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सावधानी से प्रयोग में लाएं एटीएम, वरना बन सकता है क्लोन

इन दिनों एटीएम कार्ड धोखाधड़ी की संख्या बढ़ गई है. कारण है ब्लैक स्ट्रिप (मैग्नेटिक पट्टी) वाले पुराने एटीएम कार्ड की क्लोनिंग आसानी से होना. जानकारों की मानें तो हर 100 में से एक व्यक्ति के कार्ड की नकल बनाई जा रही है. बैंकों ने भी यह मान लिया है कि सिर्फ ब्लैक स्ट्रिप वाले एटीएम कार्ड सुरक्षित नहीं हैं. इसलिए बैंक प्रबंधन उपभोक्ताओं को अब चिप वाले कार्ड जारी कर रहे हैं.

पुराने एटीएम कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप में खातेदार की सारी जानकारी होती है. कार्ड स्वैप करने पर मशीन सारी जानकारी जुटा लेती है. अपराधी एटीएम और स्वैप मशीन के आसपास अतिरिक्त डिजिटल डिवाइस लगाते हैं जिसे फिक्स करने की जरूरत नहीं होती है.

स्वैप होने के बाद मशीन में बटन के पास माइक्रो कैमरे लगाते हैं, जिससे पिन पता चल जाता है. ट्रांजेक्शन पूरा होते ही अपराधी डिजिटल डिवाइस को कम्प्यूटर सिस्टम से जोड़ते हैं और एटीएम कार्ड का सीक्रेट नंबर हासिल कर क्लोन कार्ड पर चढ़ा देते हैं. वहीं कैमरे से पिन ले लेते हैं.

कार्ड को ऐसे रखें सुरक्षित

मैग्नेटिक या ब्लैक स्ट्रिप वाले एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करते समय मशीन में कार्ड स्लौट ध्यान से देखें. उसे थोड़ा सा हिलाएं, जिससे अगर वहां कोई अतिरिक्त डिवाइस लगा होगा तो तुरंत गिर जाएगा.

पिन डालने के दौरान बटन वाली जगह को दूसरे हाथ से ढंक लें, ताकि वहां लगे माइक्रो कैमरे पिन देख न सकें.

इसलिए सुरक्षित हैं चिप वाले कार्ड

चिप वाले कार्ड पुराने कार्ड से सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि जरूरी जानकारी चिप में होती है. इसे रीड करने के लिए विशेष सौफ्टवेयर की जरूरत पड़ती है, जो केवल बैंकों के पास हैं जबकि मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड के रीडर बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं.

रुपे कार्ड भी दे रहे उपभोक्ताओं को

बैंक कई तरह के एटीएम कार्ड उपभोक्ताओं को दे रहे हैं. इनमें मास्टर कार्ड व वीजा कार्ड प्रमुख हैं. कुछ बैंक छोटे खातेदारों को रुपे कार्ड भी जारी कर रहे हैं. इसके पीछे वजह है कि यह भारत में तैयार कार्ड है, जो मुफ्त दिया जा रहा है. ये कार्ड खासकर जन-धन योजना वालों को दिए जा रहे हैं. दूसरी तरफ निजी बैंक सिर्फ चिप वाले एटीएम जारी कर रहे हैं. हालांकि ज्यादातर बैंक चिप वाले कार्ड ही दे रहे हैं.

आरबीआई का आदेश

आरबीआई ने 2012-13 में एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा था कि विदेश में सिर्फ चिप वाले कार्ड इस्तेमाल होंगे. सिंपल ब्लैक स्ट्रिप कार्ड वहां मान्य नहीं हैं. इसके चलते विदेश जाने वालों को नए कार्ड जारी किए गए.

अब मिलेंगे चिप बेस्ड कार्ड

पुराने कार्ड के क्लोन की वजह से ज्यादातर बैंकों ने व्यवस्था में बदलाव कर दिया है. अब सिर्फ चिप वाले कार्ड जारी किए जा रहे हैं. यही वजह है कि बैंकों ने एक्सपायर होने से पहले उपभोक्ताओं को कार्ड के लिए आवेदन देने को कहा है. ताकि जल्द से जल्द नए कार्ड दिए जा सकें.

आसानी से मिलती है मशीन

क्लोन के लिए अपराधी जिन डिजिटल मशीन का इस्तेमाल करते हैं, वह आसानी से मिल जाती है. इसके लिए पुलिस काफी सतर्कता बरते हुए है. वहीं ऐसे अपराधों से बचने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. ग्राहक अपने कार्ड को बैंक से चिप वाले कार्ड में बदलवा सकते हैं.

केन्द्र सरकार ने कर्मचारियों को दिया तोहफा, ले सकेंगे 25 लाख का लोन

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए मकान खरीदने के लिए लोन शर्तों में ढील दी है. आवास की बढ़ती जरूरतों को देखते हुये सरकार ने एचबीए नियमों को आसान बनाने की पहल की है. इससे भवन निर्माण क्षेत्र में छाई मंदी से भी उबरने में मदद मिलेगी.

अब केंद्रीय कर्मी पहले से ज्यादा एडवांस ही नहीं ले सकेंगे बल्कि उन्हें पहले की अपेक्षा ब्याज भी कम भरना पड़ेगा. केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिये हाउस बिल्डिंग एडवांस नियमों में बदलाव किया है.

अब वह एक करोड़ रुपये तक की कीमत वाले घर बनाने या खरीदने के लिये 25 लाख रुपये तक का एडवांस ले सकेंगे. इससे पहले यह सीमा तीस लाख रुपये तक के मकान के लिए 7.50 लाख रुपये थी.

मंत्रालय ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिये आवास हेतु भवन निर्माण के लिये एडवांस राशि जारी करने के नियमों (एचबीए) में बदलाव कर यह सुविधा शुरू की है. मौजूदा व्यवस्था में भवन निर्माण या खरीद के लिये मकान की अधिकतम कीमत 30 लाख रुपये थी और इसके लिए 7.50 लाख रुपये तक का ही एडवांस मिलता था.

मंत्रालय की ओर से नियमों में संशोधन की आज जारी जानकारी के मुताबिक इससे लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा. नए नियमों के मुताबिक पति और पत्नी, दोनों के केंद्रीय कर्मचारी होने की स्थिति में दोनों को एक साथ या अलग-अलग एडवांस लेने की छूट दी गई है. इससे पहले सिर्फ पति या पत्नी को ही एडवांस राशि लेने का विकल्प दिया गया था. हालांकि केंद्रीय कर्मचारी को उसके जीवनकाल में एक ही बार एडवांस राशि लेने का नियम अब भी बरकरार है.

इसी तरह, अगर कोई कर्मी अपने मकान का विस्तार करना चाहता है तो वह अब 10 लाख रुपये तक का ऐडवांस ले सकेगा. पहले यह सीमा महज 1.80 लाख रुपये ही थी. सरकार ने ब्याज दरों में छूट देकर राहत दी है. पहले इस तरह के ऐडवांस हाउस लोन पर 9.5 फीसदी ब्याज लिया जाता था लेकिन अब यह 8.5 फीसदी लिया जाएगा. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आवास की बढ़ती जरूरतों को देखते हुये सरकार ने एचबीए नियमों को आसान बनाने की पहल की है. इससे भवन निर्माण क्षेत्र में छाई मंदी से भी उबरने में मदद मिलेगी.

आप के व्यवहार पर निर्भर है बच्चे का भविष्य

एक विज्ञापन में सास के द्वारा अपना चश्मा न मिलने की बात पूछने पर बहू कहती है, ‘‘जगह पर तो रखती नहीं हैं और फिर दिन भर बकबक करती रहती हैं.’’

अगले ही पल मां जब अपने बेटे से पूछती है कि लंचबौक्स बैग में रख लिया तो बेटा जवाब देता है, ‘‘क्यों बकबक कर रही हो रख लिया न.’’

मां का पारा एकदम हाई हो जाता है और फिर बेटे को एक चांटा मारते हुए कहती है, ‘‘आजकल स्कूल से बहुत उलटासीधा बोलना सीख रहा है.’’

बच्चा अपना बैग उठा कर बाहर जातेजाते कहता है, ‘‘यह मैं ने स्कूल से नहीं, बल्कि आप से अभीअभी सीखा है.’’

मां अपने बेटे का चेहरा देखती रह जाती है. इस उदाहरण से स्पष्ट है कि बच्चे जो देखते हैं वही सीखते हैं, क्योंकि बच्चे भोले और नादान होते हैं और उन में अनुसरण की प्रवृत्ति पाई जाती है. आप के द्वारा पति के घर वालों के प्रति किया गया व्यवहार बच्चे अब नोटिस कर रहे हैं और कल वे यही व्यवहार अपनी ससुराल वालों के प्रति भी करेंगे. अपने परिवार वालों के प्रति आप के द्वारा किए जाने वाले व्यवहार को हो सकता है आज आप के पति इग्नोर कर रहे हों पर यह आवश्यक नहीं कि आप के बच्चे का जीवनसाथी भी ऐसा कर पाएगा. ऐसी स्थिति में कई बार वैवाहिक संबंध टूटने के कगार पर आ जाता है. इसलिए आवश्यक है कि आप अपने बच्चों के सामने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें ताकि उन के द्वारा किया गया व्यवहार घर में कभी कलह का कारण न बने.

न करें भेदभाव: इस बार गरमी की छुट्टियों में रीना की ननद और बहन दोनों का ही उस के पास आने का प्रोग्राम था. रीना जब अपने दोनों बच्चों के साथ मौल घूमने गई तो सोचा सब को देने के लिए कपड़े भी खरीद लिए जाएं. बूआ के परिवार के लिए सस्ते और मौसी के परिवार के लिए महंगे कपड़े देख कर उस की 14 वर्षीय बेटी पूछ ही बैठी, ‘‘मां, बूआ के लिए ऐसे कपड़े क्यों लिए?’’

‘‘अरे वे लोग तो गांव में रहते हैं. उन के लिए महंगे और ब्रैंडेड लेने से क्या लाभ? मौसी दिल्ली में रहती हैं और वे लोग हमेशा ब्रैंडेड कपड़े ही पहनते हैं, तो फिर उन के लिए उसी हिसाब के लेने पड़ेंगे न.’’

