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क्रेडिट कार्ड फ्रौड से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान

नोटबंदी के बाद, कैश की तुलना में प्लास्टिक मनी अधिक सुविधाजनक होने के कारण इसे हमारे दैनिक जीवन में काफी महत्व मिलने लगा है. खास तौर पर, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मिलने वाले औफर के कारण यह और भी फायदेमंद हो गया है जैसे तुरंत क्रेडिट, खर्च करने के बाद पैसे चुकाने के लिए मिलने वाला समय, रिवार्ड प्वाइंट्स, इत्यादि. लेकिन, इसमें मिलने वाली लोन सुविधा पर ब्याज भी देना पड़ता है और बुद्धिमानी के साथ इसका इस्तेमाल न करने पर यह नुकसानदायक भी हो सकता है.

अगर आप भी क्रेडिट कार्ड धारक हैं तो आप इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं कि दुनिया के लाखों लोगों की तरह ही आप भी फ्रौड के शिकार हो सकते हैं. क्रेडिट कार्ड के संबंध में कई तरह के फ्रौड होते हैं, जो बदलती तकनीक के साथ बदलते रहते हैं इसलिए क्रेडिट कार्ड से जुड़े सभी फ्रौड को एक स्थान पर लिस्ट करना लगभग असंभव है. लेकिन फिर भी क्रेडिट कार्ड संबंधी फ्रौड दो तरह के होते हैं.

कार्ड नौट प्रजेंट फ्रौड (सीएनपी)

यह, सबसे आम प्रकार की धोखाधड़ी तब होती है जब कार्डधारक की जानकारी चोरी हो जाती है और कार्ड की फिजिकल प्रजेंस के बगैर इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दे दिया जाता है. इस तरह की धोखाधड़ी आमतौर पर औनलाइन फिशिंग मेल के माध्यम से होती है और इसका परिणाम यह होता है कि फ्रौड करने वाले की ओर से आपको एक फिशिंग मेल भेजा जाता है और इस मेल पर दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही आपकी जानकारी हैकर्स के पास चली जाती है.

कार्ड प्रजेंट फ्रौड

इस तरह के फ्रौड सामान्यत: कम होते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल अभी भी किया जा रहा है. ये आमतौर पर स्किमिंग के रूप में होता है. सेलर कंज्यूमर के क्रेडिट कार्ड को डिवाइस में स्वाइप करता है ताकि सूचनाओं को स्टोर किया जा सके. जब एक बार डेटा का इस्तेमाल खरीद के लिए कर लिया जाता है, कंज्यूमर के अकाउंट से चार्ज ले लिया जाता है.

क्रेडिट कार्ड से फ्रौड की आशंका इसलिए और ज्यादा हो जाती है क्योंकि यह दो चरणों की प्रक्रिया है. औथराइजेशन एंड सेटलमेंट.

ऐसे होती है क्रेडिट कार्ड के जरिए धोखाधड़ी

एटीएम में कार्ड डालने की जगह पर स्किमर और आसपास में कहीं हिडन कैमरे लगे होते हैं. स्किमर ऐसा डिवाइस है जो आपके कार्ड की पूरी जानकारी रिकार्ड कर लेता है.

स्किमर से प्राप्‍त जानकारी के आधार पर फ्रौड करने वाले जाली क्रेडिट कार्ड तैयार करते हैं. डुप्‍लीकेट या क्‍लोन्‍ड क्रेडिट कार्ड तो कई बार हूबहू ओरिजनल जैसे नजर आते हैं. धोखाधड़ी करने वालों को हिडन कैमरे से आपके पिन की जानकारी मिल जाती है.

कैसे बचें क्रेडिट कार्ड फ्रौड से

– पहला, ऐसे किसी भी मेल लिंक पर क्लिक न करें जिसमें आपसे आपकी पर्सनल डिटेल मांगी गई हो, भले ही भेजने वाला आपके संबंधित बैंक का ही क्यों न हो.

– दूसरा, औनलाइन माध्यम से किसी भी अनजान सेलर से कुछ भी खरीदने से पहले वेंडर का नाम गूगल पर सर्च करें और देखें कि उस पर कंज्यूमर ने किस तरह के फीडबैक दिए हैं.

फोन में मालवेयर का पता कर कुछ इस तरह करें डिलीट

औनलाइन कुछ ऐसी ऐप्स मौजूद हैं जो धोखे से आपके फोन में वायरस को पहुंचाती हैं. इसके बाद ये ऐप्स आपके फोन से डाटा चोरी करती है. यदि आप भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं तो हम बता रहे हैं कि कैसे एंड्रायड मालवेयर का पता कैसे लगाएं और इसे फोन से कैसे हटाएं.

फोन बंद कर दें

डिवाइस में मालवेयर के अटैक का पता चलते ही फोन के पावर बटन को प्रेस कर फोन को पूरी तरह से औफ कर दें. फोन को बंद करने से ये मालवेयर फोन में मौजूद दूसरी ऐप्स को नुकसान नहीं पहुंचा सकता. साथ ही, फोन औफ होने से मालवेयर अपने नजदीकी नेटवर्क का उपयोग नहीं कर पाएगा. कुछ एंटी-मालवेयर ऐप्स ऐसे हैं जो आपके फोन की समस्या को पहचान कर उसका समाधान करते हैं.

फोन को सेफ मोड में स्विच करें

फोन औन करने के बाद इसे सबसे पहले सेफ मोड में स्विच करें. यह आपकी डिवाइस को ज्यादा डैमेज होने से बचाएगी. अधिकांश एंड्रायड डिवाइस के लिए, आप अपने डिवाइस को औन करने के बाद कुछ सेकेंड के लिए पावर बटन दबाकर सेफ मोड पर स्विच कर सकते हैं. इस मोड को चुनें और फोन के रिबूट होने का इंतजार करें.

ऐप सर्च करें

अपने एंड्रायड डिवाइस की सेटिंग मे जाएं. सेटिंग में जाकर ऐप सेक्शन में जाएं. वहां अपनी हाल ही की ऐप्स की लिस्ट को खोजें. इसके लिए आपको ऐप मैनेजर की जरूरत हो सकती है. ऐप को खोजने के बाद इसे अनइंस्टाल करें या फोर्स स्टौप कर दें.

फोन में मालवेयर प्रोटेक्शन डाउनलोड करें

फोन को मालवेयर से सुरक्षित रखने के लिए प्रोटेक्शन ऐप को अपने फोन में डाउनलोड करें. औनलाइन कई सिक्योरिटी ऐप्स मौजूद हैं जो आपके फोन को वायरस से बचाते हैं, वायरस को स्कैन करते हैं और जंक फाइल से छुटकारा दिलाते हैं. अपने फोन से संक्रमित ऐप को डिलीट करने के बाद डिवाइस में सिक्योरिटी प्रोग्राम को डाउनलोड करें, जो भविष्य में आपके फोन को मालवेयर जैसे वायरस से बचाएंगे.

मैं गर्भवती हूं. स्तन काफी बढ़ गए हैं. मैं ने ब्रा पहनना छोड़ दिया है. पर डरती हूं कि कहीं स्तन बेडौल न हो जाएं. मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 26 वर्षीय शादीशुदा युवती हूं. मुझे 5 महीने का गर्भ है. समस्या यह है कि मेरा पेट तो उतना नहीं बढ़ रहा पर स्तन काफी बढ़ गए हैं. ब्रा भी कसने लगी है. इसलिए मैं ने ब्रा पहनना छोड़ दिया है. पर डरती हूं कि कहीं स्तन बेडौल न हो जाएं. मैं क्या करूं?

जवाब
गर्भावस्था के दौरान स्तनों का आकार बढ़ जाता है, इसलिए आप को अपनी पुरानी ब्रा टाइट होती होगी. बेहतर होगा कि सही आकार की और अच्छी क्वालिटी की ब्रा खरीदें. ब्रा पहनना न छोड़ें वरना स्तन बेडौल हो जाएंगे. अभी स्तनों के आकार को ले कर चिंतित न हों. प्रसूति के बाद और बच्चे को स्तनपान कराने पर स्तन फिर से पहले वाले आकार में आ जाएंगे.

सफर अनजाना

मैं ने अपने परिवार के साथ उत्तर भारत भ्रमण के दौरान कटक से दिल्ली हो कर नई दिल्ली स्टेशन से पुणे-जम्मूतवी झेलम ऐक्सप्रैस में रात साढे़ 9 बजे से सफर शुरू किया. एसी टू टायर कोच में हमारी 2 बर्थ ऊपर और 2 बर्थ अलग जगहों पर थीं. नीचे वाली 2 बर्थ में तकरीबन 50 से 55 उम्र के पतिपत्नी बैठे थे. वे कोई धार्मिक पाठ कर रहे थे.

एक बर्थ के नीचे वे अपना सारा सामान रखे थे. दूसरी बर्थ का नीचे वाला पूरा हिस्सा गीला था. इसलिए हम ने बर्थ के नीचे वाले हिस्से में अपना सामान रखने के लिए उन से शेयर करने को कहा तो वे ऊंचे स्वर में मुझ पर भड़क उठे, ‘‘हम रेलवे के 25 लोग इस ट्रेन में सफर कर रहे हैं. अगर मुंह खोला तो सारे परिवार को ट्रेन से धक्का दे कर बाहर फेंक दूंगा.’’

खैर, टीटीई आया और टिकट चैक कर चला गया. मैं ने टीटीई को कुछ नहीं बताया और चुप रहना मुनासिब समझा.

बाद में हम ने उन दोनों को जम्मू में कटरा के रास्ते में देखा. मैं ने सोचा जो लोग अपने सहयात्रियों के साथ इस तरह बरताव करते हैं वे धार्मिक पाठ और धार्मिक स्थलों के दर्शन कर के क्या पुण्य ले कर लौटेंगे?

अनंदा प्रसाद पटनायक

*

मैं, मेरी सहेली, हमारी बेटियां, भाईभाभी व मां सब पचमढ़ी गए थे. हम जमुना प्रपात देखने गए. सभी खुश थे लेकिन नीचे उतर कर हमारी सारी उत्सुकता व मजा किरकिरा हो गया. वहां कई लड़के अंडरवियर पहने मस्ती कर रहे थे व चिल्ला रहे थे. कई तरह से पोज दे कर फोटो खिंचा रहे थे.

हम सभी भाई के साथ थे व दोनों की बेटियां 15 व 21 वर्ष की थीं. भाभी की उम्र भी बहुत ज्यादा नहीं है. सो, हमें वहां खड़े रहना मुश्किल हो रहा था. हम मुश्किल से 5 मिनट वहां रुक पाए और उलटे पैरों वापस आ गए. न फोटो खींचे जा सके, न पचमढ़ी के सब से अच्छे स्थल को आंखों में बसा पाए. उसे देखने से पहले उन लड़कों पर नजर जाती थी. फोटो में भी वे लड़के पीछे दिख रहे थे.

फिर भी सफर यादगार रहा क्योंकि मौसम अनुकूल था, न गरमी, न बारिश, न ठंड, हर जगह हरियाली ही हरियाली, पहाड़ ही पहाड़. हलकीहलकी फुहारों ने वातावरण को और सुहाना बना दिया था.

आयुषी सिंह

उत्तर प्रदेश से हरियाणा तक, केंद्र और राज्य सरकारों को कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली छात्रों को यौन उत्पीड़न और हत्या जैसे अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के लिए दिशा निर्देश बनाने और उन पर अमल सुनिश्चित कराने के लिए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए. मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब देना है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने महिला वकील आभा आर शर्मा और संगीता भारती की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही इन वकीलों की याचिका को सात वर्षीय छात्र प्रद्युमन के पिता की याचिका के साथ संलग्न कर दिया है. प्रद्युमन की गुरुग्राम में रायन इंटरनेशनल स्कूल के शौचालय में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी. अदालत सोमवार को गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के नौ वर्षीय छात्र अरमान सहगल की मृत्यु को लेकर दायर उसके पिता की याचिका पर भी सुनवाई करेगा. इस याचिका में अरमान की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु की सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया गया है.

वकील सुजीता श्रीवास्तव के माध्यम से दायर जनहित याचिका में स्कूल की चाहरदीवारी के भीतर बार-बार छात्रों के शोषण और बाल यौन शोषण की हो रही घटनाओं का मुद्दा उठाया गया है. याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को स्कूलों के लिए बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं होने देने को अधिसूचित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

गोरखपुर अस्पताल मामले में केंद्र-राज्य को नोटिस

गोरखपुर में बाल चिकित्सालय में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने बच्चों की मौतों को लेकर दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र, एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ये नोटिस अधिवक्ता सर्वेश बिसारिया और प्रकाशचंद्र शर्मा के जरिये दाखिल नरेश दीक्षित की रिट याचिका पर शुक्रवार को जारी किए. याचिका में मांग की गई है कि सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई और वितरण पर दिशानिर्देश/ कानून बनाने के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए. इसके साथ ही गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले दिनों हुई बच्चों की मौतों की जांच और प्रशासन की लापरवाही सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज की अध्यक्षता में बनी समिति से करवाई जाए.

याचिका में कहा गया है कि न सिर्फ ऑक्सीजन सप्लाई को नियिमत रखने की जरूरत है बल्कि यह भी जरूरी है कि मरीज को यह गैस सही दबाव और मात्र में मिलती रहे.

“सेटिंग नहीं थी इसलिए नहीं बना टीम इंडिया का कोच”

टीम इंडिया के मुख्य कोच के पद को लेकर वीरेंद्र सहवाग ने मौजूदा कोच रवि शास्त्री और भारतीय कप्तान विराट कोहली पर निशाना साधा है. सहवाग ने कहा है कि बीसीसीआई में उनकी कोई सेटिंग नहीं थी, इसलिए वह मुख्य कोच नहीं बन पाए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह दोबारा कोच पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे.

कोच की दौड़ में सहवाग को रवि शास्त्री से हार का सामना करना पड़ा था. शास्त्री, कप्तान विराट कोहली की पसंद थे. हालांकि, क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) के सदस्य और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली इस फैसले के सख्त खिलाफ थे.

एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में इस पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘देखिए, मैं कोच इसलिए नहीं बन पाया, क्योंकि जो भी कोच चुन रहे थे उनसे मेरी कोई सेटिंग नहीं थी. मैंने कभी भारतीय क्रिकेट टीम का कोच बनने के बारे में नहीं सोचा था. बीसीसीआई सचिव अमिताभ चौधरी और महाप्रबंधक (खेल विकास) एमवी श्रीधर मेरे पास आए और मुझसे औफर के बारे में विचार करने को कहा. मैंने उसके बाद इस पद के लिए आवेदन किया.’

सहवाग ने दावा किया कि उन्होंने कप्तान कोहली से भी बात की थी. सहवाग ने बताया, ‘विराट ने मुझे इसके लिए आगे बढ़ने की सलाह दी थी. मुझे लगा कि यदि सभी लोग मुझसे कह रहे हैं तो मुझे इस बारे में सोचना चाहिए. न तो मैंने इस बार आवेदन करने के बारे में सोचा और न ही आगे इस बारे में कोई योजना है.’

सहवाग ने कहा कि शास्त्री से जब उनकी बात हुई तो उन्होंने बताया कि वह इस पद के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं. सहवाग ने कहा, ‘चैंपियंस ट्राफी के दौरान जब मैं इंग्लैंड में था तो मैंने रवि से पूछा था कि वह कोच के लिए आवेदन क्यों नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने मुझसे कहा कि वह दोबारा वह गलती नहीं करना चाहते जो उन्होंने पहले की थी. अगर रवि ने पहले आवेदन कर दिया होता तो मैं कभी आवेदन नहीं करता.’

वैसे सहवाग का यह निशाना उनके दोस्त और पुराने जोड़ीदार सचिन तेंदुलकर तक भी जाता है, क्योंकि मौजूदा कोच रवि शास्त्री उनकी पसंद बताए जाते हैं. सहवाग ने यह बात इसलिए कही है, क्योंकि सभी जानते हैं कि मौजूदा कोच रवि शास्त्री भारतीय कप्तान विराट कोहली की पसंद हैं. कोहली और टीम इंडिया के बाकी सदस्यों के कहने पर ही शास्त्री को कोच बनाया गया था.

दूसरी ओर, सचिन तेंदुलकर पिछले कोच अनिल कुंबले के चयन के समय भी शास्त्री को कोच बनाने के पक्ष में थे. ऐसे में इस बार कोहली के कुंबले के खिलाफ होने की वजह से शास्त्री का रास्ता आसान हो गया था.

हालांकि, कोच चुनने वाली क्रिकेट सलाहकार समिति के सबसे अहम सदस्य सौरव गांगुली सहवाग के पक्ष में थे. इस पद के लिए सहवाग का सबसे लंबा इंटरव्यू हुआ था, तब सारे कयास लगाए जा रहे थे कि सहवाग ही कोच बनेंगे. बताया जाता है कि उन्होंने सहवाग को कोच बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था, लेकिन समिति के दो अन्य सदस्यों सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण के कोहली के पक्ष में आने से सहवाग कोच नहीं बन सके.

युवी-रैना के प्रदर्शन पर क्या बोले सहवाग

टीम इंडिया से बाहर चल रहे मध्यक्रम के बल्लेबाजों युवराज सिंह और सुरेश रैना के बारे में पूछे जाने पर सहवाग ने कहा कि युवराज-रैना के साथ अभी उम्र है. वे दोनों मध्यक्रम के लिए बेहद जरूरी हैं. बाकी सब खिलाड़ी युवा हैं. युवराज फिटनेस टेस्ट में भले ही 16 के आंकड़े तक नहीं पहुंचे हों, लेकिन उनके आसपास तो वह पहुंच रहे हैं. उन्हें आगे मौका मिलना ही चाहिए.

धोनी को वर्ल्ड कप 2019 खेलना ही चाहिए

पूर्व भारतीय कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के 2019 के विश्व कप में खेलने की संभावना पर सहवाग ने कहा कि एमएस का प्रदर्शन हाल ही में बेहद शानदार रहा है. टीम को धोनी की जरूरत है उन्हें 2019 वर्ल्ड कप खेलना चाहिए.

आसान नहीं होगी आस्ट्रेलिया पर जीत

आस्ट्रेलिया के खिलाफ 17 सितम्बर से शुरू हो रही एकदिवसीय सीरीज के लिए सहवाग ने कहा कि टीम इंडिया को कड़ी टक्कर मिलेगी. आस्ट्रेलिया एक मजबूत टीम है. जब भी वे भारत आते हैं हम उन्हें हराना चाहते हैं. 2010 से आस्ट्रेलिया भारत में नहीं जीता है. हम उन पर बहुत भारी पड़े हैं. लेकिन ये वनडे क्रिकेट है. मैच कभी भी बदल जाता है. श्रीलंका जैसा नहीं होगा और आस्ट्रेलिया की टीम कड़ी चुनौती देगी.

सिमरन : कंगना के कारण हंसल ने डुबायी अपनी फिल्म

‘‘सिटीलाइट्स’’, ‘‘शाहिद’’ और ‘‘अलीगढ़’’ जैसी विचारवान, संजीदा फिल्मों के सर्जक हंसल मेहता इस बार फिल्म ‘‘सिमरन’’ लेकर आए हैं, मगर ‘सिमरन’ देखकर कहीं से भी यह आभास नहीं होता कि इसके सर्जक हंसल मेहता हैं. यूं तो कहा जाता रहा है कि यह किसी सत्य कथा से प्रेरित फिल्म है, मगर फिल्म ‘‘सिमरन’’ में सब कुछ अति बनावटी, अस्वाभाविक और बेसिर पैर की कहानी है. फिल्म में जितना कमजोर अमरीकन पुलिस को दिखाया गया है, उतना हमने कभी सुना ही नहीं. फिल्म में प्रफुल पटेल (कंगना रानौट) के लिए अमरीका में बैंक में चोरी करना बच्चों के खेल की तरह है और अमरीकन पुलिस उसका बाल भी बांका नहीं कर पाती.

फिल्म की कहानी गुजराती व बिंदास किस्म की महिला प्रफुल पटेल (कंगना रानौट) के इर्द गिर्द घूमती है, जो कि अमरीका में अपने माता पिता के साथ रहती है. उसकी शादी होती है, पर वह टिकती नहीं. उसका तलाक हो जाता है. माता पिता से भी उसकी नहीं बनती है और वह अमरीका में अपना मकान लेना चाहती है. वह एक होटल में हाउस कीपर के रूप में काम करती है.

एक दिन वह अपनी सहेली के साथ लास वेगास जाती है. वहां कैसिनो में जुआ खेलती है. वह पहली बार जीतती है, उसके बाद वह अपना सारा पैसा हार जाती है. फिर कैसिनो के मालिक व अन्य लोगों से कर्ज लेकर जुआ खेलती है और यह धन भी वह हार जाती है. अब वह पचास हजार डालर का उधार चुकाने के लिए लूटपाट व चोरी करना शुरू करती है. फिर एक बैंक में लिपस्टिक से कागज पर यह लिखकर बैंक लूटती है कि उसके पास बम है. यह सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं लेता. इस बीच उसके घर वाले एक लड़के से उसका रिश्ता भी करवाना चाहते हैं. तो वहीं वह सिमरन के नाम से एक बैंक में कर्ज लेने जाती है. फिर उधार देने वाले की सलाह पर वह बैंक में चारी करने जाती है. फिर पुलिस उसके पीछे पड़ जाती है. दस माह की सजा होती है, पर अच्छे चाल चलन के चलते जल्दी जेल से छूट जाती है.

प्लाट रोमांचक है, मगर घटनाक्रम पूरी तरह से हास्य से भरे हुए हैं. इंटरवल से पहले कहानी उम्मीद जगाती है, मगर धीरे धीरे पूरी कहानी भटकती जाती है. इंटरवल के बाद तो सब कुछ बनावटी हो जाता है. फिल्म का क्लायमेक्स तो अतिहास्यास्पद है. फिल्म देखते समय दिमाग में सवाल उठता है कि क्या अमरीका में बैंकों के अंदर सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं होता. क्या अमरीकी पुलिस, भारतीय पुलिस से भी ज्यादा कमजोर है? फिल्म में कुछ दृश्य जबरन ठूंसे गए हैं. बेसिर पैर की इस रोमांचक फिल्म का पार्श्व संगीत भी घटिया है. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावहीन है. फिल्म के ज्यदातर संवाद अंग्रेजी भाषा में हैं, इसलिए सिंगल थिएटर के दर्शक तो इस फिल्म से खुद को दूर ही रखना चाहेंगे, जबकि मल्टीप्लैक्स का दर्शक फिल्म देखना चाहेगा, पर मल्टीप्लैक्स का दर्शक भी कितना साथ देगा, यह कहना मुश्किल है. कम से कम भारतीय लड़कियां तो सिमरन उर्फ प्रफुल पटेल के साथ रिलेट नहीं कर पाएंगी.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो कंगना रानौट ने बेहतरीन परफार्मेंस दी है, मगर उनके अभिनय का फिल्म की कहानी व पटकथा आदि से कोई संबंध नहीं बन पाता. फिल्म में प्रफुल पटेल के पति बनने के लिए उनके प्रेमी की तरह आगे पीछे मंडरा रहे सोहम शाह ने बहुत ही स्तरहीन अभिनय किया है.

दो घंटे चार मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सिमरन’’ का निर्माण भूषण कुमार, किशन कुमार, शैलेश आर सिंह और अमित अग्रवाल ने किया है. निर्देशक हंसल मेहता, संगीतकार सचिन जिगर तथा कलाकार हैं- कंगना रानौत, मार्क जस्टिस, सोहम शाह, इशा तिवारी पांडे, हितेन कुमार, अनीशा जोशी व अन्य.

अब छोटे पर्दे की ये संस्कारी बहू बनेंगी सेक्स वर्कर

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में ‘अक्षरा’ के नाम से छोटे पर्दे पर फेमस टीवी स्टार हिना खान इन दिनों छोटे पर्दे पर अपने किरदार को लेकर नए प्रयोग करती नजर आएंगी. इसके लिए वह संस्‍कारी बहू से हट कर रोल चुनेंगी. एक रिपोर्ट के अनुसार हिना जल्द ही कलर्स चैनल पर रश्मि शर्मा द्वारा प्रोड्यूज एक शो में सेक्स वर्कर का किरदार निभाती हुई नजर आएंगी. आपको बता दें कि रश्मि शर्मा बोल्ड सब्जेक्ट पर काम करने के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में उन्होंने ‘शक्ति- अस्तित्व के अहसास की’ और ‘पिंक’ से सबको चौका दिया.

हाल ही में हिना ने 15 अगस्त के मौके पर एक शो के लिए वंदे मातरम गीत रिकार्ड करवाया था. इसके चलते यह गीत कई चैनल्स पर भी दिखाई देगा. माना जा रहा है कि इस गीत को गाने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन्स भी आ सकते हैं. वहीं इसको लेकर हिना का कहना है कि जिन्हें ‘वंदे मातरम’ कहना ठीक नहीं लगता तो यह उनका निजी फैसला हो सकता है. मुझे उस इनकार से कोई दिक्कत नहीं है. वहीं अगर मैं वंदे मातरम गाती हूं तो यह मेरा निजी फैसला और पसंद है. इस पर किसी को ऐतराज करने का भी कोई हक नहीं है.‘

आपको बता दें कि हिना खान ने 2009 में यह रिश्ता क्या कहलाता है से टीवी की दुनिया में कदम रखा. इस सीरियल में उन्होंने मुख्य किरदार ‘अक्षरा’ को निभाया. गौरतलब है, सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ को छोड़ने के बाद हिना बिगबास के सीजन 10 में भी नजर आई थीं. हिना स्टार प्लस के अन्य धारावाहिक सपना बाबुल का, बिदाई, चांद छुपा बादल में और मास्टरशेफ इंडिया कुकिंग शो 3 में अतिथि की भूमिका में दिख चुकी हैं, तो वहीं हिना खान ने रिएलिटी टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ के आठवें सीजन में भी भाग लिया.

लखनऊ सेंट्रल : कहानी से लेकर एक्टिंग तक सब कुछ है कमजोर

यह कहानी है मुरादाबाद के उभरते हुए गायक किशन मोहन गेहरोत्रा (फरहान अख्तर) की. वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुरादाबाद से दिल्ली जाते हैं. जहां वह अपना नया संगीत एलबम खुद बनाना चाहते हैं. उनका मानना है कि ‘शहर छोटे होते हैं, सपने नहीं’. लेकिन उनके सपने बहुत जल्द टूट जाते हैं. उनके साथ कई घटनाएं तेजी से घटती हैं और अंततः उन्हें एक आईएएस आफिसर की हत्या के जुर्म में आजीवन जेल हो जाती है. किशन को मुरादाबाद जेल में रखा जाता है, जहां से वह भागने का असफल प्रयास करते हैं.

18 माह बाद उन्हें लखनऊ सेंट्रल जेल भेज दिया जाता है. जहां उन्हें उम्मीद की किरण उस वक्त नजर आती है, जब राज्य के मुख्यमंत्री (रवि किशन) ऐलान करते हैं कि हर जेल का एक संगीत का बैंड होगा और उनके बीच प्रतिस्पर्धा होगी. एक एनजीओ कार्यकर्ता गायत्री (डायना पेंटी) से प्रोत्साहन पाकर जेल के कैदियों को अपने साथ जोड़कर संगीत का ‘लखलऊ सेंट्ल’ नामक अपना बैंड बनाते हैं, जिसमें विक्टर (दीपक डोबरियाल), पंडित जी (राजेश शर्मा) और परविंदर (गिप्पी ग्रेवाल) शामिल हैं.

इस म्यूजिकल बैंड को बनाने के पीछे किशन की अपनी अलग योजना है. इस बैंड से जुड़े पांचों कैदियों का मकसद जेल तोड़कर भागना है. वैसे किशन के बैंड को जेलर श्रीवास्तव (रोनित राय) के विरोध का भी सामना करना पड़ता है. मगर किशन को बार बार मुख्यमंत्री का सहयोग मिलता है. मुख्यमंत्री की मदद से बैंड के कुछ सदस्यों को कुछ दिनों के लिए पैरोल पर अपने घर जाने की सुविधा मिलती है.

जब यह अपने घर पहुंचते हैं, तो इन्हें अहसास होता है कि परिवार के लोग उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहते. बहरहाल अंत में प्रतियोगिता होती है, जिसमें किशन के बैंड को विजयी घोषित किया जाता है. उसके बाद नाटकीय ढंग से वह इंसान अदालत में आता है, जिसकी गवाही पर किशन को सजा हुई थी. अदालत में कहता है कि उसने दबाब में किशन के खिलाफ झूठी गवाही दी थी, किशन तो पूरी तरह से निर्दोष है और किशन को रिहा कर दिया जाता है.

फिल्म की शुरुआत उम्मीदे जगाती है, मगर जैसे जैसे यह फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे वैसे बिखरती और जबरन कहानी बुनी गयी लगने लगती है. इंटरवल के बाद तो पूरी कहानी को टीवी सीरियल की तरह खींचा गया है. फिल्म का क्लायमेक्स भी गड़बड़ है. एक वाक्य में कहें तो फिल्म की कहानी, पटकथा सहित सब कुछ बहुत कमजोर है. फिल्म को बेवजह लंबा खींचा गया है. इस लंबाई को एडीटिंग टेबल पर कसने की जरूरत थी. कम से कम इसे बीस मिनट काटा जाना चाहिए था. फिल्म का गीत संगीत भी कमजोर है.

कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है. इसी तरह की कहानी पर कुछ दिन पहले एक फिल्म ‘कैदी बैंड’ भी आ चुकी है, जिसे दर्शकों ने सिरे से नकार दिया था. वास्तव में फिल्म ‘कैदी बैंड’ और ‘लखनऊ संट्रेल की कहानी, विषयवस्तु, पात्रों की कैदी बनने की कहानी वगैरह सब कुछ एक जैसी ही है. फिल्म में मनोरंजन, रोमांस, इमोशंस का घोर अभाव है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो फरहान अख्तर निजी जीवन में अपनी संस्था ‘मर्द’ के तहत म्यूजिकल कंसर्ट करते रहते हैं, जहां वह खुद गाते हैं. उसी को लोकप्रिय करने के लिए वह फिल्मों में भी गायक के ही किरदार में नजर आने लगे हैं. पर परफार्मेंस में कुछ नया नहीं कर रहे हैं. पिछली फिल्म ‘रौकऔन 2’ में भी उन्होंने काफी निराश किया था और अब ‘‘लखनऊ सेंट्ल’’ में भी निराश करते हैं. दीपक डोबरियाल, गिप्पी ग्रेवाल की प्रतिभा को जाया किया गया है. डायना पेंटी ठीक ठाक लगी हैं. रोनित राय सहज लगे हैं, पर वह इस तरह के किरदार कई फिल्मों में पहले भी निभा चुके हैं. रवि किशन की वजह से फिल्म में ह्यूमर आता है. फिल्म के कैमरामैन ने अच्छा काम किया है.

दो घंटे 27 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘लखनऊ सेंट्रल’’ का निर्माण निखिल अडवाणी, मोनिशा अडवाणी, मधु भोजवानी के साथ ‘वायकाम 18’ ने किया है. फिल्म के निर्देशक रंजीत तिवारी, लेखक रंजीत तिवारी व असीम अरोड़ा, कैमरामैन तुषार कांति रे तथा के कलाकार हैं फरहान अख्तर, डायना पेंटी, गिप्पी ग्रेवाल, दीपक डोबरियाल, इनामुल हक, रोनित राय, राजेश शर्मा, रवि किशन आदि.

राम रहीम के बेरहम समर्थक और धर्म के नाम पर मनमानी

मनमानी धर्म के नाम पर की जाए या पंथ के नाम पर, एक ही बात है. हिंसा, भीड़, आगजनी और हड़ताल के जरिए दूसरे धर्मों के लोगों को डराया, धमकाया जाए या अपने ही धर्म के दूसरे वर्ग को, बात एक ही है.

हिंदू संघों ने पिछले 50 सालों में गौपूजा, राममंदिर, गोधरा कांड आदि को ले कर जो उत्पात मचाया था उस का सही व पूरा सबक राम रहीम, आसाराम व रामपाल के समर्थकों ने सीखा है. राम रहीम पर उसी पंथ की एक भक्तन का बलात्कार किए जाने का आरोप सिद्ध हो गया लेकिन उन के समर्थक इस को मान नहीं रहे.

हिंदू संगठनों ने पाठ पढ़ाया है कि धर्म सर्वोपरि है और जो बात बहुमत कह दे वही सच है. इसलिए, बाबरी मसजिद रामजन्मभूमि पर बनी है, तो बनी है. गोधरा में 59 हिंदू रेल के डब्बे में मरे हैं व उस के लिए सारे गुजराती मुसलमान जिम्मेदार हैं, तो हैं. भारी भीड़ कहती है कि राम रहीम ने बलात्कार नहीं किया तो नहीं किया. और ऊंची जातियों की सरकार व अदालतों का सुबूत इकट्ठा करना दलित बहुल पंथ का अपमान है, तो है.

सत्ता में बैठे लोगों ने ही पढ़ाया है कि आस्था तर्क व तथ्य से ऊंची चीज है. और यही आस्था अपने गुरु राम रहीम को अदालती आतंकवाद से छुड़ाने के लिए पंचकूला, सिरसा, दिल्ली व अन्य जगहों पर भक्तों को जमा करने में काम आई. कानून अपना काम करेगा, इस पर विश्वास कौन कर रहा है क्योंकि जब किसी मांस को गौमांस कह दिया जाए या किसी भी किताब में दिए गए तथ्यों को झुठला कर वर्षों के पड़े झूठ के कीचड़ पर भरोसा कर लिया जाए.

राम रहीम पर मचा उपद्रव उन बीजों का फल है जो पिछले 50 सालों से बोए जा रहे हैं और जिन्होंने आज भारत के समाज को तारतार कर दिया है. धर्मों के बीच फैलाई जा रही नफरत की बीमारी धर्म के अंदरूनी विभाजनों को भी नफरत व संदेह के घेरे में ले रही है.

सरकार तो राम रहीम के मामले में ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकती क्योंकि नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर दोनों राम रहीम के गुण गा चुके हैं. राम रहीम के समर्थकों को काबू करने के लिए सरकार को जो करना है वह तो करेगी ही और जल्दी ही सब शांत भी हो जाएगा क्योंकि आज समर्थकों के पास सीमित धन व धैर्य है. वे उक्ता जाएंगे और जैसी भी स्थिति होगी, उसे मानने को मजबूर हो जाएंगे.

इस मामले में सरकार की कमजोरी साफ हो गई. केंद्र सरकार के पड़ोस में हरियाणा में 35-40 लोग मारे गए, अरबों की संपत्ति नष्ट कर दी गई और गुनाहगार कोई नहीं. सरकारें चलाना नारों का खेल नहीं है. वहीं, जनता ने किसी सरकार को बढ़चढ़ कर चुना है तो खमियाजा भी उसे ही भुगतना पड़ेगा.

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