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चैन न मिले

अगर तन मिले मगर मन न मिले

जैसे बिछौना मिले, नींद न मिले

अगर सुख मिले मगर चैन न मिले

जैसे दर्द मिले, हमदर्द न मिले

अगर आवाज मिले मगर शब्द न मिले

जैसे जिंदगी मिले मगर प्यार न मिले

अगर दो जिस्म मिलें मगर जां न मिले

जैसे इंसान मिले, इंसानियत न मिले.

– अमित सक्सेना

दिल की बात

कागज पे लिखते थे जो अधर,

होंठों को छू कर

उंगलियों को फिर उस पर

लगा नहीं सकते

आदत थी मासूम मेरी

तेरी सूरत सोच कर हम बेजबां

तन्हा रातों में तकिए को

दिल से लगा नहीं सकते

आकाश में देखे थे जो बादल

तेरे साथ खुद को जोड़ कर

गीली रेत पर वह आशियां

अब बना नहीं सकते

तुम जो उड़ते ऊंचाइयों पर

हमारे सपनों के पंख लगा के

गूंथ कर उस फलक पर

पक्के रंग लगा नहीं सकते

बदलते हैं रास्ते खुद ही

नाकाम होती रहें कोशिशें

प्यासे सागर को

मीठे दरिया से मिला नहीं सकते

बुन कर उलझते तानेबाने

आसपास शामिल सांसों में

सुलझे जवाबों के सवाल

लकीरों से मिटा नहीं सकते

बहुत सोचते हैं, समझाते हैं

अपने दिल को

इक तुझे खोने के डर से

अब तुझे पा नहीं सकते

क्यों लिख देते हैं अपने ये

कुछ सोए जज्बात

दिल की बात शायद

तुम से छिपा नहीं सकते.

       

– प्रणय विरमानी

इरोम का शौर्टकट

पूर्वोत्तर राज्यों से आफस्पा हटाने की मांग को ले कर 16 साल तक अनशन करने वाली ईरोम शर्मिला की छवि एक अव्यावहारिक महिला की बन चुकी है. उन के अनशन से आफस्पा का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन आयरन लेडी के खिताब से नवाजी गईं शर्मिला की हिम्मत जरूर टूट गई. ईरोम ने अब अपनी एक क्षेत्रीय पार्टी पीपल्स रिसर्जेंस ऐंड जस्टिस एलायंस नाम से बना ली है. इस की प्रेरणा तय है उन्हें अरविंद केजरीवाल से मिली जो यों ही समाजसेवा करतेकरते दिल्ली की कुरसी पर काबिज हो बैठे. ईरोम के साथ कई दिक्कतें हैं जिन में प्रथम यह है कि उन का कोई जनाधार नहीं है. दूसरे, वे सीधेसीधे मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबे की परंपरागत सीटों खुरई या थोबल से चुनाव लड़ेंगी. इस घोषणा से उन के करीबी बिदकना शुरू हो गए हैं. ऐसे में लगता नहीं कि वे मणिपुर की राजनीति में कोई उल्लेखनीय उठापटक कर पाएंगी.

जमीनों की हवस

ग्लोबल इन्वैस्टर्स मीट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का महत्त्वपूर्ण आयोजन होता है जो इस बार भी इंदौर में संपन्न हुआ. इस बार का अतिरिक्त आकर्षण लंगोटधारी कारोबारी बाबा रामदेव थे जो सूटेडबूटेड उद्योगपतियों का मनोरंजन हास्य योग के जरिए करते आकर्षण का केंद्र बने रहे. राजशाही से ले कर लोकतंत्र तक शासक हमेशा ही उद्योगपतियों के मुहताज रहे हैं. उन के पास देने के नाम पर प्रमुख चीज जमीन होती है. बाबा रामदेव को सूबे में फूड प्रोसैसिंग प्लांट लगाने के लिए राज्य सरकार ने 35 एकड़ जमीन देने की घोषणा की तो योगगुरु का पारा चढ़ गया और उन्होंने हास्यास्पद जवाब यह दिया कि इतने एकड़ में तो वे कबड्डी खेलते हैं.

वैसे, कबड्डी खेलने के लिए दस गुणा साढ़े बारह मीटर का मैदान काफी होता है लेकिन रामदेव को और जमीन चाहिए. अब उन्हें कौन याद दिलाए कि सरकार उन पर इतनी मेहरबान है कि उन के उत्पादों को राशन की दुकानों से बेचने का ऐलान भी कर चुकी है और उन की कंपनी पतंजलि के उत्पादों को करों में छूट भी दे रही है.

