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मैं 28 साल का हूं. मेरा लिंग छोटा है. इस वजह से पत्नी खुश नहीं रहती है. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 28 साल का हूं. एक साल की उम्र में किसी तकलीफ की वजह से डाक्टर ने मेरे अंग का आपरेशन कर दिया था. लिहाजा, वह छोटा रह गया है. इस वजह से पत्नी खुश नहीं रहती है. मैं क्या करूं?

जवाब

आमतौर पर अंग के आकार से हमबिस्तरी के मजे में कोई फर्क नहीं पड़ता है. चूंकि आप के अंग का आपरेशन हुआ था, इसलिए शायद कुछ और दिक्कत होगी. आप इस बारे में किसी माहिर डाक्टर से बात करें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

चैंपियंस ट्रॉफी : मैच पलट सकते हैं इंग्लैंड-पाकिस्तान के ये खिलाड़ी

श्रीलंका पर रोमांचक जीत के साथ चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंची पाकिस्तान टीम का मुकाबला इंग्लैंड से होगा. टूर्नामेंट की नंबर वन टीम इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान की राह आसान नहीं होगी. कार्डिफ के इसी ग्राउंड पर श्रीलंका के खिलाफ पाकिस्तान ने आखिरी मैच जीता था, जबकि इसी ग्राउंड पर इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को 87 रन से हराया था.

चैंपियंस ट्रॉफी 2017 में दोनों टीमों की परफॉर्मेंस

पाकिस्तान

टूर्नामेंट में आखिरी रैंकिंग (8वीं) की टीम पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हार से टूर्नामेंट की शुरुआत की, लेकिन उसके बाद अपने पिछले दोनों मैच जीते. पाकिस्तान ने साउथ अफ्रीका को 19 रन से परास्त किया तो वहीं श्रीलंका के खिलाफ 3 विकेट से जीत दर्ज की.

इस प्रदर्शन से पाकिस्तानी टीम जीत की लय में हैं. उनके खिलाड़ी अच्छे फॉर्म के साथ ही आत्मविश्वास में भी हैं.

इंग्लैंड

इंग्लैंड चैंपियंस ट्रॉफी 2017 में अपने सभी लगी मैच जीतने वाली अकेली टीम है. उसने अपने ग्रुप में बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को हराया. इसमें से 2 मैचों में उसने 300 से ज्यादा का स्कोर बनाया.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उसने 40 ओवर में ही 240 रन बना लिए थे. हालांकि, बारिश के कारण ये मैच नहीं हो सका और इंग्लैंड डकवर्थ लुईस सिस्टम से 40 रन से ये मैच जीत गई थी.

हर बार चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में हारा पाकिस्तान

चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में पाकिस्तान अब तक तीन बार सेमीफाइनल (2000, 2004 और 2009) में पहुंचा है. तीनों ही बार उसका सफर सेमीफाइनल में हार के साथ खत्म हुआ. ऐसे में, पाकिस्तान पहली बार इस आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने की कोशिश करेगा.

दो फाइनल खेल चुकी है इंग्लैंड की टीम

2004 और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी में इंग्लैंड फाइनल तक पहुंची थी. 2004 में उसे वेस्ट इंडीज ने रोमांचक मैच में 2 विकेट से हरा दिया था, जबकि 2013 में इंग्लैंड को 5 रन से हारकर टीम इंडिया चैंपियन बनी थी. 2009 में इंग्लैंड सेमीफाइनल तक पहुंची थी. इस बार इंग्लैंड को टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी में होगा इंग्लैंड-पाकिस्तान का मैच

चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत 1998 में हुई थी. तब से अब तक इस टूर्नामेंट में कभी भी पाकिस्तान और इंग्लैंड की टीम के बीच मुकाबला नहीं हुआ. दोनों टीमों के बीच चैंपियंस ट्रॉफी में ये पहला मैच होगा.

आईसीसी टूर्नामेंट में दोनों टीमों का रिकॉर्ड

पाकिस्तान और इंग्लैंड ने अब तक कुल 11 मैच खेले हैं जिनमें से 6 इंग्लैंड के नाम रहा और 4 में पाकिस्तान की टीम ने जीत दर्ज की तो वहीं 1 मैच का कोई निष्कर्श नहीं निकला.

ये हैं इंग्लैंड-पाकिस्तान के की-प्लेयर्स

ये 10 खिलाड़ी ऐसे हैं जो मैच का पासा पलट सकते हैं. जानें कौन हैं वो खिलाड़ी.

इंग्लैंड

जो रूट, इयॉन मोर्गन, बेन स्टोक्स, लियाम प्लंकेट और आदिल राशिद

पाकिस्तान

सरफराज अहमद, अजहर अली, फखर जमान, हसन अली और जुनैद खान

बहुत जरुरी है फिल्म में रोमांस : सलमान खान

सिनेमा में आ रहे बदलाव के साथ ही सलमान खान की फिल्मों में भी एक नया बदलाव नजर आता है. फिल्म ‘जय हो’ के बाद वह अपनी हर फिल्म में मनोरंजन के साथ कोई न कोई सामाजिक संदेश देते आ रहे हैं. इससे उनकी नई फिल्म ‘‘ट्यूबलाइट’’ भी अछूती नहीं है. ‘ट्यूबलाइट’ में इंसान के अपने यकीन की बात की गयी है, तो वहीं वह निजी जिंदगी में अपने एनजीओ ‘‘बीइंग ह्यूमन’ के तहत भी कई सामाजिक कार्य करते हुए गरीबों की मदद कर रहे हैं, मगर वह इन कामों को प्रचारित नहीं करते.

हाल ही में मुंबई के ‘‘ताज लैंड्स’’ होटल में हमने सलमान खान से एक्सक्लूसिव बातचीत की, जो कि कुछ इस प्रकार रही…

क्या आप स्टार कलाकार को फिल्म की सफलता की गारंटी मानते हैं?

जी नहीं, एक फिल्म की सफलता के लिए अच्छी कहानी और कहानी में इमोशन होना चाहिए. आप दर्शकों को ग्लैमर, एक्शन और मंहगी उड़ती हुई कारें दिखाकर मूर्ख नहीं बना सकते. इसलिए निर्माता के तौर पर जब मैं किसी फिल्म को बनाने का निर्णय लेता हूं तो मेरा सारा ध्यान उसकी कहानी पर होता है. मैं भी एक लेखक का बेटा हूं. फिल्म की कहानी अच्छी हो और फिल्म बकवास बनी हो तो भी चल जाती है, मगर फिल्म की कहानी बकवास हो और वह बहुत बेहतर ढंग से बनी हो, तो दो दिन में ही सिनेमा घर से बाहर हो जाती है. हमारी फिल्म ‘‘ट्यूबलाइट’’ में जबरदस्त इमोशन है.

‘ट्यूबलाइट’ आपके लिए दो भाईयों की कहानी है या युद्धबंदी को छुड़ाने की कहानी?