रीना की बेटी को मां का यह व्यवहार पसंद नहीं आया. न तोड़ें पति का विश्वास: विवाहोपरांत पति अपनी पत्नी से अपने परिवार वालों के प्रति पूरी ईमानदारी बरतने की उम्मीद करता है. ऐसे में आप का भी दायित्व बनता है कि आप अपने पति के विश्वास पर खरी उतरें. केवल पति से प्यार करने के स्थान पर उस के पूरे परिवार से प्यार और अपनेपन का व्यवहार करें.

रीमा अपनी बीमार ननद को जब अपने पास ले कर आई तो बारबार उन की बीमारी के चलते उन्हें हौस्पिटलाइज करवाना पड़ता. यह देख कर रीमा की मां ने एक दिन उसे समझाया, ‘‘देख बेटा वे शुरू से जिस माहौल में रही हैं उसी में रह पाएंगी. बेहतर है कि तुम इन्हें अपनी ससुराल में जेठानी के पास छोड़ दो और प्रति माह खर्चे के लिए निश्चित रकम भेजती रहो.’’

इस पर रीमा बोली, ‘‘मां, आज विपिन की जगह मेरी बहन होती तो भी क्या आप मुझे यही सलाह देतीं?’’

यह सुन कर उस की मां निरुत्तर हो गईं और फिर कभी इस प्रकार की बात नहीं की.

पतिपत्नी के रिश्ते की तो इमारत ही विश्वास की नींव पर टिकी होती है, इसलिए अपने प्रयासों से इसे निरंतर अधिक मजबूती प्रदान करने की कोशिश करते रहना चाहिए.

आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें: सोशल मीडिया पर एक संदेश पढ़ने को मिला, जिस में एक पिता अपने बेटे को एक तसवीर दिखाते हुए कहते हैं, ‘‘यह हमारा फैमिली फोटो है.’’

8 वर्षीय बालक भोलेपन से पूछता है, ‘‘इस में मेरे दादादादी तो हैं ही नहीं, क्या वे हमारे फैमिली मैंबर नहीं हैं?’’

पिता के न कहने पर बच्चा बड़े ही अचरज और मासूमियत से कहता है, ‘‘उफ, तो कुछ सालों बाद आप भी हमारी फैमिली के मैंबर नहीं होंगे.’’

यह सुन कर बच्चे के मातापिता दोनों चौंक उठते हैं. उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है. इस से साफ जाहिर होता है कि बच्चे जो भी आज देख रहे हैं वे कल आप के साथ वही व्यवहार करने वाले हैं. इसलिए मायके और ससुराल में किसी भी प्रकार का भेदभाव का व्यवहार कर के अपने बच्चों को वह रास्ता न दिखाएं जो आप को ही आगे चल कर पसंद न आए.

पारदर्शिता रखें: दूसरों की बुराई करना, अपमान करना, ससुराल के प्रति अपनी जिम्मेदारी न निभाना, मायके के प्रति अधिक लगाव रखना जैसी बातें पतिपत्नी के रिश्ते को तो कमजोर बनाती ही हैं, अपरोक्षरूप से बच्चों पर भी नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं, इसलिए आवश्यक है कि रिश्तों में सदैव पारदर्शिता रखी जाए. मेरी बहन और उस के पति ने विवाह के बाद एकदूसरे से वादा किया कि दोनों के मातापिता की जिम्मेदारी उन दोनों की है और उसे वे मिल कर उठाएंगे, चाहे हालात कैसी भी हों. वे पीछे नहीं हटेंगे.

आज उन के विवाह को 10 वर्ष होने वाले हैं. आज तक उन में मायके और ससुराल को ले कर कभी कोई मतभेद नहीं हुआ.

जिम्मेदारी महसूस करें: अकसर देखा जाता है कि पति अपने परिवार की जिम्मेदारी को महसूस करते हुए परिवार की आर्थिक मदद करना चाहता है और पत्नी को यह तनिक भी रास नहीं आता. ऐसे में या तो घर महाभारत का मैदान बन जाता है या फिर पति पत्नी से छिपा कर मदद करता है. यदि ससुराल में कोई परेशानी है, तो आप पति का जिम्मेदारी उठाने में पूरा साथ दे कर सच्चे मानों में हम सफर बनें. इस से पति के साथसाथ आप को भी सुकून का एहसास होगा.

बुराई करने से बचें: रजनी की सास जब भी उस के पास आती हैं, रजनी हर समय उन्हें कोसती है, ‘‘जब देखो तब आ जाती हैं, कितनी गंदगी कर देती हैं, ढंग से रहना तक नहीं आता.’’

उस की किशोर बेटी यह सब देखती और सुनती है, इसलिए उसे अपनी दादी का आना कतई पसंद नहीं आता.

ससुराल पक्ष के परिवार वालों के आने पर उन के क्रियाकलापों पर अनावश्यक टीकाटिप्पणी या बुराई न करें, क्योंकि आप की बातें सुन कर उन के प्रति बच्चे वही धारणा बना लेंगे. इस के अतिरिक्त मायके में ससुराल की और ससुराल में सदैव मायके की अच्छी बातों की ही चर्चा करें. नकारात्मक बातें करने से बचें ताकि दोनों पक्षों के संबंधों में कभी खटास उत्पन्न न हो.

जिस प्रकार एक पत्नी का दायित्व है कि वह अपनी ससुराल और मायके में किसी प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार न करे उसी प्रकार पति का भी दायित्व है कि वह अपनी पत्नी के घर वालों को भी पर्याप्त मानसम्मान दे और यदि पत्नी के मायके में कोई समस्या हो तो उसे भी हल करने में वही योगदान दे, जिस की अपेक्षा आप अपनी पत्नी से करते हैं, क्योंकि कई बार देखने में आता है कि यदि लड़की अपनी मायके के प्रति कोई जिम्मेदारी पूर्ण करना चाहती है, तो वह उस की ससुराल वालों को पसंद नहीं आता. इसलिए पतिपत्नी दोनों की ही जिम्मेदारी है कि वे अपनी ससुराल के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार न रखें.

यह सही है कि जहां चार बरतन होते हैं आपस में टकराते ही हैं, परंतु उन्हें संभाल कर रखना भी आप का ही दायित्व है. बच्चों के सुखद भविष्य और अपने खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक है कि बच्चों के सामने कोई ऐसा उदाहरण प्रस्तुत न किया जाए जिस पर अमल कर के वे अपने भविष्य को ही दुखदाई बना लें.

10 टिप्स जो बना देंगे आपकी सादगी को आकर्षक

किसी भी महिला का रूपरंग चाहे कैसा भी हो वह सुंदर दिखना चाहती है. किट्टी पार्टी हो या कोई और फंक्शन, निमंत्रण मिलते ही वह अपनी ड्रैस, ज्वैलरी आदि के लिए चिंतित हो उठती है. यही वह अवसर होता है जब वह महंगी डिजाइनर ड्रैस, भारी ज्वैलरी और सुंदर मेकअप के द्वारा सब में अपनी धाक जमाती है.

मगर ऐसे अवसर पर अपनी सादगी के द्वारा आकर्षक बन कर सब को प्रभावित करने के लिए अपने व्यक्तित्व पर ध्यान देना आवश्यक है.

आप कैसी दिखती हैं, कैसे रहती हैं, कैसे चलती हैं, कैसे खड़ी होती हैं, आप का कपड़े पहनने का तरीका क्या है, आप की बौडी लैंग्वेज ही आप को आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करती है.

माना कि आज सुंदर दिखना बहुत कुछ है, परंतु मन की सुंदरता ऐसी चीज है, जिस से हर किसी का दिल जीता जा सकता है. अपना आत्मविश्वास न खोएं. जैसी हैं उसी को अपनी शान मान कर जीएं. सुंदर और स्मार्ट दिखने के लिए अपनी कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है.

ऐसे दिखें सुंदर

किसी फंक्शन या पार्टी में, जहां ज्यादातर महिलाएं डिजाइनर महंगे कपड़ों और भारी ज्वैलरी से लदीफदी तथा मेकअप की मोटी परत चढ़ाए हों वहां आप का सादगी से चमकता और मुसकराता चेहरा यकीनन सब को आकर्षित कर लेगा.

फंक्शन के अनुरूप अपनी ड्रैस का चुनाव करें. समय और उपलक्ष्य के अनुसार ही तैयार हों. आप की सलीके से पहनी गई साड़ी और मैचिंग ऐक्सैसरीज आप को सब के आकर्षण का केंद्र बना देगी. आप दूसरों की अपेक्षा फिट और आकर्षक दिखती हैं तो आप के अंदर आत्मविश्वास स्वयं ही आ जाएगा. आप दूसरों से किस प्रकार मिलतीजुलती हैं, उन से किस तरह बातचीत करती हैं, यह बात बहुत माने रखती है.

आजकल लोग सब से पहले पहने गए कपड़ों से आप का मूल्यांकन करते हैं. आप का तैयार होने का ढंग कैसा है, यह माने रखता है न कि महंगी डिजाइनर ड्रैस पहनना. आप पार्टी में जो भी ड्रैस पहन रही हैं, वह अवसर के अनुकूल हो और आप पर सूट कर रही हो, यह बहुत आवश्यक है. साथ ही आप अपनी ड्रैस को अच्छी तरह संभाल पा रही हों.

चेहरा व्यक्तित्व का दर्पण

आज फिल्मी तारिकाएं या मौडल्स अकसर ऐसा गाउन या ड्रैस पहन कर स्टेज या पार्टी में आती हैं, जिसे वे संभाल नहीं पातीं और फिर सब के सामने उन्हें शर्मिंदगी उठानी पड़ती है. इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने रंगरूप, उम्र, एवं शारीरिक रचना के अनुरूप ही अपनी ड्रैस का चयन करें.

सादगी को आकर्षक बनाने के लिए कुछ बातों का विशेश ध्यान रखें. आप का चेहरा आप के व्यक्तित्त्व का दर्पण है, इसलिए सर्वप्रथम अपनी स्किन को चमकदार और आकर्षक बनाने के लिए त्वचा की सफाई आवश्यक है. चेहरे की त्वचा बहुत कोमल होती है. इसलिए आप का क्लींजर अलकोहल फ्री होना चाहिए. यदि प्राकृतिक चीजें जैसे-दूध, दही, हलदी आदि से चेहरे की साफसफाई करती हैं तो ये चीजें आप के चेहरे को नैसर्गिक सुंदरता और चमक प्रदान करेंगी.

रोज 8-10 गिलास पानी पीने से भी स्किन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है. हाथपैरों और बालों पर भी ध्यान देना जरूरी है. आईब्रोज की शेप भी सही रखें. होंठों को भी मुलायम रखें.

सादगी को आकर्षक बनाने के लिए कुछ टिप्स पेश हैं:

चेहरे पर मुसकराहट: हमेशा चेहरे पर हलकी सी स्माइल अवश्य रखें. खुशमिजाज, मुसकराता हुआ चेहरा सब को अच्छा लगता है. चेहरे की मुसकराहट अनजान लोगों को भी मुसकराने पर मजबूर कर देती है.

अभिवादन करें: जब भी किसी से मिलें, उस से अभिवादन अवश्य करें. हायहैलो, शेकहैंड करें. हमउम्र हैं तो गले भी मिल सकती हैं. यदि नाम याद है तो नाम से पुकार कर बातें करें. इस से आत्मीयता प्रकट होती है. खुद को अपटुडेट रखें.

सम्मान करें: यदि कोई बच्चा है तो उस के साथ मस्ती करें. बड़े होने का चोला ओढ़ कर न बैठें. बच्चे को प्यार करें. ‘कितना स्वीट है’ जैसा कौंप्लिमैंट दे सकती हैं. हमउम्र हैं तो ‘इस ड्रैस में आप बहुत अच्छी लग रही हैं’ कमैंट दे सकती हैं. बड़ी उम्र के हैं तो उन के स्वास्थ्य के विषय में अवश्य बात करें.

मनोरंजन करें: लोगों के साथ बातचीत में छोटेमोटे जोक्स या शायरी कर लोगों को आकर्षित कर सकती हैं. यदि आप में कोई विशेष हुनर है जैसे सिंगिंग, तो आजकल स्टेज पर गाने का प्रचलन काफी है. आप इस अवसर को हाथ से न जाने दें. अपनी सादगी और सिंगिंग से सब को आकर्षित करें.

श्रोता बनें: आप श्रोता बन कर ध्यान से सब की बातों को सुनें. कुछ भी बोलने से पहले सामने वाले को अपनी बात पूरी कर लेने दें. फिर आवश्यकतानुसार अपनी प्रतिक्रिया, मुसकराहट, हमदर्दी या सलाह दें. यदि उस की समस्या को सुलझा सकती हैं तो अवश्य ही परामर्श दे कर उस की सहायता करें.

तारीफ करें: दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे अपनी तारीफ न पसंद हो. यह ध्यान रखें कि सच्ची प्रशंसा करनी है, झूठी नहीं यानी बढ़ाचढ़ा कर नहीं. उन का कोई अच्छा गुण या उपलब्धि आप को मालूम है तो उस की प्रशंसा करें. आप किसी से उस की मनपसंद बातें करें, फिर देखें वह आप से मिल कर कितनी खुशी महसूस करती है. आप को ऐसा बनना है कि किसी को भी आप के साथ समय बिताने में अच्छा लगे. आप उसे यह एहसास दिलाएं कि वह आप के लिए बहुत ही स्पैशल है.

सहायता के लिए तत्पर रहें: यदि कोई व्यक्ति आप के समक्ष कोई समस्या रखता है, आप के द्वारा उस की परेशानी दूर हो सकती है, तो उस की सहायता अवश्य करें. जैसे यदि आप लैक्चरर हैं, कोई अपने बेटे या बेटी के कैरियर के लिए कोई जानकारी चाहता है, तो उसे अवश्य जानकारी दें. एडमिशन, होस्टल, बुक्स, स्कौलरशिप, कालेज आदि की जो भी जानकारी दे सकती हैं, अवश्य दें. इस से वह आप की सादगी का हमेशा के लिए कायल हो जाएगा.

संपर्क में रहें: आजकल व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसी अनेक साइट्स सक्रिय हैं, जिन से एकदूसरे के संपर्क में रह सकते हैं. बर्थडे, ऐनिवर्सरी या मुख्य त्योहार, नववर्ष के अवसर पर संदेश के द्वारा एकदूसरे से जुड़े रह सकते हैं. इस में भी आप की सादगी झलकती है.

सादगी को आकर्षक बनाने के लिए सब से अधिक आवश्यक है कि आप सेहतमंद हों. प्रौपर डाइट लें, अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें. पैक्ड खाने से दूरी रखें. अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करें. पैक्ड खाने से दूरी रखें. व्यायाम और सुबह की सैर अवश्य करें. सेहतमंद और छरहरा बदन पाने के लिए अपने आहार व व्यवहार में संयम बरतें. शरीर के पोस्चर पर अवश्य ध्यान दें.

आशीष नेहरा को बौलिंग करते वक्त किससे लगता था डर

पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने कहा है कि औस्ट्रेलिया के दिग्गज विकेटकीपर रहे एडम गिलक्रिस्ट को गेंदबाजी करना सबसे मुश्किल था. एक इंटरव्यू में बातचीत में नेहरा ने कहा कि उन्हें गिलक्रिस्ट दूसरे ग्रह के प्राणी लगते थे और उन्हें गेंदबाजी करना मुझे सबसे मुश्किल लगता था.

हाल ही में रिटायर हुए इस तेज गेंदबाज ने साल 2000 में अपने चरम पर रही कंगारू टीम की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, उस जमाने की औस्ट्रेलियाई टीम और एडम गिलक्रिस्ट का लेवल अलग ही था. 2002-08 तक गिलक्रिस्ट अलग ही ग्रह पर थे. जैक कैलिस, रिकी पौन्टिंग, ब्रायन लारा और वीरेंद्र सहवाग भी शानदार खिलाड़ी थे.

मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली की तारीफ के पुल बांधते हुए नेहरा ने कहा कि उसमें रातों-रात बदलाव नहीं आया है. अपने शरीर में परिवर्तन लाने के लिए उसे 3-4 साल लगे हैं. उसकी रफ्तार चौंकाने वाली है. अगर मैदान में वह टेनिस बौल से खेलता है तो भी उसकी तीव्रता वही रहेगी. नेहरा ने बातचीत में यह भी कहा कि 2011 का वर्ल्ड कप जीतना बेहद खास क्षण था. दुर्भाग्यवश वह चोट के कारण फाइनल में नहीं खेल पाए थे, क्योंकि पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्हें चोट लग गई थी.

रिटायरमेंट के बाद मीडिया से बात करते हुए नेहरा ने खुलासा किया था कि आखिर किस खिलाड़ी के चलते उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया. नेहरा को भारत-औस्ट्रेलिया टी-20 सीरीज में चुना गया था, लेकिन इस सीरीज़ में उन्हें अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला. नेहरा ने इस पर कहा कि उन्होंने यह फैसला खुद ही लिया था. कई लोगों ने कहा था कि मैं औस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम एकादश में नहीं खेला. जब मैं वहां गया तो मैं अपनी रणनीति बना के गया था.

मुझे लगता है कि भुवनेश्वर कुमार अब तैयार हैं. पिछले दो साल से मैं और बुमराह टी-20 में खेल रहे थे और भुवी अंदर-बाहर होते रहते थे. इस साल आईपीएल के बाद उन्होंने गजब का प्रदर्शन दिखाया था. मुझे अच्छा नहीं लगता कि मैं खेलूं और भुवी बाहर बैठे. वह मेरा फैसला था. मैंने इस बारे में जाते ही कप्तान विराट कोहली को बता दिया था.

गुड़िया के गैंगरेप और हत्या का दोषी कौन?

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तो खूबसूरत है ही, लेकिन प्राकृतिक रूप से देखें तो यहां का कोटखाई और भी ज्यादा खूबसूरत है. लाल, हरे सेबों से लदे सेब के बाग यहां की सुंदरता में और भी चारचांद लगा देते हैं. पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहां का जीवन भले ही दुरूह है, लेकिन सेब बागानों की वजह से यह इलाका काफी समृद्ध है, पैसे से भी और संसाधनों से भी. वैसे तो इस क्षेत्र में अपराध कम ही होते हैं, लेकिन 4 जुलाई को यहां जो कुछ हुआ, उस ने पहाड़ों की रानी कही जाने वाली हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तक को हिला कर रख दिया.

यह कुछ ऐसा ही था, जैसा 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में निर्भया के साथ हुआ था. शिमला से 60 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा कोटखाई को तहसील का दरजा प्राप्त है. इस तहसील में छोटेछोटे 247 गांव हैं. इन्हीं गांवों में एक गांव है हलाईला. गांव में स्कूली शिक्षा के आगे की पढ़ाई का साधन न होने की वजह से गांव के बच्चे महासू स्कूल में पढ़ने जाते हैं, जो गांव से कई किलोमीटर दूर है.

15 वर्षीया गुडि़या भी इसी स्कूल में 10वीं की छात्रा थी. 4 जुलाई को वह रोजाना की तरह स्कूल गई, लेकिन शाम तक लौट कर नहीं आई.

ऐसे में घर वालों का चिंतित होना स्वाभाविक ही था. उन्होंने गुडि़या की काफी खोजबीन की, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. मजबूर हो कर उन्होंने थाना कोटखाई में गुडि़या के लापता होने की रिपोर्ट लिखा दी.

