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नरगिस के अवतार में मनीषा कोइराला की वापसी

कुछ समय पहले मनीषा कोइराला ने फिल्ममेकर राजकुमार हिरानी के साथ एक तस्वीर पोस्ट की थी और उनकी प्रशंसा में कुछ शब्द लिखे, 'अनोखे डायरेक्टर और शानदार इंसान.' जनवरी से राजकुमार हिरानी संजय दत्त की बायॉपिक में व्यस्त हैं, जिसमें रणबीर कपूर, संजय दत्त की भूमिका में नजर आएंगे और दीया मिर्जा उनकी पत्नी मान्यता दत्त की भूमिका में होंगी. खबर है कि इस फिल्म से मनीषा कोइराला भी जुड़ गई है.

फिल्म में सोनम कपूर भी होंगी, जो संजय की पुरानी लव इंटरेस्ट के रूप में अपनी भूमिका अदा करेंगी, विकी कौशल संजय दत्त के अमेरिका वाले दोस्त और अनुष्का शर्मा एक पत्रकार के किरदार में होंगी. इस फिल्म में संजय दत्त के पिता सुनील दत्त की भूमिका परेश रावल निभा रहे हैं. और अभी हाल ही में खबर आई है कि संजय दत्त की मां नरगिस का किरदार मनीषा कोइराला.

राजकुमार हिरानी ने भी इस खबर को कन्फर्म कर दिया है कि मनीषा नरगिस जी का किरदार निभा रही हैं.

राजकुमार हिरानी का मानना है कि नरगिस इंडियन सिनेमा की खूबसूरत महिला थीं और उनके किरदार को निभाने के लिए उतनी ही खूबसूरत महिला का होना बहुत जरूरी है. हालांकि, मनीषा वाकई प्यारी और शानदार ऐक्ट्रेस हैं, लेकिन उन्हें इस फिल्म में लेने की मुख्य वजह उनका कैंसर से लड़ना था, क्योंकि नरगिस भी कैंसर से लड़ती रही थीं.

मनीषा, संजय दत्त के साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं, जिनमें 'कारतूस', 'खौफ', 'यलगार', 'सनम', 'अचानक', 'बागी', 'महबूबा' जैसी फिल्म शामिल है.

दूल्हा बनने जा रहे हैं नील नितिन मुकेश

पिछले साल यानि कि साल 2016 में गुपचुप तरीके से सगाई करने वाले अभिनेता नील नितिन मुकेश, इस साल शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. 7 फरवरी 2017 से उनके शादी के कार्यक्रमों की शुरुआत राजस्थान के ऐतिहासिक नगरी उदयपुर से हो चुकी है.

इस शाही शादी की शुरुआत, न्यू कपल की सगाई के लिए रखे गए रॉयल सगाई प्रोग्राम से हुई. 7 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर स्थित रेडिसन ब्लू होटल में इस फंक्शन का आयोजन किया गया. आपको एक बार फिर बता दें कि बॉलीवुड एक्टर नील नितिन मुकेश दूल्हा बनने वाले हैं. वे अपनी मंगेतर रुक्मिणी सहाय से 9 फरवरी को शादी करेगें.

इस कार्यक्रम के मौके पर नील नितिन मुकेश ने टक्सीडो सूट पहन रखा था और उनकी मंगेतर रुकमणी भी डिजाइनर गाऊन में बेहद खूबसूरत लग रही थीं. इस पूरे कार्यक्रम के दौरान नील नितिन मुकेश के पिता नजर आते रहे, जिन्होंने फिरोजी और गोल्डन कॉम्बिनेशन का कुर्ता पजामा पहना हुआ था.

नील नितिन मुकेश द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में नितिन की मंगेतर रुकमणी अपने होने वाले ससुर जी यानि कि नितिन मुकेश जी के पैर छूते हुए भी नजर आ रही हैं.

नील के पिता नितिन मुकेश ने उदयपुर में उनके बेटे के वैवाहिक समारोह के आयोजन पर गहरी खुशी जाहिर की है. नितिन मुकेश ने इस बात पर भी अपनी खुशी जताई कि उनका बेटा अरैंज मैरिज के लिए राजी हो गया

इस फंक्शन के बाद अब 8 फरवरी को मेहंदी की रस्म और संगीत सेरेमनी के कार्यक्रम होने वाले हैं. इसके तुरंत बाद, अगले ही दिन 9 फरवरी 2017 को दोनों शादी के बंधन में बंध जाएंगे. इस विवाह समारोह में शिरकत करने वाले कई फिल्मी हस्तियों का जमावड़ा लेकसिटी में पहले ही होना शुरू हो गया है.

क्रिकेट इतिहास में आपने आज तक नहीं देखी होगी ऐसी बॉलिंग

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें आए दिन अजीबोगरीब रिकॉर्ड्स बनते रहते हैं. कभी कोई बल्लेबाज एक ओवर में 36 रन बनाता है तो कई 72 बॉल में 300, कोई किसी पारी के सारे विकेट अपने नाम कर लेता है तो कोई लगातार 4 विकेट झटक लेता है. क्रिकेट के नाम ऐसे ही कई अद्भुत रिकॉर्ड हैं.

इस खेल में हमेशा अच्छे ही नहीं बुरे रिकॉर्ड्स भी बनते हैं. कुछ खिलाड़ियों ने तो ऐसा भी कारनामा किया है जिसके वजह से सिर्फ उन्हें ही नहीं उनकी टीम को भी खामियाजा भुगतना पड़ा है.

ऐसा ही एक रिकॉर्ड है जिसे देख आप सभी हैरान रह जाएंगे. दरअसल बात उस वक्त की है जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 2005 में वनडे सीरिज खेला जा रहा था.

26 फरवरी, 2005 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच हुए तीसरे वनडे में कुछ ऐसा रिकॉर्ड बना जिस पर यकीन कर पाना मुश्किल है.

जब मैदान में ऑस्ट्रेलियाई टीम बल्लेबाजी करने आई, पहले ही ओवर में गेंदबाजी कर कीवी गेंदबाज डैरल टफी ने ऐसा कारनामा किया जिसे देख सभी आश्चर्यचकित हो गए. इनींग का पहला ओवर देख कर ऐसा लग रहा था कि टफी बॉलिंग करना ही भूल गए हैं. पहले ही ओवर में उनंहोंने 4 नो बॉल और 4 वाइड गेंदें फेंकी. ओवर में एक भी गेंद फेंके बिना ही ऑस्ट्रेलिया के खाते में 10 रन जुड़ गए थे.

इडेन पार्क, ऑकलैंड में हुए इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 264 रन बनाया था. लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम 178 रन पर ही ढ़ेर हो गई थी. ऑस्ट्रेलिया ने 86 रनों से यह मैच अपने नाम कर लिया था.

देखिए कैसे ओवर के पहले ही गेंद पर 14 रन बन गए.

मेरी सास मुझे पति के साथ सैक्स करने से रोकती हैं. मैं पति के साथ सैक्स करना चाहती हूं. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 25 वर्षीय विवाहित महिला हूं. मेरी परेशानी का कारण मेरी सास हैं. वे मुझे पति के साथ सैक्स संबंध बनाने से रोकती हैं. उन का कहना है कि मेरे साथ सैक्स संबंध बनाने से उन के बेटे का औफिस में काम में मन नहीं लगेगा. अभी हमारी शादी को अधिक समय नहीं हुआ है और मैं अपने पति के साथ सैक्स संबंध बनाना चाहती हूं लेकिन मेरी सास मुझे पति के साथ सोने से भी रोकती हैं. मैं ने उन्हें समझाने की कोशिश भी की है लेकिन वे कुछ सुनना नहीं चाहतीं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप अपने पति से इस बारे में खुल कर बात करें और आप की सास की कही सारी बातें उन्हें बताएं. साथ ही, सास को साफ शब्दों में समझा दें कि पति के साथ सोना और उन के साथ सैक्स संबंध बनाना आप का वैवाहिक हक है और वे इस के लिए आप को रोक नहीं सकतीं. साथ ही, उन्हें यह भी समझा दें कि उन का यह सोचना कि सैक्स करने से उन के बेटे का नौकरी में मन नहीं लगेगा सर्वथा अतार्किक व बेकार की बात है. उन्हें बताएं कि अगर उन के बेटे को आप से यानी अपनी पत्नी से घर में शारीरिक सुख नहीं मिलेगा तो उन का मन औफिस में इधरउधर भटकेगा और तब उन का मन काम में नहीं लगेगा. 

दरअसल, आप की बातों से लगता है कि आप की सास आप के पति को अपने पल्लू से बांधे रखना चाहती हैं. वे नहीं चाहतीं कि आप पतिपत्नी के बीच प्यार का रिश्ता बने. इसलिए वे ऐसी अतार्किक बातें व हरकतें कर रही हैं. आप उन की बातों पर हरगिज ध्यान न दें और पति के साथ शारीरिक संबंध अवश्य बनाएं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

डाउनलोड करें ये बेस्ट फ्री एंटी वायरस

तकनीकी तो एक ऐसा विषय है जिसमें कि हमेशा से क्रान्तिकारी बदलाव होते रहे हैं, पर डिजिटल होना जितना फायदेमंद होता है, उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है. अगर आप अपने फोन या लैपटॉप की सुरक्षा में जरा भी सावधानी बरतने से चूक गए, तो आपका फोन और लैपटॉप कई वॉयरसो का शिकार हो सकता है. इन्हें तकनीकी भाषा में मालवेयर और रेनसमवेयरों भी कहते हैं. और ये बात आपको जानना जरुरी है कि फोन पर होने वाले इन हमलों से बचने के लिए आपको एंटीवॉयरस की जरुरत होती है.

अगर आप अक्सर ऑनलाइन  ही काम करते हैं, तब तो आपका सुरक्षित रहना और भी जरुरी हो जाता है. सुरक्षा के लिहाज से आपके पीसी और स्‍मार्टफोन्स में एंटीवॉयरस का होना बेहद जरूरी है. अगर आप बाजार से एंटीवॉयरस खरीदना नहीं चाहते तो आप इन्हें ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते हैं. आज के समय पर तो ऑनलाइन कई फ्री एंटीवॉयरस उपलब्‍ध हैं. इन्‍हें डाउनलोड करके आप सिर्फ आप अपने पीसी को ही नहीं बल्कि फोन को भी सुरक्षित रख सकते हैं. इसके अलावा इन्टरनेट से जुड़े कई सारे काम बिना किसी ऑनलाइन खतरे के, कर सकते हैं.

आज हम आपको कुछ ऐसे एंटीवॉयरसेस के बारे में बताऐंगे जो आपके स्‍मार्टफोन और पीसी को खतरे से सुरक्षित रखेंगे.

अवास्त फ्री एंटीवॉयरस

अवास्‍त का यह फ्री एंटीवॉयरस आईटी सेक्टर में कई एवार्ड जीत चुका है. आपके फोन को एक रियलटाइम प्रोटेक्‍शन देने के लिए अवास्‍त का फ्री वर्जन सबसे उपयुक्त एंटीवॉयरस है. अवास्‍त साफ्टवेयर, वॉयरस और एडवेयर आदि को डिटेक्‍ट करके उन्‍हें डिवाइस में आने से रोक देता है. इसके अलावा अगर आप अपने फोन या पीसी को प्रिंटर, टेलीफोन लाइन और टीवी के डिवाइसेस से जोड़ते हैं, तब भी अवास्‍त कनेक्शन नेटर्वक को स्‍कैन करके कई वॉयरसेस और अन्य मालवेयरस को आपके पास आने से रोकता है.

अवीरा फ्री एंटीवॉयरस

अवीरा एंटीवॉयरस आपके फोन के साथ साथ पीसी को भी सुरक्षित रखता है, इसका इस्तेमाल काफी आसान है, इसे कोई भी बड़ी आसानी से यूज़ कर सकता है. अवीरा एंटीवॉयरस एक प्रकार की शील्‍ड होती है, जो आपकी फोन डिवाइस को पूरी तरह से सुरक्षित रखती है. इसके इस्तेमाल में हमें बस एक बात का ध्‍यान रखना होता है कि ये आपके पीसी को थोड़ा सा स्‍लो कर देता है. पर अगर आपके पीसी का कंफीग्रेशन अच्‍छा है तो आप बिना किसी डर के अवीरा यूज़ कर सकते हैं.

