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ऐसा भी होता है

कई बार ऐसा अनुभव होता है कि पढ़लिख कर भी व्यक्ति के विचार व्यापक नहीं होते, नजरिया संकीर्ण ही रह जाता है, जबकि ऐसा होना नहीं चाहिए. मैं ने एक बार अपनी एक मैडिकल रिपोर्ट शहर के एक नामी डाक्टर को दिखाई. मेरा मकसद 1-2 डाक्टरों से सलाह लेना मात्र था.

रिपोर्ट पकड़ते ही पहले डाक्टर उस में उस डाक्टर का नाम तेजी से ढूंढ़ने लगे जिस ने टैस्ट के लिए सलाह दी थी. जैसे ही उस ने किसी अन्य का नाम देखा तो वे एकदम नाराज हो गए और बोले, ‘‘यह मेरा काम नहीं है.’’ मतलब जिस ने कराया, वही देखे. मुझे लगा कि मर्ज और रोग के मामले में एक डाक्टर के विचार व्यापक और उदार होना वांछित होता है.

माया रानी श्रीवास्तव

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मेरे घर के सामने एक ब्लौक में 4 फ्लैट हैं. जिन में 4 परिवार रहते हैं. नीचे के फ्लैट में एक बुजुर्ग दंपती रहते हैं. उन के ऊपर रहीम चाचा हैं जिन का अपना कारोबार है. रहीम चाचा की बगल में मनोहरलालजी हैं जो मल्टीनैशनल कंपनी में काम करते हैं. उन के नीचे भोलानाथजी हैं जो सरकारी कर्मचारी हैं.

एक दिन रात को रहीम चाचा के छोटे बेटे ने रोना शुरू किया. वह चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था और अपने पेट को बारबार पकड़ रहा था. मनोहरलालजी की नींद बच्चे के रोने से उखड़ गई. वे जोर से बोले, ‘‘अरे भाई, बच्चे को चुप कराओ, नींद उचट गई तो बड़ी मुश्किल से आएगी.’’

भोलानाथजी भी उठ गए और बड़बड़ाते हुए कहने लगे, ‘‘क्या तमाशा लगा रखा है. लोग रात को भी नहीं सोने देते. एक छोटे से बच्चे को चुप भी नहीं करा सकते.’’ बुजुर्ग माताजी की भी नींद खुल गई. वे हींग की डिब्बी ले कर रहीम चाचा के घर गईं. रहीम चाचा को हींग देती हुई बोलीं, ‘‘इसे पानी में घोल कर बच्चे की नाभि में लगा दो. दर्द ठीक हो जाएगा.’’

रहीम चाचा ने हींग घोल कर लड़के की नाभि पर लगाया. 15 मिनट बाद बच्चे को आराम मिला और वह सो गया. सुबह रहीम चाचा माताजी को इस के लिए धन्यवाद दे रहे थे कि उन की वजह से बच्चे को आराम मिला और सभी लोग अच्छे से सो सके.  ?

उपमा मिश्रा

मोबाइल फोन ग्राहकों के लिए भारतीय कंपनी का अनूठा औफर

देश का दूरसंचार क्षेत्र इन दिनों सर्वाधिक चर्चित, सक्रिय और प्रतिस्पर्धी बना हुआ है. पिछले वर्ष रिलायंस कंपनी ने अपने ग्राहकों का आधार बढ़ाने के लिए जियो सिम के जरिए उपभोक्ताओं को निशुल्क इंटरनैट डाटा निर्धारित समय के लिए उपलब्ध कराने की घोषणा की थी तो जियो सिम पाने के लिए लोगों की लंबीलंबी कतारें लग गईं. कई शहरों में यह ब्लैक में भी बिकने लगा. इसे देखते हुए दूसरी कंपनियों ने भी अपने खिसकते उपभोक्ता आधार को बचाने के लिए नईनई रणनीतियां अपनानी शुरू कर दीं जिस से ग्राहकों को बेहद सस्ती दरों पर मोबाइल नैटवर्क सेवा मिलने लगी.

दूरसंचार बाजार की इस स्थिति को देखते हुए वित्तीय सेवा क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय कंपनी मौर्गन स्टेनले तथा मूडीज का आकलन है कि अगले डेढ़ दो वर्षों तक भारतीय दूरसंचार कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी क्योंकि देश की प्रमुख दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस और आइडिया के बीच अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की होड़ मची है.

कमाल यह है कि यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ दूरसंचार सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के बीच ही नहीं है, बल्कि मोबाइल फोन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों में भी है. इसी प्रतिस्पर्धा का परिणाम है कि विदेशी ब्रैंडों की कड़ी चुनौतियों के बीच भारतीय मोबाइल फोन निर्माता कंपनी लावा ने अपनी नई सीरीज के मोबाइल के लिए नई और अलग तरह की स्कीम लागू की है. इसे अनूठे मनीबैक चैलेंज औफर का नाम देते हुए कंपनी ने कहा कि उस के स्मार्टफोन को खरीदने के एक माह के भीतर ग्राहक फोन से असंतुष्ट होने पर फोन को लौटा कर पूरा पैसा वापस ले सकता है.

कंपनी ने यह स्कीम सितंबर में चीन में और अक्तूबर में भारत में लौंच की. बताया जा रहा है कि कंपनी को इस का अच्छा रिस्पौंस मिल रहा है और इस क्षेत्र की अन्य कंपनियां भी इसी तरह के लुभावने औफर लौंच करने की तैयारी कर रही हैं.

आधार कार्ड से होगी अरबों की बचत : नंदन नीलेकणि

आधार यानी विशिष्ट पहचान पत्र के लागू होने और विभिन्न सेवाओं को उस से जोड़े जाने से पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है. उस से फर्जी दस्तावेजों तथा एक ही तरह के दस्तावेजों से कई स्थानों पर लाभ लेने वालों पर लगाम लगी है. सरकार खुद मानती है कि उस का सब से बड़ा फायदा राशनकार्ड से गरीबों को मिलने वाले राशन के वितरण में हुआ है. राशनकार्डों के आधार से जुड़ने से करीब 15 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है. इस तरह के लाभ अन्य क्षेत्रों को भी हुए हैं.

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा है कि सरकार द्वारा सुविधाओं का फर्जी तौर पर लाभ उठाने वाले लोगों की आधार के जरिए पहचान होने और लाभार्थियों की सूची से उन्हें हटाने के कारण देश को करीब 585 अरब रुपए का फायदा हुआ है. उन्होंने दावा किया इस तरह से डिजिटल का प्रभावी इस्तेमाल कर के विकासशील देश विकास की लंबी छलांग लगा सकते हैं और फर्जी तंत्र को ध्वस्त किया जा सकता है.

देश में आधार को हर सेवा के लिए अनिवार्य बनाया जा रहा है और आधार कार्ड धारकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आधार कार्ड का सब से ज्यादा लाभ गरीबों को मिल रहा है. उन के हिस्से की सरकारी मदद को फर्जी तरीके से अर्जित करने वाले लोग आधार कार्ड के कारण लाइन से हट गए हैं.

तैंतीस हजार के पार हुआ सूचकांक

बैंकिंग क्षेत्र तथा ढांचागत विकास के लिए सरकार की घोषणाओं का बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई पर जबरदस्त असर रहा और शेयर सूचकांक अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े के आखिरी सप्ताह में 33,000 अंक के रिकौर्ड स्तर को पार कर गया. सप्ताह के अंतिम 4 सत्रों में बाजार हर दिन नए रिकौर्ड बनाता रहा और पूरे सप्ताह के दौरान सूचकांक ने 767 अंक की बढ़त हासिल की जो पिछले 9 माह में सर्वाधिक रही.

बैंकिंग, ढांचागत विकास तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के शेयरों में इस अवधि में सब से ज्यादा उत्साह देखने को मिला. विदेशी बाजारों में इस दौरान मजबूती रही. अमेरिका तथा उत्तर कोरिया के बीच तनाव की स्थिति के बावजूद शंघाई तथा दक्षिण कोरिया के बाजारों में तेजी रही. भारतीय रुपया भी इस दौरान डौलर के मुकाबले लगातार मजबूत स्थिति पर रहा.

नैशनल स्टौक एक्सचेंज में भी आलोच्य अवधि में जम कर लिवाली हुई और निफ्टी 10 हजार अंक के रिकौर्ड स्तर को पार कर गया. सरकार द्वारा बैंकों के लिए भारीभरकम राशि की मदद की घोषणा से बाजार में उछाल आया और सूचकांक ने इस ऐलान के अगले दिन 500 अंक की छलांग लगा दी.