गुडि़या की नग्न लाश 6 जुलाई की सुबह हलाईला के जंगल में पड़ी मिली. उस की लाश की हालत बता रही थी कि उस के साथ दरिंदगी करने के बाद उस की हत्या की गई है. तत्काल इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस को घटनास्थल पर पहुंचने में 4 घंटे लगे. इस बीच घटनास्थल पर सैकड़ों लोग एकत्र हो चुके थे. निस्संदेह यह मामला गैंगरेप के बाद जघन्य तरीके से हत्या करने का था. पुलिस ने केस दर्ज किया और शुरुआती पूछताछ के बाद गुडि़या की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

एक स्कूली छात्रा के साथ दरिंदगी की इस घटना से प्राय: शांत रहने वाली वादी सुलग उठी. निस्संदेह यह घटना दिल दहला देने वाली थी. गुडि़या के गुनहगारों का पकड़ा जाना जरूरी था. गुडि़या के पिता ने रसूखदार लोगों को साथ ले कर पुलिस पर दबाव बनाया. केस पहले ही दर्ज हो चुका था, सो पुलिस ने जांच में सक्रियता दिखानी शुरू की. पुलिस ने 3-4 लड़कों को पकड़ा भी, लेकिन रसूखदार होने की वजह से उन्हें मामूली पूछताछ के बाद छोड़ दिया. दरअसल, सोशल नेटवर्किंग साइट पर बतौर संदिग्ध इन लोगों के फोटो वायरल हुए थे, जिस की वजह से पुलिस उन्हें उठा लाई थी.

पुलिस का ढुलमुल रवैया देख कर गुडि़या के परिजनों का पुलिस वालों से विश्वास उठने लगा तो कोटखाई के लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश उभरने लगा.crime story

मामला सुलगते देख 11 जुलाई को कोटखाई पुलिस ने पास ही के गांव के 4 युवकों को हिरासत में लिया और गुडि़या केस में पूछताछ के लिए उन्हें किसी गुप्त स्थान पर ले गई. इस के साथ ही पुलिस क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल काल डिटेल्स के डंप डाटा की छानबीन भी कर रही थी. इस बीच पुलिस की एक टीम ने पोशीदगी से उन लोगों की सूची भी तैयार की, जो इस वारदात वाले दिन से ही गांव से बाहर थे.

इस प्रयास में पुलिस को एक ऐसे युवक के बारे में पता चला, जो वारदात वाले दिन से ही भूमिगत था. पूरे गांव में किसी को भी इस बात की खबर नहीं थी कि वह अचानक कहां चला गया. पुलिस ने उस युवक के मोबाइल को ट्रैकिंग पर लगा कर उस की काल डिटेल्स व लोकेशन पर नजर रखनी शुरू कर दी. इस से पुलिस को उस की गतिविधियों पर शक तो हुआ, लेकिन न जाने किस वजह से पुलिस ने उस की ओर से ध्यान हटा लिया.

वैसे पुलिस ने इस केस की अपनी जांच के बारे में अपनी अब तक की प्रगति के बारे में किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया था. फिर भी जैसेतैसे यह बात सामने आ गई कि हिरासत में लिया गया एक आरोपी उस स्कूल के निकटवर्ती गांव का रहने वाला था, जहां गुडि़या पढ़ती थी. यह शख्स गांव में अकेला रहता था और खूब नशा करता था. उस की मां एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थी, जिस वजह से वह खुद का कुछ ज्यादा ही रौबदाब बनाए रखने की कोशिश करता था.

पत्रकारों को पुलिस ने इस केस के संबंध में कुछ बताया था तो केवल इतना कि इस कांड में 4 से अधिक आरोपी हो सकते हैं, साथ ही यह भी कि जंगल में जिस जगह से गुडि़या का शव बरामद हुआ था, वह जगह सड़क से ज्यादा दूर नहीं है. जिस तरीके से गुडि़या का नग्न शव वहां पड़ा मिला था, उस से साफ जाहिर होता है कि उस से दुराचार कर के उस की हत्या कहीं और की गई थी और बाद में शव को वहां ला कर फेंक दिया गया था.crime story

इधर यह सब चल रहा था और उधर मामला हल करने के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश के डीजीपी सोमेश गोयल को अपने निवास पर बुलाया. उन्होंने डीजीपी से इस मामले को जल्दी से जल्दी हल करने के लिए एक स्पैशल इनवैस्टीगेशन टीम का गठन करने का आदेश दिया, साथ ही मुख्यमंत्री ने पीडि़ता के परिवार को 5 लाख रुपया सहायता राशि देने की घोषणा भी की.

डीजीपी सोमेश गोयल ने उसी दिन आईजी जहूर हैदर जैदी की अगुवाई में एसआईटी गठित कर दी. इस टीम में जिन पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया, वे थे एएसपी (शिमला) भजनदेव नेगी, डीएसपी (ठियोग) मनोज जोशी, डीएसपी रतन नेगी, थानाप्रभारी (ढल्ली थाम) बाबूराम शर्मा, एसआई धर्म सिंह, थानाप्रभारी (छोटा शिमला) राजेंद्र सिंह, थानाप्रभारी (कोटखाई) व एडीशनल थानाप्रभारी (ठियोग) के अलावा आधा दरजन अन्य पुलिसकर्मी.

इस टीम ने युद्धस्तर पर गुडि़या केस की छानबीन करते हुए 84 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की. वह भी केवल 52 घंटों में. 28 मोबाइल फोनों की काल डिटेल्स निकलवा कर उन की भी जांच की गई. यह मामला कोटखाई थाना में धारा 376 एवं 302 के तहत दर्ज किया गया था. अब इस में पोक्सो एक्ट की धारा 4 का भी समावेश कर दिया गया था.

अपनी इस तरह की उपलब्धियों के साथ 13 जुलाई को डीजीपी सोमेश गोयल ने पुलिस मुख्यालय में एक बड़ी प्रैस कौन्फ्रैंस की. उन्होंने पहले तो इस मामले के हल हो जाने की घोषणा करते हुए अपने सभी कनिष्ठ अधिकारियों की पीठ थपथपाई. फिर पत्रकारों को बताया कि उन की पुलिस ने गुडि़या केस को महज 52 घंटों के भीतर सुलझा कर इस कांड में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

उन नामों का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि इस मामले में जिन्हें गिरफ्तार किया गया है, वे हैं—महिंद्रा पिकअप वैन का चालक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू, उम्र 32 साल, निवासी गांव हलाईला, उत्तराखंड का रहने वाला 42 वर्षीय सुभाष सिंह बिष्ट, नेपाल निवासी 29 वर्षीय सूरज सिंह, 19 साल का लोकजन उर्फ छोटू और गढ़वाल निवासी 38 वर्षीय दीपक उर्फ दीपू.

संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से जानकारियां साझा करते हुए डीजीपी ने बताया, ‘‘हालफिलहाल ये सभी अभियुक्त हलाईला ही में रह रहे थे, जबकि राजू मूलरूप से जिला मंडी के गांव जंजैहली का रहने वाला है. एक अन्य अभियुक्त के बारे में बताना रह गया, वह है महासू के नजदीक शराल गांव का रहने वाला 29 वर्षीय आशीष चौहान उर्फ आशु.crime story

‘‘यह एक ब्लाइंड मर्डर केस था. आरोपियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं. यह कोई वारदात नहीं थी, बल्कि अपर्चुनिटी क्राइम था. नशे में धुत्त 5 आरोपियों ने पहले छात्रा के साथ बलात्कार किया, फिर उस की हत्या कर दी. अपराध के दिन लड़की के पास मोबाइल नहीं था. उस दिन इस क्षेत्र में बारिश भी हुई थी. मेरा दावा है कि हमारी एसआईटी ने 5 तरह के वैज्ञानिक सबूत जुटा कर इस केस को पूरी जिम्मेदारी से हल कर लिया है.’’

लेकिन लोगों को पुलिस का यह दावा हजम नहीं हुआ. पुलिस जांच से नाखुश आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के ही खिलाफ कमर कस ली. कोटखाई व ठियोग थानों पर पत्थरबाजी करते हुए लोगों ने जम कर हंगामा किया.

14 जुलाई को जब शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डी.डब्ल्यू. नेगी ठियोग थाना में आए हुए थे, तभी लोगों ने थाने पर हमला कर के न केवल एसएसपी से धक्कामुक्की की, बल्कि एक दारोगा को भी थाने से बाहर खींच कर उस की वर्दी पर लगे स्टार नोच लिए. पुलिसकर्मियों ने बड़ी मुश्किल से अपने एसएसपी को थाने के भीतर पहुंचा कर गेट बंद कर लिया.

इस बीच उग्र भीड़ ने एक एसपी व एक डीएसपी की गाड़ी समेत पुलिस की कई गाडि़यों को तोड़ डाला था. इधर यह सब चल रहा था, उधर शिमला में इस तरह के हंगामे की आशंका के मद्देनजर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मुख्य सचिव गृह व डीजीपी सहित अन्य कई अधिकारियों की सचिवालय में आपातकालीन बैठक हुई. बैठक के तुरंत बाद सीएम वीरभद्र सिंह ने घोषणा कर दी कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मैं इस केस को सीबीआई के हवाले करने की सिफारिश करता हूं.

सीएम का आदेश होते ही शासन ने इस से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी, ताकि किसी को किसी तरह का संशय न रहे.crime story

लेकिन लोगों का कहना था कि इस कांड में संलिप्त रईसजादों को बचाने के लिए पुलिस सारा केस गरीब मजदूरों पर डालने की कोशिश कर रही है. पहले कुछेक रईसजादों को पुलिस ने इस केस में पकड़ा भी था, मगर उन्हें जल्दी ही छोड़ दिया गया था, जिस का जिक्र हम शुरू में कर चुके हैं. नतीजा यह हुआ कि कोटखाई व ठियोग में हुई किरकिरी के बाद शिमला पुलिस बैकफुट पर आ गई. जिन रईसजादों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था, पुलिस ने उन्हें फिर से पकड़ लिया.

शिमला के डीडीयू अस्पताल में इन के सीमन एनालिसिस और डीएनए प्रोफाइलिंग के सैंपल लिए गए. मैडिकल करवाने के बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय ले जा कर उन से देर रात तक पूछताछ की जाती रही. उन में एक के ऊपर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज थे. कुछ दिनों पहले ही वह शिमला की जिला अदालत से एक आपराधिक केस में बरी भी हुआ था.

पुलिस जो कर रही थी, लोग उस से पहले ही संतुष्ट नहीं थे. जब एक रईसजादे आशु को गुपचुप तरीके से अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया तो लोग और भी भड़क उठे. 18 जुलाई की सुबह 24 पंचायतों के 4 हजार लोग अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए गुम्मा नामक जगह पर इकट्ठा हुए तो वहां कुछ राजनेता भी पहुंच कर एकदूसरे पर तंज कसने लगे.

इन नेताओं की बेतुकी बयानबाजी से गुस्साए लोगों ने ठियोग-हाईकोटी नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया, जो 7 घंटे चला. इस बीच एक गाड़ी को भी तोड़ दिया गया और मौके पर पहुंचे ठियोग के एसडीएम टशी संडूप को लोगों ने कमरे में बंद कर दिया.

कुछ पत्रकार गुडि़या के पिता से मिलने गए तो मालूम पड़ा कि केस वापस लेने के लिए उन्हें करोड़ों का प्रलोभन दिया जा रहा था, जबकि उन्होंने साफ कह दिया था कि उन्हें पैसा नहीं चाहिए. न सरकार की तरफ से न किसी और से. उन्हें तो अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहिए, केवल इंसाफ.

उसी दिन राज्य सरकार की ओर से प्रदेश हाईकोर्ट में इस केस पर जल्दी सुनवाई करने का आवेदन किया गया, जो स्वीकार कर लिया गया. इस संबंध में महाधिवक्ता ने न्यायालय से आग्रह किया कि सीबीआई को आदेश दिया जाए कि तुरंत शिमला पुलिस से रेकौर्ड ले कर अपनी काररवाई शुरू करे. यह आदेश दे भी दिया गया.

लेकिन उस रात वह हो गया, जिस की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. कोटखाई थाने की हवालात में इस केस के एक अभियुक्त सूरज की हत्या हो गई. पुलिस के अनुसार, दूसरे अभियुक्त राजू ने सूरज का गुप्तांग मसल कर उसे मार डाला था.

जैसे ही इस की खबर लोगों को लगी, भारी भीड़ एकत्र हो कर कोटखाई की ओर बढ़ने लगी. 19 जुलाई की दोपहर सवा 3 बजे इस भीड़ ने कोटखाई थाने को आग लगा दी. थाने की इमारत के साथ वहां रखा रेकौर्ड जल कर राख हो गया. पुलिस के कई वाहन जला दिए गए, साथ ही घोषणा कर दी गई कि 20 जुलाई को शिमला बंद रहेगा.

20 जुलाई को शिमला शहर समेत समूचे राज्य में पूर्ण बंद रहा. गुडि़या को न्याय की मांग को ले कर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे. कई जगह पुलिस वालों पर पत्थरबाजी हुई तो इन प्रदर्शनकारियों द्वारा कई थानों में भी घुसने की कोशिश की गई. मृतक सूरज की पत्नी ममता ने भी पति को इंसाफ दिलाने के लिए कमर कस ली थी.

प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने इस तरह थाने के भीतर हुई हत्या को गंभीरता से लेते हुए इस की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए, साथ ही कोटखाई थाने के थानाप्रभारी समेत 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर के एसआईटी के 3 प्रमुख अफसरों आईजी जैड.एच. जैदी, एसएसपी शिमला डी.डब्ल्यू. नेगी और एएसपी भजनदेव नेगी का तबादला कर दिया गया.

पुलिस के माध्यम से इस अपराध की जो मूलकथा मीडिया तक पहुंची, वह इस प्रकार से थी कि 4 जुलाई को गुडि़या के स्कूल से घर जाते समय उसे पिकअप वैन चालक राजेंद्र उर्फ राजू रास्ते में मिला. राजू ने उसे गाड़ी से छोड़ने की बात कही. वह राजू को जानती थी, इसलिए उस की गाड़ी में बैठ गई.

पिकअप वैन में सुभाष बिष्ट, सूरज सिंह, लोकजन और दीपक भी बैठे थे. ये सब शराब के नशे में थे. कुछ आगे जा कर राजू ने वैन रोकी और ये लोग गुडि़या को घसीट कर जंगल में ले गए, जहां उस के कपड़े फाड़ कर इन लोगों ने उस के साथ यौनाचार व दुराचार किया. इस के बाद जब आरोपियों ने गुडि़या को मारने की योजना बनाई तो उस ने जान की भीख मांगते हुए कहा, ‘जो करना है करो, मगर मुझे जान से मत मारो. मैं जीना चाहती हूं. इस घटना के बारे में मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी.’

लेकिन आरोपियों को उस पर जरा भी तरस नहीं आया. उन्हें अपने फंस जाने का डर था, लिहाजा उन्होंने गुडि़या का गला दबा कर उसे मार डाला.

पुलिस के मुताबिक इस केस की यही कहानी थी और ये 5 लोग ही दोषी थे, अन्य कोई नहीं. इन में सूरज वादामाफ गवाह बनने को तैयार हो गया था, लेकिन उसी की हत्या हो गई.

फिलहाल मीडिया के जरिए लोग रोजाना सवालों के गोले दाग रहे हैं, जिन का कोई पुख्ता जवाब न पुलिस के पास है न ही सरकार के पास. कुछ अहम सवालों की बानगी इस तरह से है:

अस्पताल में जब अभियुक्तों को उन का मैडिकल करवाने ले जाया गया था तो एकदूसरे को गुडि़या का असली हत्यारा बताते हुए वे आपस में लड़ते रहे थे. ऐसे में कस्टडी रिमांड के दौरान उन्हें एक ही हवालात में क्यों रखा गया?

सूरज जब वादामाफ गवाह बनाया जा रहा था तो उसे दूसरे अभियुक्तों से अलग क्यों नहीं रखा गया? केस सीबीआई को भेज दिया गया है, बावजूद इस के पुलिस इन अभियुक्तों का कस्टडी रिमांड बढ़वा कर 18-19 जुलाई की रात में इन्हें किस बात के लिए इंटेरोगेट कर रही थी? सूरज की हत्या कस्टडी रिमांड के दौरान हवालात में हुई तो क्या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उस की चीखें नहीं सुनीं?

पुलिस के पास इस केस का एक चश्मदीद है, लेकिन अभी तक उस के सीआरपीसी की धारा 164 के अंतर्गत बयान क्यों नहीं दर्ज कराए गए? सूरज ने अपना लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने की बात कही थी तो पुलिस ने इस संबंध में अदालत में अर्जी क्यों नहीं लगाई थी? जब गुडि़या की नग्न लाश मिली थी तो उस के कपड़े और स्कूल बैग वगैरह कहां से बरामद हुए थे?

इस क्रिकेटर के प्यार में पागल थी बाहुबली की ‘देवसेना’

एक तरफ तो लोग जहां ‘बाहुबली’ फेम अनुष्का शेट्टी और उनके को-स्टार प्रभास के साथ उनके रिश्तों को लेकर कयास लगाने में व्यस्त हैं, वहीं इस अदाकारा ने खुद ही खुलासा कर दिया है कि वे किस से प्रेम करती हैं.

अनुष्का जिसे पसंद करती हैं वह कोई और नहीं बल्कि क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे बेहतरीन खिलाड़ी राहुल द्रविड़ हैं. यह खुलासा अनुष्का ने मनोरंजन पोर्टल तेलुगु स्टफ को दिए इंटरव्यू में किया है. इंटरव्यू के दौरान वहां अनुष्का के फैन भी मौजूद थे. औडियन्स में बैठे एक फैन ने अनुष्का से पूछा कि आप सबसे ज्यादा किस क्रिकेटर को पसंद करती हैं.

यह सवाल पूछने के बाद अनुष्का के चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी. फैन के सवाल का जवाब देते हुए अनुष्का ने कहा “राहुल द्रविड मेरे पसंदीदा क्रिकेटर हैं”. वे मुझे तबसे पसंद हैं जब मैं बड़ी हो रही थी. मेरा उनपर क्रश था. एक समय तो ऐसा था कि मैं उनके प्यार में डूब गई थी.

बता दें कि मीडिया में खबर है कि ‘बाहुबली’ की सफलता के बाद प्रभास और अनुष्का सगाई करने वाले हैं. अनुष्का और प्रभास के अफेयर की कई खबरें सामने आई हैं लेकिन दोनों कलाकारों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. ‘बाहुबली’ से पहले अनुष्का और प्रभास दर्शकों को अपनी औनस्क्रीन कैमेस्ट्री दिखा चुके हैं.

फिलहाल प्रभाष अपनी आगामी फिल्म ‘साहो’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. वहीं अनुष्का अपनी आने वाली फिल्म ‘भागमती’ में बिजी हैं. इस फिल्म का पहला पोस्टर अनुष्का के जन्मदिन वाले दिन 7 नवंबर को रिलीज किया गया था.

इस फिल्म में अनुष्का बिल्कुल अलग ही अंदाज में दिखाई देंगी. रिलीज किए गए पोस्टर में अनुष्का का एकदम इंटेंस लुक दिखाया गया है. उनके कपड़ों पर खून लगा है और उनके हाथ में खून से सना हुआ एक हथौड़ा भी दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही दूसरा हाथ दीवार पर कील से ठुका हुआ दिखाई दे रहा है.

नहीं खुला भोजपुरी अभिनेत्री की मौत का राज

उत्तर प्रदेश के शहर इलाहाबाद के थाना अतरसुइया के रहने वाले प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव ने 19 जून, 2017 को अपनी बेटी अंजलि को फोन किया. अंजलि मुंबई में रह कर फिल्मों में काम करती थी. वह अंधेरी वेस्ट के जुहू लेन स्थित परिमल सोसाइटी की 5वीं मंजिल पर रहती थी. सन 2011 में वह अपने घर से एक्टिंग करने मुंबई गई थी. उस के पिता प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव इलाहाबाद में अपना बिजनैस करते हैं और मां शीला हाउसवाइफ हैं. पतिपत्नी समयसमय पर अंजलि को फोन कर के उस की खैरखबर लेते रहते थे. वैसे वे नहीं चाहते थे कि अंजलि मुंबई जा कर रहे और एक्टिंग करे. लेकिन बेटी की इच्छा को ध्यान में रखते हुए उन्हें उस की बात माननी पड़ी थी.

