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‘कटप्पा’ और बाहुबली की ‘मां’ का रोमांस करते वीडियो हुआ वायरल

इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म बाहुबली-2 रिलीज हो गई है. रिलीज के साथ ही फिल्म कमाई के नए रिकॉर्ड कायम कर रही है. फिल्म देखने के लिए लोग इतने क्रेजी हैं कि सिर्फ पांच दिनों में ही इस फिल्म ने आमिर खान की दंगल और पीके को पीछे छोड़ दिया है.

लोग बाहुबली -2  का दो सालों से सिर्फ इसलिए इंतजार कर रहे थे क्योंकि वो जानना चाहते थे कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा. फिल्म का पहला पार्ट अगर आप ने देखा होगा तो, आपको बाहुबली और भल्लादेव के अलावा कटप्पा और शिवगामी का किरदार जरूर पसंद आया होगा.

फिल्म में जहां शिवगामी की करेक्टर में राम्या कृष्णन एक महारानी की भूमिका निभा रही हैं, वहीं कटप्पा बने एक्टर सत्यराज एक ऐसे गुलाम सेवक के रोल में हैं, जो राजघराने के आदेश के साथ बंधा हुआ है. दोनों ही करेक्टर अपने आप में दमदार हैं, जिनके बिना फिल्म की कल्पना नहीं की जा सकती है.

बाहुबली-2 फिल्म में जहां बाहुबली कटप्पा को मामा पुकारता नजर आता है, वहीं कटप्पा शिवगामी को मां कह कर संबोधित करता है. दोनों एक्टर्स ने अपनी भूमिका पूरे दमखम से निभायी है.

शिवगामी और कटप्पा के करेक्टर ऑडियंस के मन में ऐसे रच-बस गये हैं कि दोनों को एक साथ किसी और रोल में देखना अचरजभरा हो सकता है. इसी बीच इन दोनों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. एक ऐडफिल्म के इस वीडियो में दोनों को शाही पति-पत्नी के किरदार में देखना काफी दिलचस्प है. बताते चलें कि तमिल भाषा में बना यह ऐड एक टेक्सटाइल ब्रांड का है. इसमें ‘शिवगामी’ और ‘कटप्पा’ की केमिस्ट्री को काफी पसंद किया जा रहा है.

आपको बता दें कि कि ‘कटप्पा’ यानी सत्यराज कुछ साल पहले से इस टेक्सटाइल ब्रांड से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर इसके ऐड में नजर आ चुके हैं. लेकिन ‘बाहुबली’ की सफलता को कैश करने के इरादे से टेक्सटाइल ब्रांड कंपनी ने ने ‘कटप्पा’ के साथ ‘शिवगामी’ की जोड़ी बनायी है.

फिल्म “मॉम” में कुछ ऐसा होगा नवाज का अंदाज

नवाजुद्दीन सिद्दकी जल्द ही श्रीदेवी की फिल्म 'मॉम' में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उनके किरदार की काफी चर्चा थी और लुक देख कर लग रहा है कि वह जायज भी थी. फिल्म से नवाज का लुक रिलीज कर दिया गया है.

नवाज ने ट्विटर पर अपना लुक रिवील करते हुए लिखा, 'चीजें जो दिखती हैं वह होती नहीं हैं. रूप भ्रामक भी हो सकते हैं.' नवाज अपने हर किरदार में ढल जाने के लिए जाने जाते हैं. उन्हें इस लुक में पहचान पाना काफी मुश्किल है. तस्वीर में वह आधे गंजे और चश्मा लगाए नजर आ रहे हैं. ऐसा पहली बार होगा जब नवाज इस तरह के किरदार में दिखेंगे.

फिल्म के बारे में नवाज ने कहा था कि इस लुक को फाइनल करने में फिल्म के डायरेक्टर रवि उदयवर को 15 दिन लगे थे. पहले फिल्म का किरदार सोचा जाता है लेकिन 'मॉम' के लिए पहले लुक पर चर्चा हुई थी. इस लुक में नकली बॉडी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया था जिसे लगाने और हटाने में तकरीबन तीन घंटे का समय लगता था.

श्रीदेवी और नवाजुद्दीन सिद्दकी की ये फिल्म 7 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. दोनों के अलावा फिल्म में अक्षय खन्ना भी मुख्य भूमिका में हैं.