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने विकास के लिए बैंकिंग सिस्टम की मजबूत स्थिति को जरूरी बताया और कहा कि बैंक जब खुद मजबूत स्थिति में होंगे तब ही वे आर्थिक विकास की गतिविधियों के लिए ऋण उपलब्ध करा सकेंगे

युवा पीढ़ी के पास धैर्य की कमी है : अमित मिश्रा

पिछले कुछ वर्षों में बौलीवुड में संगीत के क्षेत्र में कई नई प्रतिभाओं ने कदम रखा है और इन में से कई सफल भी हैं. कुछ प्रतिभाओं ने तो भाईभतीजावाद और गैरफिल्मी अथवा बाहरी होने का दंश झेलते हुए भी हिम्मत नहीं हारी. इन के पीछे इन की सोच रही है कि बौलीवुड में हर दिन हजारों प्रतिभाएं आती हैं, ऐसे में स्वाभाविक तौर पर हर किसी को संघर्ष करना पड़ता है. कुछ का संघर्ष रंग लाता है, तो कुछ का नहीं. ऐसा सिर्फ बौलीवुड ही नहीं, हर क्षेत्र में होता है. बौलीवुड में ग्लैमर है, इसलिए हौआ कुछ ज्यादा ही बना हुआ है. ऐसी सोच के साथ निरंतर कुछ नया करने की चाह रखने वाले संगीतकार हैं अमित मिश्रा.

पटना, बिहार में जन्मे, वाराणसी में पले और दिल्ली में फाइन आर्ट्स में गोल्ड मैडल हासिल करने वाले अमित मिश्रा बौलीवुड के चर्चित संगीतकार हैं. कई टीवी सीरियलों व फिल्मों को संगीत से संवारने वाले अमित के संगीत से जुड़ी फिल्म ‘गैस्ट इन लंदन’ इसी साल प्रदर्शित हुई है.

संगीत को ही कैरियर बनाने की बात पर अमित कहते हैं, ‘‘सच कहूं तो संगीत मुझे विरासत में मिला है. संगीत मेरी रगों में है. पर मैं पेंटर भी रहा हूं. दिल्ली विश्वविद्यालय से मैं फाइन आर्ट्स में गोल्ड मैडलिस्ट हूं. मेरी पैदाइश पटना, बिहार की है. पर मैं वाराणसी में रहा हूं. मेरे पिताजी शंभूनाथ मिश्रा पत्र सूचना कार्यालय में नौकरी करते थे. साहित्य व संगीत से उन का काफी लगाव था. मेरी दादी और मेरे परदादा वगैरा भी संगीत से जुड़े रहे हैं. मेरी दादी कमला देवी बिहार रेडियो व बिहार टीवी पर गाती थीं. वे मशहूर मैथिली गायक थीं.

‘‘क्लासिक व लोक संगीत हमारे खानदान में रहा है. हमें बचपन से यह सब मिला है. मेरे पिता शंभूनाथ मिश्रा, अब्दुल अलीम जाफर के शिष्य थे. उन्होंने संगीत पर किताब लिखी है. मेरे ससुर नेत्र सिंह रावत फिल्म आलोचक हैं. उन का भी कला व संगीत से जुड़े लोगों के संग मिलनाजुलना रहा है. इस का असर मुझ पर भी रहा. जब घर पर संगीत से जुड़े लोग बैठते थे, तो मैं दूर से इन सभी का श्रोता हुआ करता था. पहले तो शाम को बैठकें लगती थीं, विचारविमर्श होता रहता था. अब वह सब खत्म हो गया. संगीत, साहित्य व संस्कृति तो मेरे साथ बचपन से रहे हैं.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘बचपन से ही संगीत के वाद्ययंत्रों को बजाने की लालसा रही है. मैं ने क्लासिकल संगीत, पश्चिमी संगीत और गिटार की ट्रेनिंग भी ली. राजस्थान घराने के संगीतज्ञ के पी मिश्रा से मैं ने काफी ट्रेनिंग ली. दिल्ली स्कूल औफ म्यूजिक से मैं ने पश्चिमी संगीत व गिटार बजाना सीखा. इस के अलावा अपने परिवार से बहुतकुछ सीखा.’’

घर में संगीत के माहौल के बावजूद पेंटिंग, फाइन आर्ट्स का कोर्स करने के पीछे के कारण पर अमित बताते हैं, ‘‘मैं मानता था कि मुझे किताबी कीड़ा नहीं बनना है. पर औब्जर्वेशन करना मेरे गुरुओं ने मुझे सिखाया था. औब्जर्वेशन के ही चलते हम दूसरों को ही नहीं, अपनेआप को भी औब्जर्व करते हैं, अपनेआप से बात करते हैं. तब हमें पता चलता है कि मैं जो दिख रहा हूं, वह तो नहीं हूं. शुरू में संगीत मेरा प्रोफैशन नहीं था. मैं ने पेंटर के तौर पर अपना कैरियर शुरू किया था. साथ में, मैं संगीत के लाइव शो कर रहा था. अपने कुछ गानों की धुनें भी बनाईं.’’

संगीतकार के रूप में यात्रा कब और कैसे शुरू हुई, इस पर वे कहते हैं, ‘‘लगभग 8 वर्षों पहले जब मैं दिल्ली में रह रहा था तभी मुझे अश्विनी धीर के टीवी सीरियल ‘राम खेलावन सीएम ऐंड फैमिली’ में संगीत देने का औफर मिला था. मैं ने इस के शीर्षक गीत को संगीत से संवारा था. इसी के समानांतर मैं अपने लिए कुछ गीतों की धुन बना रहा था. कुछ लघु फिल्में कर रहा था. इस सीरियल में संगीत देने के बाद मुझे लगा कि एक राह खुल गई है. अश्विनी धीर ने मुझे सब से पहले फिल्म ‘अतिथि तुम कब आओगे’ में मौका दिया.’’

किसी भी फिल्म के गीतसंगीत तैयार करने की अपनी कार्यशैली को ले कर उन का कहना है, ‘‘सब से पहले निर्देशक के मुंह से सुनना पसंद करता हूं कि उन की सोच क्या है. उन्हें किस तरह का गीतसंगीत चाहिए. उस के बाद मैं पूरी फिल्म की पटकथा को सुनना पसंद करता हूं. मैं पेंटर भी रहा हूं, तो जब पटकथा वगैरा सुनता हूं, तो मुझे गीत की आवाज सुनाई देने के साथ विजुअल्स दिखने लग जाते हैं और उस सीन में पहुंच जाता हूं.’’

अमित प्राइवेट अलबम पर भी काम कर रहे हैं. प्राइवेट अलबम के बारे में वे बताते हैं, ‘‘जल्द ही कुछ अलबम्स आने वाले हैं. हम अपना एक बड़ा अलबम 15 अगस्त, 2018 के दिन ले कर आने वाले हैं. जिसे हम अपने सैनिकों, मदर, नेचर को समर्पित कर रहे हैं. हमारे देश की कुछ संस्कृति लोगों के बीच है, तो कुछ विचार खत्म होते जा रहे हैं. संस्कृति के प्रति इज्जत खत्म होती जा रही है. आज की पीढ़ी तमाम अच्छी चीजों से थोड़ी दूर हो गई है.

मैं अपने अलबम में उन्हीं चीजों को लाने की कोशिश कर रहा हूं. इस में फौक, शास्त्रीय संगीत, अच्छा साहित्य भी होगा. सिर्फ गाने नहीं होंगे, साहित्य को भी हम गा कर पेश करना चाहते हैं. हम इस के वीडियो भी बना रहे हैं. इस पर मैं, नवेंदु त्रिपाठी और अश्विनी शंकर मिल कर काम कर रहे हैं. अश्विनी शंकर शहनाई के अच्छे घराने से हैं. यह एक लंबी सीरीज है. हमारा मकसद इस से पैसा कमाना नहीं है. हम जिस पर यकीन करते हैं, उसे हम इस के माध्यम से सामने रखना चाहते हैं.’’

आखिर आज की युवापीढ़ी अपनी संस्कृति, अपने मूल्यों से दूर क्यों होती जा रही है? इस पर वे कहते हैं, ‘‘आज हमारी युवा पीढ़ी के पास फास्टफूड ज्यादा है. अब हमारे यहां हर चीज फास्टफूड हो गई है. युवा पीढ़ी के पास धैर्य नहीं है. आज युवाओं में सुनने की शक्ति नहीं है. युवा पीढ़ी के पास समय नहीं है.’’

इस फिल्म ने उड़ा दी है अनुष्का की नींद

अनुष्का शर्मा की तरफ से प्रचारित किया जा रहा है कि जब से वह आनंद एल राय की नई फिल्म की शूटिंग शाहरुख खान के साथ कर रही हैं, तब से उनकी नींद हराम हो गयी है. वास्तव में अनुष्का शर्मा की आदत है कि वह हर दिन सुबह साढ़े चार बजे सोकर उठ जाती हैं.

लेकिन इन दिनों वह आनंद एल राय की फिल्म के लिए दोपहर दो बजे से रात दो बजे तक शूटिंग कर रही हैं. घर पहुंचते पहुंचते रात यानी कि सुबह के साढ़े तीन बज जाते हैं. उसके बाद उन्हें नींद आती नहीं. इसलिए वह सोती नहीं हैं.

अनुष्का शर्मा का दावा है कि फिल्म में उनका किरदार इतना अमेजिंग है और शूटिंग में इतना मजा आ रहा है कि वह बिना सोए पिछले दस दिनों से लगातार शूटिंग कर रही हैं. बौलीवुड के सूत्र इसे उनका पब्लिसिटी हथकंडा बता रहे हैं.