यह फिल्म दो भाईयों की प्रेम कहानी है. जिनको पता ही नहीं होता कि युद्ध में क्या होगा. यह दोनों भाई जगदलपुर नामक अपने छोटे से गांव में रहते हैं. जहां सब कुछ ठीक चल रहा है. पर इन्हें इस बात का एहसास ही नहीं है कि कभी यह दोनों अलग हो जाएंगे. यह पूरा गांव नष्ट हो जाएगा. और बड़े भाई लक्ष्मण ट्यूबलाइट है, उससे अपने भाई से अलग होना झेला नहीं जाएगा. खबरे आएंगी कि जंग शुरू हो गयी है. कुछ वहां के मरे हैं, कुछ यहां के मरे हैं. इसके अलावा कोई खबर नहीं आती. तो फिल्म में ट्यूबलाइट की कहानी है कि वह अपने भाई के बिना जिंदगी जी पाएगा या नहीं. उसका अपना एक संघर्ष है.

अपने भाई को दिमाग का उपयोग कर किस तरह से वापस लाए, इसकी कहानी है. क्योंकि वह शारीरिक रूप से कुछ नहीं कर सकता. बंदूक उठा नहीं सकता. तो लक्ष्मण उर्फ ट्यूबलाइट कैसे अपने दिमाग व सच्चे दिल के बल पर अपने भाई को वापस लेकर आता है. चीन युद्ध के समय कोई युद्धबंदी नहीं हुआ था, बल्कि सीज फायर हुआ था और सभी को उनके अपने देश वापस भेज दिया गया था.

फिल्म में इस बात पर रोशनी डाली गयी होगी कि युद्ध शुरू होने पर उस गांव व वहां रहने वालों पर क्या बीतती है?

जी हां, ऐसा भी है. जो सैनिक युद्ध के मैदान पर गया हुआ है, उसके भाईयों, उसकी मां पर क्या बीतती है. जंग में गोली किसी को पड़ती है, तो उसे कुछ पता ही नहीं चलता. पर हकीकत में गोली तो पूरे खानदान और मां की छाती पर पड़ती है. गोली पड़ने के बाद उसके परिवार को पूरी जिंदगी झेलना पड़ता है. ऐसा महज हमारी तरफ ही नहीं बल्कि दूसरी तरफ भी होता है.

‘जय हो’ से लेकर अब तक आपकी हर फिल्म में कोई संदेश होता है. उस पर लोगों से किस तरह की प्रतिकियाएं मिलती हैं?

मेरी हर फिल्म में अंडर करंट संदेश होता है. जैसे कि एक संवाद है, ‘‘स्वागत नहीं करोगे हमारा..’’ स्वागत करना हमारा कल्चर यानी कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है. तो हमने इसी तरह से हर फिल्म में छोटी छोटी बातें की हैं. हमने बड़े बड़े संदेश देने के बारे में कभी नहीं सोचा. हमने ‘दबंग 2’ में एलआईसी पॉलिसी की बात की थी. हमने एलआईसी का विज्ञापन नही लिया था, पर यह हर इंसान के लिए जरुरी है, तो वह संदेश दिया. हम तो हमारी तरफ से लोगों को कुछ देने का प्रयास कर रहे हैं.

फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ में किस बात को मुखरता के साथ पेश किया गया है?

यह फिल्म एक यकीन की बात करती है. हम लोग बहुत जल्दी छोटी छोटी बातों पर यकीन खो देते हैं. जब हम कहते हैं कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, पर काम नही हुआ. मैं कहता हूं कि यदि काम नहीं हुआ, तो इसके मायने हैं कि आपने अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दिया.

आपने बच्चों के लिए एक फिल्म ‘‘चिल्लर पार्टी’’ बनायी थी, जिसे पुरस्कार भी मिला था. पर उसके बाद बच्चों के लिए कोई फिल्म नहीं बनायी?

मेरी कौन सी फिल्म ऐसी है, जिसमें हीरो भले ही बड़े हों, पर वह फिल्म बच्चों की नही है. ‘पार्टनर’ में बच्चा था. फिर‘बजरंगी भाईजान’ में बच्ची ही हीरो थी. ‘ट्यूबलाइट’ में बच्चा है, इसके बाद आने वाली फिल्म में बच्ची है. यह जरुरी नहीं है कि जब फिल्म में बच्चें हों तभी वह बच्चों की फिल्म होगी. बच्चे भी फिल्म में बच्चों की बजाय अपने हीरो को देखना चाहते हैं. मेरी राय में फिल्म ऐसी होनी चाहिए, जिसे बच्चे भी अपने माता पिता के साथ जाकर देख सकें और इंज्वॉय कर सकें.

आप एक्शन और कॉमेडी दोनों करते हैं. पर खुद किसमें ज्यादा इंज्वॉय करते हैं?

सच कहूं तो दोनो ही बहुत भारी पड़ जाते हैं. एक्शन में बहुत मेहनत लगती है और कॉमेडी में मैं इतना माहिर हूं नहीं, इसलिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ती है. यदि अच्छी कॉमिक टाइमिंग हमारी फिल्म इंडस्ट्री में किसी के पास है, तो वह गोविंदा के पास है. वह आउट स्टैंडिंग टैलेंटेड कलाकार हैं. बाकी तो अक्की यानी कि अक्षय कुमार भी अच्छी कॉमेडी कर लेता है.

मुझे टाइमिंग वगैरह पर थोड़ा ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. कभी कभी मेरी कॉमेडी पर लोगों को हंसी आ जाती है, कभी कभी गंभीर काम करता हूं, तो उस पर लोगों को हंसी आ जाती है. मेरे साथ तो ऐसा है कि हमने कॉमेडी कर ली, पर पता नहीं किस संवाद पर हंसेंगे या नहीं. सच में हमारे प्रशंसक व दर्शक ही तय करते हैं कि उन्हें क्या अच्छा लगता है, क्या नहीं. हम जैसे कलाकार समझ ही नहीं पाते.

कई बार हम कोई संवाद साधारण तौर पर बोल देते हैं, पर उस पर इतनी तालियां बजती है कि सोचना पड़ता है कि यह क्या हुआ? सच कह रहा हूं हमें पता ही नहीं चलता कि किस संवाद पर दर्शक किस तरह से प्रतिक्रिया देगा.

लंबे समय से आपने रोमांटिक फिल्में नहीं की?

चिंता न करें. दो रोमांटिक फिल्में कर रहा हूं, पर अभी उनके नाम उजागर नहीं करना चाहता. वैसे हर फिल्म में रोमांस होता है. जब तक फिल्म में रोमांस न हो, वह फिल्म चलती नहीं है. ‘जय हो’ या ‘किक’ हो रोमांस था. ‘एक था टाइगर’ एक्शन फिल्म थी, पर उसमें भी रोमांस का तड़का था. ‘‘बजरंगी भाईजान’’ में भी रोमांस था. तो फिल्म में रोमांस होना बहुत जरुरी है.

लेकिन इन फिल्मों में रोमांस तो दोयम दर्जे पर रहा?

आपको ऐसा लगता है, मगर प्लॉट बहुत बड़ा है. बिना प्लॉट, कहानी व रोमांस के फिल्म नहीं चलती. आप शुद्ध रोमांस दिखा दो, कहानी न हो, तो वह फिल्म नहीं चलेगी.

पर क्या आज की तारीख में ‘मैने प्यार किया’ जैसी फिल्में…?

वह एक सफल फिल्म थी. उसको तीस वर्ष हो गए. आज की तारीख में वैसा रोमांस करुंगा, तो लोग मजाक उड़ाएंगे.

तीस वर्ष में रोमांस में क्या बदलाव आया?

धीरे धीरे समाज में बदलाव आया और उसी के साथ रोमांस बदलता गया. अब फास्ट फूड का जमाना है.

आपने 2014 में कनाडा में ‘डॉ कैबी’ फिल्म बनायी थी. अब कोई योजना है?

इस वक्त एक फिल्म कर रहा हूं.

कहीं पढ़ा कि आप ‘पापा द ग्रेट’ का रीमेक करना चाहते हैं?

अरे नहीं. मजाक कर रहा था.

आपके नृत्य की भी लोग काफी तारीफ करते हैं?

मेरे नृत्य की तारीफ इसलिए होती है, क्योंकि मैं अलग तरह का नृत्य करता हूं. मेरे नृत्य की तारीफ वह लोग करते हैं, जो नृत्य नहीं कर पाते हैं. जब मैं करता हूं, तो वह लोग उठकर उतना तो कर ही लेते हैं, जितना मैं करता हूं. मेरे गाने पर बेताला से बेताला, बुजुर्ग से बुजुर्ग और बच्चे भी उतना नाच लेता है, जितना मैं नाचता हूं.

फिल्म ‘‘ट्यूबलाइट’’ का ‘रेडियो…’ गाना बहुत लोकप्रिय हो रहा है?

इस गाने पर नृत्य की कदम ताल यानी कि स्टेप्स बहुत साधारण हैं, इसलिए लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं. लेकिन मुश्किल वाला नृत्य अब रेमो डिसूजा की फिल्म में आएगा, लेकिन उसमें भी ऐसा करेंगे कि मैं डांसर लगूंगा, लेकिन उसमें भी डांस वैसा ही होगा, जिसे लोग कर पाएं.

कुछ कलाकार आपको अपना मेंटर मानते हैं?

देखिए, जब तक उस लड़के व लड़की में प्रतिभा न हो, तब तक कोई उन्हें फिल्म नहीं देता. दूसरी बात हमें भी प्रतिभाओं की जरुरत है. यह उनका बड़प्पन है कि वह मुझे अपना मेंटर मानते हैं. मैंने यह बात सूरज से सीखा कि जरुरत दोनों तरफ से होती है.

आप बीइंग ह्यूमन के तहत कुछ सिनेमाघर खोलने वाले थें?

नहीं! मैं सिनेमाघर नहीं खोलने वाला था. हमारे देश में कम सिनेमाघर हैं, तो मैंने कहा था कि ज्यादा सिनेमा घर खुलने चाहिए. जहां गांवों में आबादी ज्यादा है, वहां अंतिम घर से पांच मिनट की दूरी पर एक सिनेमा घर होना चाहिए. जहां टिकट दर कम हो. जिससे लोग पायरेसी की तरफ न झुकें और परिवार के साथ फिल्म देख सकें. मेरे दिमाग में यह ख्याल उस वक्त आया था, जब हम लोग ‘बजरंगी भाईजान’ की शूटिंग मंडवा कर रहे थें. तब हमें ‘डॉली की डोली’ देखने के लिए ढाई घंटे दूर जाना पड़ा था.

गिरगिट से डराए जाने पर एंकर पर भड़के शाहरुख खान

बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान के जितने फैन भारत में हैं उतने ही विदेशों में भी हैं. दुबई में शाहरुख की दीवानगी ऐसी है कि लोग उनकी हर फिल्म देखने सिनेमाघर जरूर जाते हैं. यही वजह कि दुबई टूरिज्म ने शाहरुख खान से ही दुबई टूरिज्म के लिए प्रोमो रिकॉर्ड करने को कहा. दुबई टूरिज्म कैंपेन #BeMyGuest के शूट लिए हाल ही में शाहरुख दुबई गए थे. इस दौरान शाहरुख ने कुछ प्रमोशनल टीवी शो में भी हिस्सा लिया.

शाहरुख दुबई के एक चैनल में रमीज अंडरग्राउंड नाम के प्रैंक शो में पहुंचे. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इस शो में प्रैंक खेला जाता है. किंग खान के साथ भी एक प्रैंक किया गया. शाहरुख को वहां नकली गिरगिट से डराया गया और शाहरुख फीमेल होस्ट के साथ गड्ढे में जा गिरे. लेकिन जैसे ही शाहरुख को पता चला यह गिरगिट असली नहीं है बल्कि शो का एंकर रमीज गलाल इसमें घुसा हुआ है तो शाहरुख को गुस्सा आ गया.

शाहरुख ने शो की टीम पर भड़कते हुए कहा, 'क्या तुमने इसी बकवास के लिए मुझे इंडिया से बुलाया है.' मामला गंभीर होता देख शो एंकर ने माफी मांग ली, लेकिन शाहरुख यहां भी नहीं ठहरे और कहा माफी मांगने से कुछ नहीं होगा, यहां से चले जाओ और मेरी टीम को बुलाओ. ये कोई जोक है क्या.

एंकर ने शाहरुख को समझाने की कोशिश की और सफाई दी कि यह एक प्रैंक शो जिसका नाम रमीज अंडरग्राउंड है तो शाहरुख ने भड़कते हुए कहा मुझे तुम्हारे इस बकवास शो का नाम जानने में कोई रुचि नहीं है.

वैसे भी शाहरुख ने इस शो में आने के लिए पूरे 2 करोड़ लिए थे. शो के एंकर ने शाहरुख के साथ ट्विटर पर सेल्फी भी शेयर की है, जिसमें दोनों खुश नजर आ रहे हैं. हालांकि, जिस अंदाज में शाहरुख, रमीज से बात करते हैं और मुस्कुराते हैं, उसे देखकर ऑडियंस कह रही है कि यह प्रैंक भी स्क्रिप्टेड था. हालांकि, वह फोटो इस विडियो के पहले का है या बाद का बता पाना मुश्किल है.

बारिश के मौसम में रखें अपनी कार का भी ख्याल

मॉनसून जल्द ही दस्तक देने वाला है. जाहिर है आपको गर्मी से राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बारिश के मौसम में आपको अपने साथ साथ अपनी कार का भी ख्याल रखना होगा. आपकी गाड़ी को भी बारिश के मौसम में खास केयर की जरूरत होती है. साथ ही बारिश के दिनों में ड्राइविंग के दौरान भी आपको खास ख्याल रखना होता है. हम आपको बताते हैं मानसून के दौरान आपकी कार को सुरक्षित रखने के टिप्स और साथ ही वो बातें, जो बारिश में ड्राइविंग के दौरान ध्यान में रखनी जरूरी है.

चाहे वो कोई भी मौसम हो, आपके कार के टायर्स हमेशा अच्छे कंडीशन में होने चाहिए. ये बात मॉनसून के दिनों पर भी लागू होती है. कार के टायर्स के कंडीशन पर नजर रखने के लिए आप अपनी कार में टायर त्रेड डेफ्थ गॉज (Tyre thread depth gauge) रख सकते हैं.

