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दया भाभी कभी किया करती थीं ऐसी फिल्में

‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ भारतीय टेलीविजन के सबसे मशहूर शो में से एक है. यह शो लगभग हर घर में देखा जाता है. इसके किरदारों ने दर्शकों पर अपनी एक अलग ही छाप छोड़ी है. अन्य शो से बिलकुल अलग यह एक साफ-सुथरा पारिवारिक शो है जिसमें एक सोसाइटी में आने वाले उतार चढ़ाव को दिखाया गया है. सीरियल की शुरुआत साल 2008 में हुई थी और आज यह सभी का पसंदीदा शो बन गया है.

इस सीरियल का एक किरदार दया भाभी लोगों में काफी लोकप्रिय है. यह रोल दिशा वकानी ने निभाया है और उन्हें अपने अभिनय के लिए काफी सराहा भी गया है. दिशा की लाजवाब कॉमिक टाइमिंग और उनके बोलने के स्टाइल के बहुत बड़े फैन हैं. दया भाभी अपने खास अभिनय से आज हर घर में जगह बना चुकी है. मगर क्या आप जानते है की इस सीरियल से पहले दिशा क्या करती थी.

दिशा ने तारक मेहता का उल्टा चश्मा में रोल पाने से पहले इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए काफी स्ट्रगल किया. अपने स्ट्रगलिंग वाले दिनों में उन्होंने बी-ग्रेड फिल्म में भी काम किया है. 1997 में आई फिल्म कमसिन: द अनटच्ड में दिशा ने बोल्ड सीन भी किया था.

शातिर ठगों का जाल

भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बीमा पौलिसी कराना आम बात है. अपनी अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से ज्यादातर लोग बीमा पौलिसी खरीदते हैं. इस के लिए सरकारी, गैरसरकारी कंपनियां और बैंक अपने नियमों के हिसाब से पौलिसी करते हैं. उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के पल्लवपुरम निवासी अंबरीश गुप्ता ने भी एक नामी प्राइवेट बैंक से 14 बीमा पौलिसी करा रखी थीं, जिन की कीमत 54 लाख रुपए थी. 16 सितंबर, 2016 की एक शाम अंबरीश घर पर ही थे. अचानक उन के मोबाइल पर एक अंजान नंबर से फोन आया. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से एक व्यक्ति की आवाज सुनाई दी, ‘‘हैलो गुड इवनिंग सर, आप अंबरीशजी बोल रहे हैं न?’’

‘‘जी हां, आप कौन?’’

‘‘सर, मैं आईसीआईसीआई के फंड डिपार्टमैंट से औफीसर राहुल बात कर रहा हूं.’’ फोनकर्ता ने अपना परिचय दिया तो वह थोड़ा सतर्क हो गए, क्योंकि उन की बीमा पौलिसी इसी कंपनी में थी. उन्होंने जिज्ञासावश पूछा, ‘‘बताइए, राहुलजी.’’

‘‘सर, आप को बताना चाहता हूं कि आप की पौलिसी की कीमत अब 75 लाख रुपए हो गई है. अब आप को पूरे 21 लाख रुपए का मुनाफा होगा.’’ उस ने गर्मजोशी से बताया तो अंबरीश के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव उभर आए.

‘‘धन्यवाद, यह तो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है.’’

‘‘लेकिन एक प्रौब्लम है सर.’’

‘‘कैसी प्रौब्लम?’’ अंबरीश को एकाएक झटका सा लगा.

‘‘दरअसल सर, हमें आज रात शेयर मार्केट में गिरावट आने के संकेत मिले हैं. अगर ऐसा हुआ तो पौलिसी की वैल्यू 75 लाख से गिर कर केवल 43 लाख रह जाएगी. आप समझ सकते हैं कि शेयर बाजार का उतारचढ़ाव किसी के हाथ में नहीं होता.’’

‘‘यह तो वाकई परेशानी की बात है.’’

‘‘बिलकुल सर, लेकिन आप हमारे रौयल कस्टमर हैं. आप को सूचना देना हम ने अपना फर्ज समझा. हम चाहते हैं, आप को पौलिसी से भरपूर फायदा हो. आप अपनी पौलिसी को तत्काल बंद करने की अनुमति दें तो इस नुकसान से बच सकते हैं. 3 महीने के अंदर कंपनी आप को पूरे 75 लाख रुपए देगी.’’

उस की बात सुन कर अंबरीश ने तेजी से दिमाग दौड़ाया. इस में कोई बुराई नहीं थी. उन्हें 54 लाख के बदले 75 लाख रुपए मिल जाने थे. यानी उन्हें शुद्ध 21 लाख रुपए का फायदा हो रहा था. कुछ पल की खामोशी के बाद वह बोले, ‘‘पैसा तो मुझे मिल जाएगा, लेकिन मैं पौलिसी भी जारी रखना चाहता हूं.’’

‘‘आप इस की फिक्र न करें सर, हम आप को नई पौलिसी दे देंगे. बैंक से आप को कल फोन आ जाएगा.’’

‘‘ओके.’’ अंबरीश ने फोन रख दिया.

बैंक के औफीसर ने खुद काल की थी, जिस से यह बात साफ थी कि बैंक उन का हित चाहता था. वह सोच कर मन ही मन खुश हुए कि घाटे से बच गए. वाकई यह खुशी की ही बात थी.

अगले दिन बैंक से एक लड़की का फोन आया तो उस ने उन्हें कुछ आकर्षक लाभ वाली पौलिसियों के बारे में समझाया. साथ ही यह भी बताया कि उन्हें 21 लाख का जो मुनाफा होने जा रहा है, उतने रुपए उन्हें जमा कराने होंगे. यह रकम बैंक द्वारा उन्हें 3 महीनों में लौटा दी जाएगी. इस के बाद कई दिनों तक बातों का सिलसिला चलता रहा. मुनाफे के लालच में अंबरीश मोटी रकम का ख्वाब देख रहे थे. उन्होंने न केवल 21 लाख रुपए फोनकर्ताओं द्वारा बताए गए खातों में जमा किए बल्कि नई पौलिसी के रुपए भी जमा कर दिए.

अलगअलग समय पर कभी इनकम टैक्स, कभी सिक्योरिटी मनी तो कभी पौलिसी के नाम पर अंबरीश ने करीब 80 लाख रुपए जमा करा दिए. 2 महीने बाद दिसंबर में रकम वापसी की बात आई तो फोनकर्ता आश्वासन देने वाला अंदाज अपनाने लगे. जिन लोगों के फोन उन के पास आते रहे थे, उन्होंने धीरेधीरे उन से संपर्क करना छोड़ दिया. दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अंबरीश ने कई लोगों से विचारविमर्श किया. जिस के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि उन्हें ठगा गया है.

इस बात का अहसास होते ही उन की रातों की नींद उड़ गई. मामला मोटी रकम का था. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह ठगी का शिकार हो जाएंगे. उन्होंने इस बारे में एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ से मुलाकात कर के शिकायत की.

मामला साइबर अपराध से जुड़ा हुआ था. निस्संदेह वह किसी पेशेवर रैकेट का शिकार हुए थे. यह भी तय था कि अंबरीश जैसे न जाने कितने लोग इस तरह ठगी का शिकार हुए होंगे. मामला गंभीर था, लिहाजा उन्होंने मुकदमा दर्ज कर के तत्काल काररवाई करने के निर्देश दिए. एसएसपी के निर्देश पर अंबरीश की तरफ से पल्लवपुरम थाने में ठगी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. अंबरीश ने जिन खातों में पैसा जमा किया था उन की और उन मोबाइल नंबरों की डिटेल्स थानाप्रभारी सतेंद्र प्रकाश को उपलब्ध करा दी, जिन पर उन की बात होती रही थी.

मामला चूंकि साइबर क्राइम का था लिहाजा एसपी (सिटी) आलोक प्रियदर्शी व सीओ (क्राइम) ज्ञानवती देवी के निर्देश पर यह केस साइबर सेल को स्थानांतरित कर दिया गया. साइबर सेल के प्रभारी कर्मवीर सिंह ने अपने साथी पुलिसकर्मियों सोनू कुमार, उमेश वर्मा, कपिल कुमार, विजय कुमार व केस के जांच अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी के साथ मामले की जांच शुरू कर दी.

पुलिस बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी करने वालों तक आसानी से पहुंच सकती थी, लिहाजा इसी दिशा में जांच आगे बढ़ाई गई. जिन खातों के जरिए पैसे लिए गए थे, उन में एक खाता गाजियाबाद जिले की बैंक शाखा में किसी हरलीन कौर के नाम पर था.

पुलिस टीम गाजियाबाद पहुंची और हरलीन का पता हासिल करने के साथ ही खाते की डिटेल्स भी प्राप्त कर ली. हरलीन के खाते में लाखों के लेनदेन का ब्यौरा दर्ज था. इस से यह बात साफ हो गई कि यह रैकेट बड़े पैमाने पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था.

पुलिस ने उन सभी मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स और पते हासिल कर लिए जिन से अंबरीश को फोन किए जाते थे. हालांकि ऐसे सभी नंबर बंद हो चुके थे. ये सभी नंबर फरजी आईडी पर लिए गए थे, लेकिन जिन मोबाइल हैंडसेट में वे नंबर इस्तेमाल हुए थे, उन पर अब दूसरे नंबर चल रहे थे. सर्विलांस की मदद से पुलिस ने ऐसे सभी नंबरों का इस्तेमाल करने वालों का ब्यौरा हासिल कर लिया.

6 जनवरी, 2017 को पुलिस टीम गाजियाबाद जा पहुंची. सादे कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मी राजनगर स्थित एक औफिस में पहुंचे. वहां कई युवक व एक युवती काम कर रहे थे. उन के अंदर दाखिल होते ही कुरसी पर बैठे एक युवक ने पूछा, ‘‘कहिए?’’

‘‘हमें आप के बौस से मिलना है?’’ एक पुलिस अफसर ने कहा.

‘‘क्या काम है?’’

‘‘काम बड़ा है, इसलिए हम उन्हें ही बताएंगे. वैसे क्या नाम है आप के बौस का?’’

‘‘जी, शमशेर सर.’’

कुछ ही देर में उस युवक ने उन लोगों को एक केबिन में भेज दिया. अंदर बैठे एक युवक ने रिवौल्विंग चेयर पर झूलते हुए पूछा, ‘‘बताइए, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’

‘‘हमें अपने रुपए वापस चाहिए.’’

‘‘मतलब?’’ वह चौंका.

‘‘हम मेरठ से आए हैं और अंबरीश के रिश्तेदार हैं. बीमा पौलिसी का रुपया है, इतना तो आप समझ ही गए होंगे.’’ यह सुन कर उस युवक को बिजली जैसा झटका लगा. वह उन्हें अर्थपूर्ण नजरों से देखने लगा. उस के चेहरे का रंग उड़ा हुआ सा नजर आ रहा था.

‘‘मैं कुछ समझा नहीं…’’ उस ने अंजान बनने का नाटक किया.

‘‘हमारे साथ चलिए, हम सब समझा देंगे.’’ कहने के साथ ही पुलिस ने उसे और वहां मौजूद उस के साथियों को हिरासत में ले लिया. इस बीच वर्दीधारी पुलिसकर्मी भी वहां आ गए थे.

औपचारिक पूछताछ में पुलिस ने सभी के नामपते मालूम किए. उन की बातों से यह साफ हो गया था कि वे लोग ठगी की कंपनी चला रहे थे. गिरफ्तार लोगों में शमशेर उर्फ बबलू, पंकज धरेजा, राज सिंघानिया, सुधांशु उर्फ रोहित, अजय शर्मा व हरलीन कौर शामिल थे. इन में शमशेर दिल्ली के मालवीय नगर, पंकज फरीदाबाद, हरियाणा और अन्य सभी गाजियाबाद के रहने वाले थे. पुलिस ने मौके से कई लैपटौप, 7 मोबाइल फोन, बैंकों की पासबुक, चैकबुक, कई एटीएम कार्ड और अन्य कई दस्तावेज बरामद किए.

पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर के मेरठ ले आई और उन से विस्तार से पूछताछ की. पूछताछ में एक ऐसे गिरोह की कहानी निकल कर सामने आई जो बीमा कराने वाले लोगों को सपने दिखा कर ठगी का गोरखधंधा कर रहा था. एक दसवीं पास युवक ने अपने साथियों के साथ मिल कर सपनों का ऐसा जाल बुना कि उस में कई लोग फंस गए.

दरअसल, शमशेर उर्फ बबलू महज 10वीं पास युवक था. समाज में ऐसे युवाओं की कोई कमी नहीं है, जो आधुनिकता की चकाचौंध से प्रभावित हो कर सोचने लगते हैं कि वे थोड़ी कोशिश करें तो बहुत कम समय में सफलताओं की इमारत खड़ी कर सकते हैं. उन की चाहत होती है कि उन के पास सभी भौतिक सुविधाएं और ढेर सारी दौलत हो. महत्त्वाकांक्षाओं की हवाएं जब दिलोदिमाग में सनसनाती हैं तो सोच खुदबखुद बदल जाती है. सोच की यह चाहत उन्हें इसलिए बुरी नहीं लगती, क्योंकि इसी के चलते उन्हें ख्वाबों में कल्पनाओं के खूबसूरत महल नजर आने लगते हैं.

शमशेर भी कुछ ऐसी ही सोच का शिकार था. उस का ख्वाब था कि किसी भी तरह उस के पास इतनी दौलत हो कि जिंदगी ऐशोआराम से बीते. वक्त के दरिया में तैराकी करते हुए उस ने दिनरात बहुत दिमाग दौड़ाया. यह अलग बात थी कि उसे कुछ समझ नहीं आया. नौकरी के लिए भी उस ने कई जगह हाथपैर मारे.

जब उसे मनमुताबिक नौकरी नहीं मिली तो उस ने एक फाइनैंस कंपनी में बतौर क्लर्क नौकरी शुरू कर दी. यह कंपनी लोगों को बैंकों से लोन दिलाने का काम करती थी. इस के बदले वह उन लोगों से तयशुदा कमीशन लेती थी, जिन का लोन पास कराया जाता था. दरअसल, यह कंपनी लोगों को सपने दिखा कर ठगती थी. कुछ समय शमशेर ने एक बीमा कंपनी में भी नौकरी की.

शमशेर को ठगी की राह आसान लगी. उस ने कुछ ऐसा ही करने की ठान ली और नौकरी छोड़ दी. इंसान जैसा होता है, उसे वैसे ही लोग भी मिल जाते हैं. शमशेर ने इस मुद्दे पर कुछ दोस्तों से बात की तो उन लोगों ने बीमा पौलिसी कराने वाले लोगों को ठगने की योजना बनाई.

उस ने अपने साथी आशीष, सुमित, दिनेश, संजू चौहान के साथ मिल कर बीमा एजेंटों को लालच दे कर कुछ बीमा पौलिसी धारकों का ब्यौरा हासिल किया. इस के बाद वे उन्हें फोन कर के लालच के जाल में फंसाते और अपने खातों में पैसा जमा करा लेते. उन्हें कामयाबी मिली तो उन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

बाद में उन्होंने अपने साथी राज सिंघानिया, पंकज धरेजा, सुधांशु, अजय व हरलीन कौर को भी अपने साथ जोड़ लिया. सभी महत्त्वाकांक्षी थे और करोड़पति बनने का सपना संजोए हुए थे. इन में पंकज ने बीकौम व हरलीन ने बीटेक की शिक्षा हासिल की हुई थी. जबकि बाकी सभी 10वीं या 12वीं तक पढ़े थे. राज सिंघानिया खुद भी बीमा एजेंट था.

खास बात यह भी थी कि सुमित व दिनेश एक ऐसी कंपनी में नौकरी कर चुके थे, जिस के पास एक दरजन से ज्यादा पौलिसी करने वाली कंपनियां जुड़ी हुई थीं. इन लोगों ने शातिराना अंदाज में वहां से डाटा चोरी कर लिया.

शुरुआत में गिरोह की ठगी का शिकार हुए लोगों ने ठगी की शिकायत पुलिस से नहीं की तो उन के हौसले बढ़ गए. उन्हें लगा कि देश में लोगों को लालच दे कर ठगने का काम सब से आसान है. उन्होंने गाजियाबाद में अपना औफिस बना लिया. साथ ही फरजी पतों पर कई मोबाइल नंबर हासिल कर लिए. फिर वे फोन कर के अपने शिकार से बेहद लुभावनी बातें करते और उन्हें दिन में ही उन के ही पैसे से  जिंदगी को जन्नत बनाने के सुनहरे ख्वाब दिखाते. स्वार्थसिद्धि के लिए उन की बातें व योजनाएं इतनी लच्छेदार होती थीं कि अच्छेभले आदमी की सोच कुंद हो जाए.

उन का ठगी का धंधा चल निकला. उन का शिकार हुआ जो व्यक्ति अपनी रकम वापस पाने के लिए फोन कर के परेशान करता था, उस नंबर को वे हमेशा के लिए बंद कर देते थे. ऐसा कर के उन्हें मोबाइल नंबरों से पकड़े जाने का डर नहीं रहता था. कई बीमा पौलिसी धारक ऐसे भी होते थे जो 2 नंबर की रकम से मोटी पौलिसी खरीदते थे. भेद खुलने के डर से वे ठगी का शिकार हो कर भी चुप रह जाते थे. गिरोह के निशाने पर ऐसे लोग ही ज्यादा होते थे, जिन की पौलिसी लाखों में होती थी. इन ठगों ने खूब कमाई की. सभी लोग लग्जरी लाइफ जीते थे.

राज सिंघानिया जिस फ्लैट में रहता था, उस का किराया ही 20 हजार रुपए महीना था. इतना ही नहीं, वह अपने नौकर को 8 हजार रुपए महीना वेतन देता था. उस ने गाजियाबाद के पौश एरिया में अपना साइबर कैफे भी खोल लिया. दूसरी ओर शमशेर ने दिल्ली में भी अपना औफिस बना लिया. वह शानदार जिंदगी जीता था. शिकार बने लोगों का पैसा हरलीन के खाते में जमा कराया जाता था.

हरलीन कुल जमा रकम का 35 फीसदी कमीशन लेती थी. ठगी के खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज सिंघानिया के खाते में करीब एक साल में 4 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ था. इन लोगों का धंधा अनवरत चलता रहता, लेकिन अंबरीश ने शिकायत की तो इन की करतूतों का भंडाफोड़ हो गया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने लिखापढ़ी कर के सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानत नहीं हो सकी थी. पुलिस शेष आरोपियों की तलाश कर रही थी.     

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

महिलाएं इस तरह करती हैं दुकानों में चोरी, वायरल हुआ वीडियो

चोरी करना दुनिया की सबसे बुरी आदतों में से एक हैं. हमे हमेशा सिखाया जाता हैं की चोरी करना गलत हैं और काफी बुरी बात है. चोरी करने से आपको फायदा जरूर होगा, लेकिन चोरी चोरी होती है और अगर आपको पकड़ा गया तो आपको जेल हो सकती है.

कुछ लोग मजबूरी में चोरी करते हैं तो कुछ लोगों का चोरी करना उनका धंधा होता हैं. चोरी करने वालों की संख्या में आज कल महिलाएं ज्यादा बढ़ गयी हैं. महिलाओं पर कोई ज्यादा शक नहीं करता, लेकिन महिलाओं की संख्या चोरी के मामलें में ज्यादा हैं.

अब एक ऐसा वीडियो सामने आया हैं जिसमे महिला चोर चोरी करते हुए दिखाई गई हैं और इस वीडियो में अलग अलग कई चोरियां शामिल हैं.

इस वीडियो में अलग अलग दुकान के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटनाएं दिखाई गई हैं. ये महिला चोर कुछ ना कुछ चीज दुकान से उठाती हैं और अपने कपड़ों के अंदर छुपाती हैं और दुकान से बाहर निकल जाती हैं, जिससे किसी को ये शक भी नहीं होता की महिला के पास कुछ है. ये महिला अपनी साड़ी के अंदर चीज छुपाती हैं और दुकान से बाहर निकल जाती हैं.

ये महिलाएं काफी चालाक होती हैं और सभी के सामने ऐसा बर्ताव करती हैं जिससे किसी को उन पर शक ना हो. ये महिलाएं भारी सी भारी चीज को चोरी करकर ले जाती हैं.

आप भी वीडियो देखे: 

आप भी हैं ईपीएफ खाता धारक तो जान लें ये जरुरी बातें

कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड (EPF) यानि कर्मचारी भविष्य निधि सरकारी और गैर सरकारी नौकरीपेशा लोगों के लिए महत्वपूर्ण जमा खाता है. पेंशन का लाभ अधिकांश नौकरियों में नहीं ही मिलता है और इसलिए रिटायरमेंट के बाद यह किसी भी शख्स के लिए बेहद जरूरी निवेश साबित होता है जिसमें वह नौकरी के वर्षों में अंशदान करता है. पीएफ से जुड़ी ये जानकारियां आपको मालूम होंगी लेकिन हाल के दिनों में हुए कुछ बदलाव हुए हैं जिनके बारे में आपको न पता हो तो आइए एक नजर डाल लें.

कितना होता अंशदान

पीएफ में अंशदान न केवल कर्मचारी द्वारा किया जाता है बल्कि एक मद नियोक्ता द्वारा भी जमा करवाया जाता है. ईपीएफ में से 8.33 फीसदी अंशदान पेंशन में जाता है और बाकी की राशि पीएफ में जाती है. ईपीएफ से पेंशन 58 साल की उम्र से मिलती है. पीएफ का पैसा बीमारी का इलाज, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर निकाल सकते हैं.

कब निकाल सकते हैं पीएफ

अगर दो महीने से बेरोजगार हैं तो पीएफ से पैसे निकाल सकते हैं. पीएफ खाता खोलने के 5 साल के अंदर पैसे निकालने पर टैक्स लगता है.

आधार हुआ जरूरी

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अपने लगभग 4 करोड़ अंशधारकों के लिये आधार संख्या जमा करने की तारीख बढ़ाकर 30 अप्रैल 2017 कर दी है. इससे पहले ईपीएफओ (EPFO) ने आधार संख्या जमा करने की समयसीमा 31 मार्च 2017 तय की थी.

रिटायरमेंट के वक्त पीएफ खाता धारक को मिलेंगे 50 हजार रुपए

पीएफ (PF) के वे अंशधारक जो 20 साल या इससे अधिक समय तक अंशदान करते रहेंगे, उन्हें रिटायरमेंट के वक्त 50000 रुपए अतिरिक्त रकम (जिसे बोनस भी कह सकते हैं) मिलेगा. इसे शुरू में दो सालों के लिए प्रायोगिक आधार पर शुरू किया जाएगा और बाद में इसकी समीक्षा की जाएगी.

कैसे मिलेगा लाभ

50 हजार रुपए का लाभ 20 साल से कम समय तक खाताधारक बने रहने पर इस अपवाद के तहत मिलेगा यदि आप एक अंशधारक के तौर पर आजीवन अक्षमता या दिव्यांगता का शिकार हो गये हो.

यूएएन के जरिए पता करें पीएफ जमा राशि

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसमें जमा पैसे को रिटायरमेंट तक न ही निकाला जाए. वैसे आपके पीएफ अकाउंट में कितने पैसे जमा हैं और यह नियमित रूप से जमा हो रहे या नहीं, जैसी तमाम जानकारियों के लिए आपको कोई लंबी चौड़ी कोशिश करने की जरूरत नहीं है. आप भविष्य निधि खाते में कितनी रकम है, यह इंटरनेट पर ईपीएफओ की वेबसाइट पर लॉग इन करके भी कर सकते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपके पास यूएएन यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर हो.

पावर बैंक खरीदने से पहले जरूर जानें ये बातें

कई बार ऐसा होता है कि आप कहीं घूमने गए हैं और आपके फोन की बैटरी खत्म हो गई. ऐसे में पावर बैंक की कमी खलती है. इस समस्या का हल करने के लिए यदि अब पावरबैंक खरीदने का सोच रहे हैं, तो उससे पहले जरूर जान लें ये बातें.

पावर बैंक की कैपेसिटी

पावर बैंक खरीदते समय सबसे पहले आपको ये देखना होता है कि उसकी कैपेसिटी कितनी है. यहां कैपेसिटी का मतलब पावर बैंक के mAh से है. यह भी चेक करें कि पावर बैंक से निकलने वाला आउटपुट वोल्टेज आपके फोन के लिए उचित है या नहीं. यदि आउटपुट वोल्टेज फोन के चार्जिंग से कम है तो फोन चार्ज नहीं होगा. यदि आपके फोन की बैटरी 1,500mAh की है तो आपको 3,000mAh या इससे ज्यादा पावर का पावर बैंक खरीदना चाहिए.

क्वालिटी और सेफ्टी

पावर बैंक खरीदते समय उसकी क्वालिटी का पूरा ख्याल रखें. जैसे वह कितनी जल्दी फोन को चार्ज करता है और चार्चिंग कितनी देर चलती है, क्योंकि खराब क्वालिटी के पावर बैंक आपके फोन को भी खराब कर सकते हैं.

USB चार्जिंग ऑप्शन

पावर बैंक की सबसे बड़ी खासियत ये होती है उसमें चार्जिंग के लिए कई सारे पोर्ट हों. यानी कई सारे फोन चार्ज हो सकें. पावर बैंक में कई टाइप के कनेक्टर पोर्ट होने चाहिए जिससे मोबाइल और टैबलेट चार्ज हो सके.

पावर बैंक का पावर सप्लाई

इस बात का ख्याल रखें कि आप जो पावर बैंक खरीद रहे हैं वह कितने एंपीयर का पावर सप्लाई करता है. यदि आपके फोन को 2.1 amps पावर की जरूरत है तो आपको 2.1 amps या इससे ज्यादा पावर का पावर बैंक खरीदना चाहिए.

LED इंडिकेटर

पावर बैंक में LED इंडिकेटर का होना बहुत जरूरी है. इससे पता चलता है कि बैटरी लेवल कितनी है और पावर बैंक कितना चार्ज हो चुका है. इसलिए एलईडी इंडिकेटर वाला ही पावर बैंक खरीदें.

ब्रांडेड पावर बैंक

पावर बैंक जब भी खरीदें तो ब्रांडेड ही खरीदें. इसका फायदा आपको ये होगा कि आपको पावर बैंक में बैटरी और चार्जिंग सर्किट बेहतर मिलेंगे, क्योंकि आपके फोन की कीमत पावर बैंक से कहीं ज्यादा है.

अब सनी के बेटे करण की नैया पार लगाएंगे दिनेश विजन

बौलीवुड में बहुत तेजी से उतर चढ़ाव होते रहते हैं. इस उतार चढ़ाव में यदि इंसान जरा सा भी चूक जाए तो उसे जीवन भर पछताना पड़ता है. शायद इसी उधेड़बुन में सनी देओल की हालत खराब है. सनी देओल पिछले पांच सालों से अपने बेटे करण देओल के फिल्मी करियर की शुरूआत कराने के लिए प्रयासरत हैं. अब तक सनी देओल की जिद रही है कि वह खुद ही अपने बेटे की पहली फिल्म का निर्माण व निर्देशन करेंगे. इसी के चलते उन्होने अपने कई दोस्त निर्माताओं के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि वे उनके बेटे करण देओल को लांच करें. पर सनी देओल की अपनी होम प्रोडक्शन कंपनी ‘‘विजेता फिल्म्स’’ की लगभग सभी फिल्मों के लगातार असफल होने की वजह से बात बन नहीं रही थी.

सनी देओल ने बेटे के करियर को संवारने के मुद्दे पर हार नहीं मानी और फिल्म ‘‘पल पल दिल के पास’’ बनाने की घोषणा की है. इस फिल्म में करण के सामने हीरोईन चुनने के लिए सनी देओल ने छह माह से ज्यादा का समय लगाकर देश भर में 200 लड़कियों का ऑडीशन लेकर 48 लड़कियों का चयन कर मुंबई बुलाया. मुंबई में इन 48 लड़कियो के लुक टेस्ट वगैरह लेने के बाद शिमला की 18 वर्षीय साहेर बम्बा को चुना. सूत्रों का दावा है कि ‘पल पल दिल के पास’ की कुछ दिन मनाली में शूटिंग भी हुई, पर फिर ये मामला कहां गड़बड़ा गया, पता ही नहीं चला.

वहीं दूसरी तरफ सनी देओल ने ‘विजेता फिल्मस’ के ही बैनर तले मराठी भाषा की सुपर हिट फिल्म ‘‘पोस्टर बॉय’’ का हिंदी में रीमेक शुरू किया, जिसमें सनी देओल, बॉबी देओल और धर्मेंद्र ने भी अभिनय किया है, मगर यह फिल्म शूटिंग पूरी होने के बाद रूक गयी है. इसकी वजह भी अब तक किसी को नहीं पता.

इन सारी खबरों के बीच अब नई खबर ये आ रही है कि सनी देओल ने अपने बेटे करण को दूसरे फिल्मकारों की फिल्में करने की छूट दे दी है. इसी के चलते अब करण देओल ने फिल्म ‘‘राब्ता’’ के निर्माता व निर्देशक दिनेश विजन की कंपनी की नई फिल्म अनुबंधित की है, जिसका निर्देशन ‘जन्नत’ व ‘जन्नत 2’ जैसी फिल्मों के निर्देशक कुणाल देशमुख करने वाले हैं.

इस खबर के आने के बाद बौलीवुड में खबरें गर्म हैं कि क्या अब ‘‘पल पल दिल के पास’’ नही बनेगी? तो कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अपने बेटे करण देओल को खुद ही बौलीवुड में उतारने का सनी का सपना अधूरा रह जाएगा? या सनी देओल हर हाल में अपने बेटे के साथ पहले ‘पल पल दिल के पास’ को ही सिनेमाघरो में ले जाएंगे? यदि ऐसा हुआ तो क्या फिल्म ‘‘पल पल दिल के पास’’ के प्रदर्शन तक दिनेश विजन अपनी कंपनी की, करण देओल के अभिनय से सजी फिल्म को प्रदर्शित नहीं कर पाएंगे? इन सवालो का जवाब अभी तक किसी के भी पास नहीं है. अब देखना ये है कि इन मसलों पर भविष्य में क्या नई बात उभर कर आती है.

आईपीएल 10 में इन नए चेहरों का है बोलबाला

हर साल की तरह आईपीएल 10 में भी बड़े-बड़े और महंगे क्रिकेटरों पर बातें हो रही है, लेकिन इन बड़े नामों के बीच कुछ स्थानीय क्रिकेटर आईपीएल के जरिए अपनी प्रतिभा को पहचान दे रहे हैं.

आईपीएल के हर सीजन में क्रिकेट जगत को कुछ नए सितारे मिलते हैं. खासतौर पर टीम इंडिया में नए खिलाड़ियों की एंट्री के लिए रणजी की तरह ही आईपीएल को तवज्जो दी जाने लगी है. ऐसे में आईपीएल में खिलाड़ियों का प्रदर्शन उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की दिशा भी तय करता है.

यूं तो आईपएल के 10 सालों के सफर में कई स्थानीय क्रिकेटर हीरो की तरह उभर कर सामने आए हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्होंने अपनी पहचान बनाई है. आईपीएल 10 में भी ऐसे कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिनका नाम शायद आपने पहले ही कभी सुना हो. तो आईए जानें, इस आईपीएल सीजन में किन नए प्लेयर्स ने दिखाया दम.

ऋषभ पंत (दिल्ली डेयरडेविल्स)

पिता की मौत के बाद खेले मैच में 57 रन की पारी खेलने के बाद चर्चा में आए ऋषभ पंत ने अपने खेल से बताया है कि वह लंबी दूरी तय करने वाले हैं. कोलकाता के खिलाफ 16 गेंदों में 38 रन की पारी हो या फिर पुणे से मुकाबले में 22 गेंदों पर 31 रन बनाने की बात हो, पंत ने यह साबित किया है कि वह भारतीय क्रिकेट में एक स्टार के तौर पर उभर रहे हैं.

नीतीश राणा (मुंबई इंडियंस)

मध्यक्रम के इस 22 वर्षीय बल्लेबाज ने अपने बेहतरीन शॉट चयन और अच्छे खेल से क्रिकेट दिग्गजों को हैरान किया है. दिल्ली के इस लड़के ने अपनी टीम के लिए दो बार (सनराइजर्स हैदराबाद और किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ) मैच जिताऊ पारियां खेली हैं. 135 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए राणा ने निरंतरता और गति दोनों का शानगार मिश्रण दिखाया है.

मनन वोहरा (किंग्स इलेवन पंजाब)

आईपीएल 2017 में एक स्टार के रूप में उभरने की सारी प्रतिभा मनन वोहरा में दिखाई पड़ रही है. अब तक मनन 6 पारियों में 176 रन बना चुके हैं. सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ बनाये गये उनके 95 रन अब तक का उनका अधिकतम स्कोर है. यानी अब तक मनन यह दिखा चुके हैं कि वह एक आक्रामक बल्लेबाज हैं और जब चाहें रन गति को बढ़ा सकते हैं. अभी आईपीएल 2017 का लंबा सफर बचा है और यदि मनन इस गति से रन बनाते रहे तो उन्हें स्थानीय से राष्ट्रीय हीरो बनने में वक्त नहीं लगेगा.

राहुल त्रिपाठी (राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स)

पुणे ने 26 वर्षीय राहुल त्रिपाठी को महज 10 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन उन्होंने अपनी कीमत से कहीं ज्यादा कीमती खेल दिखाया है. सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 41 गेंदों में 59 रन और मुंबई इंडियंस के खिलाफ 31 गेंदों में 45 रन बनाकर त्रिपाठी ने खुद को साबित किया है. त्रिपाठी को लेटबूमर कहा जा रहा है.

संजू सैमसन (दिल्ली डेयरडेविल्स)

सिर्फ 22 साल के संजू सैमसन पहली बार आईपीएल नहीं खेल रहे. पिछले सीजन में भी उन्होंने खुद को साबित किया है. पुणे सुपरजायंट्स के खिलाफ 63 गेंदों में 102 रन की उनकी पारी भविष्य में उन्हें टीम इंडिया के नियमित प्लेयर के तौर पर स्थापित होने का मौका दे सकती है. इस सीजन में उन्होंने केकेआर और सनराइजर्स के खिलाफ बेहतरीन बैटिंग की.

मनन वोहरा (किंग्स इलेवन पंजाब)

सैमसन की ही तरह मनन वोहरा भी अपनी टीम के लिए भरोसेमंद साबित हुए हैं. उन्हें आईपीएल की देन कहा जा सकता है. किंग्स इलेवन पंजाब के लिए वह धुआंधार सलामी बल्लेबाज साबित हुए हैं. सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 23 वर्षीय वोहरा ने 50 गेंदों पर 95 रन की पारी खेलकर अपने इरादे जाहिए किए थे.

क्या बदल रहे हैं मोहन भागवत

आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ फिल्म और फैशन की बहुत समर्थक नहीं रही है. कई बार वह इसके विरोध में भी खड़ी होती रही है. ऐसे में संघ प्रमुख मोहन भागवत का सिनेमा के अवार्ड फंक्शन में जाना और वहां पर आमिर खान को अवार्ड देना दिखता है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कुछ बदल रहे हैं. आमिर खान के असहिष्णुता के बयान को को लेकर कुछ समय पहले संघ और उससे जुड़े संगठन बहुत नाराज थे. इन लोगों ने आमिर खान को देश छोड़ कर चले जाने का बयान तक दे डाला था. जब मोहन भागवत के हाथों आमिर खान को अवार्ड मिला तो उस वक्त पूरा नजारा बदला सा दिख रहा था. खुद आमिर खान कभी अवार्ड समारोह में नहीं जाते पर यहां आकर उन्होंने अपने पिछले रिकार्ड को तोड़ा है.

आमतौर पर संघ प्रमुख को ऐसे फिल्मी कार्यक्रमों में नहीं देखा जाता. संघ प्रमुख मोहन भागवत के यहां आने और अवार्ड लेने वाले लोगों को अवार्ड देने की पीछे की खास वजह भी है. यह अवार्ड फंक्शन भारत रत्न मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने अपने पिता मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की स्मृति में किया था. दीनानाथ मंगेशकर हिन्दू महासभा और संघ के स्वंयसेवक थे. ऐसे में संघ प्रमुख को इसमें अवार्ड देने के लिये बुलाया गया था. वैसे तो यह अवार्ड क्रिकेटर कपिल देव और वैजयंती माला को भी मिला पर चर्चा में आमिर खान ज्यादा रहे.

चर्चा की एक वजह यह भी है कि अखबारों के फिल्मी पन्ने पर किसी संघ प्रमुख को अवार्ड देते पहले नहीं देखा गया. संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन मानता है. ऐसे में यह बहुत चर्चा का विषय नहीं है. संघ खुद ही अपने को इस तरह की गतिविधियों से दूर रखता है. इसलिये संघ प्रमुख मोहन भगवत के इसमें हिस्सा लेने से चर्चा होने लगी. चर्चा का सबसे बड़ा कारण आमिर खान और उनका एक वर्ग द्वारा किया गया विरोध भी था. लता मंगेशकर ने अपने पिता और संघ के बीच संबधों को बता कर यह जता दिया कि संघ प्रमुख के वहां आने की वजह पूरी फिल्मी नहीं थी.

संघ प्रमुख मोहन भागवत को उदारवादी सोच को बढ़ावा देने वाला माना जाता है. वह संघ को हर क्षेत्र में विस्तार देना चाहते हैं. राजनीति में किसी से परहेज न रखने की नीति के फलस्वरूप ही भाजपा ने अलग दलों से तालमेल और बाहरी नेताओं को पार्टी में शामिल करने का काम किया. यही नहीं मोहन भागवत की अपनी नीति के कारण ही संघ चुनावी तैयारियों से लेकर चुनाव में प्रचार प्रसार तक में मजबूती से भाजपा का साथ देता दिख रहा है. जिससे भाजपा को पूरे देश में काम करने और अपने प्रसार का मौका मिला सका है.

आज जहां दूसरे दलों के संगठन टूट रहे है वहीं पर संघ अपने मजबूत संगठन की ढाल लेकर भाजपा के साथ खड़ा है. जानकार लोग मानते हैं कि संघ की विस्तारवादी नीति का प्रभाव भाजपा पर भी पड़ेगा. भाजपा में संघ का दखल पहले के मुकाबले बढ़ेगा.             

 

64 साल की हुई अभिनेत्री मौसमी चटर्जी

बॉलीवुड में मौसमी चटर्जी को उन अभिनेत्रियों में शुमार किया जाता है जिन्होंने 70 और 80 के दशक में अपनी रूमानी अदाओं से दर्शकों को अपना दीवाना बनाये रखा था. मौसमी चटर्जी आज पूरे 66 साल की हो गई हैं. उनका जन्म 26 अप्रैल 1953 को कोलकाता में हुआ और वे वहीं पली बढ़ीं.

हिन्दी सिनेमा की कई बेहतरीन फिल्में जैसे 'अंगूर', 'मंजिल' और 'रोटी कपड़ा और मकान' अभिनेत्री मौसमी चटर्जी के नाम हैं. मौसमी ने राजेश खन्ना, शशि कपूर, जीतेंद्र, संजीव कुमार, विनोद मेहरा और अमिताभ बच्चन जैसे, उस समय के दिग्गज कलाकारों के साथ काम भी किया है. हम आपको बता दें कि आजकल मौसमी चटर्जी कोलकाता में रह रहीं हैं और कुछ बंगाली फिल्में कर रही हैं और एक अच्छी स्क्रिप्ट आने पर वे बॉलीवुड फिल्में करने को भी तैयार हैं.

चौदह साल की उम्र में मौसमी चटर्जी फिल्मी दुनिया में आईं

26 अप्रैल 1953 को कोलकाता में जन्मी मौसमी चटर्जी ने अपने अभिनय जीवन की शुरूआत साल 1967 में प्रदर्शित बंगला फिल्म ‘बालिका वधु’ से की. उनकी यह फिल्म टिकट खिडक़ी पर सुपरहिट साबित हुई. उस समय मौसमी की उम्र केवल 14 साल थी, लेकिन उन्हें अपना नाम बदलना पड़ा. इस फिल्म के निर्देशक तरुण मजूमदार ने कहा कि इंदिरा से ज्यादा उन पर मौसमी नाम सूट करेगा और इस तरह मौसमी चटर्जी फिल्मी दुनिया में आ गई और चौदह साल की उम्र में इंदिरा बालिका वधु बन गईं. इस दौरान पांचवीं कक्षा में पढ़ती थीं इंदिरा चटर्जी.

बॉलीवुड में करियर की शुरूआत

बॉलीवुड में मौसमी चटर्जी ने अपने करियर की शुरूआत साल 1972 में अभिनेता विनोद मेहरा के विपरीत प्रदर्शित फिल्म ‘अनुराग’ से की. शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अनुराग’ में मौसमी चटर्जी ने अंधी लडक़ी का किरदार निभाया था. करियर की शुरूआत में इस तरह का किरदार किसी भी नयी अभिनेत्री के लिये जोखिम भरा हो सकता था लेकिन मौसमी ने अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस फिल्म के लिये मौसमी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से नामांकित किया गया था.

फिल्म ‘अनुराग’ में मौसमी ने अंधी लड़की की भूमिका इतने सशक्त ढंग से निभाई कि उस साल की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार उन्हें दिया गया. इस फिल्म के सभी गाने भी खासे खूब लोकप्रिय हुए थे और इस तरह मौसमी के सफल करियर का यह सिलसिला चल निकला.

बिना ग्लिसरीन के ही रो पड़ती थी मौसमी

मौसमी चटर्जी के बारे में कहा जाता था कि वो रोने वाले दृश्य बड़े ही सरलता के साथ कर लेती थीं और इसके लिए उन्हें ग्लीसरीन की भी जरूरत नहीं पड़ती थी. मौसमी के अनुसार जब किसी दृश्य में उन्हें रोना होता था तो वे सोचती थी कि ये उनके साथ सच में हो रहा है और वे रो पड़ती थी.

मौसमी का फिल्मी सफर

मौसमी ने उस दौर के लगभग सभी बड़े अभिनेताओं के साथ, कई प्रमुख फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘रोटी, कपड़ा और मकान’, ‘उधार की जिंदगी’, ‘मंजिल’, ‘बेनाम’, ‘जहरीले इंसान’, ‘हमशक्ल’, ‘सबसे बड़ा रुपैया’ और ‘स्वयंवर’ जैसी उल्लेखनीय फिल्में हैं.

फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के लिये मौसमी चटर्जी को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार का नामांकन मिला था. साल 1976 में प्रदर्शित हुई सुपरहिट फिल्म ‘सबसे बड़ा रुपैया’ में एक बार फिर से मौसमी चटर्जी और विनोद मेहरा की जोड़ी को काफी पसंद कियी गया.

हम आपको बता दें कि साल 1982 में रिलीज हुई गुलजार की फिल्म ‘अंगूर’ ने बहुत बड़ी सफलता हासिल की थी. यों तो उश समय इस फिल्म की सफलता का पूरा श्रेय संजीव कुमार और देवेन वर्मा को मिला था लेकिन मौसमी चटर्जी ‘अंगूर’ में काम करके बेहद खुश हुई थीं.

मौसमी चटर्जी के पूरे फिल्मी करियर में उनकी जोड़ी सबसे अधिक विनोद मेहरा के साथ पसंद की गयी. इसके अलावा उन्होंने संजीव कुमार, जीतेन्द्र, राजेश खन्ना, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन जैसे सुपर सितारों के साथ भी काम किया.

उन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा कई बंगला फिल्मों में भी अपने अभिनय का जौहर दिखाया है. उनकी कुछ अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में कच्चे धागे, जहरीला इंसान, स्वर्ग नरक, फूल खिले है गुलशन गुलशन, मांग भरो सजना, ज्योति बने ज्वाला, दासी, अंगूर, घर एक मंदिर, घायल, संतान, जल्लाद, करीब, जिंदगी रॉक्स आदि शामिल है.

साल 2010 में अर्पणा सेन ने अपनी फिल्म ‘द जैपनीज वाइफ’ में मौसमी को एक महत्वपूर्ण भूमिका दी थी और इसी फिल्म से मौसमी ने बॉलीवुड में वापसी की थी.

मौसमी का  विवाह

मौसमी जितनी कम उम्र में परदे पर आई, उतनी ही कम उम्र में उनका विवाह भी हो गया था. उश समय के प्रसिद्ध गायक हेमंत कुमार ने अपने बेटे जयंत के लिए मौसमी का हाथ मांगा. विवाह समारोह और मुंबई में आयोजित पार्टी में फिल्मों के काफी लोग जुटे थे. सभी को उस अभिनेत्री को देखने की उत्सुकता थी, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म के जरिए पूरे बंगाल का दिल जीत लिया था.

मौसमी चटर्जी बहुत ही मशहूर अभिनेत्री थीं. फैंस इन्हें हर जगह घेरे रखते थे. कभी भी उनके फैंस द्वारा कोई बुरा बर्ताव देखने को नहीं मिला. वे जहां भी गई लोगों ने उन्हें बहुत प्यार और सम्मान दिया.हाल ही में मौसमी चटर्जी को बंगाल सिने आर्टिस्ट द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया.

ये है पेट्रोल की असली कीमत

आपको पेट्रोल की असली किमत के बारे में पता है, अगर नहीं तो चलिए आज हम आपको बताते हैं. हम आपको बताते हैं कि पेट्रोल पर सरकार क्या-क्या टैक्स लगाती है. लेकिन इससे पहले मुंबई में पेट्रोल की कीमत के बारे में जानते हैं. अब मुंबई में पेट्रोल की कीमत 77.50 रुपये प्रति लीटर है. अभी के डॉलर एक्सचेंज रेट और कच्चे तेल की कीमत को देखते हुए तेल कंपनियां 29.54 रुपये प्रति लीटर में पेट्रोल ले रही हैं.

लेकिन मुंबई के उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत 77.50 रुपये प्रति लीटर हो जाती है. इस पर ग्राहकों को 47.96 रुपये प्रति लीटर का टैक्स देना पड़ रहा है. मुंबई में पेट्रोल की कीमत अब देश में सबसे अधिक हो गई है. दरअसल राज्य सरकार ने वैट के साथ 3 रुपये का सूखा उपकर (ड्रॉट सेस) लगाया है.

ऑयल कंपनियां रिफाइनरियों से 26.86 रुपये प्रति लीटर में तेल खरीदती हैं. इसके बाद ऑयल कंपनियों का तेल की मार्केटिंग में 2.68 रुपये प्रति लीटर का खर्च आता है. 21.48 रुपये प्रति लीटर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है. मुंबई के लिए 1.10 रुपये की चुंगी लगती है. इसके अलावा .20 रुपये का खर्च कंपनी ने डीलर तक पहुंचने में आता है. यह सबकुछ मिलाकर एक लीटर पेट्रोल की कीमत 52.32 रुपये हो जाती है.

इसके बाद 52.32 रुपये पर 26 फीसदी का वैट लगता है और 9 रुपये का टैक्स अलग से लगता है. एक लीटर पेट्रोल पर डीलर का कमीशन 2.58 रुपये होता है. यह सब मिलाकर अब मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 77.50 रुपये हो जाती है. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मुंबई में पेट्रोल पर 153 फीसदी टैक्स वसूलती हैं.

वहीं दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 68.26 रुपये है. वहीं भारत के करीबी देशों में पेट्रोल की कीमत देखें तो पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 43.68 रुपये है. श्रीलंका में 50.95 रुपये प्रति लीटर है. नेपाल में 64.24 रुपये प्रति लीटर है. बांग्लादेश में 70.82 रुपये प्रति लीटर है. 

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