बौलीवुड से जुड़े सूत्र दावा करते हैं कि यदि कलाकार की नींद पूरी न हो, वह बात कैमरा तुरंत पकड़ लेता है, जिसकी वजह से कलाकार के अभिनय में कमी साफ साफ परदे पर नजर आती है. तो क्या अनुष्का शर्मा अपने किरदार के साथ खिलवाड़ कर रही हैं?

अपराध, कानून और सजा : एक युवती के कातिलों को इस तरह मिली सजा

दुनिया के खूबसूरत माने जाने वाले केंद्रशासित आधुनिक शहर चंडीगढ़ के सैक्टर-22 में एक जानामाना रेस्टोरेंट है नुक्कड़ ढाबा. इस रेस्टोरेंट का खाना इतना लजीज है कि दूरदूर से लोग यहां खाना खाने आते हैं, जिस की वजह से वहां हमेशा ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है.

इसी रेस्टोरेंट के मालिक जोगिंदर सिंह की 20 साल की बेटी मनीषा सिंह सैक्टर-34 के एक इंस्टीट्यूट से आर्किटैक्चर का कोर्स कर रही थी. पढ़ने में वह ठीकठाक थी, इसलिए वह एक अच्छी आर्किटैक्ट बनना चाहती थी. 2 भाइयों की एकलौती बहन मनीषा काफी खूबसूरत थी. पिता जोगिंदर सिंह को अपनी इस एकलौती बेटी से लगाव तो था ही, साथ ही नाज भी था कि आगे चल कर वह खानदान का नाम रौशन करेगी.

लेकिन यह सोच कर उन का मन उदास भी हो जाता था कि बेटियां तो पराया धन होती हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद वह मनीषा की शादी कर देंगे तो वह उन्हें छोड़ कर अपनी ससुराल चली जाएगी.

खैर, रोज की तरह 18 अक्तूबर, 2014 की सुबह मनीषा इंस्टीट्यूट जाने के लिए घर से निकली. उस दिन शनिवार था, इसलिए दोपहर तक उसे घर वापस आ जाना था. लेकिन वह शाम तक भी नहीं लौटी तो घर में सभी को उस की चिंता हुई. चिंता की वजह यह थी कि उस का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ बता रहा था.

जोगिंदर सिंह ने तुरंत इस बात की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को देने के साथ गुमशुदगी एवं किडनैपिंग की आशंका संबंधी एक लिखित शिकायत सैक्टर-22 की पुलिस चौकी जा कर दे दी. यह चौकी सैक्टर-17 स्थित थाना सैंट्रल के अंतर्गत आती थी, इसलिए थाना सैंट्रल में इस की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई.

पुलिस रात भर मनीषा की तलाश करती रही. जब सफलता नहीं मिली तो पुलिस ने अगले दिन उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर खंगाली. इस से पता चला कि वह शनिवार को सुबह से ही रजत के संपर्क में थी. 21 वर्षीय रजत बेनीवाल चंडीगढ़ के सैक्टर-51ए में रहता था और पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग कालेज में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र था.

संदेह के आधार पर पुलिस ने रजत को हिरासत में ले कर औपचारिक पूछताछ तो की ही, उस के मोबाइल फोन की लोकेशन भी निकलवाई. इस से पता चला कि उस के और मनीषा के मोबाइल फोन की लोकेशन एक साथ थी.

इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने रजत को विधिवत गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की. पहले तो वह पुलिस को बहकाने की कोशिश करता रहा, लेकिन 2 घंटे की सघन पूछताछ में आखिर उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि मनीषा ने किसी नशीले पदार्थ का सेवन कर लिया था, जिस से उस की मौत हो गई थी. डर की वजह से उस ने उस की लाश को चंडीगढ़ से 40 किलोमीटर दूर ले जा कर राजपुरा रोड के एक गंदे नाले में फेंक दिया था.

पुलिस को रजत के इस बयान में पूरी तरह से सच्चाई नजर नहीं आ रही थी. इस के बावजूद डीएसपी सैंट्रल डा. गुरइकबाल सिंह सिद्धू के नेतृत्व में सैंट्रल थाना के कार्यकारी थानाप्रभारी इंसपेक्टर जसबीर सिंह और सैक्टर-22 चौकीप्रभारी देशराज सिंह के अलावा एक विशेष टीम रजत को ले कर राजपुरा रोड पर कस्बे बनूड़ से होते हुए शंभु बैरियर के समीप स्थित गांव टेपला पहुंची, जहां वह बदबूदार गंदा नाला था.

crime story

रजत की निशानदेही पर आधे घंटे की कोशिश के बाद गंदे नाले के पास से मनीषा की लाश बरामद की ली गई. लाश पूरी तरह से कीचड़ से सनी थी. पुलिस ने मनीषा के घर वालों को फोन कर के वहीं बुला कर लाश की शिनाख्त करा ली. शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए चंडीगढ़ के सैक्टर-16 स्थित जनरल अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया.

पुलिस का मानना था कि रजत ने मनीषा की मौत की जो वजह बताई थी, वह सही नहीं हो सकती. इस मामले में अकेला रजत ही नहीं शामिल था, बल्कि कुछ अन्य लोग भी उस के साथ थे. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि मनीषा की मौत का रहस्य काफी गहरा है.

चंडीगढ़ लौट कर रात में एक बार फिर रजत से गहन पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने चौंकाने वाला जो खुलासा किया, उस के अनुसार, इस वारदात में उस के अलावा 2 अन्य लोग शामिल थे. वे थे— चंडीगढ़ के सैक्टर-56 का रहने वाला कमल सिंह और मोहाली के फेज-10 का रहने वाला दिलप्रीत सिंह. 29 साल का कमल सिंह एक रेस्तरां का मालिक होने के साथसाथ शादीशुदा ही नहीं, एक बच्चे का बाप भी था. 22 साल का दिलप्रीत सिंह इंटीरियर डिजाइनिंग का डिप्लोमा कर रहा था.

पुलिस ने उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया था. दोनों से हुई पूछताछ में पता चला कि दिलप्रीत मृतका मनीषा का बौयफ्रैंड था. उसी ने उस की जानपहचान अपने दोस्तों रजत और कमल से कराई थी. पुलिस को दिए अपने बयानों में उन्होंने बताया था कि 18 अक्तूबर, 2014 को चारों एक पार्टी में गए थे, जहां सब ने ड्रग्स लिया और शराब भी पी.

सभी आ कर गाड़ी में बैठे थे, तभी अचानक मनीषा की मौत हो गई. इस के बाद वे उस की लाश को ले कर पहले पल्सौरा गांव गए. वहां उन्हें लाश को ठिकाने लगाने का मौका नहीं मिला तो वे लाश को ले कर राजपुरा रोड पर स्थित गंदे नाले पर पहुंचे और वहीं लाश को एक कपड़े में लपेट कर फेंक दिया.

20 अक्तूबर, 2014 को तीनों अभियुक्तों को जिला अदालत में पेश कर के एक दिन के कस्टडी रिमांड पर लिया गया. उसी दिन सैक्टर-16 के जीएमएसएच अस्पताल में मनीषा की लाश का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम के बाद लाश घर वालों के हवाले कर दी गई. लाश पर चोट का कोई निशान नहीं था. उस समय मौत की वजह भी स्पष्ट नहीं हो सकी थी. सीएफएसएल जांच के लिए मृतका के शरीर के कुछ हिस्सों केअलावा विसरा सुरक्षित कर लिया गया था.

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21 अक्तूबर को सैक्टर-25 के श्मशानगृह में मनीषा के घर वालों ने उस का दाहसंस्कार कर दिया. उस समय वहां कुछ पत्रकार भी मौजूद थे, जिन से मनीषा के घर वालों ने कहा था कि पुलिस वाले कुछ भी कहें, पर साफ है कि मनीषा की हत्या की गई है, वह भी रंजिशन एवं योजनाबद्ध तरीके से.

क्योंकि मनीषा किसी भी तरह का नशा नहीं करती थी. वह इस तरह के लड़कों के साथ कहीं जाती भी नहीं थी. कमल ने योजनाबद्ध तरीके से उन से बदला लेने के लिए मनीषा की हत्या की थी. क्योंकि एक साल पहले वह उन के ढाबे पर खाना खाने आया था.

तब उस ने बिल न अदा करते हुए उन के ढाबे पर काम करने वाले एक लड़के के साथ मारपीट की थी. उस के बाद उन लोगों ने भी उसे उस की बदतमीजी का थोड़ा सबक सिखाया था. उस ने उस समय काफी बेइज्जती महसूस की थी. अपनी उसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए उस ने योजना बना कर दिलप्रीत, जो मनीषा के इंस्टीट्यूट में पढ़ता था, के जरिए मनीषा का अपहरण कर योजनाबद्ध तरीके से उस की हत्या कर दी थी.

दूसरी ओर पुलिस ने जो जांच की थी, उस के अनुसार, रजत, कमल और दिलप्रीत ड्रग्स के आदी थे. मोबाइल पर संदेश भेज कर किसी जिंदर नामक शख्स से उन्होंने ड्रग्स मंगवाया था. जिंदर के बारे में इन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी. हां, पूछताछ में यह जरूर पता चला है कि अभियुक्त कमल पर थाना सैक्टर-39 में हत्या का एक मुकदमा दर्ज था, जो अदालत में विचाराधीन है.

अभियुक्तों का कहना था कि मनीषा भी कभीकभी ड्रग्स लेती थी. उस दिन भी उन चारों ने नशे के लिए एक साथ ड्रग्स लिया था. तभी ओवरडोज की वजह से मनीषा की मौत हो गई थी. उस के बाद डर की वजह से उन्होंने उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए गंदे नाले में फेंक दिया था.

पुलिस की इस कहानी से मनीषा के घर वाले कतई सहमत नहीं थे. उन्होंने पत्रकारों के माध्यम से पुलिस के सामने सवाल खड़े किए थे कि क्या पुलिस ने इस बात की जांच की है कि जिसे ड्रग्स की ओवरडोज से मौत माना जा रहा है, कहीं वह ड्रग्स दे कर हत्या करने का मामला तो नहीं है?

नशेबाजों ने उस की 2 लाख रुपए की ज्वैलरी हथियाने के लिए तो उस की हत्या नहीं की, जो उस ने उस दिन पहन रखी थी? योजना बना कर मनीषा का अपहरण तो नहीं किया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रभावी परिवारों के लड़कों के पकड़े जाने से पूरी कहानी बदल दी गई हो?

चंडीगढ़ में आम चर्चा थी कि वहां ड्रग पैडलर्स का पूरा रैकेट सक्रिय है. ड्रग्स ओवरडोज मामलों में पहले भी वहां कुछ मौतें हो चुकी थीं. कहीं ऐसा तो नहीं कि मनीषा को उस रैकेट की जानकारी हो गई थी और इसी वजह से उसे मौत की नींद सुला दिया गया हो? लगातार हो रही इस तरह की मौतों के बाद भी पुलिस नशे के सौदागरों की धरपकड़ कर उन के खिलाफ सख्त काररवाई क्यों नहीं कर रही?

चंडीगढ़ में एक प्रतिष्ठित संस्था है फौसवेक (फेडरेशन औफ सेक्टर वेलफेयर एसोसिएशंज). इस संस्था के सदस्यों ने साफ कहा था कि वे नशे से जुड़े लोगों को पकड़ कर पुलिस के पास ले जाते हैं और पुलिस वाले अकसर उन्हें चेतावनी दे कर छोड़ देते हैं.

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मनीषा के मामले को ले कर शहर में प्रदर्शन होते रहे, कैंडल मार्च निकाले जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने अपने ढंग से काररवाई करते हुए मनीषा की मौत के ठीक 81 दिनों बाद 8 जनवरी, 2015 को रजत, कमल और दिलप्रीत के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर के अदालत में पेश कर दिया. यह चार्जशीट नशे की अहम धाराओं के तहत दाखिल की गई थी.

लेकिन अदालती काररवाई अपने ढंग से चली. मामले की गहराई में जाने का प्रयास करते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों के खिलाफ 4 फरवरी, 2015 को गैरइरादतन हत्या, सबूतों से छेड़छाड़ और किडनैपिंग की धाराओं के आरोप तय कर दिए. सुनवाई की अगली तारीख 24 फरवरी तय की गई.

उस दिन चंडीगढ़ की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत में केस की विधिवत सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के पहले दिन मृतका के भाई 25 वर्षीय ऋषभ सिंह ने अपना बयान दर्ज कराया कि घटना वाले दिन सुबह कार से उस की बहन को लिवाने दिलप्रीत आया था. घर के बाहर मनीषा ने कुछ देर उस से बातचीत की और फिर वह इंस्टीट्यूट जाने की बात कह कर गाड़ी में बैठ गई. कार में पहले से ही 2 अन्य लोग मौजूद थे.

इस के बाद अदालत में मौजूद तीनों अभियुक्तों की उस ने पहचान भी की. इस के बाद केस की तारीख पड़ी 12 मार्च, 2015 को. उस दिन आरोपी दिलप्रीत के वकील तरमिंदर सिंह ने अदालत में अरजी दायर कर के मनीषा के फोन की जांच कराने की मांग की, जो स्वीकार कर ली गई.

लेकिन अगले दिन जब मनीषा का मोबाइल फोन कोर्ट में पेश किया गया तो उस का लौक नहीं खोला जा सका. इस पर मुकदमा 20 मार्च तक के लिए टल गया. कोर्ट ने सीएफएसएल को मोबाइल फोन भेज कर उस की जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा.

20 मार्च को यह रिपोर्ट पेश नहीं हो सकी तो अगली तारीख 31 मार्च की पड़ी. उस दिन केस के जांच अधिकारी ने सीएफएसएल की ओर से 5 सीडीज में दिया गया मोबाइल का डाटा कोर्ट को सौंपा. इस के बाद लगातार कई पेशियों तक अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने के अलावा उन का क्रौस एग्जामिनेशन हुआ.

6 जून, 2015 को सीएफएसएल ने मनीषा की जनरल विसरा रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी, जिस में बताया गया था कि मौत से पहले उस के साथ रेप और अननैचुरल सैक्स किया गया था. वहीं विसरा से एक आरोपी का सीमन भी बरामद कर प्रिजर्व किया गया था. अब आगे तीनों आरोपियों से इस का मिलान कराया जाना था. इस के अलावा सीएफएसएल ने मनीषा के जिस्म के कुछ हिस्सों की गहन जांच के आधार पर अपनी एक विशेष रिपोर्ट भी तैयार की थी.

इस रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस की आरोपियों से मिलीभगत अथवा पूछताछ में की गई ढील अब पूरी तरह से सामने आ गई थी. इन तमाम मुद्दों पर बहस होने के बाद 24 जुलाई, 2015 को मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने इस केस में सामूहिक दुराचार और आपराधिक दुराचार के अलावा आपराधिक साजिश रचने की धाराएं क्रमश: 376डी, 377 एवं 120बी जोड़ने की अपील अदालत से की. तीनों आरोपियों का डीएनए सैंपल लेने की भी बात कही गई.

इस विशेष रिपोर्ट में मनीषा की मौत का कारण इंट्राक्रैनियल हैमरेज बताया गया था. सेरोलौजिकल जांच में उस के गुप्तांगों में वीर्य मिला था. विसरा जांच के रासायनिक विश्लेषण में मनीषा के शरीर में 85.57 प्रतिशत इथाइल अल्कोहल की मात्रा पाई गई थी. वहीं नार्पसेयूडोफिड्राइन नामक साइकोट्रोपिक सब्सटांस (नशीला पदार्थ) के मौजूद होने की बात भी कही गई थी. इस सब के अलावा हिस्टोपैथोलौजी रिपोर्ट में ब्रौंकोन्यूमोनिया एवं माइक्रोवेसिकुलर स्टीटोसिस मिलने की बात भी पता चली थी.

सरकारी वकील ने जो नई धाराएं इस केस में जोड़ने की दरख्वास्त अदालत से की थी, उस का विरोध करते हुए बचाव पक्ष के वकील इंदरजीत बस्सी ने अदालत से कहा कि धाराओं में संशोधन अथवा बढ़ोत्तरी की अरजी मान्य नहीं है. केस की जांच करने वालों ने अपनी जांच पूरी कर के चार्जशीट दायर की है और इस समय केस गवाहियों की स्टेज पर है.

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अपने इस विरोध के संबंध में बचावपक्ष के वकील ने अपने ये नुक्ते अदालत के सामने रखे थे—

मृतका के साथ यौन प्रताड़ना के मुद्दे पर किसी भी गवाह ने अभी तक अपना बयान दर्ज नहीं कराया है. अभियोजन पक्ष की कहानी के हिसाब से कहीं भी इस का जिक्र नहीं किया गया कि आरोपियों के पीडि़ता के साथ यौनसंबंध बने थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतका खुद आरोपियों के साथ गई थी, जिस में कहीं भी जबरदस्ती का कोई आरोप नहीं लगाया गया है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के जिस्म पर कहीं भी चोट के निशान नहीं थे, जिस से उस के साथ जबरदस्ती की बात साबित नहीं होती. सीएफएसएल रिपोर्ट और चार्जशीट में इस बात का जिक्र नहीं है कि यौनसंबंध कब और किस समय बने थे? डीएनए प्रोफाइल के तहत अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के ब्लड सैंपल लेने के लिए अरजी दायर की है, ताकि वीर्य से इस का मिलान किया जा सके. ऐसे में यह प्रतीत होता है कि अभियोजन पक्ष खुद इस बात को ले कर संशय में है कि यह वीर्य किस का है?

यह बहस भी कुछ दिनों तक चलती रही. 29 जुलाई को विद्वान जज अंशु शुक्ला ने इस मुद्दे पर और्डर पास किया कि दुराचार और कुकर्म की अतिरिक्त धाराएं जोड़ने पर फैसला अभियुक्तों की ब्लड सैंपल रिपोर्ट और डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के आने के बाद होगा. इस के लिए तारीख दी गई 29 अक्तूबर, 2015. लेकिन उस दिन रिपोर्ट न आने की वजह से सुनवाई टल गई.

बाद में रिपोर्ट आई तो नई धाराएं जोड़ कर अदालत की काररवाई फिर से शुरू हुई. देखतेदेखते एक साल से अधिक का समय गुजर गया. 31 जनवरी, 2017 को अदालत ने अपनी काररवाई मुकम्मल कर के इस केस के तीनों अभियुक्तों को दोषी करार दे कर सजा सुनाने की तारीख 4 फरवरी, 2017 तय कर दी.

इस तरह सक्षम एडीजे अंशु शुक्ला ने केस से जुड़े 17 गवाहों के बयान एवं साक्ष्यों के आधार पर अपने 160 पृष्ठों के फैसले में 4 फरवरी, 2017 को मनीषा सिंह केस के तीनों अभियुक्तों रजत बेनीवाल, कमल सिंह और दिलप्रीत सिंह को सामूहिक दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौनसंबंध, गैरइरादतन हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में 20-20 साल की कैद के अलावा तीनों को 5 लाख 22 हजार रुपए प्रति दोषी जुरमाने की सजा सुनाई. अदालत के इस फैसले के खिलाफ दोषियों ने समयावधि के भीतर हाईकोर्ट में अपील की है, जो विचाराधीन है.

बहरहाल, मनीषा के पिता द्वारा जारी किया गया यह संदेश काबिलेगौर है कि अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए मातापिता कोशिश तो करें, लेकिन बच्चे किसी के बहकावे में न आ सकें, इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है. अगर उन की आदतों या व्यवहार में जरा भी बदलाव नजर आए तो बच्चों को एक दोस्त की तरह समझा कर किसी के बहकावे में आने से रोकें. आप का बच्चा कितना भी सही क्यों न हो, उसे बहकाने वाले तब तक उस का पीछा नहीं छोड़ते, जब तक वह उन के जाल में फंस नहीं जाता.

13 विंटर ब्यूटी टिप्स : सुंदरता बरकरार रखने में ये नुसखे बेहद काम आएंगे

सर्दी के मौसम में जब आप की त्वचा रूखी व बाल बेजान से होने लगते हैं, तो चाहे आप कितने भी महंगे व मौडर्न आउटफिट्स क्यों न पहन लें, न देखने वाले अट्रैक्ट हो पाते हैं और न ही आप खुद को आईने में देख कर अच्छा फील करती हैं. ऐसे में ये विंटर ब्यूटी टिप्स आप के लिए बड़े काम के सिद्ध होंगे:

स्किन को करें मौइश्चराइज : सर्दियों में त्वचा की नमी बरकरार रखने के लिए वाटर बेस्ड मौइश्चराइजर की जगह औयल बेस्ड मौइश्चराइजर का प्रयोग करें. इस से त्वचा की नमी बनी रहती है, जो सौफ्ट टच देती है. लेकिन ध्यान रखें कि अपनी स्किन टाइप को ध्यान में रख कर ही प्रोडक्ट खरीदें, क्योंकि प्रोडक्ट सही होगा तभी परिणाम भी बेहतर मिलेगा. दिन भर सौफ्ट टच के लिए 2-3 बार त्वचा पर मौइश्चराइजर अप्लाई कर सकती हैं.

न भूलें सनस्क्रीन लगाना: अकसर महिलाओं की सोच होती है कि सिर्फ  गरमी के मौसम में ही तेज धूप त्वचा पर हानिकारक प्रभाव डालती है. मगर ऐसा नहीं है, क्योंकि सर्दियों में भी हम ज्यादा धूप के संपर्क में आते हैं जिस से स्किन टैन होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि जब भी बाहर जाएं सनस्क्रीन लगाना न भूलें. इस से स्किन की प्रौपर केयर हो पाएगी.

खूब पानी पीएं: भले ही सर्दियों में आप को कम प्यास लगे, फिर भी 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं वरना पानी की कमी होने के कारण आप बीमारियों की गिरफ्त में तो आएंगी ही, त्वचा भी रूखी होने के साथसाथ चेहरे की चमक  भी फीकी पड़ जाएगी.

स्क्रबिंग जरूरी: स्क्रबिंग हर मौसम के लिए जरूरी है, क्योंकि इस से स्किन की ऊपरी परत से डैड सैल्स और ब्लैकहैड्स रिमूव होते हैं, जिस से स्किन साफसुथरी लगती है. लेकिन ध्यान रखें कि सर्दियों में हफ्ते में सिर्फ 1 बार ही स्क्रबिंग करें वरना ड्राईनैस की समस्या हो सकती है.

टोनिंग से लाएं स्किन में चमक: स्किन की टोनिंग बहुत जरूरी है, क्योंकि हमारा संपर्क रोजाना धूलमिट्टी से होता है. ऐसे में स्किन पर जमी धूलमिट्टी को हटाना बहुत जरूरी है. यह न सिर्फ स्किन पर ग्लो लाने का काम करती है, बल्कि स्किन को मौइश्चर भी प्रदान करती है, जिस से स्किन चमकतीदमकती दिखती है.

फेसपैक कारगर: घर पर अनेक ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें चेहरे पर अप्लाई कर उस की अतिरिक्त देखभाल कर सकती हैं जैसे थोड़े से मसले हुए केले से फेस की 10 मिनट तक अच्छी तरह मसाज करें और फिर उसे साफ पानी से धो लें. उस के बाद शहद से अच्छी तरह चेहरे की मसाज कर के उसे साफ कर लें.

इसी तरह मलाई में चुटकी भर हलदी मिला कर फेस पर 10 मिनट तक लगाए रखने के बाद चेहरे को कुनकुने पानी से धो लें. ऐलोवेरा में स्किन को मौइश्चराइज करने के गुण होते हैं. अत: इस से चेहरे की मसाज करें. चेहरा चमक उठेगा.

हाथपैरों को दें ऐक्स्ट्र्रा केयर: सर्दियों में सिर्फ फेस को ही नहीं, बल्कि हाथपैरों को भी ऐक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है. अत: बादाम या जोजोबा औयल से हाथपैरों की मसाज करें. इस से उन में सौफ्टनैस आएगी वरना फटी एडि़यां आप का कौन्फिडैंस लूज करेंगी.

बचें गरम पानी से: चाहे कितनी भी ठंड हो ज्यादा गरम पानी से न नहाएं, क्योंकि इस से त्वचा का मौइश्चर खत्म होने के कारण वह बेजान हो जाती है. कुनकुने पानी से ही नहाएं और नहाने के तुरंत बाद बौडी पर मौइश्चराइजर अप्लाई करें, इस से स्किन में नमी बनी रहती है.

हेयर केयर भी है जरूरी: फ्रिजी व डल हेयर्स से बचने के लिए उन पर गरम पानी भूल कर भी न डालें. साथ ही सर्दियों में डैंड्रफ की समस्या का भी ज्यादा सामना करना पड़ता है. इसलिए  नियमित कोकोनट औयल से बालों की मसाज करें. हफ्ते में 1 बार औयल में नीबू की कुछ बूंदें मिला कर मसाज करें. नियमित ट्रिमिंग कराना भी न भूलें.

लिप्स को बनाएं मुलायम: अगर आप चाहती हैं कि सर्दियों में भी हर कोई आप के होंठों की तारीफ करे, तो उन्हें मौइश्चराइज करने वाला ग्लौस, लिपबाम लगाएं. ये न केवल होेंठों को शाइनी लुक देंगे, बल्कि इन से होंठ इतने सौफ्ट लगेंगे कि हर कोई वाउ कह उठेगा. ग्लौस वाली लिपस्टिक ही यूज करें.

आंखों के नीचे की ड्राईनैस करें दूर: सर्दियों में ज्यादा ड्राईनैस आने के कारण आंखों के नीचे पपड़ी बनने लगती है, जो न दिखने में अच्छी लगती है और साथ ही टच करने पर दर्द भी होता है. ऐसे में औयली क्रीम लगाएं. इस से ड्राईनैस कम होगी.

कैसी हो डाइट: सर्दियों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स लेने की जरूरत होती है. ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं. खट्टेमीठे फल जैसे संतरा वगैरह खाएं. इन से बौडी को ऐनर्जी मिलती है और वह बीमारियों से लड़ने में सक्षम होती है. जंक फूड से दूर रहें.

वार्डरोब भी हो परफैक्ट: अगर स्पेस है तो आप विंटरवियर के लिए अलग से वार्डरोब रख सकती हैं, जिस में वूलन स्टोल, स्वैटर, लैदर जैकेट्स, श्रग, कोट, वूलन कुरती, लैगिंग्स रख कर खुद की स्मार्टनैस को और बढ़ा सकती हैं. विंटर बूट्स के लिए भी अलग से शू रैक रख सकती हैं.

वर्क फ्रौम होम के फायदे और नुकसान हम से जानिए

वर्क फ्रौम होम यानी घर बैठे नौकरी करें. जी हां, कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें घर बैठे किया जा सकता है. आप दुनिया में कहीं भी हों, इंटरनैट और वाईफाई की सहायता से इन कामों को बखूबी कर सकती हैं. इस से काम देने वाले और काम करने वाले दोनों को लाभ है. खासकर ऐसी मांएं या पिता अथवा दोनों के लिए जो अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं. पहले यह सुविधा पश्चिमी विकसित देशों तक ही सीमित थी. मगर अब हमारे देश में इंटरनैट और वाईफाई के विस्तार के कारण वर्क फ्रौम होम यहां भी संभव है.

