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आईसीसीसी टेस्ट रैंकिंग: अश्विन पहले तो कोहली दूसरे नंबर पर

इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक जमाने वाले भारतीय कप्तान विराट कोहली एक पायदान चढ़कर टेस्ट करियर में अपनी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग पर पहुंच गए हैं. कोहली टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरे नंबर पर हैं. वहीं भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन गेंदबाजों की रैंकिंग में शीर्ष पर बरकरार हैं.

मुंबई में सीरीज के चौथे टेस्ट में 235 रन बनाने वाले कोहली को 53 अंक मिले, जिससे उनके रेटिंग पॉइंट्स 886 हो गए हैं. वह एक पायदान चढ़कर रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. अब वह एक ही समय पर सभी प्रारूपों में शीर्ष रैंकिंग हासिल करने के करीब हैं. वह फिलहाल वनडे बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरे और टी-20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में पहले स्थान पर हैं. वह ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ से 11 अंक पीछे हैं.

दूसरी ओर अश्विन आईसीसी टेस्ट गेंदबाजों की रैंकिंग में शीर्ष पर बने हुए हैं, जिन्होंने चौथे टेस्ट में 12 विकेट लिये. अक्टूबर में पहली बार 900 अंक का आंकड़ा पार करने वाले अश्विन के अब 904 अंक हो गए हैं और वह दूसरे स्थान पर काबिज श्रीलंका के रंगना हेराथ से 37 अंक आगे हैं. अश्विन की रेटिंग किसी ऑफ स्पिनर की दूसरी सर्वश्रेष्ठ रेटिंग है. उनसे आगे श्री लंका के ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन हैं, जो 920 पॉइंट्स तक पहुंचे थे.

टॉप 5 बल्लेबाज

स्टीव स्मिथ (ऑस्ट्रेलिया)

विराट कोहली (भारत)

जो रूट (इंग्लैंड)

केन विलियम्सन (न्यूजीलैंड)

हाशिम अमला (द. अफ्रीका)

टॉप 5 गेंदबाज

आर. अश्विन (भारत)

रंगना हेराथ (श्रीलंका)

डेल स्टेन (द. अफ्रीका)

जेम्स एंडरसन (इंग्लैंड)

जेसन हेजलवुड (ऑस्ट्रेलिया)

कालेधन पर आर्थिक नाटक

नोटबंदी के बावजूद मध्य प्रदेश, असम व कुछ अन्य जगहों में कुछ सीटें जीत कर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पैठ साबित कर दी है. एक तरह से उस ने यह मुहर लगवा ली है कि जिन लोगों ने 2014 में उसे वोट दिया था वे नोटबंदी से खुश नहीं, तो नाराज भी नहीं हैं. राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों व पंचायतों के चुनावों में भाजपा कहींकहीं हारी है पर इस के बहुत से कारण हो सकते हैं.

लेकिन इस का अर्थ यह निकालना कि नोटबंदी से जनता खुश है, गलत है. नोटबंदी को बेचा गया ही इस तरह है कि मानो थोड़ी तपस्या के बाद चमत्कार होंगे. 1969 में इंदिरा गांधी ने यह किया था और 1984 में राजीव गांधी ने. 1969 में सरकारीकरण, गरीबी हटाओ और समाजवाद के नारों पर और 1984 में देश की एकता के नाम पर इंदिरा व राजीव को जीत मिली थी. आज वैसी ही जीत भाजपा के नरेंद्र मोदी को मिली है.

ब्लैकमनी से देश की गरीब जनता खिन्न है, इस में शक नहीं. भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में ऐसा ही है. अमेरिका में ‘औक्यूपाई वाल स्ट्रीट’ आंदोलन कुछ महीने चला था. कालेधन के नारे पर ही नरेंद्र मोदी मई 2014 में जीत कर आए थे और ढाई साल में जब कुछ नहीं हुआ तो जनता निराश होने लगी. यह तो भगवा ब्रिगेड के अनवरत प्रचार का कमाल है कि उस की सत्ता को आंच न पहुंची.

नोटबंदी लागू कर देशभर पर अकाल सा थोप दिया गया है. लोग दूसरों के कालेधन का विरोध करने की जगह अपने पैसों को बचाने में लग गए हैं पर कुछ को संतोष यह है कि जिन के पास ज्यादा कालाधन है उन्हें या तो कतारों में खड़ा होना पड़ेगा या पूरा अथवा कुछ हिस्सा खोना पड़ेगा.

जो सुख दूसरों खासतौर पर सक्षमों के दुख को देखने में मिलता है उस का आनंद असीम होता है. बचपन से ही जानवरों को सताने की ट्रेनिंग हरेक बच्चे को दे दी जाती है. सड़कों के किनारे खड़े 4-5 युवाओं के झुंड जब लड़कियों को छेड़ते हैं तो यह परपीड़न सुख होता है जो शायद प्रकृतिदत्त है या समाज इतनी सदियों से दे रहा है कि यह जीवन का अंग बन गया है.

इसी परपीड़न सुख की लहर पर चढ़ कर इंदिरा गांधी ने लंबा राज किया था और वही नरेंद्र मोदी करना चाह रहे हैं. आमतौर पर गरीबों का नाम ले कर कम संख्या वालों का बहाना बनाया जाता है.

अमीरों के इस कालेधन को न तो रद्दी होना है और न ही सक्षमों के पर कतरे जाएंगे. यह राजनीतिक नाटक अपनी कीमत लेगा. लेकिन लाभ किस का होगा, मालूम नहीं. आर्थिक नाटक में जेब आखिरकार किस की कटती है, इसे भूल कर अमीरों का एक वर्ग व गरीबों का बड़ा रेवड़ फिलहाल खुश ही नजर आ रहा है. ये तब रुष्ट होंगे जब इस की कीमत इन्हें लगातार महीनोंसालों देनी होगी.

बच्चों में खेल भावना जरूरी : विशाल शेखर

जब समान रुचि के 2 लोग मिलते हैं तो दोस्ती के रंग भी धीरेधीरे गहरे हो जाते हैं. संगीतकार जोड़ी विशाल डडलानी और शेखर रावजियानी की संगीतकार जोड़ी भी इसी तरह बनी. संगीतकार की इस जोड़ी को लोग विशाल शेखर के नाम से जानते और पहचानते  हैं. विशाल शेखर ने 17 वर्ष के दौरान 50 से अधिक फिल्मों को संगीत से संवारते हुए ‘झंकार बीट्स’, ‘कमीने’, ‘वेकअप सिड’, ‘चेन्नई ऐक्सप्रैस’, ‘स्टूडैंट औफ द इयर’, ‘नमस्ते लंदन’, ‘बचना ऐ हसीनो’, ‘सुल्तान’ सहित कई सुपरहिट फिल्मों का संगीत दिया है.

इन दिनों यशराज फिल्म्स की आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘बेफिक्रे’ का संगीत काफी लोकप्रिय हो रहा है जिसे विशाल शेखर ने ही संगीत की धुनों से संवारा है. इस में एक रोमांटिक गीत को विशाल डडलानी ने सुनिधि चौहान के साथ अपनी आवाज में भी स्वरबद्ध किया है. लेकिन इस जोड़े के अलगाव की भी खबरें आती रहती हैं. इस मामले पर दोनों अलगअलग राय रखते हैं.

विशाल : हम कभी अलग नहीं हो सकते. हमारे अलगाव की खबरें शेखर ही फैलाता होगा.

शेखर : हम हर माह इस तरह की खबरें कम से कम एक बार सुनते हैं. देखिए, रचनात्मक क्षेत्र में अनबन होनी बहुत जरूरी है. उस से चीजें निखर कर आती हैं. वैसे मैं ने देखा है कि जब हम सफलता की ओर अग्रसर होते हैं तो लोग हमारी टांग खींचने का काम करते हैं.

आप ने पहली बार आदित्य चोपड़ा के साथ काम किया है?

विशाल : यह सच है कि बतौर निर्देशक आदित्य चोपड़ा के साथ हमारी यह पहली फिल्म है. मगर हम ‘यशराज फिल्म्स’ के साथ 7 फिल्में कर चुके हैं. हर फिल्म में उन का रचनात्मक योगदान रहता है. वे हर निर्देशक को पूरी स्वतंत्रता देते हैं. संगीत की उन्हें काफी अच्छी समझ है.

संगीत में पेरिस शहर या फ्रांस भी नजर आएगा?

विशाल : मैं ‘उड़े दिल बेफ्रिके…’ गीत की बात करूंगा. इस गाने में दर्शक औैर श्रोता को इस बात का एहसास होगा कि आज की तारीख में फ्रांस में क्या माहौल है. वहां किस तरह का पौप संगीत लोकप्रिय है. आज की तारीख में फ्रैंच संगीत पर अरबी संगीत का प्रभाव है, जिसे वहां के लोग ‘रयान’ नाम दे रहे हैं. यानी वहां ‘रयान संगीत’ का स्कूल है, तो उस का प्रभाव हमारे आज के गाने ‘उड़े दिल बेफिक्रे…’ में नजर आएगा.

इसी तरह इस फिल्म के शीर्ष गीत ‘लबों का कारोबार…’ में यूरोपियन संगीत का प्रभाव नजर आएगा. इस तरह का संगीत हौलीवुड की ‘एमली’ जैसी फिल्मों में भी सुनाई दिया होगा. इतना ही नहीं, यदि आप ध्यान देंगे तो हमारे देश की पुरानी फिल्मों के संगीत में भी यूरोपियन संगीत का प्रभाव रहा है, तो उस की झलक आप को इस में भी मिलेगी.

शेखर : इस फिल्म के लिए जिस तरह की डिजाइनिंग हुई है, वह अपनेआप में अलग है. फिल्म की साउंड डिजाइनिंग की वजह से भी यह गाना फ्रांस का एहसास देते हुए भारतीय नजर आता है. हम ने ऐसी धुन बनाई है, जिसे हर आम आदमी गा सके. आप गाने का फिल्मांकन देखेंगे, तो आप को फ्रांस नजर आएगा, पर गीतसंगीत में भारत का संगीत महसूस होगा. हम ने भारत व फ्रांस के बीच के जुड़ाव को अपने संगीत में पिरोया है.

फिल्म संगीत को ले कर लोगों की कई राय हैं. कुछ लोग मानते हैं कि गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं. जबकि कुछ का मानना है कि भारतीय दर्शक फिल्म देखते समय गाना सुनना चाहता है इसलिए फिल्म में गाने होने चाहिए. आप लोगों की राय क्या है?

विशाल : हम मानते हैं कि दोनों राय सही हैं. फिल्म के हिसाब से बात होनी चाहिए. यदि हंसी व खेलकूद वाली फिल्म चाहिए, गाना सिर्फ रिलीफ के लिए है, तो वह भी सही है लेकिन जब गाने फिल्म की पटकथा का हिस्सा बन जाते हैं, तो वह फिल्म देखने व सुनने वाले के लिए एक अनुभव बन जाती है. ऐसे में जब दर्शक को कहानी व गाने पसंद आ जाते हैं, तो वे गाने अमर हो जाते हैं, ऐसे में लोग उस फिल्म को गाने के माध्यम से याद करेंगे.

शेखर : दोनों बातें सही हैं. पर यदि गाना कहानी को आगे बढ़ाता है, तो यह सोने पे सुहागा कहा जाना चाहिए. मैं मानता हूं कि गाने हमेशा फिल्म की कहानी को आगे ले जाते हैं. गाना बिना कथा के नहीं होता. कई बार कुछ फिल्मों में गाने पृष्ठभूमि में चलते हैं, वह उस वक्त परदे पर चल रहे दृश्य या वातावरण को ही व्यक्त करते हैं.

इन दिनों कई गायक आ रहे हैं. आप को उन में से किस में ज्यादा उम्मीदें नजर आती हैं?

विशाल : आज के ये गायक काफी सक्षम हैं और काफी तैयारी कर के आ रहे हैं. ये गायक सिर्फ  फिल्म में ही नहीं बल्कि अलबम के अलावा लाइव म्यूजिकल कंसर्ट व स्टेज पर भी गा रहे हैं.

शेखर : आज के गायक अच्छे कलाकार हैं. अपना संगीत भी बनाते हैं. आज की तारीख में स्टूडियो या महज माइक के सामने अच्छा गाने वाले गायक कम हैं, अब वे गायक हैं जो कि लाइव म्यूजिक कंसर्ट में गाने के अलावा माइक के सामने भी अच्छा गाते हैं.

क्या माइक के सामने गाने वाले और लाइव कंसर्ट या स्टेज पर गाने वालों की आवाज में फर्क होता है?

विशाल : जो स्टेज पर गाता है, वह प्रभाव स्टूडियो के अंदर आना जरूरी है और जो स्टूडियो में गाते हैं, उन्हें स्टेज पर गाना आना चाहिए.

शेखर : ये एक ही काम के दो पहलू हैं.

आप टीवी के रिएलिटी शो में जज बन कर जाते हैं, जहां बच्चे प्रतियोगी होते हैं. इन बच्चों से कितना काम करवाया जाना चाहिए. इस पर विवाद होता आया है. आप की क्या राय है?

विशाल : पहली बात तो छोटी उम्र में बच्चों में मौजूद खेल भावना को समझना बहुत जरूरी होता है. दूसरी चीज संगीत के प्रति जो उन की चाहत है, उसे दबने नहीं देना चाहिए. आजकल के जो बच्चे हैं, वे शास्त्रीय संगीत के साथसाथ फिल्मों के संगीत में न सिर्फ रुचि रखते हैं, बल्कि जानकारी भी रखते हैं. हम लोग बच्चों से ज्यादा काम करवाने के बजाय इस बात पर ध्यान देते हैं कि उन के अंदर संगीत को ले कर जो रुचि है, उसे बढ़ाया जाए. हम टीवी शो में जज बन कर जाएं या स्टूडियो में बैठ कर काम कर रहे हों, तमाम मातापिता अपने बच्चों को ले कर हमारे पास आते हैं. बच्चे हमें अपने गाने सुनाते हैं. उस वक्त हमारा एक ही मकसद होता है कि हमारे सामने जो भी बच्चा आया है, उसे संगीत से जो प्यार है उस प्यार को मरने न दिया जाए. हम बच्चों को सिखाते हैं, समझाते हैं पर ऐसा करते हुए हम कईर् बार बहुत कुछ बच्चों से सीखते भी हैं.

शेखर : मैं तो इसे वर्कशौप की तरह देखता हूं. मुझे याद है, जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तो जब 9वीं पास करने के बाद 10 वीं में गए तो गरमी की छुट्टियों में हमारी स्पैशल क्लास हुआ करती थी, जिस में हमें 9वीं कक्षा में पढ़ाया गया पाठ्यक्रम फिर से दोहराया जाता था. इसी तरह जब हम बच्चों के साथ काम करते हैं, चाहे स्टूडियो के अंदर हम उन की बात सुनें या रिऐलिटी शो में जाएं, यह हमारे लिए और उस बच्चे के लिए भी वर्कशौप होता है, क्योंकि बच्चा अपने घर पर भी सालभर संगीत सीखता रहता है. तभी वह रिऐलिटी शो में आता है. मैं तो इसे एक म्यूजिक वर्कशौप की तरह लेता हूं. जहां बच्चे सीखने के साथसाथ एंजौय करते हैं.

आप ने बीच में ब्रिटिश रौकबैंड ‘द वैंप’ के  साथ जुड़ कर कुछ काम किया है?

विशाल : हमारे लिए ब्रिटिश गायक एकौन ने एक गाना ‘छम्मकछल्लो…’ गाया था. ब्रिटेन में और खासकर अमेरिका में ‘छम्मकछल्लो…’ की लोक प्रियता देख कर सारे लोग चकित हैं. यह गाना पूरे विश्व में बहुत लोकप्रिय है. देखिए, भारतीय बाजार तकरीबन 11 लाख का है तो वहां के गायकों को लगता है कि वे भारत आ कर इस बाजार पर अपना आधिपत्य बना लें. ये लोग भारतीय बाजार में अपने लिए जगह तलाशने के लिए प्रयासरत हैं. इसी के चलते हमारे एक दोस्त तनुज माथुर ने एक नई कंपनी ‘बौटम लाइन मीडिया’ खोली है. उन्होंने ही हम से कहा कि हम ब्रिटिश बैंड ‘द वैंप’ के साथ काम करें. हम ने जब पता किया तो पता चला कि इस बैड में 20 साल के 4 बच्चे हैं जो काफी लोकप्रिय हैं. इन्होंने लंदन के एक बहुत बड़े स्टेडियम में लगातार 3 दिन संगीत का कार्यक्रम किया और स्टेडियम हाउसफुल रहा. हम लोगों ने उन के साथ सामंजस्य बैठाया है. हम ने धुनें बनाई हैं. कुछ गीत उन्होंने गाए हैं. कुछ हम ने गाए हैं. हम ने एक गाना ‘बेलिया…’ रिलीज कर दिया है जो काफी लोकप्रिय हो गया है.

शेखर : 23 देशों में ‘बेलिया’ गीत लोकप्रिय हो गया है. यह गाना अभी तक सिर्फ भारत में रिलीज हुआ है, इसलिए विश्व के लोग इसे डाउनलोड नहीं कर सकते.

आप विदेशों में म्यूजिक कंसर्ट करते हैं, क्या अनुभव होते हैं?

विशाल : हम जहां भी म्यूजिक के कंसर्ट करने जाते हैं, वहां बौलीवुड का उत्सव मनाया जाता है. हमारे शो में वहां के लोग आते हैं, तो लगता है कि कोई बहुत बड़ा उत्सव मनाया जा रहा है. वे नाचते हैं, गाते है, एंजौय करते हैं. वे हमारे साथ सैलिब्रेट करते हैं.

शेखर : हमारे शो में अमेरिकन, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान सभी देशों के लोग आते हैं, मार्च माह में हम ने अमेरिका और ब्रिटेन में 12 शो किए. सभी हाउसफुल रहे. आज की तारीख में बौलीवुड का संगीत इतना लोकप्रिय है कि पूरे विश्व में हमारे लिए दरवाजे खुले हैं. पिछले दिनों अमेरिकी सैलिब्रिटी हमारा शो प्रस्तुत करने आए थे.

मिस्त्री से छिनी टीसीएस की कुर्सी

टाटा समूह की कंपनी टीसीएस के शेयरधारकों ने मंगलवार को अपने निदेशक मंडल से साइरस मिस्त्री को हटाने के बारे में लाए गए प्रस्ताव पर मतदान कर दिया. सायरस मिस्त्री की कंपनी के निदेशक पद से हटा दिया गया है. टीसीएस के 93.11 प्रतिशत शेयरधारकों ने सायरस मिस्त्री को डायरेक्टर पद से हटाने के पक्ष में वोट किया. उन्हें समर्थन में 6.89 प्रतिशत मत ही हासिल हुए.

मिस्त्री को कंपनी के चेयरमैन पद से पहले ही हटाया जा चुका है. उन्हें कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए कंपनी की असाधारण आम बैठक (ईजीएम) में यह वोटिंग की गई थी.

इस अवसर पर मिस्त्री ने कहा कि उनकी लड़ाई पद के लिए नहीं है, बल्कि वह देश के सबसे बड़े समूह की आत्मा को बचाने के लिए लड़ रहे हैं. इस बैठक में साइरस मिस्त्री मौजूद नहीं थे. हालांकि रतन टाटा इस बैठक में मौजूद थे. उनके अलावा अंतरिम चेयरमैन इशात हुसैन भी मीटिंग में थे. हालांकि, उन्होंने इस मीटिंग की अध्यक्षता नहीं की.

सर्दियों में अस्थमा रोक न दे जिंदगी

15 साल की अनुरिमा अस्थमा की शिकार है. बचपन से ही उसे अस्थमा के अटैक आते रहे जो बढ़ती उम्र के साथ कम होने के बजाय बढ़ते गए. इस के लिए उसे नियमित दवा का सहारा लेना पड़ता है. सर्दी के दिनों में यह बीमारी बढ़ जाती है, क्योंकि सर्र्द हवा और ठंड की वजह से श्वास नली में बलगम जल्दी जमा हो जाता है जो श्वास नली को अवरुद्ध कर देता है. इस से मरीज को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है. फलस्वरूप सांस फूलने लगती है. कुछ लोगों में यह बीमारी ठंड से एलर्जी होने की वजह से भी बढ़ जाती है. नियमित सावधानी से इस रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है. यह बीमारी आजकल बच्चों से ले कर वयस्कों तक लगभग सभी को है. इस बीमारी के बढ़ने की वजहें प्रदूषण, अनियमित खानपान, तनाव का बढ़ना, किसी चीज से एलर्जी का होना व नींद पूरी न होना आदि हैं.

मुंबई की एस आर वी हौस्पिटल की चैस्ट फिजीशियन डा. इंदू बूबना बताती हैं कि तनाव और धूम्रपान अस्थमा के मुख्य कारक हैं. इन से सब से अधिक अस्थमा बढ़ता है. इस के अलावा नींद की कमी, प्रदूषण भी इस के जिम्मेदार हैं. सही जीवनशैली से इसे कम किया जा सकता है. मेरे पास कई मरीज ऐसे आते हैं जो अस्थमा का नाम सुन कर ही घबरा जाते हैं. जबकि यह बीमारी जानलेवा नहीं है. सही इलाज से इस का निदान संभव है. इस के अलावा कुछ सावधानियां सर्दी के मौसम में अस्थमा के रोगी को अवश्य रखनी चाहिए.

–       घर को साफसुथरा रखें. ध्यान रहे वैंटिलेशन की सुविधा बेहतर हो.

–       खाना खाते वक्त अपने हाथों को सैनिटाइजर से धोएं ताकि वायरस आप से दूर रहें.

–       मुंह के बजाय सांस हमेशा नाक से लें. इस से हवा गरम हो कर आप के सीने तक पहुंचती है, जिस से ठंड कम लगती है.

–       फ्लू के वैक्सीन अवश्य लगवाएं. इस से व्यक्ति 70 प्रतिशत ठंड की एलर्जी से बच सकता है.

–       घर में अगर रूमहीटर का प्रयोग करते हैं तो उस के फिल्टर की सफाई अवश्य करें.

–       घर के पेट्स, टैडी बियर, फर वाले सभी खिलौने, प्लांट्स आदि को बिस्तर से दूर रखें.

–       पुराने सामान को घर में न रखें, डस्ंिटग के वक्त धूल न उड़ाएं, गीले कपड़े से घर की सफाई करें.

–       बिस्तर की चादर को फोल्ड कर वाश्ंिग मशीन में डालें, जहां तक संभव हो धूल को उड़ने न दें.

