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बिना इंटरनेट अपने स्मार्टफोन में देखना चाहते हैं लाइव टीवी?

अब तो टेलिकॉम बाजार में 4जी डाटा पैक्स काफी सस्ती कीमत में मिलने लगे हैं. मूवी-म्यूजिक ट्रांसफर करना हो या फिर ऑनलाइन वीडियो देखना हो 4जी स्पीड से हर काम काफी आसान हो जाता है. यही नहीं, आप अपने फोन पे लाइव टीवी भी आराम से देख सकते हैं.

ये बात तो आप जानते ही हैं कि आपके स्मार्टफोन में ये 4जी पैक खत्म होने के बाद इंटरनेट की स्पीड काफी कम हो जाती है और लाइव टीवी बफरिंग के साथ चलता है. इससे पिक्चर क्वालिटी भी काफी लो हो जाती है. इस परेशानी से निपटने के लिए हम आपके लिए, यहां एक ऐसी डिवाइस की जानकारी लाएं हैं जिसके जरिए बिना इंटरनेट के भी लाइव टीवी देखा जा सकता है.

टीवी ट्यूनर डोंगल

अगर आप मोबाइल पर लाइव टीवी देखना चाहते हैं तो यूजर को TV ट्यूनर डोंगल लेने की जरुरत होगी. इसे किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदा जा सकता है. इनकी कीमत न्यूनतम 1,000 रुपये होती है.

कैसे काम करता है ये ट्यूनर डोंगल?

यह DVB-T सिग्नल पर काम करता है. इसे फोन में सीधा कनेक्ट किया जा सकता है. इसके जरिए यूजर्स लाइव टीवी देख सकते हैं. साथ ही इसमें माइक्रो यूएसबी पोर्ट दिया जाता है जिसे फोन के चार्जर पोर्ट में कनेक्ट किया जा सकता है. अब बात आती है चैनल सर्च करने की, तो इसके लिए इसमें बिल्टइन टीवी सॉफ्टवेयर दिया होता है जो कंट्री रीजन के हिसाब से चैनल ढूंढता है. यहां से यूजर्स बिना इंटरनेट के भी फ्री चैनल का लुत्फ उठा सकते हैं. आपरो बता दें कि यह केवल एंड्रायड स्मार्टफोन पर ही काम करता है. टीवी ट्यूनर डोंगल यह किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मिल जाएंगे.

1. Segolike Mini DVB-T Microm USB HD TV Tuner Stick

इसकी कीमत 2,510 रुपये है जो डिस्काउंट के बाद 1,010 रुपये में खरीदा जा सकता है. इस पर पूरे 1,500 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है.

2. MagiDeal Aluminum Micro USB Mobile Watch DVB T2 tuner

1,900 रुपये के डिस्काउंट के बाद इस डिवाइस को 1,720 रुपये में खरीदा जा सकता है. इसकी वास्तविक कीमत 3,620 रुपये है.

रिलायंस जिओ के 12 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक

जिन लोगों ने रिलायंस जिओ का सिम लिया था उनके लिए एक बुरी खबर है. जिओ के यूजर्स का डेटा लीक हो गया है. रिलायंस जिओ के भारत में 12 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स हैं. यह डेटा magicapk.com (मैजिकएपीक डॉट कॉम) नाम की वेबसाइट पर लीक हुआ है. यह वेबसाइट 18 मार्च 2017 को godaddy.com से रजिस्टर की गई. हालांकि इस साइट के बारे में कोई और डेटा अभी उपलब्ध नहीं है. यह डेटा कैसे इस वेबसाइट के पास पहुंचा, इसकी कोई जानकारी नहीं है. लीक होने वाले डेटा में वह सभी जानकारियां हैं जो कि आधार कार्ड में दी हुई होती हैं. आधार कार्ड के माध्यम से ही रिलायंस जिओ ने अपने सिम लोगों को दिए थे. अपना नया सिम देने के लिए जिओ ने कोई और डॉक्यूमेंट नहीं लिया था सिर्फ आधार कार्ड से ही ऑनलाइन यूजर्स का डेटा लेकर सिम दिए थे. अब आधार कार्ड में उपलब्ध जिओ यूजर्स की सभी जानकारियां इस वेबसाइट पर लीक हो गई हैं. हालांकि रिलायंस जिओ ने कहा है कि यह डेटा असली है या नहीं इसकी जांच की जा रही है.

रिलायंस जिओ ने किया खंडन

वहीं जिओ ने दावा किया है कि इस वेबसाइट पर दिखाई गई पूरी जानकारी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है और यह सब गलत है. रिलायंस जिओ के डेटाबेस में की गई इस सेंधमारी के बारे में सबसे पहले fonearena.com ने बताया है. वरुण क्रिस के मुताबिक जब इस वेबसाइट पर उन्होंने अपनी और अपने साथियों की डिटेल्स को देखा तो वह दंग रह गए. रविवार रात करीब 11:40 पर देखा गया तो यह वेबसाइट इंटरनल सर्वर एरर दिखाने लगी. इस बात का पता नहीं चल पाया है कि यह साइट क्रैश हो गई है या फिर इसे अथॉरिटीज ने बंद कर दिया है. किसी भी जिओ यूजर की जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर एक सर्च बॉक्स दिया गया था जिसमें सिर्फ जिओ नंबर डालकर यूजर के बारे में पूरी जानकारी सामने आ जाती थी. जब 2 जुलाई 2017 को खरीदे एक नंबर को डालकर देखा गया तो एक्टिवेशन डेट, सर्किल और नाम आ गया. इस नंबर के लिए आधार नंबर और ईमेल आईडी नहीं आईं.