कौन से काम घर बैठे संभव

सूचना प्राद्योगिकी से संबंधित कार्य घर से इंटरनैट और वाईफाई से किया जा सकता है. मसलन:

वर्चुअल असिस्टैंट: वर्चुअल असिस्टैंट की अपनी कंपनी घर से चला सकते हैं या किसी ऐसी कंपनी के लिए जो आप को दूसरी कंपनी के लिए या क्लाइंट के लिए काम दे. छोटे बिजनैस वाले जो स्थाई कर्मचारी रखने में असमर्थ हैं, उन्हें ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है, जो उन के लिए घर से काम कर सकें.

मैडिकल ट्रांस्क्रिप्ट: डाक्टरों की बातें सुन कर उन के निर्देश, उपचार और दवाओं से संबंधित बातें कंप्यूटर पर टाइप करना होता है. डाक्टर दूसरे देश के भी हो सकते हैं. उन का उच्चारण ठीक से समझना पड़ता है.

अनुवादक: अगर आप एक से अधिक बहुप्रचलित अंतर्राष्ट्रीय भाषा जानते हैं, तो दुनिया में ऐसी काफी कंपनियां हैं जो अपने देश में बैठे अपनी औडियो फाइल्स या डौक्यूमैंट्स किसी अन्य भाषा में अनुवाद कराना चाहती हैं.

वैब डिजाइनर: सूचना प्राद्योगिकी के क्षेत्र में सब से ज्यादा वर्क फ्रौम होम के अवसर प्राप्त हैं. इस क्षेत्र में वर्चुअल असिस्टैंट, वेब डैवलपर या डिजाइनर, नए कस्टम वैब डिजाइन या उन की वैब में बदलाव, सुधार या अपडेटिंग की जरूरत पड़ती रहती है.

कौल सैंटर प्रतिनिधि: इस में भी काफी अवसर हैं. जब कभी हम किसी बड़ी कंपनी पर कोई सामान या सेवा का और्डर दे रहे हों तब दूसरी ओर से हमारी बात सुनने वाला कोई बड़े काल सैंटर में न हो कर उन का कोई प्रतिनिधि हो सकता है, जो घर से ही काम करता हो.

सहायक तकनीकी विशेषज्ञ: काल सैंटर को अपने कंप्यूटर व अन्य उपकरणों के रखरखाव या उन की मरम्मत अथवा आधुनिकीकरण के लिए समयसमय पर तकनीकी मदद की जरूरत होती है. इसे कभी तो घर बैठे ही सुलझा सकते हैं तो कभी औन साइट जाना होता है. अगर आप कंप्यूटर, इंटरनैट, मौडेम, वाईफाई आदि के जानकार हैं तो यह काम आप कर सकते हैं.

ट्रेवल एजेंट: अगर आप को इस बिजनैस की जानकारी हो तो आप चाहें तो घर से यह काम कर सकते हैं.

शिक्षण का कार्य: स्कूल और कालेज में ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिन्हें कोच या ट्यूटर की आवश्यकता होती है. आजकल तो डिस्टैंस ऐजुकेशन या कौरस्पौंडेंस कोर्स का काफी चलन हो रहा है, जिस के चलते इस क्षेत्र में भी वर्क फ्रौम होम के पर्याप्त अवसर हैं.

लेखक या संपादक: लिखने, संपादन या प्रूफरीडिंग की काम खासकर वैब के लिए घर से कर सकते हैं. अगर लिखने की जानकारी नहीं भी हो तो ब्लौगस्फेयर जौइन कर सकते हैं. इस में मजा भी है और पैसा भी. दूसरों की ब्लौगसाइट पर लिख कर भी कमाया जा सकता है.

फ्रैंचाइजी: अगर बिजनैस की कुछ बुनियादी जानकारी हो और कुछ पूंजी लगा सकते हों तो किसी कंपनी या शिक्षण संस्था की फ्रैंचाइजी ले कर घर से यह काम कर सकते हैं.

शतरंज का कोच: अगर चेस जानते हैं तो कंप्यूटर और इंटरनैट पर स्काइप से घर बैठे बच्चों को चेस सिखा सकते हैं. विदेशों में बसे अनेक भारतीय बच्चे चेस की कोचिंग लेना चाहते हैं. इस के लिए प्रति घंटे अच्छी रकम मिलती है.

वर्क फ्रौम होम के लाभ

आप बच्चों और परिवार को अधिक समय दे सकते हैं, विशेषकर अगर बच्चे छोटे हों तो यह ज्यादा लाभकारी है.

यह अवकाशप्राप्त व्यक्तियों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत है.

ऐसी औरतें जिन के पति का तबादला होता रहता हो, उन के लिए वर्क फ्रौम होम अच्छा विकल्प है.

विकलांग भी अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार घर से काम कर सकते हैं.

आप को सुबहसुबह उठ कर तैयार हो निश्चित समय पर ट्रेन या बस से या खुद ड्राइव कर दफ्तर नहीं जाना है. महिलाओं को वर्क फ्रौम होम और ज्यादा फायदेमंद है. उन्हें रोज मेकअप करने की आवश्यकता होगी. वार्डरोब में कम कपड़े होने से भी काम चलेगा.

आप अपने काम से ब्रेक ले कर घर के अन्य काम भी कर सकते हैं.

अगर आप स्वयं अनुशासित हैं और परिवार के अन्य सदस्य आप के काम की महत्ता समझते हैं, तो आप यह कर सकते हैं.

आप अपने घर का खाना खाते हैं. बाहर काम करने से अकसर कैंटीन या रैस्टोरैंट्स में खाना पड़ता है, जिस पर खर्च होता है. वर्क फ्रौम होम करने पर पैसे की बचत के साथसाथ घर का स्वास्थ्यप्रद खाना भी मिलता है.

औफिस रैंट और कर्मचारियों पर होने वाले व अन्य खर्च बिजली, एयर कंडीशनर, वाहन भत्ता, दुर्घटना बीमा आदि की बचत होती है.

घर से काम करने वाले उपकरणों पर होने वाले खर्च पर आय कर से छूट ले सकते हैं.

मौसम की मार नहीं झेलनी पड़ती है. बरसात, गरमी या जाड़े का सामना नहीं करना पड़ता है.

वर्क फ्रौम होम से नुकसान

मगर वर्क फ्रौम होम से कुछ नुकसान भी हैं:

आप दूसरों के साथ पर्याप्त और सीधे संवाद से वंचित होते हैं.

टीवी, किचन, महरी आदि आप का ध्यान काम से हटा सकते हैं.

आप के व्यावसयिक व्यवहार और स्किल का समुचित रूप से विकास नहीं होता है.

अगर आप वर्क फ्रौम होम में अनुशासित रह कर काम नहीं करते हैं तब ज्यादा आरामतलबी हो सकते हैं.

दफ्तर में काम करने से वहां के कंप्यूटर आदि में खराबी आने पर तुरंत सपोर्ट मिल जाती है. कंपीटिशन की भावना की कमी होती है. किसी भी बिजनैस में बेहतर प्रदर्शन के लिए कंपीटिशन अच्छा है.

कभीकभी बौस यह भी समझ सकता है कि आप से घर पर किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है. अत: आप को अनचाहे समय में भी बौस के निर्देश लेने होते हैं. अकेलेपन का एहसास होता है. औफिस में काम करते समय सहकर्मियों से कुछ व्यक्तिगत बातें होती रहती हैं पर वर्क फ्रौम होम में यह संभव नहीं.

आप अपने स्टाइल से काम करते जाते हैं. आप को अपने सीनियर्स से कुछ सीखने का अवसर नहीं प्राप्त होता.

सोने की मोहरों से भरे घड़े : इन बाबाओं से आप भी बचकर रहिये

कमरे का वातावरण रहस्यमय था. लाल रंग का मद्धिम रोशनी वाला बल्ब टिमटिमा रहा था. कमरे के एक कोने में बिछी काली दरी पर एक बाबाजी बैठे थे. उन की उम्र 35 से 40 साल के बीच रही होगी. वह साधुसंन्यासियों या तांत्रिकों जैसे कपड़े पहनने के बजाय पैंटशर्ट पहने था. सिर पर गुलाबी रंग की पगड़ी बांधे उस बाबा के सामने 30-32 साल का एक युवक बैठा था. उस के पीछे 2 अन्य लोग भी बैठे थे. उन की उम्र 55-60 साल रही होगी. सामने गद्दी पर बैठे बाबा ने थोड़ी सख्त आवाज में पूछा, ‘‘आप लोग घर के आंगन की मिट्टी लाए हैं?’’

बाबाजी के सामने बैठे युवक ने झट से अपने हाथ में थामी कपड़े की छोटी सी पोटली बाबा की ओर बढ़ा दी. उस में शायद मिट्टी थी. बाबा ने पोटली से चुटकी भर मिट्टी निकाल कर अपनी हथेली पर रख कर उसे सूंघा. उस के बाद हैरानी से आंखें फाड़ कर सामने बैठे युवक को घूरते हुए कहा, ‘‘हूं…मैं ने पहले ही कहा था कि जरूर कोई बला है. अब पता चला कि वह बला नहीं, बल्कि शेषनाग बैठा है धन पर कुंडली मारे.’’