ATM रखने वाले हर व्यक्ति के लिए है ये VIDEO, वरना ऐसे ही चोरी होते रहेंगे आपके पैसे

आपने ATM चोरी की कई घटनाये सुनी होंगी, जिसमे लाखों की लूट होती है. आये दिन कोई न कोई नया तरीका आता है एटीएम से पैसे लूटने का. हम आपको आज जो वीडियो दिखा रहे है, वो हर एटीएम रखने वाले शख्स के लिए है, क्योंकि इस वीडियो में चोर चुद बता रहा है कैसे करते हैं चोरी.

आपको बता दे की ये वीडियो हर ATM होल्डर के लिए देखना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इस वीडियो को देख कर आप भी सतर्क हो जायेंगे. इस वीडियो में एक चोर का बताया गया तरीका है, पकड़े जाने पर चोर ने खुद ही पूरा तरीका बता दिया की कैसे वो एटीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ करके पैसे लूटते थे.

आप भी देखें इस शातिर चोर का तरीका :-   

कैसा है रेंटल इनकम का आइडिया?

कई निवेशक किराए को आमदनी का अहम स्रोत मानते हैं. किराया दरअसल इन्फ्लेशन एडजस्टेड होता है. हालांकि फ्री मार्केट में ज्यादातर दूसरी इनकम के साथ भी ऐसा ही है. बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज महंगाई के साथ घटता-बढ़ता रहता है, जैसे कि रेंट. हालांकि ज्यादातर मार्केट्स में रेंट में सालाना आधार पर बदलाव होता है.

सवाल ये है कि क्या केवल रेंट पर देने के लिए दूसरा मकान खरीदना ठीक है? अगर इन बातों पर गौर किया जाए तो शेयर खरीदने में एनालिस्ट्स कंपनी के मैनेजमेंट पर ध्यान देने को कहते हैं. बॉन्ड्स के मामले में क्रेडिट रेटिंग अहम होती है. प्रॉपर्टी में लोकेशन सबसे अहम है. हम आपको बता देना चाहते हैं कि हर प्रॉपर्टी से अच्छी रेंटल इनकम नहीं मिलती. लोग अपनी अधिकांश बचत का इस्तेमाल कर बड़ा घर बनवाते हैं.

आपने अक्सर देखा होगा कि कई निवेशकों ने अपने फ्लैट कंपनियों को सर्विस्ड अपार्टमेंट के रूप में आउटसोर्स कर दिए हैं. बुनियादी सुविधाओं पर शुरुआती निवेश के बाद मेंटेनेंस और मैनेजमेंट पर रनिंग इनवेस्टमेंट के साथ इन अपार्टमेंट्स में ऑक्युपेंसी रेट अच्छा रहता है, बशर्ते लोकेशन अच्छी हो.

सवाल यह है कि किराए के लिहाज से निवेशकों को प्रॉपर्टी के मामले में किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

1. ब्रोकरों के जरिए लंबी अवधि की लीज पर प्रॉपर्टी को देकर बेहतर आमदनी का जरिया बनाया जा सकता है. इस मामले में भी हालांकि कुछ महीनों का रेंट एक किरायेदार के जाने और दूसरे के आने के बीच की अवधि और ब्रोकर के कमीशन की भेंट चढ़ जाएगा. जिन मार्केट्स में हाउसिंग लोन आसानी से मिल रहे हैं, वहां मकान खरीदने वालों की औसत उम्र घट रही है. यह देखना जरूरी है कि जहां आप रेंटल इनकम के लिए प्रॉपर्टी खरीदने वाले हैं, वहां क्या रेंटर्स का ऐसा अच्छा मार्केट है, जो खरीदने के बजाय रेंट पर रहने को तवज्जो दें. कमर्शियल प्रॉपर्टी अगर ठीक जगह पर हो रेंटल इनकम देने में रेजिडेंशियल से बेहतर रहती है.

2. प्रॉपर्टी की देखभाल का खर्च हर साल बढ़ता है. तीसरी बात यह है कि किसी हॉलिडे होम में इनवेस्टमेंट बड़ा अलग सा दिखता तो है, लेकिन ऐसी प्रॉपर्टीज में मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है. सुपर रिच लोग तो अपने हॉलिडे होम्स को सुरक्षित और साफ रखने के लिए पैसा झोंक सकते हैं, लेकिन दूसरे लोगों को रेंटल से मिलने वाली इनकम पर यह खर्च भारी पड़ सकता है.

3. वीआरबीओ और एयरबीएनबी जैसी सर्विसेज भी लोगों को इनकम पाने का मौका देती हैं, लेकिन वे गेस्ट्स को दी जाने वाली सुविधाओं के स्टैंडर्ड को लेकर काफी सख्त होती हैं. कुछ खराब ऑनलाइन रिव्यू किसी भी प्रॉपर्टी को हॉलिडे रेंटल मार्केट से बाहर कर सकते हैं.

4. ज्यादातर बायर प्रॉपर्टी के दाम की तुलना महंगाई के असर को ध्यान में रखे बिना करते हैं. अगर 15 साल पहले 20 लाख रुपये में खरीदी गई प्रॉपर्टी आज एक करोड़ रुपये की है तो यह भी देखें कि उस वक्त फैमिली की इनकम क्या थी और अब क्या है? अगर बायर तब 4 लाख रुपये सालाना कमा रहा था और अब 50 लाख रुपये की उसकी आमदनी है तो उसकी स्थिति बेहतर है.

सलाना कमाई के पर्सेंटेज के रूप में देखें तो 15 साल के मुकाबले आज प्रॉपर्टी उसके लिए ज्यादा सस्ती है. आज के रेंट की तुलना प्रॉपर्टी की आज की कीमत से करें, तब आपको पता चलेगा कि उस एसेट में कितनी संपत्ति आपने लगाई है और कितनी इनकम उससे हो रही है.

पुराने बैंक अकाउंट से हो सकता हैं नुकसान जल्द कराएं बंद

अगर आप के नाम पर एक से ज्‍यादा पुराने बैंक अकाउंट चल रहे हैं जिन में आप पैसे का ट्रांजैक्‍शन नहीं कर रहे हैं तो आप अलर्ट हो जाएं. बेहतर है कि आप ऐसे बैंक अकाउंट को बंद करा दें. वरना आपको पैसों के नुकसान के अलावा कई दूसरी दिक्‍कतों का सामना भी करना पड़ सकता है.

पुराने सैलरी अकाउंट पर लगेगा चार्ज

अगर आपने नौकरी बदली है और नई कंपनी ने आपका सैलरी अकाउंट दूसरे बैंक में खुलवा दिया है तो आपका पुराना सैलरी अकाउंट 3 से 6 माह में सेविंग अकाउंट में बदल जाएगा. सेविंग अकाउंट में आपको मिनिमम बैलेंस रखना होता है. अगर आप अकाउट में मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करते हैं तो बैंक आपके अकाउंट से पैसे काटने लगता है. अकाउंट में पैसे न होने पर आपका बैलेंस नेगटिव में चला जाता है और बैंक से आपके रिश्‍ते खराब हो सकते हैं. अगर इसी बैंक में आपको दोबारा अकाउंट खुलवाना है तो पुराना अकाउंट बंद करवाए बिना आप नया अकाउंट नही खुलवा पाएंगे.

कई बैंक अकाउंट मेन्‍टेन करने में पैसों का नुकसान

ज्‍यादातर बैंक अकाउंट में एवरेज मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी होता है. अगर आप तीन से चार बैंक अकाउंट मेन्‍टेन कर रहे हैं तो आपको इन अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना होगा. ऐसे में आपको पैसों का नुकसान होगा. आप इस पैसे को एफडी और दूसरी जगह पर लगा कर ज्‍याद ब्याज पा सकते हैं.

कार्ड पर देना होगा चार्ज

आपके हर बैंक अकाउंट पर आपको डेबिट कार्ड मिलता है. बैंक यह  कार्ड फ्री में नहीं देते हैं और इस कार्ड पर सालान फीस चार्ज करते हैं जो कि 200 रुपए से लेकर 500 रुपए सालाना तक हो सकती है. अगर आप को इन अकाउंट्स की जरूरत नहीं है तो कार्ड पर सालाना फीस का कोई मतलब नहीं है.

इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने में होगी दिक्‍कत

कई सारे बैंक अकाउंट होने से आपको इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने में भी दिक्‍कत का सामना करना पड़ सकता है. रिटर्न फाइल करने के समय सभी बैंकों से इन्‍फार्मेशन और स्‍टेटमेंट जुटाना एक कठिन काम साबित हो सकता है.

अकाउंट का हो सकता है मिसयूज            

ऐसा अकाउंट जिसका आप लंबे समय से यूज नहीं कर रहे हैं डॉरमैंट अकाउंट कहलाता है. ऐसे अकाउंट का मिसयूज भी हो सकता है. और आपको बिना किसी गलती के दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है.

आपके गैजट्स को साफ रखने में मदद करेंगी ये चीजें

टेक्नॉलजी के इस युग में आप नियमित रूप से बहुत सारे गैजट्स का इस्तेमाल हर रोज करते हैं. लगातार उपयोग करने से उन गैजट्स में फिंगरप्रिन्ट्स, डस्ट पार्टिकल्स जैसी बहुत सी चीजें लग जाती हैं, जिनकी वजह से फिर आगे गैजट्स ठीक से काम नहीं कर पाते.

हम आपको बता रहें हैं कुछ शानदार और बेहद सस्ती चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल करके आप अपने गैजट्स को क्लीन और सेफ रख सकते हैं. तो जानिए ऐसे कुछ बेहतरीन उपाय …

स्क्रीन वाइप्स

आप घर में टीवी, फोन, टैबलेट, लैपटॉप और कम्प्यूटर जैसी चीजें इस्तेमाल करते हैं. इनकी स्क्रीन पर डस्ट और धब्बे पड़ जाने की वजह से इनको इस्तेमाल करने का आपका अनुभव अच्छा नहीं रहता, इसलिए जरूरी है कि समय समय पर इनकी सफाई होती रहे.

आप स्क्रीन वाइप्स का इस्तेमाल करके अपनी स्क्रीन को साफ रख सकते हैं. आप मार्केट से मात्र 500 रुपए में वाइप्स का एक अच्छा बॉक्स खरीद सकते हैं. स्क्रीन वाइप्स एक विशेष प्रकार का फॉर्म्युलेटेड सलूशन होता है जो स्क्रीन को बहुत ही कम समय में साफ कर देता है.

स्क्रीन क्लीनिंग किट

डस्ट पार्टिकल्स के अलावा भी आपके टच स्क्रीन डिवाइसेज पर फिंगरप्रिंट और छोटे छोटे धब्बों जैसी बहुत सी परेशानियां आती हैं और किसी कपड़े या टिसु का इस्तेमाल करके इन्हें साफ करने से स्क्रीन पर छोटे छोटे स्क्रैच पड़ जाते हैं.

आप मात्र 150 रुपए में एक स्क्रीन क्लीनिंग किट खरीद सकते हैं. इस किट में माइक्रोफाइबर क्लॉथ के साथ स्क्रीन क्लीनिंग लिक्विड होता है, जिससे सभी प्रकार की स्क्रीन्स को आसानी से साफ किया जा सकता है. ध्यान रखें कि पैक पर दिए गए निर्देशों का ठीक प्रकार से पालन हो.

एयर ब्लोअर्स

कम्प्यूटर कैबिनेट के अन्दर बहुत तरह के फालतू के कॉम्पोनेंट्स चले जाते हैं. यहां तक कि अगर आपका कैबिनेट पूरी तरह से बंद है फिर भी डस्ट पार्टिकल्स उसमें चले जाते हैं जिनकी वजह से आपका कम्प्यूटर ठीक से काम नहीं करता है.

आप 300 से 800 रुपए तक में एक अच्छा एयर ब्लोअर खरीद सकते हैं. इसकी मदद से आप बेहद आसानी से अपने कैबिनेट से डस्ट निकाल सकते हैं. इसका इस्तेमाल करते समय अपनी आंख, नाक और मुंह को ढ़ककर रखना बेहतर होगा. साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इसे मदरबोर्ड के ज्यादा नजदीक ना ले जाया जाए.

सीपीयू के साथ साथ आप एयर ब्लोअर्स का इस्तेमाल करके सेट टॉप बॉक्स, की-बोर्ड, ऐंप्लिफायर्स, मेगिंग कंसोल्स और मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर्स को भी साफ कर सकते हैं.

कैमरा ब्लोअर

किसी भी कैमरे का इमेज सेंसर उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. अच्छी फोटोज के लिए इमेज सेंसर का साफ होना बेहद जरूरी है. इमेज सेंसर पर डस्ट पार्टिकल्स के आ जाने से इमेज पर धब्बे पड़ जाते हैं. बार बार लेंस बदल कर इस्तेमाल करने से भी इमेज सेंसर पर डस्ट आ जाती है.

कुछ डीएसएलआर इनबिल्ट सेंसर क्लीनिंग सिस्टम के साथ आते हैं लेकिन वे हमेशा प्रभावी नहीं रहते. आप कैमरा ब्लोअर का इस्तेमाल करके आसानी से इमेज सेंसर की सफाई कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें कि ब्लोअर का नोजल इमेज सेंसर को टच न करे. आप मात्र 300 रुपए में एक अच्छा इमेज ब्लोअर खरीद सकते हैं.

