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यूं बनाएं अपने स्मार्टफोन को वायरस फ्री

आप सभी स्मार्टफोन का इस्तेमाल इंटरनेट सर्फिंग, यू-ट्यूब व अन्य वेबसाइट्स से वीडियो व ऑडियो डाउनलोड करने के लिए बड़े पैमाने पर करते हैं और ऐसे में फोन में वायरस का आना एक आम बात हो जाती है. कई वायरस तो ऐसे होते हैं जिन्हें आपके फोन में मौजूद एंटी-वायरस भी नहीं रोक पाता. कई बार आपका फोन वायरस के हमले का शिकार हो चुका है, यह भी आपको तब पता चलता है, जब फोन पर फाइलें बहुत धीरे खुलने लगती हैं या आपका फोन हैंग करने लगता है.

आइए हम आपको बताते हैं कि अगर आपका मोबाइल फोन भी वायरस के हमले का शिकार हो गया है, और आप इन छिपे हुए वायरस से अपने फोन को मुक्त कैसे कर सकते हैं.

मेमोरी कार्ड से वायरस हटाना

ये काम तो बेहद आसान होता है. इसके लिए आप मेमोरी कार्ड का डेटा किसी अन्य जगह पर ट्रांस्फर करके इसे फॉर्मेट कर दें. लेकिन अगर वायरस आपके फोन की मेमोरी में आ चुका है, तो आप घबराइए नहीं, क्योंकि सारी एप्लिकेशन्स फोन की इंटरनल मेमोरी में ही डाउनलोडेड होती हैं. इसके लिए आप फोन की आंतरिक मेमोरी को फार्मेट कर सकते हैं. यहां आपको सारी एप्लिकेशन को फिर से डाउनलोड करना होगा, पर इसमें आपका काफी वक्त भी लग जाता है.

कम से कम समय में अपने फोन से वायरस कैसे डिलीट करे, यह जानने के लिए हमारे द्वारा बताए गए इन स्टेप्स को ध्यान से पढ़ें :

स्टेप 1. सबसे पहले अपने फोन को रिबूट करें. ऐसा करने से ऐप्स के साथ जो भी वायरस चल रहे होंगे वो बंद हो जाएंगे. अगर फोन में रिबूट का ऑप्शन न आए तो पावर के बटन को कुछ देर तक के लिए दबा कर रखें. उसके बाद रिबूट का ऑप्शन आएगा इसे सेलेक्ट करके आप अपने स्मार्टफोन को रीबूट कर सकते है.

स्टेप 2. जब आपका स्मार्टफोन रिस्टार्ट हो जाए तो अपने डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर ऐप्स के ऑप्शन पर क्लिक कर, आपको आपके फोन की सभी इन्सटॉल्ड ऐप्स दिख जाएंगी. अगर फोन में वायरस होगा तो वह रनिंग मोड पर दिख जाएगा. जबकि आप देखेंगे कि बाकी सारी ऐप्स में से कोई भी रंनिग मोड पर नहीं होगी.

स्टेप 3. रंनिग लिस्ट में वायरस दिखते ही सबसे पहले उसे अनइन्सटॉल करें. वायरस पर क्लिक करते ही अनइन्सटॉल के ऑप्शन पर क्लिक करें. अगर यहां भी अनइन्सटॉल का ऑप्शन न आए तो आपको डिवाइस एडमिनिस्ट्रेटर सेटिंग पर जाना होगा.

स्टेप 4. डिवाइस एडमिनिस्ट्रेटर सेटिंग पर जाकर आपको फोन में मौजूद सारी ऐप्स नजर आएंगी. इसमें से जो भी ऐप्स आपको काम की न लगे, उसे अनइन्सटॉल कर दें.

स्टेप 5. सारी गैर-जरूरी ऐप्स को अनइन्सटॉल करने के बाद, अपने स्मार्टफोन को रीस्टार्ट करें. ऐसा करने से फोन में मौजूद सारे वायरस रिमूव हो जाएंगे.

दिलजीत और अनुष्काः किसने किसे डुबाया

मशहूर पंजाबी लोकगायक और पंजाबी फिल्मों के सुपर स्टार अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जब फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा और इस फिल्म के लिए उन्हे सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता  का पुरस्कार मिला, तो अनिल कपूर के बेटे और फिल्म ‘‘मिर्जिया’’ से अभिनय के मैदान में उतरने वाले हर्षवर्धन कपूर ने इसके खिलाफ आवाज उठायी थी. हर्षवर्धन कपूर का तर्क था कि दिलजीत पंजाबी फिल्मों के सुपर स्टार हैं, ऐसे में उन्हें नवोदित अभिनेता का पुरस्कार दिया जाना गलत है. उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों ने हर्षवर्धन के पक्ष में आवाज उठाते हुए यहां तक कहा था कि दिलजीत दोसांझ ने ‘उड़ता पंजाब’ में ऐसा कुछ नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार दिया जाता. यानी कि दिलीज दोसांझ की अभिनय प्रतिभा को लेकर सवाल उठे थे, यह एक अलग बात है कि ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर जो विवाद चल रहा था, उसके चलते मामला दब गया था. इसके अलावा इस मुद्दे पर भी हमेशा की ही तरह बॉलीवुड कई हिस्सों में बंट गया था.

मगर फिल्म ‘‘फिल्लौरी” के प्रदर्शन के साथ ही दिलजीत दोसांझ की प्रतिभा का सच लोगों के सामने आ चुका है. फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ में अनुष्का शर्मा और दिलजीत दोसांझ की जोड़ी है. दिलजीत दोसांझ पंजाबी फिल्मों के सुपर स्टार हैं, मगर फिल्म ‘फिल्लौरी’ को पंजाब में भी दर्शकों ने पसंद नहीं किया. पंजाब दर्शकों को सिनेमा के पर्दे पर दिलजीत दोसांझ और अनुष्का शर्मा की जोड़ी ही पसंद नहीं आयी. यही हालत पूरे देश में रहे. यह एक अलग बात है कि अनुष्का शर्मा की फिल्म निर्माण कंपनी ‘‘क्लीन स्लेट फिल्मस’’ और ‘फिल्लौरी’ से जुड़ा स्टूडियो फॉक्स स्टार दावा कर रहा है कि ‘फिल्लौरी’ बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है.

हालात काफी कुछ अलग है. ‘फिल्लौरी’ की ही वजह से अब दिलजीत दोसांझ को पंजाबी फिल्मों में भी अपना करियर डगमगाया हुआ नजर आने लगा है. जिसके चलते अब दिलजीत दोसांझ को अपनी आने वाली पंजाबी फिल्म ‘‘सुपर सिंग’’ के बॉक्स ऑफिस भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है. फिल्म ‘सुपर सिंग’ में दिलजीत सिंह एक सुपर हीरो के किरदार में हैं. इस फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह और निर्माता एकता कपूर की कंपनी ‘‘बालाजी मोशन पिक्चर्स” और ‘ब्रैट फिल्मस’ है. पर अंदर से हिल चुके दिलजीत दोसांझ ने अभी से मीडिया के माध्यम से खबर फैलानी शुरू कर दी है कि उन्होंने पंजाबी फिल्म ‘सुपर सिंग’ की शूटिंग समय से पहले पूरी कर डाली.

उधर अनुष्का शर्मा की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के अंदर हड़कंप मचा हुआ है. अनुष्का शर्मा बतौर निर्माता अपनी तीसरी फिल्म ‘कनेडा’ पर गहन विचार विमर्श कर रही हैं. क्योंकि इस फिल्म में भी अनुष्का शर्मा के साथ दिलजीत दोसांझ की जोड़ी है. अब सूत्र दावा कर रहे हैं कि अनुष्का शर्मा ने ‘कनेडा’ को न बनाने का निर्णय करते हुए किसी अन्य विषय पर काम करने के लिए अपनी टीम से कहा है. जबकि फिल्म ‘कनेडा’ के मसले पर अनुष्का शर्मा व उनके भाई कर्णेश शर्मा कुछ भी कहने को तैयार नही हैं.

इतना ही नहीं अनुष्का शर्मा या उनके भाई कर्णेश शर्मा खुलेआम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि ‘फिल्लौरी’ की वजह से उन्हें नुकसान हुआ. पर बॉलीवुड के बिचौलियों की माने तो फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ के लिए अनुष्का शर्मा खुद को कसूरवार ठहरा नहीं सकती. पर उनके कुछ नजदीकी सूत्र दिलजीत को कसूरवार मानते हैं.

बड़े काम के हैं ये टेक्नॉलोजी टिप्स

पेश हैं कुछ ऐसे टिप्स, जो आपके लिए बहुत काम के साबित होंगे. वैसे वास्तविक जीवन में इन सभी टिप्स का उपयोग करना बहुत जरूरी है. क्योकि वर्तमान समय में आपकी निजी चीजों के गलत तरीके से इस्तेमाल करने वाले बहुत लोग हैं.

ऑफलाइन विडियो

क्या अपने पसंदीदा यूट्यूब विडियो को बार-बार देखने से आपको डेटा खर्च होने का डर रहता है? अगर हां तो विडियो को अपने कंप्यूटर में डाउनलोड कर लें और उन्हें ऑफलाइन देखें. इसके लिए आपको यूट्यूब के URL में थोड़ा सा बदलाव करना होगा. उसमें ss जोड़ दें.

इसके बाद आपके सामने ऑप्शंस की लिस्ट खुल जाएगी और आप जिस फॉर्मेट में विडियो डाउनलोड करना चाहेंगे, कर सकेंगे.

पॉप-अप से छुटकारा

क्या आप वेबसाइट्स पर चिड़चिड़ाहट पैदा करने वाले चमकीले पॉप-अप विज्ञापनों से परेशान हैं. क्रोम और फायरफॉक्स ब्राउजर्स में इसका हल है प्लग-इन के रूप में जिसका नाम है Adblock Plus इसे इंस्टॉल करें और विज्ञापनों को हमेशा के लिए बंद कर दें.

दूसरो के कंप्यूटर पर संभलकर

अगर आप किसी और शख्स के कंप्यूटर का इस्तेमाल ब्राउजिंग के लिए करते हैं तो incognito विंडो में ही करें. incognito विंडो आपका पासवर्ड, कुकीज और हिस्ट्री सेव नहीं करता. इसका इस्तेमाल करने से एक तो आपको प्राइवेट डेटा को डिलीट करने की जरूरत नहीं रहेगी और दूसरे निजी जानकारी की चोरी की आशंका खत्म होगी. इस विंडो को क्रोम और फायरफॉक्स में खोलने के लिए Ctrl+Shift+N दबाएं.

कहीं भी कोई भी रेडियो

आप मुंबई में हैं और दिल्ली के किसी एफएम को मिस कर रहे हैं या आप किसी ऐसे शहर में रहते हैं जहां एफएम रेडियो की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो आप onlineradios.in या onlinefmradio.in पर जाकर ऑनलाइन ही भारत भर में कहीं भी उपलब्ध कोई भी एफएम रेडियो सुन सकते हैं.

ब्राउजर होगा तेज

अक्सर वेब ब्राउजर स्लो होने लगते हैं क्योंकि आपके ब्राउजर में बहुत सारा वेब डेटा भर जाता है और उसकी स्पीड को प्रभावित करने लगता है. आप Ctrl+Shift+Del प्रेस करके एक निश्चित समय तक के स्टोर्ड किए गए वेब डेटा मसलन कुकीज, पासवर्ड्स, केश मेमरी को साफ कर सकते हैं और इस तरह आपका ब्राउजर फिर से सही स्पीड में काम करने लगेगा.

अरफी लांबा की अंतर्राष्ट्रीय फिल्म

इन दिनों बौलीवुड में हर कलाकार खुद को सीमाओें से परे ले जाना चाहता है. इरफान खान, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, राज कुमार राव सहित हर कलाकार हौलीवुड या अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों का हिस्सा बनना चाहता है. ऐसे में भला ‘फुगली’ और ‘सिंह इज ब्लिंग’ जैसी फिल्मों में हास्य किरदार निभा चुके अभिनेता अरफी लांबा कैसे पीछे रह जाते?

जी हां! अब अरफी लांबा भी अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बन गए हैं. वे जर्मन फिल्मकार डेनियल हररिच के निर्देशन में जर्मन के सुपर स्टार हेनर लॉचरबाक के साथ जर्मन फिल्म में रोमांटिक किरदार निभाते हुए नजर आने वाले हैं, मगर यह उनकी पहली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म नहीं है. थिएटर से अभिनय करियर की शुरूआत करने वाले अरफी लांबा फिल्मों में अपने अभिनय करियर की शुरूआत, साल 2008 में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ से ही की थी. उसके बाद वे हिंदी फिल्मों में नजर आए. इतना ही नहीं, अरफी अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘‘बांबे बर्लिन फिल्म प्रोडक्शन’’ के तहत सायकोलॉजिकल रोमांचक फिल्म ‘प्राग’ और ‘द रोड टू मेंडले’ का सह निर्माण तथा ‘एल वो ई वी’ का निर्माण कर चुके हैं.

अब जर्मन फिल्म में अभिनय करने की चर्चा चलने पर अरफी लांबा कहते हैं -‘‘मुझे उस वक्त खुशी का अहसास होता है जब किसी भारतीय कलाकार को विदेशों में सराहना मिलती है. मैं मूलतः भारतीय पंजाबी हूं, मगर मेरे फिल्मी अभिनय करियर की शुरूआत हौलीवुड फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ से हुई थी. जब में अपनी फिल्म ‘एल वो इ वी’ को लेकर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में गया, तो मेरी मुलाकात जर्मन फिल्मकार डेनियल से हुई. उन्होने मुझे जर्मन फिल्म का आफर दिया, मुझे यकीन नहीं था कि मैं ये कर पाउंगा, पर डेनियल को मुझ पर भरोसा था. अब जबकि मैं फिल्म की शूटिंग पूरी कर चुका हूं, तो कह सकता हूं कि मैंने अच्छा काम किया है. यह फिल्म अतिशीघ्र जर्मनी में प्रदर्शित होगी.’’

चाची की यारी में कर दिया कत्ल

17 अक्तूबर, 2016 की सुबह जिला गोरखपुर के चिलुआताल के महेसरा पुल के नजदीक जंगल में एक पेड़ के सहारे एक साइकिल खड़ी देखी गई, जिस के कैरियर पर एक बोरा बंधा था. बोरा खून से लथपथ था, इसलिए देखने वालों को अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि बोरे में लाश हो सकती है.

लाश  होने की संभावना पर ही इस बात की सूचना थाना चिलुआताल पुलिस को दे दी गई थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी इंसपेक्टर रामबेलास यादव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर आ पहुंचे थे. बोरे से उस समय भी खून टपक रहा था.

इस का मतलब था कि बोरा कुछ देर पहले ही साइकिल से वहां लाया गया था. उन्होंने बोरा खुलवाया तो उस में से एक आदमी की लाश निकली. मृतक की उम्र 35-36 साल रही होगी. उस के सिर पर किसी वजनदार चीज से वार किया गया था. वह रंगीन सैंडो बनियान और लुंगी पहने था. शायद रात को सोते समय उस की हत्या की गई थी.

पुलिस को लाश की शिनाख्त कराने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई. वहां जमा भीड़ ने मृतक की शिनाख्त प्रौपर्टी डीलर सुरेश सिंह के रूप में कर दी थी. वह चिलुआताल गांव का ही रहने वाला था.

शिनाख्त होने के बाद रामबेलास यादव ने मृतक के घर वालों को सूचना देने के लिए 2 सिपाहियों को भेजा. दोनों सिपाही मृतक के घर पहुंचे तो घर पर कोई नहीं मिला. पड़ोसियों से पता चला कि सुरेश सिंह के बिस्तर पर भारी मात्रा में खून मिलने और उस के बिस्तर से गायब होने से घर के सभी लोग उसी की खोज में निकले हुए थे.

घर पर पुलिस के आने की सूचना मिलने पर मृतक सुरेश सिंह के बड़े भाई दिनेश सिंह घर आए तो जंगल में एक लाश मिलने की बात बता कर दोनों सिपाही उन्हें अपने साथ ले आए. लाश देखते ही दिनेश सिंह फफक कर रो पड़े. इस से साफ हो गया कि मृतक उन का भाई सुरेश सिंह ही था.

इस के बाद पुलिस ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए बाबा राघवदास मैडिकल कालेज भिजवा दिया और उस साइकिल को जब्त कर लिया, जिस पर लाश बोरे में भर कर वहां लाई गई थी.

थाने लौट कर रामबेलास यादव ने मृतक के बडे़ भाई दिनेश सिंह की तहरीर पर सुरेश सिंह की हत्या का मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कर लिया. मृतक सुरेश सिंह प्रौपटी डीलिंग का काम करता था. विवादित जमीनों को खरीदनाबेचना उस का मुख्य धंधा था. पुलिस ने इसी बात को ध्यान में रख कर जांच आगे बढ़ाई, लेकिन उस का ऐसा कोई दुश्मन नजर नहीं आया, जिस से लगे कि हत्या उस ने कराई है.

यह हत्याकांड अखबारों की सुर्खियां बना तो एसएसपी रामलाल वर्मा ने एसपी (सिटी) हेमराज मीणा को आदेश दिया कि वह जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा कराएं. उन्होंने सीओ देवेंद्रनाथ शुक्ला और थानाप्रभारी रामबेलास यादव को सुरेश सिंह तथा उस के घरपरिवार के आसपास जांच का घेरा बढ़ाने को कहा.

क्योंकि उन्हें लग रहा था कि यह हत्या दुश्मनी की वजह से नहीं, बल्कि अवैधसंबंधों की वजह से हुई है. क्योंकि मृतक को जिस तरह बेरहमी से मारा गया था, इस तरह लोग अवैध संबंधों में ही नफरत में मारे जाते हैं. इसी बात को ध्यान में रख कर जांच आगे बढ़ाई गई तो जल्दी ही नतीजा निकलता नजर आया.

किसी मुखबिर ने बताया कि पिछले कई सालों से सुरेश सिंह की अपनी पत्नी से पटती नहीं थी. दोनों में अकसर लड़ाईझगड़ा होता रहता था और इस की वजह सुरेश सिंह का सगा भतीजा राहुल चौधरी था. क्योंकि उस के अपनी चाची राधिका से अवैध संबंध थे.

घटना से सप्ताह भर पहले भी इसी बात को ले कर सुरेश और राधिका के बीच काफी झगड़ा हुआ था. तब सुरेश ने पत्नी की पिटाई कर दी थी, जिस से नाराज हो कर वह बच्चे को ले कर मायके चली गई थी. रामबेलास यादव को हत्या की वजह का पता चल गया था. राहुल से पूछताछ करने के लिए वह उस के घर पहुंचा तो उस के पिता दिनेश सिंह ने बताया कि वह तो लखनऊ में है.

लखनऊ में राहुल गोमतीनगर में किराए का कमरा ले कर रहता है और सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहा है. पिता का कहना था कि हत्या वाले दिन के एक दिन पहले वह लखनऊ चला गया था. जबकि मुखबिर ने उन्हें बताया था कि घटना वाले दिन सुबह वह चिलुआताल में दिखाई दिया था.

पिता का कहना था कि घटना से एक दिन पहले यानी 16 अक्तूबर, 2016 को राहुल लखनऊ चला गया था, जबकि मुखबिर का कहना था कि घटना वाले दिन वह चिलुआताल में दिखाई दिया था. मुखबिर की बात पर विश्वास कर के रामबेलास यादव ने राहुल को लखनऊ से लाने के लिए 2 सिपाहियों को भेज दिया.

लखनऊ पुलिस की मदद से गोरखपुर पुलिस 22 अक्तूबर, 2016 को लखनऊ के गोमतीनगर से राहुल चौधरी को गिरफ्तार कर गोरखपुर ले आई. थाने ला कर उस से सुरेश सिंह की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने बिना किसी हीलाहवाली के चाची से अवैध संबंधों की वजह से चाचा सुरेश सिंह की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. राहुल ने चाची के प्रेम में पड़ कर चाचा की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना चिलुआताल में सुरेश सिंह पत्नी राधिका सिंह और 6 साल के बेटे के साथ रहता था. उस का बड़ा भाई था दिनेश सिंह. राहुल उसी का बेटा था. दोनों भाइयों के परिवार भले ही अलगअलग रहते थे, लेकिन रहते एक ही मकान में थे. सुखदुख में भी एकदूसरे की मदद भी करते थे.

गांव वाले भाइयों के इस प्रेम को देख मन ही मन जलते थे. सुरेश सिंह चेन्नई में किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था. लेकिन पत्नी राधिका बेटे के साथ गांव में रहती थी. वह साल में एक या 2 बार ही घर आता था. उस के न रहने पर जरूरत पड़ने पर घर के छोटेमोटे काम उस के बड़े भाई का बेटा राहुल कर दिया करता था.

राहुल और राधिका थे तो चाचीभतीजा, लेकिन हमउम्र होने की वजह से दोनों दोस्तों की तरह रहते थे, बातचीत भी वे दोस्तों की ही तरह करते थे. इस का नतीजा यह निकला कि धीरेधीरे उन के बीच मधुर संबंध बन गए. उन के मन में एकदूसरे के लिए चाहत के फूल खिले तो एकदूसरे के स्पर्श मात्र से उन का रोमरोम खिल उठने लगा.

राहुल चाची राधिका से जुनून के हद तक प्यार करने लगा तो राधिका ने भी उस के प्यार पर अपने समर्पण की मोहर लगा दी. एक बार मर्यादा टूटी तो उन्हें जब भी मौका मिलता, जिस्म की भूख मिटाने लगे. दोनों ने अपने इस अनैतिक रिश्ते पर परदा डालने की कोशिश तो बहुत की, लेकिन पाप के इस रिश्ते को वे छिपा नहीं सके.

लोग राधिका और राहुल को ले कर तरहतरह की चर्चाएं भी करने लगे, पर उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया. जब सुरेश सिंह के किसी शुभचिंतक ने उसे फोन कर के चाचीभतीजे के बीच पक रही खिचड़ी की जानकारी दी तो वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गया. यह सन 2014 की बात है.

सुरेश ने खूब पैसे कमाए थे. उन्हीं पैसों से उस ने गांव में रह कर प्रौपर्टी का काम शुरू कर दिया, जो थोड़ी मेहनत के बाद अच्छा चल निकला. कामधंधे की वजह से अकसर उसे दिन भर घर से बाहर रहना पड़ता था, इसलिए राहुल और राधिका को मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी. लेकिन एक दिन अचानक वह दोपहर में घर आ गया तो उस ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया.

फिर क्या था, सुरेश ने न पत्नी को छोड़ा और न भतीजे को. उस ने इस बात को ले कर भाई से बात की तो बेटे की हरकत से वह काफी शर्मिंदा हुए. समाज और रिश्तों की दुहाई दे कर उन्होंने बेटे को घर से निकाल दिया तो वह लखनऊ आ गया और गोमतीनगर में किराए पर कमरा ले कर रहने लगा.

यहां वह सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. सुरेश की वजह से गांव में राहुल और उस की चाची की काफी बदनामी हुई थी. यही नहीं, उसे घर से भी निकाल दिया गया था. राधिका की खूब थूथू हुई थी. गांव से ले कर नातेरिश्तेदारों तक ने उस की खूब फजीहत की थी.

धीरेधीरे बात थमती गई. मांबाप से मांफी मांग कर राहुल फिर घर लौट आया. मांबाप ने उसे माफ जरूर कर दिया था, लेकिन उस पर कड़ी नजर रखी जा रही थी. राधिका से उसे मिलने की सख्त मनाही थी. जबकि वह चाची से मिलने के लिए तड़प रहा था. लेकिन सख्त पहरेदारी की वजह से दोनों का मिलन संभव नहीं हो पा रहा था.

चाचा सुरेश की वजह से राहुल प्रेमिका चाची से मिल नहीं पा रहा था. उसे लग रहा था कि जब तक चाचा रहेगा, वह चाची से कभी मिल नहीं पाएगा. चाचा प्यार की राह का कांटा लगा तो वह उसे हटाने के बारे में सोचने लगा. आखिर उस ने उसे हटाने का निश्चय कर लिया.

अब वह ऐसी राह खोजने लगा, जिस पर चल कर उस का काम भी हो जाए और वह फंसे भी न. काफी सोचविचार कर उस ने तय किया कि वह अपना मोबाइल फोन औन कर के बाइब्रेशन पर लखनऊ वाले कमरे पर ही छोड़ देगा और रात में गोरखपुर पहुंच कर चाचा की हत्या कर के लखनऊ अपने कमरे पर आ जाएगा.

पुलिस उस पर शक करेगी तो मोबाइल लोकेशन के सहारे वह बच जाएगा. तब वह शायद यह भूल गया था कि कातिल कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से उस का बचना आसान नहीं है.

राहुल जब से घर आ कर रहने लगा था, सुरेश और उस की पत्नी राधिका के बीच उसे ले कर अकसर झगड़ा होता रहता था. जबकि इस बीच राहुल एक बार भी चाची से नहीं मिला था.

रोजरोज के झगड़े से परेशान हो कर राधिका नाराज हो कर बेटे को ले कर मायके चली गई थी. राधिका के चली जाने से राहुल काफी दुखी था. उस का मन घर में नहीं लगा तो 16 अक्तूबर को मांबाप से कह कर वह लखनऊ चला गया.

चाची से न मिल पाने की वजह से राहुल तड़प रहा था. तड़प की वेदना से आहत हो कर उस ने योजना को अमलीजामा पहना दिया. योजना के अनुसार 17 अक्तूबर की शाम 4 बजे इंटरसिटी ट्रेन से वह गोरखपुर के लिए चल पड़ा. रात 11 बजे के करीब वह गोरखुपर पहुंचा. स्टेशन से टैंपो ले कर वह चिलुआताल के बरगदवां चौराहे पर पहुंचा और वहां से पैदल ही घर पहुंच गया.

उसे घर तो जाना नहीं था, इसलिए सब से पहले उस ने पिता के कमरे के दरवाजे की सिटकनी बाहर से बंद कर दी, ताकि शोर होने पर वह बाहर न निकल सकें.

इस के बाद पीछे की दीवार के सहारे वह सुरेश सिंह के कमरे में पहुंचा, जहां वह गहरी नींद सो रहा था. उसे देखते ही नफरत से राहुल का खून खौल उठा. उसे पता था कि चाचा के घर में लोहे की रौड कहां रखी है. उस ने लोहे की रौड उठाई और पूरी ताकत से सुरेश के सिर पर 3 वार कर के उसे मौत के घाट उतर दिया.

राहुल को विश्वास हो गया कि सुरेश की मौत हो चुकी है तो उस ने घर में रखा बोरा उठाया और उसी में उस की लाश भर कर रात के 4 बजे के करीब बाहर झांक कर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा. जब उसे लगा कि कोई नहीं देख रहा है तो उस ने सुरेश की ही साइकिल घर उस की लाश वाले बोरे को कैरियर पर रख कर जंगल की ओर चल पड़ा.

लेकिन जब वह झील की ओर जा रहा था, तभी एक ट्रैक्टर आता दिखाई दिया. उसे देख कर वह घबरा गया और साइकिल को एक पेड़ से टिका कर भागा. ट्रैक्टर पर बैठे एक मजदूर ने उसे भागते देख लिया तो उस ने उस का नाम ले कर पुकारा भी, लेकिन रुकने के बजाए राहुल बरगदवां चौराहे की ओर भाग गया.

वहां से उस ने टैंपो पकड़ी और गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां से ट्रेन पकड़ कर लखनऊ स्थित अपने कमरे पर चला गया. उस ने चालाकी तो बहुत दिखाई, लेकिन वह काम न आई और पकड़ा गया. राहुल चौधरी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद कर ली थी.

पूछताछ के बाद राहुल को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. राधिका के पति की हत्या की खबर पा कर ससुराल आ गई थी. राहुल ने जो किया था, उस से उसे काफी दुख पहुंचा. क्योंकि उस ने राहुल से कभी नहीं कहा था कि वह उस के पति की हत्या कर उसे विधवा बना दे.

राहुल के मांबाप भी काफी दुखी हैं. उन्होंने राहुल से अपना नाता तोड़ कर उसे उस के हाल पर छोड़ दिया है.

– कथा में राधिका सिंह बदला नाम है. कथा पुलिस सूत्रों एवं राहुल के बयानों पर आधारित

जब एक महिला को अपनी सीट देकर खुद जमीन पर सो गए नरेंद्र मोदी

केंद्र की मोदी सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है और सरकार इन तीन वर्षों के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों का जमकर बखान करने की तैयारी में है. इन सब के बीच सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला की एक कहानी इन दिनों फिर से सुर्खियों में है.

यह कहानी 2014 में अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' में छपी थी, जिसे आजकल फिर से सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है. इस कहानी में मोदी और वाघेला की करीब 26 साल पहले की एक 'रेल यात्रा' का जिक्र है. इंडियन रेलवे (ट्रैफिक) सर्विस की वरिष्ठ अधिकारी लीना शर्मा ने एक अंग्रेजी अखबार में लिखे एक लेख में अपनी 90 की दशक की अहमदाबाद यात्रा का जिक्र करते हुए लिखा था…

मैं और मेरी दोस्त ट्रेन द्वारा लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे. दो सांसद भी उसी बोगी में यात्रा कर रहे थे. सब कुछ तो ठीक था लेकिन उनके साथ यात्रा कर रहे 12 लोग जो बिना टिकट के थे, उनका व्यवहार बड़ा खौफनाक था. उन्होंने हमें हमारी सीट से उठने पर मजबूर कर दिया और वहां बैठकर अपना सामान रखकर वो अश्लील कमेंट करने लगे.

हमें गुस्सा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था. यह एक भयावह रात थी हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें? ऐसा लग रहा था कि सभी यात्री गायब से हो गए हैं. किसी तरह हम अगली सुबह दिल्ली पहुंच गए. फिर हमें अहमदाबाद जाना था लेकिन हम भावनात्मक रूप से कमजोर हो गए थे. मेरी दोस्त को गहरा आघात लगा था और उसने निर्णय कर लिया था कि वह अब अहमदाबाद नहीं जाएगी और दिल्ली ही रहेगी. मैंने निर्णय ले लिया कि मैं जाऊंगी और एक अन्य बैचमेट (उत्पलप्रना हजारिका, जो रेलवे बोर्ड में अभी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं) मेरे साथ हो गई थी. हम रात को अहमदाबाद की ट्रेन में सवार हो गए और इस बार हमारे पास टिकट नहीं था क्योंकि हमारे पास इतना समय नहीं था कि हम टिकट खरीद सके. हम प्रतीक्षा सूची में थे.

हम फर्स्ट क्लास बोगी के टीटी से मिले और उसने उसे अपनी परेशानी के बारे में बताया जिस पर उसने मदद करने का भरोसा दिया. कुछ देर में टीटीई हमें एक कूपे की तरफ ले गया जहां सफेद खादी कुर्ता-पायजामा पहने दो नेता बैठे थे. टीटीई ने हमें कहा कि "ये अच्छे लोग हैं और इस रूट के नियमित पैंसेजर हैं, डरने की बात नहीं है." दोनों ही व्यवहारिक रूप से अच्छे लग रहे थे लेकिन पिछली रात के अनुभव से डर भी लग रहा था. उन्होंने अपने आप का परिचय गुजरात के दो भाजपा नेताओं के रूप में दिया. उन्होंने अपना नाम बताया था लेकिन हम जल्दी ही हम उनका नाम भूल गए. हमने भी उन्हें अपने बारे में बताया और कहा कि हम असम से रेलवे के दो प्रशिक्षु अधिकारी हैं. बातचीत का सिलसिला चला तो इतिहास से लेकर राजनीति जैसे मुद्दों पर बात हुई.

लीना अपने लेख में लिखती हैं कि, उन दो नेताओं में जो सीनियर (वाघेला) थे वह काफी जोशीले स्वभाव के थे जबकि दूसरे जवान नेता (नरेंद्र मोदी) ज्यादातर चुप थे, लेकिन उनकी बॉडी लैंग्वेज से लग रहा था कि हम जो चर्चा कर रहे हैं वह अच्छी तरह से उसे सुन रहे हैं. तभी मैंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत का जिक्र किया तो वह अचानक से बोले, "आप कैसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जानती हैं?" तब मैंने उन्हें बताया कि मेरे पिता ने मुझे उनके बारे में बताया था.

इन दो नेताओं ने हमें यह कहते हुए गुजरात भाजपा ज्वाइन करने का न्योता भी दिया लेकिन हमने हंसते हुए कहा कि हम असम से हैं तब उन्होंने कहा हमें कोई दिक्कत नहीं हैं हम आपके टैलेंट की कद्र करते हैं. तभी डिनर आ गया और भोजन की चार शाकाहारी थालियां आई. सबने भोजन किया और सभी का बिल उस नौजवान (मोदी) ने चुकता किया. तभी टीटीई आया और उसने कहा कि ट्रेन में सीट नहीं हैं और मैं आपके लिए सीट की व्यवस्था नहीं कर सकता. तभी दोनों आदमी (मोदी और वाघेला) अपनी सीट से खड़े हो गए कहा कोई बात नहीं हम आपके लिए व्यवस्था कर देते हैं. दोनों ने अपनी सीट हमें दे दी और खुद ट्रेन के फर्श पर अपनी चादर बिछाकर सो गए.

यह कहानी लिखते हुए लीना शर्मा लिखती हैं कैसा विपरीत उदाहरण था पिछली रात दो नेताओं के साथ हमारी यात्रा कितनी भयावह रही था जबकि यह यात्रा यादगार हो गई थी. अगली सुबह जब ट्रेन अहमदाबाद पहुंची तो दोनों ने हमसे किसी भी परेशानी के लिए मदद करने का आश्वासन दिया. वरिष्ठ नेता (वाघेला) ने हमसे कहा कि किसी भी तरह की परेशानी हो तो हमारे दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले हैं. जबकि दूसरे व्यक्ति (मोदी) ने हमसे कहा, "मेरे पास कोई पक्का घर तो है नहीं कि मैं आपको आमंत्रित कर सकूं लेकिन आप उनका (वाघेला) आमंत्रण स्वीकार कर सकती हैं." ट्रेन के रुकने से पहले मैंने अपनी डायरी निकाली और फिर से उनका नाम पूछा, मैंने तुरंत दोनों का नाम लिखा: शंकर सिंह वाघेला और नरेंद्र मोदी.

लेखिका लीना शर्मा ने इस घटना का जिक्र 1995 में पहली बार असम के एक अखबार के लिए लिखे अपने लेख में किया था. उस वक्त लीना ने गुजरात से ताल्लुक रखने वाले दो अज्ञात राजनेताओं के नाम यह लेख लिखा था और लीना को इस बात का जरा सी भी आभास नहीं था कि वो जिन दो राजनेताओं का जिक्र अपने लेख में कर रही हैं, वो आने वाले दिनों में मशहूर हो जाएंगे. वाघेला 1996 में गुजरात के सीएम बने, जबकि मोदी 2001 से लगातार 2014 तक गुजरात के सीएम बने और आज वो देश के प्रधानमंत्री हैं.

घर बैठे करिए ये पार्ट टाइम जॉब्स

आज के दौर में सभी को जॉब की जरुरत होती है. देखा भी गया है कि बहुत से लोग अपना खर्चा निकालने के लिए पार्ट टाइम जॉब ढूंढते भी रहते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही जॉब्स के बारे में बतायेगे जिससे आप घर में खाली न बैठकर या खाली समय में बस कुछ ही घंटो में अच्छी कमाई कर सकते हैं..

1. ऑनलाइन कम्युनिकेशन असोसिएट

ऐसा कोई भी पार्ट टाइम जॉब करने के लिए आपको वैब कंटेन्ट (Web Content), सोशल मीडिया नेटवर्क और कुछ ट्रैंड्स की समझ होना आवश्यक है. इस जॉब में आपको वेब कंटेंट अपडेट करना और सोशल मीडिया को मैनेज करना और अच्छी कंटेंट रिपोर्ट्स तैयार करना होता है. ऐसे जॉब में आप कितनी देर काम करते है इसपर आपकी कमाई निर्भर करती है.

2. सॉफ्टवेयर डेवलपर

सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अगर आपको प्रोग्रामिंग आती है, तो आप ये काम आसानी से कर सकेंगे. इस काम में आपको सॉफ्टवेयर डेवेलप करना होता है और कई नये-नये ऐप तैयार करने होते हैं. इस जॉब से आप एक हजार से चौदह सौ रुपये प्रति घंटा तक भी कमाई कर सकते हैं.

3. बाइलिंग्वल लीगल असिस्टेंट

कभी भी आपको ऐसा जॉब करने के लिए एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान होना बेहद जरुरी होता है. साथ ही साथ अगर आपने कानून की थोड़ी सी पढ़ाई की हुई है या आपको इसकी थोड़ी समझ है तो आप ये जॉब आसानी से कर सकते हैं.

आपको इस जॉब में कानूनी कम्युनिकेशन को समझना होता है और कंटेंट को वकील और क्लाइंट्स को समझाना होता है. इस जॉब में आपको आपके प्रोजेक्ट या केस के आधार पर पैसा मिलता है.

4. फ्रीलांस जॉब्स

आपमें फोटोग्राफी, फोटोशॉप और ग्राफिक डिजाइन की अच्छी स्किल्स हैं और साथ ही आप इंटरनेट टूल्स से फोटो एडिट करने की अच्छी जानकारी रखते हैं, तो आप फ्रीलांसर फोटोग्राफर बन सकते हैं क्योंकि ऐसे जॉब के लिए आपको ये सब आना बेहद जरुरी होता है.

ऐसे जॉब में आपको किसी कंपनी, अखबार, मैगेजीन या फिर किसी व्यक्ति के लिए फोटोग्राफी का काम करना पड़ता है. इस पार्ट टाइम जॉब में भी आपको काम के हिसाब से पैसे दिए जाते है. आप अपने फोटो ऑनलाइन भी बेच सकते है.

5. सोशल मीडिया नेटवर्किंग

इस जॉब में आपको इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब आदि का अच्छे से उपयोग करना आना चाहिए. अपने नेटवर्क और काम के हिसाब से चीजों को जितना अधिक प्रसारित करेंगे, इसमें आप उतनी ही मोटी कमाई कर सकेंगे.

आय और निवेश के इन स्रोत पर कटता है टीडीएस

अधिकांशत: निवेश से अर्जित आय टीडीएस के अधीन आती है. सैलरी इनकम और डिबेंचर पर अर्जित ब्याज टीडीएस कटौती के दायरे में आता है.

इसलिए आपको टैक्स और टीडीएस कटौती के बारे में जानकारी होना अनिवार्य है. साथ ही आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि इससे कैसे बचा जा सकता है. आय और निवेश के वो रास्ते जिन पर टीडीएस कटता है.

सैलरी पर टीडीएस कटौती

वो लोग जिनकी आय कर की सीमा से ज्यादा होती है नियोक्ता उनकी कुल आय पर से टीडीएस कटौती करता है. इसमें सभी कटौती और छूट के बाद आय के अलावा अन्य आय शामिल होती है. टीडीएस इनकम स्लैब के आधार पर कटौती योग्य होता है.

इसे टाला भी जा सकता है, अगर आप आयकर अधिनियम की धारा 80सी और 80डी के दायरे में आने वाले विकल्पों में निवेश करते हैं. हालांकी, इसके लिए आपको इन्वेस्टमेंट के प्रूफ भी देने होते हैं. कंपनियां वित्त वर्ष के अंत में एक टीडीएस प्रमाणपत्र जिसे फॉर्म 16ए के रूप में भी जाना जाता है, जारी करती हैं.

ब्याज से प्राप्त आय पर टीडीएस कटौती

बैंक सामान्य तौर पर ब्याज से प्राप्त होने वाली आय पर टीडीएस कटौती करते हैं. इसकी सीमा 10,000 रुपए सालाना से ऊपर की होती है. उच्च कर वर्ग में आने वाले करदाताओं को देयता के अनुसार कर का भुगतान करना होता है. वहीं निम्न आय वाले व्यक्ति फार्म 15जी या एच (इनमें से जो भी लागू हो) को जमा कर टीडीएस के लिए क्लेम कर सकते हैं. इसके साथ ही, विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाकर कोई भी टीडीएस बचा सकता है, लेकिन एक बैंक में ब्याज से प्राप्त आय 10,000 रुपए से ऊपर नहीं होनी चाहिए.

टीडीएस पूरी राशि पर लागू होता है न कि अधिकता वाली राशि पर. टीडीएस कटौती की दर 10 फीसद होती है लेकिन अगर आपने पैन कार्ड नहीं दिया है तो आपकी सैलरी पर 20 फीसद का टीडीएस कटेगा.

डिबेंचर और प्रतिभूति से अर्जित ब्याज पर टीडीएस कटौती

डिबेंचर और सिक्योरिटीज पर अर्जित ब्याज, अधिनियम की धारा 193 के तहत टीडीएस कटौती योग्य होता है. 10,000 रुपए से ज्यादा की सरकारी प्रतिभूतियों और 5000 रुपए से ज्यादा के डिबेंचर पर 10 फीसद के हिसाब से टीडीएस कटता है. टीडीएस कटौती क्रेडिट और पेमेंट के दौरान या फिर इनमें से जो पहले हो उसमें होती है.

ईपीएफ विदड्रॉल पर टीडीएस कटौती

यदि कर्मचारी भविष्य निधि को अंशदान के पांच वर्ष से पहले निकाला जाएगा तो टीडीएस लागू होगा. हालांकि, 1, जून 2016 से 50,000 रुपये से कम राशि के लिए टीडीएस कटौती नहीं की जाएगी. टीडीएस उस सूरत में लागू नहीं होता है जब व्यक्ति भविष्य निधि को एक खाते से दूसरे प्रोविडेंट फंड अकाउंट में स्थानांतरित करता है. अगर फॉर्म 15जी या 15एच को नहीं भरा गया है तो टीडीएस 10 फीसदी की दर से लगता है. इसमें पैन कार्ड देना अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने पर टीडीएस 20 फीसदी की दर से लगता है.

अचल संपत्ति पर टीडीएस कटौती

अचल संपत्ति पर 50 लाख से अधिक के लेन-देन पर धारा 194-IA के अंतर्गत 1 फीसद का टीडीएस लागू होता है, वहीं कृषि योग्य भूमि के लिए यह लागू नहीं है. टीडीएस कटौती भुगतान के समय या विक्रेता को क्रेडिट देते समय या इनमें से जो पहले हो उसमें लागू होती है. बिक्री के बाद, खरीदार विक्रेता को टीडीएस प्रमाण पत्र प्रदान करेगा.

लॉटरी से जीतने वाली रकम पर टीडीएस कटौती

अगर किसी व्यक्ति ने लॉटरी में कोई रकम जीती है तो उसे 30 फीसद का टीडीएस कटवाना होगा. यह उस सूरत में होगा जब टिकट में जीती गई राशि 10,000 रुपए से ज्यादा होगी. इसी तरह की शर्त सेक्शन 194बी के अंतर्गत वर्ग पहेली और कार्ड गेम में जीती गई रकम पर भी लागू होगी.

रिटायरमेंट प्लैनिंग करते वक्त इन गलतियों से बचें

अकसर लोग नौकरी लगने के बाद इत्मिनान से जिन्दगी बिताते हैं. मजे से गुजर-बसर करते हैं और रिटायरमेंट की चिंता करना तो दूर, आने वाले दिनों तक की चिंता नहीं करते. ऐसी सोच रखने वालों को इसका खामियाजा भी जल्द ही भुगतना पड़ता है. प्राइवेट जॉब वालों के लिए तो यह बेपरवाही बहुत सी मुसीबतों का सबब बन सकता है. क्योंकि प्राइवेट जॉब में ज्यादा अनिश्चिततायें होती हैं.

नौकरी के बाद अपने रिटायरमेंट को बेहतर बनाने का सबसे अच्छा तरीका है, कि आप आज ही से रिटायरमेंट के बारे में सोचना शुरू कर दें. यह अभी से तय कर लें कि आप रिटायरमेंट के बाद कैसा जीवन गुजारना चाहते हैं. उसी के हिसाब से अपनी जिन्दगी के  फैसले लें.

एक सर्वे के मुताबिक 80 फीसदी लोग रिटायरमेंट की प्लैनिंग नहीं कर पाते हैं. जो लोग प्लैनिंग करते भी हैं वे कुछ सामान्य गलतियां कर देते हैं जिसका खामियाजा रिटायरमेंट के दौरान और रिटायर होने के बाद भुगतना पड़ता है.

रिटायरमेंट से पहले इन गलतियों को करने से बचें

1. अपने खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाना

सबसे जरूरी है इस बात का अनुमान लगाना कि रिटायरमेंट के बाद आपका खर्च कितना होगा. यानी अपनी जरूरतों का सही अनुमान लगाना बहुत जरूरी है. अगर आंकलन सही नहीं किया गया तो आपका रिटायरमेंट फंड कम पड़ सकता है. इसलिए अंदाजे से काम चलाने के बजाय आप अपने पिछले कुछ महीनों के खर्चों की लिस्ट तैयार करें और औसत निकालकर अपना रिटायरमेंट फंड तैयार करें.

2. महंगाई का ध्यान न रखना

महंगाई तो हम सभी पर भारी पड़ रही है. यह दिनों-दिन बढ़ती जाती है. पर रिटायरमेंट की प्लैनिंग करते वक्त हम इसे भूल जाते हैं. नतीजा यह होता है महंगाई के कारण आपका फंड कम पड़ जाता है. आज जो महंगाई है वो भविष्य में बढ़ेगी. इसे ध्यान में रखकर फंड बनाएं.

3. रिटायरमेंट फंड से पैसे निकालना

रिटायरमेंट दूर है, यह सोचकर फंड पैसे निकालन बेवकूफी है. जरूरत कोई भी हो, वो आपके भविष्य की सेविंग है, उसे खर्च न करने में ही भलाई है. बच्चों की शादी, एडमिशन आदि के लिए तो फंड से पैसे निकालना ठीक भी है, लेकिन दिक्कत तो तब होती है जब लोग लक्जरी चीजों के लिए जैसे कार खरीदना, विदेश यात्रा आदि के लिए इसका इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं. इसलिए रिटायरमेंट फंड को हाथ लगाने से पहले यह जरूर सोच लें कि यह पैसा उस समय के लिए है जब आपके पास कमाई का कोई साधन नहीं होगा.

4. मेडिकल फंड न रखना

रिटायरमेंट फंड में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से कुछ व्यवस्था करनी जरूरी है क्योंकि बुढ़ापे में लोग ज्यादा बीमार पड़ते है. साथ ही अक्सर कई तरह की स्वास्थ संबंधी दिक्कतों से जूझते है. इसलिए रिटायरमेंट प्लैनिंग के वक्त ही इस बारे में सोच लेना चाहिए.

5. लोन न चुकाना

एक बात जो आपको हमेशा ध्यान रखनी चाहिए वो यह कि रिटायरमेंट से पहले ज्यादा से ज्यादा कर्ज चुका दें. क्योंकि रिटायरमेंट के बाद आपकी कमाई का जरिया खत्म हो जाता है और जिंदगी केवल उन्हीं पैसों के दम पर चलानी होती है जो आपने जमा किए हैं. इसलिए फंड में से लोन न चुकाना पड़े इस बात का ध्यान जरूर रखें.

इन सात शहरों में भी होगी आईपीएल ओपनिंग सेरेमनी

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सीजन 10 की शुरुआत हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनैशनल स्टेडियम में शानदार रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ. इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण फिल्म अभिनेत्री एमी जैक्सन रहीं.

इस दौरान पूर्व कप्तानों को सम्मानित किया गया, जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली के अलावा कई दिग्गज शामिल रहे. इस मौके पर वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंद्र सहवाग भी मौजूद रहे. आरसीबी और सनराइजर्स के कप्तान अपनी-अपनी टीमों के साथ मैदान पर आए.

इन सब के अलावा क्रिकेट फैंस के लिए खास बात यह है कि आईपीएल के इस सीजन में एक के बजाय आठ अलग-अलग ओपनिंग सेरेमनी होनी है.

हैदराबाद के बाद गुरुवार को यानी की 6 अप्रैल 2017 को पुणे में ओपनिंग सेरेमनी होगी. पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख परफॉर्म करेंगे.

गुजरात के राजकोट में सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में 7 अप्रैल को टाइगर श्रॉफ क्रिकेट फैंस का मनोरंजन करेंगे.

वहीं, कोलकाता के ईडन गार्डन में श्रद्धा कपूर और सिंगर मोनाली ठाकुर 13 अप्रैल को परफॉर्म करेंगी. इसके बाद 15 अप्रैल को दिल्ली के फिरोज शाह कोटला ग्राउंड में परिणीति चोपड़ा परफॉर्म करती नजर आएंगी.

इसके अलावा बंगलुरु, इंदौर और मुंबई का कार्यक्रम अभी तय किया जाना बाकी है. बंगलुरु और इंदौर में पहला मैच 8 अप्रैल को होगा जबकि मुंबई में पहला मैच 9 अप्रैल को होना है.

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