें कैसे होंगी कम?

अरुंधति भट्टाचार्य के मुताबिक अभी तक गांवों के मुकाबले शहरों में ज्यादा डिपॉजिट हुआ है. ज्यादा दबाव से बैंकों के कामकाज ठप्प नहीं होंगे. मोबाइल ट्रांजेक्शन में 140 फीसदी की बढ़ोत्तरी आई है और ये समय देश के लिए सुनहरा मौका है कि ज्यादा से ज्यादा ट्रांजेक्शन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाएं. लोग जिन कार्डों का इस्तेमाल एटीएम से पैसा निकालने के लिए करना चाहते हैं उन्हीं का इस्तेमाल डिजिटल ट्रांजेक्शन के तौर पर करें तो दिक्कतें कम होंगी.

कब मिलेंगे 500 के नोट

500 रुपये के नोट 3 सर्किल में देना शुरू हो गए हैं. अभी फिलहाल भोपाल में 500 रुपये के नोट देना शुरू हो गया है और मुंबई में 1-2 दिन से 500 रुपये के नोट देना शुरू कर दिए जाएंगे.

सूखी नहर में सियासी जाल

कुछ महीने पहले दक्षिण में कावेरी के जल बंटवारे को लेकर जहां कर्नाटक और तमिलनाडु की तनातनी के बाद दोनों राज्यों में उग्र प्रदर्शन, आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाओं का लंबा सिलसिला चला और महीने भर में बमुश्किल मामला ठंडा पड़ा, वहीं अब उत्तर में सतलुज-यमुना लिंक नहर को खोलने और हरियाणा को इसके जरिए पंजाब से पानी दिए जाने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला दिए जाने के बाद दोनों राज्यों में राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई है.

हालांकि अभी नौबत कर्नाटक और तमिलनाडु जैसी तो नहीं आई है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई जगह जर्जर, टूटी-फूटी और सूखी नहर में पानी के लिए आग लगाने में दोनों राज्यों के सियासी दल कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं. चूंकि पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए इस लिंक नहर के पानी को एक बड़े मुद्दे के तौर पर भुनाने में कोई दल किसी से पीछे नहीं रहना चाहता. भले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश यानी हुक्म की उदूली हो जाए.

इस मामले में दोनों राज्यों में विभिन्न राजनीतिक दलों की दोहरी भूमिका दयनीय होने की हद तक हास्यास्पद हो गई है. भाजपा हरियाणा में सत्तारूढ़ है और पंजाब की अकाली सरकार में हिस्सेदार है, लेकिन पंजाब के अगले विधानसभा चुनाव में बाजी पलटने को आतुर कांग्रेस जहां हरियाणा को पानी न दिए जाने के पक्ष में आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं हरियाणा की कांग्रेस इकाई हर हाल में पानी लेने के लिए हरियाणा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने में लगी हुई है.

चुनावी तकाजा ही है कि पंजाब के बुजुर्गवार मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज करते हुए साफ तौर पर हरियाणा को पानी देने से इंकार कर दिया है. वहीं कांग्रेस सांसद और पंजाब की सत्ता के दावेदार पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद संसद की सदस्यता से इस्तीफा देकर पानी के लिए शहीद होने में जरा भी देर नहीं की थी.

बादल सरकार पर तीखा हमला करते हुए पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने कह सकते हैं कि चुनावी कसम खा रखी है कि जबतक वह हैं, तबतक पंजाब के पानी की एक-एक बूंद की रक्षा करेंगे और राज्य के दरियाओं के पानी की एक बूंद भी दूसरे राज्यों को नहीं जाने देंगे.

जाहिर है कि दबाव पंजाब की अकाली सरकार पर भी है. इधर कोर्ट का फैसला हरियाणा के पक्ष में आने के बाद से सूबे के किसान जल्दी पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. जबकि सतलुज-यमुना लिंक नहर की हालत इतनी खस्ता है कि मौजूदा हालत में वह बेचारी पानी ढो ही नहीं सकती. नहर के कई किनारे कमजोर हो चुके हैं तो कई जगह जमी काई और उगे सरकंडों ने नहर की बुनियाद को कमजोर कर दिया है. यहां तक कि हरियाणा में अंबाला से शुरू होनेवाली इस नहर के प्रवेश द्वार पर कथित रूप से बनाई गई सुरक्षा चौकी का अस्तित्व ही नहीं है, क्योंकि वहां कर्मचारी तक तैनात नहीं हैं. यानी सूखी नहर में ही विभिन्न दल सियासी जाल फेंकने में लगे हैं.

iPhone8 में नहीं होगा होम बटन?

अपने हालिया डिवाइस आईफोन 7 और 7 प्लस स्मार्टफोन को मिली मिलीजुली प्रतिक्रिया के बाद खबरें हैं कि एप्पल अगले साल यानी 2017 में दो नए आईफोन लॉन्च कर सकता है. जिसमें कर्व्ड और बेजलफ्री डिस्प्ले होगा.

एक रिपोर्ट के मुताबिक बार्कले रिसर्च एनालिस्ट के मुताबिक नए आईफोन 8 के भी दो वैरिएंट आएंगे जिसमें से एक का 5 इंच और 5.8 इंच डिस्प्ले होगा. इनके डिजायन में ब्लेज नहीं होंगे.

इस रिपोर्ट में एनालिस्ट के हवाले से कहा गया, “हालांकि ये डियाजन लागू किए ही जाएंगे इसकी सौ फीसदी गारंटी नहीं है. लेकिन मानना है कि बेजलफ्री डिजायन होगा और बड़ी और कर्व्ड स्क्रीन के साथ नया आईफोन लॉन्च होगा.”

ऐसी खबरें हैं कि बेजलफ्री डिजायन बनाने के लिए एप्पल  ने अगले आईफोन में अपने होम बटन को हटा दिया है. हालांकि नए ऑईफोन के लॉन्च होने तक कई तरह के दावे सामने आते रहेंगे.

दो लाख माइक्रो एटीएम होंगे एक्टीवेट

500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों का चलन बंद होने के बाद नए नोट पाने की जद्दोजहद में करीब 2 लाख माइक्रो एटीएम राहत पहुंचाएंगे. सरकार ने बैंकों को रूरल एरिया में करीब 1.1 लाख माइक्रो एटीएम और शहरी, अर्द्ध शहरी इलाकों में करीब 90,000 माइक्रो एटीएम ऐक्टिवेट करने के निर्देश दिए हैं. माइक्रो एटीएम से हर हफ्ते करीब 70,000 ट्रांजैक्शंस होते हैं और सरकार को उम्मीद है कि इससे बैंक ब्रांच और एटीएम नेटवर्क पर कुछ दबाव कम होगा.

मिनिस्ट्री ऑफ फाइनैंस के डायरेक्टर (FI) DFS अशोक कुमार सिंह ने बताया, 'माइक्रो-एटीएम को कम से कम समय में शुरू किया जा सकता है और जितने ज्यादा कैश-इन, कैश आउट पॉइंट्स होंगे, उतनी अधिक लोगों को सहूलियत होगी. उन्होंने बताया, 'पिछले कुछ महीनों में हमने बिजनस कॉरसपॉन्डेंट पॉइंट्स पर ट्रांजैक्शंस की संख्या करीब दोगुनी कर दी है और पिछले छह महीने में इंटरऑपरेबल ट्रांजैक्शंस 10 गुना बढ़े हैं.'

माइक्रो एटीएम हैंडहेल्ड डिवाइस होती हैं, जिनमें GPRS होता है. ऐसी डिवाइस में फिंगरप्रिंट स्कैनर भी होता है, जो इसे आधार के अनुकूल बनाता है. इसमें कस्टमर को एटीएम की तरह अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करना होता है. जब कार्ड को स्वाइप किया जाता है तो माइक्रो एटीएम इसे कोर बैंकिंग सिस्टम से कनेक्ट कर देता है और उनके अकाउंट्स से डेबिट या क्रेडिट हो जाता है.

सरकार ने एक बयान में कहा है कि देश भर में बड़ी संख्या में माइक्रो एटीएम तैनात किए जाएंगे, जिससे नई करंसी के डिस्बर्समेंट में कोई दिक्कत न हो. साथ ही सरकार ने बिजनस कॉरसपॉन्डेंस के लिए कैश होल्डिंग लिमिट को भी बढ़ाकर 50,000 तक कर दिया है और अब इन रेप्रिजेंटटिव्स को कई बार कैश निकालने की इजाजत होगी, जबकि पहले यह दिन में एक बार ही कैश निकाल सकते थे.

सरकार ग्रामीण और शहरी इलाकों में उपलब्ध होने वाले माइक्रो-एटीएम की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी में है. सिंह ने बताया, 'छह महीने में 1.5 से 2 लाख नए पॉइंट्स जोड़े जाएंगे और इसके बाद एक साल में हम 4 लाख के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे. हम सभी राशन शॉप्स (PDS) को बिजनस कॉरसपॉन्डेंस की तरह बनाना चाहते हैं, जिनकी संख्या करीब 5.5 लाख के करीब है.'

