Download App

इस ढोल में पोल ही है

सास बहू की तकरारों के किस्से हर जबान पर होते हैं पर साथसाथ रहते उन में अकसर ऐसा प्रेम हो जाता है कि एकदूसरे के बिना जीना दूभर हो जाता है. जौनपुर के निकट मछली शहर की एक 55 वर्षीय बहू की सड़क पर जाते हुए दुर्घटना में मौत का समाचार जब इलाहाबाद में इलाज करा रही उस की 78 वर्षीय सास को मिला तो उन्होंने दम तोड़ दिया. दोनों की अरथी एकसाथ घर से निकली. सास लंबी बीमारी से ग्रस्त थीं पर बहू ने अपनेपन से उन का ध्यान रखा था. इसीलिए बहू की मृत्यु के समाचार का आघात सास सह न सकीं और चल बसीं.

सासबहू का 10-15 साल साथ रहने के बाद प्यार स्वाभाविक है. अगर इस प्यार में खटास पैदा होती है तो समाज के उन विध्वंसकों के कारण जो हर समय सासबहू के मामूली मतभेद को बढ़ाचढ़ा कर पेश करते रहते हैं. इस बारे में इतने सवाल किए जाते हैं कि हर सास को हर बहू पर संदेह होने लगता है. इस पर दूसरे रोज तेजाब डालते हैं.

महान संस्कारों और संस्कृति का ढोल पीटने वाले भूल जाते हैं कि इस ढोल में पोल ही है बस. हमारे यहां संबंध केवल स्वार्थ और संदेह पर टिके हैं और यह हमें विरासत में मिला है. जिन पौराणिक घटनाओं का आंख मूंद कर हवाला दिया जाता है उन में सासबहू का मतभेद जम कर महिमामंडित किया गया है. जो प्रवचन आज दिनरात दिए जा रहे हैं और जिन का धंधा अब चमचमाने लगा है उन में सास के मन में भरा जाता है कि वह पूजनीय है, कामधाम न करे, बैठ कर खाए. केवल पुत्रवती बहू को स्वीकारे, दहेज सांस्कारिक है और बहू को रीतिरिवाजों से बांध कर रखे. ऐसे में बहू भला कैसे खुश रहेगी.

अगर उलट शिक्षा दी जाए कि बहू जीवन का अभिन्न अंग है, बेटे के बराबर नहीं, बढ़ कर है, बेटी की तरह पराए घर में भी नहीं रहती. सासबहू में जौनपुर वाली सासबहू का लगाव होना स्वाभाविक ही है. आज की गलत शिक्षा पाश्चात्य देन नहीं, हमारी अपनी सांस्कृतिक विरासत है जिसे चिपका कर नहीं माथे पर लगाने में गर्व हो रहा है.एक घर में रहते सास को सब से ज्यादा भरोसा बहू पर करना चाहिए. बेटे से भी बढ़ कर, बेटी को नाराज कर के भी. बहू से विवाद तभी खत्म होंगे जब वह दोस्त, सहयोगी अपनी सी हो. 

18 सालों तक रेंगने वाला ट्रायल

सूर्यनगरी के नाम से विख्यात जोधपुर की अदालत में चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रैट दलपत सिंह राजपुरोहित की कोर्ट दूसरी मंजिल पर है. उस दिन ठंड काफी तेज थी और हवा चल रही थी. इस के बावजूद कोर्ट के गलियारे में भारी भीड़ थी. उस दिन तारीख थी 18 जनवरी और चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रैट सलमान खान के 18 साल पुराने केस में अपना फैसला सुनाने वाले थे. इसलिए सुबह 9 बजे से ही लोग कतार लगाए खड़े थे.

उन्हें अपने उस हीरो के आने का इंतजार था, जिसे बहुचर्चित शिकार प्रकरण में अवैध हथियार रखने और हिरण के शिकार में इस्तेमाल करने के आरोपों में फैसला सुनाया जाना था.

ज्ञातव्य हो इस से पहले जयपुर हाईकोर्ट की विद्वान न्यायाधीश निर्मलजीत कौर 25 जुलाई, 2016 को सलमान खान को हिरणों के शिकार मामले में बरी कर चुकी थीं. इस के बाद उन पर आर्म्स एक्ट का ही मामला बचा था जो जोधपुर की अदालत में विचाराधीन था.

18 जनवरी, 2017 को सलमान जब जोधपुर में सुनाए जाने वाले फैसले के लिए अदालत में आने वाले थे तो उन की एक झलक पाने की बेताबी हर शख्स के चेहरे पर झलक रही थी. अच्छीखासी गहमागहमी के बीच वकील, अन्य मामलों के मुवक्किल, यहां तक कि सेलफोन कैमरा मोड किए पत्रकारों और फोटोग्राफर्स की अंगुलियां भी सलमान के फोटो खींचने को बेताब थीं.

स्थिति यह थी कि सवा 10 बजतेबजते कोर्ट रूम के बाहर जमा भीड़ बेकाबू होने लगी. पुलिस के लिए बंदोबस्त भारी पड़ रहा था. करीब साढे़ 10 बजे एकाएक हलचल मची, लेकिन आने वाली सलमान की बहन अलवीरा थीं, जो सीधे कोर्ट रूम में पहुंच गईं.

करीब 10 बज कर 35 मिनट पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट दलपत सिंह राजपुरोहित डायस पर आए. विद्वान न्यायाधीश ने वहां मौजूद सलमान खान के वकीलों में से एक से पूछा, ‘मुलजिम को कब तक लाओगे?’ जवाब में उन्होंने बताया, ‘मुश्किल से 20 मिनट लगेंगे.’ न्यायाधीश ने कहा, ‘ठीक है, आधे घंटे में ले आओ. वैसे कोर्ट का टाइम 5 बजे तक है.’

इस के साथ ही न्यायाधीश वापस अपने चैंबर में चले गए. वहां मौजूद सलमान खान की बहन अलवीरा जो अब तक विचार मुद्रा में खड़ी थीं, ने अपने वकील हस्तीमल सारस्वत को मोबाइल से फोन कर के न्यायाधीश की हिदायत के बारे में बताया. इस के बाद सवा 11 बजे अधिवक्ता सारस्वत अपने जूनियर्स के साथ कोर्ट रूम में पहुंच गए. इस के साथ ही लोगों में हलचल मच गई. उन्हें लगा कि अब सलमान आने वाले हैं.

इस नाटकीय दृश्यांतर के साथ करीब साढ़े 11 बजे सलमान खान कोर्ट पहुंचे. विद्वान न्यायाधीश ने उन से नाम पूछा जो उन्होंने बता दिया. जज ने कहा, ‘‘आप पर आर्म्स एक्ट की धारा 2/25 और 27 के तहत 2 मामले हैं.’’

सलमान खान ने नजरें झुका कर केवल हां कहा. उन्होंने न्यायाधीश की तरफ नजरें उठा कर देखने की कोशिश जरूर की लेकिन तुरंत ही नजरें झुका लीं. उन के चेहरे पर तनाव साफ नजर आ रहा था. न्यायाधीश राजपुरोहित ने आदेश पढ़ना शुरू किया. उन्होंने 3-4 लाइनें ही पढ़ी होंगी, जिन का भावार्थ समझते ही वकीलों में हलचल मच गई. कानाफूसी का दौर शुरू हुआ तो अलवीरा का चेहरा खुशी से दमक उठा. सलमान ने ध्यानपूर्वक फैसला सुना, लेकिन उन का चेहरा निर्विकार बना रहा.

 

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट दलपत सिंह राजपुरोहित ने अपने फैसले में कहा, ‘‘यह मुकदमा सलमान खान के खिलाफ आर्म्स एक्ट में बनता ही नहीं है. यह केस आर्म्स एक्ट की धारा 21(1) में बनता है. जिस का ज्यूरिडिक्शन भी जोधपुर नहीं मुंबई में होना चाहिए. क्योंकि लाइसैंस मुंबई से जारी हुआ था.’’

सलमान खान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने तक के दौरान सिलसिलेवार कमियां बताते हुए विद्वान न्यायाधीश राजपुरोहित ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष सलमान के खिलाफ लगे आरोपों को प्रमाणित करने में पूरी तरह विफल रहा है. यहां तक कि सलमान को मुंबई के बजाय लूणी निवासी बता दिया गया है.’’

कुछ ही क्षणों में पटकथा बदल गई. दरअसल फैसला इतनी सहजता से सुनाया गया था कि किसी को उस का अंदाजा तक नहीं हुआ. फैसला सुनते ही अदालत परिसर में मौजूद अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों समेत कानून के जानकार हैरत में रह गए. उन के हतप्रभ होने की वजह भी स्पष्ट थी कि 18 बरसों तक कानून के इस महत्त्वपूर्ण नुक्ते पर अभियोजन पक्ष का ध्यान क्यों नहीं गया.

102 पेज के फैसले में न्यायाधीश की यह टिप्पणी भी काफी हद तक चौंकाने वाली थी कि तत्कालीन जिला कलक्टर ने यह तक नहीं देखा कि सलमान कहां का रहने वाला है. वे पूरी तरह सरकारी वकीलों पर निर्भर रहे. फैसले में पुलिस और प्रशासन का हर हथियार भोथरा होता नजर आया.

 

यह प्रकरण अदालत में 18 साल से खिंचता आ रहा था. इतना लंबा ट्रायल भुगतने की वजह का खुलासा करते हुए विद्वान न्यायाधीश दलपत सिंह राजपुरोहित ने सवाल उठाया कि जब 29 सितंबर, 1998 को सलमान के कमरे में बिना लाइसेंस रिन्यू कराए गए हथियार मिले थे, तब काररवाई क्यों नहीं की गई?

जज ने आगे कहा कि लापरवाहीपूर्वक अनुसंधान और चार्जशीट फाइल करने के परिणामस्वरूप सलमान को लंबा ट्रायल भुगतना पड़ा.

इस फैसले में हर कदम पर पुलिस और प्रशासन की नाक नीची होती नजर आई. पुलिस ने सलमान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत मामला दर्ज किया था. यह धारा अवैध हथियार यानी जिस का कभी कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ हो, रखने पर लागू होती है. जबकि इस मामले में ऐसा बिलकुल नहीं था सलमान के पास हथियार का लाइसेंस था, लेकिन उस लाइसेंस की अवधि 22 सितंबर, 1998 को खत्म हो चुकी थी.

यदि किसी हथियार की लाइसेंस अवधि खत्म हो चुकी हो तो उसे संबंधित पुलिस थाने में जमा कराना होता है. ऐसा नहीं करने पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 का उल्लंघन नहीं, बल्कि लाइसेंस नवीनीकरण की धारा 22(1) का उल्लंघन माना जाता है. अगर ऐसा था तो इस धारा का प्रकरण जोधपुर के बजाय मुंबई में चलना चाहिए था. क्योंकि लाइसैंस मुंबई से जारी हुआ था.

न्यायाधीश के फैसले में पुलिस की तफ्तीश पर सवाल उठाया गया था कि इस मामले में पुलिस ने आर्म्स एक्ट की धारा 27 क्यों जोड़ी? जबकि यह धारा अवैध हथियार यानी लाइसेंस से संबंधित है. अभियोजनपक्ष के अनुसार सलमान ने बिना लाइसैंस रिन्यू कराए रिवौल्वर और राइफल का इस्तेमाल काले हिरणों के शिकार में किया. लेकिन कोर्ट में इन हथियारों की शिनाख्त तक नहीं कराई गई. इस का मतलब हथियार पुलिस के कब्जे में नहीं थे.

इस मामले में पूरा सिस्टम फेल कैसे हुआ, इस की बानगी समझें तो हिरणों के शिकार की पहली प्राथमिकी वन विभाग द्वारा दर्ज की गई. तत्कालीन वन अधिकारी ललित बोड़ा द्वारा सलमान के आदमी को भेज कर मुंबई से हथियार मंगाए गए. प्रश्न यह है कि जब सलमान वन विभाग की कस्टडी में थे तो आर्म्स एक्ट की धारा 27 के अंतर्गत सूचना ले कर हथियार खुद बरामद कर के क्यों नहीं लाए?

पुलिस के पास यह प्रकरण वन विभाग से आया. लेकिन विवेचना अधिकारी ने गिरफ्तारी तो कर ली, पर ना तो साक्ष्य जुटाए और ना ही थानाप्रभारी मांगू सिंह से मौका मुआयना करवाया गया.

 

यहां तक कि महत्त्वपूर्ण गवाह सत्यमणि तिवारी के बयान भी घटना के 20 माह बाद लिए गए. तत्कालीन जिला कलेक्टर रजत कुमार मिश्र ने तो वरिष्ठ अधिकारी होने के बावजूद अभियोजन की स्वीकृति देने के दौरान इतना तक नहीं देखा कि सलमान कहां के रहने वाले हैं. जबकि अभियोजन स्वीकृति देने में 2 साल बीत गए.

अभियोजन पक्ष का सब से बड़ा दायित्व था कि वह केस फाइल को बारीकी से देखता कि उस में हिरण की खाल की एफएसएल की रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं था.

प्रमुख गवाह दिनेश गावरे की तफ्तीश तक नहीं की गई. जब केस फाइल में इंडियन एयरलाइंस के विमान से हथियार मुंबई भेजने का जिक्र था तो पैसेंजर मैनिफेस्टो की तफ्तीश की जानी चाहिए थी.

लूणी के तत्कालीन थानाप्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह ने सलमान खान के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी. लेकिन जिरह के दौरान उन का यह कथन हैरान करने वाला था कि उन्होंने चार्जशीट पढ़ी ही नहीं. कोर्ट ने उन के इस जवाब पर सख्त टिप्पणी की तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे तो सिर्फ आरोप पत्र पेश करने के निर्देश थे.’’

पिछले 18 सालों से सलमान खान का मुकदमा लड़ रहे एडवोकेट हस्तीमल सारस्वत की पैनी सूझबूझ की दाद देनी होगी कि उन्होंने अपनी बहस में अभियोजन पक्ष की हर छोटीबड़ी गलती को उठाया. फलस्वरूप उन की हर दलील अभियोजन पक्ष पर भारी पड़ती चली गई. एडवोकेट सारस्वत का कहना था सलमान के खिलाफ पूरा मामला फरजी बनाया गया था, इसलिए टिक नहीं पाया. उन के अनुसार कोर्ट ने हमारी इस दलील को माना कि सलमान को इस केस में फंसाया गया था.

हम ने कोर्ट में दलीलें दी थी कि सलमान के खिलाफ हथियार केस में कोई सबूत नहीं था, ना ही उन के जोधपुर में रहने के दौरान कोई सबूत मिला और ना ही कथित शिकार के दौरान मिला. उन्होंने कहा कि सलमान के पास तो सिर्फ एयरगन थी.

 

फैसले के दौरान सारस्वत की बेटी समृद्धि भी मौजूद थी. जैसे ही सलमान के पक्ष में फैसला आया, भावुकता के अतिरेक में अलवीरा ने अपने निकट खड़ी समृद्धि को गले लगा लिया. सलमान खान ने मुसकराते हुए समृद्धि से कहा, ‘यू आर माई लकी चार्म.’ जब हिरण प्रकरण का मुकदमा शुरू हुआ था तब समृद्धि की उम्र मात्र 1 साल थी.

अभियोजन पक्ष के वकील बी.एस. भाटी का कहना था कि फैसले की स्टडी करने के बाद हम सेशन कोर्ट में अपील करेंगे. गलत धाराओं में लंबी अवधि तक चलते रहे इस ट्रायल के बारे में फिल्म समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का यह तंज बहुत कुछ कह जाता है कि जोधपुर में अदालत की तरफ जाने वाले रास्ते पर भीड़ बढ़ गई है. 18 वर्ष पहले का प्रकरण आज तक रेंग रहा था?’’       

हौट वैदर, हौट हेयरस्टाइल

खूबसूरत दिखने में हेयरस्टाइल बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. युवतियां हर मौके पर अलगअलग हेयरस्टाइल कैरी करना चाहती हैं, लेकिन इस के लिए जरूरी नहीं कि पार्लर जा कर ही हेयरस्टाइल बनवाया जाए. आप चाहें तो घर पर ही एक अच्छा और नया हेयरस्टाइल ट्राई कर सकती हैं. आइए जानें कैसे:

शादी या फंक्शन में जाने के लिए हेयरस्टाइल

सब से पहले बालों को सुलझा लें. फिर फ्रंट के थोड़े से बालों को सौफ्ट लुक देने के लिए छोड़ दें और बाकी बैक कौंब करते हुए स्प्रे करें. फिर कुछ बालों को ले कर लूप बनाते हुए जूड़ा बनाती जाएं. जूड़े की फाइनल फिनिशिंग जूड़ा पिन से करें. बाद में ज्वैलरी से मैचिंग सिल्वर या गोल्डन ज्वैल्ड फ्लावर्स या पिन्स लगाएं.

गर्लिश लुक हेयरस्टाइल

इस हेयरस्टाइल के लिए बालों को आयरन रोड से सीधा कर लें और आगे के बालों की हलके हाथों से बैक कौंबिंग करते हुए पफ बना लें. बैक कौंबिंग किए बालों को साइड में पिनअप कर लें. इस तरह के हेयरस्टाइल के लिए ज्वैल्ड पिन्स का प्रयोग कर के स्टाइलिश लुक पाया जा सकता है.

बर्थडे गर्ल के लिए क्राउन पोनी

फ्रंट में यानी क्राउन पोर्शन के एक सैक्शन से बाल छोड़ कर पीछे के बालों में बैक कौंबिंग करें और अपनी पसंद के अनुसार हाई या बैक पोनी बना लें. अब आगे के बालों को ले कर अंदर की तरफ फोल्ड कर के पिनअप करें. इस तरह आप का हाई क्राउन तैयार हो जाएगा. अब आप अपनी चेन स्टाइल हेयर ऐक्सैसरीज से उसे डैकोरेट करें.

कालेज फेयरवल पार्टी

अगर आप के बाल छोटे हैं और आप अपने इस खास दिन कुछ अलग लंबे बालों वाला लुक चाहती हैं तो इस के लिए फोरहैड के पास वाले बालों का एक सैक्शन छोड़ कर पीछे के बालों में कौंब कर के पोनी बनाएं. आजकल बाजार में कई वैराइटी में स्टाइलिश ऐक्सटैंशन उपलब्ध हैं. लंबे बालों को ऐक्सटैंशन ले कर पोनी पर अटैच करें. अब आगे के बालों को एकदम सीधा ऊपर की तरफ उठा कर बैक कौंबिग करें. अब इन्हें बनाई गई पोनी के ठीक पास बौबी पिन से अटैच करें और पोनी के बेस में लगाए गए रबड़बैंड पर लपेट दें. बचे हुए एंड्स को जूड़ा पिन से टक करें.

