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स्टीव स्मिथ की तुलना में विराट कोहली हैं बेहतर बल्लेबाज : माइकल क्लार्क

आस्ट्रेलिया टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने शार्टर फार्मेट में टीम इंडिया के कप्‍तान विराट कोहली को आस्‍ट्रेलिया के कप्‍तान स्‍टीव स्मिथ से बेहतर बल्‍लेबाज बताते हुए उनकी इस श्रेष्‍ठता पर मुहर लगा दी है. आस्‍ट्रेलिया के कामयाब कप्‍तानों में गिने जाने वाले क्‍लार्क का मानना है कि कोहली की अगुआई में भारत के प्रदर्शन में सुधार का सबसे बड़ा कारण यह है कि मौजूदा भारतीय कप्तान हार से नहीं डरते. जीत के लिए वे आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए टीम की अगुवाई करते हैं.

क्लार्क ने एक चर्चा के दौरान कोहली की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा, ‘मैं हमेशा से सौरव गांगुली की कप्तानी का कायल रहा हूं. वे तारीफ के हकदार है. उन्‍होंने टीम में एक माहौल तैयार किया जिसे महेंद्र सिंह धोनी और कोहली ने अपने अपने तरीकों से आगे बढ़ाया.

कोहली और आस्ट्रेलिया के मौजूदा कप्तान स्टीव स्मिथ की बल्लेबाजी और कप्तानी की तुलना के बारे में पूछने पर क्लार्क ने स्वीकार किया कि भारतीय कप्तान बेहतर वनडे बल्लेबाज हैं. उन्‍होंने कहा, ‘विराट कोहली एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहतर बल्लेबाज हैं, लेकिन दोनों के बीच मामूली अंतर है. दोनों काफी अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन कप्तान के रूप में यह महत्वपूर्ण होता है कि टीम आपके नेतृत्व में कैसा प्रदर्शन कर रही है. मैं स्मिथ को बेहतर टेस्ट बल्लेबाज मानता हूं.’

भारत के पूर्व स्टार बल्लेबाज वीवी लक्ष्मण की नजर में भी कोहली स्मिथ की तुलना में बेहतर कप्तान हैं. उन्होंने कहा, ‘कोहली बेहतर कप्तान हैं. कोहली और स्मिथ दोनों ही युवा कप्तान हैं, लेकिन हमने देखा है कि टेस्ट में स्टीव स्मिथ पूर्वानुमान लगाने में उतने प्रभावी नहीं हैं. टेस्ट सीरीज के दौरान गेंदबाजी में बदलाव करते हुए उनके फैसले काफी अच्छे नहीं थे.’

लक्ष्मण ने कहा, ‘कोहली को धोनी जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी का भी फायदा मिलता है जो लंबे समय तक टीम की अगुआई कर चुके हैं और काफी सफल रहे हैं.’ लक्ष्मण ने इसके साथ ही कहा कि उन्हें मौजूद भारतीय टीम में कोई कमजोर पक्ष नजर नहीं आता. उन्होंने कहा, श्रीलंका दौरे पर टीम ने आक्रामकता के साथ क्रिकेट खेला और सभी 9 मैचों में अपनी जीत दर्ज कराई. हमारी जीत यह दर्शाती है कि टीम गेंदबाजी, बल्लेबाजी, क्षेत्ररक्षण सभी विभागों में सुधार कर रही है.

कौन बनेगा करोड़पति अब अमिताभ बच्चन नहीं करेंगे होस्ट..!

कौन बनेगा करोड़पति के सीजन 9 को अब अमिताभ बच्चन होस्ट नहीं करेंगे. अब इस शो पर कंटेस्टेंट से अमिताभ बच्चन के जगह कोई और एक्टर सवाल पूछता नजर आएगा. आपको बता दें  यह एक्टर और कोई नहीं बल्कि खुद बच्चन परिवार के लाडले अभिषेक बच्चन है. अभिषेक अब कौन बनेगा करोड़पति के सीजन 9 को होस्ट करते नजर आएंगे.

कौन बनेगा करोड़पति के इस सीजन को अब तक अमिताभ बच्चन ने होस्ट किया और प्रतिभागियों से जमकर सवाल पूछे, मगर अब  उनकी जगह उनके बेटे अभिषेक लेने वाले हैं.

सोनी टेलीविजन के अधिकारिक फेसबुक पेज पर जारी हुए नए प्रोमो को देखकर ऐसा ही लगता है, जिसमें अभिषेक कहते दिख रहे हैं ‘न्यू न्यू सीजन है ध्यान लगाकर देख, केबीसी अब होस्ट करेगा आपका अभिषेक’.

इस खबर ने चौंका दिया न.  लेकिन इसकी सच्चाई क्या है, आइए आपको बताते हैं. दरअसल, अभिषेक ‘केबीसी’ के सीजन 9 के एक एपिसोड में आने वाले हैं. इसमें वह ‘प्रो कबड्डी’ टीम जयपुर ‘पिंक पैंथर्स’ का प्रमोशन करते दिखाई देंगे. इसमें उनके टीम मेट्स भी दिखाई देंगे. इस एपिसोड के लिए अभिषेक शूटिंग पूरी कर चुके हैं. इस खास एपिसोड में अमिताभ अपने बेटे का स्वागत करते दिखाई देंगे. यानी अमिताभ अपने बेटे के लिए एक स्पेशल एपिसोड होस्ट करने जा रहे हैं.

यह एपिसोड वाकई खास होने वाला है. वैसे यह पहला एपिसोड नहीं है, जिसमें अभिषेक केबीसी में दिखाई देने वाले हैं. इससे पहले भी वह सीजन चार और आठ में दिखाई दिए हैं. सीजन आठ में वह फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के प्रमोशन के लिए भी केबीसी के मंच पर आ चुके हैं.

स्क्रीन पर मैं कितनी भी देर दिखूं, मुझे फर्क नहीं पड़ता: डायना पेंटी

मोडलिंग से एक्टिंग की तरफ बढ़ी डायना पेंटी अब जल्‍द ही फिल्‍म ‘लखनऊ सेंट्रल’ में नजर आने वाली हैं. इससे पहले वह ‘कौकटेल’ और ‘हैप्पी भाग जाएगी’ जैसी फिल्‍मों में नजर आ चुकी हैं. डायना का कहना है कि अगर किरदार अच्‍छा हो, तो उन्‍हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि उनका रोल फिल्‍म में कितनी देर का है.

डायना ने कहा, ‘अगर किरदार दमदार और असरदार हो, तो स्‍क्रीन पर मैं कितनी देर दिखती हूं इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह मेरी प्राथमिकता नहीं है. मैं हमेशा किरदार के असर और उनके मायनों पर गौर करती हूं, रोल की लंबाई पर नहीं.’

बता दें कि डायना फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ में पुरुषों के समाज में एक स्‍ट्रांग महिला का किरदार निभा रही हैं. डायना ने अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा, ‘मैं इस फिल्‍म में गायत्री का किरदार निभा रही हूं, जो एक एनजीओ के लिए काम करती है. एक ऐसा एनजाओ, जो कैदियों के जेल से रिहा होने के बाद उन्‍हें एक अच्‍छी सामाजिक जिंदगी जीने में मदद करती है. उनका कहना है कि यह एक मजेदार किरदार है क्‍योंकि इस फिल्म में वह जेल के भीतर काम कर रही हैं.

फिल्म ‘लखनऊ सेंट्रल’ का हाल ही में ये ट्रेलर रिलीज हुआ था.

इसके बाद डायना जान अब्राहम की फिल्‍म में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म का नाम शांतिवन है. यह जबर्दस्त एक्शन और ड्रामा से भरपूर फिल्म है. 1998 में भारतीय सेना के पोखरण रेंज में पांच बार सीरीज में परमाणु परीक्षण किया गया था. डायना ने अपनी इस फिल्म के बारे में बताया कि उन्होंने इस पटकथा को पढ़कर ही फिल्म को साइन कर लिया. यह एक सत्य घटना पर आधारित है. साथ ही भारत के इस परमाणु परीक्षण को हर कोई जानने में इच्छुक है. उन्होंने यह भी बताया कि यह फिल्म उनकी पहली एक्शन ड्रामा फिल्म है. यह काफी चुनौतीपूर्ण किरदार होगा जिसमें ढेर सारा दिमागी खेल शामिल होगा.

डायना ने फिल्‍म ‘कौकटेल’ से अपने फिल्‍मी करियर की शुरूआत की थी. इस फिल्म में वह दीपिका पादुकोण और सैफ अली खान के साथ नजर आईं. बता दें कि अपनी पहली फिल्‍म ‘कौकटेल’ के पूरे 4 साल बाद डायना अपनी दूसरी फिल्‍म ‘हैप्पी भाग जाएगी’ में नजर आईं.

अब 999 रुपये में करें हवाई सफर, ये कंपनी लेकर आई है खास औफर

एयरलाइन्‍स कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा का फायदा सीधा ग्राहकों को मिल रहा है. कंपनियां अपने उपभोक्‍ताओं को लुभाने के लिए समय समय पर आकर्षक औफर पेश करती रहती हैं. एक के बाद एक औफर पेश करने वाली एयर एशिया की तरफ से ग्राहकों के लिए नया औफर पेश किया गया है. यदि आप भी विदेश यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं तो यह औफर आपके लिए सबसे किफायती साबित हो सकता है.

एयर एशिया के नए बिग सेल औफर के तहत कंपनी मिनिमम 999 रुपए के टिकट पर घरेलू उड़ान की पेशकश कर रही है. वहीं यदि आपका विदेश जाने का मन है तो कंपनी इंटरनेशनल ट्रैवलिंग का औफर महज 1999 रुपये में पेश कर रही है.

एयर एशिया का यह बिग सेल औफर सीमित समय के लिए उपलब्‍ध रहेगा. जल्‍द आप भी इस औफर का लाभ उठा सकते हैं. कंपनी के मुताबिक टिकट के लिए 1999 रुपये से अतिरिक्‍त कोई चार्ज नहीं देना होगा. इसमें सभी तरह का टैक्‍स इनक्‍लूड है.

एयर एशिया के बिग सेल औफर का लाभ आप 1 मार्च 2018 से 21 नवंबर 2018 के बीच ट्रैवल करने के लिए उठा सकते हैं. यानी इन आठ महीने के दौरान आप कंपनी के इस किफायती औफर का फायदा उठाए. बिग सेल औफर के तहत 11 सितंबर से बुकिंग शुरू हो चुकी है, जो कि 17 सितंबर 2017 तक चलेगी. इस सेल के तहत आप अलग अलग रूट पर यात्रा कर सकते हैं.

घरेलू उड़ान के लिए सबसे सस्‍ता टिकट 999 रुपए में बागडोगरा से कोलकाता रूट का है. इसके बाद 1,099 रुपए की टिकट भुवनेश्‍वर से कोलकाता, कोच्चि से बंगलुरु,  गोवा से बंगलुरु, गुवाहाटी से इंफाल और हैदराबाद से बंगलुरु रूट की है. इन रूट पर यह औफर केवल वनवे रूट के लिए दिया जाएगा.

एयर एशिया की इस स्‍कीम के तहत 50 लाख प्रोमो सीट्स होंगी. औनलाइन बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को ही इस औफर में सीट उपलब्‍ध कराई जाएंगी. जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि यह औफर घरेलू के साथ ही इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए भी उपलब्‍ध है, मगर यह सुविधा कुछ चुनिंदा रूट पर ही मिलेगी.

इंटरनेशनल फ्लाइट में कंपनी की तरफ से सबसे सस्‍ता एयर टिकट 1,999 रुपए का है. इसमें विशाखापटनम से कुआलालंपुर तक की यात्रा की जा सकती है. इसके अलावा कोच्चि से कुआलालंपुर और तिरुचिरापल्‍ली से कुआलालंपुर रूट की टिकट 2,999 रुपए की है. कंपनी रांची से बंगलुरु, हैदराबाद से भुवनेश्‍वर के लिए भी फ्लाइट शुरू करने की योजना पर काम कर रही है.

फिर वही अपराध : 10 साल की बच्ची से हैवानियत की इंतहा

26 नवंबर, 2016 की बात है. दोपहर के ढाई बजे थे. घड़ी पर जैसे ही मनोज कुमार की नजर पड़ी, उस के मुंह से ‘ओफ्फ…काफी देर हो गई’ की आवाज निकली. उसे कहीं जाना था, इसलिए वह फटाफट घर से निकल कर सवारी पकड़ने के लिए गांव से बाहर सड़क पर आ गया. सड़क पर पहुंच कर वह वाहन का इंतजार कर ही रहा था कि अचानक उस की नजर सड़क के बाईं पटरी पर सरपतों की झाड़ी में पहुंची. वहां पर एक लड़की की लाश पड़ी थी.

चूंकि मनोज केराकत कोतवाली का चौकीदार भी था, इसलिए वह जिज्ञासावश उस जगह पहुंच गया, जहां लाश पड़ी थी.

उस लड़की की उम्र 10-12 साल लग रही थी. वह बैंगनी रंग का कढ़ाईदार सलवारसूट पहने हुई थी. उस का गला कटा हुआ था. लाश मिलने की सूचना कोतवाली में देना उस की जिम्मेदारी थी, इसलिए जिस जगह उसे जाना था, वहां न जा कर वह सीधे केराकत कोतवाली पहुंच गया. कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार को उस ने लड़की की लाश मिलने की जानकारी दे दी. उस ने यह भी बता दिया कि लाश गांव शिवरामपुर खुर्द के रहने वाले भीम सिंह के खेत के किनारे पर है.

मनोज की सूचना पर कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार फौरन पुलिस टीम के साथ मौके की तरफ रवाना हो गए. इस की जानकारी उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी. घटनास्थल की दूरी केराकत कोतवाली से महज 12 किलोमीटर थी, इसलिए कुछ ही देर में वह मौके पर पहुंच गए.

तब तक लाश मिलने की जानकारी आसपास के क्षेत्रों में भी फैल गई थी, इसलिए वहां काफी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ भी जुट गई थी. कोतवाली प्रभारी ने लाश का निरीक्षण किया तो लग रहा था कि उस के साथ शायद दुराचार किया गया है. उसी दौरान क्षेत्राधिकारी (केराकत) राकेश पांडेय, उपजिलाधिकारी सहदेव मिश्रा भी वहां पहुंच गए. जितने लोग वहां खड़े थे, पुलिस ने उन सब से उस लड़की की शिनाख्त करानी चाही पर कोई भी उसे नहीं पहचान सका. तब पुलिस ने जरूरी काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

चौकीदार मनोज कुमार की तहरीर पर भादंसं की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. मौके से मृतका या हत्यारे के बारे में कोई ऐसी कोई चीज नहीं मिली, जिस के जरिए पुलिस आगे बढ़ सके. इस के बावजूद पुलिस अपने स्तर से ही केस की जांच करने लगी.crime-story-fir-wahi-apradh

कोतवाली प्रभारी मृतका की पहचान को ले कर उलझे हुए थे. दूसरे दिन समाचारपत्रों में यह खबर प्रमुखता से छपी तो 28 नवंबर की शाम को वाराणसी के जैतपुरा थाना क्षेत्र से कुछ लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. उन्हें जब वह लाश दिखाई गई तो आजाद कुरैशी नाम के एक शख्स ने उस की पुष्टि अपनी बेटी मुसकान के रूप में की. कोतवाली पहुंच कर उस ने अपनी बेटी के कपडे़ भी पहचान लिए.

29 नवंबर को उस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उस में दुष्कर्म की भी पुष्टि हो गई. चूंकि मुसकान की रिपोर्ट भादंवि की धारा 363 के तहत जैतपुरा थाने में 26 नवंबर को दर्ज हुई थी. इसलिए एसएसपी नितिन तिवारी के निर्देश पर कोतवाली प्रभारी नरेंद्र कुमार ने यह केस थाना जैतपुरा को स्थानांतरित कर दिया.

अब जैतपुरा थानाप्रभारी रमेश यादव यह जानने में लग गए कि मुसकान का हत्यारा कौन है. इस संबंध में उन्होंने मुसकान के मातापिता से बात की तो मां रजिया सुलतान ने बताया कि पड़ोस के एक आदमी ने मोहल्ले के ही पप्पू गुप्ता के साथ मुसकान को मल्लाही बगीचे की तरफ जाते देखा था. पप्पू को गांव के सभी लोग जानते थे कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का है. इसलिए उन्हें बेटी को ले कर चिंता हुई. जब वह पप्पू के घर गईं तो वह नहीं मिला.

रजिया से बात करने के बाद थानाप्रभारी को भी पप्पू पर ही शक हो गया. पुलिस ने उस की तलाश के लिए मुखबिर भी सक्रिय कर दिए. पुलिस ने 29 नवंबर को ही मुखबिर की सूचना पर 30 वर्षीय पप्पू गुप्ता को दबोच लिया. वह कहीं भागने की फिराक में था.

जब पुलिस ने उस से मुसकान के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो वह बहुत देर तक टिक नहीं पाया और उस ने स्वीकार कर लिया कि मुसकान की हत्या उस ने ही की थी. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह मानवता को शर्मसार करने वाली निकली—

उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के जैतपुरा के अंतर्गत एक मोहल्ला है शक्कर तालाब. यहीं पर आजाद कुरैशी अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रजिया सुलतान के अलावा 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. आजाद कुरैशी मोहल्ले में ही चिकन की दुकान चलाता था.crime-story-fir-wahi-apradh

घर के काम निपटाने के बाद रजिया घर में खाली रहती तो उस ने अखबार की थैलियां बनानी शुरू कर दीं. उस के पास थैलियों की मांग बढ़ने लगी तो कभीकभार बच्चे भी उस के काम में शरीक हो जाते थे. इस तरह इस काम से उसे अतिरिक्त आमदनी हो जाती थी.

26 नवंबर का दिन था. सुबह के यही कोई साढ़े 9 बज रहे थे. रजिया घर के कामकाज में लगी हुई थी कि तभी उसी के मोहल्ले का पप्पू गुप्ता उस के दरवाजे पर आया. वह गली में घूमघूम कर हाथ ठेले पर मूंगफली के दाने, चने आदि बेचता था. उस के लिए वह थैलियां रजिया से ही ले जाता था. उस दिन भी वह थैलियां लेने आया था. जैसे ही पप्पू ने दरवाजा खटखटाया तो दरवाजे पर रजिया की ननद रेशमा आई. वह उस से बोली, ‘‘अभी थैलियां तैयार नहीं हैं. थोड़ी देर में हो जाएंगी.’’

इस पर वह बोला, ‘‘ठीक है, मैं 20 मिनट रुक जाता हूं. तैयार कर के दे दीजिए.’’ इतना कह कर वह वहीं रुक गया, जबकि रेशमा घर के अंदर चली गई. इतने में रजिया की 10 वर्षीय बेटी मुसकान घर का कूड़ा फेंकने के लिए बाहर निकली तो पप्पू ने उसे 10 रुपए दे कर नजदीक की दुकान से पान लाने को कहा.

पैसे ले कर मुसकान पान की दुकान की ओर गई तभी पीछेपीछे पप्पू भी हो लिया. चूंकि पप्पू के मन में कुछ और ही था, इसलिए वह मुसकान को पान की दुकान से बहलाफुसला कर अपनी स्कूटी पर बिठा कर वाराणसी से करीबन 45 किलोमीटर दूर जौनपुर जिले की केराकत कोतवाली क्षेत्र के एक खेत में ले गया. वहां डराधमका कर उस ने उस मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया फिर बाद में ब्लेड से उस का गला भी रेत डाला.

उस की हत्या करने के बाद वह स्कूटी से वाराणसी लौट आया था और छिपछिप कर लोगों पर नजर रखने लगा. जब उसे पता चला कि पुलिस उस के पीछे पड़ी है तो उसे वहां से कहीं भागना ही उचित लगा. लेकिन उस से पहले ही वह पुलिस के हाथ लग गया.

उधर मुसकान कूड़ा फेंकने के बाद भी घर नहीं आई तो रजिया उसे घर से बाहर देखने निकली. पर वह नहीं दिखी और न ही वहां पप्पू गुप्ता दिखा जो थैलियां लेने के इंतजार में दरवाजे के बाहर खड़ा था.

रजिया उसे पड़ोसियों के यहां खोजने गई, पर वह वहां भी नहीं मिली. बेटी की चिंता में रजिया की धड़कनें तेज होने लगीं. खबर मिलने पर रजिया का पति आजाद कुरैशी भी दुकान से घर चला आया.

वह भी परिवार और मोहल्ले के लोगों को ले कर आसपास बेटी की खोज में जुट गया लेकिन उस का कहीं कोई पता नहीं चल पाया. उसी दौरान मोहल्ले के ही एक आदमी ने बताया कि मुसकान पप्पू के साथ कुछ देर पहले मल्लाही बगीचे की ओर जाते दिखी थी.

यह खबर मिलते ही रजिया और उस के पति ने पप्पू के घर का रुख किया. घर पर पप्पू तो नहीं मिला बल्कि उस की पत्नी नेहा (काल्पनिक नाम) मिली. उस ने बताया कि पप्पू घर पर नहीं है. वह सुबह से ही निकले हैं.

पप्पू आपराधिक प्रवृत्ति का था. मोहल्ले के सभी लोग उसे अच्छी तरह जानते थे. सन 2004 में उस ने एक 7 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या की कोशिश की थी.

उस बच्ची के बयान के बाद उसे 10 साल की सजा हुई थी. वह 10 साल की सजा काट कर जेल से हाल ही में बाहर आया था. ऐसे में उस के साथ मुसकान के गायब होने से उस के परिवार वाले ही नहीं, बल्कि मोहल्ले के लोग भी परेशान और आशंकित थे.

अंत में सभी लोग एक राय हो कर सीधे जैतपुरा थाना पहुंच गए, जहां थानाप्रभारी रमेश यादव को पूरी बात बताने के साथ बेटी मुसकान का पता लगाने की गुहार लगाई. तब पुलिस ने 26 नवंबर को ही अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 363 के तहत मामला दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जैतपुरा थाना पुलिस मुसकान और पप्पू को तलाशने लगी. पर दोनों का ही पता नहीं लगा. मुसकान का पता न लगने पर मोहल्ले के लोगों में भी आक्रोश भर गया. लोगों ने पुलिस को आंदोलन करने की भी धमकी दे डाली.

तीसरे दिन सोमवार 29 नवंबर, 2016 को जैसे ही अखबारों के माध्यम से जौनपुर में बच्ची का शव पाए जाने की खबर आजाद कुरैशी को हुई तो वह परिजनों के साथ जौनपुर पहुंच गए. तब पता चला कि वह लाश किसी और की नहीं, बल्कि मुसकान की ही थी.

पप्पू गुप्ता से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे भादंवि की धारा 363, 366, 367(च), 302, आईपीसी व पोक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक जहां उस की जमानत नहीं हो पाई थी, वहीं उस के किए पर उस के 2 छोटे भाई और पत्नी भी शर्मसार हैं. उन्हें मोहल्ले वालों के तानों से दोचार होना पड़ रहा है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्रेम त्रिकोण : एक नहीं दो लोगों से थे इस औरत के नाजायज संबंध

12 अप्रैल, 2017 को जैसेजैसे रात गहराती जा रही थी, जगमोहन की चिंता बढ़ती जा रही थी. कभी वह दरवाजे की ओर ताकते तो कभी टिकटिक करती घड़ी की ओर. इस की वजह यह थी कि उन का जवान बेटा शिवकुमार शाम 4 बजे घर से निकला था तो अभी तक लौट कर नहीं आया था. परेशानी की बात यह थी उस का मोबाइल फोन स्विच औफ आ रहा था. बेटे से संपर्क नहीं हो सका तो जगमोहन ने रिश्तेदारों तथा उस के यारदोस्तों से पूछा, लेकिन कोई भी उस के बारे में कुछ नहीं बता सका. उन्होंने अपनी रिश्तेदार ममता से भी उस के बारे में पूछा था, उस ने भी कुछ नहीं बताया था.

जगमोहन ने वह रात चहलकदमी करते गुजारी. सवेरा होते ही जब उन्होंने पड़ोसियों से बेटे के गायब होने की चर्चा की तो किसी ने बताया कि वेदप्रकाश के बाग में पेड़ से एक युवक की लाश लटक रही है. जगमोहन पड़ोसियों के साथ वहां पहुंचे तो पेड़ से लटक रही लाश देख कर चीख पड़े.

क्योंकि वह लाश उन के बेटे शिवकुमार की थी. थोड़ी ही देर में यह बात पूरे गांव में फैल गई. फिर तो पूरा गांव वेदप्रकाश के बाग में इकट्ठा हो गया. लोगों का यही कहना था कि शिवकुमार ने फांसी लगा कर आत्महत्या की है. लेकिन जगमोहन यह बात कतई मानने को तैयार नहीं था. किसी ने फोन द्वारा इस घटना की सूचना थाना घाटमपुर पुलिस को दे दी थी.

थाना घाटमपुर के थानाप्रभारी अरविंद कुमार सिंह ने मिली सूचना की जानकारी अपने अधिकारियों को दी और खुद पुलिस बल के साथ बडेरा गांव पहुंच गए. उस समय तक बाग में काफी भीड़ लग चुकी थी. घटनास्थल पर मौजूद जगमोहन ने अरविंद कुमार सिंह को बताया कि फांसी के फंदे पर लटक रहा युवक उन का बेटा शिवकुमार है, जो कल शाम 4 बजे से गायब था.

अरविंद कुमार सिंह ने बारीकी से घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र 30 साल के आसपास थी. वह अपनी ही शर्ट के फंदे से लटक रहा था. उस के पैर जमीन को छू रहे थे. उस के शरीर पर भी चोटों के निशान थे. इस सब से यही लग रहा था कि पहले मृतक की जम कर पिटाई की गई थी. उस के बाद उसे फांसी पर लटकाया गया था. देखने में ही मामला पूरी तरह से संदिग्ध लग रहा था.

अरविंद कुमार सिंह लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे थे कि एसपी (ग्रामीण) सुरेंद्रनाथ तिवारी और सीओ (घाटमपुर) जितेंद्र कुमार भी आ गए. अधिकारियों ने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस के बाद मृतक के पिता जगमोहन से पूछताछ की गई. जगमोहन ने बताया कि उस के बेटे ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उस की हत्या की गई थी और गुमराह करने के लिए लाश को यहां लटका दिया गया है.

‘‘तुम्हें क्या किसी पर शक है?’’ एसपी सुरेंद्रनाथ तिवारी ने पूछा.

‘‘जी साहब, मुझे गांव की ममता और उस के प्रेमी पप्पू पर शक है.’’ जगमोहन ने कहा.

सुरेंद्रनाथ तिवारी ने थानाप्रभारी को निर्देश दिया कि लाश की पोस्टमार्टम की काररवाई के बाद ममता और उस के प्रेमी पप्पू से पूछताछ की जाए. मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी अरविंद कुमार ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया.Crime thriller love story

ममता बडेरा गांव के ही अमित की पत्नी थी. अरविंद कुमार ने ममता को थाने बुलवा लिया. उस से शिवकुमार की मौत के बारे में पूछताछ की गई तो वह साफ मुकर गई कि उसे कुछ नहीं पता. इस का कहना था कि शिवकुमार उस की जातिबिरादरी का तो था ही और रिश्तेदार भी था. भला वह उस की हत्या क्यों करेगी. उस के घर वाले उसे झूठा फंसा रहे हैं.

ममता के साथ उस का 8 साल का बेटा कल्लू भी था. ममता उसे अपने साथ लाई थी. अरविंद कुमार ने उस मासूम को एकांत में ले जा कर उस से प्यार से पूछा तो उस ने सारा भेद खोल दिया. उस ने बताया कि उस की मम्मी और पप्पू चाचा ने मिल कर शिवकुमार चाचा को खूब पीटा था. उस के बाद रात में ही दोनों शिवकुमार चाचा को घर के बाहर ले गए थे.

बच्चे के बयान के बाद थानाप्रभारी ने ममता पर सख्ती की तो वह टूट गई. उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. उस ने बताया कि हालात ऐसे बन गए कि उसे शिवकुमार की हत्या करनी पड़ी. इस के बाद पुलिस उस के प्रेमी पप्पू को भी हिरासत में ले कर थाने ले आई गई.

दोनों से की गई पूछताछ में शिवकुमार की हत्या के पीछे प्रेमत्रिकोण में की गई हत्या की कहानी सामने आई, जो इस प्रकार थी-

उत्तर प्रदेश के कानपुर (देहात) जनपद के डेरापुर थाने के तहत एक गांव है मटेरा. इसी गांव में जयकुमार अपने परिवार के साथ रहता था. उस के पास खेती की जो थोड़ीबहुत पुश्तैनी जमीन थी, उसी के सहारे वह अपना परिवार पाल रहा था.

उस की 3 बेटियां थीं, जिन में ममता सब से छोटी थी. बड़ी बेटियों की शादी करने के बाद छोटी बेटी ममता भी शादी के लायक हो गई थी. वह उस के हाथ पीले कर के चिंतामुक्त हो जाना चाहता था. इसलिए उस के लिए भी लड़का देखने लगा. उसे किसी से अमित बारे में पता चला तो वह उसे देखने पहुंच गया.

अमित कानपुर जनपद के कस्बा घाटमपुर से 2 किलोमीटर दूर बडेरा गांव का रहने वाला था. उस के पास भी खेती की ठीकठाक जमीन थी. उस के बड़े भाई अमन की शादी हो चुकी थी. अमित का मन न तो पढ़ाई में लगा और न ही खेती में. वह घाटमपुर स्थित कपड़ों के एक शोरूम पर काम करने लगा था जयकुमार को अमित ठीकठाक लगा तो उस ने ममता की शादी उस के साथ कर दी.

अमित ममता को पा कर बेहद खुश था, क्योंकि ममता उस की कल्पना के अनुरूप निकली थी. हंसीखुशी से उन की गृहस्थी की गाड़ी चल निकली थी. उसी दौरान ममता एक बेटे कमल उर्फ कल्लू की मां बनी.

ममता की जेठानी बरखा तेजतर्रार थी. चूंकि ममता उस से ज्यादा खूबसूरत थी, इसलिए वह उस से ईर्ष्या करती थी. जबतब वह उसे महारानी कह कर ताने भी मारती थी. घरेलू कामकाज को ले कर भी दोनों में अकसर झगड़ा होता रहता था.

बरखा पति पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी, लेकिन अमन राजी नहीं था. कुछ दिनों बाद बरखा ने त्रियाचरित्र की ऐसी चाल चली कि दोनों भाइयों के बीच खेती की जमीन और मकान का बंटवारा तक हो गया.

अमित अलग रहने लगा तो उस के ऊपर नौकरी के अलावा जमीन की देखरेख की भी जिम्मेदारी आ गई. वह दिनरात काम में व्यस्त रहने लगा, साथ ही वह शराब भी पीने लगा. कुल मिला कर व्यस्तता की वजह से वह पत्नी को समय नहीं दे पाता था.

एक दिन ममता घर में अकेली थी, तभी शिवकुमार आ गया. वह उसी की जाति का था और गांव के पूर्वी छोर पर रहता था. वह गांव के जानेमाने किसान जगमोहन का एकलौता बेटा था. वह पिता के साथ खेती के कामों में हाथ बंटाता था. वह रंगीनमिजाज था और बनसंवर कर रहता था.

शिवकुमार की दोस्ती अमित से थी, इसलिए ममता उसे अच्छी तरह जानती थी. ममता और शिवकुमार का आमनासामना हुआ तो दोनों एकदूसरे को अपलक देखते रह गए. ममता की खूबसूरती ने शिवकुमार के दिल में हलचल मचा दी. कुछ पलो बाद ममता के होंठ फड़के, ‘‘कैसे आना हुआ शिव, कोई काम था क्या?’’

‘‘हां भाभी, अमित के पास आया था. उस ने कुछ पैसे उधार लिए थे?’’ शिवकुमार ने कहा.

‘‘वह तो हैं नहीं, अभी खेतों पर गए हैं?’’ ममता ने कहा.

‘‘तो फिर मैं चलता हूं. कल सुबह आऊंगा.’’ शिवकुमार ने कहा.

‘‘अरे वाह, ऐसे कैसे चले जाओगे. आज इतने दिनों बाद तो आए हो, कम से कम चाय तो पीते जाओ.’’ ममता ने मुसकराते हुए कहा.

शिवकुमार भी यही चाहता था. कुछ देर में ही ममता चाय बना लाई. चाय पीने के दौरान शिवकुमार की नजरें ममता की देह पर ही टिकीं रहीं. जब दोनों की नजरें टकरातीं शिवकुमार कामुक अंदाज से मुसकरा देता. उस की मुसकराहट से ममता के दिल में हलचल मच जाती.

शिवकुमार ममता से मिल कर अपने घर लौटा तो ममता का खूबसूरत चेहरा उस के दिलोदिमाग में ही घूमता रहा. दूसरी ओर ममता का भी यही हाल था. वह शिवकुमार की आंखों की भाषा पढ़ चुकी थी. इस के बाद शिवकुमार ममता के नजदीक आने की तरकीबें सोचने लगा.

ममता का पति अमित शराब पीता था. इसी का उस ने फायदा उठाया. वह देर शाम शराब की बोतल ले कर उस के घर पहुंच जाता और दोनों जाम से जाम टकराने लगते थे. खानेपीने का खर्चा शिवकुमार ही उठाता था. वह ममता पर भी खर्च करने लगा था. उस की इस दरियादिली की ममता अपने पति से खूब तारीफ करती.

एक दिन शिवकुमार दोपहर को ममता के घर पहुंचा. उस समय वह घर में अकेली थी और चारपाई पर लेटी थी. शिवकुमार को देख कर वह उठ कर खड़ी होते हुए मुसकरा कर बोली, ‘‘अरे, तुम इस वक्त कैसे चले आए, तुम्हारी महफिल तो शाम को सजती है?’’

‘‘तुम ठीक कहती हो भाभी, लेकिन आज मैं दोस्त से नहीं, तुम से मिलने आया हूं.’’

‘‘अच्छा,’’ ममता खिलखिला कर हंसी, ‘‘इरादा तो नेक है.’’

‘‘नेक है तभी तो अकेले में मिलने आया हूं. भाभी मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं.’’ शिवकुमार ने सीधे ही मन की बात कह दी.

‘‘शिव, यह तुम ने कह तो दिया पर जानते हो प्यार की राह में कितने कांटे हैं?’’ ममता ने गंभीरता से कहा, ‘‘मैं शादीशुदा और एक बच्चे की मां हूं.’’

‘‘जानता हूं, फिर भी जब तुम चाहोगी, मैं सारी बाधाओं को तोड़ दूंगा.’’ शिवकुमार ने ममता के करीब जा कर कहा.

इस के बाद शिवकुमार के गले में बांहें डाल कर ममता ने कहा, ‘‘शिव, मैं भी तुम्हें बहुत चाहती हूं. लेकिन शर्म की वजह से दिल की बात नहीं कह पा रही थी.’’

शिवकुमार ने ममता को पकड़ कर सीने से लगा लिया. फिर तो मर्यादा भंग होते देर नहीं लगी. जिस्मानी रिश्ते की नींव पड़ गई तो वासना का महल खड़ा होने लगा. शिवकुमार को जब भी मौका मिलता, वह ममता के घर आ जाता और इच्छा पूरी कर चला जाता. जब शिवकुमार का  आने का सिलसिला बढ़ने लगा तो आसपड़ोस के लोगों की नजरों में दोनों खटकने लगे. मोहल्ले में इस बारे में चर्चा होेने लगी तो उड़तेउड़ते यह खबर अमित के कानों तक पहुंच गई.

अमित अपनी पत्नी ममता पर बहुत विश्वास करता था. पर इस बात ने उसे विचलित कर दिया. उसे पत्नी और विश्वासघाती दोस्त पर बहुत गुस्सा आया. उस ने शिवकुमार को खूब खरीखोटी सुनाई और ममता की जम कर पिटाई कर दी. ममता की जेठानी बरखा ने इस बात को चटकारे ले कर खूब प्रचार किया.

अमित की सख्ती के बाद शिवकुमार का उस के घर आनाजाना बंद हो गया. काफी दिनों तक ममता भी घर से बाहर नहीं निकली. इस से अमित ने सोचा कि शायद अब वह सुधर गई है. लेकिन उस की सोच गलत निकली. इस बीच उस ने पड़ोसी गांव मानपुर के रहने वाले पप्पू यादव से संबंध बना लिए थे. वह दबंग किस्म का युवक था और ब्याज पर पैसे देता था.

अमित ने भी उस से कुछ पैसे ब्याज पर ले रखे थे. पैसा व ब्याज वसूली के लिए वह अमित के घर आता रहता था. इसी आनेजाने में ममता ने उस से नाजायज संबंध बना लिए थे.

शिवकुमार कुछ समय तक ममता से नहीं मिल सका था, लेकिन बाद में वह चोरीछिपे उस से मिलने आने लगा था. अब ममता के पप्पू और शिवकुमार दोनों से संबंध बनाए थे. वह दोनों में से किसी को भी नाराज नहीं करना चाहती थी. किसी तरह अमित को पता चल गया कि ममता ने पप्पू यादव से संबंध बना लिए हैं तो वह बहुत दुखी हुआ.

काफी समझाने पर भी जब ममता नहीं मानी तो उस ने कलह करने के बजाय उस से दूर रहना उचित समझा. अत: वह पत्नी से अलग घाटमपुर में रहने लगा. बीचबीच में वह अपने बेटे से मिलने आ जाता था.

एक दिन शिवकुमार ममता से मिल कर घर से निकल रहा था, तभी पप्पू यादव आया. शक होने पर पप्पू ने ममता से पूछा. त्रियाचरित्र करते हुए उस ने कहा, ‘‘शिवकुमार मेरा रिश्तेदार है. इसलिए वह मेरे साथ जबरदस्ती करता है.’’

ममता की बात सुन कर पप्पू गुस्से से बोला, ‘‘अगर ऐसी बात है तो उसे सबक सिखाना पड़ेगा. तुम भी ध्यान रखो कि मेरी हो तो मेरी ही रहो. एक म्यान में 2 तलवारें नहीं रह सकतीं.’’

इस के बाद पप्पू यादव शिवकुमार पर कड़ी नजर रखने लगा. 12 अप्रैल, 2017 की रात 10 बजे शिवकुमार ममता के घर पहुंचा. उस समय पप्पू यादव ममता के घर में ही था. आते ही शिवकुमार ममता के साथ जबरदस्ती करने लगा. उस ने पप्पू को देखा नहीं था.

ममता ने विरोध किया, लेकिन शिवकुमार नहीं माना. तभी पप्पू यादव ने उसे ललकारा. दोनों के बीच मारपीट होने लगी. उसी बीच ममता एक डंडा ले आई और शिवकुमार को पीटने लगी. शिवकुमार चीखने लगा. चीख से ममता के बेटे कल्लू की आंखें खुल गईं. डर की वजह से वह बिस्तर पर ही पड़ा रहा.

कुछ ही देर में शिवकुमार पस्त पड़ गया. इस के बाद ममता ने शिवकुमार के पैर पकड़ लिए और पप्पू यादव ने उस का गला दबा दिया. शिवकुमार की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाना जरूरी था. आधी रात बीतने के बाद दोनों ने शिवकुमार की लाश को साइकिल पर रखा और उसे गांव के बाहर वेदप्रकाश के बाग में ले गए.

मामला आत्महत्या का लगे, इस के लिए उन्होंने शिवकुमार की शर्ट निकाल कर एक बांह उस की गरदन में कस दी और दूसरी पेड़ से बांध दी. शिवकुमार की लाश को लटका कर दोनों अपनेअपने घर आ गए.

सुबह के समय गांव के किसी व्यक्ति ने बाग में लटक रही लाश देखी तो उस ने यह बात गांव वालों को बता दी. जानकारी मिली तो जगमोहन बाग में पहुंचा तो बेटे की लाश देख कर दहाड़ें मार कर रोने लगा. इसी बीच किसी ने घाटमपुर पुलिस को सूचना दे दी थी.

पुलिस ने 15 अप्रैल, 2017 को अभियुक्त पप्पू यादव और ममता को रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष माती अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें स्वीकार नहीं हुई थीं.  ?

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अब फोन खो जाने के डर को कहें अलविदा, अपनाएं ये तरीका

आज के जमाने में स्मार्टफोन सभी के पास मौजूद है. कहीं ना कहीं यह हमारे जरुरत की चीज बन गया है, क्योंकि हम अपना आधे से ज्यादा काम अपने फोन की मदद से ही करते हैं. ऐसे में अगर आपका स्मार्टफोन चोरी हो जाए, तो आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

घर में गुम हुए फोन को ढूंढना फिर भी आसान होता है, लेकिन अगर आपका फोन चोरी हो गया हो तो इसे ढूंढना काफी मुश्किल होता है. चोर आपके फोन से कौन्टैक्ट, फोटोज या फोन में सेव अन्य अहम डौक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल कर सकता है. इसी परेशानी से निपटने के लिए हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं जिसके जरिए आप अपना फोन ट्रैक कर सकते हैं.

इसके लिए आपको एक ऐप को इंस्टौल करना होगा. इससे अगर आपका फोन गुम हो जाए या खो जाए तो इस ऐप कि मदद से आपको फोन को ट्रैक किया जा सकता है.

इस्तेमाल का तरीका

सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर पर जाकर GPS tracker by Follow me एप को डाउनलोड करें. इस जैसी कई एप्स प्ले स्टोर में मौजूद होंगी. आपको ब्लू आइकन वाली एप को डाउनलोड कर इंस्टौल करना है.

एप को ओपन करें यहां जो पेज ओपन होगा इसमें से सेटिंग्स पर टैप करें.

अब आपको अपना अकाउंट बनाना होगा जिसके लिए पेज पर दिए गए लिंक को क्लिक करना होगा.

अब एक नया पेज ओपन होगा इसमें आपको यूजरनेम और पासवर्ड डालना है. इसके बाद ट्रैक इंटरवेल में एक मिनट को सेलेक्ट करें उसके बाद फिर नीचे दिए गए सेव बटन पर टैप कर दें.

इसके बाद आपके फोन में टौप पर जीपीएस का साइन आ जाएगा. इसके बाद एप से बाहर आएं और गूगल क्रोम पर जाकर GPS tracker by Follow me लिंक को खोलें.

यहां आपको अपना अकाउंट लौगइन करना होगा इसके बाद एक पेज ओपन होगा जिसमें Continue to my map पर टैप करना है.

इसके बाद एक मैप ओपन होगा जिसमें आपके खोए हुए फोन की लोकेशन ओपन हो जाएगी. यहां से आप अपने फोन को ट्रैक कर सकते हैं.

मैं एक युवक से प्यार करती थी. फिर मुझे पता चला कि वह शादीशुदा है. मैं समझ नहीं पा रही हूं कि क्या करूं.

सवाल
मैं 19 वर्षीय अविवाहित युवती हूं. मैं एक युवक से प्यार करती थी. हमारा प्रेमसंबंध साल भर चला. फिर अचानक मुझे पता चला कि वह शादीशुदा है. सचाई जान कर मुझे बहुत दुख हुआ और मैं ने इस संबंध को समाप्त कर लिया, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से किसी के बीवीबच्चों की जिंदगी में अशांति फैले.

पर अब एक लड़का जिसे मैं सिर्फ अपना दोस्त मानती हूं और उस से कभीकभार हंसीमजाक कर लेती थी आजकल कुछ ज्यादा ही नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो मुझे अच्छा नहीं लग रहा. मैं समझ नहीं पा रही हूं कि क्या करूं. क्या उस से बात करना छोड़ दूं?

जवाब
आप ने एक शादीशुदा व्यक्ति से प्रेमसंबंध तोड़ कर बहुत समझदारी का काम किया है. अपनी खुशी के लिए किसी और के सुखी दांपत्य में खलल डालना उचित नहीं है. रही आप के तथाकथित दोस्त की बात तो उसे स्पष्ट कर दें कि आप उसे सिर्फ दोस्त मानती हैं, इसलिए वह अपनी हद में रहे. एक बार दोटूक बात करेंगी और वह समझदार हुआ तो संभल जाएगा वरना आप उस से बात करना छोड़ सकती हैं.

नई शुरुआत (अंतिम भाग) : आभास क्या दे पाया आभा का साथ

पिछले अंक में आप ने पढ़ा:

12वीं जमात में फेल होते ही आभास को उस के पिता ने अपने मछली कारोबार में लगा दिया. आभा स्कूल मास्टर की बेटी थी. वह जहां भी जाती, आभास उसे छोड़ने का एक भी मौका नहीं छोड़ता था. पिता की मौत के बाद हालात ऐसे बने कि आभा व आभास की शादी हो गई. फिर आभा की नौकरी एक स्कूल में लग गई, जहां विनय नाम का एक मास्टर उस के नजदीक आ गया. दोनों में संबंध बने और आभा पेट से हो गई.

अब पढि़ए आगे..

 ‘‘मेरी जरूरतें वैसी नहीं थीं. वह तो औरत की कमजोरी है, जो जरा सा प्यार मिलने पर पिघल जाती है. तुम अपनी बीवी को भी धोखा दे रहे थे. मेरे पास सिर्फ ऐयाशी के लिए आते थे.’’

‘‘तुम कुछ भी समझ सकती हो,’’ विनय बोला.

‘‘हां, कुछ भी कहने से तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि तुम बेशर्म हो. तुम एक नंबर के बुजदिल भी हो. अभी तुम्हारी करतूत तुम्हारी बीवी को बता दूं, तो पतलून गीली हो जाएगी. जाओ, दफा हो जाओ. दोबारा अपना चेहरा मत दिखाना. थूकती हूं तुम पर.

‘‘मैं चाहूं तो कानूनन इस बच्चे का हक भी दिला सकती हूं, पर मैं इतनी कमजोर भी नहीं, जितना तुम ने सोचा होगा,’’ आभा गुस्से में इतना कुछ बोल गई.

विनय तो चला गया, पर आभा बहुत देर तक रोती रही. वह स्कूल जाती. विनय से सामना भी होता, पर कोई बात नहीं होती. लेकिन विनय का खोट उस की कोख में बारबार चोट मारता था. कुछ ही दिनों के बाद अचानक आभास आया. आभा उसे पहचान न सकी. वह बिलकुल बदल गया था. अच्छे कपड़ों में वह सजासंवरा लग रहा था.

आभास बोला, ‘‘कैसी हो आभा? तुम तो पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो.’’

आभा बोली, ‘‘मैं ने पैसे तो भेज दिए थे. अब क्या चाहिए तुम्हें? मेरा पीछा छोड़ो.’’

‘‘अरे, तुम मेरी बीवी हो. मैं तुम्हें कैसे छोड़ दूंगा?’’ आभास ने इतना बोल कर जबरन उसे खाट पर बिठा दिया और खुद बगल में बैठ गया. आभा बोली, ‘‘आज कोई जबरदस्ती की, तो मैं शोर मचाऊंगी.’’

‘‘तुम शोर मचा लो, लेकिन मैं कोई जबरदस्ती नहीं करने जा रहा हूं.’’

‘‘देखो, मैं बहुत परेशान हूं. मुझे और तंग न करो.’’

‘‘मैं तुम्हारी परेशानी जानता हूं. जैसा भी हूं, तुम्हारा पति हूं, तुम्हें मुसीबत से बचाने आया हूं. मैं सब जानता हूं.’’ आभा हैरानी से उस की ओर देख कर बोली, ‘‘क्या जानते हो तुम?’’ आभास बड़े ही सब्र से बोला, ‘‘तुम मां बनने वाली हो.’’

आभा को बड़ी हैरानी हुई. वह बोली, ‘‘तुम्हें यह सब कैसे पता चला?’’

‘‘वह सब मैं रास्ते में बताऊंगा. तुम स्कूल जा कर एक हफ्ते की छुट्टी ले लो, फिर आ कर जौइन कर लेना.’’

आभास और आभा टैक्सी से फतुहा जा रहे थे. आभा के पूछने पर आभास बोला, ‘‘तुम्हें जो लड़का सुबहसुबह दूध और अखबार पहुंचाता है, उसे मैं अच्छी तरह से जानता हूं. मैं बीचबीच में यहां भी आता रहा हूं. मास्टर बाबू की मोटरसाइकिल भी तुम्हारे घर के सामने कई बार देख चुका हूं और बाकी खबर उस लड़के से फोन पर लेता रहता हूं. उसी लड़के ने बताया था कि तुम औरतों की डाक्टर से मिलने भी गई थीं.’’

आभास ने आभा का हाथ अपने हाथ में ले लिया. आभा की आंखों से आंसू की बूंदें उस की हथेली पर गिर रही थीं.

आभा बोली, ‘‘तुम इतना बदल कैसे गए?’’

‘‘जब मैं तुम्हारे पास रुपए मांगने गया था, तब तुम्हारी फटकार से मुझे बहुत दुख हुआ. मैं ने 2 साल का आईटीआई का इलैक्ट्रिकल ट्रेड कोर्स में दाखिला लिया. उस के बाद अपनी एक इलैक्ट्रिकल सामान की दुकान खोली और नए बन रहे घरों में वायरिंग का काम किया.

‘‘बाद में पटना में अपार्टमैंट्स में वायरिंग का ठेका लेने लगा. अब तो कुछ ठेके सरकार से भी मिलने लगे हैं. यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है.’’

आभा उस से सटते हुए बोली, ‘‘मुझे माफ करना. मुझ से भूल हो गई.’’

‘‘माफीवाफी छोड़ो. घर चल कर तुम भूल कर भी उस मास्टर का नाम न लेना. मां जानती हैं कि मैं बीचबीच में इसलामपुर तुम्हारे पास आता रहता हूं. किसी को तुम्हारे पेट से होने को ले कर कोई शक नहीं होगा.’’

‘‘मगर, यह बच्चा तो विनय का ही है.’’

‘‘यह बच्चा सिर्फ हम दोनों का होगा. तुम कहो, तो मास्टर की टांगें तुड़वा दूं?’’

‘‘नहीं, ऐसा कुछ नहीं करना,’’ आभा बोली.

आभास बोला, ‘‘जैसा तुम कहो.’’

आभा अपनी ससुराल आ गई थी. अब घर पहले से काफी साफसुथरा लगता था. रात में जब आभास उस के पास आया, तो वह बोली, ‘‘आज मछली की बदबू नहीं आ रही है.’’

आभास बोला, ‘‘अब सरकार ने मछली वाला ठेका दूसरी पार्टी को दे दिया है. यहां का विधायक मेरी पहचान का है. वही शिक्षा मंत्री भी है. सोच रहा हूं कि उस से बोल कर तुम्हारा ट्रांसफर यहीं करवा दूं.

‘‘कुछ महीने में तुम्हारा काम हो जाएगा. तब तक वहीं काम करती रहो. अगर तुम चाहो, तो नौकरी छोड़ भी सकती हो.’’

आभा बोली, ‘‘आभास, अब मैं जिंदगी के उतारचढ़ाव से थक गई हूं. अब एक सीधीसादी जिंदगी जीने का मन कर रहा है.’’ आभास ने उस से पूछा, ‘‘अच्छा, सचसच बताना कि क्या सारी गलती मेरी ही थी?’’

‘‘कुछ तुम्हारी, कुछ मेरी और कुछ हम दोनों की.’’

‘‘तब क्यों न पुरानी बातों को भूल कर एक नई जिंदगी की शुरुआत करें… आज से और अभी से?’’

यह सुनते ही आभा आभास की बांहों में समा गई.

पौर्न वेबसाइट बंद होनी चाहिएं : साजो सुंदर

डिजिटलाइजेशन के साथ पौर्न वेबसाइट का धंधा बड़ी तेजी से फैल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप समाज में न सिर्फ विकृति फैल रही है, लोगों को आत्महत्याएं तक करनी पड़ रही है, बल्कि युवा पीढ़ी सेक्स को लेकर दिग्भ्रमित भी हो रही है. सिनेमाघरों में दर्शकों को आकर्षित करने और उन्हें ‘पौर्न वेबसाइट’ के दुश्प्रभावों से लोगों को अवगत कराने के उद्देश्य से एक प्रसिद्ध पौर्न वेब पोर्टल के नाम पर लेखक व निर्देशक साजो सुंदर हिंदी और तमिल में द्विभाषी फिल्म ‘एक्स वीडियो’ लेकर आ रहे हैं. ‘कलर शैडोज इंटरटेनमेंट’ के बैनर तले बनी यह फिल्म लोगों के निजिता के आधिकार का महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा उठाती है, जिसके बारे में लोग बात करने से भी डरते हैं.

साजो सुंदर उन फिल्म निर्दशकों में से हैं, जो कई बार साबित कर चुके हैं कि यदि आपके अंदर प्रतिभा है तो आसमान में भी आप उड़ सकते हैं. जी हां! फिल्मकार साजो सुंदर ने बतौर सहायक लेखक अशोक कुमार के साथ करियर शुरू किया था. फिर मशहूर फिल्म निर्देशक हरी के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम किया. उन्होंने ‘कानागवेल काका’, ‘धोनी’ और ‘बंगलोर नाटकल’ में बतौर ‘को डायरेक्टर’ काम किया. ‘बंगलोर नाटकल’ मल्टी स्टार कास्ट वाली फिल्म है. प्रकाश राज के साथ तमिल, तेलगू व मलयालम त्रिभाषी फिल्म ‘अनसमयाल अराइल’ का ‘को डायरेक्शन’ किया. अब स्वतंत्र निर्देशक व लेखक की हैसियत से वह तमिल व हिंदी में द्विभाषी फिल्म ‘एक्स वीडियो’ लेकर आ रहे हैं. जिसमें इस बात का चित्रण है कि किस तरह लोगों की निजिता का हनन करते हुए लोगों के द्वारा अपने मोबाइल फोन या इंटरनेट पर सुरक्षित किए गए निजी वीडियो व सेक्स वीडियो को चुराकर ‘पौर्न वेबसाइट’ खुलेआम प्रसारण कर धन कमा रही है.

डिजिटल युग में किस तरह लोग दूसरों के बेडरूम में झांक रहे हैं, उसकी कथा बयां करने वाली फिल्म है, ‘एक्स वीडियो’. कहानी शुरू होती है तीन दोस्तों मनोज, डैनी और अंकित से. इनमें से अंकित ने छह माह पहले ही अपनी प्रेमिका तृप्ति से शादी की है. एक बार उससे बात करके वह उसका एक न्यूड वीडियो बनाता है और कहता है कि जब हम बूढ़े हो जाएंगे, तब इसे देखेंगे, लेकिन इंटरनेट के जरिए नावेद वह वीडियो लीक करके बेच देता है, जिसे मनोज और डैनी देखते हैं. वह अंकित को बताते है. अंकित आत्महत्या कर लेता है. उसके बाद मनोज और डैनी प्रतिज्ञा करते हैं कि इस तरह की पौर्न वेब साइट चलाने वालों के रैकेट को खत्म करके ही रहेंगे. मनोज पत्रकार है. वह अपने मित्र व पुलिस इंस्पेक्टर इमरान की मदद से जांच शुरू करता है.

पता चलता है कि इस पौर्न वेबसाइट को चलाने वाले पांच दोस्त विक्रम, अभिषेक, राहुल, रोहण है, जिसका मास्टर माइंड विक्रम है, जो पैसे देकर लोगों से वीडियो खरीदवाता है. नए वीडियो बनवाता भी है. इन वीडियो को वेबसाइट पर लोड कर धन कमाता है लेकिन उससे कई लोगों की जिंदगी बर्बाद हो रही है. कई लोग आत्महत्या कर चुके हैं. विक्रम अपने आफिस का अग्रीमेंट और एकाउंट सब गलत नाम पर बनवा रखा है, जिससे वह कभी पकड़ा ना जाए.

मनोज, पुलिस इंस्पेक्टर इमरान, डैनी व तृप्ति मिलकर विक्रम को पकड़ने का प्लान बनाते हैं. काफी मेहनत के बाद यह प्लान सफल होता है. विक्रम को जेल हो जाती है. मनोज, डैनी से बात करता है कि वह तृप्ति की मदद करना चाहता है. मनोज, तृप्ति के सामने शादी करने का प्रस्ताव रखता है, मगर तृप्ति मना कर देती है. मनोज, डैनी व इमरान लोगों को ऐसे वीडियो किसी भी हालत में ना बनाने कर बात प्रमोट करना शुरू करते हैं.

फिल्मकार साजो सुंदर कहते हैं, ‘‘आम लोगों को अश्लील फिल्म उद्योग के दुष्प्रभावों से परिचित कराने और उसके गहरे मकड़जाल को बेनकाब करने के लिए हमने फिल्म ‘एक्स वीडियो’ का निर्माण किया है. हमारी यह फिल्म लोगों को उनकी निजिता के अधिकार पर आए संकट से, अश्लील फिल्म जगत द्वारा उत्पन्न किए जा रहे भय, संकट व नए खतरों के प्रति जागरूक करेगी.’’

वह आगे कहते हैं, ‘‘हमारा मकसद ‘पौर्न वीडियो’ और ‘पौर्न वेबसाइट’ के खिलाफ लोगों को जागरूक करना है. मैं सरकार द्वारा ‘पौर्न वेबसाइट’ पर पाबंदी के कदम का पुरजोर तरीके से समर्थन करता हूं और इसके लिए मुहीम चलाना चाहता हूं. मैं अपनी फिल्म के प्रदर्शन के बाद पौर्न वेबसाइट बंद हो, इस मांग के साथ अदालत का दरवाजा भी खटखटाने वाला हूं.’’

यौन उत्पीड़न के बढ़ते अपराधों की चर्चा करते हुए साजो सुंदर कहते हैं, ‘‘हमारे देश में यौन उत्पीड़न के अपराध इसलिए ज्यादा हैं, क्योंकि हमारे यहां सेक्स शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं है. हमारी फिल्म लोगों के दिलो दिमाग मन और आत्मा के सटीक निशाने पर चोट करने के साथ ही नई पीढ़ी के बीच जागरूकता लाएगी.’’

पौर्न वीडियो या पौर्न वेबसाइट किस तरह लोगों को नुकसान पहुंचाती है. इस सवाल पर फिल्मकार साजो सुंदर ने कहा, ‘‘पौर्न वीडियो या पौर्न वेबसाइट देखने वालों का दिमाग खराब हो जाता है और वह सभी सेक्स से जुड़े अपराधों से जुड़ते हैं.’’

इंटरनेट व डिजिटलाइजेशन के बढ़ते कदम के इस दौर में लोगों की निजिता का हक बरकरार रखने की दिशा में सरकार क्या कर सकती है. इस सवाल पर साजो सुंदर ने कहा, ‘‘सरकार कुछ अति कठोर कदम उठाकर हमें सुरक्षित कर सकती है.’’

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