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जवां रहें उम्रभर और बुढ़ापे में भी करें यौनसुख की सीमाएं पार

कुछ दिनों से आलोक कुछ बदलेबदले से नजर आ रहे हैं. वे पहले से ज्यादा खुश रहने लगे हैं. आजकल उन की सक्रियता देख कर युवक दंग रह जाते हैं. असल में उन के घर में एक नन्ही सी खुशी आई है. वे पिता बन गए हैं. 52 साल की उम्र में एक बार फिर पिता बनने का एहसास उन को हर पल रोमांचित किए रखता है. इस खुशी को चारचांद लगाती हैं उन की 38 वर्षीय पत्नी सुदर्शना. सुदर्शना की हालांकि यह पहली संतान है लेकिन आलोक की यह तीसरी है.

दरअसल, आलोक की पहली पत्नी को गुजरे 5 साल बीत चुके हैं. उन के बच्चे जवान हो चुके हैं और अपनीअपनी गृहस्थी बखूबी संभाल रहे हैं. कुछ दशक पहले की बात होती तो इन हालात में आलोक के दिल और दिमाग में बच्चों के सही से सैटलमैंट के आगे कोई बात नहीं आती. इस उम्र में अपनी खुशी के लिए फिर से शादी की ख्वाहिश भले ही उन के दिल में होती लेकिन समाज के दबाव के चलते इस खुशी को वे अमलीजामा न पहना पाते. अब जमाना बदल चुका है. लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हो गए हैं, एंप्टी नैस्ट सिंड्रोम से बाहर निकल रहे हैं. और अपनी खुशियों को ले कर भी वे ज्यादा स्पष्ट और मुखर हैं. अब लोग 70 साल तक स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं.

जब आलोक ने देखा कि उन के बच्चों का उन के प्रति दिनप्रतिदिन व्यवहार बिगड़ता जा रहा है. अपने कैरियर व भावी जिंदगी को बेहतर बनाने की आपाधापी में बच्चों के पास उन की खुशियों को जानने व महसूस करने की फुरसत नहीं है तो आलोक ने न केवल उन से अलग रहने का निर्णय लिया बल्कि एक बार फिर से अपनी जिंदगी को व्यवस्थित करने का मन बनाया.

एक दिन इंटरनैट के जरिए उन की मुलाकात सुदर्शना से हुई जो उन्हीं की तरह अच्छी जौब में थी. आर्थिक नजरिए से सैटल थी, लेकिन कैरियर के चक्कर में सही उम्र में शादी न हो सकी थी. वह 37 साल की हो चुकी थी. उस ने एक खूबसूरत नौजवान का जो ख्वाब देखा था, उसे अब भूल चुकी थी. उसे अब एक व्यावहारिक दोस्त चाहिए था.

सुदर्शना को आलोक में व्यावहारिक जीवनसाथी के सभी गुण नजर आए. दोनों ने झटपट कानूनी तरीके से शादी कर ली.

कोकशास्त्र में कहा गया है कि पुरुषों की सैक्स क्षमता पूरी तरह से उन के अपने हाथों में होती है. दरअसल, जवानी में जो अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं उन के लिए अधेड़ावस्था जैसी कोई चीज ही नहीं होती. सच बात तो यह है कि इस युग में अधेड़ उम्र के माने वे नहीं रहे जो आधी सदी पहले तक हुआ करते थे. महिलाएं जरूर अभी तक रजोनिवृत्ति के चलते कुदरत के सामने अपने मातृत्व को लंबे समय तक कायम रखने को ले कर विवश हैं लेकिन स्त्रीत्व का आकर्षण उन में भी उम्र का मुहताज नहीं रहा.

सैक्स का सुख लें

आज पुरुष चाहे 50 का हो या 55 का या फिर 60 वर्ष का, स्वस्थ रहने की सजगता ने उसे इस उम्र में भी फिट बनाए रखा है, हालांकि इस में उसे कुदरत का भी साथ मिला है. वास्तव में उम्र ढलने के साथसाथ उस के परफौर्मैंस में कुछ गिरावट तो आती है, लेकिन उस की यह क्षमता बिलकुल खत्म नहीं होती.

यहां कनफ्यूज न हों, पहले भी यह सब सहजता से होता रहा है. मगर इस तरह की क्षमताएं आमतौर पर राजाओं, महाराजाओं और अमीरउमरावों तक ही सीमित होती थीं क्योंकि वही आमतौर पर स्वस्थ होते थे और स्वास्थ्य के प्रति सजग होते थे. आम आदमी के लिए पहले न तो इतनी सहजता से स्वस्थ रहने के साधन उपलब्ध थे, न ही इस का ज्ञान था, इसलिए उन में बुढ़ापा जल्दी आ जाता था.

वैसे लंबे समय तक सैक्स में सक्षम और सक्रिय बने रहने का एक आसान उपाय है हस्तमैथुन. हस्तमैथुन एक ऐसी प्रक्रिया है जिस में किसी दूसरे की जरूरत नहीं होती. शरीर विज्ञान की सीख कहती है कि शरीर के जिस अंग को आप सक्रिय बनाए रखेंगे उस की उम्र उतनी ही लंबी होगी और वह उतनी ही देर तक सक्षम रहेगा. वास्तव में यह बात सैक्स के मामले में भी सही है. असल में जो व्यक्ति जितना ज्यादा सैक्स करता है वह उतनी ही देर तक सैक्स कर सकता है.

मशहूर विशेषज्ञ डा. जौनसन का भी कहना था और आज के सैक्सोलौजिस्ट भी इस बात को मानते हैं कि लंबे समय तक सैक्स क्षमता बरकरार रखने के लिए युवावस्था में सैक्स सक्रियता जरूरी है. अगर यह सक्रियता रहती है तो 50 वर्ष की उम्र के बाद भी पुरुष को नपुंसक होने का डर नहीं रहता. यही नहीं, वह 70 साल तक पिता बनने का सुख भी प्राप्त कर सकता है.

सैक्सोलौजिस्ट हस्तमैथुन को विशेष महत्त्व देते हैं. असल में जो पुरुष अपने लिंग को जितना सक्रिय रखता है, उस की उतनी ही सैक्स की चाहत बढ़ती है क्योंकि इस प्रक्रिया में लिंग की अच्छीखासी ऐक्सरसाइज होती है.

कई बार पुरुष इसलिए भी अपनी पत्नियों को संतुष्ट नहीं कर पाते क्योंकि वे सैक्स के मामले में लगातार सक्रिय नहीं रहते. इस से उन के अंग विशेष की ऐक्सरसाइज भी नहीं हो पाती और ऐन मौके पर शर्मिंदगी उठानी पड़ती है. कहने का मतलब यह है कि इस मामले में निष्क्रियता सैक्ससुख से वंचित कर देती है.

सैक्सोलौजिस्टों की मानें तो हस्तमैथुन सैक्स क्षमता बनाए रखने का एक कारगर तरीका है. यह न सिर्फ पुरुषों को स्वस्थ रखता है बल्कि अच्छीखासी प्रैक्टिस भी कराता है. इतना ही नहीं, उम्र ढलने के साथ सैक्स की चाहत को बढ़ाने में मदद करता है.

खानपान व जीवनशैली सुधारें

इन तमाम बातों के साथसाथ यह भी ध्यान देने योग्य है कि अपने खानपान व मोटापे को भी नजरअंदाज न करें. सैक्स जीवन पर सब से ज्यादा कुप्रभाव मोटापा ही डालता है. मोटापे का अतिरिक्त वजन विटामिन बी-1 के लिए जिगर और थायराइड से प्रतिस्पर्धा करता है और इन दोनों ही अंगों को खराब कर देता है, जबकि सैक्स क्षमता के लिए दोनों ही अंग महत्त्वपूर्ण हैं. मोटा व्यक्ति पतले व्यक्ति की तुलना में सैक्स की कम इच्छा करता है. जब वह इच्छा करेगा भी, न तो वह पार्टनर को संतुष्ट कर पाता है और न खुद ही संतुष्ट हो पाता है.

इस में दोराय नहीं है कि सैक्स सब के जीवन का अभिन्न हिस्सा है. ऐसे में न सिर्फ खानपान, जीवनशैली आदि का खयाल रखना होता है बल्कि कुछ सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो नशीले पदार्थों के आदी होते हैं.

लब्बोलुआब यह है कि भविष्य को आनंदमय बनाना है तो युवावस्था से ही इस का ध्यान रखना होगा. इतना ही नहीं, अपने भावनात्मक रिश्तों को भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है. आज के दौर में बच्चे अपने कैरियर के लिए घर से दूर चले जाते हैं. ऐसे में मातापिता घर में अकेले रह जाते हैं. ऐसे पतिपत्नी के लिए सैक्स जीवन को ऊर्जावान बनाए रखता है. कहने की बात नहीं है कि सैक्स शारीरिक क्रिया के अलावा मानसिक संतुष्टि भी है. इसलिए चैन और सुकून से जीने के लिए अपने लाइफस्टाइल को बदल डालें और 60 वर्ष की उम्र के बाद भी गुनगुनाएं, अभी तो मैं जवान हूं…

सैक्स ही नहीं कई बीमारियों में भी कमाल का असर दिखाती है वियाग्रा

डायमंड के आकार वाली छोटी सी नीली गोली वियाग्रा सैक्स पावर को बढ़ाने के अलावा दूसरी बीमारियों में भी कमाल का असर दिखाती है. वियाग्रा में मौजूद दवा सिल्डेनाफिल को मर्दों की सैक्स संबंधी कमजोरियों को दूर करने में असरकारक माना जाता है लेकिन एक नई रिसर्च के अनुसार, वियाग्रा अन्य कई गंभीर रोगों में भी फायदेमंद है.

कई देशों में वियाग्रा के साइड इफैक्ट्स के बारे में शोध करने पर इस के कई फायदे सामने आए जो चौंकाने वाले हैं. अमेरिका में किए गए एक शोध के अनुसार, ठंड के मौसम में अकसर लोगों की उंगलियों में ऐंठन, दर्द होना, मुड़ न पाना, पीली पड़ जाना जैसी समस्याएं हो जाती हैं. ठंड से बच कर इन समस्याओं से बचा जा सकता है.

इस समस्या से जूझ रहे मरीजों को सिल्डेनाफिल देने पर उन्हें काफी फायदा हुआ. ऐसे?स्थान जहां अधिक बर्फ पड़ती है, वहां के लोगों को माउंटेन सिकनैस की समस्या हो जाती है. ऊंचे स्थानों पर औक्सीजन की कमी होने से ब्लड में इस का लेवल कम हो जाता है जिस से पल्मोनरी धमनियां संकरी हो जाती हैं. ऐसे में हृदय को पंपिंग करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और व्यक्ति की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है.

पल्मोनरी हाइपरटैंशन जैसी समस्या में भी सिल्डेनाफिल काफी प्रभावशाली होती है. फेफड़ों की बीमारी व हृदय संबंधी गड़बडि़यां होने पर पल्मोनरी हाइपरटैंशन की समस्या हो सकती है. पल्मोनरी हाइपरटैंशन के इलाज के लिए पुरुष व स्त्री दोनों के लिए सिल्डेनाफिल की 20 एमजी की 1-1 खुराक दिन में 3 बार निर्धारित की गई है. क्लीनिकल ट्रायल्स में इस दवा के काफी बेहतर परिणाम मिले हैं.

हृदय रोगियों के लिए हालांकि वियाग्रा सुरक्षित नहीं है लेकिन एक ही जगह पर रक्त की अधिकता, जिस की वजह से हार्ट फेल्योर की समस्या उत्पन्न होती है, के मरीजों के लिए सिल्डेनाफिल काफी प्रभावकारी होती है.

स्ट्रोक जैसी समस्या में सिल्डेनाफिल कमाल का असर दिखाती है. इस विषय पर शोध करने वाले जरमनी के डा. मैक रैपर का कहना है कि सिल्डेनाफिल मस्तिष्क के स्ट्रोक को दूर  करने में काफी अच्छा काम करती है.

सिल्डेनाफिल को ले कर नए शोध जारी हैं.  शोधों में इस से होने वाले लाभ और नुकसान के नतीजे सामने आ रहे हैं. बहरहाल, अब तक किए गए नतीजों से वियाग्रा एक लाभदायक दवा के रूप में भी सामने आई है. मगर ध्यान रहे, ऐसी कोई भी दवा बिना विशेषज्ञों की सलाह के बगैर न लें

खुद के जाम में समेटे पी लो दो घूंट जिंदगी के

सुनो शोर धड़कनों का

जब जिंदगी खामोश होती है

सुनो सरगोशी सांसों की

जब सोच बेहोश सी होती है

देखो तुम उम्र का वो तिनका

जब वक्त का छर्रा

पैरों तले खिसकता है

सुनो खुद के उस हिस्से का बयान

जब तुम्हारा हिस्सा सिसकता है

पढ़ो तुम उस लफ्ज को

जो लबों पर न आया

बस जबां पर है

वो तुम नहीं हो

जो तुम हो

ढूंढ़ो उसे, वो कहां है

इसी जिंदगी के दरमियान है

कहीं वजूद जिंदगी के

खुद के जाम में समेटे

पी लो दो घूंट जिंदगी के

कौन जाने कब ये सांसें

फरामोश होती हैं

सुनो शोर धड़कनों का

जब जिंदगी खामोश होती है.

– मलेंद्र कुमार

व्हाट्सऐप यूजर्स के लिए खुशखबरी, अब इसके जरिए कर सकेंगे कमाई

पिछले कुछ महीनों से खबर थी कि व्हाट्सऐप बिजनेस के लिए एक अलग ऐप लान्च कर सकता है. इस हफ्ते की शुरुआत में कंपनी ने जानकारी दी थी कि ऐप में वेरिफाइड अकाउंट्स की शुरुआत की जाएगी. यानी कंपनियां वेरिफाइड अकाउंट्स के जरिए ग्राहकों से बात कर पाएंगे. इसके जरिए आने वाले समय में यूजर्स एक पीले चैटबाक्स से कंपनियों से सीधे संवाद भी स्थापित कर पाएंगे. बता दें कि इस चैट मैसेज को आप डिलीट नहीं कर पाएंगे, लेकिन व्हाट्सऐप यूजर्स को यह सुविधा देगा कि वह बात नहीं करने की स्थिति में कंपनियों को ब्लाक कर पाएंगे.

विश्‍व भर के व्हाट्सऐप यूजर्स के लिए खुशखबरी भी है कि अब वह इसके जरिए कमाई भी कर सकेंगे. व्हाट्सऐप ने बताया है कि जल्द ही वह अपने यूजर्स का मोबाइल नंबर अपनी ओनर कंपनी फेसबुक के साथ साझा करेगा. जिसकी मदद से व्हाट्सएप यूजर्स फेसबुक पर और भी ज्यादा टारगेट विज्ञापन देख पाएंगे.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सऐप ने इस फीचर की टेस्टिंग भारत में शुरू कर दी है. ये सर्विस कथित तौर पर बुक माय शो के साथ शुरू की गई है. स्क्रीनशाट में लिखे मैसेज में कंपनी ने यूजर को जानकारी दी है कि हम इस चैट में आपको टिकट की कन्फर्मेशन भेजेंगे. अगर आप मैसेज नहीं चाहते तो स्टाप लिखकर भेजें. बुक माय शो ने अपने यूजर्स को टिकट बुकिंग की कन्फर्मेशन भेजी है. एक यूजर ने इसका स्क्रीनशाट ट्विटर पर शेयर भी किया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सऐप बुक माय शो के अलावा कैब प्रोवाइडर ओला और होटल कंपनी ओयो के साथ भी हाथ मिलाने की तैयारी में है. इससे आने वाले वक्त में ओला के ग्राहकों को OTP और इनवायस व्हाट्सऐप पर ही मिलने लगे.

आपको बता दें कि दुनियाभर में करीब 1 बिलियन व्हाट्सएप यूजर हैं. ऐसे में अगर व्हाट्सएप, यूजर्स की जानकारी फेसबुक पर साझा करता है तो उसे यूजर्स को उनकी सुरक्षा का विश्वास दिलाना होगा. व्हाट्सएप, यूजर्स को सीमित समय के लिए ये आप्शन देगा कि वो अपनी जानकारी फेसबुक पर शेयर करना चाहते हैं या नहीं. वहीं, व्हाट्सएप ने ये साफतौर पर कहा है कि फेसबुक से साझा की गई सभी जानकारी सुरक्षित रहेंगी.

इन उपायों से कम कर सकेंगे आप होम लोन की ईएमआई

आमतौर पर आपका क्रेडिट स्कोर यह तय करता है कि आप कितनी आसानी से और कितनी रकम का लोन प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन आपको शायद ही यह बात मालूम होगी कि आपका क्रेडिट स्कोर आपकी ईएमआई का भी निर्धारण कर सकता है. होम लोन पर ब्याज दर को क्रेडिट रेटिंग से लिंक किए जाने का चलन तेज हो रहा है.

मौजूदा समय में सबसे सस्ता होम लोन मुहैया करवाने वाला सरकारी बैंक बैंक आफ बड़ौदा है. अब दूसरे बैंक भी बैंक आफ बड़ौदा के नक्शे कदम पर चलने की तैयारी कर रहे हैं. दिग्गज सरकारी बैंक, बैंक आफ बड़ौदा ब्याज दर को होम लोन लेने वाले व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से जोड़ेगी.

सिबिल स्कोर 760 प्वाइंट्स से ज्यादा होने पर होम लोन पर 8.35 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना होगा. जो पहली बार लोन ले रहे हैं और जिनका कोई क्रेडिट स्कोर नहीं है, उन्हें बैंक आफ बड़ौदा 8.85% पर होम लोन देगा. 725 से 759 तक के क्रेडिट स्कोर वाले बैंक आफ बड़ौदा के ग्राहक होम लोन पर 8.85 फीसदी जबकि 724 से कम स्कोर वाले ग्राहक 9.35 फीसदी की दर से ब्याज देंगे.

सिबिल स्कोर पूरी तरह से किसी व्यक्ति के अपना पिछला लोन चुकाने में बरते गये अनुशासन और हाल ही में लिए गए लोन का रीपेमेंट वह कितने अंतराल पर कर रहा है पर निर्भर करता है. सभी बैंकों को उनके ग्राहकों की लोन हिस्ट्री सिबिल जैसे क्रेडिट इन्फार्मेशन ब्यूरोज को मुहैया करानी होती है. इन्हीं आकंड़ों के आधार पर क्रेडिट स्कोर तैयार होता है.

बौलीवुड की इन फिल्मों में दिखा टीचर-स्टूडेंट्स का जबरदस्त कनेक्शन

आज देशभर में टीचर्स डे मनाया जा रहा है और बौलीवुड फिल्‍मों में दिखाये जाने वाले रिश्‍तों में ‘टीचर और स्‍टूडेंट्स’ का कनेक्‍शन काफी खास रहा है. अब चाहे वायलेन बजाता टीचर ‘राज’ हो, अपने स्‍टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जाता ‘प्रभाकर आनंद’ हो, अपने स्‍टूडेंट्स की प्रतीभा को निखारकर उनके मां- बाप के सामने उनकी खूबियो को लाने वाले तारे जमीं पर,  के ‘आमिर खान’ हों या फिर ‘थ्री इडियट’ फिल्म में इंजिनियरिंग का पाठ पढाते ‘बोमन इरानी’ हों.

फैशन का स्‍टाइल हो या फिर अपने स्‍टूडेंट्स के साथ स्‍पेशल कनेक्‍शन का सीन सभी ने अपना एक अलग अंदाज दिखाया. फिल्‍मों के इन टीचर्स ने सभी का दिल जीत लिया. ‘टीचर स्‍टूडेंट्स कनेक्‍शन’ के इस दौड़ में हीरो ही नहीं बल्की हसीनाओं ने भी अपने जल्वे बिखेरें हैं फिर चाहें वह ‘मैं हूं न’ की ‘सुष्मिता सेन’ हो या फिर बोल्डनेस का तड़का लगाने वाली ‘डर्टी पिक्चर’ की ‘विद्या बालन’ हो. इन सभी ने रोमांस का पाठ पढ़ाने के साथ ही फैशन की सीख भी दी. बौलीवुड फिल्‍मों ने टीचर्स के कई चेहरों को सामने रखा. आज हम बौलीवुड की कुछ ऐसी ही फिल्मों और सितारों की बात करेंगे जिन्‍होंने हमें हमेशा याद रहने वाले शानदार टीचर दिए हैं.

मोहब्‍बतें (2000)

इस फिल्‍म में अमिताभ बच्‍चन ने गुरुकुल के बेहद ही अनुशासन बनाए रखनें वाले टीचर के किरदार को निभाया है, फिल्म में उनका नाम नारायण शंकर है. गुरुकुल के अनुशासन भरे माहौल में जब राज आर्यन यानी शाहरूख खान ने वायलेन टीचर के रूप में एंर्टी लिया तो उन्होने कालेज की फिजाओं में प्‍यार का रंग भी घोल दिया.

मैं हूं न (2004)

शाहरुख खान स्टारर फिल्म मैं हूं न में सुष्मिता ने टीचर का किरदार निभाया था. वह कैमिस्ट्री की टीचर बनी थी. इसमें सुष्मिता द्वारा पहनी गई साड़ी तो उस वक्त फैशन स्टेटमेंट बन गई थी. कैमिस्ट्री की टीचर के किरदार में सुष्मिता इतनी ग्लैमरस लगी कि उनकी खूबसूरती पर शाहरुख सहित सभी दर्शक कायल हो गए. ये फिल्म उनके करियर की बेस्ट फिल्म साबित हुई.

फालतू (2006)

रेमो डिसूजा के निर्देशन में बनी यह पहली फिल्‍म कालेज के बैक बैंचर्स के छिपे हुए टैलेंट को सामने लाने वाली फिल्‍म थी. इस कामेडी फिल्‍म में जैकी भगनानी, पूजा गुप्‍ता, चंदन राय जैसे कलाकार नजर आए थे. इस फिल्‍म में अरशद वारसी और रितेश देशमुख टीचर बने नजर आए. हालांकि यह फिल्‍म बाक्‍स आफिस पर ज्‍यादा कमाल न दिखा सकी.

कभी अलविदा न कहना (2006)

इस फिल्म में  रानी मुखर्जी ने एक प्राइमरी टीचर का किरदार निभाया था. हालांकि, फिल्म में वे क्लासरूम से कहीं ज्यादा वक्त शाहरुख खान के साथ बिताती दिखीं, लेकिन दर्शकों ने उनके इस फैशन स्टेटमेंट को नोटिस ही नहीं बल्कि फौलो भी किया.

तारे जमीन पर (2007)

लगातार बदलते सिलेबस और स्‍कूलों में बच्‍चों पर बढ़ते पढ़ाई के प्रेशर ने नन्‍हें-मुन्‍नों के लिए काफी परेशानियां खड़ी की हैं. ऐसे में कई बार पेरंट्स हर बच्‍चे को इस दौड़ का हिस्‍सा बनाने की कोशिश करते हैं. इसी गंभीर विषय पर आमिर खान फिल्‍म ‘तारे जमीन पर’ लेकर आए. यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म थी. इस फिल्‍म में डिस्‍लेक्सिया से जूझ रहे बच्‍चों को पढ़ाने के तरीके और उन्‍हें ट्रीट करने के सही तरीकों को दिखाया गया.

पाठशाला (2009)

इस फिल्‍म में शाहिद कपूर पहली बार टीचर बने नजर आए थे. म्‍यूजिक टीचर बने शाहिद कपूर और स्‍कूल के प्रिंसिपल बने नाना पाटेकर के किरदारों को काफी पसंद किया गया था.

आरक्षण (2011) 

निर्देशक प्रकाश झा की ‘आरक्षण’, टीचर और स्‍टूडेंट्स के बीच के रिश्‍तों पर बनी फिल्‍मों में से एक है. इस फिल्‍म में भी अमिताभ बच्‍चन एक स्‍कूल के प्रिंसिपल के किरदार में थे, जो आगे चलकर एक समाज सेवक बन जाते हैं. ‘प्रभाकर आनंद के किरदार में अमिताभ ने सिस्‍टम से जूझते हुए काफी अहम और सकारात्‍मक बदलाव दिखाए.

द डर्टी पिक्चर (2011)

फिल्म में बोल्डनेस का तड़का लगाने वाली विद्या, ऊ लाला ऊ लाला… गाने में एक सेक्सी टीचर के तौर पर नजर आईं थी.

स्‍टूडेंट आफ द ईयर (2012)

करण जौहर की यह फिल्‍म पूरी तरह स्‍कूल लाइफ और स्‍टूडेंट्स के बीच होने वाले काम्‍पिटीशन पर आधारित थी. इस फिल्‍म से आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्‍होत्रा ने बालीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी.

देसी ब्वायज

फिल्म ‘देसी ब्वायज’ में एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह की एंट्री को भूल पाना मुश्किल है. इस फिल्म में चित्रांगदा का किरदार इतना ग्लैमरस था कि क्लासरूम में बैठे सभी स्टूडेंट्स पढ़ाई को छोड़कर केवल उनपर ही फोकस करते थे. फिल्म में उन्होंने एक सुपर हाट मैक्रो इकोनोमिक्स प्रोफेसर का किरदार निभाया. ऐसे में अक्षय कुमार भी उनकी अदाओं के दीवाने हो गए. रील लाइफ की तरह रियल लाइफ में भी हमारे स्कूल या कालेज में एक न एक ऐसी टीचर जरूर होती हैं, जिनकी क्लास में स्टूडेंट्स (खासकर लड़कों) की अटेंडेंस फुल होती है.

गुरु-शिष्य के रिश्ते को चरितार्थ करते हैं बौलीवुड के ये गानें

फिल्में समाज का आईना होती हैं और इसी को चरितार्थ करते हुए बौलीवुड में तकरीबन हर विषय पर फिल्में बनी हैं और अधिकतर पर गाने भी लिखे और फिल्माए गए हैं. गुरु-शिष्य के अनूठे रिश्ते को लेकर बौलीवुड में ऐसी तमाम फिल्में बनी हैं जिन्होंने दर्शकों का दिल जीता है. अब चाहे वायलेन बजाता टीचर ‘राज’ हो या फिर अपने स्‍टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जाता ‘प्रभाकर आनंद’, फिल्‍मों के इन टीचर्स ने सभी का दिल जीत लिया. चाहे फैशन का स्‍टाइल हो या फिर अपने स्‍टूडेंट्स के साथ स्‍पेशल कनेक्‍शन, इन फिल्‍मों ने टीचर्स के कई चेहरों को सामने रखा.

आज हम आपको ऐसी ही कुछ गानों के बारे में बताने जा रहे हैं जो गुरु-शिष्य के रिश्ते को चरितार्थ करते हैं.

तू धूप है छम से बिखर..

आमिर खान स्टारर एक ऐसी फिल्म जिसने तमाम टीचर्स और स्टूडेंट्स को न सिर्फ भावुक कर दिया बल्कि सोचने के लिए एक नई दिशा दी. सन 2007 में आई आमिर खान की फिल्म तारे जमीन पर उस दशक की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही.

आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं..

1954 में रिलीज हुई फिल्म जागृति का गाना आओ बच्चों तुम्हें सिखाए आज भी शिक्षक दिवस के मौके पर कई स्कूलों में बजाया जाता है. इस फिल्म को 1956 में फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया था.

अपनी तो पाठशाला मस्ती की पाठशाला..

2006 में रिलीज हुई मिस्टर परफेक्शनिस्ट यानि आमिर खान की फिल्म रंग दे बसंती का निर्देशन और प्रोडक्शन राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने संभाला था. फिल्म का गाना ‘अपनी तो पाठशआला, मस्ती की पाठशाला’ आज भी स्टूडेंट्स के पसंदीदा गानों की लिस्ट शामिल है.

ऐ खुदा मुझको बता…

सन 2010 में आई फिल्म पाठशाला में शाहिद कपूर, आयशा टाकिया, श्रद्धा आर्या, अली आजी, सुशांत सिंह और नाना पाटेकर अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म भारतीय एजुकेशन सिस्टम और इसके भविष्य पर एक कटाक्ष थी.

चक दे ओ चक दे इंडिया..

फिल्म ‘चक दे इंडिया’ हौकी गेम पर आधारित फिल्म थी. इस फिल्म में शाहरुख खान कोच के रोल में नजर आए थे, जो अपनी टीम को खेलने के ट्रिक्स तो सिखाते ही हैं, साथ ही वह अपनी टीम में एकता और खेल भावना भी लेकर आते हैं और सिखाते हैं कि टीम की तरह खेलने पर ही कोई जीत सकता है.

कुछ इस तरह करें पढ़ाई के साथ कमाई

समय के साथ-साथ जीवन में काफी बदलाव आते हैं. महंगाई के इस दौर में विद्यार्थियों को पैरैंट्स से मिलने वाली पाकेट मनी कम लगती है. ऐसे में यंगस्टर्स के पास अपनी कमाई के कई विकल्प हैं. आप पढ़ाई के साथ कुछ घंटे काम करके कालेज के दौरान 10 से 20 हजार रुपए मंथली कमा सकते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ कुछ घंटे देकर पैसा कमाने के कुछ तरीके जिसमें आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी.

आइये जानते हैं ऐसे विकल्पों के बारे में.

सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट

सोशल मीडिया के बढ़ते असर को देखते हुए कार्पोरेट कंपनियां, पालिटीशियन, सरकारी कार्यालयों आदि में सोशल मीडिया मैनेज करने वालों की मांग तेजी से बढ़ी है. इसमें वैसे लोगों की मांग बढ़ी है, जिसको फेसबुक, ट्विटर, लिंक्‍ग‍इन, यूट्यूब आदि की समझ हो और इसको अच्‍छे से मैनेज करने की क्षमता रखते हों. अगर, आप कालेज स्‍टूडेंट हैं तो इस काम को पढ़ाई के साथ बेहतर तरीके से कर सकते हैं. इसके लिए कोई एक्‍सट्रा नालेज या स्‍पेस की जरूर नहीं होगी. आपको कंटेंट और टेक्‍नोसेवी होना होगा.

औनलाइन रीसर्चर

आज के इस काम्पिटेटिव दौर में ज्‍यादातर कंपनियां प्रोडक्‍ट लान्‍च करने से पहले औनलाइन रिसर्च करती हैं. इसके अलावा कालेज भी अलग-अलग टापिक पर रिसर्च कराते हैं. इसके लिए कालेज के डिपार्टमेंट्स पेड रिसर्च को पार्ट टाइम हायर करते हैं. हालांकि, इस फील्‍ड में काम करने के लिए आपके पास पहले से थोड़ा-बहुत अनुभव होना चाहिए. अगर, आप किसी प्रोडक्‍ट या सबजेक्‍ट को लेकर औनलाइन रिसर्च कर रहे हैं तो उस के विषय में पहले से जानकारी बहुत जरूरी है. तभी आप सही तरीके से रीसर्च कर सकते हैं.

इवेंट प्‍लानिंग

अगर, आप किसी मेट्रो सिटी (दिल्‍ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्‍नई या बेंगलुरू) में पढ़ाई कर रहे हैं तो आप रोज किसी न किसी इवेंट से रू-ब-रू जरूर हो रहे होंगे. बड़े शहरों के अलावा टियर टू और थ्री शहरों में इवेंट और्गेनाइजर की मांग तेजी से बढ़ी है. इसके चलते इस सेक्‍टर में काम करने वाली कंपनियों को नए हैंड की जरूरत पड़ती है. वे इसके लिए पार्ट टाइम लड़के या लड़कियों को हायर करते हैं.

इवेंट कंपनी में पार्ट टाइम जौब की टाइमिंग 4 से 6 घंटे की होती है. इवेंट कंपनी में काम करने के सबसे बड़ा फायदा उन स्‍टूडेंट को मिलता है जो मैनजमेंट (बीबीए या एमबीए) कर रहे होते हैं. उनको इवेंट के दौरान मैनजेमेंट के गुण सीखने को मिलते हैं. साथ ही वो ऐसे चैलेंज से भी अवगत हो जाते हैं, जो काम के दौरान भविष्‍य में उनके सामने आने वाले होते हैं.

कंटेंट एडिटिंग एंड राइटिंग

अगर, आपको लिखने का शौक या भाषा पर अच्‍छी पकड़ है तो आप कंटेंट का काम कर अच्‍छी खासी रकम कमा सकते हैं. इसमें आप कंटेंट एडिटिंग से लेकर राइटिंग का काम कर सकते हैं. कंटेंट एडिटर के तौर पर आप जिस भाषा में काम करेंगे उस भाषा की ग्रामर पर अच्‍छी पकड़ होनी चाहिए. वहीं फ्रीलांस राइटर के तौर पर काम करने के लिए आपको लिखने की शैली आनी चाहिए.

आपकी पढ़ाई को और भी आसान बना देंगे ये ऐप्स

बचपन में मम्मी-पापा और स्कूल-कालेज में शिक्षकों ने हमें बहुत कुछ सिखाया. लेकिन आज जिंदगी की बढ़ती रफ्तार और डिजिटल दौड़ में टेक्नोलाजी से मिले तमाम गैजेट्स और सर्विसेज भी हमारे लिए किसी टीचर से कम नहीं हैं, जिनसे हम हर समय कुछ न कुछ सीखते ही रहते हैं.

कंप्यूटर और आईटी के साथ शिक्षा व्यवस्था में भी खूब बदलाव हुआ है. मोटी कापी-किताबों की जगह अब टैबलेट और स्मार्टफोन ने ले ली है. टेक्नोलाजी के दौर में विद्यार्थियों की जीवनशैली में काफी बदलाव आया है. पढ़ाई हो या पर्सनल लाइफ छात्र सभी जगह टैबलेट और एप्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

विद्यार्थियों के इसी रुझान को देखते हुए कंपिनयां भी एक से बढ़कर एक एप्लीकेशन बाजार में पेश कर रही हैं. आज हम कुछ खास एप्लीकेशन्स की बात कर रहे हैं, जो छात्रों की एजुकेशनल लाइफ को आसान बना सकते हैं.

एवरनोट

कालेज लाइफ में अगर सबसे ज्यादा कुछ होता है तो वो है नोट्स बनाना, नोट्स से छात्रों के बैग भरे रहते हैं ऐसी स्थिति में आप चाहें तो इस ऐप का सहारा ले सकते हैं. इसमें आप अपने डेली नोट को एक मौडर्न तरीके से बना सकते हैं. इसके वीडियो तथा इमेज ऐड करने के फीचर के माध्यम से आप नोट्स के साथ साथ कालेज के लेक्चर को इंटिग्रेट कर सकते हैं. इससे नोट्स को डेट वाइज सेट किया जा सकता है. इसमें नोट्स की शेयरिंग का औपशन भी दिया गया है. इसमें सेव किए गए नोट्स को आप टाइटल या कीवर्ड से खोज सकते हैं.

रिकार्डाइड

रिकार्डाइड की सहायता से कोई भी स्टूडेंट नोट्स की व्वाइस रिकार्डिंग कर सकता है. क्लासरुम में बैठकर आप लेक्चर को रिकार्ड कर सकते हैं और फिर उसे बिना किसी दिक्कत के दोबारा सुन भी सकते हैं. यह ऐप उन छात्रों के लिए काफी मददगार है जिन्हें क्लास में लेक्चर के दौरान नोट्स को लिखने और सुनने में दिक्कत होती है. इस ऐप की मदद से आप एक बार में एक घंटे तक का लेक्चर सेव कर सकते हैं.

फोटो मैथ

मैथ्स एक ऐसा विषय है जो काफी लोगों को डरवाने सपने देता है. तो अगर आप भी उनमें से एक हैं तो आज हम आपके लिए ले कर आये हैं इस समस्या का समाधान. फोटो मैथ नामक ऐप द्वारा आप मुश्किल से मुश्किल सवालो को चंद मिनटों में हल कर सकते हैं. सवाल को हल करने के लिए केलव आपको उस सवाल का फोटो खिंच कर अपलोड करना है और अपलोड करते ही आपका जवाब चंद मिनटों में आपके सामने होगा.

शेयर योर बोर्ड

ऐंड्रायड ऐप शेयर योर बोर्ड से क्लास में लगे व्हाइट बोर्ड की इमेज कैप्चर कर सकते हैं और बाद में इसे आसानी से समझ सकते हैं. शेयर योर बोर्ड व्हाइट बोर्ड की परफेक्ट इमेज लेने में मददगार है. व्हाइट बोर्ड की कैप्चर की गई इमेज को बड़ा साइज करके देखा जा सकता है और बोर्ड पर ‌लिखे मैटर को पढ़ा जा सकता है.

इसके साथ ही इसमें यह भी सुविधा है कि इसे साथी छात्रों को भी शेयर किया जा सकता है. इसकी मदद से आप व्हाइट बोर्ड पर लिखे गए मैटर को एडिट भी कर सकते हैं.‌ जिन छात्रों से क्लास मिस हो जाती है, उनके लिए यह ऐप वरदान साबित हो सकता है. क्लास मिस होने पर व्हाइट बोर्ड का फोटो कैप्चर करके बाद में क्लास में पढ़ाए गए टापिक को समझा सकते हैं.

क्विकपीडिया

क्विकपीडिया की मदद से आप अपने फोन पर विकीपीडिया को आसानी से एक्सिस कर सकते हैं. इसकी मदद से आप फीचर पेज, न्यूज और अन्य कई तरह की विकी‌पीडिया पर सर्च की जाने वाली इनफारमेशन को हासिल कर सकते हैं.

क्विकपीडिया किसी भी टापिक से संबंधित विश्वसनीय सूचना आपके स्मार्टफोन की स्क्रीन पर प्रदान करता है. इसकी मदद से आर्टिकल को एक्सप्लोर किया जा सकता है. इसमें फौन्ट को बड़ा और छोटा करने की भी सुविधा है. इसके अलावा आप इसकी सहायता से सर्च किए गए मैटर को खुद को या अपने दोस्त को भी भेज सकते हैं.

पीडीएफ कनवर्टर

अक्सर ऐसा होता है की हम अपने नोट्स तथा अन्य पढ़ाई से सम्बंधित चीजों की फोटो लेके रख लेते हैं तो ये ऐप आपके काफी काम की होने वाली है. इस ऐप में आप इमेज को सेलेक्ट कर एक पीडीएफ फाइल में कन्वर्ट कर सकते हैं, जिये आप बाद में आसानी से पढ़ सकते हैं. इस पीडीएफ फाइल को आप अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कर सकते हैं.

आखिर क्यों सिंधु ने अपने गुरु के लिए कहा ‘आई हेट माई टीचर’

भारत में गुरु शिष्य परंपरा बहुत पुरानी है लेकिन भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने वाले गुरु गोपी और उनकी शिष्या पीवी सिंधू आजकल इस परंपरा को नया आयाम दे रहे हैं.

22 वर्षीय सिंधू ने पुलेला गोपीचंद की देखरेख में विश्व बैडमिंटन के शिखर को छुआ है. सिंधू ने साल 2016 में रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता इसके बाद हाल ही में आयोजित विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं.

ऐसे में शिक्षक दिवस के अवसर पर सिंधू ने अपने गुरु गोपीचंद को अनोखे अंदाज में संदेश दिया है. इसके लिए सिंधू ने स्पोर्ट्स ड्रिंक ब्रांड गैटोरेड ने गुरुओं को लेकर एक शार्ट फिल्म बनाई है. इस फिल्म का शीर्षक है ‘आई हेट माई टीचर’.

इस फिल्म में सिंधु के सफर और कोच गोपीचंद के गुरु-शिष्य के संबंधों को दिखाया गया है.  सिंधु ने अपने बयान में कहा है, “कोच ने मेरे लिए बहुत मेहनत की और उनके बड़े ख्वाब थे. इस टीचर डे पर मैंने अपनी कामयाबी को उन्हें डेडिकेट करने का फैसला लिया.” इस शार्ट फिल्म को सिंधू ने प्रोड्यूस किया है.

एक मिनट दो सेकेंड लंबी इस शार्ट फिल्म की शुरुआत में सिंधू ये कहती हैं, ‘आई हेट माई टीचर’, वो मेरी चोटों के निशान का कारण हैं, वो मुझपे चिल्लाते हैं. मैं जब पसीने से भीगती हूं गिरती हूं और जब सांस भी नहीं ले पाती हूं तब वो खुश होते हैं.

सिट-अप्स लगाती दिख रही सिंधू के पास बैठे गोपी की आवाज आती है, जो तुम कर रही हो ये काफी नहीं है. सिंधू आगे कहती हैं,  वो मेरे दर्द का कारण हैं, वो मेरी नींद की चिंता नहीं करते. आई हेट हिम क्योंकि वो कभी हार नहीं मानते, इसलिए भी क्योंकि वो हमेशा सही होते हैं. सबसे ज्यादा मैं उन्हें इसलिए नापसंद करती हूं क्योंकि वो मुझ पर इतना विश्वास करते हैं जितना मुझे खुद पर नहीं है. थैक्य यू कोच!

आप भी देखें यह शार्ट फिल्म.

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