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त्योहारों के सीजन में इन स्मार्टफोन्स पर मिल रही है बंपर छूट

त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है और इस मौके पर कई मोबाइल कंपनिया कुछ चुनिंदा मौडल पर भारी भरकम डिस्काउंट दे रही हैं. इस औफर का फायदा आप 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक चलने वाले इस फेस्ट के बीच उठा सकते हैं. इस औफर में आइफोन, सैमसंग और वन प्लस सहीत कई ब्रांडेड मोबाइल शामिल हैं.

आइफोन 6

अमेजन पर आइफोन की खरीद पर 44 फीसदी तक छूट मिल रही है. कंपनी के इस फोन की कीमत 29,500 रुपए है, जिसे औफर के बाद 26,572 रुपए में खरीदा जा सकता है. इस पर 1,263 EMI औप्शन भी दिया गया है. आईफोन 6 स्मार्टफोन में है 4.70 इंच का डिस्प्ले, 1 जीबी रैम और 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा.

लेनोवो Z2 प्लस 

लेनोवो के इस स्मार्टफोन पर कंपनी 40 प्रतिशत डिस्काउंट दे रही है. इस फोन की कीमत 19,990 रुपए है, लेकिन इसे औफर के बाद महज 11,990 रुपए में खरीदा जा सकता है. लेनोवो जेड2 प्लस स्मार्टफोन में 5.00 इंच का डिस्प्ले, 2.15 गीगाहर्ट्ज़ क्वाड-कोर प्रोसेसर, 3 जीबी रैम और 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है.

सैमसंग गैलेक्सी औन 5 प्रो

7,990 रुपए वाले सैमसंग गैलेक्सी औन 5 प्रो पर 6% का डिस्काउंट मिल रहा है. आप इसे अमेजन से 7,490 रुपए में खरीद सकते हैं.

 

वन प्लस 3टी 

इस फोन पर अमेजन 7 फीसदी की छूट दे रहा है. इस स्मार्टफोन की कीमत 29,999 रुपए है. डिस्काउंट के बाद यह 27,999 रुपए में खरीदा जा सकता है. वन प्लस 3टी स्मार्टफोन में 5.50 इंच का डिस्प्ले, 1.6 गीगाहर्ट्ज़ क्वाड-कोर प्रोसेसर, 6 जीबी रैम और 16 मेगापिक्सल का रियर कैमरा मौजूद है.

बाबूमोशाय बंदूकबाज : सेक्स से भरपूर अति घटिया पटकथा वाली फिल्म

अपराध कथा वाले टीवी सीरियल और फिल्म ‘‘गैंग्स आफ वासेपुर’’ दोनों के मिश्रण का अति घटिया संस्करण है कुशान नंदी की फिल्म ‘‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’’. यथार्थ सिनेमा और एक कांट्रैक्ट किलर की कहानी के नाम पर यह फिल्म महज प्यार, धोखा, राजनीति के कलुषित चेहरे और बदले की एक ऐसी कहानी है जो किसी को भी रास नहीं आ सकती.

फिल्म ‘‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’’ की कहानी उत्तर भारत के एक छोटे कस्बे की है. पैसे के एवज में किसी का कत्ल करना बाबू का पेशा है. बाबू (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) एक राजनेता सुमित्रा (दिव्या दत्ता) के लिए काम करता है. सुमित्रा की जबान पर सदैव गंदी गंदी गालियां रहती हैं. तो दूसरी तरफ उसे फुलवा (बिदिता बाग) से प्यार भी हो गया है. सुमित्रा से पैसे लेकर बाबू एक इंसान की हत्या कर देता है. पर फुलवा के कहने पर बाबू बिना पैसे लिए अन्य दो की हत्या कर देता है. इसके एवज में फुलवा हमेशा के लिए बाबू की हो जाती है, मगर सुमित्रा अपने खास आदमी त्रिलोकी (मुरली शर्मा) के बहकावे में आकर बाबू से संबंध खत्म कर एक दूसरे राजनेता दुबे (अनिल जार्ज) से हाथ मिला लेती है. जबकि दुबे ने बाबू से हाथ मिलाया है.

दुबे, सुमित्रा के तीन खास आदमियों, (जिसमें त्रिलोकी भी शामिल है) को मारने का कांट्रैक्ट बाबू को देता है. बाबू, सुमित्रा को दीदी कहता है, इसलिए वह सुमित्रा को बताने जाता है कि उसे त्रिलोकी की हत्या का कांट्रैक्ट मिला है. यह बात दुबे को पता चल जाती है और दुबे उसी वक्त यास्मीन (श्रृद्धा दास) से बात कर उन तीन के साथ ही बाबू की हत्या का कांट्रैक्ट दे देता है. यास्मीन यह काम अपने प्रेमी बांके बिहारी (जतिन गोस्वामी) से कराती है, जो कि बाबू को अपना गुरू कहता है. अब बाबू और जतिन आमने सामने आ जाते हैं. दोनों के बीच शर्त लगती है कि दोनों में से जो पहले इन तीन को मारेगा, वह इस पेशे में रहेगा, दूसरा इस पेशे से चला जाएगा. हारने पर बांके बिहारी, बाबू को गोली मारकर कहता है कि उसे तो चार की हत्या का कांट्रैक्ट मिला था.

आठ साल बाद जब बाबू पुनः वापस आता है, तो बदले की कहानी शुरू होती है. एक मुकाम पर यह बात उजागर होती है कि बांके बिहारी ने फुलवा से शादी कर ली है और यास्मीन को प्यार में धोखा दे रहा है. जबकि बाबू और फुलवा का एक बेटा भी है. बहरहाल, बदला लेते हुए बाबू, सुमित्रा, दुबे, पुलिस अफसर, बांके बिहारी, फुलवा सभी की हत्या कर देता है. अपने बेटे को लेकर दूसरी जगह रहने चला जाता है, पर एक दिन उसका बेटा ही बाबू को गोली मार देता है.

फिल्म की कहानी व पटकथा जिस तरह से आगे बढ़ती है, वैसे वैसे लगता है कि यह फिल्म नहीं बल्कि सीरियल है, जिसमें लगभ सभी किरदार कई बार मर कर जी उठते हैं. अस्सी के दशक में जिस तरह से खून खराबा, बदले की कहानी व सेक्स से भरपूर ‘सी ग्रेड’ फिल्में बनती थी, उसी की दिलाती है कुशान नंदी की फिल्म ‘‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’’. फिल्म ज्यों ज्यों आगे बढ़ती है, त्यों त्यों दर्शक फिल्म से खुद को अलग करता जाता है. यह फिल्म अति घटिया कहानी के साथ ही अति घटिया पटकथा की परिचायक है. फिल्मकार ने दर्शक जुटाने के लिए कहानी व पटकथा पर काम करने की बनिस्पत बेवजह का सेक्स परोसने पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दिया है. फिल्म में मनोरंजन व भावनाओं का घोर अभाव है. फिल्म किसी भी स्तर पर किसी की भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है. निर्देशक के रूप में कुशान नंदी अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाते.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो पूरी फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी अपने स्वाभाविक अभिनय के साथ छाए रहते हैं. नवाजुद्दीन सिद्दिकी के सामने जतिन गोस्वामी कहीं नहीं टिकते. दिव्या दत्ता एक अच्छी अदाकारा हैं, यह बात उन्होने पुनः साबित किया है बिदिता बाग के अभिनय की भी तारीफ करनी पड़ेगी. मगर इन कलाकारों को अपने किरदारों को निभाते समय पटकथा से कोई मदद नहीं मिली.

दो घंटे व तीन मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ का निर्माण किरण श्राफ, कुशान नंदी, अश्मित कुंडेर हैं. फिल्म के निर्देशक कुषान नंदी, लेखक गालिब असद भोपाली तथा कलाकार हैं- नवाजुद्दीन सिद्दिकी, बिदिता बाग, दिव्या दत्ता, जतिन गोस्वामी, श्रद्धा दास, मुरली शर्मा, अनिल जार्ज, भगवान तिवारी व अन्य.

स्निफ : निराश करती है अमोल गुप्ते जैसे निर्देशक की यह फिल्म

पुरस्कृत फिल्म ‘तारे जमीन पर’ के लेखक तथा ‘स्टेनली का डिब्बा’ और ‘हवा हवाई’ जैसी उत्कृष्ट फिल्मों के सर्जक अमोल गुप्ते इस बार बाल जासूस फिल्म ‘‘स्निफ’’ लेकर आए हैं, जो कि बहुत निराश करती है.

‘‘हर बच्चे में कोई न कोई काबीलियत होती है.’’ इस मूल मुद्दे के साथ बाल जासूस वाली फिल्म ‘स्निफ’ देखकर मन में एक ही सवाल उठता है कि क्या इस फिल्म के सर्जक वही अमोल गुप्ते हैं, जिन्हें फिल्म ‘‘तारे जमीन पर’’ जैसी फिल्म के लेखन के लिए कई पुरस्कार मिले थे? क्या ‘स्निफ’ के लेखक व निर्देशक वही अमोल गुप्ते हैं, जो अतीत में ‘‘स्टेनली का डिब्बा’’ और ‘‘हवा हवाई’’ जैसी फिल्म का सृजन कर चुके हैं.

फिल्म की कहानी मुंबई की एक कास्मोपोलीटीन इमारत की है, जिसमें हर प्रांत, हर भाषा के लोग रहते हैं. इसी इमारत में एक सरदार परिवार रहता है, जिनका अचार का व्यापार है. उनका बेटा सनी (खुशमीत गिल) अभी तीसरी कक्षा का छात्र है. मगर सनी की दादी (सुरेखा सीकरी) परेशान है कि सनी कुछ भी सूंघ नहीं पाता. यहां तक कि डाक्टर भी कह देते हैं कि सनी की नाक में एक ऐसी व्याधि है, जिसके चलते वह कुछ भी सूंघ नहीं सकता. पर अचानक एक दिन स्कूल की लैबोरेटरी में दो रासायनिक पदार्थों के मिश्रण से एक गैस निकलती है, जो कि सनी की नाक में चली जाती है. सनी को जोर की छींक आती है और फिर उसे अद्भुत चमत्कारिक सूंघने की शक्ति मिल जाती है. वह दो किलोमीटर दूर तक सूंघ सकता है. एक दिन इस इमारत के निवासी कुमार (राजेश पुरी) की कार चोरी हो जाती है. कार को ढूढ़ने के प्रयास में पुलिस लगी हुई है. पर  सनी अपने तरीके से प्रयास करता है. अंततः कुमार की कार वापस मिल जाती है.

बौलीवुड में फिल्म ‘‘स्निफ’’ के निर्देशक अमोल गुप्ते की गिनती श्रेष्ठ बाल फिल्मकार के रूप में होती है. मगर ‘स्निफ’ में वह बुरी तरह से विफल हुए हैं. अनूठी विषयवस्तु के बावजूद पटकथा की तमाम गड़बड़ियों के चलते फिल्म स्तर हीन हो जाती है. अफसोस की बात यह है कि बालक सनी न सुपर हीरो और न ही एक जासूस/डिटेक्टिव के रूप में उभर पाता है. इतना ही नहीं फिल्म के एक भी किरदार का सही ढंग से चित्रण ही नहीं हुआ. सभी किरदार बंगाली या महाराष्ट्यिन या सिंधी या गुजराती समुदाय के लोगों के कैरीकेचर मात्र हैं. फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो दर्शक के दिमाग में याद रह जाए. ‘स्निफ’ ऐसी फिल्म है, जिसे न देखने का अफसोस नहीं हो सकता.

इंटरवल से पहले कई खामियों के बावजूद फिल्म थोड़ी सी उत्सुकता जगाती है. दर्शक सोचता है कि इंटरवल के बाद सनी अपनी चमत्कारी सूंघने की शक्ति से कार चोर को पकड़ेगा, पर ऐसा कुछ नही होता. कार चोरी व कार वापस मिलने तक का पूरा प्लाट अति बचकाना और बोर करने वाला है. कहने का अर्थ यह कि इंटरवल के बाद फिल्म लेखक व निर्देशक के हाथ से बाहर चली जाती है. फिल्म देखते हुए लगता है कि शायद लेखक व निर्देशक ने बिना पटकथा के फिल्म फिल्मा डाली. फिल्म में मिस्टर मुखर्जी कई वर्षों से घर से बाहर क्यों नही निकले? उनकी पुलिस अफसर ने भी उनसे काम करने के लिए क्यों नहीं कहती? इसका जवाब फिल्म खत्म होने पर भी दर्शक को नहीं मिलता.

‘‘तारे जमीन पर’’ के प्रदर्शन के बाद से शिक्षा जगत में काफी बदलाव आया. मगर ‘तारे जमीन पर’ जैसी फिल्म के ही लेखक की फिल्म ‘स्निफ’ के कुछ सीन देखकर सवाल उठता है कि वह बच्चों को किस तरह का पाठ पढ़ाना चाहते हैं? फिल्म में एक सीन है, जिसमें परिवार के सभी सदस्य अचार को पहले सूंघकर और फिर अचार की शीषी के अंदर से उंगली से अचार निकालकर चखते हैं कि अचार अच्छा बना है या नहीं. इस सीन से एक बालक कौन सी तमीज सीखेगा? कौन सी अच्छी सीख लेगा? क्या अचार को चखने के लिए चम्मच का उपयोग करना वर्जित है? इसी तरह फिल्म में एक बंगाली परिवार के अंदर का सीन है. हमेशा घर में रहने वाले और शुगर के मरीज मिस्टर मुखर्जी के चोरी से मिठाई खाने पर उनकी पत्नी व पुलिस अफसर मिसेस मुखर्जी (सुष्मिता मुखर्जी) अपने पति के गाल पर बिना गिने धड़ाधड़ थप्पड़ लगाती हैं. आखिर इस सीन से फिल्मकार बच्चों को क्या सीख देना चाहते हैं? दूसरी बात इस सीन का फिल्म के मूल कथानक से कोई संबंध नजर नहीं आता.

फिल्म का गीत संगीत भी साधारण है. फिल्म में गणपति आरती जबरन ठूंसी हुई लगती है. जहां तक अभिनय का सवाल है, तो बाल कलाकार खुशमीत गिल ने कुछ दृश्यों में काफी अच्छा अभिनय किया है. इसके अलावा इस फिल्म में किसी भी कलाकार ने ऐसा अभिनय नहीं किया है, जो कि याद रहे.

डेढ़ घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘‘स्निफ’’ का निर्माण ‘त्रिनिटी पिक्चर्स’ के साथ मिलकर अमोल गुप्ते ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक अमोल गुप्ते, कलाकार हैं- खुशमीत गिल, सुरेखा सीकरी, सुष्मिता मुखर्जी, राजेश पुरी, अमोल गुप्ते व अन्य.

मुश्किलों से लड़कर नवाज ने बनाई अपनी अलग पहचान

आज हम बात करेंगे गैंग्स आफ वासेपुर से चर्चा में आए फैजल खान यानी नवाजुद्दीन सिद्दीकी के जीवन के बारे में.

19 मई 1974 में उत्तरप्रदेश के मुजफ्फनगर जिले के बुढ़ाना गांव में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म हुआ. 43 साल के नवाज के पिता किसान थे और 9 भाई-बहनों के बड़े परिवार में उनका पालन-पोषण हुआ है. उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव से निकलकर मुंबई में आकर एक्टर बनने तक का सफर नवाज के लिए आसान नहीं रहा है.

अगर बात करे करियर की शुरुआत की तो नवाज ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली चले आए और यहां आकर उन्होंने अपना खर्चा चलाने के लिए चौकीदार और केमिस्ट की शौप पर काम करना शुरु कर दिया.

नवाज ने मुंबई आने से पहले तक सिर्फ 5 फिल्में ही देखी थीं. उनके गांव में कोई भी थिएटर भी नहीं था. फिल्म देखने के लिए उन्हें 40 किलोमीटर दूर शहर में जाना पड़ता था.

करियर के शुरुआती दिनों में नवाज ने कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए. साल 1999 में आई फिल्म ‘शूल’ में वेटर का किरदार तो आमिर खान की फिल्म ‘सरफरोश’ में चोर की भूमिका के अलावा नवाज फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस में भी नजर आए थे.

नवाज ने फिल्म ‘मिस लवली’ में पहली बार रील और रियल लाइफ में किस किया था. एक इंटरव्यू के दौरान नवाज ने बताया था कि उन्होंने उसके पहले अपनी वाइफ को भी किस नहीं किया था. नवाज़ की शादी बड़ी कम उम्र में हो गयी थी. जब वो मुंबई में स्ट्रगल कर रहे थे तब उनकी पत्नी गांव में ही रहती थी.

नवाज का रोल मौडल कोई मेगास्टार या सुपस्टार नहीं बल्क‍ि एक्टर आशीष विद्यार्थी हैं. नवाज बचपन से ही एक बैडमिंटन प्लेयर बनना चाहते थे लेकिन घुटनो में चोट लगने के कारण वो ख्वाब अधूरा रह गया और वह एक्टर बन गए.

नवाज ने साल 2010 में आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘पीपली लाइव’ में एक पत्रकार की भूमिका निभाई जिसके लिए उनके किरदार को काफी सराहा गया. सुजौय घोष की फिल्म ‘कहानी’ के बाद नवाज दर्शकों की नजरों में आने लगे. नवाज के करियर में सबसे बड़ा बदलाव अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के साथ आया. इस फिल्म में नवाज ने फैजल खान नाम के किरदार को जीवंत किया जिसके डायलौग लोगों के जुंबा पर आज भी आ जाते हैं.

नवाज ने सलमान खान के साथ फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘किक’ में भी अहम किरदार अदा किया. इसके अलावा फिल्म ‘बदलापुर’ में भी नवाज के किरदार को दर्शकों का प्यार मिला. कई बड़े स्टार्स के साथ कई फिल्में कर रहे नवाजुद्दीन का दर्शकों को बड़े पर्दे पर इंतजार रहता है.

लंबी लाइन से मिलेगा छुटकारा, पासपोर्ट के लिए औनलाइन होगा वेरिफिकेशन

सरकार पासपोर्ट वेरिफिकेशन को जल्द ही आनलाइन करने वाली है. सरकार अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम परियोजना (सीसीटीएनएस) को विदेश मंत्रालय की पासपोर्ट सेवा के साथ जोड़ेगी.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके लिए एक आनलाइन पोर्टल की शुरुआत की है. ये प्रोजेक्ट लगभग एक साल के भीतर पासपोर्ट आवेदकों का सत्यापन करेगा. इसके अन्तर्गत पुलिस स्वयं आवेदकों के घर जाकर पासपोर्ट आवेदकों का सत्यापन करेगी.

हालांकि ये प्रोजेक्ट देर से शुरू हुआ, लेकिन अब इस आनलाइन व्यवस्था से पासपोर्ट बनावाने में लगने वाले लंबे समय और वेरिफिकेशन से आपको जल्द ही छुटकारा मिलेगा.

पासपोर्ट आनलाइन वेरिफिकेशन को पहली बार मंजूरी 2009 में ही मिल गई थी. देश के 15,398 पुलिस स्टेशन इस डिजिटल पोर्टल से से जुड़े हुए हैं. जिनमें से कुल 13,775 थानों को सीसीटीएनएस से जोड़ा गया है. अबतक  सीसीटीएनएस के जरिए सात करोड़ से ज्यादा क्रिमिनल मामलों का रिकार्ड दर्ज किया गया है.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा डिजिटल पुलिस पोर्टल की लान्चिंग की शुरुआत की गई थी. जिसने नागरिकों को अपराध की रिपोर्ट करने और आनलाइन सत्यापन की सुविधा मुहैया कराईं.

पोर्टल से होने वाले लाभ

  • यह पोर्टल वेरिफिकेशन करने में पुलिस की मदद करेगा.
  • राजनाथ सिंह ने अपने ट्वीट में कहा कि पुलिस पोर्टल नागरिकों को औनलाइन शिकायत दर्ज कराने और पूर्व में की गई शिकायतों के सत्यापन में मदद करेगा.
  • इसके साथ ही यह पोर्टल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की मदद करने के साथ उनके सपने को साकार करेगा.

इन 5 बदलावों के साथ अमिताभ ला रहे हैं केबीसी 9

अमिताभ बच्‍चन वैसे तो इन दिनों अपनी फिल्‍मों की शूटिंग में बिजी हैं, लेकिन फिर भी जल्‍द ही वह हर रोज टीवी पर लोगों से मिलने वाले हैं. बिग बी 28 अगस्‍त से एक बार फिर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सीजन 9 में नजर आएंगे.

इसके पहले एपिसोड में शो का पिछले 17 सालों का सफर दिखाया जाएगा. शो की शुरुआत होने से पहले ही अमिताभ बच्चन ने कहा है कि यह शो ना सिर्फ लोगों के जीवन में बदलाव लाता है बल्कि उनके जीने के तरीके को भी बदल देता है.


अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ नया सीजन है और बाकी सारी चीजें इसकी पुरानी है तो हम आपको बता दें इस बार केबीसी में कंटेस्‍टेंट के लिए बहुत कुछ नया होगा.

इन बड़े बदलावों के साथ आनएयर होगा केबीसी सीजन 9

– कौन बनेगा करोड़पति की जीत की राशि बढ़ाकर 7 करोड़ रुपए की गई है. यदि प्रतियोगी एक करोड़ रुपए जीत जाता है तो अगला सवाल सीधा सात करोड़ रुपए के लिए होगा. इस प्राइज मनी में भारत सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सभी टैक्स शामिल होंगे.

– इस बार ‘फोन अ फ्रेंड’ लाइफलाइन का फार्मेट बदला गया है. इसकी जगह पर ‘वीडियो काल अ फ्रेंड’ जोड़ा गया है. इससे अपने किसी दोस्त से वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए सहयोग लिया जा सकता है. साथ ही जोड़ीदार नाम से एक नया फीचर भी जोड़ा गया है. इसमें विभिन्न स्टेज पर अपने किसी दोस्त की मदद ली जा सकेगी.

– शो में इस बार सेलेब्रिटी गेस्ट अपनी फिल्म प्रमोट नहीं कर सकेंगे. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सेलेब्रिटी दिखेंगे ही नहीं. वे किसी प्रतियोगी के जोड़ीदार बनकर इस खेल को खेल सकते हैं. या सेलेब्रिटी खुद भी सोशल काज के लिए फंड इकट्ठा करने के मकसद से खेल सकते हैं.

– इस बार शो की लंबाई छोटी कर इसे सिर्फ 30 से 35 एपिसोड्स का बनाया गया है, जो कि छह सप्ताह तक चलेगा. इसे पहले से ज्यादा कठिन और कौम्पिटीटिव बनाया गया है. साथ ही निर्माता इस शो को हर साल नियमित रूप से लाना चाहते हैं. वे इसमें आगे से कोई गैप नहीं रखेंगे.

– शो को प्रतियोगी के साथ-साथ दर्शक भी जियो टीवी के जरिए खेल सकते हैं. प्रतियोगी से पूछा सवाल मोबाइल की स्क्रीन पर दिखाई देगा. शो की टैग लाइन रखी गई है, ‘अब जवाब देने का वक्त आ गया.’ शो में उन सवालों को शामिल किया जाएगा, जो आज की पीढ़ी के लिए इंगेजिंग लगें.

तीन तलाक के बाद सात जन्मों के रिश्तों पर भी नजर डाल लीजिये

एक साथ तीन तलाक पर कानूनी पाबंदी से इस बात की उम्मीद जग गई है कि औरतों के हक पर सरकार और अदालतें गंभीरता से विचार करेंगी. मुसलिम धर्म की ही तरह हिन्दू धर्म में भी बहुत सारे ऐसे मामले हैं जिनमें शादीशुदा जोडे अलग होना चाहते हैं. हिन्दू धर्म में शादी के बाद अलग होने की बेहद जटिल प्रक्रिया होती है. जिसमें सालों साल लोग पिसते रहते हैं. कई बार इस तरह की परेशानियों के चलते अरपराधिक घटनायें भी घटती हैं, जिनके मुकदमे दहेज उत्पीडन और दहेज हत्या जैसी हालातों तक पहुंच जाते हैं. हिन्दू धर्म में खाप पंचायतों और जातीय पंचायतों में शादी से अलग होने के अजीब ओ गरीब फैसले होते रहते हैं. जिस तरह से तीन तलाक को लेकर कानून और सरकार मुखर हुये, उस तरह से ही हिन्दू धर्म में शादी के बाद अलगाव यानि संबध बिच्छेद होने का सरल रास्ता बनाया जाये.

आज समाज में एकल पैरेंटस की संख्या बढ़ती जा रही है. इसकी मूल वजह यह है कि हिन्दू धर्म में शादी के बाद संबंध विच्छेद होना सरल नहीं है. संबंध विच्छेद की शुरुआत दहेज उत्पीड़न जैसे मुकदमों से शुरू होती है. एक पक्ष दूसरे पक्ष पर और दूसरा पक्ष पहले पक्ष पर अलगअगल तरह के आरोप लगाता है. थानों से लेकर कचहरी तक यह मुकदमे चलते हैं. इसके बाद दोनों पक्ष सहमति से अलगाव के लिये तैयार होते हैं. तब अलगाव के बाद यह मुकदमे समझौते के आधार पर खत्म होते हैं. कई बार लोगों में धैर्य नहीं रहता तो घटना गंभीर अपराध में बदल जाती है. हिन्दू धर्म में तलाक लेने के जो अधिकार दिये गये हैं उनमें से सबसे अधिक प्रचलित अधिकार एक दूसरे के चरित्र पर सवाल खड़े करना है. जल्द अलगाव के लिये सैक्सुली टार्चर करने के आरोप भी खूब लगते हैं.

अगर सहमति से अलगाव नहीं हो रहा तो अपनी कही बात को साबित करना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में सालों साल थाने से लेकर कचहरी तक भटकना पड़ता है. हर जिले में पारिवारिक अदालतें हैं. यहां लगी भीड़ को देखकर समझा जा सकता है कि सात जन्मों तक साथ देने का वादा इसी जन्म में किस तरह से टूट रहा है. साथ रह पाने में असफल पति पत्नी के लिये तलाक लेकर दूसरी शादी करना बहुत ही मुश्किल काम होता है. कई बार ऐसे फैसलों में इतना वक्त लग जाता है कि शादी की उम्र ही निकल जाती है. ऐसे में पति या पत्नी अकेले रहना सबसे अधिक पसंद करते हैं.

सबसे बड़ी परेशानी उन पति पत्नी के सामने आती है जिनके बच्चे हो चुके होते हैं. ऐसे में बच्चों को साथ लेकर यह लोग एकल पैरेंट के रूप में रहते हैं. आज समाज में तेजी से एकल पैरेंट की संख्या बढ़ती जा रही है. आज के दौर में 25 साल की उम्र तक शादी हो जाती है. 4 से 5 साल शादी के बंधन से अलग होने का फैसला लेने तक उम्र 30 साल हो जाती है. 10 से 12 साल सबंध विच्छेद होने या अलगाव में लग जाते हैं. अगर 40 की उम्र तक किसी का संबंध विच्छेद हो भी जाये, तो वह दूसरी शादी करके घर बसाने के लायक नहीं रह जाता है.

मुसलिम धर्म में एक साथ तीन तलाक, हलाला, कांट्रैक्ट मैरिज जैसी बहुत ही रूढिवादी सोच है, पर इसके बाद भी वहां तलाक लेने का सरल सीधा रास्ता भी है. हिन्दू धर्म में शादी के बाद अलग होने का रास्ता सरल नहीं है. ऐसे में बहुत सारी मानसिक बीमारियां जन्म लेने लगती हैं. दहेज के नाम पर होने वाले ज्यादातर मुकदमे की जड में अलगाव ही होता है. शादी के बाद कानूनी अलगाव को अगर सरल बना दिया जाये तो हिन्दू धर्म में अवसाद में जीने वाले पति पत्नी एकल पैरेंट बनने से बच सकते हैं. दहेज के नाम पर होने वाले अपराध घट सकते हैं. सोशल मीडिया पर फैला यह मैसेज यूं ही नहीं है कि ‘तीन तलाक के बाद सात जन्मों के रिश्तों पर भी नजर डाल लीजिये.’

सावधान : कहीं ब्लौक न हो जाए आपका एटीएम कार्ड

स्टेट बैंक लगातार कोई ना कोई नया कदम उठाता जा रहा है. पिछले दिनों बचत खाते पर ब्याज दरें गिराने के बाद अब बैंक आपके एटीएम कार्ड को लेकर बड़ा कदम उठाया है. अगर आपका खाता स्टेट बैंक आफ इंडिया में है और आप इसका डेबिट कार्ड यानी एटीएम इस्तेमाल करते हैं तो आपका कार्ड ब्लौक हो सकता है.

खबरों के अनुसार एसबीआई अपने ग्राहकों के डेबिट कार्ड बदल रही है और ऐसा दावा है कि जिन लोगों ने 30 सितंबर से पहले अपने एटीएम कार्ड नहीं बदलवाए उनके कार्ड ब्लौक कर दिए जाएंगे.

हालांकि कार्ड ब्लौक करने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. लेकिन बैंक ने अपने बयान में कहा है कि बैंक पुराने मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले डेबिट कार्ड बदल रही है. इनकी बजाय अब नए ईएमवी चिप वाले कार्ड जारी किए जा रहे हैं. बैंक ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसे लेकर जानकारी दी है जिसमें कहा गया है कि यह कदम सुरक्षा की दृष्ट से उठाया जा रहा है.

बैंक ने जारी बयान में कहा है कि ग्राहकों को अपना डेबिट कार्ड बदलवाने के लिए बैंक आना होगा या फिर आनलाइन बैंकिग के माध्यम से अप्लाय करना होगा. खबर के अनुसार रिजर्व बैंक ने पिछले साल ही बैंकों को मैग्नेटिक स्ट्रिप वाली मशीनों और डेबिट कार्ड से निजात पाने के निर्देश दिए थे.

साथ ही ईएमवी चिप और पिन आधारित कार्ड जारी करने के आदेश भी जारी किए थे, ताकि डेबिट कार्ड्स की क्लोनिंग और दूसरे तरह की धोखेबाजी से बचा जा सके.

क्या है मैग्नेटिक स्ट्रिप वाला डेबिट कार्ड

पुराने डेबिट कार्ड के पीछे की तरफ एक काली पट्टी नजर आती है. यही काली पट्टी मैग्नेटिक स्ट्रिप है जिसमें आपके खाते की पूरी जानकारी दर्ज होती है. एटीएम में इसे डालने के बाद पिन नंबर डालते ही आप अपने खाते से पैसे निकल पाते हैं.

जानें ईएमवी चिप कार्ड के बारे में

यह नए तरह की तकनीक है जिसमें कार्ड पर एक छोटी चिप लगी होगी जिसमें आपके खाते की पूरी जानकारी होगी. यह जानकारी इनक्रिप्टेड होगी ताकी इसे कोई चुरा ना सके. साथ ही पहले की तरह इसे भी सिक्रेट पिन नंबर के ही देखा जा सकेगा. यह तकनीक दुनियाभर में डेबिट कार्ड के लिए नए स्टैंडर्ड के रूप में सामने आई है.

इंतजार खत्म, आज शाम ऐसे करें जियो फोन के लिए रजिस्ट्रेशन

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने जियो के 4जी फीचर वाले फोन से मोबाइल बाजार में भी हड़कंप मचा दिया है. जियो ने 21 जुलाई को भारत का स्मार्टफोन जियो फोन लान्च किया था. जिसकी प्री-बुकिंग आज यानि 24 अगस्त से शुरू हो रही है.

मुकेश अंबानी ने जियो फोन को लान्च करते वक्त कहा था की 4G फीचर फोन की लाखों यूनिट्स एक हफ्ते में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी. लेकिन शुरू में जियो फोन की सप्लाई सीमित होने के कारण हर रिटेलर 40 प्री-बुकिंग वाउचर्स ही खरीद सकेंगे.

जियो फोन का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है. यूजर्स आज से औनलाइन और औफलाइन दोनों तरीकों से फोन की बुकिंग कर सकेंगे.

आइयें जानते हैं कि किस तरह से करें रजिस्ट्रेशन?

आज शाम 5 बजे से जियो फोन के लिए रजिस्ट्रेशन MyJio app और Jio.com वेबसाइट से कराए जा सकते हैं. जिन लोगों के पास औनलाइन बुकिंग करने के लिए एप नहीं है, वे अपने नजदीकी स्टोर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे.

एक यूजर्स एक ही बार रजिस्ट्रेशन करने के लिए मान्य होगा और बुकिंग्स के लिए आधार कार्ड की कापी की जरुरत होगी.

अगर आप जियो फोन को बल्क आर्डर करना चाहते हैं तो आपको अपनी कंपनी के नाम पर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके लिए आपको कंपनी का पैन और जीएसटीएन नंबर देना होगा.

जल्दी बुकिंग करा लेने वालों को 1 से 4 सितम्बर के बीच फोन मिल जाएगा.

जियोफोन लेने के लिए यूजर्स को 1,500 रुपये की रिफंडबेबल राशि देनी होगी. कहा जा रहा है कि यह राशि यूजर्स को तभी वापस मिलेगी जब तीन साल बाद वो जियोफोन कंपनी को वापस करेंगे.

अगर आप भी ऐसे करते हैं स्मार्टफोन चार्ज तो हो जाइए सावधान

आज के समय में स्मार्टफोन हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में आपको अपने फोन की बैटरी का विशेष रुप से ध्यान रखना बेहद जरुरी है.

सभी बैटरियों की एक्सपायरी डेट होती है और स्मार्टफोन्स की बैटरी पर भी यह बात लागू होती है. आप अपने स्मार्टफोन को कैसे यूज करते हैं, इसका असर बैटरी की लाइफ पर भी पड़ता है. अगर आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक चले तो कुछ बातों का ध्यान रखना होगा.

इन टिप्स को अपनाकर आप अपने फोन की बैट्री को लंबे समय तक चार्ज रख सकते हैं और सुरक्षित भी.

अपने चार्जर से ही चार्ज करें स्मार्टफोन

स्मार्टफोन को हमेशा उसी चार्जर के साथ चार्ज करना चाहिए जो उसके साथ मिला हो. स्मार्टफोन्स में एक जैसे चार्जिंग पोर्ट होते हैं तो हमें लगता है कि कोई चार्जर हम इस्तेमाल कर सकते हैं. मगर ध्यान रहे कि अगर चार्जर की पावर अलग हुई तो बैटरी की परफार्मेंस और कैपेसिटी पर असर पड़ सकता है. बैटरी खराब होने या उसमें आग लगने के मामले इसी वजह से सामने आते हैं.

लोकल चार्जर के इस्तेमाल से बचें

कभी भी सस्ते चार्जर जिन्हें बोलचाल की भाषा में ‘लोकल चार्जर’ इस्तेमाल न करें. इनमें ओवर चार्जिंग से बचाने के लिए सेफ्टी का कोई सिस्टम नहीं होता. वे बैटरी और फोन को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

फोन को बार-बार चार्ज न करें

बैटरी को चार्ज करने से पहले उसे 20% तक तो डिस्चार्ज होने ही देना चाहिए. ऐसा नहीं कि 60 पर्सेंट या 50 पर्सेंट होने पर ही आप बार-बार चार्ज करने लग जाएं. बिना मतलब और बार-बार चार्ज करने से बैटरी की ओवरआल लाइफ कम हो जाती है.

रातभर चार्जिंग पर न छोड़ें स्मार्टफोन

वैसे तो ज्यादातर स्मार्टफोन्स में आटो पावर कट आप्शन आता है यानी बैटरी चार्ज होने पर अपने आप बैटरी अतिरिक्त चार्ज लेना बंद कर देती है. फिर भी जरूरी है कि फोन को कई-कई घंटों तक चार्जिंग पर न छोड़ा जाए.

चार्ज करते वक्त स्मार्टफोन को इस्तेमाल न करें

फोन डायरेक्ट चार्जिंग पर लगाया हो या पावरबैंक के साथ लगाकर चार्ज किया जा रहा हो, इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इस्तेमाल करने के दौरान स्मार्टफोन का तापमान बढ़ जाता है. इससे बैटरी के साथ-साथ स्मार्टफोन की परफार्मेंस पर भी खराब असर पड़ सकता है.

चार्ज करते वक्त फोन का प्रोटेक्टिव कवर हटा दें

संभव हो तो चार्ज करते समय फोन का प्रोटेक्टिव केस हटा दें. चार्ज करते वक्त बैटरी का थोड़ा सा गर्म होना स्वाभाविक है मगर फोन पर कवर लगा होगा तो यह और गर्म हो जाएगा. इसलिए चार्ज करते वक्त फोन या तो हार्ड सरफेस पर रखें ताकि उसमें हीट ट्रांसफर हो जाए या फिर साफ्ट कपड़े पर स्क्रीन के बल रखें.

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