पांडा फ्री एंटीवॉयरस

पांडा एंटीवॉयरस उन लोगों के लिए एक अच्‍छा ऑप्‍शन है जो हमेशा ही फ्री एंटीवॉयरस यूज़ करना चाहते हैं. यह न सिर्फ एक लाइट वेट एंटीवॉयरस है, बल्‍कि विंडोज 10 के अलावा कई दूसरे नए नए विंडोज वर्जन्स में भी पांडा अच्‍छी तरह आपकी सिक्‍योरिटी का ध्यान रखता है. ये आपके कम्प्यूटर के अलावा अन्य यूएसबी डिवाइसेस को भी प्रोटेक्‍ट करता है.

एवीजी फ्री एंटीवॉयरस

एवीजी अपनी आसान तकनाकियों की वजह से काफी पॉपुलर है, ये आपके फोन को प्रोटेक्‍शन देने के साथ साथ कई वॉयरसेस और मालवेयरस को खुद ही ब्‍लॉक कर देता है. एवीजी के बारे में कहा जाता है कि इससे एक क्‍लिक में ही पूरे फोन और पीसी को वॉयरस फ्री किया जा सकता है.

बिटडिफेंडर फ्री एंटीवॉयरस

फ्री एंटीवॉयरस के एडीशन्स में बिटडिफेंडर भी काफी पॉपुलर हो रहा है, ढेरों फीचर्स के अलावा बिटडिफेंडर में एटीफिशिंग और एंटी-फ्रॉड का नया फीचर भी दिया गया है. ये एंटीवॉयरस उन एप्‍लीकेशन्स को ब्‍लॉक कर देता है जिससे वॉयरस या फिर और भी कोई अनावश्यक चीज डिवाइस में आती है और आपके फोन या कम्प्यूटर को नुकसान पहुंचा सकती है.

डिजिटल बनाए जीवन आसान

डिजिटल भुगतान एक वर्चुअल शौपिंग मौल की तरह है, जहां आप के पास बैंक, दुकानें, टैक्सियां, ईटरीज एवं मनोरंजन की सुविधाएं आदि उपलब्ध होती हैं, लेकिन आप के पास किसी भी प्रकार का भौतिक संवाद नहीं होता. फिर भी आप की सभी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है.

कैसे बनें डिजिटल

– सब से पहले आप के पास एक स्मार्ट फोन अथवा एक इंटरनैट कनैक्शन के साथ एक कंप्यूटर होना जरूरी है.

– आप का एक ईमेल ऐड्रैस होना चाहिए जहां पर आप के सभी पत्राचार दस्तावेज के तौर पर दर्ज होते हैं.

– आप को उन बैंक/खरीदारी करने वाले स्थान इत्यादि की वैबसाइट पर जाना चाहिए, जिन के साथ आप सौदा करना चाहते हैं और इस के लिए आप उन की वैबसाइट खोलें अथवा उन के मोबाइल ऐप को डाउनलोड करें.

– अधिकांश वैबसाइट्स आप को यूजरनेम व पासवर्ड उपलब्ध कराएंगी, जिसे आप के ईमेल ऐड्रैस पर भेज दिया जाएगा.

– उदाहरण के लिए बैंकिंग में आप को एक यूजर आईडी व पासवर्ड (अपने बैंक से एक बार आप इंटरनैट बैंकिंग के लिए निवेदन कर सकते हैं) दिया जाएगा और इस प्रकार आप इस का इस्तेमाल कर सकते हैं.

औनलाइन खरीदारी सस्ती और आसान

औनलाइन खरीदारी के लिए आप किसी भी अग्रणी वैबसाइट जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील इत्यादि पर जा कर अपनी खरीदारी वाले विभिन्न उत्पादों की जांच कर सकते हैं. आप कीमत की तुलना कर सकते हैं और अपनी पसंद की वस्तु का चयन कर सकते हैं. खरीदारी करने के लिए आप को केवल और्डर देना होगा और अपने बैंक अथवा क्रैडिट/डैबिट कार्ड अथवा मोबाइल वौलेट्स जैसे पेटीएम, फ्रीचार्ज एवं अन्य के माध्यम से इलैक्ट्रौनिक तरीके से भुगतान करना होगा.

हर बार जब आप खरीदारी के लिए लेनदेन करेंगे, आप के मोबाइल पर आप के बैंक की तरफ से एक वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आप वास्तव में खाते के मालिक हैं और इस लेनदेन को अंजाम देने जा रहे हैं. एक बार जब आप अपनी पसंद का सामान मंगा लेते हैं, तब आप उस वैबसाइट से सामान भेजे जाने की स्थिति पर औनलाइन नजर रख सकते हैं, जहां से आप ने सामान मंगवाया है.

त्वरित और सुविधाजनक

अब यदि आप एक मित्र, रिश्तेदार अथवा आपूर्तिकर्ता को धन का हस्तांतरण करना चाहते हैं, तब आप इंटरनैट बैंकिंग का इस्तेमाल कर इसे बहुत आसानी से पूरा कर सकते हैं. इस के लिए आप को केवल ‘प्राप्तकर्ता’ (जिसे आप धन भेजना चाहते हैं) को फंड ट्रांसफर के सैक्शन के अंतर्गत जोड़ना होगा और प्राप्तकर्ता का खाता नंबर, बैंक का नाम और शाखा का पता अथवा आईएफएससी कोड का विवरण भरना होगा, जोकि प्राप्तकर्ता की चैकबुक पर दिया गया है (अधिकांश बैंकिंग साइट्स आप को अपनी स्वयं की साइट पर ऐसा करने में सहायता करती हैं). इस के बाद आप एक बार फिर सुरक्षा के लिए ओटीपी प्रमाणन की प्रक्रिया से गुजर कर आसानी से धन का हस्तांतरण कर सकते हैं.