–       ठंड से बचने के लिए अधिकतर लोग आग या रूमहीटर के पास बैठते हैं जो ठीक नहीं, ऊनी कपड़े अधिक गरम होने पर उस के रेशे जल जाते हैं और इस से निकलने वाला धुआं अस्थमा के रोगियों के लिए खतरनाक होता है, जिसे व्यक्ति गौर नहीं करता, इसलिए रूमहीटर से घर को गरम करें, पर स्वयं से दूरी बनाए रखें, साथ ही घर में नमी को भी बनाए रखें.

–       सर्दी में भी व्यायाम अवश्य करें, लेकिन पहले अपनेआप को वार्मअप करना न भूलें.

–       ठंड में खाने में तरल पदार्थ का सेवन अधिक करें, घर पर बना हुआ, कम वसायुक्त खाना खाएं. खाने में ताजे फल, सब्जियां अधिक लें. खट्टे पदार्थ या नीबू खाने से कभी किसी का अस्थमा नहीं बढ़ता, जिन को एलर्जी है वे न खाएं.

–       कपड़े हमेशा साफसुथरे और धुले हुए ही पहनें. पहले सूती कपड़े पहनें, उन के ऊपर ऊनी कपड़े पहनें.

–       दवा का सेवन नियमित करें. स्प्रे, इनहेलर को जरूरत के अनुसार लें.

–       छोटे बच्चे अगर अस्थमा के शिकार हैं तो जाड़े में उन्हें पोषक तत्त्वों से भरपूर भोजन दें.

डा. इंदू आगे कहती हैं कि अस्थमा के रोगी बढ़ रहे हैं लेकिन लोगों में जागरूकता पहले से अधिक है. लोग सही समय पर इलाज करा कर स्वस्थ भी हो रहे हैं इसलिए इस बीमारी में पहले से कुछ कमी भी आई है. मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो इस बीमारी को टालने के मूड में होते हैं. उन्हें समझाने के लिए काउंसलिंग करनी पड़ती है. उन्हें लगता है कि अस्थमा, बाद में टीबी का रूप ले लेगा जबकि ऐसा होता नहीं है. अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में काफी अंतर है. अस्थमा अधिकतर एलर्जी से होता है जबकि ब्रोंकाइटिस धूम्रपान करने की वजह से अधिक होता है. सही मात्रा में दवाएं लेना ही इस का इलाज है.

बढ़ते प्रदूषण में रखें खयाल

बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण में अपने शरीर का खयाल रखना बहुत जरूरी है. खासकर अस्थमा के मरीजों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है. कुछ सावधानी बरतने से आप घर में इस के खतरनाक प्रभावों को कम कर सकते हैं. एनडीएमसी की रिटायर्ड डायरैक्टर डा. अल्का सक्सेना कहती हैं कि प्रदूषित हवा से बचने के लिए काफी छोटीछोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जैसे घर की साफसफाई समय से करें, सोने से पहले स्टीम लें ताकि दिनभर की गंदगी फेफड़ों से निकल जाए, बाहर के खाने से पूरी तरह से दूर रहें, घर पर बनी चीजें ज्यादा से ज्यादा खाएं. इन सब चीजों से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकेंगे और बीमारियों से दूर रहेंगे.

कैसे बचें

–       घर से मास्क लगा कर ही निकलें.

–       सुबह के वक्त काफी स्मौग रहता है. इस की वजह अकसर रात के वातावरण में जमा धुएं का न छंट पाना होता है जो सुबह की धुंध में मिल कर स्मौग बना देता है. सर्दी में ऐसा अकसर होता है, इसलिए बेहतर होगा भोर के बजाय धूप निकलने के बाद सैर के लिए वाक पर जाएं.

–       सर्दी में जहां वायु प्रदूषण ज्यादा रहता है वहीं लोग पानी भी कम पीते हैं. यह खतरनाक साबित होता है. दिन में तकरीबन 4 लिटर तक पानी जरूर पिएं.

–       घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं. इस से शरीर में औक्सीजन की आपूर्ति सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैस अगर रक्त तक पहुंच भी जाएगी तो वह कम नुकसान पहुंचा पाएंगी.

–       नाक के भीतर के बाल हवा में मौजूद बड़े धूल कणों को शरीर के भीतर जाने से रोक लेते हैं.

–       अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं नियमित तौर से लें. कहीं बाहर जाने पर दवा या इनहेलर साथ ले जाएं और डोज मिस न होने दें. ऐसा होने पर अस्थमा के अटैक का खतरा रहता है.

–       साइकिल से चलने वाले लोग भी मास्क लगाएं. चूंकि वे हैल्मेट नहीं लगाते, इसलिए उन के फेफड़ों तक बुरी हवा आसानी से पहुंच जाती है.

घर का प्रदूषण

–       किचन में लगे एग्जौस्ट फैन को देखें. अगर उस पर ज्यादा कालिख जम रही है तो समझ जाएं कि किचन में हवा नुकसानदायक स्तर तक बढ़ चुकी है.

–       एयरकंडीशनर का फिल्टर और पीछे की तरफ की वैंट में अगर ज्यादा धूल या कालिख जमा हो रही है तो यह इस बात की ओर इशारा है कि घर बुरी हवा के निशाने पर है.

–       व्यस्त हाइवे या सड़कों के किनारे बने मकान, कारखानों के करीब बने मकानों में स्वाभाविक तरीके से धूल और मिट्टी के साथ कार्बन पार्टिकल पहुंच जाते हैं.

क्या करें

किचन में इलैक्ट्रौनिक चिमनी लगवाएं और बेहतर वैंटिलेशन रखें ताकि खाना बनाते वक्त धुआं घर में न फैले. अगर घर के आसपास व्यस्त रोड या कारखाने हों तो खिड़कीदरवाजों को हैवी ट्रैफिक के समय बंद रखें. इस से भले ही पूरा बचाव न हो लेकिन धूलमिट्टी कम से कम घर में घुस पाएगी.

स्मौग है खतरनाक

स्मौग शब्द स्मोक और फौग से मिल कर बना है. जब वातावरण में मौजूद धुआं फौग के साथ मिल जाता है तब स्मौग कहलाता है. गरमी में वातावरण में पहुंचने वाला स्मोक ऊपर की ओर उठ जाता है. जबकि ठंड में ऐसा नहीं हो पाता और धुएं व धुंध का एक जहरीला मिश्रण तैयार हो कर सांसों में पहुंचने लगता है. स्मौग कई मानों में स्मोक और फौग दोनों से ज्यादा खतरनाक होता है.

हवा में मौजूद 8 खलनायक

1.  पीएम 10 : पीएम का मतलब होता है पार्टिकल मैटर. इन में शामिल हैं हवा में मौजूद धूल, धुआं, नमी, गंदगी आदि, जैसे 10 माइक्रोमीटर तक के पार्टिकल. इन से होने वाला नुकसान ज्यादा परेशान करने वाला नहीं होता.

2.  पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर तक के ये पार्टिकल साइज में बड़े होने की वजह से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं.

3.  एनओ2 : यह नाइट्रोजनऔक्साइड है. यह वाहनों से निकलने वाले धुएं में पाई जाती है.

4.  एसओ2 : सल्फरडाईऔक्साइड गाडि़यों और कारखानों से निकलने वाले धुएं से निकल कर यह फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाती है.

5. सीओ : यह कार्बनमोनोऔक्साइड है. गाडि़यों से निकल कर यह फेफड़ों को घातक नुकसान पहुंचाती है.

6. ओ3  : इसे ओजोन कहते हैं. दमे के मरीजों के लिए बहुत नुकसानदेह होता है.

7. एनएच3 : यह अमोनिया है. फेफड़ों और पूरे श्वसन तंत्र के लिए यह खतरनाक होता है.

8.  पीबी : लेड, गाडि़यों से निकलने वाले धुएं के अलावा मैटल इंडस्ट्री से भी निकल कर यह लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला सब से खतरनाक मैटल हैं.

सास की हिटलरशाही

राधिका की दादी तारा बाकी दादियों से एकदम अलग हैं. क्रूर, त्योरियां चढ़ी, हर वक्त नाक पर गुस्सा, बातबात पर चिल्लाना उन की आदत है. करीब 75 साल की तारा सरकारी स्कूल से रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं. उम्र के इस पड़ाव में वे आज भी फिट हैं. सुबहशाम अकेले टहलने निकल जाती हैं. आमतौर पर तारा अकेले रहना ही पसंद करती हैं. बेटियां उन के साथ वक्त बिताना पसंद नहीं करती हैं. उन के बेटेबहू और पोतेपोतियां तो उन से ग्यारह इंच की दूरी पर रहते हैं. भरापूरा परिवार होने के बावजूद वे अकेली हैं. पति काफी समय पहले ही गुजर चुके हैं. खैर, उन के साथ भी तारा के कुछ खास अच्छे ताल्लुकात नहीं थे. इन सब के अलावा पड़ोसी भी उन से कम ही बतियाते हैं. पड़ोसी उन के घर के बाकी सदस्यों से बात करना पसंद करते हैं लेकिन तारा से बात करने में हर कोई असहज रहता है. ऐसा नहीं है कि तारा से इलाके के सारे लोग डरते हैं.

दरअसल, लोगों के इस रवैये के पीछे वजह है तारा का अजीबोगरीब रूखा स्वभाव. वे स्वभाव से बहुत चिड़चिड़ी हैं. बातबात पर उन्हें गुस्सा आ जाता है. गुस्से में वे क्या कह दें, वे खुद भी नहीं जानतीं. इसी आदत की वजह से उन्हें कोई पसंद नहीं करता. 

तारा तो महज एक उदाहरण हैं. ऐसे कई घर हैं जहां दादीनानी बन चुकी सास आज भी हिटलर बन कर बैठी हैं. स्वभाव में रूखापन लिए असंवेदनशील बातें करने वाली सास आप को काफी घरों में देखने को मिल जाएंगी.

सब कुछ छिन जाने का डर

बेटों की शादी के बाद काफी महिलाओं के स्वभाव में परिवर्तन आ जाता है. बहू के आने के बाद उन्हें अपनी सत्ता छिनती दिखती है जिस के चलते उन का बरताव अजीब सा हो जाता है. पलपल उन को डर सताने लगता है कि कहीं बहू घर में कब्जा न जमा ले? कहीं वह उन के बेटे को न बहका दे? कहीं बेटा हम से अलग न हो जाए? अगर बेटाबहू साथ खुश हैं तो ऐसे में उन्हें तनाव घेर लेता है कि आखिर वे खुश क्यों हैं? वे कहां जा रहे हैं? अगर वे अकेले कहीं बाहर जा रहे हैं तो सास को दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं. वे बातबात पर गुस्सा करने लगती हैं. बेटे को काबू में करने के लिए मर जाने और घर छोड़ जाने तक की धमकी दे डालती हैं जिस से घर में हर वक्त तनाव का माहौल बना रहता है और इसी वजह से पतिपत्नी के बीच आएदिन कलह होती है.

बेटियां भी काट लेती हैं कन्नी

बातबात पर टोकना किसी को पसंद नहीं होता, चाहे वह बेटी हो या फिर बहू. मां के सिरफिरेपन के चलते बेटियां भी मायके आना नहीं चाहतीं क्योंकि बेटियां भी मां की आदत से अच्छी तरह से अवगत होती हैं. ऐसी महिलाएं न सिर्फ अकेले रह जाती हैं, बल्कि बुढ़ापे में जब उन्हें सहारे की जरूरत पड़ती है तब वही बहुएं काम आती हैं, जिन को कभी उन्होंने ताने मारे थे और बहू के बेटे के साथ वक्त बिताने के नाम पर वे विचलित हो जाती थीं.

