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आदमखोर का आतंक

बीते 5 मार्च की रात जयपुर शहर की सब से प्रमुख सड़क जवाहरलाल नेहरू मार्ग (जेएलएन मार्ग) पर कई तेंदुए चहलकदमी कर रहे थे. शहर के बीचोबीच स्थित इस सड़क पर पूरी रात वाहनों का आनाजाना लगा रहता है. सड़क पर चहलकदमी करते तेंदुओं को देख कर उधर से गुजरने वाले वाहन चालकों की सांसें थम सी जाती थीं. फिर भी वे सावधानीपूर्वक बचतेबचाते निकलते रहे. तेंदुओं के इस सड़क पर घूमने का सिलसिला रात करीब 12 बजे से 6 मार्च की सुबह लगभग साढ़े 5 बजे तक चलता रहा. इस बीच तेंदुए कई बार सड़क पर आए. लोगों ने उन्हें इस तरह सड़क पर घूमते पहली बार देखा था, इसलिए पूरी रात बिजली की रोशनी से जगमग रहने वाली इस सड़क पर कुछ लोगों ने तेंदुओं के फोटोग्राफ भी खींचे.

गनीमत यह रही कि किसी तेंदुए ने न तो किसी वाहन चालक पर हमला किया और न ही कोई तेंदुआ किसी वाहन की चपेट में आया. ये तेंदुए रात को 6 घंटे तक करीब 2 किलोमीटर तक सड़क पर इधर से उधर घूमते रहे. सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी वहां पहुंचे और तेंदुओं पर नजर रखते रहे. सुबह करीब साढ़े 5 बजे सभी तेंदुए स्मृति वन में चले गए. 6 मार्च को दिन में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन तेंदुओं की तलाश की, लेकिन उन का कुछ पता नहीं चला.

वन अधिकारियों का कहना था कि जयपुर में राजस्थान यूनिवर्सिटी कैंपस व स्मृति वन के आसपास तेंदुओं का देखा जाना आम बात है. लेकिन सड़क पर घूमते देखे गए तेंदुओं से डरने का एक कारण यह था कि इधर सरिस्का बाघ अभयारण्य में आदमखोर तेंदुए का आतंक फैला हुआ था.

इसलिए लोगों को लग रहा था कि कहीं आदमखोर तेंदुए सरिस्का से भटक कर जयपुर तो नहीं आ गए हैं. दरअसल सरिस्का बाघ परियोजना अलवर से जयपुर तक फैली है. जयपुर में घूम रहे तेंदुओं का भले ही कुछ पता नहीं चला, लेकिन अलवर जिले में सरिस्का इलाके के कई गांवों में आदमखोर तेंदुओं का खौफ अभी खत्म नहीं हुआ है. सरिस्का इलाके में आदमखोर तेंदुओं का आतंक पिछले साल अक्तूबर से चल रहा है.

फरवरी, 2017 की 5 तारीख थी. अलवर जिले की थानागाजी तहसील के कस्बा किशोरी के पास कालालांका गांव सरिस्का बाघ परियोजना इलाके में ही बसा है. इसी गांव के रहने वाले प्रभुदयाल मीणा की पत्नी बिरदी देवी उस दिन दोपहर बाद 4 बजे के करीब अपने खेतों में फसल की रखवाली करने गई थी.

सोच में डूबी बिरदी देवी ने देखा कि कुछ जंगली जानवर खेतों में फसल उजाड़ रहे हैं.  सरिस्का का इलाका होने की वजह से ऐसे जंगली जानवरों की कमी नहीं है. जंगली सूअर, रोजड़े (नीलगाय जैसा एक जानवर), नीलगाय वगैरह जानवर खेतों में घुस जाते हैं. इन इलाकों में रहने वाले किसान इन जानवरों को भगा देते हैं, लेकिन मारते नहीं हैं.

बिरदी देवी खेत में घुसे जंगली जानवरों को भगाने के लिए पहाड़ की तलहटी की ओर चली गई. उसी बीच झाडि़यों में छिपे बैठे तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया. 45 साल की बिरदी देवी उस तेंदुए का मुकाबला नहीं कर पाई. वह बचाव के लिए चिल्लाई. आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों ने उस की आवाज सुनी तो उस तरफ दौड़े. ग्रामीणों को आता देख कर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया. लोगों ने मौके पर पहुंच कर देखा बिरदी देवी लहूलुहान पड़ी थी. उस की गरदन से खून बह रहा था. गांव वाले उसे अस्पताल ले जाते, उस के पहले ही उस ने दम तोड़ दिया.

तेंदुए के हमले से बिरदी देवी की मौत से गांव वालों में आक्रोश फैल गया. सूचना मिलने पर तहसील थानागाजी के एसडीएम कैलाश शर्मा, सरिस्का के एसीएफ सुरेंद्र सिंह धाकड़, थानागाजी के पूर्व विधायक कांती मीणा और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए.

बिरदी देवी की कोई संतान नहीं थी. अधिकारियों ने मृतका के परिवार वालों को मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया. गांव वालों का कहना था कि तेंदुआ पहले ही 2 लोगों की जान ले चुका है, अब उस ने तीसरे इंसान को निशाना बनाया है. ऐसे आदमखोर तेंदुए को तुरंत पकड़ा जाए.

  गांव वालों को शांत कराते हुए अधिकारियों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया. उस दिन तो जैसेतैसे मामला सुलट गया, लेकिन अगले ही दिन एक  और बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई.

6 फरवरी को किशोरी कस्बे के पास रायपुरा गांव के जंगल में तेंदुए ने मदनलाल बलाई की पत्नी संती देवी को अपना शिकार बना डाला. रायपुरा गांव और कालालांका गांव के बीच मात्र 3 किलोमीटर की दूरी है. संती देवी उस दिन शाम को करीब 5 बजे अपनी 2 बेटियों के साथ खेत में फसल की रखवाली करने गई थी, तभी अचानक खेत में खड़ी फसलों में से छलांग लगा कर निकले तेंदुए ने उसे दबोच लिया था.

मां पर तेंदुए को झपटते देख दोनों बेटियों ने शोर मचाया तो आसपास के खेतों में काम  कर रहे लोग मौके पर आ पहुंचे. लेकिन तब तक तेंदुए ने उस की जान ले ली थी. मां की मौत पर दोनों बेटियां चीखचीख कर रो रही थीं. सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन वन विभाग के अधिकारी नहीं आए.

गांव वालों के डर से करीब 4 घंटे बाद सरिस्का मुख्यालय से डीएफओ बालाजी करी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. लगातार तेंदुए के हमले से 2 महिलाओं की मौत होने से लोगों का गुस्सा भड़क उठा था. उन्होंने संती देवी का शव उठाने से इनकार कर दिया.

गांव वालों ने अधिकारियों से साफ कह दिया था कि तेंदुए का आतंक पिछले 4-5 महीने से लगातार बढ़ता जा रहा है. इस से वे डरे हुए हैं. करीब साढ़े 4 महीने पहले 28 सितंबर, 2016 को प्रतापगढ़ इलाके के सावंतसर गांव में तेंदुए ने रेवड़मल का शिकार किया था. वह रात को अपने खेत में पानी देने जा रहा था.

इस के बाद 20 अक्तूबर, 2016 को प्रतापगढ़ इलाके के ही भड़ाज गांव में तेंदुए ने 55 साल की बूढ़ी गुल्ली देवी बलाई को मौत के घाट उतार दिया था. तेंदुए के लगातार हो रहे हमलों की इन घटनाओं से साफ हो गया था कि सरिस्का बाघ अभयारण्य का कोई तेंदुआ आदमखोर हो चुका है.

दरअसल, एक बार इंसान का खून मुंह लगने से किसी शेर, बाघ और तेंदुए के नरभक्षी बन जाने की संभावना बढ़ जाती है. सन 2016 के सितंबर और अक्तूबर महीने में तेंदुए के हमले से हुई 2 लोगों की मौत के बाद सरिस्का प्रशासन ने इस इलाके से 2 तेंदुओं को पकड़ कर जयपुर चिडि़याघर भेज दिया गया था.

इस के बाद कुछ दिनों तक इलाके में तेंदुए के हमले की घटनाएं नहीं हुईं. जयपुर चिडि़याघर भेजे गए दोनों तेंदुओं का बधियाकरण करने और चिप लगाने के बाद उन्हें इसी साल जनवरी के आखिर में वापस सरिस्का के जंगल में छोड़ दिया गया था.

रायपुर गांव में संती देवी की मौत पर गांव वाले उस का शव ले कर पूरी रात बैठे रहे. अगले दिन 7 फरवरी की सुबह गांव वालों ने किशोरी-अजबगढ़ सड़क मार्ग को पत्थर लगा कर जाम कर दिया था, किशोरी कस्बे की बाजार बंद करा दी, साथ ही आसपास के स्कूलों की छुट्टी करा कर बैंक पर भी ताला लगा दिया.

नाराज गांव वाले आदमखोर तेंदुए को पकड़ने, पीडि़त पक्ष के घर वालों को सरकारी नौकरी देने और 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग कर रहे थे. चूंकि तेंदुए के आतंक से आसपास के बीसियों गांवों के लोग डरे हुए थे, इसलिए कई गांवों के लोग रायपुर पहुंच गए.

अधिकारियों के लगातार समझाने और कई दौर की वार्ता के बाद दोपहर करीब 12 बजे संती देवी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. इस बार संती देवी की लाश से तेंदुए के साक्ष्य एकत्र किए गए. इसी के साथ अधिकारियों ने गांव वालों से कहा कि सरकार के स्तर से जो कुछ संभव हो सकेगा, वह दिलाया जाएगा.

इस के बाद सरिस्का बाघ अभयारण्य के अधिकारियों ने आदमखोर तेंदुए को पकड़ने के लिए 4 अलगअलग जगहों पर पिंजरे लगा दिए, साथ ही तेंदुए की तलाश के लिए 5 टीमें बना कर 40 कर्मचारी पिंजरों वाले इलाकों में तैनात कर दिए गए. अधिकारियों ने गांव वालों को भी तेंदुए से सावधान रहने को कहा.

उन दिनों खेतों में फसल पकने की ओर थी. ऐसे में फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसानों ने अपने खेतों में मचान बना लिए, ताकि फसल के साथ खुद का बचाव किया जा सके. वन कर्मचारियों की मेहनत 9 फरवरी को रंग लाई. उस दिन 2 तेंदुओं को पकड़ लिया गया. इस में एक नर था और एक मादा.

मादा तेंदुआ रायपुर जंगल के पास किसान करण सिंह के खेत में लगे पिंजरे में फंस गई थी, जबकि नर तेंदुए को ट्रंकुलाइज कर के पकड़ा गया. यह तेंदुआ उसी इलाके में नारायणी माता के जंगल में घूम रहा था. ग्रामीणों की सूचना पर वनकर्मियों ने उसे बेहोश कर के पिंजरे में कैद कर लिया था. करीब साढ़े 5 साल की उम्र का यह तेंदुआ मामूली रूप से घायल था.

मादा तेंदुआ करीब साढ़े 3 साल की थी. 2 तेंदुए पकड़े जाने पर जयपुर चिडि़याघर से डा. अरविंद माथुर को मौके पर बुलाया गया. उन्होंने दोनों तेंदुओं की जांच कर के उन्हें स्वस्थ बताया. रायपुर के जंगल में पकड़ी गई मादा तेंदुए को मृतका संती देवी की दोनों बेटियों और अन्य ग्रामीणों को दिखाया गया, ताकि यह पता चल सके कि आदमखोर तेंदुआ यही है या दूसरा.

हालांकि लोगों ने उसी तेंदुए के आदमखोर होने की बात कही, लेकिन वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की.

2 तेंदुए पकड़े जाने के बाद यह माना जा रहा था कि संभवत: अब शांति हो जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 9 फरवरी की रात थानागाजी इलाके की भूडि़यावास ग्राम पंचायत के गांव गढ़ी नवल सिंह में तेंदुए ने रतन सिंह के जानवरों के बाड़े में घुस कर एक गाय, एक बकरी और एक पालतू कुत्ते का शिकार कर लिया.

तेंदुए से आतंकित गांव वालों ने थानागाजी के समीपवर्ती बामनवास चौगान, सूरतगढ़, अजबगढ़, अंगारी, बीसूणी, बाछड़ी, कालालांका आदि गांवों में रात को चौकीदारी शुरू कर दी.

इसी बीच 12 फरवरी को फिर एक घटना घट गई. आदमखोर तेंदुए ने एक ही दिन में 2 लोगों को शिकार बना डाला. तेंदुए ने उस दिन सुबह किशोरी कस्बे के पास जैतपुर गांव में खेत पर चारा लेने जा रही 37 साल की संती देवी पत्नी रिछपाल सैनी को मार डाला. उसी दिन शाम को करीब 7 बजे एक तेंदुआ इसी इलाके में सिलीबावड़ी गांव में 55 साल के बूढ़े रामकुंवर मीणा को घर से खींच ले गया.

दोनों घटनाएं डेढ़, 2 किलोमीटर के दायरे में घटी थीं. जैतपुर में तेंदुए की शिकार हुई संती देवी के पति रिछपाल सैनी की 13 साल पहले सांप के काटने से मौत हो चुकी थी. संती देवी अपने 6 बच्चों का खेती और मजदूरी कर के पालनपोषण कर रही थी. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. उस की 2 बेटियों की शादी हो चुकी थी, जबकि 2 बेटियां और 2 बेटे और थे. घटना के समय संती देवी के साथ उस की बेटी पूजा भी थी.

पूजा ने भाग कर जान बचाई थी. जैतपुर में सुबह संती देवी की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए. आसपास के हजारों लोग मौके पर एकत्र हो गए. उन्होंने रास्ते जाम कर दिए. राजपा विधायक डा. किरोड़ीमल मीणा, पूर्व विधायक कांती मीणा और कृष्णमुरारी गंगावत सहित कई जनप्रतिनिधि भी पहुंच गए.

दिन भर चले हंगामे के बाद शाम को संती देवी के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. वन विभाग ने मृतका के घर वालों को 4 लाख रुपए मुआवजा देने पर सहमति जताई. अधिकारी जैतपुर में मामला शांत कर रवाना हुए ही थे कि सिलीबावड़ी में तेंदुए के हमले से रामकुंवर मीणा की मौत की खबर आ गई. आखिरकार अधिकारी रास्ते से वापस लौट कर सिलीबावड़ी पहुंचे.

