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होमवर्क खुद करें

समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेक परिवर्तन हुए हैं. वर्तमान में शुरुआती शिक्षा में अक्षर ज्ञान को रटने के स्थान पर क्रियात्मक तथा भावात्मक विकास से जोड़ा गया है. अब बच्चे खेलखेल में पढ़ते हैं. विषयों को रुचि कर बनाने के उद्देश्य से उन का बारबार अभ्यास करने के बजाय अनेक प्रकार की मनोरंजक वर्कशीट्स तैयार की जाती हैं. आज गूगल, यूट्यूब आदि पर सभी विषयों के एक से बढ़ कर एक ट्यूटोरियल उपलब्ध हैं. ऐसे समय में छात्रों को कक्षा में दिया जाने वाला होमवर्क अपनी अहमियत खोता जा रहा है. बावजूद इस के हम होमवर्क का महत्त्व नकार नहीं सकते. होमवर्क करने से किशोरों को स्कूल में पढ़ाया गया पाठ याद हो जाता है और उन में पढ़ाई के प्रति रुचि भी जाग्रत होती है.

आज किशोर स्कूल की छुट्टी हो जाने के बाद अनेक प्रकार की कोचिंग कक्षाओं में जाते हैं अथवा होम ट्यूशन पढ़ते हैं. ऐसी व्यस्त दिनचर्या में उन के पास सदा समय की कमी रहती है. सुबह से शाम तक मानसिक कार्य करने के बाद बचे समय में वे शारीरिक खेलों के स्थान पर इलैक्ट्रौनिक गैजेट, फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि पर समय बिताते हैं. इन सब के बीच होमवर्क करने का समय नहीं रहता. इस के लिए उन्होंने एक नया तरीका निकाला है और वह है व्हाट्सऐप पर दोस्तों से होमवर्क शेयर करना.

दोस्तों के ग्रुप में होमवर्कव्हाट्सऐप के माध्यम से एकदूसरे को भेजते हैं और वहां से इसे टीवी देखते हुए अथवा हैडफोन लगा कर संगीत सुनते हुए कौपी करते रहते हैं. पर वास्तविकता यह है कि स्वयं किया गया होमवर्क ही लाभदायक होता है. जानिए, होमवर्क खुद करने के क्या फायदे हैं?

–       ज्ञान को स्थायी बनाने के लिए उस की पुनरावृत्ति जरूरी है, जो होमवर्कखुद करने से ही संभव है.

–       आजकल किशोर परीक्षाओं के समय दिनरात जागते हैं, सभी विषयों की ट्यूशन लेते हैं जिस से वे सदा तनावग्रस्त रहते हैं. यदि वे कक्षा में अध्यापक द्वारा पढ़ाए गए पाठ को ध्यान से सुनें और अपना होमवर्कखुद करें तो कम मेहनत से भी अधिक अंक पा सकते हैं.

–       होमवर्क स्वयं करने से विषय  रुचि कर लगने लगता है, क्योंकि छात्र को पाठ में आने वाली कठिनाइयों का पता चल जाता है और उसे साथसाथ दूर करने से विषय आसान बन जाता है.

–       होमवर्कखुद करने से छात्रों की मानसिक तथा बौद्धिकशक्ति के साथ लिखने का अभ्यास भी विकसित होता है. इस का लाभ परीक्षा के समय मिलता है. पेपर समय पर पूरा हो जाता है और कैसा भी प्रश्न आने पर छात्र घबराते नहीं हैं.

–       समय पर तथा नियमित रूप से होमवर्क करने की आदत से ट्यूशन पढ़ने से भी बचा जा सकता है. इस से समय तथा धन दोनों की बचत होती है.

कमतर नहीं लड़कियां

अमूमन समाज में लड़कियों को लड़कों से कमतर आंका जाता है. शारीरिक सामर्थ्य ही नहीं अन्य कामों में भी यही समझा जाता है कि जो लड़के कर सकते हैं वह लड़कियां नहीं कर सकतीं, जबकि इस के कई उदाहरण मिल जाएंगे जिन में लड़कियों ने खुद को लड़कों से बेहतर साबित किया है. पिछले वर्ष संपन्न हुए रियो ओलिंपिक और रियो पैरालिंपिक खेलों में खिलाडि़यों की इतनी बड़ी फौज में से सिर्फ  लड़कियों ने ही देश की झोली में मैडल डाल कर देश का नाम रोशन किया. यही नहीं अन्य क्षेत्रों में भी लड़कियां लड़कों से न केवल कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं बल्कि आगे हैं. हमेशा देश में 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट में लड़कियां ही पहले पायदान पर रहती हैं. चाहे आईएएस बनने की होड़ हो, विमान या लड़ाकू जहाज उड़ाने की या फिर मैट्रो चलाने की, लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं. इस के बावजूद लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है.

कुछ धार्मिक पाखंडों, सामाजिक कुरीतियों और परंपराओं ने भी लड़कियों को लड़कों से कमतर मानने की भूल की है. इसी के चलते भ्रूण हत्या तक हो रही है. आज जरूरत है इस दकियानूसी विचार को झुठलाने व खुद को साबित करने की, जिस का सब से सरल उपाय है पढ़लिख कर काबिल बनना. आप को बता दें कि घर में सब्जी बनाने से ले कर देश चलाने तक में लड़कियां व महिलाएं आगे हैं और उन्होंने यहां खुद को साबित कर दिखा भी दिया है कि हम किसी से कम नहीं हैं.

देशदुनिया में किनकिन जगहों पर नाम कमाया

पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में टौप

जीवन में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी ऐसा कार्य नहीं जिसे कर पाना असंभव हो. इस का जीताजागता उदाहरण है टीना डाबी, जिस ने महज 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में टौप किया. इस का श्रेय टीना ने अपनी मम्मी को दिया. साथ ही अपनी मेहनत व लगन को भी टीना ने इस जीत की वजह बताया है, जिस का परिणाम यह हुआ कि वे अपना गोल अचीव करने के लिए जीजान से जुट गईं. यहां तक कि उन की मम्मी ने टीना के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ दी. राजनीति विज्ञान की छात्रा टीना ने न सिर्फ लेडी श्रीराम कालेज दिल्ली से गै्रजुएशन की बल्कि स्टूडैंट औफ द ईयर भी बनीं और यूपीएससी की परीक्षा में टौप कर अपनी पहचान बनाई.

2016 की 12वीं की टौपर बनी सुकृति गुप्ता

कोई भी कार्य करने के लिए व्यक्ति के अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है. यही इच्छाशक्ति इंसान को ऊंचाई तक पहुंचा देती है. इसी के बल पर दिल्ली के अशोक विहार स्थित मोंटफोर्ट स्कूल में पढ़ने वाली सुकृति गुप्ता ने 2016 में 500 में से 497 अंक प्राप्त कर 12वीं में पूरे देश में टौप कर दिखा दिया कि अब लड़कियां सिर्फ घर की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि वे खुद को लड़कों से बेहतर साबित कर रही हैं. इतना ही नहीं, सुकृति अब अपने पेरैंट्स की तरह इंजीनियर बन कर देश के लिए कुछ करना चाहती है. ऐसा करने में सिर्फ सुकृति गुप्ता ही नहीं बल्कि अन्य कई लड़कियां भी प्रयासरत हैं.

सब से युवा प्रतिभागी बनी मास्टर शैफ इंडिया

लड़कियां अब सिर्फ घर की रसोई संभालने तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे अपने इस हुनर को किसी प्लेटफौर्म के जरिए दुनिया के सामने ला कर नाम भी कमाती हैं. इस शो में विजेताओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, जिन्हें कुकरी स्किल्स, टैस्ट, इनोवेशन और डिशेज प्रैजेंट करने के आधार पर विजेता घोषित किया जाता है. सीजन 5 में कीर्ति के साथ आखिरी दौड़ में आशिमा अरोड़ा, दिनेश पटेल और मिरवान विनायक थे, जिन्हें पछाड़ कर उन्होंने साबित कर दिया कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं. कीर्ति अब तक के सभी सीजन्स में विनर बनने वाली सब से युवा प्रतिभागी हैं.

ओलिंपिक 2016 में लड़कियों ने लहराया परचम

रियो ओलिंपिक में लड़कियों ने ही देश की लाज बचाई. हरियाणा की साक्षी मलिक ने कुश्ती में कांस्य पदक जीत कर दिखा दिया कि  चाहे आप के लक्ष्य के रास्ते में कितने ही विरोधी खड़े हों और आप के पास साधन भी सीमित हों, लेकिन यदि लगन, सच्ची निष्ठा और मेहनत हो तो हर बाधा खुद ब खुद दूर हो जाती है. साक्षी ने परिवार में दादाजी की सपोर्ट से मात्र 12 वर्ष की उम्र में रोहतक से प्रशिक्षण लिया और आज उन का संघर्ष और मेहनत जीत के रूप में सामने है. वहीं पी वी सिंधु ने ओलिंपिक में बैडमिंटन चैंपियनशिप में रजत पदक जीत कर बता दिया कि बचपन में वह जो सपना देखती थी उसे उस ने आज पूरा कर के दिखा दिया. 2009 में 13 वर्ष की छोटी सी उम्र में सिंधु ने जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था.

आप को बता दें कि जिमनास्टिक जैसे खेल में जिस में भारत अभी तक अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाया था, त्रिपुरा की 22 वर्षीय दीपा कर्माकर ने 2016 के ओलिंपिक में क्वालिफाई कर सब को चौंका दिया.

दिव्यांग ने जीता पैरालिंपिक

जहां हम हलकी सी चोट लगने पर हिम्मत हार जाते हैं, वहीं दीपा मलिक ने रियो पैरालिंपिक में शौटपुट में पैरालाइसिस की शिकार होने के बावजूद सिल्वर मैडल जीत कर देश का मान बढ़ाया. वे इस खेल में सिल्वर मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. उन्होंने साबित कर दिया कि जब तक हम खुद को लाचार मानते रहेंगे तब तक कभी जीत नहीं पाएंगे, लेकिन जिस दिन हम ने सोच लिया कि हमारे हौसले के आगे हमारी दिव्यांगता भी आड़े नहीं आ सकती, उस दिन हम असंभव को भी संभव कर सकते हैं.

दिव्यांगता के बावजूद एवरेस्ट पर फतेह

अरुणिमा सिन्हा जिन्होंने एक ट्रेन लूट में अपना पैर गंवा दिया था, लेकिन फिर भी उन के जज्बे की दाद देनी होगी कि वे दुनिया की सब से ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतेह कर पहली दिव्यांग महिला बनीं.

चाय वाली उपमा बनी बिजनैस वूमन औफ द ईयर

26 साल की उपमा विरदी को आस्ट्रेलिया में बिजनैस वूमन औफ द ईयर अवार्ड भारतीय चाय की पहचान आस्ट्रेलिया में कराने के कारण मिला. वहां के लोग कौफी ज्यादा पीते हैं, लेकिन उपमा ने उन्हें अपनी मसाला चाय का ऐसा चसका लगाया कि अब वे उन के फैन हो गए हैं. उपमा जो मूल रूप से चंडीगढ़ की हैं, ने किसी काम को छोटा नहीं समझा, तभी तो पेशे से वकील होने के बावजूद वे खाली समय में चाय बना कर लोगों को सर्व करती थीं, अब तो बड़ेबड़े इवैंट्स में उन्हें बुला कर उन से मसाला चाय बनाना सीखा जाता है. आज वे पूरी दुनिया में चाय वाली के नाम से मशहूर हो गई हैं.

देश की पहली महिला फाइटर पायलट

भारतीय वायुसेना में पहली बार 3 महिला लड़ाकू पायलटों की नियुक्ति हुई, जिस में अवनि चतुर्वेदी मध्य प्रदेश से, भावना कंठ बिहार से और मोहना सिंह राजस्थान से हैं. उपरोक्त के अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पहली महिला आईपीएस किरण बेदी, राजनेत्री सुषमा स्वराज और कई अन्य मिसाल हैं इस बात की कि लड़कियां लड़कों वाला हर काम कर सकती हैं और कहीं भी लड़कों से कमतर नहीं हैं.

लड़कियां भी सीखें इलैक्ट्रीशियन, प्लंबर का काम

अंजलि की ग्रैजुएशन की परीक्षा चल रही थी. एक दिन वह परीक्षा की तैयारी कर रही थी कि अचानक बिजली गुल हो गई. उस ने इनवर्टर औन किया तो भी घर में बिजली नहीं आई, जबकि पड़ोस के घरों में बिजली थी. उस समय रात के 10 बज रहे थे. किसी इलैक्ट्रीशियन को बुलाना भी संभव नहीं था. अंजलि ने जैसेतैसे मोमबत्ती की रोशनी में परीक्षा की तैयारी की और दूसरे दिन परीक्षा दे पाई. परीक्षा के बाद अंजलि ने अपनी मां से कहा कि मुझे भी बिजली का काम सीखना है ताकि ऐसी स्थिति आने पर छोटेमोटे फौल्ट खुद ठीक कर पाऊं.

अंजलि की मां ने कहा कि तुम लड़की हो कर बिजली का काम कैसे सीख पाओगी, लेकिन अंजलि ने कहा कि मां आज तमाम लड़कियां इलैक्ट्रिक और इलैक्ट्रौनिक्स में आईटीआई, पौलिटैक्निक व इंजीनियरिंग की डिग्रियां ले रही हैं. सभी डिग्रियों में यही सारी चीजें सिखाई जाती हैं तो मैं क्यों नहीं सीख सकती. अंजलि की मां ने उस के पापा से कह कर अंजलि को बिजली का काम सीखने की इच्छा से अवगत करा दिया. अंजलि के पापा को पहले तो यह बात बड़ी अजीब लगी, लेकिन जब उन्होंने रात में मेनस्विच का फ्यूज उड़ जाने की वजह से परीक्षा की तैयारी में बाधा आने के बारे में सुना तो उन्हें भी लगा कि अंजलि भले ही उन की इकलौती लड़की है, लेकिन उसे बिजली का काम सिखाने में हर्ज नहीं. यह छोटीमोटी समस्याओं से नजात दिलाने में कारगर साबित होगा.

उन्होंने अपने नजदीकी इलैक्ट्रीशियन से अंजलि को बिजली का काम सिखाने के लिए राजी कर लिया. उस ने 2 महीने की छुट्टियों में इलैक्ट्रीशियन से बिजली के छोटेमोटे काम सीख लिए.इस के बाद घर में जब भी बिजली का छोटामोटा फौल्ट होता या कोई औैर समस्या होती तो बिना इलैक्ट्रीशियन को बुलाए उसे वह खुद ठीक कर लेती.  अंजलि ने जो निर्णय लिया वह काबिलेतारीफ था. उस ने न केवल लड़कियों पर लगे इस आक्षेप को दूर किया कि लड़कियां बिजली का काम नहीं सीख या कर सकतीं बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कोई भी काम सीखना कठिन नहीं है. अकसर घरों में बिजली की जो समस्याएं देखी जाती हैं उन में मेन स्विच का फ्यूज का उड़ जाना, तार में शौर्टसर्किट होना, विद्युत उपकरणों का फ्यूज हो जाना, पंखे का रैग्यूलेटर खराब होना, ट्यूबलाइट का स्टार्टर खराब होना, प्रैस आदि में छोटेमोटे फौल्ट होना आम बात होती है. इस के लिए हम इलैक्ट्रीशियन के पास जाते हैं तो वह मनमाफिक पैसे की मांग करता है, जबकि काम कुछ भी नहीं होता. ऐसे में अगर घर के किशोर थोड़ी हिम्मत करें तो बात बन सकती है.

बिजली के अलावा जो चीज महत्त्वपूर्ण है, वह है वाटर सप्लाई, जिस के माध्यम से घर के अलगअलग हिस्सों में न केवल पानी पहुंचाया जाता है बल्कि सीवर, शौचालय, आरओ सिस्टम इत्यादि महत्त्वपूर्ण चीजें भी इन्हीं से जुड़ी होती हैं. ऐसे में अगर अचानक पानी के पाइप में कहीं लीकेज हो जाए तो उस दिन नहानेधोने से ले कर शौच जाने व पीने के पानी तक की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है. अचानक आई इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए प्लंबर के पास भागने के बजाय अगर थोड़ाबहुत काम सीख लिया जाए तो समस्या का समाधान घर पर ही सस्ते में हो सकता है.

खाली समय में सीखें काम

इलैक्ट्रिक व प्लंबरिंग से जुड़ी छोटीमोटी परेशानियों से नजात पाने के लिए अगर अपने खाली समय का उपयोग किया जाए और किसी ऐक्सपर्ट इलैक्ट्रीशियन या प्लंबर के साथ काम सीखा जाए तो यह फायदेमंद साबित हो सकता है. प्लंबर का काम करने वाले लोगों को अकसर काम के दौरान सहायक की जरूरत होती है, जो उन के कार्यों  में सहयोग करते रहते हैं. इन लोगों से संपर्क कर प्लंबरिंग व इलैक्ट्रिक का काम सीखा जा सकता है.बिजली मिस्तरी संजय रावत का कहना है कि अकसर घरों में बिजली की वायरिंग, बिजली के उपकरणों की फिटिंग के दौरान ऐक्सपर्ट के रूप में अकेले काम नहीं किया जा सकता है. इसलिए हमें सहायक की आवश्यकता होती है. बिजली मरम्मत  के कार्यों की जानकारी न होने के बावजूद इन्हें अच्छीखासी राशि का भुगतान भी करना पड़ता है. अकसर हमारे साथ सीखने वाले लोग कुछ ही दिन में इलैक्ट्रिक का काम करतेकरते ऐक्सपर्ट बन जाते हैं और कमाई भी करने लगते हैं.

इसी तरह प्लंबरिंग से जुड़े फौल्ट जैसे छोटेमोटे कार्यों को किसी प्लंबर का सहायक बन कर सीखा जा सकता है और इस से जहां घर की छोटीमोटी समस्या सुलझती है वहीं आप आसपास काम कर कमाई भी कर सकते हैं. बिजली मिस्तरी या प्लंबर 400-500 रुपए तक ले लेता है जबकि इन छोटेमोटे कार्यों के बारे में खुद जानकारी रखी जाए तो अनावश्यक पैसे के खर्च से बचा जा सकता है.

कोई भी सीख सकता है काम

यह जरूरी नहीं कि बिजली व प्लंबरिंग से जुड़े मरम्मत के कार्य करने की क्षमता सिर्फ लड़कों में ही होती है, बल्कि लड़कियां भी इस तरह के कार्य आसानी से कर सकती हैं. बिजली मरम्मत का कार्य सीखने वाली लड़की नाजमीन का कहना है कि वह इलैक्ट्रिक ट्रेड से आईटीआई का कोर्स कर रही है. जब उस ने इस कोर्स को करने का निर्णय लिया तो उस के घर वालों ने उस का विरोध किया, लेकिन नाजमीन ने सब को विश्वास में ले कर इस कोर्स में दाखिला लिया. वह आईटीआई के अंतिम वर्ष में है. वह न केवल बिजली के खंभों पर चढ़ कर बिजली मरम्मत का कार्य कर लेती है बल्कि घरों में वायरिंग व छोटेबड़े फौल्ट दूर करने में भी निपुण है.

लड़कियां इलैक्ट्रीशियन, प्लंबर से तो काम सीख ही सकती हैं इस के अलावा सरकारी संस्थान कम समय के बिजली व प्लंबरिंग से जुड़े ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित करते हैं जहां से न केवल निशुल्क ट्रेनिंग ली जा सकती है बल्कि इस के लिए सरकारी छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है.भारत सरकार व राज्य सरकार कारीगरों से जुड़ी ट्रेनिंग स्थानीय लैवल पर उपलब्ध करा रही है. भारत सरकार द्वारा कौशल विकास व उ-मिता मंत्रालय, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, नैशनल स्किल डैवलपमैंट कौरपोरेशन सहित तमाम विभा गों व मंत्रालयों द्वारा एनजीओ व ट्रेनिंग देने वाली कंपनियों के माध्यम से प्रशिक्षित किए जाने का काम किया जा रहा है, जो न केवल निशुल्क होता है बल्कि टे्रनिंग पूरी होने के बाद इस का प्रमाणपत्र वजीफा भी दिया जाता है. ऐसे में ट्रेनिंग के इच्छुक लड़केलड़कियां इलैक्ट्रीशियन व प्लंबरिंग का काम सीखने के लिए इन से संपर्क कर सकते हैं.                                

घर में रखें टूलबौक्स

बिजली या प्लंबरिंग से जुड़े कार्य या मरम्मत के लिए तमाम तरह के उपकरणों या टूल्स की जरूरत पड़ती है. इन टूल्स के बिना कोई भी ऐक्सपर्ट मरम्मत का कार्य नहीं कर सकता इसलिए अगर आप ने इलैक्ट्रीशियन या प्लंबरिंग का काम सीख लिया है तो इस के साथ रिपेयर के लिए काम आने वाले आवश्यक टूल्स भी घर पर रखना न भूलें.

बिजली मरम्मत में काम आने वाले प्रमुख टूल्स

बिजली उपकरणों की मरम्मत करने के लिए सब से जरूरी टूल के रूप में ग्लव्स का इस्तेमाल होता है. ये उन चीजों से बने होते हैं जिन में अगर गलती से बिजली का नंगा तार छू जाए तो झटका लगने की आशंका नहीं होती. इस के अलावा बोर्ड, स्विच या बिजली के उपकरणों के पेच कसने के लिए अलगअलग साइज के स्क्रूड्राइवर सैट की जरूरत पड़ती है. बिजली मरम्मत में काम आने वाला एक महत्त्वपूर्ण टूल प्लायर होता है जिस के द्वारा तारों को आपस में जोड़ने, ऐंठने का काम किया जाता है. वहीं नोज प्लायर के द्वारा दबाने व चैनल लौक  के द्वारा भी लौक किए जाने का काम किया जाता है. बिजली के अन्य कुछ टूल्स जिन का महत्त्वपूर्ण उपयोग होता है, उन में वायर कटर, टैस्टर, अलगअलग साइज के रिंच, निडिलनोज प्लायर, स्ट्रिपर, रेजर चाकू, रोटो स्प्रिट, पाइप रीमर इलैक्ट्रिक लेबल, अर्थ मैग्नेट टेप, वोल्टेज डिटैक्टर, सीटरौकसा, मैग्नेटिक नट ड्राइवर, इंसूलेटेड स्कू्रड्राइवर सैट, स्क्रूहोल्डरसैट, नाकआउट सैट, टोन जनरेटर, टैगआउट किट, ड्रिल बिट्स, लैड हैड, लैंप, सहित जरूरत पर आने वाले तमाम टूल्स का उपयोग किया जाता है.

आप के घर में जिस तरह के वायर या वायरिंग का उपयोग किया गया है इस के लिए जरूरी टूल्स को अपने घर पर जरूर रखना चाहिए जिस से अचानक आने वाले किसी फौल्ट से निबटा जा सके.

प्लंबरिंग के काम में आने वाले जरूरी उपकरण

प्लंबरिंग में अकसर जो पाइप ब्लौकेज, लीकेज या टूटफूट की समस्या देखी गईर् है, इस के हिसाब से इन की मरम्मत के लिए जिन महत्त्वपूर्ण उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है उन में एडजस्टेबल रिंच, टेफलान टेप, पाइप कटर, पाइप लुब्रिकैंट्स और ब्रश, वैसिन रिंच हैं. इन में पाइप कटर द्वारा आवश्यकता पड़ने पर पाइप को काट कर जोड़ने, टेप के माध्यम से नापने का काम किया जा सकता है. इस के अलावा भी तमाम तरह के टूल्स की जरूरत पड़ सकती है, जिस में इनसाइड और आउटसाइड पाइप रीमर, इलैक्ट्रिक ड्रिल, घर में लगी टोंटियों के साइज की दूसरी टोंटियां इत्यादि हैं.

एफर्ट से बढ़ाएं पिता का कारोबार

24 वर्षीय रोहन ग्रैजुएशन के अंतिम वर्ष का छात्र है. उस के पिता का टूर ऐंड ट्रैवल का बिजनैस है, लेकिन पिछले 2 साल से यह धंधा मंदा चल रहा था. रोहन को जब यह पता चला तो उस ने आगे बढ़ कर बिजनैस को गति देने की सोची. उस ने कंपनी की वैबसाइट बना कर जगहजगह उस का लिंक भेजना शुरू किया. धीरेधीरे बुकिंग शुरू हो गई. आज आलम यह है कि रोहन की कंपनी के पास कस्टमर की डिमांड के मुताबिक गाडि़यां ही नहीं हैं. रोहन जैसे न जाने कितने किशोर हैं जिन्होंने आगे बढ़ कर अपने एफर्ट से पिता के बिजनैस का मेकओवर किया है और घाटे में चल रहे बिजनैस को मुनाफे का सौदा बना दिया. दरअसल, समय के साथ परंपरागत तरीके से बिजनैस के बजाय नए जमाने के हिसाब से चलने में मुनाफा है. नोटबंदी के बाद से तो बिजनैस का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है. कल तक जहां कैश से सारा काम हो सकता था आज औनलाइन पेमैंट और डिजिटल मार्केटिंग का चलन जोरों पर है. ऐसे में यदि किशोर पिता के कारोबार को ऊंचाई देने की सोच रहे हैं तो इस से जुड़ी तमाम बातों की जानकारी हासिल कर लें. प्रस्तुत हैं कुछ बिंदु जो इस राह में आप की मदद कर सकते हैं :

पेरैंट्स को भरोसे में लें

व्यवसाय या परिवार के हित में आप जो भी करना चाहते हैं, सब से पहले आप को अपने पेरैंट्स को भरोसे में लेना होगा. आप उन्हें विस्तार से समझाइए कि किस तरह से उन की कोशिश सफल होगी. इस के लिए आप के पास सौलिड आइडियाज होने के साथसाथ उस के कुछ कागजी सुझाव भी होने चाहिए.

फायदेनुकसान के बारे में जानें

नई दिल्ली स्थित तारा इंस्टिट्यूट के डायरैक्टर सत्येंद्र कुमार का कहना है कि बिजनैस को बढ़ाने अथवा नया कलेवर देने से पहले जरूरी है कि आप उस के फायदे व नुकसान से भलीभांति अवगत हों, आप को यह चिह्नित करना होगा कि आप के साथ कौनकौन सी दिक्कतें आने वाली हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है?

बाजार की डिमांड समझें

गर्ग ग्रुप, दिल्ली के संरक्षक वी के गर्ग का मानना है कि यह समझना अत्यंत जरूरी है कि हम जिस बिजनैस में हाथ आजमाने जा रहे हैं, मौजूदा समय में उस की बाजार में कितनी और किस रूप में डिमांड है. उसी के अनुरूप अपनी प्लानिंग करें और कदम आगे बढ़ाएं.

संबंधित स्किल सीखना भी जरूरी

बिजनैस से जुड़ा कोई हुनर सीखना जरूरी है तो उस से पीछे न हटें. आप को कई ऐसे रास्ते मिलेंगे जहां से आप नई जानकारी हासिल कर सकते हैं. केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई कौशल विकास योजना के अंतर्गत 2022 तक 40 करोड़ से अधिक लोगों को कौशल सिखाया जाना है. इस में बड़ी आबादी युवाओं की होगी, जो कम खर्च में बेहतर स्किल से लैस होंगे.

इंटरनैट से मिलेगी भरपूर मदद

आज युवा पीढ़ी के पास इंटरनैट के रूप में एक ऐसा अस्त्र है जिस की बदौलत वे अपनी हर समस्या का पलभर में समाधान ढूंढ़ सकते हैं. इस के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच भी आसान हो सकेगी और काम का दायरा किसी सीमा में सीमित न हो कर देशविदेश तक फैल सकता है.

पढ़ाई न होने पाए बाधित

इन सब कोशिशों के बीच यह न भूलें कि आप यदि ग्रैजुएशन के छात्र हैं तो आप की जिम्मेदारी उस परीक्षा को बेहतर अंकों से पास करने की भी है. समय के साथ हर चीज जरूरी होती है. पिता के कारोबार को गति देने में सक्षम साबित हुए हैं तो पढ़ाई के प्लेटफौर्म पर भी आप को खुद को अव्वल साबित करना होगा. शिक्षा से आप का विजन मजबूत होगा.

ये 7 स्किल आएंगे काम

नवीनतम विचार, धैर्य व दृढ़ संकल्प, महत्त्वाकांक्षी, आकलन का कौशल, नई चीज सीखने को तत्पर रहना, निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिकूल परिस्थितियों में न डिगना ऐसे स्किल्स हैं जो बिजनैस को गति देने के लिए जरूरी हैं.

बोर्ड परीक्षा की तैयारी : रटें नहीं, रिटेन करें

12 वर्ष की आशु अपनी कक्षा में प्रथम आती थी. उस की इस परफौर्मैंस पर उस के मातापिता के साथसाथ उस के टीचर्स भी काफी गर्व करते थे. वह सोशल साइंस, हिंदी और इंगलिश सब्जैक्ट्स के साथ गणित के प्रश्नों के उत्तर भी रट कर याद कर लेती थी और परीक्षा में बिना सोचेसमझे उन के उत्तर लिख कर आ जाती थी. वह अपने टीचर्स द्वारा पढ़ाए गए विषयों को समझने की कोशिश नहीं करती थी. इस बार जब आशु वार्षिक परीक्षा में कम मार्क्स से पास हुई तो उसे दुख हुआ. लेकिन जब उस ने गंभीरता से परीक्षा के लिए की गई अपनी तैयारी पर विचार किया तो उसे अपनी गलतियों के बारे में पता चला. उसे एहसास हुआ कि उस से गलती कहां हुई है.

सच पूछिए तो आशु जैसे कितने ही बच्चे परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह से नहीं करते हैं. उन्हें लगता है कि केवल विषयवस्तु याद कर लेने से परीक्षा में प्रश्नों को सौेल्व करना आसान हो जाता है किंतु रटी हुई चीजों के साथ सब से बड़ी प्रौब्लम यह होती है कि ऐनवक्त पर आप द्वारा पढ़े गए लैसन दिमाग से गायब हो जाते हैं. यह स्थिति काफी खतरनाक होती है. सीबीएसई की 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षा में मुख्य रूप से साइंस, आर्ट्स और कौमर्स संकाय होते हैं. कैरियर और जीवन निर्माण के लिए ये तीनों संकाय समान महत्त्वपूर्ण हैं. इन में ऐक्सिलैंट केवल स्टूडैंट्स की अपनी प्रैफरैंस और चौइस पर निर्भर करता है. साइंस सब्जैक्ट्स इंजीनियरिंग और मैडिकल क्षेत्र में कैरियर बनाने में मददगार होते हैं तो आर्ट्स विषयों के साथ शुद्ध रूप से साइंस स्टूडैंट्स के लिए स्पैशलाज्ड डोमेन को छोड़ कर सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एलिजिबिलिटी प्रदान करते हैं. कौमर्स का क्षेत्र तेजी से बढ़ती ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए एक एवरग्रीन एरिया माना जाता है, जो कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटैंट्स से ले कर सीईओ तक के शीर्ष पर पहुंचने में अहम भूमिका निभाता है. इन तीनों संकायों की बेहतर तैयारी के लिए एक विशेष रणनीति और प्लानिंग की जरूरत होती है. आइए देखते हैं कि इन तीनों संकायों में 12वीं की परीक्षा की तैयारी के लिए कौन सी स्ट्रेटेजी की जरूरत होती है.

साइंस

विज्ञान संकाय में 4 विषयों फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलौजी और गणित को मुख्य माना जाता है. एडिशनल सब्जैक्ट्स के रूप में कंप्यूटर साइंस, इन्फौर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज, बायोटैक्नोलौजी इत्यादि को भी शामिल किया जाता है. इन सभी विषयों में केवल गणित को छोड़ दें तो रैस्ट विषय प्रैक्टिकल वाले होते हैं. इन सभी विषयों की तैयारी के लिए स्टूडैंट्स को अलगअलग स्टे्रटेजी अडौप्ट करने की जरूरत होती है.