चीन को पछाड़ एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनिशप में भारत ने रचा इतिहास

भारत ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनिशप में अपना दबदबा बनाकर 5 स्वर्ण पदक जीते और इस तरह से पदक तालिका में शीर्ष रहकर इतिहास रचा तथा चीन को दूसरे स्थान पर खिसका दिया. भारत ने आज 5 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीते और इस तरह से कुल 29 पदकों (12 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य) के साथ वह शीर्ष पर रहा.

भारत का इससे पहले एशियाई चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 22 पदक (10 स्वर्ण, 5 रजत और 7 कांस्य) था. चीन 8 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य पदक लेकर दूसरे स्थान पर रहा.

जापान 1973 से 1981 तक पहली 5 चैंपियनशिप में शीर्ष पर रहा था. इसके बाद चीन का दबदबा शुरू हुआ जो 2 साल पहले वुहान तक रहा. भारत ने इस बार चीन का एकाधिकार समाप्त कर दिया. उसने हालांकि अगले महीने लंदन में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप को ध्यान में रखकर यहां दूसरी श्रेणी के एथलीटों को भेजा था.

भारत को हालांकि आखिरी दिन एक झटका भी लगा जब अर्चना अधव से श्रीलंका की निमाली वालिवर्षा कोंडा के विरोध के बाद महिलाओं की 800 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक छीन लिया गया और श्रीलंकाई एथलीट को चैंपियन घोषित कर दिया गया.

पुणे की 22 वर्षीय अर्चना ने 2 मिनट 2 सेकेंड में दौड़ पूरी करके 800 मीटर का स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन निमाली ने बाद में विरोध दर्ज कराया कि भारतीय एथलीट ने फिनिश लाइन पर उन्हें पीछे से धक्का दिया था. इसके बाद अर्चना को अयोग्य घोषित कर दिया गया और 2 मिनट 05:23 सेकंड में दौड़ पूरी करने वाली निमाली को स्वर्ण पदक दे दिया गया.

इसके बावजूद कलिंग स्टेडियम में भारतीय एथलीटों का दबदबा रहा. हेप्टाथलान में स्वप्ना बर्मन ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया. बर्मन 7वीं और अंतिम स्पर्धा (800 मीटर) में चौथे स्थान पर आने के बावजूद स्वर्ण पदक जीता. उनके पास खिताब जीतने के लिए पर्याप्त अंक थे. बंगाल की इस 20 वर्षीय एथलीट ने 7 स्पर्धाओं में कुल 5942 अंक बनाए. वह 800 मीटर की दौड़ पूरी करने के तुरंत बाद गिर गई और उन्हें तुरंत चिकित्सा मुहैया कराई गई.

जापान की मेग हेम्पिल 5883 अंक लेकर दूसरे और हेम्ब्रम 5798 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रही. लक्ष्मणन गोविंदा ने पुरुषों की 10000 मीटर दौड़ 29 मिनट 55.87 सेकंड में पूरी करके स्वर्ण पदक जीता. एक अन्य भारतीय गोपी थोंकनाल दूसरे स्थान पर रहे. विश्व जूनियर रिकॉर्ड धारक नीरज चोपड़ा ने पुरुषों के भाला फेंक में अपने अंतिम प्रयास में 85.23 की दूरी तक भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता.

देविंदर सिंह इस स्पर्धा में तीसरे स्थान पर रहे. भारत ने इसके बाद महिलाओं और पुरुषों की 4 गुणा 400 मीटर दौड़ भी जीती. इस बीच जानसन ने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ 1 मिनट 50.07 सेकंड में पूरी करके कांस्य पदक जीता.

क्रिकेट इतिहास की सबसे खतरनाक बाउंसर्स

क्रिकेट में कई तरह की गेंदबाजी की जाती है जैसे यॉर्कर, स्विंग, रिवर्स स्विंग और बाउंसर आदि. इन सब फॉर्म में से जो गेंदबाजी सबसे घातक होती है वह है, बाउंसर. गेंदबाज बाउंसर का इस्तेमाल ना सिर्फ बल्लेबाजों को रन बनाने से रोकने के लिए करता है बल्कि अच्छी बाउंसर गेंद बल्लेबाज के मन में डर भी पैदा करती है.

क्रिकेट इतिहास में बहुत से गेंदबाजों ने खतरनाक बाउंसर गेंदें फेंकी हैं. आइए कुछ ऐसी ही खतरनाक बाउंसर गेंदों के बारे में आपको बताते हैं.

एंडी लॉयड बनाम मैल्कम मार्शल

वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज मैल्कम मार्शल अपनी जबड़ा तोड़ने वाली बाउंसर के लिए जाने जाते थें. मार्शल 1984 में पहले टेस्ट के दौरान इंग्लैंड के एंडी लॉयड को एक बाउंसर डाली थी जो उनके सिर पर लगी थी और लॉयड जमीन पर गिर पड़े. अगले कुछ दिनों तक लॉयड अस्पताल में रहे.

शोएब अख्तर बनाम गैरी कर्स्टन

दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज रहे शोएब अख्तर ने ना सिर्फ अपनी पेस से बल्लेबाजों का दिल दहलाया बल्कि अपनी जबड़ा तोड़ने वाली बाउंसर से भी बहुत से बल्लेबाजों का हौसला पस्त किया. 2003 में अख्तर की एक बाउंसर साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज गैरी कर्स्टन को लगी जिसके बाद कर्स्टन कभी क्रिकेट नहीं खेल सके.

पीटर कर्स्टन बनाम ग्लेन मैक्ग्रा

अपनी सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर रहे ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने 1993 में साउथ अफ्रीकी बैट्समैन पीटर कर्स्टन को एक बाउंसर फेंकी थी जिसको खेलने वो नाकाम रहे है और गेंद सीधा उनके चेहरे के अगले हिस्से में लगी और वो बेसुध होकर मैदान में ही गिर पड़े.

शिवनारायण चन्द्रपॉल बनाम ब्रेट ली

वेस्टइंडीज टेस्ट टीम की रीढ़ रहे शिवनारायण चन्द्रपॉल ने दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में एक ब्रेट ली की बाउंसर सिर पर झेली इसके बाद वो मैदान में कुछ इस तरह गिरे जिसे देखकर हर किसी की सांस थम गई.

ब्रायन लारा बनाम शोएब अख्तर

बाउंसर की रफ्तार अगर 150 किमी प्रति घंटे से ज्यादा हो तो बल्लेबाज कोई भी हो खेलना मुश्किल हो जाता है. वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा ने शोएब अख्तर की आंधी की रफ्तार वाली बाउंसर झेली और मैदान पर किसी कटे पेड़ की तरह गिर पड़े.

ग्रेग रिची बनाम कोर्टनी वॉल्श

वेस्टइंडीज के घातक गेंदबाज कोर्टनी वॉल्श ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्रेग रिची को ऐसी बाउंसर गेंद फेंकी जो सीधा उनके मुंह पर लगी. इसके बाद रिची को मैदान छोड़कर जाना पड़ा.

फिल ह्यूज बनाम शॉन एबट

एक बाउंसर गेंद कितनी घातक हो सकती है उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया के युवा बल्लेबाज फिल ह्यूज की मौत सिर में एक बाउंसर लगने की वजह से हुई थी. फिल ऑस्ट्रेलिया के ही तेज गेंदबाज शॉन एबट की बाउंसर से चोटिल होकर मैदान पर गिरे और फिर कभी नहीं उठ पाए.

‘संस्कारी बाबूजी’ आलोकनाथ 61 बरस के हुए

संस्कारी बाबूजी के नाम से फेमस आलोकनाथ 61 साल के हो गए हैं. 10 जुलाई 1956 को दिल्ली में जन्में आलोकनाथ की पर्सनल लाइफ की कई ऐसी बातें हैं, जो ज्यादातर लोग नहीं जानते. मसलन उनके और एक्ट्रेस नीना गुप्ता के अफेयर को ही ले लीजिए. आलोक काम के सिलसिले में दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्ट्रगल के दौरान उनकी मुलाकात नीना गुप्ता से हुई और जल्दी ही उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई.

क्यों एक-दूसरे से अलग हुए आलोक-नीना

आलोक और नीना के अफेयर और ब्रेकअप के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन कहा जाता है कि दोनों ही अपने करियर पर ध्यान देना चाहते थे. इसलिए उन्होंने ब्रेकअप करने का फैसला लिया. नीना और आलोक ने साथ में 'गांधी' (1982) और 'अंत' (1994) में साथ काम किया है.

नीना के रहे कई अफेयर, आलोक ने की बिहारी अंशू से शादी

ब्रेक के बाद नीना का अफेयर म्यूजिशियन शारंगदेव और वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स से भी रहा. बात आलोकनाथ की करें तो उन्होंने पेरेंट्स की पसंद की बिहारी लड़की अंशु सिंह से शादी की और सेटल हो गए. बाबू जी अपने जीवन संगिनी के साथ संस्कारी पति की तरह जीवन निर्वाह कर रहें.

आलोकनाथ ने असंस्कारी रोल भी किए

संस्कारी बाबू जी ने हमेशा से अस तरह के रोल नहीं किए बल्कि अपने शुरुआती दौर में कन्यादान करने के बजाए लड़की के साथ पेड़ों के चारों ओर नाचते गाते भी दिखे. 1987 की उनकी फिल्म कामाग्नि में आलोकनाथ बहुत रोमांटिक और गरमागरम सींस करते नजर आए, इसे देखकर आप उनके संस्कारी रूप भूल जाएंगे. आलोकनाथ कई फिल्मों में विलेन की भूमिका करते नजर आएं. वह विनाशक, षडयंत्र, और बोलराधाबोल जैसी फिल्मों में  खलनायक का रोल बाखूबी अदा कियें.

ये है भविष्य के लिए पैसे जमा करने का सही तरीका

वास्तव में, एक व्यक्ति को रिटायरमेंट को एक विशेष लक्ष्य के तौर पर लेना चाहिए और उसके हिसाब से निवेश करना चाहिए. अपनी भविष्य निधि (पीएफ) के समान ही अपने पहले वेतन के समय से ही आप को म्यूचुअल फंड के माध्यम से इक्विटी में निवेश करना चाहिए.

