Download App

स्मार्टफोन को ऐसे रखें सेफ एंड सिक्योर

लोगों के पास स्मार्टफोन होना आजकल एक बेहद आम बात है. और हो भी क्यों ना इससे लोगों की कई सारी जरूरतें जो पूरी होती हैं. बात चाहे सोशल साइट्स पर स्टेटस अपडेट करनी को हो या फिर उपलब्ध विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने की, हम सभी की ये जरूरतें स्मार्टफोन ही तो पूरी करता है. तभी तो जानकार लोगों ने इसे "स्मार्ट" फोन नाम दिया है.

पर आजकल स्मार्टफोन को सुरक्षित रखना उतना ही मुश्किल होता जा रहा है. हैकिंग, वायरस अटैक और गुम हो जाने पर डेटा का गलत हाथों में जाना, ये सभी आपके स्मार्टफोन कि लिए खतरे हो सकते हैं. हम आपको ऐसे कुछ टिप्स और तरीके बताने जा रहे हैं, जिससे आपका स्मार्टफोन रहेगा सेफ एंड सिक्योर…

1. स्मार्टफोन के अंदर के डेटा या एप्लीकेशन को एक्सेस करने के लिए लॉक स्क्रीन एक प्रवेशद्वार की तरह काम करता है. अगर आप अपने फोन पर लॉक स्क्रीन पासवर्ड सेट करके नहीं रखते हैं, तो स्मार्टफोन गुम जाने या चोरी चले जाने की स्थिति में आपके डेटा का गलत इस्तेमाल हो सकता है. इसलिए अपने स्मार्टफोन में हमेशा लॉक स्क्रीन पासवर्ड का उपयोग करें. पासवर्ड कभी भी कोई आसान जानकारी ना रखें. इसमें सिम्बोलिक और न्यूमेरिक कॉम्बीनेशन का यूज करें.

2. हैकर्स आपके स्मार्टफोन में कई तरह से प्रवेश कर सकते हैं. ब्लूटूथ, लोकेशन सर्विस, वाई-फाई और आपको फोन का डेटा भी हैकर्स के लिए एक आमंत्रण हो सकते हैं. इसलिए बेवजह ब्लूटूथ या अन्य सेटिंग्स को खुला नहीं छोड़ना चाहिए.

3. सार्वजनिक स्थल पर उपलब्ध वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल हैकिंग का खतरा बढ़ा देता है. खासतौर पर यदि आप ऐसे वाईफाई पर कोई फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन करते हैं तो.

4. ऐप्स के बारे में बिना ज्यादा जाने और उनके बारे में सिर्फ एक लाइन पढ़कर उन्हें डाउनलोड करना आपको मुसीबत में डाल सकता है. इसलिए ऐप्स हमेशा भरोसेमंद स्टोर से ही डाउनलोड करें. क्योंकि, इस तरह के ऐप्स में कई बार कुछ ट्रिक्स भी छुपी रहती हैं, जिससे आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है. कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग, डेवलपर कंपनी की डिटेल्स और रिव्यु अवश्य पड़ें. इससे आपके स्मार्टफोन को सुरक्षा मिलेगी.

5. आपके स्मार्टफोन में एंटी-वायरस जरूर होना चाहिए. इससे नेट सर्फिंग और शेयरिंग के दौरान वायरस या मालवेयर के हमले से फोन को सुरक्षा मिलती है. यही नहीं हमेशा जांचते रहें कि एंटीवायरस अप-टू-डेट है. अगर अपडेट ना हो तो उसे तुरंत अपडेट करें और समय-समय पर आपके स्मार्टफोन को एक्सटर्नल मेमोरी कार्डसहित स्कैन करते रहें. इससे आपके फोन में बेकार की चीजें जमा नहीं होंगी और वायरस होने पर उन्हें खोजकर तुरंत डिलीट भी किया जा सकेगा.

बिना रेंट ऐग्रीमेंट के किराए पर न दें मकान

आजकल किराए पर मकान देना या मकान में ही पीजी खोल लेना, आय का बहुत अच्छा जरिया है. बड़े शहरों में तो यह बहुत ही तेजी से बढ़ता हुआ बिजनेस है, क्योंकि बड़े शहरों में नौकरी और पढ़ाई के लिए छोटे शहरों और गांवों से लोग आते रहते हैं. पर मकान मालिक पुलिस वेरीफिकेशन और रेंट ऐग्रीमेंट बनवाने से बचते हैं. बहुत से मकान मालिकों को यह झंझट का काम लगता है. पर ऐसा सोचना गलत है. जरा सी भाग-दौड़ से बचने के लिए जरूरी कार्यवाही न करना बेवकूफी है.

कई बार ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जब किरायेदार समय पर किराया नहीं देते. यही नहीं कई बार तो मकान खाली नहीं करते और उल्टे मकान मालिक को ही धमकीयां देते रहते हैं. ऐसे में परेशानी मकान मालिक को ही होती है. पर ऐसी परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है, बस थोड़ी सी सावधानी के साथ.

रेंट ऐग्रीमेंट की बारीकियों को समझना है बहुत जरूरी

क्या है रेंट ऐग्रीमेंट

रेंट ऐग्रीमेंट किरायेदार और मकान मालिक के बीच का लिखित करारनामा है. किसी भी रेंट ऐग्रीमेंट में किराए संबंधी सभी नियमों और शर्तों का स्पष्ट विवरण होना चाहिए. ऐग्रीमेंट में मकान के किराए के अलावा अन्य शुल्कों(बिजली बिल, पानी का बिल, मेंटेनेंस चार्ज आदि) के बारे में भी पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किराएदार मकान मालिक पर कोई आरोप न लगा पाए.

क्यों किराए पर दे रहे हैं मकान

किराए पर दिए जाने वाले मकान का इस्तेमाल कैसे होगा, रेंट ऐग्रीमेंट में इसकी जानकारी देना भी जरूरी है. अगर मकान या फ्लैट रहने के लिए किराये पर लिया जा रहा हो या बिजनेस संबंधी कामों के लिए, सबकी जानकारी देना जरूरी है. मकान में कितने लोग रहेंगे, उनका स्थायी पता, उनके प्रोफेशन की जानकारी भी साफ-साफ लिखी होनी चाहिए.

किराएदारों के लिए जरूरी सूचनाएं

अगर आप किसी रिहायशी सोसाइटी में किराए पर मकान दे रहे हैं, तो उस सोसाइटी के कुछ नियम हैं जो रेंट ऐग्रीमेंट में स्पष्ट होने चाहिए. रेंट ऐग्रीमेंट में किराएदार की जिम्मेदारीयों के बारे में लिखें. साथ में ये भी लिखें कि किराएदार के किसी भी कामकाज से मकान को नुकसान नहीं हो. अगर ऐसा होता है, तो पूरी जिम्मेदारी किराएदार की होगी. किराएदार को नुकसान की भरपाई करनी पड़ेगी, ये जानकारी भी दे दें.

रेंट ऐग्रीमेंट की अवधि

कोई भी रेंट ऐग्रीमेंट एक अवधि तक ही वैध होता है. इसमें किराएदार के रहने की अवधि और रेंट के बढ़ने के समय के बारे में भी जानकारी दी जाती है. नोटिस पीरियड की भी जानकारी लिखी होती है.

इन बातों पर ध्यान देना भी है जरूरी –

1. स्टैम्प पेपर पर ही बनवाएं रेंट ऐग्रीमेंट. रेंट ऐग्रीमेंट का पंजीकरण भी करवाना जरूरी है. यह आपके पास आधिकारिक डाक्युमेंट होगा.

2. किराएदार की गतिविधियों पर ध्यान दें, हमेशा नहीं तो कभी-कभी ही पर ध्यान देना जरूरी है. कई बार किराएदार, मकानमालिक की जानकारी के बिना अपने दोस्तों को भी साथ रख लेते हैं.

3. किराएदार के बारे में जानकारी जुटाना जरूरी है. बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किराएदार रखना भविष्य में आपके लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता है.

 

कस्टमर की अनोखी डिमांड को सुन कर वेश्याओं के छूट जाते हैं पसीने

वेश्यावृत्ति और वेश्याओं को समाज में घृणा की नजर से देखा जाता है. वेश्याओं के लिए हमारे समाज की न सोच अच्छी है और ना ही नजरिया, पर ज्यादातर लोगों की इस बात की जानकारी नहीं कि ज्यादातर वेश्याएं इस धंधे में अपनी मर्जी से कम और मानव तस्करी का शिकार बन कर ज्यादा आती हैं.

अगर आप को इन वेश्याओ की असली जिंदगी की सच्चाई पता चलेगी तब आपके मन में इनके लिए दयाभाव जरूर उत्तपन्न होगा. मशहूर वेश्यालयों की वेश्यावृति में लिप्त महिलाओं को भी अक्सर कई समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है. कुछ कस्टमर वेश्याओं के सामने अजीबों गरीब डिमांड रख देते हैं. मशहूर वेश्यालयों में ऐसी ही कुछ अजीबों गरीब डिमांड जिसे सुनकर कोई भी चौंक जाएगा.

आइए जानते हैं कस्टमर की वेश्याओं से की गई इन अनोखी डिमांड को…

1.  एक सेक्स वर्कर ने बताया कि उसके एक कस्टमर ने उससे अलग-अलग तरह की फनी आईब्रोज ड्रॉ करवाईं. इस दौरान वह उसके साथ पागलों की तरह हंस रहा था.

2.  एक कस्टमर सेक्स वर्करों से सिर्फ ये डिमांड करता है की वो उसे गालियां दे और थप्पड़ मारे, ऐसा करने के लिए वो उस सेक्स वर्कर को पैसे भी देता है.

3. एक सेक्स वर्कर का एक कस्टमर जब भी आता तो नकली गनफाइट करवाता था. इस दौरान दोनों नकली बंदूक से एक दूसरे पर फायर करते थे और इस दौरान वो एक दूसरे को गालियां भी देते थे.

4.  दिल्ली के जी. बी. रोड स्थित एक वेश्यालय में काम करने वाली लड़की ने बताया कि एक कस्टमर उसे एक रात के दस हजार रुपये तक देता है पर उसे हाथ भी नहीं लगाता. वह डिमांड करता है की लड़की उसके सामने निर्वस्त्र होकर गिलास में पेशाब करे.

5. कस्टमरों की कई डिमांड पूरी करने वाली एक महिला ने बताया कि एक कस्टमर ने उसे उसकी मां बनने के लिए कहा, यही नहीं बेटा बनकर वह बच्चों की तरह रहा था.

6. कुछ कस्टमर इतने अजीब होते हैं कि सेक्स वर्कर की न्यूड बॉडी पर भोजन रख कर खाने की मांग करते हैं. ऐसा ही एक वाकया एक महिला के साथ हुआ जब एक कस्टमर ने उसके पूरे शरीर पर चिली सॉस लगा दी थी.

7. एक कस्टमर ने सेक्स वर्कर के सामने फरमाइश रखी कि वह कमरे में सिर्फ कॉम्बैट बूट्स पहनकर कविताएं पढ़े.

एक सर्वे के मुताबिक सेक्स करते समय ऐसी अजीबो-गरीब डिमांड करने वाले व्यक्ति बहुत शर्मीले स्वाभाव के होते हैं. वे अपनी बात किसी के सामने नहीं रख पाते हैं इसलिए उनमे सेक्स करने का आत्मविश्वास नहीं होता और वो बिना सेक्स किये ही वेश्याओ को पूरे पैसे दे कर चले जाते हैं.

इस खिलाड़ी के नाम है क्रिकेट इतिहास का सबसे लंबा छक्का

बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों का मिश्रण है क्रिकेट. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा की क्रिकेट को गेंदबाजों से ज्यादा बल्लेबाजों का खेल माना जाता है. बल्लेबाज द्वारा खेला गया हैरान कर देने वाला शॉट सभी के जहन में बस जाता है. कई बार तो गेंदबाज ऐसे शॉट से सख्ते में आ जाते हैं और हैरान हो जाते हैं.

कई बार बल्लेबाज किसी गेंद पर इतना लंबा छक्का जड़ देता है कि गेंद स्टेडियम से बाहर तक चली जाती है. क्रिकेट फैंस इसपर स्टेडियम में खड़े होकर तालियां बजाते हैं लेकिन गेंदबाज इसे जिंदगीभर नहीं भूल पाता. आइए आज आपको कुछ ऐसे ही शानदार छक्कों के बारे में..

अल्बर्ट ट्रॉट

1938 में इस बल्लेबाज ने वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए इतना लंबा छक्का मारा था कि गेंद लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के पवेलियन को ही पार कर गई थी. 79 साल बाद आज तक भी कोई इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है. आपको जानकर शायद यकीन ना हो लेकिन इस छक्के की लंबाई 164 मीटर थी. इसे क्रिकेट इतिहास का सबसे लंबा छक्का माना जाता है. अल्बर्ट ट्रॉट 1938 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही टीमों के लिए खेले है.

एलबी मॉर्कल

2008 में प्रज्ञान ओझा की गेंद पर दक्षिण अफ्रीका के इस खिलाड़ी ने पिछली टांग पर बैठकर गेंद को स्टेडियम के पार पहुंचा दिया था. 125 मीटर लंबा ये सिक्स इतना ऊंचा था कि कैमरामैन इसे शूट तक नहीं कर पाया था. इसके बाद नई गेंद मंगवानी पड़ी थी.

प्रवीण कुमार

आपको इस गेंदबाज का नाम यहां पढ़कर हैरानी हो, मगर ये सच है कि 2008 में यूसुफ पठान की गेंद पर हैरअंगेज शॉट मारकर प्रवीण कुमार ने गेंद को 124 मीटर दूर तक पहुंचा दिया था. उस दौरान गेंद सिर्फ स्टेडियम की छत छूने से जरा-सी रह गई थी.

क्रिस लिन

ऑस्ट्रेलिया में खेले गए बीबीएल टूर्नामेंट में ब्रिस्बेन हीट की ओर से खेल रहे क्रिस लिन ने शॉन टेट की 147 किमी/प्रति घंटा की गति से फेंकी गई गेंद पर 121 मीटर का छक्का जड़ा था. इस दौरान गेंद स्टेडियम की छत के ऊपर जा पहुंची थी.

कोरी एंडरसन

वनडे में दूसरा सबसे तेज शतक जड़ने वाले इस बल्लेबाज ने 2014 में ईशांत शर्मा की गेंद पर 120 मीटर लंबा छक्का लगाकर गेंद को स्टेडियम से बाहर पहुंचा दिया था. इतने ही लंबे छक्के मारने की लिस्ट में एडम गिलक्रिस्ट और रॉबिन उथप्पा भी शामिल हैं, जिन्होंने आईपीएल में इस कारनामे को किया है.

युवराज सिंह

2007 के टी20 वर्ल्ड कप में युवराज सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार 70 रनों की पारी खेली थी. इस दौरान युवराज ने ब्रेट ली की एक गेंद पर 119 मीटर लंबा छक्का जड़ा था. इस सिक्स को लोग आजतक नहीं भूल सके हैं. आपको बताते चलें कि क्रिस गेल और रॉस टेलर ने भी आईपीएल में इतना ही लंबा छक्का जड़ा है.

डेनियल क्रिस्टियान

2015 में लीग मैच में होबार्ट की ओर से खेलते हुए डेनियल क्रिस्टियान ने हरीकेंस के खिलाफ 117 मीटर लंबा छक्का जड़ा था. इस पारी के दौरान डेनियल महज 33 रन ही बना सके थे.

एमएस धोनी

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लॉन्ग ऑफ में 112 मीटर लंबा छक्का मारा था. धोनी हैलीकॉप्टर शॉट के लिए मशहूर हैं. इस बार भी आईपीएल में फैंस को उनके इसी तरह के प्रदर्शन की आस है.

क्या दांव पर है भाग्यश्री के बेटे का करियर

जब से बॉलीवुड में खबर फैली है कि अनुराग कश्यप अपनी प्रोडक्शन कंपनी की एक्शन व हास्य प्रधान फिल्म ‘‘मर्द को दर्द नहीं होता’’ में भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु दसानी को अभिनय करने का मौका देकर अभिमन्यु के अभिनय करियर को संवारने जा रहे हैं, तब से बॉलीवुड के बिचौलिए चर्चा कर रहे हैं कि क्या अभिनेत्री भाग्यश्री ने अपने बेटे के करियर को लेकर सही कदम उठाया है?

वास्तव में इस तरह की चर्चाओं के पीछे कई वजहें हैं. पिछले कुछ समय से अनुराग कश्यप की प्रोडक्शन कंपनी ‘‘फैंटम’’ लगातार असफल फिल्में ही दे रही है. दूसरी बात अनुरगा कश्यप ने फिल्म ‘‘मर्द को दर्द नहीं होता’’ के निर्देशन की जिम्मेदारी अपने सहायक वसन बाला को सौंपी है. यह वही वसन बाला है, जिन्होंने अनुराग कश्यप के लिए 2012 में फिल्म ‘‘पैडलर’’ निर्देशित की थी. पर आज तक यह फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं हो पायी. क्योंकि इस फिल्म को वितरक ही नहीं मिल रहे हैं.

इतना ही नहीं अनुराग कश्यप ने फिल्म ‘‘मर्द को दर्द नहीं होता’’ में अभिमन्यु दसानी के साथ हीरोईन के तौर पर किसी स्थापित अभिनेत्री की बजाय टीवी सीरियल की अदाकारा राधिका मदान को चुना है. सूत्रों का दावा है कि राधिका मदान व अभिमन्यु दसानी एक साल से ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. लेकिन किससे, किस बात की ट्रेनिंग ले रहें हैं, पता नही.

बहरहाल, बॉलीवुड के सूत्र इसे भाग्यश्री व उनके बेटे अभिमन्यू दसानी द्वारा लिया गया एक रिस्कपूर्ण निर्णय मान रहे हैं.

‘जब तक औरत भावनाओं में डूबी रहेगी, तब तक हारती रहेगी’

फिल्म ‘‘नाम शबाना’’ में एक जासूस का किरदार निभाकर शोहरत  बटोर रही अभिनेत्री तापसी पन्नू ने इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले काफी रिसर्च किया. उसके बाद इस फिल्म में अभिनय करते हुए तापसी को समझ में आया कि पुरूषों की बनिस्बत औरतें ज्यादा बेहतरीन जासूस साबित हो सकती हैं, क्योंकि औरतों में सिक्स सेंस ज्यादा अच्छा और तेज होता है.

खुद तापसी पन्नू ने इस संबंध में ‘‘सरिता’’ पत्रिका से खास बातचीत करते हुए कहा कि ‘‘दूसरे विश्व युद्ध से अब तक के इतिहास पर जब आप शोध करेंगे, तो पाएंगे कि महिलाओं को जासूस कम, हनी ट्रैप के रूप में ज्यादा उपयोग किया गया. कहने का अर्थ यह है कि लड़की जब स्पाई हो, तो उसको इस तरह से भी उपयोग किया जा सकता है. नैंसी वेक हों या इनायत खान नाम की महिला जासूस, जो दूसरे विश्व युद्ध के समय काफी चर्चित रही हैं. यह हनी ट्रैप बनकर आती थी, पर जो काम वे करती थीं, उससे वे अंतिम स्पाई बन जाया करती थीं. तापसी आगे कहती हैं कि जैसे मैंने पहले आपको बताया कि इस फिल्म को करते समय मेरी समझ में आया कि लड़कियां ज्यादा बेहतरीन स्पाई बन सकती है, क्योंकि उनका सिक्स सेंस ज्यादा अच्छा काम करता है. इसके अलावा लड़कियां मल्टीटास्किंग होती हैं. उनके दिमाग में एक साथ कई चीजें चलती रहती हैं, जबकि पुरूषों का दिमाग एक ही दिशा में काम करता है. यदि एक लड़की स्पाई हो, तो उसकी सीमाएं आंकना मुश्किल हो जाता है. फिल्म ‘बेबी’ में मेरे किरदार को ‘हनी ट्रैप’ के रूप में उपयोग किया गया था. इसके अलावा पुरूषों की ये मानसिकता होती है कि एक लड़की हमारा क्या बिगाड़ सकती है.’’

जब हमने तापसी से पूछा कि शोधकार्य करने के बाद लड़कियों या औरतों को लेकर आप किस निश्चय पर पहुंची और लड़कियों से क्या कहना चाहेंगी?

इस पर तापसी पन्नू ने कहा कि ‘‘शोधकार्य के दौरान मुझे एक बात यह समझ में आयी कि हर लड़की को और हर जासूस को विचार करना चाहिए कि सामने वाले ने उससे जितना कहा है, उसके कितने अर्थ या मायने हो सकते हैं. सच कहूं तो अब तक मैंने इस बात को अपनी निजी जिंदगी में कभी उपयोग नहीं किया था, तो मेरे लिए ये समझना बहुत मुश्किल रहा कि बाल की खाल कैसे निकाली जाए.’’

आगे जब हमने तापसी पन्नू से पूछा कि उनकी बात को मानते हुए, यदि निजी जिंदगी में लड़कियां अपने सिक्स सेंस का उपयोग करने लगें, तो क्या उनका शोषण कम हो जाएगा? इसके जवाब में तापसी पन्नू ने कहा कि ‘‘सिक्स सेंस से लड़की सामने वाले पुरूष के इरादे को भांप सकती है, पर उस वक्त उसे तुरंत प्रतिक्रिया देनी आनी चाहिए. अगर सोचने में समय बर्बाद कर दिया, तब कोई मतलब नहीं रह जाएगा और प्रतिक्रियाएं परिस्थितियों के अनुसार देनी चाहिए. जैसे कि कुछ दिन पहले हमने (मैंने व अक्षय कुमार ने) कुछ महिलाओं के साथ वर्कशॉप कर उन्हें समझाया था कि वे किस तरह से अपनी कोहनी का उपयोग करके भी खुद को सुरक्षित रख सकती हैं. सेल्फ-डिफेंस की ट्रेनिंग के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा और मैं तमाम लड़कियों को सिखाती भी रहती हूं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि, सामने वाले पुरूष का कद क्या है और उसकी ताकत कितनी है? जरूरत इस बात की होती है कि आपको कुछ उतनी ट्रिक्स आनी चाहिए कि आप सामने वाले पर जीत हासिल कर लें. यदि सही समय पर आपका दिमाग काम किया, तो आप सात सेकंड के अंदर सामने वाले पुरूष को चित कर सकती हैं. अक्सर होता यह है कि जब कोई घटना घटती है, तो लड़की यह सोचने लगती है कि ऐसा मेरे साथ कैसे हो गया? उस वक्त वह तुरंत प्रतिक्रिया कर, अपने शरीर को हरकत में ला अपने आपको बचाने के बारे में नहीं सोच पाती है. कोई लड़की हो या औरत, उसकी पहली कमजोरी शारीरिक नहीं, बल्कि दिमागी सोच है. जहां घटना घटती है, तुरंत औरतों का ‘प्रजेंस ऑफ माइंड’ काम नहीं करता और वे डर जाती हैं. यदि लड़की रिएक्ट करेगी, तो जीत उसकी ही होगी. इसके लिए लड़की को यह भूलना पड़ेगा कि कोई उन्हें आकर बचाएगा. लड़कियों को ये सोचना ही पड़ेगा कि उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी है.’’

जब हमने तापसी से पूछा कि क्राव मागा, कूडो व मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग से उनकी निजी जिंदगी पर कितना असर हुआ? तो तापसी ने उत्तर दिया कि ‘‘मैंने ये सारी ट्रेनिंग तो अपनी फिल्मों के किरदार के साथ न्याय करने के लिए ली थी, पर अब मेरे अंदर जबरदस्त आत्मविश्वास आ गया है, जबकि अपनी निजी जिंदगी में, मैं पूरी तरह हिंसा के खिलाफ हूं. मैं तो किसी को एक थप्पड़ भी नही मार सकती. पर अब मैं डर नहीं सकती. अब मेरी समझ में आ गया है कि मेरे पास मसल्स नहीं हैं, तो भी मैं सामने वाले पुरूष का मुकाबला कर सकती हूं. मुझे इंसान के शरीर के कई ऐसे बिंदु पता हैं, जहां पर चोट करके एक झटके में उसे जमीन पर ढेर किया जा सकता है.’’

जब हमने तापसी से सवाल किया कि ‘‘आम जीवन में क्राव मागा या कूडो सीख कर औरतें कैसे घरेलू हिंसा से बच सकती हैं’’, तो हमारे इस सवाल पर तापसी पन्नू कहती हैं कि- ‘‘मेरी राय में तो हर लड़की या औरत को कोई न कोई मार्शल आर्ट सीखना चाहिए. इससे उनका अपना आत्मविश्वास बढ़ेगा और इससे वह दिमागी रूप से मजबूत भी हो जाती हैं. दूसरी बात मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करने से शारीरिक ताकत आ जाती है. लड़की की बॉडी लैंग्वेज स्ट्रांग हो जाती है, उसे अपनी शारीरिक ताकत का अहसास हो जाता है और जहां तक घरेलू हिंसा का सवाल है, तो वहां जब तक औरते भावनाओं में डूबी रहेंगी, तब तक हारती ही रहेंगी. हमें यह मानकर चलना चाहिए कि, जहां एक औरत पर हाथ उठता है, वहां इमोशन्स खत्म हो जाते हैं. यदि किसी पुरूष में इंसानियत नहीं है, उसमें मानवीय संवेदना नही है, वह औरत पर हाथ उठाता है, तो औरत को भी अपने इमोशन्स को भूल कर सामने वाले पर वार करना चाहिए.’’

महिलाओं की सुरक्षा के लिए पेश हैं खास गैजेट्स

बस या टैक्सी में सफर करते वक्त, सड़क के किनारे या अपने ही घर में या घर के आस-पास कभी भी और कहीं भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संदेह हो सकता है. इसलिए आज के समय में महिलाओं को अपनी रक्षा खुद करना आना चाहिए.

आज के टेक्नोलॉजी के युग में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई खास गैजेट्स उपलब्ध हैं जिन्हें महिलाएं अपने हैंडबैग में आसानी से कैरी कर सकती हैं और जरूरत पड़ने पर सेल्फ डिफेंस के लिए उनका इस्तेमाल भी कर सकती हैं.

पेन व कॉम्ब नाइफ

सेल्फ डिफेंस के लिए शानदार गैजेट है पेन नाइफ व कॉम्ब नाइफ. ये दिखने में एकदम सामान्य पेन या कॉम्ब जैसे दिखते हैं लेकिन खोलने पर ये चाकू बन जाता है.

कैट कीचेन

एक सामान्य कीचेन की तरह दिखने वाला ये गैजट बड़ा काम का हो सकता है और खुद की सेफ्टी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इस कैट कीचेन को मिडल और इंडेक्स फिंगर में फंसाना होगा और उसके साथ ही आप हमला करने वाले पर वार कर सकते हैं.

परफ्यूम पेपर स्प्रे

यह स्प्रे देखकर लगता है कि यह कोई परफ्यूम की बोतल है. लेकिन सामने वाले पर इससे स्प्रे करने पर थोड़ी देर के लिए उसे दिखाई देना बंद हो जाता है और आप बच के निकल सकती हैं.

पेपर फोम

यह पेपर स्प्रे की तरह ही होता है लेकिन थोड़ा महंगा है. पेपर स्प्रे को यूज करने पर वह हवा के साथ आपकी आंखों में भी जा सकता है. लेकिन पेपर फोम के साथ ऐसा नहीं होता है. इसलिए पेपर फोम ज्यादा सेफ है.

सेलफोन स्टन गन

यह गैजेट सेलफोन की तरह दिखता है लेकिन काफी तेज करंट देता है.

पर्सनल अलार्म

अगर आप ऐसी स्थिति में हो कि आप चिल्ला भी नहीं सकते तो पर्सनल अलार्म गैजेट का बटन दबाने पर ये काफी तेज आवाज करता है. इसे सुनकर कोई आपकी मदद करने आ सकता हैं.

युवती लगा सकती है बलात्कार का आरोप

ऋतु की अभिषेक से अच्छी बनती थी. यहां तक कि औफिस में दोनों साथ लंच करते, घूमतेफिरते, लेकिन एक दिन जब ऋतु को उस के फ्रैंड ने अभिषेक के साथ वाशरूम में देखा तो ऋतु डर गई और हड़बड़ाहट में उस ने खुद को सब की नजरों में सही दिखाने के लिए चिल्ला चिल्ला कर अभिषेक पर बलात्कार का आरोप लगाने लगी. यह देख अभिषेक के साथसाथ उस के फ्रैंड्स भी दंग रह गए, क्योंकि जो नजारा उन्होंने देखा था उस से ऋतु की मरजी साफ जाहिर हो रही थी. सभी जानते थे कि वह अभिषेक को फंसा रही है, लेकिन कोई कहने की हिम्मत सिर्फ इसलिए नहीं जुटा पा रहा था कि कहीं ऋतु उसे भी फंसा न दे.

अधिकांश मामलों में यही देखने को मिलता है कि जब युवतियों की मांगें पूरी नहीं होतीं या फिर वे खुद फंसती दिखती हैं तो युवकों पर बलात्कार का आरोप लगा कर उन्हें फंसाने की कोशिश करने लगती हैं. इसलिए अगर आप भी रिलेशनशिप में हैं तो पहले से सावधानी बरत कर चलें. कहीं कोई आप को भी फंसा न दे.

कब कब लगा सकती है आरोप

झगड़ा होने पर

‘आजकल तुम रिया के साथ ही ज्यादा बातें करते हो, मुझे हमेशा इग्नोर करने की तुम्हारी इतनी हिम्मत’, ‘तुम तो हमेशा अपने लिए ही जीते हो’, ‘तुम तो कभी रोमांटिक बातें ही नहीं करते’, ‘मुझ से ज्यादा तुम्हें औरों में इंट्रस्ट है’ आदि बातों को ले कर अकसर लड़ाई होने पर युवती आप को फंसाने या फिर सबक सिखाने के लिए बलात्कार का आरोप लगा सकती है.

बात नहीं मानने पर

बातबात पर जिद करना कि मुझे तो नेहा जैसा मोबाइल ही चाहिए, मैं तो तुम्हारे साथ महंगे रैस्टोरैंट में ही डिनर करूंगी, तुम मुझे यह स्कूटी दिलवाओ और जब आप की पौकेट इन चीजों के  लिए इजाजत नहीं देती या आप मना करने लगते हैं तो युवती को लगने लगता है कि मेरा बौयफ्रैंड तो कंजूस है. फिर वह आप से गलत तरीके से पैसे ऐंठने के लिए आप को फंसा सकती है.

पैसों की डिमांड पूरी न होने पर

कभी पर्स चोरी होने की बात कह कर, कभी रिचार्ज करवाने के लिए तो कभी किसी बहाने से आप से पैसों की मांग करे. 1-2 बार तो आप भी रिश्ते की खातिर उसे पैसे दे देंगे, लेकिन आदत बनती देख आप को भी यह सब खटकने लगेगा और जैसे ही आप पैसे देने बंद करेंगे वैसे ही आप फंसे, क्योंकि ऐसी युवतियां रिश्ता दिल से नहीं रखतीं.

शादी नहीं करने पर

आप दोनों काफी समय से रिलेशनशिप में थे, लेकिन घर की जिम्मेदारियों व मां के न मानने के कारण आप ने अपने पार्टनर से शादी करने से मना कर दिया जो आप के पार्टनर को बिलकुल बरदाश्त नहीं और उस ने आप को झूठे आरोप में फंसा दिया, जबकि आप ने उस के सामने यह बात पहले ही रख दी थी कि हम हमेशा सिर्फ दोस्त रहेंगे चाहे शादी हो या न हो.

ब्रेकअप होने पर

आप जान गए थे कि आप की पार्टनर आप को चीट कर रही है. एक तरफ आप से प्यार की बातें वहीं दूसरी तरफ किसी और से. ऐसे में आप ने उस से ब्रेकअप कर लिया जिसे अपना अपमान मान कर वह आप को कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगी.

फ्रैंड्स के साथ ज्यादा समय बिताने पर

अधिकांश युवतियों की यह हैबिट होती है कि वे खुद की इग्नोरैंस बिलकुल बरदाश्त नहीं करतीं, खासकर तब जब उन्हें लगे कि उन का बौयफ्रैंड उन से ज्यादा दोस्तों से बात कर रहा है. ऐसे में वे औरों की नजरों में गिराने के लिए आप को बदनाम कर सकती हैं.

कैसे बचें

शारीरिक संबंध न बनाएं

रिलेशनशिप में होने पर हमारी पहली चाहत अपने पार्टनर को पाने की होती है, जिस के कारण हम जल्दबाजी में बिना सोचसमझे उस के साथ शारीरिक संबंध बना बैठते हैं, जिस के बाद में खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ते हैं. ऐसे में जरूरी है कि जब तक रिश्ते को नाम न मिल जाए तब तक संबंध बनाने की गलती न करें.

फोटो न खींचने दें

अगर आप खुद की फीलिंग्स पर कंट्रोल न रख पाने के कारण रिलेशन बना रहे हैं तो कोशिश करें कि न खुद इस मूवमैंट के फोटो शूट करें और न ही पार्टनर को करने दें वरना यह आप के ब्लैकमेल का रास्ता बन सकता है.

अपना बैंक बैलेंस न बताएं

कई बार हम ओवर ऐक्साइटमैंट में अपने पार्टनर को अपनी सारी पर्सनल इन्फौर्मेशन जैसे बैंक बैलेंस वगैरा के बारे में बता देते हैं. एक बार आप की आर्थिक स्थिति का पता लगने के बाद वह न सिर्फ आप से पैसे ऐंठ सकती है बल्कि मोटी रकम वसूलने के लिए आप पर रेप का आरोप लगाने में भी देर नहीं लगाएगी.

ड्रिंक वगैरा न लें

आप जब भी पार्टनर के साथ हों तो ड्रिंक वगैरा न करें ताकि आप को उस की गतिविधियों का पता चलता रहे.

लिव इन में न रहें

भले ही आप लिव इन रिलेशनशिप में एकदूसरे की मरजी से रह रहे हैं, लेकिन जब भी मन भरने लगे या मजबूरीवश आप अपने पार्टनर से दूर हुए तो वह आप को सुबूतों सहित रेप के जुर्म में बंद करवा सकती है. ऐसे में आप के पास अपनी सफाई में कहने को कुछ नहीं होगा इसलिए इस ओर सावधानीपूर्वक बढ़ें.

फोन, व्हाट्सऐप पर सैक्सी चैट से दूर रहें

व्हाट्सऐप पर कभी भी अपने पार्टनर से सैक्सी बातें न करें. आमनेसामने ऐसी बातें करें वरना वह फोन पर रिकौर्डिंग कर के यह टूल आप को ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल कर सकती है, इसे आप झुठला भी नहीं पाएंगे.

पिछले सीक्रैट्स न बताएं

आप पहले किसी के साथ रिलेशनशिप में थे, किस कारण आप का उस के साथ पंगा हुआ वगैरावगैरा बातें पार्टनर से शेयर न करें वरना वह इन्हीं सीक्रैट्स से भविष्य में आप के लिए मुसीबत पैदा कर सकती है. जब आरोप लगाए तब क्या करें

धमकी का जवाब धमकी से न दें

यदि आप की पार्टनर ने आप को गुस्से में आ कर फंसाने की धमकी दी है तो आप यह बात सुन कर गुस्से में न आएं, क्योंकि अगर दोनों ओर गरमी का माहौल होगा तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा.

छिपें नहीं, फेस करें

इस दौरान छिपने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसा करने से लोगों को लगेगा कि आप ने सचमुच कोई अपराध किया है बल्कि जिस तरह आप पहले अपनी जिंदगी जीते थे वैसे ही जीएं. अगर वह सामने भी आ जाए तो नौर्मल रहें.

फोन अटैंड करें

डर के मारे कि कहीं फोन पर रिकौर्डिंग न कर ले इस चक्कर में अपना नंबर ही चेंज कर लें या फिर उस के फोन ही अटैंड न करें. ऐसा करने की गलती न करें बल्कि फोन पर उसे समझाएं कि हमारे बीच सिर्फ दोस्ती का रिश्ता था और अगर तुम्हें मुझ से कोई प्रौब्लम थी भी तो उसे प्यार से समझाती, न कि इस तरह आरोप लगा कर.

पेरैंट्स को लें कौन्फिडैंस में

अपनी समस्या पेरैंट्स को अवश्य बताएं कि मैं ने जिस युवती से फ्रैंडशिप की थी उस ने अब मेरी गलती न होते हुए भी मुझे फंसा दिया है. ऐसे में पेरैंट्स आप को सपोर्ट करेंगे और इस से युवती को भी लगेगा कि अब आप अकेली नहीं हैं. 

राजनीति का शिकार होते छात्र

देश के उज्ज्वल भविष्य की पौध तैयार करने वाले शिक्षण संस्थान आज राजनीतिक प्रोपेगेंडे का अड्डा बनते जा रहे हैं और छात्र इस राजनीति का शिकार हो रहे हैं. लोकतंत्र में जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है, अपनी बात कहने का पूरा हक होता है वहीं आज अपनी बात कह कर फंस जाने का कारण बनता जा रहा है, जिस से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार छिनता प्रतीत होता है, जिस का असर छात्रों पर पड़ रहा है. छात्र विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने के मकसद से आते हैं, लेकिन यहां धर्म के तथाकथित धंधेबाज अपना धंधा चमकाने के लिए उन का गलत इस्तेमाल करते हैं और विरोध करने पर उन के साथ दुराचार किया जाता है, जिस में सैंडविच बने छात्र पढ़ाई तो भूल ही जाते हैं.

देश का भविष्य कहे जाने वाले छात्रों को न केवल राजनीतिक दलों के झंडाबरदार अपने विचारों को अपनाने पर मजबूर करते हैं बल्कि उन के आदेश न मानने पर उन्हें भारीभरकम विरोध और गालीगलौज तक सहना पड़ता है, जिस से प्रभावित हो कर वे पढ़ाई कर देश के विकास में योगदान देने की बात सोचना छोड़ अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं. पिछले वर्ष दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जो कुछ घटित हुआ वह किसी से छिपा नहीं है. वहां कन्हैया कुमार को नायक बना राजनीति की रोटियां सेंकी गईं. देश विरोधी नारे लगाए गए. फिर कन्हैया को गिरफ्तार किया गया और उस पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाया गया.

कन्हैया औल इंडिया स्टूडैंट फैडरेशन का अध्यक्ष और वामपंथी विचारधारा का समर्थक था. इस तरह वह भगवा खेमे का विरोधी भी हुआ. सो एबीवीपी जोकि आरएसएस का एक अंग है, को उन के विरोध का मौका मिल गया. उधर वामपंथी भी खुल कर कन्हैया के समर्थन में उतर आए और एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इस सब का संबंध रोहित वेमुला से जुड़ा जो आत्महत्या कर चुका था. ताजा उदाहरण दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कालेज की छात्रा गुरमेहर कौर का है, जो ‘पोस्टकार्ड्स फौर पीस’  नामक चैरिटेबल संस्था की एंबैसेडर भी है. गुरमेहर कौर तब खबरों में आई जब रामजस कालेज में हुई हिंसा के खिलाफ उस ने ‘स्टूडैंट्स अगेंस्ट एबीवीपी’ नामक कैंपेन की शुरुआत की. विदित हो, रामजस कालेज में कल्चर औफ प्रोटैस्ट सैमिनार में हिंसा हुई थी. उस समय वहां जेएनयू के छात्र उमर खालिद और शेहला राशिद भी आमंत्रित थे, जिस पर एबीवीपी बिफर उठी.

गुरमेहर ने एबीवीपी का विरोध कर न केवल साफ कर दिया बल्कि यह भी कहा कि वह एबीवीपी से नहीं डरती. हालांकि एबीवीपी के सरमाएदारों की आलोचना तो सब ने की मगर अकेली लड़की द्वारा जवाब देने पर एबीवीपी में जो खौफ पैदा हुआ उस का बदला लेने व अपना दबदबा कायम रखने के लिए गुरमेहर के कैंपेन की बात को तो नजरअंदाज कर दिया. मगर खुद को सच्चा साबित करने के लिए गुरमेहर द्वारा अप्रैल, 2016 में यूट्यूब पर डाले गए एक वीडियो को सामने ले आए. दरअसल, गुरमेहर ने उस समय यह वीडियो किसी और संदर्भ में डाला था, लेकिन गुरमेहर ने सोशल मीडिया पर एबीवीपी के खिलाफ अभियान चलाया तो एबीवीपी ने इस वीडियो का सहारा लिया.

पिछले साल, 2016 में भारतपाकिस्तान शांति को ले कर सोशल मीडिया पर गुरमेहर ने यह वीडियो डाला था, जिस में उस का कहना था, ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा बल्कि युद्ध ने मारा है.’ विदित हो गुरमेहर कौर के पिता कैप्टन मंदीप सिंह 1999 के भारतपाक के बीच हुए कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे. फरवरी, 2017 में गुरमेहर ने सोशल मीडिया पर एक मैसेज पोस्ट किया जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघों की हिंसक बातों के विरोध में था. गुरमेहर की मां का भी कहना था कि उस के वीडियो के असली मैसेज को समझें. गुरमेहर का कहना सिर्फ इतना है कि युद्ध हमेशा विनाश का कारण होता है, लेकिन उस के मैसेज का गलत मतलब निकाल उसे विवाद का रूप दे दिया गया.

कट्टरपंथियों की छत्रछाया में पलबढ़ रही एबीवीपी ने जब जेएनयू के छात्रों को नहीं बख्शा तो इसे कैसे छोड़ते, सो विवादस्वरूप गुरमेहर को कई तरह से प्रताडि़त किया गया. उसे भद्दी गालियां दी गईं. उसे रेप की धमकी दी गई, तिस पर अब एबीवीपी यह डिमांड कर रही है कि वामपंथ से जुड़ी संस्थाओं पर पाबंदी लगाई जाए, जबकि पुलिस द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि एबीवीपी समर्थकों द्वारा कई छात्रों को उस दौरान पीटा गया था. दरअसल, हमारी शिक्षा प्रणाली को शुरू से ही धर्म से जोड़ दिया जाता है, जिस से बचपन से ही मन में धर्म भर जाता है. मदरसों में पढ़ने वाले जेहाद का पाठ पढ़ते हैं, तो सनातन धर्म के स्कूलों में पढ़ने वाले मूर्ति पूजा. वहीं आर्य समाज के स्कूल मूर्ति पूजा की निंदा करते नहीं थकते. इस बीच, पढ़ाई कहीं खो जाती है और छात्र धर्म, जाति आदि पर बंटते दिखते हैं. ऐसे में बड़े होने पर वे इन शिक्षण संस्थानों में पहुंच कर देशद्रोह के नारे न लगाएं तो क्या करें.

कट्टरवाद, भगवाकरण और धर्म के दुकानदारों की राजनीति के सरमाएदार एबीवीपी जैसे संगठनों से लबरेज शिक्षण संस्थानों के छावनी में बदलने पर क्या पढ़ाई का माहौल रहता है? नहीं, बल्कि सिर्फ राजनीति ही चर्चा में रहती है जिस का शिकार हो रोहित वेमुला जैसे छात्र आत्महत्या करते हैं. कन्हैया जैसे जेल जाते हैं और गुरमेहर जैसे हर सचाई का साथ छोड़ गालियां खा कर शहर छोड़ने पर मजबूर होते हैं. ऐसे में छात्र उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने के बजाय देशद्रोही का तमगा पहने इन संस्थानों से निकलते हैं.

देह व्यापार में प्यार की कोई जगह नहीं

10 नवंबर, 2016 को दोपहर के करीब 2 बजे राजस्थान के जिला राजसमंद के थाना केवला की पुलिस को सूचना मिली कि उदयपुर से गोमती जाने वाले फोरलेन नेशनल हाईवे के किनारे पड़ासली भैरूंघाटी के पास एक लाश पड़ी है. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी भरत योगी अधिकारियों को घटना के बारे में बता कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे. उन के पहुंचतेपहुंचते एसपी डा. विष्णुकांत भी मौके पर पहुंच गए थे.

लाश सड़क से 2 सौ मीटर की दूरी पर एक खाई में पड़ी थी. वह एक औरत की लाश थी, जो टीशर्ट और लैगिंग पहने हुए थी. मृतका का रंग गोरा, कद ठिगना तथा शरीर थोड़ा मोटा था. हाथ की अंगुलियों पर टैटू बने थे और नाखूनों पर नेलपौलिश लगी थी. बालों का रंग भूरा था, जिस से अंदाजा लगाया गया कि बालों पर कलर किया गया होगा. एक कान में बाली थी. गले पर गहरे जख्म थे.

मृतका की उम्र 30-35 साल के बीच थी. लाश के पास बीयर की बोतलें पड़ी थीं. देख कर ही लग रहा था कि हत्या कहीं और कर के लाश वहां ला कर फेंकी गई थी. पहनावे से मृतका मेवाड़ क्षेत्र की नहीं लग रही थी.

अनुमान लगाया गया कि मृतका किसी बड़े शहर की रहने वाली थी. आसपास बड़ा शहर उदयपुर था. गुजरात की सीमा भी नजदीक थी. पुलिस ने घटनास्थल से मिले सबूतों को जुटा कर आसपास के लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उस की शिनाख्त नहीं कर सका. इस के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए केवला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुर्दाघर में रखवा दिया.

लाश देख कर डाक्टरों ने बताया कि मृतका की हत्या 10 से 15 घंटे पहले गला घोंट कर की गई थी. बाद में लाश को राजसमंद के सरकारी अस्पताल भिजवा दिया गया था. इसी के साथ लाश की शिनाख्त होने के बाद ही पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया गया.

पुलिस के सामने समस्या मृतका की शिनाख्त की थी. इस के लिए पुलिस ने लाश के फोटो व वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिए. इस के अलावा उदयपुर, प्रतापगढ़ और डूंगरपुर के सभी थानों को लाश के फोटो भेज कर कहा गया कि मृतका का पता लगाने की कोशिश करें. हो सकता है कहीं उस महिला की गुमशुदगी दर्ज हो. इसी के साथ ही हाईवे पर स्थित नेगडि़या और मांडावाड़ा टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली गईं.

मृतका की लाश के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से पुलिस को सूचनाएं मिलीं कि मृतका उदयपुर की हो सकती है. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उदयपुर जा कर स्थानीय पुलिस की मदद ली. लाश मिलने के तीसरे दिन यानी 12 नवंबर को पता चला कि वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की थी, जो मुंबई की रहने वाली थी.

उदयपुर में रोमा जिस्मफरोशी करती थी. पुलिस ने जिस्मफरोशी करने वाली महिलाओं के संपर्क में रहने वाले कुछ लोगों से पता किया तो उन से रोमा का फोन नंबर मिल गया. उस नंबर को वाट्सऐप वाले दूसरे फोन पर डाला गया तो उस की डीपी में मृतका की तसवीर आ गई. वह लाश रोमा उर्फ रेशमा की ही थी.

इस के बाद पुलिस को यह भी पता चल गया कि रोमा उदयपुर में रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा के लिए काम करती थी. रेखा उर्फ पूजा छाबड़ा का नाम उदयपुर पुलिस के लिए नया नहीं था. सैक्स रैकेट के मामले में वह उदयपुर की जानीमानी हस्ती थी. रोमा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने उसे 12 नवंबर को हिरासत में लिया. उस से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के बडे़ बेटे अनिल और ड्राइवर धनराज मीणा को भी हिरासत में ले लिया.

उदयपुर पुलिस ने तीनों को राजसमंद की थाना केवला पुलिस को सौंप दिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने तीनों को 13 नवंबर को रोमा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इस पूछताछ में रोमा के मुंबई से उदयपुर आने और जिस्मफरोशी के धंधे की सरगना रेखा के बेटे से प्रेम करने से ले कर हत्या तक की कहानी सामने आ गई.

उदयपुर राजस्थान का पर्यटनस्थल है. यहां रोजाना तमाम देशीविदेशी सैलानी आते हैं. अन्य महानगरों की तरह यहां भी जिस्मफरोशी का कारोबार धड़ल्ले से होता है. उदयपुर की हिरणमगरी कालोनी के सेक्टर-9 की रहने वाली रेखा उर्फ पूजा काफी समय से सैक्स रैकेट चला रही थी.

उस के खिलाफ थाना हिरणमगरी में पीटा के 7 मामले दर्ज हैं. इस के अलावा वह शांतिभंग के मामलों में भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी थी. रेखा की उम्र 50 साल के आसपास है. उस की शादी ललित छाबड़ा से हुई थी, जिस से उस के 2 बेटे हुए, बड़ा अनिल और छोटा मनीष.

रेखा पहले उदयपुर की हिरणमगरी के सेक्टर-5 में रहती थी. अभी भी वहां उस का मकान है, जिस में वह लड़कियों से जिस्मफरोशी कराती थी. इसी धंधे की बदौलत उस के संपर्क मुंबई, दिल्ली और कोलकाता की लड़कियों से हो गए थे. उदयपुर के कई नामीगिरामी होटलों के अलावा हाईवे पर स्थित फार्महाउसों व गेस्टहाउसों के संचालकों से उस के संपर्क थे.

जिस्म के शौकीनों के लिए वह मुंबई, दिल्ली और कोलकाता से लड़कियां बुलाती थी. रेखा लड़कियों की खूबसूरती और देह के आधार पर ग्राहकों से रकम वसूलती थी. बाहर से आई लड़कियां कुछ दिन उदयपुर में रह कर लौट जाती थीं.

ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से रेखा फोन कर के लड़कियां बुला लेती थी. इस धंधे से उस ने करोड़ों की दौलत कमाई. इसी कमाई से उस ने उदयपुर के हिरणमगरी के सेक्टर-9 में 3 हजार वर्गमीटर का भूखंड खरीद कर आलीशान कोठी बनवाई. कोठी के बेसमेंट में अनैतिक गतिविधियों के लिए ठिकाने बनवाए. उस ने कोठी में चारों तरफ कैमरे लगवाए, ताकि बाहर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. कहा जाता है कि जब रेखा ने यह मकान बनवाना शुरू किया था, उस के कारनामों की वजह से मोहल्ले वालों ने काफी विरोध किया था, लेकिन उस ने आपराधिक लोगों की मदद से सब को चुप करा दिया था. इस मकान की कीमत इस समय करीब 5 करोड़ रुपए है.