गणित की तैयारी

गणित की तैयारी के लिए पूर्व के वर्षों के प्रश्नों का अध्ययन जरूरी होता है. इस से प्रत्येक टौपिक और चैप्टर के लिए मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन के साथसाथ प्रश्नों के नेचर का भी पता लग जाता है. इस विषय की तैयारी की सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस के लिए सैल्फ स्टडी और सैल्फ प्रैक्टिस बहुत जरूरी है. निरंतर अभ्यास से ही शुद्धता और स्पीड प्राप्त की जा सकती है. कौंसैप्ट को क्लियर करना भी जरूरी होता है और इस स्टेज पर सब्जैक्ट टीचर से डिस्कशन बहुत लाभप्रद होता है. चूंकि गणित में कैलकुलेटर का यूज अलाउड नहीं होता इसलिए बिना कैलकुलेटर की हैल्प के मैथ्स और अन्य विषयों के नुमेरिकल प्रश्नों को हल करने की प्रैक्टिस करनी चाहिए.

कौमर्स फैकल्टी

कौमर्स फैकल्टी में अकाउंटैंसी, इकोनौमिक्स, बिजनैस स्टडीज जैसे मुख्य विषयों को शामिल किया जाता है. ये सभी विषय मार्क्स स्कोरिंग की दृष्टि से काफी अहम होते हैं. खासकर अकाउंटैंसी बड़ा स्कोरिंग सब्जैक्ट होता है. अकाउंटैंसी में 100 मार्क्स के पेपर में 80 मार्क्स थ्योरी के और 20 मार्क्स प्रैक्टिकल के होते हैं. अकाउंटिंग फौर पार्टनरशिप फर्म्स चैप्टर से 35 मार्क्स के प्रश्न पूछे जाते हैं जो सब से अधिक वेटेज के होते हैं, इसीलिए इस सैक्शन की अच्छी तैयारी कई मानों में लाभप्रद होती है. एक अंक वाले प्रश्नों की संख्या 8 होती है. कौमर्स सैगमैंट में ही दूसरा सब्जैक्ट जो बहुत ही इजी स्कोरिंग वाला होता है वह बिजनैस स्टडीज है. कंपनियों के मैनेजमैंट, प्लानिंग, फाइनैंशियल मार्केट्स, और्गेनाइजेशन और स्टाफिंग जैसे विषयवस्तुओं वाले इस सब्जैक्ट में यदि एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स की बड़ी सूक्ष्मता से स्टडी कर ली जाए और उन के अच्छे नोट्स बना लिए जाएं तो इस में अच्छा स्कोर करना मुश्किल नहीं होता. कौमर्स के इस सब्जैक्ट में 80 मार्क्स थ्योरी के होते हैं जबकि 20 मार्क्स प्रैक्टिकल के होते हैं.

कौंसैप्ट आधारित प्रश्नों की संख्या अधिक होती है. साथ में इस सब्जैक्ट में विभिन्न कंपनियों के केस स्टडी दिए होते हैं, जिस के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं.

मानविकी

मानविकी के विषयों को आर्ट्स का विषय भी कहते हैं. इस संकाय में मुख्य रूप से इकोनौमिक्स, इंगलिश, ज्योग्राफी, पौलिटिकल साइंस, हिस्ट्री के साथ सोशल साइंस के अन्य विषयों का कांबिनेशन होता है.

इस संकाय में इकोनौमिक्स कठिन विषय माना जाता है क्योंकि इस में नैशनल इनकम अकाउंटिंग के प्रश्न होते हैं जिन में नैशनल इनकम और इस के विभिन्न एग्रीगेट्स के कैलकुलेशन के प्रश्न पूछे जाते हैं. इस के अतिरिक्त इस विषय में कौस्ट ऐंड रेवेन्यू, प्रोडक्शन, इलास्टिसिटी औफ डिमांड ऐंड सप्लाई, मल्टीप्लायर, इनकम ऐंड ऐंप्लौयमैंट से भी गणितीय प्रश्न पूछे जाते हैं.

कुल मिला कर इस विषय में 25 से 28 मार्क्स के नुमेरिकल प्रश्न पूछे जाते हैं. इस विषय की तैयारी के लिए एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स की इंटैंसिव स्टडी काफी जरूरी होती है. चूंकि इस विषय में कोई प्रैक्टिकल नहीं होता इसीलिए थ्योरी की तैयारी बड़ी सूक्ष्मतापूर्वक करने की जरूरत है. विशेष कर नुमेरिकल प्रश्नों की तैयारी में प्रैक्टिस की काफी जरूरत होती है.

कई प्रश्न डायग्राम और डाटा आधारित होते हैं. कौंसैप्ट को स्पष्ट रूप से समझना भी उतना ही आवश्यक होता है. डायग्राम को अच्छी तरह से ड्रा करने की प्रैक्टिस के साथसाथ उन की लेबलिंग करना भी आना चाहिए.

इस पेपर में भी 10 मार्क्स के एक अंक वाले प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए टैक्स्ट बुक पढ़ते समय इस तरह के प्रश्नों की अलग से लिस्ट बना लेने से लाभ होता है. लौंग आंसर टाइप के प्रश्नों की संख्या 8 होती है जो 6 मार्क्स वाले होते हैं. इन प्रश्नों के आंसर की तैयारी के लिए सभी चैप्टर्स से महत्त्वपूर्ण टौपिक्स के नोट्स बनाना जरूरी होता है.

हिस्ट्री और ज्योग्राफी के पेपर्स प्रैक्टिकल ऐग्जामिनेशन वाले होते हैं. ज्योग्राफी के सिलेबस को 2 पार्ट्स में बांटा गया है. 70 मार्क्स की थ्योरी और 30 मार्क्स का प्रैक्टिकल. ज्योग्राफी कौंसैप्ट बेस्ड सब्जैक्ट होता है. इस की तैयारी के लिए टैक्स्ट बुक की कम से कम 2 बार स्टडी करना जरूरी है. ज्योग्राफी में मैप स्टडी का भी ध्यान रखें.

हिस्ट्री में 80 मार्क्स की थ्योरी और 20 मार्क्स के प्रैक्टिकल होते हैं. इंडिया के मानचित्र पर लोकेशन की प्रैक्टिस के साथसाथ टैक्स्ट बुक से संबंधित पैसेज पर आधारित प्रश्नों को हल करने की प्रैक्टिस से परीक्षा की तैयारी को मुकम्मल किया जा सकता है. इस में टाइम मैनेजमैंट का भी ध्यान रखें. शब्द सीमा के साथ पौइंट में आंसर लिखने की आदत डालें.

इंगलिश और हिंदी के विषय भी साइंस और कौमर्स के स्टूडैंट्स के सब्जैक्ट कौंबिनेशन में कौमन विषय होते हैं. इंगलिश में रीडिंग सैक्शन के प्रश्नों को हल करने के लिए वोकैबलरी के साथसाथ इंगलिश के पेपर्स और मैगजीन्स को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए. राइटिंग सैक्शन के प्रश्नों को हल करने के लिए राइटिंग की प्रैक्टिस की जरूरत होती है. इस के लिए व्याकरण की बेसिक नौलेज भी जरूरी होती है. टैक्स्ट बुक्स के प्रश्नों को हल करने के लिए चैप्टर्स की सीरियस स्टडी जरूर करनी चाहिए.

हिंदी की तैयारी के लिए एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स को आधार बनाएं और उन का गहन अध्ययन करें. प्रश्नों के सारगर्भित उत्तर लिखें और उचित शब्दों का इस्तेमाल करें. समय और शब्द सीमा का विशेष ध्यान रखें.             

फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलौजी, बायोटैक्नोलौजी की तैयारीविज्ञान के इन सभी विषयों की तैयारी के लिए यदि स्टूडैंट्स निम्न बातों का ध्यान रखें तो बोर्ड परीक्षाओं में उन की अच्छी परफौर्मैंस के बारे में कोई संदेह नहीं रह जाता :

–       पहले तो इन सभी विषयों की एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स को बड़ी गहनता से पढ़ने की जरूरत है. सिलेबस में शामिल सभी चैप्टर्स को पढ़ते वक्त उन के शौर्ट नोट्स बनाना अच्छा रहता है, ये नोट्स बाद में बड़े काम आते हैं. इन टैक्स्ट बुक्स में प्रत्येक चैप्टर के अंत में दिए गए सौल्व्ड उदाहरणों और ऐक्सरसाइज के प्रश्नों को हल कर लेने पर स्टूडैंट्स में आश्चर्यजनक सैल्फ कौन्फिडैंस का विकास होता है.

–       एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स के प्रत्येक चैप्टर में परिभाषाओं को अच्छी तरह से समझना दूसरा महत्त्वपूर्ण कारण है. इस के अंतर्गत सभी कठिन टर्म्स के उन की परिभाषाओं के साथ नोट्स बना लेने चाहिए. ऐसा करने से कम से कम 15 से 20 मार्क्स के प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह से तैयार हो जाते हैं.

–       टैक्स्ट बुक्स में सभी चैप्टर्स में दिए गए फार्मूले और समीकरण और उन समीकरणों के डेरिवेशन के भी अच्छी तरह से नोट्स बना लेने चाहिए. यह नोट्स शौर्ट आंसर्स से ले कर लौंग आंसर्स टाइप के प्रश्नों को हल करने में काफी मदद करते हैं.

–       एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स के इंटैंसिव स्टडी के बाद इन सभी सब्जैक्ट्स की रैफरैंस बुक्स से भी तैयारी की जा सकती है.

–       बायोलौजी में डायग्राम की प्रधानता होती है. फिजिक्स और कैमिस्ट्री में भी डायग्राम होते हैं, लेकिन बायोलौजी से कम होते हैं. बायोलौजी में महत्त्वपूर्ण डायग्राम्स की प्रैक्टिस करने के साथसाथ उन की प्रौपर लेबलिंग भी जरूरी होती है, जिस के लिए सीरियस प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है.

–       विज्ञान के इन सभी विषयों में वन मार्क्स के औसतन 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं जिन के आंसर एक शब्द में देने होते हैं. ये प्रश्न स्कोरिंग के पौइंट औफ व्यू से काफी अहम होते हैं और इसलिए इन प्रश्नों की तैयारी सावधानीपूर्वक करनी चाहिए.

बेहतर तैयारी के लिए कौमन टिप्स

सीबीएसई की 12वीं के सभी संकायों की परीक्षा का पैटर्न प्राय: एकसमान होता है और यही कारण है कि इन सभी विषयों की तैयारी की स्ट्रेटेजीज भी प्राय: कौमन होती हैं. फैकल्टीज के परे यदि स्टूडैंट्स निम्नांकित कौमन पौइंट्स को ध्यान में रखें तो तैयारी आसान होने के साथसाथ स्कोरिंग भी अच्छी होती है.

–       सभी विषयों की एनसीईआरटी टैक्स्ट बुक्स अपरिहार्य हैं. इसलिए आप अपनी परीक्षा की तैयारी इन बुक्स से ही करें.

–       पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करने की प्रैक्टिस करने से आत्मविश्वास मजबूत होता है. इसलिए सभी विषयों के पूर्व वर्षों के प्रश्नों को अवश्य हल करें.

–       मौक टैस्ट की प्रैक्टिस भी सैल्फ कौन्फिडैंस को बढ़ाती है. समयबद्ध तरीके से प्रश्नों को हल करने पर फाइनल परीक्षा में टाइम को मैनेज करने में भी मदद मिलती है.

–       संभव हो तो गु्रप में स्टडी करने की कोशिश करें. इस से तैयारी परफैक्ट और फास्ट होती है क्योंकि इस से किसी भी तरह का कंफ्यूजन होने पर उन का हल जल्दी मिल जाता है.

–       अपने सब्जैक्ट टीचर्स के लगातार संपर्क में रहें.

–       टीचर्स द्वारा बताई गई हर बारीकी, महत्त्वपूर्ण पौइंट्स, सर्वाधिक संभावित प्रश्न और टौपिक्स को अच्छी तरह से समझें और फिर नोट्स बनाएं.

–       प्रश्नों के उत्तर रट कर याद रखने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें.

–       डायग्राम्स ड्रा करने की प्रैक्टिस करें और उन के विभिन्न भागों को सही से चिह्नित करने का अभ्यास करें.

–       सैल्फ स्टडी के लिए एक अच्छा प्लान बना लें और उसी के हिसाब से अपनी स्टडी करें.

–       प्रश्नों के उत्तर लिखलिख कर याद करें. इस से लैसन लंबे समय तक याद रहता है.

–       बोर्ड की परीक्षा में बारबार रिपीट किए गए प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह से तैयार कर लें.

–       सभी सब्जैक्ट्स के सिलेबस को छोटेछोटे सैग्मैंट्स में बांट लें और फिर अपने प्लान के अनुसार उन का अध्ययन करें.

मुलायम परिवार विवाद का ये है पार्ट 2

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के ताजा बयान से यह साफ हो चुका है कि मुलायम परिवार का विवाद खत्म नहीं हुआ था. साधना गुप्ता के बयान से यह भी साफ हो गया है कि उनकी अपनी महत्वाकांक्षा है. अब वह खुद राजनीति में न आना चाहती हों, पर अब वह पर्दे के पीछे नहीं रहना चाहती. साधना चाहती हैं कि उनका बेटा प्रतीक राजनीति में आये. साधना गुप्ता का मर्म कुछ ऐसा ही है जैसा साल 2000 के करीब था. साल 2000 में जब साधना गुप्ता की कोई पहचान नहीं नही थी. साल 2003 में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो पहली बार साधना गुप्ता उनके साथ मुख्यमंत्री आवास में रहने गई. पहली बार मुलायम के सर्मथकों को यह पता चला था कि मुलायम की दूसरी पत्नी है.

इसी दौर में मुलायम पर आय से अधिक जायदाद का मसला उठा. वहां से प्रमाण मिला कि प्रतीक यादव मुलायम का बेटा है. उसके बाद साधना गुप्ता को सबकुछ ठीक लगने लगा था. परिवार में अंदर और बाहर साधना गुप्ता का अपना प्रभाव बन गया था. साल 2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तब से साधना गुप्ता को परिवार में दूरी का अहसास होने लगा. यह सच है कि मुलायम और साधना की मुलाकात जिस समय हुई थी उस समय साधना राजनीति में आना चाहती थीं. अब साधना खुद स्वीकार करती हैं कि नेताजी ने उनको राजनीति में नहीं आने दिया.

2017 के विधानसभा चुनाव के पहले मुलायम परिवार में उठे झगड़े में साधना गुप्ता पूरी तरह से चुप थीं. चुनाव खत्म होते होते जिस तरह से साधना गुप्ता ने खुलकर अपनी बातचीत की और उसको बाकायदा प्रचारित किया गया उससे साफ है कि चुनाव परिणाम के बाद अगर सपा की प्रदेश में सरकार नहीं बनी तो अखिलेश यादव के खिलाफ मुलायम परिवार में विरोध के नये सुर सुनाई देंगे. अभी तक अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, इस कारण सपा संगठन पर उनका कब्जा आसानी से हो गया. अगर अखिलेश दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने तो हालात बदले होंगे. ऐसे में कुर्सी से हटने के बाद अखिलेश को चुनौतियों का सामना करना सरल नहीं होगा.

अखिलेश के स्वभाव से वाकिफ लोगों का अंदाजा है कि अखिलेश यादव झुकने वाले नहीं हैं. कुर्सी पर रहें या कुर्सी पर न रहें, परिवार के विवाद पर उनका जो स्टैंड पहले था, वही आगे भी रहेगा. मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के बाद विरोधी ही नहीं परिवार के लोग भी लाभ लेने के लिये अखिलेश को दवाब में लेंगे. साधना गुप्ता कहती हैं कि ‘अब तक चुप थी अब जवाब दूंगी. दुष्ट लोगों ने परिवार को तोड़ा है.’ पूरी बातचीत में साधना गुप्ता ने यह नहीं बताया कि दुष्ट कौन थे? अखिलेश की नजर में अमर सिंह इसके जिम्मेदार थे, अब वह पार्टी से बाहर हैं. असल में मुलायम के परिवार का विवाद राजनीतिक उत्तराधिकार से जुड़ा है. इसका पार्ट वन भले ही खत्म हो गया हो पर पार्ट टू बाकी है.    

लखनऊ में गूंजा भोपाल का धमाका

07 मार्च मंगलवार की सुबह 10 बजे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 81 किलोमीटर दूर शाजापुर में भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन की जनरल बोगी में बम धमाका हुआ. इसमें करीब 10 लोग घायल हो गये. मध्य प्रदेश पुलिस ने पिपरिया में 3 लोगो को अरेस्ट किया. पिपरिया में पकड़े गये आतंकियों ने पुलिस को बताया कि उनके कुछ साथी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव और इटावा में मौजूद हैं. लखनऊ में यह आतंकी शहर और देहात की सीमा से लगे काकोरी थानाक्षेत्र की हाजी कालोनी के बादशाह खान के मकान में किरायेदार के रूप मे रह रहा था. इसका नाम सैफुल्लाह बताया गया. सैफुल्लाह के साथ 2 और साथी वहां रहते बताये गये.

पुलिस ने दोपहर करीब ढाई बजे हाजी कालोनी के मकान को घेर लिया. करीब 9 घंटे की मशक्त के बाद पुलिस ने आतंकी सैफुल्लाह को मार गिराया, तब लखनऊ सहित पूरे देश ने राहत की सांस ली. आंतकी को खतरनाक आईएसआईएस से जुड़ा बताया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के एडीजी ला एंड आर्डर दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि लखनऊ-कानपुर के कुछ युवा ने आईएसआईएस से प्रभावित होकर खोरासन ग्रुप बना लिया है. इसी ग्रुप ने मध्य प्रदेश में ब्लास्ट किया. यूपी एटीएस और पुलिस ने कानपुर के जाजमऊ, तलाक महल और उन्नाव में छापे मारे. इस दौरान दो सगे भाईयों इमरान व फैजल को अरेस्ट किया गया. यह पिपरिया में पकडे गये दानिश के भाई हैं. इटावा के बकेवर से फखरे व तीन अन्य की तलाश जारी है.

लखनऊ के काकोरी में सैफुल्लाह के साथ 2 और अन्य लोग भी थे. काकोरी का नाम स्वंत्रतता संग्राम से जुडा है. देश को आजाद कराने की लड़ाई में पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिये काकोरी में ट्रेन को लूटने के लिये डकैती डाली थी. काकोरी की ट्रेन डकैती का नाम आजादी के इतिहास में दर्ज है. यहां आजादी के दीवानों को अंग्रेज सरकार ने फांसी की सजा दी थी. इसी थाने में अब लखनऊ का ऐसा पहला मुकदमा दर्ज हुआ जिसमें आईएसआईएस का नाम आ रहा है. आईएसआईएस ने पहली बार उत्तर प्रदेश में अपनी आंतकी धमक दिखाई है.

सैफुल्लाह के मारे जाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को बधाई मिल रही है. बिना किसी जानमाल के नुकसान के यह काम करना तारीफ का काम भी है. इसके बाद भी समझने वाली बात यह है कि पुलिस ही नहीं लखनऊ के लोगों ने इसे तमाशे के रूप में लिया. घटना स्थल पर जुटी भीड पूरी घटना को मोबाइल कैमरों में जिस तरह से क्लिक करने को बेचैन थी वह खतरनाक साबित हो सकता था. पुलिस में एटीएस और उसके कमांडों को छोड कर बाकी पूरी तरह से सावधान नहीं थी. प्रदेश की पुलिस को वाहवाही की आड में सच को अनदेखा नहीं करना चाहिये.

जानिए तकनीकी दुनिया के कुछ मजेदार तथ्य

तकनीकी दुनिया में कई ऐसे तथ्‍य हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होगें. कुछ अनोखे तथ्यों के साथ-साथ कुछ इस तरह के फैक्‍ट्स या तथ्य भी हैं जिनको जानकर हो सकता हैं आपको हंसी भी आ जाए.

टेक्‍नालॉजी जग़त में फैक्‍ट्स हर तरह से महत्वपूर्ण होते हैं और कुछ कॉफी पॉपुलर भी होते हैं, चाहे वह जानकारी और इतिहास की दृष्टी से हो या इनके मजेदार होने की दृष्टी से.

1. क्या आप जानते हैं कि आज की सबसे मशहूर और सफल कंपनियों में गिनी जाने वाली कंपनियां एप्पल, गूगल और एचपी ऐसी कंपनियां हैं जो सबसे शुरआत में गैराज से शुरु हुईं थी.

2. हम आपको यहां एक और अचरज भरी बात बता देना चाहते हैं कि दुनिया का सबसे पहला माउस लकड़ी का बना था. हालांकि इस तरह के फैक्‍ट जानकर आपको यकीनन हंसी आ जाएगी.

3. तकनीकी के क्षेत्र में हुए एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में जितने लोगो के पास खुद के टूथब्रश हैं उससे ज्यादा लोगो के पास खुद के मोबाइल फोन्स हैं.

4. केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया में 90% टेक्स्ट मैसेजेज उन्हें भेजने और डिलीवर्ड होने के 3 मिनट के अंदर-अंदर ही पढ लिए जाते हैं.

5. आपके मेल पर आने वाले स्पैम मेल्स में तकरीबन 4.1 करोड़ स्पैम मेल्स में सिर्फ एक मेल का रिप्लाई जाता है. यहां गौर करने वाली उससे बात ये है कि स्पैमर्स इसमें भी थोड़े बहुत पैसे कमा लेते हैं.

6. तकनाकी के विकास के साथ-साथ भौतिक चीजों का इस्तेमाल कॉफी हद तक बढ़ गया है. पिछले साल यानि कि साल 2016 तक दुनिया में 2 अरब से ज्यादा TV प्रयोग हो चुके हैं.

7. क्या आप ये बात जानते हैं कि Cabir.A नाम का पहला सेल फोन वायरस 2004 में पाया गया था.

8. विडियो गेम्स साल 2008 के बाद से ही DVDs में बिकने शुरू हुए थे, इससे पहले ये डीवीडीज में नहीं आया करते थे.

9. यूट्यूब पर आने वाले सभी वीडियोज में से 20 फीसदी संगीत से संबंधित होते हैं.

10. साल 2016 के वित्तीय वर्ष के अंत तक eBay शोपिंग साइट पर हर सैकेंड 680$ यानि कि 45311.80 रूपये की बिक्री होती हैं.

11. यह बात बहुत मजेदार है कि दुनिया में 91% लोग ऐसे ही हैं जो पूरा दिन अपने मोबाइल फोन को खुद से इतनी ही दूरी पर रखते हैं जहां तक उनका हाथ पहुंच जाए.

12. दूसरे देशों की बात करें तो 8 करोड़ अमेरिकी ऐसे हैं जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल सिर्फ इंटरनेट चलाने के लिए करते हैं, ना कि कॉल करने के लिए.

13.  क्लॉड एलवुड शैनन जो कि एक अमेरिकन गणितज्ञ थे, उन्हें “सूचना सिद्धांत” का पितामह कहा जाता है. इन्होंने ही “Digital Circuit” का अविष्कार किया था और यह काम उन्होंने अपने स्नात्कोत्तर के दौरान ही किया था और उस समय उनकी उम्र केवल 21 साल थी. इसकी सहायता से ही आज हम इंटरनेट पर कुछ भी ऐक्सेस कर पाने में सक्षम हैं.

14. वेबसाइट्स पर पहला Banner विज्ञापन साल 1994 में दिखाया गया था.

15. क्या आप जानते हैं कि ई-मेल, World Wide Web आने से पहले आया था.

16. ये बात आपको अवश्य जाननी चाहिए कि इंटरनेट की दुनिया में Symbolics.com सबसे पहला और सबसे पुराना डोमेन है. इसने साल 2013 की 15 March को अपने 28 साल पूरे किए हैं.

17. साल 1993 में रिलीज हुआ Mosaic, पहला वेब ब्राऊजर था, जो जबरदस्त हिट भी हुआ.

