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सपना या आजादी, आखिर किसे चुनेंगे फरहान अख्तर

फरहान अख्तर की फिल्म 'लखनऊ सेंट्रल' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. फिल्म में किशन मोहन गिरोत्रा के रूप में फरहान अख्तर के किरदार की पहली झलक ने चर्चा बटोरी थी और अब फिल्म के ट्रेलर से फरहान सुर्खियों में हैं.

इस ट्रेलर में फरहान एक बार फिर दमदार एक्टिंग करते नजर आ रहे हैं. ट्रेलर देखकर ऐसा है कि फिल्म में दमदार डायलॉग की कमी नहीं होगी. 2 मिनट 37 सेंकड के ट्रेलर में ऐसे डायलॉग हैं, जो इस ट्रेलर की जान हैं.

भोजपुरी गायक का किरदार निभा रहे हैं फरहान

बता दें, फरहान फिल्म में एक महत्वाकांक्षी भोजपुरी गायक का किरदार निभा रहे हैं. इसके साथ ही वह फिल्म में मनोज तिवारी के प्रशंसक भी हैं.

फरहान ने 20 भोजपुरी फिल्में देखीं

इस फिल्म की शूटिंग के दैरान फरहान ने भोजपुरी सिनेमा को बेहतर तरीके से समझने के लिए 20 भोजपुरी फिल्में देखीं. उन्होंने मनोज तिवारी और रवि किशन की भी कई भोजपुरी फिल्में देखीं.

15 सितम्बर को रिलीज होगी फिल्म

15 सितम्बर को रिलीज होने वाली यह फिल्‍म असल घटनाओं से प्रेरित है. फिल्‍म का निर्देशन रंजीत तिवारी और निखिल आडवानी ने किया है. फिल्म में फरहान के साथ एक्ट्रेस डायना पेंटी भी नजर आने वाली हैं. इस फिल्‍म में रोनित रॉय, पंजाबी स्‍टार गिप्‍पी ग्रेवाल, राजेश शर्मा और रवि किशन भी नजर आने वाले हैं.

ये हैं फिल्म के पांच दमदार डायलॉग

1. प्लान तो भागने का है, पर सपना बैंड बनाने का है.

2. छोटे शहर के लोगों के बड़े-बड़े सपने. बाबूजी शहर छोटे होते हैं सपने नहीं.

3. दर्जनों सौ की भीड़, साथ बजते हाथ, सबके जुबान पर एक ही नाम 'किशन'

4. सरकार भी पांच साल में बदल जाती है तिलकधारी, ये तो जेल है.

5. यहां बैंड बनेगा नहीं, बजेगा.

इस बॉलीवुड अभिनेत्री के प्यार में पड़ गए थे धोनी और युवी

बॉलीवुड और क्रिकेट स्टार्स का रिश्ता बहुत पुराना है. बॉलीवुड स्टार्स और क्रिकेट स्टार्स के अफेयर्स की खबरें भी आये दिन आती रहती हैं. ये सिलसिला आज से नहीं बल्कि 19वीं सदी से चलता आ रहा है. इन अफेयर्स में किसी का सफर शादी तक पहुंचता है तो कुछ बीच मझधार में ही अलग हो जाते हैं. अपने डेट और अफवाहों की वजह से कई खिलाड़ी और बॉलीवुड सितारे विवाद का हिस्सा बने.

ऐसी ही कुछ कहानी है धोनी-दीपिका और युवराज-दीपिका के अफेयर की. इन दोनों खिलाड़ियों को एक साथ इस बॉलीवुड दिवा से प्यार हो गया था.

साल 2007 में महेंद्र सिंह धोनी और दीपिका पादुकोण के बीच अफेयर की खबरें खूब सुर्खियां बटोर रही थी. धोनी ने एक इंटरव्यू में कबूल भी किया था कि वह दीपिका को पसंद करते हैं.

खबरें थीं कि धोनी ने दीपिका को 2007 में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच टी-20 मैच देखने के लिए आमंत्रित किया था और दीपिका ने धोनी के निमंत्रण को स्वीकारते हुए स्टेडियम में अपनी उपस्थिति दर्ज भी कराई थी. मैच के दौरान धोनी-दीपिका एक साथ कैमरे पर भी कैद हो गए थे. मैच के बाद भी दीपिका को धोनी के साथ देखा गया था. माना जाता है कि धोनी ने अपने लंबे बाल दीपिका के कहने पर ही कटवाए थे.

लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही दीपिका का नाम युवराज सिंह के साथ जुड़ा. यही नहीं दीपिका युवराज के कहने पर जयपुर में मैच देखने को भी गईं. इस बात के पता चलते ही धोनी ने दीपिका से संबंध तोड़ने की ठान ली और पूरा ध्यान अपने खेल पर लगाना शुरू कर दिया. इस तरह धोनी-दीपिका की लव स्टोरी परवान चढ़ने के पहले ही खत्म हो गई.

इसके बाद युवराज सिंह और दीपिका कई जगहों पर एक साथ देखे गए. दीपिका के 22वें जन्मदिन पर दोनों को एक साथ डिनर डेट पर देखा गया. लेकिन एक साल बाद ही दीपिका ने युवराज से अपना रिश्ता तोड़ लिया.

पहले तो धोनी ने अपने दोस्त के कारण दीपिका का साथ छोड़ दिया और बाद में दीपिका ही उनकी दोस्त को छोड़ कर चली गयीं. खैर अब दोनों ही खिलड़ी वैवाहिक जीवन में बंध चुके हैं और खुश भी हैं.

भाजपा को सता रहा उपचुनाव का डर

चार माह पहले जिस भाजपा ने उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत हासिल किया वही भाजपा अब उपचुनाव में उतरने से पहले डर रही है. असल में अगस्त माह तक भाजपा को उत्तर प्रदेश में लोकसभा के 2 और विधानसभा के 5 उपचुनाव से गुजरना है. विधानसभा के 5 उपचुनाव से बचने के लिये वह विधानपरिषद के पीछे दरवाजे से अपना बचाव कर सकती है पर लोकसभा के 2 उपचुनाव का मुकाबला उसे करना ही होगा. लोकसभा की यह दो सीटे गोरखपुर और फूलपुर हैं. गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है और फूलपुर के सांसद केशव मौर्या उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. दोनों को ही शपथ लेने के 6 माह के अंदर लोकसभा से इस्तीफा देकर विधानसभा का चुनाव लड़ना है. योगी आदित्यनाथ और केशव मौर्य जिन सीटों से चुनाव लड़ेंगे वहां के विधायको को इस्तीफा देकर सीट खाली करनी पड़ेगी.

भाजपा दोनो ही नेताओं के लिये ऐसी सीट की तलाश में है जहां से वह चुनाव हारे नहीं. इन नेताओं के द्वारा खाली की गई लोकसभा सीट पर भी ऐसे लोगों को चुनाव लड़ाना है जो चुनाव न हारे. उपचुनाव में हार का प्रभाव योगी सरकार पर पड़ेगा. हार का मतलब होगा कि भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा है. भाजपा को अपने 3 दूसरे नेताओं के लिये भी विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता का रास्ता बनाना है. इनमें उपमुख्यमंत्री डाक्टर दिनेश शर्मा, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और मोहसिन रजा शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में पहली बार एक साथ इतनी संख्या में ऐसे लोगों को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया गया, जो विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं.

अब भाजपा को इस बात का डर सता रहा है कि वह अगर एक भी चुनाव हार गई तो उसकी साख पर बट्टा तो लगेगा ही मंत्री पद को बचाना भी मुश्किल हो जायेगा. जिस तरह से योगी सरकार के खिलाफ लोगों में अंसतोष है. इसके साथ ही साथ भाजपा के खिलाफ पूरा विपक्ष एकजुट हो सकता है. राजनीतिक हलको में यह बात चल रही है कि बसपा नेता मायावती फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं, जो केशव मौर्य के इस्तीफा के बाद खाली हो रही है. अगर मायावती यहां से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच जाती हैं तो भाजपा के लिये यह करारी हार हो सकती है.

ऐसे में भाजपा अब केशव मौर्य को उत्तर प्रदेश सरकार से हटाकर केन्द्र में लाना चाहती है. जिससे उनको लोकसभा से इस्तीफा न देना पड़े. मायावती को फूलपुर से चुनाव लड़ने का मौका ही न मिले. फूलपुर लोकसभा सुरक्षित सीट है. ऐसे में मायावती के मुकाबले भाजपा के पास कोई बड़ा नेता चुनाव मैदान में उतारने लायक है नहीं. अपनी परेशानी को छिपाने के लिये भाजपा इसे तालमेल की कमी का रंग देना चाहती है. वह यह संदेश दे रही है कि बेहतर तालमेल के लिये केशव को उत्तर प्रदेश से हटा कर केन्द्र में ले जाया जा सकता है. इसके पीछे की असल वजह उपचुनाव में हार का खतरा है. सरकार की नीतियों से भाजपा को यह उम्मीद नहीं है कि वह विधानसभा चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहरा पायेगी.  

मैंने कई बार अपने दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं. इस बार हमने एहतियात नहीं बरती. यदि मुझे गर्भ ठहर गया तो क्या होगा.

सवाल

मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं. हम ने कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए पर हमेशा एहतियात बरती, इसलिए किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. पर इस बार जब हम ने संबंध बनाया तो हम इतने लापरवाह हो गए कि कोई एहतियात नहीं बरती. अब मुझे डर लग रहा है कि यदि मुझे गर्भ ठहर गया तो क्या होगा. कृपया बताएं कि यदि ऐसा हो गया तो इस समस्या से कैसे छुटकारा पा सकती हूं?

जवाब

आप ने पूरा खुलासा नहीं किया है कि आप को संबंध बनाए कितना समय बीत चुका है. शुरुआती समय के लिए गर्भ निरोधक गोलिया हैं, जिन्हें ले कर आप इस चिंता से मुक्त हो सकती है. पर समय ज्यादा हो गया है जिस में ये गर्भनिरोधक कारगर नहीं होते, तो आप को किसी लेडी डाक्टर से परामर्श लेनी चाहिए और यदि गर्भ ठहर गया तो गर्भपात करा सकती है. भविष्य में भूल कर भी विवाह से पहले संबंध न बनाएं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

युवकों में बढ़ता बेहतर लुक का क्रेज

बेहतर लुक का क्रेज आज सिर्फ युवतियों में ही नहीं युवकों में भी पाया जाने लगा है बल्कि युवकों में यह बेहद तेजी से बढ़ रहा है. बेहतर लुक और खूबसूरत दिखने के ट्रैंड का एक मुख्य कारण है अधिक पैसा कमाने की चाह और बदलता लाइफस्टाइल. आज इस आपाधापी भरी जिंदगी में अधिक पैसा कमाने की चाह होना गलत नहीं बल्कि इस चाह को पूरा करने के लिए इस फैशन के दौर में यह जरूरी भी है कि युवा अपने लुक को ले कर लापरवाही न बरतें और खुद को स्मार्ट बनाएं.

आज युवक भी ऐसे प्रोडक्ट और मेकअप टिप्स की तलाश में रहते हैं, जिन से स्टाइलिश और खूबसूरत दिखें. जानिए ऐसे ही कुछ मेकअप टिप्स के बारे में :

मेकअप से पहले

युवकों को चाहिए कि वे मेकअप करने से पहले शेव जरूर कर लें. इस से उन्हें आकर्षक लुक मिलेगा. इस के बाद स्क्रब को हलके हाथों से त्वचा पर रगड़ते हुए कुनकुने पानी से चेहरा धो लें. शेविंग के कुछ समय बाद चेहरे को फेसवाश या स्क्रब से साफ करें, जिस से त्वचा में जलन महसूस न हो.

त्वचा में पीएच बैलेंस

त्वचा में पीएच बैलेंस बनाए रखने के लिए अच्छी कंपनी का टोनर लगाएं. त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए मौइश्चराइजर लगाना न भूलें.

आंखों के नीचे काले घेरे

कई बार युवकों की आंखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं, जिन्हें छिपाने के लिए वे कंसीलर का इस्तेमाल कर सकते हैं. चेहरे की झाइयों, दागधब्बों, मुहांसों को छिपाने के लिए आप फाउंडेशन लगा सकते हैं. पसीना आने पर मेकअप खराब न हो इसलिए वाटरपू्रफ फाउंडेशन लगाएं.

नैचुरल लुक, चमकदार त्वचा

नैचुरल लुक और चमकदार त्वचा के लिए टिंटेड मौइश्चराइजर युवकों के लिए सब से अच्छा विकल्प है. यह धूप से बचाने के साथ ही त्वचा को मुलायम भी रखता है. चमकदार होंठों को कोमल व चमकदार बनाए रखने के लिए लिप बाम जरूर लगाएं.

तैलीय त्वचा

तैलीय त्वचा का तेल कम करने के लिए कौंपैक्ट पाउडर लगाएं. यह आप की त्वचा का रंग हलका करने के साथ ही पसीना, चिपचिपापन हटाता है, जिस से आप फ्रैश फील करते हैं.

आप मानें या न मानें लेकिन युवतियों को प्रभावित करने के लिए सिर्फ अच्छा लुक ही काफी नहीं है बल्कि अपनी त्वचा का खयाल रखना भी उतना ही जरूरी है. इस सीजन में जितना जरूरी युवतियों के लिए अपनी त्वचा की देखभाल है, युवकों के लिए भी उन की त्वचा की देखभाल उतनी ही जरूरी है. ऐसे में युवक लुक में जान डालने वाले इन उपायों पर जरूर गौर करें.

साबुन चुनते वक्त रखें ध्यान

आप को साबुन के चयन में युवतियों से अधिक समझदारी बरतनी होगी, क्योंकि आप का सामना धूप, औयल और प्रदूषण से अधिक होता है. ऐसे में बिना सोचेसमझे कोई भी साबुन इस्तेमाल करने के बजाय अपनी स्किन के अनुरूप साबुन का चुनाव करें. औयली स्किन के लिए फू्रट या जैल बेस साबुन और ड्राई स्किन के लिए क्रीम बेस साबुन अच्छा रहता है.

सनस्क्रीन  लड़कियों के लिए नहीं

धूप में निकलना युवकों का अधिक होता है, तो धूप से बचाव की जरूरत युवकों की त्वचा को क्यों नहीं है? युवकों को धूप में निकलते वक्त सनस्क्रीन लोशन लगाना नहीं भूलना चाहिए. सामान्यत: एसपीएफ 30 युक्त सनस्क्रीन युवकों की त्वचा को धूप से बचाने के लिए बेहतर है.

बालों के लिए कंडीशनर

अकसर युवक बालों पर शैंपू लगाने के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल जरूरी नहीं समझते, लेकिन बालों के लिए कंडीशनर की जरूरत युवकों को भी उतनी ही है, जितनी युवतियों को. इस से बालों की नमी बनी रहती है और बालों की चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है.

मौइश्चराइजिंग

युवकों की त्वचा का सामना धूप और प्रदूषण से अधिक होता है इसलिए उन की त्वचा की नमी का खोना लाजिमी है. ऐसे में युवकों को चाहिए कि वे रोज सोने से पहले व नहाने के बाद हलके मौइश्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करें.         

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जीएसटी का पेंच

जीएसटी लागू करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया है कि इस ‘एक देश एक टैक्स’ से करचोरी खत्म हो जाएगी और अच्छे दिन असल में आ जाएंगे. ब्लैक की बात करते हुए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ऐसे बोलते हैं मानो हर जना जो नकद में काम करता है वह देश और समाज का गुनाहगार है. जिन गुनाहगार छोटे व्यापारियों और कारखानेदारों के लिए यह जीएसटी लगाया गया है, वे असल में बेहद गरीबी में फटेहाल हैं. वे 4 लोगों को काम दे सकते हैं तो इस का मतलब नहीं कि वे टाटा, बिड़ला, अडानी बन गए हों.

जीएसटी से जिस तरह कंप्यूटरों पर टिक कर सारा व्यापार चलाया जाएगा, उस से आधा पढ़ालिखा व्यापारी, छोटा कारखानेदार, छोटा ठेकेदार, उन के साथ काम करने वाले मजदूर काले धन को धोने के नाम पर गंदे नाले में बह जाएंगे और देश में गरीब हायहाय करने लगें, तो बड़ी बात नहीं.

काला धन सरकार की वजह से पैदा होता है. कोई अमीर अपनी जेब में टैक्स चोरी का पैसा नहीं रखना चाहता, क्योंकि यह पैसा उस के भी किसी काम का नहीं होता. वह उस से छोटामोटा सामान खरीद सकता है, पर असली महंगे सामान के लिए तो उसे बड़ी कंपनियों के पास ही जाना होता है, जो काले पैसे में भरोसा नहीं करतीं.