लेंसपेन

अपने कैमरे के लेंस को साफ रखने के लिए हर कैमरा ओनर को अपने पास लेंसपेन रखना चाहिए. यह एक हैंडी टूल है. इसका इस्तेमाल डीएसएलआर के साथ साथ सीडी और स्मार्टफोन के कैमरे के लेंस को साफ करने के लिए भी किया जा सकता है. इसमें दिया गया ब्रश, लेंस के साथ साथ लेंस की बॉडी को भी साफ करता है.

लेंसपेन का इस्तेमाल करके टेलिस्कोप्स और माइक्रोस्कोप्स के लेंस को भी साफ किया जा सकता है. बेहतर क्लीनिंग के लिए इसे सेंटर से बाहर की ओर सर्कुलर मोशन में मूव करें. एक अच्छा लेंसपेन 300 रुपए के आसपास मिल जाता है.

साइबर क्लीन

साइबर क्लीन एक क्लीनिंग कंपाउंड है जिसका इस्तेमाल करके आप 99.9% हार्मफुल जर्म्स को खत्म कर सकते हैं. जेली की तरह लगने वाले इस मटीरियल से आप की-बोर्ड और मोबाइल कीपैड की सफाई भी कर सकते हैं.

सबसे खास बात सह है कि इस मटीरियल का इस्तेमाल करने के बावजूद आपके हाथ पूरी तरह से साफ रहते हैं. 300 रुपए में इसका एक पैकेट खरीदा जा सकता है.

कम्प्रेस्ड एयर कैन्स

अगर आप एयर ब्लोअर नहीं खरीदना चाहते हैं तो कम्प्रेस्ड एयर कैन आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह एक स्प्रे पेंट के बॉक्स के जैसा दिखाई देता है. आप इसे मात्र 300 रुपए में खरीद सकते हैं.

आईपीएल 10 : हेलमेट ने बचाई इस क्रिकेटर की जान

क्रिकेट मैदान पर चोट लगना तो आम बात है. लेकिन इन चोटों का हादसों में बदल जाना वाकई में दिल दहला देने वाला होता है. इन हादसों को देख क्रिकेटर्स तो परेशान होते ही हैं साथ ही इसका असर दर्शक, फैन्स और खेल पर भी पड़ता है.

दरअसल आईपीएल 10 में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने सभी का दिल दहला दिया. कोलकाता नाइट राइडर्स और राइजिंग पुणे सुपरजायंट के बीच खेले गये 41वें मुकाबले के दौरान कुछ ऐसा हुआ जो सांसे रोकने वाला था. गेंदबाज की बाउंसर बॉल पर गेंद सीधा हेलमेट पर जाकर लगी और चोट लगने से बच गई.

कोलकाता की पारी के दौरान 18वें ओवर में जब पुणे की डेनियल क्रिस्टियन गेंदबाजी कर रहे थे तो आखिरी गेंद पर उन्होंने बाउंसर डाली जो कि सीधा नॉथन कॉल्टर नाइल के हेलमेट पर जाकर लगी. जिसके बाद उन्होंने जल्द ही अपना हेलमेट उतारा और अपने आप पर काबू पाया. इस दौरान पुणे के सभी खिलाड़ी उनके पास आ गये.

आपको बता दें कि टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए केकेआर की टीम ने 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 155 रन बनाए और पुणे सुपरजायंट को जीत के लिए 156 रनों का लक्ष्य दिया.156 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स की टीम ने 19.2 ओवर में 6 विकेट खोकर 158 रन बना लिए और केकेआर को 4 विकेट से हरा कर लगातार तीसरी जीत दर्ज की है.

पुणे की ओर से राहुल त्रिपाठी ने शानदार 93 रन बनाए. पिछले सात मैचों में पुणे की ये छठी जीत है और इस जीत के साथ ही वो प्वाइंट्स टेबल में तीसरी पोजिशन पर आ गई है. राहुल त्रिपाठी को उनकी शानदार 52 गेंदों में 93 रनों की पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया.

सेंसर बोर्ड के साथ ट्रिब्यूनल ने भी बैन की फिल्म ‘गेम ऑफ अयोध्या’

इन दिनों देश के राजनीतिक गलियारों, अदालतों के साथ साथ बौलीवुड में भी अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थान पर राममंदिर के निर्माण का ही मुद्दा छाया हुआ है. ऐसे  समय में ही अयोध्या से जुड़ी दो फिल्मों के बैन का मसला भी चर्चा में हैं.

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो कुछ हुआ, उस पर पूरी यथार्थपरक रोशनी डालकर उससे वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराने के नाम पर बनी निर्देशक देव पाण्डे की, खेसारीलाल व काजल राघवानी अभिनीत भोजपुरी फिल्म ‘‘बाबरी मस्जिद’’ को सेंसर बोर्ड पहले ही बैन कर चुका है और अब सुनील सिंह निर्देशित हिंदी फिल्म ‘‘गेम ऑफ अयोध्या’’ भी बैन हो गयी है. ‘‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ द्वारा ‘गेम ऑफ अयोध्या’ को सेंसर प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिए जाने से अब यह फिल्मं सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं की जा सकती. ‘सेंट्ल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टीफिकेशन’ ने फिल्म के कंटेंट पर भी सवाल उठाया है.

‘‘सरोज इंटरटेनमेंट प्रा.लिमिटेड’’ के बैनर तले बनी निर्माता रचना सिंह व कार्यकारी निर्माता भूषण अग्रवाल तथा निर्देशक सुनील सिंह की फिल्म ‘‘गेम ऑफ अयोध्या’’ एक पत्रकार की प्रेम कहानी के साथ अयोध्या मसले पर उसने 25 साल पहले जो रिपोर्टिंग के वक्त गलती की थी, उसे सुधारते हुए सच को लोगों के सामने रखने की कहानी है. फिल्म में 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कुछ राजनेताओं की मौजूदगी में कार सेवकों ने जो कृत्य किया था, उसका चित्रण करने के साथ ही अयोध्या घटनाक्रम पर गठित लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर तथ्य पेश किए गए हैं. फिल्म में कुछ पुराने वीडियो भी जोडे़ गए हैं.

‘‘सेंट्ल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ ने इस उत्तरप्रदेश राज्य के साथ ही पूरे देश में वैमनस्यता फैलाने के साथ ही अयोध्या विवाद के गहराने की आशंका के साथ इस फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिया. ‘‘सेंट्ल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ ने निर्माता को सूचित करते हुए लिखा है- ‘‘यह फिल्म मंदिर मस्जिद के विवादास्पद मुद्दे को भड़काने का काम कर सकती है. फिल्म का फिल्मांकन इस अंदाज में किया गया है, जिससे धार्मिक उन्माद फैल सकता है. इस फिल्म में कई संवाद व दृश्य ऐसे हैं, जिनसे सांप्रदायिक सौहाद्र बिगड़ सकता है. शांति भंग हो सकती है. एकता को नुकसान हो सकता है. राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर आंच आ सकती है, यदि इस फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी,तो इससे सिनेमैटोग्राफ एक्ट की कई गाइड लाइन्स का उल्लंघन होगा.’’

इसके बाद निर्माता ने सेंसर प्रमाण पत्र के लिए ‘‘फिल्म सर्टीफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल’’ में अपील की, जहां ‘एफसीएटी’ के चेअरमैन अवकाश प्राप्त न्यायाधीश मनमोहन सरीन की अध्यक्षता में एक कमेटी ने फिल्म ‘‘गेम आफ अयोध्या’’ को देखकर समीक्षा करते हुए बैन करने का आदेश दिया. ट्रिब्यूनल के अनुसार फिल्म एक प्रेम कहानी है, मगर इसमें राम मंदिर व बबारी मस्जिद के ढहाए जाने को लेकर काफी कुछ कहा गया है. फिल्म में राजनेताओं द्वारा उठाए गए कदम के अलावा उस वक्त की सरकार को लेकर भी बात की गयी है, पर फिल्म में वर्णित तमाम तथ्य ‘सब जुडिस’ हैं, ये कुछ विवादास्पद तथ्य है.’’

सेंसर बोर्ड और एफसीएट द्वारा फिल्म ‘गेम ऑफ अयोध्या’ को बैन किए जाने के बाद अपनी  फिल्म का बचाव करते हुए फिल्म के निर्देशक सुनील सिंह कहते हैं -‘‘हमने इस फिल्म को एक अच्छे मकसद के साथ बनाया है. हमारा मकसद है आज की पीढ़ी के सामने हर तथ्य को सही अर्थो में पेश करना. हमारी फिल्म ऑफबीट सिनेमा और मेनस्ट्रीम सिनेमा का मिश्रण है. यह एक हिंदू लड़के व मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी है, जिसमें बिछुड़ना और फिर मिलना भी है. एक मुस्लिम लड़की और हिंदू लड़के की प्रेम कहानी का चित्रण कर हम समाज को बांटने की बनिस्बत समाज को एकता के सूत्र में बांधने, सामाजिक सौहार्द को बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. फिल्म में गलत तथ्यों को नहीं पेश किया गया है. हमने काल्पनिक कहानी नहीं गढ़ी है, बल्कि जो सत्य व यथार्थ है, उसे ही फिल्म का हिस्सा बनाया है. राजनेताओं से संबंधित जो दृश्य फिल्म में हैं, वे सभी दृष्य हमने ‘फिल्म्स डिवीजन’ से मांग कर जोड़े हैं. हम चाहते हैं कि 6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद ढहाई गयी, उस वक्त जो बच्चे 5-6 साल के थे, वे सत्य नहीं जानते हैं. पर अब वह 25-30 साल के हो रहे हैं, तो उन्हें सत्य पता होना चाहिए.’’

फिल्म के कार्यकारी निर्माता भूषण अग्रवाल कहते हैं- ‘‘यह सरकारी प्रोपगेंडा वाली फिल्म नहीं है. बल्कि एक हिंदू लड़के व मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी है. हमारी पूरी फिल्म ‘द लिब्रहान अयोध्या कमीशन ऑफ इंक्वायरी’ की जो रिपोर्ट है, उस पर आधारित है. इस फिल्म में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद जो पूरे देश में अफरातफरी मची, उस पर रोशनी डालती है. हिंसा के खिलाफ खडे़ होने वाले हीरो की कहानी है. हर फिल्म में एक्शन और कॉमेडी हो यह जरूरी तो नही है. कई बार सच को भी लोग देखना पसंद करते हैं. हमें यकीन है कि हमारी फिल्म जल्द दर्शकों तक पहुंचेगी.’’

अपनी फिल्म ‘‘गेम ऑफ अयोध्या’’ को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए दृढ़ संकल्प रखने वाले फिल्म के निर्देशक सुनील सिंह आगे कहते हैं- ‘‘हम अपनी फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं. इसके लिए हम प्रयासरत हैं. सेंसर बोर्ड और एफसीएट यानि कि ट्ब्यिूनल से फिल्म को बैन किए जाने के बाद अब हम हाईकोर्ट जाने वाले हैं और जरूरत पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे. हमने अपनी फिल्म में भी कहा है कि- ‘इस फिल्म को बनाने के पीछे हमारा मकसद लोगों के सामने सत्य को पेश कर समाज में वैमनस्यता पैदा करना नही हैं. हम तो चाहते हैं कि हम सभी एक जुट होकर इस देश के विकास के लिए काम करें.’

हमने अपनी फिल्म को अयोध्या में हर संभव वास्तविक लोकेशन पर फिल्माने की कोशिश की है. कुछ दृश्य हमने फिल्म्स डिवीजन से ले कर फिल्म में जोडे़ हैं. जब हम अयोध्या में शूटिंग कर रहे थे, उस वक्त भी हम इस बात को लेकर सचेत थे कि कोई विवाद ना पैदा हो. लोगों में गलतफहमी न फैले, इसलिए उस वक्त हमने अपनी इस फिल्म का नाम ‘गेम ऑफ पावर’ रखा था. फिल्म के क्लैप बोर्ड पर यही नाम था. शूटिंग के दौरान भारी संख्या में आम लोग जमा हो रहे थे, तो हमने अपने कलाकारों को समझाया था कि वे अपने संवाद धीमी आवाज में ही कहें, जिससे उन्हें शूटिंग देखने आए लोग ना समझ पाए. यह सब करने के पीछे हमारा एकमात्र मकसद यही रहा कि राज्य या देश की शांति व एकता भंग ना हो. हमारा दावा है कि हमारी फिल्म ‘गेम ऑफ अयोध्या’ हर हाल में लोगों में प्यार व एकता की भावना ही पैदा करेगी.’’ 

जब आपस में टकराए एक ही टीम के दो खिलाड़ी

कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) के खिलाफ 2017 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 41वें मैच में राइजिंग पुणे सुपरजायंट (आरपीएस) के कप्तान स्टीव स्मिथ और ऑलराउंडर बेन स्टोक्स के बीच कैच लपकने के चक्कर में जोरदार टक्कर हुई.

कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर खेले गए मुकाबले में केकेआर की पारी का 19वां ओवर चल रहा था. जयदेव उनाडकट यह ओवर कर रहे थे. स्ट्राइक पर नाथन कोल्टर नाइल थे. ओवर की पांचवीं गेंद पर नाइल ने डीप मिडविकेट की दिशा में हवाई शॉट खेला.

स्टोक्स डीप स्क्वायर लेग से जबकि स्मिथ लॉन्गऑन की तरफ से दौड़ते हुए कैच लेने गए. स्टोक्स नजदीक थे, लिहाजा उन्होंने कैच लेने का प्रयास किया. स्मिथ बहुत तेजी से गेंद की दिशा में बढ़ रहे थे और स्टोक्स को कैच लेता देखने के बाद वो खुद को रोक नहीं सके. ऑस्ट्रेलियाई कप्तान तभी स्टोक्स से टकराए और नीचे गिर गए. बल्लेबाज को छह रन भी मिल गए.

इस टक्कर के बाद स्टोक्स तो संभल गए, लेकिन स्टीव स्मिथ का सर विज्ञापन बोर्ड से जा टकराया. स्टीव कुछ पल के लिए औंधे होकर लेट गए. उन्हें लेटा देख, स्टोक्स ने डगआउट की ओर मदद के लिए इशारा किया. हालांकि स्टीव ने तुरंत थम्स अप का साइन दिखाकर संकेत दिया कि वह ठीक हैं और फिर उठ खड़े हुए.

इस बीच स्टीव का चेहरा देखकर लग रहा था, जैसे उनका सिर झन्ना गया हो. हालांकि इसके तुरंत बाद वह मैदान पर फील्डिंग करते दिखे और अपने नियमित बैटिंग क्रम पर आकर बल्लेबाजी भी की. हालांकि वह सिर्फ 9 रन ही बना पाए और क्रिस वोक्स की बॉल पर बोल्ड हो गए.

हालांकि, यह मुकाबला आरपीएस के लिए अच्छा रहा. कप्तान स्मिथ ने टॉस जीतकर पहले केकेआर को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया. मेजबान टीम ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 155 रन बनाए. जवाब में आरपीएस ने राहुल त्रिपाठी (93) की उम्दा पारी की बदौलत 4 गेंदें शेष रहते 4 विकेट से मैच जीत लिया.

जरूरत से ज्यादा सेक्सी थी हीरोइन, सरकार ने लगा दिया बैन

कंबोडिया की एक मॉडल को वहां की सरकार ने कुछ ज्यादा ही सेक्सी बताते हुए एक साल के लिए बैन कर दिया है. उन पर संस्कृति मंत्रालय के नियम ना मानने के आरोप हैं. ये मॉडल 24 साल की डेनी नॉन हैं. सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के चलते नॉन अब अगले 1 साल तक कैमरा के सामने नहीं आ सकेंगी. एक साल तक वो कोई फिल्म नहीं कर सकती हैं. नॉन ने इस बैन को गलत कहा है.

24 साल की डेनी नॉन को कंबोडिया की संस्कृति और आर्ट मिनिस्ट्री ने आचार संहिता का उल्लंघन के लिए बैन किया है. मंत्रालय के मुताबिक वो कुछ ज्यादा ही सेक्सी हैं और अंग प्रदर्शन करती हैं, जो कि देश के लिए ठीक नहीं है.

अभिनेत्री डेनी नॉन ने इस पर कहा है कि मुझे क्या पहनना है और क्या नहीं इसका फैसला करना आता है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी आजादी को स्वीकार नहीं करते. नॉन ने कहा कि इस मामले को लेकर संस्कृति मंत्रालय के लोगों ने उन्हें बुलाया था और क्या पहनना है ये भी बताया था लेकिन मेरा मानना है कि कपड़े पहनने किसी का निजी मामला है.

नॉन का कहना है कि मैं फिल्में तो छोड़िए फेसबुक पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए भी ध्यान रखूंगी कि मैं ज्यादा सेक्सी नहीं दिखूं लेकिन मैं अगर मैं हूं ही सेक्सी तो फिर क्या करूं. डेली मेल के मुताबिक, मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि नॉन को यह सजा दी गई है क्योंकि मिनिस्ट्री के साथ लिखित में उन्होंने कपड़ों और अंग प्रदर्शन को लेकर वादा किया था, जो उन्होंने तोड़ दिया.

नॉन का कहना है कि सरकार ने उनके साथ ज्यादती की है क्योंकि कंबोडिया में वो कोई अकेली अभिनेत्री नहीं हैं. उन्होंने कहा कि कुछ अभिनेत्री तो बेडरूम सीन भी खूब देती हैं लेकिन संस्कृति मंत्रालय ने उन पर ही बैन लगाया. नॉन बैन को औरतों की आजादी में तो दखल मानता ही हैं, इसे अपने करियर के लिए भी बुरा कह रही हैं. वो कहती हैं कि सालभर तक कैमरे से दूर रहना करियर को नुकसान कर सकता है.

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