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अर्टिकैरिया से छुटकारा पाना है आसान

 

पित्ती को चिकित्सकीय भाषा में अर्टिकैरिया कहा जाता है. अर्टिकैरिया 20% लोगों को उन के जीवन के किसी न किसी स्तर पर जरूर प्रभावित करता है. यह कई पदार्थों या स्थितियों के कारण होता है. यह त्वचा की एक प्रतिक्रिया है, जिस से चकत्ते पड़ जाते हैं और उन में खुजली होती है. यह खुजली मामूली से ले कर गंभीर स्थिति तक हो सकती है. तेज खुजलाने, शराब का सेवन करने, ऐक्सरसाइज करने और भावनात्मक तनाव से खुजली की समस्या और गंभीर हो सकती है.

अर्टिकैरिया के प्रकार

अर्टिकैरिया निम्न प्रकार के होते हैं:

ऐक्यूट अर्टिकैरिया: ऐक्यूट अर्टिकैरिया में सूजन 6 सप्ताह से कम समय तक रहती है. भोजन, दवा, संक्रमण इस के होने के सब से सामान्य कारण हैं. कीड़े के काटने और किसी आंतरिक रोग के कारण भी यह समस्या हो सकती है.

क्रौनिक अर्टिकैरिया: क्रोनिक अर्टिकैरिया में सूजन 6 सप्ताह से अधिक समय तक रहती है. इस के कारणों को पहचानना कठिन है. इस के कारण ऐक्यूट अर्टिकैरिया के समान हो सकते हैं, लेकिन इस में औटोइम्युनिटी, गंभीर संक्रमण और हारमोन असंतुलन भी सम्मिलित हो सकते हैं.

फिजिकल अर्टिकैरिया: फिजिकल अर्टिकैरिया सर्दी, गरमी, पसीने आदि के कारण हो सकता है. यह केवल उन्हीं स्थानों पर होता है जहां त्वचा इन ट्रिगरों के सीधे संपर्क में आती है.

लक्षण

अर्टिकैरिया के कारण निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

– लाल, अत्यधिक खुजली वाले अंडाकार या कीड़े के आकार के  चकत्ते. चकत्तों का आकार कुछ मिलीमीटर से कई इंच तक हो सकता है.

– जब लाल चकत्ते को बीच से दबाया जाता है तो यह सफेद या पीला पड़ जाता है.

– अर्टिकैरिया के चकत्ते शरीर के किसी भी भाग पर दिखाई दे सकते हैं. ये अपना आकार बदल सकते हैं, दूसरे स्थान पर फैल सकते हैं, गायब हो सकते हैं और पुन: प्रकट हो सकते हैं.

अधिकतर अर्टिकैरिया के लक्षण 24 घंटों में चले जाते हैं, लेकिन क्रौनिक अर्टिकैरिया के लक्षण कई महीनों या वर्षों तक रह सकते हैं.

ट्रिगर/कारण

अनुसंधानों में अर्टिकैरिया के  कई कारणों की पहचान की गई है, लेकिन सभी कारकों के बारे में पता नहीं है. अर्टिकैरिया के सामान्य कारक निम्न हैं:

भोजन: कई लोगों में कुछ भोज्यपदार्थ अर्टिकैरिया के  लिए ट्रिगर का कार्य करते हैं जैसे मछली, मूंगफली, अंडा, दूध आदि.

दवा: कई दवाओं से भी यह समस्या हो सकती है. ऐस्प्रिन, पेनिसिलीन और ब्लड प्रैशर की दवा से यह समस्या अधिक होती है.

सामान्य ऐलर्जन: पराग कण, पशुओं की मृत त्वचा और कीड़ों के डंक जैसे सामान्य ऐलर्जन से भी यह समस्या हो सकती है.

पर्यावरणीय कारक: इन में गरमी, सर्दी, सूर्य का प्रकाश, पानी सम्मिलित हैं. इस के अलावा ऐक्सरसाइज और भावनात्मक तनाव के कारण भी त्वचा पर पड़ने वाले दबाव से अर्टिकैरिया की समस्या हो सकती है.

चिकित्सकीय अवस्था: कभीकभी अर्टिकैरिया की समस्या ब्लड ट्रांसफ्यूजन, इम्यून तंत्र से संबंधित गड़बडि़यों, थायराइड, हारमोन की गड़बड़ी, कैंसर के  कुछ प्रकार जैसे लिंफोमा या बैक्टीरिया का संक्रमण जैसे हैपेटाइटिस, एचआईवी आदि के कारण भी हो सकती है.

आनुवंशिकता: आनुवंशिक अर्टिकैरिया के मामले कम देखे जाते हैं. यह कुछ निश्चित ब्लड प्रोटीन्स के कम स्तर या असामान्य कार्यप्रणाली से संबंधित हैं, जो इसे नियंत्रित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि आप का रोगप्रतिरोधक तंत्र किस प्रकार कार्य करेगा.

डाक्टर से संपर्क

अगर अर्टिकैरिया की समस्या निम्नलिखित लक्षणों के साथ आए तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें:

– शरीर के कई भागों पर बड़ी संख्या में त्वचा पर चकत्ते पड़ना.

– चक्कर आना.

– सनसनाहट महसूस होना.

– सांस लेने में कष्ट होना.

– छाती में जकड़न महसूस होना.

– ऐसा महसूस होना जैसे जीभ या गले में सूजन आ गई हो.

अर्टिकैरिया का उपचार घर पर ही कुछ सामान्य सावधानियां रख कर किया जा सकता है. लेकिन अगर 5 दिन में लक्षण दूर न हो कर गंभीर हो जाए तो डाक्टर से संपर्क करें.   

– डा. रोहित बत्रा, डर्मैटोलौजिस्ट ऐंड विटिलिगो ऐक्सपर्ट, सर गंगाराम हौस्पिटल, नई दिल्ली   

करिश्मा मोदी का

नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन का करिश्मा 1971 की इंदिरा गांधी की तरह का सा है और वे अपनी ही पार्टी के पुराने नेताओं को छोड़ कर अकेले मुश्किल इलाकों में भी जीत सकते हैं. सब की आंखें वैसे उत्तर प्रदेश की ओर ही लगी थीं और नरेंद्र मोदी ने अकेले धुआंधार प्रचार कर के समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी को धराशायी कर दिया. बिहार वाली कहानी नहीं दोहराई जा सकी. भाजपा की उत्तर प्रदेश में जीत का मतलब है कि उत्तर प्रदेश शायद जातियों के मकड़जाल से निकल रहा है. भाजपा ने न गरीबों की बात की, न मंडल कमीशन की, न अंबेडकर की, फिर भी जीत गई, तो मतलब है कि अब सिर्फ इसलिए वोट नहीं डाले जाएंगे कि कोई उन की बात कर रहा है.

उत्तर प्रदेश की गरीबी की वजह उस की जाति है. यहां की जनता सैकड़ों जातियों में बंटी है. बहुजन समाज पार्टी ने दलितों को मुहरा बना कर कई बार सत्ता पाई, पर दलित वैसे के वैसे ही रहे. पिछड़े यादवों की सरकारें बनीं, पर यादव व दूसरे पिछड़े वैसे के वैसे ही रहे. कांग्रेस जब तक जीतती रही, वह इन जातियों का हल्ला मचा कर जीतती रही. अब अगर भारतीय जनता पार्टी बिना राम मंदिर जैसे मुद्दे की नाव पर सवार हो कर ही जीती है, तो साफ है कि माहौल बदल रहा है. भाजपा सरकार पिछली सरकारों से खास अलग है, ऐसा सोचना कुछ ठीक नहीं होगा. हर सरकार लगभग एक सा काम करती है. कुछ भी करो यदि हल्ला ज्यादा हो तो सरकार हाथ खींच लेती है. भाजपा का भगवा रंग तो वैसे भी सभी पार्टियां अपनाती ही हैं. पिछले कुंभ में इलाहाबाद में अखिलेश यादव ने खुद लग कर ऐसा इंतजाम किया था, जो कोई धार्मिक पार्टी करती.

भारतीय जनता पार्टी धीरेधीरे कांग्रेस की जगह ले रही है, पर उसे कांग्रेस की तरह दूसरी जमातों के नेता भी लेने पड़ रहे हैं. यह केवल ब्राह्मणवादी पार्टी नहीं रह गई है और एक बसपा के पहले रहे नेता को उस ने राज्य का अध्यक्ष बनाया था. भाजपा का नया रंग उसे हर जाति के साथ जोड़ रहा है और यही उस की जीत की वजह है. इन राज्य चुनावों में जीत का मतलब यह न निकाला जाए कि कोई भी पार्टी हमेशाहमेशा के लिए है. राजनीति में कर्मठता का भी काफी योगदान है और अखिलेश यादव व राहुल गांधी ने इन चुनावों में अपनी मेहनत दिखाई, चाहे वे जीत न पाए. फिर भी किसी भी पार्टी के लिए हमेशा के लिए बने रहना मुश्किल है. पंजाब में अकालीभाजपा सरकार का बुरी तरह हारना इसी का सुबूत है.

लोकतंत्र हो या तानाशाही, जब तक जनता खुश न रहे तब तक शासन में रह रहे लोगों से डर कर रहना होगा. भाजपा ने नोटबंदी से लोगों को नाराज किया, पर जवाब में अखिलेशराहुल या मायावती ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जो नरेंद्र मोदी के कामों या काम करने की बातों से बेहतर लगता हो. इन विधानसभा चुनावों में जीत के बाद भाजपा की मनमानी पर और रोक लगेगी. जीत का मतलब होता है जिम्मेदारी. लोग कुछ ज्यादा ही मांगने लगते हैं. हमारे देश में तो लोग चाहते हैं कि सबकुछ पकापकाया मिल जाए. जब नई पार्टी सत्ता में आती है, तो लोगों की मांगें बढ़ जाती हैं. यही मांगें पहले कांग्रेस और फिर समाजवादी पार्टी को ले डूबीं.

अवसर के अनुसार ऐसे हों तैयार

प्रत्येक परिधान की अपनी उपयोगिता होती है, अपना महत्त्व होता है, परंतु उसे पहनने के अवसर अलगअलग होते हैं. कुछ शालीन, कुछ भड़कीली, कुछ ट्रैडिशनल, कुछ मौडर्न या कुछ इंडोवैस्टर्न आउटलुक वाली ड्रैसेज हम अपनी इच्छा, अपनी जरूरत अथवा अवसर के हिसाब से पहनती हैं. घर में तो आप कुछ भी पहन सकती हैं यानी जिस में भी आप कंफर्टेबल महसूस करें. पर इस का यह मतलब बिलकुल भी नहीं कि आप दिन भर नाइटी में घूमें. घर के परिधान आराम, काम और घर के सदस्यों के रिश्ते के अनुसार होने चाहिए. कुरतासलवार, कुरतापाजामा, कुरतीकैपरी, टौप, शौर्ट्स, फ्रौक, साड़ी कुछ भी. लेकिन बात तो बाहर जाने की या खास अवसरों की है, जब विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इस दृष्टि से ड्रैसों को कुछ भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है ताकि पहनने, सहेजने, खरीदने व मैनेज करने में आसानी हो :

पार्टी वियर

पार्टी, उत्सव व त्योहारों पर आप वाइब्रैंट कलर्ड परिधानों में अपना जलवा बिखेरते हुए खुशियां मनाएं. ड्यूअल और मल्टी टोन साडि़यां आजकल खूब प्रचलन में हैं. चंदेरी साड़ी तो नैट का आंचल, सिल्क, कंजीवरम, बंधानी, कलकुट्टी व बनारसी इत्यादि पारंपरिक साडि़यां किसी भी एज गु्रप में खूब फबती हैं. ठंड का मौसम है तो पश्मीना शाल कंधे पर स्टाइल में डाली जा सकती है, तो हाल्टर कालर ब्लाउज, गराराशरारा, पटियाला सलवार, चूड़ीदार पर कलियों वाला अनारकली या औब्लीक कालर वाला लंबा ब्रौकेड कुरता अथवा ग्लौसी फैब्रिक, प्लाजो के साथ लंबा कंट्रास्ट साइड मिडल कट वाला, डिजाइनर कुरता, ऊपर हाईनैक फ्रंट ओपन बौर्डर कढ़ाई वाला, स्लीवलैस श्रग गाउन या लंबी खूबसूरत जैकेट पहनें. बया कफ्तान, स्टाइलिश लेस मैक्सी गाउन में आप 40 के ऊपर हैं तो भी यंग दिखेंगी और आप का अंदाज निराला आई कैचिंग. कम उम्र की महिलाएं, लड़कियां, शाइनिंग ब्राइट कलर वाले जंप सूट, फ्लैशी टौप के साथ लौंग स्कर्ट, झीने फ्लोरोसैंट कलर्ड थ्रीफोर्थ गाउन के साथ हाल्टर कालर वाली खूबसूरत फूलों के प्रिंट की लौंग फ्रौक, पैच वर्क वाली लंबी स्लीव के साथ कौकटेल पोर्म ड्रैस ट्यूनिक, स्पैगेटी, कुछ भी ऐसा पहनें जो माहौल को चार चांद लगाए. स्टोल, बैल्ट, कैप, हैट, ग्लव्ज, स्कार्फ, रंगबिरंगे मिटन इत्यादि ऐक्सैसरीज से और भी आकर्षक स्टाइलिंग कर सकती हैं.

पिकनिक, मस्ती के लिए कढ़ी हुई हिप्पी ब्लाउज वाली बोहो ड्रैस, कंट्रास्ट टौप वाले जंप सूट, कैपरी टौप, डैनिम ब्लू ब्लैक जींसपैंट, शिमर या नैट प्लाजो लैगिंग, प्लेन कुरता अथवा कुरते के साथ प्रिंटेड स्लीवलैस जैकेट या हाईनैक कोटी. क्राप्ड टौप्स, फ्लेयर्ड जींस, डैनिम शौर्ट्स, सर्दियों में मिनी स्कर्ट के साथ मोटे कपड़े की कलरफुल टाइट या थर्मल लैगिंग पहनें, अलगअलग ब्राइट कलर्स की ड्रैसें लेयरिंग स्टाइल में पहनें. अच्छी दिखती हैं. स्लीवलैस जैकेट के साथ टर्टल कालर की शर्ट सर्दियों में खूब जंचती है.

औफिस वियर, फौर्मल वियर

यदि आप औफिस गोइंग हैं, तो वहां यदि कोई ड्रैस कोड है तो वही पहनें अन्यथा जैसा वहां का चलन हो उस के  अनुसार साड़ीसूट या शर्टपैंट, टाईकोट, कट कालर, प्लेन कालर कोट, बंद गले का टर्टल कालर कोट, लौंग कोट इत्यादि वही पहनें. हलके प्रिंट वाले सोबर सूट, साडि़यां अथवा तन को शालीनता से ढकने वाली चुस्त स्मार्ट ड्रैसें औफिस के लिए उपयुक्त हैं. जहां ब्लैक, ब्लू डैनिम जींस के साथ व्हाइट या लाइट कलर्ड बटनअप शर्ट खूब जंचती है, वहीं भड़कीले, ब्राइट कलर, डिजाइनर व अंगप्रदर्शन वाली ड्रैस पहनने से परहेज करें ताकि दूसरों के कार्य में आप की वजह से खलल न पड़े. वर्क प्लेस पर न तो अपने और न ही दूसरों के काम का टैंपो भंग करने में समझदारी है. कपड़े स्मार्टली पहनें, जिस से आप स्वयं भी औफिस कार्यों को अच्छी तरह अंजाम दे सकें. यदि आप औफिस गोइंग नहीं हैं पर आप को कभी किसी औफिस में जाना पड़ता है, तो भी इस बात का ध्यान रखना जरूरी है. ऐसी जगहों पर मीटिंग्स में जाड़ों में स्मार्ट ब्लैक जैकेट या ब्लेजर अथवा ग्रे, स्किन, कौफी कलर व कंधे पर डाली गई शाल खूब सूट करेगी.

शादी व सेरेमोनियल वियर

शादियों के लिए गोल्डन सिलवर शाइनिंग ब्राइट बोल्ड कलर्स की ड्रैस खूब पसंद की जाती है. ट्रैडिशनल साडि़यों में भी इस पर खास जोर दें. जरी की भारी बनारसी साड़ी, ब्लाउज खूब फबेंगे. यदि घर के संबंध हैं या सहेली की शादी है, तो आप हैवी वर्क वाली चुन्नी के साथ जयपुरी लहंगा, स्ट्रेट या कलियों वाला, जरदोजी काम किया चमकती बूटियों वाला घेरदार लहंगा, ऊपर बैकलैस पूरी बाजू हैवी वर्क वाली सुनहरी, चमकती चोली या कुरता भी डाल सकती हैं या कुछ और जिस में मस्ती में जी भर कर डांस करने का मजा भी ले सकें. लेटैस्ट लहंगे में रौयल लुक देने के लिए जैकेट, रोब्स कैप्स का भी बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है.

रिसैप्शन के लिए थोड़ा हलकी जरी, मोतीसितारों या सीप कढ़ी साड़ी के साथ स्लीवलैस या फोर्थ बाजू वाले बैकलैस ऐलीगैंट बलाउज अथवा अनारकली सूट, नैट लेस या टिशू पर ऐंब्रौयडरी की हुई लौंग स्कर्ट या ज्यादा वर्क की हुई फिल्म वाली लंबी ग्लौसी फैब्रिक बेस्ड फ्रौक चमकते स्लीक से आभूषणों के साथ आप को स्टाइलिश लुक देगी.

हलदी फंक्शन में जा रही हों तो कुछ पीले परिधान में जाएं. अच्छा लगेगा. इसी तरह मेहंदी की रस्म में जा रही हों तो हरी, मेहंदी कलर की ड्रैस का चुनाव करें, जिस से लगेगा आप वाकई उन की खुशियों में दिल से शामिल होने आई हैं.

ऐक्सरसाइज, वाक जौग वियर

वाकिंग के लिए ढीला कुरता, कुरती पाजामा, टौप, ट्राउजर, कैपरी, जौगिंग के लिए ट्रैक सूट, व्यायाम के लिए घुटनों तक स्किनी लैगिंग, शौर्ट, कौटन स्लीवलैस टौप आदि सही रहते हैं, जिन में बौडी को आराम से हिलाघुमा सकें और पसीना भी सोखता रहे.

सादी संजीदा ड्रैसें

बहुत से ऐसे मौके होते हैं, जब चटकमटक, कामदार, दामदार कपड़े पहन कर जाना बिलकुल उचित नहीं जैसे जब किसी मरीज को हौस्पिटल या घर देखने जा रही हों या किसी की मातमपुरसी में, तो सादे सफेद या हलके रंग और प्रिंट वाले संजीदा कपड़े पहनें.

नाइट वियर

नाइट गाउन या नाइटी तो कुछ महिलाओं को इतनी प्यारी होती है कि वे घर में हर वक्त उसी में ही रहना चाहती हैं, सब्जीभाजी खरीदने भी उसी में निकल आएंगी, पर ऐसा करना अशोभनीय है. पाजामा, कुरता, टौप का नाइट सूट भी सही और सुविधाजनक है, जिस में कलर प्रिंट, फैब्रिक आप अपने सुकून के मुताबिक चुन सकती हैं.

स्पोर्ट्स वियर

ढीले टौप शौर्ट्स या स्कर्ट्स स्किनी शौर्ट्स खेलकूद के लिए आरामदेह और चुस्तीस्फूर्ति बढ़ाने में सहायक होते हैं. तैराकी के लिए विविध प्रकार के स्वीमिंग सूट मिलते हैं, टू पीस या वन पीस, बिकिनी अपनी चौइस है. अन्य परिधान स्वीमिंग के लिए असुविधा जनक हैं और हास्यास्पद भी.

इन बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने क्रिकेटर्स से की शादी

बॉलीवुड और क्रिकेट का रिश्ता काफी मजबूत और पुराना है. मनोरंजन की सबसे बड़ी दो इंडस्ट्रियों के बीच अनेकों अफेयर के किस्से जन्में परंतु कुछ अपने रिश्ते को शादी तक ले जा पाए और कुछ किस्से अधूरे ही रह गए. कुछ ऐसे क्रिकेटर जिन्होंने बॉलीवुड अभिनेत्रियों से शादी की.  

हरभजन सिंह और गीता बसरा

भारतीय गेंदबाज हरभजन सिंह ने अभिनेत्री गीता बसरा के साथ 29 अक्टूबर 2015 को शादी की. यह शादी जालंधर के एक गुरूद्वारे में हुई. दोनों ने पांच वर्ष लंबी कोर्टशिप के बाद शादी की. शादी ने सोशल मीडिया पर खूब धूम मचाया था. इस शादी में क्रिकेट जगत और बॉलीवुड की नामी हस्तियों ने  शिरकत की जिनमें अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा जैसे नाम शामिल हैं.  

मोहसीन खान और रीना रॉय

पाकिस्तान के प्रसिद्ध खिलाड़ी मोहसीन खान और हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री रीना रॉय के 1980 में खूब सुर्खियां बटोरी. इस जोड़े ने शुरूआत डेटिंग के साथ की. दोनों ने 1 अप्रेल 1983 को शादी की. शादी के बाद, यह जोड़ा पहले कराची (पाकिस्तान) में बसा और फिर मुंबई शिफ्ट हो गया. जहां मोहसीन खान ने भी फिल्मों में करियर बनाने की कोशिश की. इन दोनों की एक बेटी जन्नत है. लेकिन ये शादी ज्यादा दिन नहीं चल सकीं और बाद में इस जोड़े का तलाक हो गया.    

मोहम्मद अजहरूद्दीन और संगीता बिजलानी

1994 में मोहम्मद अजहरूद्दीन और संगीता बिजलानी के बीच अफेयर होने की खबरे सामने आईं. अजहर शादीशुदा थे. दोनों की मुलाकात एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान हुई थी. आखिरकार अजहर ने अपनी पत्नी को तलाक दिया और 1996 में संगीता बिजलानी से शादी की. हालांकी इन दोनों का तलाक हो चुका है. खबरों की मानें तो, संगीता बिजलानी के अजहर से तलाक के पीछे अजहर और बैडमिंटन प्लेयर ज्वाला गुट्टा के बीच की नजदीकियां थीं.  

मंसूर अली खान और शर्मिला टैगोर

मंसूर अली खान और शर्मिला टैगोर की शादी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी. दोनों ही अपने क्षेत्रों में सफलता की बुलंदी पर थे जब 27 दिसंबर 1969 को नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर ने शादी की. लोगों को इस शादी के ज्यादा दिन तक चलने की उम्मीद नहीं थी. नवाब पटौदी ने शर्मिला को फिल्मों में काम करने से कभी नहीं रोका और उनका साथ दिया. यहां तक कि शर्मिला की अधिकतर हिट फिल्में उनकी शादी के बाद की हैं. उनके तीन बच्चे हैं जिनमें फिल्म अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान शामिल हैं. 

युवराज सिंह और हेजल कीच

अभी हाल ही में हुई युवराज और हेजल की शादी ने सोशल मीडिया के खूब हरा भरी किया था. बॉलीवुड अभिनेत्रियों में युवराज काफी पॉपुलर रहे, लेकिन बाजी अंत में हेजल कीच के हाथ लगी. इससे पहले किम शर्मा, दीपिका पादुकोण और मॉडल अंचल कुमार युवराज पर अपने प्यार के जाल फेंक चुकी हैं.

ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

तकनीक के इस दौर में जब खाने-पीने से लेकर पहनने तक सब ऑनलाइन हो गया है, तो इंश्योरेंस ऑनलाइन क्यों न हो? बहुत सी बीमा कंपनियां अब ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदने का ऑप्शन भी दे रही हैं. ऑनलाइन इंश्योरेंस लेना बहुत आसान और कीफायती भी है, इसलिए बहुत से लोग ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीद रहे हैं. पर ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने से पहले थोड़ी सावधानी भी जरूरी है. ऑनलाइन पॉलिसी लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान-

कंपनी का पिछला रिकॉर्ड जरूर देखें

आप जिस भी कंपनी से ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदना चाहते हैं उसका पिछला रिकॉर्ड चेक करना बहुत जरूरी है. कंपनी साइट पर दिए गए दूसरे ग्राहकों का अनुभव जरूर पढ़ें. कंपनी द्वारा ग्राहक संतुष्टि, क्‍लेम निपटारे का रिकॉर्ड भी चेक करें. अगर आप ऑनलाइन हेल्थ इंश्योरेंस खरीद रही हैं तो यह भी जरूर देखें की उस कंपनी का किस कंपनी के साथ टाइ अप है और वह हॉस्पिटल भी आपके घर के आस-पास ही हो.

कौन खरीद सकता है पॉलिसी?

अगर आप सोच रहे हैं कि कोई भी ऑनलाइन पॉलिसी खरीद सकता है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. आप कुछ स्टैंडर्ड पॉलिसी ही ऑनलाइन खरीद सकती हैं. अगर आपकी उम्र 45 साल है और आप पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो आप ऑनलाइन हेल्‍थ पॉलिसी नहीं खरीद सकती हैं. लाइफ इंश्योरेंसपॉलिसी में भी सिर्फ टर्म इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी और कुछ यूलिप प्‍लैन ही ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं.

किस पॉलिसी की कितनी है कीमत

ऑनलाइन इंश्योरेंसपॉलिसी खरीदने से पहले अलग अलग पॉलिसियों के बारे में जानकारी हासिल करना बहुत जरूरी है. कभी भी एग्रीगेटर साइट पर दी गई जानकारी पर पूरी तरह से विश्‍वास न करें. कंपनी की निजी वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें.

कितना लगता है सर्विस टैक्‍स

ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने से पहले उस पर लगने वाले सर्विस टैक्स के बारे में पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें. आमतौर पर कंपनियां सर्विस टैक्स के बारे में कुछ ऐसे जानकारी देती हैं, कि पढ़ने वाले को पता ही नहीं चलता. इंश्योरेंस प्रीमियम पर 14 पर्सेंट सर्विस टैक्स तो चुकाना ही पड़ता है.

प्रीमियम में कितनी छूट

ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदने पर भी छूट मिल सकती है. इंश्योरेंस खरीदने से पहले कंपेयर करना न भूलें. इससे आपको अलग अलग कंपनियों के प्रीमियम का अंदाजा हो जाएगा. रिसर्च से आप कम प्रीमियम में इंश्योरेंस खरीद सकते हैं.

आईपीएल में परफॉर्मेंस देंगी अभिनेत्री दिशा पटानी

बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पटानी इस साल पहली बार आईपीएल में परफॉर्म करने वाली हैं. दिशा 8 अप्रैल को मध्यप्रदेश के इंदौर में परफॉर्म करेंगी. हम आपको बता दें कि आईपीएल 5 अप्रैल से ही शुरू होने जा रहा है. इंडियन प्रीमियर लीग यानि कि आईपीएल का दसवां सीजन बस शुरु ही होने जा रहा है. 5 अप्रैल, 2017 को सनराइजर्स हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के बीच, हैदराबाद में खेला जाने वाला मैच इस सीजन की मेजबानी करेगा.
 
आईपीएल की खासियत है कि जितनी नजर इसके मैचों पर रहती है, उतनी ही चर्चित इसकी ओपनिंग सेरेमनीज भी होती हैं. इस बार तो दर्शकों को 8 ओपनिंग सेरेमनी का आनंद उठाने का मौका मिलेगा. पहले के सीजनों में शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण जैसे बॉलीवुड स्टार इससे अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं. 
 
आईपीएल के आयोजकों की मानें, तो इस बार 8 अलग-अलग शहरों में बॉलीवुड सितारे लोगों का मनोरंजन करते नजर आएंगे. इसकी शुरुआत बुधवार को हैदराबाद से होगी, जहां राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आईपीएल का पहला मुकाबला होगा. इंडियन प्रीमियर लीग के इस दसवें संस्करण के उद्घाटन समारोह में टाइगर श्रॉफ, श्रद्धा कपूर, परिणीति चोपड़ा जैसे सितारे भी दर्शन करने वाले हैं. 
 
खबरों के अनुसार, दिशा पटानी का मानना है कि ऐसे जबर्दस्त इवेंट में कौन परफॉर्म नहीं करना चाहेगा और उनके लिए भी ये एक रोचक इवेंट होने वाला है. वाकई इतनी बड़ी दर्शक संख्या के सामने परफार्म करना अपने आप में एक बेहतरीन अनुभव होगा. सूत्रों की माने तो दिशा इस मौके पर अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस देने की कोशिश में लगी हुई हैं. वे इसके लिए खुद ही कोरियोग्राफ भी कर रही हैं. दिशा किंग्स इलेवन पंजाब के थीम सॉन्ग, कौन तुझे, चुल, लैला और बेफिक्रा के मैश पर अपना परफॉर्मेंस देने वाली हैं.
 
खबरों की मानें तो इस बार युवा बॉलीवुड सितारे अलग-अलग शहरों की ओपनिंग सेरेमनी में परफॉर्म करते नजर आएंगे. खबर यह भी है कि सुपर-डांसर ऋतिक रोशन भी अब की बार धमाल मचाते नजर आ सकते हैं.

कॉलेज डिग्री के बिना कमायें लाखों

आजकल सभी को नौकरी चाहिए. हर व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है. पर किसी के परिवार वाले साथ नहीं देते, किसी की किस्मत तो किसी की डिग्री. अगर आप भी अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं, तो अभी देर नहीं हुई. बिना डिग्री के भी आप अपने पैरों पर खड़ी हो सकते हैं. कुछ ऐसी नौकरीयां हैं, जिसमें सैलेरी बहुत है पर किसी खास डिग्री की जरूरत नहीं है. अगर आपके पास कम्यूनिकेशन, प्लानिंग, स्ट्रेटजी जैसे स्किल्स हैं तो बिना डिग्री के भी नौकरी मिल सकती है.

इन नौकरियों के लिए नहीं चाहिए कोई डिग्री-

1. कस्टमर सपोर्ट ऑफिसर

किसी भी कंपनी को मार्केट में अपना प्रोडक्ट चलाना के लिए कस्टमर को खुश करना बहुत जरूरी है. यह प्रोफेशन कस्टमर्स का पूरा ख्याल रखने के लिए ही बना है. अगर आपके पास अच्छे कम्यूनिकेशन स्किल्स हैं तो आप इसमें अपना करियर बना सकते हैं. आपको अपनी कंपनी के कस्टमर्स के शिकायतों और परेशानियों का समाधान निकालना होगा. कई बार अप्रिय भाषा भी सुनने को मिलेगी. इसलिए आपके पास स्ट्रॉन्ग कम्यूनिकेशन स्किल्स के साथ साथ सहनशक्ति होना बहुत जरूरी है.

2. रियल एस्‍टेट एजेंट

आसान से शब्दों में कहा जाए तो ‘ब्रोकर’. बड़े शहरों में बिना ब्रोकर के फ्लैट ढूंढना बहुत मुश्किल है. ये प्रॉपर्टी के खरीदने ये रेंट करने के लिए विक्रेता और खरीदार के बीच में बिचौलिए का किरदार निभाते हैं. अगर आप में आत्मविश्वास है तो आप भी ये काम कर सकती हैं. एजेंट बनने के लिए डिग्री की नहीं, पर लाइसेंस की जरूरत जरूर पड़ती है.

3. मेकअप आर्टिस्‍ट

अगर आप क्रिएटिव हैं और आप में आर्टिस्‍टि‍क स्किल्‍स हैं तो आप सफल मेकअप आर्टिस्‍ट बन सकते हैं. मॉडलिंग, फैशन, सिनेमा आदि क्षेत्रों में मेकअप आर्टिस्‍ट की अपने टैलेंट के हिसाब से अच्‍छी कमाई होती है. इसके लिए भी किसी डिग्री का होना आवश्‍यक नहीं है. अगर आपके पास टैलेंट है तो आप अच्छी कमाई कर सकते हैं.

4. सोशल मीडिया मैनेजर

बदलते समय के साथ बहुत सारे नए प्रोफेशन भी आ गए हैं. सोशल मीडिया मैनेजर भी नए जमाने की जॉब है. आजकल हर कंपनी का सोशल मीडिया पर होना कंपनी की जरूरत बन गई है. एक सोशल मीडिया मैनेजर को ट्विटर, फेसबुक और लिंक्डइन जैसी साइट्स पर अपनी कंपनी का स्टेटस अपडेट लिखना, प्रमोशन कंटेंट बनाना, सवालों के जवाब देना और कमेंट्स का रिप्लाई करना जैसे काम करने होते हैं. इस जॉब के लिए भी कोई स्पेसिफिक डिग्री नहीं चाहिए. पर आपको सोशल मीडिया के बारे में पता होना चाहिए और आपके पास क्रिएटिविटी भी होनी चाहिए.

5. इवेंट मैनेजर     

शादी हो, घर का प्रोग्राम या कोई ऑफिस इवेंट, किसी भी छोटे-बड़े फंशन के आयोजन के लिए इवेंट मैनेजर की जरूरत पड़ती है. पार्टी करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो पार्टी को प्रॉपर तरीके से प्लैन कर सके और विभिन्न प्रकार के इवेंट्स और समारोहों के आयोजन में अहम भूमिका निभाएं. अगर आपका क्रिएटिव माइंडसेट है तो आप बिना डिग्री के इस प्रोफेशन में ऊंचाइयां छू सकते हैं.

6. फ्रीलांस फोटोग्राफर  

फोटोग्राफी कुछ लोगों के लिए सिर्फ एक हॉबी है. अगर फोटोग्राफी आपकी भी हॉबी है, तो आप इसे अपना प्रोफेशन भी बना सकते हैं. हालां‍कि इस प्रोफेशन में आपको अपने क्‍लाइंट्स की जरूरत के हिसाब से काफी ट्रेवल भी करना पड़ सकता है. लेकिन इसके लिए कोई डिग्री की जरूरत नहीं हैं.

7. पर्सनल ट्रेनर

यह एक दिलचस्प जॉब है. पर इसके लिए पहले आपको खुद फिट होना पड़ेगा. हेल्थ को लेकर लोग पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. इशलिए पर्सनल ट्रेनर की डिमांड बढ़ गई है. इस जॉब को करने के लिए आपको डिग्री या सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ती है. इस पेशे में आप लाखों रुपये कमा सकते हैं.

8. रेडियो जॉकी

अगर आपकी आवाज में भी जादू है तो आप रेडियो जॉकी बन सकते हैं. इस जॉब के लिए कम्यूनिकेशन स्किल्स चाहिए. अगर शब्दों पर आपकी अच्छी पकड़ है तो आप रेडियो जॉकि बन सकते हैं.

फीस विवाद भी अदालत ही सुलझाए क्या

देश भर की छोटी बड़ी तमाम अदालतें इन दिनी झल्लाई हुईं हैं तो इसकी बड़ी वजह फालतू के वे मुकदमे ज्यादा हैं जो शौक और शौहरत  के लिए ज्यादा और इंसाफ नाम की चिड़िया के लिए कम लड़े जाते हैं. बेशुमार मुकदमों और उनकी फाइलों के बोझ तले दबी अदालतें अभी गर्मियों की छुट्टियों में अतरिक्त घंटे काम करने मन बना ही रहीं थीं कि नया बखेड़ा फिर दिल्ली से उठ खड़ा हुआ, जिस पर अगली पेशी पर जज साहिबान और झल्लाते यह भी कह सकते हैं कि आप लोग यानि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और महा मशहूर हो चले वकील साहब राम जेठमलानी पहले तय कर लें कि वकील की फीस कौन देगा. आम आदमी पार्टी, दिल्ली की जनता, सरकार या खुद प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल, इस के बाद ही अदालत में पांव रखें.

मुकदमे में कोई तकनीकी पेंच नहीं है, अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेता, और दिल्ली क्रिकेट के तत्कालीन  सर्वे सर्वा  वित्त मंत्री अरुण जेटली जो खुद भी वकील हैं पर क्रिकेट में भ्रष्टाचार की आरोप लगाए थे और उन्हे साबित करने एक कमेटी भी गठित कर दी थी. यह बात अरुण जेटली को अच्छी नहीं लगी तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा ठोक दिया. यह चर्चित हो चला मुकदमा जल्द ही अपनी दूसरी वर्षगांठ मनाएगा. केजरीवाल ने अपने बचाव के लिए जेठमलानी को वकील नियुक्त किया, जिन्होंने पिछली पेशी पर मौखिक जिरह में जेटली के पसीने छुड़ा दिये थे. तब तक यह किसी को नहीं मालूम था कि जेठमलानी पिछले साल दिसंबर में ही अपनी फीस का बिल केजरीवाल को भेज चुके हैं और उन्होंने इसके भुगतान के लिए सरकारी खजाने को मुफीद समझा है.

यह बात उजागर हुई तो दिलचस्प किस्म का हल्ला मच गया. भाजपा की तरफ से प्रकाश जावडेकर ने तर्क दिये कि भला यह कौन सी बात हुई कि अपने निजी मामलों के लिए केजरीवाल जनता की गाढ़ी कमाई लुटाएं. चूंकि जेटली जी ने स्टाम्प ड्यूटी खुद भरी है और वकील की फीस भी अपने खीसे से दी है, इसलिए केजरीवाल को भी ऐसा ही करना चाहिए . विवाद बढ़ा तो आप के पट्ठे भी मैदान में यह दलील देते कूद पड़े कि चूंकि केजरीवाल पर सीएम रहते मुकदमा दायर हुआ, इसलिए सरकारी खजाने से फीस देने के विवाद को भाजपा ईवीएम मशीनों की खामी ढकने तूल दे रही है.

अब भाजपा का यह कहना भी एकदम बेमानी नहीं है कि केजरीवाल पर तो मानहानि के दस मुकदमे चल रहे हैं, क्या उनका खर्च भी जनता भुगतेगी और अगर वे यह मुकदमा हार गए तो दस करोड़ रुपये कौन देगा. राजनीति क्यों और कैसे मनोरंजन का जरिया बनती जा रही है इसे इस विवाद में जेठमलानी की इस दखलंदाजी से भी समझा जा सकता है कि वे तो सिर्फ अमीर क्लाइंटों से फीस लेते हैं, निर्धनों के मुकदमे मुफ्त लड़ देते हैं. यह उन्होंने नहीं बताया कि कितने गरीब गुरबों के केस उन्होंने लड़े हैं, पर यह जरूर सच है कि तहसील और जिला स्तर के वकील महज वक्त काटने की गरज से मुफ्त के भाव मुकदमे लड़ने की दरियादिली दिखाते हैं और काबिल और कामयाब वकील उधारी में भी मुकदमे लड़ते हैं, फिर बाद में अपनी फीस मय ब्याज के मुवक्किल से वसूलते हैं.

इस फीस विवाद पर मीडिया, वकीलों और आम लोगों ने भी अपनी अपनी बहूमूल्य राय निशुल्क प्रचारित प्रसारित कीं कि अगर मुकदमा दिल्ली के सीएम के खिलाफ है तो फीस सरकारी खजाने से चुकाना हर्ज की बात नहीं और अगर जेटली ने मुकदमा व्यक्ति अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर किया है तो केजरीवाल जेठमलानी की भारीभरकम फीस भुगतें. चूकि दूसरी राय भारी पड़ रही थी इसलिए जेठमलानी ने अपना गरीबों रईसों वाला फार्मूला पेश कर डाला.

इस मसले पर राजद सुप्रीमो लालू यादव की यह चुटकी अहम है कि चाचा यानि जेठमलानी उनके मुकदमे तो फ्री लड़ते हैं. खुद जेठमलानी पिछले दिनों भोपाल में कह चुके हैं कि कभी  भाजपा में उन्हें इस शर्त पर लिया गया था कि वे उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चल रहे हत्या के एक मुकदमें में पैरवी करेंगे, यानि वे लगभग इसी शर्त पर बिहार से राजद के सदस्य चुने गए थे कि लालू और उनकी टीम के मुकदमे मुफ्त में लड़ेंगे. अगर ऐसा है तो सुप्रीम कोर्ट खुद भी इस पर संज्ञान लेने का अधिकार रखता  है कि मुकदमे की सुनवाई बाद में होगी, पहले ऐसे उलझे मामलों में यह स्पष्ट किया जाये कि फीस कौन कितनी और कैसे दे और ले रहा है और वकील इसे किसी संवैधानिक पद के एवज में तो नहीं ले रहा.      

भगवान के लिए बंद करें कन्या पूजन का ये ड्रामा

दस साल की बच्ची से चाचा ने की ज्यादती की कोशिश…बॉक्सिंग खिलाड़ी ने की नाबालिग से ज्यादती…मंगलवार 4 अप्रैल को भोपाल के अखबारों में छपी उक्त शीर्षकों वाली खबरें इस लिहाज से जरूर चिंता का विषय थीं कि इस दिन अष्टमी का त्योहार होने के चलते घर घर में कन्या पूजन हो रहा था, नहीं तो रोज रोज कन्याओं से दुष्कर्मों की खबरें भोपाल में इतनी आम हो गई हैं कि लोगों ने इन्हे छुरेबाजी या जेबकटी की तरह रोजमरराई और मामूली जुर्म मानना शुरू कर दिया है.

इसी साल फरवरी में अवधपुरी इलाके में एक अधेड़ शिक्षक ने ग्यारह साला एक छात्रा का बलात्कार किया था और इसके चंद दिनो पहले ही भोपाल के ही कोलार इलाके के नामी प्ले स्कूल में तीन वर्षीय एक मासूम से स्कूल संचालिका के पति ने दुष्कर्म किया था. इन मामलों पर जरूर थोड़ा बहुत हल्ला मचा था पर फिर लोगों को संवेदनहीन होने में ही अपना भला लगा. चूंकि  संवेदनहीन होना बहुत आसान काम भी नहीं है, इसके लिए जिस नशे की जरूरत होती है वह भोपाल के दर्जन भर इलाकों में समारोह पूर्वक परोसा जा रहा था. वह नशा है धर्म का, जिसने लोगों को घुमा फिरा कर और सीधे सीधे भी बताया कि किसी बात का टेंशन मत लो, ये दुनिया ईश्वर के इशारे पर चलती है, तुम तो निमित्त भर हो, इस तरह के सैकड़ों मीठे प्रवचन सुनकर और कुछ रुपये चढ़ाकर लोग एक ग्लानि और सामाजिक अपराधबोध से सस्ते में मुक्ति पा गए. फिर हफ्ते भर कन्या पूजन और भंडारों के आयोजन होते रहे.

रामकथा बांचने में मशहूर एक नामी संत मोरारी बापू ने अपने 3 अप्रैल के प्रवचनों में कहा कि बेटा जन्म ले तो उत्सव मनाओ, पर बेटी जन्मे तो सवा गुना उत्सव मनाओ. अपनी कथा में इस बापू ने एक सामयिक समस्या का उक्त समाधान बताया, फिर बताया कि कैसे अवध क्षेत्र में जा बसी वासंती नाम कि गणिका तुलसीदास के पैरों में गिरि और उन्हें रिझाने का अपना मकसद भूलकर उनसे बोली कि आप के मुख से राम का गुणगान सुनना चाहती हूं. इस पर गोस्वामी तुलसीदास बोले, श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन…बस फिर हुआ एक और चमत्कार, वासंती यह पद पूरा होते होते अस्तित्व में लीन हो गई यानि तर गई. इन संदर्भ और प्रसंगो का बच्चियों के साथ होने बाले दुष्कर्मों का कोई सीधा संबंध भले ही न प्रतीत हो, पर नवरात्रि में कन्या पूजन से तो इन मानो में है कि हम एक विरोधाभासी और दोगले  समाज में जी रहे हैं.

एक तरफ तो कन्याओं को देवी मानते पूजते हैं और दूसरी तरफ मौका मिलते ही या मौका ताड़ते ही उनसे दुष्कर्म करने में इस बात का भी लिहाज नहीं करते कि कम से कम नवरात्रि में तो इन मासूमों को बख्श दिया जाये. निश्चित रूप से धर्म के नशे में चूर भक्तजनों की पहली आपत्ति यह होगी कि वे दुष्कर्मी या बलात्कारी कोई आदमी थोड़े ही थे, वे तो हैवान और दानव थे, जो ऊपर जाकर खौलते कड़ाहे में अपने किए की सजा भुगतेंगे.  अब अक्ल के ये अंधे यह नहीं बता पाएंगे कि जब अबोध बच्चियों से दुष्कर्म कोई राक्षस कर रहा होता है, तब जीभ लपलपाती हाथ में त्रिशूल लिए वह तस्वीर वाली दुर्गा मां क्यों प्रगट होकर इन कलयुगी दानवों का संहार नहीं करती.

अगर यह सब कुछ प्रतीकात्मक है और किस्से कहानियों में ही सिमटे रहना है, तो फिर कन्या पूजन क्यों, कन्या जन्म पर सवाया उत्सव क्यों, उन लोगों को पापी क्यों कहा जाये जो कन्या भ्रूण हत्या करते और करवाते हैं. मुमकिन है वे बच्ची की हिफाजत इस माहौल में करने में खुद को असमर्थ पाते हों, इसलिए बेटी को कोख में ही मार देते हों. समाज और कानून बच्चियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकते पर धर्म और उसके ठेकेदार तो कहते हैं कि राम या कृष्ण का नाम लेने से महापापी भी मुक्त हो जाते हैं.  यह पलायनवादी  और मुजरिमों को शह देने वाला संदेश नहीं तो क्या है? और खुद को सभ्य समाज का हिस्सा मानने वाले लोग क्या खाकर बच्चियों का पूजन कर रहे हैं जब वे उनकी सुरक्षा खुद नहीं कर सकते अगर कन्या पूजन से पाप धुलते हैं मोक्ष मुक्ति मिलती है, समाज को कोई अदृश्य शक्ति मिलती है तो कन्याओं के बलात्कारियों को तो यह मौका पहले मिलना चाहिए और यदि उन्हें ईश्वर ही सजा देगा तो फिर कानून की जरूरत ही क्या.

यह कड़वा सच हजम करने जरूर एक बहुत बड़ी छाती चाहिए कि वह धर्म ही है जो स्त्री को शूद्र समान और दासी मानता है और दूसरी तरफ देवी कहकर इसलिए पूजता भी है कि कहीं उसमे स्वाभिमान न आ जाये, वह सचमुच में बराबरी की बात न करने लगे इसलिए बच्चियों के दुष्कर्मों को इस नजरिए से भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह मानसिक विकृति के साथ साथ पुरुषोचित अहम की देन तो नहीं, जो समाज पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए कुछ भी कर सकता है. केवल जघन्य, हैवानियत या अक्षम्य कह देने से बच्चियां नहीं बचने वालीं और कन्या पूजन से बचती होतीं तो अकेले भोपाल में औसतन हर तीसरे दिन एक कन्या दुष्कर्म का शिकार नहीं होती.

अगर कन्या पूजन सामाजिक जिम्मेदारियों से विमुख करता है तो धर्म के नाम पर होने वाले इन ड्रामों पर रोक लगनी चाहिए, जिनमे मंशा एक तमाशे को अंजाम देने की और बड़े पैमाने पर होने लगे एक गंभीर प्रवृत्ति के अपराध से और उसकी ग्लानि से मुक्त होने की होती है. हमें यह स्वीकारना आना चाहिए कि ऊपर कोई न्याय नहीं होता, जिसके नाम पर अरबों खरबों का कारोबार रोज खुलेआम होता है. अब तो धर्मगुरुओं की चिंता घटता लिंगानुपात इसलिए है कि उनकी दुकानों पर घाटे का खतरा मंडराने लगा है. रामकथा जैसे आयोजनो में औरतें नाचती हैं तो ग्राहकी बढ़ती है नहीं तो उसके होने न होने से इन्हें कोई सरोकार न पहले कभी था न आज है.  स्त्री तब भी भोग्या थी और आज भी भोग्या है.               

डिप्रेशन से बचने के लिए ये ऐप्स हैं मददगार

दुनियाभर में डिप्रेशन (अवसाद) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस मामले में भारत भी पीछे नहीं है. वर्ल्ड हेल्थ डे (7 अप्रैल) का थीम भी डिप्रेशन से जुड़ा है.

अगर आपके करीबी या आपके मित्र को डिप्रेशन से जुड़ी कोई परेशानी है, तो कुछ ऐप्स की मदद भी ले सकते हैं.

डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों की संख्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, भारत में भी तकरीबन 36 फीसदी लोग डिप्रेशन से ग्रस्त हैं. दरअसल, यह एक ऐसी मानसिक स्थित है, जिसमें लोगों की सकारात्मक सोच की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है.

अब बदलती लाइफस्टाइल की वजह से यह बीमारी आम होती जा रही है. इसी के चलते डिजीटल हो रही दुनिया में इससे उबरने के लिए कुछ ऐप्स मददगार साबित हो सकते हैं.

स्टार्ट एप

कई बार लोगों को यह पता नहीं होता है कि वे डिप्रेशन से पीड़ित हैं या नहीं. ऐसी स्थिति में यह ऐप आपके लिए उपयोगी हो सकता है. यह न सिर्फ डिप्रेशन टेस्ट की सुविधा देता है, बल्कि नियमित रूप से आपके प्रोग्रेस को भी ट्रैक करता है. आप डिप्रेशन से जुड़ी दवाएं ले रहे हैं, तो यह नियमित रूप में दवा लेने के लिए अलर्ट करता है. डिप्रेशन की अवस्था में कौन-सी दवा ले रहे हैं और उसका साइड इफेक्ट क्या है? इसकी जानकारी भी आपको इस ऐप के जरिए मिलेगी. अच्छी बात यह है कि यहां फार्मासिस्ट और मेडिकल प्रोफेशनल्स की तरफ से हर दिन डिप्रेशन से उबरने के टिप्स भी मिलेंगे. यह ऐप एंड्रायड और आइओएस यूजर के लिए उपलब्ध है.

स्टाप ब्रीद ऐंड थिंक

आज की भागम-भाग वाली जिंदगी में तनाव आम बात है. यह एक ऐसा ऐप है, जो चिंता और तनाव से दूर रखने में मदद करता है. इसमें ब्रीद यानी सांस लेने के उपाय बताए गए हैं. साथ ही, इस ऐप में फीलिंग और इमोशन्स के हिसाब से मेडिटेशन गाइड भी दिए गए हैं. यहां आप मेडिटेशन से पहले और बाद में अपने इमोशन की जांच कर सकते हैं. इसे सेल्फ हीलिंग, सेल्फ मोटिवेशन, स्ट्रेस-डिप्रेशन आदि को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है. यह मूड के हिसाब से मेडिटेशन उपाय भी सुझाएगा. इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.

मूड टूल्स

अगर आप लगातार डिप्रेस्ड फील करते हैं, तो मूड टूल्स आपको इससे उबरने में मदद कर सकता है. इसके लिए इसमें कई रिसर्च सपोर्टेड टूल्स दिए गए हैं. ऐप में थॉट डायरी टूल में आपकी थॉट्स और थिंकिंग पैटर्न के हिसाब से मूड को बेहतर करने के सुझाव दिए जाते हैं. बिहेवियर एक्टिवेशन थेरेपी में किसी एक्टिविटीज से पहले और बाद की स्थिति को परखा जाता है, जबकि सेफ्टी प्लान को सुसाइड सेफ्टी के लिहाज से डेवलप किया है. आप डिप्रेशन से ग्रस्त हैं या नहीं, तो इसके लिए पीएचक्यू 9 टेस्ट में हिस्सा ले सकते हैं. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

मेडिटेशन म्यूजिक

अगर आप परेशानी-चिंता महसूस कर रहे हैं, तो मेडिटेशन म्यूजिक ऐप की मदद ले सकते हैं. इसकी मदद से आपको रिलैक्स होने में मदद मिलेगी. अगर इसके फीचर्स की बात करें, तो इसमें हाई क्वालिटी मेडिटेशन म्यूजिक व मेलोडीज दिए गए हैं. इसमें मेडिटेशन के लिए अलग-अलग साउंड हैं, जैसे- सॉफ्ट पियानो, लेक, सनलाइज, हेवन साउंड, परफेक्ट रैन, नेचर फॉरेस्ट मेलोडीज आदि. इससे निगेटिव फीलिंग को दूर करने में मदद मिलेगी. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

डिप्रेशन सीबीटी सेल्फ हेल्फ

इस ऐप में डिप्रेशन को कंट्रोल करने से जुड़े टिप्स और टूल्स दिए गए हैं. डिप्रेशन मूड को मॉनीटर करने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट, क्लिनिकल डिप्रेशन व कॉग्निटिव बिहैवियर थैरेपी (सीबीटी) से जुड़े आर्टिकल्स, डिप्रेशन असिस्टेंस ऑडियो के अलावा, यहां पर इमोशनल ट्रेनिंग ऑडियो और रिलैक्सेशन ऑडियोज भी दिए गए हैं. यह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

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