इक्विटी फंड में सिस्टेमेटिक इन्वेस्ट प्लान (एसआईपी) नियमित एवं अनुशासित बचत का मार्ग प्रशस्त करती है और साथ ही साथ दीर्घकालिक तौर पर उच्च स्तरीय रिटर्न प्रदान कर मंहगाई से निजात पाने में सहायता करती है.

जैसे वेतन बढ़ने पर पीएफ की राशि में बढ़ोतरी होती है, वैसे ही वेतन बढ़ने पर एसआईपी में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए. एक व्यक्ति को पीएफ एवं एसआइपी दोनों में समान योगदान करने की नीति अपनानी चाहिए.

वास्तव में इन राशियों में जितनी ही वृद्धि होगी, रिटायरमेंट के बाद उतना ही सुख प्राप्त होगा. एसआईपी के अतिरिक्त व्यक्ति को इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए एक इक्विटी फंड में वार्षिक बोनस, इंसेंटिव के एक भाग का भी निवेश करना चाहिए.

बचत के एक हिस्से को ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) फंड में निवेश करना चाहिए, जो वर्तमान समय में आयकर अधिनियम, 1961 के अनुभाग 80 सी के अंतर्गत कर में छूट प्रदान करता है. यह आप के रिटायरमेंट के लिए एक और अच्छी बचत हो सकती है.

कैसे लगाएं रिटायरमेंट कोष का अनुमान

वास्तविक रिटायरमेंट कोष का पूर्वानुमान लगाना कई बार मुश्किल लगता है, लेकिन एक अनुमानित महंगाई दर के आधार पर आप अपने वर्तमान खर्चे को नियंत्रित कर सकते हैं और आप को इस आधार पर रिटायरमेंट के लिए आवश्यक कोष की अनुमान लगा सकते हैं.

आप इस राशि तक पहुंचने के लिए अपने मासिक निवेश को भी निर्धारित कर सकते हैं. यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि किसी भी स्थिति में एसआईपी में अवरोध नहीं आना चाहिए, क्योंकि इससे अंतिम कोष पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. निवेश के नियमित होने पर ब्याज के बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है.

ग्लाइड पाथ की नीति का करें पालन

हालांकि इक्विटी एक उथल-पुथल वाला निवेश है. इसमें रिटर्न के मामले में कुछ वर्ष बहुत अच्छे होते हैं, जबकि कुछ मामूली. इस समस्या पर विजय प्राप्त करने के लिए आप को कम अवस्था में ही बड़ी राशि का निवेश करना चाहिए और रिटायरमेंट के निकट आने पर इक्विटी आवंटन में क्रमिक रूप से कमी करनी चाहिए.

इसे ‘ग्लाइड पाथ’ कहते हैं, इससे आप रिटायरमेंट के नजदीक पहुंचने के समय इक्विटी की उथल-पुथल से बच सकते हैं और इक्विटी आवंटनो को अपेक्षाकृत कम उथल-पुथल वाले फिक्स्ड आय सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) द्वारा अंजाम दिया जा सकता है.

– इसके अतिरिक्त आप को इक्विटी से पूरी तरह बाहर निकलने की आवश्यकता नहीं है. जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार रिटायरमेंट के दौरान मार्जिनल एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए.

– नियमित खर्चों के लिए आप एक फिक्स्ड मासिक राशि को निर्धारित कर पोर्टफोलियो से एक सिस्टेमेटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्लूपी) को भी शुरू कर सकते हैं. इससे आवश्यकतानुसार यूनिटों का नगदीकरण हो जाएगा और राशि प्रत्येक माह बैंक खाते में जमा हो जाएगी. रिटायरमेंट कोष से एक फिक्स्ड राशि को निकाल कर आप खर्च के अनुशासन को अपना सकते हैं.

क्या है कपिल शर्मा की बेहोशी का सच?

पिछले दो तीन दिनों से हर चैनल व हर समाचार पत्र में खबर छप रही है कि जब शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा और इम्तियाज अली अपनी फिल्म ‘‘जब हैरी मेट सेजल’’ को कपिल शर्मा के शो में प्रमोट करने के मकसद से शुक्रवार, सात जुलाई की शाम शूटिंग करने पहुंचे, तो अचानक कपिल शर्मा बेहोश होकर गिर पड़े, जिसके चलते कपिल शर्मा को अंधेरी स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया तथा शूटिंग नहीं हो पायी, पर अब बौलीवुड से जो खबरे छनकर सामने आ रही हैं, उसके अनुसार यह खबर पूरी तरह से गलत है.

वास्तव में कपिल शर्मा ने शाहरुख खान और उनकी पूरी टीम के साथ योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की है, क्योंकि कपिल शर्मा ने सेट पर बेहोश होने का नाटक किया और वहां से निकल कर मीरा रोड के जनरल स्टूडियों मे जाकर अपनी फिल्म ‘‘फिरंगी’’ की शूटिंग करनी शुरू कर दी. सूत्र दावा कर रहे हैं कि कपिल शर्मा अस्पताल में भर्ती नहीं हैं, बल्कि वे उसी दिन से बड़े आराम से अपनी फिल्म ‘‘फिरंगी’’ की शूटिंग करने में मस्त हैं.

मजेदार बात ये है कि जब एक वेब साइट के पत्रकार ने कोकिला बेन अस्पताल से संपर्क किया, तो कोकिला बेन अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा – ‘‘हमारे पास ऐसा कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है कि कपिल शर्मा पिछली रात हमारे अस्पताल में इलाज कराने आए थे.’’ हो सकता है कि डाक्टर ने अपने पेशे के इथिक्स के चलते मरीज का नाम उजागर न करने के लिए ऐसी बात कही हो, पर कपिल शर्मा लोखंडवाला की जिस इमारत में रहते हैं, उस इमारत के लोगों का दावा है कि कपिल शर्मा अपने घर से निकलकर मीरा रोड के जनरल स्टूडियो में शूटिंग करने गए, जबकि एक अन्य सूत्र का दावा है कि शनिवार की सुबह कपिल शर्मा मीरा रोड के जनरल स्टूडियो पहुंचे और इस स्टूडियो में अपनी फिल्म ‘‘फिरंगी’’ की शूटिंग की. सच सामने नहीं आ रहा है, क्योंकि कुछ लोग अभी भी दावा कर रहे हैं कि कपिल शर्मा लगातार तीसरी बार अपने सेट पर बेहोश हुए हैं.

पर अब जिस ढंग की खबरें आ रही हैं, उससे दो तरह के सवाल उठते हैं. पहला सवाल यह उठता है कि यदि कपिल शर्मा शुक्रवार की रात बेहोश होकर सेट पर गिरे,तो दूसरे दिन शनिवार की सुबह सुबह वह इतना चुस्त व दुरूस्त कैसे हुए कि मीरा रोड जाकर अपनी फिल्म  ‘फिरंगी’ की शूटिंग करने लगे? और दूसरा सवाल यह उठता है कि यदि कपिल शर्मा ने शुक्रवार की रात सेट पर बेहोश होने का नाटक किया था, तो  फिर मीडिया में उनके बेहोश होने और अस्पताल में भर्ती होने की बारे लगातार दो दिन तक कैसे छपती रही? मीडिया तक इस खबर को किसने पहुंचाया? तीसरा सवाल यह उठता है कि कपिल शर्मा ने शाहरुख खान के साथ ऐसा क्यों किया? ज्ञातब्य है कि कुछ समय पहले एक अवार्ड समारोह की रिहर्सल के वक्त भी कपिल शर्मा ने शाहरुख खान को दो घंटे तक इंतजार कराया था.

हमारी नजर इस बात पर टिकी हुई है कि इस पूरे प्रकरण का सच कभी सामने आता है या नहीं?

कितनी भी बड़ी हो फाइल, आसानी से करें ट्रांसफर

कभी-कभी ऐसा होता है कि हम अपनी बड़ी या हैवी फाइल्स को भेजने के लिए पेन ड्राइव का इस्तेमाल करते हैं या उस फाइल को उससे छोटी साइज में बार बार, आधा-आधा कर के भेजते हैं. जिसे आप जीमेल के जरिए अपनी फाइल्स को भेजते हैं. लेकिन अभी तक आप जीमेल पर अधिकतम 25 MB तक ही फाइल भेज सकते थे, लेकिन अब आप अपने मेल के जरिये 10 GB तक की फाइल सेंड कर सकते हैं. इसके लिए आपको गूगल ड्राइव की मदद लेनी होगी. जिसके जरिये आप बिना किसी परेशानी के फाइल्स को किसी को भी भेज सकते हैं.

आज हम आपको बताएंगे कि गूगल ड्राइव के जरिये कैसे आप अपनी फोटोज या बड़ी फाइल्स को भेज सकते हैं. यहां हम आपको बता देना चाहते हैं कि इसके लिए आपका जीमेल अकाउंट का होना जरुरी है. अगर आपका जीमेल अकाउंट नहीं है तो पहले जीमेल अकाउंट बना लें.

क्या है गूगल ड्राइव?

गूगल ड्राइव एक गूगल की ओर से दी जाने वाली फ्री सेवा है जो आपको ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज पर फाइल्स स्टोर करने की सुविधा देता है. आप इन फाइल्स को कहीं भी शेयर कर सकते हैं या सेव कर सकते हैं. इसके अलावा गूगल ड्राइव के जरिये आप और भी कई फीचर्स पा सकते हैं जैसे कि डॉक्यूमेंट, स्प्रेडशीट आदि. इनके जरिए आप हैवी फाइल्स को आसानी से भेज सकते हैं.

कैसे करें इस्तेमाल?

1. सबसे पहले अपना जीमेल अकाउंट ओपन करें.

2. अब अपने अकाउंट के बायीं ओर दिए गए कंपोज पर क्लिक करें. जहां नए मेल के लिए एक बॉक्स ओपन होगा.

3. अब आपको कंपोज मेल में नीचे कई सारे आईकॉन दिखेंगे जिनमें से एक गूगल ड्राइव का ऑप्शन भी दिखेगा. अब गूगल ड्राइव के आईकॉन पर क्लिक करें.

4. गूगल ड्राइव पर क्लिक करते ही आपके सामने गूगल ड्राइव की विंडो ओपेन होगी. वहां पर आप पहले से अपलोड की गई सभी फाइलें देख सकते हैं.

5. इनमें से उस फाइल को सिलेक्ट कर लें जिसे आपको जीमेल पर सेंड करना है.

6. अब नीचे दिए गए इंसर्ट एज ड्राइव लिंक और अटैचमेंट में से आपको अटैचमेंट ऑप्शन को सिलेक्ट करना होगा.

7. इसके बाद इनसर्ट बटन पर क्लिक करते ही आपकी सिलेक्ट की गई गूगल ड्राइव की फाइल अटैचमेंट के रूप में मेल करने के लिए तैयार है. अब आप किसी को भी आसानी से ईमेल के जरिये हैवी फाइल को भेज सकते हैं.

एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज 142 वर्ष का हुआ

9 जुलाई 1875 में बांबे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई थी. प्रेमचंद रायचंद सहित 11 व्यापारियों ने केले के एक पेड़ के नीचे बैठ कर पहली सौदेबाजी की थी. बांबे स्टॉक एक्सचेंज में सबसे पहला घोटाला इसे शुरू करने वाले शख्स ने ही किया था. 1987 में हॉलीवुड में एक फिल्म आई थी- ‘वाल स्ट्रीट’. यह न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर आधारित थी. माइकल डगलस ने इसमें गॉर्डोन गेक्को का किरदार निभाया था. गेक्को स्टॉक मार्केट का सबसे खिलाड़ी है. फिल्म के एक दृश्य में वह कंपनियों के उच्च अधिकारियों की कारगुजारी पर एक शानदार भाषण देता है. लोग सन्न रह जाते हैं जब वह कहता है- ‘लालच करना अच्छा होता है.’ माइकल डगलस को इस फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर पुरुस्कार मिला था.

एशिया का सबसे पहला स्टॉक एक्सचेंज

वैसे तो भारत में शेयरों की दलाली का काम 1857 के ग़दर से पहले ही शुरु हो गया था पर बांबे स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना नौ जुलाई, 1875 को हुई. इस तरह यह एशिया का सबसे पहला स्टॉक एक्सचेंज बना. तब इसे नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग एसोसिएशन कहा जाता था. इसके संस्थापकों में सबसे बड़ा नाम था प्रेमचंद रायचंद का. उन्हें उस वक़्त ‘कपास किंग’ कहा जाता था. आप उस वक़्त के हिन्दुस्तान की बाज़ार की ताक़त का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इसके बनने से 83 साल पहले यानी 1792 में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई थी. इन दोनों स्टॉक एक्सचेंजों के खुलने में काफी समानताएं रही हैं. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना करने वाले 24 दलालों ने ‘बटनवुड’ नामक एक पेड़ के नीचे बैठकर एक समझौते के तहत की थी. जिसे ‘बटनवुड समझौता’ कहा जाता है. ठीक उसी प्रकार प्रेमचंद रायचंद और अन्य 11 व्यापारियों ने केले के एक पेड़ के नीचे बैठ कर पहली सौदेबाजी की थी. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज वाल स्ट्रीट के नुक्कड़ पर है और इसी तरह स्ट्रीट से बांबे स्टॉक एक्सचेंज का भी वास्ता जुड़ता है. यह जिस गली में है उसे ‘दलाल स्ट्रीट’ कहते हैं.

ईस्ट इंडिया कंपनी के दलालों की खरीद-फ़रोख्त से शुरुआत

भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद के प्रोफेसर सतीश देवधर अपनी किताब ‘ डे टू डे इकॉनॉमिक्स’ में लिखते हैं; ‘हिंदुस्तान में स्टॉक मार्केट की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के साथ हुई. जो ब्रिटिश लोग भारत के साथ व्यापार करना चाहते थे उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की. जो लोग सिर्फ़ पैसा कमाना चाहते थे उन्होंने इस कंपनी में निवेश किया और उन्हें उस अनुपात में मालिकाना अधिकार भी दिया गया. भारत के साथ व्यापार में जितना जोख़िम था उतना ही मुनाफा. लिहाज़ा कई कंपनियां बन गयीं. इनको बाज़ार से पूंजी उठाने या लगाने के लिए भारत में ही पंजीकरण कराना था. वे आगे लिखते हैं, ‘अब सवाल था कि अगर किसी को इन कंपनियों में से पैसा निकालना हो या इनमें लगाना हो तो क्या होगा? इसीलिए एक बाज़ार की ज़रूरत महसूस हुई जहां कंपनियों के शेयर्स ख़रीदे या बेचे जा सकें. इस ज़रूरत ने हिंदुस्तान में स्टॉक एक्सचेंज खुलवा दिए.’ 1928 में बंबई (अब बांबे) स्टाक एक्सचेंज (बीएसई) की बिल्डिंग बनी. बीती करीब एक सदी से यह भारत के शेयर बाजार का प्रतीक है.

दुनिया का सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज

स्टॉक मार्केट में पब्लिक लिमिटेड कंपनियां रजिस्टर्ड होती हैं. ये कंपनियां बाज़ार से आईपीओ के ज़रिये पैसा उठा सकती हैं या फिर यहां इनके शेयरों की खरीदफ़रोख्त होती है. 1986 में एक संवेदी सूचकांक या सेंसेक्स बनाया गया. सेंसेक्स में बीएसई में सबसे बड़े और सबसे सक्रिय शेयरों में से ऐसे 30 शेयर शामिल होते हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इनके भावों के हिसाब से सेंसेक्स ऊपर चढ़ता है और इसका उलटा होता है तो ये नीचे आता है. सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार की नाड़ी जैसा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में इस वक्त तकरीबन 15 लाख रजिस्टर्ड कंपनियां हैं और उनमे से सिर्फ पांच हज़ार ही बांबे स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड हैं. मार्च 2017 में जारी आंकड़ों के मुताबिक़ इसका बाज़ार पूंजीकरण तकरीबन 110 लाख करोड़ है. इस लिहाज से यह दुनिया का ग्यारहवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट है. अक्टूबर 2013 में यह दुनिया का सबसे तेज़ स्टॉक मार्केट बन गया था जब यहां एक सौदा छह माइक्रो सेकंड में हुआ था. एक सेकंड के छठवें हिस्से को माइक्रो कहते हैं.

देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर

बांबे स्टॉक एक्सचेंज में होने वाले व्यापार की देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 12 फीसदी की हिस्सेदारी है. शेयर बाजार किसी देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर होता है. यह उतार-चढ़ाव का खेल है और कई कारक मिलकर इसे बढ़ाते और गिराते हैं. जब यह बढ़ रहा होता है तो हर तरफ छद्म आशावाद फैल जाता है. और जब यह गिर रहा होता है तो समाज को अवसाद घेर लेता है. शेयर बाजार व्यापारिक, राजनैतिक, और उस साल होने वाली बारिश और उसकी वजह से फ़सल में आने वाले बदलाव की भावनाओं का खेल है. आज के दौर में कंपनियां वैश्विक हो गयी हैं. इस वजह से दुनिया भर के शेयर बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ गए हैं. अमेरिका के शेयर बाज़ार का असर हिंदुस्तान के शेयर बाज़ार पर पड़ता है. कहते भी हैं कि चाहे कुछ भी हो, डॉलर कभी नहीं सोता. कहीं न कहीं, किसी न किसी देश में वह हलचल मचा रहा होता है.

वैश्विक मंदी और स्टॉक मार्केट

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपनी किताब ‘फाल्ट लाइन्स’ में लिखा है कि लगभग हर अर्थव्यवस्था में मंदी का कारण राजनैतिक होता है. ऐसी ही एक मंदी 1929 के बाद अमेरिका में आई थी. वह पहले विश्व युद्ध के बाद का दौर था. 28 अक्टूबर, 1929 को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज बुरी तरह से गिर गया था. एक अनुमान के मुताबिक़ 28 और 29 अक्टूबर 1929 को इस स्टॉक एक्सचेंज में शेयर धारकों के तीन हज़ार करोड़ डॉलर डूब गए थे. व्यापारिक तेज़ी और मंदी स्टॉक मार्किट के दो सबसे बड़े पहलू हैं. तेज़ी में शेयर ख़रीदे जाते हैं और मंदी में बिकवाली होती है. खरीदने वाले बुल (बैल) कहलाते हैं और मंदी में बेचने वाले बेयर (भालू). आम भाषा में इन्हें तेजड़िया या मंदड़िया कहा जाता है.

घोटालों का इतिहास

बांबे स्टॉक एक्सचेंज में पहला घोटाला उन्हीं प्रेमचंद रायचंद ने किया था जो इसके संस्थापकों में से थे. इतिहासकार शारदा द्विवेदी अपनी किताब ‘प्रेमचंद रायचंद: हिज लाइफ एंड टाइम्स’ में लिखती हैं, ‘वे शायद देश के पहले शेयर दलाल थे जिन्हें अंग्रेजी बोलना और लिखना आता था.’ उन्होंने 1861 में शुरु हुए अमेरिकी गृह युद्ध के दौरान कपास की सौदेबाजी में काफी पैसा कमाया. इस गृह युद्ध की वजह से ब्रिटेन की मिलों को कपड़ा अब हिन्दुस्तान से जाने लगा था. इसके चलते रायचंद की कंपनी बेकबे रिक्लेमेशन के शेयर दिनों-दिन महंगे होते गए. इनकी खरीदफरोख्त वायदा व्यापार के जरिये होती थी. जिसके लिए पैसे जुटाने का खेल बैंक ऑफ बॉम्बे से होता था. उस समय के इस बड़े बैंक पर भी रायचंद का नियंत्रण था. इस तरह की और भी कई कंपनियां बनीं और रायचंद ने अपने नाम का इस्तेमाल करके उनके शेयर भी आसमान छूती कीमतों पर बिकवाए.

1865 में अमेरिका में गृह युद्ध बंद हुआ तो इंग्लैंड ने फिर कपास वहां से ख़रीदना शुरू कर दिया. इसका असर यह हुआ कि हिन्दुतान की कंपनियों के शेयर्स रातों-रात ज़मीन पर आ गिरे. अब सबके पास आसमान छूती कीमतों में खरीदे गए ऐसे शेयर थे जिनका भाव कौड़ी हो चुका था क्योंकि उनका कोई खरीददार नहीं था. सबसे ज्यादा नुकसान प्रेमचंद रायचंद की कंपनी को हुआ. चूंकि बैंक ऑफ़ बॉम्बे का भी पैसा उनकी कंपनियों में लगा हुआ था लिहाज़ा वह भी धराशायी हो गया. यह देश का सबसे पहला स्टॉक मार्केट घोटाला था जिसमें बैंक के 1.38 करोड़ रुपये डूब गए थे.

दूसरा चर्चित घोटाला 1991 में दलाल हर्षद मेहता ने किया. यह लगभग 5000 करोड़ रु का घोटाला था और इसका भंडाफोड़ किसी सरकारी संस्था ने नहीं बल्कि सुप्रसिद्ध पत्रकार सुचेता दलाल ने किया था. उन्होंने हर्षद मेहता के बैंक ऑफ कराड और मेट्रोपोलिटन को-आपरेटिव बैंक के बीच फर्जी लेनदेन को उजागर किया था. इसकी वजह से तत्कालीन कांग्रेस सरकार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था.

धीरुभाई अंबानी और स्टॉक मार्केट

धीरुभाई अंबानी के उदय होने से पहले कंपनियां शायद ही स्टॉक मार्केट पर ध्यान देती थीं. उनके आने के बाद पूरा खेल ही बदल गया था. वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आम आदमी को इससे जोड़ दिया था. 1982 में उन्होंने अपनी कंपनी रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के शेयरों का वायदा व्यापार कर मुनाफ़ा कमाने की इच्छा रखने वाले मंदड़ियों को अपने सामने नतमस्तक करवा दिया था. आज बांबे स्टॉक मार्केट का देश की अर्थव्यवस्था पर इतना प्रभाव है कि सरकार की भी एक आंख उस पर टिकी रहती है. आदमी और कंपनियां रसातल में जा रही हैं और बांबे स्टॉक एक्सचेंज नयी ऊंचाइयां छू रहा है. बीते सप्ताह सेंसेक्स 31000 का आंकड़ा पार कर गया है.

अपनों के बीच छलका जोशी का दर्द

भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का दर्द उत्तर प्रदेश के राजभवन में अपनों के बीच छलक गया. उत्तर प्रदेश के राजभवन में उत्तर प्रदेश के पद्म सम्मान पाने वालों के लिये एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी और सरकार के खास लोग मौजूद थें.

सम्मानित होने के बाद जब डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने पहले राजनीति में जुगाड़ की प्रतिभा पर खुलकर बोले. इसकी जरूरत बताते हुए डॉक्टर जोशी ने कहा कि सियासत में जुगाड़ का अपना खासा महत्व है. उनका कहना था कि जुगाड़ भी एक प्रतिभा है इसकी जरूरत हर जगह पड़ती है. जुगाड़ से ही नई खोज हो जाती है. जुगाड़ होना कम प्रतिभा की बात नहीं है.

राजनीति में जुगाड़ के बाद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने अपने पद्म विभूषण सम्मान पर भी बोला जिससे उनका दर्द और भी बढ कर छलक रहा था. डॉक्टर जोशी ने कहा कि उनको पद्म विभूषण सम्मान मिला है. वह अपनी खुद की पहचान ढूंढ रहे हैं. वह यह समझ नहीं पा रहे कि यह सम्मान मेरी पहचान को उजागर करता है या नष्ट करता है. डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने जब यह बात कही तो लोग मंत्रमुग्ध हो कर उनकी बात सुनते रहे. राज्यपाल राम नाईक ने अपने उदबोधन में डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी के काम की तारीफ करते हुये अपने अनुभव सुनाये.

डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का बयान उस समय आया है जब राष्ट्रपति के नाम को लेकर बड़े भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को दरकिनार करने की बात कही जा रही है. जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब भाजपा अपने मतो पर राष्ट्रपति का चुनाव कर सकती है तो लालकृष्ण आडवाणी का नाम आगे क्यों नहीं रखा गया? इसमें भाजपा के बड़े नेताओं की उपेक्षा को देखा जा रहा है. अपने विषय में लालकृष्ण आडवाणी ने कोई बयान भले न दिया हो पर डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने जुगाड़ और पद्म विभूषण सम्मान और अपनी पहचान की बात को लेकर अपना दर्द बयान कर दिया है.

भाजपा भले ही इस बात को महत्व न दे, इसे पार्टी का फैसला बताये पर जनता के बीच और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह बातें अहम है कि पार्टी अपने बड़े नेताओं के साथ कैसा व्यवहार कर रही है? देश में इस बात का मान दिया जाता है कि अपने से बड़े को प्रमुख बनाकर रखा जाये. समाजवादी पार्टी में उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव को जब पुत्र अखिलेश यादव ने दरकिनार किया तो पार्टी का सबसे प्रमुख यादव और पिछड़ा वर्ग हर ही नाराज होकर दूर चला गया जिसका असर अखिलेश यादव को अपनी बुरी हार के रूप में देखनी पड़ी.

भाजपा तो रामायण और महाभारत सहित तमाम धार्मिक कहानियों और ग्रंथों से प्रेरणा लेकर चलती है. उस में जब बुजुर्ग नेताओं की अवहेलना होती है तो उनका दर्द छलकना स्वाभाविक है. इससे सीख लेकर पार्टी को सोचना चाहिये.

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