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एनटीपीसी हादसा : अत्याधिक तेजी बनी हादसे की वजह

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में स्थित ऊंचाहर नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन यानि एनटीपीसी में बौयलर फटने से 35 से अधिक लोगों की मौत हो गई. सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हो गये. एनटीपीसी की यह छठी यूनिट थी, जिसमें हादसा हुआ. यह सबसे नई यूनिट थी. इसको बनाने का काम रिकार्ड समय में हुआ. 31 मार्च को यह बनकर तैयार हुई और अगस्त माह में इसमें उत्पादन शुरू हो गया. इस यूनिट से 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था. अभी यहां पर केवल 200 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा था.

इस यूनिट में कई तरह का काम भी बकाया था. वह भी साथ में चल रहा था. इस वजह से यहां मजदूरों की संख्या अधिक थी, जिससे हादसा भयावाह हो गया. वैसे तो यह यूनिट अब तक इस वजह से चर्चा में थी कि प्रधानमंत्री के सपनों को पूरा करने के लिये एनटीपीसी प्रशासन ने कम समय में ही उसको केवल तैयार ही नहीं किया उससे उत्पादन भी शुरू कर दिया था. हादसे के बाद यह यूनिट देश के सबसे बड़े पावर प्रोजेक्ट हादसे के रूप में याद की जायेगी.

रायबरेली और अमेठी कांग्रेस पार्टी के नेताओं गांधी परिवार की पैतृक सीट है. यहां से गांधी परिवार के राहुल गांधी और सोनिया गांधी लोकसभा सदस्य हैं. भाजपा किसी भी तरह से कांग्रेस के इन नेताओं को उनके घर में चुनौती देना चाहती है. इस रणनीति के तहत भाजपा ने स्मृति इरानी को अमेठी और रायबरेली में प्रचार के लिये लगा रखा है. रायबरेली में रेल कारखाना और एनटीपीसी दो बड़े बिजनेस रहे हैं. भाजपा अब अमेठी और रायबरेली के लोगों को यह समझाना चाहती है कि कांग्रेस ने उन लोगों के लिये कुछ नहीं किया. भाजपा ही तेजी से विकास कर सकती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019-20 तक पावर फौर औल यानि सबको बिजली और उदय जैसी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया. प्रधानमंत्री के इस सपने को पूरा करने के लिये एनटीपीसी ऊंचाहर ने आधीअधूरी तैयारियों के बीच अपनी छठी पावर यूनिट से बिजली उत्पादन का काम शुरू कर दिया.

जानकार मानते हैं कि 500 मेगावाट की एक यूनिट को चालू करने में कम से कम 3 से साढ़े तीन साल का समय लग जाता है. इस इकाई को ढाई साल के रिकार्ड समय में ही शुरू कर दिया गया. इसका व्यवसायिक उत्पादन भी शुरू हो गया. इस बात को लेकर एनटीपीसी प्रशासन जल्द ही अपनी उपलब्धियां घोषित करने वाली थी. अगर यह यूनिट पूरी तरह से तैयार होती तो यहां बड़ी संख्या में मजदूर नहीं होते. इस यूनिट से ट्रायल के दौरान कुछ खामियां मिली, जिसकी वजह से 28 अक्टूबर को इसका काम रोका जाना था. इसके बाद भी यह काम नहीं रुका. यूनिट की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कोयला पूरी तरह से राख में नहीं बदलती थी. राख प्लांट से बाहर नहीं निकल रही थी. जिसकी वजह से बौयलर का तापमान बढ़ता गया और वह फट गया. हादसे के शिकार हुये लोगों का इलाज लखनऊ दिल्ली के अस्पतालों में चल रहा है.

असल में एनटीपीसी सुरक्षा मानको को सबसे अच्छा पालन करने वाली संस्था है. ऊंचाहार एनटीपीसी में 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है. यहां से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तराखंड बिजली सप्लाई की जाती है. देश भर में बिजली उत्पादन का 16 फीसदी हिस्सा इस यूनिट से तैयार होता था. ऐसे में 2019 तक हर घर को बिजली देने के लिये ऊंचाहार एनटीपीसी की छठी यूनिट का काम करना बहुत जरूरी था. ऐसे में सभी तरह के सुरक्षा मानकों को पूरा किये बिना आधा उत्पादन करने के लिये यूनिट को शुरू कर दिया गया.

नई बनी इस यूनिट को तैयार करने में लगे उपकरण भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड भेल के द्वारा भेजे गये थे. अगर सही तरह से जांच हो तो यह पता चल सकेगा कि आधे अधूरे उत्पादन के साथ जल्दबाजी में इस यूनिट को शुरू क्यों किया गया? हो सकता है कि यह बातें जांच का बिन्दू न हो.

औद्योगिक हादसों के मामलों में भारत का रिकार्ड अच्छा नहीं है. राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो 2015 के मुताबिक 299 औद्योगिक हादसे हुये. इसमें 229 लोगों की जान गई. 2014 में 200 लोगों की जान गई थी. असल में हमारे देश में बिना आधारभूत ढांचा मजबूत किये बिना काम शुरू करने का रिवाज बढ़ता जा रहा है.

लखनऊ से दिल्ली के बीच डबल डेकर रेल गाडी शुरू हुई. धूमधाम से शुरू हुई यह रेलगाडी अव्यवस्था का शिकार हो गई. यह पूरी तरह से व्यवस्थित होकर कभी नहीं चल पाई. डबल डेकर ट्रेन जैसा हाल तेजस ट्रेन का भी हुआ. रेल विभाग ने कई ट्रेनो की स्पीड बढ़ा दी. जिसकी वजह से ट्रेनों के संचालन में तमाम तरह की परेशानियां आ रही हैं. रेलवे स्टेशनों पर रेल गाडियों के खड़ी होने के लिये प्लेटफार्म खाली नहीं होते. जिसकी वजह से ट्रेन लेट हो रही हैं. पटरियों की हालत खस्ताहाल है.

आजकल अफसरों में आगे निकलने की होड लगी है. वह किसी भी तरह से यह दिखाने की कोशिश में रहते हैं कि उनका काम अव्वल है. स्कूलों में बच्चे फेल न हो इसके लिये सिलेबस सरल कर दिया गया. बच्चों को फेल करना बंद कर दिया गया. रिजल्ट अच्छा दिखाने के लिये टीचर नकल कराने लगा. इस तरह वाहवाही बटोरने के चोंचले भारी पड़ने लगे हैं. बिना पूरी तैयारी के काम शुरू करके ऐसे संस्थानों को आम जीवन को जोखिम में नहीं डालना चाहिये.

सार्वजनिक उद्यम के क्षेत्रों में काम कर रहे दूसरे संस्थान भी अपने कर्मचरियों पर पूरा ध्यान नहीं दे रहे. कर्मचारियों की केवल सुरक्षा की ही बात नहीं है, उनके रहने, खाने और आवागमन तक के उपाय नहीं किये जा रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह सार्वजनिक उद्यमों में बढ़ता राजनीतिक हस्तक्षेप है. राजनीतिक और सरकारी हस्तक्षेप से सरकारी विभागों की कार्यक्षमता पहले की खत्म हो चुकी है. वहां फैले भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता से सभी परिचित हैं.

अब सार्वजनिक उद्यम संस्थान भी इसका तेजी से शिकार होते जा रहे हैं. सार्वजनिक उद्यम संस्थान के लाभ के हिस्से को कर्मचारियों की सुविधाओं पर खर्च करने की जगह नेताओं, अफसरो की ऐशोआराम पर खर्च किया जाता है. काम करने वालों में ठेका सिस्टम बढ़ गया है. अब सार्वजनिक उद्यमों को प्राइवेट कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है. जिसकी वजह से वह लाभ मे होने के बाद भी पिछड़ रही है. यह नेताओं की चारागाह बन कर रह जा रही है.

अपने डौक्यूमेंट को अब ऐसे करें स्कैन

स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत यह है की आपके कई काम ये आसान कर देता है. जैसे की टीवी, कैमरा, अलार्म क्लौक, म्यूजिक प्लेयर और अब तो स्कैनर का भी काम स्मार्टफोन ही कर देता है. डाक्यूमेंट्स की जरुरत तो आए दिन किसी न किसी जरुरी काम के लिए पड़ती रहती है. ऐसे में डौक्यूमेंट को स्कैन कर के फोन में सेव रखना बड़ा कामगर साबित होता है.

स्मार्टफोन से स्कैन करने के लिए इन स्टेप्स को करें फौलो

डौक्यूमेंट को स्कैन करने के दो तरीके होते हैं. पहले तरीके में यूजर्स गूगल ड्राइव के जरिए डौक्यूमेंट स्कैन कर सकते हैं. दूसरे तरीके में थर्ड पार्टी एप डाउनलोड कर के डाक्यूमेंट्स स्कैन किए जा सकते हैं.

गूगल ड्राइव से ऐसे करें स्कैन

– अपने फोन में गूगल ड्राइव के विकल्प पर क्लिक करें

– आपको स्क्रीन पर + का साइन दिखेगा. इस पर क्लिक करें

– इसके बाद आपके सामने 6 विकल्प आएंगे. इसमें स्कैन के विकल्प पर क्लिक करें

– अब जिस भी डौक्यूमेंट को स्कैन करना है उसे पर्याप्त लाइट में रखकर इमेज स्कैन कर लें

– अब ‘√’ के विकल्प पर क्लिक करें

– इसके बाद डौक्यूमेंट आपकी ड्राइव में सेव हो जाएगा

यहां से आप डौक्यूमेंट शेयर भी कर सकते हैं.

थर्ड पार्टी एप से ऐसे करें स्कैन

– गूगल प्ले स्टोर पर जा कर स्कैनिंग एप, जैसे की Camscanner डाउनलोड कर लें.

– डाउनलोड करने के बाद एप को ओपन करें और साइन-इन या रजिस्टर कर लें.

– साइन-इन करने के बाद एप की होम स्क्रीन पर आपको डौक्यूमेंट, आईडी और क्यूआर कोड स्कैन करने का विकल्प आएगा.

– जिस भी डौक्यूमेंट को स्कैन करना है, उसको क्लिक कर लें

– फोटो लेने के कुछ देर बाद आपको फोटो पर 6 प्वाइंट नजर आएंगे. इनकी मदद से फोटो के अंदर डौक्यूमेंट को सेलेक्ट कर ओके कर दें.

– आपका डौक्यूमेंट अब स्कैन हो जाएगा. इससे आप अपने डौक्यूमेंट को फिल्टर्स के जरिए एडिट भी कर सकते हैं.

– ‘√’ पर क्लिक करते ही आपका स्कैन डौक्यूमेंट सेव हो जाएगा. इस डौक्यूमेंट की आप पीडीएफ फाइल भी बना सकते हैं.

इसके बाद आप चाहे तो इसे शेयर भी किया जा सकता है.

गलती से भी डाउनलोड ना करें ये वाला व्हाट्सऐप

दुनियाभर में इस्तेमाल किए जाने वाले पौप्युलर मेसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. दरअसल, प्ले स्टोर पर एक फेक व्हाट्सऐप देखा गया है जिसके झांसे में अब तक करीब 5 हजार से ज्यादा लोग आ चुके हैं. इस फेक ऐप को व्हाट्सऐप का मलिशस वर्जन भी कहा जा रहा है यानी गलती से भी अगर आपने इसे डाउनलोड कर लिया तो आपके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है.

यह फेक ऐप गूगल प्ले स्टोर पर ‘Update WhatsApp Messenger’ के नाम से दिखाई दे रहा है, इसके साथ डिवेलपर का नाम ‘WhatsApp Inc’ दिया गया है. इस ऐप को चेक करने पर पता चला है कि इसके अब तक 5 हजार बार डाउनलोड्स हो चुके हैं.

इतना ही नहीं, प्ले स्टोर पर इसी नाम से इसका एक और वर्जन में उपलब्ध है जिसे फिलहाल 10 लाख बार डाउनलोड किया जा चुका है. बता दें कि ओरिजनल व्हाट्सऐप के गूगल प्ले स्टोर में करीब 1 बिलियन यानी 1 अरब डाउनलोड्स हैं.

इस बात की जानकारी सबसे पहले एक ट्विटर यूजर @MujtabaMHaq ने दी जिसके बाद व्हाट्सऐप ट्रैकिंग वेबसाइट WABetaInfo ने भी इसकी जानकारी दी है. Update Whatsapp Messenger ऐप के नीचे कई यूजर्स ने कमेंट किए हैं जिसमें बताया गया है कि इस ऐप को डाउनलोड न करें क्योंकि यह एक फेक ऐप है. इसके साथ ही कई यूजर्स ने इसे रेड फ्लैग भी दिया है.

तो “शादी में जरूर आना” में पहले कृति खरबंदा की बजाय तापसी पन्नू थीं

दस नवंबर को प्रदर्शित होने जा रही विनोद बच्चन निर्मित और रत्ना सिन्हा निर्देर्शित फिल्म ‘‘शादी में जरुर आना’’ की काफी चर्चाएं हो रही हैं. इस फिल्म में राज कुमार राव के साथ कृति खरबंदा की जोड़ी को ट्रेलर आने के बाद से काफी पसंद किया जा रहा है.

मगर सच यह है कि इस फिल्म को छोटी फिल्म बताकर बड़ी फिल्म ‘जुड़वा 2’ करने के लिए तापसी पन्नू ने छोड़ दिया था, उसके बाद औडीशन द्वारा कृति खरबंदा को यह फिल्म मिली थी. अब फिल्म के प्रदर्शन के बाद तापसी पन्नू गम मनाएंगी या खुशी, यह तो दस नवंबर के बाद ही पता चलेगा. मगर तापसी इस मसले पर चुप हैं.

उधर कृति खरबंदा का दावा है कि इस फिल्म के लिए वह पहली पसंद थीं. इसके लिए उन्होंने औडीशन भी दिया था.

जबकि देशी सिनेमा को अहमियत देने वाले व फिल्म ‘‘शादी में जरुर आना’’ के निर्माता विनोद बच्चन कहते हैं-‘‘-रत्ना सिंन्हा ने पहले ही राज कुमार राव को कहानी सुना रखी थी. वह फिल्म करने के लिए तैयार थे.

कहानी सुनकर मुझे लगा कि सत्तू के किरदार के लिए राज कुमार राव एकदम परफैक्ट हैं. पर हमने हीरोईन के रूप में तापसी पन्नू को साइन किया था. मगर हमारी फिल्म की शूटिंग की तारीखों के साथ उनकी दूसरी फिल्म ‘जुड़वा 2’ को दी गयी तारीखों का टकराव हो रहा था.

तो तापसी ने खुद ही अलग होने की इच्छा जाहिर की. तापसी ने कहा कि ‘जुड़वा 2’ बड़ी फिल्म है और मैं अपने करियर के इस मोड़ पर बड़ी फिल्म को प्राथमिकता देना चाहती हूं. तब हमने नई अभिनेत्री के लिए औडीशन लेना शुरू किया. काफी लड़कियों के औडीशन लेने के बाद हमने कृति खरबंदा को चुना.’’

हवाई यात्रा कैंसलेशन चार्ज में की गई बढ़ोतरी, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान

आम तौर पर यात्री अपनी सुविधा को देखते हुए साथ ही कुछ पैसे बचाने के लिए यात्रा से काफी समय पहले ही टिकट बुक कर लेते हैं, लेकिन टिकट कैंसल करने की सूरत में यात्रियों को कुछ चार्ज चुकाना पड़ता है. लेकिन हो सकता कि इस बार आपको हवाई यात्रा के टिकट को कैंसल कराने पर पहले से ज्यादा चार्ज चुकाना पड़े, क्योंकि गुरुवार को स्पाइस जेट ने अपने कैंसलेशन चार्ज में बढ़ोतरी कर दी है. इस बढ़ोतरी के चलते स्पाइस जेट कैंसलेशन चार्ज बढ़ाने वाली पहली विमान कंपनी बनी है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्पाइस जेट ने डामेस्टिक फ्लाइट कैंसल करने पर 3000 रुपये बढाए हैं जो गुरुवार तक 2,250 रुपये था और इंटरनेशनल फ्लाइट कैंसल करने पर 3500 रुपये बढ़ाए हैं जिलका पहले चार्ज 2500 रुपये था. यदि बेस फेयर 3000 रुपये से कम है तो पैसेंजर्स को टैक्स का हिस्सा भी रिफंड किया जाएगा. अब गो एयर का सबसे कम कैंसलेशन चार्ज है. गो एयर डामेस्टिक और इंटरनैशनल फ्लाइट के लिए 2,225 रुपये चार्ज करता है.

आपको बताते चले कि पिछले एक साल में भारत में टिकट कैंसलेशन का चार्ज लगभग डबल यानी कि दोगुना हो गया है. जनवरी 2016 में स्पाइस जेट में टिकट कैंसलेशन चार्ज 1,800 रुपये थे.

ज्यादा कैंसलेशन फीस को देखते हुए, पैसेंजर्स अब तभी टिकट पहले बुक कर सकते हैं, तब उन्हें काफी अच्छा आफर मिल रहा हो. लेकिन, भारत में ‘अर्ली टिकट बुकिंग’ मार्केट बहुत अच्छा नहीं है. एक ट्रैवल एजेंट ने हमें बताया कि ज्यादातर डोमेस्टिक रूट पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि पैसेंजर्स ने एक महीना पहले टिकट बुक कराया है या तीन महीने पहले, दोनों स्थितियों में किराया समान ही होता है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति क्यों टिकट जल्दी बुक कराएगा. शायद यही वजह है कि भारत को लेट बुकिंग मार्केट भी कहा जाता है.

कुंआरेपन की जांच और पंचायती फरमान

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की एक मांबेटी को उस के पिता ने घर में बंद कर दिया, क्योंकि दोनों ने बेटी के पति और पंचायत के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने की कोशिश की थी. उन का मोबाइल फोन भी ले लिया गया. 22 मई, 2016 को लड़की योगिता, जो पुलिस में भरती होने की तैयारी कर रही थी, उस की शादी नासिक के 25 साला लड़के अर्जुन से हुई थी. यह अर्जुन की दूसरी शादी थी. लड़की जब वर्जिनिटी टैस्ट यानी कुंआरेपन की जांच में फेल हो गई, तो पति ने उसे छोड़ दिया था. इसलिए मांबेटी ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला लिया था. दोनों पतिपत्नी कंजरभाट समुदाय के हैं, जिस के 2 हिस्से हैं, डेरा सच्चा और खंडपीठ. इस समुदाय के अपने नियम हैं, जिन्हें सब मानते हैं.

इस समुदाय में तकरीबन ढाई लाख सदस्य हैं, जो ज्यादातर संगमनेर, सांगली, पुणे जिले में बसे हैं. उन की ताकतवर जात पंचायत है. 2 साल पहले इस समुदाय का अंडमाननिकोबार द्वीप समूह पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था. इस में भारत से तकरीबन 4 सौ सदस्य शामिल हुए थे  इन के नियम के मुताबिक, शादी के बाद जब पतिपत्नी एक सफेद कपड़े पर जिस्मानी संबंध बनाते हैं, तो लड़कियों में कुंआरेपन को सब से अहम मानने वाली जात पंचायत के सदस्य उस समय बाहर इंतजार करते हैं. यह एक टैस्ट होता है कि लड़की कुंआरी है या नहीं. योगिता के केस में अर्जुन ने कहा कि सैक्स के बाद लड़की का खून नहीं दिखा, तो उस ने योगिता को अपनी पत्नी मानने से साफ इनकार कर दिया. वह फरियाद करती रही कि वह कुंआरी है. पुलिस फोर्स में भरती होने की तैयारी में काफी कसरत करने के चलते खून नहीं बहा है. उस के पति और ससुराल वालों ने उस के गहने ले लिए. अगले दिन जब योगिता और उस की मां ने थाने में शिकायत करने की कोशिश की, तो उन्हें कमरे में बंद कर दिया गया. समाजसेवी संस्था के लोगों ने उस की मदद करने की कोशिश भी की, लेकिन योगिता ने जात पंचायत के डर से मदद लेने से इनकार कर दिया. उस ने बताया कि अभी उस की शादी एक और टैस्ट पर टिकी है. उसे एक मीटर कपड़ा दिया जाएगा, जिसे वह ऊपर या नीचे के हिस्से में बांधेगी और उसे बिना कपड़ों के ही दौड़ना होगा और पंचायत के मर्द उस का पीछा करते हुए उस के शरीर पर गरम आटे की लोई फेंकेंगे. पर उस ने यह सब करने से मना कर दिया है. समाजसेवकों ने भी योगिता के पिता को समझाने की कोशिश की, पर उन्हें भी जात पंचायत का डर है. उन्होंने जात पंचायत के लोगों को समझाने की कोशिश की, जिस के बाद 1 जून, 2016 को संगमनेर तालुका, अहमदनगर जिले में योगिता के घर मीटिंग हुई.

योगिता और अर्जुन ने 10 दिन बाद मिलबैठ कर बात करने के बाद यह मामला ही खत्म कर दिया. योगिता ने अर्जुन के पास लौटने का फैसला किया, जिस से उस के परिवार का बहिष्कार भी न हो और उस के भाईबहन की शादी में कोई परेशानी न हो. अर्जुन का कहना है, ‘‘हम अपने नियम मानते हैं. पंचायत बहुत खास है, इसलिए मैं ने उन का फैसला माना, पर मैं ने योगिता से माफी भी मांगी और उस ने मुझे माफ कर दिया, इसलिए अब हम हमेशा पतिपत्नी की तरह रहेंगे.’’ जब डिप्टी सुपरिंटैंडैंट अजय देवारे और कुछ समाजसेवी इस मुद्दे पर बात करने पहुंचे, उस दिन गांव के मुख्य पंच नोडकलाल गायब रहे. ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ की समाजसेवी वकील रंजना गवडे का कहना है कि लड़की और उस का परिवार जात पंचायत के बहुत ही सामाजिक दबाव में है. योगिता की 2 कुंआरी बहनें और एक भाई है. उस के पिता पेंटर हैं. डिप्टी सुपरिंटैंडैंट अजय देवारे का कहना है कि योगिता अब किसी कानूनी पचड़े में नहीं फंसना चाहती. वह अपने पति के साथ रहना चाहती है. हम उस के फैसले की इज्जत करते हैं और उस की सिक्योरिटी का भरोसा दिलाते हैं.

अर्जुन ने योगिता को लिखित में भरोसा दिया है कि वह उस के घर महफूज और खुश रहेगी.

समाजसेवकों का कहना है कि जागरूक होना बहुत जरूरी है. वर्जिनिटी टैस्ट यानी कुंआरेपन की जांच से एक औरत की बेइज्जती होती है, यह अपराध है. एक मर्द को 2 बार शादी करने पर जब किसी को कोई एतराज नहीं है, तो एक औरत के कुंआरेपन पर इतना तमाशा क्यों? ऐसी पंचायतों के सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ ‘प्रोटैक्शन औफ पीपल फ्रौम सोशल बायकौट ऐक्ट 2016’ कानून पास करवाने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य है. इस कानून को राष्ट्रपति के दस्तखत का इंतजार है. अगर यह कानून पास हो गया, तो पंचायत के ऐसे नियम बंद हो जाएंगे, यह औरत के प्रति दिमागी और जिस्मानी जोरजुल्म है, इस के लिए सभी को जागरूक होना पड़ेगा कि ऐसी घटनाएं समाज में जल्द से जल्द बंद हों.

हमसफर हो दगाबाज, तो प्लैटोनिक लव को कहें गुडबाय

बौयफ्रैंड और गर्लफ्रैंड के बीच रिश्तों में लौंग टाइम ड्रिवेन फैक्टर के लिए सब से जरूरी ऐलीमैंट है, ‘कमिटमैंट’ और यही कमिटमैंट जब डगमगाने लगे तो भरोसे व ईमानदारी पर टिके इस रिश्ते को टूटने में जरा सी भी देर नहीं लगती. प्रेम संबंध में दोनों ओर से लोआयलिटी की दरकार होती है. ऐसे में एक साथी अगर भरोसा तोड़ता है, तो दूसरा साथी स्वत: ही ब्रेकअप को मजबूर हो जाता है. आजकल प्रेम की इस दुनिया में सब से ज्यादा प्रचलित कोई शब्द है तो वह है ‘प्लैटोनिक बौंडिंग.’ इस में फिजिकल रिलेशन के बगैर सिर्फ कमिटमैंट के आधार पर प्रेमसंबंध कायम किए जाते हैं. इस निष्काम प्रेम में झूठ, फरेब व बेवफाई की कोई जगह नहीं होती. 2 साथी मिल कर जब यह तय करते हैं कि वे साथसाथ चल कर निष्काम भाव से पूरे समर्पण के साथ अपने प्रेम को आगे ले जाएंगे पर जब कोई एक साथी बीच राह में बेवफाई का रास्ता पकड़ लेता है तो प्लैटोनिकता के माने बदल जाते हैं और जोड़ों के बीच ‘लवडील’ वहीं खत्म हो जाती है.

पर क्या हरेक संबंध में ऐसा हो पाता है? क्या एक साथी की दगाबाजी का अंदाजा होते ही दूसरा साथी तत्काल अपनी रिलेशनशिप पर ब्रेक लगा पाता है?

कुछ जोड़ों द्वारा ‘प्लैटोनिक बौंडिंग’ पर प्रतिक्रिया

मल्टीनैशनल कंपनी में काम करने वाली सपना गौतम जो दिल्ली के जीटीबी नगर में रहती है, कहती है, ‘‘प्लैटोनिक लव की सब से पहली शर्त है भरोसा व विश्वास और अगर कोई इसी के साथ खेले तो दिल को ठेस पहुंचती है. ऐसे में तुरंत ऐसे रिश्ते से बाहर हो जाना ही बेहतर है. ऐसा कर के न केवल आप अपने साथी को उस के किए का सबक सिखा सकती हैं बल्कि अपने लिए आगे का रास्ता भी खोल सकती हैं, क्योंकि दोबारा उस पर विश्वास करने का मतलब है एक बार फिर ठेस खाने को तैयार होना. ‘‘मेरे साथ जब ऐसा हुआ कि मेरे फ्रैंड ने मुझे चीट किया और मुझे किसी और दोस्त के जरिए इस की जानकारी हुई, तो मैं ने तत्काल ब्रेकअप कर लिया, क्योंकि एक बार जो भरोसा तोड़ दे वह दोबारा भी ऐसा कर सकता है. अब मैं स्ट्रैसफ्री हूं और अपने कैरियर और लाइफ पर ज्यादा फोकस कर रही हूं. अगर मैं सचाई जानते हुए भी उसी रिश्ते को ढोती रहती तो डिप्रैशन में चली जाती. मेरे लिए तुरंत ब्रेकअप ही सही चुनाव था.’’

लेकिन इस बाबत पुरुषों की राय ली गई तो उन की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई. एक सरकारी विभाग में बतौर अनुवादक काम कर रहे मनोज कुमार की प्रतिक्रिया इस से उलट और बिलकुल अलग है. वे कहते हैं, ‘‘मैं ने अपने फ्रैंड सर्कल में और अपने आसपास कई लोगों को इस मामले में सफर करते देखा है, खासकर लड़कियां इस की सब से ज्यादा भुक्तभोगी हैं. हाल का ही वाकेआ है मेरी एक सहकर्मी का अपने औफिसमेट से ताजाताजा ब्रेकअप हुआ था, मामला था वादाफरोशी का. उन दोनों में प्लैटोनिक रिश्ते के नाम पर दोस्ती हुई थी. कुछ समय तक तो सबकुछ ठीक रहा. दोनों ही एकदूसरे को ले कर कमिटेड थे पर वक्त के साथ पुरुष साथी बदल गया. वर्षों के ईमानदार रिश्ते को उस ने किसी और के साथ संबंध बना कर दागदार कर दिया.

‘‘पर इस का राज खुलने से ब्रेकअप की नौबत आ गई. पुरुष मित्र ने संबंधों और पुरानी दोस्ती का वास्ता दे कर लड़की को ऐसा करने से रोक लिया, लेकिन अधिक दिनों तक स्थिति सामान्य न रह सकी. लड़का वापस अपने पुराने ढर्रे पर उतर आया. लड़की सबकुछ जान कर भी चुप रही, क्योंकि अब मामला उस के आत्मसम्मान से जुड़ा था. वह अपने औफिस में किसी को यह जताना नहीं चाहती थी कि वह टूट कर, जुड़े रिश्ते को एक बार फिर तोड़ना चाहती है. परिणाम यह हुआ कि वह आजतक सफर कर रही है और लड़का उसे चीट कर रहा है. इसलिए मेरी पर्सनल थिंकिंग है कि रिलेशन में चीटिंग का पता लगते ही युवतियों को तुरंत ऐक्शन लेते हुए रिश्ते पर विराम लगा देना चाहिए. ऐसे रिश्ते को कैरी फौरवर्ड करना यूजलैस है.’’

ऐसे करें लोआयलिटी टैस्ट

अगर आप रिश्ते में ईमानदार हैं तो आप को अपने साथी की बेईमानी का स्वत: पता चल जाएगा पर इस के लिए जरूरी है आप का केयरफुल होना. यहां कुछ चैकपौइंट दिए जा रहे हैं, इस से आप अपने साथी का लोआयलिटी टैस्ट आसानी से कर सकते हैं :

– उस के हावभाव व बौडी लैंग्वेज पर ध्यान दें. कहीं उस में कोई बदलाव तो नजर नहीं आ रहा.

– क्या वह बातबात पर आप से कुछ छिपाने की तो कोशिश नहीं कर रहा.

– आप से नजरें चुराना तो शुरू नहीं कर दिया.

– क्या आप से इन दिनों कामुकताभरी बातें तो नहीं करता, कुछ ऐसा जिसे पहले आप ने रिलेशनशिप में कभी नोटिस नहीं किया, मसलन, बातबात पर टच करना, चिपकने की कोशिश करना, सुनसान जगह पर मिलने की जिद करना आदि.

– आप में बिलकुल इंटरैस्ट न ले रहा हो. बातबात में ऐक्सक्यूज मी कह कर फोन पर बिजी हो जाता हो.

– सैक्स संबंधी बातों में उलझाने की कोशिश करता हो.

– सब से बड़ी बात कि आप के हां कहने की देरी हो और वह फटाफट हमबिस्तर होने के लिए तैयार हो जाए.

पवित्र रिश्ता सच की डोर से बंधा होता है. अगर रिलेशनशिप में ताउम्र कमिटेड रहने का वादा किया है तो उसे निभाएं जरूर. अगर लोआयलिटी से रिश्ते को निभा रही हैं और दूसरा बेईमानी कर मजे उड़ा रहा है तो ऐसे रिश्ते को तुरंत गुडबाय कहने में ही भलाई है, क्योंकि इस से आप भावनात्मक रूप से प्रभावित हो सकती हैं.

क्या करें जब पता चले रिश्तों में डिसलोआयलिटी का

–       अगर आप प्लैटोनिक रिलेशनशिप में हैं और अचानक आप को अपने पार्टनर के किसी और के साथ रिश्ते में होने की बात पता चले तो एकदम से प्रतिक्रिया न करें. थोड़ा संयम बरतें और मामले की तह तक जाएं.

–       कोई तो वजह होगी जिस से उस ने आप की लोआयलिटी तोड़ी होगी, उस वजह का पता लगाने की कोशिश करें.

–       अगर राज फाश भी हो जाए तो गुस्से में आ कर कोई ऊटपटांग हरकत न कर बैठें, इस से आप की अपनी इमेज खराब हो सकती है. बेहतर है मिलबैठ कर आपसी सहमति से रिश्ते पर विराम लगाएं.

–       अगर आप का साथी रिश्ते को जारी रखने की गुजारिश भी करता है तो उसे बिलकुल ऐक्सैप्ट न करें. आप दोबारा धोखा खा सकती हैं.

–       इस ब्रेकअप को ले कर बिलकुल स्ट्रैस में न पड़ें. इस से आप ही का नुकसान होगा. नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करें और आगे बढ़ें.

–       सब से अहम बात है कि भावनात्मक रूप से कभी न टूटें. यह आप को अवसाद में डाल सकता है.

–       रिलेशन को रिऐक्सैप्ट करने का मौका बिलकुल न दें. क्या फायदा उस रिश्ते का जिस में आप पूर्ण समर्पण के साथ जुड़ी हैं पर दूसरा आप के भरोसे की धज्जियां उड़ा रहा है.

परिवार, दोस्त, फैन्स और मीडिया के साथ जन्मदिन मनाना पसंद है : शाहरुख खान

हिंदी सिनेमा जगत के किंग खान और सुपरस्टार के नाम से प्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख खान अब 52 साल के हो गए हैं. इंडस्ट्री में 25 साल गुजार चुके शाहरुख ने इस बार अपने जन्मदिन को मीडिया और फैन्स के साथ मनाया. उन्हें उनके फैन्स करोड़ो की संख्या में हर साल पूरे विश्व से सोशल मीडिया के सहारे बधाईयां देते हैं. इतना ही नहीं मुंबई के बांद्रा इलाके के बैंड स्टैंड में हजारों की संख्या में उनके फैन्स हर साल उनके आवास ‘मन्नत’ के आगे घंटो खड़े इसलिए होते हैं, ताकि उन्हें शाहरुख की एक झलक पूरे दिन में अवश्य मिले और वह मिलती भी है, क्योंकि शाहरुख दिन में कई बार अपने छत के ऊपर से, सबको वहां उपस्थित होने की वजह से, हाथ हिलाकर बधाई देते हैं. जन्मदिन से कुछ दिन पहले से वह अपने आपको फ्री रखते हैं, ताकि किसी भी फैन को मायूस न होना पड़े.

अपने कैंडिड बातचीत में वे कहते हैं कि मैं एक साधारण परिवार में पला और बड़ा हुआ लड़का हूं, जिसे अभिनय की इच्छा तो थी, पर इतना कामयाब होऊंगा, ये पता नहीं था. मैं अपने आप को ‘लकी’ मानता हूं कि मुझे जो भी मिले, सही इंसान मिले, जिसने मुझे हमेशा आगे बढ़ने में सहयोग दिया. इसमें निर्माता, निर्देशक, को-स्टार, सिनेमा की पूरी टीम, मीडिया और फैन्स सबकी भागीदारी है, क्योंकि मैं जानता हूं कि मेरे जैसे कितने भी आर्टिस्ट हर दिन अपने भाग्य की आजमाइश, एक्टर बनने के लिए करते हैं और अपना घर छोड़ देते हैं, पर उन्हें ऐसा मौका नहीं मिलता और वे या तो वापस घर चले जाते हैं या तनाव के शिकार हो जाते हैं. मैं उनके लिए इतना कहना चाहता हूं कि ये इंडस्ट्री मेहनत को मांगती है और मेहनत से ही हर काम सफल होता है, लेकिन उसके लिए आपको सही मौका और प्रतिभा दोनों का होना जरूरी है.

शाहरुख अपने पुराने दिनों को याद करते हैं, जब वे दिल्ली के राजिंदर नगर में अपने परिवार के साथ रहते थे, वे हंसते हुए कहते हैं कि मैं हमेशा अपने परिवार के साथ ही जन्मदिन मनाना पसंद करता हूं, तब माता-पिता के साथ मनाता था अब अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मनाता हूं, लेकिन उस दौरान जो ‘गिफ्ट’ मुझे मिलता था, वह तब भी पसंद था और आज भी पसंद है, बाकी अंतर ये है कि अभी मेरी जिंदगी काम की वजह से पब्लिक के साथ हो गयी है, ऐसे में अगर मैं उनके साथ जन्मदिन न मनाऊं, तो उसमें कुछ अधूरापन रह जाता है.

जब मैंने अभिनय शुरू किया था और थोड़ा काम भी मिल रहा था उस समय भी मैं अपने परिवार के साथ ही जन्मदिन मनाता था, लेकिन तब मेरी पौपुलैरिटी इतनी पता नहीं चलती थी, क्योंकि मीडिया इतनी स्ट्रोंग नहीं थी. मुझे याद आता है, जब मैं एक बार गोविंदा से मिला था और उस समय मैं तीन साल से काम भी कर रहा था. तब गोविंदा ने कहा था कि भारत इतनी बड़ी देश है कि यहां 10 साल तक अगर लगातार अच्छी फिल्में बनाते रहोगे, तब जाकर शायद लोग तुम्हें भारत के हर कोने में जानेंगे. इतना ही नहीं, काम करते हुए मैं हमेशा कहता रहा हूं कि इंडस्ट्री में हम सब एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं, जिसमें मीडिया भी है. मैं पर्दे पर अभिनय करता हूं और आप पर्दे के बाहर हमारे बारे में लिखकर लोगों तक, आपके मैगजीन के जरिये पहुंचाते हैं. इसलिए मैं जन्मदिन से एक दिन पहले अपने परिवार के साथ उसे मना लेता हूं और जन्मदिन के दिन मीडिया और फैन्स के लिए रखता हूं.

मैं अपने खुशी के हर एक पल को सबके साथ मनाना चाहता हूं और उसी से मुझे खुशी मिलती है. मेरे हिसाब से वह समय अच्छा था कि धीरे-धीरे एक्टर्स को अपनी सफलता का पता चलता था, लेकिन आज तो कुछ सेकंड में सब पता चल जाता है, इससे गलत ये हो जाता है कि कुछ लोगों को तो बिना सफलता पाये ही लगता है कि वे सफल हैं. तब प्रसिद्धी मिलने के बाद भी कलाकार को पता नहीं चलता था कि वे सफल हैं और वे मेहनत अधिक करते रहते थे. वे अपने बारें में कम और काम अधिक करते थे.

शाहरुख अपने बच्चों से काफी चीजें सीखते हैं. उनके हिसाब से आज की पीढ़ी इमानदार और आत्मविश्वास से भरी हुई है. अधिकतर युवा जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं. जो सच होता है, वे सामने कहने से घबराते नहीं. शाहरुख आगे कहते हैं कि मुझे आज भी अगर कुछ गलत हुआ हो और उसे कुछ कहने की जरुरत होती है तो ढाई से तीन दिन उस बात को कहने में लग जाते हैं. कई बार मैं बहुत ‘हार्श’ भी हो जाता हूं, लेकिन अब मैं अपने आपको कंट्रोल भी करता हूं. मेरे बच्चों से मैंने सीधा बात करना सीखा है.

शाहरुख के फैन्स उन्हें पूरे साल कुछ न कुछ अच्छी मेसेज भेजते रहते हैं. जिसका कलेक्शन उनके पास रहता है. उसमें बहुत स्वीट और नौटी मेसेज होते हैं, उसे पढने में उन्हें बहुत अच्छा लगता है. हमेशा कूल और पेशेंट दिखने के पीछे उनकी सोच ये रहती है कि उनकी वजह से कुछ गलत न हो, इसका वे पूरा ध्यान रखते हैं, हालांकि पहले उन्हें ऐसा करने में मुश्किल होती थी, पर अब नहीं होती. उम्र और अनुभव से वे इसे समझ चुके है.

रिबन : कमजोर कहानी व पटकथा

कामकाजी पति पत्नी अपनी दोहरी कमाई से मौज मस्ती में डूबे हों और उसी वक्त उनके घर एक नन्हा बच्चा आ जाए. यानी कि वह माता पिता बन जाए, तो क्या होता है? बच्चे की वजह से पति पत्नी में बढ़ती दूरियां, बच्चे की निरंतर बढ़ती अपनी मांगे, इन सबका दोनों के करियर पर पड़ता असर सहित कई चीजे होती हैं. कुल मिलाकर यह ऐसा मुद्दा है, जिससे आज की युवा पीढ़ी जूझ रही है. इस रोचक मुद्दे पर राखी शांडिल्य की फिल्म ‘‘रिबन’’ बात करती है. मगर कथानक, पटकथा व निर्देशन के स्तर पर यह इतनी कमजोर फिल्म है कि आज की युवा पीढ़ी इस फिल्म के साथ खुद को जोड़ नहीं पाती है.

यह कहानी है महानगर मुंबई में रह रहे माडर्न करण (सुमित व्यास) और सहाना (कलकी कोचलीन) की. यह पति पत्नी दोनो अपने करियर में निरंतर उंचाई छू रहे हैं और संतुष्ट हैं. शराब व सिगरेट से इन दोनों को परहेज नहीं है. जब यह बात उजागर होती है कि सहाना गर्भवती है, तो वह गर्भ गिराना चाहती है, क्योंकि वह अभी मां नही बनना चाहती है. पर जब करण उसे आश्वस्त करता है कि बच्चे के आने के बाद भी वह दोनों मिलकर सब कुछ संभाल लेंगे, तो वह मां बन जाती है.

सहाना एक अच्छी मां, एक अच्छी पत्नी और बेहतरीन प्रोफेशनल के रूप में उभरती है, तो वहीं करण भी कहीं से कमजोर नहीं नजर आता. यह बात युवा पीढ़ी को आनंद देती है. लेकिन जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे वैसे मामला बिगड़ता जाता है. बेटी पैदा होने के बाद सहाना जहां नौकरी कर रही थी, वहां उसकी पदोन्नति होती है, फिर नौकरी चली जाती है. इधर आया, उनकी बेटी को पालने की बजाय अपने पूरे परिवार को उन्हीं के घर से पालने लगती है, कई तरह की समस्याएं आती है, जिससे यह दंपति जूझता है. पर अचानक कहानी बाल यौन शोषण की तरफ मुड़ जाती है. उसके बाद जो कुछ दिखाया गया है, उससे सामंजस्य नहीं बैठ पाता.

राखी शांडिल्य की फिल्म एक घंटा 46 मिनट की है, मगर जिस तरह से अनवांक्षित और बेवजह के दृश्य फिल्म मे भरे गए हैं, वह फिल्म को कमजोर बनाने के साथ साथ दर्शक को सोचने पर मजबूर करती है कि फिल्म कब खत्म होगी. निर्देशक के तौर पर राखी शांडिल्य की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि यह फीचर फिल्म कई जगह पर आभास कराती है जैसे कि डाक्यूमेंट्री चल रही हो.

फिल्म में कलकी कोचलीन के अभिनय को देखकर लगता ही नहीं है कि यह वही कलकी हैं, जिन्होंने फिल्म ‘‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रा’’ में जबरदस्त अभिनय कर शोहरत बटोरी थी. यानी कि वह इस फिल्म में बिलकुल नहीं जमी. सुमित व्यास को अभी काफी मेहनत करने की जरुरत है.

प्रकाश मंडोल व स्वाती मंडोल निर्मित फिल्म ‘‘रिबन’’ की लेखक व निर्देशक राखी शांडिल्य है. फिल्म के कलाकार हैं- कलकी कोचलीन, सुमित व्यास, हितेश मलहन व अन्य.

इत्तेफाक : बेहतरीन रहस्य प्रधान फिल्म

बी आर चोपड़ा निर्मित व यश चोपड़ा निर्देशित 1969 की सफलतम रहस्य प्रधान फिल्म ‘‘इत्तेफाक’’ का 48 वर्ष बाद रीमेक उनके पोते अभय चोपड़ा लेकर आए हैं. फिल्म की पटकथा लिखने के साथ साथ इसका निर्देशन भी अभय चोपड़ा ने किया है. जिन्हें पुरानी ‘इत्तेफाक’ याद है, या जो पुरानी ‘इत्तेफाक’ के प्रशंसक हैं, उन्हें यह फिल्म कम पसंद आ सकती है. वैसे भी इस फिल्म में कई कमियां हैं, जिनके चलते यह फिल्म बाक्स आफिस पर सफलता के झंडे गाड़ेगी, इसमें संशय है.

फिल्म की कहानी शुरू होती है, मशहूर लेखक व अप्रवासी भारतीय विक्रम सेठी (सिद्धार्थ मल्होत्रा) का पुलिस द्वारा पीछा किए जाने के दृष्य से. पुलिस उसे पकड़ नहीं पाती है, पर जब पुलिस को शेखर सिन्हा के कत्ल की खबर मिलती है, तो शेखर सिन्हा के घर पर विक्रम सेठी, पुलिस की पकड़ में आ जाता है. अब पता चलता है कि पहले पुलिस, विक्रम सेठी को अपनी पत्नी व अपने उपन्यास का प्रकाशन करने वाली कंपनी की सीईओ कैथरीन की हत्या का आरोपी समझकर पकड़ने में लगी हुई थी और अब कैथरीन के साथ साथ शेखर सिन्हा की हत्या का आरोप भी विक्रम सेठी पर लगता है.

उधर पुलिस की शक के घेरे में शेखर सिन्हा की पत्नी माया (सोनाक्षी सिन्हा) भी हैं. इसके अलावा संध्या नामक एक रेप पीड़िता द्वारा आत्महत्या किए जाने पर संध्या के पिता ने उसकी हत्या का आरोप विक्रम सेठी पर लगा रखा है. क्योंकि विक्रम सेठी ने संध्या से हमदर्दी जताते हुए उसकी पूरी कहानी जानकर वादा किया था कि उसका नाम उजागर नहीं होगा पर विक्रम सेठी ने अपने उपन्यास में संध्या का नाम उजागर कर दिया था, इसलिए उसे ताने सुनने पड़ रहे थे. इस अपमान से उबकर उसने आत्महत्या कर ली. बहरहाल, पुलिस को कैथरीन व शेखर सिन्हा के कातिल को कटघरे में पहुंचाना है. जांच अधिकारी देव (अक्षय खन्ना) पूरी तन्मयता के साथ जांच कर रहा है.

माया और विक्रम सेठी अपने आपको निर्दोश बताते हुए अपनी अपनी कहानी सुनाते हैं. देव को दोनों की कहानी सच लगती है. काफी मशक्कत के बाद देव, कैथरीन व शेखर सिन्हा के कातिल की पहचान कर लेता है. पर जब असली अपराधी पकड़ से बाहर हो जाता है, तब पता चलता है कि देव के साथ साथ पूरा पुलिस महकमा किस तरह गलत हो गया?

पटकथा लेखक व निर्देशक अभय चोपड़ा की तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने पुरानी फिल्म की कहानी के प्लाट को उठाकर अच्छी पटकथा लिखी. कम से कम पौने दो घंटे तक दर्शक टकटकी लगाए हुए कातिल को जानने के लिए बेसब्र रहता है. इंस्पेक्टर देव की तरह दर्शक भी कातिल का अनुमान लगाने में तब तक असफल होता है, जब तक पटकथा लेखक व निर्देशक सच सामने नहीं लाता है. निर्देशन में भी उनकी खूबी नजर आती है. मगर पटकथा की कमजोरियां हैं.

फिल्म के अंदर दो हवलदारों के माध्यम से कुछ जगह हास्य के दृश्य डाले गए हैं, जो कि जबरन ठूंसे हुए लगते हैं. फिल्म की गति काफी धीमी है, इसे पटकथा की कमी ही गिना जाएगा. कहानी व पटकथा के स्तर पर रहस्यमय घटनाक्रम से युक्त दृश्यों की काफी गुंजाइश रह गयी है. सिद्धार्थ मल्होत्रा यानी कि विक्रम और सोनाक्षी सिन्हा यानी कि माया के बीच कई दृश्य जोड़े जाने चाहिए थे. यदि लेखक व निर्देशक ने इन कमियों पर गौर किया होता, तो शायद यह फिल्म कुछ ज्यादा बेहतर हो सकती थी.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो सिद्धार्थ मल्होत्रा व सोनाक्षी सिन्हा ने कुछ भी कमाल नहीं किया है. इस फिल्म की कमजोर कड़ियों में सिद्धार्थ मल्होत्रा व सोनाक्षी सिन्हा भी हैं. जबकि पुलिस इंस्पेक्टर देव के किरदार में अक्षय खन्ना ने बेहतरीन, सहज व उम्दा अभिनय किया है. दर्शक फिल्म खत्म होने के बाद भी उन्हें याद रखता है. मंदिरा बेदी को छोटे से किरदार में लेकर भी जाया किया गया.

पुरानी फिल्म की तरह इस फिल्म में भी गाने नहीं हैं. पार्श्वसंगीत कमजोर व भटकाने वाला है.

एक घंटा 47 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘इत्तेफाक’’ का निर्माण गौरी खान, रेणु रवि चोपड़ा, करण जोहर व हीरु यश जोहर ने किया है. पटकथा लेखक व निर्देशक अभय चोपड़ा, संगीतकार तनिस्क बागची तथा कलाकार हैं- अक्षय खन्ना, सिद्धार्थ मल्होत्रा, सोनाक्षी सिन्हा, मनेाज जेाशी पारुल गुलाटी, मंदिरा बेदी, हिमांशु कोहली व अन्य.

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