ऐसी महिलाओं की कोशिश रहती है कि वे सब से पहले पति और बेटे को काबू में करें. बेटे को पट्टी पढ़ाने की फिराक में रहती हैं जिस के चलते बेटा भी मां का अंधभक्त बन जाता है. इस सब के बीच बहू भी छटपटा उठती है. अगर बातबात पर झगड़े होने लगें तो बात बिगड़ते देर नहीं लगती. ऐसी सास न तो घर में कभी शांति रखती है और न ही बेटेबहू का घर चलने देती है. छोटीछोटी बातों का बतंगड़ बनाने, बेटेबहू के बीच झगड़ा करवाने और घर में अशांति पैदा करने में वह माहिर होती है. घर को शतरंज की बिसात पर चलाना ऐसी महिलाएं बखूबी जानती हैं.

क्या करें, जब सास हो ऐसी

हर किसी के हालात अलगअलग हैं और हालात के हिसाब से ही फैसले लिए जा सकते हैं. अगर घर का कोई बड़ा ऐसा है जो आप के रिश्ते को खराब करे या फिर बातबात पर ताना दे तो कोशिश करें कि मामले को प्यार से सुलझाएं. उन्हें समझाएं कि आप के इस व्यवहार के चलते घर के सदस्यों को परेशानी हो रही है. उन के रिश्तों पर आप के स्वभाव का असर पड़ा है. अगर बात समझ में आ जाए तो इस से बेहतर कुछ और नहीं हो सकता. लेकिन फिर भी अगर सामने वाला लड़ रहा है या तनाव पैदा कर रहा है तो आप शांत रहें. आप न उलझें क्योंकि अगर आप उलझे तो उस का असर धीरेधीरे आप पर भी पड़ता हुआ दिखाई देने लगेगा. अगर बात आप के काबू से बाहर चली जाए तो अच्छा होगा ऐसे शख्स से दूरी बना ली जाए.

अकसर देखा गया है कि जिन बहुओं या बेटियों को अपशब्द कहे जाते हैं, बातबात पर अपमानित किया जाता है आखिरी पड़ाव में वही बेटे और बहुएं काम आते हैं. कोशिश करें सामने वाले के स्वभाव को बदलने की. यह जानने की कोशिश करें कि आखिर क्या वजह है उन की बेरुखी की. हर कोई एकजैसा हो, यह भी तो संभव नहीं न. बात को टालमटोल कर जानें कि क्यों इतना तनाव है उन के मस्तिष्क में. हो सके तो मनोचिकित्सक के पास ले जाएं.

कुछ मामलों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर मामलों में सिर्फ अकड़ ही सामने आती है. सामने वाला उम्र में बड़ा है, लिहाजा वह अपनी ही चलाना चाहता है, चाहे वह सही हो या फिर गलत. हर मामले में वह खुद को सही साबित करने की जुगत में लगा रहता है. अपनी खुशी और स्वार्थ के चलते उन्हें गलत भी अगर सही लगे तो उस काम को वह 100 फीसदी पूरा करता है. लेकिन अगर उस के किसी छोटे से काम से भी किसी को खुशी मिल जाए तो उस काम से वह दूरी बना लेता है. सो, हिटलरटाइप सासों को सोचना चाहिए कि भले ही आज वे अपने हिटलरशाही व्यवहार से खुश हैं, बहू और बाकी घर वालों को अपने हिसाब से चला लें लेकिन आगे चल कर उन का यह रवैया न केवल उन्हें सब से अलगथलग कर देगा बल्कि उन की छवि को भी खराब करेगा.

डिविलियर्स ने छोड़ी कप्तानी, फॉफ ने संभाली जिम्मेदारी

पिछले कुछ समय से कोहनी की चोट से जूझ रहे दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने तुरंत प्रभाव से दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है. डिविलियर्स ने उनकी अनुपस्थिति में कप्तानी का जिम्मा संभाल रहे फॉफ डु प्लेसिस को स्थायी रूप से कप्तान नियुक्त करने का समर्थन किया है. क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) ने भी डुप्लेसिस को कप्तान नियुक्त करने की पुष्टि कर दी है.

डिविलियर्स ने कहा, ‘व्यक्तिगत हितों से टीम हित हमेशा ऊपर रखे जाने चाहिए. मेरे लिए टेस्ट टीम की कप्तानी करना बड़ा सम्मान था लेकिन मैं दो सीरीज में नहीं खेल पाया और मेरा श्रीलंका के खिलाफ आगामी सीरीज में भी खेलना संदिग्ध है.’

उन्होंने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया में टीम के बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए यह टीम हित में है कि फॉफ डु प्लेसिस को स्थायी तौर पर कप्तान नियुक्त किये जाने की पुष्टि की जानी चाहिए.’

32 वर्षीय डिविलियर्स को इस साल जनवरी में हाशिम अमला के पद छोड़ने के बाद कप्तान बनाया गया था. उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में टीम की अगुवाई की लेकिन इसके बाद चोट के कारण वह न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नहीं खेल पाये. उनकी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका ने एक टेस्ट जीता और एक में उसे हार मिली.

डिविलियर्स ने कहा, ‘मैं फॉफ को लगभग 20 वर्षों से जानता हूं जब हम एक ही स्कूल की टीम में खेला करते थे और उन्हें सभी का स्पष्ट समर्थन मिलेगा.’ इस बीच सीएसए की मेडिकल टीम ने डिविलियर्स को टी20 फ्रेंचाइजी प्रतियोगिता के फाइनल में नहीं खेलने की सलाह दी है.

दक्षिण अफ्रीकी टीम के मैनेजर मोहम्मद मूसाजी ने कहा, ‘एबी की बायीं कोहनी में अब काफी सुधार है लेकिन अभी वह पूरी तरह से फिट नहीं हैं. उन्हें ठीक होने में कम से कम तीन चार सप्ताह और लगेंगे.’