काला धन असल में है तो नेताओं, मंदिरोंमसजिदों और बिचौलियों के पास. जीएसटी उन्हें छू भी नहीं रहा. असली काला धन वहीं का वहीं रहेगा. सरकार की नजर से बचा पैसा पैसा है, कालासफेद नहीं. जिस देश में अभी भी 95 प्रतिशत जनता गरीब हो, वहां कैसे काले पैसे की बात की जा रही है, समझ नहीं आता. नोटबंदी के बाद जैसे नकद धंधा चालू रहा, वैसे ही जीएसटी के बाद हो सकता है. अगर कहीं फायदा होगा तो सरकार को होगा कि उस की आमदनी बढ़ जाएगी, पर यह गरीबों की जेब कट कर बढ़ेगी, अमीरों की नहीं.

जीएसटी एक अश्वमेध यज्ञ की तरह है, जिस में हिंदू राजा अपनी सेनाओं को मंत्रजंतर पढ़ने वालों के इशारे पर बेमतलब में चारों ओर दौड़ा दिया करते थे. हाथ में आता कुछ नहीं था, पर जनता से जमा किया पैसा हवनों और सेनाओं में बरबाद हो जाता था. अब हर कंप्यूटर हवनकुंड बन गया है, हर सरकारी अफसर, सैनिक और पाप के दुश्मनों को मारने का नाटक शुरू हो गया है.

जब गंभीर ने कोहली को दे दिया अपना मैन ऑफ द मैच

आज विराट कोहली और गौतम गंभीर के संबंधों को लेकर भले ही तरह-तरह की बातें की जाती हो, मगर एक दौर ऐसा भी था जब दोनों एक दूसरे की बहुत इज्जत करते थें. गंभीर ने युवा कोहली की मेहनतकश पारी के लिए अपना मैन ऑफ द मैच खिताब भी उन्हें दे दिया था. जी हां, ये वाकया था 24 दिसंबर 2009 को भारत-श्रीलंका के बीच खेले गए चौथे वनडे मैच का.

बाद में भले ही दोनों के बीच के रिश्ते वैसे मधुर नहीं रहे. आईपीएल ने दिल्ली के इन दोनों खिलाड़ियों के बीच के रिश्तों को टकराव में बदल दिया था. लेकिन इससे पहले दोनों में काफी अच्छी बनती थी. आईपीएल 2013 के दौरान मैदान पर इन दोनों खिलाड़ी के बीच कहासुनी हुई थी.

आखिर क्या था पूरा मामला

ये वाकया है 24 दिसंबर 2009 का जब कोहली ने अपना पहला वनडे शतक जमाया था. भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए चौथे मैच में श्रीलंकाई टीम ने 315 रन बनाकर भारत को जीत के लिए 316 रनों का लक्ष्य दिया था. भारतीय टीम की शुरूआत अच्छी नहीं रही थी और उन्होंने अपने दो विकेट( सचिन तेंदुलकर और वीरेन्द्र सहवाग) को सिर्फ 23 रनों के स्कोर पर खो दिया था.

गंभीर और कोहली ने मैच को आगे बढ़ाया दोनों ने इस मैच में शतकीय पारी खेली. कोहली 107 रन बनाकर आउट हुए तो गंभीर 150 रनों की पारी खेलने के बाद नाबाद लौटे. भारत ने यह मैच इन दोनों की शानदार पारियों की बदौलत 7 विकेट से जीत लिया.

गंभीर को उनकी शानदार पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया, लेकिन उन्होंने खुद को इस पुरस्कार का सही हकदार नहीं बताते हुए मैन ऑफ द मैच का यह पुरस्कार विराट कोहली को दे दिया. उनका कहना था कि एक युवा बल्लेबाज के तौर पर कोहली ने जिस तरह का खेल दिखाया वही मैन ऑफ द मैच खिताब के सही हकदार हैं.

गौरतलब है कि विराट कोहली 188 वनडे मैचों में 29 बार नाबाद रहते हुए 91.0 की स्ट्राइक के साथ 8146 रन बना चुके हैं. इस दौरान उन्होंने 43 अर्धशतक समेत 27 शतक जड़े हैं. वहीं बात अगर टेस्ट की करें तो 57 मैचों की 97 पारियों में कोहली 55.81 की स्ट्राइक रेट से 4497 रन बना चुके हैं. इस दौरान कोहली ने 16 शतक और 14 अर्धशतक जड़े. इस शानदार बल्लेबाज ने भारत की ओर से 48 टी20 मैच भी खेले हैं, जिसमें 90 के सर्वाधिक स्कोर के साथ उन्होंने 1710 रन बनाए हैं.

काश ! वह मान जाती

जून का महीना था, बिजली न होने की वजह से गरमी से लोगों का बुरा हाल था. लगभग 2 घंटे बाद बिजली आई भी तो परमजीत कौर के घर के तार में आग लग जाने की वजह से परेशानी कम होने के बजाए और बढ़ गई. दिन तो गुजारा जा सकता था, लेकिन रात गुजारना मुश्किल था. इसलिए परमजीत कौर ने अपनी 17 साल की बेटी संदीप कौर से कहा, ‘‘देख तो बेटा, तेरा भाई रमन कहां है. उस से कहो किसी बिजली मिस्त्री को बुला लाए, जिस से घर की बिजली ठीक हो जाए.’’

‘‘मम्मी, रमन तो दोस्तों के साथ ट्यूबवैल पर गया है.’’

‘‘फिर बिजली कैसे ठीक होगी?’’

‘‘मैं जा कर किसी मिस्त्री को देखती हूं.’’ संदीप कौर ने कहा और दुपट्टा ले कर घर से बाहर निकल गई. बिजली की दुकान गांव से बाहर सड़क किनारे थी, जिस पर 2 लड़के रहते थे. उन में से एक का नाम राजवीर सिंह उर्फ राजा था.

राजा गांव के ही रहने वाले रंजीत सिंह का बेटा था. रंजीत सिंह खुद तो ड्राइवर थे, लेकिन चाहते थे कि उन के बच्चे पढ़लिख कर ठीकठाक नौकरी कर लें. लेकिन दुर्भाग्य से उन के दोनों बेटे पढ़ नहीं सके. बड़े बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजा ने 8वीं पास कर के स्कूल छोड़ दिया तो छोटा 8वीं भी पास नहीं सका.

पढ़ाई छोड़ कर राजा ने बिजली मरम्मत का काम सीख लिया और गांव के बाहर दुकान खोल ली. संदीप कौर राजवीर की दुकान पर पहुंची और उसे घर ले आई. 15-20 मिनट में राजवीर ने बिजली ठीक कर के परमजीत कौर से कहा, ‘‘बेबे, आप के घर के सारे तार गल गए हैं. आप नया तार मंगवा लीजिए, मैं तार बदल दूंगा.’’

‘‘बेटा, तू पैसे ले जा और बाजार से नया तार ला कर बदल दे. मेरे यहां कौन तार लाने जाएगा?’’ परमजीत कौर ने कहा.

‘‘ठीक है बेबे, मैं तार ला कर बदल दूंगा.’’

परमजीत कौर उसे पैसे देने लगीं तो उस ने कहा, ‘‘बेबे,जब तार ला कर बदल दूंगा तब पैसे देना. अभी मैं पैसे नहीं लूंगा.’’ राजवीर परमजीत कौर से बातें करते हुए कनखियों से संदीप कौर को भी ताक रहा था.

राजवीर संदीप कौर को आज पहली बार इस तरह नहीं ताक रहा था. इस के पहले दोनों गांव के एक समारोह में मिले थे, तभी से दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे थे.

राजवीर को देखते ही 17 साल की संदीप कौर के दिल की धड़कनें बढ़ जाती थीं. राजवीर भी अकसर सुबहशाम स्कूल आतेजाते उसे देखता रहता था पर सहेलियों के साथ होने की वजह से वह संदीप से बात नहीं कर पाता था. बिजली खराब होने की वजह से उस दिन वह संदीप कौर के इतना करीब आया था.

राजवीर संदीप कौर के घर कभी बिजली ठीक करने के बहाने तो कभी किसी और बहाने आनेजाने लगा. गांव का होने की वजह से परमजीत कौर ने न कभी बुरा माना और न संदेह किया. क्योंकि राजवीर उम्र में संदीप कौर से बड़ा था. इसी तरह आनेजाने में राजवीर और संदीपकौर के बीच न केवल प्यार का इजहार हो गया, बल्कि एकदूसरे की बांहों में समा कर दोनों अपनी सीमाएं भी लांघ गए, इस का अहसास होने पर जब संदीप कौर उदास हुई तो राजवीर ने उसे आश्वासन देते हुए कहा, ‘‘इस में परेशान होने की क्या बात है, आखिर हम दोनों को शादी तो करनी ही है.’’

संदीप और राजवीर अकसर चोरीछिपे मिलने लगे थे. धीरेधीरे 2 साल का समय बीत गया. इस बीच संदीप कौर ने राजवीर से कई बार कहा कि वह उस से शादी कर ले. इस पर राजवीर उसे समझाते हुए कहता, ‘‘संदीप, शादी कोई बच्चों का खेल नहीं. शादी के बाद जिंदगी गुजारने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. पहले उस लायक हो जाने दो, उस के बाद शादी कर लेंगे.’’

राजवीर की बातें सुन कर संदीप कौर मन मसोस कर रह जाती. लेकिन अब उस की रातें राजवीर के बिना मुश्किल से कटती थीं, इसलिए वह लगातार उस पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी थी. इधर कुछ दिनों से शादी की बात को ले कर राजवीर से उस का झगड़ा भी होने लगा था. क्योंकि राजवीर शादी के लिए बहाने बना रहा था. अंत में संदीप कौर ने उसे धमकी दे दी कि अगर उस ने 2 दिनों में शादी नहीं की तो वह उसे गांव वालों के सामने बदनाम कर के जहर खा लेगी.

संदीप कौर की इस धमकी से राजवीर बुरी तरह डर गया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह संदीप कौर को किस तरह समझाए. 22 दिसंबर, 2016 की सुबह रोज की तरह संदीप कौर स्कूल जाने के लिए घर से निकली जरूर, लेकिन लौट कर नहीं आई.

संदीप कौर लौट कर नहीं आई तो उस की मां को चिंता हुई. जालंधर के थाना लांबड़ा का एक गांव है कोहाला. तरसेम सिंह इसी गांव के रहने वाले थे. उन के पास कुछ जमीन थी, उसी की पैदावार से घर का खर्च चलता था. लेकिन इस से वह संतुष्ट नहीं थे. उन के गांव के तमाम लोग विदेशों में रहते थे, इसलिए उन की देखादेखी तरसेम सिंह भी 3 साल पहले सऊदी अरब चले गए थे.

पति के विदेश जाने के बाद परमजीत कौर ने परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली थी. उन के परिवार में एक बेटी संदीप कौर और बेटा रमन था. संदीप कौर आठोला के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं में पढ़ रही थी.

वह सुबह स्कूल जाती थी और शाम साढ़े 4 बजे तक घर लौट आती थी, पर 22 दिसंबर, 2016 को वह शाम 6 बजे तक घर नहीं लौटी तो परमजीत कौर को चिंता हुई. उन्होंने संदीप कौर की सहेलियों के घर जा कर पूछा तो पता चला कि उस दिन तो वह स्कूल गई ही नहीं थी. यह सुन कर परमजीत कौर के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

बेटी के लापता होने से परमजीत कौर रोने लगीं. गांव वालों ने उन्हें सांत्वना दी और सभी मिल कर संदीप कौर को रात भर ढूंढते रहे. अगले दिन स्कूल जा कर भी पता किया, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला. परमजीत कौर ने सऊदी अरब फोन कर के पति को भी बेटी के लापता होने के बारे में बता दिया.

जवान लड़की का मामला था, इसलिए सभी घबरा रहे थे. 3 दिनों तक तलाश करने के बाद जब संदीप कौर की कहीं कोई खबर नहीं मिली तो गांव वालों के कहने पर संदीप कौर की गुमशुदगी थाना लांबड़ा में दर्ज करा दी गई.

थानाप्रभारी सुखपाल सिंह को पूछताछ में पता चला कि 22 दिसंबर को संदीप कौर किसी युवक के साथ थी. युवक के बारे में पता करने के लिए थानाप्रभारी ने संदीप कौर की सहेलियों से पूछताछ की, पर कुछ पता नहीं चला. हां, इतनी जानकारी जरूर मिली कि उस का किसी युवक से चक्कर था. लेकिन युवक के बारे में किसी को पता नहीं था.

युवक के बारे में पता करने के लिए सुखपाल सिंह ने मुखबिरों को लगा दिया. इस बीच संदीप कौर को गायब हुए 8 दिन बीत गए थे. संदीप कौर के पिता तरसेम सिंह भी सऊदी अरब से आ गए थे. आखिर पुलिस की मेहनत रंग लाई और किसी मुखबिर से पता चला कि संदीप कौर के गायब होने में गांव के ही राजवीर सिंह का हाथ है.

संदेह के आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए राजवीर को थाने बुला लिया. उस से संदीप के बारे में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने संदीप कौर के गायब होने का रहस्य उजागर करते हुए जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर सभी हैरान रह गए. उस ने बताया कि संदीप कौर की हत्या कर के उस की लाश को उस ने जमीन में गाड़ दिया है.

3 जनवरी, 2017 को राजवीर को अदालत में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया. रिमांड के दौरान राजवीर सिंह उर्फ राजा की निशानदेही पर पुलिस ने एसडीएम, ग्राम सरपंच और अन्य लोगों की उपस्थिति में गांव कोहाला के बाहर एक खेत से संदीप कौर की लाश बरामद कर ली. लाश काफी हद तक सड़ चुकी थी.

सुखपाल सिंह ने संदीप कौर के घर वालों से लाश की शिनाख्त करवाने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और गुमशुदगी की जगह हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया. राजवीर के बताए अनुसार उसे संदीप कौर की मौत का बहुत दुख था क्योंकि वह उसे सचमुच बहुत प्यार करता था. लेकिन उस ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी कि न चाहते हुए भी उसे उस की हत्या करनी पड़ी.

जिस दिन संदीप कौर ने उसे बदनाम करने और खुद जहर खाने की धमकी दी थी, उस दिन वह काफी डर गया था और रात भर सो नहीं सका. अगले दिन भी वह काफी घबराया हुआ था. वह गांव के बाहर खेतों में घूमता रहा और सोचता रहा कि इस मुसीबत से कैसे छुटकारा पाए, क्योंकि वह संदीप कौर को हर तरह से समझा कर थक चुका था. वह शादी की अपनी जिद पर अड़ी थी. शायद वह चाहती थी कि सऊदी अरब से पिता के आने से पहले शादी कर हो जाए.

राजवीर ने एक बार फिर संदीप कौर को समझाया कि वह कुछ दिनों रुक जाए लेकिन संदीप कौर रुकने को तैयार नहीं थी. जब वह किसी तरह नहीं मानी तो राजवीर ने उसे गांव से बाहर जाने वाली सड़क पर मिलने को कहा. उस ने कहा कि दोनों घर से भाग कर शादी करेंगे.

अगले दिन 22 दिसंबर, 2016 की सुबह संदीप कौर स्कूल जाने के लिए घर से निकली और राजवीर के पास पहुंच गई. दिन भर राजवीर उसे लांबड़ा में घुमाता रहा. शाम को वह उसे गांव के बाहर एक सुनसान खेत, जिसे उस ने एक दिन पहले देख रखा था, में ले आया. कुछ देर प्यारमोहब्बत की बातें करने के बाद उस ने एक बार फिर संदीप कौर को समझाने की कोशिश की पर वह अपनी जिद पर अड़ी रही.

इस के बाद राजवीर ने इधरउधर देखा. दूरदूर तक उसे कोई नहीं दिखाई दिया तो संदीप कौर के गले में बांहें डाल कर वह जोरों से दबाने लगा. अचानक हुए इस हमले से संदीप कौर की आंखें हैरानी से फटी रह गईं. वह कुछ कर पाती, उस के पहले ही दबाव बढ़ने से कुछ देर तड़प कर उस की मौत हो गई.

कहीं वह जिंदा न रह जाए, यह सोच कर उस ने वहां पड़ी ईंट उठा कर संदीप कौर के सिर पर कई वार किए. जब उसे विश्वास हो गया कि अब वह मर चुकी है तो उसे बाहों में ले कर वह कुछ देर रोता रहा और कहता रहा कि काश उस ने उस की बात मान ली होती.

संदीप कौर की लाश ठिकाने लगाने के लिए राजवीर ने रात में ही खेत में फावड़े से एक गहरा गड्ढा खोदा और लाश को उसी गड्ढे में दबा दिया. फावड़ा वह पहले से खेत में रख आया था. पुलिस ने वह फावड़ा भी बरामद कर लिया था. सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने राजवीर सिंह को फिर से 5 जनवरी, 2017 को अदालत में पेश किया, जहां से जिला जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

नौकरी खो जाने के डर से कर रहे हैं ये काम तो..

यदि आपको कभी लगता है कि आपकी कंपनी आपको नौकरी से निकाल सकती है तो ऐसा मत मानिये कि किसी प्रकार का नौकरी लॉस इंश्योरेंस आपको नई नौकरी पाने के दरमियान कुछ महीनों तक सहारा देता रहेगा.

इस बात के आसार भी हो सकते हैं कि आप इसकी पात्रता भी ना रखते हों. टेक्नोलॉजी सेक्टर में छंटनी का दौर चल रहा है. ऐसे में कर्मचारी ऐसे किसी विकल्प की तलाश में हैं जिससे उन्हें नौकरी खोने का भी बीमा मिल सके. आइये इसके बारे में कुछ और बातें जानते हैं…

– स्टैंड अलोन जॉब लॉस कवर उपलब्ध नहीं हैं. किसी भी प्रकार की बीमा कंपनी ऐसी पॉलिसी नहीं चलाती है. अन्य पॉलिसियां जो एक्सीडेंट और गंभीर बीमारी को कवर करती हैं, उसमें यह उपलब्ध है.

– यह केवल उन तीन सबसे बड़ी ईएमआई के लिए हैं जो कि अपनी आय का पचास प्रतिशत किश्त में चुकाते हैं.

– एक से तीन महीने का समय वेटिंग पीरीयड में आता है, इसका क्लेम केवल उसी समयावधि के लिए किया जा सकता है.

– छंटनी के मामले में पॉलिसी तभी लागू होती है जब नियोक्ता विलय या अधिग्रहण के चलते आपकी छंटनी कर दे. इसके लिए आपको छंटनी का लिखित प्रमाण चाहिये. बिना प्रमाण के लिए यह क्लेम मान्य नहीं होगा.

– कई पॉलिसियां ऐसी होती हैं जो कि इस तरह के क्लेम को मान्य नहीं करती. इसके अलावा विभिन्नी बीमा में छंटनी को एक सूची के जरिये देखा जाता है.

– यदि नौकरी के रिस्क को लेकर कोई क्लेम पेश किया जाता है तो इसमें बहुत सारी शर्तें देखना होंगी.

– नौकरी के लॉस कवर का सीमित क्षेत्र देखते हुए इसका कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है.

– छंटनी का प्रमाण रखना बेहद जरूरी है क्योंकि वही चीज आपके काम आएगी यदि आपको क्लेम करने की पात्रता है.

धोखा तो नहीं दे रहा जासूस

अमित को संदेह था कि उन की पत्नी का किसी से संबंध है. उन का अपना बिजनैस था. बिजनैस की वजह से उन्हें समय नहीं मिलता था कि वह पत्नी पर नजर रखते. वह सुबह घर से निकलते थे तो देर रात को ही लौट पाते थे. इस बीच पत्नी क्या करती है, उन्हें पता नहीं चल पाता था. ऐसा नहीं था कि उन्होंने पत्नी को रंगेहाथ पकड़ने की कोशिश नहीं की थी. कई बार वह अपना काम छोड़ कर घर आ गए. पर संयोग से उस समय पत्नी घर में अकेली मिली.

अमित को लगा कि वह पत्नी को उस के प्रेमी के साथ रंगेहाथ नहीं पकड़ सकते तो असलियत जानने के लिए वह एक प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनी जा पहुंचे. कंपनी ने अमित की पत्नी की असलियत का पता लगाने के लिए जासूस लगा दिया. जासूस ने जल्दी ही अमित की पत्नी के खिलाफ सारे सबूत जुटा लिए. लेकिन वे सबूत अमित को देने के बजाय वह सबूत ले कर अमित की पत्नी के पास पहुंच गया. उस ने उसे बता दिया कि उस का पति उस की जासूसी करवा रहा है.

जासूस ने उसे वे सबूत भी दिखा दिए, जो उस ने अमित के कहने पर जुटाए थे. अमित की पत्नी के एक युवक से संबंध थे. अगर इस बात के सबूत अमित को मिल जाते तो वह उसे छोड़ सकता था. इसलिए उस ने जासूस से पैसे ले कर मामला रफादफा करने को कहा. जासूस का इस में फायदा ही था, इसलिए वह तैयार हो गया.

उस ने एक बार ही नहीं, कई बार उन सबूतों को छिपाने के लिए अमित की पत्नी से रुपए लिए. वह शायद इसी तरह उस से पैसे ऐंठता रहता, लेकिन अमित को उस जासूस पर शक हो गया. तब उन्होंने दूसरी डिटेक्टिव कंपनी से संपर्क कर पत्नी ही नहीं, उस जासूस के खिलाफ भी सबूत जुटा लिए. देखा जाए तो वह प्राइवेट जासूस एक तरह से अमित की पत्नी को ब्लैकमेल कर रहा था. उन्होंने तुरंत उस जासूस के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया.

प्राइवेट जासूसों द्वारा इस तरह के फर्जीवाड़े या ठगी का यह पहला मामला नहीं था. आजकल डिटेक्टिव कंपनियां कुकुरमुत्तों की तरह खुल गई हैं, जिन में काम करने वालों ने मिशन के रूप में काम करने के बजाय गलत तरीके से कमाई का जरिया बना लिया है.

कुछ लोग तो पैसे ले कर बिना उस मामले की जानकारी जुटाए ही उलटीसीधी जानकारी दे देते हैं, जिस से संबंधों में दरार आ जाती है. रंजना का ऐसा ही मामला है.

जिस लड़के से रंजना की शादी तय हुई, उसे शक हुआ कि उस का संबंध उस के साथ काम करने वाली एक लड़की से है. इस के लिए उस ने एक नामी डिटेक्टिव कंपनी से संपर्क किया. कंपनी ने उस लड़के के बारे में पता करने के लिए 50 हजार रुपए मांगे. रंजना ने 20 हजार रुपए एडवांस दे दिए. जासूस ने लड़के के बारे में पता करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा.

सप्ताह भर बाद रंजना ने जासूस से जानकारी मांगी तो वह टालमटोल करने लगा. रंजना ने जब दबाव डाला तो उस ने कह दिया कि उस लड़के के साथ काम करने वाली अदिति से उस के संबंध हैं. साक्ष्य के तौर पर उस ने काल डिटेल्स भी दे दी, जिस के अनुसार लड़के ने अदिति के नंबर पर फोन किए थे. इस के बाद जासूस अपनी बकाया रकम मांगने लगा. रंजना को उस की बात पर विश्वास नहीं हुआ और उस ने काल डिटेल्स में जो नंबर अदिति का बताया था, उस पर फोन किया. पता चला कि वह नंबर किसी आदमी का था, जो उस लड़के को जानता ही नहीं था. असलियत पता चलने पर रंजना ने उस जासूस के खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखाई.

इन बातों से साफ पता चलता है कि आज जासूसी के नाम पर लोग किस तरह ठगे जा रहे हैं. यही नहीं, दिल्ली और मुंबई में कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिन में इन प्राइवेट जासूसों की वजह से कई दंपतियों में तलाक हो गए तो कइयों के बीच झगड़े होने लगे. दरअसल, कुछ महिलाओं या पुरुषों को शक था कि उन के पति या पत्नी का किसी से अफेयर चल रहा है. इन्होंने प्राइवेट जासूसों की मदद ली.

ऐसे मामलों में प्राइवेट जासूसों ने फरजी काल डिटेल्स तैयार कर के साबित कर दिया कि उन के चरित्र ठीक नहीं हैं. इस के चलते उन महिलाओं और पुरुषों में झगड़े शुरू हो गए. बाद में जब मामला अदालत में पहुंचा तो कुछ मामलों में पता चला कि पति और पत्नी निर्दोष हैं. लेकिन जासूसों के चक्कर में वे तलाक के लिए अदालत पहुंच गए थे. यही नहीं, कुछ के तो तलाक हो भी गए थे. मजे की बात यह थी कि इन मामलों में पति या पत्नियों ने 25 हजार से एक लाख रुपए तक प्राइवेट जासूसों पर खर्च कर दिए थे.

वैसे ज्यादातर प्राइवेट जासूसों की मदद आजकल वैवाहिक संबंधों के बारे में या फिर मैट्रीमोनियल डिसप्यूट और तलाक के मामलों में ली जाती है. इस की एक वजह यह है कि मैट्रीमोनियल कल्चर में रिश्तों की वैल्यू घटती जा रही है. यही वजह है कि प्राइवेट जासूसों के पास रिलेशनशिप से जुड़े मामले जांच के लिए ज्यादा आ रहे हैं.

लोग मैट्रीमोनियल वेबसाइट पर बायोडाटा डालते हैं. उस में ज्यादातर फर्जीवाड़ा होता है. इन साइट्स के जरिए शादी होने या रिश्ता तय करने से पहले लोग प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी की मदद लेने लगे हैं. ऐसा नहीं है कि सारी डिटेक्टिव कंपनियां या जासूस गलत काम करते हैं. अगर ऐसा होता तो ये ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाते. ज्यादातर कंपनियां या जासूस सही काम करते हैं, इसलिए प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनियों की मदद लेने से पहले क्लायंट्स को भी चाहिए कि वे कंपनी के बारे में ठीक से पता कर लें.

महानगरों में आज तमाम डिटेक्टिव एजेंसियां चल रही हैं, लेकिन भरोसा उन्हीं पर किया जा सकता है, जो एसोसिएशन औफ प्राइवेट डिटेक्टिव्स एंड इनवेस्टीगेटर्स (इंडिया) और सर्टिफाइड प्राइवेट डिटेक्टिव्स एसोसिएशन जैसे संगठनों से जुड़ी हैं. क्योंकि इन से जुड़ी कंपनियों को कुछ तय प्रक्रियाओं का पालन करना होता है. लेकिन ऐसी कंपनियों की संख्या काफी कम है.

जासूसी कंपनियों की विश्वसनीयता का पता लगाने के लिए सब से पहले यह देखना चाहिए कि कंपनी प्राइवेट लिमिटेड है या नहीं? यह पता लगाना इसलिए जरूरी है कि कंपनी को कौंफिडेंशियल मैटर सौंपा जा रहा है. सीडीआर यानी काल डिटेल्स निकलवा देने का दावा करने वाली एजेंसियों पर क्लायंट्स आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं, जबकि ऐसा दावा करने वाले सब से बड़े धोखेबाज हैं, क्योंकि प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों के पास काल डिटेल्स निकलवाने का अधिकार नहीं होता. उन के लिए यह गैरकानूनी काम है. हालांकि भरोसेमंद कंपनियां पैसे ज्यादा लेती हैं, क्योंकि उन का नेटवर्क काफी बड़ा और विश्वस्त होता है.  

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