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अपना ही तमाशा बनाने वाली लड़की: भाग 1

राजस्थान में कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी. कई जगह पारा माइनस तक पहुंच गया था. ऐसी ठंड में 10 जनवरी को  सुबह करीब 5 बजे जयपुर में पुलिस कंट्रोल रूम के फोन की घंटी बजी. सुबहसुबह कंट्रोल रूम में हीटर पर हाथ सेंक रहे ड्यूटी अफसर ने फोन उठाया. दूसरी ओर से किसी लड़की ने रोते हुए धीमी सी आवाज में कहा, ‘‘हैलो.’’

‘‘हां बोलिए, मैं पुलिस कंट्रोल रूम से ड्यूटी अफसर बोल रहा हूं.’’

‘‘सर, मेरे साथ 4 लड़कों ने गैंगरेप किया है. रेप के बाद वे लड़के मुझे एमएनआईटी के पास फेंक गए हैं. मेरे कपड़े भी फटे हुए हैं.’’ लड़की ने सुबकते हुए कहा, ‘‘सर, उन बदमाशों ने मेरी जिंदगी बरबाद कर दी. मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.’’

गैंगरेप की बात सुन कर ड्यूटी अफसर ने लड़की से उस का नामपता पूछ कर उसे सांत्वना देते हुए कहा, ‘‘तुम वहीं रुको, हम पुलिस की गाड़ी भेज रहे हैं.’’

सुबहसुबह गैंगरेप की सूचना मिलने पर कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिसकर्मी परेशान हो उठे थे. ड्यूटी अफसर ने तुरंत वायरलैस संदेश दे कर पैट्रोलिंग पुलिस टीम को मौके पर जाने को कहा. इस के बाद पुलिस अधिकारियों को वारदात की सूचना दी गई. एमएनआईटी यानी मालवीय नैशनल इंस्टीट्यूट औफ टेक्नोलौजी राजस्थान का जानामाना इंस्टीट्यूट है, जो जयपुर के बीच मालवीय नगर, झालाना डूंगरी में स्थित है.

कड़ाके की ठंड में सुबह 5 बजे लोगों का घर में रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं होता. लेकिन ठंड हो या गरमी, पुलिस को तो अपनी ड्यूटी करनी ही होती है. सूचना पा कर जयपुर (पूर्व) के पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए.

एमएनआईटी के सामने पुलिस अधिकारियों को वह लड़की मिल गई. उस के कपड़े फटे हुए थे और वह ठंड से कांप रही थी. उस के बदन पर काफी कम कपड़े थे. वह केवल एक कार्डिगन पहने थी, जिस से सर्दी से बचाव संभव नहीं था. उस ने बताया कि उस के साथ 4 लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है. लड़की की हालत देख कर पुलिस अधिकारियों को उन दरिंदों पर बहुत गुस्सा आया.

पुलिस अधिकारियों ने लड़की को सांत्वना दे कर पुलिस की गाड़ी में बिठाया और सदर थाने ले गए. थाने पहुंच कर सब से पहले अर्दली से उस लड़की के लिए गरमागरम चाय मंगवाई गई, साथ ही एक महिला कांस्टेबल से उस की गरम जैकेट ले कर लड़की को पहनने को दी गई, ताकि ठंड से उस का बचाव हो सके. कमरे में हीटर भी जला दिया गया, ताकि कुछ गरमाहट आ सके.

चाय पी कर और जैकेट पहन कर लड़की के शरीर में कुछ गरमाहट आई. लड़की कुछ सामान्य हुई तो पुलिस अधिकारियों ने उस से वारदात के बारे में पूछा. लड़की ने बताया कि उस का नाम उर्वशी है और वह जयपुर के जगतपुरा में अपने पिता व भाई के साथ रहती है. वे लोग कुछ महीने पहले ही जयपुर आए हैं. जबकि मूलरूप से उस का परिवार उत्तर प्रदेश के मैनपुरी का रहने वाला है. उर्वशी ने आगे बताया कि वह 9 जनवरी को अलवर में स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) की प्रतियोगी परीक्षा दे कर ट्रेन से जयपुर वापस आई थी.

ट्रेन से जयपुर जंक्शन पर उतर कर वह शाम करीब सवा 7 बजे स्टेशन से बाहर निकली. उसे जगतपुरा स्थित अपने घर जाना था. इस के लिए वह किसी सवारी का इंतजार कर रही थी, तभी एक औटो वाला जगतपुरा की आवाज लगाता हुआ सुनाई दिया. उस ने औटो वाले से पूछा कि जगतपुरा फाटक चलोगे तो उस ने कहा, ‘‘20 रुपए लगेंगे.’’

वह उस औटो में बैठ गई. औटो में पहले से ही 3 लड़के बैठे थे. औटो वाला सिंधी कैंप, नारायणसिंह सर्किल से होते हुए 2-3 घंटे तक घुमाता रहा. बाद में वह उसे एक ग्राउंड में ले गया, जहां उन लोगों ने उस के कपड़े फाड़ दिए. इस के बाद औटो में बैठे तीनों लड़कों और औटो वाले ने उस के साथ दुष्कर्म किया. दुष्कर्म करने वाले 2 लड़के आपस में एकदूसरे का नाम संदीप और ब्रजेश ले रहे थे. उन दरिंदों ने उसे जान से मारने की नीयत से एक बोतल में भरा सफेद रंग का पेय भी पिलाया. वह पेय पीने के बाद उस ने उल्टी कर दी. लड़कों की उम्र 20-25 साल थी. बाद में वे चारों उसे औटो में बैठा कर अनजान जगह पर छोड़ गए.

जाने से पहले उन लड़कों ने उसे धमकी दी थी कि उन्होंने उस की वीडियो क्लिप बना ली है, किसी को बताया तो वे नेट पर डाल देंगे. उन सब के जाने के बाद उस ने वहां एक राहगीर से पूछा तो उस ने बताया कि यह जगह एमएनआईटी के पास है. इस के बाद वह एक बुजुर्ग की मदद से बस शेल्टर पर पहुंची और पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन किया.

इतनी सर्द सुबह उर्वशी के साथ हुई दरिंदगी की दास्तां सुन कर पुलिस अधिकारियों की आंखों में खून उतर आया. अधिकारियों ने उर्वशी से पूछ कर उस के घर वालों को सूचना दे कर उन्हें थाने बुलवा लिया. बेटी के साथ हुई दरिंदगी की बात जान कर उर्वशी के पिता फफकफफक कर रो पड़े. वह कुछ बोल नहीं पाए. पता चला कि वह मानसिक रूप से कमजोर थे. उर्वशी का छोटा भाई भी पिता के साथ थाने आया था.

पुलिस ने उर्वशी से उस के साथ दरिंदगी की लिखित रिपोर्ट ले कर सदर थाने में भादंवि की धारा 328, 367, 376डी व 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. सदर थाने में रिपोर्ट इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि लड़की का अपहरण रेलवे स्टेशन इलाके से हुआ था. हालांकि उर्वशी जहां मिली थी, वह इलाका जवाहरनगर सर्किल थाने के तहत आता था.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस उर्वशी को बनीपार्क स्थित सेटेलाइट अस्पताल ले गई. अस्पताल में उस की बोर्ड से मैडिकल जांच कराई गई. जांच में उस के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई.

नए साल के पहले पखवाड़े में राजधानी जयपुर में शाम को युवती का अपहरण करने के बाद रात भर उस से सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पुलिस अधिकारियों को हिला दिया था. जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने इस घटना को गंभीरता से लिया. उन्होंने अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर जयपुर (प्रथम) प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में जयपुर कमिश्नरेट, जयपुर पश्चिम एवं जयपुर पूर्व के अधिकारियों की टीमें गठित कर दीं. प्रफुल्ल कुमार ने पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अशोक कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस उपायुक्त (पूर्व) कुंवर राष्ट्रदीप, पुलिस उपायुक्त (अपराध) विकास पाठक, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रतन सिंह, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पूर्व) हनुमान सहाय मीणा, सहायक पुलिस आयुक्त (सदर) नीरज पाठक, प्रशिक्षु आईपीएस सुश्री तेजस्विनी गौतम, सहायक पुलिस आयुक्त (झोटवाड़ा) आस मोहम्मद, सहायक पुलिस आयुक्त राजपाल गोदारा, थानाप्रभारी (चौमूं) जितेंद्र सिंह सोलंकी, थानाप्रभारी (हरमाड़ा) लखन सिंह खटाना, थानाप्रभारी (सदर) रड़मल सिंह, थानाप्रभारी (करघनी) अनिल जसोरिया, थानाप्रभारी (बनीपार्क) धर्मेंद्र शर्मा सहित एक दरजन थानाप्रभारियों के नेतृत्व में अलगअलग टीमें बना कर जांच शुरू कर दी.

पुलिस को सब से पहले उस औटो वाले का पता लगाना था, जिस में बैठ कर उर्वशी ने जाने की बात कही थी. इस के बाद उस जगह का पता लगाना था, जहां उस के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था. इसी के साथ उर्वशी से दरिंदगी करने वाले संदीप और ब्रजेश सहित अन्य आरोपियों का पता लगाना था.

पुलिस ने जांच शुरू करते हुए सब से पहले रेलवे स्टेशन और उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग खंगाली. एक रिकौर्डिंग में उर्वशी रेलवे स्टेशन से बाहर जाती नजर आ रही थी. रेलवे स्टेशन के बाहर 3 जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन वे खराब थे.

पुलिस ने औटो चालकों से पूछताछ शुरू की. जयपुर में करीब 8 हजार औटो हैं, लेकिन उन में किसी का भी वेरिफिकेशन नहीं है. उर्वशी ने पुलिस को हरेपीले औटो के बारे में बताया था. ये हरेपीले औटो सीएनजी से चलते हैं. ऐसे औटो की संख्या भी हजारों में है. पुलिस ने युवती के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर उस की भी जांच की, साथ ही मोबाइल टावर के आधार पर आरोपियों का पता लगाने की भी कोशिश की गई.

मॉडल ने करवाया बोल्ड फोटोशूट, फैन्स के छूट गए पसीने

अपनी दिलकश अदाओं से दर्शको के दिल पर राज करने वाली हॉलीवुड मॉडल डेनिला लोपेज ओसोरिया ने हाल ही में एक ब्रांड के लिए हॉट फोटोशूट करवाया है. ये एक बिकिनी ब्रांड हैं. डेनिला फोटोशूट के दौरान बेहद सैक्सी लग रही हैं.

इस फोटोशूट के दौरान डेनिला ने काफी हॉट और बोल्ड सीन दिए हैं. लाइमलाइट में आने के लिए यह मॉडल कुछ न कुछ इस तरह के फोटोशूट करके सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. उन्होंने व्हाइट, ब्लू, ब्लैक, रेड कलर की कुछ प्रिंटेट बिकिनी और स्विमिंग सूट पहन फोटोशूट करवाया है.

एक फोटो में वे व्हाइट बिकिनी में तरबूज खाती नजर आ रही हैं. वहीं, एक अन्य फोटो में पूल साइड में प्रिंटेड बिकिनी में दिख रही हैं. ब्लू कलर ऑफ शोल्डर बिकिनी में समुद्र में पोज देती दिख रही हैं. बता दें कि डेनिला डिफरेंट ब्रांड्स, मैगजीन्स के लिए फोटोशूट करवाती रहती हैं.

आप भी देखिए ये हॉट फोटोशूट

सलमान ने शुरू की 400 करोड़ की तैयारी

सलमान खान और शाहरुख खान को भले ही आमिर खान से बड़ा सितारा माना जाता हो, लेकिन बॉक्स ऑफिस की दौड़ में हमेशा आमिर खान इन दोनों को पीछे छोड़ देते हैं. और इन दोनों खानों को सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या वाकई सलमान खान और शाहरुख खान दोनों आमिर से बड़े सितारे हैं.

पहली सौ करोड़, पहली दो सौ करोड़ और पहली तीन सौ करोड़ क्लब की सभी फिल्में आमिर खान के ही नाम है. दंगल तो चार सौ करोड़ की पहली फिल्म होते-होते रह गई, लेकिन इस फिल्म ने सर्वाधिक कलेक्शन का नाम आमिर खान के नाम पर दिया है. जहां सलमान और शाहरुख अपनी फिल्मों के रिलीज के पहले गली-गली जा कर डंका पीटते हैं अपनी फिल्म के बारे में बताते हैं, वहीं आमिर चुपके से आते हैं और सारा बाजार लूट कर ले जाते हैं. 

सूत्रों का कहना है कि इस बार सलमान ने आमिर को पछाड़ने का मन बनाया है. उनकी इस वर्ष की पहली फिल्म 'ट्यूबलाइट' ईद पर प्रदर्शित होने वाली है. सलमान चाहते हैं कि यह फिल्म न केवल दंगल को पटखनी दे बल्कि चार सौ करोड़ क्लब की पहली फिल्म बने. वैसे आमिर खान ने भी दंगल के प्रदर्शन के पहले 'मिशन 400 करोड़' नाम का प्लान बनाया था जिसके अंतर्गत उन्होंने पुरजोर कोशिश की थी कि उनकी फिल्म चार सौ करोड़ का आंकड़ा पार करे. हालांकी पूरा दम लगाने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया. 

सलमान भी प्लान बना रहे हैं कि ईद पर उनकी प्रदर्शित हो रही फिल्म  ट्यूबलाइट की चमक कुछ ऐसी बिखरें कि आंखें चौंधिया जाए. फिल्म को 400 करोड़ का आंकड़ा पार कराने के लिए सलमान ने इसकी प्लानिंग शुरू कर दी है. ईद पर उनकी फिल्में ऐतिहासिक सफलता हासिल करती है और उसका पूरा फायदा सलमान उठाना चाहते हैं. सलमान की सबसे सफल फिल्म 300 करोड़ तक पहुंची है और 400 करोड़ दूर की कौड़ी नजर आती है, लेकिन सलमान को अपने स्टारडम पर भरोसा है. सलमान खान एक बार आमिर को पीछे छोड़ना चाहते हैं.

‘बिन आधार स्कॉलरशिप न होई’

आधार कार्ड को भले ही पिछली सरकार ने शुरू किया था, पर तत्कालिन सरकार इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ाती जा रही है. ट्रेन में टिकट से लेकर पेंशन लेने तक सब जगह आधार को अनिवार्य कर दिया गया है. इसी कड़ी में अब स्कूल और कॉलेज में भी आधार कार्ड को अनिवार्य करने की घोषणा की गई है. मानव संसाधन मंत्रालय (एचआरडी) ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) पाने वाले स्टूडेंट्स के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करने की घोषणा की है. स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को अपना आधार कार्ड देना होगा.

मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में छात्रों को जरा रियायत भी दी गई है. घोषणा के मुताबिक जिन छात्र-छात्राओं के पास आधार कार्ड नहीं है उन्हें 30 जून तक आधार के लिए एनरॉलमेंट करवाने का समय दिया गया है. आधार कार्ड मिलने तक छात्रवृति की सुविधा जारी रखने के लिए आधार आवेदन या एनरॉलमेंट स्लिप दिखाना होगा. यह नियम जम्मू-कश्मीर के स्टू़डेंट्स पर लागू नहीं होगा.

मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार जो बच्चे राष्ट्रीय साधन सह योग्यता छात्रवृत्ति योजना का लाभ उठाना चाहते हैं उन्हें 30 जून तक आधार के लिए आवेदन करना होगा. हालांकि कुछ राज्यों (जम्मू कश्मीर, असम और मेघालय) में आधार कार्ड दिखाने की अनिवार्यता नहीं है.

तो इसलिए अनिवार्य है आधार

सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय के ऐसे निर्णय के पीछे की वजह छात्रवृत्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाना है. साथ ही आधार की वजह से छात्रों कई सारे दस्तावेज लगाने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा.

अगर आधार नहीं है तो…

सूत्रों के मुताबिक जिन छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं है वो स्कॉलरशिप के लिए आधार एनरोलमेंट आईडी स्लिप, आधार एनरोलमेंट आवेदन, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड इत्यादि के जरिए भी ऐप्लाई कर सकते हैं.

राशन की दुकानों पर भी आधार

इससे पहले सरकार ने राशन की दुकानों से सब्सिडी वाले अनाज की लेने के लिए भी आधार अनिवार्य कर दिया गया था. खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 1.4 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी वाला अनाज जरूरतमंदों तक पहुंचाना है.

पीएफ और पेंशन की सुविधा के लिए आधार कार्ड जरूरी

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े खाताधारकों और पेंशनधारकों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य बना दिया गया है. ईपीएफओ ने खाता धारकों और पेंशनधारकों को 31 मार्च तक अपना आधार नंबर या उसके लिए आवेदन का सबूत जमा करने का निर्देश दिए हैं. 

जब क्रिकेट से 21 सालों के लिए बैन हुआ साउथ अफ्रीका

आज साउथ अफ्रीका विश्व की चुनिंदा टीमों में से एक है. लेकिन एक वक्त ऐसा था जब इस देश की टीम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बैन कर दिया गया था. लेकिन सवाल यह है कि साउथ अफ्रीका को क्रिकेट से बैन क्यों किया गया? आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी.

साउथ अफ्रीका क्रिकेट को टेस्ट टीम होने का दर्जा 1889 में ही मिल गया था, लेकिन इस टीम को 20वीं शताब्दी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पूरे 21 साल का बैन झेलना पड़ा. यहां तक की साउथ अफ्रीका ने अपना पहला विश्व कप साल 1975 में नहीं बल्कि 1992 में खेला. लेकिन साउथ अफ्रीका को क्रिकेट से बैन क्यों किया गया? आइए जानते हैं.

इसकी कहानी साल 1970 से शुरू होती है, जब आईसीसी ने साउथ अफ्रीका सरकार की रंगभेद नीति के कारण साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से निलंबित करने के लिए वोट किया. साउथ अफ्रीकी सरकार की रंगभेद नीति में कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे जिसने आईसीसी को दुविधा में डाल दिया था.

सरकार के नियमों के मुताबिक उनकी देश की टीम को श्वेत देशों (इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) के खिलाफ ही खेलने की इजाजत थी. साथ ही यह शर्त थी कि विपक्षी टीम में श्वेत खिलाड़ी ही खेलेंगे. आईसीसी के द्वारा साउथ अफ्रीका टीम को निलंबित करने के बाद कई बड़े-बड़े साउथ अफ्रीकी खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया और कईयों का क्रिकेट करियर इसी इंतजार में खत्म हो गया कि कब साउथ अफ्रीका टीम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी मिलेगी.

आखिरकार पूरे 21 साल के बाद साउथ अफ्रीका में बदलाव आया और रंगभेद की नीति को खत्म किया गया. साथ ही आईसीसी ने साउथ अफ्रीका को साल 1991 में टेस्ट क्रिकेट का दर्जा फिर से वापस लौटा दिया.

साउथ अफ्रीका क्रिकेट भले ही 21 सालों के बाद क्रिकेट में फिर से लौटा, लेकिन अगले कुछ सालों में टीम में अश्वेत खिलाड़ियों के लिए आरक्षण को लागू किया गया. इस कानून के मुताबिक साउथ अफ्रीका टीम में 4 अश्वेत खिलाड़ियों का रहना जरूरी था. साउथ अफ्रीका टीम के पहले अश्वेत कप्तान के रूप में एश्वेल प्रिंस को 12 जुलाई 2006 को चुना गया. इस आरक्षण को साल 2007 में हटा लिया गया.

साउथ अफ्रीका ने टेस्ट दर्जा वापस मिलने के बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला. साउथ अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करने के बाद बेहतरीन क्रिकेट खेली और आगे के सालों में शॉन पोलक, एलन डोनाल्ड जैसे बेहतरीन क्रिकेटरों ने साउथ अफ्रीका  को शोहरत दिलाई. 

मैं एक युवक को चाहती हूं, वह सेक्स की डिमांड कर रहा है. अब वह किसी ओर से इश्क फरमा रहा है. क्या करूं.

सवाल

मैं पिछले 2 वर्ष से एक युवक को चाहती हूं, लेकिन कुछ समय से उस से मुलाकात नहीं हो पाई कारण था उस का मुझ से शारीरिक संपर्क बनाने की डिमांड जबकि मैं ने उस की यह डिमांड ठुकरा दी थी. तब से वह मुझ से बात भी नहीं करता. अभी कुछ समय से मुझे पता चला है कि वह किसी अन्य युवती से इश्क फरमा रहा है, जिस से मैं बहुत आहत हूं. बताइए, मैं क्या करूं?

जवाब

सब से पहले तो आप खुद को संभालिए. धैर्य रखिए और ठंडे दिमाग से सोचिए कि जो युवक सिर्फ आप से संबंध बनाने को मना करने पर नाराज हो गया उस का मकसद क्या होगा? यह एक अनुचित मांग है. अगर आप मान जातीं और उस के बाद वह किसी और के चक्कर में पड़ जाता तो आप क्या करतीं?

जी हां, अमूमन ऐसे युवक शारीरिक संबंध बनाने तक ही प्रेम समझते हैं फिर किनारा कर लेते हैं. आप खुद को समझाइए कि आप बच गईं. खुद को बिजी रखिए अपने जीवन को खुशहाल बनाने के उपाय कीजिए. उस का खयाल दिमाग से यह सोच कर निकाल दीजिए कि वह आप के लायक नहीं था.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

 

सैटिंग्स बदलकर बढ़ाएं अपने फोन की बैटरी

आज के वक्त की जरुरत बन चुके हैं स्मार्टफोन्स और ये बात तो आप भी अच्छे से समझते होंगे, क्योंकि आप भी इनके बड़े उपयोगकर्ता हैं. आप जब भी अपने लिए फोन लेने जाते हैं तो उसके कई फीचर्स को पहले परखते हैं. हम अपनी जरुरत के हिसाब से सबसे पहले फोन की बैटरी देखते हैं और यकीनन जिस फोन की बैटरी अच्छी होती है वही फोन खरीदना पसंद भी करते हैं.

एक अच्छी बैटरी वाला फोन लेने के बाद भी, अत्यधिक इस्तेमाल करने की वजह से आपके फोन की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है और फिर  आपको अपने फोन को बार-बार चार्ज करना पड़ता है. अब ऐसी परेशानियों से बचने के लिए, हम आपको कुछ सेटिंग्स बता रहे हैं, जिन्हें बदलकर आप अपने फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल में ले सकते हैं और फोन की बैटरी को जल्दी खत्म होने से बचा सकते हैं. तो आपको बताते हैं इन सेटिंग्स के बारे में..

जीपीएस :

आप भी अक्सर जीपीएस का यूज करते हैं और आजकल जीपीएस का प्रयोग ज्यादा ही किया जाने लगा है. इससे आप कभी भी कहीं भी, आपकी या दूसरे की लोकेशन का पता लगा सकते हैं. जब आप जीपीएस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हों तब आपको इसे ऑफ कर देना चाहिए. इसके लगातार चालू रहने से आपके फोन की बैटरी ज्यादा खर्च होती है, उसे ऑफ करने से बैटरी लंबे समय तक काम में आ सकती है.

पॉवर सेविंग मोड :

आपने देखा होगा कि आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन्स में पावर सेविंग मोड का ऑप्शन डिफॉल्ट ही आने लगा है और अगर आपके फोन में ये ऑप्शन अभी तक नहीं है तो आप देर न करें. जल्दी से जल्दी गूगल प्ले स्टोर से इसे डाउनलोड कर लें और हमेशा ही अपने फोन में इसे ऑन रखें. ये आपके फोन की बहुत बैटरी बचाता है.

स्क्रीन टाइमआउट :

स्क्रीन टाइमआउट सेटिंग से मतलब होता है कि जब आप अपने मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहे होंगे, तो खुद-ब-खुद आपके फोन की स्क्रीन लॉक हो जाएगी. अगर आप इस सेटिंग को फोन में यूज करते हैं तो आपके फोन की बैटरी जल्दी खत्म नहीं होती और लंबे समय के लिए चलती है. इस सेटिंग में आप आप खुद से ही सेलेक्ट कर सकते हैं कि कितने समय अर्थात कितने सेकेंड्स या मिनट्स के बाद आपके फोन की स्क्रीन अपने आप ऑफ हो जाएगी.

ध्यान से लें जीवन बीमा पॉलिसी

कल को किसी ने नहीं देखा है. धर्म के नाम पर बाजार लगाने वालों को भी आने वाले कल के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है. अपने आने वाले कल को सुरक्षित करने के लिए जीवन बीमा पॉलिसी लेना बहुत जरूरी है. अगर आपने अभी तक जीवन बीमा पॉलिसी नहीं ली है तो जीवन बीमा पॉलिसी के लिए जल्द से जल्द आवेदन कर दीजिए.

पर जीवन बीमा पॉलिसी के लिए भी कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है. अक्सर लोग पॉलिसी लेने में असमंजस में पड़ जाते हैं. कौन सी पॉलिसी लें, किस कंपनी से पॉलिसी लें, कितने की पॉलिसी लें? ये बातें आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनीं रहती हैं. जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते समय अक्सर लोग एजेंट की बातों पर ही भरोसा करते हैं. ऐसा करना भी सही नहीं है क्योंकि एजेंट पॉलिसी से जुड़ी कई जानकारियां आपको नहीं देते.

1. कैसे चुनें पॉलिसी ?

निवेश-सह-बीमा प्लैन को चुनने से पहले लाइफ कवर को समझना जरूरी है. यदि आप केवल सुरक्षा कवर का चुनाव करते हैं तो इससे सिर्फ बीमा मिलेगा. इसमें कोई बचत नहीं होगी. इंटरनेट पर दो-तीन वेबसाइट देखें और उनकी सिफारिशों की समीक्षा करें. किसी पॉलिसी को चुनने से पहले बेनेफिट इलस्ट्रेशन की समीक्षा करें.

2. किस कंपनी से चुनें पॉलिसी ?

एलआईसी जीवन बीमा पॉलिसी लेने के लिए अच्छी कंपनी है. पर आप कई प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों से भी जीवन बीमा पॉलिसी से ले सकते हैं. पर आपको अपने बजट और बीमा कवर की राशि के हिसाब से ही किसी कंपनी की पॉलिसी खरीदनी चाहिए.

3. तय करें बीमा कवर की राशि

आपको कितने बीमा की जरूरत है, यह जानने के लिए आपको इंटरनेट की मदद लेनी होगी. कई पर्सनल फाइनेंस की वेबसाइटों पर कैलकुलेटर उपलब्ध रहते हैं, जिनकी मदद से आप बीमा कवर की राशि कैलकुलेट कर सकते हैं.

4. कितनी हो पॉलिसी की अवधि ?

अगर आपके पास अधिक वित्तीय संपत्तियां हैं, तो आपको जीवन बीमा पर खर्च करने की जरूरत नहीं है. आमतौर पर लोगों के रिटायर होने तक ज्यादातर आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी हो चुकी होती हैं. इसलिए आपको ऐसी पॉलिसी लेनी चाहिए जो रिटायरमेंट की उम्र के आसपास खत्म हो जाएं.

5. किसी की मदद लें या खुद खरीदें पॉलिसी ?

आप एजेंट से विभिन्न पॉलिसियों का तुलनात्मक विश्लेषण उसकी सिफारिश के साथ मांग सकते हैं. एजेंट प्रीमियम लोडिंग, मेडिकल टेस्ट, एमडब्ल्यूपीए, इंश्योरेंस डीमैट अकाउंट खोलने में आपकी मदद कर सकता है.

6. क्या है एमडब्ल्यूपीए ?

मैरीड वीमन्स प्रोटेक्शन एक्ट के तहत पॉलिसी लेने से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बीमाधारक की मृत्यु के बाद क्लेम की राशि उसके परिवार को ही मिलेगी. इसका इस्तेमाल उसकी देनदारी चुकाने में नहीं होगा.

चुनावी सभाओं में नोटबंदी पर प्रधानमंत्री मौन

नोटबंदी को अपनी सरकार का सबसे साहसिक काम बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी सभाओं में नोटबंदी को लेकर मौन हैं. उत्तर प्रदेश में तीन चरणों का मतदान हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने प्रचार अभियान में कांग्रेस-सपा गठबंधन से लेकर, किसानों के विकास, मुलायम कांग्रेस परिवार, मंदिर मस्जिद, कब्रिस्तान और शमशान घाट तक हर मुद्दे पर बोल रहे हैं. नोटबंदी पर पूरी तरह से मौन हैं. विपक्ष के नोटबंदी पर दिये जा रहे बयान को वह कोई खास तबज्जों नहीं दे रहे हैं. नोटबंदी के दौरान यह कहा गया था कि इससे राजनीति में खर्च घटेंगे. तमाम सारे दल मनमाने तरह से खर्च नहीं कर पायेंगे. चुनाव में किसी भी दल या प्रत्याशी के लाव लश्कर को देखकर नहीं लगा कि नोटबंदी का चुनावों पर कोई असर पड़ा है.

नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 50 दिनों के बाद इसका असर देश पर दिखाई देगा. कालाधन आयेगा, मंहगाई घटेगी, बेईमान जेल जायेंगे. 50 दिन के बाद भी कोई असर दिखना शुरू नहीं हुआ. यह उम्मीद की जा रही थी कि प्रधानमंत्री अपनी चुनावी सभाओं में नोटबंदी के पीछे की जरूरत और आगे की अपनी रणनीति पर चर्चा करेंगे. नोटबंदी से भाजपा का मजबूत बनिया वोटर, किसान और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुआ था. उन सभी को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नोटबंदी पर बात करेंगे, अपनी आगे की योजना की भी घोषणा करेंगे. जनता को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री जब अलग अलग जगहों पर चुनावी रैली करेंगे तो जनता से अपने मन की बात कर उसका समर्थन नोटबंदी के मुद्दे पर मांग सकते है.

चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री का नोटबंदी पर चुप रहना कई तरह के सवाल खड़ा करता है. केन्द्र सरकार के जिस काम को सबसे मजबूत माना जा रहा है जिससे देश में भ्रष्टाचार खत्म करने, कालाधन रोकने उसे विकास योजनाओं में लगाने का काम हो सकता था उस पर प्रधानमंत्री मौन हैं. वह पहले के प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह पर यह आरोप तो लगाते हैं कि उनको रेन कोट पहन कर बाथरूम में नहाना आता था. वह नोटबंदी को लेकर अपनी योजनाओं पर नहीं बोलना चाहते. यह सच है कि नोटबंदी सरकार का बेहद गंभीर मसला है.

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और केन्द्र सरकार के काम पर लड़े जा रहे हैं. भाजपा ने यहां पर कोई अपना मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी तक नहीं सामने किया है. सभी लोग मोदी के नाम और काम पर वोट मांग रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नोटबंदी पर बात न करके अपने समर्थकों को निराश कर रहे हैं. अगर प्रधानमंत्री नोटबंदी पर बात करते तो चुनाव में उसका अलग असर पड़ता. नोटबंदी से परेशान जनता को राहत मिलती. विरोधी दल नोटबंदी को लेकर बारबार कह रहे हैं कि अच्छे दिनों का वादा करके प्रधानमंत्री ने पूरे देश को लाइन में लगा दिया. इसके बाद भी प्रधानमंत्री अपनी चुनावी रैलियों में नोटबंदी के मसले पर बोलने से बच रहे हैं.                        

अब व्हाट्सऐप भी करेगा मेैप की तरह काम

व्हाट्सऐप युवाओं का सबसे लोकप्रिय ऐप है. और जब व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए आए दिन नए-नए फीचर ले कर आता है तो और भी प्रिय हो जाता है.

व्हा‍ट्सऐप अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर शुरू करने जा रहा है. और इस फीचर से आप अपनी फ्रेंडलिस्ट में शामिल दोस्तों की लोकेशन का पता लगा सकते हैं. इस फीचर के जरिए व्हाट्सऐप आपको यह जानकारी देगा कि आपका कौन सा दोस्त किस वक्त कहां है. इस नए फीचर का नाम लाइव लोकेशन(Live Locations) होगा.

वैसे व्हा‍ट्सऐप आपके दोस्तों की पूरी जानकारी रियल टाइम उपलब्ध कराएगा. वैसे यह बात तो है कि जब से व्हाट्सऐप को फेसबुक ने टेकओवर किया है, तब से लगातार उसमें एक के बाद एक नए फीचर तथा सर्विसेस शुरू की जा रही हैं.

सुना जा रहा है कि व्हा‍ट्सऐप के नए-नए फीचर्स को देखते हुए ट्विटर भी लाइव लोकेशन वाला फीचर जल्द ही जारी कर सकता है.

लाइव लोकेशन के फीचर को कब तक लॉन्च किया जाना है अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि WABetaInfo नाम के वेबपेज से इस नए ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है.

अभी तक इस ऐप की ग्यारंटी न तो व्हाट्सऐप ने ली है और न ही एंड्रॉयड ने. और इसलिए जो भी यूजर इसे डाउनलोड करेंगे, वो इसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे. और पर अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस फीचर को बनाने के पीछे आखिर मकसद क्या है.

इस नए फीचर को एक्टिवेट करने के लिए सेटिंग्स में 'शेयर योर लोकेशन' को एक्टिवेट करना होगा.

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