Download App

कहां हैं केजरीवाल

देश की राजनीति बड़े उबाऊ दौर से गुजर रही है, जिससे लगता ऐसा है कि अब गाय, दलित और नव राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से सभी ने समझौता कर एक बड़े बहुमत वाली सरकार के सामने घुटने टेक दिये हैं. हताश बसपा प्रमुख मायावती राज्यसभा से इस्तीफा देकर लखनऊ लौट गईं हैं, ममता बनर्जी की दहाड़ रिरियाहट में बदलती जा रही है, लालू यादव अपने कुनबे को लेकर चिंतित हैं तो मुलायम सिंह भगवा खेमे की शरण में हैं. और तो और बात बात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की उद्योगपतियों से सांठ गांठ को हवा देकर विपक्षी चूल्हे में आंच बनाए रखने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कहीं अते पते नहीं हैं. वे आखिरी बार कब क्या बोले थे शायद ही किसी को याद हो.

लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका एक सचेतक की होती है, जिसे कम से कम केजरीवाल तो प्रभावी ढंग से निभा रहे थे. जिन लोगों को केजरीवाल का बोलना खटकता था, वे तक उनकी हैरान कर देने वाली सियासी गुमशुदगी पर सकते में हैं. राजनीति की रंगीन मसालेदार फिल्म को ब्लेक एंड व्हाइट डाक्यूमेंटरी में तब्दील होते देखना जरूर यह एहसास कराता है कि कहीं सचमुच तो आपातकाल नहीं लग गया. अरविंद केजरीवाल की खामोशी रहस्यमयी इस लिहाज से भी है कि बीते दिनों कई ऐसी घटनाएं और हादसे हो गए जिन पर अपना मुंह सिल पाना उनके लिए असंभव सी बात थी. किसान आंदोलन पर वे चुप रहे, रामनाथ कोविंद की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के पेंच पर भी वे खामोश रहे और तो और जीएसटी लागू हो जाने जैसे अहम मुद्दे पर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

बिलाशक राजनीति में उनकी इमेज एक ऐसे उद्दंड किशोर की बन गई है जो बात कुछ भी हो बोलता जरूर है, दखल देना उसकी आदत में शुमार है और वह किसी से डरता नहीं. दो ही स्थितियों में कोई प्रतिक्रियावादी चुप रहता है, पहली यह कि उसे समझ आ जाता है कि अब बोलने से कोई फायदा नहीं और दूसरी यह कि उसका मुंह बांध दिया गया हो. मौजूदा सत्ता पक्ष बड़ी चालाकी और चतुराई से विपक्ष को मिटा रहा है, जिससे नुकसान लोकतन्त्र और आम लोगों का हो रहा है. मोदी सरकार में आलोचना बर्दाश्त करने की हिम्मत नहीं है, ऐसे में राजनीति के रंगमंच पर एक ही किरदार था, जो सरकार को आईना दिखाता रहता था, वे अरविंद केजरीवाल चुप क्यों हैं इस का खुलासा होना बेहद जरूरी है. क्या वे किसी से भयभीत हैं या उन्हें भी अमित शाह ने मेनेज कर लिया है, इस बात की जांच के लिए कोई आयोग भी गठित करना पड़े तो करना चाहिए.

देश खतरनाक अंधे मोड पर है जहां से जनता को आगाह करने वाले नेता एक एक कर पलायन कर रहे हैं या फिर डिप्रेशन की गिरफ्त में आ गए हैं, तो अब ज़िम्मेदारी जनता की बनती है कि वह इन ऊर्जावान और जुझारू नेताओं को वेंटिलेटर से उठाकर खुले मैदान में लाये, नहीं तो फिर खुद भी इसी वेंटिलेटर पर चढ़ने तैयार रहे. केजरीवाल जैसे नेताओं की छद्म बेहोशी की वजह से कट्टरवाद तेजी से पनप रहा है, आम हिंदुवादी उन्माद का शिकार हो रहा है जिससे धर्म निरपेक्षता खतरे में है. इसलिए केजरीवाल कहां हैं इसका खुलासा होना जरूरी हो चला है. यह भी सच है कि वे कोई करिश्मा नहीं कर देंगे, पर सच यह भी है कि उन जैसे नेता ही सरकार के कान उमेठने की हिम्मत कर पाते हैं जो लोकतन्त्र की अनिवार्यता है.

ऐसा मोटापा किस काम का

इंगलैंड के एक छोटे शहर नौर्थफ्लीट की लिसेथ एक्सपोजिटो की जब शादी हुई तो वह ठीकठाक वजन की थी पर जल्दी ही मैक्डौनल्ड और फुल इंगलिश जंक फास्ट फूड की बदौलत वह एक बच्चे के जन्म के बाद मुटयाती गई. उस के पति जोस को वह फैट बौडी की नजर आती पर लिसेथ ने तब तक चिंता न की जब तक उसे जोस के फोन पर दूसरी लड़की के टैक्स्ट मैसेज न दिखे. उस ने जोस से जब जानना चाहा तो उस ने कह दिया कि तुम्हें तो खाने के अलावा कुछ सूझता ही नहीं.

नतीजा, तलाक हो गया और वे दोनों अलग हो गए. पर लिसेथ ने इस से सबक सीखा और उस ने अपना वजन घटाने का फैसला किया. डाक्टरों की सलाह थी कि वह बैरिएट्रिक सर्जरी कराए पर लिसेथ ने सैल्फ कंट्रोल से कुछ ही महीनों में अपना 60 किलोग्राम वजन कम कर लिया. उसे जोस मिला तो कहने लगा कि तुम तो हौट हो पर लिसेथ ने जोस को दुत्कार दिया.

विवाहित औरतें अकसर अपने वजन के प्रति बेफिक्र सी हो जाती हैं. भारत में पतियों को दूसरी लड़कियों की कमी रहती है पर वे पत्नी को बोझ समझने लगते हैं और कन्नी काटने लगते हैं. फ्रस्ट्रैशन में ऐसी मोटी पत्नियां और ज्यादा खाने लगती हैं और अपने रिश्तेदारों, किट्टियों, धार्मिक स्टंटों में मन लगाने लगती हैं.

विवाह की बिल्डिंग चाहे बनी रहे पर नींव कमजोर हो जाती है और घर दोनों के लिए रैन बसेरा बन कर रह जाता है. पतियों का भी कई बार यही हाल होता है जब वे किलो पर किलो अपने पर जोड़ते रहते हैं. पत्नियों को भी वैसे ही शर्म आने लगती है और मोटी पत्नी को कहीं साथ ले जाने में पति हिचकता है.

विवाह मोटे हो जाने का लाइसैंस नहीं है. ठीक है हिंदू मैरिज एक्ट में मोटे होने के कारण तलाक का प्रावधान नहीं है वरना ‘तुम मोटी हो, तुम मोटी हो, तुम मोटी हो’ कह कर हिंदुओं में मुसलमानों से कई गुना तलाक हो रहे होते. पत्नियां भूल जाती हैं कि विवाह बनाए रखना नौकरी बचाए रखने की तरह है. मोटी पत्नी न बाहर के काम कर सकती है, न घर के काम आसानी से कर सकती है. वह घर, पति, बच्चों सब पर बोझ बन जाती है. पति अगर किसी और औरत या किसी और काम में मन लगाने लगे तो क्या दोष दिया जा सकता है. मोटे पतियों की छरहरी पत्नियां भी बेहद कुंठित रहती हैं और पति से कन्नी काटने लगती हैं.

मोटापा स्वास्थ्य से ज्यादा विवाह के लिए नुकसान देता है, जिस का इलाज डाक्टरों और जिमों में भी नहीं होता. ठीक है आज खाने को काफी मिल जाता है और घी, तेल, चीनी भरपूर हैं पर इन्हें मुंह में ठूंस लिए जाएं, विवाह की कीमत पर, तो यह तो खुद से भी बेईमानी है और जीवनसाथी से भी.

आज नहीं तो कल अदालतें मोटापे को जीवनसाथी के प्रति क्रूरता मान कर तलाक देना शुरू कर सकती हैं. इसलिए लिसेथ का वह रास्ता अपनाएं जो उस ने तलाक के बाद लिया. वह पहले ही पतली हो जाती तो विवाह तो बच जाता.

टौप 10 मौडर्न किचन ऐप्लाइंसेज

आप का किचन एल शेप हो या यू शेप, मौड्यूलर हो या फिर ट्रांजिशनल, जब तक आप अपने किचन में ट्रैडिशनल कुकवेयर को हटा कर मौडर्न ऐप्लाइंसेज और गैजेट्स को जगह नहीं देंगी, तब तक आप का किचन स्मार्ट नजर नहीं आएगा. इतना ही नहीं, नई तकनीक से बने इन किचन गैजेट्स से आप झटपट अपना काम भी निबटा सकती हैं.

आइए, मौडर्न किचन ऐप्लाइंसेज के बारे में बारीकी से जानते हैं:

फूड प्रोसैसर

अपने किचन को मौडर्न लुक देने के लिए मिक्सर को हटाइए और उस की जगह फूड प्रोसैसर को घर ले आइए. कई तरह के ब्लेड्स के साथ मिलने वाले फूड प्रोसैसर से आप न सिर्फ पीसने का काम ले सकती हैं, बल्कि खाने की सामग्री को मनचाहा काटने के साथसाथ उसे कूट और कद्दूकस भी कर सकती हैं यानी एक चीज से आप कई काम कर सकती हैं. फूड प्रोसैसर की कीमत लगभग क्व3 हजार से शुरू होती है. फूड प्रोसैसर ऐसा खरीदें जिसे साफ करना और मैंटेन करना आसान हो.

सैल्फी टोस्टर

सैल्फी के जमाने में सिंपल लुक वाले टोस्टर को क्या आज भी आप ने अपने किचन में सजा रखा है. यदि हां, तो आज ही उसे रिप्लेस करें सैल्फी टोस्टर से. इन दिनों सैल्फी टोस्टर डिमांड में है, जिस से आप अलगअलग प्रिंटेड फेसेस के टोस्ट बना कर परोस सकती हैं. सैल्फी टोस्टर के साथ ये प्रिंटेड फेसेस सांचे के रूप में मिलते हैं, जिन्हें सैट करने के बाद आप हूबहू उसी तरह का प्रिंटेड ब्रैड पा सकती हैं. इस की कीमत 5 से 10 हजार रुपए है. औनलाइन इस की खरीददारी कर सकती हैं.

एग कुकर

रोजाना सुबह उठते ही बरतन में पानी भर कर अंडे उबालना अगर आप को भी उबाऊ लगता है, तो आज ही एग कुकर घर ले आइए और इस उबाऊ काम को आसान बनाइए. इस इलैक्ट्रिक एग कुकर की मदद से आप सिर्फ 2 से 3 मिनट में आधा दर्जन अंडे उबाल सकती हैं. इस की कीमत भी बेहद कम है. कम से कम क्व3 सौ और अधिक से अधिक एक हजार.

डीप फ्रायर

फ्रैंच फ्राइस से ले कर पकौड़े तलने के लिए क्या आज भी आप कड़ाही का इस्तेमाल करती हैं? तलने के बाद टिशू पेपर की सहायता से पकौड़ों का ऐक्स्ट्रा तेल भी निकालती हैं? बेशक उस के बाद कड़ाही से ले कर किचन टाइल्स पर लगे तेल के दाग को छुड़ाने के लिए काफी मेहनत भी करती होंगी. अगर हां, तो इस झंझट से छुटकारा पाने के लिए आज ही डीप फ्रायर ले आइए. इस से न तो तलते वक्त पकौड़ों के जलने का डर रहेगा न तो यह ऐक्स्ट्रा औयल सोखेगा. सब से अच्छी बात यह कि आप को तेल का दाग नहीं छुड़ाना पड़ेगा. बाजार में इस की बड़ी रेंज है, जो डेढ़ से ले कर 6 हजार तक हो सकती है.

बार्बेक्यू ग्रिल्स

अगर आप भी डीप फ्राइड के बजाय तंदूरी फूड खाना ज्यादा पसंद करती हैं, तो अब रैस्टोरैंट में जा कर तंदूरी रोटी से ले कर तंदूरी चिकन, पनीर तंदूरी, चिकन टिक्का, गोभी टिक्का जैसी डिशेज और्डर करने के बजाय बार्बेक्यू ग्रिल घर ले आइए और मनचाही तंदूरी रैसिपीज खुद बनाइए. इस ग्रिल का लुक काफी मौडर्न होता है, इस से आप के किचन को स्टाइलिश लुक भी मिलेगा. बाजार में यह आप को क्व9 सौ से ले कर क्व5 हजार में मिल सकता है.

कौफी मेकर

अगर आप को भी कौफी पीने का शौक है, तो सुबहशाम खुद कौफी बनाने के बजाय कौफी मेकर खरीद कर घर लाइए और झटपट कौफी बनाइए. मार्केट में कई तरह के कौफी मेकर उपलब्ध हैं, जिन की कीमत  6 सौ से शुरू होती है और  2 हजार तक हो सकती है. ऐसे में आप डिजाइन और अपनी सुविधानुसार कौफी मेकर का चुनाव कर सकती हैं.

सैंडविच मेकर

वैज सैंडविच, ग्रिल्ड सैंडविच, टोस्ट सैंडविच, चीज सैंडविच जैसे औप्शन अगर आप भी रेस्तरां वालों की तरह नाश्ते में अपने घर वालों या फिर घर आए मेहमानों को परोसना चाहती हैं, तो तुरंत सैंडविच मेकर खरीद लीजिए.  7 सौ से 2 हजार की कीमत में मिलने वाले सैंडविच मेकर में सभी तरह के सैंडविच बनाने के साथसाथ आप इस में आमलेट, पैनकेक, टिक्की आदि भी बना सकती हैं.

नूडल मशीन

अगर आप के बच्चों को नूडल्स खाना पसंद है, लेकिन आप उन की सेहत का ध्यान रखते हुए उन्हें नूडल्स खाने से रोकती हैं, तो अब ऐसा न करें, बल्कि नूडल मशीन घर ले आएं और खुद अपने हाथों से उन के लिए हैल्दी टेस्टी नूडल्स बनाएं. 1 से 3 हजार की कीमत में मिलने वाली नूडल मशीन से आप कुछ ही घंटों में नूडल्स बना सकती हैं. इस से न तो आप को बाजार से नूडल्स खरीदने की जरूरत होगी और न ही बच्चों की  सेहत की चिंता. कुछ नूडल्स मशीनों में पास्ता मेकर के भी सांचे होते हैं यानी आप एक ही मशीन से नूडल्स और पास्ता दोनों बना सकती हैं.

आइसक्रीम मेकर

समर सीजन में हर शाम परिवार वालों या दोस्तों के साथ आइसक्रीम पार्लर जाने के बजाय आइसक्रीम मेकर खरीदिए और खुद अलगअलग फ्लेवर वाली आइसक्रीम बनाइए. इन दिनों मार्केट में छाए आइसक्रीम मेकर से आइसक्रीम बनाना बहुत ही आसान है. महज 30 मिनट में आप मनचाही आइसक्रीम बना सकती हैं. फ्रीजिंग से ले कर डीफ्रिजिंग का काम भी ये खुद करता है.  2 हजार से  20 हजार कीमत के आइसक्रीम मेकर मार्केट में उपलब्ध हैं.

डिश वाशर

घर आए खास मेहमानों के लिए तरहतरह के पकवान बनाने से ले कर उन्हें भर पेट परोसने में कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जैसे ही बारी बरतन धुलने की आती है कमर दर्द करने लगती है. माना कि इस के लिए आप नौकरानी की मदद ले सकती हैं, लेकिन कभी वह घर पर नहीं हुई तो? यह सोच कर चिंता करने के बजाय आज ही डिश वाशर घर ले आएं. इस की सहायता से आप बरतन आसानी से धुल सकती हैं. बिजली से चलने वाला डिश वाशर आप को  25 हजार से ले कर 40 हजार के अंदर मिल जाएगा.                             

मोहब्बत का खूनी अंत

मध्य प्रदेश के इंदौर के थाना चंदननगर के रहने वाले 21 साल के सलमान शेख के अचानक लापता हो जाने से उस के घर वाले काफी परेशान थे. वह फैब्रिकेशन का काम करता था. घर से काम के लिए निकला सलमान घर नहीं लौटा तो 9 जनवरी, 2017 को उस के बड़े भाई तौकीर शेख ने थाना चंदननगर में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. गुमशुदगी दर्ज कराते समय उस ने अपने घर के सामने रहने वाले रऊफ खान और उस के ड्राइवर सद्दाम पर भाई के गायब करने का शक जाहिर किया था.

रऊफ खान बड़ीबड़ी बिल्डिंगों की मरम्मत एवं रंगाईपोताई का ठेका लेता था. उस के यहां पचासों मजदूर काम करते थे. सलमान भी पहले उस के यहां नौकरी करता था. लेकिन साल भर पहले उस ने सलमान को अपने यहां से नौकरी से निकाल दिया था.

रऊफ खान संपन्न आदमी था. वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका था. उस की पहुंच भी ऊंची थी, इसलिए बिना किसी ठोस सबूत के पुलिस उस पर हाथ डालने से कतरा रही थी.

पुलिस ने लापता सलमान शेख के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में चौंकाने वाली जानकारी यह मिली कि सलमान की सब से ज्यादा और लंबीलंबी बातें रऊफ की पत्नी शबनम से हुई थीं. रऊफ के नौकरी से निकाल देने के बाद भी उस की शबनम से बातें होती रही थीं. इन बातों से थाना चंदननगर पुलिस को लगा कि शायद इसी वजह से सलमान के घर वाले रऊफ खान पर शक जाहिर कर रहे थे.

उन्होंने सलमान के भाई तौकीर से रऊफ और उस के रिश्तेदारों के बारे में पूछा तो उस ने बताया कि उस के कई नजदीकी रिश्तेदार धार जिले के धरमपुरी में रहते हैं. तौकीर की इस बात पर उन्हें 5 दिनों पहले धरमपुरी में मिली लाश की बात याद आ गई.

दरअसल, 10 जनवरी, 2017 को धार जिला के थाना धरमपुरी के थानाप्रभारी के.एस. साहू को फोन द्वारा बेंट संस्थान के जंगल में लाश पड़ी होने की खबर मिली थी. अधिकारियों को सूचना दे कर वह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे. वहां एक लाश पड़ी थी, जिस का सिर काफी क्षतविक्षत था. शायद जंगली जानवरों ने उसे नोचखसोट डाला था. उस का गुप्तांग भी कटा हुआ था. लाश की स्थिति देख कर थानाप्रभारी को लगा कि यह हत्या प्रेमप्रसंग में की गई है. क्योंकि प्रेमप्रसंग में अकसर इसी तरह हत्याएं की जाती हैं.

पुलिस ने लाश की शिनाख्त के लिए जब मृतक के कपड़ों की तलाशी ली तो पैंट की जेब से एक पर्स मिला, जिस में एक लड़के और लड़की की तसवीर के अलावा हिसाब की एक डायरी और तंबाकू की एक पुडि़या मिली. उस में कुछ ऐसा नहीं था, जिस से मृतक की पहचान हो सकती.

मृतक के गले में तुलसी की एक माला पड़ी थी, जिस से अंदाजा लगाया गया कि लाश किसी हिंदू की है. लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी तो के.एस. साहू ने घटनास्थल की सारी काररवाई निपटा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. इस के बाद लाश की शिनाख्त के लिए इस की जानकारी अपने जिले में ही नहीं, आसपास के जिलों में भी दे दी थी. उसी जानकारी के आधार पर थाना चंदननगर के थानाप्रभारी को जब पता चला कि रऊफ की रिश्तेदारी धरमपुरी में है तो उन्हें लगा था कि वह लाश सलमान शेख की हो सकती है.

उन्होंने तत्काल लापता सलमान शेख के घर वालों को थाना धरमपुरी जाने की सलाह दी. तौकीर पिता के साथ थाने पहुंचा तो पता चला कि लाश तो दफना दी गई है. थानाप्रभारी के.एस. साहू ने लाश के सामान को दिखाया तो उन्होंने उस में रखी एक अंगूठी देख कर कहा कि वह लाश सलमान शेख की थी, पर यह तुलसी की माला उन का बेटा क्यों पहनेगा?

के.एस. साहू तुरंत समझ गए कि हत्यारों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए उसे तुलसी की माला पहना कर उस का गुप्तांग काट दिया था. पुलिस को भ्रमित करने के लिए ही हत्यारों ने जेब में लड़की और लड़के की फोटो भी रखी थी. हत्यारों ने गलती यह की थी कि वे सलमान शेख की अंगूठी निकालना भूल गए थे. अंगूठी से ही उस की लाश की पहचान हो गई थी.

लाश की पहचान होने के बाद अगले दिन उपजिलाधिकारी के आदेश पर सलमान शेख का शव निकलवा कर उस के घर वालों को सौंप दिया गया था. घर वालों ने सलमान की लाश ला कर इंदौर के एक कब्रिस्तान में दफना दिया था. सलमान की लाश मिलने की सूचना पा कर उस के परिचितों और दोस्तों ने थाना चंदननगर में धरना दे कर हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की थी.

एक ओर जहां मृतक सलमान शेख के घर वालों और परिचितों ने पुलिस पर हत्यारों को गिरफ्तार करने का दबाव बना रखा था, वहीं मुखबिर से मिली जानकारी ने थानाप्रभारी को चौंका दिया था. मुखबिर ने बताया था कि सलमान को आखिरी बार रऊफ खान के ड्राइवर सद्दाम के साथ देखा गया था.

इस के बाद थाना चंदननगर पुलिस ने शबनम और सद्दाम को हिरासत में ले कर पूछताछ की. लेकिन दोनों ही कुछ भी बताने को तैयार नहीं थे. चूंकि पुलिस के पास दोनों के खिलाफ ठोस सबूत थे, इसलिए पुलिस ने दोनों से थोड़ी सख्ती की और उन्हें काल डिटेल्स दिखाई तो दोनों ने ही असलियत उगल दी.

सद्दाम ने स्वीकार कर लिया कि शबनम भाभी से सलमान शेख के संबंध थे, जिस से नाराज हो कर रऊफ खान ने सलमान की हत्या की योजना बनाई थी. इस योजना में उस के अलावा रऊफ के भतीजे गोलू उर्फ जफर और जावेद भी शामिल थे.

इस के बाद उस ने सलमान शेख की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस के अनुसार थाना चंदननगर पुलिस ने जावेद, रऊफ खान, गोलू उर्फ जफर के अलावा थाना धरमपुरी पुलिस की मदद से धरमपुरी के रहने वाले रऊफ के एक रिश्तेदार को भी गिरफ्तार किया था. बाद में इन सब को भी थाना धरमपुरी पुलिस को सौंप दिया गया था, जहां इन सब से की गई पूछताछ में सलमान की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

इंदौर के थाना चंदननगर में रहने वाला 21 साल का सलमान अब्दुल लतीफ शेख का बेटा था. उस के घर के सामने ही रऊफ खान का घर था, जो बिल्डिंगों की मरम्मत और पुताई का ठेका लेता था. इस के लिए उस के पास तमाम मजदूर काम करते थे. सलमान पढ़लिख कर कमाने लायक हुआ तो अब्दुल लतीफ शेख के कहने पर रऊफ खान ने उसे भी अपने यहां काम पर रख लिया था.

सलमान रऊफ का पड़ोसी था ही, इसलिए उस का रऊफ के घर पहले से ही आनाजाना था. लेकिन जब वह उस के यहां काम करने लगा तो उस का आनाजाना कुछ ज्यादा ही हो गया. जिस की वजह से रऊफ की पत्नी शबनम से उस की कुछ ज्यादा ही पटने लगी. उन का रिश्ता भी कुछ ऐसा था. सलमान शबनम को भाभी कहता था, इसलिए खुल कर हंसीमजाक होता था.

रऊफ खान का काम बड़ा था, इसलिए उस का दिन भागदौड़ में ही बीत जाता था. चूंकि सलमान पड़ोसी था, इसलिए घर के कामों के लिए वह ज्यादातर उसे ही भेजता था. घर के कामों के साथसाथ सलमान शबनम के छोटेमोटे निजी काम भी कर दिया करता था. शबनम खूबसूरत भी थी और उम्र में भी रऊफ खान से छोटी थी. सलमान उस के हमउम्र था. इसी आनेजाने में ही युवा सलमान की नजरें शबनम के गदराए यौवन पर जम गईं. फिर तो जब भी उसे मौका मिलता, वह शबनम से ऐसा मजाक करता कि वह शरम से लाल हो उठती. औरतों को मर्दों की नजरें पहचानने में देर नहीं लगती. शबनम ने भी सलमान की नजरों से उस का इरादा भांप लिया.

पहले तो शबनम ने उस की नजरों से बचने की कोशिश की, लेकिन खुद से भी कमउम्र के आशिक की दीवानगी ने उसे बचने नहीं दिया, उस की दीवानगी उसे अच्छी लगने लगी तो वह उस के सामने अपने छिपे अंगों को इस तरह दिखाने लगी, जैसे सलमान जो देख रहा है, उस से वह अंजान है.

सलमान ने जो कुछ अब तक नहीं देखा था, शबनम से वह देखने को मिला तो वह ज्यादा से ज्यादा उस के करीब रहने की कोशिश करने लगा. सलमान की चाहत की आग में शबनम कुछ ज्यादा ही पिघलने लगी और धीरेधीरे खुद ही उस की होती चली गई. उस बीच रऊफ खान विधानसभा का चुनाव लड़ रहा था. इसलिए वह चुनाव में इस कदर व्यस्त हो गया कि न उसे काम का खयाल रहा और न पत्नीबच्चों का.

उस ने सभी कर्मचारियों को चुनाव प्रचार में लगा रखा था. ऐसे में उस ने सलमान को घर के कामों की जिम्मेदारी सौंप दी थी. इस बीच उस ने रातदिन शबनम भाभी की सेवा की. उस सेवा के फलस्वरूप एक दिन सलमान ने उसे बांहों में भर लिया. शबनम ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘तुम तो बड़े दिलेर निकले, तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी. मुझे बांहों में भरते हुए तुम्हें डर नहीं लगा. तुम्हारे भाईजान ने देख लिया तो सीधे सूली पर चढ़ा देंगे.’’

‘‘भाभीजान, मैं ने तुम से मोहब्बत की है. मोहब्बत करने वाले किसी से नहीं डरते.’’

‘‘तुम भाईजान के गुस्से को तो जानते ही हो, एक ही बार में सारा इश्क उतार देंगे.’’

‘‘भाभीजान, क्यों मोहब्बत के मूड को बिगाड़ रही हो.’’

‘‘मैं तो मजाक कर रही थी.’’ शबनम ने कहा और सलमान से लिपट गई. इस के बाद दोनों तभी अलग हुए, जब उन के तनमन की आग ठंडी हो गई. इस के बाद दोनों को जब भी मौका मिलता, तन की आग के दरिया में डूब कर आपस में सुख बांट लेते.

सलमान को अब शबनम की जुदाई पल भर के लिए भी बरदाश्त नहीं होती थी. वह चाहता कि शबनम हमेशा उस की आंखों के सामने रहे. लेकिन यह संभव नहीं था. फिर भी वह हर पल उसी की यादों में खोया रहता और उस से मिलने का मौका ढूंढता रहता. अकसर वह दोपहर में काम छोड़ कर शबनम से मिलने उस के घर पहुंच जाता.

सलमान के इस तरह काम छोड़ कर जाने से रऊफ को उस पर शक हुआ तो उस ने कर्मचारियों से उस के बारे में पूछा. पता चला कि सलमान उस की पत्नी से फोन पर घंटों बातें करता है, अकसर दोपहर में उसी से मिलने भी जाता है. रऊफ ने जब इस बात पर ध्यान दिया तो पता चला कि सलमान और शबनम के बीच कुछ चल रहा है. इस के बाद वह दोनों पर नजर रखने लगा. आखिर एक दिन उस ने सलमान को पत्नी से फोन पर बातें करते पकड़ लिया तो उस ने सलमान की पिटाई कर के काम से निकाल दिया.

सलमान को इस से कोई फर्क नहीं पड़ा. वह रऊफ के घर के ठीक सामने ही रहता था. मौका निकाल कर वह शबनम से मिल ही लेता था. फोन पर उन की बातें होती ही रहती थीं. जब रऊफ को पता चला कि अब भी सलमान और शबनम मिलते हैं तो उसे डर सताने लगा कि अगर शबनम सलमान के साथ भाग गई तो समाज में वह मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा, क्योंकि एक तरह से सलमान उस का नौकर था. उस के पास पैसा था और ऊंची राजनीतिक पहुंच भी. इसलिए उस ने सलमान को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया.

रऊफ ने सलमान को इंदौर से करीब 150 किलोमीटर दूर ले जा कर धार जिले के धरमपुरी इलाके के जंगल में हत्या करने की योजना बनाई, ताकि पुलिस किसी कीमत पर उस की लाश को न पा सके. अपनी इस योजना में उस ने अपने ड्राइवर सद्दाम, भतीजे गोलू उर्फ जफर और जावेद को शामिल किया.

योजना तो बन गई, लेकिन अब सलमान को धरमपुरी के जंगल तक ले कैसे जाया जाए, इस पर विचार किया गया. वह आसानी से जाने वाला नहीं था. आखिर एक तरकीब निकाली गई और इस काम के लिए ड्राइवर सद्दाम को तैयार किया गया. उस ने सद्दाम से कहा कि वह सलमान को शबनम से मिलाने के बहाने धरमपुरी के जंगल तक ले चले.

योजना के अनुसार, 8 जनवरी, 2017 को सद्दाम सलमान से मिला. सद्दाम ने उस से शबनम से मिलाने की बात कही तो वह फौरन तैयार हो गया. क्योंकि पिछले कई सप्ताह से वह शबनम से मिल नहीं पाया था. सद्दाम सलमान को अपने साथ ले कर चला तो कई लोगों ने सलमान को उस के साथ जाते देख लिया था. धरमपुरी के जंगल में पहुंच कर सलमान ने शबनम के बजाए गोलू, जावेद और रऊफ खान को देखा तो समझ गया कि उस के साथ धोखा हुआ है.

वह कुछ कहता या भाग पाता, उस से पहले ही सभी ने उसे पकड़ लिया और उस की पिटाई शुरू कर दी. पिटाई करने के बाद उस के गले में रस्सी डाल कर कस दिया तो उस की मौत हो गई. इस के बाद पहचान छिपाने के लिए उस का चेहरा ईंट से कुचल दिया गया. उस के कपड़े उतार कर गुप्तांग काट दिया गया, ताकि उस के धर्म का पता न चल सके.

गले में तुलसी की माला डाल कर उस की पैंट की जेब में एक लड़के और लड़की की फोटो भी डाल दी. उन्होंने पुलिस को गुमराह करने के लिए किया तो बहुत कुछ, लेकिन उन का अपराध छिप न सका और वे पकडे़ गए.

सलमान की हत्या करने के बाद रऊफ ने गोलू और सद्दाम को रात में ही इंदौर भेज दिया था, जबकि खुद जावेद के साथ अपनी बहन के यहां धरमपुरी में रुक गया था, ताकि किसी को शंका न हो. वह अगले दिन इंदौर आ गया और अपने काम में लग गया.

रऊफ और उस के साथियों को पूरा भरोसा था कि पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. लेकिन पुलिस उन तक पहुंच ही गई. इस तरह उन की उम्मीदों पर पानी फिर गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक शबनम, रऊफ खान, सद्दाम, जावेद और गोलू जेल में थे.     

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

इन गलतियों से हो जाती है फोन की मेमोरी फुल

ये बात तो आपको बताने वाली नहीं है कि आपके फोन के हैंग होने और स्लो चलने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इसका एक प्रमुख कारण फोन स्टोरेज का फुल होना होता है.

हमारी कुछ गलतियों की वजह से फोन का स्टोरेज फुल हो जाता है. यहां हम आपको उन 7 गलतियों के बारे में बता रहे हैं. अगर आप भी ऐसी कोई गलती कर रहे हैं तो यहां हमारे द्वारा बताई गई इस लिस्ट से चेक कर सकते हैं.

इंस्टाग्राम फोटोज सेव रखना

इंस्ट्राग्राम की सेव्ड फोटोज बहुत सारा स्पेस कवर करती हैं. इन फोटोज का मोह न रख इनको डिलीट करें.

थर्ड पार्टी ऐप्स को इंस्टाल करना

थर्ड पार्टी ऐप्स फोन की मेमोरी खाने के साथ ही इसे स्लो बनाती हैं. ऐसी सभी ऐप्स को डिलीट करें. इनमें कैमरा ऐप्स भी शामिल हैं. इनका काम बहुत कम पड़ता है लेकिन यह फोन का बहुत सारा स्पेस खा जाती हैं.

म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विसेज का यूज न करना

म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स से आप अपने पसंद का गाना वीडियो कुछ सेकंड में ही देख-सुन सकते हैं और इन्हें फोन में डाउनलोड करने की जरूरत भी नहीं होती. इससे आप फोन में ढ़ेरों गाने और वीडियो स्टोर करने से बच जाएंगे.

पुराने मैसेज को डिलीट न करना

डिलीट ऑल थ्रेड्स ऑप्शन पर जाकर पुराने मैसेज को डिलीट कर सकते हैं. इससे एक साथ सभी पुराने मैसेज डिलीट हो जाएंगे.

अनचाहे  ऐप्स को डिलीट न करना

कई ऐप्स फोन में जरूरी नहीं होती तब भी पड़ी रहती हैं. ऐसी सभी ऐप्स को डिलीट करें. ये फोन की मेमोरी खा रही हैं.

ब्राउसर के Cache को क्लीन न करना

अगर आप क्रॉम ब्राउजर का यूज करते हैं तो इसकी कैश, डाटा और हिस्ट्री को डिलीट करें.

फाइल्स को एसडी कार्ड में मूव करें

अपने फोन के इंटरनल स्टोरेज को क्लीन करने के लिए सभी फाइल को माइक्रोएसडी कार्ड में मूव कर दें.

तीज उत्सव में दिखा फैशन का रंग, डांस की मस्ती

फेस्टिवल कोई हो अब महिलाएं अपने हुनर को दिखाने में पीछे नहीं रहतीं. डांस, मस्ती, फैशन और कैटवाक सबकुछ करने में कोई हिचक नहीं रह गई है. इसमें कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता. चाहे गृहणी हो या वर्किग विमेन. उम्र का भी कोई बंधन नहीं रह गया. 17 साल से लेकर 50 साल के उपर तक की महिलाओं को अब डांस करने में किसी तरह की झिझक का सामना नहीं करना होता.

अंश वेलफेयर फांउडेशन ने रिदम डांस एकेडमी में तीज उत्सव का आयोजन किया तो महिलाएं पूरी तरह से सज धज कर वहां पहुंच गईं. सोलह श्रृंगार और तीज के रंग में रंगी महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था.

यहां पर फिल्मी गानों पर डांस के साथ कैटवाक और फैशन के रंग भी दिखाने थे. दीवानी मस्तानीपर सुनीता राय, ‘डोला रे डोला पर ममता सिंह ने डांस किया. सुषमा पूरवार ने मोहे रंग दोऔर कुसुम वर्मा ने घरवा से निकसी ननद भौजाई’, जैस फोक सांग पर डांस किया. नीलम पूरवाल, पूनम रस्तोगी, सीमा मिश्रा, रूचि खान, संगीता सिंह और प्रियका रघुवंशी ने डांस प्रस्तुत किया. कई तरह के अलग अलग टाइटिल के लिये महिलाओं ने जोरआजमाइश की. जजमेंट पैनल ने बड़े मशक्कत के बाद विजेताओं का चयन किया.

गायत्री नैनी तीज क्वीन चुनी गईं. संतोष कुमारी और रूचि खान को रनरअप का खिताब मिला. हरियाली क्वीन सुनीता राय, बेस्ट वॉक ओम कुमारी, नैचुरल ब्यूटी सीमा मोदी, इंप्रेसिव ड्रेस पूनम रस्तोगी, बेस्ट मेंहदी ममता सिंह, बेस्ट फिगर नेहा तिवारी, बेस्ट मेकअप रीशू सिंह, बेस्ट झांझर साधना सिंह, बेस्ट स्माइल नीलम पूरवाल, बेस्ट हेयर स्टाइल वानी, बेस्ट बैंगल संगीता सिंह, बेस्ट ज्वेलरी का खिताब श्वेता को दिया.

सुदंरता, फैशन और स्टाइल के साथ महिलाओं ने कुकिंग कंपटीशन में भी अपना हुनर दिखाया. इसमें लवीना चलानी, जया, कंचन रस्तोगी, को विजेता चुना गया. जजमेंट पैनल के सदस्य कुसुम वर्मा, रीता सिंह, श्रद्धा सक्सेना, रचना कपूर, शीतल और तृप्ति तिवारी ने अंश वेलफेयर फाउडेशन, लोक उन्नति संस्थान और बीटीसी चाय के उपहार से सभी विजेताओं को सम्मानित किया.

कैसे बचें बैंक द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों से

बचत खाते से लेकर सिप तक, बैंक आपको तमाम तरह की सुविधाएं मुहैया करवाते रहते हैं. दूसरे बैंकों से बेहतर ब्याज दर की पेशकश और अन्य फायदों का हवाला देते हुए बैंक ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को खुद से जोड़ने की कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन बेहद कम लोग ही यह बात जानते हैं कि बैंक की कोई भी सेवा निशुल्क नहीं होती है. आपको बता दें कि एटीएंम फीस से लेकर बैंक में खाता बंद करवाने पर भी आपको बैंक चार्ज देना होता है. हालांकि आप अगर कुछ सावधानी बरतें तो आप बैंक के कुछ चार्ज से बच सकते हैं. हम अपनी खबर के माध्यम से इन्हीं तरीकों के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.

बैंकिंग फीस : बैंक में नया खाता खोलने से पहले एक बार बैंकिंग फीस जरूर जान लें. मसलन बैंकिंग फीस में बैलेंस फीस, सेविंग एकाउंट से जल्दी पैसे निकालने पर लगने वाली फीस, एटीएम कार्ड का इस्तेमाल आदि. इन सभी शुल्क को ध्यान में रखने पर पैसों की बचत की जा सकती है.

एटीएम फीस : जानकारी के लिए बता दें कि किसी और बैंक का एटीएम कार्ड किसी अन्य बैंक में इस्तेमाल करने पर एटीएम सेवा प्रदाता और आपका बैंक दोनों अतिरिक्त शुल्क चार्ज कर सकते हैं. देश में बीते वर्ष आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद अधिकांश बैंक सीमित नकद निकासी संख्या के बाद शुल्क वसूल रहे हैं. इस तरह छोटे-छोटे चार्जेज सालाना आधार पर हजारों रुपये बन जाते हैं जिन्हें आप जरा सी सावधानी से बचा सकते हैं.

खाता बंद करने पर : बैंक में खाता बंद करने से पहले एक बार चार्जेस चेक कर लें. कुछ बैंक तय समय से पहले खाता बंद करने पर क्लोजर फीस लेते हैं.

ओवरड्राफ्ट : कोशिश करें कि अपने बैंक खाते में रखी राशि से ज्यादा खर्च न करें. खाते में रखी राशि से ज्यादा खर्च करने पर बैंक ओवरड्राफ्ट फीस चार्ज करता है.

बैंक कार्ड को क्रेडिट कार्ड के रुप में करें इस्तेमाल : कुछ बैंक, बैंक कार्ड को क्रेडिट कार्ड के बजाय डेबिट कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने पर पहले दो से पांच ट्रांजेक्शन करने के बाद चार्ज लगाते हैं. यह बैंकों पर निर्भर करता है. कोशिश करें कि ट्रांजेक्शन के समय अपने बैंक कार्ड को क्रेडिट कार्ड के रूप में इस्तेमाल करें. इस तरह पैसों की बचत की जा सकती है.

इंटरस्ट बियरिंग सेविंग्स एकाउंट : अगर ग्राहक के तौर पर आप ऐसे किसी बैंक या वित्तीय संस्थान की तलाश कर रहे हैं तो ऐसे बैंक का चयन करें जो आपसे न्यूनतम चार्ज लें.

बैंकों से चार्ज रिवर्सल की करें मांग : यदि बैंक आप पर ज्यादा बैंकिंग फीस जैसे कि ओवरड्राफ्ट फीस लेता है तो बैंक से संपर्क कर उनसे बात करें कि फीस रिवर्स हो सकती है या नहीं. कई बार बैंक इस फीस को वापस ले लेते हैं यदि आपके साथ ऐसा कई बार नहीं होता है तो.

ऑनलाइन माध्यम का करें चयन : अधिकांश बैंक ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराते हैं. अगर आपके पास इंटरनेट कनेक्शन के साथ स्मार्टफोन या कंप्यूटर है तो आप ऑनलाइन बैंकिंग का चयन कर सकते हैं. इससे पेपर स्टेटमेंट फीस से बचा जा सकता है.

“विलेन को फिल्म से निकाला तो फिल्म छोड़ दूंगी”

आपने बॉलीवुड में दो हीरो के बीच दोस्ती की कई मिसालें सुनी होंगी लेकिन एक हीरो और हीरोइन के बीच दोस्ती का ये किस्सा आपको वाकई अचंभे में डाल देगा.

वाकया उन दिनों का है जब अपने मुंहफट अंदाज और बड़बोलेपन के चलते शत्रुघ्न सिन्हा को इंडस्ट्री में नापसंद किया जाने लगा था. उस वक्त दो ही लोग थे जो शत्रुघ्न के दोस्त थे. पहले संजीव कुमार और दूसरी मुमताज.

दोनों को फिल्म ‘खिलौना’ ऑफर हुई तो उन्होंने शत्रुघ्न के नाम की भी सिफारिश कर डाली. डायरेक्टर ने शत्रुघ्न को फिल्म में विलेन का रोल दिया. लेकिन शत्रुघ्न कैमरे के सामने विलेन का रोल करते करते शूटिंग के सदस्यों के साथ भी विलेन का रोल करने लगे. वो शूटिंग के दौरान क्रू मेंबर के साथ बदतमीजी करते, उनसे गाली गलौज करते थे.

शत्रुघ्न के व्यवहार के चलते पूरी यूनिट उनके खिलाफ हो गई. खुद एलवी प्रसाद भी शत्रुघ्न के खराब व्यवहार से इतने त्रस्त थे कि उन्हें बिना शूट दिए पूरे पूरे दिन बैठाया जाता था.

एक तरफ फिल्म की पूरी यूनिट थी जो शत्रुघ्न को फिल्म से निकलवाने पर तुली थी और दूसरी तरफ संजीव और मुमताज थे जो कोशिश कर रहे थे कि शत्रुघ्न को फिल्म से न निकाला जाए. उधर शत्रुघ्न इन चीजों से बेखबर टीम के साथ अजीबोगरीब व्यवहार कर रहे थे.

एक दिन शत्रुघ्न किसी बात पर टीम से झगड़ पड़े और आजिज आकर एलवी प्रसाद ने शत्रुघ्न को शूटिंग से बाहर कर दिया. संजीव कुमार ने एलवी प्रसाद को समझाने की बहुत कोशिश की, यहां तक कि शत्रुघ्न की तरफ से उनसे माफी भी मांगी लेकिन प्रसाद नहीं माने.

शत्रुघ्न मुंह लटकाए शूट से लौट रहे थे तब मुमताज एलवी प्रसाद के पास पहुंची और कहा कि अगर आप शत्रुघ्न को शूट से बाहर करेंगे तो मैं फिल्म की शूटिंग छोड़ दूंगी. ये सुनते ही प्रसाद सकते में आ गए. फिल्म की 70 फीसदी शूटींग पूरी हो चुकी थी और शूटिंग पर लाखों रुपया खर्च हो चुका था, ऐसे में अगर हीरोइन फिल्म छोड़ दे तो निर्माता सड़क पर आ जाता.

एलवी प्रसाद ने मुमताज की धमकी को गंभीरता से लेते हुए फैसला किया कि शत्रुघ्न की नादानियां सही जाएं और उन्हें शूट से बाहर न निकाला जाए.

संगीत की दुनिया से आ रही है ये फिल्म ‘वन हार्ट’

मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान को इंडस्ट्री 25 साल हो चुके हैं. जैसे कि आप सभी को पता ही है कि सचिन तेंदुलकर भी सबसे सामने अपनी बायोपिक लेकर आ चुके हैं और माइकल जैक्सन की कॉन्सर्ट पर फिल्म भी बनाई जा सकती है, तो एआर रहमान पर कोई क्यों नहीं? शायद इसी एक सोच के साथ ए.आर. रहमान की कॉन्सर्ट पर फिल्म बनाई गई है.

इस फिल्म का नाम है 'वन हार्ट : द एआर रहमान कॉन्सर्ट फिल्म'. यह फिल्म लगभग बनकर तैयार है और अगले माह ही 25 तारीख यानि कि 25 अगस्त को रिलीज भी होने जा रही है. इसका एक ट्रेलर भी जारी कर दिया गया है, उम्मीद है आप सभी ने इसे देखकर कुछ तो अंदाजा लगा ही लिया होगा.

फिल्म के इस ट्रेलर में एक भी गाने की झलक नहीं है, लेकिन रहमान के बैंड के कई चेहरे यहां दिखाई दे रहे हैं. ये सभी लोग रहमान के बारे में ही बात कर रहे हैं और यह भी बता रहे हैं कि, क्यों उनका हर लाइव कॉन्सर्ट खास होता है.

ऐकेडमी अवॉर्ड विनर रहमान के बैंड में कई चेहरे विदेशी हैं. अपने अनुभवों को सुनना रहमान के फैन्स के लिए ऐसा अनुभव होगा जो कि पहले कभी नहीं हुआ. रहमान के प्रशंसक भारी तादाद में, न केवल भारत में बल्कि दुनिया के हर कोने से हैं इसीलिए मेकर्स के दिमाग में इस फिल्म को पेश करने का ख्याल आया होगा.

खबरों की माने तो इस फिल्म में उनके बनाए 18 गानों के बारे में बात की जाएगी. दस मेंबर्स वाला उनका बैंड, खुद ये कहानी सुना सकता है. इस फिल्म को रहमान के द्वारा समय-समय पर दिए कुछ इंटरव्यूज के आधार पर तैयार किया गया है.

जब ओवर के पहले ही गेंद पर बन गए थे 14 रन

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें आए दिन अजीबोगरीब रिकॉर्ड्स बनते हैं. कभी कोई बल्लेबाज एक ओवर में 36 रन बनाता है तो कई 72 बॉल में 300, कोई किसी पारी के सारे विकेट अपने नाम कर लेता है तो कोई लगातार 4 विकेट झटक लेता है. क्रिकेट के नाम ऐसे ही कई अद्भुत रिकॉर्ड्स हैं.

इस खेल में हमेशा अच्छे ही नहीं बुरे रिकॉर्ड्स भी बनते हैं. कुछ खिलाड़ियों ने तो ऐसा भी कारनामा किया है जिसके वजह से सिर्फ उन्हें ही नहीं उनकी टीम को भी खामियाजा भुगतना पड़ा है.

ऐसा ही एक रिकॉर्ड है जिसे देख आप सभी हैरान रह जाएंगे. दरअसल बात उस वक्त की है जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 2005 में वनडे सीरिज खेला जा रहा था.

26 फरवरी, 2005 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच हुए तीसरे वनडे में कुछ ऐसा रिकॉर्ड बना जिस पर यकीन कर पाना मुश्किल है.

जब मैदान में ऑस्ट्रेलियाई टीम बल्लेबाजी करने आई, पहले ही ओवर में गेंदबाजी कर कीवी गेंदबाज डैरल टफी ने ऐसा कारनामा किया जिसे देख सभी आश्चर्यचकित हो गए. इनींग का पहला ओवर देख कर ऐसा लग रहा था कि टफी बॉलिंग करना ही भूल गए हैं. पहले ही ओवर में उनंहोंने 4 नो बॉल और 4 वाइड गेंदें फेंकी. ओवर में एक भी गेंद फेंके बिना ही ऑस्ट्रेलिया के खाते में 10 रन जुड़ गए थे.

इडेन पार्क, ऑकलैंड में हुए इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 264 रन बनाया था. लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम 178 रन पर ही ढ़ेर हो गई थी. ऑस्ट्रेलिया ने 86 रनों से यह मैच अपने नाम कर लिया था.

देखिए कैसे ओवर के पहले ही गेंद पर 14 रन बन गए.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें