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हर लड़की कहे कि मैं खुले में शौच नहीं जाउंगी : अक्षय कुमार

आज जहां बौलीवुड में सफल माने जाने वाले खान कलाकार वर्ष में महज एक फिल्म करने लगे हैं, वह अपनी सफलता को बरकरार नहीं रख पा रहे हैं. वहीं आज भी अक्षय कुमार हर वर्ष कम से कम तीन से चार फिल्में कर रहे हैं. उनकी फिल्में बाक्स आफिस पर सफलता के झंडे भी गाड़ रही है. अक्षय कुमार के साथ फिल्में कर चुकी कुछ हीरोइनें मानती हैं कि अक्षय कुमार का हाथ लगते ही मिट्टी भी सोना बन जाती है. ऐसे ही सफल कलाकार से जुहू स्थिति उनके घर की इमारत में ही बने आफिस में मुलाकात हुई. हम जिस कमरे मैं बैठे हुए थे, उसके सामने समुद्री लहरें आ जा रही थी. मानों वह समुद्री लहरें भी इस सफल इंसान तक पहुंचना चाहती हो. अक्षय कुमार अब महज एक कलाकार नहीं हैं बल्कि कुछ लोग तो उन्हें संदेश वाहक और समाज सेवक भी मानते हैं.

अब सफलता के साथ आपका चोली दामन का साथ हो गया है?

ऐसा कुछ नही है. यहां सिर्फ किस्मत चलती है. मुझे खुद याद है कि अतीत में मेरी कई फिल्मों को लेकर कईयों ने कहा कि यह फिल्म अच्छी नहीं है, यह नहीं चलेगी, मगर वह फिल्म सुपर डुपर हिट रही. मैंने कई फिल्मों के बारे में सुना कि क्या धांसूं फिल्म बनायी है. यह फिल्म तो बाक्स आफिस पर रिकार्ड तोड़ेगी, पर पता चलता है कि वही फिल्म बाक्स आफिस पर पूरी तरह से असफल होती है. निर्माता को तोड़कर रख देती है. मेरी राय में फिल्म की सफलता का कोई फार्मूला नहीं है. कौन सी फिल्म कैसे सफल होती है, कोई नहीं जानता. यह बात मैंने अपने अनुभव से सीखा. जहां तक मेरे हाथ डालने से फिल्म के हिट होने या मिट्टी के सोने बनने की बात है, तो मैं ऐसा नहीं मानता. मेरे करियर में आठ से बारह फिल्में हिट हो जाती है. फिर ऐसा दौर आया, जब एक साथ 14 फिल्में असफल हुई. फिर ऐसा दौर आता है कि फिल्में चल जाती हैं. तो बौलीवुड में कुछ भी संभव है.

आपकी एक्शन, खिलाड़ी, रोमांटिक व हास्य ईमेज बनी. इन दिनों गंभीर विषय वाली फिल्में करने की है?

पहली बात तो मेरी नई फिल्म ‘‘ट्वायलेट : एक प्रेम कथा’’ गंभीर फिल्म नहीं है, इसका मुद्दा गंभीर है. यह भी सच है कि मैं एक सोच के साथ ‘रूस्तम’, ‘एअरलिफ्ट’, ट्वायलेट : एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्में कर रहा हूं. ऐसी फिल्में करना मुझे अच्छा लगता है. दूसरी बात जब मैं इस तरह के किरदारों को असलियत में देखता हूं, इन किरदारों से मिलता हूं, तो बहुत अच्छा लगता है. मैं जब ऐसे किरदारों से मिलता हूं, तो उनकी आंखों में आंखे डालकर देखता हूं कि यह कहानी इनके साथ गुजरी है. तो मजा आता है.

फिल्म ‘ट्वायलेट : एक प्रेम कथा’ करने की वजह क्या रही?

यह फिल्म करीबन सात आठ सत्य कथाओं पर आधारित है. जब हमें बताया गया कि कुछ पत्नियों ने अपने पति का घर छोड़ दिया या अपने पति से तलाक ले लिया या अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती हैं, क्योंकि ससुराल यानी कि पति के घर में शौचालय नहीं है, तो मेरी उत्सुकता जगी. पहले तो मुझे गांव की इन औरतों का यह बहुत बड़ा कदम लगा. ऐसा कदम उठाने का साहस तो शहरी औरतें भी नहीं कर सकती. पर जब मैंने इनमें से एक दो से मिला और शोधकार्य किया, तो पाया कि घर के अंदर शौचालय न होना कितनी बड़ी समस्या है. इससे औरतों को ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसका सामना कोई भी पुरूष नहीं कर सकता.

दूसरी बात खुले में शौच जाने पर ही कितनी लड़कियों का बलात्कार हो जाता है. उनके घर में शौचालय नहीं है. मगर वाईफाई है, मोबाइल है, सेल्फी खींचते रहेंगे. तो मुझे लगा कि यह फिल्म करनी चाहिए.

यानी कि आपने इस फिल्म को करने से पहले कुछ लोगों से मुलाकात की?

जी हां! ‘ट्वायलेट..’ की जो समस्या है, उस पर करीबन नौ पुरुषों के साथ ऐसा हुआ है. पर हम सभी से नहीं मिल पाए. पर एक पति पत्नी से मिला. मैं यह चाहता हूं कि हमारे देश की हर औरत, हर बेटी विवाह करने से पहले लड़के से सवाल करे कि आपके घर में शौचालय है. हर लड़की यह कहे कि मैं खुले में शौच नहीं जाउंगी. फिर उससे पढ़ाई या उसके काम धंधे आदि के बारे में पूछे. जिस दिन से हर लड़की ने इस तरह का सवाल करना शुरू किया, उसी दिन देश में 54 प्रतिशत की बजाय 5 प्रतिशत घरों में शौचालय की कमी रह जाएगी.

क्या शौचालय समस्या महज गांवो की है?

यह समस्या महज गांवों की नहीं है. यह समस्या शहरों की भी है. शहरों में लोग रेल पटरियों पर या समुद्र के किनारे शौच करते नजर आ ही जाते हैं. देखिए, जिनकी औकात नहीं है या जिनके पास शौचालय बनाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो वह खुले में शौच कर रहे हैं, तो बात समझ में आती है. लेकिन उनका क्या किया जाए, जिनकी नीयत नहीं है. यह कहानी ऐसे लोगों के लिए है.
फिल्म की कहानी को गांव या छोटे शहर ले जाने की वजह क्या रही?
हमें कहानी गांव की मिली. यह कहानी असली घटनाक्रम पर है. पूरी फिल्म हास्य कथा है. हमने शौचालय बनाने का संदेश हास्य के माध्यम से दिया है. अंत में सिर्फ पांच मिनट फिल्म गंभीर है. अन्यथा पूरी फिल्म हास्य है.

इस तरह की फिल्म को दर्शक देखना पसंद करेगा?

इसका जवाब खुद मुझे भी नहीं पता. मैं कभी भी बाक्स आफिस की चिंता नहीं करता. मैं अपनी तरफ से अच्छा काम करने का प्रयास करता हूं. मगर यह डाक्युमेंट्री फिल्म नहीं है. यह एक मनोरंजन प्रधान प्रेम कहानी है. इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद यदि कुछ प्रतिशत लोगों ने भी अपने घर में ट्वायलेट बनवा लिए, तो वही मेरी सफलता होगी. मैं चाहता हूं कि लोगों का माइंड सेट बदले, सोच बदले, नीयत बदले. मुझे उम्मीद है कि हमारे देश की युवा पीढ़ी जरुर शौचालय की जरुरत को समझेगी.

आप खुद फिल्म निर्माण भी कर रहे हैं और आपकी फिल्में सफलता भी पा रही हैं. यह कैसे संभव हो पा रहा है?

पहली बात तो फिल्म की सफलता का कोई फार्मूला नहीं है. पर मैंने अपने मित्र से लाभ व हानी के बीच सामंजस्य बैठाना और काम करने का तरीका सीखा है. मैं कहानी पसंद आने के बाद एक प्रोडक्शन कंपनी से बात करता हूं कि वह इस कहानी पर कितनी लागत से फिल्म बना सकता हैं. फिर उसे उससे थोड़ी सी ज्यादा रकम देकर कहता हूं कि वह एक तय समय पर अच्छी फिल्म बनाए. यदि फिल्म के निर्माण में देरी हुई, तो उसकी रकम कम होती जाएगी. इसलिए मेरे आफिस में महज पांच छह लोग ही काम करते हैं. मैं वर्ष में सिर्फ 180 दिन काम करता हूं. पूरे एक माह के लिए परिवार के साथ छुट्टी मनाने चला जाता हूं. शनिवार व रविवार को काम नहीं करता.

किस फिल्म के किरदार ने आपकी निजी जिंदगी पर असर पड़ा?

पिछले कुछ वर्षों से मैं जितनी फिल्में की हैं, यह सभी फिल्में कुछ न कुछ असर मुझ पर डालकर गयी है. इतना ही नहीं फिल्म ‘खिलाड़ी’ भी कुछ तो छोड़कर गयी थी. ‘ट्वायलेट : एक प्रेम कथा’, ‘रूस्तम’ और ‘एअरलिफ्ट’ ने भी असर किया.
इसके बाद कौन सी फिल्में आएंगी?
पैडमैन और गोल्ड. इसके अलावा रजनीकांत के साथ साइंस फिक्शन फिल्म ‘‘रोबोट 2.0’’ की है.

अब मेधा के आंदोलन ने किया शिवराज सिंह चौहान की नाक में दम

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक परेशानी या झंझट से मुक्त होकर चैन की सांस और नींद भी नहीं ले पाते कि तुरंत दूसरी आफत आ खड़ी होती है. उनकी नई परेशानी का नाम मेधा पाटकर जो किसी पहचान का मोहताज नहीं जिनके मोहताज अब शिवराज सिंह होते नजर आ रहे हैं. नर्मदा बचाओ आंदोलन की मुखिया मशहूर समाज सेविका मेधा पाटकर निमाड अंचल के बड़बानी जिले के गांव चिखल्दा में अब से 12 दिन पहले आमरण अनशन पर बैठी थीं पर लगातार गिरते सेहत से वे अब बैठ भी नहीं पा रहीं थीं इसलिए लगभग अचेतावस्था में जमीन पर दरी बिछाकर लेटी रहीं. उन्हें ऐसी ही हालत में पुलिस गिरफ्तार कर ले गई.

मुख्य मुद्दा विस्थापितों के पुनर्वास का है जिसे सरकार बेहद हल्के में लेकर टरकाने की नाकाम कोशिश कर रही है. मेधा के साथ अनशन पर नर्मदा बचाओ आंदोलन के 11 और कार्यकर्ताओं के अलावा सैकड़ों ग्रामीण सरकार की तरफ से किसी अच्छी खबर की आस लिए बैठे हैं. जिद्दी मेधा अब कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं तो नर्मदा घाटी के हालात भी विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं. लड़ाई आंकड़ो के अलावा सरकार की मनमानी की भी है.

नर्मदा विवाद किसी गोरखधंधे से कम नहीं, नर्मदा किनारे सरदार सरोवर बांध साल 2006 में बनकर तैयार हुआ था जिसकी ऊंचाई तब 125.92 मीटर थी. इस बांध के बनने से कोई 3 लाख 20 हजार लोग बेघर और विस्थापित हो गए थे इनमें से 95 फीसदी आदिवासी समुदाय के थे. सरदार सरोवर बांध का उदघाटन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसंबर 2006 में किया था. मेधा पाटकर और दूसरे कई समाजसेवी और बाबा आमटे सरीखे पर्यावरणविद इस बांध का विरोध करते रहे हैं. यह लड़ाई असाधारण इस लिहाज से रही कि आंदोलनकारियों के अदालत में जाने से एक वक्त में वर्ल्ड बेंक ने भी इस से हाथ खींच लिए थे.

मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन विवाद नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद और बढ़ा जिन्होंने इस मानव भक्षी बांध की ऊंचाई 17 मीटर और बढ़ाए जाने की इजाजत दे दी. पहले ही लाखों लोग बेघर होकर दर दर की ठोकरें खा रहे थे पर अपने गृह प्रदेश को फायदा पहुंचाने की गरज से नरेंद्र मोदी ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की अनदेखी की तो मेधा पाटकर फिर उग्र हो उठीं और अनशन की चेतावनी भी उन्होंने दी जिस पर पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों की तरह भाजपा सरकारों ने भी कभी तटस्थ तो कभी दमन कारी रवैया अपनाया.

इस बार मेधा के अनशन पर बैठते ही प्रशासन ने बड़ी मासूमियत से गिनाया और बताया कि अब सिर्फ 1700 परिवारों का ही पुनर्वास होना बाकी है जबकि मेधा पाटकर के दावे के मुताबिक प्रभवितों की संख्या अभी भी हजारों में है. एनबीए यानि नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार सरकार लगातार झूठ बोलकर गुमराह करती रही है. इसके पहले के पुनर्वासों में जमकर हुई धांधली, भ्रष्टाचार और दलाली किसी सबूत के मोहताज नहीं लेकिन ताजा संकट मेधा पाटकर के बिगड़ती सेहत और बढ़ते समर्थन का था. एक ट्वीट के जरिये शिवराज सिंह ने मेधा से अनशन खत्म करने की अपील की थी पर इस बार आर पार की लड़ाई के मूड में आ गई मेधा ने उन्हें झिड़क दिया था. इस पर सियासत का नया टोटका अपनाते शिवराज सिंह ने एक नामी संत भय्यू जी महाराज को मध्यस्थता की जिम्मेदारी सौंपते हुए एक सरकारी प्रतिनिधि मण्डल उनके साथ मेधा पाटकर को मनाने भेजा.

विस्थापन और पुनर्वास की समस्या एक हद तक राजनैतिक भी है और सामाजिक भी है जिसका हल धार्मिक तौर पर निकालने की शिवराज सिंह की कोशिश भी काम नहीं आई उल्टे आंदोलनकारियों सहित ग्रामीण और गुस्से से भर उठे तो शिवराज सिंह को नहीं सूझा कि अब क्या करें. मेधा की गिरफ्तारी उन्हें सहूलियत भरा रास्ता लगा पर यह हल नहीं है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी जज्बाती होकर मेधा को घेरने की कोशिश की थी परंतु बात बनी नहीं. अब सरकार की चिंता विस्थापित कम मेधा का बिगड़ता स्वास्थ ज्यादा था जो किसी भी तरह की चिकित्सीय सहायता नहीं ले रहीं थी इस पर आखिर सरकार ने वही किया जो आमतौर पर ऐसे हालातों में किया जाता है.

7 अगस्त को भारी पुलिस बल तैनात कर मेधा पाटकर को धरना स्थल से जबरन हटा दिया गया. इस पर गुस्साये आंदोलनकारियों ने एतराज जताया तो पुलिस ने उन पर डंडे भी बरसाए. अब एनबीए के कार्यकर्ता आगे की रणनीति बना रहे हैं लेकिन सरकार का दमनकारी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है जो ऐसे आंदोलनो का मर्म न समझते उन्हें लाठी से दबाने की गलती कर उन्हें और हिंसक बनाने उकसाती है. मुख्य मंत्री शिवराज सिंह खुद चिखल्दा जाकर मेधा पाटकर से बात करते तो शायद कोई रास्ता निकलता लेकिन नर्मदा प्रेमी शिवराज सिंह ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है तो इसके नतीजे उनके और भाजपा के हक में तो कतई निकलने बाले नहीं.

क्रिकेट के ये 10 अनोखे रिकार्ड हैं भारतीय खिलाड़ियों के नाम

आज क्रिकेट की लोकप्रियता से हर कोई वाकिफ है. दुनिया में जो स्थान क्रिकेट को प्रापत है वह किसी और खेल को नहीं मिला है. और बात अगर अपने देश भारत की हो तो क्या कहने. भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं धर्म है. यहां क्रिकेट की पूजा की जाती है.

अनिश्चिताओं से भरे इस खेल क्रिकेट में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता. कोई हारी हुई बाजी जीत जाता है तो कोई जीती हुई बाजी हार. यह एक ऐसा खेल है जिसमें आए दिन रिकार्ड बनते हैं और टूटते हैं.

बात रिकार्ड की हो और भारतीय खिलाड़ी का नाम ना आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता. भारत ने क्रिकेट को कई ऐसे दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ढ़ेरों रिकार्ड्स बनाए हैं. ये रिकार्ड्स ऐसे हैं कि इन्हें भूल पाना नामुमकिन है. आईए नजर डालते हैं भारतीय खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए कुछ ऐसे ही रिकार्ड्स पर.

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक

बात जब क्रिकेट के रिकार्ड्स की हो और सचिन तेंदुलकर का उसमें नाम न आए, ये शायद मुम्किन नहीं. जब भी हम क्रिकेट के रिकार्ड्स की बात करेंगे उसमें सचिन के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतकों का ज्रिक जरूर होगा. इसके अलावा सचिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं. इतना ही नहीं 200 टेस्ट मैच खेलने वाले वो एकलौते खिलाड़ी हैं.

कप्तान के तौर पर धोनी का आईसीसी खिताब जीतना

महेंद्र सिंह धोनी का नाम क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में शुमार किया जाता है. वह धोनी ही हैं जिनकी कप्तानी में भारत ने आईसीसी की सभी प्रमुख ट्राफियों पर अपना कब्जा जमाया. फिर बात चाहे 2007 टी-20 विश्व कप की हो, 2011 विश्व कप या फिर 2013 चैंपियंस ट्राफी की. ऐसा करने वाले दुनिया के एकलौते कप्तान हैं धोनी.

एक पारी में 10 विकेट लेने का रिकार्ड

भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने टेस्ट क्रिकेट में एक पारी के पूरे के पूरे 10 विकेट लेने का रिकार्ड अपने नाम किया हुआ है. उन्होंने ये कारनामा 7 फरवरी 1999 को पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में किया था. उस मैच में पाकिस्तान की दूसरी पारी के 10 विकेट चटकाकर कुंबले ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा लिया. इससे पहले एक पारी में 10 विकेट झटकने का रिकार्ड सिर्फ जिम लेकर के नाम था.

लगातार सबसे ज्यादा मेडन ओवर फेंकने का रिकार्ड

भारत के बाएं हाथ के स्पिनर बापू नादकर्णी को क्रिकेट इतिहास के सबसे कंजूस गेंदबाजों में गिना जाता है. नादकर्णी ने इंग्लैंड के खिलाफ 1963 में लगातार 21 मेडन ओवर डाले थे. उन्होंने अपने इस स्पेल में लगातार 131 डाट बाल फेंकी थी. उन्होंने 32 ओवर में 27 मेडन सहित सिर्फ 5 रन खर्च किए थे.

वनडे क्रिकेट में दो दोहरा शतक

एकदिवसीय क्रिकेट में जहां कई दिग्गज बल्लेबाजों के नाम एक भी दोहरा शतक नहीं होता वहीं भारत के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा दुनिया के ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने वनडे में दो दोहरे शतक लगाए हैं. इनका नाम सबसे पहले दो डबल सेंचुरी लगाने का रिकार्ड है. उन्होंने अपना पहला दोहरा शतक साल 2013 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलुरू के मैदान पर जड़ा था जबकि उनके बल्ले से दूसरा दोहरा शतक साल 2014 में श्रीलंका टीम के खिलाफ कोलकाता के ईडेन गार्डन्स के मैदान पर निकला. उस मैच में उन्होंने 264 रनों की विशाल पारी खेली थी जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा वनडे क्रिकेट का सर्वाधिक स्कोर भी है.

फास्टेस्ट फिफ्टी का रिकार्ड

2007 टी-20 विश्व कप के एक ओवर में युवराज सिंह द्वारा जड़ा गया एक ओवर में 6 छक्का किस क्रिकेट फैन के जहन में नहीं होगा. इस मैच में युवराज ने टी20 क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक बनाया था. युवराज ने मात्र 12 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया था जो अंतर्राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में आज भी सबसे तेज अर्धशतक है.

पदार्पण खिलाड़ी के रूप में अजहरूद्दीन के 3 टेस्ट में 3 शतक

टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करते हुए शतक जड़ना किसी भी बल्लेबाज के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है. मगर अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में शतक लगाने की कल्पना तो शायद बल्लेबाज सपने में भी नहीं कर सकता. लेकिन भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन ने ये कारनामा कर दिखाया है. अजहर ने 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले तीन टेस्ट मैचों में तीन शतक लगाकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार आगाज किया था.

टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक

वीरेंद्र सहवाग भारत के पहले बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जड़ा है. उन्होंने ये कारनामा एक बार नहीं बल्कि दो बार किया है. लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरे शतक की. इस मामले में इस विस्फोटक बल्लेबाज का नाम सबसे ऊपर आता है. सहवाग के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज तिहरा शतक बनाने का रिकार्ड दर्ज है. साल 2008 में सहवाग ने चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केवल 278 गेंदों पर तिहरा शतक लगाकर टेस्ट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक बनाया था.

रहाणे द्वारा एक टेस्ट में सबसे ज्यादा कैच लपकने का रिकार्ड

किसी एक टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा कैच लपकने का रिकार्ड भारत के अजिंक्य रहाणे के नाम है. साल 2015 में श्रीलंका के खिलाफ गाले में हुए टेस्ट मैच में रहाणे ने कुल 8 कैच लपके थे जो कि एक विश्व रिकार्ड है.

टेस्ट क्रिकेट में द्रविड़ ने खेली है सबसे ज्यादा गेंद

भारत की दीवार के नाम से मशहूर दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा गेंद खेलने वाले बल्लेबाज हैं. अपने टेस्ट करियर के दौरान उन्होंने 164 टेस्ट मैचों में कुल 31258 गेंदें खेलीं हैं जो एक विश्व रिकार्ड है.

मैं 26 साल की हूं. शादी नहीं हुई है पर सुरक्षित यौन संबंध बनाएं हैं. मुझे मासिकस्राव समय से नहीं होता. क्या करूं.

सवाल
26 साल की अविवाहिता हूं. मेरी लंबाई 5 फुट 3 इंच है और वजन 70 किलोग्राम. 5 माह पहले मुझे मासिकस्राव नहीं हुआ था. लेकिन अगले महीने हुआ था. उस के 10 दिन बाद मैं ने सुरक्षित यौन संबंध स्थापित किए. उस महीने मुझे मासिकस्राव समय से हुआ. लेकिन अब देर से हो रहा है. इस के क्या कारण हो सकते हैं? कुछ लोगों ने बताया कि मुझे थायराइड की जांच करानी चाहिए. कृपया बताएं क्या करूं?
जवाब
अनियमित या देरी से मासिकस्राव होने के कई कारण हैं. अगर आप यौन सक्रिय हैं, तो पहली बात यह कि आप को गर्भावस्था के बारे में निश्चित करना चाहिए. इस के अलावा पैल्विक अल्ट्रासाउंड जांच होनी चाहिए ताकि अंडाशय में सिस्ट या पौलिसिस्टिक ओवरीज की जांच हो सके. ये मासिकस्राव में देरी के कारण हो सकते हैं. अधिक वजन का भी मासिकस्राव पर प्रभाव पड़ता है. आप की लंबाई के हिसाब से आप का वजन 60 किलोग्राम होना चाहिए. आप को अपने आहार नियंत्रण एवं जीवनशैली में परिवर्तन के जरीए वजन कम करना चाहिए. इस से आप के मासिकस्राव के नियमित होने में मदद मिलेगी.

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

जानिए कहां छुपा है आपके एंड्रायड डिवाइस में वाईफाई का पासवर्ड

पिछले कुछ सालों से, स्मार्टफोन यूजर्स इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं. इसके साथ ही टेलिकौम कंपनियां भी सस्ते इंटरनेट के नाम पर फ्री इंटरनेट के औफर्स देने लगी हैं.

इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए लोगों के लिए पब्लिक वाई-फाई उपलब्ध कराया गया है. ऐसे में अगर आप कहीं किसी पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं जिसका पासवर्ड आपके स्मार्टफोन में एक बार डालने पर सेव हो जाता है, लेकिन आप देख नहीं पाते हैं, तो आज हम आपको वाई-फाई नेटवर्क के पासवर्ड को जानने का तरीका बताने जा रहे हैं.

यहां शुरू करने से पहले आपको बता दें कि यह प्रोसेस सिर्फ एंड्रायड डिवाइस पर काम करता है. इसके अलावा, आप एडमिन का एक्सेस बिना प्राप्त किए वाई-फाई का पासवर्ड नहीं प्राप्त कर सकते क्योंकि यह जानकारी डिवाइस के सिस्टम फोल्डर में स्टोर होता है.

1. सबसे पहले आपको गूगल प्ले स्टोर से वाईफाई पासवर्ड व्यूअर (रूट) इंस्टौल करना होगा.

2. एक बार एप इंस्टौल होने के बाद, आपको उन सभी चीजों की अनुमति दे दें जो एप आपसे मांग रहा है. इससे एप उस सेव फाइल को पढ़ सकेगा, जहां आपके वाई-फाई पासवर्ड स्टोर हैं.

3. आपकी ओर से परमिशन दिये जाने के बाद, एप आपके द्वारा पहले से कनेक्ट किए गए सभी नेटवर्क के पासवर्ड की एक लिस्ट जारी करेगा.

4. अगर आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना चाहते हैं, तो लिस्ट में एक एंट्री टैप करें, जहां आप पासवर्ड की कॉपी क्लिपबोर्ड पर कौपी कर सकते हैं या किसी भी एप के जरिए इसे शेयर कर सकते हैं. साथ ही, आप एक QR कोड भी बना सकते हैं.

बिग बौस 11 में होगी भाभी जी की एंट्री!

टीवी का सबसे पौपुलर रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ एक बार फिर चर्चा में है. सितंबर में शुरू होने वाले इस शो के लिए प्रतियोगियों की खोज शुरू हो गई है. ऐसे में सूत्रों की मानें तो ‘भाभी जी घर पर हैं’ में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने वालीं शिल्पा शिंदे का नाम भी इस शो से जुड़ सकता है.

इस रिएलिटी शो के अगले सीजन के अन्य प्रतियोगी अचिंत कौर, नंदिश सिंधू, रिया सेन, नवप्रीत बंगा, अभिषेक मलिक, मिश्ती चक्रवर्ती, मोहित मल्होत्रा, नवनीत कौर ढिल्लन, और जोया अफरोज हो सकते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिल्पा शिंदे ने एंड टीवी के मशहूर शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ के किरदार अंगूरी भाभी से घर-घर में अपनी एक खास पहचान बनाई थी, लेकिन शो के प्रोड्यूसर से विवाद होने के चलते पिछले साल शो को अलविदा कह दिया था.

हाल ही में शिल्पा शिंदे तब सुर्खियों में आ गईं जब उन्होंने शो के मेकर्स मानसिक तौर पर परेशान किए जाने का आरोप लगाया था. जिसके बाद शिल्पा ने शो के प्रोड्यूसर समेत सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन पर भी मानहानि का मुकदमा ठोक दिया था. साथ ही उन्होंने सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन पर छोटे पर्दे के कलाकारों के हक में आवाज नहीं उठाने का आरोप भी लगाया था.

आपको बता दें कि शिल्पा ने छोटे पर्दे पर अपने करियर की शुरुआत साल 1999 में की थी. अब देखना यह है कि क्या रिऐलिटी शो ‘बिग बौस’ के घर आकर भी शिल्पा अपना जलवा बरकरार रख पाती हैं या नहीं. खैर, ये तो वक्त ही बताएगा.

दिलों का तो नहीं पता पर बौलीवुड के इन सुपरस्टार्स के घरों में है बहुत कम फासला

जरा सोचिए विद्या सुबह की कौफी लेकर शाहिद की पत्नी मीरा से बातें कर रही हैं. ट्विंकल खन्ना अक्षय कुमार को बाय कहने बाहर तक आयीं कि लिफ्ट में ऋतिक रोशन भी टकरा जायें.

अगर पुराने दौर में चलें तो अमिताभ, फिल्म चुपके-चुपके की तर्ज पर जया बच्चन को बौटनी पढ़ा रहे हों कि तभी हेमा और धर्मेंद्र उनके घर चाय पर आ जायें.

जाहिर है फिल्मी सितारों की ये कहानी भी फिल्मी और काल्पनिक ही हैं, लेकिन रियल लाइफ में इनका एक गहरा कनेक्शन फिर भी है. वो ये है कि ये बौलीवुड सितारे पड़ोसी हैं.

विद्या बालन और शाहिद कपूर

विद्या बालन और शाहिद कपूर ने अब तक केवल एक ही फिल्म में साथ काम किया है. रियल लाइफ में दोनों पड़ोसी हैं. मुंबई के जुहू इलाके में शाहिद और विद्या बालन का घर है. शाहिद जहां फर्स्ट फ्लोर पर रहते हैं, वहीं विद्या सेकेंड फ्लोर पर रहती हैं.

अक्षय, साजिद और रितिक

अक्षय कुमार जुहू में रहते हैं और उनके पड़ोसी एक और सुपरस्टार हैं और वह हैं रितिक. दोनों एक ही बिल्डिंग में अलग-अलग फ्लोर पर रहते हैं. यही नहीं, यहीं पास में ही निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी रहते हैं.

सलमान खान, शाहरुख खान, फरहान और रेखा

मुंबई के बांद्रा के बैंड स्टैंड इलाके में कई स्टार्स रहते हैं, जिनमें शाहरुख खान और फरहान अख्तर के घर की चंद कदमों की है. शाहरुख के घर मन्नत से सलमान की गैलेक्सी भी अधिक दूर नहीं हैं. मन्नत और फरहान के घर विपासना के बीच ही गुजरे जमाने की अभिनेत्री रेखा का घर बसेरा स्थित है.

विवेक ओबरौय और गोविंदा

विवेक ओबरौय और गोविंदा ने भले ही कभी साथ में काम नहीं किया हो, लेकिन दोनों के बंगले जुहू में बिल्कुल आस-पास ही स्थित हैं. विवेक के पिता सुरेश ओबेरौय ने यह बंगला खरीदा था. वही गोविंदा ने अपने परिवार के लिए यह घर खरीदा था.

रणवीर सिंह और यामी गौतम

रणवीर सिंह का यूं तो घर खार इलाके में है, लेकिन इन दिनों वह गोरेगांव में एक अपार्टमेंट में शिफ्ट हुए हैं. चूंकि उन्हें पदमावती की शूटिंग के लिए फिल्मसिटी जाने में तकलीफ हो रही थी और खबर है कि इन दिनों इस बिल्डिंग में यामी गौतम भी रह रही हैं.

खबरें ये भी हैं कि रणवीर सिंह को उस कोलोनी के बच्चे बेहद प्यार करने लगे हैं, चूंकि वह जब भी बाहर आते हैं. बच्चे भीड़ लगाते हैं और रणवीर उन्हें कई बार चौकलेट्स भी देते हैं. कई बार उनके साथ थोड़ी मस्ती भी कर लेते हैं.

हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, अनिल कपूर और जीतेंद्र

आपको ये जानकर भी हैरानी होगी, लेकिन सच यही है कि हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, अनिल कपूर और जीतेंद्र सभी जुहू इलाके में बस चंद कदमों की दूरी पर ही रहते हैं.

अमिताभ के जहां तीन बंगले हैं. वही जीतेंद्र की बिटिया एकता कपूर का कृष्णा बंगला भी वहीं स्थित है. हेमा मालिनी भी उसी इलाके में रहती हैं. सनी देओल का बंगला भी इसी इलाके में है.

जैकी श्रौफ और आमिर खान

जैकी श्राफ और आमिर खान ने फिल्म धूम 3 में साथ काम किया है. जैकी आमिर के पिता के किरदार में थे. इन दिनों आमिर कार्टर रोड में फीडा वन अपार्टमेंट में रह रहे हैं और खास बात यह है कि जैकी श्रौफ अपने बेटे टाइगर और पूरे परिवार के भी इसी अपार्टमेंट की दूसरी विंग में रहते हैं. दोनों अच्छे दोस्त हैं और एक-दूसरे की पार्टियों में शामिल होते रहते हैं.

तब्बू, श्रीदेवी और असिन

असिन की हालांकि अब शादी हो चुकी है, लेकिन जब वे मुंबई में काम कर रही थीं, उस वक्त तब्बू और श्रीदेवी उनकी पड़ोसी थीं.
वे लोखंडवाला में ग्रीन एकड़ अपार्टमेंट में रहती थीं. असिन ने खुद बताया था कि तब्बू और श्रीदेवी ने उनका बहुत ख्याल रखा था.

सिर्फ युवी ही नहीं इनके नाम भी है 6 गेंद में 6 छक्के लगाने का रिकार्ड

क्रिकेट के मैदान में आपने छक्के लगते तो बहुत देखे होंगे, लेकिन बात अगर 6 गेंदो पर लगातार 6 छक्के लगाने की हो तो आपके जहन में सबसे पहले भारत के विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह का नाम आएगा.

युवराज ने टी 20 विश्व कप में 6 छक्के लगाकर पहला विश्व कप भारत के नाम किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले युवराज पहले बल्लेबाज नहीं हैं. युवराज के अलावा दो और भारतीय बल्लेबाज ये कारनामा कर चुके हैं. आइए जानें उन भारतीय खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने 6 गेंदों पर लगातार 6 छक्के लगाए हैं.

रवि शास्त्री

भारत के मुख्य कोच रवि शास्त्री ये कारनामा करने वालों में से प्रथम स्थान पर हैं. उन्होंने 1984 में रणजी ट्राफी में बाम्बे और बरोदा के मैच में बाएं हाथ के स्पिनर तिलक राज के ओवर में यह कारनामा अपने नाम किया था. रवि शास्त्री ने इसी मैच में प्रथम श्रेणी क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक भी लगाया था.

युवराज सिंह

सिक्सर किंग के नाम से पहचाने जाने वाले भारत के विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह ने यह कारनामा 2007 के टी-20 विश्व कप में किया था. उन्होंने इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रौड की गेंदों पर मैदान के चारों तरफ छक्के उड़ाए. इसके साथ-साथ उन्होंने भारतीय टीम का भी नाम रोशन कर दिया. ऐसा करने वाल युवराज सिंह चौथे बल्लेबाज और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के दूसरे बल्लेबाज बने.

सागर मिश्रा

भारत के प्रथम श्रेणी जिसे घरेलू क्रिकेट भी कहा जाता है सागर ने उसमें यह कगरनामा किया है. आपको बता दें सागर ने यह कारनामा टाइम्स शील्ड बी डिवीजन के एक मैच में किया है. इस मैच में सागर ने 46 गेंदों पर 96 रन बनाए है.

हाल ही में समपन्न हुए भारत-श्रीलंका टेस्ट मैच में हार्दिक पांड्या ने डेब्यू किया. अपने पहले टेस्ट में 49 गेंद में 50 रन बनाकर प्रशंसा बटोरने वाले भारतीय टीम के युवा बल्लेबाज हार्दिक पांड्या युवराज के एक खास रिकार्ड की बराबरी करना चाहते हैं. पांड्या भी युवराज की तरह एक ओवर में छह छक्के लगाना चाहते हैं.

चाचा नीतीश से मुकाबले पर चले तेजस्वी

लालू यादव के लाडले तेजस्वी यादव अपने चाचा नीतीश कुमार की राह पर चल निकले हैं. नीतीश कुमार के महागठबंधन तोड़ने के बाद बिहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता बने तेजस्वी अब समूचे राज्य का दौरा करेंगे और जनता को बताएंगे कि नीतीश कुमार ने उनके ऊपर भ्रष्टाचार का गलत आरोप मढ़ कर महागठबंधन और जनादेश को लात मारी है. महागठबंधन के खलनायक नीतीश कुमार ही हैं. इसके साथ ही वह भाजपा भगाओ, देश बचाओ मुहिम से लोगों को जोड़ेंगे.

दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी ने नीतीश के खिलाफ दौरा शुरू करने के लिए नीतीश कुमार की पसंदीदा जगह चंपारण जिला को ही चुना है. गौरतलब है कि नीतीश कुामर चंपारण से ही अपने हर दौरे की शुरुआत करते रहें हैं.  तेजस्वी कहते हैं कि नीतीश कुमार भाजपा के गोद में जाने के लिए इतने उतावले थें कि उन्होंने 2015 के विधान सभा चुनाव में मिले जनादेश की भी लाज नहीं रखी. सब कुछ प्री-प्लांड था. इसलिए महात्मा गांधी की कर्म भूमि चंपारण से नीतीश और भाजपा गिरोह की पोल खोलने की शुरुआत करेंगे.

बिहार विधान सभा में बहुमत साबित करने के दिन तेजस्वी ने नीतीश कुमार के खिलाफ जम कर निशाना साधा. नीतीश ने भाजपा के साथ मिल कर भले ही बहुमत साबित कर दिया हो, पर उस दिन बिहार की राजनीति को एक आक्रामक युवा राजनेता भी मिल गया. तेजस्वी ने जब महागठबंधन तोड़ने और जनादेश के साथ धोखा करने का आरोप नीतीश पर लगाया तो नीतीश चुपचाप बैठे रहे. जब नीतीश की बोलने की बारी आयी तो उन्होंने यह कह कर तेजस्वी के तीखे सवालों से कन्नी काट ली कि वह सारे सवालों और आरोपों का जबाब समय आने पर देंगे.

राज्य के सियासी हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि महागठबंधन के टूटने से लालू यादव को भले ही सियासी नुकसान हुआ हो, पर तेजस्वी जैसा दमदार नेता मिल गया. सियासी धुरंधर पिता के साये से इतर तेजस्वी का नया रूप सामने आया है. अब लालू निश्चिंत होकर अपनी सियासी विरासत तेजस्वी को सौंप सकते हैं.

बिहार में नीतीश कुमार भी भाजपा से हाथ मिला कर लालू और उनके परिवार के पीछे पड़ गए हैं. इससे पहले भाजपा, पप्पू यादव की पार्टी जाप और जीतनराम मांझी की पार्टी हम समेत कई विरोधी दल लालू के बेटों के पीछे पड़े हुए हैं. कोई उनपर अरबों रूपए की संपति बनाने का आरोप लगा रहा है तो कोई फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंकों से बगैर ब्याज के कर्ज लेने का ठीकरा फोड़ रहा है. राजद सुप्रीमो लालू यादव विरोधियों के आरोपों पर सफाई दर सफाई दे रहे हैं, लेकिन उनके बेटों पर आरोपों की झड़ी बढ़ती ही जा रही है.

राजद सुप्रीमो लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव पिछले कुछ सालों से अपने पिता के सियासी हथकंडों को सीखने की कवायद में जी-जान से लगे हुए हैं. महागठबंधन टूटने के बाद तेजस्वी एक युवा नेता के रूप में उभर चुके हैं. तेजस्वी की खासियत यह है कि वह अपने पिता के दलितों और पिछड़ों की सियासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की तरक्की की वकालत पुरजोर तरीके से करते हैं. राष्ट्रीय जनता दल में नई जान फूंकने के साथ ही पार्टी का ज्यादातर बोझ भी अपने मजबूत कंधों पर उठा लिया है. लालू की विरासत और राजनीति को संभालने में कामयाब होते देख विरोधी दलों की बेचैनी बढ़ने लगी है और इस वजह से लालू के बेटों को परेशान करने की कोशिशों में लग गए हैं.

दलित और पिछड़ों की राजनीति कर बिहार से लेकर दिल्ली तक अपना रौब और धौंस गांठने वाले लालू यादव के बेटे आंखें मूंद कर अपने पिता के राजनीतिक फार्मूले का इस्तेमाल करने के मूड में नहीं हैं. पिता जहां दलित और पिछड़ों को आवाज देने को ही अपनी कामयाबी मानते हैं, वहीं उनके बेटे साफ कहते हैं कि पिछड़ों को तालीम दिलाने के बाद ही वाजिब तरक्की हो सकेगी. पढ़ने के बाद हर कोई अपना रास्ता खुद बना ही लेता है, उसे किसी बैसाखी की दरकार ही नहीं पड़ती है.

उन्होंने बिहार के युवा वोटरों पर अपनी नजरें गड़ा रखी थी. तेजस्वी कहते थे कि युवाओं को राजनीति और मतदान के प्रति जागरुक करने की जरूरत है, क्योंकि वह राजनीति से कटा हुआ है और वोट डालने से कतराता है. बिहार में एक करोड़ 71 लाख 9 हजार 728 युवा वोटर हैं. इनमें 18 से 19 साल के वोटरों की संख्या 19 लाख के करीब है. 20 से 29 साल के वोटरों की संख्या एक करोड़ 53 लाख के आसपास है.  युवाओं को सियासत के प्रति जागरुक करने के बाद ही सियासत का तौर-तरीका बदलेगा और सूबे की असली तरक्की हो सकेगी.

बिहार की कुल आबादी 10 करोड़ 50 लाख है और 6 करोड़ 21 लाख वोटर हैं. इनमें 27 फीसदी अति पिछड़ी जातियां, 22.5 फीसदी पिछड़ी जातियां, 17 फीसदी महादलित, 16.5 फीसदी मुसलमान, 13 फीसदी अगड़ी जातियां और 4 फीसदी अन्य जातियां हैं. सूबे में अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित 38 सीटों के अलावा 60 ऐसीर विधान सभा सीट हैं जहां दलित निर्णायक स्थिति में हैं, क्योंकि वहां उनकी आबादी 16 से 30 फीसदी है.

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव क्रिकेट खिलाड़ी बनना चाहते थे. दिल्ली अंडर-19 क्रिकेट टीम में खेलने के बाद उन्हे आईपीएल के दिल्ली डेयर डेविल्स टीम के लिए चुना गया था. क्रिकेट में कुछ खास जलवा नहीं दिखा पाने के बाद वह पिता के कंधे पर सवार होकर सियासत के अखाड़े में कूद पड़े थे और अब वह अपनी राजनीतिक जमीन बनाने की कवायद में जी-जान से लग गए हैं. तेजस्वी की कम एजुकेशन को लेकर भी विरोधी उन पर निशाना साधते रहे हैं, पर यह भी कड़वा सच है कि संसद और विधन सभाओं में कई ऐसे ऊंची-ऊंची डिग्रियां पाए नेता हैं जो सियासी तौर पर खास कामयाब नहीं हो सके हैं. राजनीतिक विचारक हेमंत राव कहते हैं कि यह सही है कि किसी भी क्षेत्र में कामयाबी के लिए बेसिक तालीम जरूरी है, लेकिन राजनीति में ऐसी सोच ज्यादातर झूठी ही साबित हुई है. राजनीति में कामयाबी के लिए सियासी समझ, जनता की नब्ज पर पकड़ और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति का होना जरूरी है.

आ रही है गेंहू की शुगर फ्री किस्म

शुगर यानि डायबिटीज की बीमारी से त्रस्त लोग कुछ सालों बाद यह कहने मजबूर हो ही जाते हैं कि डायबिटीज ठीक होने बाली बीमारी नहीं, बल्कि शुगर मेनेज करने का सलीका है. जाहिर है उनका इशारा परहेज की तरफ होता है. इस बीमारी में लोग शक्कर तो शक्कर, आलू और चावल जैसी ज्यादा कार्बोहाइट्रेट वाली चीजों से भी परहेज करने लगते हैं. लेकिन गेहूं जैसे रोजमरराई अनाज से मुंह मोड पाना उनके लिए मुमकिन नहीं हो पाता. इस बीमारी के बढ़ने पर एक मुकाम ऐसा भी आता है कि गेहूं से भी शुगर बढ़ने लगती है, इसलिए हाट बाजारों में मरीज मोटे अनाज वाला आटा ढूंढते नजर आते हैं, जिसमे कार्बोहाइट्रेट कम होता है.

डायबिटीज से पीड़ितों के लिए एक अच्छी खबर मध्यप्रदेश के खंडवा शहर से आ रही है जहां के भगवंतराव मंडलोई एग्रीकल्चर कालेज के वैज्ञानिकों ने गेहूं की शुगर फ्री किस्म ईजाद करने में कामयाबी हासिल कर ली है. इस किस्म को ए-12 नाम दिया गया है. कालेज के डीन डा पीपी शास्त्री और कृषि वैज्ञानिक सुभाष रावत की मानें तो ए-12 किस्म की अपनी खूबियां हैं, मसलन इसमें गेहूं की दूसरी किस्मों के मुकाबले रेशे और छिलके की मात्रा ज्यादा है और इसके गुण बाजरे की तरह हैं. मेथी के आकार वाली यह किस्म पचती भी जल्दी है, इसमे प्रोटीन की मात्रा भी कम है.

पिछले साल सफल परीक्षणों के बाद इसे किसानों को वितरित किया गया है, जिससे किसान प्रोत्साहित हों और ज्यादा से ज्यादा रकबे में इसे बोएं. अगर संबंधित सरकारी एजेंसियों ने इस किस्म को मान्यता दी तो तय है बाजार में भी खासी हलचल मचेगी, क्योंकि आटा बनाने वाली कई नामी कंपनियां अभी लगभग शुगर फ्री आटा अलग अलग तरीके से प्रचार कर बेच रही हैं, लेकिन ग्राहक उनसे आश्वस्त नहीं हैं. ए-12 किस्म चूंकि प्रामाणिक तौर पर शुगर फ्री होगी, इसलिए इसका आटा हाथों हाथ बिकना तय है. जिस तेजी से डायबिटीज के मरीजों की तादाद बढ़ रही है उसे देखते ऐसी किसी किस्म की जरूरत भी महसूस हो रही थी.   

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