दोस्त दोस्त न रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अनौपचारिक संबंधों का प्रदर्शन करते रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस वक्त जरूर बुरा लगा होगा जब व्हाइट हाउस के चीफ फोटोग्राफर ने ओबामा के कार्यकाल की स्मरणीय तसवीरों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उन की पत्नी गुरुचरण कौर की फोटो को पहले नंबर पर रखा जिस में मनमोहन सिंह सूटबूट पहने काफी रुतबेदार और अभिजात्य भी लग रहे हैं. यानी बराक भाई, बराक भाई कहते रहने का सिला उम्मीद के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी को नहीं मिला, जिन्होंने ओबामा के स्वागत में लालगुलाबी कालीन बिछाते खुद अपने हाथों से चाय पिलाई थी. सच यह है कि गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्रियों की बौडी लैंग्वेज में वह बात आ ही नहीं पाती जो कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों की बौडी लैंग्वेज और आम लैंग्वेज में भी होती है. अब उम्मीद है कि वहां के नए राष्ट्रपति के साथ मोदी इस बात का ध्यान रखेंगे.

जीवन की मुसकान

एक सहेली ने पार्टी दी. हम सभी  सहेलियां इकट्ठी हुईं. उस सहेली के घर का बगीचा बहुत सुंदर था. ड्राइंगरूम के कोने में बहुत सुंदर एक्वेरियम रखा हुआ था जिस में रंगबिरंगी मछलियां तैर रही थीं. मैं ने पूछा, ‘‘इस की देखरेख के लिए समय कैसे निकाल पाती हो?’’ वह मुसकराई, बोली, ‘‘मैं नहीं करती इस की देखरेख, पतिदेव करते हैं.’’ हम लोग बड़े खुश हो गए उस के पतिदेव का काम देख कर. ‘‘सारा काम तेरे पति करते हैं, तू क्या करती है, यह तो बता?’’ वह गंभीर हो गई, बोली, ‘‘ये जो पति के काम देख रही हो न, इन को करने के बाद इस की सफाई का काम मैं करती हूं. पतिदेव अब रिटायर हो गए हैं. अभी तक तो उन की आदत थी औफिस में कुरसी पर बैठेबैठे हुक्म चलने की, अब यदि घर में मैं कुछ भी बोलती तो उन्हें बुरा लग सकता था. इसलिए मैं ने पहले ही से उन्हें कहना शुरू कर दिया था कि भई, यह काम तो बड़ा मुश्किल है मुझ से नहीं होगा, केवल आप ही कर सकते हैं यह काम.  ‘‘बस धीरेधीरे इन्होंने काम तो संभाल लिए लेकिन इन से होते तो हैं नहीं, क्योंकि इन्होंने कभी किए ही नहीं. पर मैं ने इन्हें कभी टोका नहीं. ये टैंक साफ करते हैं तो समझो कि पूरा ड्राइंगरूम गंदा हो जाता है लेकिन मैं बाद मैं चुपचाप साफ कर देती हूं. बगीचे में जाते हैं तो तमाम मिट्टी हर कहीं फैल जाती है, मैं बाद में माली को बुला कर ठीक करवा देती हूं. इन के मन में संतुष्टि है कि मैं बहुत काम कर रहा हूं. समय के साथ सीख भी जाएंगे. बाजार से सामान लाना, बगीचा देखना इन सब में इन का समय अच्छे से कट जाता है और बाद के कामों को संभालने में मेरा,’’ कह कर वह मुसकरा दी. हम सब उस की बातों से सहमत हुए और सोचने लगे कि अब हम भी अपनेअपने घर में अपनेअपने पतियों को बारबार न टोक कर उन्हें उन का मनपसंद काम करने  के लिए प्रेरित करेंगे ताकि वे खुश रहें और  हम भी.       

– अनीता सक्सेना, भोपाल (म.प्र.)

बाढ़ राहत अभियान के दौरान मैं ने एक फौजी को सलाम करते हुए कहा, ‘‘सर, आप वाकई में महान हो.’’ तब उस फौजी का जवाब था, ‘‘अरे नहीं, हम तो एक मामूली फौजी हैं. और यह तो हमारा फर्ज है.’’ इतना कह कर वे फिर अपने काम में जुट गए. तब मेरे मन में एक खयाल आया कि फौजी कब मामूली होते हैं. वे तो हमेशा असाधारण होते हैं. वे सिर्फ सीमा के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के, हम सब के रक्षक होते हैं. देश के इन सच्चे सपूतों को हम सभी का शतशत नमन.