‘‘शेषनाग…धन…कुंडली..? हम कुछ समझे नहीं बाबाजी.’’ सामने बैठे युवक ने ही नहीं, उस के पीछे बैठै दोनों लोगों ने हैरानी से कहा.

‘‘अरे भाई, तुम लोग तो बड़े भाग्यशाली हो, तुम्हारे घर के अंदर बहुत बड़ा खजाना दबा है.’’ बाबा ने उन्हें समझाते हुए कहा.

‘‘यह आप क्या कह रहे हैं बाजाजी, हम कुछ समझ नहीं पाए? हमारे घर की समस्याएं, परेशानियां..?’’

‘‘सब इसी खजाने की वजह से है.’’ बाबा ने उन की बात बीच में ही काटते हुए कहा, ‘‘वह खजाना इन समस्याओं के माध्यम से बारबार चेतावनी दे रहा है कि मुझे बाहर निकालो. लेकिन बात तुम लोगों की समझ में नहीं आ रही है. खैर, कोई बात नहीं, अब तुम मेरे पास आ गए हो तो समझ लो कि तुम्हारे भाग्य खुल गए.’’

‘‘लेकिन बाबाजी, हमें क्या पता कि हमारे घर में खजाना कहां गड़ा है?’’ युवक ने कहा.

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‘‘यह काम तुम्हारा नहीं है. कहीं खजाने के चक्कर में अपने घर को मत खोद डालना. गड़ा धन ऐसे नहीं मिल जाता. उस के लिए बड़ी पूजा करनी पड़ती है. तरहतरह के उपाय और साधना करनी पड़ती है. इस के लिए काफी रुपए खर्च करने पड़ेंगे. अगर बिना पूजापाठ के धन निकालने की कोशिश की गई तो परिवार तबाह हो जाता है.

‘‘तुम्हारे घर के अंदर 16 मटके दबे हुए हैं, जिन में सोने की मोहरें भरी हैं. एक बात और ध्यान से सुन लो, मैं श्री गुरुनानक देवजी का वंशज हूं. वह बेदी थे और मैं भी बेदी हूं, इसीलिए यह काम पूरी दुनिया में सिर्फ मैं ही कर सकता हूं. दूसरा कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ, जो यह काम कर सके. समझे कि नहीं?’’

‘‘नहीं महाराज, हम खुद धन निकालने की कैसे सोच सकते हैं, क्योंकि हमें कहां पता है कि मटके कहां गड़े हैं? अब आप ही बताइए कि इस काम में कितना खर्च आएगा?’’

‘‘लगभग 3 लाख रुपए तो खर्च हो ही जाएंगे. और सुनो, अगर यह काम इसी सप्ताह शुरू नहीं हुआ तो धन तो जाएगा ही, तुम्हारा सब सत्यानाश कर के जाएगा. इसलिए यह काम 2-4 दिनों में ही शुरू करना होगा.’’ बाबा ने चेतावनी देते हुए कहा.

बाबा की बात सुन कर युवक और उस के पीछे बैठे दोनों लोगों ने एक साथ कहा, ‘‘ठीक है बाबाजी, हम 2 दिनों में रुपयों की व्यवस्था कर के आते हैं.’’

इस के बाद तीनों बाबा को प्रणाम कर के चले गए.

करतारपुर और कपूरथला के बीचोबीच कपूरथला के थाना सदर का एक गांव है कोट करार. इसी गांव में सरदार तरसेम सिंह पत्नी और 2 बेटों हरजिंदर सिंह तथा चरणजीत सिंह के साथ रहते थे. उन के पास भले ही जमीन ज्यादा नहीं थी, पर उन के यहां किसी चीज की कमी नहीं थी.

दोनों बेटों को उन्होंने 12वीं तक पढ़ा कर समय से उन की शादियां कर दी थीं. शादी के बाद दोनों बेटे टैंपो खरीद कर चलाने लगे थे. कुछ सालों पहले तरसेम और उन की पत्नी की मौत हो गई थी.

दोनों भाइयों की कमउम्र में ही शादियां हो गई थीं, इसलिए उन्हें बच्चे भी जल्दी हो गए थे. इस समय हरजिंदर का बेटा 12वीं में पढ़ रहा है तो चरणजीत का 9वीं में. वैसे तो दोनों भाइयों को किसी चीज की कमी नहीं थी, पर इधर कुछ दिनों से उन के सारे काम उलटेपुलटे हो रहे थे.

यह इत्तफाक था या कुछ और कि पूरे परिवार को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि आखिर यह हो क्या रहा है? उन के बने काम भी एकदम से बिगड़ने लगे थे. घर का वातावरण भी नकारात्मक हो गया था. परिवार के सदस्यों को बुरे और डरावने सपने आने लगे थे.

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हालांकि यह सब मात्र संयोग था, लेकिन वहम हो जाए तो उस का इलाज किसी के पास नहीं है. ऐसे में किसी ने कह दिया कि यह सब किसी ऊपरी साए की वजह से हो रहा है तो सब ने मान भी लिया. फिर तो सभी ने यही माना कि बिना किसी उपचार के यह ठीक नहीं होगा.

चरणजीत के चाचा परमजीत सिंह भी गांव में ही रहते थे. उन के एक मित्र थे जसवीर सिंह. वह काफी समझदार और अनुभवी आदमी थे. उन्होंने किसी अखबार में एक इश्तहार देखा था, जिस में लिखा था, ‘बनते काम बिगड़ते हों, ऊपरी हवा का चक्कर हो, संतान हो कर गुजर जाती हो, बीमारी या मुकदमेबाजी हो, दुश्मनों का भय या फिर काम बंद हो, हर समस्या का समाधान, हर मुसीबत से शर्तिया छुटकारा. एक बार अवश्य मिलें. नोट: कृपया आने से पहले फोन अवश्य कर लें.’

समाचारपत्र में छपा यह विज्ञापन देख कर जसवीर सिंह ने यह बात अपने मित्र परमजीत को बता कर कहा, ‘‘क्यों न तुम्हारे भतीजों को इस के यहां दिखाया जाए, शायद उन की समस्या का समाधान हो ही जाए?’’

‘‘बात तो तुम ठीक कह रहे हो. जाने में कोई हर्ज भी नहीं है.’’ परमजीत सिंह ने कहा था.

दरअसल, उन्हें भी यह बात जंच गई थी. उस समय हरजिंदर घर पर नहीं था. उन्होंने छोटे भतीजे चरणजीत से बात की और उसे साथ चलने को राजी कर लिया. हालांकि वह बड़े भाई से पूछे या सलाह किए बिना जाना नहीं चाहता था, पर चाचा की वजह से वह इनकार भी नहीं कर सका.

24 दिसंबर, 2016 को चरणजीत सिंह, जसवीर सिंह और परमजीत सिंह समाचारपत्र में दिए पते के अनुसार फ्लैट-2055 नियर बीएमसी स्कूल, चंडीगढ़ रोड, लुधियाना पहुंच गए.

चलने से पहले जसवीर ने फोन कर दिया था. वहां पहुंचने पर तीनों की मुलाकात रविंदर सिंह बेदी नामक सिख युवक से हुई. वह खुद को तंत्रमंत्र, ज्योतिष आदि का विशेषज्ञ बताता था. इन लोगों की समस्या सुन कर उस ने इन्हें अगले दिन घर की मिट्टी ले कर आने को कहा. इस तरह ये लोग 2-3 दिनों तक कपूरथला से लुधियाना आतेजाते रहे.

26 दिसंबर, 2016 को रविंदर सिंह बेदी ने चरणजीत से उस के घर में खजाना दबे होने की बात बता कर उसे निकालने के लिए पूजा के लिए 3 लाख रुपए का खर्च बताया.

चरणजीत का बड़ा भाई हरजिंदर गाड़ी ले कर बाहर गया था. उस के वापस आने का कोई निश्चित दिन नहीं था. दूसरी ओर रविंदर के कहे अनुसार, एक भी दिन देर करना उचित नहीं था. अकेले कोई फैसला लेने में चरणजीत को मुश्किल हो रही थी. दूसरी ओर चाचा और जसवीर सिंह बारबार कह रहे थे कि वह चिंता न करे, सब ठीक हो जाएगा.

दिमाग पर ज्यादा जोर न देते हुए चरणजीत ने रुपयों का इंतजाम किया और 28 दिसंबर, 2016 को चाचा परमजीत और जसवीर सिंह के साथ अपनी अल्टो कार से लुधियाना रविंदर के यहां पहुंच गया. रविंदर ने कहा, ‘‘मैं कोई भी काम गलत या कच्चा नहीं करता. हर काम लिखित और गारंटी के साथ करता हूं. इसलिए पहले कोर्ट चल कर इस काम को करने के लिए एग्रीमेंट बनवाते हैं.’’

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जसवीर, परमजीत और चरणजीत ने बहुत कहा कि उन्हें उस पर पूरा विश्वास है, लेकिन रविंदर ने उन की एक नहीं सुनी. वह तीनों को लुधियाना की न्यू कोर्ट ले गया और नोटरी के माध्यम से चरणजीत की अल्टो कार अपने नाम पर यह कह कर ट्रांसफर करवा ली कि अभी उसे इस की जरूरत है. काम हो जाने के बाद वह उसे वापस कर देगा.

जिस एग्रीमेंट के लिए रविंदर उन्हें कोर्ट ले गया था, वह पीछे रह गया. कोर्ट से लौट कर चरणजीत सिंह ने 50-50 हजार कर के 2 लाख रुपए रविंदर बेदी को नकद दे दिए. इस के अलावा उस ने चरणजीत से हजारों रुपए के महंगे स्टोन, पुखराज, पन्ना, नीलम आदि मंगवाए.

रविंदर बेदी का कहना था कि पूजा के समय ये स्टोन पूजा वाले स्थान पर रखे जाएंगे. जिस जगह खजाना दबा होगा, ये स्टोन अपने आप चल कर उस जगह को बताएंगे. उस दिन के बाद चरणजीत को वे स्टोन खजाने का पता क्या बताते, रविंदर बेदी खुद ही गायब हो गया.

चरणजीत लुधियाना स्थित रविंदर बेदी के घर के चक्कर लगालगा कर थक गया, उसे न उस की कार मिली और न खजाना. उस के रुपए भी चले गए. रविंदर का कुछ अतापता नहीं था, काफी चक्कर लगाने के बाद एक दिन बेदी मिला भी तो सिवाय आश्वासन के उस ने कुछ नहीं दिया. उस ने कहा, ‘‘चिंता करने की जरूरत नहीं है. शुभ मुहूर्त आते ही वह पूजा शुरू कर के तुम्हें राजा बना देगा.’’

इस के बाद न कभी वह शुभ मुहूर्त आया और न ही चरणजीत राजा बन सका. धीरेधीरे चरणजीत की समझ में आ गया कि रविंदर बेदी ने उसे ठग लिया है. एक दिन वह अपने बड़े भाई हरजिंदर और 2 रिश्तेदारों को साथ ले कर रविंदर बेदी के घर पहुंचा. उस ने अपनी कार और 2 लाख रुपए वापस मांगे.

रविंदर ने उन्हें टका सा जवाब देते हुए कहा, ‘‘कैसे रुपए? जो रुपए तुम ने दिए थे, वे पूजापाठ की सामग्री में खर्च हो गए. रही बात कार की तो उसे खुद तुम ने मुझे बेचा था. बाबाजी की सेवा के लिए.’’

रविंदर की बात सुन कर चरणजीत सिंह के पैरों तले से जमीन खिसक गई. दुख तो उसे 2 लाख रुपयों का भी था, लेकिन कार की चिंता अधिक थी, क्योंकि कार उस ने एचडीएफसी बैंक से फाइनैंस करवाई थी, जिस की किस्तें वह अभी भी भर रहा था.

वह समझ गया कि खजाने का लालच दे कर रविंदर ने उस के साथ जबरदस्त चीटिंग की है. एक बार और उस ने बेदी से निवेदन करते हुए कहा कि उसे खजानावजाना कुछ नहीं चाहिए. वह उस की कार और 2 लाख रुपए लौटा दे. इस के बाद वह उस के द्वारा ठगी का किसी के सामने जिक्र नहीं करेगा.

चरणजीत का इतना कहना था कि रविंदर आगबबूला हो उठा. उस ने चरणजीत को धमकी देते हुए कहा, ‘‘चुपचाप शराफत से चले जाओ, वरना पुलिस को बुला कर बंद करवा दूंगा.’’

‘‘कमाल है, एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी. ठगा भी मैं ही गया हूं और तुम बंद भी मुझे ही कराओगे. बदमाशी की भी हद होती है. अब मैं पुलिस के पास जाता हूं.’’

‘‘जाओ, शौक से जाओ. पुलिस थानों में मेरी इतनी चलती है कि वहां कोई तुम्हारी बात नहीं सुनेगा. तुम्हें पता नहीं कि मैं पुलिस को हफ्ता देता हूं.’’

सच पूछो तो उस समय रविंदर बेदी की धमकी से चरणजीत डर गया था. उस ने घर जा कर यह बात अपने बड़े भाई और रिश्तेदारों को बताई. तब सब ने यही सलाह दी कि उसे पुलिस के पास जाना चाहिए. लेकिन सब ने सोचा कि एक बार और रविंदर के पास जा कर बात कर लेनी चाहिए. पर जब वे रविंदर के फ्लैट पर पहुंचे तो उस ने कोई बात सुने बिना सभी को धमका कर भगा दिया.

पूरे 6 महीने हो गए थे चरणजीत को रविंदर के पीछे भटकते हुए. हार कर लुधियाना के थाना डिवीजन-7 में जा कर उस ने थानाप्रभारी सतवंत सिंह को अपने साथ रविंदर बेदी द्वारा की गई ठगी की पूरी कहानी सुना दी. चरणजीत की पूरी बात सुन कर सतवंत सिंह ने एएसआई सुखविंदर सिंह को बुला कर यह मामला उन के हवाले कर काररवाई करने को कहा.

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सुखविंदर सिंह चरणजीत की शिकायत पर काररवाई करते हुए सिपाही बलबीर सिंह को रविंदर बेदी के घर बुलाने भेजा, ताकि आमनेसामने बैठ कर बात की जा सके.

दरअसल, ऐसे मामलों में काफी हद तक पीडि़त खुद ही दोषी होता है, जो अंधविश्वास के झूठे मायाजाल में फंस कर अपना नुकसान कर बैठता है. सोचना चरणजीत को चाहिए था कि उस के घर से लगभग 150 किलोमीटर दूर बैठा आदमी यह बात कैसे जान गया कि उस के घर में खजाना दबा है. लालच और अंधविश्वास में ही उलझ कर चरणजीत जैसे लोग रविंदर बेदी जैसे फरेबी तांत्रिकों के मायाजाल में फंस कर उल्लू बन जाते हैं.

बहरहाल, सुखविंदर सिंह के बुलवाने पर रविंदर बेदी थाने नहीं आया. वह घर से ही गायब हो गया. पुलिस उस की तलाश करती रही. पुलिस अपना काम अपने तरीके से कर रही थी. कार और 2 लाख रुपए तो चरणजीत के फंसे हुए थे, इसलिए वह और उस के रिश्तेदार गुपचुप तरीके से रविंदर के घर की निगरानी कर रहे थे.

एक दिन रविंदर बेदी कपड़े और कुछ रुपए लेने जैसे ही घर आया, चरणजीत और उस के रिश्तेदारों को देख कर ठिठका. वह शहर छोड़ कर भाग जाना चाहता था. चरणजीत और उस के रिश्तेदारों को देख कर वह गली में भागा, पर चरणजीत और उस के रिश्तेदारों ने दौड़ा कर उसे पकड़ लिया. इस में मोहल्ले वालों ने भी उन की मदद की. क्योंकि मोहल्ले वाले भी उस की ठगी के धंधे से अच्छी तरह परिचित थे. सभी रविंदर को पकड़ कर थाने ले गए.

रविंदर का साथी कमल शर्मा उर्फ ड्राइवर भी पकड़ा गया था. वह रविंदर के हर काम में उस का सहायक था. चरणजीत की कार भी रविंदर ने उसी के नाम करवाई थी. थाने पहुंच कर रविंदर ने नौटंकी शुरू कर दी. काफी देर तक उस की नौटंकी चलती रही.

कभी वह कहता कि अपनी तंत्रमंत्र की ताकत से सभी को भस्म कर देगा तो कभी कहता कि वह इन के 2 लाख रुपए किस्तों में लौटा देगा. रही बात कार की तो इसे उस ने चरणजीत से खरीदी थी, जिस के उस के पास बाकायदा कागज हैं.

लेकिन पुलिस ने न उस की बातों पर ध्यान दिया और न नौटंकी पर. 16 मई, 2017 को अपराध संख्या 109/2017 पर भादंवि की धारा 420, 406, 120बी के तहत उस के और उस के साथी कमल शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर अदालत में पेश कर के एक दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

लेकिन रिमांड अवधि में पुलिस उस से ज्यादा जानकारी हासिल नहीं कर सकी. रिमांड खत्म होने पर उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया था. बाद में चरणजीत ने अपनी कोशिश से उस से कार वापस ली थी.

इस मामले में चरणजीत का कहना है कि पुलिस ने उस की बात ठीक से नहीं सुनी. लेकिन पुलिस ऐसे मामलों में कर भी क्या सकती है?

पुलिस या कानून किसी से नहीं कहता कि लालच में अपना सब कुछ लुटा दो. यहां तो हर कोई लूटने को बैठा है. लुटने वाले को भी तो कुछ सोचना चाहिए.

लुटना या बचना आदमी के अपने हाथ में है. कुदरत ने हर इंसान को बराबर दिमाग दिया है. अगर कोई फंसाने के लिए दिमाग लगाता है तो सामने वाले को बचने के लिए अपने दिमाग का उपयोग करना चाहिए. ऐसे में अगर कोई फंस जाता है तो वह भी कम दोषी नहीं है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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