मैसी बन फौर कालेज आउटिंग

अपने अंदर की फंकी साइड को बाहर लाना चाहती हैं तो उस के लिए मैसी बन को जरूर कैरी करें, क्योंकि इसे कैरी कर आप अपने दोस्तों के साथ आउटिंग पर भी जा सकती हैं. इसे बनाना भी बहुत आसान है, इस के लिए आप को कौंब की भी जरूरत नहीं है बस, सारे बालों को हाथ से ही सीधा कर के एक पोनी बनाएं और फोल्ड कर के रबर लगा लें.

पूल पार्टी के लिए हेयरस्टाइल

कुछ नया करने के लिए बालों की जड़ों में वौल्यूमाइजिंग हेयर स्प्रे लगाएं और माथे के ठीक ऊपर के बालों को बैक कौंब कर के मनचाही ऊंचाई दे कर बौबी पिन्स से सैट करें. पूल पार्टी के लिए यह हेयरस्टाइल बुरा नहीं है.

ट्रैंडी व कैजुअल लुक के लिए

ट्रैंडी और कैजुअल लुक के लिए वौल्यूमाइजिंग से बाल धोएं. फिर हलके गीले बालों के अंतिम सिरों पर थोड़ा सा सीरम लगाएं और हथेलियों से नीचे से ऊपर की ओर कुछ देर प्रैस करें. फिर इन्हें नैचुरली सैट होने दें. कौरपोरेट पार्टी अटैंड करने के लिए आप तैयार हैं.

इस तरह आप हौट वैदर में हौट हेयरस्टाइल से सब को फिदा कर सकती हैं. आप के हौट हेयरस्टाइल को देख कर सब वाऊ कहे बिना नहीं रहेंगे, जिस से आप का कौन्फिडैंस बूस्ट होगा.

गरमियों के लिए कुछ खास हेयरस्टाइल

पोनीटेल : गरमियों में पोनीटेल बनाने से अच्छा हेयरस्टाइल कोई हो ही नहीं सकता. इस से एक तरफ आप गरमी से बची रहती हैं दूसरे, पोनीटेल स्टाइलिश और स्पोर्टी लुक भी देती है. इस हेयरस्टाइल में सारे बालों को पीछे की ओर से रबड़बैंड या रिबन से बांध दिया जाता है. पोनीटेल को आकर्षक बनाने के लिए कलरफुल पोनीटेल होल्डर भी लगाया जा सकता है.

शौर्ट लेयर्ड हेयर कट : यह हेयरस्टाइल किसी भी तरह के बालों पर बनाया जा सकता है. कर्ली और स्टेट बालों पर भी यह स्टाइल फबता है. इस में बालों को इस स्टाइल से काटा जाता है कि उस की कई लेयर नजर आती हैं जिन से बाल देखने में हैवी भी लगते हैं.

सुपर स्लीक शौर्ट हेयरस्टाइल : जिन के बाल सिल्की और बिलकुल स्टेट हैं उन पर यह स्टाइल अच्छा लगता है.

बौब हेयरस्टाइल : गरमियों के हिसाब से बौब हेयरकट सब से ज्यादा अच्छा रहता है. इसे किसी भी तरह के चेहरे के अनुरूप काटा जा सकता है. इस शौर्ट हेयरकट में सिर के चारों तरफ बाल सीधे काटे जाते हैं, जोकि लैंथ से थोड़े नीचे रहते हैं. कानों को ढकते हुए इस हेयर कट में बाल पीछे की अपेक्षा आगे से थोड़े लंबे होते हैं. बौब कट में भी कईर् स्टाइल हो सकते हैं जैसे कि अगर इस में बीच से पार्टीशन करते हैं तो एक साइड लंबे रख सकते हैं और दूसरी तरफ छोटे. इस के अलावा बौबकट में ‘चिन लैंथ ट्रैडिशनल बौबकट’, ‘शौर्ट लैयर्ड ब्लांड बौब स्टाइल’ भी ट्राई कर सकती हैं.

क्रौप : इस हेयरस्टाइल में बाल एकदम छोटे रहते हैं व बालों के सिरे ब्रोकन एग स्टाइल में कटे होते हैं जिस से इन्हें संवारने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. यह कट शार्प फीचर वाले फेस पर ज्यादा फबता है.

ब्लांड कर्ली हेयरकट : इस में बालों को घना दिखाने के लिए उन्हें लेयर में काटा जात है. इस हेयरकट की खासीयत यह है कि इसे लंबे और छोटे दोनों प्रकार के बालों में बनाया जा सकता है. यह हेयरस्टाइल गोल या लंबे किसी भी चेहरे पर अच्छा लगता है.

रोलरकट : लौंग बालों को रोलर्स से पर्म कर के भी डिफरैंट स्टाइल कैरी किया जा सकता है.

स्ट्रेटनिंग  : आप बालों में सीरम या फिर जैल लगा कर भी उन्हें स्ट्रेट कर सकती हैं.

फ्रिंज कट : फ्रिंज हेयरकट भी कई तरह का होता है जैसे कि विस्पी फ्रिंज, थिक व थिन फ्रिंज, लौंग, साइड एवं शौर्ट फ्रिंज स्टाइल. इन में से कोई भी स्टाइल आप अपने बालों के अनुरूप चुन सकती हैं.

स्पाइस हेयरकट : यह अकसर सैलिब्रिटीज के द्वारा बनाया जाने वाला काफी कौमन हेयरस्टाइल है. इस में बाल ऊपर की ओर उठे हुए होते हैं.

फ्लैट टौप हेयरस्टाइल : इस हेयरस्टाइल में बाल फ्रंट से स्ट्रेट व साइड से छोटे होते हैं, जिन में सिर पर सामने के बालों की ऊंचाई 1 इंच से कम होती है और ये सीधे खड़े बाल ऊपर से एकसमान सपाट होते हैं.

मौत बनी बीवी की बेवफाई

दरखशा काफी खूबसूरत थी. उसे इस बात का गुमान भी था, इसलिए वह निकाह के बाद भी खूब बनसंवर कर रहती थी. खुश रहना उस की आदत में शुमार था, लेकिन 3 जनवरी, 2017 की शाम को उस के चेहरे पर उदासी और परेशानी झलक रही थी. इस की वजह था उस का शौहर सरफराज. न सिर्फ दरखशा, बल्कि उस के ससुर सहित घर के अन्य लोग भी परेशान थे. वजह यह थी कि सरफराज लापता हो गया था. परेशान ससुर ने दरखशा से पूछा, ‘‘बहू, घर से जाते वक्त उस ने कुछ कहा था तुम से?’’

‘‘उन्होंने कहा था कि एक घंटे बाद घर लौट आऊंगा, लेकिन पता नहीं कहां रह गए? मुझे पता होता कि वह लौट कर नहीं आएंगे तो मैं उन्हें जाने ही नहीं देती.’’ दरखशा ने उदास स्वर में जवाब दिया.

‘‘उसे तो कहीं कोई काम भी नहीं था, फिर अचानक ऐसा कौन सा काम निकल आया कि उसे रुकना पड़ गया?’’

‘‘मैं क्या बता सकती हूं. मैं तो खुद ही उन का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं.’’

सरफराज अचानक कहां लापता हो गया, वह घर क्यों नहीं आया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी. लेकिन सभी लोग दरखशा को शक की निगाहों से देख रहे थे. इस से वह और भी ज्यादा परेशान थी.

सरफराज उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर के कस्बा सिकंदराबाद के मोहल्ला रिसालदारान के रहने वाले उस्मान का बेटा था. करीब 5 साल पहले उस का निकाह जिले के ही ककोड़ थाना क्षेत्र के गांव बीघेपुर की दरखशा के साथ हुआ था. शादी के बाद दरखशा के मायके वाले दिल्ली जा कर बस गए थे.

पिछले 10 दिनों से दरखशा मायके में थी. 2 जनवरी को सरफराज उसे लेने गया था. अगले दिन वह उसे ले कर वापस आ रहा था, तभी कोई काम होने की बात कह कर सरफराज गाजियाबाद में रुक गया था. दरखशा वहां से अकेली ही घर आ गई थी.

कई घंटे बीतने पर भी जब सरफराज नहीं आया तो सभी को चिंता होने लगी. सरफराज के गाजियाबाद में रुकने की बात घर वालों को दरखशा ने बताई थी. यह अलग बात थी कि कोई भी उस की बात पर भरोसा नहीं कर रहा था. इस की वजह यह थी कि सरफराज सीधासादा युवक था. उस ने घर वालों से कहा था कि वह दरखशा ले कर सीधे घर ही आएगा. गाजियाबाद में न तो उस की कोई रिश्तेदारी थी और न ही कोई काम ही हो सकता था.

दरखशा के रिश्ते भी उस से तल्खी भरे थे. तल्खी की वजह थी दरखशा के बहके कदम. उस के अपने मायके के गांव के ही एक युवक से प्रेमसंबंध थे और यह बात किसी से छिपी नहीं थी. इस बात को ले कर शौहरबीवी के बीच अकसर तकरार होती रहती थी. सरफराज के घर वालों ने अपने स्तर पर उस की खोजबीन की तो उन्हें कहीं से पता चला कि सरफराज को बीघेपुर गांव के सत्यवीर के साथ देखा गया था.