अंजलि को उस के मातापिता प्यार से ‘लवी’ कहते थे. मुंबई में अंजलि ने अपने बातव्यवहार से अपने काम के लोगों से अच्छे संपर्क बना लिए थे. कोशिश कर के उसे कुछ फिल्मों में काम भी मिल गया था. उन में सब से प्रमुख भोजपुरी फिल्म ‘कच्चे धागे’ थी. इस के बाद उस की कुछ और भी फिल्में आईं, जिन में ‘दम होई जेकरा में ओही गाड़ी खूंटा’, ‘लहू के दो रंग’, ‘दीवानगी हद से’, ‘केहू ता दिल में बा’, ‘अब होई बगावत’ और ‘ठोक देब’ प्रमुख थीं.

अंजलि ने हिंदी फिल्म ‘धानी का डीजे कैम’ में भी काम किया था. उस ने करीब आधा दरजन हिंदी फिल्मों में काम किया था, बावजूद इस के उस की ऐसी कोई पहचान नहीं बन पाई थी, जिस से उसे किसी अच्छे बैनर की फिल्म मिलती.

अंजलि इस कोशिश में थी कि उसे कोई लीड रोल वाली फिल्म मिल जाए, पर उसे ऐसी फिल्म नहीं मिल रही थी. ज्यादातर फिल्मों में उसे साइड रोल ही मिल रहे थे. घर वालों से मिलने वह 4-5 महीने में इलाहाबाद आती रहती थी.

फरवरी, 2017 में जब वह घर आई थी तो काफी खुश थी. उसे उम्मीद थी कि अब उस के घर वाले गर्व से कह सकेंगे कि उन की बेटी फिल्म एक्ट्रेस है. कुछ लोगों ने कई फिल्मों में अंजलि के काम को देखा तो उस की काफी तारीफ की. इस से उसे उम्मीद थी कि अब उसे बड़ी फिल्में मिल जाएंगी. कुछ दिन घर में रह कर वह मुंबई चली गई थी. जब भी उसे टाइम मिलता था, वह घर वालों से फोन पर बात कर लेती थी.crime story

फिल्मों की दुनिया का ग्लैमर तो हर किसी को दिखता है, लेकिन परदे के पीछे का दर्द कम ही लोग जानते हैं. वह दर्द कई बार कलाकार को हताश और निराश कर देता है. उस हताशा और निराशा में कुछ कलाकार संयम से काम ले कर खुद को उबार लेते हैं तो कुछ उसी में उलझ कर दम तोड़ देते हैं. कहने को अपनी मौत का वह खुद ही जिम्मेदार होता है, पर असल में इस के लिए समाज की व्यवस्था जिम्मेदारी होती है.

भोजपुरी फिल्मों की दुनिया भी कुछ ऐसी ही रचीबसी है. छोटेछोटे शहरों के बहुत सारे युवा तरहतरह के सपने ले कर मुंबई पहुंचते हैं. वहां पहुंच कर कोई हीरो बनना चाहता है तो कोई हीरोइन, कोई विलेन बनना चाहता है तो कोई पुलिस वाला. किसी को गायक बनना होता है तो कोई डायरेक्टर बनने की कोशिश में रहता है.

लेकिन मुंबई आने वाले हर कलाकार की ख्वाहिशें पूरी नहीं हो पातीं. अगर हर साल बनने वाली फिल्मों की संख्या की बात करें तो यहां हर साल 100 से अधिक फिल्में बनती हैं. अपनी कहानी, गानों और द्विअर्थी संवादों के कारण ज्यादातर फिल्मों को ए-सर्टिफिकेट दिया जाता है.

वैसे भोजपुरी फिल्मों का सब से बड़ा बाजार बिहार, झारखंड ही है. अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और मुंबई में भी ये फिल्में चलने लगी हैं. मुंबई में हर साल हीरो और हीरोइन बनने वाले लड़केलड़कियों की लंबी कतार लगी होती है. फिल्में बनाने वाले ऐसे निर्मातानिर्देशक ज्यादा हैं, जो कम बजट की फिल्में बनाते हैं.

इन में अधिकांश फिल्में तो सिनेमाघरों तक पहुंच ही नहीं पातीं. ऐसे में इन फिल्मों में काम करने वाले कलाकारों को बड़ी निराशा होती है. क्योंकि वह यही सोचते हैं कि उन की फिल्म रिलीज होगी तो लोग उन के काम को देखेंगे और पसंद करेंगे. इस के बाद उन्हें और फिल्मों में काम मिलेगा.

भोजपुरी फिल्मों पर आज भी पुरुष प्रधान समाज का कब्जा है. ज्यादातर गायक, जो फिल्मों में हीरो बनते हैं, वही कब्जा किए हुए हैं. ये लोग अपने साथ काम करने वालों की एक लौबी बनाए होते हैं, जिस से नए कलाकार के लिए काम करना मुश्किल हो जाता है.

अंजलि फेसबुक के जरिए अपने घर वालों से जुड़ी थी. उस की मां समयसमय पर मुंबई में उस के पास रहने के लिए जाती रहती थीं. अंजलि मां को घुमाने के लिए कभी बीच पर ले जाती थी तो कभी सिद्धिविनायक मंदिर. 6 जून को अंजलि के मातापिता की शादी की सालगिरह थी. उस ने फेसबुक पर अपनी यादों का एक एलबम शेयर करते हुए मम्मीपापा को बधाई दी थी.

29 साल की अंजलि की नई फिल्म ‘केहू ता दिल में बा’ रिलीज हो चुकी थी. वह अब नए प्रोजैक्ट की तैयारी में थी. 8 जून को अंजलि ने अपने फेसबुक पेज पर एक शेर लिखा था, ‘उस के साथ जीने का एक मौका दे दे खुदा, तेरे साथ तो मरने के बाद भी रह लेंगे.’

अंजलि की इस पोस्ट को उस समय दोस्तों ने ऐसे ही समझा था. कई ने पूछा भी था कि कौन है वह, जिस के लिए उस ने यह शेर लिखा है.

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19 जून, 2017 की बात है. अंजलि के मोबाइल पर उस की मां शीला ने फोन किया. घंटी बजने के बाद भी अंजलि ने फोन रिसीव नहीं किया तो शीला ने कई बार फोन किया. हर बार उस के फोन की घंटी बजी, पर फोन नहीं उठा. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. जब कभी अंजलि व्यस्त होती थी तो फोन रिसीव कर के कह देती कि ‘मम्मी मैं अभी बिजी हूं. बाद में काल कर लूंगी.’

बेटी द्वारा फोन न उठाने से शीला परेशान हो गईं. उन्होंने उसी समय पति प्रेमप्रकाश श्रीवास्तव को पूरी बात बताई. प्रेमप्रकाश ने भी अंजलि को फोन किया. पूरी घंटी बजने के बाद भी फोन नहीं उठा तो परेशान हो कर उन्होंने उस की सोसाइटी के नंबर पर संपर्क किया.

सोसाइटी वालों ने डुप्लीकेट चाबी से अंजलि का कमरा खोला तो कमरे के अंदर अंजलि पंखे से लटकी मिली. सोसाइटी वालों ने यह जानकारी फोन द्वारा पुलिस को दी और अंजलि को लीला कपूर अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

अंजलि के घर वालों को जैसे ही यह खबर मिली, वे मुंबई पहुंचे. मुंबई पुलिस की एसीपी रश्मि कारदिंकर ने बताया कि मृतका के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस को अपनी जांच में हत्या से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला. ऐसे में इस मामले को आत्महत्या ही माना गया.

एक युवा अभिनेत्री, जो कुछ साल पहले बहुत सारे सपने ले कर मुंबई गई थी, उन सपनों का अंत हो चुका था. अंजलि के साथ काम करने वाले कई कलाकार इस घटना से बहुत आहत थे. वे कह रहे थे कि अंजलि बहुत ही मिलनसार और हंसमुख थी. उस में फिल्मनगरी वाली चालाकियां नहीं थीं. शायद यही वजह रही कि वह इस दुनिया की चालबाजियों को समझ नहीं पाई.

अंजलि को अपने काम और टैलेंट पर भरोसा था. वह इस उम्मीद में थी कि एक बार उसे अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल जाए तो वह दुनिया को दिखा देगी कि उस में भी अभिनय क्षमता है. फिल्म जगत के कई लोगों ने उसे भरोसा दिलाया था कि वह उसे अपनी फिल्म में काम देंगे. जब अंजलि के भरोसे को ठेस लगी तो उस के सामने दुनिया के रंगमंच को अलविदा कहने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखा.

अंजलि के इस फैसले से भोजपुरी फिल्मों की दुनिया को कोई फर्क नहीं पड़ा. वहां हर काम अपनी गति से चल रहा है. प्रभाव पड़ा है तो अंजलि के परिवार, उस के मातापिता और भाईबहन पर. वह इस हादसे से टूट गए हैं. घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी वे अभी कुछ बोलनेसमझने की हालत में नहीं हैं. उन्हें आज भी अपनी प्यारी बेटी की याद आती है तो लगता है लवी अभी आने वाली है.

अंजलि के बिना मुंबई से वापस आते समय उस की मां ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था, ‘मुंबई कभी दोबारा आना नहीं होगा’. बेटी की याद पूरे परिवार को बारबार सताती है. 13 जुलाई को अंजलि के जन्मदिन पर उस की मां ने फेसबुक पर बेटी को बधाई देते हुए पूछा था, ‘क्या अब तुझ को मेरी याद नहीं आती?’

मां के लिए बेटी बहुत बड़ा सहारा थी. बेटी ऐसे हार जाएगी, यह कभी उन्होंने सोचा भी नहीं था. यही वजह है कि मां को इस बात का विश्वास नहीं हो रहा कि अंजलि अब इस दुनिया में नहीं है.

हम ने अपनी माताजी का गुरदा प्रत्यारोपण करवाया है. गुरदा प्रत्यारोपण के बाद कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए.

सवाल
हाल ही में हम ने अपनी माताजी का गुरदा प्रत्यारोपण करवाया है? हम जानना चाहते हैं कि गुरदा प्रत्यारोपण के बाद कौनकौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब
यह किसी और का गुरदा होता है, इसलिए तब तक दवा लेना जरूरी है जब तक कि शरीर इस नए गुरदे को स्वीकार नहीं लेता. गुरदा प्रत्यारोपण के बाद हैल्दी जीवनशैली अपनाएं ताकि जटिलता की आशंका न्यूनतम हो. पोषक भोजन का सेवन करें. वजन अधिक है तो वजन घटाएं. संक्रमण से बचने के लिए जरूरी उपाय करें. ऐसे स्थान, व्यक्ति से दूर रहें, जिस से संक्रमण फैलने का डर हो. बीमार हों तो डाक्टर की सलाह के बिना दवा न लें. जब भी डाक्टर के पास इलाज के लिए जाएं तो उन्हें गुरदा प्रत्यारोपण के बारे में जरूर बताएं.

मैं भाभी की बहन से जिस्मानी रिश्ता बना चुका हूं, पर वह किसी और लड़के के साथ भी हमबिस्तर हो चुकी है. मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 23 साल का हूं और भाभी की चचेरी बहन से प्यार करता था. उस के साथ 7 बार जिस्मानी रिश्ता भी बना चुका हूं, पर वह किसी और लड़के के साथ भी हमबिस्तर हो चुकी है, इसलिए मैं ने उस से बोलना छोड़ दिया है. मगर सोते वक्त उस की याद आती है. मैं क्या करूं?

जवाब
जब आप बिना शादी के किसी को हमबिस्तर बनाएंगे, तो यह होगा ही. अगर आप उसे जैसी है वैसी अपना सकते हैं, तो ज्यादा एतराज करे बिना दोस्ती बनाए रखें.

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हुस्न का धोखा

सेठ मंगतराम अपने दफ्तर में बैठे फाइलों में खोए हुए थे, तभी फोन की घंटी बजने से उन का ध्यान टूट गया. फोन उन के सैक्रेटरी का था. उस ने बताया कि अनीता नाम की एक औरत आप से मिलना चाहती है. वह अपनेआप को दफ्तर के स्टाफ रह चुके रमेश की विधवा बताती है.

सेठ मंगतराम ने कुछ पल सोच कर कहा, ‘‘उसे अंदर भेज दो.’’

सैक्रेटरी ने अनीता को सेठ के केबिन में भेज दिया. सेठ मंगतरात अपने काम में बिजी थे कि तभी एक मीठी सी आवाज से वे चौंक पड़े. दरवाजे पर अनीता खड़ी थी. उस ने अंदर आने की इजाजत मांगी. सेठ उसे भौंचक देखते रह गए.

अनीता की न केवल आवाज मीठी थी, बल्कि उस की कदकाठी, रंगरूप, सलीका सभी अव्वल दर्जे का था.

सेठ मंगतराम ने अनीता को बैठने को कहा और आने की वजह पूछी. अनीता ने उदास सूरत बना कर कहा, ‘‘मेरे पति आप की कंपनी में काम करते थे. मैं उन की विधवा हूं. मेरी रोजीरोटी का कोई ठिकाना नहीं है. अगर कुछ काम मिल जाए, तो आप की मेहरबानी होगी.’’

सेठ मंगतराम ने साफ मना कर दिया. अनीता मिन्नतें करने लगी कि वह कोई भी काम कर लेगी.

सेठ ने पूछा, ‘‘कहां तक पढ़ी हो?’’

यह सुन कर अनीता ने अपना सिर झुका लिया.

सेठ मंगतराम ने कहा, ‘‘मेरा काम सर्राफ का है, जिस में हर रोज करोड़ों रुपए का लेनदेन होता है. मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि तुम्हें कहां काम दूं? खैर, तुम कल आना. मैं कोई न कोई इंतजाम कर दूंगा.’’

अनीता दूसरे दिन सेठ मंगतराम के दफ्तर में आई, तो और ज्यादा कहर बरपा रही थी. सभी उसे ही देख रहे थे. सेठ भी उसे देखते रह गए.

अनीता को सेठ मंगतराम ने रिसैप्शनिस्ट की नौकरी दे दी और उसे मौडर्न ड्रैस पहनने को कहा.

अनीता अगले दिन से ही मिनी स्कर्ट, टीशर्ट, जींस और खुले बालों में आने लगी. देखते ही देखते वह दफ्तर में छा गई.

अनीता ने अपनी अदाओं और बरताव से जल्दी ही सेठ मंगतराम का दिल जीत लिया. उस का ज्यादातर समय सेठ के साथ ही गुजरने लगा और कब दोनों की नजदीकियां जिस्मानी रिश्ते में बदल गईं, पता नहीं चला.

अनीता तरक्की की सीढि़यां चढ़ने लगी. कुछ ही समय में वह सेठ मंगतराम के कई राज भी जान गई थी. वह सेठ के साथ शहर से बाहर भी जाने लगी थी.

सेठ मंगतराम का एक बेटा था. उस का नाम राजीव था. वह अमेरिका में ज्वैलरी डिजाइन का कोर्स कर रहा था. अब वह भारत लौट रहा था.

सेठ मंगतराम ने अनीता से कहा, ‘‘आज मेरी एक जरूरी मीटिंग है, इसलिए तुम मेरे बेटे राजीव को लेने एयरपोर्ट चली जाओ.’’

अनीता जल्दी ही एयरपोर्ट पहुंची, पर उस ने राजीव को कभी देखा नहीं था, इसलिए वह एक तख्ती ले कर रिसैप्शन काउंटर पर जा कर खड़ी हो गई.

राजीव उस तख्ती को देख कर अनीता के पास पहुंचा और अपना परिचय दिया.

अनीता ने उस का स्वागत किया और अपना परिचय दिया. उस ने राजीव का सामान गाड़ी में रखवाया और उस के साथ घर चल दी.

राजीव खुद बड़ा स्मार्ट था. वह भी अनीता की खूबसूरती से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका. अनीता का भी यही हालेदिल था.

घर पहुंच कर राजीव ने अनीता से कल दफ्तर में मुलाकात होने की बात कही.

अगले दिन राजीव दफ्तर पहुंचा, तो सारे स्टाफ ने उसे घेर लिया. राजीव भी उन से गर्मजोशी से मिल रहा था, पर उस की आंखें तो किसी और को खोज रही थीं, लेकिन वह कहीं दिख नहीं रही थी.

राजीव बुझे मन से अपने केबिन में चला गया, तभी उसे एक झटका सा लगा.

अनीता राजीव के केबिन में ही थी. वह अनीता से न केवल गर्मजोशी से मिला, बल्कि उस के गालों को चूम भी लिया.

आज भी अनीता गजब की लग रही थी. उस ने राजीव के चूमने का बुरा नहीं माना.

इसी बीच राजीव के पिता सेठ मंगतराम वहां आ गए. उन्होंने अनीता से कहा, ‘‘तुम मेरे बेटे को कंपनी के बारे में सारी जानकारी दे दो.’’

अनीता ने ‘हां’ में जवाब दिया.

मंगतराम ने आगे कहा, ‘‘अनीता, आज से मैं तुम्हारी टेबल भी राजीव के केबिन में लगवा देता हूं, ताकि राजीव को कोई दिक्कत न हो.’’

इस तरह अनीता का अब ज्यादातर समय राजीव के साथ ही गुजरने लगा. इस वजह से उन दोनों के बीच नजदीकियां भी बढ़ने लगीं.

आखिरकार एक दिन राजीव ने ही पहल कर दी और बोला, ‘‘अनीता, मैं तुम से प्यार करने लगा हूं. क्या हम एक नहीं हो सकते?’’

अनीता यह सुन कर मन ही मन बहुत खुश हुई, पर जाहिर नहीं किया. कुछ देर चुप रहने के बाद वह बोली, ‘‘राजीव, तुम शायद मेरी हकीकत नहीं जानते हो. मैं एक विधवा हूं और तुम से उम्र में भी 4-5 साल बड़ी हूं. यह कैसे मुमकिन है.’’

राजीव ने कहा, ‘‘मैं ऐसी बातों को नहीं मानता. मैं अपने दिल की बात सुनता हूं. मैं तुम्हें चाहता हूं…’’ इतना कह कर राजीव अचानक उठा और अनीता को अपनी बांहों में भर लिया. अनीता ने भी अपनी रजामंदी दे दी.

राजीव और अनीता अब खूब मस्ती करते थे. बाहर खुल कर, दफ्तर में छिप कर. राजीव अनीता पर बड़ा भरोसा करने लगा था. उस ने भी अनीता को अपना राजदार बना लिया था.

इस तरह कुछ ही दिनों में अनीता ने कंपनी के मालिक और उस के बेटे को अपनी मुट्ठी में कर लिया. अनीता ने अपने जिस्म का पासा ऐसा फेंका, जिस में बापबेटे दोनों उलझ गए.

अनीता ने सेठ मंगतराम के घर पर भी अपना सिक्का जमा लिया था. उस ने सेठजी की पत्नी व नौकरों पर भी अपना जादू चला दिया. वह अपने हुस्न के साथसाथ अपनी जबान का भी जादू चलाती थी.

एक दिन राजीव ने अनीता से कहा, ‘‘मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’

अनीता बोली, ‘‘मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं, पर सेठजी ने तो तुम्हारे लिए किसी अमीर घराने की लड़की पसंद की है. वे हमारी शादी नहीं होने देंगे.’’

राजीव बोला, ‘‘हम भाग कर शादी कर लेंगे.’’

अनीता ने जवाब दिया, ‘‘भाग कर हम कहां जाएंगे? कहां रहेंगे? क्या खाएंगे? सेठजी शायद तुम्हें अपनी जायदाद से भी बेदखल कर दें.’’

अनीता की बातें सुन कर राजीव चौंक पड़ा. वह सोचने लगा, ‘क्या पिताजी इस हद तक नीचे गिर सकते हैं?’

अनीता ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मैं पिछले 2 साल से सेठजी के साथ हूं. जहां तक मैं जान पाई हूं, सेठजी को अपनी दौलत और समाज में इज्जत बहुत प्यारी है. क्यों न ऐसा तरीका निकाला जाए कि सेठजी जायदाद से बेदखल न कर पाएं.’’

राजीव ने पूछा, ‘‘वह कैसे?’’

अनीता ने बताया, ‘‘क्यों न सेठजी के दस्तखत किसी तरह जायदाद के कागजात पर करा लिए जाएं?’’

राजीव बोला, ‘‘यह कैसे मुमकिन है? पिताजी कागजात नहीं पढ़ेंगे क्या?’’

अनीता बोली, ‘‘सेठजी मुझ पर काफी भरोसा करते हैं. दस्तखत कराने की जिम्मेदारी मेरी है.’’

कुछ दिनों के बाद अनीता सेठजी के केबिन में पहुंची, तो उन्होंने पूछा, ‘‘बड़े दिन बाद आई हो? क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आई?’’

अनीता ने कहा, ‘‘दफ्तर में काफी काम था. आज भी मैं आप के पास काम से ही आई हूं. कुछ जरूरी फाइलों पर आप के दस्तखत लेने हैं.’’

सेठ मंगतराम बुझे मन से बिना पढ़े ही फाइलों पर दस्तखत करने लगे. अनीता ने जायदाद वाली फाइल पर भी उन से दस्तखत करा लिए.

सेठजी ने अनीता से कहा, ‘‘कुछ देर बैठ भी जाओ मेरी जान,’’ फिर उस से पूछा, ‘‘सुना है कि तुम मेरे बेटे से शादी करना चाहती हो?’’

यह सुन कर अनीता चौंक पड़ी, पर कुछ नहीं बोली.

सेठजी ने बताया, ‘‘राजीव की शादी एक रईस घराने में तय कर दी गई है. तुम रास्ते से हट जाओ.’’

अनीता ने कहा, ‘‘सेठजी, मैं अपनी सीमा जानती हूं. मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी, जिस से मैं आप की नजरों में गिर जाऊं.’’

वैसे, अनीता ने एक शक का बीज यह कह कर बो दिया कि शायद राजीव ने विदेश में किसी गोरी मेम से शादी कर रखी है.

सेठजी अनीता की बातों से चौंक पड़े. यह उन के लिए नई जानकारी थी. उन्होंने अनीता को राजीव से जुड़ी हर बात की जानकारी देने को कहा.

अनीता ने अपनी दस्तखत कराने की योजना की कामयाबी की जानकारी राजीव को दी. वह खुशी से झूम उठा.

राजीव ने अनीता से कहा, ‘‘डार्लिंग, मैं ने कई बार ज्वैलरी डिजाइन की है. इन डिजाइनों की कीमत बाजार में करोड़ों रुपए है. मैं इस के बारे में अपने पिताजी को बताने वाला था, पर अब मैं इस बारे में उन से कोई बात नहीं करूंगा.’’

अनीता ने जब ज्वैलरी डिजाइन के बारे में सुना, तो वह चौंक पड़ी. उस ने मन ही मन एक योजना बना डाली.

एक दिन अनीता सेठजी के केबिन में बैठी थी, तब उस ने चर्चा छेड़ते हुए कहा, ‘‘राजीवजी के पास लेटैस्ट डिजाइन की हुई ज्वैलरी है, जिस की बाजार में बहुत ज्यादा कीमत है. आप का बेटा तो हीरा है.’’

यह सुन कर सेठजी चौंक पड़े और बोले, ‘‘मुझे तो इस बारे में तुम से ही पता चला है. क्या पूरी बात बताओगी?’’

अनीता ने कहा, ‘‘शायद राजीवजी आप से खफा होंगे, इसलिए उन्होंने इस सिलसिले में आप से बात नहीं की.’’

अनीता ने चालाकी से सेठजी के दिमाग में यह कह कर शक का बीज बो दिया कि शायद राजीव अपना कारोबार खुद करेंगे.

सेठ चिंतित हो गए. वे बोले, ‘‘अगर ऐसा हुआ, तो हमारी बाजार में साख गिर जाएगी. इसे रोकना होगा.’’

अनीता ने कहा, ‘‘सेठजी, अगर डिजाइन ही नहीं रहेगा, तो वे खाक कारोबार कर पाएंगे?’’

सेठजी ने पूछा, ‘‘तुम क्या पहेलियां बुझा रही हो? मैं कुछ समझा नहीं?’’

अनीता ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘सेठजी, अगर वह डिजाइन किसी तरह आप के नाम हो जाए, तो आप राजीव को अपनी मुट्ठी में कर सकते हैं.’’

‘‘यह होगा कैसे?’’ सेठजी ने पूछा.

अनीता बोली, ‘‘मैं करूंगी यह काम. राजीवजी मुझ पर भरोसा करते हैं. मैं उन से दस्तखत ले लूंगी.’’

सेठजी ने कहा, ‘‘अगर तुम ऐसा कर दोगी, तो मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगा.’’

अनीता ने यहां भी पुराना तरीका अपनाया, जो उस ने सेठजी के खिलाफ अपनाया था. राजीव से फाइलों पर दस्तखत लेने के दौरान ज्वैलरी राइट के ट्रांसफर पर भी दस्तखत करा लिए.

सेठ चूंकि सोने के कारोबारी थे, इसलिए काफी मात्रा में सोना व काले धन अपने घर के तहखाने में ही रखते थे, जिस के बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया था. पर बुढ़ापे का प्यार बड़ा नशीला होता है. लिहाजा, उन्होंने अनीता को इस बारे में बता दिया था.

इस तरह कुछ दिन और गुजर गए. एक दिन राजीव ने अनीता से कहा, ‘‘अगले सोमवार को हम कोर्ट में शादी कर लेंगे. तुम ठीक 9 बजे आ जाना.’’

अनीता ने भी कहा, ‘‘मैं दफ्तर से छुट्टी ले लेती हूं, ताकि किसी को शक न हो.’’

फिर अनीता सेठजी के पास गई. उन्हें बताया, ‘‘सोमवार को राजीव कोर्ट में किसी विदेशी लड़की से शादी करने जा रहा है. मुझे उस ने गवाह बनने को बुलाया है.’’

सेठजी गुस्से से आगबबूला हो गए.

तब अनीता ने सेठजी को शांत करते हुए कहा, ‘‘कोर्ट पहुंच कर आप राजीव को एक किनारे ले जा कर समझाएं. शायद वह मान जाए. आप अभी होहल्ला न मचाएं. आप की ही बदनामी होगी.’’

सेठजी ने अनीता से कहा, ‘‘तुम सही बोलती हो.’’

सोमवार को राजीव कोर्ट पहुंच गया और अनीता का इंतजार करने लगा, तभी उस के सामने एक गाड़ी रुकी, जिस में अपने पिताजी को देख कर वह चौंक पड़ा.

सेठजी ने राजीव को एक कोने में ले जा कर समझाया, ‘‘क्यों तुम अपनी खानदान की इज्जत उछाल रहे हो? वह भी दो कौड़ी की गोरी मेम के लिए.’’

यह सुन कर राजीव हंस पड़ा और बोला, ‘‘क्यों नाटक कर रहे हैं आप? मैं किसी गोरी मेम से नहीं, बल्कि अनीता से शादी करने वाला हूं. पता नहीं, वह अभी तक क्यों नहीं आई?’’

अनीता का नाम सुन कर अब चौंकने की बारी सेठजी की थी. उन्होंने कहा, ‘‘क्या बकवास कर रहे हो? अनीता ने मुझे बताया है कि तुम आज एक गोरी मेम से शादी कर रहे हो, जिस के साथ तुम विदेश में रहते थे.’’

राजीव ने झुंझलाते हुए कहा, ‘‘आप क्यों अनीता को बीच में घसीट रहे हैं? मैं उसी से शादी कर रहा हूं.’’

सेठजी को अब माजरा समझ में आने लगा कि अनीता बापबेटों के साथ डबल गेम खेल रही है. उन्होंने राजीव को समझाते हुए कहा, ‘‘बेटे राजीव, वह हमारे बीच फूट डाल कर जरूर कोई गहरी साजिश रच रही है. अब वह यहां कभी नहीं आएगी.’’

राजीव को भी अपने पिता की बातों पर विश्वास होने लगा. उस ने अनीता के घर पर मोबाइल फोन का नंबर मिलाया, पर कोई जवाब नहीं मिला.

दोनों सीधे दफ्तर गए, तो पता चला कि अनीता ने इस्तीफा दे दिया है. दोनों सोचने लगे कि आखिर उस ने ऐसा क्यों किया?

कुछ दिनों के बाद जब सेठजी को कुछ सोने और पैसों की जरूरत हुई, तो वे अपने तहखाने में गए. तहखाना देख कर वे सन्न रह गए, क्योंकि उस में रखा करोड़ों रुपए का सोना और नकदी गायब हो चुकी थी.

सेठजी के तो होश ही उड़ गए. वे तो थाने में शिकायत भी दर्ज नहीं करा सकते थे, क्योंकि वे खुद टैक्स के लफड़े में फंस सकते थे.

सेठजी ने यह सब अपने बेटे राजीव को बताया. राजीव ने कहा, ‘‘कोई बात नहीं. मेरे पास कुछ डिजाइन के कौपी राइट्स हैं, उन्हें बेचने पर काफी पैसे मिलेंगे.’’

पर यह क्या, राजीव जब शहर बेचने गया, तो पता चला कि वे तो 12 महीने पहले किसी को करोड़ों रुपए में बेचे जा चुके हैं.

यह सुन कर राजीव सन्न रह गया. उस पर धोखाधड़ी का केस भी दर्ज हुआ, सो अलग.

सेठजी ने साख बचाने के लिए अपनी कंपनी को गिरवी रखने की सोची, ताकि बाजार से लिया कर्ज चुकाया जा सके.

पर यहां भी उन्हें दगा मिली. एक फर्म ने दावा किया और बाद में कागजात भी पेश किए, जिस के मुताबिक उन्होंने करोड़ों रुपए बतौर कर्ज लिए थे और 4 महीने में चुकाने का वादा किया था.

देखतेदेखते सेठजी का परिवार सड़क पर आ गया. उन्होंने अनीता की शिकायत थाने में दर्ज कराई, पर वह कहां थी किसी को नहीं पता.

पुलिस ने कार्यवाही के बाद बताया कि रमेश की तो शादी ही नहीं हुई थी, तो उस की विधवा पत्नी कहां से आ गई.

आज तक यह नहीं पता चला कि अनीता कौन थी, पर उस ने आशिकमिजाज बापबेटों को ऐसी चपत लगाई कि वे जिंदगीभर याद रखेंगे.

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