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ई-वालेट पर साइबर हमले का डर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक नोटबंदी का जो फैसला देश पर थोपा, उस से आम आदमी पर क्या फर्क पड़ा, उस ने क्या क्या झेला किसी से छुपा नहीं है. दुख की बात तो यह है कि करीब सवा सौ लोगों की मौत और इतनी परेशानियां झेलने के बाद भी यह अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो पाया. अलबत्ता नरेंद्र मोदी की हठधर्मिता जरूर पूरी हो गई.

बात यहीं तक सीमित होती तब भी  ठीक था, लेकिन भगवा ब्रिगेड के कंधों पर खड़े नरेंद्र मोदी ने अब नई जिद पकड़ ली है, देश को कैशलेस बनाने की, जो इतना आसान नहीं है. आश्चर्य की बात तो यह है कि बिना संपूर्ण संसाधनों के नरेंद्र मोदी देश को उस रास्ते पर ले जाना चाहते हैं, जिस में खतरे ही खतरे हैं. जबकि यह तभी संभव हो सकता है, जब पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा सरकार आईटी कंपनियों और बैंक के उच्चाधिकारियों के साथ बैठ कर रणनीति तैयार करे.

इस वक्त देश में कुल जमा 2.05 लाख एटीएम मशीनें हैं और 14.5 लाख पीओएस (पौइंट औफ सेल) मशीनें. जबकि डेबिट कार्डों की संख्या 69.17 करोड़ है और क्रेडिट कार्ड धारक 2.5 करोड़ हैं. अनुपात के हिसाब से एटीएम और पीओएस दोनों ही कम हैं. इस मामले में देहात क्षेत्रों और कस्बों की स्थिति तो और भी गंभीर है.

कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए डेबिट और क्रेडिट कार्डों के बाद नंबर आता है इंटरनेट और इंटरनेट युक्त मोबाइल यूजर्स का. ई-बैंकिंग की बात करें तो 132 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में 33 करोड़ इंटरनेट यूजर्स और 1.02 अरब मोबाइल यूजर्स हैं. इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल यूजर्स होने के बावजूद केवल 33 प्रतिशत यूजर्स ही मोबाइल में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इन में भी बैंकिंग करने वाले कम ही हैं. ऐसे में इंटरनेट बैंकिंग कैसे संभव है?

आंकड़ों पर ध्यान दें तो पिछले 5 सालों में 3 गुना साइबर अपराध बढ़े हैं. गुजरे 3 साल में 96 हजार से ज्यादा वेबसाइटें हैक की गई हैं. इन में 63 प्रतिशत कंपनियों की साइटों को हैक कर के हैकरों ने भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया. 4 मई, 2016 को सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 2016 की पहली तिमाही में 8,056 वेबसाइट्स हैक की गईं, यानी हर दिन करीब 90 वेबसाइट्स. बताते चलें कि साइबर क्रिमिनल्स की सब से ज्यादा नजर वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र पर रहती है.

इस समय सुरक्षा एजेंसियां 32.14 लाख से अधिक डेबिट और क्रेडिट कार्डों से संबंधित बैंकिंग सुरक्षा में लगाई गई सेंध की जांच कर रही हैं. इन में से कुछ कार्डों में साइबर मालवेयर हमले से तो कुछ में हैकिंग से सेंध लगाई गई. इस में एटीएम का क्लोन बनने के लिए कार्डधारक से कोई जानकारी लेने की जरूरत नहीं होती. नेशनल पेमेंट कारपोरेशन औफ इंडिया के अनुसार चोरी के डेबिट कार्ड डेटा से क्लोन बना कर 19बैंकों एसबीआई, एचडीएफसी, एक्सिस और यस बैंक के 641 ग्राहकों को लगभग 1.3 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया.

परेशानी की बात यह है कि साइबर अपराधियों ने इस काम को अमेरिका, ब्राजील, तुर्की, चीन,पाकिस्तान, बांग्लादेश, अल्जीरिया और संयुक्त अरब अमीरात में बैठ कर अंजाम दिया, जहां कुछ नहीं किया जा सकता. कहीं दूर देश में बैठा व्यक्ति डाटा चुरा कर आप के कार्ड का क्लोन बना लें और आप का खाता साफ कर दे तो आप क्या कर सकते हैं? रिपोर्ट लिखाई भी तो पुलिस क्या कर लेगी?

मोदी सरकार नकद लेनदेन से इसलिए भी बचना चाहती है, क्योंकि हर साल नोट छापने और उसे मार्केट तक पहुंचाने में 21 हजार करोड़ रुपए का खर्चा आता है. जुलाई 2015 से जून 2016 तक रिजर्व बैंक ने 21.2 अरब नोटों की सप्लाई की, जिन्हें तैयार करने में 3,421 करोड़ रुपया खर्च आया. 2000 और 500 के नए नोटों की छपाई और ट्रांसपोर्ट पर भी 15,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. जाहिर है, ई-बैंकिंग से यह खर्चा भी कम होगा और सरकार को हर ट्रांजैक्शन पर टैक्स भी मिलेगा. इस सब से आम आदमी भले ही घाटे में रहे पर मोबाइल पर नेट की सुविधा देने वाली पेटीएम, पे-पल, ई-कैश, एम पैसा, गूगल वालेट,मोबीक्विक और फ्रीचार्ज जैसी कंपनियों को मोटा मुनाफा होगा.

आप को लाभ यही होगा कि पैसे के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. हां, साइबर अपराधियों का खतरा जरूर बना रहेगा. कहने का अभिप्राय यह है कि ई-वालेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. यह तभी सुरक्षित हो सकता है जब सरकार साइबर अपराधियों को रोकने के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर के साइबर विशेषज्ञों की टीमों की नियुक्ति करे. 

जीवन में गंभीरता भी जरूरी

देश की समस्याओं का अब एक बड़ा कारण लोगों का भावनाओं में बह जाना और समस्याओं को मजाक में उड़ा देना है. एक तरफ धार्मिक धुआंधार प्रचार और दूसरी तरफ मोबाइल की चुहलबाजी ने मानसिकता को कुंद कर दिया है और लोगों का सोचविचार इतना कम हो गया है कि नोटबंदी जैसे मामले पर भी सोशल मीडिया में मजाक ज्यादा चले, इस प्रहार की मार का दर्द कम उजागर हुआ. जीवन एक संघर्ष है. न फसल मजाक से पैदा होती है, न मकान हंसी और चुटकुलों से बनते हैं, न ही बच्चे प्रवचनों से पैदा होते हैं और न भाषणों से बड़े होते हैं. जीवन में गंभीरता की जरूरत होती है और जिस समाज ने यह गंभीरता खो दी, मूर्खता में या दंभ में वह मरेगा ही. पंजाब एक समय देश का सब से उन्नत राज्य था पर दंभ, धर्म, शराब, नशे और मजाक ने उसे आज इस तरह गर्त में डाल दिया कि ‘उड़ता पंजाब’ जैसी फिल्म बन सके.

आप जीवन में कितनी गंभीर हैं, क्या पूछा खुद से? कितना समय मोबाइलों पर चुटकुले फौरवर्ड करने या किट्टी पार्टियों में निरर्थक तंबोलों में खर्च करती हैं या कितना समय समस्याओं को जानने और पहचानने की कला को विकसित करने में लगाती हैं? हमारे यहां पढ़ीलिखी, शिक्षित अध्यापिकाएं भी न विचारकों की बातें करती हैं न किताबें पढ़ती हैं और न कुछ लिखती हैं. उन का समय शौपिंग में, टीवी या रिपीट होती फिल्में देखने में, फोन पर गप्पें मारने या कान में इयरफोन ठूंस कर पुराने गाने बारबार सुनने में व्यर्थ हो रहा है.

जब कोई समस्या आती है तो हाथपैर फूल जाते हैं, क्योंकि जिस से सलाह मांगो वह मुंह छिपा लेता है. किसी को कुछ समझ हो तो बताए न? समझ तो तब आएगी जब दूसरों की, देश की, समाज की, विश्व की, भूगोल की, पर्यावरण की समस्या पर ध्यान दिया हो. गंभीर चर्चाएं करने वालों को अमेरिका जैसे देश में भी ‘नर्ड’ कह कर अपमानित किया जाता है. यह समाज मूर्खों का समूह बन रहा है, जिस में क्रिकेटरों और फिल्मी सितारों के जीवन के हर पल की चिंता है पर अपनी आने वाली आफत की नहीं. गंभीर जने को यहां एकाकीपन की कैद में डाला जा रहा है. उसे किसी भी ग्र्रुप में ऐरोगैंट एजुकेटेड कह कर अलगथलग कर दिया जाता है. बहाव के विरुद्ध सोचने वाले को अजूबा मान लिया जाता है. उसे बदलने का संकल्प करें ताकि जीवन सुधरे.

हिंदी को कम न आंकें

‘हिंदी की राह आसान नहीं.’ इस जुमले में उतना ही दम है जितना हिंदी भाषी छात्रों की पीड़ा में और यह पीड़ा तब और गहरी हो जाती है जब हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इन कैंपस या आउट कैंपस में बहनजी या भाईजी कह कर बुलाया जाता है. हिंदी के प्रति लोगों का यह रवैया कुछ अजीब नहीं लगता है. वैश्विक स्तर पर अंगरेजी का तेजी से विकास हुआ है और इस की स्पष्ट झलक हमारे देश में भी देखी जा सकती है. जनसंपर्क की भाषा के रूप में अंगरेजी ने अपनी स्थिति मजबूत की है. पढ़ाई हो या नौकरी, हर जगह अंगरेजी माध्यम के लोगों को हाथोंहाथ लिया जाता है. जो इस भाषा की रेस में पिछड़ जाते हैं वे जिंदगी की दौड़ में भी पीछे रह जाते हैं. ऐसी स्थितियों को हम ने खुद पैदा किया है. अंगरेजी अब हमारी जरूरत बन गई है.

इन सब से उलट अगर हिंदी भाषा और माध्यम की बात की जाए तो जाहिर है इस माध्यम से पढ़ने वाले छात्रों के पास नौकरी या मोटी सैलरी पाने का ज्यादा स्कोप नहीं होता. काफी मशक्कत के बाद नौकरी मिल जाती है तो उस में भी उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट होती है और मोटी तनख्वाह पाने की हसरत अधूरी रह जाती है. ऐसे छात्रों को एकसाथ कई मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं. एक रिजैक्शन का और दूसरा फेलियर होने का ठीकरा उन के सिर फोड़ा जाता है. चाहे मुश्किलें कितनी भी गहरी क्यों न हों रात तो निकल ही जाती है. ऐसा बिलकुल नहीं कि हिंदी माध्यम से पढ़ने वालों को खाली हाथ बैठना पड़ता है, अगर थोड़ी कोशिश की जाए तो इस में भी अच्छा कैरियर बन सकता है.

एक समय था जब हिंदी को आउट औफ डिमांड माना जाता था. अब इस के पेशेगत स्कोप और बढ़ती लोकप्रियता ने इसे विश्व की टौप चार्ट बस्टर्ड लैंग्वेज की लिस्ट में शामिल किया है. अब यह ग्लोबल लैंग्वेज बन चुकी है. विदेशी छात्रों का हिंदी भाषा के प्रति बढ़ता रुझान यह साबित करता है कि हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है. जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय में पौपुलर होते हिंदी कोर्सेज ने इस के लिए ग्लोबल भविष्य के दरवाजे खोल दिए हैं. हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय ने विदेशी छात्रों के लिए हिंदी से जुड़े कई शौर्ट टर्म औैर फुल टाइम कोर्सेज की शुरुआत की है, जो एक अच्छा संकेत है. विदेशी ही क्यों, अब तो अपने देश के छात्रों के पास भी हिंदी से संबंधित नौकरियों के भरपूर अवसर हैं. हिंदी कौल सैंटर से ले कर हिंदी अनुवादक, हिंदी अधिकारी, स्टैनो, टाइपिस्ट, आदि की जौब खुले दिल से हिंदी भाषी छात्रों का इंतजार कर रही है.

हिंदी माध्यम से पढ़े युवाओं से उन के नौकरी प्राप्त करने संबंधी अनुभव पूछे गए तो उन्होंने कुछ इस प्रकार अपने विचार बांटे : रक्षा मंत्रालय के अपौइंटमैंट डिविजन में बतौर पीए कार्यरत कमलेश दत्त कहती हैं, ‘‘हमारी युवापीढ़ी हिंदी को अपनाने से इसलिए कतराती है, क्योंकि उन्हें इस में अपने भविष्य की संभावनाएं शायद कम नजर आती हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. सरकारी और गैरसरकारी संस्थानों में अनगिनत ऐसे पद हैं, जो सिर्फ हिंदी भाषियों के लिए आरक्षित हैं. हां, यह जरूर है कि इन पदों को भरने की आवश्यक कार्यवाही या साक्षात्कार आदि में अभी भी अंगरेजी की प्रधानता बनी हुई है.

‘‘हिंदी की छवि को कम न आंक कर अगर हम इस के प्रचारप्रसार और अनिवार्यता पर ध्यान दें तो इस में अच्छी संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं. मैं भी हिंदी माध्यम से पढ़ी हूं पर आज एक अच्छे पद पर कार्यरत हूं औैर अपने काम से संतुष्ट भी. मुझे कभी यह मलाल नहीं रहा कि मैं हिंदी माध्यम से पढ़ कर आई हूं बल्कि मुझे गर्व है कि मैं ने इसी माध्यम के बल पर अच्छी नौकरी पाई.’’ रक्षा मंत्रालय में हिंदी अनुभाग में बतौर जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर कार्यरत मनोज कुमार साव कहते हैं, ‘‘कौन कहता है कि हिंदी का कोई स्कोप नहीं है. आज इसी भाषा ने मुझे रोजीरोटी दी है. परिस्थितिवश मुझे इस माध्यम को चुनना पड़ा था और जब बात इसी क्षेत्र में कैरियर बनाने की आई तो घर वालों की खासी नाराजगी झेलनी पड़ी.

‘‘सब ने कहा, जूते घिस जाएंगे पर नौकरी नहीं मिलेगी. आज मैं इस पद पर हूं. समाज और परिवार में अच्छाखासा सम्मान है. परिवार वालों को मुझ पर फख्र है. हां, थोड़ा वक्त जरूर लगता है पर संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए. हिंदी अब कहीं से भी किसी भाषा से बिलकुल कम नहीं. जैसे फ्रैंच, जरमन, स्पेनिश का स्कोप बढ़ा है, हिंदी का भी उतना ही बढ़ा है. मुझे इस भाषा से प्यार है और मैं इस का सम्मान करता हूं.’’

हिंदी माध्यम के छात्र कुछ ऐसे संवारें जिंदगी

दोभाषिए, कनिष्ठ व वरिष्ठ हिंदी अनुवादक :  इस के लिए कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रत्येक वर्ष अनुवादकों की रिक्तियां निकाली जाती हैं. इस के अतिरिक्त सरकारी अधीनस्थ कार्यालयों और पीएसयू में भी अच्छे अवसर हैं.

स्टैनो व टाइपिस्ट : विभिन्न अधीनस्थ सरकारी संस्थानों, मंत्रालयों, पीएसयू, प्राइवेट सैक्टर बैकों, उपक्रमों आदि में इन पदों की रिक्तियां आती रहती हैं.

हिंदी पत्रकारिता :  यह सब से डिमांडिंग व स्कोपफुल औप्शन है, हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए. इस में जौब के बेहतर अवसर हैं.

रेडियो, टीवी आदि में समाचारवाचक :  इस क्षेत्र में हिंदी माध्यम के छात्र न केवल लोकप्रियता की ऊंचाइयां छू सकते हैं बल्कि अच्छा वेतन भी पा सकते हैं.

स्कूल यूनिवर्सिटी में हिंदी शिक्षक :  इस रूप में काम कर हिंदी माध्यम को और ज्यादा सशक्त और प्रचारितप्रसारित किया जा सकता है. इस पेशे में सम्मान के साथसाथ पैसा भी है.

फ्रीलांस राइटर या कंटैंट राइटिंग : इसे कर के शोहरत के साथसाथ धन भी अर्जित किया जा सकता है.

विदेशी दूतावास में हिंदी जनसंपर्क अधिकारी व बैंकों में हिंदी अधिकारी : इन पदों पर नियुक्ति पा कर भविष्य संवारा जा सकता है.

हिंदी कोर्स कराने वाले कुछ प्रसिद्ध संस्थान

केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा :  यह संस्थान देशविदेश के छात्रों को हिंदी भाषा से संबंधित विभिन्न डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, डिग्री कोर्स करवाता है. यह संस्थान केंद्र द्वारा मान्यताप्राप्त व वित्त पोषित है. केंद्रीय हिंदी निदेशालय :  सरकारी मान्यताप्राप्त इस शिक्षण संस्थान की स्थापना विशेष रूप से गैरहिंदी भाषी लोगों को पत्राचार के माध्यम से हिंदी का प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु की गई है. यह एनआरआई और विदेशों में बसे हिंदी सीखने के इच्छुक भारतीयों को हिंदी से जुड़े विभिन्न कोर्स की सुविधा देता है, जिस में भिन्न डिप्लोमा आधारित कोर्सेज जैसे प्रबोध, प्रवीण व प्राज्ञ की उपाधि दी जाती है.

केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल : यह केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा का स्वायत्त संगठन है. संस्थान मुख्यतया हिंदी के अखिल भारतीय शिक्षणप्रशिक्षण अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय प्रचारप्रसार के लिए कार्य, योजनाओं का संचालन करता है.

केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान/हिंदी शिक्षण योजना

संवैधानिक प्रावधान के तहत 1974 में केंद्र सरकार और उस से जुड़े मंत्रालयों/उपक्रमों/अधीनस्थ कार्यालयों के कर्मचारियों/अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से इस संस्थान की स्थापना की गई थी. आज यह संस्थान हिंदी से जुड़े विभिन्न कोर्सेज के लिए जानामाना संस्थान है. इस में अधिकारियों के लिए हिंदी से जुड़े वर्कशौप का भी आयोजन किया जाता है.

मोबाइल पर भी थोड़ा तरस खाइए

एक सर्वे के मुताबिक, एशियाई पर्यटक सब से ज्यादा अपने स्मार्ट फोन से चिपके रहते हैं. आप चाहे अपना टूथब्रश व पेस्ट भूल जाएं, पर मोबाइल नहीं भूल सकते. पर्यटकों के मुताबिक स्मार्ट फोन ब्रश, पेस्ट, ड्राइविंग लाइसैंस जैसी जरूरतों से कहीं आगे है. ऐक्सपीडिया और ऐजेंसिया 2 ऐसी ऐजेंसी हैं, जो यह देखती हैं कि मोबाइल का सफर में कितना इस्तेमाल होता है. इन ऐजेंसियों ने खोज निकाला है कि एशियाई लोगों के लिए मोबाइल फोन अब सब से बड़ी जरूरत है.

एक बार एक लिफ्ट में एक आदमी ने एक महिला, जिस का रंग उड़ा हुआ था और सांसें उखड़ रही थीं, से पूछा, ‘‘आप को दमा की तकलीफ तो नहीं है? या आप का लिफ्ट में दम तो नहीं घुट रहा?’’

औरत ने जवाब दिया, ‘‘मेरा दम घुट रहा है, क्योंकि मेरे मोबाइल पर नैटवर्क का सिगनल नहीं आ रहा.’’

श्मशान भी अछूता नहीं

अब कोई सरकारी फरमान तो नहीं निकाल सकते कि आप अपना मोबाइल कक्षाओं, श्मशानघाट व मीटिंग आदि में न इस्तेमाल करें, क्योंकि लोगों को खुद इतनी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए कि कहां मोबाइल पर बात करनी है कहां नहीं. अब ऐसे तो नहीं हो सकता कि मलिंगा रनअप करते विराट कोहली की तरफ तूफानी बौल फैंकने लगे तो कोहली उसे हाथ दिखा कर रोक दे और यह कहे कि 1 मिनट भाईसाहब, मुझे एक ऐड कंपनी से काल आया है. 2 मिनट बात कर लूं फिर आप की बाल खेलूंगा.

सब से बड़ी हैरानी और गुस्सा तब आता है जब श्मशान घाट पर 1 मिनट आंसू बहाते लोग नजर आते हैं और दूसरे पल ही एक साधारण मसले पर बात करने के लिए फोन पर बात करने लगते हैं. कई बार तो ऊंची आवाज में पूरे दृश्य का भी वर्र्णन हो जाता है, ‘‘हां जी, मैं यहां संस्कार पर आया हूं. बस अभी फारिग हो कर तुम्हारे पास आता हूं. फिर शाम की पार्टी का प्लान कर लेते हैं.’’

ऐसे ही एक मौके पर जब चिता जलने की तैयारी कर रहे थे, तो किसी का फोन बजा और पूरी जोश के साथ रिंगटोन, मौजा ही मौजा… बज पड़ी.

पंडितजी को गुस्सा आया, ‘‘बंद करो फोन. यह कोई टाइम है.’’

रिश्तेदारों ने समझाया, ‘‘पंडितजी, यह तो सही गाना है. यह तो मर गए पर हम सब के लिए अपनी जायदाद छोड़ गए.’’

खुद के लिए मुसीबत

चाहे आप हम से हमारी नींद छीन लें, खाना छीन लें, टीवी बंद कर दें, पर मोबाइल के बगैर 1 मिनट मानो ऐसा लगता है कि हमें वक्त की सुनामी ने उछाल कर कहीं दे मारा हो. एक मिनट के लिए भी अगर हमारी गाड़ी रैड लाइट पर रुकती है, तो हम सब से पहले एक भूखे शेर की तरह मोबाइल की तरफ झपटते हैं कि कहीं पिछले 40 सैकंड में हम को किसी ने मैसेज तो नहीं किया? और अगर कहीं गाड़ी चलाते वक्त फोन काल आ जाए तो फिर रामदेव को पीछे छोड़ते हुए, हम ऐसे योगा के आसन करते हैं कि वाहवाही हो जाती है. देखिए न, सड़क पर आंखें, एक हाथ स्टेयरिंग पर, दूसरे हाथ में मोबाइल और स्टेयरिंग वाला हाथ गियर भी बदलता हुआ, इतना भीषण योगा आसन करने के बाद भी योग गुरु को लगता है कि हम योगा को गंभीरता से नहीं लेते हैं. सब से चिंता वाली बात है कि हम सैल्फी खींचतेखींचते मौत के मुंह में छलांग लगाने में दुनिया में अव्वल नंबर पर हैं. हमें कितना अच्छा लगता है कि हम चलती गाड़ी के ट्रैक पर भी फोटो खींच लेते हैं. ऊंची पहाडि़यों के ऊपर भी यह क्रेज जारी रहता है. पता तो तब चलता है जब हम अपने देश की नन्ही जानों को गवां के बिलखते रह जाते हैं.

मोबाइल को भी आराम दीजिए

इसलिए दोस्तो, आराम दीजिए अपनेआप को भी और अपने मोबाइल को भी. जो मोबाइल आप के दोस्तों से मिलाती है, दुनिया भर की जानकारी देता है, आप का हर पल साथ देता है, उस मोबाइल को सम्मान दीजिए, आराम दीजिए.

एक आदमी अपनी गाड़ी में बैठ रहा था. ड्राइवर से उस ने पूछा, ‘‘मोबाइल का चार्जर रख लिया? जी जनाब, लैपटौप का चार्जर रखा? जी जनाब, कैमरे का चार्जर रख लिया? जी जनाब. चलो गाड़ी चलाओ. थोड़ी दूर जाने पर उस आदमी ने कहा, ड्राइवर, जरूरी समान रख लिया पर पता नहीं फिर भी क्यों लग रहा है कि मैं कोई चीज भूल रहा हूं? ड्राइवर ने बिना आंखें झपकाते हुए कहा, ‘‘सर बुरा न मानें शायद आप मैडम को घर भूल आए.               

कार : पूजा पाठ से ज्यादा जरूरी सुरक्षा नियम

प्रोफैसर सुमित्रा के घर उत्सव का माहौल था. 3 महीने पहले बुक की गई नई औडी आज घर आने वाली थी. पंडितजी ने कार घर लाने का मुहूर्त आज का निकाला था. उन के पति डाक्टर चंद्रभूषण ने, जो शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक हैं, आज अपने नर्सिंग होम जा कर जरूरी औपरेशन करने का काम भी किसी और को दे दिया था, क्योंकि उन का पूजा में बैठना जरूरी था. मयंक जो एमडी कर रहा था, चिराग जो इंजीनियर था, आज छुट्टी पर थे. पंडितजी की पूजा काफी देर से चल रही थी.

बेटे गाड़ी ले कर आए तो पंडितजी ने कार को फूलमाला पहनाई, घूमघूम कर कई जगह लाल टीका लगाया, हर पहिए पर जल छिड़का, फिर सड़क पर कार के सामने नारियल फोड़ा. कई मंत्र पढ़े जो किसी को समझ नहीं आए.

सब का नाम ले कर गाड़ी के चारों तरफ घूमघूम कर श्लोक बुदबुदाए. उस के बाद सब ने उन के पैर छुए.

पौराणिक सोच

पंडितजी ने पहले ही करीब 50 लाख की औडी के हिसाब से 5 हजार का शुभदान का संकेत दे दिया था. गरीब मरीजों का भी खून चूसने वाले डाक्टर चंद्रभूषण को किसी पंडित को कार पूजा के लिए इतनी दक्षिणा देना कहीं से भी गलत नहीं लगा.

प्रश्न यह उठता है कि एक से एक पढ़ालिखा परिवार भी लेटैस्ट तकनीक की कार खरीदने पर पूजा पौराणिक जमाने की क्यों करता है? क्या मंत्र, जाप, पूजापाठ ही कार चलाने वाले और उस में बैठने वाले की सुरक्षा करते हैं? अगर कोई सीटबैल्ट नहीं बांधेगा, सुरक्षा कानून का पालन नहीं करेगा, पी कर गाड़ी चलाएगा, नटबोल्ट की जानकारी नहीं होगी, उसे पंडितजी के ये मंत्र बचा लेंगे? रोज सड़कों पर इतने हादसे होते हैं. देखतेदेखते ही ऐक्सीडैंट में कारों का कचूमर निकल जाता है. उन कारों की भी तो पूजा की गई होती है, फिर?

हम आधुनिक विज्ञान की नईनई तकनीकों को देख कर इतनी सुविधाओं में जीते हुए खुश होते हैं पर मानसिक रूप से हम शायद पौराणिक युग में ही हैं, जहां पंडितोंमौलवियों के बताए धर्मकर्म, दानदक्षिणा आदि हमारा पीछा नहीं छोड़ते या यों कहें हम ही इन्हें छोड़ना नहीं चाहते.

क्या कार खरीदने पर कार में बैठने वाले लोग यह सोचते हैं कि उन्होंने तो कार की पूजा करवा रखी है, अब चाहें वे जैसी मरजी चलाएं, कुछ नहीं होगा. नहीं न? फिर? जब ड्राइविंग पर ही भविष्य में सुरक्षा टिकी है तो पंडितों के बताए मुहूर्त पर या उन की पूजा पर इतना यकीन क्यों? हम क्यों इन बातों से बाहर नहीं आ पा रहे?

धार्मिक आडंबर

बैंगलुरु में तो व्हीकल गणपति मंदिर है, जहां गाड़ी खरीदने पर लोग पहले वहीं दर्शन के लिए जाते हैं और वहां उपस्थित पंडितों को भारी दक्षिणा दी जाती है. ये कहां जा रहे हैं हम? लेटैस्ट कार खरीदने पर धूर्त पंडितों को पैसे दे कर आशीर्वाद लेने? क्या मूर्खता है यह? हम डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक बन जाएंगे पर धार्मिक अंधविश्वास नहीं छोड़ सकते, क्योंकि उन की जड़ें तो हमारे अंदर इतनी गहरी बैठा दी गई हैं कि हम इन से मुक्त हो ही नहीं पा रहे. धार्मिक आडंबरों के चक्कर में पड़ कर जो गलती हमारे पूर्वजों ने की, हम भी इतने आधुनिक, सुशिक्षित हो कर उसे दोहराए चले जा रहे हैं और यह सिर्फ यहां ही नहीं, विदेशों में भी कहींकहीं देखने को मिलता है. ग्रेट ब्रिटेन में कई जगह नई कार खरीदने पर उस पर ‘हौली वाटर’ छिड़का जाता है.

पंडित की पौबारह

मुंबई की एक मल्टीनैशनल कंपनी की ऐक्सपोर्ट मैनेजर निधि रस्तोगी बताती हैं,

‘‘5 साल पहले विवाह होते ही हम ने नई कार खरीदी थी. न किसी पंडित से पूछा, न दानदक्षिणा दी, न ही मुहूर्त निकलवाया. हम दोनों आराम से चुपचाप गए और नई कार ले कर घूमते, खातेपीते वापस आ गए. अब 5 साल हो गए हैं. 3 साल का एक बेटा भी है. आज तक गाड़ी पर एक खरोंच तक नहीं आई है. सुयश यानी मेरे पति बहुत सेफ ड्राइविंग करते हैं. अगर कार लेने से पहले दिल्ली में बैठे हम ने अपने बुजुर्गों से सलाह ली होती तो पता नहीं कितने रुपए पंडित की जेब में चले गए होते, हम ने उन्हें कार लेने के बाद ही बताया.’’

सुरक्षा नियम ज्यादा अहम

दुनिया आगे बढ़ रही है. रोज नए आविष्कार हो रहे हैं. इनसान कब का चांद पर जा  पहुंचा है, नई तकनीकों पर हम रोज हैरान होते हैं पर धर्मांधता, अंधश्रद्धा, अंधविश्वास, पंडित, मौलवियों के मामले में हम बड़े कमजोर पड़ जाते हैं. अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं. जीवन में आने वाले सुखदुख को नए तर्कों से जोड़ें, पंडितों के बताए शगुनअपशगुन से नहीं. नई कार लेने पर दोस्तों, परिवार के साथ उस का आनंद उठाएं. पंडितों के भ्रमजाल में न पड़ें. आप की सुरक्षा आप के अपने हाथ में है, किसी पंडित के मंत्रतंत्र में नहीं. सुरक्षा नियमों का ध्यान रखते हुए अपने नए सफर का आनंद लें.     

करीम मोरानी पर बलात्कार और ब्लैकमेलिंग का आरोप

बौलीवुड के मशहूर निर्माता, बड़े बड़े इवेंट के आयोजक, ‘सिनेयुग’ प्रोडक्शन कंपनी के मालिक और 24 वर्षीय अभिनेत्री जोया मोरानी के पिता करीम मोरानी को पुलिस ने एक 24 वर्षीय थिएटर कलाकार द्वारा बलात्कार और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद गिरफ्तार किया है. इस कलाकार ने करीम मोरानी पर शादी का झांसा देकर मुंबई व हैदराबाद में कई बार उसके साथ सेक्स संबंध बनाने के आरोप लगाए हैं. पुलिस ने करीम मोरानी के खिलाफ 376, 342, 417, 506, 493 और 354-सी आदि धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है.

यह अलग बात है कि करीम मोरानी ने कुछ पत्रकारों को बयान भेजकर कहा है कि करीम मोरानी को बदनाम करने के मकसद से गलत आरोप लगाए गए हैं. करीम मोरानी को कानून में पूरा यकीन है और वह जरुरत के मुताबिक कानूनी कदम उठाएंगे. करीम मोरानी की बेटी जोया मोरानी के साथ नाटकों में अभिनय कर चुकी इस अदाकारा ने पर एल बी नगर, हैदाराबद पुलिस में जो आराप लगाए हैं उसके अनुसार उसके साथ बालात्मकर की घटनाएं एक साल परानी हैं.

एल बी नगर के डिप्टी पुलिस कमिश्नर तफीर इकबाल के अनुसार पीड़िता ने जो शिकायत दर्ज करायी है, उसके अनुसार यह अपराध एक साल पहले घटित हुआ था. अब पुलिस इसकी जांच करने के अलावा सबूत जुटाने का प्रयास कर रही है. पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार इस कलाकार ने आरोप लगाया है कि करीम मोरानी ने उसके न्यूड फोटो खींचने के अलावा इंटीमेसी के वक्त का वीडियो अपने मोबाइल पर बना रखा है, जिसके माध्यम से वह उसे ब्लैकमेल करते रहते हैं. 

पूनम पांडे के ये 3 फोटो और 2 वीडियो आपके पसीने छुड़ा देंगे

मॉडल और एक्ट्रेस पूनम पांडे इन दिनों रेड हॉट अवतार में नजर आ रही हैं. जी हां पूनम ने एक बार फिर हॉट फोटोशूट करवाया है. आपको बता दें कि स्विमिंग शूट पहने पूनम का ये दिलकश अंदाज आपके पसीने छुड़ा सकता है. पूनम का यही बेबाक अंदाज उन्हें सोशल साइट की क्वीन बनाता है. अपनी हॉट फोटो और वीडियो से पूनम यूट्यूब और सोशल साइट पर आग लगा देती हैं.

कुछ दिन पहले पूनम ने ग्लास चैलेंज देते हुए एक वीडियो रिलीज किया था. यह चैलेंज अपने आप में अनोखा था इसका अंदाजा आप वीडियो देखकर ही लगा सकते हैं. बता दें कि कुछ दिन पहले पूनम पांडे ने मालदिव वैकेशन की बिकनी पोज वाली फोटो शेयर की थी. उस फोटो में पूनम एक रिजॉर्ट के सामने बिकनी पोज दे रहीं थी.

वहीं हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की हॉलीवुड फिल्म ‘बेवॉच’ का ट्रेलर रिलीज हुआ था. इसमें प्रियंका सिर्फ एक झलक के लिए नजर आ रही हैं, जिससे उनके फैन्स भी खासा नाराज हैं. लेकिन फैन्स की इस नाराजगी को दूर करने के लिए हमेशा अभी अदाओं को लेकर लाइम लाइट में बनी रहने वालीं पूनम पांडे का एक वीडियो शेयर किया गया है.

इस वीडियो में पूनम का बेहद हॉट और सेक्सी अवतार देखने को मिल रहा है. इस वीडियो में पूनम रेड कलर की बिकनी पहले हुए किसी बीच किनारे रेत पर जलवे बिखेरती हुई नजर आ रहीं हैं. 

आपने कभी नहीं देखा होगा ऐसा जबरदस्त छक्का

टी-20 मैचों में गेंदबाजों की पिटाई होना और बल्लेबाजों के द्वारा चौकों-छक्कों की बरसात होना आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा शॉट देखा है जिसमें बल्लेबाज पूरी तरह से जमीन पर लेट जाए फिर भी गेंद बाउंड्री के पार 6 रन के लिए चली गई हो.

अबूधाबी में यूएई और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे टी-20 मुकाबले में अफगानिस्तान के बल्लेबाज नजीबुल्लाब जादरान ने पारी के 19वें ओवर में ऐसा शॉट जड़ा जिससे सभी लोग हैरान रह गए. यूएई के गेंदबाज मोहम्मद शहजाद की गेंद पर लगभग वाइड गेंद पर जादरान ने यह शॉट खेला, जिसे खेलते वक्त वह फिसल गए, लेकिन गिरने के बाद भी गेंद सीमारेखा के पार चली गई.

इस शॉट को आईसीसी ट्वीट किया है. देखिये ये अजीबोगरीब शॉट.

होम लोन से जुड़ी 5 जरूरी बातें

मिडिल क्लास के घर खरीदने के सपने को सच करने में होम लोन ने बड़ी भूमिका अदा की है. लेकिन आज भी ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि होम लोन की सुविधा लेने में बहुत पेचीदगियां हैं. जबकि ऐसा है नहीं. यदि होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले इस की कुछ बारीकियों को जांच लें, तो यह आप के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.

कब बनाएं योजना

बजाज कैपिटल में फाइनैंस प्लानिंग और क्लाइंट सर्विसेज के ग्रुप हैड सुशील जैन का कहना है कि पिछले 10 सालों में लोगों के घर खरीदने के फैसले में बदलाव देखने को मिले हैं. इनकम टैक्स ऐक्ट में सैक्शन 24 के जुड़ने के बाद अब घर के खरीदार घर की खरीद के लिए उम्र से ज्यादा अपनी आय को प्राथमिकता देते हैं. सैक्शन 24 घर खरीदार को होम लोन पर आयकर में छूट पाने के योग्य बनाता है. ऐसे में युवा जितनी जल्दी प्रौपर्टी में निवेश करते हैं, उतनी ही जल्दी वे इस छूट के हकदार बन जाते हैं.

सुशील जैन के अनुसार, युवाओं को नौकरी मिलने के 3-4 सालों के भीतर घर खरीदने की योजना बना लेनी चाहिए, क्योंकि आजकल बिल्डर्स ऐसी योजनाएं ले कर आ रहे हैं जिन में घर की बुकिंग राशि मिडिल क्लास के वहन करने योग्य होती है. इस के साथसाथ युवाओं को आयकर में छूट के अलावा लोन की किस्तें चुकाने का अच्छा समय भी मिल जाता है.

होम लोन की योग्यता

इस बारे में सुशील बताते हैं, ‘‘कोई भी वेतनभोगी, प्राइवेट कर्मचारी या अपना व्यवसाय करने वाला होम लोन के लिए योग्य है. होम लोन का आवेदन करने के लिए इन तीनों श्रेणियों के लोगों के जरूरी डौक्यूमैंट्स में थोड़ा सा अंतर है. अपनी आय का ब्योरा दिखाने वाले डौक्यूमैंट्स में वेतनभोगियों और प्राइवेट कर्मचारियों को अपनी 3 महीने की सैलरी स्लिप, 6 माह की बैंक स्टेटमैंट और फार्म 16 भर कर देना होता है, तो व्यवसाय करने वालों को 2 साल के आयकर भुगतान का चार्टर्ड अकाउंटैंट का प्रमाणपत्र भी देना होता है.’’

क्या ध्यान रखें

होम लोन का सही फायदा भी आप को मिले और इस की किस्तों का भुगतान आप पर बोझ न बने, इस के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें: द्य होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह जरूर पता कर लें कि वित्तीय तौर पर आप इस के योग्य हैं भी या नहीं. क्रैडिट इनफौर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (सिबिल) की वैबसाइट के द्वारा आप अपना क्रैडिट स्कोर जान सकते हैं. 300 से 900 पौइंट्स के स्केल पर आप का क्रैडिट स्कोर आंका जाता है. यदि आप का क्रैडिट स्कोर मानकों के अनुरूप न हो तो उसे सही करने का तरीका भी आप को सिबिल की वैबसाइट पर मिल जाएगा.

होम लोन में 2 प्रकार की ब्याज दरों का विकल्प है- फिक्स्ड और फ्लोटिंग. किस्तों का भुगतान करते समय फिक्स्ड ब्याज दर पर लिए गए लोन की ईएमआई में बदलाव नहीं आता. बाद में ब्याज दर में बदलाव आए तो इस में थोड़ा बदलाव संभव है. ऐसे में सुशील जैन का सुझाव है कि फ्लोटिंग ब्याज दर का विकल्प चुनें. यदि आप के फाइनैंस सलाहकार के अनुसार ब्याज दरों में कटौती की संभावना हो तो.

लोन की रकम के अतिरिक्त प्रोसैसिंग चार्ज, सर्विस चार्ज, भुगतान की तय समयसीमा से पहले लोन चुकाने का चार्ज इत्यादि की जानकारी पहले से ले लें. ये सभी अतिरिक्त चार्ज आप को दिए जा रहे लोन का ही हिस्सा होते हैं न कि उस रकम का जो आप ने घर खरीदने के लिए बैंक से ली है.

यदि आप ने निर्माणाधीन घर खरीदने के लिए लोन लिया है, तो आयकर में छूट पाने के लिए आप तभी योग्य होंगे जब घर का निर्माण कार्य पूरा हो जाए.

होम लोन के फायदे

होम लोन लेने वाले को निम्न फायदे होते हैं:

– यदि लोन के डौक्यूमैंट्स में आप घर मालिक या सहमालिक हैं तो ईएमआई पर लगने वाले ब्याज पर आप को आयकर छूट मिलेगी.

– ब्याज के अलावा आप की किस्त का जो हिस्सा लोन की मूल रकम में जाता है, उस पर आप इनकम टैक्स ऐक्ट 80सी के अंतर्गत आयकर छूट पा सकते हैं. इस के अंतर्गत 1 वित्तीय साल में आप लगभग 1.5 लाख की आयकर छूट पा सकते हैं.

– लोन की रकम और किस्तों पर आयकर छूट पाने के अलावा स्टांप ड्यूटी और रजिस्टे्रशन फीस पर भी आप आयकर छूट पा सकते हैं. इनकम टैक्स ऐक्ट 80सी के अंतर्गत मिलने वाली इस छूट का फायदा आप को उसी साल मिलेगा जिस साल में आप ने इन का भुगतान किया हो.

महिलाओं के लिए फायदे

भारत के कई राज्यों में मकान की रजिस्ट्रेशन फीस पर महिलाओं के लिए छूट का प्रावधान है. इस का फायदा उठाने के लिए महिला के नाम पर मकान की रजिस्ट्री होनी जरूरी है.

सुशील जैन ने महिलाओं के लिए होम लोन के अन्य फायदे भी बताए, जो निम्न प्रकार हैं:

– पतिपत्नी यदि जौइंट होम लोन लें, तो वे ज्यादा लोन पाने के योग्य होने के साथसाथ आयकर में ज्यादा छूट पाने के भी योग्य होंगे.

– जौइंट लोन में दोनों आवेदन करने वालों को मिलने वाली आयकर छूट में अंतर संभव है.

– प्रौपर्टी पतिपत्नी दोनों के नाम होने से उत्तराधिकारी की समस्या से छुटकारा मिल जाता है.

– होम लोन का पूरा लाभ उठाने के लिए अपनी किस्तों का समय पर भुगतान करें. यों तो 1 भी किस्त छूटनी नहीं चाहिए, लेकिन लगातार 2 किस्तें छूटने पर आप बैंक की कार्यवाही के दायरे में तो आ ही जाएंगे, आप का क्रैडिट स्कोर भी खराब हो जाएगा.

मैं जब भी पति के साथ सेक्स करती हूं तो जल्दी थक जाती हूं. आनंद नहीं ले पाती, क्योंकि मुझे दर्द होता है.

सवाल

मेरी समस्या मेरे और पति के शारीरिक संबंधों को ले कर है. मैं जब भी पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती हूं तो जल्दी थक जाती हूं. शारीरिक संबंधों का पूरी तरह आनंद नहीं ले पाती क्योंकि इस दौरान मुझे दर्द होता है.

जवाब

कई बार जब महिला शारीरिक संबंध बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होती तब उस के साथ ऐसी ही समस्या पेश आती है जैसी आप के साथ आ रही है. इस के अलावा वैजाइनल ड्राइनैस भी सैक्स संबंधों के दौरान दर्द का कारण बनता है, इस के लिए आप चाहें तो किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर सकती हैं.

सैक्स संबंध को सुखद बनाने के लिए फोरप्ले (चुंबन, सहलाना आदि) जैसी क्रियाएं अवश्य करें. जिस तरह संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए सैक्स जरूरी होता है, ठीक उसी तरह फोरप्ले भी जरूरी होता है.

फोरप्ले सैक्स से पहले की कुछ ऐसी क्रियाएं हैं जिन से सैक्स का न केवल खुल कर आनंद लिया जा सकता है बल्कि सैक्स के मजे को दोगुना भी किया जा सकता है. फोरप्ले न केवल सैक्स संबंधों का जरूरी हिस्सा होता है बल्कि इस से आप के साथी की भी सैक्स में रुचि बढ़ती है. यदि आप फोरप्ले करते हैं तो आप अधिक समय तक सैक्स का आनंद उठा पाएंगे. फोरप्ले मूड को तरोताजा करता है, शरीर को रोमांच से भर देता है. फोरप्ले पतिपत्नी को सैक्स के लिए तैयार करता है.

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