18. अमेरिका में हर साल 220 लाख टन कंप्यूटर नष्ट किये जाते हैं.

19. सामान्य तौर पर हम सभी एक मिनट में 20 बार अपनी पलकें झपकाते हैं लेकिन अगर हमारे सामने कम्प्यूटर हो तो हम केवल 7 बार अपनी पलकें झपकाते हैं.

20. हमारे द्वारा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला WWW यानि कि “World Wide Web” शब्द को साल 1990 में यू.के. के कम्प्यूटर वैज्ञानिक टिम वर्नर्स ली ने ईजात किया था.

21. तकनाकी की गति जानना चाहते हैं तो, आपको जानकर खुशी होगी कि लगभग 5 करोड़ लोगो तक पहुंचने के लिए Radio को 38 साल, TV को 13 साल और इंटरनेट को सिर्फ 4 साल लगे.

हौसला ही काफी है, ऊंची उड़ान के लिए

दुनिया को कुछ हिस्सों में बांटा गया है. किन हिस्सों में? कभी सोचा है? देश, राज्य, धर्म, जातियों में नहीं, पर दुनिया को बड़े करीने से सिर्फ दो हिस्सों में बांटा गया है. चौंकिए मत, चाहे कोई भी देश हो, राज्य हो या कोई भी धर्म हिस्से तो सिर्फ दो ही हैं. एक पुरुष और एक स्त्री. दुनिया को बांटने के साथ ही पुरुषों और स्त्रियों के काम काज को भी बांट दिया गया था.

पुरुषों का काम है घर से बाहर जाकर काम काज करना और स्त्रियों का काम है घर संभालना, घर की देखभाल करना. नि:स्वार्थ भाव से काम करने के बावजूद कोई पगार तो दूर कितने लोग तो स्त्रियों के काम की कद्र ही नहीं करते. पुरुष का काम है घर के लिए पैसे कमाना. मतलब पुरुष का काम है घर के लिए आटे का जुगाड़ करना, और पुरुषों का ही काम है आटे की कंपनी चलाना, पर स्त्रियों का काम है उस आटे से कुछ खाने लायक बनाना. इसके अतिरिक्त कुछ करना.

पर इतिहास गवाह है कि समय समय पर इस मानसिकता को कई स्त्रियों ने चुनौति दी है. आज जानते हैं ऐसी ही कुछ स्त्रियों के बारे में जिन्होंने पितृसत्तामक समाज के खिलाफ जाकर अपनी पहचान बनाई.

1. कोको चैनल (Gabrielle ‘Coco’ Channel)

फैशन की दुनिया में ‘चैनल’ ब्रांड का अलग ही रुतबा है. गैब्रिएल ‘कोको’ चैनल एक मामूली हैट डिजाइनर थी. पर अपनी प्रतिभा से उन्होंने फ्रांस के संपन्न परिवारों के बीच अपनी जगह बनाई. उनके खूबसूरत डिजाइन के हैट लोगों को खूब पसंद आए. उन्होंने फोर्बस की ‘20वीं सदी की 100 सबसे मश्हूर हस्तियों’ में अपनी जगह बनाई. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद औरतों को कोरसेट(corset) के चंगुल से छुड़ाने का श्रेय भी कोको को ही जाता है.

2. शर वैंग (Cher Wang)

शर वैंग ‘HTC’ की सह संस्थापक और चेयरपर्सन हैं. शर को तकनीक की दुनिया में सबसे सफल और शक्तिशाली महिला कहा जाता है. इतनी शौहरत के बावजूद शर लाइमलाइट और चकाचौंध की दुनिया से दूर रहती हैं. एक सफल बिजनेसवुमन होने के साथ साथ शर चैरिटी के कामों से भी जुड़ी हैं.

3. रुथ हैंडलर (Ruth Handler)

बार्बी डौल तो देखी होगी आपने? हर छोटी बच्ची के पास ये डौल होती है. हर बच्ची की जिन्दगी में बार्बी को लाने का श्रेय रुथ को जाता है. अपनी बेटी बार्बरा को देखकर उन्हें बार्बी डौल बनाने का आइडिया आया. बार्बी डौल आज भी कई लिविंग रूम क्लोसेट की शान है.

4. एरियाना हफिंगटन (Arianna Huffington)

एरियाना ‘The Huffington Post’ अखबार की सह संस्थापक हैं. 2016 में उन्होंने हफिंगटन पोस्ट से इस्तीफा दे दिया पर मीडिया के फिल्ड में उनके नाम का सिक्का चलता है. उन्होंने 70 के दशक में कई चर्चित किताबें लिखी. उन्होंने पिकास्सो की बायोग्राफी भी लिखी.

5. किरण मजुमदार शॉ (Kiran Mazumdar Shaw)

किरण ने ‘बायोकॉन लिमिटेड’ की स्थापना की थी. कहा जाता है कि उन्हें कंपनी खोलने की जगह नहीं मिली थी तो उन्होंने एक गराज से ही कंपनी की शुरुआत की. आज बायोकॉन बायोमेडिसीन रिसर्च की एक जानीमानी कंपनी है.

6. वंदना लुथरा (Vandana Luthra)

वंदना लुथरा ने ‘VLCC Health Care Ltd’ की स्थापना की. आज VLCC के प्रोडक्ट्स ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड समेत 11 देशों में खरीदे जाते हैं. देश में VLCC के कई स्टोर्स हैं.

7. एकता कपूर (Ekta Kapoor)

आप एकता को पसंद या नापसंद कर सकती हैं. पर उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती. भारतीय टेलीविजन का चेहरा बदलने का श्रेय इन्हीं को जाता है. एकता ने ‘बालाजी टेलीफिल्म्स’ की स्थापना की. उनके प्रोडक्शन हाउस से कई ऐसे डेली सोप बनें जो भारत में कई घरों का हिस्सा बन गए. दोपहर में घर पर अकेले रहने वाली स्त्रियों को एकता ने क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कहानी घर घर की जैसे सीरियल का तोहफा दिया.

ऑनलाइन टीवी देखने के शानदार ऐप

फिल्मों और सीरियल्स के शौकिनों के लिए ऑनलाइन टीवी देखने के काफी सारे ऐप उपलब्ध हैं. ज्यादातर ऐप ऐसे है जो नेटफ्लिक्स का उपयोग करना पसंद करते हैं. इनके अलावा और भी कुछ ऐप्स ऐसे भी हैं जो आपको ढेर सारे चैनल्स और फिल्में देखने का विकल्प देते हैं. इनमें से कुछ ऐप का उपयोग करने के लिए तो आपको अपने जीमेल अकाउंट से लॉगिन भी नहीं करना होगा.

मोबड्रो

यह एक शानदार ऐप है लेकिन यह प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है. इसके लिए डेवलपर की वेबसाइट पर जाना होगा. मोबड्रो नेशनल जियोग्राफिक, एचबीओ, बीबीसी, डिस्कवरी जैसे चैनल्स को देखने की सुविधा देता है. इसके अलावा फिल्मों के भी बहुत से चैनल उपलब्ध होते हैं. ऐप में न्यूज, स्पोर्ट्स और म्यूजिक के लिए भी डेडिकेटेड कैटेगरी है.

टुबी डॉट टीवी

इस ऐप में अमेरिका और कोरियन फिल्म का अच्छा कलेक्शन है. इसके अलावा यह अमेरिका के कई शो को एयर करता है. फिल्मों के मामले में इसमें अच्छा कलेक्शन है. यह ऐप फ्री है और इसमें किसी तरह का ऐप पर्चेस भी ऑफर नहीं किया जाता.

लाइव स्ट्रीम टीवी

इस ऐप में आपको दुनियाभर के 300 से ज्यादा टीवी चैनल्स देखने को मिलते हैं साथ ही इसमें आपको ऑनडिमांड कंटेट भी उपलब्ध कराया जाता है. यह कंटेट एचडी क्वालिटी में बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध होता है. इस ऐप में इतने फ्री चैनल्स हैं कि आप इंग्लिश प्रीमियर लीग के अलावा चैंपियंस लीग, विश्वकप और बड़े-बड़े टूर्नामेंट देख सकते हैं. इसकी ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको साइन अप करने की कोई जरुरत नहीं है.

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