एक ही दिन में 2 लोगों के शिकार से लोग खासा नाराज थे. हालात बेकाबू होते जा रहे थे. 5 से 12 फरवरी तक 8 दिनों में तेंदुए के हमले से 4 लोगों की मौत हो चुकी थी. इस से 4 महीने पहले 2 लोगों को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया था. 6 लोगों की मौत से गांव वालों का गुस्सा होना स्वाभाविक था.

हालात बेकाबू होते देख कर 12 फरवरी की शाम को सरकार ने अधिकारियों को आदमखोर तेंदुए को देखते ही गोली मार देने के मौखिक आदेश दे दिए.

इसी के साथ अलवर जिला मुख्यालय से कलेक्टर मुक्तानंद अग्रवाल और एसपी राहुल प्रकाश को मौके पर पहुंच कर हालात संभालने के निर्देश दिए गए. अलवर से 4 शूटर ले कर कलेक्टर और एसपी रात को ही उस इलाके में पहुंच गए. इस के अलावा जिला सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर बाघ अभयारण्य से स्पैशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स भी आदमखोर तेंदुए को पकड़ने के लिए सरिस्का के प्रभावित इलाके में भेजा गया.

13 फरवरी को भी सर्च औपरेशन चलता रहा. पुलिस और वन विभाग के 150 से ज्यादा जवान आदमखोर तेंदुए की खोज में जुटे थे. पुलिस का डौग स्क्वायड भी तेंदुए की तलाश में लगा था. इस के अलावा ड्रोन कैमरे की भी मदद ली गई. कई जगह पिंजरे लगाए गए. प्रशासन ने गांवों में माइक से सूचना प्रसारित कराई कि गांव वाले शाम को और सुबह के समय जल्दी खेतों में न जाएं. अकेले भी खेत या जंगल में जाने से बचें.

तेंदुए को ट्रंकुलाइज करने के लिए 3 टीमें अलग से तैनात की गईं. इन में एक टीम जयपुर चिडि़याघर व दूसरी रणथंभौर और तीसरी सरिस्का से बुलाई गई थी. ये टीमें आसपास के वाटर होल्स पर निगरानी करती रहीं, ताकि पानी पीने के लिए आने पर तेंदुए को ट्रंकुलाइज कर पकड़ा जा सके. तमाम प्रयासों के बावजूद आदमखोर तेंदुए का पता नहीं चला.

14 फरवरी को भी सर्च अभियान चलता रहा. 20-22 जवानों व वन कर्मचारियों की 6 टीमें आदमखोर तेंदुए की तलाश में जुटी रहीं.

भरतपुर से केवलादेव पक्षी अभयारण्य की 8 लोगों की टीम भी घना के निदेशक बीजू राय के नेतृत्व में सरिस्का आ गई. बीजू राय को तेंदुए के बारे में अच्छी जानकारी है. इस के अलावा तेंदुए ने जिन इलाकों में अब तक हमला किया था, उन इलाकों में 20 कैमरे लगाए गए.

 पेड़ों पर लगाए गए इन कैमरों में सेंसर भी लगे हुए थे, ताकि किसी जानवर के कैमरे के सामने से गुजरने पर उस की तसवीर कैद हो जाए. 1-2 जगह पंजों के निशान जरूर मिले, लेकिन तेंदुआ फिर भी नहीं मिला.

15 फरवरी का दिन भी आदमखोर तेंदुए की तलाश में गुजर गया. 7 टीमें करीब 15 किलोमीटर के दायरे में तेंदुए की तलाश में लगी रहीं. सिलीबावड़ी पहाड़ पर पगमार्क मिलने पर वहां एक और पिंजरा लगाया गया. तेंदुए को पकड़ने के लिए उदयपुर से 2 पिंजरे और मंगवाए गए. आदमखोर के न पकड़े जाने से करीब 2 दरजन गांवों के लोगों में दहशत कम नहीं हुई.

18 फरवरी को कस्बा किशोरी के पास गोपालपुरा इलाके में एक मादा तेंदुआ वन विभाग के पिंजरे में आ फंसी. इस से पहले तेंदुए ने किशोरी कस्बे के पास रामजी का गुवाड़ा में एक घर के बाड़े में पशुओं पर हमला कर पाड़े को मार दिया था. सरिस्का प्रशासन ने पिंजरे में फंसी मादा तेंदुए के नाखून, ब्लड, स्टूल, बाल व लार आदि के सैंपल लिए और उन्हें डीएनए जांच के लिए हैदराबाद भेज दिए.

बाद में इस तेंदुए को जयपुर चिडि़याघर भेज दिया गया. इस तेंदुए के नरभक्षी होने या न होने के बारे में वन विभाग ने कहा कि हैदराबाद से डीएनए जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा. इस मादा तेंदुए के शरीर पर कोई चिप भी नहीं लगी मिली. इस से यह माना जा रहा था कि 20 अक्तूबर, 2016 को भड़ाज गांव में महिला गुल्ली देवी की मौत के बाद पकड़े गए जिस तेंदुए को जयपुर चिडि़याघर ले जाया गया था. यह तेंदुआ वह नहीं था, क्योंकि वह नर तेंदुआ था और उसे जनवरी, 2017 के आखिर में सरिस्का इलाके में छोड़ते समय चिप लगाई गई थी.

तेंदुए लगातार पकड़े जा रहे थे, लेकिन आतंक कम नहीं हो रहा था. हालात ये हो गए थे कि सरिस्का के जंगलों में वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, पुलिस व तेंदुओं के बीच लुकाछिपी का खेल चलता रहा. वन कर्मचारी बारबार पिंजरे की लोकेशन बदलते रहे. मजे की बात यह थी कि तेंदुए भी उसी हिसाब से अपनी लोकेशन बदलते रहे.

19 फरवरी को तेंदुओं ने किशोरी व उमरैण इलाके में 5 स्थानों पर दुधारू पशुओं पर हमले किए. वन कर्मचारियों ने तेंदुए के पगमार्क लिए. 20 फरवरी को भी तेंदुए ने मवेशियों का शिकार करने के साथ किशोरी इलाके के गांव बिसूणी की ढाणी में सुबहसुबह एक महिला तीजा देवी और उस के साथ जा रही सरजो देवी पर हमला करने की कोशिश की.

उन के चिल्लाने पर खेतों से लोग भाग कर आए तो तेंदुआ भाग गया. 21 फरवरी को किशोरी कस्बे के पास संत वाले खोरा में रखे गए पिंजरे में एक नर तेंदुआ कैद हो गया. इस तेंदुए का एक दांत टूटा हुआ था.

इस से यह कयास लगाया गया कि यह आदमखोर हो सकता है. टूटे दांत के कारण वह आसानी से शिकार नहीं कर पाता होगा, क्योंकि टूटे दांत के कारण मुंह में घाव हो जाते हैं. वन अधिकारियों ने इस तेंदुए के आवश्यक सैंपल ले कर डीएनए टेस्ट के लिए हैदराबाद भेज दिए. बाद में इस तेंदुए को जयपुर चिडि़याघर भेज दिया गया.

इस तेंदुए के पकड़े जाने के बाद हालांकि तेंदुए कई बार दिखाई दिए हैं, लेकिन कथा लिखे जाने तक इंसान पर हमले की कोई अन्य घटना नहीं घटी थी. इस से यह माना जा रहा है कि संभवत: आदमखोर वही नर तेंदुआ था. अधिकारियों को इस के नरभक्षी होने के कुछ प्रमाण जरूर मिले हैं, लेकिन पूरी तरह पुष्टि हैदराबाद से रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.

विडंबना यह है कि जंगल अब लगातार सिमटते जा रहे हैं और वहां मानवीय दखल बढ़ता जा रहा है. इंसान वन्यजीवों का दुश्मन बन गया है. हालांकि वन्यजीवों का शिकार प्राचीन काल से होता आ रहा है, लेकिन कई दशक पहले भारत सरकार ने वन्यजीवों व पक्षियों को अधिसूचित कर के इन के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन कानून बनने और कड़ी सजा के प्रावधान होने के बावजूद वन्यजीवों का शिकार बंद नहीं हो सका.

सरिस्का अभयारण्य में लगातार शिकार होने से सन 2004 के आसपास बाघों का पूरी तरह सफाया हो गया था. बाद में राजस्थान के तत्कालीन हैड औफ फौरेस्ट फोर्स आर.एन. मेहरोत्रा के प्रयासों से रणथंभौर से ला कर बाघों को सरिस्का में छोड़ा गया. उस दौरान जब सरिस्का में एक भी बाघ नहीं था, तब तेंदुओं ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था.

बाद में जब सरिस्का में बाघों को बसाया गया और धीरेधीरे उन की वंशवृद्धि होने लगी तो तेंदुए अपनी जान बचाने के लिए सरिस्का के जंगलों से बाहर निकलने लगे. अलवर जिले से जयपुर जिले तक फैले करीब 1200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले सरिस्का अभयारण्य में सैकड़ों गांव हैं. इन में कई गांवों के आसपास बाघबघेरों का बसेरा है.

बाघों के डर से तेंदुओं ने गांवों के आसपास आबादी क्षेत्र में अपना नया ठिकाना बना लिया है. यह बात भी उल्लेखनीय है कि अक्तूबर और नवंबर, 2016 में तेंदुए ने 2 लोगों का शिकार किया था. इस के बाद 2 तेंदुए पकड़ कर जयपुर चिडि़याघर भेजे गए थे. फिर इलाके में शांति रही. इंसान पर हमले की कोई घटना नहीं हुई. जनवरी के आखिर में जब ये दोनों तेंदुए जयपुर चिडि़याघर से वापस ला कर सरिस्का इलाके में छोड़े गए तो फिर से इंसानों पर हमले की घटनाएं होने लगीं और 4 लोगों की जानें चली गईं.

सन 2014 में हुई तेंदुओं की राष्ट्रीय गणना में देश भर में उत्तर पूर्व को छोड़ कर 7910 तेंदुए थे. इस गणना के बाद यह अनुमान लगाया गया था कि देश में 12 हजार से अधिक तेंदुए हैं. देश में सब से ज्यादा 1817 तेंदुए मध्य प्रदेश में थे. सब से कम 29 झारखंड में. राजस्थान में करीब 171 तेंदुए गिने गए.

हालांकि अनुमान है कि तेंदुओं की संख्या 400 से ज्यादा है. सन 2004 में राजस्थान में 550 से ज्यादा तेंदुए थे. अभी सरिस्का में 65 से 80 के बीच तेंदुए बताए जाते हैं.

यह सुखद बात है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 8 मार्च को विधानसभा में पेश बजट में प्रदेश में प्रोजेक्ट लैपर्ड शुरू करने की घोषणा की है. इस के लिए बजट में 7 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. यह प्रोजेक्ट शुरू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है. इस से तेंदुओं को संरक्षण मिलने की उम्मीद है. अभी केवल हिमाचल प्रदेश में ही स्नो लैपर्ड के लिए प्रोजेक्ट चल रहा है.  

कीबोर्ड के ये शॉर्टकट्स आसान कर देंगे आपका काम

कम्प्यूटर पर काम करने वाले अधिकांश लोग माउस का इस्तेमाल करने के आदी होते हैं. कोई भी पुरानी फाइल ढूंढ़नी हो, कोई विंडो को छोटा करना हो, दो विंडो एक साथ ओपन करनी हों या फिर मॉनीटर पर चालू सभी प्रोग्राम को बंद करना हो इसके लिए अब आपको माउस छूने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

हम आपको कुछ ऐसे की-बोर्ड शार्टकट्स बताएंगे जो आपको लंबे प्रोसेस को शार्ट कर आपका काफी सारा वक्त बचाएंगे. जानिए कम्प्यूटर के ऐसे शार्टकट्स जिनका इस्तेमाल आप शायद अब तक नहीं करते थे.

Windows Key + Arrow

यह विंडो 7 का एक बहुत ही अच्छा फीचर है यह फीचर विंडो 8 में भी उपलब्ध है. इस कीवर्ड की सहायता से आपकी स्क्रीन दो हिस्सों में बंट जाती है जिससे की आपको काम करने में परेशानी नहीं होती और आप आसानी से काम कर सकते है. 

Windows + Left Arrow को दबाने से कम्प्यूटर के लेफ्ट जगह पर आपकी विंडो खुल जाएगी और Windows + Right Arrow को दबाने से कम्प्यूटर के राइट जगह पर विंडो खुल जाएगी. Windows + Up Arrow से आप किसी भी विंडो को मेक्सिमाइज़ कर सकते हैं. तथा Window + Down Arrow ले आप किसी भी विंडो को मीनिमाइज़ कर सकते हैं.

Shift + Arrow

इसके इस्तेमाल से आप अपने लिखे गए किसी भी चीज को हाईलाइट कर सकते है. अगर आर cntrl का इस्तेमाल करते है तो एक वर्ड की बजाए आप पूरी लाइन को हाईलाइट कर सकते है. cntrl+b से आप वर्डस को बोल्ड भी कर सकते है.

Alt + F4

किसी विंडो को बिना माउस को छुए बंद करने के लिए आप इस कीवर्ड का इस्तेमाल कर सकते है ALT+F4 को दबाने से आपकी विंडो के सारे प्रोग्राम बंद हो जाएंगे.

Windows Key + L

अगर आपको काम करते करते अचानक से कुछ याद आता है और आप अपना कम्प्यूटर तो बंद नहीं करना चाहते तो आर उसे लॉक करके जा सकते हो. आपको अपने कीबोर्ड को छूने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

Windows Key + M

जब आपके पास बहुत सारी विंडो खुली हुई होती हैं तो एक -एक कर सभी विंडो को बंद करने में बहुत समय लग जाता है. Windows Key + M को दबाने से आपकी सारी विंडो बंद हो जाती है.

Shift + Space

एक्सल पर काम करते समय बहुत बड़ी बड़ी फाइल्स होती है जिसपर चीजें ढूंढ़ना बहुत ही मुश्किल होता है लेकिन  Shift + Space दबाने से आप पूरी लाइन को सलेक्ट कर सकते है और अगर आप इस लाइन को डिलीट करना चाहते है तो आप CNTRL+DEL को दबा सकते हैं.

ALT + S / CTRL + Enter

अगर आप किसी को भी जल्दी से मेल करना चाहते है तो इसके लिए बहुत ही आसान कीवर्ड है मैसेज लिखने के बाद आप ALT + S / CTRL + Enter को दबाकर अपना मेल जल्दी से भेज सकते है.

R / CTRL + R

किसा को रिप्लाई करने के लिए जरूरी नहीं की आप रिपलाई का बटन दबाएं आप आसान तरीके से भी रिपलाई कर सकते है R / CTRL + R दबाने से आप झट से रिपलाई कर सकते है.

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मर्सिडीज खरीदने की है चाहत तो..

लक्जरी कार बनाने वाली कंपनी मर्सिडीज बेंज भारत मे जीएसटी लागू होने के बाद अपनी कारों के दाम 7 लाख रुपये तक घटा सकती है. यह कीमत मर्सिडीज की सिर्फ उन्हीं कारों की कम होगी जिन्हें भारत में बनाया जाता है.

कंपनी जीएसटी के बाद दरों में हुए बदलाव का सीधा फायदा लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है. कंपनी के मुताबिक कारों की नई दरें 26 मई से लागू होंगी. यह दरें जून में भी लागू रहेंगी. वहीं कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर जीएसटी को एक जुलाई से लागू नहीं किया जाता है तो एक जुलाई से कंपनी पुराने दामों पर ही कार बेचने लगेगी.

मर्सिडीज अभी भारत में सेडान क्लास में सीएलए, सी क्लास, ई क्लास, एस क्लास, और मेबैच एस 500 मॉडल को बनाती है. वही कंपनी अपनी एसयूवी के जीएलए, जीएलसी, जीएसई और जीएलएस को भारत में तैयार करती है. इसके अलावा कंपनी अपने दूसरे मॉडलों के दामों में कोई कटौती नहीं करेगी.

मर्सिडीज की जिन कारों की कीमत कम की है उनकी कीमत 32 लाख रुपये से लेकर 1.87 करोड़ रुपये के बीच है. कंपनी के मुताबिक मर्सिडीज सीएलए की कीमत में 1.4 लाख रुपये की कटौती की जाएगी. वहीं कंपनी की मेबैच एस 500 कीमत में 7 लाख रुपये की कटौती की जाएगी.

गौरतलब है कि पिछले दिनों जीएसटी के रेट में लग्जरी कारों की कीमतों में 28 फीसदी के स्लैब के हिसाब से कमी आई थी. मर्सिडीज की जितनी भी मेड इन इंडिया कारें हैं सब पर कंपनी 1 जुलाई से लागू हो रही कीमत के हिसाब से ग्राहकों को अपनी कारें बेचेगी.

मर्सिडीज की कारें 4 फीसदी सस्ती होने के बाद राज्यों में लगने वाले टैक्स के अनुसार 2 से 9 फीसदी तक सस्ती होंगी. मर्सिडीज पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसने जीएसटी लागू होने से पहले इसका फायदा ग्राहकों को दे दिया है.

आपको बता दें कि मर्सिडीज बेंज ने अपने ग्राहकों के लिए विशेष वारंटी योजना एडवांस एश्योरेंस प्रोग्राम शुरू किया है. इसके तहत उसके वाहनों पर छह साल तक की एक्सटेंडेड वारंटी ली जा सकेगी.

जीएसटी के बाद घटेगा टैक्स

जीएसटी काउंसिल ने पिछले हफ्ते तय किया था कि कारों और एसयूवी को 28 पर्सेंट टैक्स के सबसे ऊंचे स्लैब में रखा जाएगा. इसके अलावा छोटी कारों पर 1 से 3 पर्सेंट तक और बड़ी गाड़ियों पर 15 पर्सेंट सेस लगेगा. लग्जरी कारों पर अभी 55 पर्सेंट तक टैक्स लगता है. इसका मतलब यह हुआ कि जीएसटी लागू होने पर इस सेगमेंट में टैक्स 12 पर्सेंट तक घटेगा.

क्रिकेट के इस रिकॉर्ड में भी पाक से आगे हैं भारतीय बल्लेबाज

वनडे क्रिकेट में अब तक दोहरे शतक के 6 रिकॉर्ड बन चुके हैं. जिनमें से 4 रिकॉर्ड भारतीय बल्लेबाजों के नाम है. भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और मौजूदा क्रिकेटर रोहित शर्मा ने 50 ओवर क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने का कारनामा अपने नाम किया था.

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि गाजियाबाद के 12 साल के एक खिलाड़ी ने मात्र 40 ओवरों के क्लब मैच में तिहरा शतक लगाकर अपनी टीम को 252 रनों ते जीत दिलाई है. स्वास्तिक ने 138 गेंदों पर 356 रन बनाए.

गाजियाबाद में आरसीवी क्रिकेट एकेडमी के सलामी बल्लेबाज स्वास्तिक चिकारा ने 23 मई 2017 को जो करिश्मा किया, उसके बारे में क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाजों ने भी नहीं सोचा होगा. गाजियाबाद के अटोर गांव के स्वास्तिक ने अंडर-16 टूर्नामेंट में सिर्फ 40 ओवर के मैच में ही तिहरा शतक जड़ डाला.

हालांकि, मैन ऑफ द मैच स्वास्तिक की पारी की तुलना सचिन, सहवाग और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों की पारियों से नहीं की जा सकती, लेकिन किसी भी स्तर के क्रिकेट में सीमित ओवरों के मैच में तिहरा शतक बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.

पारी में 48 चौके और 22 छक्के लगाए

आरसीवी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया. स्वास्तिक ने पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर अपने इरादे जाहिर कर दिए. इसके बाद दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे और स्वास्तिक चौके और छक्के जड़ते रहे. स्वास्तिक ने 138 गेंदों में 48 चौके और 22 छक्कों की मदद से 356 रन ठोक डाले. उनकी इस विशाल पारी की बदौलत टीम ने 452 रन स्कोर बनाया. जवाब में आरपी पानीपत 37.2 ओवर में 200 रन पर ढेर हो गई. स्वास्तिक ने गेंदबाजी में भी हाथ दिखाते हुए दो विकेट चटकाए.

पाक क्रिकेटर के नाम है वनडे में तिहरा शतक का रिकॉर्ड

आपको बता दें कि स्वास्तिक के साथ साथ वनडे क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड पाकिस्तनी क्रिकेटर बिलाल इरशाद अहमद के भी नाम है. पाकिस्तान में इंटर क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप के मुकाबले में 26 वर्षीय बिलाल इरशाद अहमद ने ताबड़तोड़ बैटिंग करते हुए इतिहास रच दिया था. 50 ओवर के मैच में इस खिलाड़ी ने ट्रिपल सेंचुरी लगाने का कारनामा कर दिखाया. बिलाल ने महज 175 गेंदों पर 9 छक्के और 42 चौकों की मदद से नाबाद 320 रन बनाए.

सचिन ने जड़ा वनडे का पहला दोहरा शतक

सईद अनवर (194 रन) और चार्ल्स कोवेंट्री (194 रन) के बाद साल 24 फरवरी 2010 में ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने 200 रनों की पारी खेलकर ना सिर्फ अनवर का रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बने.

वीरू और रोहित ने भी बनाए है वनडे में दोहरा शतक

सचिन के बाद तो वीरेंद्र सहवाग ने साल 2011 में इंदौर वनडे में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे में दोहरा शतक जड़ दिया. सहवाग ने 219 रन बनाए थे. रोहित शर्मा दोनों से एक कदम आगे निकलते हुए दो बार वनडे में दोहरा शतक ठोक चुके हैं. रोहित ने 2013 में बेंगलुरु में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 209 रन और साल 2014 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे में 264 रनों की पारी खेल चुके है.

ये है दुनिया का सबसे महंगा फोन

वैसे तो आए दिन नए नए स्मार्टफोन्स मार्केट में आते रहते हैं, लेकिन इन दिनों एक फोन ने अपनी ओर खासा ध्यान खींचा है. इस फोन की खासियत ही ऐसी है कि आपको भी इसे लेने का मन करेगा. लग्जरी फोन बनाने वाली कंपनी Vertu ने हाल ही 2.3 करोड़ रुपए का फोन लॉन्च किया है. इस फोन की केवल 8 यूनिट तैयार की गई हैं, यानी कि इन फोन्स को केवल 8 लोग ही खरीद सकते हैं. कमाल की बात तो यह है कि इस फोन की होम डिलिवरी कंपनी खुद हेलीकॉप्टर से करवाएगी.

आपको बता दें कि Vertu Signature Cobra की कीमत 2.3 करोड़ रुपए है. इतने महंगे इस फोन में स्मार्टफोन जैसे कोई फीचर्स नहीं हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि अगर फोन में वही 500 से 1000 रुपए वाले फीचर फोन वाले ही फीचर्स हैं, तो आखिर यह इतना महंगा क्यों है. हम आपको बताते हैं.

दरअसल यह फोन इसलिए महंगा है क्योंकि इसको 400 से ज्रूादा रूबी से सजाया गया है. फोन की डिजाइन कोबरा शेप में है और यही वजह है कि इस फोन का नाम भी Vertu Signature Cobra रखा गया है. फोन पर बने इस कोबरा स्नेक की दोनों आंखों के ऊपर दो हीरे भी जड़े हुए हैं.

इस फोन को चाइना के ई कॉमर्स पोर्ट JD.com पर लिस्टिड किया गया है. पोर्टल पर कोई भी इस फोन को बुक कर सकता है. हालांकि उसे डिलिवरी के वक्त 145 डॉलर चुकाने होंगे. वहीं बाकी पैसे डिलिवरी के बाद देने होंगे.

क्या आपने देखा महेंद्र सिंह धोनी का यह बाहुबली 2 वीडियो

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के फैन्स के लिए वर्चुअल ट्रीट का समय आ गया है. इन दिनों लोगों के दिलो दिमाग पर बाहुबली 2 का फीवर छाया हुआ है. लोग दो से तीन बार तक सिनेमा हॉल में जाकर इस फिल्म को देख रहे हैं. फिल्म ने कमाई से लेकर करीब हर रिकॉर्ड तोड़ डाला है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर धोनी लवर्स का दिल खुश हो जाएगा.

इन दिनों धोनी और बाहुबली का एक स्मैश वीडियो सोशल मीडिया पर हॉट टॉपिक बना हुआ है. इस कमाल के वीडियो में एमएस धोनी को बाहुबली के रूप में दिखाया गया है. इतना ही नहीं वीडियो में बाहुबली के डायलॉग भी इस्तेमाल किए गए हैं और दृश्य धोनी के जीवन पर बनी फिल्म धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में से लिए गए हैं. हालांकि इनमें सुशांत सिंह राजपूत नहीं, बल्कि खुद धोनी की कई मैच की झलकियां देखने को मिलती हैं.

इस स्मैश वीडियो को वॉल मास्क के यूट्यूब पेज पर शेयर किया गया था, लेकिन यह वायरल अब हुआ है. इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट में पैसों की बारिश कर दी और अमरेंद्र बाहुबली ने फिल्म में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले.

सचिन ए बिलियन ड्रीम्स : शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचने की दास्तान

क्रिकेटर एम एस धोनी की बायोपिक फिल्म ‘‘एम एस धोनी अनटोल्ड स्टोरी’’ को मिली अपार सफलता के बाद अब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर के जीवन पर फिल्मकार जेम्स अर्कस्क्रीन डाक्यूड्रामा फिल्म ‘‘सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स’’ लेकर आए हैं. दोनों ही फिल्में क्रिकटरों की होने के बावजूद बहुत अलग हैं. इसलिए दर्शक को इन दोनों फिल्मों की तुलना करने से बचना होगा. क्योंकि ‘‘एम एस धोनी अन टोल्ड स्टोरी’’ में क्रिकेटर एम एस धोनी की कहानी में कल्पना का पुट भी था. जबकि ‘सचिनःए बिलियन ड्रीम्स’ में कुछ भी काल्पनिक नहीं है.

फिल्म ‘‘सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स’’ एक मध्यमवर्गीय परिवार के लड़के की अपने परिश्रम के बलबूते शोहरत की बुलंदियो पर पहुंचने की दास्तान है. जो कि हर इंसान खास तौर पर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सबक बन सकती है. इस फिल्म में सचिन की मेहनत, ईमानदारी, सकारात्मक सोच का चित्रण है. सचिन ने तुरंत सफलता पाने के लिए जोड़तोड़ यानी कि शार्ट कट रास्ता नहीं अपनाया. मगर जैसा कि हर इंसान की आटोबायोग्राफी की किताब में उसके जीवन के नकारात्मक पहलुओं पर कम बात होती है, उसी तरह इस फिल्म में भी कुछ कमियां नजर आती हैं. मसलन-बचपन के दोस्त सचिन और विनोद कांबली के बीच करियर के लगभग अंतिम पड़ाव के वक्त  जो दरार आयी थी, उस पर यह फिल्म कुछ नहीं कहती. जबकि सचिन व विनोद कांबली की लंबी पारी का जिक्र यह फिल्म करती है. वैसे इस फिल्म में सचिन की जिंदगी के कई वास्तविक वीडियो समाहित किए गए हैं.

फिल्मकार जेम्स अर्कस्क्रीन ने फिल्म की शुरुआत बहुत भावनात्मक मोड़ से की है. शुरुआत एक वीडियो से होती है, जिसमें सचिन अपनी बेटी सारा को गोद में लिए हुए हैं. उस वक्त पहली बार अपनी बेटी को गोद में लेते हुए सचिन ने कहा था-‘मुझे बहुत डर लग रहा है, इसे पकड़ने में.’ उसके बाद कहानी सचिन के बचपन में चली जाती है. बचपन में वह बड़े शरारती थे, पर जब उनकी बड़ी बहन कश्मीर से लाया गया बैट यानी कि बल्ला उपहार में सचिन को देती हैं और यहीं से सचिन की जिंदगी बदल जाती है.

फिर सचिन के बड़े भाई अजीत तेंडुलकर उन्हे लेकर क्रिकेट के कोच रमाकांत आचरेकर के पास जाते हैं. पहली ही गेंद पर सचिन के स्टैंप धराशाही हो जाते हैं. तब अजीत, रमाकांत आचरेकर से कहते हैं कि सचिन जल्द ही तकनीक सीख लेगा. फिर मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे की इच्छा, महत्वाकांक्षा, हंसी, खुशी, संघर्ष और गम आदि का जिक्र हो जाता है. अपने कोच आचरेकर से क्रिकेट सीखने से लेकर पहले मैच तक पहुंचने, जो कि पाकिस्तान के खिलाफ था, की कथा नाटकीय ढंग से चित्रित की गयी है. उसके बाद फिल्म में ज्यादातर वीडियो ही दिखाए गए हैं. बीच बीच में सचिन सूत्रधार के रूप में आते रहते हैं.

फिर वह वीडियो आता हैं, जिसे क्रिकेटर सचिन के खेल की पहचान कहा जाता है. और उससे प्रभावित होकर रमाकांत आचरेकर, अजीत से पूछते हैं कि ‘नाम क्या बताया तुम्हारे भाई का’, जिसका जवाब कंमेटेटर टोनी ग्रेग की घोषणा में आता है-सचिन तेंडुलकर. कहानी पहुंच जाती है 1983 के विश्व कप क्रिकेट तक. जिसने सचिन की जिंदगी को नई दिशा दी. वह क्रिकेट को जिंदगी मानते हुए विश्व कप जीतने का सपना देखने लगे. कई मैच के वीडियो सचिन के सपनों व उनके क्रिकेट को परदे पर पेश करते हैं. मसलन-वासिम अकरम और वकार युनुस का सचिन को चिढ़ाना, एक नौसीखिए गेंदबाज की गेंद का सचिन की नाक पर लगना तथा सचिन का कहना कि ,‘‘मैं अपने देश को नीचे आने नहीं दे सकता और न ही क्रीज छोड़कर जा सकता हूं.’

1996 में ईडेन गार्डेन पर खेले गए ‘विश्व कप सेमी फाइनल’ सहित कई मैच के वीडियो नजर आते हैं. फिर भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन के पद से हटाए जाने पर सचिन अपनी बेबाक राय रखते हैं. वह कहते हैं-कैप्टनशिप छीनी जा सकती है, पर क्रिकेट नहीं.’ फिर 1999 में खेले गए कई मैचों के रोचक पल नजर आते हैं. इंटरवल से पहले वह सीन आता है, जब अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सचिन किक्रेट के लिए वापस इंग्लैंड पहुंचते हैं. क्योंकि वह मानते हैं कि उनके पिता भी यही चाहते कि वह देश के लिए खेले. पर पिता को खोने का दर्द उस वक्त स्पष्ट रूप से उनके चेहरे पर झलकता है, जब उनकी पत्नी अंजली होटल के कमरे में पिता के देहांत की खबर देती हैं. और दर्शक भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाता.

उसके बाद सचिन व अंजली के बेटे अर्जुन तेंडुलकर के जन्म की कहानी, सचिन उसे महान क्रिकेटर बनाने के लिए किस तरह ट्रेनिंग देते हैं, और सचिन के परिवार वालों को लगता है कि सचिन के पिता अर्जुन के रूप में वापस आ गए हैं. फिर सचिन के करियर का कठिन पड़ाव शुरू होता है, जब उन्हे दूसरी बार भारतीय क्रिकेट टीम का कैप्टन बना दिया जाता है. मैच फिक्सिंग का दौर चरम पर था. हर क्रिकेटर इस डर के साथ खेल रहा थाकि उनके खिलाफ कभी भी जांच हो सकती हैं, दूसरी तरफ सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण उभर रहे थे. जबकि मोहम्मद अजहरूद्दीन जैसे कुछ क्रिकेटर उनकी बात नहीं मान रहे थे. फिल्म में उनके करियर के पतन का भी जिक्र है. अखबारों में उनके पतन की सुर्खियों का भी जिक्र है, पर उस वक्त उनके दोस्तों ने उनका साथ दिया. 2007 में शर्मनाक हार के बाद 2011 विश्व कप जीतने की मेहनत को भी बेहतर तरीके से दिखाया गया है. अंततः वानखेड़े स्टेडियम में सचिन का क्रिकेट से संन्यास लेने के अति भावुक सीन के साथ फिल्म खत्म होती है और दर्शक मंत्रमुग्ध रह जाता है.

फिल्मकार ने सचिन के जीवन के तमाम पहलुओं को बहुत ही बेहतरीन तरीके से फिल्म के अंदर पिरोया है. आम बालीवुड फिल्मों से हटकर इस फिल्म में सचिन के जीवन को काफी यथार्थपरक तरीके से पेश किया गया है. सचिन के जीवन व करियर के उतार चढ़ाव कई जगहों पर सपनों की दुनिया सी लगती है, जबकि वह यथार्थ है. फिल्मकार ने सचिन को ही ज्यादा महत्व दिया. उन्हे एक अच्छा पुत्र, एक अच्छा पिता, एक अच्छा पति दिखाया है, पर सचिन व अंजली की प्रेम कहानी पर फिल्म कुछ नही कहती. फिल्म में क्रिकेट के काले अध्याय का भी ज्रिक है. मगर सचिन को जब सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड और धोनी के कैप्टनशिप में खेलना पड़ा, उन दिनों की उनकी मानसिक स्थिति पर कोई बात नही करती. मो.अजहरूद्दीन के साथ विवाद को ठीक से चित्रित नहीं किया गया. संगीत के प्रति सचिन के लगाव का भी जिक्र अच्छे ढंग से किया गया है. फिल्म में सुनील गावसकर, कपिल देव व रवि शास्त्री तथा सचिन के प्रशंसक के रूप में अमिताभ बच्चन और सचिन की पत्नी अंजली के इंटरव्यू भी हैं.

एक बेहतरीन डाक्यूड्रामा वाली फिल्म बनाने के लिए निर्देशक जेम्स अर्कस्कीन के साथ ही लेखक जेम्स अर्कस्क्रीन व शिवकुमार अनंत बधाई के पात्र हैं.

जहां तक फिल्म को दर्शक मिलने का सवाल है, तो इस पर कुछ भी ठोस कहना मुश्किल है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आज की नई पीढ़ी ने सचिन के बल्ले का कमाल देखा नहीं है. आज की नई पीढ़ी को पता ही नहीं है कि सचिन को क्रिकेट का भगवान क्यों कहा जाता है. दूसरी बात यह फिल्म डाक्यूड्रामा है. जिसमें नाटकीयता नहीं है, जो मनोरंजन दे, पर क्रिकेट प्रेमियों को फिल्म पसंद आनी चाहिए.

दो घंटे 19 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स’’ के निर्माता रवि भागचंदका व  कार्निवल मोशन सिनेमा, लेखक व निर्देशक जेम्स आर्कस्क्रीन, संगीतकार ए आर रहमान हैं. फिल्म के कलाकार हैं-सचिन तेंडुलकर, अर्जुन तेंडुलकर, मयूरेश पेम, महेद्र सिंह धोनी, अंजली तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सारा तेंडुलकर.

इमरान खान का करियर संवारेंगे आमिर खान

आमिर खान के भांजे व अभिनेता इमरान खान ने बड़े जोर शोर से 2008 में फिल्म ‘‘जाने तू या जाने ना’’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा था. मगर उनका करियर गति नहीं पकड़ पाया. 2008 से 2013 के बीच उन्होंने 12 फिल्मों में अभिनय किया. मगर इनमें से एक भी फिल्म उन्हे स्टार नहीं बना सकी. 18 सितंबर 2015 को प्रदर्शित फिल्म ‘‘कट्टी बट्टी’’ में वह कंगना रानौट के साथ नजर आए थे. इस फिल्म की बाक्स आफिस पर ऐसी दुर्गति हुई कि निखिल आडवानी ने इसके बाद अपनी दूसरी फिल्म में इमरान खान को लेने का इरादा छोड़ दिया. बतौर अभिनेता इमरान खान को एक भी फिल्म नहीं मिली. तब से वह गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं.

पर अब सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार इमरान खान ने अभिनय से तोबा कर लीया है. पिछले दो वर्ष के दौरान वह घर पर बैठ कर फिल्म की पटकथा पर काम करते रहे. अब वह अपनी लिखी इस फिल्म की पटकथा वाली फिल्म का निर्देशन करने वाले हैं, जिसका निर्माण कोई और नहीं बल्कि इमरान खान के मामा यानि कि आमिर खान करेंगे.

16 साल बाद इरफान और आसिफ कपाड़िया की जोड़ी

हौलीवुड फिल्म ‘‘द वारियर’’ में इरफान खान ने आस्कर से पुरस्कृत निर्देशक आसिफ कपाड़िया के संग काम किया था. अब पूरे सोलह साल बाद इरफान खान और निर्देशक आसिफ कपाड़िया की जोड़ी एक साथ नजर आएगी. इस बार आसिफ कपाड़िया मशहूर पाकिस्तानी लेखक मोहसीन हमीद की किताब ‘‘मोथ स्मोक’’ पर आधारित फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिसमें मुख्य भूमिका निभाने के लिए उन्होंने इरफान खान को चुना है.

16 साल पहले ब्रिटेन में रह रहे आसिफ कपाड़िया ‘‘द वारियर’’ से पहली बार निर्देशन में उतरे थे और उन्होंने इस फिल्म में एक अहम किरदार निभाने के लिए इरफान खान को चुना था. इस फिल्म ने उस वक्त ‘बाफ्टा’ सहित कई पुरस्कार बटोरे थे. यहां तक कि इस फिल्म में अभिनय कर इरफान खान, आसिफ कपाड़िया की निर्देशकीय प्रतिभा से इस कदर प्रभावित हुए थे कि वह गाहे बगाहे आसिफ कपाड़िया की तारीफ किया करते हैं. बहरहाल, 16 साल के अंतराल में आसिफ कपाड़िया के नाम पर ‘बाफ्टा’ व ‘आस्कर’ सहित कई पुरस्कार दर्ज हो चुके हैं.

सूत्रों के अनुसार अब इरफान खान लंबे समय से आसिफ कपाड़िया के साथ काम करने की सोच रहे थे. इसी के चलते वह अच्छी कहानी की तलाश में थे. सूत्र दावा कर रहे हैं कि मोहसीन हमीद की किताब ‘मोथ स्मोक’ पर फिल्म बनाने के अधिकार इरफान खान, आसिफ कपाड़िया और फिल्म ‘बांबे वेल्वेट’ में कार्यकारी निर्माता रहे दीना पटानी ने मिलकर खरीदे हैं. अब यह तीनों मिलकर ही फिल्म का निर्माण करेंगे, जिसका निर्देशन आसिफ कपाड़िया करेंगे. इसकी पहली कहानी ‘दारू शेहजाद’ है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि इसमें शेहजाद का किरदार इरफान खान निभाएंगे. शेहजाद उस युवक की कहानी है, जो कि कि लाहौर में एक बैंक में काम कर रहा है. मगर अपनी बुरी आदतों, ड्रग्स व अपराध से जुड़ने पर नौकरी से निकाल दिया जाता है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस फिल्म का फिल्मांकन कहां किया जाएगा? क्योंकि भारत व पाकिस्तान के बीच जो हालात बने हुए हैं, उन हालातों में इस फिल्म को कहां फिल्माया जाएगा, यह तय नहीं हो पाया है. फिलहाल इस बारे में इरफान खान कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं.

वैसे 2000 में छपी किताब ‘मोथ स्मोक’ पर 2002 में पाकिस्तानी फिल्मकार अजफार अली ने ‘दायरा’ नामक फिल्म बनायी थी, जिसे उर्दू में ‘सर्कल’ नाम दिया गया था. इस फिल्म में पाकिस्तानी अभिनेता शेहजाद नवाज ने अभिनय किया था. उसके बाद इस पर हिंदी फिल्म बनाने की योजना बनी थी, जिसे राहुल बोस निर्देशित करने वाले थे. पर बाद में यह फिल्म नहीं बन पायी थी.

अब देखना है कि इस बार इरफान खान, आसिफ कपाड़िया व दीना पटानी का यह प्रयास क्या रंग लाता है?

सुमन नेगी की बौलीवुड में वापसी

मॅालीवुड की ऐश्वर्या कही जाने वाली तथा 2004 में सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म ‘‘धाकड़ छोरा’’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाली अदाकारा सुमन नेगी एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वह किरण कुमार तितोया निर्मित तथा संदीप कुमार निर्देशित रहस्य प्रधान रोमांटिक फिल्म ‘‘बेईमान आशिक’’ को लेकर चर्चा में हैं.

मूलतः उत्तराखंड निवासी और गढ़वाली राजपूत सुमन नेगी की परवरिश व शिक्षा दिक्षा मेरठ में हुई. उनके माता पिता मेरठ के कालेज में प्रोफेसर रहे हैं. ‘मिस मेरठ’ चुनी जाने के बाद सुमन नेगी ने मेरठ में ही तीन लाख रूपए की लागत से बनी फिल्म ‘‘धाकड़ छोरा’’ में अभिनय किया था, जिसमें उनके हीरो उत्तर कुमार थे. इस फिल्म ने 2004 में एक करोड़ कमा लिए थे. उसके बाद वह ‘मालीवुड’ की ऐश्वर्या के रूप में मशहूर हो गयी थी. फिर उन्होंने कई फिल्में की. उनकी एक फिल्म ‘‘किस्मत एक अनोखा मोड़’’ कान्स फिल्म फेस्टिवल में भी गयी थी. पर पिछले चार वर्षों से उनके बारे में कोई खबर नहीं थी.

बहरहाल अब उन्होंने फिल्म ‘‘बेइमान आशिक’’ से पुनः अभिनय क्षेत्र में कदम रखा है. इस फिल्म की चर्चा चलने पर सुमन नेगी ने कहा-‘‘मैने इसमें रिया नामक एक बिंदास व बोल्ड लड़की का किरदार निभाया है. इसमें मैने अपनी प्रतिभा व नाम के अनुसार ही किरदार निभाया है. मैं बौलीवुड में एक अलग मुकाम बनाना चाहती हूं.’’

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