रोमा उर्फ रेशमा भी रेखा के बुलाने पर जिस्मफरोशी के लिए मुंबई से उदयपुर आई थी. कहा जाता है कि रोमा मूलरूप से बांग्लादेश की रहने वाली थी. वह गरीबी की वजह से इस दलदल में फंस गई थी.

कुछ दिनों वह कोलकाता में रही, फिर वहां से मुंबई चली गई. अन्य कालगर्ल्स की तरह वह भी बुलाने पर मुंबई से दूसरे शहरों में जाने लगी. इसी तरह रेखा के बुलाने पर वह उदयपुर आई थी.

रोमा को उदयपुर अच्छा लगा, इसलिए वह रेखा के साथ रह कर जिस्मफरोशी करने लगी. शुरू में तो उस के चाहने वाले काफी थे, लेकिन धीरेधीरे उस का शरीर और उम्र बढ़ी तो चाहने वालों की संख्या घटने लगी.

यह सच्चाई भी है कि उम्र बढ़ने के साथ कालगर्ल्स के चहेतों की तादाद कम होने लगती है. रोमा की उम्र जरूर ज्यादा हो गई थी, लेकिन जब वह टाइट वेस्टर्न ड्रैस पहनती थी तो उस के उभार चाहने वालों को आकर्षित करते थे. बालों को भी वह कलर करने लगी थी. फिर भी उस का धंधा टूटता जा रहा था. इस के अलावा जिस्म बेचने के बाद भी उसे पूरा पैसा नहीं मिलता था. उस की कमाई का अधिकांश हिस्सा रेखा रख लेती थी. इसलिए अब उसे इस धंधे में अपना भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा था.

रोमा के जो भी आशिक थे, वे सिर्फ उस के जिस्म से मतलब रखते थे. उन में से किसी की नजरों में उसे अपनापन नजर नहीं आता था. रोमा जब से उदयपुर आई थी, रेखा के साथ उसी के घर में रह रही थी. वह उस की आंटी भी थी और मालकिन भी. साथ रहने की वजह से रोमा का आमनासामना रोजाना रेखा के छोटे बेटे मनीष से होता था. कभीकभी रोमा अपने छोटेमोटे काम भी मनीष से करा लेती थी. मनीष को पता ही था कि उस की मां रेखा देहव्यापार कराती है. उस के घर एक से एक खूबसूरत और हर उम्र की लड़कियां आतीजाती रहती थीं.

मनीष करीब 28 साल का युवा था. उस की अपनी शारीरिक जरूरतें थीं. अगर वह चाहता तो घर आने वाली किसी भी कालगर्ल्स से अपनी शारीरिक जरूरत पूरी कर सकता था, लेकिन रोमा उस के दिल में जगह बनाने लगी थी. अपनी जरूरतों के हिसाब से वह भी मनीष से प्यार करने लगी थी. कब दोनों एकदूसरे के प्यार में खो गए, पता ही नहीं चला.

रोमा और मनीष के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. ये संबंध लगातर चलते रहे, जिस से रेखा को उन के संबंधों की जानकारी हो गई. रेखा इस धंधे की खेलीखाई और घाघ औरत थी. उसे पता था कि इस तरह के संबंधों का क्या हश्र होता है. भविष्य के बारे में सोच कर रोमा रेखा की चिंता किए बगैर मनीष के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी.

मनीष से रोमा को गर्भ भी ठहर गया. अब वह मनीष से शादी की बात करने लगी. उसे पता था कि मनीष से शादी करने के बाद वह रेखा की करोड़ों की जायदाद में आधे की हिस्सेदार हो जाएगी. इस के लिए ही वह मनीष पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी.

इस बात की भनक रेखा को लगी तो उसे मामला गड़बड़ नजर आने लगा. वह कतई नहीं चाहती थी कि उस का बेटा कालगर्ल्स से शादी करे और उस की जायदाद में हिस्सा मांगे. पहले उसे लगता था कि इस मामले को वह अपने स्तर से निपटा देगी. लेकिन उस की चिंता तब बढ़ गई, जब उस का अपना बेटा मनीष भी रोमा की भाषा बोलने लगा.

रोमा को ले कर घर में लगभग रोज ही झगड़े होने लगे. इस से रेखा परेशान रहने लगी. अब वह रोमा से छुटकारा पाने के उपाय सोचने लगी. काफी सोचविचार कर उस ने फैसला किया कि इस झगड़े की जड़ रोमा है, इसलिए उसे ही मनीष के रास्ते से हटा दिया जाए.

रेखा ने काफी सोचविचार कर साजिश रची. उसी साजिश के तहत उस ने मनीष को तलवारबाजी के एक झगड़े में पुलिस से गिरफ्तार करवा कर जेल भिजवा दिया. मनीष के जेल जाते ही रेखा ने अपने ड्राइवर धनराज मीणा और बड़े बेटे अनिल से बात की. इस के बाद योजना के अनुसार, 9 नवंबर की शाम को धनराज ने रोमा को इतनी शराब पिलाई कि वह सुधबुध खो बैठी. उसी हालत में धनराज और रेखा ने सलवार के नाड़े से रोमा का गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. अधिक नशा होने की वजह से वह विरोध भी नहीं कर सकी.

रेखा को पूरा विश्वास हो गया कि रोमा की मौत हो चुकी है तो उस ने अनिल और धनराज से कहा कि वे लाश को गाड़ी से ले जा कर कहीं फेंक आएं. अनिल और धनराज हुंडई आई10 कार की पिछली सीट पर लाश रख कर निकल पड़े. कार धनराज चला रहा था.

दोनों नेगडि़या टोलनाका, नाथद्वारा, राजनगर, केवला होते हुए मांडावाड़ा टोलनाके से हो कर पड़ासली के पास पहुंचे. वहीं हाईवे पर सुनसान जगह देख कर धनराज ने सड़क के किनारे कार रोक दी.

फिर अनिल की मदद से कार की पिछली सीट पर पड़ी रोमा की लाश को निकाल कर हाईवे से करीब 2 सौ मीटर दूर ले जा कर खाई में फेंक दिया. इस तरह लाश को ठिकाने लगा कर दोनों उसी कार और उसी रास्ते से रात में ही घर आ गए.

रोमा की हत्या का खुलासा होने पर पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए नेगडि़या टोलनाका व मांडावाड़ा टोलनाका की सीसीटीवी फुटेज की फिर से जांच की तो उन की कार आतीजाती दिखाई दे गई. पुलिस ने दोनों की उस रात की मोबाइल की लोकेशन और काल डिटेल्स भी सबूत के तौर पर जुटाए.

कथा लिखे जाने तक पुलिस यह पता करने की कोशिश कर रही थी कि रोमा कौन थी, वह कहां की रहने वाली थी, उस के परिवार में कोई है या नहीं? अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने रोमा की लाश का पोस्टमार्टम करा कर अंतिम संस्कार करा दिया था.

बहरहाल, देहव्यापार करने वाली रोमा ने कभी नहीं सोचा होगा कि प्यार करने की उसे ऐसी सजा मिलेगी. रोमा के साथ जो हुआ, उस से एक बार फिर साबित हो गया है कि इस तरह की औरतों का कोई भविष्य नहीं होता.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें