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खुशखबरी : एसबीआई ने पैसे ट्रांसफर करने वाले ग्राहकों को दी बड़ी राहत

यदि आप स्टेट बैंक आफ इंडिया (SBI) के ग्राहक हैं और अगर आप आनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए IMPS विकल्प का इस्तेमाल करते हैं, तो बैंक आपको बड़ी राहत देने वाली है.

जी हां, बैंक ने अपने ग्राहको का खयाल रखते हुए और उनकी सुविधा को देखते हुए एक बड़े कदम का एलान किया है.आपको बता दें कि आपके द्वारा आईएमपीएस (IMPS) के विकल्प द्वारा आनलाइन पैसे ट्रांसफर करने पर अब बैंक आपसे 80 फीसदी कम चार्ज लेगी.

इसका मतलब यह हुआ कि आप वर्तमान में पैसे ट्रांसफर करने के लिए जितना चार्ज बैंक को दिया करते थे अब आपको उससे 80 फीसदी कम चार्ज देना होगा.

क्या है आईएमपीएस (IMPS)

आईएमपीएस एक त्वरित अंतरबैंकिंग इलेक्ट्रानिक कोष हस्तांतरण सेवा है. इसका उपयोग मोबाइल फोन और इंटरनेट बैंकिंग दोनों माध्यम से किया जा सकता है.

वैसे हम आपको बताते चले कि एसबीआई 1001 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक के आईएमपीएस पर 5 रुपये +जीएसटी और 1 लाख 1 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक के आईएमपीएस पर 15 रुपये +जीएसटी वसूलता है.

जान लें ये 4 नियम जो बदल चुके हैं

स्टेट बैंक आफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए सेविंग्स अकाउंट के लिए न्यूनतम बैलेंस घटा दिया है जोकि अक्टूबर से लागू भी हो चुका है. पहले यह न्यूनतम बैलेंस 5,000 रुपए था, जिसे अब 3,000 रुपये कर दिया गया है.

बैंक ने जुलाई में 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस (तत्काल भुगतान सेवा) हस्तांतरण पर शुल्क समाप्त कर दिया था. ऐसा उसने छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया था. इससे पहले स्टेट बैंक 1,000 रुपये तक के आईएमपीएस लेनदेन पर देय सेवाकर के साथ प्रति लेनदेन 5 रुपये का शुल्क वसूल रहा था.

नौकरियों की कमी ला सकती है बहुत बड़ा तूफान

नौकरियों की कमी आने वाले सालों में एक बहुत बड़ा तूफान ला सकती है. देश में नए जवानों की गिनती तो तेजी से बढ़ रही है, पर नौकरियों की किल्लत भी बढ़ रही है. सरकार पहले लोगों से टैक्स लगा कर मिले पैसे से सरकारी नौकरियां दे कर कुछ को खुश रखती थी, पर अब टैक्स से आने वाला पैसा कम होने लगा है.

रेलवे ने चाहे कहा है कि वह एक लाख नौकरियां देगी, पर यह वादा है काले धन के 15 लाख रुपए खाते में जमा करने की तरह का. रेलों का देश में जो हाल है, उस से लगता नहीं कि नई नौकरियों की गुंजाइश है. वैसे भी जो जवान नौकरियों को लिए खड़े हैं, वे ज्यादातर चाहे पढ़लिख लें, पर कुशल हरगिज नहीं हैं. ज्यादातर नकल मार कर सर्टिफिकेट लिए घूम रहे हैं.

शहरों में पहले छोटेमोटे काम मिल जाते थे, पर लगता है कि जीएसटी की मार की वजह से छोटे कारखाने व छोटे व्यापारियों का काम ठप हो जाएगा और वे जो कम कुशल लोगों को नौकरी दे सकते थे, अब नहीं दे सकेंगे. खेतों में काम के मौके कम हो रहे हैं, क्योंकि वहां टै्रक्टर और मशीनों से काम होने लगा है. फिर वह काम 12 महीनों नहीं चलता. सेना भी अपने सैनिकों को कम करने वाली है.

नए जवान लड़कों की गिनती सरकार के लिए सिर्फ आंकड़ा भर है, क्योंकि सरकार को तो गौरक्षा, संस्कृति, राष्ट्रवाद, धर्म की ज्यादा पड़ी है. सरकार का आधा ध्यान तो टैक्सों को जमा करने के नएनए तरीकों पर लगा है. वह नए धंधे तैयार करने पर सोच ही नहीं रही है.

सिर्फ यह कहने से कि देश की कुल आय 6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, काफी नहीं है, क्योंकि इस आय में बरबाद होने वाले कामों पर लगा पैसा भी शामिल है.

भारत में बेरोजगारी की हालत अभी इसलिए बहुत बुरी नहीं दिख रही, क्योंकि लोगों को अभी भी बहुत कम में गुजारा चलाने की आदत है. आप किसी बाजार, महल्ले, गांव, गली, खेत, फैक्टरी में चले जाएं, आप को खाली बैठे लोग नजर आ जाएंगे, जो वैसे बेरोजगार नहीं हैं. उन्हें कुछ वेतन मिलता है, पर चूंकि काम नहीं है, तो वही वेतन बहुत होता है. वे असल में देश व घर पर बोझ हैं.

यह सरकार कर सकती है कि देश में बेरोजगारी न हो. इस देश की जमीन ऐसी है कि वह हर हाथ को काम दे सकती है, पर यहां बरबादी और काम रोकने का रिवाज बना हुआ है. हर जना दूसरे का काम रोकता है और हर जना समय बरबाद कर रहा है. लोगों का अरबोंखरबों का काम हर साल बेकार में जाता है. धर्म तो इस बरबादी का सब से बड़ा नमूना है, जिस पर लोग, सरकार और समाज जीभर कर पैसा देते हैं और निठल्लों को पालते हैं.

अगर बेरोजगारों को किसी ने एक झंडे के नीचे खड़ा कर लिया, तो हर दल की मुसीबत हो जाएगी, यह पक्का है. और यह भी पक्का है चाहे सरकार बदल जाए, नई नौकरियां नहीं निकलेंगी.

पाकिस्तान में फिर तूल पकड़ेगा राजनीतिक हलकों में भ्रष्टाचार का मामला

कराची में सिंध हाईकोर्ट के बाहर अजीबोगरीब नजारा दिखा, जब नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यूरो के लोग सिंध के भूतपूर्व सूचना मंत्री शरजील मेमन की धर-पकड़ में मशक्कत करते दिखाई दिए और यह सब टीवी पर फ्लैश होता रहा. पीपीपी नेता मेमन को 11 अन्य लोगों के साथ सार्वजनिक निधियों में पांच अरब के घोटाले में गिरफ्तार किया गया है. इस हाई प्रोफाइल गिरफ्तारी ने जवाबदेही तय किए जाने के मामलों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. माना जा रहा है कि इससे राजनीतिक हलकों में भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर तूल पकड़ेगा.

पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो ने इस मामले में कानून के मनमाने इस्तेमाल का आरोप लगाया है. हालांकि ऐसे आरोपों पर सवाल करने की पूरी गुंजाइश है. सवाल उठता है कि अपनी सुविधा से मामलों की गंभीरता और उन पर कार्रवाई को अलग करके आंकना कितना उचित है? तब तो और भी नहीं, जब नेशनल काउंटबिलिटी ब्यूरो का प्रमुख आम सहमति से चुना गया हो और इस सहमति में पीपीपी भी साझीदार हो. उचित तो यही होगा कि पीपीपी इस मामले की जांच प्रक्रिया में सहयोग करे और मेमन सहित अन्य अभियुक्त खुद को अदालत में बेगुनाह साबित करें. ऐसे समय में, जब भ्रष्टाचार के मामले में देश की छवि पूरे विश्व में बहुत ज्यादा खराब हो, पाकिस्तान की प्रगति के लिए देश में जवाबदेही तय होना अब बहुत जरूरी है.

सार्वजनिक क्षेत्र में आर्थिक भ्रष्टाचार विकास में बाधक होता है और इससे जनता का भी सिस्टम पर भरोसा टूटता है. सच तो यह है कि पारदर्शिता का दूसरा कोई विकल्प नहीं और घूसखोरी-दलाली खत्म करने का यही पहला और प्रमुख जरिया है.

दुर्भाग्य से पाकिस्तान में भ्रष्टाचार विरोधी हर प्रयास का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निपटाने में होता आया है. पार्टियां इसे पालती-पोसती रही हैं. निर्वाचित लोगों को तो खुद को सार्वजनिक जांच के लिए हमेशा प्रस्तुत रखना चाहिए, खासकर जहां मामला वित्तीय अराजकता का हो. यह सही है कि जवाबदेही का मामला सिर्फ सियासी दलों तक नहीं, सेना, नौकरशाही न्यायपालिका सहित तमाम सरकारी संस्थाओं तक भी आना चाहिए.

अतिथि शिक्षकों पर एलजी और दिल्ली सरकार के बीच ठनी

अतिथि शिक्षकों के मामले पर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल अनिल बैजल में टकराव बढ़ गया है. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पत्र के जवाब में बैजल ने कहा कि ‘आप’ सरकार अतिथि शिक्षकों की भर्ती और उन्हें पक्का किए जाने पर सिर्फ दिखावा कर रही है. सरकार ने मामले में दो महीने से कोई सार्थक कदम नहीं उठाए हैं.

बैजल ने कहा कि दिल्ली सरकार को इस बाबत विधि विभाग से परामर्श करने की सलाह भी दी थी, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की गई. उप मुख्यमंत्री सिसोदिया ने अपने पत्र में बैजल से अतिथि शिक्षकों से संबंधित विधेयक को पास करने की गुहार लगाई है.

इस पर उपराज्यपाल ने कहा कि ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस ऑफ दि गवर्मेट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरीटरी रुल्स, 1993 के तहत विधेयक को अपेक्षित प्रतिवेदनों सहित उनके सम्मुख प्रस्तुत नहीं किया गया है. इसलिए यह कहना गलत है कि विधेयक उपराज्यपाल के पास लंबित है.

‘विधेयक असंवैधानिक’

बैजल ने कहा कि विधेयक को पेश करने के फैसले पर पुनर्विचार करने के बारे में दी गई सलाह के बावजूद बिल को विधानसभा में पारित किया गया, जबकि उक्त विधेयक संवैधानिक नहीं था. उन्होंने दिल्ली सरकार को नसीहत दी कि इस समस्या का निवारण केवल कानून, नियम व प्रक्रियाओं का पालन करके ही किया जा सकता है. सार्वजनिक दिखावे से यह संभव नहीं है. उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बताया कि मामले में 10 अगस्त, 14 सितंबर व 26 सितंबर को सरकार को सलाह भेजी गई थी. दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक इस पर अमल नहीं हुआ.

मुख्य सचिव ने विधेयक नहीं दिखाया : मनीष

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उप राज्यपाल को लिखे पत्र में मांग की कि अतिथि शिक्षकों से संबंधित विधेयक को मंजूरी दी जाए, जिससे इन्हें राहत मिल सके. सिसोदिया ने लिखा है कि उक्त विधेयक मुख्य सचिव के माध्यम से उप राज्यपाल को भेजा गया है. मुख्य सचिव ने इस विधेयक को कानून व शिक्षा मंत्री की दिखाया ही नहीं. अतिथि शिक्षकों की समस्या का रास्ता निकाले बिना ही उक्त विधेयक राजनिवास भेज दिया गया. जब उन्होंने संबंधित विभाग से जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि उक्त फाइल को नहीं दिखाए जाने के आदेश जारी किए गए हैं.

‘सरकार की प्राथमिकता में शामिल है शिक्षा’

एलजी को भेजे पत्र में सिसोदिया ने लिखा है कि दिल्ली में शिक्षा सरकार की प्राथमिकता रही है. इस पर काम करते हुए शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं. एलजी को लिखे पत्र में कहा गया है कि सरकार ने बीते वर्षो में जो काम किया है, उसे बर्बाद न करें. मामले में निर्णय का असर केवल 15 हजार अतिथि शिक्षकों पर नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 16 लाख बच्चों के भविष्य पर भी होगा.

‘आप’ की याचिका पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सरकार की उस याचिका पर आश्चर्य जताया, जिसमें अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक हटाने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले पर तस्वीर साफ नहीं है, जो कुछ भी हो रहा है, वह अजीब है. जस्टिस एकके चावला की पीठ ने कहा कि हमें इस बात पर हैरानी है कि दिल्ली सरकार आखिर उस रास्ते पर क्यों जाना चाहती है. वह अभी भी अपने तरीके से चलना चाहते हैं, चाहे वह कानून सम्मत हो या नहीं. सरकार की याचिका में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और वर्ष 2010 के बाद स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति पर 27 सितंबर को लगाई गई रोक हटाने की मांग की गई है. अगली सुनवाई 9 को होगी.

कभी नहीं मिला इन बौलर्स को वो ओहदा जिसके वो हकदार थे

दुनिया में जब भी स्पिन गेंदबाजों का नाम लिया जाता है तो मुथैया मुरलीधरन, शेन वौर्न या अनिल कुंबले का जिक्र होता है. लेकिन कई ऐसे स्पिन गेंदबाज भी थे, जिनकी अंगुलियों में गेंद को टर्न कराने की गजब की क्षमता होते हुए भी वह ओहदा नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे.

आज बात करेंगे ऐसे ही खिलाड़ियों की, जिन्होंने टीम को कई बार मुश्किलों से उबारा, लेकिन क्रिकेट इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में कभी नहीं लिखा गया.

पौल स्टैंग

मौजूदा टीम से उलट साल 1990 और 2000 में जिम्बाब्वे एक मजबूत टीम मानी जाती थी. इसी टीम का अहम हिस्सा थे लेग स्पिनर पौल स्टैंग. अच्छे एक्शन वाले स्टैंग की गेंदें काफी स्विंग होती थीं, जिस वजह से उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों में विकेट झटके. लेकिन फिर भी उन्हें 119 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का ही मौका मिला. 24 टेस्ट मैचों में उन्होंने 70 विकेट झटके. जबकि 95 वनडे मैचों में उन्होंने 96 विकेट लिए.

डैनियल विटोरी

साल 2000 के अंत में इस खिलाड़ी ने अकेले ही पूरी न्यूजीलैंड टीम का कायाकल्प बदल दिया था. यूं तो न्यूजीलैंड की पिचों को तेज कहा जाता है, लेकिन विटोरी की गेंदों ने वहां भी कहर बरपाया है. 34.36 की औसत से 113 टेस्ट मैचों में उन्होंने 362 विकेट लिए हैं. जबकि 295 वनडे मैचों में उनके नाम 305 विकेट हैं. 34 टी20 मैचों में उन्होंने 38 विकेट लिए हैं.

स्टुअर्ट मैकगिल

जब यह खिलाड़ी औस्ट्रेलियाई टीम में था तो उन वक्त शेन वौर्न का रुतबा अलग ही था. इसी वजह से उन्हें ज्यादा क्रिकेट खेलने का मौका मिला ही नहीं. कंगारू टीम के लिए कुल मिलाकर 47 अंतरराष्ट्रीय मैच (टेस्ट और वनडे) खेलने वाले मैकगिल ने 2003 में शेन वौर्न पर बैन लगने के बाद उनकी जगह को भरने की पूरी कोशिश की. 44 मैचों में उन्होंने 29.02 की औसत से 208 विकेट झटके थे.

ग्रीम स्वान

आधुनिक क्रिकेट में सबसे कमतर खिलाड़ियों में आंके जाने वाले ग्रीन स्वान ने अपने करियर के दौरान इंग्लैंड क्रिकेट टीम को बुलंदियों पर पहुंचाया. 2010 के आईसीसी टी20 क्रिकेट विश्व कप में उन्होंने कैरिबियाई पिचों में जमकर धमाल मचाया था. इस टूर्नामेंट में वह पांचवे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी थे. इसी प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड ने यह टूर्नामेंट जीता था.

दीपिका के इस किरदार को फिर परदे पर उतारना चाहती हैं कृति खरबंदा

आमतौर पर बौलीवुड में एक कलाकार दूसरे कलाकार की अभिनय प्रतिभा के चलते उसका प्रशंसक बनता है.

कृति खरबंदा भी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की बहुत बड़ी फैन हैं. मगर इसकी वजह अलग है. इतना ही नहीं कृति खरबंदा, दीपिका पादुकेाण के एक खास किरदार को परदे पर उतारना चाहती हैं.

इसकी चर्चा करते हुए कृति खरबंदा ने हमसे कहा- ‘‘यह सच है कि मैं इन दिनों दीपिका पादुकोण की प्रशंसा करती रहती हूं. इसकी वजह यह है कि उन्होंने ऐसे मुद्दे पर बात की, जिस पर लोग बात नहीं करना पसंद करते. यूं तो मैं उनकी अभिनय की प्रशंसक हूं, पर जब दीपिका पादुकोण ने आगे बढ़कर अपने डिप्रेशन की बात की और डिप्रेशन से गुजर रहे लोगों की मदद के लिए काम करना शुरू किया, तो मैं उनकी इस बात के लिए काफी प्रशंसक बन गयी, क्योंकि इस मसले पर बात करना यानी कि रस्सी पर चलने के बराबर है. पर उन्होंने इसे बहुत सकारात्मक ढंग से लिया.

यदि आप मुझसे पूछे कि मैं दीपिका पादुकोण के किस किरदार को पुनः रचना चाहूंगी, तो मेरा जवाब होगा कि उनकी निजी जिंदगी के डिप्रेशन की बात को स्वीकार करने वाले पक्ष को पुनः परदे पर अपने अभिनय से संवारना चाहूंगी. मैं तो उन किरदारों को भी निभाना चाहती हूं, जो कि दूसरों की मदद कर रहे हों, दूसरों की जिंदगी संवार रहे हों.’’

जब अमिताभ के लिए डांस करने से मना कर सेट छोड़ चले गए थे प्राण

गंभीर आवाज में ‘बरखुरदार’ कहने का वो खास अंदाज भला कौन नहीं पहचानेगा. वह अभिनेता प्राण साहब या प्राण सिकंद हैं, जो अपने बेमिसाल अभिनय से हर किरदार में प्राण डाल देते थे.

फिर चाहे वह ‘उपकार’ में अपाहिज का किरदार हो या ‘जंजीर’ में अक्खड़ पठान का. प्राण ऐसे एक्टर थे जिनका चेहरा हर किरदार को निभाते हुए यह अहसास छोड़ जाता था कि उनके बिना इस किरदार की पहचान मिथ्या है.

साल 1973 में आई डायरेक्टर प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर सुपरहिट साबित हुई थी. इस फिल्म से किसी को उम्मीद नहीं थी, लेकिन फिल्म ने रिलीज होते ही कई रिकौर्ड अपने नाम कर लिए थे. इस फिल्म में प्राण और अमिताभ की दोस्ती को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया था.

जंजीर के बाद भी अमिताभ और प्राण कई फिल्मों में एक साथ नजर आए. शराबी और अमर अकबर एंथनी जैसी फिल्मों में तो प्राण ने अमिताभ के पिता का किरदार भी निभाया था. रील लाइफ में साथ-साथ कई फिल्म करने के बाद ये दोनों रियल लाइफ में भी काफी अच्छे दोस्त बन गए थे.

लेकिन क्या आप जानते हैं जंजीर फिल्म की शूटिंग के दौरान प्राण अमिताभ बच्चन के लिए ‘यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी’ गाना को शूट नहीं करना चाहते थे. फिल्म में प्राण ने एक पठान का किरदार निभाया था. जिसे इस गाने पर डांस करना होता है. लेकिन प्राण ऐसा करने के लिए तैयार नहीं थे.

प्राण नहीं चाहते थे कि वो किसी नए स्टार के लिए डांस करें. इसके साथ ही वो फिल्मों में डांस करने से अक्सर बचने की कोशिश भी किया करते थे. जब इस गाने की शूटिंग हो रही थी तो प्राण सेट छोड़कर चले गए.

जिसके बाद फिल्म के डायरेक्टर प्रकाश मेहरा उन्हें मनाकर वापस लाए थे. प्रकाश ने प्राण से कहा तुम्हारे बिना मैं ये फिल्म नहीं बना सकता. अमिताभ बिल्कुल नया है, वो अपने दम पर फिल्म नहीं चला पाएगा.

इससे पहले अमिताभ की कई फिल्में फ्लौप हो चुकी थी. यही वजह थी प्रकाश मेहरा कोई चांस नहीं लेना चाहते थे. खैर, प्राण मान गए और फिर गाने की शूटिंग को पूरा किया गया. फिल्म रिलीज होने के साथ ही हिट हो गई और दोस्ती के ऊपर फिल्माए गए इस गाने की भी खूब तारीफ हुई. इस गाने ने काफी दिनों तक लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता को बनाए रखा.

प्राण साहब का नाम लेते ही जहन में एक अजीब सी छवि आने लगती है क्योंकि प्राण साहब ने आधिकाधिक फिल्मों में निगेटिव किरदार निभाय़ा था, लेकिन असल जीवन में प्राण साहब का व्यक्तित्व बहुत ही सादगी भरा था.

प्रेम और रोमांस हैं एक ही सिक्के के दो पहलू, इसे कुछ ऐसे समझिए

रोमांस का मतलब केवल प्यारमुहब्बत और दैहिक सुख ही प्राप्त करना नहीं है, बल्कि रोमांस का अर्थ है दो युवा दिलों का एकसाथ धड़कना, एकदूसरे की भावनाओं को समझना. जिस प्रेम में निष्ठा हो उस में ही रोमांस प्राप्त होता है. अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निष्ठा व प्रेम जरूरी हैं. कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य में तभी कामयाबी पाता है जब उस के मन में कुछ कर पाने की इच्छा और लगन होती है.

रोमांस यानी अपने प्यार को दिलोजान से पाने का एहसास. कोई ऐसा साथी मिले, जो प्यारी सी मीठी बातें या फिर छेड़छाड़ करे जो तनमन में स्पंदन जगा कर रोमरोम को पुलकित कर दे यानी रोमांस एक खूबसूरत एहसास भर देता है.

एक मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत सुजाता का मानना है कि रोमांस के बिना जिंदगी अधूरी होती है. मैं नहीं जानती कि रोमांस की उत्पत्ति कब और कहां से हुई, पर मैं इतना जरूर कहूंगी कि रोमांस अपने प्यार के प्रति दीवानगी को बढ़ाता है.

आकर्षण है रोमांस

एक महिला सामाजिक संगठन से जुड़ी जया की मानें तो रोमांस ऐसा आकर्षण है जो अपने प्रिय को अपनी ओर आकर्षित करता है, जो कम समय में ही अपने प्यार को सम्मोहन में जकड़ लेता है.

अकेलेपन की स्थिति में रोमांस जीवन में रंग भरने का काम करता है. एकदूसरे का सामीप्य रोमांस की संभावनाओं को और बढ़ा देता है. रोमांस के बिना लाइफ में सबकुछ अधूराअधूरा सा लगता है.

सिक्के के दो पहलू

प्रेम और रोमांस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. एक निजी स्कूल संचालिका गीता का कहना है, ‘‘रोमांस के बिना प्यार संभव ही नहीं है, क्योंकि ये दोनों ही व्यक्ति को प्यार की राह पर आगे बढ़ने को मजबूर करते हैं.

‘‘प्यार अगर मंजिल है तो रोमांस उस तक पहुंचने का रास्ता है. बिना रामांस के प्यार को परवान तक पहुंचा पाना मुश्किल होता है. रोमांस प्रेम में तभी बदलता है जब एकदूसरे के प्रति रोमांस के भाव उत्पन्न हों. हम यह कह सकते हैं कि रोमांस दो प्रेम पथिकों को एकदूसरे से जोड़ने का सरल व सुंदर माध्यम है.’’

उत्साह है जरूरी

रोमांस में उत्साह का होना बहुत जरूरी है. बिना उत्साह के इस का रसपान करना संभव नहीं है. उत्साह ही रोमांस को जोशीला बनाता है, तनमन की गहराइयों का एहसास कराता है. सुरेश और संगीता अपने रोमांस को ले कर काफी उत्साहित थे. इसीलिए आज वे दोनों रोमांस करने के बाद, अच्छे साथी बन कर एक सफल गृहस्थ बन जीवनयापन कर रहे हैं.

वास्तविक प्रेम

प्रेम और रोमांस में वास्तविकता होनी बहुत जरूरी है. प्रेम में खुशबू है और खुशबू की तरह प्रेम को भी छिपाया नहीं जा सकता. दो युवा दिल अपने बदन की खुशबू को बखूबी पहचानते हैं, महसूस करते हैं. खुशबूरूपी वास्तविकता प्यार में ताजगी बनाए रखती है. इसलिए प्रेम में वास्तविकता संजीवनी का काम करती है. फिर कहा भी जाता है कि प्रेम में अमीरीगरीबी नहीं देखी जाती.

स्पंदन का एहसास

डा. सुरेंद्र सरदाना का कहना है, ‘‘रोमांस एक एहसास है, जिस की गहराई महसूस की जा सकती है. अपने चाहने वाले के लिए जिस प्रकार दिल की धड़कनें रुकने का नाम नहीं लेतीं, ठीक उसी प्रकार प्यार में रोमांस के बिना मजा किरकिरा हो जाता है. किसी अपने चहेते, जो दिल ही दिल आप को चाहता है, उस से मिलने की इच्छा तीव्र हो जाती है. प्रिय से निगाहें मिलने पर तनमन में स्पंदन सा महसूस होता है और तब प्यार के सागर में डुबकी लगाने को मन करता है. यही तो है रोमांस आप का. रोमांस तभी आनंदित करता है, जब उस में एकदूसरे का एहसास हो.’’

कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि प्रेम और रोमांस एक सिक्के के दो पहलू हैं. प्रेम के बिना रोमांस अधूरा है. रोमांस दो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. रोमांस का भाव स्थायी नहीं, संचारी होता है, क्योंकि यह प्रेमियों के तनमन में संचारित होता रहता है.

प्यार न हो कम

लड़कियां जब प्यार करती हैं तो अपने प्रेमी के सिवा कुछ सोचना नहीं चाहतीं, जबकि लड़के कुछ पर्सनल स्पेस चाहते हैं. सो, उन्हें स्पेस देती रहें. इस से आप में उन की दिलचस्पी बनी रहेगी और वे ज्यादा खुश रहेंगे.

हर लड़का चाहता है कि उसे वह इज्जत मिले जिस के लिए वह डिजर्व करता है. यह इज्जत तब और भी खास हो जाती है जब अपने चाहने वाले से मिले. अगर आप उसे इज्जत नहीं देंगी तो वह रिश्ते को कहीं न कहीं बोझ समझने लगेगा.

प्यार में उत्साह बनाए रखना जरूरी है. इस के लिए रोमांस के नएनए तरीके, शरारत, अदाओं को करने में कोई कसर न छोड़ें.

पने वर्तमान की तुलना कभी भी अतीत से न करें.

पार्टनर से कुछ पाने की चाहत रखने के बजाय उसे कुछ देने पर ध्यान दें, चाहे वह छोटा सा गुलाब हो.

कोई भी व्यक्ति परफैक्ट नहीं होता पर अपने पार्टनर को अपने लिए हमेशा परफैक्ट मानें.

पार्टनर को रोमांस के मामले में सौफ्टली हैंडल करें. रोमांस करने में उसे कुछ भय है तो प्यार, मनुहार और फोरप्ले द्वारा उसे तैयार करें. तभी आप दोनों रोमांस के पलों का आंनद उठा पाएंगे.

जब आप की रूममेट बीमार हो जाए तो आप क्या करेंगी?

यदि आप होस्टल में रह कर पढ़ रही हैं तो आप की रूममेट भी अवश्य होगी. क्योंकि आमतौर पर एक रूम में 2 स्टूडैंट्स के रहने की व्यवस्था होती है. कुछ ही दिनों में आप की रूममेट आप की दोस्त बन जाती है और आप एकदूसरे से अपनी पर्सनल बातें भी शेयर करने लगती हैं. लेकिन जब आप की रूममेट बीमार हो जाए तो आप क्या करेंगी? क्या उसे अपने हाल पर छोड़ देंगी या फिर उस की देखभाल अपनी बहन की भांति कर अपना फर्ज निभाएंगी?

रूममेट से आप का खून का रिश्ता भले ही न हो और हो सकता है कि वह आप की जाति, धर्म की भी न हो, लेकिन जब एक छत के नीचे रहना मजबूरी हो, तो दोनों को एकदूसरे को स्वीकार करते हुए अपने सुखदुख साझा करने चाहिए.

प्राय: देखा गया है कि जब आप की रूममेट बीमार होती है तो आप उस की तीमारदारी करने के बजाय कोई न कोई बहाना बना कर कन्नी काट लेती हैं, जो ठीक नहीं है, क्योंकि कभी आप की तबीयत भी बिगड़ सकती है. ऐसे में वह भी आप के साथ ऐसा व्यवहार करे तो आप को कैसा लगेगा? सच्चा मित्र वही है जो बीमारी या विपत्ति के समय काम आए. अत: सुख के ही नहीं, दुख के भी साथी बनें.

यदि आप की रूममेट बीमार है और डाक्टर ने उसे आराम करने को कहा है तो इस का मतलब यह नहीं कि आप उसे देख नाकभौं सिकोड़ने लगें या यह आशंका पाल लें कि कहीं वह बीमारी आप को तो नहीं लग जाएगी?

जो बीमारी संक्रामक नहीं है, वह भला आप को कैसे लग सकती है? यदि संक्रामक हुई भी, तो सावधानी और सतर्कता बरतते हुए उसी कमरे में रहते हुए उस की सेवा कर सकती हैं. कम से कम समय पर दवा तो दे ही सकती हैं और उस के खानेपीने का इंतजाम कर सकती हैं. यदि रूममेट की बीमारी की वजह से आप को थोड़ा अधिक काम करना भी पड़े, तो करने में कोई बुराई नहीं है.

यदि आप की रूममेट अपनी किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का जिक्र आप से करती है तो आप होस्टल की वार्डन या अधीक्षक को इस संबंध में बताएं. वे किसी योग्य डाक्टर को बुलवाएंगे या उसे अस्पताल तक पहुंचाएंगे. इस दौरान आप रूम पार्टनर के साथ रहें तथा उस का मनोबल बनाए रखें. इस के अलावा उस के परिजनों को भी इस की सूचना दें. यदि तबीयत ज्यादा खराब हो तो परिजनों को बुलवा लेना ही ठीक रहता है. फिर वे जहां चाहें उस का इलाज कराएं.

रूममेट के बीमार होने पर कोई भी दवा अपने मन से न दें. कई बार जो दवा आप को सूट करती है वही दूसरे को ऐलर्जी या रिऐक्शन कर सकती है इसेलिए डाक्टर की सलाह ले कर ही दवा दें.

जब आप को दिख रहा है कि रूममेट बीमार है फिर भी वह अपने हिस्से का काम कर रही है, तो आप को उसे रोकना चाहिए. बिना कहे उस की सहायता करें और उस पर एहसान न जताएं. खुद पहल कर उस की जरूरतें पूछें तथा उन्हें पूरा करने की कोशिश करें.

यदि आप और आप की रूममेट एक ही क्लास में पढ़ती हैं तो आप अपने नोट्स आदि उसे दें ताकि जितने समय वह कालेज नहीं जा पाई, उस की कुछ तो भरपाई हो सके.

बीमारी की अवस्था में बजट भी गड़बड़ा जाता है. हो सकता है कि उस के पास पैसे खत्म हो गए हों, ऐसे में अपने पैसों से इलाज करा देना ही इंसानियत है.

रिश्तों की इन अजीब उलझनों का जवाब हमसे जानिए

सिचुएशन 1

आप किसी परिचित के यहां खाना खाने गए हैं लेकिन खाना या तो बेस्वाद है या फिर इतना स्पाइसी कि गले से नीचे उतारना मुश्किल है. कई बार आप जिन चीजों को हाथ तक नहीं लगाते, यदि वे आप के आगे परोस दी जाएं तो भी मुश्किल होती है, जैसे प्याज व लहसुन से बना भोजन या कद्दू, करेले जैसी सब्जियां.

ऐसे संभालें

किसी ने बड़े चाव से भोजन परोसा और आप नखरे दिखाएं कि आप को यह भोजन कतई पसंद नहीं, तो यह अशिष्टता होगी और मेजबान का अपमान भी होगा. मेजबान का दिल दुखाने के बजाय आप को कुछ बहाने बनाने होंगे, जैसे आज मेरा फास्ट है, तबीयत ठीक नहीं है इसलिए दिन में एक बार खाती हूं, पेट गड़बड़ है या अभीअभी घर से खा कर ही आए हैं. साथ ही, उन से कहें, ‘ऐसा कीजिए आप मुझे एक कप चाय पिला दीजिए.’ इस से उन का मान भी रह जाएगा और आप अरुचिकर भोजन खाने से भी बच जाएंगे.

सिचुएशन 2

आप की फ्रैंड की नईनई शादी हुई है. आप को पता चल गया है कि उस का पति अच्छा इंसान नहीं है. वह आवारा है, नशेड़ी है या फिर बदनाम इंसान है. ऊपर से सहेली पूछ रही है कि बता, मेरा पति कैसा लगा?

ऐसे संभालें

बसीबसाई गृहस्थी को उजाड़ना बुद्धिमानी की बात नहीं. जब शादी हो ही चुकी है तो सहेली को उस के पति के बारे में सबकुछ साफसाफ बता देना ठीक नहीं होगा. कई बार शादी के बाद इंसान बदल भी जाता है.

हो सकता है जिसे आप आवारा या बदनाम समझ रही हों, वह शादी के बाद सुधर जाए. लेकिन सहेली से आप अपने मुंह से यह सब कहेंगी, तो उस का दांपत्य जीवन शुरू से ही खटाई में पड़ जाएगा और वह अपने पति के बारे में बुरी धारणा बना लेगी या तो दुखी होगी या फिर पति के साथ दुर्व्यवहार करेगी और उसे उसी नजरिए से देखने लगेगी. इस से बात बनने के बजाय बिगड़ जाएगी. बेहतर होगा कि सहेली के पूछने पर, ‘हां, अच्छे लग रहे हैं. इन्हें भरपूर प्यार देना और सुखी जीवन जीना.’ फिर मजाकमजाक में यह भी कह दें कि शुरू से ही ध्यान रखना, इन्हें कोई बुरी आदत न लग जाए.

सिचुएशन 3

आप किसी के बारे में बुराभला कह रही हैं और पता चले कि वह तो आप के ठीक पीछे खड़ा है और सबकुछ सुन चुका है.

ऐसे संभालें

बात को छिपाने या बहाने बनाने से कोई फायदा नहीं. या तो आप को बेहद कुशल अभिनेता बनते हुए यह जताना होगा कि आप उस की उपस्थिति के बारे में जानती थीं और आप ने जानबूझ कर ऐसा सुनाने व छेड़ने के लिए कहा या फिर सीधेसीधे माफी मांग लेने में ही फायदा है. भले ही वह बुरी तरह नाराज हो जाए और उस वक्त आप को माफ न करे, लेकिन फिर भी गुस्से की आंच जरा धीमी तो पड़ ही जाती है.

सिचुएशन 4

आप की फ्रैंड अचानक आप के सामने अजीब तरह की ड्रैस पहन कर आती है और पूछती है कि कैसी लग रही हूं मैं. सच यह है कि वह बहुत बेढंगी और फनी लग रही है. न तो ड्रैस अच्छी है और न ही उस की बौडी पर पहनने लायक है.

ऐसे संभालें

फ्रैंड का मजाक उड़ाने की गलती न करें. इस से उस का मन दुखी होगा, शर्मिंदगी महसूस होगी और रिश्तों पर विपरीत असर पड़ेगा लेकिन, वह आप की फास्ट फ्रैंड है इसलिए उस से किसी गलतफहमी में रखना भी ठीक नहीं वरना दूसरे उस का मजाक बनाएंगे. उसे कुछ ऐसा कहें, ‘अरे वाह, कलर तो काफी अच्छा चूज किया, लेकिन यह स्टाइल मुझे जरा कम जंचा. आजकल ऐसी स्टाइल कम चल रही है. इस से अच्छा होता कि तुम मौजूद फैशन के मुताबिक ड्रैस खरीदतीं.

एक काम करो, इसे घर में या कौंप्लैक्स में ही पहनना. बाहर जाना हो, तो इस के बजाय अपनी अमुक ड्रैस पहनना. तेरी कदकाठी और फिगर पर वह ज्यादा मस्त लगती है. इस प्रकार आप इशारों ही इशारों में उसे ड्रैस की कमी बता देंगी.

सिचुएशन 5

पड़ोसिन का निकला हुआ पेट देख कर आप को लगा कि वह गर्भवती है और आप ने बिना आगापीछा सोचे पूछ डाला, ‘कब की डेट है?’ भौचक्की पड़ोसिन ने कहा, ‘काहे की डेट है? मैं प्रैग्नैंट थोड़ी हूं?’

ऐसे संभालें

बात को तुरंत ट्विस्ट देते हुए मजाकिया लहजे में अपनापन जताते हुए कुछ ऐसा कहें, ‘अरी बावली बहन, मैं ने तो तुझे जानबूझ कर ऐसा कहा. अपनी सेहत पर ध्यान दे. मोटा पेट हजार बीमारियों की जड़ है. सुबहशाम वाक, जौगिंग वगैरा किया कर वरना आज जो सवाल मैं ने मजाक में किया है वही सवाल लोग सचमुच तुझ से करने लगेंगे. मुझे ही देख, मैं ने खानपान कितना कंट्रोल किया, तब जा कर मोटापा काबू में आया है वरना टुनटुन हो जाती. मेरे हसबैंड तो सुबहशाम वाक पर जाते हैं और व्यायाम भी करते हैं.’

सिचुएशन 6

आप के मित्र दंपती में अनबन हो गई. अनबन भी ऐसी कि तलाक तक बात पहुंच गई. दोनों ही आप के दोस्त हैं. दोनों आप से अलगअलग मिल कर एकदूसरे की बुराई करते हैं, आप से राय मांगते हैं और दूसरे पक्ष से संबंध तोड़ने के लिए कहते हुए संबंधों की दुहाई देते हैं.

ऐसे संभालें

इस स्थिति में आप दोनों को कभी खुश नहीं रख सकते. दोनों को खुश रखने की कोशिश करेंगी तो दोनों से ही संबंधों में खटास आ जाएगी. चूंकि स्थिति काफी बिगड़ चुकी है और तलाक तक की नौबत आ गई है, इसलिए दोनों में तालमेल बैठाने या उन के संबंधों को जोड़ने की कोशिश भी बेकार साबित होगी. बेहतर यह होगा कि आप किसी एक से हमदर्दी रखें, उसे भावनात्मक या आर्थिक सहारा दें, उस का संबल बन कर एक अच्छी दोस्त साबित हों. हां, इस के लिए उसे चुनें जो दिल से आप के ज्यादा करीब हो, कम दोषी हो और जिस के साथ आप के रिश्ते ज्यादा पुराने रहे हों.

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