इसका मतलब है कि डिविलियर्स श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में भी नहीं खेल पाएंगे. इस बीच डुप्लेसिस की गेंद से छेड़छाड़ के लिये दी गयी सजा के खिलाफ अपील पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद 19 दिसंबर को सुनवाई करेगी.

आईसीसी पैनल ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होबार्ट में दूसरे टेस्ट मैच की फुटेज के आधार पर डुप्लेसिस को गेंद से छेड़छाड़ करने का दोषी पाया था. उस समय उनके मुंह में मिंट थी और उन्हें गेंद पर अपनी लार लगाते हुए देखा गया था.

महज एक फीसदी लोगों के पास जमा है देश का 60 फीसदी धन

भारतीय अर्थव्यवस्था को ले कर इन दिनों तरहतरह के अध्ययन किए जा रहे हैं. विश्व की बड़ी रेटिंग एजेंसियां तथा आर्थिक सर्वेक्षण कराने वाली संस्थाएं यह अनुमान लगाना चाहती हैं कि भारत में नोटबंदी का असर अर्थव्यवस्था पर किस तरह से होगा. उसी क्रम में वैश्विक स्तर पर संपत्ति संबंधी सर्वेक्षण कराने वाली ज्यूरिख की वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनी क्रैडिट सुइस गु्रप एजी ने हाल ही में जारी एक सर्वेक्षण में कहा है कि भारत में एक प्रतिशत धनी लोगों के पास देश की 58.4 फीसदी संपत्ति है.

इस संस्था ने कहा है कि भारत में एक फीसदी धनाढ्य लोगों के पास 2014 को 49 प्रतिशत की तुलना में उन की संपत्ति इस बार 58.1 प्रतिशत पहुंच गई है. मतलब कि शेष भारतीयों के पास 41.6 प्रतिशत संपत्ति है. बड़ी आबादी को इस पर ही गुजारा करना है जबकि महज एक फीसदी आबादी के पास देश की 99 फीसदी आबादी से भी ज्यादा संपत्ति है. 2001 की तुलना में 2016 में इस आबादी की हिस्सेदारी अत्यधिक बढ़ी है. मतलब कि 16 साल पहले उन की धन संपत्ति की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत के आसपास थी लेकिन आज इस में 20प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दुनिया के अन्य देशों में भी गरीब तथा अमीर हैं लेकिन जो खाई भारत के गरीबों तथा अमीरों के बीच है वह शायद किसी अन्य विकासशील देश में देखने को नहीं मिलती है. इस का प्रमाण यह सर्वेक्षण है. इस से स्पष्ट है कि देश की एक फीसदी आबादी किस तरह से 99 प्रतिशत लोगों पर भारी पड़ रही है. देश में असंख्य लोग हैं, जो रात को भूखे ही सोते हैं और रातें खुले आसमान के नीचे बिताते हैं. उन की स्थिति में सुधार का प्रयास नहीं हो रहा है, जबकि अमीर लगातार देश की संपत्ति को हर रहा है.                       

 

मैं 17 साल की लड़की हूं. एक लड़के से प्यार करती हूं. मैं उस के परिवार को कैसे मनाऊं.

सवाल

मैं 17 साल की लड़की हूं. एक लड़के से 4 सालों से प्यार कर रही हूं. कुछ दिनों पहले लड़के के घर वालों को हमारे रिश्ते के बारे में पता चल गया. उन्होंने लड़के को बहुत डांटाफटकारा है. उन का कहना है कि उन के घर में आज तक किसी की लव मैरिज नहीं हुई. शादी ब्याह घर के बड़े तय करते हैं और फिर हम दोनों की जाति भी अलग अलग है. इसलिए शादी का तो सवाल ही नहीं उठता. लड़के के पिता ने उस से कहा है कि यदि उस ने मुझ से बात की तो वे उसे घर से निकाल देंगे या कहीं दूर किसी रिश्तेदार के पास भेज देंगे. लड़का अब मुझ से बात नहीं कर रहा. मैं उसे और उस के परिवार को कैसे मनाऊं?

जवाब

आप बहुत छोटी हैं और 12-13 वर्ष की उम्र जब से आप कहती हैं कि आप का प्रेम संबंध चल रहा है बच्चे प्यार शब्द के माने भी नहीं जानते. आप जिसे प्यार समझ रही हैं वह महज यौनाकर्षण है, जो किशोरावस्था में विपरीत सैक्स में होता है. अत: अपनी पढ़ाई या कैरियर पर ध्यान दें और इस संबंध को यहीं विराम दें. घर वालों को नाराज कर के अपने और लड़के के लिए समस्याएं पैदा न करें.

 

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मैंने कई बार सैक्स किया है, जिस से यौनांग ढीला हो गया है. इसे टाइट करने का घरेलू उपचार बताएं.

सवाल

मैं 21 वर्षीय युवती हूं. 2 महीनों के बाद मेरी शादी है. मैं अपनी एक बहुत बड़ी समस्या की वजह से बेहद परेशान हूं. शादी के लिए कोई उत्साह नहीं है. शादी के लिए इनकार नहीं कर सकती, क्योंकि घर वालों को दुखी नहीं करना चाहती. दरअसल, मैं ने अपने बौयफ्रैंड के साथ कई बार सैक्स किया है, जिस से मेरा यौनांग ढीला हो गया है. कोई घरेलू उपचार बताएं जिस से इसे कुछ टाइट किया जा सके?

जवाब

आप की जल्दी शादी होने वाली है, इसलिए अतीत की बातों को अपने मन से निकाल दें. आप के यौनांग में कोई विकार नहीं हुआ है, इसलिए किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न पालें. आप ने कभी किसी से संबंध बनाए थे, इस बात का जिक्र किसी से न करें. यह समय व्यर्थ की बातें सोच कर परेशान होने का नहीं है वरन सुखद भविष्य की कल्पना करने का है.

 

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