गाड़ी के ब्रेक, वाइपर ब्लेड और वाश पाइप सिस्टम को चेक करते रहें. साथ ही गाड़ी में खराब हो चुके पुर्ज़ों को बदलवा दें. किसी जानकार मेकैनिक से चेसिस में बने पानी निकलने वाली जगह को चेक कराएं ताकि बारिश के मौसम में गाड़ी की चेसिस के अंदर पानी इकट्ठा ना हो.

भीगी हुई सड़कों पर ज़्यादा लाइट की जरूरत होती है. ऐसे में अपनी कार के हेड लाइट को दुरुस्त रखें. अगर बहुत ज़्यादा जरूरत हो तो गाड़ी में एक्सट्रा लाइट लगवा लें. बारिश के मौसम में उमस काफी बढ़ जाती है ऐसे में अपनी कार को ढक कर ना रखें, इससे गाड़ी में रस्ट लगने का खतरा होता है. कार को हमेशा थोड़ी खुली जगह में ही पार्क करें.

आद्रता ( Moisture ) से आपकी कार को काफी नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में आप कुछ देसी नुस्खे भी अपना सकते हैं. डीज़ल और जले हुए मोबिल को मिलाकर गाड़ी की बॉडी के निचले हिस्से, इंजन के आसपास और लीफ स्प्रिंग पर लगा सकते हैं. ये गाड़ी को रस्ट से बचाता है. ध्यान रखें कि जले हुए मोबिल और डीज़ल का ये मिक्सचर आपकी त्वचा पर ना लगे, इससे आपकी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है. इस मिक्सचर का इस्तेमाल डिस्क ब्रेक, कैलिपर्स, व्हील ड्रम और रबर पार्ट पर बिल्कुल ना करें. समय समय पर आप अपनी कार पर वैक्स पॉलिश भी लगाते रहें.

रस्ट लगने पर आप रस्ट रिमूवल पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये पाउडर किसी भी कार एसेसरिज की दुकान पर आसानी से उपलब्ध होता है. बारिश में ड्राइव करने के बाद गाड़ी को अच्छी तरह पानी से धोएं. गाड़ी की वाशिंग, मेंटेनेंस, ऑयल स्प्रे की सुविधा कई पेट्रोल पंप पर भी उपलब्ध होती है. आप वहां भी जा सकते हैं.

अपनी कार को कभी भी उन रास्तों पर ले जानें से बचें जिस पर जलजमाव हुआ हो. और अगर किसी कारणवश आपको कार ले जानी पड़े तो पानी में गाड़ी को कभी भी तेज़ ना चलाएं. कार की स्पीड बिल्कुल धीमी रखें.

अगर आप अपनी कार को लेकर पानी में उतरते हैं तो गाड़ी की स्पीड धीमी रखें. साथ ही ये ध्यान रखें कि गाड़ी बंद ना हो. अगर पानी में घुसने के बाद आपकी कार बंद होती है तो संभव है कि टेल पाइप से पानी घुसकर आपकी कार की इंजन तक पहुंच जाए. इससे आपकी कार के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है.

अगर पानी में घुसने के बाद आपकी कार बंद हो जाती है तो उसे भूलकर भी दोबारा स्टार्ट ना करें. ऐसा करना आपकी कार के इंजन को लॉक कर सकता है. इसलिए बेहतर है कि गाड़ी को धक्का देकर पानी से बाहर निकालें और फिर स्टार्ट करें. बारिश में गाड़ी चलाते वक्त कभी भी सड़के के किनारों पर ना जाएं. बारिश के मौसम में सड़कों पर फिसलन होती है और अगर आप अपनी कार को लेकर सड़क के किनारों पर उतरते हैं तो गाड़ी के फिसलने का डर बना रहता है.

बारिश के मौसम में अपनी कार में एक रस्सी और एक बेलचा (Shovel) जरूर रखें ताकि जब आपकी कार कहीं गीली मिट्टी या पानी में फंस जाए तो रस्सी की मदद से उसे बाहर निकाला जा सके. बेलचा आपको टायर के आसपास की मिट्टी हटाने में मदद करेगा.

गाड़ी में एक टॉर्च जरूर रखें. अगर आप कही अंधेरी या सूनसान जगह पर फंसते हैं तो ये टॉर्च आपकी मदद करेगी. ट्रैफिक जाम में घंटों फंसने के बाद हो सकता है आप भूख लग जाए. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कार में पर्याप्त खाना लेकर चलें.

एक मेडिकल किट भी गाड़ी में जरूर रखें. वैसे आमतौर पर सभी गाड़ियों में मेडिकल किट मुहैया कराया जाता है लेकिन आप उस किट को हमेशा मेंटेन रखें. इमरजेंसी की स्थिति में आपको इसकी जरूरत पड़ सकती है.

सुरक्षित मोबाइल बैंकिंग के कारगर तरीके

पिछले दो वर्षों में बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए मोबाइल तथा इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है.

यह बैंकिंग का सबसे तेज तथा कभी भी किया जा सकने वाला कार्य है, लेकिन परेशानी तब होती है जब मोबाइल खो जाए या फिर चोरी हो जाए.

इसलिए थोड़ी सी भी लापरवाही खतरनाक हो सकती है इसलिए जरूरत है आप सोच-समझकर मोबाइल बैंकिंग का उपयोग करें.

निजी सूचनाएं तथा जानकारियां

मोबाइल बैंकिंग का यूज करते समय निजी सूचनाएं जैसे- खाता नंबर, जन्‍मतिथि, पासवर्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और पैन कार्ड जैसी निजी जानकारियां गोपनीय रखें अन्यथा हैकर्स आपका बैंक अकाउंट हैक करके आसानी से नुकसान पहुंचा देंगे. जरूरी है कि फोन को सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर से सुरक्षित किया जाएं.

पब्लिक वाइ-फाइ/ब्लूटूथ नहीं

अगर मोबाइल बैंकिंग का उपयोग कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि गलती से भी पब्लिक वाइ-फाइ व मोबाइल ब्लूटूथ का उपयोग न करें. इससे वायरस आपके मोबाइल पर हमला कर सकता है. इस खतरे से बचने के लिए आप मोबाइल में एंटी वायरस फायरवॉल और सेफ्टी सॉफ्टवेयर टाइम-टाइम पर अपडेट करते रहें.

ब्राउजिंग हिस्ट्री पर ध्यान

जब भी आप मोबाइल बैंकिंग का यूज करते हैं तो तभी अपने स्मार्टफोन से ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करते जाएं, इससे अगर फोन खो जाएं या हैक भी हो जाएं तो आपको नुकसान नहीं होगा.

पासवर्ड हो स्ट्रांग

जब भी आप मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं क्या उसमें ऑटोलॉक लगाकर रखते हैं? सेफ मोबाइल बैंकिंग के लिए अपने मोबाइल में ऑटोलॉक जरूर लगाएं. इसके लिए आप कैरेक्टर, न्यूमैरिक और स्पेशल कैरेक्टर्स का 8 डिजीट वाला या उससे ज्यादा के कैरेक्टर का एक स्ट्रांग पासवर्ड चुनें.

ट्रस्टेड साइट पर ब्राउजिंग करें

जब भी मोबाइल में ब्राउजिंग करें तो ध्यान रखें कि साइट विश्वसनीय हो, विशेषकर अगर आप गेम्स, ऐप्स, गाने और वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं. बहुत बार देखा गया है कि किसी भी साइट से डाउनलोड करना महंगा साबित हो जाता है चूंकि डाउनलोडिंग के साथ-साथ वायरस अटैक का खतरा और बढ़ जाता है.

प्रियंका चोपड़ा की बहन का हौट वीडियो हुआ वायरल

25 साल की मनारा चोपड़ा कुछ ही समय पहले बॉलीवुड में आई हैं. उन्होंने बॉलीवुड में अपने हौट सीन से सबको हैरान कर दिया है. मनारा बॉलीवुड की चर्चित हीरोइन प्रियंका चोपड़ा की बहन हैं.

प्रियंका चोपड़ा आजकल हॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमा रही हैं, पर उनकी बहन मनारा चोपड़ा बॉलीवुड में ही काम कर रही हैं. मनारा चोपड़ा कहती हैं कि लोग मुझे मेरे नाम से ही जाने, प्रियंका चोपड़ा के नाम से नहीं.

सुर्खियों में बने रहने के लिए मनारा चोपड़ा बॉलीवुड में लगातार हौट सीन कर रही हैं. पर आजकल वह किसी और वजह से सुर्खियों में हैं. असल में उनका एक हौट सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

आप भी देखिए ये वीडियो

आप भी बोल सकते हैं धाराप्रवाह अंग्रेजी

प्रतीक का एमसीए का यह अंतिम सेमैस्टर था. वह कैंपस इंटरव्यू की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था. इंटरव्यू की तैयारी के लिए उस ने सब से पहले अपने सब्जैक्ट्स के बेसिक कौंसैप्ट्स की गहन तैयारी में काफी समय दिया. फिर करंट अफेयर्स का भी बड़ी तल्लीनता से अध्ययन किया. इंटरव्यू के दिन वह काफी कौन्फिडैंट था कि आज किसी न किसी मल्टीनैशनल कंपनी में उस का चयन अवश्य होगा.

लेकिन वह अपने बैच में एकमात्र ऐसा कैंडिडेट था, जिस का सिलैक्शन नहीं हो पाया. प्रतीक ने जब इंटरव्यू का एनालिसिस किया तो उसे अपनी असफलता का कारण समझ आया. दरअसल, इंटरव्यू बोर्ड द्वारा पूछे गए प्रश्नों का प्रतीक बहुत अच्छे ढंग से उत्तर नहीं दे पाया था. कारण था उस की स्पोकन इंगलिश अच्छी न होना.

लेकिन इस का अर्थ यह नहीं था कि प्रतीक को अंग्रेजी नहीं आती थी बल्कि उस की इंगलिश बहुत अच्छी थी. बस, वह इंगलिश बहुत फ्लुएंटली नहीं बोल पाता था. उस की सब से बड़ी समस्या थी कि वह जब भी किसी के सामने इंगलिश बोलना शुरू करता तो बहुत डर जाता था और इसी घबराहट में वह गलतियां कर बैठता था.

सच पूछिए तो इंगलिश जानना और बोलना दोनों ही अपनेआप में अलगअलग बातें हैं और जिस में सफलता के लिए प्लान के आधार पर इंटैंसिव प्रिपरेशन और कंसिस्टैंट प्रैक्टिस की जरूरत होती है.

प्रतीक की असफलता की कहानी उन लाखों किशोरों की सच्ची दास्तान है जो उत्कृष्ट प्रतिभा के बावजूद फ्लुएंटली अंग्रेजी नहीं बोल पाते हैं और इस चक्कर में अच्छे अवसर भी खो देते हैं, क्योंकि आजकल मल्टीटास्किंग के साथसाथ फ्लुएंट अंग्रेजी को भी काफी महत्त्व दिया जाता है और अगर हमारे अंदर प्रतिभा है, लेकिन अंग्रेजी नहीं बोल पाते तो बेहतर मौके हमारे हाथ से निकल जाते हैं, जिस का पछतावा हमें हमेशा रहता है.

इस सच से कदाचित इनकार नहीं किया जा सकता कि इंगलिश स्पीकिंग में मास्टरी कैरियर में फास्ट ग्रोथ के लिए एक गोल्डन पासपोर्ट के रूप में शुमार होती है. पब्लिक कम्युनिकेशन की यह कला पर्सनैलिटी को निखारती है और क्विकफिक्स की तरह इंस्टैंट सफलता दिलाने में काफी मदद करती है.

आखिर अंग्रेजी में धाराप्रवाह बोलने की कला पर मास्टरी कैसे हासिल की जाए?

सच पूछिए तो निरंतर प्रयास, दृढ़ प्रतिज्ञा और अदम्य साहस के साथ यदि कोई व्यक्ति इंगलिश बोलने की कोशिश करता है तो वह अवश्य इस कला में जल्दी ही महारथ हासिल कर सकता है.

अंग्रेजी बोलने वालों को तल्लीनता से सुनें

क्या आप ने कभी सोचा है कि बच्चा बिना किसी ग्रामर और प्रारंभिक प्रोफैशनल स्पीकिंग ट्रेनिंग के अपनी मातृभाषा धाराप्रवाह बोलना कैसे सीख लेता है? आखिर वह बच्चा अपनी मातृभाषा सीखने के लिए क्या प्रयास करता है? हकीकत में वह साधारण रूप से अपने पेरैंट्स और परिवार के अन्य लोगों को अपनी मातृभाषा बोलते हुए सुनता है और वह उस भाषा को बोलने में पारंगत हो जाता है.

इसलिए इंगलिश स्पीकिंग में मास्टरी के लिए इंगलिश स्पीकर्स को ध्यान से सुनें औैर इंगलिश स्पीकिंग के तरीके को फौलो करें. इस के साथ ही टैलीविजन पर प्रसारित होने वाले टौक शो भी ध्यान से देखने पर इंगलिश स्पींकिग की कला को आसानी से सीखा जा सकता है. इस के अंतर्गत फेमस पर्सनैलिटी और सैलेब्रिटी होस्ट फ्लुएंट इंगलिश बोलते हैं जो अन्य दृष्टिकोण से भी परफैक्ट होती है.

अमेरिकी मीडिया की मालकिन ओपरा विनफ्रे इसी टौक शो के कारण आज एक ग्लोबल व्यक्तित्व बन चुकी हैं. भारतीय टैलीविजन इंडस्ट्री में राजदीप सरदेसाई, करण थापर, करण जौहर इत्यादि बेशुमार सैलेब्रिटीज हैं, जो अपने विभिन्न टौक शोज के कारण दुनिया भर में अपनी प्रसिद्धि के मील स्तंभ स्थापित कर चुके हैं. आप इन के इंगलिश बोलने के स्टाइल और तरीके को फौलो करेंगे तो शीघ्र इंगलिश का एक अच्छा स्पीकर बन सकते हैं.

ग्रामर की गलतियों को सीरियसली न लें

इंगलिश बोलते समय जब कोई स्पीकर ग्रामर की गलतियों से डर जाता है तो यह स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है. इसलिए यदि आप ऐक्सीलैंट और फ्लुएंट स्पीकर बनना चाहते हैं तो आप को सब से पहले अपने मन से ग्रामर में होने वाली गलतियों को पूरी तरह से निकालना पड़ेगा, क्योंकि गलती करने के भय के कारण हम आगे नहीं बढ़ पाते.

गलती का यह डर हमारे पैरों में बेडि़यों की तरह होता है जो हमें आगे नहीं बढ़ने देता. इस के बारे में सीधा सा फौर्मूला यही है कि आप को यह मान कर चलना होगा कि हर इंगलिश स्पीकर, अपने जीवन के शुरुआती दिनों में अवश्य व्याकरण की गलतियों का शिकार हुआ होगा. बिना ग्रामर की मिस्टेक्स के इंगलिश स्पीकिंग की कला में पूर्णता किसी भी कीमत पर हासिल नहीं की जा सकती.

इसलिए जब भी आप इंगलिश बोलें तो ग्रामर की मिस्टेक्स भूल जाएं. ऐसा न करने की स्थिति में आप कभी भी इंगलिश उतनी तेजी से और शुद्ध नहीं बोल पाएंगे जिस का आप सपना देख रहे होते हैं.

वर्ड पावर बढ़ाएं

ब्रिटिश पौलिटीशियन और लेखक डिजरायली ने एक बार कहा था, ‘शब्दों द्वारा हम दुनिया पर शासन कर सकते हैं.’ क्या आप ने कभी इस बात पर गौर किया है कि हम बोलते समय हकलाते क्यों हैं और हमारे बोलने की स्पीड टूटती क्यों है?

दरअसल, बोलने के क्रम में हम ग्रामर की नौलेज की कमी के कारण नहीं बल्कि प्रौपर वर्ड्स के अभाव के कारण घबरा जाते हैं औैर हकलाने लगते हैं. वर्ड पावर कम्युनिकेशन सशक्त मीडियम के रूप में काम करती है. इसलिए वर्ड पावर बढ़ाना बहुत जरूरी है.

वर्ड पावर बढ़ाने के लिए आप के पास अच्छी डिक्शनरी होनी चाहिए. इस डिक्शनरी में किसी वर्ड का मीनिंग मदर टंग के बजाय इंगलिश में होता है, जिस से इंगलिश बेहतर समझने और बोलने में काफी मदद मिलती है.

विभिन्न विषयों पर लिखी पुस्तकें पढें

किसी लैंग्वेज को फ्लुएंटली बोलने के लिए उस भाषा की पुस्तकों का गहन अध्ययन करना आवश्यक होता है. इतना ही नहीं उस लैंग्वेज की विभिन्न स्ट्रीम्स पर पुस्तकें, मैगजींस और जर्नल्स जरूर पढ़ने चाहिए. इस से कौंसैप्ट, ग्रामर के साथसाथ वोकैब्यूलरी को मजबूत करने में काफी मदद मिलती है.

भारीभरकम शब्दों का प्रयोग करने से बचें

अलंकारिक और साहित्यिक शब्द भाषा को समृद्ध बनाते हैं, लेकिन ऐसे शब्दों का प्रयोग यदि लेखन में किया जाए तो आलेख उत्कृष्ट क्वालिटी का हो जाता है. इस तरह के कठिन और बड़े शब्दों के प्रयोग से औडियंस को समझने में कठिनाई होती है और फिर हमारा कम्युनिकेशन अधूरा रह जाता है. इस के अतिरिक्त कठिन शब्दों के उच्वारण में भी परेशानी होती है, जिस के कारण हम फर्राटेदार अंग्रेजी नहीं बोल पाते. इसलिए जब भी सार्वजनिक स्थान पर बोलना हो तो सरल और छोटे वाक्यों का प्रयोग करें. भारी और अलंकारिक शब्दों के प्रयोग से यथासंभव बच कर रहना चाहिए.                                

इंगलिश बोलते समय इन महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को कभी न भूलें :

–       खुद को कभी कम न आंकें, लेकिन इस के साथ ही आप को अपनी कमजोरियों का भी ज्ञान होना चाहिए. इतना ही नहीं, अपनी कमजोरी को धैर्य से दूर करने के लिए मेहनत करें.

–       जब भी किसी व्यक्ति के सामने इंगलिश बोल रहे हों तो सैल्फ कौन्फिडैंस कभी न खोएं.

–       इंगलिश में वाक्यों के स्ट्रक्चर्स को सीखें और उन्हें याद भी रखें. ये स्ट्रक्चर्स इंगलिश स्पीकिंग के लिए फाउंडेशन स्टोन का काम करते हैं.

–       जब भी इंगलिश बोलना शुरू करें तो शुरू में 4-5 वाक्य सिंपल और छोटेछोटे बोलें. फिर आप को इस भाषा को बिना रुके बोलने में कभी दिक्कत नहीं होगी.

–       शब्दों के उच्चारण को भाषा की आत्मा कहा जाता है. इसलिए केवल फर्राटेदार इंगलिश ही नहीं बल्कि करैक्ट उच्चारण वाली इंगलिश बोलने की भी आदत डालें और इस के लिए शब्दों के करैक्ट उच्चारण को डिक्शनरी में देखते रहें और उन्हें रिटेन करते रहें.

–       अपने जीवन की आम बातें इंगलिश में ही सोचें और कल्पना करें. ऐसा करने से इंगलिश आप की आदत में शामिल हो जाएगी और इस से भय नहीं लगेगा.

–       रोज कम से कम एक अंग्रेजी अखबार जरूर पढ़ें. पेपर में आर्टिकल्स और एडिटोरियल को गौर से पढें. ऐसा करने से इंगलिश लैंग्वेज को जानने में काफी मदद मिलेगी. साथ ही विभिन्न प्रकार के विषयों पर आप के कौंसैप्ट होंगे जो अंतत: आप को फ्लुएंट इंगलिश बोलने में काफी मदद करेंगे.    

हनीमून सिस्टाइटिस : किडनी के लिए खतरा

जो महिलाएं नियमित यौन संबंध बनाती हैं, उन में ज्यादा संख्या में बैक्टीरिया ब्लैडर में चले जाते हैं. बारबार यौन संबंध बनाने से हुए संक्रमण को हनीमून सिस्टाइटिस कहते हैं.

यूरिनरी ट्रैक्ट का संक्रमण यूटीआई, यूरेथरा (मूत्रनली), ब्लैडर (मूत्राशय), युरेटर्स (मूत्रवाहिनी) और किडनी (गुरदे) का संक्रमण है. ये शरीर के वे भाग हैं जिन से गुजरते हुए यूरिन शरीर से बाहर निकलता है. यूटीआई में मूत्रमार्ग का कोई भी भाग संक्रमित हो सकता है. यूरिनरी ट्रैक्ट का संक्रमण जितना ऊपर स्थित होगा संक्रमण उतना ही गंभीर होगा. इस के अनुसार ही यूटीआई को अपर और लोअर में वर्गीकृत किया गया है. यूटीआई संक्रमण गंभीर हो कर डीहाइड्रेशन, सैप्सिस, किडनी फेल्योर का कारण बन सकता है.

इस संक्रमण का खतरा उन महिलाओं में ज्यादा रहता है:

– जो महिलाएं गर्भनिरोधक के रूप में डायफ्राम या स्पर्मिसीडल का उपयोग करती हैं.

– जिन के यूरिनरी ट्रैक्ट में अवरोध आ जाता है जैसेकि पथरी या प्रौस्टेट का बढ़ जाना.

– जिन में किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता उदाहरण के लिए स्पाइनल कौर्ड इंजरी.

– जिन का रोगप्रतिरोधक तंत्र कमजोर हो, एड्स, डायबिटीज, अंग प्रत्यारोपण करवाने वाले रोगी और वे जिन्होंने कैंसर के उपचार के लिए कीमोथेरैपी कराई हो, शामिल हैं.

– उम्रदराज लोगों और बच्चों में भी इस की आशंका बढ़ जाती है, क्योंकि वे अपने यौन अंगों को अच्छी तरह साफ नहीं कर पाते.

महिलाएं क्यों अधिक शिकार

– महिलाओं में यूरेथरा की लंबाई पुरुषों के मुकाबले कम होती है. इस से बैक्टीरिया के लिए वहां पहुंचना आसान होता है.

– महिलाओं में यूरेथरा गुदा मार्ग के ज्यादा करीब स्थित होता है. इस से गुदा मार्ग के बैक्टीरिया के यूरेथरा तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है. यौन संबंधों के दौरान, बैक्टीरिया के यूरेथरा में पहुंचने की आशंका अधिक होती है.

– गर्भनिरोधक के रूप में डायफ्राम के उपयोग से यूरेथरा पर दबाव पड़ता है. इस से ब्लैडर में मौजूद यूरिन खाली नहीं हो पाता. जब ब्लैडर में थोड़ा यूरिन बच जाता है, तो उस में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

– मेनोपौज के बाद यूटीआई के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि ऐस्ट्रोजन हारमोन के कम होने से वैजाइना, यूरेथरा और ब्लैडर के निचले हिस्से के ऊतक बहुत पतले और आसानी से टूटने वाले हो जाते हैं.

इस के विपरीत पुरुषों में यूटीआई का खतरा कम होता है, क्योंकि उन का यूरेथरा लंबा होता है और प्रौस्टेट में बनने वाला द्रव बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होता है.

यूटीआई को रोकने के टिप्स

– खूब पानी या दूसरे तरल पदार्थ लें. इस से आप ज्यादा बार यूरिन करेंगी, जिस से शरीर से बैक्टीरिया बाहर निकल जाएंगे.

– यूरिन को कभी न रोकें.

– मूत्र या मल त्यागने के बाद आगे से पीछे की ओर धोएं, न कि पीछे से आगे की ओर. इस से गुदा मार्ग के आसपास मौजूद बैक्टीरिया के वैजाइना और यूरेथरा तक पहुंचने का खतरा कम हो जाएगा.

– यौन संबंध बनाने के बाद यौन अंग को धोएं और यूरिन पास करें ताकि बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकल जाएं.

– अगर डायफ्राम ही संक्रमण का कारण हो तो गर्भनिरोधक के रूप में दूसरे तरीकों का प्रयोग करें.

– कोई भी वयस्क या बच्चे जिन में भी यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण के लक्षण नजर आएं, तो लक्षण नजर आने के 24 घंटों के अंदर डाक्टर से मिल लें.

– डाक्टर ऐंटीबायोटिक का कोर्स दे तो उसे पूरा करें. बेहतर महसूस कर रहे हों तो भी उपचार जारी रखें.

– कौफी और अलकोहल का सेवन न करें. ये दोनों ब्लैडर को इरिटेट करती हैं.

– धूम्रपान भी न करें, क्योंकि वह भी ब्लैडर को इरिटेट करता है.

उपचार

प्रौस्टेट को ठीक करने के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं, जिन में दवा, थेरैपी और सर्जरी शामिल है. कौन सा उपचार सही रहेगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे प्रौस्टेट का आकार क्या है, मरीज की उम्र, मरीज का संपूर्ण स्वास्थ्य, लक्षण कितने गंभीर हैं.

अगर लक्षण अधिक गंभीर नहीं हैं, तो कुछ दिनों के लिए उपचार न कराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखें. कुछ लोगों में इस के लक्षण अपनेआप चले जाते हैं.

दवा: लक्षण अधिक गंभीर नहीं हैं, तो दवा इस का सब से अच्छा उपचार है. अल्फा ब्लौकर दवा मूत्राशय के ऊपरी भाग की मांसपेशियों और उन के तंतुओं को रिलैक्स कर देती है, जिस से मूत्र त्यागना आसान हो जाता है. 5-अल्फा रिडक्टस इनहिबिटर्स दवा हारमोन परिवर्तन को रोक कर प्रौस्टेट को संकुचित कर देती है. अगर ये दोनों दवाएं अलगअलग कारगर नहीं होती हैं, तो डाक्टर दोनों को एकसाथ लेने का सुझाव दे सकते हैं.

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी: अगर लक्षण मध्यम से ले कर गंभीर हैं और दवा से ठीक नहीं हो रहे हैं, साथ ही मूत्रमार्ग में रुकावट आ रही है या पथरी है, यूरिन में रक्त आ रहा है अथवा किडनी से संबंधित समस्या है, तो डाक्टर सर्जरी कराने का सुझाव दे सकते हैं. सर्जरी के द्वारा प्रौस्टेट के बाहरी भाग को निकाल दिया जाता है.

लेजर थेरैपी: हाई ऐनर्जी लेजर अतिविकसित प्रौस्टेट ऊतकों को नष्ट कर देता है. लेजर थेरैपी कराने के बाद आराम भी जल्दी मिल जाता है और इस के साइड इफैक्ट्स भी कम होते हैं.

ऐंटीबायोटिक्स: ऐंटीबायोटिक्स के द्वारा यूटीआई का उपचार किया जाता है. कौन सी दवा कितने समय तक दी जाएगी यह मरीज के स्वास्थ्य और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है. अगर संक्रमण गंभीर हो गया है तो ऐंटीबायोटिक दवा दी जाती है.             

– डा. विपिन त्यागी, कंसल्टैंट यूरोलौजिस्ट ऐंड रोबोटिक सर्जन, गंगाराम हौस्पिटल, नई दिल्ली

बच्चों में डालें अच्छी आदतें

बचपन से ही बच्चों को अच्छी आदतें और व्यवहार सिखाना जरूरी है. कच्ची उम्र में बच्चे जो सीखते हैं वह आगे चल कर उन की दिनचर्या व व्यवहार का हिस्सा बन जाता है.

साफसफाई की आदत

शेमरौक प्रीस्कूल की ऐग्जीक्यूटिव डायरैक्टर एवं शेमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल की फाउंडर डायरैक्टर मीनल अरोड़ा कहती हैं कि बच्चों में व्यक्तिगत स्तर पर साफसफाई की आदत डालने की कम उम्र से ही शुरूआत करने की जरूरत होती है. बचपन से ही बच्चों में निम्न आदतें डाल कर आप उन्हें साफसफाई के प्रति सजग बना सकती हैं:

– बच्चे के दिन की शुरुआत हाथमुंह धोने से कराएं.

– उसे अपने दांत 2 से 3 मिनट तक सही ढंग से साफ करने को कहें ताकि उस के दांत कैविटी मुक्त रहें. दिन में 2 बार ब्रश करने को आदत बनाएं.

– हर भोजन से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने की आदत डालें.

– बच्चे को अपने नाखून छोटे रखने को कहें, क्योंकि बड़े नाखूनों में गंदगी जमा हो जाती है, जिस से संक्रमण का खतरा रहता है.

– खांसते या छींकते समय टिशू पेपर या रूमाल मुंह या नाक पर रखना सिखाएं.

– धुले और प्रैस किए गए कपड़े पहनने को कहें.

– कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालने की आदत डालें.

– बतौर जिम्मेदार अभिभावक बच्चे को समझाएं कि खुद को साफसुथरा रखने के साथसाथ अपने घर, महल्ले और पासपड़ोस को भी साफ रखना चाहिए.

– बच्चे को अपनी चीजें जैसे खिलौने, किताबें आदि सही जगह रखने की शिक्षा दें.

– उंगली, पैंसिल, पैन, रबड़ जैसी चीजों को नाक या मुंह में न डालने की शिक्षा दें.

– बच्चें को सिखाएं कि वह सड़कों पर कूड़ाकचरा न डालें. बाहर जाते समय साथ एक पेपर बैग ले जाने को कहें ताकि कचरा कहीं खुले में न डालना पड़े.

घर से करें शुरुआत

कई बच्चों को नैपकिन व नाइफ का इस्तेमाल करना नहीं आता, तो कुछ को खाना खाते वक्त जोर से आवाज करने की आदत होती है. पेरैंट्स होने के नाते आप को अपने बच्चों को रेस्तरां, सामाजिक आयोजनों में ले जाने से पहले टेबल पर बैठने और खाने के तरीकों के बारे में सिखाना चाहिए. नन्हे बच्चों में टेबल मैनर्स और खाने के शिष्टाचार सिखाने की शुरुआत घर से ही करनी चाहिए.

टेबल मैनर्स का प्रयोग बच्चे घर से बाहर कर सकें, इस के लिए उन्हें पहले घर पर प्रैक्टिस कराएं. अगर बच्चे रेस्तरां में या किसी के घर पर खाने की टेबल पर कोई गलती कर रहे हैं, तो उन्हें वहां डांटें या उन पर चीखेंचिल्लाएं नहीं, घर आ कर आराम से प्यार से समझाएं.

शुरू में ऐसे रेस्तरां में ले जाएं जहां बहुत ज्यादा भीड़ न हो ताकि वे आप के द्वारा सिखाए गए टेबल मैनर्स पर सहजता से अमल कर सकें. अगर आप के बच्चे टेबल मैनर्स का पालन करते हैं, तो उन की तारीफ करें ताकि वे आगे भी इन नियमों का पालन करें. बचपन से बच्चों को मैनर्स सिखाना बहुत जरूरी है, क्योंकि जैसेजैसे बच्चे बड़े होंगे, सोशल गैटटुगैदर में ये मैनर्स उन्हें आत्मविश्वास दिलाएंगे.

जरूरी टेबल मैनर्स

– बच्चों को सिखाएं कि किस तरह उन्हें छोटेछोटे टुकड़े तोड़ कर, खाने को अच्छी तरह चबा कर और मुंह बंद कर के खाना खाना है. साथ ही यह भी सिखाएं कि पानी पीते व भोजन करते समय अनावश्यक आवाज न करें. ऐसी आदत भी डालें कि प्लेट में उतना ही खाना लें जितना खा सकें या पहले थोड़ा ही लें. जरूरत हो तो बाद में ले लें ताकि खाने को बरबाद होने से बचाया जा सके.

– खाना खाते समय किस बरतन में क्या खाना है, इस की जानकारी भी छोटी उम्र से ही दें जैसे सूप के लिए बड़े चम्मच और डैजर्ट के लिए छोटे चम्मच. इसी तरह ग्रेवी वाली डिश के लिए कटोरी का इस्तेमाल करना सिखाएं.

– बच्चों को यह भी सिखाएं कि अगर उन्हें खाने की कोईर् चीज टेस्टी लगती है, तो उन्हें उसे बनाने वाले की तारीफ कैसे करनी चाहिए, साथ ही अगर कोई चीज अच्छी न लगे तो किस तरह विनम्रतापूर्वक यह बताना कि उन्हें वह डिश पसंद नहीं आई.

– बच्चों को बताएं कि अपने घर में भी और किसी और के घर में भी खाना खाने के बाद अपनी प्लेट खुद उठा कर सिंक में रखें.

– किसी भी रैस्टोरैंट में जाने पर बच्चों को नैपकिन का इस्तेमाल करना सिखाएं. नैपकिन का यूज मुंह या हाथ पोंछने के लिए ही करें.

– बच्चों को टेबल पर बैठने के मैनर्स भी सिखाएं. उन्हें बताएं कि हाथों को टेबल पर रखें. उन्हें यह भी बताएं कि खाना खाते वक्त उन के हाथों की पोजिशन ऐसी हो कि साथ बैठे लोगों को दिक्कत न आए.

– उन्हें बताएं कि खाना खाते समय बातें न करें. यह भी सिखाएं कि भोजन करते समय नाइफ को राइट और फौर्क को लैफ्ट हैंड से पकड़ें. खाना खत्म होने के बाद पानी के गिलास में हाथ न धोएं और अगर वे खाना खा चुके हों तब भी तुरंत टेबल से न उठें. सब के भोजन समाप्त होने का इंतजार करें.

– अपने घर पर ही शुरू से ही अलगअलग तरह की कटलरी का प्रयोग करना सिखाएं. बच्चों को प्लेट से भोजन को चम्मच से मुंह के पास ला कर खाने को कहें. उन्हें बताएं कि अगर डाइनिंग टेबल पर उन्हें कोई डिश चाहिए तो पास बैठे व्यक्ति से डिश पास करने को कह दें न कि टेबल की दूसरी ओर हाथ बढ़ा कर खुद लेने की कोशिश करें.

सिखाएं टेबल मैनर्स

बच्चों को किसी पब्लिक प्लेस पर ले जाना किसी मुसीबत से कम नहीं होता खास कर तब जब वे शरारती हों. कई बार तो बच्चे बाहर जा कर खाने की टेबल पर इतना आतंक मचाते हैं कि औरों के सामने आप को शर्मिंदा होना पड़ता है. कुछ बच्चे खाना खाते समय एक जगह टिक कर नहीं बैठते, इधरउधर भागते रहते हैं. क्रौकरी के साथ छेड़छाड़ करते रहते हैं. कभी टेबल पर पानी गिरा देते हैं तो कभी खाना, जिस से मेजबानों को बहुत परेशानी होती है. इसलिए कम उम्र से ही बच्चों को टेबल मैनर्स सिखाएं ताकि घर या बाहर आप को शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े.

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