सत्यवीर ही वह युवक था, जिस के दरखशा से प्रेम संबंध थे. परेशानहाल सरफराज के घर वाले थाना ककोड़ पहुंचे और थानाप्रभारी वी.के. मिश्र से मिल कर उन्हें पूरी बात बताई. उन्होंने सरफराज की गुमशुदगी दर्ज करा कर अपना शक सत्यवीर और उस के साथियों पर जाहिर किया.

अगले दिन कुछ लोग सरफराज की गुमशुदगी को ले कर एसएसपी सोनिया सिंह से मिले तो उन्होंने इस मामले में काररवाई के निर्देश दिए. एसपी (सिटी) मान सिंह चौहान के निर्देशन में थानाप्रभारी वी.के. मिश्र इस मामले की जांच में जुट गए. पुलिस ने दरखशा से पूछताछ की तो वह शौहर के गायब होने को ले कर परेशान होने की बात कह कर सवालों के जवाब देने से बचती रही. इस से पुलिस का शक उस पर और भी बढ़ गया.

पुलिस ने सख्ती की तो दरखशा ने बताया कि सरफराज को सत्यवीर अपने 2 साथियों नितिन और रवि के साथ ले गया था. यह जान कर सभी को अनहोनी की आशंका सताने लगी. पुलिस सत्यवीर और उस के साथियों की तलाश में जुट गई.

अगले दिन यानी 5 जनवरी को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि सत्यवीर अपने साथियों के साथ मारुति जेन कार नंबर डीएल2सीए 1537 से हसनपुर गांव की ओर आएगा.

पुलिस उस की सरगरमी से तलाश में जुटी थी. थानाप्रभारी वी.के. मिश्र ने सड़क पर नाका लगा कर अपने साथियों हैडकांस्टेबल कारेलाल, कांस्टेबल जनेश्वर दयाल, हेमंत, महिला कांस्टेबल मीनाक्षी और मुन्नी देवी के साथ चैकिंग शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद पुलिस को बताए गए नंबर की कार आती दिखाई दी तो उन्होंने उसे रोक लिया. सूचना सटीक थी. कार में वही तीनों युवक सवार थे, जिन की पुलिस को तलाश थी. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

थाने ला कर उन तीनों से पूछताछ शुरू हुई तो पहले तो उन्होंने पुलिस को बरगलाने का प्रयास किया, लेकिन जल्दी ही उन्होंने बता दिया कि वे लोग सरफराज की हत्या कर के उस की लाश को ठिकाने लगा चुके हैं. पुलिस ने उन की निशानदेही पर बीघेपुर गांव के जंगल में एक गड्ढे से सरफराज की लाश बरामद कर ली.

हत्या की खबर से गांव में सनसनी फैल गई. शव मिलने की सूचना पर एसडीएम कन्हई सिंह और सीओ यशवीर सिंह भी आ पहुंचे थे. पुलिस ने पंचनामा तैयार कर मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और उस के घर वालों की तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. सत्यवीर और उस के दोस्तों से हुई पूछताछ के बाद दरखशा को भी गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि इस साजिश में वह खुद भी शामिल थी.

पुलिस ने सभी से विस्तार से पूछताछ की तो सत्यवीर और दरखशा ने पुलिस को सरफराज की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह अवैध संबंधों के फेर में पत्नी द्वारा प्रेमी के साथ षडयंत्र कर के अपने शौहर को रास्ते से हटाने की कहानी थी.

खूबसूरत दरखशा को जो भी युवक देखता, आहें भर कर रह जाता था. यह बात अलग थी कि पारिवारिक बंदिशों के चलते वह अपने अरमानों की बगिया में किसी युवक को स्थान नहीं दे सकी थी.

लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलता. जवानी की दहलीज पर खड़ी दरखशा की जिंदगी में सत्यवीर ने प्रवेश किया. दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे. आतेजाते सत्यवीर अकसर उसे देखता रहता था.

दरखशा कोई नादान नहीं थी. उस की निगाहों की भाषा वह बखूबी समझती थी. वह कब उस के दिल में बस गया, इस का उसे पता तक नहीं चला. चाहत दोनों ओर थी. फलस्वरूप जल्दी ही दोनों चोरीछिपे मिलने लगे. उन का प्यार परवान चढ़ पाता, इसी बीच घर वालों ने दरखशा का निकाह सरफराज से कर दिया. ससुराल आ कर दरखशा ने घरगृहस्थी में मन लगाना शुरू किया, लेकिन वह सत्यवीर को पूरी तरह भूल नहीं सकी.

वक्त अपनी गति से चलता रहा. विवाह के एक साल बाद दरखशा ने एक बेटे को जन्म दिया. सरफराज के आर्थिक हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे. दरखशा ने अपने भावी शौहर को ले कर जो सपने संजोए थे, उन पर वह खरा नहीं उतरा था. वह उस की चाहतों का भी उस ढंग से खयाल नहीं रख पाता था, जैसा वह चाहती थी.

दरखशा का मायके आनाजाना लगा रहता था. सत्यवीर उसे जब भी देखता तो देखता ही रह जाता. सत्यवीर ने दोबारा डोरे डाले तो दरखशा ने इस बार भी अपने कदम पीछे नहीं हटाए. एक दिन उस ने दरखशा को रास्ते में रोक कर पूछा, ‘‘कैसी को दरखशा?’’

‘‘बस अच्छी हूं.’’ वह आह भर कर बोली.

‘‘कभीकभी किस्मत भी कैसा मजाक करती है, इंसान जो चाहता है, वह उसे नहीं मिलता.’’

उस का इशारा समझ कर दरखशा उस की नजरों से नजरें मिला कर बोली, ‘‘लेकिन इंसान को कोशिश भी नहीं छोड़नी चाहिए. कौन जाने किस्मत कब जाग जाए.’’

दरखशा का मनमाफिक जवाब सुन कर सत्यवीर बहुत खुश हुआ. उस का हौसला बढ़ गया. इस के बाद उन के बीच फोन पर बातें और छिपछिप कर मुलाकातें होने लगीं. एक दिन दोनों एकांत में मिले तो सत्यवीर ने उस की आंखों में झांक कर कहा, ‘‘मैं तुम से बेइंतहा मोहब्बत करता हूं दरखशा और तुम्हें हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता था, लेकिन…’’

‘‘तुम क्या जानो, मैं ने भी तुम्हें कभी भुलाया नहीं है. तुम पहले शख्स थे, जिस के लिए मेरे दिल में चाहत पैदा हुई थी. सपनों में तुम्हें ही शौहर के रूप में देखती थी.’’

दरखशा की बातें सुन कर सत्यवीर ने बाहें फैलाईं तो वह कटी डाल की तरह उन में आ गिरी. यह सब गलत था, लेकिन दरखशा पतन की उस गर्त में कदम रख चुकी थी, जिस की दलदल में कदम पड़ने पर इंसान उस के अंदर तक धंसता चला जाता है. उन के बीच एक बार अवैध संबंधों का जो सिलसिला शुरू हुआ तो उस ने रुकने का नाम नहीं लिया. अपने संबंधों को उन्होंने काफी छिपा कर रखा.

दिक्कत तब आई, जब सत्यवीर ने दरखशा की ससुराल भी जाना शुरू कर दिया. इस के बाद तो उन के संबंधों को चर्चा में आते देर नहीं लगी. उड़तेउड़ते यह बात सरफराज के कानों तक भी पहुंची, लेकिन उस ने कभी इस पर विश्वास नहीं किया. एक दिन जब वह सुधबुध खो कर बांहों में समाए हुए थे तो सरफराज अचानक घर आ गया. उस ने बीवी को गैरमर्द की बांहों में देखा तो आगबबूला हो उठा.

उस ने सत्यवीर को खरीखोटी सुनाई तो वह सिर झुकाए चुपचाप निकल गया. इस के बाद उस ने दरखशा को जम कर लताड़ा, ‘‘मैं आज तक यही समझता रहा कि तुम पाकसाफ औरत हो, लेकिन मुझे पता नहीं था कि तुम इतनी नापाक हो. अपने यार के साथ न जाने कब से गुलछर्रे उड़ा रही हो.’’

दरखशा की गलती थी, इसलिए उस ने खामोश रहना ही बेहतर समझा. इस घटना के बाद दरखशा वक्ती तौर पर बदल गई, लेकिन जल्दी ही उस ने फिर से पुराना ढर्रा अख्तियार कर लिया. दरअसल वे दोनों एकदूसरे की जिस्मानी जरूरत का जरिया बन चुके थे. सत्यवीर को ले कर घर में आए दिन झगड़ा होने लगा. यह झगड़ा बढ़ता तो सरफराज उस के साथ मारपीट भी कर देता.

दिसंबर, 2016 के दूसरे सप्ताह में दोनों के बीच जम कर झगड़ा हुआ. नाराज हो कर दरखशा अपने मायके चली गई. इस दौरान वह सत्यवीर के बराबर संपर्क में रही. सत्यवीर उस से मिलने दिल्ली भी गया. तब दरखशा ने मायूसी से कहा, ‘‘तुम जानते हो सत्यवीर, मैं क्या कुछ झेल रही हूं. यह पक्का है कि अब सरफराज मुझे कभी तुम से नहीं मिलने देगा. लेकिन मैं तुम से मिले बिना रह नहीं सकती. अब तुम्हारी खातिर उस के जुल्मों से मेरी जान भी चली जाए तो मुझे परवाह नहीं.’’

सत्यवीर ने उस के होंठों पर अपनी हथेली रख कर कहा, ‘‘कैसी मनहूस बातें करती हो तुम. जान ही जाएगी तो तुम्हारी नहीं, सरफराज की जाएगी.’’

‘‘मैं खुद भी कब से यही चाहती हूं. अपने प्यार के लिए इस दीवार को आज नहीं तो कल हमें गिराना ही होगा. तड़पभरी जिंदगी मैं अब और नहीं जी सकती.’’

बस, उसी दिन सत्यवीर ने सरफराज की हत्या करने का मन बना कर कहा, ‘‘फिक्र न करो, मैं जल्दी ही कुछ करूंगा.’’

इस के बाद सत्यवीर वापस चला आया. वह जानता था कि हत्या करना उस के अकेले के वश में नहीं है. उस ने दरखशा से अपने रिश्तों की बात बता कर कस्बा जारचा निवासी अपनी बुआ के बेटे रवि और ग्राम लखनावली निवासी दोस्त नितिन से इस मुद्दे पर बात की.

सत्यवीर शातिर था. वह जानता था कि ये लोग बिना लालच के साथ नहीं देंगे, लिहाजा उस ने उन के सामने लालच का पासा फेंकते हुए कहा, ‘‘तुम लोग साथ दोगे तो तुम लोगों को भी हमेशा दरखशा के साथ मौजमस्ती कराऊंगा.’’

‘‘अगर वह नहीं मानी तो?’’ रवि ने सवाल किया.

‘‘मैं ने उस के सामने शर्त रख दी थी और वह इस के लिए खुशीखुशी तैयार है.’’

इस के बाद वे दोनों भी उस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद उन्होंने सरफराज की हत्या की योजना बना डाली. 2 जनवरी को सरफराज दरखशा को लेने ससुराल गया तो दरखशा ने यह बात सत्यवीर को फोन से बता दी.

अगले दिन सत्यवीर रवि और नितिन को ले कर कार से दिल्ली चला गया और दरखशा के बताए स्थान पर खड़ा हो गया. सरफराज और दरखशा वहां पहुंचे तो सत्यवीर ने बताया कि वे लोग दिल्ली किसी काम से आए थे, अब वापस जा रहे हैं.

योजना के मुताबिक दरखशा ने उन्हें भी साथ ले चलने को कहा. सरफराज उन के झांसे में आ गया. रास्ते में सभी ने चाय पी. दरखशा ने चकमा दे कर सरफराज की चाय में नशीली दवा मिला दी, जिस के बाद वह कार में ही सो गया. दरखशा को सिकंदराबाद उतार कर सत्यवीर सरफराज को अपने गांव के जंगल में ले गया, जहां तीनों ने मिल कर फावड़े से गला काट कर उस की हत्या कर दी.

बेहोशी के चलते वह विरोध भी नहीं कर सका. इस के बाद उन्होंने शव को एक गड्ढे में दबा दिया और अपनेअपने घर चले गए.

उधर दरखशा ने सरफराज के गाजियाबाद में रुकने की मनगढ़ंत कहानी सुना दी. लेकिन वह अपने ही जाल में उलझ गई. शौहरबीवी के रिश्ते विश्वास के होते हैं, जब कोई इस तरह से किसी को धोखा दे तो अंजाम कभी अच्छा नहीं होता. दरखशा ने भी शौहर को धोखा दे कर पतन की दलदल में कदम न रखे होते तो ऐसी नौबत कभी न आती.

पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ लिखापढ़ी कर के न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हो सकी थी.      

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

नंबर 1 बनने हेतु मेहनत करें : नेहा शर्मा

नेहा शर्मा उन अभिनेत्रियों में से हैं, जिन के कैरियर को फिल्म की असफलता प्रभावित नहीं करती. 2007 में चरण तेज के साथ तेलुगू फिल्म ‘चिरुथा’ से अभिनय कैरियर की शुरुआत करने के बाद वे हिंदी फिल्मों से जुड़ीं. पिछली फिल्म ‘तुम बिन 2’ की असफलता के बाद वे अनिल कपूर और अर्जुन कपूर के संग ‘मुबारकां’ फिल्म में काम कर खुश हैं.  पेश हैं उन से हुई बातचीत के खास अंश :

आप का कैरियर जिस तरह से बढ़ रहा है, उस से आप कितना खुश हैं?

मैं अपने कैरियर को ले कर काफी खुश हूं. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि  हर इंसान के लिए सफलता के माने अलग होते हैं. आप के लिए सफलता के जो माने हैं, वही मेरे लिए हों, ऐसा जरूरी नहीं है. मेरी सफलता का सब से बड़ा पैमाना यह है कि मैं जो कुछ करना चाहती हूं, जिस तरह का काम करना चाहती हूं, उसे करने के मुझे अवसर मिले.

मैं अपनेआप को खुशकिस्मत मानती हूं कि मैं खुद से अपनी फिल्में चुन सकती हूं. मैं हमेशा वही काम करती हूं, जिसे करने के लिए मेरा दिल कहे. मुझे यह पसंद नहीं कि कोई इंसान मुझे सलाह दे कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए या यह नहीं करनी चाहिए. यदि दूसरों की सलाह पर फिल्में करना सफलता का पैमाना है तो मुझे यह पसंद नहीं.

मुझे लगता है कि अब तक के कैरियर में मैं ने वही काम किया, जो मुझे पसंद आया. इसलिए मैं खुश हूं. इसी आधार पर मुझे लगता है कि मेरा कैरियर बहुत सही तरीके से आगे बढ़ रहा है.

मगर बौलीवुड में कलाकार का कैरियर तो फिल्म की सफलता के इर्दगिर्द घूमता है?

देखिए, यह सब अलगअलग नजरिए से खुद को देखने का तरीका होता है. कुछ लोगों को अपनेआप को नंबर वन कहलाने की चाहत होती है, तो वे बताते रहते हैं कि हमारी फिल्म ने इतने करोड़ कमा लिए.

मैं नंबर वन, नंबर 2 या नंबर 3 में यकीन नहीं रखती. वास्तव में वे कलाकार, जो नंबर की चूहादौड़ में हैं, उन्हें तमाम लोग कंट्रोल करते हैं. इन के इर्दगिर्द लंबीचौड़ी फौज रहती है, जो इन्हें पलपल पर टोकती रहती है कि उन्हें क्या करना है या क्या नहीं करना है.

मेरे इर्दगिर्द ऐसी कोई फौज नहीं है. मैं खुश हूं. मेरे लिए सफलता बहुत बड़ी बात है. पर मैं हमेशा वही काम करना चाहती हूं, जिस में मुझे खुशी मिले. जिस काम को करने के लिए मेरा मन गवाही दे. मुझे कोई टोकने वाला नहीं है, जो मुझ से कहे कि मुझे क्या करना है. मैं तो फिल्में भी दूसरों की सलाह से नहीं, अपनी पसंद से चुनती हूं.

‘तुम बिन 2’ की असफलता से आप के कैरियर पर क्या असर हुआ?

हम सब की ढेरों अपेक्षाएं और उम्मीदें होती हैं, उसी के अनुरूप हम योजना बनाते हैं, जब उस तरह से चीजें नहीं होतीं तो हम हताश हो जाते हैं. परिणामत: हमारा कैरियर खत्म होने लगता है, लेकिन मैं तो फिल्म की शूटिंग पूरी करते ही उसे भूल कर आगे बढ़ जाती हूं. इसलिए किसी भी फिल्म की असफलता का मेरे कैरियर पर कोई असर नहीं होता.

जहां तक ‘तुम बिन 2’ की असफलता का सवाल है, तो मेरे हिसाब से फिल्म सफल रही, निर्माता को नुकसान नहीं हुआ. लोगों को मेरा काम भी पसंद आया. दूसरी सफलता और असफलता दोनों ही हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं. हमें सफलता की ही तरह असफलता को भी लेना चाहिए. मैं सफलता मिलने पर हवा में नहीं उड़ती और असफलता से मायूस नहीं होती.

मैं इस बात का गम नहीं मानती कि मुझे क्या नहीं मिला, पर जो मिलता है, उस का जश्न जरूर मनाती हूं. तीसरी बात मैं इस बात पर यकीन करती हूं कि किसी भी फिल्म की सफलता व असफलता कलाकार के हाथ में नहीं होती है.

कलाकार के अलावा फिल्म के साथ बहुत सी चीजें जुड़ी होती हैं. मसलन, फिल्म का निर्माता कौन है? फिल्म के साथ कौन सा स्टूडियो जुड़ा हुआ है? निर्देशक कौन है? उस ने पहले कौन सी फिल्में बनाई हैं? गाने किस तरह के हैं? संगीतकार कौन है? कलाकार कौनकौन हैं? पता नहीं कितनी लंबी सूची होती है, जब तक इन सारी चीजों पर चैकलिस्ट नहीं लगेगी, तब तक फिल्म की सफलता की गारंटी कोई नहीं दे सकता.

एक कलाकार के तौर पर आप फिल्में चुनते समय कुछ तो ध्यान देती होंगी?

कलाकार के तौर पर हम उस तरह के कटैंट वाली फिल्म चुनते हैं, जिस में हमें यकीन होता है. हम कहानी या पटकथा के बारे में जानकारी दे कर अपने आप से सवाल करते हैं कि क्या यह हमें पसंद है? क्या हम किरदार के साथ इत्तेफाक रखते हैं? क्या हम इसे अपने अभिनय से संवार सकेंगे? इन सारे सवालों का जवाब ‘हां’ हो तो हम फिल्म कर लेते हैं.

हीरोइन के रूप में फिल्म ‘तुम बिन 2’ करने के बाद मल्टीस्टारर फिल्म ‘मुबारकां’ में छोटा सा कैमियो करना कहां तक उचित है?

यह मसला पानी से भरे आधे गिलास की ही तरह है. इस गिलास को देखने का हर इंसान का अपना अलग नजरिया होता है. क्या आप मल्टीस्टारर फिल्म ‘अंदाज अपनाअपना’ में जिस किरदार को जूही चावला ने निभाया था, भुला सकते हैं? वह भी तो छोटा सा किरदार था. इसी तरह मेरा दावा है कि जब फिल्म ‘मुबारकां’ प्रदर्शित होगी, तो लोगों को मेरा किरदार याद रहेगा.

इस मल्टीस्टारर फिल्म में अभिनय कर मैं ने बहुत कुछ सीखा. जहां मुझे दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर के साथ काम कर बहुत कुछ सीखने को मिला, तो वहीं मैं लंबे समय से अनीस बजमी के निर्देशन में फिल्म करने का सपना देख रही थी.

मैं तो उन की कौमेडी फिल्मों की मुरीद हूं. मैं ने उन की हर फिल्म देखी है. ऐसे में जब अनीस बजमी ने मेरे सामने ‘मुबारकां’ में कैमियो करने का प्रस्ताव यह कहते हुए रखा कि इस में अनिल कपूर व अर्जुन कपूर भी हैं, तो मैं ने इसे तुरंत लपक लिया.

इस के अलावा आज मैं अपने कैरियर के जिस मुकाम पर हूं वहां मुझे ज्यादा से ज्यादा अच्छा काम, बेहतरीन लोगों के साथ करना है. मैं ‘मुबारकां’ के अलावा कुछ दूसरी रोचक व बड़ी फिल्में कर रही हूं, पर जब तक उन की घोषणा निर्माता न कर दें, मैं उस पर बात नहीं कर सकती.

फिल्म में आप का क्या किरदार है?

बहुत ज्यादा विस्तार से बताना तो ठीक नहीं होगा, लेकिन यह फनी फिल्म है. मेरा किरदार भी फनी है. मैं लोगों को इस फिल्म में हंसाऊंगी.

अनिल कपूर के साथ ‘मुबारकां’ में काम करने के क्या अनुभव रहे?

बहुत मजा आया. वे काफी बड़े कलाकार हैं. विविधतापूर्ण किरदार निभा चुके हैं. वे  ऐनर्जी से भरपूर हैं. हर किसी से गर्मजोशी के साथ मिलते हैं. काम के प्रति उन का समर्पण देख कर मैं दंग रह गई. उन से बहुत कुछ सीखने को मिला.

क्या यह माना जाए कि आप महत्त्वाकांक्षी नहीं हैं?

किस ने कहा? मैं महत्त्वाकांक्षी हूं, लेकिन मेरे लिए सफलता के माने कुछ और हैं. मेरे लिए सफलता का अर्थ नंबर वन की कुरसी हथियाना नहीं है. मैं इस तरह की किसी भी चूहादौड़ का हिस्सा नहीं हूं.

मेरे लिए सफलता का पैमाना इस बात पर निर्भर करता है कि मैं अपनी पसंद के किरदार व पसंद की फिल्में चुनने के लिए स्वतंत्र हूं. किसी भी फिल्म को स्वीकार करने में मुझे काफी समय लगता है. कुछ लोग मुझे चूजी समझते हैं.

अब तो आप की बहन आयशा शर्मा भी बौलीवुड में संघर्ष कर रही हैं?

वे भी दूसरी आम युवतियों की तरह हैं, जो अपने लिए बौलीवुड में जगह तलाश रही हैं.

आप ने कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय किया है. आप को लगता है कि वहां काम करना ज्यादा आसान है?

आसान कहीं नहीं होता. हर जगह आप को अपनी प्रतिभा के बल पर अपनी जगह बनानी होती है. यही बात बौलीवुड, टौलीवुड, हौलीवुड हर जगह लागू होती है.

आप ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था, वह अब काम आ रहा है?

दिल्ली में मैं ने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया. फैशन डिजाइनिंग करने से हमें पोशाक कैसे डिजाइन करनी है, यह समझ में आता है. इसी के चलते मेरे लिए अपनी फिल्मों के किरदारों के अनुरूप पोशाकों को अपनी डिजाइनर के साथ बैठ कर डिजाइन करवाना आसान होता है. इस के अलावा अब मैं ने अपना ऐप शुरू किया है. अब मैं अपना खुद का लेबल शुरू करने वाली हूं.

आप को अपने ऐप की जरूरत क्यों महसूस हुई?

मुझे जरूरत महसूस नहीं हुई, लेकिन ऐप बनाने वाली कंपनी इस्कापेक्स ने मुझ से संपर्क किया. उन्होंने मुझे ऐप के बारे में विस्तृत जानकारी दी. तब मुझे एहसास हुआ कि ऐप होना कितना जरूरी है, क्योंकि इस में बहुत कुछ है.

मेरे फैंस मेरे संपर्क में आने के लिए मेरे बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया यानी कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर वगैरा पर जाते हैं. इस से उन का काफी समय बरबाद होता है.

अब उन्हें मेरे बारे में किसी भी जानकारी को हासिल करने के लिए अलगअलग सोशल मीडिया पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें सारी जानकारी मेरे ऐप से मिल जाएगी.

किन फिल्मकारों के साथ काम करना चाहती हैं?

मैं संजय लीला भंसाली के साथ फिल्में करना चाहती हूं. यदि वे अपनी किसी ऐतिहासिक फिल्म से जुड़ने का औफर देंगे, तो मैं आंख मूंद कर उन के इस औफर को स्वीकार कर लूंगी.

मैं संजय लीला भंसाली से फिल्म की पटकथा भी नहीं मांगूगी,  क्योंकि मुझे पता है कि संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों में महिला किरदारों को बहुत ही भव्यता व शालीनता के साथ पेश करते हैं. उन की फिल्म में महिला पात्र हमेशा सशक्त होते हैं.

आप एक राजनीतिज्ञ परिवार से जुड़ी हुई हैं. तो क्या फिल्मों में क्या करना है या क्या नहीं ऐसा कुछ है?

बिलकुल नहीं. मैं ने कोई सीमाएं नहीं बनाई हैं. मैं किरदार की मांग के अनुरूप हर तरह की पोशाक पहनने के लिए तैयार हूं. मैं ने अपने पिता व भागलपुर से कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा के लिए चुनाव प्रचार किया है. मगर मेरा राजनीति से जुड़ने का कोई इरादा नहीं है.

आप ने एक चीनी फिल्म ‘झौंगजौंग’ की थी. कोई दूसरी चीनी फिल्म करने वाली हैं?

ऐतिहासिक फिल्म है. पिछले वर्ष चीन में प्रदर्शित हुई और सफल हुई. वहां फिल्म करने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. वहां फिल्मकार पटकथा, विषय व चरित्र पर बहुत बारीकी से काम करते हैं. यदि दूसरी फिल्म का औफर मिला, तो जरूर करना चाहूंगी.

अब दक्षिण भारतीय फिल्में नहीं कर रही हैं?

जब किसी अच्छे कथानक वाली फिल्म का औफर मिलेगा, तो जरूर करना चाहूंगी.

किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

कोई सीमारेखा तो खींची नहीं है. मगर मैं संजीदा या गंभीर किस्म के किरदार फिलहाल नहीं निभाना चाहती. मैं हमउम्र के हलकेफुलके किरदारों को ही निभाना चाहती हूं. रोमांटिक किरदारों को निभाना चाहती हूं.

सच कहूं तो मुझे ढेर सारे चरित्र निभाने हैं. अभी तो मेरे कैरियर की शुरुआत हुई है. मुझे उम्मीद है कि अभी मेरी राह में तमाम औफर आएंगे. मैं यह भी अच्छी तरह से समझती हूं कि मैं उस मुकाम पर नहीं हूं, जहां शाहरुख खान या सलमान खान हैं.

इन सभी कलाकारों ने 20-25 साल के कैरियर में 2-3 सौ फिल्में की हैं. तो जब मैं उस मुकाम पर पहुंचूंगी, तो शायद मैं लोगों से कह सकूंगी कि मुझे यह किरदार या यह फिल्म करनी है.

सच यही है कि जो दूसरे कर रहे हैं, उन से मैं कुछ अलग काम करना चाहती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं जो भी किरदार निभाऊं वह मेरे लिए ड्रीम रोल साबित हो. इस के लिए मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत करती हूं.

कोई खास किरदार जो करना चाहती हों?

ऐसा कुछ नहीं है. मैं अलगअलग तरह की फिल्में करना चाहती हूं. हर जौन में काम करना है. मुझे लगता है कि जिंदगी में काम ज्यादा और आराम कम करना चाहिए. तो मेरी कोशिश यही है कि मैं बहुत सी फिल्में करूं और सब अलग तरह की हों, जिस से मेरे अंदर की अभिनय कला का विकास हो सके. आप को याद होगा कि मैं ने अभिनय की कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. जो कुछ सीखा है, काम करते हुए सीखा है.

शौक?

कुकिंग, पढ़ना, कुत्तों के साथ खेलना, संगीत सुनना मुझे पसंद है. मुझे बचपन से ही नृत्य का शौक रहा है. मैं ने कत्थक की विधिवत ट्रेनिंग ली है. इस के अलावा मैं ने जाज, सालसा जैसे कई वैस्टर्न डांस के फौर्म की भी ट्रेनिंग हासिल की.

पसंदीदा अभिनेत्री?

विद्या बालन, मधुबाला, कौमरान डियाज. 

 

एक ही दिन दो मैदानों पर भिड़ेंगे भारत पाकिस्तान!

चैंपियंस ट्रॉफी-2017 का रोमांच अपने तरम पर है. कयासों का सिलसिला भी जारी है. इसी बीच अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि चैंपियंस ट्रॉफी की खिताबी टक्कर भारत और पाकिस्तान के बीच होगी. अगर ऐसा हुआ तो 18 जून को लंदन में दो मैदानों पर भारत और पाकिस्तान की टीमें भिड़ेंगी.

दरअसल, उसी दिन दोपहर दो बजे हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल (वर्ल्ड कप क्वालिफायर) में भारत और पाकिस्तान में भिड़ंत होगी.

चैंपियंस ट्रॉफी में पहला सेमीफाइनल पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच होगा. हलांकि मेजबान टीम हराना आसान नहीं होगा. लेकिन क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है. वहीं दूसरा सेमीफाइनल भारत और बांग्लादेश के बीच खेला जाना होगा. अगर पाकिस्तान इंग्लैंड को और भारत बांग्लादेश को हरा देती है तो फाइनल में भारत पाकिस्तान के बीच रोमंचक मुकाबला देखने को मिलेगा.

हॉकी वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल (2018 हॉकी वर्ल्ड कप क्वालिफायर) में भारत और पाकिस्तान एक ही पूल (पूल बी) में हैं. उनके अलावा इस पूल में नीदरलैंड, स्कॉटलैंड और कनाडा की टीमें हैं. लंदन में शुरू हो रहे टूर्नामेंट में 15 जून को भारत की टीम स्कॉटलैंड से, 17 जून को कनाडा से, 18 जून को पाकिस्तान से और 20 जून को नीदरलैंड से होगा.

क्वार्टर फाइनल मुकाबले 22 को, सेमीफाइनल 24 को और फाइनल 25 जून को होगा. उधर, 8-23 जुलाई तक हॉकी वर्ल्ड लीग का दूसरा सेमीफाइनल जोहानिसबर्ग में और फाइनल 1-10 दिसंबर तक भुवनेश्वर में खेला जाएगा.

प्रतियोगिता के ये सेमीफाइनल्स 2018 के वर्ल्ड कप हॉकी का क्वालिफायर भी हैं. वर्ल्ड कप में 10 टॉप टीमों के अलावा मेजबान और पांच कॉन्टिनेंटल चैंपियन टीमें भाग लेंगी. अगले साल होने वाले इस वर्ल्ड कप हॉकी (24 नवंबर से 16 दिसंबर 2018) का मेजबान भारत है.

इन सरकारी योजनाओं में निवेश करने के हैं बड़े फायदे

कौन नहीं चाहता है कि उसके पास पैसे हों कुछ सेविंग हो जिसे वे भविष्‍य में इस्‍तेमाल कर सके. हर किसी को अपने अच्‍छे वक्‍त में बुरे वक्‍त को ध्‍यान में रखते हुए थोड़ी-बहुत बचत करना आना चाहिए. ऐसा नहीं है कि बचत सिर्फ वही लोग करते हैं जिनकी सालाना कमाई लाखों और करोड़ों में होती है. बचत वो लोग भी कर सकते हैं जो कि गरीब और मध्‍यम वर्गीय परिवार वाले होते हैं और जिनके पास आय का कोई अच्‍छा साधन भी ना हो वो भी. ऐसी कई सरकारी योजनाएं हैं जहां पर निवेश करके थोड़ी नहीं बल्कि बहुत सारी बचत कर सकते हैं. आपको हम ऐसी ही कुछ सरकारी योजनाओं के बारे में बताने वाले हैं.

किसान विकास पत्र

किसान विकास पत्र को KVP भी कहा जाता है या पोस्‍ट ऑफिस की सरकारी योजना है. यह स्‍कीम कम आय वाले परिवारों के लिए मुख्‍य तौर लाई गई है. किसान विकास पत्र 100 रुपये, 500, 1000, 10,000 और 50,000 रुपये तक की कई निवेश योजनाओं को प्रदान करता है. यह क्रेंद्र सरकार की योजना है. इसमें 100 रुपया निवेश की सबसे छोटी इकाई है तो वहीं अधिकतम आप कितना भी निवेश कर सकते हैं. किसान विकास पत्र पर सालाना करीब 7.8 प्रतिशत का ब्‍याज दर है तो वहीं इसकी मैच्‍योरिटी का समय 8 साल 4 महीने है. किसान विकास पत्र में निवेश करने से मिलते हैं ये लाभ :

– निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है.

– 5 साल के बाद निवेश किया गया पैसा निकाला जा सकता है.

– KVP को गिरवी रखके आप बैंक से कर्ज भी ले सकते हैं.

– किसान विकास पत्र कैश देकर पोस्‍ट ऑफिस से खरीदा जा सकता है

– नाम बदलने और नॉमिनेशन की भी सुविधा दी जाती है

एफडी

एफडी के बारे में तो लगभग हर कोई जानते ही हैं. एफडी यानी कि फिक्‍सड डिपॉजिट. यह एक ऐसा बचत खाता है जहां पर आपकी इच्‍छानुसार परिपक्‍वता अवधि के लिए धन राशि जमा की जाती है. यहां पर निवेशक को एक निर्धारित ब्‍याज भी प्रदान की जाती है. लेकिन इसके अंतर्गत जमा राशि को निर्धारित समय से पहले नहीं निकाला जा सकता है. भारत के लगभग सभी बैंक 7 दिन से लेकर 10 साल तक की एफडी की अलग-अलग योजनाएं प्रदान करते हैं. एफडी के अंतर्गत 7-9 प्रतिशत का ब्‍याज दिया जाता है. जिसके अंतर्गत 4-5 साल के अंदर आपकी जमा राशि दोगुनी हो जाती है.

एनएससी (NSC)

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट किसी बैंक के फिक्‍सड डिपॉजिट की तरह होता है. यह पोस्‍ट ऑफिस की बचत सेवा है. जिसके अंतर्गत आपको ब्‍याज पर टैक्‍स देने की आवश्‍यकता नहीं होती है और रिटर्न लगभग उतना ही मिलता है. इस योजना की सफलता को देखते हुए विभाग के द्वारा 5 साल के लॉक इन पीरियड के साथ अब 10 साल साल लॉक इन पीरियड की शुरुआत की गई है जिसमें 8.8 प्रतिशत का ब्‍याज दिया जाता है. यहां पर 100 रुपये न्‍यूनतम राशि से लेकर 10 हजार तक की राशि पर निवेश कर सकते हैं. साथ ही इसमें प्राप्‍त ब्‍याज पर टीडीएस कटौती भी नहीं होती है.

सरकारी बांड

कभी-कभी सरकार किसी विशेष प्रोजेक्‍ट के लिए बांड जारी करती है. सरकार द्वारा जारी किए गए इस बांड पर ब्‍याज थोड़ा कम मिलता है लेकिन इसमें पूंजी की गारंटी सरकार देती है. इसलिए इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. सरकारी बांड सरकार पूंजी जुटाने के लिए जारी करती है. इनकी अवधि 14 दिन से लेकर 30 साल तक हो सकती है. सरकारी बांड में 10,000 रुपये तक न्‍यूनतम निवेश की सीमा रखी गई है.

विराट की लकी चार्म हैं अनुष्का, यकीन नहीं आता तो देखें वीडियो

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा का रिश्ता अब किसी से छिपा नहीं है. शुरुआत में जहां भारतीय कप्तान ने अपने रिश्ते को कभी नहीं छिपाया, वहीं अनुष्का हमेशा इस पर कमेंट करने से बचती रहीं.

लेकिन अब चीजें बदल चुकी हैं. दोनों सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे की तारीफ भी करते हैं और मिलते भी हैं. चाहे वह युवराज सिंह और हेजल कीच की शादी में डांस करना हो और या जहीर खान और सागरिका की सगाई पर हाथों में हाथ डालकर एंट्री करना.

विराट कोहली ने पहली बार अनुष्का के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की है. खास बात यह है कि उन्होंने यह बताने की कोशिश की अनुष्का शर्मा की उनके साथ मौजूदगी कितनी अहमियत रखती है. अनुष्का कप्तान कोहली की लकी चार्म भी हैं.

स्टार स्पोर्ट्स को दिए एक इंटरव्यू में विराट कोहली ने कहा, मैं मोहाली में था और टेस्ट सीरीज चल रही थी. मैं उस वक्त अनुष्का के साथ था, वह मुझसे मिलने आई थी. दिलचस्प बात है कि जब मुझे टेस्ट कैप्टन बनाया गया, तब भी वह मेरे साथ मेलबर्न में थी. यह बहुत खास लम्हा था, जो हम दोनों ने साथ बिताया था. मोहाली में भी, उन्होंने (बीसीसीआई) पहले ही मुझसे बात कर ली थी. मैंने तुरंत अनुष्का को फोन लगाकर पूरी बात बताई. कोहली ने कहा कि एक मिनट के लिए मैं अतीत में चला गया और एकेडमी से शुरुआत से लेकर मोहाली तक सोचने लगा. मैं भावुक होकर रोने लगा था, क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यह दिन देख पाऊंगा. कोहली ने कहा कि ज्यादा खूबसूरत यह था कि मैंने इसे अनुष्का के साथ शेयर किया. यह ऐसी चीज है, जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा.

आपको बतते चलें कि वर्ल्ड कप 2015 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के बाद फैन्स ने इसका ठीकरा अनुष्का पर फोड़ा दिया. फैन्स ने विराट के जल्दी आउट होने के लिए अनुष्का को दोषी ठहराया था. फैन्स ने कहा था कि अनुष्का का विराट के साथ होना अच्छा नहीं है. हालांकि, विराट ने तुरंत अनुष्का का बचाव किया था. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ऐसे बयानों की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने फैन्स को ऐसी बकवास बंद करने की हिदायत दी थी.

इरफान क्यों जाना चाहते हैं शंघाई

इरफान खान इन दिनों अमेरीका में केली मैकडोनाल्ड के संग हॉलीवुड फिल्म ‘‘पजल’’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. मगर वह बीच में कुछ दिन के लिए शंघाई जाना चाहते हैं. इसकी वजह यह है शंघाई में 17 जून से 26 जून के बीच बीसवां ‘‘शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिस्वल’’ का आयोजन होने जा रहा है, जिसका वह हिस्सा बनना चाहते हैं. वास्तव में इस फिल्म समारोह में फिल्मकार मुस्तफा सरवर फारूकी निर्देशित द्विभाषी अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘‘नो बेड आफ रोजेस’’ का विश्व प्रीमियर होना है. बांगला देश में फिल्मायी गयी इस फिल्म में इरफान खान ने नुशरत इमरोज तिशा, रॉकी प्राची व पर्णो मित्रा के साथ अभिनय किया है.

इसी के साथ इरफान खान ने अपनी होम प्रोडक्शन कंपनी ‘‘इरफान खान फिल्मस’’ के बैनर तले अब्दुल अजीज की कंपनी ‘‘जाज मल्टी मीडिया’’ के साथ मिलकर निर्माण भी किया है. फिल्म की कहानी के केंद्र में दो परिवार हैं. इनमें से एक परिवार के एक सदस्य के निधन के बाद प्यार की तलास शुरू होती है.

इरफान खान के लिए यह फिल्म काफी रास्ते खोलने वाली है. क्योंकि 22 जून से 29 जून के बीच मास्को में होने वाले ‘‘मास्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’ में प्रतियोगी खंड में इस फिल्म को चुना गया है.

यहां मिलेगा आपको मुफ्त में मोबाइल इंटरनेट डेटा और फ्री टॉकटाइम

अगर आपको मुफ्त में मोबाइल इंटरनेट डेटा मिल जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है. लेकिन ऐसे करने वाली कंपनियों की छिपी हुई अपनी मंशा होती है. शायद यही वजह है कि एयरटेल जीरो और फेसबुक की फ्री बेसिक्स सेवा ने नेट न्यूट्रैलिटी की चर्चा को जन्म दे दिया.

सवाल ये है कि कंपनियां बिना पैसे लिए इंटरनेट तो दे रही हैं पर वे चुनिंदा वेबसाइट को ही एक्सेस करने के लिए मजबूर कर रही हैं. मार्केट में कई ऐसे ऐस्प भी मौजूद हैं जो आपको मुफ्त में इंटरनेट देते हैं. इनकी सेवा में कुछ छिपा हुआ भी नहीं है. ये सारे ऐप प्रीपेड यूज़र के लिए हैं.

जिगाटो

संभवत: यह इस कैटेगरी का सबसे बेहतरीन ऐप है. जिगाटो अपने यूजर को ऐप पर डेटा कमाने का विकल्प देता है. इसके लिए आपको जिगाटो ऐप इंस्टॉल करना होगा. यह आपको कई अलग ऐप का सुझाव देगा, जिन्हें आप इस्तेमाल करके डेटा कमा सकते हैं. आम तौर पर कमाया गया इंटरनेट डेटा इन ऐप को इस्तेमाल करने में खर्च किए गए डेटा से ज्यादा होता है. भले ही इन ऐप को इस्तेमाल करने पर शुरुआत में डेटा की खपत होगी लेकिन बाद में आप मुफ्त डेटा कमा ही लेंगे.

उदाहरण के तौर पर आप व्हाट्सऐप या ट्विटर इस्तेमाल करने के लिए 20 एमबी डेटा खर्चते हैं, तो इस दौरान आप 25 एमबी डेटा कमाते हैं जिसे आप अपनी टेलीकॉम कंपनी से हासिल कर सकते हैं.

जब आप इस ऐप को लॉन्च करेंगे तो आपको इस ऐप द्वारा स्मर्थित ऐप्स की सूची मिलेगी. इस सूची में वही ऐप होंगे जो आपके डिवाइस पर पहले से मौजूद हैं. इसके बाद जिगाटो आपको मुफ्त डेटा के लिए कई ऐप इंस्टॉल करने का सुझाव देगा. यह देखते हुए कि जिगाटो में कई लोकप्रिय ऐप पहले से मौजूद हैं, इसलिए आपको अपने इस्तेमाल करने के तरीके कोई खास बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

इसके अलावा जिगाटो को इंस्टॉल करते वक्त आप इसे अपने मोबाइल में मौजूद ऐप की जांच करने की इज़ाजत भी देते हैं. यूज़र और जानकारों का मानना है कि जिगाटो आपकी निजता का उल्लंघन नहीं करता. गूगल प्ले स्टोर से जिगाटो ऐप मुफ्त में इंस्टॉल कर सकते हैं.

अर्न टॉकटाइम

अर्न टॉकटाइम बहुत हद तक जिगाटो ऐप जैसा ही है. यह भी आपको दूसरे ऐप इस्तेमाल करने के एवज में मुफ्त डेटा देता है. हालांकि, इसका तरीका थोड़ा अलग है. जिगाटो आपको ऐप्स पर मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने के लिए रीचार्ज देता है, जबकि अर्न टॉकटाइम ऐप आपको पैसे दते है जिसका इस्तेमाल आप प्रीपेड रीचार्ज के लिए कर सकते हैं.

आप अपने दोस्तों को भी इस ऐप के बारे में सुझाव देकर कमा सकते हैं. इसके बाद कमाए हुए पैसे का इस्तेमाल इंटरनेट डेटा खरीदने के लिए किया जा सकता है. इस ऐप द्वारा निजता के उल्लंघन की जानकारी नहीं सामने आई है. हालांकि, इस ऐप के काम करने के अंदाज को देखते हुए आपको नजर बनाए रखना चाहिए.

पेट्यून्स

जिगाटो या अर्न टॉकटाइम पर आपको टॉक टाइम कमाने के लिए अलग-अलग काम करने पड़ते हैं, जबकि पेट्यून्स ऐप आपके रिंगटोन को विज्ञापन से बदल देता है. इसके बाद आपको हर कॉल के लिए पैसे मिलते हैं. पेट्यून्स हर दिन आपके फोन की एक्टिविटी का हिस्सा बन जाता है.

इस ऐप पर 1 रुपये कमाने के लिए आपको तीन कॉल का जवाब देना होगा. अगर आपको दिन में 15 फोन कॉल भी आते हैं तो महीने में आप 150 रुपये कमाएंगे. इसका इस्तेमाल मोबीक्विक के जरिए डेटा पैक रीचार्ज़ करने या अन्य बिल देने के लिए किया जा सकता है.

मॉय एड्स

विज्ञापन देखें, फिर उसके बारे में कुछ आसान सवाल का जवाब देकर पैसे कमाएं. इसका कंसेप्ट इतना स्पष्ट है कि हमें आपको कुछ भी समझाने की ज़रूरत नहीं. आप वाई-फाई नेटवर्क में विज्ञापन देख सकते हैं. आपको अन्य ऐप को डाउनलोड करने या इस्तेमाल करने की भी ज़रूरत नहीं.

वैसे तो विज्ञापन देखना उतना आसान नहीं. लेकिन 45 सेकेंड के विज्ञापन देखने के लिए 8 रुपये मिलना, हमें एक बेहतरीन विकल्प लगा. इस पैसे का इस्तेमाल आप अपने फोन को रीचार्ज करने के लिए या मोबाइल डेटा खरीदने के लिए कर सकते हैं.

फोन को रीचार्ज करके

फ्रीचार्ज, पेटीम, मोबाक्विक या एयरटेल मनी जैसे ऐप आपको ऑनलाइन मोबाइल रीचार्ज करने का विकल्प तो देते ही हैं, साथ में कुछ स्पेशल डील और कैशबैक ऑफर भी साथ आते हैं. इसका मतलब है कि जब आप अपने फोन को रीचार्ज़ करते हैं, इनमें से किसी ऐप को इस्तेमाल करके आप स्पेशल ऑफर का फायदा उठा सकते हैं. ये ऑफर हर दिन के लिए अलग होते हैं. इसलिए मोबाइल पर दो-तीन ऐप इंस्टॉल रखें और रीचार्ज करने से पहले हर प्लेटफॉर्म पर ऑफर की जांच कर लें. ऐसा करके आप पैसे बचा पाएंगे.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें