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आप जानते हैं कौन थें टीम इंडिया के पहले कोच

पूर्व कप्तान और टीम निदेशक रवि शास्त्री को भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त कर दिया गया. इस तरह नए कोच को लेकर चल रही अटकलों का दौर भी खत्म हो गया. शास्त्री का साथ देने के लिए पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान को टीम इंडिया का गेंदबाजी कोच बनाया गया है, जबकि राहुल द्रविड़ को विशेष विदेशी दौरे के लिए बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त किया गया है.

भारतीय क्रिकेट टीम को रवि शास्त्री के रूप में 2019 वर्ल्ड कप तक के लिए नया कोच मिल गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि टीम इंडिया के पहले कोच कौन थें. नहीं, तो हम बताते हों आपको. जानें टीम इंडिया के पहले कोच और अब तक के टीम इंडिया के कोच के बारे में.

अजित वाडेकर थें टीम इंडिया के पहले कोच

ऐड-हॉक मैनेजर के स्थान पर कोच की नियुक्ति की शरुआत 90 के दशक में शुरु हुई. इस लिहाज से अजित वाडेकर भारतीय टीम के पहले कोच बनें. हालांकि, उनसे पहले बिशन सिंह बेदी और अब्बास अली बेग ने भी कुछ समय तक अपनी सेवाएं दी थीं, लेकिन उन्हें बतौर मैनेजर ही देखा गया था.

संदीप पाटील भी रहे 1 साल तक कोच

केन्या की टीम के सफलतम कोच रहे संदीप पाटील ने भी कुछ समय तक भारतीय टीम को बतौर कोच अपनी सेवाएं दी. पाटील के कोच रहते ही 2003 के वर्ल्ड कप में केन्या की टीम ने अच्छा प्रदर्शन कर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. हालांकि उनका कार्यकाल 1996 में शुरू होकर उसी साल खत्म भी हो गया.

ऑलराउंडर मदन लाल भी थें टीम इंडिया के कोच

मिडिल ऑर्डर में बेखौफ बल्लेबाजी और जुझारू गेंदबाजी के लिए मशहूर ऑलराउंडर मदन लाल का बतौर कोच कार्यकाल कुछ खास नहीं रहा. टीम इंडिया के कोच के तौर पर उन्होंने 1996 से 1997 तक अपनी सेवाएं दीं.

अंशुमान गायकवाड़ 2 बार बतौर कोच चुने गएं

पेस बोलरों को बढ़िया अंदाज में खेलने के लिए मशहूर 'द ग्रेट वॉल' अंशुमान गायकवाड़ 2 बार बतौर कोच चुने गएं. पहले 1997 से 99 और फिर थोड़े समय के लिए 2000 में उन्होंने बतौर कोच अपनी सेवाएं दीं.

कपिल देव भी बनें कोच

भारत को पहली बार वर्ल्ड कप जिताने वाले दिलेर कप्तान कपिल देव भी टीम इंडिया के कोच रहें. हालांकि, कोच के तौर पर उनका समय काफी कम रहा और वह 1999 से 2000 तक टीम इंडिया से इस रोल में जुड़े रहे. इसके बाद से कपिल देव ने कोचिंग की जिम्मेदारी छोड़कर क्रिकेट कॉमेंटेटर और एक्सपर्ट की भूमिका चुन ली.

जॉन राइट के रूप में मिला पहला विदेशी कोच

साल 2000 में जॉन राइट के रूप में टीम इंडिया को पहला विदेशी कोच मिला. कोच के रूप में उनका कार्यकाल काफी सफल रहा. विदेशी धरती पर भारत की जीत, 2003 वर्ल्ड कप के फाइनल तक भारत का सफर और सौरभ गांगुली की साहसिक कप्तानी का श्रेय कोच राइट को भी जाता है. जॉन राइट ने 2000 से लेकर 2005 तक भारतीय टीम को बतौर कोच अपनी सेवाएं दीं.

विवादित रहा ग्रेग चैपल का कार्यकाल

जॉन राइट के बाद कोच चुने गए ग्रेग चैपल को उनके विवादित कार्यकाल की वजह से जाना जाता है. 2007 वर्ल्डकप में भारत का खराब प्रदर्शन हो या सौरभ गांगुली से उनका विवाद, चैपल के नाम ऐसे विवादों की श्रृंखला है. ग्रेग चैपल 2005 से 2007 तक भारतीय टीम के कोच रहे.

कर्स्टन-धोनी की जोड़ी बनी चैंपियन

दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी गैरी कर्स्टन ने बिखरी हुई टीम इंडिया को बतौर कोच एकजुट किया. 2007 से 2011 के अपने कार्यकाल में कप्तान धोनी के साथ ऐसी रणनीति बनाई कि भारतीय टीम ने सफलता के कई कीर्तिमान रच दिए. इनमें 2011 में भारत का विश्वकप जीतना भी शामिल है.

उतार-चढ़ाव भरा रहा डंकन फ्लैचर का कार्यकाल

कोच के तौर पर डंकन फ्लैचर का कार्यकाल उतार-चढ़ाव भरा रहा. टीम में कई बदलाव आए तो टीम ने असफलताएं भी देखीं. 2011 से 2015 के कार्यकाल में एक समय भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में फिसलकर 7वें नंबर पर पहुंच गई थी. हालांकि, फ्लैचर को उनके लाइमलाइट से दूर रहने और खामोशी से अपना काम करने वाले कोच के तौर पर याद किया जाता है.

कुछ ऐसा था अनिल कुंबले का कार्यकाल

विश्व के सर्वश्रेष्ठ लेग स्पिनरों में से एक अनिल कुंबले ने बतौर हेड कोच 2016 में अपना पद संभाला. कोच के तौर पर उनका कार्यकाल सफल और बेदाग रहा. हालांकि, कप्तान विराट कोहली के साथ मनमुटाव के बाद उन्होंने इस्तीफा देकर पीछे हटना ही ठीक समझा.

2015 से 2016 तक वह टीम इंडिया के साथ बतौर टीम डायरेक्टर जुड़े थे. अब उनका कॉन्ट्रैक्ट 2019 तक है, जिसमें कोच के तौर पर उनकी असली परीक्षा होगी.

आईये जानते हैं, क्या है ग्रेच्युटी?

ग्रेच्युटी वेतन का वह हिस्सा होता है जो कर्मचारी को उसकी सेवाओं के बदले एक निश्चित अवधि के बाद दिया जाता है. मोटे तौर पर यह रिटायरमेंट के बाद कंपनी या नियोक्ता की तरफ से कर्मचारी को उसकी सेवा के बदले भुगतान होता है. कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले भी कई बार नौकरी छोड़ते हैं, उस स्थिति में भी न्यूनतम सेवा योगदान देने वाले को ग्रेच्युटी का लाभ मिलता है.

आयकर अधिनियम की धारा 10(10) के मुताबिक किसी भी निगम या कंपनी में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाला हर कर्मचारी ग्रेच्युटी हासिल कर सकता है

कर्मचारी को उसकी सेवा के प्रत्येक वर्ष के बदले 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के तौर पर दिया जाता है. इसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता का योग शामिल होता है. ग्रेच्युटी के तहत मिली राशि पर कर देना पड़ता है.

निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी को टैक्स से छूट मिल सकती है

आप जानते हैं अगर संसद में पास हो गया यह बिल तो 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पर नहीं देना होगा टैक्स. निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी को टैक्स से छूट मिल सकती है. केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा है कि कर मुक्त ग्रैच्युटी सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक करने संबंधित विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है.

मीडिया से बात करते हुए दत्तात्रेय ने कहा कि यह मुद्दा काफी पहले से हमारे एजेंडा में है. इस सत्र में इसे लाया जा सकता है. कैबिनेट से मंजूरी के लिए भी इसे जल्द भेजा जाएगा. कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी काफी फायदा मिलेगा. बिल को अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलना बाकी है.

बता दें निजी कंपनियों में पांच साल की सर्विस देने पर ही कर्मचारियों को ग्रच्युटी का भुगतान कंपनी द्वारा किया जाता है. ऐस ही कई और नियमों में रियायत देने के लिए कई ट्रेड यूनियन, श्रम मंत्रालय को लगातार अवगत कराती रही हैं. साथ ही कंपनियों द्वारा कम-से-कम 10 कर्मचारी होने की शर्त को हटाने की मांग भी ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई है. पेमेंट्स ऑफ ग्रेच्युटी (संशोधन) बिल के जरिए 10 लाख की टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख कर दिया जाएगा. अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो, इससे निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त ग्रेच्युटी का पैसा ज्यादा मिलेगा. संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत 17 जुलाई को होगी.

गौरतलब है बीते फरवरी महीने में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श में इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी. ट्रेड यूनियनों की मांग है कि अधिकतम राशि के संदर्भ में संशोधित प्रावधान एक जनवरी 2016 से प्रभावी हो जैसा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में किया गया है. इसके अलावा यूनियनों ने यह मांग भी उठाई है कि ग्रैच्युटी के तहत प्रत्येक पूरे हुए सेवा वर्ष के लिये 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन का वेतन दिया जाए.

मोहब्बत में सारी हदें पार कर बैठे ये बॉलीवुड सितारे

दुनिया में हर इंसान को किसी न किसी से प्यार होता हैं और इंसान प्यार में कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है. बॉलीवुड स्टार्स भी आम इंसान की तरह ऐसा करने में पीछे नहीं हटते. ऐसे ही कुछ बॉलीवुड स्टार्स के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने अपने प्यार के लिए क्या कुछ नहीं किया –

जब बिन कपड़ों के ही महेश के पीछे दौड़ पड़ी थी परवीन

साल 1977 में दोनों का इश्क परवान चढ़ रहा था. उस वक्त महेश भट्ट शादीशुदा थे, जबकि परवीन कबीर बेदी से ब्रेकअप के सदमे से उबर रही थीं. अपने जमाने की सुपरस्टार परवीन और महेश ने लिव-इन में रहना शुरू कर दिया. घर पर परवीन एक साधारण लड़की होती थीं, जो महेश को पागलों की तरह प्यार करती थीं. बताया जाता है कि एक रात जब परवीन से गुस्सा होकर महेश भट्ट चले गए थे, तब परवीन भी उनके पीछे दौड़ीं. प्यार में अंधी परवीन यह भी नहीं सोच पाई थीं कि उन्होंने कुछ भी नहीं पहन रखा है.

अमिताभ बच्चन के लिए रेखा ने मांग में भरा सिंदूर

22 जनवरी, 1980 को ऋषि कपूर और नीतू की शादी हुई थी. नीतू ने अपनी करीबी दोस्त रेखा को भी बुलाया था. पार्टी में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, तेजी बच्चन समेत कई सेलेब्स पहुंचे थे. इस बीच सफेद रंग की साड़ी व मंगलसूत्र पहने और माथे पर लाल रंग की बिंदी लगाए हुए रेखा पहुंचीं. मांग में भरा सिंदूर सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा था. कहा जाता है कि रेखा ने उस दिन अमिताभ ने नाम का सिंदूर लगाया था.

अक्षय और रवीना की गुपचुप शादी

एक समय अक्षय कुमार के इश्क के किस्से काफी मशहूर थे. उनका नाम उस दौर की तकरीबन हर बड़ी एक्ट्रेस के साथ जुड़ा है. कहा जाता है कि उन्होंने रवीना टंडन से गुपचुप शादी तक कर ली थी. हालांकि, जब अक्षय ने ट्विंकल के साथ डेटिंग शुरू कि तो उन्होंने रवीना से तलाक लिया था.

धर्मेन्द्र और हेमा ने की थी धर्म बदलकर शादी

बॉलीवुड में हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र एक दौर के सबसे पॉपुलर कपल के तौर पर चर्चित थे. दोनों को अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने के लिए खूब मशक्कत करनी पड़ी. दरअसल, धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा और 4 बच्चों के पिता थे. वे हेमा से शादी करना चाहते थे, लेकिन उनकी पत्नी तलाक देने को तैयार नहीं थीं. ऐसे में धर्म बदलकर दोनों ने गुपगुप शादी. हालांकि, शादी के बाद भी देओल परिवार ने आज तक हेमा मालिनी को नहीं अपनाया है.

श्रीदेवी ने बांधी थी बोनी को राखी

एक दौर में श्रीदेवी और मिथुन चक्रवर्ती के अफेयर्स के किस्से भी खूब मशहूर हुए, लेकिन श्रीदेवी ने साल 1996 में अपने फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को चौंकाते हुए अपने से 8 साल बड़े उम्र के बॉलीवुड प्रोड्यूसर बोनी कपूर के साथ शादी कर ली. बोनी कपूर की पहली पत्नी मोना के मुताबिक, मिथुन ने श्रीदेवी से बोनी को राखी भी बंधवाई थी.

दीपिका ने अपनी गर्दन पर रणवीर कपूर के लिए बनवाया टैटू

2008 में आई फिल्म 'बचना-ए-हसीनों' के सेट पर दीपिका और रणबीर कपूर का इश्क परवान चढ़ा. रणबीर के प्यार में खोई दीपिका ने उस वक्त अपनी गर्दन पर 'RK' का टैटू गुदवा लिया था. हालांकि, इसके कुछ ही महीनों बाद जोड़ी का ब्रेकअप हो गया था.

करीना ने शाहिद के लिए छोड़ा था नॉनवेज

शाहिद कपूर और करीना कपूर की लव-स्टोरी के बारे में कौन नहीं जानता. दोनों ने अपने प्यार का इजहार भी किया और फिर ये रिश्ता भी तोड़ दिया. बताया जाता है कि करीना शाहिद से बेहद प्यार करती थीं, इसी प्यार के खातिर उन्होंने नॉनवेज तक छोड़ दिया था.

सैफ अली खान ने बनवाया करीना के नाम का टैटू

बॉलीवुड में टैटू गुदवाने वाले कलाकारों की फेहरिस्त काफी लंबी है. बॉलीवुड में लगभग हर कलाकार ने अपने शरीर के किसी न किसी हिस्से पर टैटू गुदवाया है. करीना कपूर से डेटिंग शुरू करते ही सैफ ने उनके नाम का टैटू बनवा लिया था.

चैन स्मोकर सुष्मिता ने रणदीप की खातिर स्मोकिंग छोड़ने की कोशिश

सुष्मिता सेन का नाम एक्टर रणदीप हुड्डा से जुड़ चुका है. ये दोनों स्टार्स 2008 से 2010 तक रिलेशनशिप में थे. दोनों 2009 में फिल्म 'कर्मा' की शूटिंग के दौरान मिले थे. सुष्मिता स्थापित कलाकार थीं, जबकि रणदीप इंडस्ट्री में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे. कुछ समय तक साथ रहने के बाद दोनों का ब्रेकअप हुआ. बताया जाता है कि चैन स्मोकर होने के बावजूद सुष्मिता, रणदीप की खातिर स्मोकिंग छोड़ने की कई बार कोशिश कर चुकी थीं.

अमीषा पटेल ने तोड़ दिए थे अपने पेरेंट्स से रिश्ते

पेरेंट्स के खिलाफ जाकर अमीषा पटेल फिल्ममेकर विक्रम भट्ट के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहीं. जब वे विक्रम के साथ रिलेशनशिप में थीं, तब उन्होंने पेरेंट्स से पूरी तरह से बात बंद कर दी थी.

इन 5 कारणों की वजह से रवि शास्त्री बनें टीम इंडिया के हेड कोच

आखिरकार काफी लंबे इंतजार और कई मोड़ों के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को अपना नया कोच मिल गया है. कप्तान विराट कोहली की पसंद रविशंकर जयाद्रिथा शास्त्री (रवि शास्त्री) 2019 वर्ल्ड कप तक टीम इंडिया के कोच रहेंगे. रवि शास्त्री के अलावा जहीर खान को टीम का बॉलिंग कोच बनाया गया है, वहीं भारतीय क्रिकेट की दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ को विदेशी दौरों के लिए बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया गया है. यह फैसला सलाहकार समिति के नेतृत्व में हुआ.

वीरेंद्र सहवाग, टॉम मूडी, रिचर्ड पायबस और लालचंद राजपूत भी मुख्य कोच की रेस में थे, लेकिन शास्त्री को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. कोच सलाहकार समिति द्वारा उन्हें कोच चुनने का निर्णय एकदम सही रहा. अब हम आपको वो 5 कारण बताने जा रहे हैं जिनके कारण रवि शास्त्री को टीम इंडिया का कोच चुना गया.

 अनुभव

शास्त्री के पास क्रिकेट का काफी अुनभव है जो 2019 वर्ल्ड कप के लिए काम आ सकता है. उन्होंने भारत के लिए 80 टेस्ट में 3830 रन और 150 वनडे मैच में 3108 रन बनाए हैं. साथ ही वह गेंदबाज के तौर पर भी अच्छे साबित हुए हैं. उन्होंने टेस्ट मैचों में 151 और वनडे में 129 विकेट भी लिए हैं. उनका यह अनुभव अब विराट कंपनी के काम आ सकता है. ऐसे में कोच पद पर रहते हुए वो भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑलराउंड परफॉर्मेंस निखारने में और नए टैलेंट की खोज में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

पहले भी रह चुके हैं टीम के कोच

शास्त्री पहले भी टीम के कोच रह चुके हैं और उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने श्रीलंका को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर टेस्ट मैच सीरीज जीती थी. यह कुमार संगाकारा की फेयरवेल सीरीज भी थी. इसके बाद 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत ने घर में साउथ अफ्रीका को 3-0 से मात दी. लेकिन भारत को टी20 और वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद भारत टीम को ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर 4-1 से करारी मात मिली. लेकिन टीम इंडिया ने शानदार वापसी करते हुए पहली बार टी20 सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 3-0 से मात दी थी.

टीम मैनेजमेंट का अनुभव

रवि शास्त्री दुनिया के महान खिलाडिय़ों में शुमार हैं और उनके पास टीम मैनेजमेंट का भी लंबा अनुभव है. साथ में वह टीम के डायरेक्टर भी रह चुके हैं, जो उनके लिए प्लस प्वाइंट है. भारत ने 1983 विश्व कप पर कब्जा किया था तो वह उस दौरान शास्त्री टीम के सदस्य भी थें. वह 2007 में क्रिकेट मैनेजर के तौर पर भारतीय टीम के साथ बांग्लादेश दौरे पर गए थें.

कोहली के साथ अच्छा संबंध

रवि शास्त्री के टीम के कप्तान विराट कोहली के साथ अच्छे संबंध हैं. कोहली ने पहले भी बीसीसीआई के आगे शास्त्री को कोच बनाने की बात रखी थी. वहीं 2014 में इंग्लैंड से 1-3 से सीरीज हारने के बाद शास्त्री को टीम का डायरेक्टर बनाया गया. 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बड़ी नाकामी के बाद विराट कोहली शास्त्री की ही देख-रेख में एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभरकर सामने आए थें.

पहले ही साफ कर ली थी पद हासिल करने की बात

टीम इंडिया का कोच बनने के लिए शास्त्री ने पहले आवेदन नहीं किया था. बाद में कोहली के कहने पर उन्होंने आवेदन भरने के लिए हामी भरी, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक शर्त रखी. शास्त्री ने पहले ही साफ कह दिया था कि यदि उन्हें कोच चुना जाएगा तो वह तभी आवेदन करेंगे, अन्यथा नहीं. ऐसे में कोच सलाहकार समिति ने उनका सम्मान रखने के लिए भी उन्हें कोच बनाने के लिए सहमति जताई.

आपको भी सताता है आईफोन के खो जाने का डर?

अब आईफोन कितना महंगा आता है ये तो हम सभी जानते है. जरा सोचिए अगर कभी आपका आईफोन आपसे खो जाए, तो आप क्या करेंगे? अगर आपको इस सवाल का जवाब नहीं पता, तो हम आपको आज एक बेहतरीन तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे कि आप बड़ी ही आसानी से अपने आईफोन को ढूंढ सकते हैं.

यहां एक और बात, आप आईफोन की बैटरी खत्म हो जाने के बाद भी इसे ढूंढ सकते हैं. ये तरीका, खुद आपके ही आईफोन में मौजूद है. आपको अपने फोन में ही एक सेटिंग करनी है.

फाइन्ड माय आईफोन

आपको आपको आईफोन Find My iPhone को चालू करके रखना होगा. हम आपको बताएंगे कि कैसे अपने फोन में इनेबल करें Find My iPhone? इस फीचर के जरिए आप अपने खोए हुए फोन की लोकेशन पता लगा सकते हैं. यहां तक ही अगर फोन खो जाने के बाद उसकी बैटरी खत्म हो जाए, तो भी आप फोन का पता लगा सकते हैं. इसके लिए :

सेटिंग पर जाएं फिर iCloud पर टैप करें. इसके बाद Find My iPhone पर टैप करें. फिर Find My iPhone और Send Last Location को इनेबल कर दें. (Settings< Find My iPhone<Toggle on Find My iPhone<Send Last Location)

आईपैड और दूसरे आईफोन से कैसे ढूंढे अपना आईफोन?

1. सबसे पहले Find My iPhone एप को ओपन करें.

2. राइट कॉर्नर में Sign Out पर टैप करें. यहां आप अपना Apple ID और पासवर्ड डाल दें.

3. इसके बाद आपको आपकी डिवाइस दिखाई देगी. अपने फोन को सेलेक्ट करें.

4. आपकी स्क्रीन पर एक बड़ा बिंदू दिखाई देगा, जो आपको आपके फोन की लोकेशन दिखाएगा. आप लोकेशन को जूम कर सकते हैं.

5. नीचे Actions पर टैप करें और फिर कार के ऑप्शन पर क्लिक करें. ऐसा करने से आप मैप एप पर चले जाएंगे और आप अपने आईफोन के पास पहुंच सकते हैं.

कंप्यूटर से कैसे ढूंढे अपना आईफोन?

1. ब्राउजर को ओपन कर Apple ID और पासवर्ड एंटर कर साइन इन करें.

2. इसके बाद Find My iPhone एप क्लिक पर क्लिक करें.

3. इसके बाद All Devices को सेलेक्ट करें दें और अपना अपने फोन पर क्लिक करें.

4. इसके बाद आप मैप पर देख पाएंगे कि आपका फोन कहां हैं.

अमरनाथ : तीर्थयात्रा का मृत्युपथ

दुनिया में तीर्थयात्राओं का पागलपन अगर कहीं है तो वह हमारे देश भारतवर्ष में है. तीर्थयात्रा की सनक में हजारों लोग हर वर्ष मारे जा रहे हैं. अमरनाथ तीर्थयात्रा में इस बार भी 7 लोग शिवलोकवास सिधार गए तो कोई आश्चर्य नहीं है. तीर्थयात्रियों पर हमले की आशंका पहले से ही थी. खुफिया तंत्र ने पहले से चेतावनी दे चुका था फिर भी भक्तों का सैलाब मौत के इस पथ पर उमड़ पड़ा था. कश्मीर के अतंतनाग में यात्रियों की बस पर आतंकियों के हमले में 7 लोग मारे गए और 31 घायल हो गए.

पूरे देश भर में आए दिन तीर्थयात्री मारे जा रहे हैं. पिछले 3-4 महीने की खबरें बता रही हैं कि भारत का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं है जहां तीर्थयात्री न मरे हों.

– मथुरा-भरतपुर रोड पर एक इनोवा अनियंत्रित हो कर नहर में गिरने से 10 तीर्थयात्रियों की मौत.

– उत्तरकाशी में तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरने से 22 लोगों की मौत.

– बिहार के बक्सर में नाव डूबने से 3 तीर्थयात्री मरे.

– हरियाणा के करनाल-कुरुक्षेत्र में जीपट्रक टक्कर में 11 तीर्थयात्रियों की मौत.

– बदरीनाथ से देहरादून के लिए तीर्थयात्रियों को ले कर आ रहा हेलिकोप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से एक की मृत्यु.

– महाराष्ट्र के जालना में एक टैंकर ने 13 तीर्थयात्रियों को कुचल दिया.

हज यात्रा का इतिहास देखें तो हजारों यात्री भगदड़ जैसी दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. कुंभ मेलों में हजारों भक्त मोक्ष पा जाते हैं. ये कैसी सनक है? ताज्जुब है हमारी सरकारें लोगों को मौत के मुंह में धकेलने के लिए साधन, सुविधाएं, सुरक्षा मुहैया कराती हैं. सब्सिडी दी जाती है.

125 करोड़ लोग मंदिरों, मठों, तीर्थों, मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारों, कुंभों, हज यात्राओं के चक्कर लगा कर धन और वक्त व्यय कर रहे हैं. जनता के लिए धर्म के ऐसे कामों के लिए सरकारों का हर साल साधन, सुविधाएं, सब्सिडी के नाम पर अरबों रुपया खर्च हो रहा है.

अमरनाथ यात्रा के लिए सरकार हर साल तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम करती है. जगह जगह आर्मी के दस्ते चौकसी से तैनात रहते हैं. इस बार 40 हजार सुरक्षा जवान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए थे. हमले के डर से सेना की गाडिय़ों के साथ तीर्थयात्रियों के जत्थों को रवाना किया जाता है. 40 दिन तक चलने वाली इस तीर्थयात्रा पर सरकार का पूरा ध्यान रहता है.

अमरनाथ तीर्थयात्रा पर आतंकवादियों का भय तो रहता है ही, चीन की अडंगेबाजी भी सामने आती रही है पर सरकार हर हाल में भक्तों को दर्शन करा के ही दम लेती है. 

धर्म की देन इन मौतों के अलावा आए दिन मंदिरों, मठों में भगदड़ और हर रोज धर्म, जातियों के आपसी झगड़ों में हजारों जानें जा रही हैं. ये कैसा पागलपन है? कैसी बेवकूफी है? क्या हम शिक्षित, स य, तर्कशील समाज है?

शिक्षा का प्रकाश कहीं दिखार्ई दे रहा है? उल्टा अंधविश्वास का अंधेरा चारों ओर गहराता जा रहा है. हम किस विकास की बात कर रहे हैं? ऊंची मीनारें, चौड़ी सडक़ें, चमचमाती गाडिय़ां, हवाई जहाजें, अत्याधुनिक मिसाइलें, क्या यही हमारी प्रगति का पैमाना है? हम दुनिया में गर्व से इतराते घूम रहे हैं.

इन मौतों को ले कर कहीं कोई सवाल नहीं. किसी तरह का कोई आंदोलन नहीं, कोई क्रांति नहीं. समाज मौन है. इस से देश को कितना नुकसान हो रहा है, कोई आकलन नहीं है. धर्म का यह पागलपन आखिर कौन रोकेगा?

टी20 : इस खिलाड़ी ने बना दिए 71 बॉल में 214 रन

टी20 क्रिकेट में सब कुछ फटाफट होता है, कभी फटाफट रन बनते हैं तो कभी विकटें गिर जाती हैं. क्रिकेट के इस प्रारुप में रिकॉर्ड बनते और टूटते देर नहीं लगता. इस खेल में छक्कों और चौकों की खूब बौछार होती है. हाल में ऐसा ही खेल अफगानिस्तान में देखने को मिला.

अफगानिस्‍तानी क्रिकेट टीम को एक नया सितारा मिला गया है. इस बल्लेबाज ने स्‍थानीय मैच में विकेटकीपर बल्‍लेबाज शफीकुल्‍लाह शफाक ने दोहरा शतक जड़ दिया. पारागांव नांगरहार चैम्पियन ट्रॉफी के एक मैच में शफाक ने सिर्फ 71 गेंदों में 214 रन ठोंक डाले.

अपनी इस विस्‍फोटक पारी में शफीकुल्‍लाह ने 21 छक्‍के और 16 चौके लगाए. उन्‍होंने गेंदबाजों की बुरी तरह पिटाई की. शफाक के प्रदर्शन की बदौलत उनकी टीम, खतीज क्रिकेट अकादमी ने 20 ओवरों में 351 रनों का पहाड़ जैसा स्‍कोर खड़ा किया.

शफाक को उनके साथी वहीदुल्‍लाह का भरपूर साथ मिला जिन्‍होंने 31 गेंदों में 81 रन बनाए. इसके जवाब में विपक्षी टीम, काबुल स्‍टार क्रिकेट सिर्फ 107 रन ही बना सकी और खतीज को 244 रनों की भारी-भरकम जीत हासिल हुई.

अपने टी20 अंतरराष्‍ट्रीय कॅरियर में शफाक ने 35 मैच खेलकर 392 रन बनाए हैं. टी20 अंतरराष्‍ट्रीय में उनका उच्‍चतम स्‍कोर 51 है मगर उनका स्‍ट्राइक रेट 143.07 है जो कि बेहद प्रभावशाली है. उन्‍होंने 2009 में डेनमार्क के खिलाफ वर्ल्‍ड कप क्‍वालिफायर में डेब्‍यू किया था. उसी साल शफाक को अफगानिस्‍तान के लिए अंतरराष्‍ट्रीय एकदिवसीय मैच खेलने का मौका मिला. शफाक अफगानिस्‍तान के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जिन्‍होंने पिछले तीन आईसीसी वर्ल्‍ड कप (2012, 2014 और 2016) खेले हैं.

हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ एक सीरीज में शफाक ने 28 गेंद में पचासा जड़कर अफगानिस्‍तान के लिए सबसे तेज अर्द्धशतक जड़ने के रिकॉर्ड की बराबरी की थी. वर्ल्‍ड कप टी20 में इंग्‍लैंड के खिलाफ 20 गेंदों में 35 रनों की उनकी पारी की भी खासी तारीफ हुई थी, हालांकि अफगानिस्‍तान 15 रनों से मैच हार गया था. दूसरी तरह उनके भाई, वहीदुल्‍लाह शफाक़ अंडर 19 टीम के लिए खेलते रहे हैं और 2014 व 2016 के अंडर 19 वर्ल्‍ड कप में खेल चुके हैं.

जायेद खान को है अब टेलाविजन का सहारा

ऐसे कई सितारे हैं जो फिल्मों में असफल होने के बाद टेलीविजन का रुख कर लेते हैं. ये तो वही बात है कि कहीं भी सफलता न मिलने पर स्टार्स बड़े पर्दे से हटकर छोटे पर्दे को सहारा लेते हैं.

तो अब ऐसे सितारों की लिस्ट में एक नाम और जुड़ गया है. यूं तो फिल्मों में ये नाम बहुत पुराना हो चुका है पर हाल ही में खासा चर्चाओं में बना हुआ है.

बॉलीवुड के सुपरस्टार ऋतिक रोशन को कौन नहीं जानता और उनकी एक्स वाइफ सुजैन भी एक जाना पहचाना चेहरा हैं. लेकिन सुजैन के भाई, जायेद खान जो कि बॉलीवुड में एक असफल नाम साबित हुए हैं, फिल्मों मं कोई कमाल न दिखा पाने के बाद और बड़े पर्दे की असफलता के बाद अब टीवी का रुख कर रहे हैं.

जायेद को आखरी बार फिल्मों में देखे काफी वक्त हो गया है. जायेद खान ने फिल्म 'मैं हूं ना' और 'शब्द' जैसी हिट फिल्मों में काम किया था. पर उन्हें करियर में कोई खास सफलता अब तक नहीं मिल सकी है, तो फिल्मों में कामयाबी ना मिलती हुयी देख जायेद ने आखिर टीवी पर्दे की तरफ रुख करने का फैसला ले ही लिया है. जायेद अब बहुत जल्द टीवी इंडस्ट्री में एक नए शो से डेब्यू करने जा रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक प्रोड्यूसर-डायरेक्टर सिद्धार्थ पी मल्होत्रा के अपकमिंग शो में जायेद बिजनेस टाइकून का रोल निभाने वाले हैं. बताया जा रहा है कि जायेद का ये टेलीविजन शो एक सस्पेंस थ्रिलर है.

जायेद के अलावा इस शो में 'एक हसीना थी' फेम के वत्सल शेठ और 'ड्रीम गर्ल' फेम की निकिता दत्ता भी शामिल होंगे. जायेद ने इस शो में काम करने को लेकर मीडिया में एक अखबार को अपनी ये कन्फर्मेशन भी दे दी है.

वहीं सिद्धार्थ ने अब तक इस शो की खबर पर कोई भी जवाब नहीं दिया है. इस शो से एक और फिल्मी सितारे का टीवी पर पदार्पण हो जाएगा. इसके पहले भी कई फिल्म स्टार्स ने फिल्मों में खास काम ना मिल पाने पर टीवी का रुख किया था.

वैसे जायेद, वत्सल सेठ और निकिता दत्ता को एक साथ देखने के लिए आप और कई और दर्शक जरूर बेताब होंगे.

सीबीएफसी ने ‘इंदू सरकार’ को दिए 14 कट्स

1975 के आपातकाल की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ के निर्माता निर्देशक मधुर भंडारकर ने ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘सीबीएफसी’ की परीक्षण समिति ने उनकी फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ को लेकर 14 कट्स की सिफारिश की है, जिसके विरोध में वे रीवाइजिंग कमेटी यानी कि पुनःपरीक्षण समिति के पास जाएंगे.

फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ के किरदार तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी से प्रेरित हैं. 25 जून 1975 को आपातकाल लागू हुआ था और 21 मार्च 1977 को खत्म हुआ था.

सूत्रों के अनुसार सीबीएफसी ने फिल्म में दिखायी गयी ‘नेशनल हेराल्ड’’ समाचार पत्र की एक कटिंग को हटाने के लिए कहा है, जिसमें 1975 के वक्त की खबर के साथ बाजपेयी, मोरारजी और आडवाणी के नाम हैं.

सूत्रों के अनुसार इसके अलावा ‘सीबीएफसी’ ने फिल्म से निम्न पंक्तियां हटाने की सिफारिश की है :

1. अब इस देश में गांधी के मायने बदल चुके हैं.

2. भारत की एक बेटी ने देश को बंदी बनाया हुआ है.

3. और तुम लोग जिंदगी भर मां बेटे की गुलामी करते रहोगे.

4. मैं तो 70 साल का बूढ़ा हूं, मेरी नसबंदी क्यों करवा रहे हो.

‘सीबीएफसी’ने फिल्म से निम्न शब्द हटाने की भी सिफारिश की है :

1. किशोर कुमार,

2. आई बी,

3. पी एम,

4. सेक्शन आफिसर,

5. आर एस एस,

6. अकाली,

7. कम्यूनिस्ट,

8. जय प्रकाश नारायण

इन कट्स के बावजूद फिल्म में दो डिस्क्लेमर जोड़ने की भी सिफारिश की गयी है. मधुर भंडारकर ने कहा है – ‘‘यह कट्स बेमानी है. इससे हमारी फिल्म प्रभावित होगी. इसलिए हम हर हाल में रिवाइंजिंग कमेटी के पास जाएंगे.’’

यूं तो यह फिल्म शुरू से ही कांग्रेस पार्टी की आंखों में खटक रही थी. मुंबई प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम ने ‘सीबीएफसी’ चेअरमैन पहलाज निहलानी को पत्र लिखकर मांग की थी कि फिल्म को सेंसर प्रमाण पत्र दिए जाने से पहले फिल्म को उन्हें दिखाया जाए. उधर कांग्रेस पार्टी की इंदौर शाखा ने ‘‘सिने सर्किट एसोसिएशन’’ और ‘सिने ग्रह संचालन’ को पत्र लिखकर फिल्म ‘इंदू सरकार’ को सिनेमाघरों में न दिखाने की मांग के साथ धमकी भी दी है.

जबकि मधुर भंडारकर ने दावा किया है कि उनका मकसद अपनी फिल्म के माध्यम से किसी भी विचारधारा का प्रचार करना नहीं है.

आपकी आय के इन स्रोतों पर कटता है टीडीएस

अभी तक सभी ये बात जानते है कि अधिकांशत: निवेश से अर्जित आय टीडीएस के अधीन आती है. उदाहरण के तौर पर सैलरी इनकम और डिबेंचर पर अर्जित ब्याज टीडीएस कटौती के दायरे में आता है. इसलिए आपको टैक्स और टीडीएस कटौती के बारे में जानकारी होनी चाहिए. साथ ही आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि इससे कैसे बचा जा सकता है. हम अपनी खबर में आपको आय और निवेश के उन रास्तों के बारे में बताएंगे जिनपर टीडीएस कटता है, जानिए.

सैलरी पर टीडीएस

वो लोग जिनकी आय कर की सीमा से ज्यादा होती है नियोक्ता उनकी कुल आय पर से टीडीएस कटौती करता है. इसमें सभी कटौती और छूट के बाद आय के अलावा अन्य आय शामिल होती है. टीडीएस इनकम स्लैब के आधार पर कटौती योग्य होता है. वहीं इसे टाला भी जा सकता है अगर आप 80सी और 80डी के दायरे में आने वाले विकल्पों में निवेश करते हैं. इसके लिए आपको इन्वेस्टमेंट के प्रूफ भी देने होते हैं. कंपनियां वित्त वर्ष के अंत में एक टीडीएस प्रमाणपत्र जिसे फॉर्म 16ए के रूप में भी जाना जाता है, जारी करती हैं.

ब्याज से प्राप्त आय पर टीडीएस

बैंक सामान्य तौर पर ब्याज से प्राप्त होने वाली आय पर टीडीएस कटौती करते हैं. इसकी सीमा 10,000 रुपए सालाना से ऊपर की होती है. उच्च कर वर्ग में आने वाले करदाताओं को देयता के अनुसार कर का भुगतान करना होता है. वहीं निम्न आय वाले व्यक्ति फार्म 15जी या एच (इनमें से जो भी लागू हो) को जमा कर टीडीएस के लिए क्लेम कर सकते हैं. इसके साथ ही, विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाकर कोई भी टीडीएस बचा सकता है, लेकिन एक बैंक में ब्याज से प्राप्त आय 10,000 रुपए से ऊपर नहीं होनी चाहिए. ध्यान दें कि टीडीएस पूरी राशि पर लागू होता है न कि अधिकता वाली राशि पर. टीडीएस कटौती की दर 10 फीसद होती है लेकिन अगर आपने पैन कार्ड नहीं दिया है तो आपकी सैलरी पर 20 फीसद का टीडीएस कटेगा.

डिबेंचर और प्रतिभूति पर अर्जित ब्याज

डिबेंचर और सिक्योरिटीज पर अर्जित ब्याज, धारा 193 के तहत टीडीएस कटौती योग्य होता है. 10,000 रुपए से ज्यादा की सरकारी प्रतिभूतियों और 5000 रुपए से ज्यादा के डिबेंचर पर 10 फीसद के हिसाब से टीडीएस कटता है. टीडीएस कटौती क्रेडिट और पेमेंट के दौरान या फिर इनमें से जो पहले हो उसमें होती है.

ईपीएफ विदड्रॉल पर टीडीएस कटौती

यदि कर्मचारी भविष्य निधि को अंशदान के पांच वर्ष से पहले निकाला जाएगा तो टीडीएस लागू होगा. हालांकि, जून 1, 2016 से 50,000 रुपये से कम राशि के लिए टीडीएस कटौती नहीं की जाएगी. टीडीएस उस सूरत में लागू नहीं होता है जब व्यक्ति भविष्य निधि को एक खाते से दूसरे प्रोविडेंट फंड अकाउंट में स्थानांतरित करता है. अगर फॉर्म 15जी या 15एच को नहीं भरा गया है तो टीडीएस 10 फीसदी की दर से लगता है. इसमें पैन कार्ड देना अनिवार्य है. ऐसे नहीं करने पर टीडीएस 20 फीसदी की दर से लगता है.

अचल संपत्ति पर टीडीएस

अचल संपत्ति पर 50 लाख से अधिक के लेन-देन पर धारा 194- IA के तहत 1 फीसद का टीडीएस लागू होता है, वहीं कृषि योग्य भूमि के लिए यह लागू नहीं है. टीडीएस कटौती भुगतान के समय या विक्रेता को क्रेडिट देते समय या इनमें से जो पहले हो उसमें लागू होती है. बिक्री के बाद बिक्री के बाद, खरीदार विक्रेता को टीडीएस प्रमाण पत्र प्रदान करेगा.

लॉटरी से जीतने पर मिली रकम

अगर किसी व्यक्ति ने लॉटरी में कोई रकम जीती है तो उसे 30 फीसद का टीडीएस कटवाना होगा. यह उस सूरत में होगा जब टिकट में जीती गई राशि 10,000 रुपए से ज्यादा हो. इसी तरह की शर्त सेक्शन 194बी के अंतर्गत वर्ग पहेली और कार्ड गेम में जीती गई रकम पर भी लागू होगी.

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