– मनोज जैन, चेन्नई (तमिलनाडु)

सफर अनजाना

बात तब की है जब मैं अपनी कुछ सहेलियों के साथ ट्रेन में होस्टल से घर वापस जा रही थी. हम सब सहेलियां एक ही डब्बे में थीं. रात होने पर हम सब सोने की तैयारी कर रही थीं. मेरी सहेलियां अपनी सीट पर सो गईं. मुझे नींद नहीं आ रही थी, इसलिए मैं नीचे की सीट पर बैठ कर सामान की रखवाली कर रही थी. कुछ देर बाद वहां एक लड़का मंडराने लगा. मुझे बैठा देख वह मेरी सीट पर आ कर बैठ गया. फिर धीरेधीरे मेरे करीब आने लगा. मैं ने उसे दूर होने को कहा. तो वह बोला, ‘‘प्लीज, क्या आप मेरे साथ मेरी सीट पर चल कर बैठेंगी, क्योंकि मैं अकेला हूं.’’ उस की बात सुन कर मैं बहुत घबरा गई. फिर मैं ने उस से कहा कि तुम यहां से जाओ वरना मैं अपने भैया को जगाती हूं. मैं ने अपनी सहेली, जो गहरी नींद में सो रही थी, का पांव पकड़ कर भैयाभैया कह कर उसे हिलाना शुरू कर दिया. उसे झिंझोड़ने पर वह नींद ही में ऊं आं करने लगी. यह देख कर वह लड़का वहां से भाग गया. अच्छा हुआ कि मेरी सहेली चादर ओढ़ कर सोई थी जिस से यह पता नहीं चला कि वह लड़की है. सुबह जब मैं ने सहेलियों को रात की घटना सुनाई तो वे सब जोरजोर से हंसने लगीं. 

– कस्तूरी, नागपुर (महा.)

मेरे पति का तबादला कोलकाता से हजारीबाग हुआ था. हम बौंबे मेल से कोडरमा जा रहे थे. सामान ज्यादा था. बौंबे मेल सुबह 4 बजे कोडरमा स्टेशन पहुंचती है. हम वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के डब्बे में यात्रा कर रहे थे. पति ने कोच अटैंडैंट को 3:45 बजे जगाने के लिए बोला था. ट्रेन समय पर कोडरमा स्टेशन पहुंच गई. कोच अटैंडैंट हमारी सीट के पास खड़ा हो कर बोला, लग रहा है कि कोडरमा है. पति तुरंत उठ खड़े हुए और कोडरमा से ही चढ़े एक यात्री से कन्फर्म किया कि कोडरमा ही है.  मेरे पति नंगे पांव ही जल्दीजल्दी सामान बाहर फेंकने लगे और मुझे, दोनों बच्चों को ट्रेन से नीचे उतार दिया. कोच अटैंडैंट ने हमारी सहायता नहीं की जबकि एक सहयात्री ने बहुत सहायता की. आखिरी सामान उतार ही रहे थे कि ट्रेन चल दी. पति एक हाथ में अपना ब्रीफकेस और दूसरे हाथ में 2 जूते ले कर चलती ट्रेन से प्लेटफौर्म पर कूद गए.  हम ने प्लेटफौर्म पर पड़ा सामान समेटा. पति ने अपना जूता पहनना चाहा तो भौचक्के रह गए. दो जूतों में एक उन का चमड़े का था और दूसरा सहयात्री का स्पोटर्स शू था. उस सहयात्री के बारे में सोच कर हमें बहुत दुख हुआ.            

– रेनू सिंह, लातूर (महा.)

राम नीति राजनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के ठीक पहले केंद्र की भाजपा सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने अयोध्या में 250 करोड़ रुपए खर्च कर रामायण संग्रहालय विकसित करने की घोषणा कर दी है तो राम नाम की दौड़ में राज्य की सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल हो गए हैं जो सरयू नदी के किनारे रामलीला थीम पार्क बनाने की बात कह चुके हैं. हिंदुओं को जितना राम और रामायण ने पिछड़ा रखा है उतना कोई और रख भी नहीं सकता था.

चुनावी वैतरणी पार करने के लिए राम का सहारा लिया जाता है तो तय है कि यह अभिशप्त लोकतंत्र की निशानी है. अब दिक्कत में कांग्रेस और बसपा हैं जो रामायण संग्रहालय और रामलीला थीम पार्क का विरोध नहीं कर पा रहीं. यही कमजोरी खासतौर से बसपा की दुर्गति की वजह भी बनी है.

इन्हें भी आजमाइए

– सनबर्न होने पर पुदीने की पत्तियों को चटनी की तरह पीस कर झुलसी हुई त्वचा पर लगाने से आप को अवश्य फायदा होगा. इसे लगाने के 10 मिनट के बाद धो लें.

– होंठों को नैचुरल लुक देने के लिए पहले लिप पैंसिल से होंठों को सही आकार दें, इस के बाद नैचुरल कलर की लिपस्टिक लगाएं.

– गरम दूध में तुलसी मिला कर पीने से नर्वस सिस्टम रिलैक्स होता है. यह स्ट्रैस हार्मोन को नियंत्रित कर एंग्जाइटी और डिप्रैशन से बचाता है.

– जिस बरतन में दूध उबालने जा रहे हैं उस के किनारों पर मक्खन को ठीक से लगा दें. मक्खन दूध को पतीले से बाहर गिरने ही नहीं देगा.

– एक चम्मच चीनी को भूरा होने तक गरम कीजिए और फिर इसे केक के मिक्सचर में मिला दीजिए, इस से केक का रंग अच्छा हो जाएगा.

– चाय या कौफी में दालचीनी पाउडर मिलाएं, यह डायबिटीज को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मददगार है.

– नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए आप बचे नीबू के छिलके से नाखूनों के ऊपर मालिश करें.

– लहसुन को हलका सा गरम कर देने के बाद उस को छीलने में सुविधा होती है.

ऐसा भी होता है

एक बुजुर्ग दंपती बहुत दिनों से उदास व दखी थे. बहुत सोचने के बाद उन्होंने पड़ोस के लड़के को अपने घर बुलाया. उस से विनती की, ‘‘हमारा फेसबुक का अकाउंट बना दो.’’ लड़के ने कहा, ‘‘लाइए अंकल, अभी बना देता हूं, बताइए किस नाम से बनाऊं?’’

बुजुर्ग ने कहा, ‘‘किसी भी लड़की का अच्छा सा नाम रख लो.’’

लड़का हैरान हुआ, ‘‘अंकल, फर्जी अकाउंट क्यों?’’

‘‘बेटा पहले बना दो, फिर बताता हूं क्यों.’’ लड़के ने उन का अकाउंट बना दिया, फिर पूछा, ‘‘प्रोफाइल फोटो कौन सी लगाऊं?’’

‘‘कोई भी हीरोइन जो आजकल के बच्चों को अच्छी लगती हो.’’ लड़के ने गूगल से फोटो सर्च कर के डाल दी. फेसबुक अकाउंट बन गया.

फिर बुजुर्ग ने कहा, ‘‘बेटा, कुछ मशहूर लोगों को ऐड कर दो.’’ लड़के ने कुछ लोगों को रिक्वैस्ट भेज दी. फिर बुजुर्ग ने अपने बेटे का नाम सर्च करवा कर रिक्वैस्ट भेज दी.

जब सब काम पूरा हो गया, लड़के ने कहा, ‘‘अंकल, अब तो बता दीजिए, आप ने यह अकाउंट क्यों बनवाया?’’

बुजुर्ग दंपती की आंखों से आंसू बहने लगे. बुजुर्ग ने कहा, ‘‘हमारा एक ही बेटा है और शादी के बाद हम से दूर रहने लगा है. कहता है, ‘मेरी पत्नी आप लोगों को पसंद नहीं करती.’ कितना अपमान सहते, इसलिए बेटे के घर जाना छोड़ दिया. एक पोता और एक पोती है. बस, उन्हें देखने का बहुत मन करता है. किसी ने कहा कि फेसबुक पर लोग अपने परिवार की फोटो डालते हैं. अपने नाम से अगर अकाउंट बनाया तो वह हमें ऐड नहीं करेगा. इसलिए हम ने यह नकली अकाउंट बनवाया.’’ बुजुर्ग दंपती के आंसुओं को देख कर और उन के अकाउंट का सच जान कर लड़के की आंखों से भी आंसू बहने लगे.    

– पूनम अहमद, ठाणे (महा.)

*

मेरे जेठ के लड़के की शादी के अवसर पर मेरी बूआसास भी सपरिवार आई थीं. घर से बरात निकलने का समय हो रहा था. सभी सजनेसंवरने में लगे हुए थे. मैं भी व्यस्त थी. तभी बूआजी अपने हाथ में एक डब्बा ले कर आईं और मुझ से बोलीं, ‘‘बहू, डाइनिंग टेबल पर यह गहनों का डब्बा खुला पड़ा था. न जाने किस का है?’’ मैं देख कर हैरान रह गई क्योंकि वे सारे जेवर मेरी बेटी के थे. शायद शीघ्रता में वह इसे रखना भूल गई थी.

मैं ने गहने अपने पास रख लिए और बूआजी को बहुतबहुत धन्यवाद दिया.

– नीरू श्रीवास्तव, जमशेदपुर (झारखंड)

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