इसके अलावा, फाइनैंस मिनिस्ट्री को जल्द लॉन्च किए जाने वाले पोस्टल पेमेंट्स बैंकों का भी सहारा है. सरकार को पहले से ही इन माइक्रो-एटीएम पर फर्जी करंसी डिपॉजिट करने के कुछ मुद्दे को सामना करना पड़ रहा है और इस नेटवर्क में गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जमा करने और नकदी निकालने को 2,000 रुपये तक सीमित रखा गया है.

नोटबंदी से बैंकों के असल बिजनेस पर पड़ी मार

500 और 1,000 रूपये के पुराने नोट वापस लिए जाने के बाद जो हालात बने हैं, उसका बैंकों पर भी बुरा असर पड़ रहा है. बैंकों पर परेशान ग्राहकों को रिलीफ पहुंचाने का जबरदस्त दबाव है. उनके सारे एंप्लॉयीज नोट एक्सचेंज, नकदी देने और डिपॉजिट लेने में लगे हुए हैं क्योंकि बैंकों की ब्रांच के आगे कस्टमर्स की लंबी लाइन लग रही है. इससे बैंकों के लोन देने के मेन बिजनेस पर बुरा असर पड़ा है. कॉरपोरेट लोन को छोड़ दें तो होम, कार, बाइक और कंज्यूमर गुड्स लोन का काम रूक गया है.

इससे बैंकों की लोन रिकवरी भी प्रभावित हो रही है, जिसकी मार वे बर्दाश्त नहीं कर सकते. हाल के क्वॉर्टर्स में बैंकों को बढ़ते बैड लोन की वजह से प्रोविजनिंग बढ़ानी पड़ी है. सूत्रों का कहना है कि बैंकों के परफॉर्मेंस पर इसका कितना असर होगा, अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.

यह इस पर निर्भर करेगा कि हालात सामान्य होने में कितना समय लगता है. उन्होंने बताया कि अलग-अलग काम में लगे बैंक एंप्लॉयीज को सभी ब्रांच में तैनात किया गया है ताकि वे लोगों की परेशानियां दूर कर सकें.

AUSvsSA: चित हुए कंगारू, गंवाई सीरीज

पर्थ टेस्ट के बाद होबार्ट टेस्ट में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम को दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा है. होबार्ट टेस्ट के चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया के पास 8 विकेट थे और वो प्रोटियाज की पहली पारी के स्कोर से 120 रन पीछे थे, लेकिन होबार्ट में हर सुबह तेज गेंदबाजों के लिए कुछ होता है और वही चौथे दिन की सुबह भी देखने को मिला.

ऑस्ट्रेलिया ने अपने बाकी बचे 8 विकेट महज 40 रनों पर गंवा दिए और दक्षिण अफ़्रीका को पारी और 80 रनों से जीत हासिल हुई. गौर करने वाली बात ये है कि इस टेस्ट का दूसरा दिन पूरी तरह से बारिश की भेंट चढ़ गया था. मतलब महज 2 दिन से थौड़ा ज्यादा दिन के खेल में ही ये टेस्ट मैच खत्म हो गया.

पहले दिन ऑस्ट्रेलिया को होबार्ट की पिच पर दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद पूरी टीम महज 85 रनों पर सिमट गई. किसी भी टेस्ट की पहली पारी में ये ऑस्ट्रेलिया की सबसे खराब शुरुआत रही. सिर्फ 17 रनों के अंदर ऑस्ट्रेलिया की आधी टीम पैवेलियन में थी. घर पर पिछले 32 साल में ये ऑस्ट्रेलिया का सबसे खराब प्रदर्शन रहा.

इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने अपने 5 विकेट 132 रन पर गंवा दिए थे, लेकिन फिर क्विंटन डि कॉक के शतक की बदौलत प्रोटियाज ने 340 का स्कोर बनाया और 241 रनों की बढ़त हासिल की.

दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन बेहतर बल्लेबाजी की और दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट के नुकसान पर 121 रन बनाए, लेकिन चौथे दिन की सुबह काइल एबॉट और कगीसो रबाडा की गेंदबाजी का कंगारू बल्लेबाजों के सामने कोई जवाब नहीं था.

रबाडा ने 4 और एबॉट ने 6 विकेट झटके और प्रोटियाज को पारी और 80 रनों से जीत दिला दी. इस जीत के साथ ही 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 की बढ़त हासिल कर सीरीज अपने नाम कर ली है. एबॉट को मैच में 9 विकेट हासिल करने के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया.

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