यदि ‘प्राप्तकर्ता’ एक ऐसा व्यक्ति है, जिस के साथ आप नियमित रूप से सौदे करना चाहते हैं, तब आप को हस्तांतरण के लिए हर बार पंजीकृत होने की आवश्यकता नहीं है, आप को केवल रजिस्टर्ड (पेईज) की सूची में जाने की आवश्यकता होगी और उस का नाम चुन कर धन हस्तांतरण को अंजाम देना होगा. सब से बड़ी सुविधा की बात यह है कि यह सुविधा 24 घंटे और 7 दिन उपलब्ध है, इसलिए आप को पैसा भेजने के लिए हर बार बैंक जाने की आवश्यकता नहीं है. इस के इतिरिक्त आप को चैकबुक की भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अब हर चीज डिजिटल है.

यदि आप नियमित अंतराल पर किसी अन्य पक्ष को विशिष्ट धनराशि हस्तांतरित करना चाहते हैं, तो अपने वित्तीय संस्थान को ऐसा करने के लिए स्थायी अनुदेश दे सकते हैं. एक बार यह स्थायी अनुदेश देने के बाद आवश्यक धनराशि अपनेआप ही दी गई तारीख पर उस पक्ष को हस्तांतरित हो जाएगी.

डिजिटल वौलेट्स का करें इस्तेमाल

हालिया विमुद्रीकरण के बाद नकदी की बड़ी कमी रही है, लेकिन डिजिटल भुगतान के ढेर सारे तरीके उपलब्ध हैं. आप भुगतान के लिए अपने क्रैडिट अथवा डैबिट कार्ड को स्वाइप कर सकते हैं अथवा इंटरनैट बैंकिंग के माध्यम से अन्य व्यक्ति के खाते में मनी ट्रांसफर कर सकते हैं. यदि ये विकल्प उपलब्ध नहीं हैं, जैसेकि आप के सब्जी विक्रेता के पास यह जरीया नहीं उपलब्ध है, तब आप पेटीएम अथवा फ्रीचार्ज इत्यादि के इस्तेमाल से उसे भुगतान कर सकते हैं. यह विकल्प बहुत आसानी से मोबाइल फोन के जरीए काम करता है. इस के लिए आप को केवल पेटीएम ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा. एक बार डाउनलोड पूरा होने पर आप अपने बैंक खाते से धन को कुछ उपायों का इस्तेमाल कर पेटीएम में हस्तांतरित कर सकते हैं और इस के बाद आप उस व्यक्ति का नंबर डालें जिसे आप धन हस्तांतरित करना चाहते हैं. सामान्य तौर पर पैसा भेजने वाला और पैसा प्राप्त करने वाला व्यक्ति इस राशि को अपने बैंक के खाते में हस्तांतरित कर निकालना नहीं चाहता. ऐसी स्थिति में उसे औसतन 4 से 6% का भुगतान करना पड़ता है.

इस के अतिरिक्त आप फ्लाइट, होटल और रेलवे बुकिंग के लिए भी डिजिटल विकल्प को अपना सकते हैं. आप आसानी से मेकमाईट्रिप, ईजमाईट्रिप इत्यादि जैसी वैबसाइट्स पर ऐअरलाइंस की दरों की तुलना कर सकते हैं और सर्वश्रेष्ठ सौदे प्राप्त कर सकते हैं अथवा ओयो, गोआईबिबो, क्लियरट्रिप इत्यादि होटल बुकिंग की वैबसाइट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप बुक माई शो पर अपने मूवी टिकट बुक कर सकते हैं.

राशन की खरीदारी भी अब डिजिटल हो गई है. बिगबास्केट, लोकलबन्या और ग्रोफर्स के साथ आप अपनी सुविधा से अपने राशन की खरीदारी कर सकते हैं और अपनी आवश्यकता के अनुसार सामान प्राप्त करने के लिए अपनी सुविधानुसार समय का चयन कर सकते हैं. अगले 4 दिनों की डिलिवरी स्लौट के लिए ऐक्सप्रैस डिलिवरी (60 से 90 मिनट में डिलिवरी) का विकल्प उपलब्ध कराया गया है. ताजा सब्जियों से ले कर फ्रोजन आइटम्स तक, पोल्ट्री से मछली और मांस तक अब सब कुछ औनलाइन उपलब्ध है. कैश औन डिलिवरी विकल्प के अतिरिक्त आप नैट बैंकिंग, क्रैडिट/डैबिट कार्ड अथवा वौलेट्स के जरीए भुगतान कर सकते हैं. वौलेट के इस्तेमाल से आप को अकसर अच्छे सौदे हाथ लग जाते हैं और छूट जैसी कई लुभावनी पेशकश भी मिलती हैं.

बैंकिंग आप की उंगलियों पर

बैंक बाजार, डील4लोन्स, पौलिसी बाजार इत्यादि वैबसाइट्स पर जा कर आप सस्ते कर्ज अथवा बीमा पौलिसियों को भी प्राप्त कर सकते हैं. व्यक्तिगत ऋण के लिए आप बैंक की शाखा में जाए बगैर औनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं. यदि आप निवेशक हैं, तब आप इस के चयन के पूर्व विभिन्न बैंकों की एफडी दरों की तुलना कर सकते हैं, जिस से आप को सर्वश्रेष्ठ दर की जानकारी प्राप्त होगी.

इसी के समान एक विकल्प के तहत आप प्रत्येक माह 500 तक के न्यूनतम निवेश के साथ एक आरडी (रैकरिंग डिपौजिट) खोल सकते हैं. आप डिजिटल विकल्प का इस्तेमाल कर म्यूचुअल फंड्स की औनलाइन खरीदारी भी कर सकते हैं. यदि आप शेयर बाजार में प्रत्यक्ष निवेशक हैं तब आप औनलाइन तौर पर एक डीमैट खाता खोल कर बिना किसी परेशानी के लेनदेन कर सकते हैं. इस के जरीए आप अपनी संभावित खरीदारी वाले प्रत्येक स्टौक की कीमत की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं.

डिजिटल ही भविष्य है

काफी चुनौतियों के बावजूद डिजिटल लेनदेन जिंदगी जीने का एक ढंग बन जाएगा. जितनी जल्दी हम इसे अपनाएंगे, उतनी जल्दी हमारे लिए आसान और शानदार जीवन का मार्ग भी प्रशस्त होगा. अपने बैंक बैलेंस की जांच से ले कर एफडी बनाने और बिलों का भुगतान करने तक डिजिटल विकल्प व्यक्तिगत वित्त जीवन को असुविधा और झंझट से छुटकारा दिलाएगा. आप किसी को एक बार भुगतान कर सकते हैं अथवा कुछ सैकंड्स में अपने धन की जानकारी मिल जाती है और साथ ही साथ उस की उपयोगिता का भी पता चल जाता है. ऐसे में आप अपने फोन अथवा कंप्यूटर के इस्तेमाल से चलतेफिरते आर्थिक व निवेश संबंधी महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं. इस प्रकार आप कुछ उपायों का इस्तेमाल कर स्वयं ही अपने सलाहकार और प्रबंधक बन सकते हैं.

दुरुपयोग से बचने के उपाय

जब आप औनलाइन गतिविधियों में शामिल होते हैं, तब आप को कुछ एहतियात बरतने की भी आवश्यकता है, क्योंकि ये वैबसाइट्स कुछ चुनौतियां भी ले कर आती हैं:

– यदि आप अपना फोन गंवा देते हैं, तो आप के वौलेट बैलेंस का गलत इस्तेमाल हो सकता है.

– यदि आप अपने बैंक अकाउंट आईडी व पासवर्ड को मिसप्लेस कर देते हैं, तो इस का गलत इस्तेमाल हो सकता है.

– यदि आप असुरक्षित स्थान पर क्रैडिट कार्ड्स का इस्तेमाल करते हैं तब वहां पर जालसाजी की संभावना काफी बढ़ जाती है.

– यदि आप यात्रा और ठहरने की तिथि के चयन में किसी प्रकार की गलती कर देते हैं तब आप को उसे रद्द कराने अथवा उस में सुधार करने के लिए अनावश्यक भुगतान भरना पड़ सकता है.

– आप जिन वैबसाइट्स को डाउनलोड करते हैं, वे एसएमएस सहित आप की फोन की गतिविधियों को ट्रैक कर सकती हैं, इसलिए अनजानी वैबसाइट्स को डाउनलोड करते समय सावधान रहें, जो असुरक्षित हो सकती हैं.   

– राकेश मक्कड़

फुलर्टन इंडिया क्रैडिट कंपनी लिमिटेड

फेसबुक के बाद अब अलीबाबा का मुफ्त इंटरनेट

वर्तमान समय में अधिकतम व्यक्ति इंटरनेट के बिना रहने का सोच भी नहीं सकते है. खासकर युवाओं को इंटरनेट की सबसे ज्यादा जरुरत होती है. इसी के चलते चीन की इंटरनेट कंपनी अलीबाबा जल्द ही भारत में मुफ्त इंटरनेट मुहैया करा सकती है. अलीबाबा सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के बाद ऐसा करने वाली दूसरी कंपनी हो सकती है. अलीबाबा कंपनी इस समय देशभर में मुफ्त इंटरनेट मुहैया कराने के लिए टेलीकॉम कंपनियों और वाई-फाई प्रदाताओं से बातचीत कर रही है.

अलीबाबा मोबाइल बिज़नेस कम्पनी सर्विस प्रोवाइडर या वाई-फाई प्रोवाइडर के साथ मिलकर काम करने पर विचार कर रही है. अलीबाबा मोबाइल बिजनेस कम्पनी यूजर के लिए डेटा की कीमत कम करने और कनेक्टिविटी भी पहले की तुलना बेहतर करने की कोशिश कर रही है. अलीबाबा द्वारा भारत के सभी वाई-फाई प्रोवाइडर से भी बात कर रही है.

अभी अलीबाबा अपने प्लान पर काम ही कर रही है. इस संबंध में वह बहुत से भावी साझीदारों से बातचीत भी कर रही है. चीनी कंपनी की योजना कमजोर कनेक्टिविटी वाले राज्यों में इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की है. भारत में सभी राज्यों में कनेक्टिविटी की समस्या नहीं है. इसलिए अलीबाबा कम्पनी उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित रखेगी जहां पर कनेक्टिविटी की समस्या है. भारत में सबसे पहले मौजूदा ग्राहकों की जरूरतों का विश्लेषण किया जायगा, जिन्हें इन सेवाओं की ज़रूरत है.

अलीबाबा पहली कंपनी नहीं है जिसने भारत में मुफ्त इंटरनेट मुहैया कराने के बारे में सोचा है. इससे पहले फेसबुक ने Internet.org और फ्री बेसिक्स प्रोजेक्ट के ज़रिए भी कुछ ऐसा ही करना चाहा था. हालांकि, नेट निरपेक्षता के सिद्धांतों के कारण फेसबुक की योजना की योजना सफल नहीं हो पाई थी.

जब 72 गेंद में ही लग गया तिहरा शतक

क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट टी-20 में तिहरा शतक जड़ इतिहास रचने वाले दिल्ली के मोहित अहलावत सुर्खियों में हैं. दिल्ली में एक लोकल क्रिकेट टूर्नामेंट में खेली गई अपनी पारी में अहलावत ने 10 या 20 नहीं बल्कि 39 बार गेंद को छक्के के लिए मैदान से बाहर भेजा. अपनी इस अद्भुत पारी में अहलावत ने 14 चौके भी जड़े.

मोहित ने सिर्फ 72 गेंदों में नाबाद 300 रन की पारी खेलकर सनसनी फैला दी है. इस अद्भुत पारी के बाद उनकी टीम ने 20 ओवर में दो विकेट पर 416 रन बनाए और मैच 216 रन से जीता.

दिल्ली के लिए तीन प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले 21 साल के अहलावत मावी एकादश की ओर से फ्रेंड्स प्रीमियर लीग में फ्रेंड्स एकादश के खिलाफ खेल रहे थे. इस पारी के बाद 21 साल के इस विकेटकीपर बल्लेबाज का नाम अचानक भारतीय क्रिकेटप्रेमियों की जुबान पर चढ़ गया है.

इस पारी से अहलावत की नजर अब बड़े मंच पर अपना जलवा बिखेरने की है. मोहित ने ये पारी उस समय खेली है, जब आईपीएल 10 के लिए नीलामी होने में कुछ ही दिन बाकी हैं. ऐसे में उन्हें खरीदने को लेकर आईपीएल टीम के मालिकों के बीच होड़ लग सकती है.

मोहित को IPL का इंतजार

मोहित अहलावत अब तक आईपीएल में भी नहीं खेल पाए हैं. 72 गेंदों पर तिहरे शतक का उनका करिश्मा ऐसा है जो आईपीएल टीमों के मालिकों का ध्यान जरूर खींचेगा. मोहित ने आईपीएल नीलामी के लिए अपना नाम भी भेजा है. हालांकि उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता कि यह पारी नीलामी में मालिकों का ध्यान खींच पाएगी या नहीं.

3 प्रथम श्रेणी मैच खेले

मोहित ने अब तक सिर्फ 3 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं. उन्होंने रणजी ट्रोफी में 3 बार दिल्ली का प्रतिनिधत्व किया. टीम इंडिया के पूर्व ओपनर और दिल्ली के कप्तान गौतम गंभीर ने मोहित अहलावत को रणजी टीम में जगह दी थी लेकिन तब किस्मत ने इस खिलाड़ी का साथ नहीं दिया.

तीनों ही बार मोहित नाकाम रहे और 5 पारियों में सिर्फ 5 रन ही बना सके. हालांकि इस धमाकेदार पारी से उनकी किस्मत बदल सकती है और उन्हें आईपीएल 10 में खेलने का मौका मिल सकता है.

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने अक्टूबर 2015 में दिल्ली की तरफ से राजस्थान के खिलाफ जयपुर में डेब्यू किया था. उस मैच की पहली पारी में 1 और दूसरी पारी में 4 रन बनाए थे. इसके बाद खेले गए 2 प्रथम श्रेणी मैचों की 3 पारियों में वह अपना खाता तक नहीं खोल सके. अक्टूबर 2015 में ही हरियाणा के खिलाफ उन्होंने आखिरी बार प्रथम श्रेणी मैच खेला है.

बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद उन्हें फिर से दिल्ली की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला. हालांकि मोहित अहलावत को उम्मीद है कि उनकी यह पारी गौतम गंभीर का ध्यान जरूर खींचेगी और वह उनपर विश्वास दिखाते हुए दूसरा मौका जरूर देंगे.

लाल बहादुर शास्त्री क्रिकेट अकादमी से ली ट्रेनिंग

मोहित दिल्ली की लाल बहादुर शास्त्री एकेडमी में अभ्यास करते हैं. इस एकेडमी से गौतम गंभीर और अमित मिश्रा जैसे बड़े खिलाड़ी निकले हैं.

भाजपा में टिकट बिकने का लांछन

भाजपा ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जिस तरह से टिकट वितरण में अपनों की उपेक्षा की उससे आहत पार्टी के लोग दबी जुबान से तमाम तरह के आरोप लगा ही रहे थे कि इसी बीच पूर्व एमएलसी और लखनऊ पब्लिक स्कूल के संस्थापक एसपी सिंह ने कहा कि टिकट देने के बदले करोडों रूपये मांगे गये थे. एसपी सिंह ने अपनी एमएलसी पत्नी कांती सिंह के साथ इस बात पर भाजपा से नाराज होकर समाजवादी पार्टी का साथ पकड़ा. एसपी सिंह अभी तक एमएलसी का चुनाव जीतते रहे हैं. लोकसभा चुनाव के पहले से वह भाजपा के साथ थे. वह अब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे. बांगरमऊ विधानसभा जिला उन्नाव से वह टिकट मांग रहे थे. भाजपा के नेताओं के भरोसा देने पर वह 2 साल से इस क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे.

एसपी सिंह कहते हैं ‘भाजपा नेता उनको लगातार इस बात का भरोसा दे रहे थे कि टिकट उनको ही मिलेगा. बाद में टिकट के बदले पैसे मांगने लगे. उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज के प्रतिनिधि पर आरोप लगाते एसपी सिंह ने कहा कि वह टिकट के बदले करोडों की मांग करने लगे. अपने आरोप को विस्तार देते एसपी सिंह ने कहा कि भाजपा में हर एक स्तर पर टिकट के लिये पैसे मांगे जा रहे हैं. बसपा और भाजपा की तुलना करते एसपी सिंह ने कहा कि ‘बसपा में जहां सिंगल विंडों सिस्टम है, वहीं भाजपा में सौ से ज्यादा जगहों पर पैसा मांगा जाता है.’

एसपी सिंह ने कहा कि वह अब चुनाव लड़ने का इरादा त्याग चुके हैं. वह कहते हैं कि संभव है कि इन मसलों की जानकारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को न हो, पर प्रदेश के प्रभारी ओम माथुर को इस बात की जानकारी है. प्रदेश में दलबदल करने वाले नेताओं के टिकट देने के नाम पर पैसे लिये गये हैं. एसपी सिंह ने कहा कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ हैं. अब चुनाव लड़ने के लिये सपा में नहीं आये है.

एसपी सिंह ने जो बात खुलकर कही वही बात भाजपा के तमाम नेता दबी जुबान में कहते रहे हैं. भाजपा ने बड़े पैमाने पर दलबदल करने वालों को विधानसभा का टिकट दिया है. केन्द्र स्तर पर यह कहा गया कि विधानसभा चुनाव में जीत के लिये बाहरी नेताओं का सहारा लेना जरूरी है. कई बार टिकट वितरण को लेकर भाजपा नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष का घेराव किया. उनकी कार के आगे लेट गये. राष्ट्रीय अध्यक्ष को काले झंडे दिखाये. टिकट वितरण को लेकर पहली बार भाजपा सवालों के घेरे में आ गई है. जो बात भाजपा कार्यकर्ता दबी जुबान में कह रहे थे वही अब एसपी सिंह ने खुलकर कह दी है.

भाजपा जिस तरह से बसपा और सपा पर टिकट बेचने का आरोप लगाती थी अब वही आरोप खुद पर लगा है. इसे वह टिकट न मिलने की खीझ कह सकती है. जनता के बीच यह बात उसी तरह से सही मानी जा रही है जिस तरह से बसपा और सपा के संबंध में मानी जाती है. राजनीतिक शुचिता और ईमानदारी की बात करने वाली भाजपा का दामन भी दागदार है. अब इस पर किसी तरह की सफाई जनता को समझ नहीं आ रही. उसे लग रहा है कि अगर देश में मोदी की हवा चल रही है और भाजपा अपने बल पर विधानसभा चुनाव जीत सकती है तो अपनों की उपेक्षा कर दलबदल करने वालों को टिकट क्यों दिया गया? इसका जबाव भाजपा नेताओं के पास नहीं है.              

जानिए किसके समर्थन से बागी हुए पनीरसेल्वम..!

तमिलनाडु की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ी हुई है. जयललिता की मौत के बाद अन्नाद्रमुक के अंदर नेतृत्व को लेकर जारी कलह अब सतह पर है और मुख्यमंत्री पद से दबाव में हटे ओ पनीरसेल्वम ने मीडिया से कहा है कि वे अम्मा के अपोलो अस्पताल में भरती रहने के दौरान 75 दिनों तक अस्पताल गये, लेकिन उन्हें कभी जयललिता से मिलने नहीं दिया गया. सिर्फ राज्यपाल ही उनसे अस्पताल में दो बार मिल सके थे. उन्होंने यह भी कहा है कि जयललिता चाहती थीं कि वे ही मुख्यमंत्री बनें. ध्यान रहे कि मंगलवार की देर रात पनीरसेल्वम जयललिता की समाधि पर पहुंचे थे और ध्यान लगाया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें यहां अम्मा की आत्मा ने बुलाया है और मीडिया में शशिकला के विरोध में बयान दिया.

पनीरसेल्वम को पार्टी के कुछ नेताओं का समर्थन मिलता दिख रहा है. वहीं, भाजपा का भी रुख पनीरसेल्वम के प्रति नरम नजर आ रहा है. संभवत: भाजपा को अन्नाद्रमुक की कलह में इस दक्षिणी  राज्य में अपने लिए संभावनाएं दिख रही है. भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एच राजा ने एक ट्वीट में कहा है कि पनीरसेल्वम ने मीडिया से स्पष्ट कहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा शशिकला मंडली के दबाव में दिया है. उन्होंने पनीरसेल्वम के इस साहस पूर्ण एलान के लिए उन्हें बधाई भी दी है. पनीरसेल्वम ने शशिकला खेमे के डीएमके से मिले होने के आरोपों पर कहा है कि उनका डीएमके से कोई रिश्ता नहीं है और न ही उन्हें भाजपा इस मुद्दे पर सपोर्ट कर रही है.

पनीरसेल्वम ने यह भी कहा है कि उन्हें 10 साल पहले अम्मा ने पार्टी कोषाध्यक्ष बनाया था और अन्नाद्रमुक में किसी को अधिकार नहीं है कि उन्हें इस पद से मुक्त कर दे. उन्होंने यह भी कहा है कि अम्मा उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं. मालूम हो कि कल देर रात मीडिया में पनीरसेल्वम का खुला बयान आने के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था और शशिकला ने कहा था कि उन्हें जल्द पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी हटा दिया जायेगा. वहीं, पार्टी के नये कोषाध्यक्ष व राज्य सरकार के मंत्री दीनदिगुल श्रीनिवासन ने कहा है कि पार्टी की सभी विधायक शशिकला के साथ हैं.

तमिलनाडु में मंगलवार रात करीब 9 बजे नए राजनीतिक ड्रामे का आगाज़ हुआ जो लोग आमतौर पर तमिल फिल्मों में देखते हैं. पनीरसेल्वम मरीना बीच पर जयललिता की समाधि पर आए और करीब 40 मिनट तक वहीं बैठे रहे. वहां से उठने के बाद उन्होंने बहुत संयत हो कर जो बातें कही हैं उनमें कई ऐसे क़ानूनी बिंदु हैं जो अब तक शशिकला का समर्थन कर रहे पार्टी के विधायकों को भी उनसे दूर कर सकते हैं.

एक और अहम बात ये है कि एक ही झटके में उन्होंने पार्टी के उन कैडरों का दिल जीत लिया है जो शशिकला और उनके परिवार के लोगों का पार्टी पर नियंत्रण होने से नाखुश हैं. पार्टी के छोटे बड़े नेताओं की भारी भीड़ मंगलवार रात पनीरसेल्वम के साथ मौजूद थी जबकि शशिकला के घर (जयललिता का पुराना घर पोएस गार्डेन) केवल मंत्रियों की गाड़ियों को ही जाते देखा गया.

पनीरसेल्वम ने जिन क़ानूनी बिंदुओं का जिक्र किया है, वो गवर्नर को ऐसा फैसला करने के लिए बाध्य करेंगे जिनका फायदा पनीरसेल्वम को हो सकता है. पनीरसेल्वम ने तीन अहम बातें कही हैं. पहली ये कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि पार्टी के विधायक दल की बैठक है. दूसरी ये कि उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया. और तीसरी कि उन पर विधायक दल के नेता के रूप में शशिकला का नाम प्रस्तावित करने के लिए दबाव बनाया गया.

गवर्नर को पनीरसेल्वम की कही बातों पर विचार करना होगा क्योंकि जब पनीरसेल्वम आधिकारिक रूप से गवर्नर को ये बताएंगे कि उन्हें इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया गया तो गवर्नर को उन्हें विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए कहना पड़ेगा. पनीरसेल्वम तब कह सकते हैं कि वो हफ़्ते-दस दिन बाद अपना बहुमत साबित करेंगे. तब तक आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ जाएगा.

दिलचस्प है कि पनीरसेल्वम ने गवर्नर को जो इस्तीफे का पत्र लिखा उसमें एक ऐसी बात है जो आमतौर पर कोई मुख्यमंत्री नहीं लिखता. उनके दस्तख़त के ठीक नीचे समय भी लिखा है. वक्त था 1.41 पीएम. इस समय तक पार्टी विधायकों की बैठक शुरू नहीं हुई थी. मतलब साफ है कि उन्हें बैठक से पहले ही इस्तीफा देने के लिए विवश किया गया.

हालांकि सबको यकीन है कि सौम्य स्वभाव के पनीरसेल्वम ने ये कदम किसी ताकतवर शख्स के समर्थन के बगैर नहीं उठाया है. विश्लेषक मान रहे हैं कि पिछले दिनों जयललिता के अंतिम संस्कार और फिर दिल्ली में मुलाकात के दौरान पनीरसेल्वम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हावभाव से साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी पनीरसेल्वम के साथ है.

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव एच राजा का कहना है, "गवर्नर पनीरसेल्वम को विश्वासमत हासिल करने के लिए बुला सकते हैं क्योंकि उन्होंने इस्तीफ़ा देने पर मजबूर करने की बात कही है. तमिलनाडु के लोग इस बात से नाराज़ होंगे कि शशिकला के कुछ करीबियों ने मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने पर विवश किया."

तो ऐसे में सवाल उठता है कि शशिकला और पनीरसेल्वम दोनों में किसके साथ ज्यादा विधायक हैं? जानकारों की राय है कि ज़्यादातर विधायक पनीरसेल्वम के साथ हैं.

संक्षेप में तमिलनाडु अब फिर उसी स्थिति का सामना कर रहा है जो जयललिता के निधन के वक्त पैदा हुईं थी. एमजी रामचंद्रन की मौत के बाद पार्टी विभाजित हुई अब लगता है कि जयललिता की मौत के बाद भी इसे विभाजन देखना होगा.

अपनों पे सितम और गैरों पर करम

शाही जिंदगी जीने वाली जयललिता क्या एक क्रूर और कुंठित महिला थीं? इस सवाल का सटीक जवाब यही है कि हां यह संभव है. उन की अंतिम यात्रा में उन का अपना सगा कोई नहीं था. इसलिए नहीं कि जयललिता व्यक्ति से विचार हो गई थीं, बल्कि इसलिए कि वह गैरों को अपनाती रहीं और अपनों को ठुकराती रहीं.

22 सितंबर को जब वह चेन्नै के अपोलो अस्पताल में भरती हुई थीं, उस के कुछ दिनों बाद एक युवती उन्हें देखने और मिलने अस्पताल गई थी. पुलिस वालों को उस ने बताया था कि उस का नाम दीपा है और वह जयललिता की भतीजी है. लेकिन पुलिस वालों ने उसे खदेड़ दिया था. शायद उन्हें ऐसे ही निर्देश थे या फिर मुख्यमंत्री का कोई खून का रिश्तेदार भी है, इस बात से उन्हें कोई सरोकार नहीं था.

जयकुमार जयललिता के बड़े भाई थे, जिन्होंने बचपन में बहन के साथ बराबरी के अभाव झेले थे और संघर्ष भी किया था. तब उन के संबंध बेहद मधुर थे. सन 1971 मे मां की मौत होने तक तो जयललिता के अपने भाई से ठीकठाक संबंध रहे. लेकिन इस के बाद उन के संबंधों में खटास आ गई थी.

खटास की सही वजह किसी को नहीं मालूम, पर अंदाजा यह लगाया गया कि जयललिता के सार्वजनिक जीवन की व्यस्तता इस की वजह थी. जाहिर तौर पर यह वजह दमदार नहीं है. सन 1995 में जयकुमार की मौत के बाद जयललिता ने भाभी और उन के बच्चों की कोई खबर नहीं ली.

ऐसा लगता है कि जयकुमार को या तो बहन का उच्छृंखल स्वभाव पसंद नहीं था या फिर उस की लोकप्रियता हजम नहीं हो रही थी. उन्हें जयललिता की अंतरंग होती जा रही शशिकला नागवार गुजरती थी, जिस की हैसियत तमिलनाडु के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में दूसरे नंबर की थी. शशिकला को लोग चिन्नम्मा यानी मौसी कहते हैं. खदु शशिकला मानती भी थीं कि और कहती भी थीं कि वह जयललिता की सगी बहन नहीं हैं, पर किसी भी रिश्ते से बढ़ कर हैं.

एक मामूली सी वीडियो की दुकान चलाने वाली शशिकला पर मेहरबानी की तमाम हदें जयललिता ने शुरू कर दी थीं. इस मित्रता पर काफी बवाल भी मचता रहता था. लेकिन मां और एमजीआर के बाद शशिकला जयललिता की एक भावनात्मक जरूरत पूरी कर रही थीं, साथ ही साथ वह उस की मुकम्मल कीमत भी वसूल रही थीं. शशिकला के पति सहित तमाम रिश्तेदार अच्छे ओहदों पर हैं और करोड़ों अरबों का व्यापार करते हैं.

पनीरसेल्वम जब मुख्यमंत्री बने तो उन्हें भी शशिकला के दरबार में हाजिरी दर्ज करानी पड़ी थी, जो अब अपनी सहेली की विरासत की मालकिन हैं. अपने दत्तक पुत्र सुधाकरण, जो शशिकला का भांजा भी था, की शादी में अनापशनाप खर्च कर गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुकीं जयललिता शक्की भी बहुत थीं.

अपने इर्दगिर्द के जमावड़े को ले कर वह आशंकित भी रहती थीं. यानी असुरक्षा उन में स्थाई रूप से थी. यही वजह थी कि सुधाकरण से वह नाराज हुईं तो फिर उस की तरफ मुड़ कर नहीं देखा. एक बार उन्होंने शशिकला पर भी जहर देने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.

शशिकला समझदार निकलीं, जो फिर से जयललिता के करीब जा पहुंचीं और उन के बाद उन के साम्राज्य की मालकिन हैं. लेकिन साफ दिख रहा है कि चिनम्मा कभी अम्मा नहीं हो सकतीं.

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