Download App

BREAKING : 30 रुपये लीटर मिलेगा पेट्रोल..!

अभी देश में आम आदमी को जो सबसे बड़ी मार पड़ती है, वह पेट्रोल और डीजल के महंगा होने पर पड़ती है. लेकिन आज आप भले ही महंगा पेट्रोल खरीद रहे हो, लेकिन 5 साल बाद यह आपको 30 रुपये लीटर या उससे कम में मिल सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, नई तकनीकों के उभार के चलते ईंधन के तौर पर पेट्रोल पर दुनिया की निर्भरता कम होगी. इसके चलते पेट्रोल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिलेगी. अमेरिका के फ्यूचरिस्ट टोनी सेबा ने यह दावा किया है. टोनी ने ही कई साल पहले सोलर पावर की मांग में तेज इजाफे की भविष्यवाणी की थी. यह काफी हद तक सही साबित हुई है, जिस दौर में टोनी ने सोलर पावर की मांग बढ़ने का दावा किया था, उस वक्त आज की तुलना में कीमतें 10 गुना थीं.

टोनी के अनुसार सेल्फ ड्राइव कारों की तेजी से बढ़ती मांग के चलते ऑइल की डिमांड में जोरदार गिरावट आएगी और पेट्रोल के दाम 25 रुपये प्रति बैरल तक गिर सकते हैं. टोनी ने कहा, ‘2020-21 में ऑइल की डिमांड अपने पीक पर होगी. इसके बाद 10 सालों के भीतर तेल उत्पादन का आंकड़ा 100 मिलियन बैरल से 70 मिलियन बैरल तक पहुंच जाएगा. इसके चलते कच्चे तेल की कीमत तेजी से गिरते हुए 25 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाएगी.’

टोनी ने कहा कि लोग पुराने स्टाइल की कारों का इस्तेमाल करना बंद नहीं करेंगे. लेकिन इकॉनमी में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. ये इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में भी सस्ते होंगे और इन्हें चलाना भी आसान होगा.

गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने भी पिछले दिनों कहा था कि हम 2030 तक भारत में पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारों के ही संचालन पर विचार कर रहे हैं. यानी 15 साल बाद देश में डीजल और पेट्रोल कारों की बिक्री ही बंद हो जाएगी.

जीएसटी के फायदे जानते हैं आप!

1 जुलाई से देश में जीएसटी लागू होने वाला है. इसके साथ ही पूरे देश में एक टैक्स व्यवस्था हो जाएगी. हालांकि जीएसटी आने के बाद की तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है फिर भी लोगों को अभी पता नहीं है कि जीएसटी आने के बाद उन्हें किन-किन चीजों पर कम टैक्स देना होगा और किन चीजों की टैक्स की दरें बढ़ जाएंगी. तो चलिए आपकी इस परेशानी का भी हल निकाल देते हैं हम.

जीएसटी आने के बाद इन चीजों के घटेंगे दाम

1 जुलाई को पूरे देश में जीएसटी आने के बाद आपको ये चीजें पहले के मुकाबले सस्ती मिलेंगी.

स्मार्टफोन, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट और सीमेंट होंगे सस्ते

स्मार्टफोन पर एक्साइज ड्यूटी-वैट मिलाकर अभी कुल टैक्स करीब 13.5 फीसदी से ज्यादा हो जाता है जबकि जीएसटी के बाद स्मार्टफोन हैंडसेट पर 12 फीसदी की दर से ही टैक्स लगेगा. वहीं मोबाइल सर्विस पर जीएसटी की दर 18 फीसदी रखी गई है जबकि अभी सेस मिलाकर सर्विस टैक्स की दर 15 फीसदी है लेकिन सरकार का दावा है कि इससे आपका मोबाइल बिल नहीं बढ़ने वाला.

जीएसटी आने के बाद सीमेंट की एक बोरी पर सब टैक्स मिलाकर 28 फीसदी टैक्स लगेगा जो कि फिलहाल 31 फीसदी होता है.

जीएसटी के मुताबिक आयुर्वेदिक दवाओं समेत सभी दवाओं और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट पर 12 फीसदी की टैक्स दर रखी गई है जबकि अभी 13 फीसदी से भी ज्यादा के रेट से टैक्स लगता है.

पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामान और हवन सामग्री को जीएसटी की ‘निल’ कैटेगरी में डाला गया है यानी इस पर जीरो टैक्स लगेगा और ये चीजें आपको सस्ती मिलेंगी.

जीएसटी के बाद मनोरंजन, केबल और डीटीएच सर्विसेज पर टैक्स घटेगा

इन पर राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला एंटरटेनमेंट टैक्स जीएसटी में शामिल होगा. 1 जुलाई से प्रभावी होने जा रही जीएसटी सिस्टम के तहत एंटरटेनमेंट प्रोग्राम और सिनेमा हॉल में फिल्में 28 फीसदी टैक्स कैटेगरी में आएंगी. फिलहाल, राज्य सिनेमाघरों में फिल्मों दिखाने पर 100 फीसदी तक एंटरटेनमेंट टैक्स लगाते हैं. एंटरटेनमेंट सर्विसेज जीएसटी के तहत लो टैक्सेशन कैटेगरी में आएंगी.

जीएसटी की निचली दरों के लाभ के साथ ही सर्विस प्रोवाइडर इन पर इनपुट सर्विसेज के तहत जीएसटी में टैक्स क्रेडिट के भी हकदार होंगे. जीएसटी काउंसिल ने केबल टीवी और डायरेक्टटूहोम सर्विसेज पर 18 फीसदी टैक्स तय किया है.

फिलहाल इन पर राज्यों में 15 फीसदी सर्विस टैक्स के ऊपर 10 से 30 फीसदी तक एंटरटेनमेंट टैक्स लगाया जाता है. सर्कस, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य, ड्रामा जैसे कार्यक्रमों पर जीएसटी दर मूल्यानुसार 18 फीसदी रखी गई है.

ये भी होंगे सस्ते

चायपत्ती

चायपत्ती पर अभी तक 18 फीसदी टैक्स लगता है. जीएसटी लागू होने के बाद सिर्फ पांच फीसदी टैक्स लगेगा. मतलब 300 रुपये किलो वाली चायपत्ती 261 रुपये में मिल सकती है.

कार

छोटी पेट्रोल कार पर 31.5 फीसदी टैक्स लगता था जो अब घटकर 29 फीसदी हो गया है. यानी 5 लाख की कार 4 लाख 87 हजार रुपये की हो सकती है. वहीं, मझोली कार पर पहले 49 फीसदी टैक्स लगता था जो अब घटकर 31 फीसदी हो चुका है. एक अनुमान है कि 9 लाख की कार 7 लाख 38 हजार की हो जाएगी.

जीएसटी के बाद ये सर्विसेज होंगी महंगी

दिल्ली में थीम पार्क, वाटर पार्क या राइड्स वाले एम्यूजमेंट पार्क्स पर पहले 15 फीसदी सर्विस टैक्स लगता था जो बढ़कर 28 फीसदी हो जाएगा.

इन पर 15 फीसदी की जगह अब लगेगा 18 फीसदी टैक्स

हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, सॉफ्ट ङ्क्षड्रक्स, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वाटर, हेयर ऑयल, साबुन, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर और एकाउंट बुक, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर.

इन पर लगेगा सबसे ज्यादा 28 फीसदी टैक्स

चुइंगगम, गुड़, कोकोआ रहित चॉकलेट, पान मसाला, वातित जल, पेंट, डीओडरन्ट, शेविंग क्रीम, हेयर शैम्पू, डाइ, सनस्क्रीन, वॉलपेपर, सेरेमिक टाइल्स, वॉटर हीटर, डिशवॉशर, सिलाई मशीन, वॉशिंग मशीन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, शेवर्स, हेयर क्लिपर्स, ऑटोमोबाइल्स, मोटरसाइकल, निजी इस्तेमाल के लिए एयरक्राफ्ट और नौकाविहार को लग्जरी मानते हुए जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी का टैक्स लगाने का फैसला लिया है.

इनपर 15 फीसदी की जगह 28 फीसदी टैक्स

टीवी-फ्रिज, कस्टर्ड पाउडर, कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटोकॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घडिय़ां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैम्प, लाइट फिटिंग्स.

इनपर लगेगा 18 फीसदी टैक्स

फ्लेवर्ड रिफाइंड शुगर, पास्ता, कॉर्नफ्लेक्स, पेस्ट्रीज और केक, प्रिजर्व्ड वेजिटेबल्स, जैम, सॉस, सूप, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेज, मिनरल वॉटर, टिशू, लिफाफे, नोट बुक्स, स्टील प्रॉडक्ट्स, प्रिंटेड सर्किट्स, कैमरा, स्पीकर और मॉनिटर्स पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा.

इन पर 12 फीसदी टैक्स

नमकीन, भुजिया, बटर ऑयल, घी, मोबाइल फोन, ड्राईफ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, अगरबत्ती, कैंडल, टूथपाउडर, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायोगैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्राइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे, एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, साइकिल और इसके पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, लाईएश की ईंटें, कंघी.

इन चीजों पर लगेगा 12 फीसदी टैक्स

फ्रोजन मीट प्रॉडक्ट्स, बटर, पैकेज्ड ड्राई फ्रूट्स, ऐनिमल फैट, सॉस, फ्रूट जूस, भुजिया, नमकीन, आयुर्वेदिक दवाएं, टूथ पाउडर, अगरबत्ती, कलर बुक्स, पिक्चर बुक्स, छाता, सिलाई मशीन और सेल फोन जैसी जरूरी आइटम्स को 12 पर्सेंट के स्लैब में रखा गया है.

फोन की एक गलती से हैक हो सकता है आपका बैंक अकाउंट

डिजिटल और मोबाइल बैंकिंग ने बेशक आपका काम आसान कर दिया है, लेकिन इससे फ्रॉड की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं. यूजर्स अपना बैंक अकाउंट वर्चुअली किसी भी डिवाइस से खोल सकते हैं और यही काम हैकर्स भी करते हैं. ऐसे में अपने मोबाइल से की गई एक गलती से आपको भारी नुकसान उठाना पर सकता है.

मोबाइल बैंकिंग करते समय आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए. आज हम आपको ऐसी पांच बातों के बारे में बताते हैं जो सेफ मोबाइल बैंकिंग के लिए जरूरी है.

पब्लिक वाई-फाई का नहीं करें इस्तेमाल

कोई एप डाउनलोड करते समय या मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय पब्लिक इंटरनेट या वाई-फाई का इस्तेमाल ना करें. सबसे ज्यादा फिशिंग स्कैम आदि ऐसे ही पब्लिक इंटरनेट से आते हैं. अगर आपके फोन में बैंकिंग एप नहीं है और फिर भी फोन से आपको बैंकिंग का इस्तेमाल करना है तो ब्राउजर में जाकर लिंक टाइप करें. कभी किसी ईमेल के लिंक से एप या इंटरनेट बैंकिंग ना खोलें. मोबाइल बैंकिंग करते समय लॉक आइकन पर जरूर ध्यान दें कि ये आपके बैंक का ही साइन है या नहीं.

जरूर रखें ये ऐप

आप अगर मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं तो ध्यान रखिए कि आपके फोन में एंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर जैसा कोई ऐप आपके फोन में जरूर इंस्टॉल हो. ये एप स्मार्टफोन खो जाने की स्थिती में आपके फोन को लोकेट कर सकता है. आखिरी बार उसकी लोकेशन कहां रही है ये पता लगा सकता है. आप अपना जीमेल अकाउंट खोलकर उस एप के जरिए अपने साइलेंट फोन को रिंग मोड में डाल सकते हैं और अगर फोन नहीं मिल रहा है तो उसका सारा डेटा डिलीट कर सकते हैं. 

सिस्टम को करें अपडेट

वॉनाक्राई रैनसमवेयर के आने के बाद से विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने की सलाह दी गई. ऐसा ही मोबाइल के साथ भी होता है. अगर आपके फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम का या एप का नया अपडेट आ गया है तो उसे फौरन अपडेट कर लें. नई अपडेट्स के साथ सिक्योरिटी से जुड़े नए पैच आते हैं जिसे इंस्टॉल करना जरूरी है.

ईमेल और टेक्स्ट मैसेज का रखें ध्यान

ईमेल और टेक्स्ट मैसेज दिखने में भले ही बड़ा आसान सा लगता है पर ये नोटिफिकेशन आपको किसी भी फ्रॉड की जानकारी सही समय पर दे सकता है. मोबाइल फ्रॉड या ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड की जानकारी अगर आप तीन दिन के अंदर बैंक को नहीं देते हैं तो आपको लेट माना जाता है और इसके बाद मुआवजा मिलने में भी दिक्कत हो सकती है.

ऑथेंटिकेशन

ऑथेंटिकेशन प्रोसेस को आसान करने के लिए हम भले ही मोबाइल बैंकिंग में ऑटोफिल ऑप्शन कर लेते हैं, लेकिन ये करना सही नहीं है. ऑथेंटिकेशन थोड़ा आसान होना जरूरी है, लेकिन इतना भी नहीं कि उसके चक्कर में आपका मोबाइल बैंकिंग ऐप हमेशा लॉग इन ही रहे.

जब भी आप कोई साइट ब्राउज करते हैं उसकी कुकीज बनती हैं जो आपके हिसाब से साइट को सेट करने के लिए होती हैं. मतलब अगर आपने साइट पर किसी एक सेक्शन में ज्यादा समय लगाया है तो कुकीज के कारण वही सेक्शन आपको दूसरी बार साइट पर जाने पर सामने दिखेगा.

इस खिलाड़ी ने वनडे में लगाया पहला तिहरा शतक

आपने टेस्ट क्रिकेट में कई तिहरे शतक वाले बल्लेबाज देखें होंगे, लेकिन पाकिस्तान के एक 26 वर्षीय युवा बल्लेबाज ने यह कारनामा 50 ओवर के मैच में कर दिखाया है. पाकिस्तान में इंटर क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप के मुकाबले में 26 वर्षीय बिलाल इरशाद अहमद नाम के खिलाड़ी ने ताबड़तोड़ बैटिंग करते हुए इतिहास रच दिया.

50 ओवर के मैच में इस खिलाड़ी ने ट्रिपल सेंचुरी लगाने का कारनामा कर दिखाया. बिलाल ने महज 175 गेंदों पर 9 छक्के और 42 चौकों की मदद से नाबाद 320 रन बनाए.

पीसीबी फजल मोहम्मद इंटर क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप टूर्नामेंट में अल रहमान सीसी के खिलाफ खेलते हुए शहीद अलम बक्स क्रिकेट क्लब के खिलाड़ी बिलाल ने जाकिर हुसैन के साथ दूसरे विकेट के लिए 364 रनों की पार्टनरशिप की. इसकी बदौलत टीम ने 50 ओवर में 556 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. शहीद अलाम बक्स क्लब ने इस मैच को 411 रनों से जीता.

इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान के 98 जिलों की टीमें हिस्सा ले रही हैं. घरेलू क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए इस टूर्नामेंट को शुरू किया गया है, जिसमें कुल 2,836 क्लब के बीच 5 हजार से अधिक मैच खेले जाएंगे.

वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बात करें तो सर्वाधिक स्कोर का रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा के नाम है. उन्होंने 2014 में श्रीलंका के खिलाफ 264 रनों का स्कोर खड़ा किया था. इसके अलावा मार्टिन गुप्टिल, विरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल, सचिन तेंदुलकर डबल सेंचुरी लगा चुके हैं.

फिक्स था आईपीएल 10 का फाइनल मैच !

आईपीएल का 10वां सीजन खत्म हो चुका है. आईपीएल का फाइनल काफी रोमांचक था. मुंबई की टीम ने रोमांच से भरपूर फाइनल मुकाबले में पुणे को 1 रन से हराकर तीसरी बार आईपीएल चैंपियन बनी. मुंबई की टीम आईपीएल के खिताब को तीन बार जीतने वाली पहली टीम बन गई. लेकिन मुंबई की इस जीत का स्वाद फीका होता जा रहा है. क्योंकि कुछ लोगों का कहना है कि आईपीएल का फाइनल मैच फिक्स था.

आईपीएल फाइनल फिक्स होने के लगातार सवाल उठ रहे हैं. ट्विटर पर एक शख्स ने 9 ट्वीट किए जो फिक्स होने का संदेह और पैदा करता है.

इस शख्स ने मैच से पहले ही बता दिया था कि कौन पहले बैटिंग करेगा, कौन कितने रन बनाएगा और कौन चैंपियन बनेगा. मैच में बिलकुल वही हुआ जो ट्वीट किया गया. उसके बाद इस शख्स ने ट्वीट किया कि ये भविष्यवाणी थी.

इन 9 भविष्यवाणियों में से सारी सही भी निकलीं. 'क्रिकेट इनसाइडर' नाम के ट्विटर हैंडल से हुई इन 9 भविष्यवाणियों में से एक ये भी थी कि मुंबई की टीम 120-130 के बीच रन बनाकर आखिरी ओवर में मैच जीतेगी.

आप कहेंगे कि ये तो हो ही सकता है क्रिकेट में एक टीम हारती है और एक को जीत नसीब होती है, लेकिन ये भी बता देना कि जीतने वाली टीम 120-130 के बीच रन बनाएगी और इसके साथ ही साथ ये भी बता देना कि मैच आखिरी ओवर में खत्म होगा, चौंकाता है.

आईए आपको उन 9 ट्वीट्स के बारे में बताते हैं.

पहला ट्वीट

सबसे पहला ट्वीट यह था कि टॉस कोई भी टीम जीते, लेकिन पुणे की टीम पहले बॉलिंग ही करेगी. यानी अगर मुंबई टॉस जीतती है तो वो पहले बैटिंग चुनेगी और यदि पुणे जीतती है तो वो पहले बॉलिंग चुनेगी. हुआ भी यही, मुंबई ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया.

दूसरा ट्वीट

दूसरे ट्वीट में बताया कि मुंबई पहले बल्लेबाजी करते हुए 120 से 130 रन के बीच रन बनाएगा. मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 129 रन बनाए और पुणे को 130 रन का लक्ष्य दिया.

तीसरा ट्वीट

तीसरे ट्वीट में बता दिया गया कि मुंबई आखिरी ओवर में मैच जीतेगा और मैच में यही हुआ. मुंबई ने आखिरी ओवर की आखिरी बॉल पर मैच जीता. पुणे को आखिरी बॉल पर जीत के लिए 4 रन चाहिए थे, लेकिन उनके बैट्समैन 2 रन ही दौड़ सके थे.

चौथा ट्वीट

पार्थिव पटेल 10 रन के अंदर आउंट होंगे. मुंबई इंडियंस के विकेटकीपर और ओपनर बल्लेबाज सिर्फ 4 रन ही बना पाए और आउट हो गए.

पाचवां ट्वीट

पोलार्ड सिर्फ 1 छक्का ही जमा पाएंगे. पोलार्ड ने फाइनल में 3 बॉल खेलकर 7 रन बनाए थे, जिसमें एक सिक्स भी था.

छठा ट्वीट

मैच में एक भी नो बॉल नहीं होगी. मैच में हुआ भी बिलकुल ऐसा ही. मैच में एक भी नो-बॉल नहीं हुई. पुणे के बॉलर्स ने 5 बॉल वाइड फेंकीं, जबकि मुंबई की ओर से 3 वाइड बॉल फेंकी गई.

सांतवा ट्वीट

पुणे टीम के ओपनर बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी 10 रन भी नहीं बना पाएंगे. पुणे के ओपनर राहुल त्रिपाठी 8 बॉल में मात्र 3 रन बनाकर आउट हुए.

आठवां ट्वीट

स्मिथ मैच में सबसे ज्यादा रन बनाएंगे. मैच में भी यही हुआ. स्मिथ ने 51 रन बनाए. वो न सिर्फ पुणे के, बल्कि पूरे मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बैट्समैन रहे.

नौवां ट्वीट

इस ट्वीट में बताया कि स्टीव स्मिथ 100 से कम के स्ट्राइक रेट से बल्लबाजी करेंगे. ये ट्वीट लगभग गलत साबित हुआ. क्योंकि पुणे के कप्तान स्टीव स्मिथ ने 102.00 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की.

इन ट्वीट्स को देखने के बाद तो आप भी कहेंगे कि सच में ये इत्तेफाक है या फिर सही में ये मैच फिक्स था. देखना यह भी होगा कि आगे और खुलासे होंगे या ये महज एक अफवाह बनकर रह जाएगा.

भ्रष्टाचार पर मोदी क्या इन सवालों का जवाब देंगे

आयकर विभाग और सीबीआई की सक्रियता बढ़ गयी है. राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के पी चिदंबरम के बेटे के खिलाफ छापेमारी चल रही है. खुलासे हो रहे हैं. खुलासे होंगे. कहा जा रहा है कि सरकार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रही है. ‘‘भ्रष्टाचारियों को हिसाब-किताब देने का दिन आ गया है.‘‘ …‘‘लोगों को उनकी करतूतों के लिये जिम्मेदार ठहराया जायेगा.‘‘

अच्छी बात है. आरोप के अलग-अलग दायरे में सोनिया गांधी, राहुल गांधी हैं. कई कांग्रेसी हैं. ‘आम आदमी पार्टी’ के अरविंद केजरीवाल हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती हैं. राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव हैं. तृणमूल कांग्रेस को ढ़ीले-ढ़ाले आरोप के दायरे में रखा गया है. कह सकते हैं, कि जिनकी भी राजनीतिक चुनौती भाजपा को मिल सकती है, वो तमाम राजनीतिक दल और उनके सबसे बड़े नेता भ्रष्टाचार के आरोपी हैं.

विपक्ष का कहना है, ‘‘यह राजनीति से प्रेरित है.” हम यह नहीं कह सकते कि ‘ऐसा नहीं है.” हम यह भी नहीं कह सकते कि ‘‘आरोपों में कोई दम नहीं.” हम यह जरूर कह सकते हैं कि भ्रष्ट व्यवस्था और भ्रष्ट सरकार भ्रष्ट राजनीतिक दलों को ही जन्म देती है. भाजपा और मोदी की सरकार भ्रष्ट व्यवस्था की ही कड़ी है. उसी का विस्तार और उसी का राष्ट्रवादी संस्करण है, जहां आर्थिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार की लम्बी परम्परा है. इस परम्परा से बाहर कोई नहीं है.

आजादी के बाद आर्थिक विकास की दिशा और सरकारों पर नजरें टिकायें तो यह नजारा साफ नजर आयेगा कि अर्थव्यवस्था में जैसे-जैसे निजी कम्पनियों की भूमिका बढ़ती गयी है, देश में आर्थिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार का आंकड़ा भी बढ़ता गया है. जिसका सीधा सा मतलब निकलता है कि निजी सम्पत्ति और निजी कम्पनियां ही भ्रष्टाचार के मूल में हैं. जिसके खिलाफ न तो कांग्रेस की सरकार ने, ना ही भाजपा की मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया है. उन्हें तो भ्रष्टाचार की परिधि से बाहर रखा गया. इन ताकतों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले यदि सामने आये भी तो, वो लम्बित ही रहे. कुमार मंगलम बिड़ला पर सीधा आरोप आया तो मनमोहन सरकार ही बदल गयी. मोदी जिन ताकतों को खुली छूट देने का करार हैं, वह करार अपने आप में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक भ्रष्टाचार है.

दूध से नहाई भाजपा क्या यह बताने के लायक है कि लोकसभा चुनाव में आया करोड़ों-करोड़ रुपये का आर्थिक स्त्रोत क्या है? विधान सभा चुनावों में खर्च का सही ब्योरा क्या है? वॉल स्ट्रीट के निजी कम्पनियों से किये गये करारों के मसौदे क्या हैं? आरोपों के दायरे से बाहर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, वसुधंरा राजे, शिवराज सिंह, नितिन गडकरी जैसे लोग बरी कैसे हैं? सपा के अखिलेश यादव पर तो सवाल है, मगर मुलायम सिंह यादव इस दायरे से बाहर कैसे हैं?

हम कह सकते हैं, कि 2019 की तैयारी अच्छी है. विपक्ष के हिस्से यदि कोयले का पानी है, तो भाजपा के हिस्से का दूध मिला पानी भी दूध नहीं है. भ्रष्ट व्यवस्था के प्यादे यदि काले हैं, तो सरकार उजली नहीं होगी. उजली सरकार वित्तीय ताकतों को मंजूर नहीं.

किसके लिए अभिनय करते हैं नरेंद्र झा

बौलीवुड में अपने दम पर अपने करियर को सुदृढ़ करना बिरले कलाकारों के बस की ही बात होती है. मगर नरेंद्र झा ने टीवी से फिल्मों तक का लंबा सफर अपनी अभिनय प्रतिभा, मेहनत, लगन के बलबूते पर तय कर सफलता के नए आयाम स्थापित किए. पर आज भी उनके पैर जमीन पर ही हैं. वह ‘हैदर’, ‘हमारी अधूरी कहानी’, ‘घायल वंस अगेन’, ‘मोहनजो दाड़ो’, ‘रईस’, ‘‘काबिल’’ सहित कई फिल्मों में स्टार कलाकारों के साथ महत्वपूर्ण किरदारों में नजर आते रहे हैं. अब वह सोलो हीरो के रूप में फिल्म ‘‘विराम’’ करके उत्साहित हैं, जिसका हाल ही में ‘‘कान्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ. इसके अलावा बतौर हीरो वह दो अन्य फिल्में कर रहे हैं. मगर उनका दावा है कि वह पैसों के लिए काम नहीं करते हैं.

हाल ही में जब उनसे हमारी मुलाकात हुई, तो नरेंद्र झा ने साफ साफ कहा-‘‘यह सच है कि जिन फिल्मों में दो या तीन सीन का किरदार होता है, उनसे बचने की कोशिश जरूर कर रहा हूं. क्योंकि मैं सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करता. मैं अपने आपको मनोरंजन देने के लिए भी काम करता हूं. मैं काम इंज्वाय करने के लिए करता हूं. मैं समझता हूं कि 2 या 3 दृश्यों का जो आफर लेकर आते हैं, उन्हें खुद यकीन नहीं होता है कि अंततः वह सीन फिल्म में रहेंगे भी या नहीं. मैं ईश्वर का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे दैनिक रूप से पैसा बटोरने की मजबूरी नहीं दी है.’’

नरेंद्र झा को नजदीक से जानने वालों का दावा है कि नरेंद्र झा उन कलाकारों में से हैं, जो कि पैसे के पीछे कभी नहीं भागते. बतौर कलाकार अपने अंदर स्फूर्ति लाने के वह लिए वह हर माह कुछ दिन मुंबई से दूर प्रकृति की गोद में बिताते हैं. खुद नरेंद्र झा ने बताया-‘‘मैंने मुंबई से सौ किलोमीटर दूर अपना छोटा सा होलीडे होम बना रखा है. जब शूटिंग नहीं होती हैं. तो मैं वहीं रहने के लिए चला जाता हूं, यहां से वहां पहुंचने में डेढ़ घंटे लगते हैं. वहां शांत मन से कुछ लेखन करता रहता हूं. ईश्वर की अनुकंपा से मेरी जिंदगी ठीकठाक चल रही है. मुझे इस बात की फिक्र नहीं है कि किसने कितने करोड़ कमा लिए हैं.’’ 

बौलीवुड में भी अब हो रहा है बेहतरीन काम : परवीन डबास

1999 में फिल्म ‘‘दिल्लगी’’ से लकर अब तक परवीन डबास के अभिनय करियर की यात्रा काफी रोचक रही है. परवीन डबास ने पूरे विश्व में सर्वाधिक धन कमाने वाली भारतीय फिल्म ‘‘मानसून वेडिंग’’ में अभिनय कर जबरदस्त शोहरत बटोरी थी. बीच में उन्होंने एक फिल्म ‘‘सही धंधे गलत बंदे’’ का निर्देशन भी किया था, जिसके लिए उन्हे ‘मैक्सिको इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में पुरस्कृत भी किया गया था. मगर  अस्वस्थता के चलते वह दो वर्ष तक बिस्तर पर पड़े रहे, जिसके चलते उनके करियर में गतिरोध आ गया.

बहरहाल, इन दिनों वह अप्रवासी भारतीय विजित शर्मा की सायकोलाजिकल थ्रिलर फिल्म ‘‘मिरर गेम:अब खेल शुरू’’ को लेकर चर्चा में हैं. तो दूसरी तरफ वह बतौर लेखक, निर्देशक व अभिनेता अपनी एक फिल्म शुरू करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं.

आपने ‘मानसून वेडिंग’ या ‘खोसला का घोसला’’ जैसी फिल्में की थी. क्या इस तरह की फिल्में आज के समय में बनती, तो ज्यादा बेहतर बनती?

– कब कौन सी चीज फायदा कर दें पता नही. कई बार एक छोटा सा किरदार आपको स्टार बना देता है. कई बार आप फिल्म में मुख्य किरदार निभाते हैं, फिल्म हिट हो जाती है, दूसरों को फायदा हो जाता है, आपको नहीं होता. अब हम इस तरह की बातें नहीं सोच सकते कि वह फिल्म अब आती, तो क्या हो सकता है? मैं उन चीजों के बारे में नहीं सोच सकता, जो नहीं हो सकता. मैं उन चीजों के बारे में सोचता हूं, जो हैं.

सिनेमा के बदलते दौर में क्या बौलीवुड में  बेहतरीन काम किया जा रहा है?

– देखिए, भेड़चाल तो हर जगह चलती है. मेरी ही कई फिल्में ऐसी हैं, जिन पर भेड़चाल हुई. जब मेरी फिल्म ‘‘मानसून वेडिंग’’ आयी, तो कईयों ने उसी तरह की फिल्में बना डाली. मैं हमेशा इस बात से बहुत खुश होता हूं कि मेरी फिल्मों ने सिनेमा में उस तरह की फिल्मों को बनाने का ट्रेंड शुरू किया. अब हम सायकोलाजिकल थ्रिलर फिल्म ‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’ लेकर आ रहे हैं, मुझे यकीन है कि इस फिल्म के रिलीज के बाद एक बार फिर बौलीवुड में इस तरह की फिल्मों का एक दौर शुरू हो जाएगा. फिल्म का ट्रेलर तमाम लोगों को पसंद आ रहा है. काफी चर्चाएं हो रही हैं.

आखिर भारतीय सिनेमा में अच्छा काम बहुत कम होने की वजहें क्या हैं?

– आपने जटिल सवाल कर दिया. देखिए, सिनेमा के बदलाव के साथ अब स्टार कलाकार भी अच्छा सिनेमा करने लगे हैं. ‘बजरंगी भाईजान’, ‘दिल धड़कने दो’, ‘दंगल’, ‘एयर लिफ्ट’, ‘रूस्तम’ और अब ‘बाहुबली’. यह सारी अच्छी फिल्में हैं, तो हर समय हर तरह का सिनेमा बनता है और बनता रहेगा. मुझे नहीं लगता कोई इंसान खराब फिल्म बनाना चाहता है. कई बार कुछ फिल्में अच्छी बन जाती हैं, कुछ अच्छी नहीं बन पाती हैं. कई बार फिल्म बनते बनते गड़बड़ा जाती हैं. कई बार फिल्म बनाने की वजहें अलग होती हैं. कई बार पटकथा अच्छी होती है, पर निर्देशक उसे उस तरह से परदे पर उतार नहीं पाता. कई बार बहुत अच्छी फिल्म बनाने की कोशिश की जाती है, पर दर्शक उसे पसंद ही नहीं करता.

एक कलाकार के तौर पर आप पटकथा व किरदार पढ़कर पसंद करते हैं. उसके बाद भी फिल्में असफल होती हैं?

– गड़बड़ी तो कहीं भी, किसी भी चीज में हो सकती है. कई बार फिल्म अच्छी होती है, पर ट्रेलर गलत बन जाता है. तो फिल्म नहीं चलती. कई बार फिल्म के नाम के चलते फिल्म नही चलती. फिल्म एक ऐसी विधा है, जहां कहानी पटकथा लिखने से लेकर कलाकारों का चयन, शूटिंग, एडीटिंग, ट्रेलर, गाने, उसके पोस्टर व मार्केटिंग से लेकर रिलीज का समय सब कुछ सही बैठ जाए, तभी फिल्म चलती है. इनमें से कहीं कुछ भी गड़बड़ा जाए, तो बंटाधार हो जाता है. फिर अब दर्शक के पास च्वाइस बहुत हैं. जबकि अब फिल्मकार भी कुछ ज्यादा ही मेहनत कर रहा है.

हमारी बौलीवुड की फिल्में हौलीवुड की फिल्मों का मुकाबला नहीं कर पाती हैं?

– ‘दंगल’ ने चीन में काफी पैसा कमाया, पर यह जरुरी नहीं कि अमेरिका में भी कमाए. हौलीवुड फिल्मों ने लंबे समय से पूरे विश्व के दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ रखी है. जब मैं छोटा था, तो मैं भी वीडियो खरीदकर हौलीवुड फिल्में देखा करता था. वह हमेशा पटकथा व प्री प्रोडक्शन पर काफी काम करते हैं और ऐसी फिल्में बनाते हैं, जिससे पूरे विश्व का दर्शक उनकी फिल्में देखने के लिए प्रेरित हो. हम बौलीवुड के फिल्मकारों ने इस तरह की सोच पर अब काम करना शुरू किया है. ‘मानसून वेडिंग’ पहली फिल्म थी, जिसने भारत के बाहर भी काफी पैसा कमाया था. वह भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत भारतीय फिल्म थी. पर विश्व में सराही गयी. ‘स्लम डाग मिलेनियर’ भी संस्कृति के आधार पर भारतीय थी. इसकी कहानी भारतीय इंसान विकास स्वरूप ने ही लिखी थी. वास्तव में हौलीवुड ने धीरे धीरे अमरीकन फिल्म देखना एक कल्चर बना दिया है.

आपके लेखन के शौक में कोई नई प्रगति हुई है?

– उम्र व अनुभव के साथ प्रगति होती रही. स्कूल के दिनों में कविताएं लिखता था. मैंने कुछ रिजेक्टेड लवर जैसी कविताएं लिखी, तो लड़कियों ने मेरा मजाक भी उड़ाया. कालेज में पहुंचने के बाद कहानी लिखी. फिर कुछ फिल्मों में अभिनय करते समय कुछ सीन मैंने लिख दिए, जिन्हे मैं लिखना नहीं मानता. क्योंकि यह काम तो मैं अपने किरदार को अपने तरीके से निभाने के लिए करता रहा. अभी भी कविताएं कभी कभी लिखता हूं. अंग्रेजी अखबर के लिए ब्लाग लिखता हूं. कविताएं तो अंग्रेजी में तथा फिल्म की पटकथा हिंदी में लिखता हूं. 

क्या पढ़ना पसंद करते हैं?

– जब छोटा था तो क्लासिक पढ़ता था. मैंने काफी हिंदी व अंग्रेजी लेखकों को पढ़ा है. बीच में उर्दू कविताओं को पढ़ने का शौक रहा है. जावेद अख्तर ने जो पहली किताब व कैसेट ‘तरकश’, लिखी है इसे भी मैंने पढ़ा है.

सुना है आप को घूमने का भी शौक है?

– यात्राएं करने का शौक है. महाराष्ट्र व भारत में बहुत सी घूमने की जगहें हैं. मुझे ट्रैकिंग करने का भी शौक है. हाइकिंग की है. एक साल पहले मैं मनाली सायकल से गया था. मुझे अनजाने शहर में कार में बैठकर घूमने की बजाय पैदल चलते हुए घूमना पसंद है. तभी हमें शहर का असली मजा, असली खूशबू पता चलती है. एडवेंचर काम करने का आनंद अलग मिलता है. यात्राएं करते हुए ही हमें असली भारत व इंसान से मुलाकात होती है. हमने महाराष्ट् में कई जगह ट्रैकिंग की है. सायकलिंग करने के लिए यहां बहुत जगह हैं.

गूंज उठेगी किलकारी आईवीएफ से

आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से हर साल हजारों बच्चे जन्म लेते हैं. जो महिलाएं बांझपन जैसी समस्या से जूझ रही हैं उन के लिए आईवीएफ प्रक्रिया की यह जानकारी काफी फायदेमंद हो सकती है:

पहला चरण: मासिकधर्म के दूसरे दिन आप के ब्लड टैस्ट एवं अल्ट्रासाउंड के माध्यम से आप के अंडाशय की जांच होती है. फिर यह अल्ट्रासाउंड सुनिश्चित करता है कि आप को कितनी मात्रा में स्टिम्युलेशन दवा दी जानी चाहिए. मासिकधर्म के दौरान डाक्टर जांच के तहत हो रही प्रक्रिया पर निगरानी करते हैं. फिर जांच के बाद आप के फौलिकल्स यानी रोम को मौनिटर करते हैं. जैसे ही आप का रोम एक निश्चित आकार में पहुंच जाता है तो फिर आप उसे रोज मौनिटर कर सकते हैं. मौनिटरिंग के बाद आप को दूसरी दवा दी जाती है, जो ट्रिगर शौट के रूप में जानी जाती है.

दूसरा चरण: अंडों की पुन:प्राप्ति के बाद डाक्टर आप के गर्भाशय के स्तर के विकास के लिए प्रोजेस्टेरौन को बढ़ाने के लिए बाहरी प्रोजेस्टेरौन दवा देते हैं.

तीसरा चरण: जब अंडे पुन: बनने की प्रक्रिया में हों तब पुरुष साथी को मास्टरबेशन के माध्यम से शुक्राणु प्रदान करने के लिए कहा जाता है. डाक्टर क्लीनिक में भी निषेचन के लिए शुक्राणु तैयार करते हैं.

चौथा चरण: शुक्राणु एवं अंडे की पुन:प्राप्ति की प्रक्रिया के बाद डाक्टर शुक्राणु एवं अंडे का गठबंधन करते हैं. इस के बाद वे निषेचित अंडे को कुछ समय के लिए इनक्यूबेटर में रख देते हैं. इस अवधि के दौरान एक भ्रूण विशेषज्ञ के द्वारा भ्रूण के विकास की नियमित चैकिंग की जाती है. अगर सब कुछ सही दिशा में चल रहा हो तो स्वस्थ विकास के लिए 3 से 5 दिनों के बाद भ्रूण तैयार हो जाता है.

5वां चरण: भ्रूण के आरोपण के लिए यह एक सरल एवं दर्दरहित प्रक्रिया है. आरोपण के लिए भ्रूण को तरल पदार्थ के रूप में एक कैथेटर में रखा जाता है. इस प्रक्रिया में अच्छी खबर के लिए आप को 2 सप्ताह इंतजार करना पड़ता है, जिस में प्रैगनैंसी टैस्ट होता है. इस के बाद डाक्टर कुछ निश्चित भोजन से संबंधित एहतियात बरतने को कहते हैं. उन्हीं चीजों को खाने की सलाह देते हैं जो आप के आरोपण की प्रक्रिया में सहायक साबित हों.

इस प्रक्रिया में आप को प्रैगनैंसी का सही परिणाम जानने के लिए ब्लड टैस्ट होने तक का इंतजार अवश्य करना चाहिए, बजाय इस के कि प्रैगनैंसी किट से रिजल्ट पता किया जाए, क्योंकि कई बार प्रैगनैंसी किट से गलत रिजल्ट भी आता है.                                  

वजन कम करने के बहुत फायदे मिले : परिणीति चोपड़ा

फिल्म ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ से अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत करने वाली परिणीति को पहली फिल्म में ही काफी सफलता मिली. इस के बाद उन्होंने ‘इश्कजादे’, ‘शुद्ध देसी रोमांस’, ‘हंसी तो फंसी’ आदि फिल्मों में काम किया. फिल्मों से अधिक परिणीति ने विज्ञापनों में काम किया. कुछ समय तक वे फिल्मों से दूर रह कर अपना वजन घटाने में व्यस्त रहीं. हाल ही में उन की फिल्म ‘मेरी प्यारी बिंदू’ रिलीज हुई. इस फिल्म के संबंध में उन से कुछ सवालजवाब हुए:

यह फिल्म आप की दूसरी फिल्मों से कितनी अलग है?

यह मेरे लिए बहुत अलग फिल्म है. मैं ने जब इस की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे लगा कि इस तरह की फिल्में अभी तक दर्शकों ने देखी नहीं हैं. इस फिल्म में जीवन के हर भाग से एक गाना जुड़ा है, जो एक कहानी कहता है. अभी तक बौलीवुड में ऐसी फिल्म नहीं बनी है.

फिल्म चुनते वक्त किस बात का ध्यान रखती हैं?

फिल्म में उस की स्क्रिप्ट और भूमिका मुख्य होती है. इस के अलावा फिल्म निर्देशक कौन है, यह बात भी अवश्य देखती हूं. किसी फिल्म को करने से मना करना मुश्किल होता है, क्योंकि हर निर्देशक के लिए उस की फिल्म उस के दिल का टुकड़ा होती है. मगर मैं जिस फिल्म की कहानी पसंद नहीं करती या जिसे करने में मुझे दिल से खुशी नहीं होती उसे करने के लिए प्रैशर में हां कह कर फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी.

आप हमेशा बिंदास गर्ल की भूमिका निभाती हैं. क्या आप को लगता है कि आज की जैनरेशन भी ऐसी ही है?

नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं है. हां, बिंदू एक बिंदास लड़की है, जो अपना हर काम आधा कर के छोड़ देती है. उस की कोई प्लानिंग नहीं होती है. पर आज की जैनरेशन ऐसी नहीं है. वह उद्देश्य पर पूरी तरह फोकस्ड है. वह जानती है कि उसे क्या करना है और उसे पाने के लिए मेहनत भी करती है. इस फिल्म में मेरा चरित्र भी वैसा ही है. मैं अपने उद्देश्य को पाना चाहती हूं, पर कभीकभी केयरलैस हो जाती हूं. मगर रियल लाइफ में मैं ऐसी बिलकुल नहीं हूं.

इस फिल्म में आप ने आशा भोसले के गाने गाए हैं. यह आप के लिए कितना मुश्किल था?

मैं ने यह नहीं सोचा कि ये आशाजी के गाने हैं. बस मुझे उन के ये गीत पसंद हैं. मुझे गाना आता है और मौका मिला तो मैं ने गा लिया. हां, लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरे गीतों को भी लोग उतना ही पसंद करें जितना आशाजी के गीतों को पसंद करते हैं. इन गीतों को गाते वक्त किसी प्रकार का प्रैशर नहीं था, क्योंकि उन के गीत हमेशा उन के ही रहेंगे.

फिल्म का कौन सा पार्ट मुश्किल था?

कोलकाता की गरमी में फिल्म की शूटिंग करना बहुत मुश्किल था.

क्या कभी ऐसा हुआ कि आप ने बोला कुछ और लिखा कुछ और गया? ऐसा होने पर आप क्या करती हैं?

पहले तो देखना पड़ता है कि किस बात को ले कर आलोचना की जा रही है. अगर मैं ने कुछ गलत किया है, जो मुझे करना नहीं चाहिए था, तो ऐसे में मुझे पता होता है कि मुझे सुनना पड़ेगा और मैं उस के लिए तैयार रहती हूं. मैं ऐसी स्थितियों से निकलना जानती हूं. कई बार जो कहती हूं, उसे मीडिया तोड़मरोड़ कर लिखता है. तब मुझे बहुत बुरा लगता है. तब मैं कुछ भी बोलने से डरती हूं, क्योंकि मीडिया कई बार ऐसे प्रश्न पूछता है जिन के जवाब मुझे नहीं पता होते हैं.

फिल्मों में आने के बाद आप ने अपनेआप को पूरी तरह से बदला है. यह किसी दबाव में किया या फिर खुद ही फिट रहना पसंद करती हैं?

यह बात सही है कि इंडस्ट्री में आने के बाद मुझे फिटनैस पर ध्यान देना पड़ा. 12 सालों से वजन कम करने का मेरा प्रयास चल रहा था. आप जो मेरी यह काया देख रही हैं. यह मेरी 12 सालों की मेहनत का ही फल है. इंडस्ट्री का प्रैशर यही था कि मुझे परदे पर और अधिक सुंदर दिखना है.

हर महिला को अपने वजन का ध्यान रखना चाहिए. वजन घटने के मुझे बहुत फायदे मिले हैं. अब मैं काफी देर तक काम करने पर भी नहीं थकती हूं. पहले मैं 4 घंटे की शिफ्ट में ही थक जाती थी. अब तो मैं अपने सारे पुराने कपड़े भी पहन सकती हूं.

फिल्मों में आने के बाद लाइफ कितनी बदली है?

मैं बहुत बदली हूं. मुझे अपना काम पसंद है. मैं मेहनत भी कर सकती हूं, लेकिन मैं पूरा साल काम नहीं कर सकती. मुझे काम के साथसाथ परिवार और दोस्तों के साथ रहना भी पसंद है. उन्हें मिस नहीं कर सकती, इसलिए बीचबीच में ब्रेक लेती रहती हूं. मुझे काम और परिवार के बीच तालमेल बैठाना आता है.

इंडस्ट्री की चकाचौंध देख कर ज्यादातर यूथ मुंबई ऐक्टिंग के लिए आ जाते हैं. उन्हें क्या मैसेज देना चाहती हैं?

मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि जितना ग्लैमर फिल्मों में दिखाया जाता है उतना होता नहीं है. न सब कुछ आसान है और न ही मुमकिन. असल जिंदगी में अभिनय के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. लौंग शिफ्ट, लौंग ट्रैवलिंग आदि सब कुछ करना पड़ता है. यूथ को इस सब के लिए तैयार रहना चाहिए ताकि किसी भी चुनौती को स्वीकार सकें.                    

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें