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500 और 1000 के नोटों का ऐसे होगा इस्तेमाल, ये है प्लान

नोटबंदी के बाद से पुराने 500 और 1000 के नोटों की गिनती जारी है. लोगों के मन में सवाल है कि बैंकों के पास जमा हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों के साथ रिजर्व बैंक औफ इंडिया (आरबीआई) क्या कर रहा है? तो आपको बता दें, नोटबंदी के बाद आए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों में जिनकी गिनती हो चुकी है, उन्हें टुकड़ों में काटकर ईंट के आकार में बदलने के बाद निविदा के माध्यम से उनका निपटारा कर दिया जाएगा. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सूचना का अधिकार कानून के तहत यह जानकारी दी है. बता दें कि 30 जून 2017 को जारी किए अपने प्रारंभिक आकलन में रिजर्व बैंक ने पुराने 500 और 1000 रुपए के नोटों का कुल मूल्य 15.28 लाख करोड़ रुपए बताया था.

ऐसे नष्ट होंगे पुराने नोट

आरबीआई ने आरटीआई के जवाब में कहा, ‘500 और 1000 के पुराने नोटों को पहले गिना जाता है, फिर इनके असली-नकली का वेरिफिकेशन किया जाता है. इसके बाद इन नोटों को आरबीआई की विभिन्न शाखाओं में मौजूद मशीनों से टुकड़े-टुकड़े करके एक ईंट की तरह आकार बना दिया जाता है, फिर इन्हें टेंडर निकालकर नष्ट करवाया जाता है.’

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दोबारा गलाकर तैयार नहीं होंगे नोट

रिजर्व बैंक के अनुसार जब इन कटे हुए नोटों को दबाकर इन्हें चौकोर ईंट के आकार में बदल दिया जाएगा तो निविदा के माध्यम से इनका निस्तारण कर दिया जाएगा. जवाब में कहा गया है, रिजर्व बैंक ऐसे नोटों का पुनर्चक्रण नहीं करता है. यानी दोबारा उससे गलाकर नया तैयार नहीं किया जाएगा.

ब्रिकेटिंग प्रणाली से बदले गए नोट

मुद्रा सत्यापन की अत्याधुनिक प्रणाली के तहत नोटों की जांच की गई है. इस प्रक्रिया को पूरा करने वाले नोटों को रिजर्व बैंक के विभिन्न कार्यालयों में लगाए गए नोटों को ब्रिकेटिंग प्रणाली में इन्हें काटकर उन्हें ब्रिकेट में परिवर्तित किया जा रहा है. देशभर में विभिन्न कार्यालयों में कुल 59 अत्याधुनिक मुद्रा सत्यापन एवं प्रसंस्करण मशीनें हैं.

8 नवंबर 2016 में हुए थे बंद

मोदी सरकार की नोटबंदी की घोषणा के बाद 8 नवंबर 2016 को पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे. इसकी वजह से लोगों को 500 और 1000 रुपए के नोटों को बैंक में जमा कराने और बैंक से पैसे निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.

आपके वीडियो कौल्स पर है पौर्न इंडस्ट्री की नजर

अगर आप व्हाट्सऐप या स्काइप पर वीडियो कौल करते हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि पौर्न इंडस्ट्री की नजर आजकल आपकी वीडियो कौल्स पर है. साइबर सेल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पौर्न इंडस्ट्री लोगों की वीडियो कौल टैप कर रही है और उन्हें पौर्न साइट पर अपलोड कर रही हैं. साइबर सेल के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें लोगों की निजी वीडियो कौल पौर्न साइट पर अपलोड कर दी गई है. नए शादीशुदा जोड़े और डिस्टेंस रिलेशनशिप वाले कपल पौर्न इंडस्ट्री के खासतौर पर निशाने पर हैं.

कैसे होती हैं वीडियो कौल हैक

हाल ही में 25 साल की एक महिला ने, जिसकी बीते नवंबर में ही शादी हुई थी, साइबर सेल में एक शिकायत दर्ज करायी है. अपनी शिकायत में महिला ने कहा है कि उसके पति के साथ की गई एक निजी वीडियो कौल को किसी ने हैक करके पौर्न साइट पर अपलोड कर दिया है. अब महिला ने साइबर सेल से इस वीडियो को सभी पौर्न साइट से हटाने की विनती की है. एक साइबर विशेषज्ञ का कहना है कि वीडियो कौल आईपी एड्रेस की मौनिटरिंग करके आसानी से हैक की जा सकती है.

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ऐसे में यूजर्स के साथ-साथ हैकर्स भी लाइव वीडियो कौल देख सकते हैं. आईपी एड्रेस मौनिटरिंग के अलावा मोबाइल वायरस की मदद से भी वीडियो कौल टैप की जा रही हैं. वीडियो कौल हैक करने के बाद ये वीडियो पौर्न इंडस्ट्री को बेच दी जाती हैं और जब तक इस बारे में पता चलता है, तब तक यह वीडियो काफी लोगों के पास पहुंच चुकी होती है. साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि लाइव वीडियो कौल सुरक्षित नहीं है और आजकल हैकरों के लिए यह सबसे पसंदीदा और आसान काम है.

मोबाइल ऐप से भी हो सकता है नुकसान

साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि कई मोबाइल ऐप भी आपका फोन हैक होने के लिए जिम्मेदार होती हैं. कई ऐप आपके मोबाइल कैमरे और माइक्रोफोन का डाटा कैप्चर कर लेती हैं. जिसके बाद हैकरों का काम आसान हो जाता है. वहीं कुछ स्क्रीन रिकौर्डिंग ऐप की मदद से भी लाइव वीडियो कौल हैक होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों के वाई-फाई का इस्तेमाल भी हैकरों का काम आसान कर देता है.

ऐसे बचें हैकरों से

साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई का इस्तेमाल ना करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक ना करें. इसके अलावा गूगल स्टोर से ही ऐप इंस्टौल करें और फोन में मजबूत पासवर्ड लगाएं, ताकि आपका फोन आसानी से हैक ना हो पाए. साइबर कानून विशेषज्ञों के अनुसार, बदनामी के डर से कई महिलाएं अपनी शिकायत को एफआईआर में तब्दील नहीं करती, जिस कारण अपराधी आसानी से बच निकलते हैं. इससे ना सिर्फ अपराधी बच निकलते हैं बल्कि उनकी हिम्मत और ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में कह सकते हैं कि सावधानी ही बचाव है.

किसिंग कंट्रोवर्सी पर अब एक्ट्रेस ने दी शो छोड़ने की धमकी

पौपुलर टीवी शो ‘तू आशिकी’ में पंक्ति का किरदार निभाने वाली लीड एक्ट्रेस जन्नत जुबेर रहमानी पिछले एक हफ्ते से सुर्खियों में छाई हुई हैं. ‘तू आशिकी’ में पंक्ति और अहान के बीच का रोमांस इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है और उनके ‘किस का किस्सा’ है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. अब इस पूरे हंगामे पर जन्नत ने बड़ा फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है.

मीडिया में आईं खबरों के मुताबिक, एक्ट्रेस जन्नत जुबेर रहमानी ने कहा है कि अगर शो में ऐसे ही इंटीमेट और किसिंग सीन रहे तो मैं शो में आगे काम नहीं कर सकूंगी साथ ही बिना नोटिस पीरियड दिए इस शो को छोड़ दूंगी. एक्ट्रेस की इस बात पर उनके पैरेंट्स भी पूरा सपोर्ट कर रहे हैं. बता दें जन्नत ने शो की डिमांड पर कई रोमांटिक सीन किए थे.

दरअसल, जन्नत इस शो की शूटिंग अच्छे से कर रही थीं. जब उन्हें अपने कोस्टार ऋत्विक अरोड़ा को किस करने को कहा गया तो उन्हें कुछ ठीक नहीं लगा. उन्होंने अपनी मां को सेट पर बुला लिया. इस बारे में जन्नत के पैरेंट ने मेकर्स और प्रोड्यूसर से बात की. खबरों की मानें तो जब जन्नत की मां ने बेटी के किस सीन पर बवाल मचाया तो मेकर्स नाराज हो गए. उन्होंने जन्नत को रिप्लेस करने का फैसला ले लिया. साथ ही कुछ एक्ट्रेस का औडिशन भी लिया गया.

इस कंट्रोवर्सी पर एक्ट्रेस के पिता का कहना है कि मेरी बेटी एक अच्छी अदाकारा है. जब हमने शो साइन किया था, तब हम ये फैसला ले चुके थे कि जन्नत को स्क्रीन पर क्या करना है और क्या नहीं. हम चाहते हैं कि वह अच्छे एक्टर के तौर पर उभर कर आए, ना कि एडल्ट सीन और किसिंग सीन करके.

उन्होंने कहा, यह शो परिवारवाले देखते हैं. अगर मेकर्स इसे एडल्ट शो बनाना चाहते हैं तो हमें यह स्वीकर नहीं है. यहां तक कि सरकार भी 18 साल से पहले शादी की इजाजत नहीं देती. बता दें कि जन्नत महज 16 साल की हैं, इसलिए उनके पैरेंट्स नहीं चाहते कि उनकी बेटी एडल्ट सीन करे.

ये 5 फ्रूट हेयर मास्क बचाएंगे आपके बालो को रंगो का मार से

होली खेलने के बाद अगर आपको भी बालों से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं तो आप यहां पर दिए गए फ्रूट मास्‍क को ट्राई कर सकती हैं. ये आपके बालों को लंबे, घने और मजबूत बनाएंगे.

केला और दही

अपने बालों की लंबाई के हिसाब से केला मैश कीजिये, उसमें थोड़ी सी दही और नींबू का रस मिलाइये. इस पेस्‍ट को अपने सिर पर करीबन 20-30 मिनट तक के लिये लगा रहने के बाद ठंडे पानी से धो लीजिये और माइल्‍ड शैंपू लगा लीजिये जिससे मुलायम बाल मिल जाएं.

पपीता और दूध

पपीता, दूध, दही और शहद मिला कर पेस्‍ट बनाइये और इस हेयर मास्‍क को 30 मिनट तक के लिये लगा लीजिये. इस मास्‍क से बालों की गंदगी साफ होगी और बाल चमकदार बनेगे.

स्‍ट्राबेरी और नींबू जूस

सिर की आम समस्‍याएं जैसे, रूसी, खुजली, बालों का झड़ना और चिपचिपाहट से राहत दिलाता है. थोड़ी सी स्‍ट्राबेरी लें और उसे पीस लें, उसमें शहद, दूध और नींबू का रस मिलाएं. मिक्‍स कर के बालों पर लगाएं और 15 मिनट के बाद सिर को शैंपू से धो लें.

आड़ू और दही

अगर आपकी सिर की त्‍वचा रूखी है, तो उसे इस खास मास्‍क से सही किया जा सकता है. एक पेस्‍ट तैयार करें जिसमें आड़ू, दही और पपीता या संतरा आदि फल मिला लें. इस पेस्‍ट को 20 से 25 मिनट तक के लिये लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी और शैंपू से धो लें.

अमरूद और शहद

अमरूद में विटामिन ए पाया जाता है जो कि नए बालों की ग्रोथ और लंबाई को बढाता है. एक पका हुआ अमरूद लें, उसमें शहद, नींबू की कुछ बूंदे मिलाए और सिर पर 15 मिनट तक के लिये लगा रहने दें. उसके बाद बालों को शैंपू से धो लें.

क्या आप के साथ भी कभी ऐसा हुआ है?

गुजरात के अहमदाबाद से रात्रिकालीन सेवाओं के तहत निजी बसें चलती हैं जो सूरत, मुंबई और गोआ तक जाती हैं. ये बसें डबलडैकर होती हैं और इन में लेटने की व्यवस्था भी होती है. लेकिन इन बसों में शौचालय का प्रावधान नहीं है. अहमदाबाद से ममता अपने पति और बच्ची के साथ सूरत जा रही थी. रात के 10 बजे थे. सारे यात्री बस में लेट गए और बस चल पड़ी. अहमदाबाद से सूरत पहुंचने में बस को 6 घंटे लगते हैं. बस चालक उस दिन बस को 4 घंटे में सूरत पहुंचाना चाहता था. चालक व परिचालक केबिन में थे. ममता का पति विरेन मस्त नींद में था. 2 घंटे के बाद ममता ने पति को उठाया.

‘‘सुनो.’’

‘‘क्या बात है?’’ जम्हाई लेते हुए विरेन बोला.

‘‘मुझे टौयलेट जाना है, ड्राइवर से गाड़ी रोकने को कहो,’’ ममता ने कहा.

बस में सारे यात्री सो रहे थे. गुजरात के शानदार लाइन 4 लाइन वाले ऐक्सप्रैस हाइवे पर बस पूरी रफ्तार से भागी जा रही थी. चालक, परिचालक अपने में मस्त थे, उन्हें सूरत पहुंच कर अपने खास रैस्टोरैंट के सामने गाड़ी रोक कर चिकन बिरयानी खानी थी और अपनी बस का माइलेज भी उसे लेना था. अच्छा माइलेज मिलने पर उसे अपनी परिवहन कंपनी की तरफ से विशेष उपहार भी मिलना था. चालक, परिचालक का केबिन चारों तरफ से बंद था, जिस में प्रवेश करने के लिए डबलडोर प्रणाली थी. चालक बस को सीधे सूरत में रोकना चाहता था. उधर ममता का टौयलेट जाने का प्रैशर बढ़ता जा रहा था.

‘‘गाड़ी रुकवाओ प्लीज,’’ ममता ने संकोच करते हुए पति से फिर कहा.

विरेन अपने बिस्तर से नीचे उतरा और परिचालक के पास गया, ‘‘ओ भाई, जरा उठो,’’ उस ने परिचालक को जगाया.

‘‘क्या बात है?’’ परिचालक ने बेरुखी से पूछा.

‘‘बस रुकवाओ, मेरी वाइफ को टौयलेट जाना है,’’ विरेन बोला.

‘‘गाड़ी कहीं नहीं रुकेगी, मैं ने बस चलने से पहले बोला था, बस सीधे सूरत में रुकेगी. 2 बजे पहुंचेंगे, वहीं चायपानी, खानापीना होगा, वहीं टौयलेट करने जाना,’’ परिचालक बोला.

‘‘कंडक्टर साहब, उसे जोर से प्रैशर बन रहा है. बस रुकवाओ,’’ विरेन फिर बोला.

‘‘मैं कुछ नहीं कर सकता,’’ परिचालक बोला.

‘‘मैं ड्राइवर से बोलता हूं,’’ विरेन बोला, ‘‘ड्राइवर साहब, जरा बस रोको, मेरी वाइफ को टौयलेट जाना है.’’

चालक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, उस ने केबिन को अंदर से बंद कर रखा था. तभी ममता भी वहां आ गई, उसे बहुत जोर से टौयलेट आ रहा था.

‘‘ओ भाई, गाड़ी रोको, मुझे टौयलेट जाना है,’’ ममता बोली.

‘‘अरे बेन, सूरत में कर लेना, अभी 2 घंटा और है पहुंचने में,’’ परिचालक बोला.

ममता और विरेन बस चालक और परिचालक से अनुरोध करते रहे लेकिन उन्होंने बस को नहीं रोका. इस से बस के अंदर बहस होने लगी तो सोए हुए यात्रियों ने हल्ला न करने के लिए पतिपत्नी से कहा.

‘‘ओ बेन, हल्ला न करो, डिस्टर्ब हो रहा है,’’ एक यात्री बोला.

‘‘मुझे टौयलेट जाना है, बस रुकवाने को तो बोल रहे हैं हम,’’ ममता बोली.

‘‘तुम ने गाड़ी में चढ़ने से पहले टौयलेट क्यों नहीं किया जब कंडक्टर बोला था,’’ एक मोटा यात्री बोला और चादर तान कर सो गया.

ममता को अब बरदाश्त से बाहर हो रहा था.

‘‘भाईसाहब गाड़ी रोकिए,’’ अब की बार ममता ने जोर से कराहते हुए बोला. लेकिन चालक व परिचालक ने ममता की बेबसी पर ध्यान नहीं दिया.

तभी ममता को परिचालक के बिस्तर के पास एक बड़ा पौलिथीन का कैरीबैग दिखाई दिया. उस बैग में पुराने कपड़े थे जिन से परिचालक बस को साफ करता था. ममता ने उस बैग को उठा लिया. उस ने देखा, बस में उस की बेटी को छोड़ कोई भी महिला नहीं थी. केवल वह और उस की बेटी थी महिला शक्ति के नाम पर. ममता को बड़ी तकलीफ हो रही थी. वह कराह उठी लेकिन उस की बेबसी को समझने वाला कोई न था. उसे बहुत दर्द होने लगा तो वह उठी. उस ने एक कठोर निर्णय ले लिया था. वह सब से पीछे सीट पर गई और अंधेरे में उस ने उस बैग में टौयलेट किया और फिर अपनी बेटी को भी उसी में टौयलेट करवाया. अभी बस को सूरत पहुंचने में आधा घंटा और बचा था. बस में लोग खर्राटे मार कर सो रहे थे.

‘‘ममता.’’

‘‘जी.’’

‘‘तुम इस पौलिथीन को फेंकना मत,’’ विरेन बोला.

‘‘क्या करना है इसे रख कर?’’ ममता ने आक्रोश से थैली को देखते हुए कहा.

‘‘तुम देखना, मैं इस का क्या करता हूं. इसे मुझे दे दो,’’ विरेन बोला.

उस ने उस पौलिथीन को बस में लटकाने वाली खूंटी में लटका दिया. ठीक 2 बजे रात को बस सूरत के पास एक रैस्टोरैंट पर रुकी.

‘‘सभी लोग चायपानी पी लो, खाना खा लो, चिकन बिरयानी गरमागरम,’’ परिचालक बोला.

‘‘टौयलेट वगैरा कर लो, बस पूरे आधा घंटा रुकेगी,’’ इस बार बस चालक बोला.

यात्री उतरने लगे. ममता पटेल भी अपने पति और बच्ची के साथ बस से उतर गई.

‘‘अरे, इस मूत्र को अब तो फेंक दो,’’ वह बोल पड़ी.

‘‘अरे नहीं, अब इस मूत्र को उपभोक्ता अदालत में पेश करूंगा. मीडिया को दिखाऊंगा,’’ विरेन बोला और उस ने उस बस का फोटो खींचा व बस का नंबर भी नोट किया.

‘‘ऐ भाई, बस का फोटो क्यों लेने का,’’ परिचालक ने सहसा विरेन को फोटो खींचते समय टोका.

‘‘तुम ने बस नहीं रोकी थी, अब तुम्हारे ऊपर मुकदमा चलेगा, यह थैली प्रमाण है,’’ विरेन पटेल ने वह थैली दिखाते हुए कहा.

‘‘अरे, तेरे जैसे बहुत देखे हैं, 20 साल से गाड़ी चला रहा हूं,’’ चालक बोला.

रात को 2 बजे, रैस्टोरैंट में चालक और परिचालक चिकन बिरयानी खा रहे थे और जोरजोर से हंस भी रहे थे, ‘साला, हम पर मुकदमा करेगा, थैली दिखाता है, हाहाहा,’ चालक बुदबुदाया. ‘पता चल जाएगा, अदालत में जब बीसों साल लग जाएंगे,’ परिचालक भी बुदबुदाया. देश की सरकारी बस हो या निजी बस सेवा, चालक और परिचालक बस को वहीं पर रोकते हैं जहां उन को निशुल्क मुरगा, बिरयानी, शराब परोसी जाती है. और साथ ही, एक निश्चित रकम या डीए भी रैस्टोरैंट वाले इन चालकपरिचालकों को देते हैं.

इस बस के साथ भी यही हुआ था, एक तो बस का माइलेज का बोनस लेने का चक्कर, दूसरा निर्धारित रैस्टोरैंट में चालकपरिचालक द्वारा फ्री का खानपान करना. विरेन पटेल सपरिवार अपने घर पहुंचा और अगले दिन उस ने देश के टीवी चैनलों को अपनी इस घटना के बारे में बताया. लेकिन चैनलों ने इस घटना को नहीं दिखाया. आखिरकार उस ने उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दायर किया. उस के पास बस का टिकट था, बस का नंबर था और बस का फोटो भी था. उस ने अपने मोबाइल में रिकौर्डिंग की हुई बस परिचालक की और अपनी बात को भी अदालत में रखा. 3 साल तक मुकदमा चलता रहा. इन 3 सालों तक विरेन ने मूत्र की थैली को संभाल कर रखा. जब भी आता, वह उस बदबूदार थैली को अपने साथ जरूर उपभोक्ता अदालत में लाता. ‘‘इस थैली में क्या गारंटी है कि यह मूत्र ममता का ही है,’’ परिचालक के वकील ने सवाल किया.

‘‘3 साल से इसे संभाल कर रखा है, मैडिकल जांच करवा लो मेरा,’’ ममता ने दलील दी.

‘‘इस मूत्र को बस में ही निकाला गया है, इस का क्या प्रमाण है?’’ चालक के वकील ने पूछा.

‘‘जब मेरी पत्नी टौयलेट कर रही थी तो मैं ने बस के अंदर इस का वीडियो अपने मोबाइल से बना लिया था, देखिए, यह रहा वीडियो,’’ विरेन ने मोबाइल से बनाई गई वीडियो उपभोक्ता न्यायालय में प्रस्तुत की. आखिरकार 3 साल बाद नए न्यायाधीश ने इस अनोखे मुकदमे का निष्पादन कर ही दिया और उपभोक्ता अदालत ने उस निजी परिवहन के मालिक पर 50 हजार रुपए का दंड लगाया. क्षतिपूर्ति के रूप में न्यायालय ने ममता को यह धनराशि प्रदान करवाई और बस चालक, परिचालक के लाइसैंस निरस्त कर दिए. उस लग्जरी बस में शौचालय का न होना और पीडि़ता की मदद न करना ही बस चालक व परिचालक का अपराध माना गया. लेकिन इस खबर को बिकाऊ मीडिया ने कोई तवज्जुह नहीं दी जिस से इतनी बड़ी विडंबना देश के लोगों तक नहीं पहुंच पाई. लेकिन सोशल मीडिया ने इस सत्य को सब पाठकों के बीच प्रस्तुत किया जिस से इस मुकदमे में सक्रियता आई और निर्णय की प्रतिक्रिया तेज हुई. परिणाम यह हुआ है कि अहमदाबाद से जो भी निजी डबलडैकर स्लीपर बसें चलती हैं वे अब हर 1 घंटे के बाद अपने यात्रियों को टौयलेट करने के लिए बस रोकती हैं. अब हर बस में हैल्पलाइन नंबर भी लिख दिए गए हैं.

धर्म की नगरी में औरत बिकती है, बोलो खरीदोगे

जान कर आश्चर्य होगा आप को कि जिस देश में स्त्री को देवी का रूप बता कर पूजा जाता है, वह सरेराह, गलीगली में बिकती भी है और खरीदार उस की देह देख कर कीमत भी लगाते हैं. आप को यह जान कर भी आश्चर्य होगा कि देश के उन धार्मिक जगहों पर, जहां देवीदेवताओं को पूजने मीलों चल कर लोग आते हैं, रात के अंधेरे में उसी शहर के किसी बदनाम गली में औरतें खरीदने की चीज बन जाती हैं. यों धर्म में स्त्री को देवी का रूप तो दिया गया पर उसी धर्म के ठेकेदारों ने औरतों का जम कर शोषण किया. ये पत्थर की देवी को पूजते रहे और उधर औरत जगहजगह शोषित होती रही. धार्मिक पोंगापंथी का नजारा देखिए कि देश में उन्हीं जगहों पर औरतों को अधिक वेश्या बनने पर मजबूर भी होना पङा, जहां की भूमि को देवतुल्य माना गया है :

काशी (वाराणसी)

मंदिरों का शहर, तथाकथित धर्म की नगरी काशी में ऐसी बदनाम गलियां भी हैं, जहां खुलेआम वेश्यावृत्ति होती है. यहां रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर शिवदासपुर नाम का एक जगह वेश्यावृत्ति के लिए खासा मशहूर है. दशाश्वमेध घाट से सटा दालमंडी में तो तमाम कानूनी पाबंदियों के बावजूद भी वेश्यावृत्ति होती है. यहां कई पुराने कोठे भी हैं जहां रोज रात को मुजरा गाया जाता है और दिन को शरीफ दिखने वाले लोग रात के अंधेरे में काला कारनामा करते हैं.

प्रयाग (इलाहाबाद)

गंगा, जमुना, सरस्वती नदियों की त्रिवेणी के चलते तीर्थस्थल के रूप में मशहूर इलाहाबाद में जहां कुंभ मेले में लाखों लोग धर्म के ठेकेदारों द्वारा लुटतेपिटते हैं, वहीं यहां के बाजार चौक के मीरगंज इलाके में औरतों की देह की खुल कर बोली लगाई जाती है. यहां कई पुराने व बदनाम कोठे हैं, जहां आज भी रात को घुंघरुओं की आवाजें सुनी जा सकती हैं.

कोलकाता

कोलकाता के काली घाट में स्थित काली मंदिर में यों तो शक्ति यानी देवी की पूजा की जाती है, मगर वहीं इस से कुछ ही दूरी पर स्थित सोनागाछी इलाका ऐशिया का सब से बड़ा रैडलाइट है. यहां कई हजार वेश्याएं हैं. आप को यह जान कर भी आश्चर्य होगा कि यहां के वेश्यालयों में 18 साल से कम उम्र की हजारों नाबालिग लड़कियां हैं, जो इस घिनौने काम में जबरन धकेल दी गई हैं. इन जगहों के अलावा देश में कई और भी जगहें हैं जहां न सिर्फ देह व्यापार का कारोबार किया जाता है, यहां अपराधियों और अपराध के अड्डे भी हैं. राजधानी दिल्ली का सब से बड़ा रैडलाइट एरिया जीबी रोड, जिसे हालांकि 1965 में नाम बदल कर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग कर दिया गया था, देह व्यापार के साथसाथ लड़कियों के खरीदफरोख्त का अड्डा भी बन चुका है. हाल ही में यहां एक कोठे से कई लङकियों को जबरन देह  धंधे में धकेलने से पुलिस के प्रयास से मुक्त भी कराया गया. यह कोई 1-2 बार नहीं बारबार होता आया है.

वहीं ग्वालियर का रेशमपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर में चर्तुभुज इलाका आदि कई ऐसी जगहें हैं, जहां की बदनाम गलियां अपने बदनाम कामों के लिए मशहूर हैं. यह बताते चलें कि हालिया आई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 21 लाख से ज्यादा लोग एचआईवी (एड्स) से संक्रमित हैं और इन के मरीजों की बढ़ती संख्याओं की एक वजह ये बदनाम गलियां भी हैं.

सैक्स फैंटेसीज : बदल रही है लोगों की सोच

कौमेडी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ की कहानी कई बार सैक्स फैंटेसीज दिखाने की कोशिश करती है. इस सीरियल में अनिता और विभू मिश्रा नामक पतिपत्नी एक रोमांटिक कपल है. अनीता के करैक्टर में वह कई बार समाज की सैक्स फैंटेसीज को दिखाने की कोशिश भी करती है. अनीता जब बहुत रोमांटिक मूड में होती है, तो पति विभू से कहती है कि वह किसी दूसरे रूप में प्यार करना चाहती है. कभी वह उसे प्लंबर बनने को कहती है, कभी इलैक्ट्रीशियन तो कभीकभी गुंडामवाली तक बनने को कहती है. पति विभू उसी गैटअप में आता है. वह पत्नी से उसी अंदाज में बात करता है. इस से पत्नी अनीता को बहुत खुशी महसूस होती है. वह दोगुनी ऐनर्जी से प्यार करती है. यह कौमेडी सीरियल भले ही हो, पर इस में पतिपत्नी संबंधों को बहुत ही नाटकीय ढंग से दिखाया जा रहा है.

सैक्स को ले कर महिलाओं पर रूढिवादी सोच हमेशा हावी रही है. लेकिन अब समय के साथ यह टूटने लगी है. अब पुरुषों की ही तरह महिलाएं भी सैक्स को पूरी तरह ऐंजौय करना चाहती हैं. इसे ले कर उन के मन में कई तरह के सपने भी होते हैं. अब ये बातें भी पुरानी हो गई हैं कि कौमार्य पति की धरोहर है. अब शादी के पहले ही नहीं शादी के बाद भी सैक्स की वर्जनाएं टूटने लगी हैं. शादी के बाद पतिपत्नी खुद भी ऐसे अवसरों की तलाश में रहते हैं जहां वे खुल कर अपनी हसरतें पूरी कर सकें.

परेशानियों से बचाव

सैक्स के बाद आने वाली परेशानियों से बचाव के लिए भी महिलाएं तैयार रहती हैं. प्लास्टिक सर्जन डाक्टर रिचा सिंह बताती हैं, ‘‘शादी से कुछ समय पहले लड़कियां हमारे पास आती हैं, तो उन का एक ही सवाल होता है कि उन्होंने शादी के पहले सैक्स किया है. इस बात का पता उन के होने वाले पति को न चले, इस के लिए वे क्या करें? लड़कियों को जब इस बारे में सही राय दी जाती है तो भी वे मौका लगते ही सैक्स को ऐंजौय करने से नहीं चूकतीं. शादी के कई साल बाद महिलाएं हमारे पास इस इच्छा से आती हैं कि वे शारीरिक रूप से कुंआरी सी हो जाएं.’’

विदेशों में तो सैक्स को ले कर तमाम तरह के सर्वे होते रहते हैं पर अपने देश में ऐसे सर्वे कम ही होते हैं. कई बार ऐसे सैंपल सर्वों में महिलाएं अपने मन की पूरी बात सामने रखती हैं. इस से पता चलता है कि सैक्स को ले कर उन में नई सोच जन्म ले रही है. डाक्टर रिचा कहती हैं कि शादी से पहले आई एक लड़की की समस्या को एक बार सुलझाया गया तो कुछ दिनों बाद वह दोबारा आ गई और बोली कि मैडम एक बार फिर गलती हो गई.

सैक्स रोगों की डाक्टर प्रभा राय बताती हैं कि हमारे पास ऐसी कई महिलाएं आती हैं, जो जानना चाहती हैं कि इमरजैंसी पिल्स को कितनी बार खाया जा सकता है. कई महिलाएं तो बिना डाक्टर की सलाह के इस तरह की गोलियों का प्रयोग करती हैं. कुछ महिलाएं तो गर्भ ठहर जाने के बाद खुद ही मैडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा ले कर खा लेती हैं. मैडिकल स्टोर वालों से बात करने पर पता चलता है कि बिना डाक्टर की सलाह के इस तरह की दवा का प्रयोग करने वाले पतिपत्नी नहीं होते हैं.

बदल रही सोच

सैक्स अब ऐंजौय का तरीका बन गया है. शादीशुदा जोड़े भी खुद को अलगअलग तरह की सैक्स क्रियाओं के साथ जोड़ना चाहते हैं. इंटरनैट के जरीए सैक्स की फैंटेसीज अब चुपचाप बैडरूम तक पहुंच गई है, जहां केवल दूसरे मर्दों के साथ ही नहीं पतिपत्नी भी आपस में तमाम तरह की सैक्स फैंटेसीज करने का प्रयास करते हैं. इंटरनैट के जरीए सैक्स की हसरतें चुपचाप पूरी होती रहती हैं. सोशल मीडिया ग्रुप फेसबुक और व्हाट्सऐप इस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. फेसबुक पर महिलाएं और पुरुष दोनों ही अपने निक नेम से फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और मनचाही चैटिंग करते हैं. इस में कई बार महिलाएं अपना नाम पुरुषों का रखती हैं ताकि उन की पहचान न हो सके. वे चैटिंग करते समय इस बात का खास खयाल रखती हैं कि उन की सचाई किसी को पता न चल सके. यह बातचीत चैटिंग तक ही सीमित रहती है. बोर होने पर फ्रैंड को अनफ्रैंड कर नए फ्रैंड को जोड़ने का विकल्प हमेशा खुला रहता है.

इस तरह की सैक्स चैटिंग बिना किसी दबाव के होती है. ऐसी ही एक सैक्स चैटिंग से जुड़ी महिला ने बातचीत में बताया कि वह दिन में खाली रहती है. पहले बोर होती रहती थी. जब से फेसबुक के जरीए सैक्स की बातचीत शुरू की है तब से वह बहुत अच्छा महसूस करने लगी है. वह इस बातचीत के बाद खुद को सैक्स के लिए बहुत सहज अनुभव करती है. पत्रिकाओं में आने वाली सैक्स समस्याओं में इस तरह के बहुत सारे सवाल आते हैं, जिन्हें देख कर लगता है कि सैक्स की फैंटेसी अब फैंटेसी भी नहीं रह गई है. इसे लोग अपने जीवन का अंग बनाने लगे हैं.

समाजशास्त्री डाक्टर मधु राय कहती हैं, ‘‘पहले ऐसी बातचीत को मानसिक रोग माना जाता था. समाज भी इसे सही नहीं मानता था. अब इस तरह की घटनाओं को बदलती सोच के रूप में देखा जा रहा है. हमारे पास सैक्स समस्याओं पर चर्चा करने आए व्यक्ति ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ सैक्स करने में असमर्थ था. उस ने कई डाक्टरों से अपना इलाज भी करवाया, लेकिन कोई लाभ न हुआ. ऐसे में उस की पत्नी ने घर के नौकर के साथ संबंध बना लिए. एक दिन पति ने पत्नी को नौकर के साथ संबंध बनाते देख लिया. मगर उसे गुस्सा आने के बजाय अपने में बदलाव महसूस हुआ. उस दिन उस ने अपनी पत्नी के साथ खुद भी सैक्स संबंध बनाने में सफलता पाई. अब वह खुद को सहज महसूस करने लगा था.’’

तरहतरह के लोग

फेसबुक को देखने, पसंद करने और चैटिंग करने वालों में हर वर्ग के लोग हैं. ज्यादातर लोग गलत जानकारी देते हैं. व्यक्तिगत जानकारी देना पसंद नहीं करते. छिबरामऊ की नेहा पाल की उम्र 20 साल है. वह पढ़ती है. वह लड़के और लड़कियों दोनों से दोस्ती करना चाहती है. 32 साल की गीता दिल्ली में रहती है. वह नौकरी करती है. उस की किसी लड़के के साथ रिलेशनशिप है. वह केवल लड़कियों से सैक्सी चैटिंग पसंद करती है. उस की सब से अच्छी दोस्त रीथा रमेश है, जो केरल की रहने वाली है. वह दुबई में अपने पति के साथ रहती है. अपने पति के साथ शारीरिक संबंधों पर वह खुल कर गीता से बात करती है. ऐसे ही तमाम नामों की लंबी लिस्ट है. इन में से कुछ लड़कियां अपने को खुल कर लैस्बियन मानती हैं और लड़कियों से दोस्ती और सैक्सी बातों की चैटिंग करती हैं. कुछ गृहिणियां भी इस में शामिल हैं, जो अपने खाली समय में चैटिंग कर के मन को बहलाती हैं. कुछ लड़केलड़कियां और मर्द व औरतें भी आपस में सैक्सी बातें और चैटिंग करते हैं.

कई लड़केलड़कियां तो अपने मनपसंद फोटो भी एकदूसरे को भेजते हैं. फेसबुक एकजैसी रुचियां रखने वाले लोगों को आपस में दोस्त बनाने का काम भी करता है. एक दोस्त दूसरे दोस्त को अपनी फ्रैंडशिप रिक्वैस्ट भेजता है. इस के बाद दूसरी ओर से फ्रैंडशिप कन्फर्म होते ही चैटिंग का यह खेल शुरू हो जाता है. हर कोई अपनीअपनी पसंद के अनुसार चैटिंग करता है. कुछ लड़कियां तो ऐसी चैटिंग करने के लिए पैसे तक वसूलने लगी हैं. वाराणसी के रहने वाले राजेश सिंह कहते हैं, ‘‘मुझ से चैटिंग करते समय एक लड़की ने अपना फोन नंबर दिया और कहा इस में क्व500 का रिचार्ज करा दो. मैं ने नहीं किया तो उस ने सैक्सी चैटिंग करना बंद कर दिया.’’

इसी तरह से लखनऊ के रहने वाले रामनाथ बताते हैं, ‘‘मेरी फ्रैंडलिस्ट में 4-5 लड़कियों का एक ग्रुप है, जो मुझे अपने सैक्सी फोटो भेजती हैं. मेरे फोटो देखना भी वे पसंद करती हैं. कभीकभी मैं उन का नैटपैक रिचार्ज करा देता हूं. इन से बात कर मैं बहुत राहत महसूस करता हूं. मुझे यह अच्छा लगता है, इसलिए मैं कुछ रुपए खर्च करने को भी तैयार रहता हूं.’’ फेसबुक के अलावा अब व्हाट्सऐप पर भी इस तरह की चैटिंग होने लगी है.

डौक्टर का काला धंधा : देश का सबसे बड़ा किडनी सौदागर

14 सितंबर, 2017 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय में चल रही उस बैठक में कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे. इस मीटिंग में 11 सितंबर को फरार हुए देश के सब से बड़े किडनी सौदागर डा. अमित की गिरफ्तारी को ले कर रायमशविरा हो रहा था.

डा. अमित की सैकड़ों करोड़ की संपत्ति थी और वह हाईप्रोफाइल लाइफ जीता था. उसे विश्व की 14 भाषाओं का ज्ञान था, सैकड़ों बार विदेश यात्रा कर चुका था. उस के व्यावसायिक तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े थे.

खाड़ी देशों के अमीर शेखों से ले कर कई देशों के लोग उस के क्लाइंट रह चुके थे. वह अपने देश के गरीबों को रुपयों का लालच दे कर उन की किडनी खरीद कर अमीरों को बेचता था. डा. अमित राउत किडनी सौदागर भी था और किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला डाक्टर भी. इस काम में वह लाखों के वारेन्यारे करता था.

विचारविमर्श के बाद मीटिंग खत्म हो गई. डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी के निर्देशन में डीआईजी पुष्पक ज्योति और एसएसपी निवेदिता कुकरेती इस पूरे मामले की मौनिटरिंग कर रही थीं. सभी की नजर डा. अमित राउत पर टिकी थी.

दरअसल, 11 सितंबर, 2017 की सुबह देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती को सूचना मिली थी कि डोईवाला थाना क्षेत्र के लाल तप्पड़ स्थित उत्तराखंड डेंटल कालेज में बने गंगोत्री चैरिटेबल हौस्पिटल में किडनी निकालने और ट्रांसप्लांट करने का अवैध कारोबार किया जा रहा है. यह भी पता चला था कि जो 4 लोग किडनी बेचने के लिए आए थे, वे हरिद्वार के रास्ते दिल्ली जाने वाले हैं.

एसएसपी ने अविलंब एक पुलिस टीम का गठन कर दिया, जिस में थाना डोईवाला के इंसपेक्टर ओमबीर सिंह रावत, हरिद्वार के इंसपेक्टर प्रदीप बिष्ट, एसआई सुरेश बलोनी, दिनेश सती, राकेश पंवार, महिला एसआई मंजुल रावत, आदित्या सैनी, कांस्टेबल गब्बर सिंह, भूपेंद्र सिंह, विनोद, नीरज और राजीव को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने सप्तऋषि चौकी के पास चैकिंग अभियान शुरू कर दिया. इसी बीच पुलिस ने एक इनोवा कार नंबर यूए 08 टीए 5119 को रोका. कार की चालक सीट पर एक युवक बैठा था, जबकि कार की पिछली सीट पर 2 महिलाएं व 3 पुरुष बैठे थे.

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पुलिस को देख कर पीछे बैठे लोगों में से एक व्यक्ति बुरी तरह घबरा गया और उस ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया.

पुलिस पूछताछ में उन लोगों ने जो कुछ बताया, उसे सुन कर पुलिसकर्मियों के रोंगटे खड़े हो गए. कार चालक का नाम दीपक था, जिसे किराए पर बुलाया गया था. जबकि अन्य लोगों में जावेद खान निवासी एस.बी. रोड सांताकु्रज, मुंबई, भावजी भाई निवासी जिला खेड़ा, गुजरात, शेखताज अली, 42 साल की सुसामा बनर्जी और 32 साल की कृष्णा दास. सुसामा बनर्जी और कृष्णा दास दक्षिण परगना, वेस्ट बंगाल की रहने वाली थीं.

इन लोगों ने पुलिस को बताया कि अस्पताल का एजेंट जावेद खान उन्हें 3 लाख रुपए में किडनी खरीदने का वादा कर के अस्पताल लाया था. अस्पताल में कृष्णा दास व शेखताज अली की किडनी निकाल ली गई थी.

भावजी भाई और सुसामा बनर्जी को किडनी निकालने के लिए ले जाया गया. उन की किडनी निकालने की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं. उसी बीच ठीक होने पर कृष्णा दास व शेखताज ने किडनी के बदले रुपए देने की मांग की तो एजेंट व अस्पताल संचालकों ने टालमटोल शुरू कर दी. यह देख कर भावजी भाई व सुसामा ने किडनी देने से इनकार कर दिया.

हंगामा बढ़ता देख अस्पताल वालों ने उन्हें एजेंट के साथ वापस भेज दिया. पैसों को ले कर हुए इस झगड़े की भनक किसी तरह सनीपुर कोतवाली में तैनात कांस्टेबल पंकज कुमार को लग गई थी.

झगड़ा किस बात को ले कर था, यह राज भी पता चल गया था. इस के बाद उस ने जरूरी जानकारियां जुटा कर एसएसपी निवेदिता कुकरेती को इस की सूचना दे दी थी. पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उस में से ओमान सहित कुछ देशों के एयर टिकट मिले, जिस से पता चलता था कि गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े हैं.

पुलिस ने जावेद खान से पूछताछ की तो उस ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वह हौस्पिटल के संचालक डा. अमित के लिए काम करता था. वह देश के अलगअलग हिस्सों से गरीब लोगों को रुपयों का लालच दे कर देहरादून लाता था. किडनी देने वालों को 3 लाख रुपए मिलते थे, जबकि उसे कमीशन मिलता था.

जावेद ने यह भी बताया कि हौस्पिटल के संचालक किडनी की खरीदफरोख्त करने के साथसाथ किडनी ट्रांसप्लांट भी करते थे. इस काम में उन्हें मोटी कमाई होती थी. यह खबर डीजीपी अनिल रतूड़ी, एडीजे (कानून व्यवस्था) राम सिंह मीना, डीआईजी पुष्पक ज्योति को मिली तो उन्होंने एसएसपी को इस मामले में तत्काल सख्त काररवाई करने के निर्देश दिए.

एसएसपी के निर्देशन में एसपी देहात सरिता डोभाल, एएसपी लोकेश्वर सिंह, मंजूनाथ टीसी सहित कई थानों की पुलिस टीम ने हौस्पिटल में रेड की, लेकिन तब तक अस्पताल का ज्यादातर स्टाफ और डा. अमित फरार हो चुका था.

स्वास्थ्य विभाग व एफएसएल की टीमों को भी मौके पर बुलवा लिया गया था. जांच के दौरान कई ऐसी दवाइयां मिलीं, जो किडनी ट्रांसप्लांट में काम आती थीं. औपरेशन थिएटर में भी ऐसे इंस्ट्रूमेंट मौजूद थे. पुलिस ने जरूरी रिकौर्ड व सबूतों को कब्जे में ले कर अस्पताल को सील कर दिया.

केस दर्ज कर के कार्रवाई

पुलिस ने इस संबंध में थाना डोईवाला में जावेद के अलावा डा. अमित कुमार, डा. अक्षय उर्फ राउत, डा. संजय दास, सुषमा कुमारी, राजीव चौधरी, चंदना गुडि़या के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 120बी, 370, 342 और मानव अंगों के प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 की धारा 18, 19, 20के  अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया.

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डा. अमित के अलावा अन्य लोग उस की टीम का हिस्सा थे. पुलिस ने भावजी भाई, शेखताज अली, सुसामा बनर्जी और कृष्णा दास को मैडिकल परीक्षण हेतु अस्पताल में भर्ती करा दिया. बाद में उन्हें कोर्ट में पेश कर के धारा 164 के तहत उन के बयान दर्ज कराए गए. पुलिस ने जरूरी पूछताछ के बाद जावेद को अदालत पर पेश कर के जेल भेज दिया. पुलिस जांच के साथ ही डा. अमित और उस के साथियों की तलाश में जुट गई. विवेचना के दौरान पुलिस ने अमित के साथियों अनुपमा, नसीम, प्रदीप उर्फ बिल्लू, सरला व अभिषेक को भी आरोपी बनाया.

किडनी के अवैध कारोबार के अब तक के सब से बड़े खुलासे ने पुलिस से ले कर सुरक्षा एजेंसियों तक को सकते में डाल दिया था. जो गंभीर बातें सामने आईं, उन के अनुसार, पिछले कुछ समय में खाड़ी देशों के शेखों के अलावा यूरोप व एशियाई देशों के विदेशी डा. अमित के यहां किडनी ट्रांसप्लांट करा कर जा चुके थे. ऐसे लोग टूरिस्ट वीजा ले कर उत्तराखंड घूमने के बहाने आते थे, लेकिन उन का वास्तविक मकसद किडनी ट्रांसप्लांट कराना होता था.

5 टीमें लगाई गईं

मामला गंभीर था, लिहाजा प्रदेश सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने भी इस मामले में विस्तृत जांच करने के आदेश दे दिए. डा. अमित व उस के साथियों की गिरफ्तारी के लिए 5 पुलिस टीमों का गठन किया गया. 48 घंटे बीत चुके थे, लेकिन डाक्टर का कुछ पता नहीं चल रहा था. आरोपी विदेश भाग सकता था, इसलिए लुकआउट नोटिस जारी कर के हवाई अड्डों को भी सूचना दे दी गई थी. इसी बीच 13 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी डाक्टर डोईवाला इलाके के ही नेचर विला रिसौर्ट में रुका हो सकता है. पुलिस टीम सर्च वारंट ले कर वहां पहुंची. वहां की तलाशी ले कर पुलिस ने एंट्री रजिस्टर को अपने कब्जे में ले लिया. लेकिन आरोपी वहां नहीं मिला.

पुलिस ने कमरा नंबर 103 की खासतौर पर तलाशी ली और जरूरी चीजों की जांच पड़ताल की. पुलिस डा. अमित व उस के साथियों की सरगर्मी से तलाश में जुटी थी. उस के करीबियों को उठा कर पूछताछ की जा रही थी. डा. अमित सहित सभी फरार आरोपियों के मोबाइल भी स्विच्ड औफ  आ रहे थे. पुलिस उन की काल डिटेल्स हासिल कर चुकी थी, लेकिन उस से भी कोई मदद नहीं मिल रही थी.

इस बीच पुलिस ने डा. अमित से जुडे़ 9 बैंक खातों को सीज करा दिया. डा. अमित की फरारी पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी. पुलिस टीमों के काम की मौनिटरिंग आला अधिकारी खुद कर रहे थे. 14 सितंबर को एएसपी लोकेश्वर सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम डा. अमित के करीबियों की मोबाइल सर्विलांस व मुखबिरों से मिली सूचना के जरिए दिल्ली होते हुए पहले चंडीगढ़ और फिर पंचकूला पहुंची. दरअसल, डा. अमित के एक मोबाइल नंबर की लास्ट लोकेशन वहीं मिली थी, इसलिए पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया था.

देहरादून से पंचकूला

इस पुलिस टीम मे एसओजी प्रभारी पी.डी. भट्ट, थानाप्रभारी रानीपोखरी धर्मेंद्र सिंह, एसएसआई मनोज रावत, रायवाला थानाप्रभारी आशीष गोसाई, एसआई ब्रजपाल सिंह, भुवनचंद्र पुजारी, मंजुल रावत, दिनेश सिंह सती, योगेश कुमार व दीपक सिंह पंवार आदि शामिल थे. पुलिस के पास सूचना थी कि डा. अमित व उस के साथी पंचकूला की साहिलपुरी कालोनी के सैक्टर-8 स्थित एक घर में छिपे हैं, लेकिन पुलिस ने वहां दबिश दी तो घर बंद मिला. अगले दिन यानी 15 सितंबर को पुलिस टीम सैक्टर-18 स्थित फाइव स्टार होटल पल्लवी पहुंची. होटल की पार्किंग में एक बीएमडब्ल्यू कार नंबर-डीएल 3 एफटी 5000 व मर्सिडीज कार नंबर यूपी 16 एआर 1100 खडी थीं, जिन्हें देख कर पुलिस को शक हुआ.

पुलिस टीम ने होटल का रजिस्टर देख कर और डा. अमित का फोटो दिखा कर होटल के स्टाफ से पूछमाछ की तो उन्होंने ऐसे व्यक्ति का अपने यहां ठहरना बताया. पुलिस ने एक कमरे मे दस्तक दी तो दरवाजा एक युवती ने खोला. पुलिस को देख कर युवती बुरी तरह घबरा गई. पुलिस उसे किनारे कर के अंदर दाखिल हो गई. डा. अमित कमरे में आराम से बैड पर लेटा विदेशी खजूर खा रहा था. पुलिस को देख कर उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं.

पुलिस ने डा. अमित के साथसाथ युवती व दूसरे कमरे में रुके उन के 2 साथियों को गिरफ्तार कर लिया. डा. अमित कसमसा कर रह गया. पकड़े गए लोगों में नर्स सरला, जीवन और मैनेजमैंट का काम देखने वाला प्रदीप शामिल था. पुलिस ने उन के कब्जे से दोनों कारों के अलावा 5 मोबाइल फोन, जिन में 2 आईफोन थे और 33 लाख 73 हजार रुपए नकद बरामद किए. डा. अमित 2 हजार के नए नोटों की गड्डियां बैग में लिए घूम रहा था. पुलिस टीम सभी को गिरफ्तार कर के देहरादून ले आई.

डा. अमित सहित अन्य से पुलिस ने गहराई से पूछताछ की. जांच व पूछताछ में डा. अमित के किडनी के गोरखधंधे की ऐसी कहानी निकल कर सामने आई, जिस ने पुलिस के आला अधिकारियों को भी चौंका दिया. कालाधंधा करने वाला यह डाक्टर देश का सब से बड़ा किडनी सौदागर निकला.

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64 वर्षीय अमित राउत मूलरूप से महाराष्ट्र का रहने वाला था और पिछले कई सालों से इस काम में लिप्त था. बताते हैं कि एक नेफ्रोलौजिस्ट के अधीन काम कर के उस ने किडनी ट्रांसप्लांट में महारथ हासिल की और फिर राह से भटक कर रैकेट चलाना शुरू कर दिया. सन 1993 में उस पर मुंबई में किडनी ट्रांसप्लांट का पहला केस दर्ज हुआ. उसे जेल जाना पड़ा. तब तक देश में न तो कोई ऐसा कानून था और न ही ऐसी कोई परिभाषा कि मानव अंगों का प्रत्यारोपण किन मामलों में सही है.

सरकार ने इसे गंभीरता से ले कर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम बना दिया, जिस में स्पष्ट किया गया कि डोनर कौन हो सकता है और ब्लड रिलेशन की परिभाषा क्या है. जेल से जमानत पर आ कर अमित जयपुर गया और फिर से इसी काम में जुट गया.

ठिकाने बदलबदल कर वह अपना काम करता रहा. जिस शहर या राज्य में भी वह पकड़ा जाता, उसे हमेशा के लिए छोड़ देता. न उसे कानून का डर था और न शर्म. उत्तराखंड उसे अपने लिए सुरक्षित ठिकाना लगा. कई साल पहले उस ने अपने एक दोस्त राजीव चौधरी के साथ मिल कर उत्तराखंड के डेंटल कालेज के अंदर 50 लाख रुपए की सालाना लीज पर जगह ले कर गंगोत्री चैरिटेबल हौस्पिटल खोल लिया. चैरिटेबल की आड़ भर थी, वास्तव में अमित का असली धंधा कुछ और था. कई लोगों की अच्छेबुरे कामों को ले कर अपनी धारणा होती है.

किडनी ट्रांसप्लांट को ले कर डा. अमित की धारणा थी कि यह सामाजिक काम है. इस से लोगों की जिंदगी बचती है. कानून से खेलने की उस की जैसे आदत बन चुकी थी. क्योंकि इस में मोटी कमाई थी. वह जरूरतमंद गरीब लोगों की किडनी 2 से 3 लाख रुपए में लेता था, जबकि उसे 40 से 50 लाख रुपए में ट्रांसप्लांट करता था. अपने इस काम का वह इतना एक्सपर्ट हो चुका था कि उस का कभी भी कोई औपरेशन असफल नहीं हुआ.

दूसरे डाक्टरों को इस काम में 6 घंटे लगते थे, जबकि यह काम वह महज 2 से ढाई घंटे में कर देता था. वह देशभर में फैले अपने एजेंटों के जरिए कई बार डोनरों को हवाईजहाज की यात्रा कराता था. गरीब डोनर स्वेच्छा से किडनी देते थे और ट्रांसप्लांट कराने वाले विदेशी होते थे, इसलिए मामला खुलता नहीं था. अमित का पूरा स्टाफ उस के इस धंधे को जानता था. लेकिन वह उन्हें न सिर्फ अच्छा पैसा देता था, बल्कि अपने धंधे को समाज सेवा बताता था. अमित शातिर दिमाग था, वह 5 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था. इन में देशी एजेंटों, विदेशी एजेंटों, डाक्टरों व खरीददारों के लिए अलगअलग नंबर थे.

अरबों की संपत्ति का मालिक

अमित का अंतरराष्ट्रीय मैनेजमेंट नेटवर्क अमेरिका, श्रीलंका, नेपाल, तुर्किस्तान, ओमान, दुबई, इंग्लैंड समेत एक दर्जन से भी ज्यादा देशों में फैला हुआ था. विदेशी एजेंटों से संपर्क के लिए उस ने औनलाइन सिस्टम बनाया हुआ था. वह बड़े रईसों के औपरेशन के लिए विदेश भी जाता था. डा. अमित दिमाग का इतना तेज था कि उस की 14 भाषाओं पर पकड़ थी. इसी धंधे से अमित ने कई सौ करोड़ की संपत्ति जुटा ली थी.

भारत के दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु राज्यों के अलावा कनाडा, आस्ट्रेलिया, ग्रीस, नेपाल व हौंगकौंग में भी उस की संपत्तियां हैं.

देहरादून में ही उस की 50 बीघा से ज्यादा जमीन है. मनी लौंड्रिंग के केस में प्रवर्तन निदेशालय उस की संपत्तियों को जब्त भी करता रहा है. लेकिन डा. अमित की कमाई ही इतनी थी कि उस पर कोई असर नहीं पड़ा. 11 सितंबर को पैसों को ले कर डोनर से झगड़ा न हुआ होता तो शायद ही उस की पोल खुलती.

पुलिस द्वारा एजेंट के पकड़े जाने की खबर लगते ही वह अपने खास स्टाफ के साथ फरार हो गया था. अमित जानता था कि पुलिस उसे भूखे शेर की तरह ढूंढ रही है. वह छिपताछिपाता पंचकूला के होटल में जा कर रुका. डा. अमित पूरी तरह आश्वस्त था कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी. वहां से उस का इरादा नेपाल भागने का था, लेकिन उस से पहले ही वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.

किडनी रैकेट के सरगना डा. अमित की फैमिली लाइफ भी अजीब निकली. उस की पहली शादी सुनीता के साथ हुई थी, जबकि दूसरी बीवी पूनम कनाडा में है. उस ने तीसरी शादी बुलबुल नाम की महिला से करने की बात पुलिस को बताई.

खुद को समाज सेवी समझता था डाक्टर

खास बात यह थी कि वह चौथी शादी करने की भी तैयारी में था, लेकिन किडनी कांड के उछलने के बाद उस की योजना पर पानी फिर गया. डा. अमित की पहली पत्नी का बेटा अक्षय एमबीबीएस और एमडी डिग्री धारक है और अमेरिका में रहता है. अपने काले धंधे को ले कर अमित को कोई अफसोस नहीं है. उस का कहना था कि कानून की नजर में वह भले ही अपराधी हो, लेकिन उस ने सैकड़ों जिंदगियां बचाई हैं. उन सब की दुआएं उस के साथ हैं.

पुलिस ने अमित सहित सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक अमित की जमानत नहीं हो सकी थी. जबकि पुलिस उस के अन्य साथियों को तलाश रही थी.

17 सितंबर को पुलिस ने अमित के दोस्त राजीव चौधरी (जो अस्पताल के संचालन का काम देखता था) की पत्नी अनुपमा, मैडिकल स्टोर संचालक अभिषेक व अमित के एक अन्य साथी जगदीश को भी गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था. राजीव के साथ अनुपमा भी हौस्पिटल का काम देखती थी. इतना ही नहीं, सर्जरी के लिए खरीदी जाने वाली दवाओं का भुगतान अनुपमा के खातों से ही होता था. पूछताछ के दौरान इन लोगों ने भी अमित के गोरधखंधे की पोल खोली है.

–  कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जिसे मरा समझा, वह जिंदा थी

हरियाणा के जिला पानीपत के थाना नगर के मोहल्ला आजादनगर की रहने वाली 20 साल की सिमरन दुबे आर्य डिग्री कालेज में बीए के दूसरे साल में पढ़ रही थी. पढ़ाई के साथसाथ वह एनएसएस (नेशनल सर्विस स्कीम) यानी राष्ट्रीय सेवा योजना की सदस्य भी थी. यह संस्था अपने सदस्यों का कैंप लगवाती है, जिस में समाजसेवा कराई जाती है. इस में जिस लड़के या लड़की का काम अच्छा होता है, उसे कालेज की ओर से प्रमाण पत्र दिया जाता है.

एसडी कालेज का बीए फाइनल ईयर में पढ़ रहा कृष्ण देशवाल एनएसएस का अध्यक्ष था. इसी साल जनवरी महीने में एसडी कालेज का एनएसएस का कैंप आर्य डिग्री कालेज में लगा था. उसी दौरान सिमरन दुबे की मुलाकात कृष्ण देशवाल से हुई तो दोनों में अच्छी जानपहचान हो गई. थाना नगर के ही मोहल्ला बराना की रहने वाली ज्योति भी सिमरन के साथ आर्य डिग्री कालेज में पढ़ती थी. दोनों में पटती भी खूब थी. उस से भी कृष्ण की दोस्ती हो गई थी.

5 सिंबर, 2017 की शाम 4 बजे के करीब सिमरन के मोबाइल फोन की घंटी बजी. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘हैलो सिमरन, मैं एसडी कालेज से कृष्ण देशवाल बोल रहा हूं, तुम कैसी हो?’’

‘‘नमस्ते सर,’’ चहकते हुए सिमरन ने कहा, ‘‘मैं तो अच्छी हूं सर, आप बताइए आप कैसे हैं?’’

‘‘मैं भी ठीक हूं, यह बताओ कि तुम इस समय क्या कर रही हो?’’

‘‘घर पर हूं सर, कोई काम है क्या? अगर कोई काम हो तो कहिए, मैं आ जाती हूं.’’ सिमरन ने कहा.

‘‘दरअसल, मिलिट्री के कुछ अधिकारी शहर में आ रहे हैं. उन के लिए जीटी रोड पर स्थित गौशाला मंदिर परिसर में कैंप लगाना है. अगर तुम आ जाओ तो मेरा काम काफी आसान हो जाएगा. ज्योति भी आ रही है. कालेज के कुछ अन्य लड़के भी आ रहे हैं.’’

‘‘ठीक है सर, ऐसी बात है तो मैं भी आ जाती हूं.’’

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‘‘ओके, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’ कृष्ण ने कहा और फोन काट दिया.

कृष्ण देशवाल से बात होने के बाद सिमरन जल्दी से तैयार हो कर घर वालों से कालेज जाने की बात कह कर निकल पड़ी. करीब घंटे भर बाद वह कृष्ण द्वारा बताए गौशाला मंदिर पहुंच गई. ज्योति वहां पहले से ही मौजूद थी. उसे देख कर सिमरन का चेहरा खिल उठा.

दोनों सहेलियां एकदूसरे के गले मिलीं और आपस में बातें करने लगीं. दोनों बातें कर रही थीं कि तभी कृष्ण सिमरन के लिए एक गिलास में कोल्डिड्रिंक ले आया. सिमरन ने उन्हें भी पीने को कहा तो दोनों ने एक साथ कहा कि उन्होंने अभीअभी पी है. इस के बाद सिमरन आराम से कोल्डड्रिंक पीने लगी.

मंदिर के कमरे में लाश

कृष्ण देशवाल, सिमरन दुबे और ज्योति जिस कमरे में ठहरे थे, उस के बगल वाले कमरे में कंप्यूटर सिखाया जाता था. कंप्यूटर सिखाने का यह काम पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. वाई.डी. त्यागी द्वारा चलाई जा रही एनजीओ के अंतर्गत होता था. कंप्यूटर सिखाने के लिए वंदना को रखा गया था.

जिस कमरे में कृष्ण, ज्योति और सिमरन ठहरे थे, वह अंदर से बंद था. इस से वंदना को थोड़ी हैरानी हो रही थी. उन से नहीं रहा गया तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया. करीब 15 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद खुला तो उस में से एक लड़का और लड़की बैग लिए बाहर निकले.

दोनों बाहर से कमरा बंद करने लगे तो वंदना ने उन से उन के साथ की एक अन्य लड़की के बारे में पूछा. वे बिना कुछ कहे चले गए तो वंदना ने इस बात की सूचना मंदिर के पुजारी वेदप्रकाश तिवारी को दे दी. वेदप्रकाश को मामला गड़बड़ लगा तो उन्होंने अपने भतीजे अभिनव को हकीकत पता करने के लिए भेजा.

अभिनव हौल से होता हुआ उस कमरे पर पहुंचा, जिसे लड़का और लड़की बाहर से बंद कर गए थे. दरवाजा खोल कर जैसे ही वह अंदर पहुंचा, वहां की हालत देख कर वह चीखता हुआ बाहर आ गया. उस की चीख सुन कर वंदना भी घबरा गई. वह अभिनव के पास पहुंची. उस के पूछने पर अभिनव ने बताया कि कमरे में एक लड़की की लाश पड़ी है.

अब वंदना की समझ में सारा माजरा आ गया. अभिनव ने यह जानकारी पुजारी वेदप्रकाश तिवारी को दी तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर दिया. पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा यह सूचना थाना चांदनी बाग पुलिस को दे दी गई. सूचना मिलते ही थाना चांदनीबाग के थानाप्रभारी संदीप कुमार पुलिस बल के साथ गौशाला मंदिर पहुंच गए. उन के पहुंचने से पहले पुलिस चौकी किशनपुरा के चौकीप्रभारी वीरेंद्र सिंह वहां पहुंच चुके थे. संदीप कुमार और वीरेंद्र सिंह ने घटनास्थल और लाश का निरीक्षण किया. मृतका के गले पर गला दबाने का स्पष्ट निशान था. इस का मतलब हत्या गला दबा कर की गई थी. उस के चेहरे को तेजाब डाल कर झुलसा दिया गया था. शायद हत्यारे ने पहचान मिटाने के लिए ऐसा किया था.

कमरे में एक लेडीज पर्स मिला.  पुलिस ने उस पर्स की तलाशी ली तो उस में से आर्य डिग्री कालेज का एक आईडी कार्ड मिला, जिस पर ज्योति लिखा था. उस पर पिता का नाम, पता और फोन नंबर भी लिखा था. पिता का नाम रामपाल था. वह थाना नगर के मोहल्ला बराना में रहते थे. एसआई वीरेंद्र सिंह ने फोन कर के रामपाल को वहीं बुला लिया.

रामपाल ने गौशाला मंदिर आ कर कमरे में मिली लाश को देखा तो फफकफफक कर रोने लगे. लाश उन की बेटी ज्योति की थी. शिनाख्त न हो सके, इस के लिए हत्यारों ने तेजाब डाल कर बड़ी बेरहमी से उस के चेहरे को झुलसा दिया था.

घटना की सूचना पा कर एसपी राहुल शर्मा, सीआईए-3 प्रवीण कुमार और डीएसपी जगदीश दूहन भी घटनास्थल पर आ गए थे. घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस ने देखा कि कमरे में पड़े डबल बैड का गद्दा उठा कर नीचे फर्श पर बिछाया गया था. लाश को उसी पर लिटा कर उस के चेहरे पर तेजाब डाला गया था. तेजाब से मृतका का चेहरा तो बुरी तरह झुलस ही गया था, गद्दा भी काफी दूर तक झुलस गया था.

मृतका की चुनरी और चप्पलें भी वहीं पड़ी थीं. बचाव के लिए मृतका ने हाथपांव चलाए थे, जिस से उस के चश्मे का एक शीशा टूट गया था. पुलिस ने कंप्यूटर की शिक्षा देने वाली वंदना से पूछताछ की तो उस ने बताया था कि शाम 4 बजे वह वहां आई तो कम्युनिटी हौल के दोनो दरवाजे अंदर से बंद थे. करीब 15 मिनट तक दरवाजा खटखटाने के बाद 19-20 साल की एक लड़की ने दरवाजा खोला.

लड़की के साथ एक लड़का भी था. वह हौल के कोने में बने कमरे का दरवाजा बंद कर रहा था. वंदना ने उस के साथ आई दूसरी लड़की के बारे में पूछा तो वह उसे धमका कर लड़की के साथ चला गया. लड़की सलवार सूट पहने थी, जबकि लड़का जींस और टीशर्ट पहने था.

फैल गई सनसनी

लड़के और लड़की के पास बैग थे. उन्होंने एकएक पौलीथीन भी ले रखी थी. लड़के के हाथ में ड्यू (कोल्डड्रिंक) की एक बोतल भी थी. वदंना को शक हुआ तो उस ने अपनी शंका पुजारी को बताई. इस के बाद पुजारी ने अपने भतीजे को भेजा तो कमरे में लाश होने का पता चला. इस तरह लाश बरामद होने से शहर में सनसनी फैल गई थी. क्योंकि गौशाला मदिर अति सुरक्षित माना जाता था. हैरानी की बात यह थी कि दोनों लड़कियों और लड़के के वहां आने की जानकारी पुजारी को नहीं थी. मंदिर में सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे थे कि उसी से लड़के और लड़की के बारे में कुछ पता चलता.

पुलिस ने कमरे में मिला सारा सामान जब्त कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था. इस के बाद रामपाल की ओर से हत्या का मुकदमा दर्ज कर के मामले की जांच शुरू कर दी गई थी. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने ज्योति की लाश उस के पिता रामपाल को सौंप दी तो उन्होंने उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

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महिला आयोग भी सक्रिय

इस हत्याकांड की सूचना राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा को मिली तो उन्होंने भी घटनास्थल की दौरा किया. वह पुलिस अधिकारियों से भी मिलीं और ज्योति के घर वालों से भी. उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस ने 48 घंटे के अंदर हत्यारे को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है. इस मामले में तेजाब का उपयोग किया गया था. जबकि कोर्ट ने तेजाब की बिक्री पर रोक लगा रखी है. यह भी जांच का विषय था कि रोक के बावजूद हत्यारे को तेजाब मिला कहां से?

अगले दिन पुलिस ने मृतका ज्योति के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस के नंबर पर अंतिम फोन अटावला गांव के रहने वाले राजेंद्र देशवाल के बेटे कृष्ण का आया था. काल लिस्ट देख कर पुलिस हैरान थी. दरअसल, दोनों के बीच 14 से 15 हजार सैकेंड बात की गई थी.

पुलिस तुरंत ज्योति के घर पहुंची और रामपाल से कृष्ण् के बारे में पूछा. उस ने बताया कि कृष्ण ज्योति के कालेज में आताजाता था, दोनों एकदूसरे को जानतेपहचानते थे. उन में अच्छी दोस्ती भी थी.

पुलिस को इस बात पर हैरानी हुई कि कृष्ण ज्योति का अच्छा दोस्त था और उस के घर भी आताजाता था. लेकिन उस की हत्या की बात सुन कर उस के घर नहीं आया था. कहीं ऐसा तो नहीं कि उसी ने ज्योति की हत्या की हो और फरार हो गया हो.

पुलिस को कृष्ण देशवाल पर शक हुआ तो उस के बारे में पता करने उस के घर पहुंच गई. घर वालों से पता चला कि वह 5 सितंबर से ही घर से 1 लाख 35 हजार रुपए ले कर गायब है. इस बात से पुलिस का शक यकीन में बदल गया. पुलिस को लगा कि ज्योति की हत्या में कृष्ण का ही हाथ है. घर वालों से पुलिस को पता चला कि कृष्ण के घर वाले भैंसों के खरीदने और बेचने का व्यवसाय करते थे. वे पैसे उसी के थे, जिन्हें कृष्ण ले कर भागा था.

इस बीच पुलिस को पता चल गया कि उस दिन कृष्ण के साथ जो लड़की थी, वह सिमरन दुबे थी. पुलिस दोनों के फोटो ले कर गौशाला मंदिर पहुंची तो फोटो देख कर वंदना ने बताया कि उस दिन यही दोनों कमरे से निकले थे.

इस से साफ हो गया कि ज्योति की हत्या कृष्ण और सिमरन ने ही की थी. इस के बाद पुलिस ने उन के फोटो अखबारों में छपवा कर उन के बारे में बताने वाले को ईनाम की भी घोषणा कर दी.

पुलिस कृष्ण और सिमरन दुबे की तलाश में जीजान से जुटी थी कि सिमरन के पिता अतुल दुबे थाना नगर पहुंचे और उन्होंने कृष्ण देशवाल के खिलाफ सिमरन के अपहरण की तहरीर दे दी. उन का कहना था कि उन की बेटी के चरित्र पर जो लांछन लगाया गया है, वह सरासर गलत है. सिमरन ऐसी घिनौनी हरकत कतई नहीं कर सकती.

उन का यह भी कहना था कि उस दिन कमरे में जो लाश मिली थी, वह ज्योति की नहीं, बल्कि सिमरन की थी. लेकिन उन की बात कोई मानने को तैयार नहीं था. उन का कहना था कि मृतका के कान की बाली और हाथ में बंधा धागा सिमरन का नहीं था. इस पर पुलिस का कहना था कि कृष्ण और सिमरन को साथ जाते वंदना ने देखा था, इसलिए उन की बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता.

पुलिस पहुंची शिमला

पुलिस कृष्ण और सिमरन की लोकेशन पता कर रही थी. लेकिन फोन बंद होने से उन की लोकेशन नहीं मिल रही थी. जैसे ही फोन चालू हुआ, उन की लोकेशन शिमला की मिल गई. लोकश्ेन मिलते ही सीआईए-3 प्रवीण कुमार टीम के साथ शिमला रवाना हो गए. स्थानीय पुलिस की मदद से उन्होंने होटलों की तलाशी शुरू कर दी. सैकड़ों होटल की तलाशी के बाद पुलिस टीम उस होटल तक पहुंच गई, जहां दोनों ठहरे थे.

लेकिन जब होटल की रजिस्टर चैक किया गया तो कृष्ण और सिमरन के नाम से यहां कोई नहीं ठहरा था. पुलिस की निगाह श्याम और राधा नाम के उन दो ग्राहकों पर टिक गई, जिन का पता पानीपत का था.

यहीं दोनों से चूक हो गई थी. उन्होंने होटल के रजिस्टर में नाम तो श्याम और राधा लिखाए थे, लेकिन पता नहीं बदला था. बस इसी से पुलिस को शक हुआ, इस के बाद पुलिस कमरे पर पहुंची तो पुलिस को देख कर दोनों सन्न रह गए. कृष्ण नीचे फर्श पर बैठा था, जबकि ज्योति बैड पर लेटी थी.

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मरने वाली ज्योति नहीं सिमरन

जिस ज्योति को लोग मरा समझ रहे थे, दरअसल वह जिंदा थी. मंदिर के कमरे से जो लाश मिली थी, वह ज्योति की नहीं, बल्कि सिमरन दुबे की थी. पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर के पानीपत ले आई. उन्हें जब एसपी राहुल शर्मा के सामने पेश किया गया तो वह भी हैरान रह गए.

राहुल शर्मा ने ज्योति के पिता रामपाल को बुला कर ज्योति को उन के सामने खड़ा किया तो बेटी को जिंदा देख कर वह सिर थाम कर बैठ गए. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में कृष्ण और ज्योति ने सिमरन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद 8 तिसंबर को अदालत में पेश कर के विस्तारपूर्वक पूछताछ एवं सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने उन्हें 4 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में सिमरन की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

20 साल की सिमरन दुबे हरियाणा के जिला पानीपत के थाना नगर के मोहल्ला आजादनगर के रहने वाले आलोक दुबे की बेटी थी. वह 4 भाईबहनों में सब से बड़ी थी. वह आर्य डिग्री कालेज में बीए के दूसरे साल में पढ़ रही थी. उसी के साथ थाना नगर के ही बराना की रहने वाली ज्योति भी पढ़ती थी. दोनों पक्की सहेलियां तो थीं ही, एनएसएस की सदस्य भी थीं.

बात इसी साल जनवरी की है. एसडी डिग्री कालेज का एनएसएस का कैंप आर्य डिग्री कालेज में लगा था. कैंप का अध्यक्ष एसडी कालेज में पढ़ने वाला कृष्ण देशवाल था, जो बीए फाइनल ईयर में पढ़ रहा था. वह गांव अटावला का रहने वाला था. उस के पिता राजेंद्र देशवाल भैंसे खरीदनेबेचने का काम करते थे.

कृष्ण 2 बहनों का एकलौता भाई था. बहनें उस से छोटी थीं. घर में बड़ा और एकलौता बेटा होने के बावजूद वह जिम्मेदारी से काम नहीं करता था. पुलिस के अनुसार, जब कृष्ण स्कूल में पढता था, तब उस ने खुद के अपहरण का ड्रामा रचा था. वह दिन भर इधरउधर घूमा करता था. आर्य कालेज में लगे कैंप के दौरान ही उस की मुलाकात सिमरन और ज्योति से हुई थी. पहली ही नजर में ज्योति उस के मासूम चेहरे पर दिल दे बैठी.

कृष्ण ने ज्योति की आंखों से उस के दिल की बात पढ़ ली.  छरहरे बदन और तीखी नयननक्श वाली ज्योति भी उसे भा गई थी. इस के बाद अकसर दोनों की मुलाकातें होने लगीं. जल्दी ही उन की ये मुलाकातें प्यार में बदल गईं.

दोनों एकदूसरे से दीवानगी की हद तक प्यार करने लगे. जल्दी ही हालात यह हो गई कि अब वे एकदूसरे को देखे बिना नहीं रह सकते थे. अब इस का आसान तरीका था, वे शादी कर लें जिस से दोनों एकदूसरे की आंखों के सामने बने रहें.

ज्योति और कृष्ण की जातियां अलगअलग थीं. इसलिए ज्योति जानती थी कि उस के घर वाले कभी भी कृष्ण से उस की शादी नहीं करेंगे.

जबकि वह कृष्ण के बिना रह नहीं सकती थी. यही हाल कृष्ण का भी था. इसलिए उस ने ज्योति से भाग चलने को कहा. लेकिन ज्योति ने उस के साथ इसलिए भागने से मना कर दिया, क्योंकि इस से उस के घर वालों की बदनामी होती.

सहेली को बनाया शिकार

इस के बाद उन्होंने एक साथ रहने के बारे में सोचाविचारा तो उन के दिमाग में आया कि क्यों न वे अपनी कदकाठी के 2 लोगों की हत्या कर के उन के चेहरे तेजाब से इस तरह झुलसा दें कि कोई उन्हें पहचान न पाए. इस के बाद वे उन्हें अपने कपड़े पहना कर अपने आईकार्ड, फोन वगैरह वहां छोड़ देंगे, ताकि लोगों को लगे कि उन की हत्या हो चुकी है.

ज्योति की सहेली सिमरन दुबे उसी की कदकाठी की थी. वे उसे जहां बुलाते, वह वहां आ भी जाती. इसलिए सिमरन की हत्या की योजना बन गई. अब कृष्ण की कदकाठी के लड़के को ढूंढना था.

कृष्ण के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था. 5 सितंबर को एनएसएस के कैंप के बहाने कृष्ण ने सिमरन और रमेश को फोन कर के गौशाला मंदिर के पहली मंजिल स्थित कमरे पर बुला लिया.

कृष्ण दाढ़ी नहीं रखे था, जबकि रमेश रखे था. इसलिए कृष्ण ने उस से दाढ़ी बनवा कर आने को कहा. लेकिन वह गोहाना मोड़ पर पहुंचा तो वहां कोई सैलून नहीं था, इसलिए उस ने फोन कर के कृष्ण को यह बात बताई तो उस ने उसे आने से मना कर दिया. रमेश वहीं से लौट गया. लेकिन सिमरन कृष्ण और ज्योति के जाल में फंस गई.

सिमरन दुबे गौशाला मंदिर पहुंची तो कृष्ण और ज्योति वहां पहले से ही मौजूद थे. ज्योति को देख कर सिमरन बहुत खुश हुई. उस ने यह खुशी उस के गले मिल कर जाहिर की. गौशाला मंदिर पहुंचने से पहले ही कृष्ण ने कोल्डड्रिंक, नींद की गोलियां और तेजाब की व्यवस्था कर रखी थी. इन्हें वह अपने साथ लाए बैग में छिपा कर लाया था.

नींद की गोली मिली कोल्डड्रिंक पिलाई

कृष्ण ने सिमरन को नींद की गोलियां मिली कोल्डड्रिंक पीने को दी तो उस ने उन से भी कोल्डड्रिंक पीने को कहा. दोनों ने कहा कि उन्होंने अभीअभी पी है. कोल्डिड्रिंक पीने के कुछ देर बाद सिमरन की आंखें मुंदने लगीं. फिर वह बेहोश सी हो कर नीचे फर्श पर लेट गई. इस के बाद ज्योति ने उस के दोनों पैर पकड़ लिए तो कृष्ण ने उस का गला घोंट दिया.

इस तरह सिमरन को मौत के घाट उतार कर ज्योति ने उसे अपने कपड़े पहना दिए और उस के चेहरे पर तेजाब डाल कर झुलसा दिया. वह ज्योति है, यह साबित करने के लिए उस ने अपना आईकार्ड और मोबाइल फोन उस के पास छोड़ दिया, ताकि लोग इसे ज्योति समझें.

सिमरन की हत्या करने के बाद ज्योति और कृष्ण कमरे से बाहर आए और औटो से पानीपत रेलवे स्टेशन पहुंचे. उस समय वहां कोई टे्रन नहीं थी, इसलिए वे बसस्टैंड गए. वहां से चंडीगढ़ की बस पकड़ कर वे अगले दिन जीरकपुर पहुंच गए. अगले दिन अखबार में ज्योति की हत्या का समाचार छपा तो दोनों निश्चिंत हो गए कि हत्या का शक सिमरन पर किया जाएगा.

उन्होंने आराम से जीरकपुर के एक मौल में शौपिंग की और शिमला जा कर बसस्टैंड के नजदीक होटल रौयल में कमरा ले कर ठहर गए.

पुलिस उन के पीछे पड़ी है, इस का अंदाजा उन्हें बिलकुल नहीं था. पुलिस ने उन की तलाश में शिमला में 2 घंटे में सैकड़ों होटल छान मारे थे. जब पुलिस रौयल होटल में पहुंची तो पुलिस को देख कर सारा स्टाफ भाग गया. पुलिस को कमरा नंबर भी पता नहीं था. आखिर आधे घंटे की मशक्कत के बाद एक कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर कृष्ण और ज्योति मिले.

ज्योति के जिंदा बरामद होने के बाद सिमरन के घर वाले बेटी की हत्या के शोक में डूब गए थे. जबकि आलोक दुबे घटना वाले दिन से ही कह रहे थे कि मरने वाली ज्योति नहीं, उन की बेटी सिमरन है. लेकिन कोई उन की बात मानने को तैयार नहीं था.

ज्योति के जिंदा बरामद होने के बाद पुलिस आलोक दुबे और उन की पत्नी ऊषा को मधुबन ले गई, जहां डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए. रिपोर्ट आने के बाद निश्चित हो जाएगा कि गौशाला मंदिर के कमरे में मिली लाश सिमरन की ही थी.

पुलिस की लापरवाही

सिमरन हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ कर पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन इस में पुलिस की लापरवाही भी नजर आ रही है. शिमला के होटल में आईडी के रूप में कृष्ण और ज्योति ने अपने आधार कार्ड जमा कराए थे, वे आधार कार्ड श्याम और राधा के नाम से थे. साफ था कि वे फर्जी थे.

पुलिस ने जब कृष्ण से उन के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि आधार कार्ड उस के दोस्त देव कपूर ने जयपुर से बनवाए था. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है. अब पुलिस आधार कार्ड बनाने वाले को गिरफ्तार करना चाहती है.

पुलिस सिमरन का मोबाइल फोन बरामद करना चाहती है, जिस के बारे में कृष्ण और ज्योति कभी कहते हैं कि शिमला में झाडि़यों में फेंक दिया है तो कभी कहते हैं कि रास्ते में फेंक दिया था. इस के अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने तेजाब और नींद की गोलियां कहां से खरीदी थीं.

इन के बारे में उन का कहना है कि तेजाब गुंड़मंडी से लिया था, जबकि नींद की गोलियां अपने एक रिश्तेदार के मैडिकल स्टोर से मंगवाई थीं.

रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

प्रेम की अंधी गली में फंस कर ज्योति और कृष्ण ने जो कदम उठाया, आखिर उस से उन्हें क्या मिला. उन्होंने जो अपराध किया है, वे कानून की नजरों से बच नहीं पाएंगे. लेकिन अगर बच भी गए तो शायद ही समाज उन्हें सुकून से रहने दे.

अभिनेत्री बिदिशा बेजबरुआ : शक में गंवाई जान

मुंबई में मौजूद निशीथ झा ने अपनी पत्नी बिदिशा बेजबरुआ को कई बार फोन किया. उस के फोन की घंटी तो बजी, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही थी. वह परेशान हो गए कि पता नहीं बिदिशा फोन क्यों नहीं उठा रही?

बिदिशा गुड़गांव के सेक्टर-43 स्थित सुशांत लोक में रहती थी. वह असम की मशहूर सिंगर और फिल्म अभिनेत्री थी. रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में भी उस ने काम किया था. निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को ही गुड़गांव में यह फ्लैट किराए पर लिया था.

निशीथ ने जिस ब्रोकर के माध्यम से यह फ्लैट किराए पर लिया था, उसे अपना परिचय दे कर फोन कर के कहा, ‘‘मैं इस समय मुंबई में हूं. मेरी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है. आप उसे किसी अच्छे डाक्टर को दिखा दीजिए.’’

इंसानियत के नाते ब्रोकर सुशांत एस्टेट की नवीं मंजिल स्थित उस फ्लैट पर पहुंच गया, जिसे उस ने कुछ दिनों पहले ही निशीथ को किराए पर दिलवाया था. फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद था. फ्लैटों में रहने वाले लोग वैसे भी अपने दरवाजे बंद ही रखते हैं. ब्रोकर ने घंटी का बटन दबा दिया और वह दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगा. दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दोबारा घंटी बजाई. इस बार भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला.

कई बार घंटी बजाने के बाद भी जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो ब्रोकर ने निशीथ को फोन कर के दरवाजा न खुलने की बात बता दी. निशीथ ने कहा कि हो न हो बिदिशा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई हो और वह दरवाजा खोलने लायक ही न हो. उस ने उस से अनुरोध किया कि वह जल्द से जल्द फ्लैट का दरवाजा तोड़ कर उसे डाक्टर के पास ले जाए.

निशीथ से बात होने के बाद ब्रोकर दरवाजे को जोरों से धक्का मार कर तोड़ने लगा. दरवाजा तोड़ने की आवाज सुन कर पड़ोसी अपनेअपने फ्लैटों से बाहर आ गए. उन में ज्यादातर लोग उस ब्रोकर को जानते थे. उन्होंने ब्रोकर से दरवाजा तोड़ने की वजह पूछी तो उस ने फ्लैट के मालिक निशीथ से हुई बात उन लोगों को बता दी.

हकीकत से अनभिज्ञ थे पड़ोसी

पड़ोसियों को ब्रोकर की बात पर विश्वास नहीं हुआ तो उस ने निशीथ को फोन मिला कर स्पीकर औन कर के पड़ोसियों द्वारा दरवाजा तोड़ने का विरोध करने की बात बता दी. निशीथ ने पड़ोसियों को बताया कि फ्लैट में उस की पत्नी अकेली है और उस की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. उसे अभी डाक्टर के पास ले जाना है.

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पड़ोसियों को पता चला कि निशीथ की पत्नी की ज्यादा तबीयत खराब है तो उन्होंने भी दरवाजा तोड़ने में ब्रोकर की मदद की. थोड़ी कोशिश के बाद दरवाजा टूट गया. लोग अंदर दाखिल हुए तो वहां का नजारा देख कर सभी सन्न रह गए. निशीथ की पत्नी की लाश पंखे से लटक रही थी. ब्रोकर ने फोन द्वारा यह खबर निशीथ और थाना सुशांत लोक पुलिस को दे दी.

सुशांत एस्टेट थाने से कुछ ही दूर स्थित है, इसलिए खबर मिलते ही थानाप्रभारी गौरव, एसआई सतीश, एएसआई अर्जुन आदि के साथ वहां पहुंच गए. पुलिस नौवीं मंजिल स्थित निशीथ के फ्लैट पर पहुंची तो वहां बिदिशा की लाश पंखे से झूलती मिली. थानाप्रभारी ने इस की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को दे दी.

थोड़ी देर में क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम भी मौके पर पहुंच गई. उसी बीच डीसीपी (ईस्ट) दीपक सहारण भी वहां आ गए. मामला एक फिल्म अभिनेत्री की मौत का था, इसलिए वहां फ्लैटों में रहने वाले जिन लोगों को भी जानकारी मिली, वे बिदिशा के फ्लैट पर पहुंच गए.

पुलिस ने लोगों के सहयोग से लाश उतार कर कमरे की तलाशी ली, पर वहां कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. पुलिस ने आसपास के फ्लैटों में रहने वाले लोगों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बिदिशा कुछ दिनों पहले ही वहां रहने आई थी, इसलिए वे इस के बारे में ज्यादा नहीं जानते.

हां, उन्होंने इतना जरूर बताया कि बिदिशा का व्यवहार बहुत अच्छा था. बातचीत से कभी नहीं लगा कि उसे कोई तनाव था. वह जब भी मिलती थी, खुश दिखती थी.

मौके पर वह ब्रोकर भी मौजूद था, जिस ने बिदिशा को यह फ्लैट किराए पर दिलवाया था. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि बिदिशा और उस के पति निशीथ से उस की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे लोग किराए पर फ्लैट लेने आए थे. पुलिस को ब्रोकर से बिदिशा के पति निशीथ का मोबाइल नंबर मिल गया था. थानाप्रभारी ने निशीथ को फोन कर के बिदिशा द्वारा आत्महत्या करने की सूचना दी. उस ने कहा कि इस समय वह मुंबई में है और कल तक गुड़गांव पहुंच जाएगा.

बिदिशा का फोन कमरे में ही था. उस में से पुलिस को उस के मातापिता का नबर मिल गया. पुलिस ने उस के पिता अश्वनी बेजबरुआ को फोन कर के बिदिशा के सुसाइड करने की बात बता दी. वह गुवाहाटी, असम में रहते थे. बेटी की मौत की खबर पा कर अश्वनी और उन की पत्नी रंजीता रोनेबिलखने लगी.

वे दोनों अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ फ्लाइट से सोमवार की रात को दिल्ली आ गए. दिल्ली से टैक्सी ले कर वे गुड़गांव पहुंचे. इस से पहले पुलिस ने मौके की जरूरी काररवाई कर के लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया था.

मृतक अभिनेत्री बिदिशा के पिता अश्वनी ने थानाप्रभारी गौरव कुमार को बताया कि बिदिशा बहुत समझदार लड़की थी. पिछले साल ही निशीथ से उस की शादी हुई थी. शादी के बाद बिदिशा को पता चला कि निशीथ के किसी और लड़की से संबंध हैं.

बिदिशा निशीथ को उस लड़की से मिलने के लिए रोकती थी, पर वह नहीं मानता था. इसी बात को ले कर वह बिदिशा से झगड़ता रहता था. बिदिशा के तनाव की सब से बड़ी वजह यही थी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उन की बेटी की मौत का जिम्मेदार निशीथ है. उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जानी चाहिए.

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निशीथ के खिलाफ केस दर्ज

मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए थानाप्रभारी ने डीसीपी दीपक सहारण से इस मसले पर बात की. उन्हीं के निर्देश पर थानाप्रभारी ने 18 जुलाई, 2017 को निशीथ के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया.

अगले दिन निशीथ गुड़गांव पहुंचा तो पुलिस ने उस से पूछताछ की. उस ने बताया कि वह बिदिशा को खुश रखता था. बस कभीकभी छोटेमोटे मतभेद हो जाते थे, जो अकसर हर घर में होते रहते हैं. पर ऐसी कोई बात नहीं थी, जिस से बिदिशा को जान देनी पड़ती. बिदिशा ने ऐसा क्यों किया, यह उस की भी समझ में नहीं आ रहा.

निशीथ भले ही खुद को बेकसूर बता रहा था, लेकिन बिदिशा के पिता ने उसी पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने 18 जुलाई को निशीथ को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस का मोबाइल फोन और लैपटौप भी कब्जे में ले लिया.

असम की गायिका और अभिनेत्री बिदिशा के सुसाइड का मामला असम में तूल पकड़ने लगा. वहां के लोग पूर्वोत्तर का मामला बता कर तूल देने लगे. इस से कुछ दिनों पहले ही वहां पूर्वोत्तर की एक लड़की से दुष्कर्म हुआ था. तब गुड़गांव पुलिस प्रशासन ने डीजीपी व गृह सचिव के माध्यम से सरकार को प्रस्ताव भिजवाया था कि यहां पूर्वोत्तर के पुलिस अफसरों को तैनात किया जाए. इस प्रस्ताव को अभी सरकार की मंजूरी नहीं मिली है.

अभिनेत्री बिदिशा का मामला जब असम में ज्यादा ही तूल पकड़ने लगा तो वहां के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से फोन पर बात की. उन्होंने बिदिशा के केस की जांच ठीक से कराने की बात कही. इस के बाद मनोहरलाल खट्टर ने गुड़गांव के पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की.

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पुलिस गंभीरता से इस मामले की जांच में जुट गई. पुलिस ने निशीथ के फोन की काल डिटेल्स निकाल कर जांच की. इस जांच में ऐसे 2 फोन नंबर सामने आए, जिन पर निशीथ की काफी देर तक बातें होती थीं. एक फोन नंबर तो ऐसा था, जिस पर उस की शादी से पहले भी बातें होती रही थीं.

पुलिस ने निशीथ को एक दिन के रिमांड पर ले कर इस बारे में पूछताछ की तो उस ने स्वीकार किया कि शादी से पहले उस की एक लड़की से दोस्ती थी, जो अब भी है. उसी लड़की को ले कर बिदिशा उस पर शक करती थी. आगे की कहानी जानने से पहले आइए थोड़ा बिदिशा के बारे में जान लें कि वह चाय बागानों के इलाके से निकल कर बौलीवुड तक कैसे पहुंची?

27 साल की बिदिशा मूलरूप से गुवाहाटी के रहने वाले अश्वनी कुमार की बेटी थी. उन का एक बेटा था कौशिक बेजबरुआ, जो पुणे की किसी कंपनी में नौकरी कर रहा है.

बिदिशा बेहद खूबसूरत थी. उस ने गुवाहाटी के निकोल्स हाईस्कूल से सन 2007 में हायर सैकेंडरी की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की. पढ़ाई के साथसाथ वह स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. उस की आवाज भी बड़ी मधुर थी, इसलिए वह गाने भी गाती थी.

इस के अलावा टीवी पर डांस देखतेदेखते बिदिशा ने डांस भी सीख लिया था. बिहू डांस की तो वह इतनी शौकीन थी कि स्कूल के अलावा वह सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भी बिहू डांस करने जाती थी. उस के डांस और गानों पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठते थे. फिल्म अभिनेत्री सोनम कपूर और कोंकणा सेन शर्मा की वह बड़ी फैन थी.

स्कूली पढ़ाई पूरी होने के बाद बिदिशा ने गुवाहाटी के कौटन कालेज से इंगलिश (लिटरेचर) से ग्रैजुएशन किया. कालेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती रही. अभ्यास करतेकरते वह एक अच्छी सिंगर बन गई.

उन्हीं दिनों उस की मुलाकात मशहूर पत्रकार अर्नब गोस्वामी से हुई. वह उन से इतनी प्रभावित हुई कि उस ने पत्रकार बनने का निर्णय ले लिया. ग्रैजुएशन करने के बाद उस ने दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट औफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया.

बिदिशा ने तमाम नाटकों में अभिनय किया था, जिन में उस की अलगअलग भूमिकाओं की खूब सराहना हुई थी. दर्शकों से मिलने वाले इस प्यार ने उसे नया फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. कहां तो उस ने पत्रकार बनने के लिए कोर्स किया था, लेकिन अब वह कुछ और ही सोचने लगी थी. इसी के चलते पत्रकार बनने के बजाय उस ने अभिनय के क्षेत्र को चुन लिया. सुंदर तो वह थी ही, साथ ही उस की फिगर भी बहुत अच्छी थी. कभीकभी वह अपनी सुंदरता और फिगर की तुलना बौलीवुड की नई अभिनेत्रियों से करती तो खुद को उन से बेहतर पाती.

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फलस्वरूप गायिका के साथसाथ उस ने अभिनेत्री बनने के सपने संजोने शुरू कर दिए. लेकिन उस के सामने समस्या यह थी कि फिल्म इंडस्ट्री में उस का कोई गौडफादर नहीं था, जो फिल्म इडस्ट्री में उस की एंट्री करा देता. फिर भी उस ने हिम्मत नहीं हारी और मुंबई चली गई.

फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री करने के लिए हजारों लड़कियां मुंबई में रह कर स्ट्रगल करती रहती हैं. विभिन्न डायरेक्टरों और प्रोड्यूसरों के पास चक्कर लगातेलगाते उन के सैंडल, जूते घिस जाते हैं. इन में तमाम लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जो फिल्मों में रोल पाने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार रहती हैं. मुंबई पहुंच कर बिदिशा भी स्ट्रगल करने वाली लड़कियों में शामिल हो गई.

मुंबई में बिदिशा की मुलाकात निशीथ झा से हुई. निशीथ गुजरात का रहने वाला था. पहले वह ओएनजीसी में अच्छे पद पर नौकरी करता था. नौकरी छोड़ कर वह मुंबई में वह बिजनैस करने लगा था. अच्छे रसूख वाले निशीथ के संबंध फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों से थे.

निशीथ की कोशिश से बिदिशा को रणबीर कपूर की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में अभिनय करने का मौका मिल गया. इस फिल्म में बिदिशा ने बिहू डांस किया था. फिल्म में काम मिलने से बिदिशा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस की निशीथ से अच्छी दोस्ती हो गई. धीरेधीरे उन की यह दोस्ती प्यार में बदल गई. घर वालों की मरजी से सन 2016 में दोनों की शादी हो गई. निशीथ का मुंबई में ही औफिस था. उस में काम करने वाली एक लड़की से उस की गहरी दोस्ती थी. घर पहुंच कर भी वह उस से बातें करता रहता था. उस के अलावा वह और भी कई लड़कियों से फोन पर बातें करता था.

कुछ दिनों तक तो बिदिशा यह सब देखती रही, पर बाद में उस ने पति को टोकना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, उस ने अपने स्तर से पता लगा लिया कि निशीथ के एक और लड़की से गहरे संबंध हैं. बिदिशा ने इस बारे में उस से बात की तो उस ने उसे समझाते हुए कहा कि जिस लड़की को ले कर वह उस पर शक कर रही है, उस से केवल उस की दोस्ती है. इस से अलावा उस से कोई संबंध नहीं है.

पति पर शक

पर बिदिशा के दिमाग में शक बैठ गया था. शक ऐसी बीमारी है, जो मतभेद होने पर और बढ़ती है. बिदिशा क्या कोई भी युवती इस बात को हरगिज स्वीकार नहीं कर सकती कि उस का पति किसी और महिला से संबंध रखे. जब पति ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया तो उस ने पति की शिकायत अपनी मां से कर दी.

मांबाप ने बेटी की गृहस्थी में इसलिए दखल नहीं दिया कि अभी कुछ दिन पहले तो दोनों की शादी हुई है. दखल देने से कहीं उन के संबंधों में दरार न आ जाए, इसलिए पिता अश्वनी ने बेटी को ही समझाया और निशीथ से भी बात की.

बिदिशा की मायके वालों से शिकायत करने की बात निशीथ को अच्छी नहीं लगी. इस का नतीजा यह निकला कि बिदिशा और निशीथ के बीच विवाद बढ़ गया. चूंकि बिदिशा अपने कैरियर के लिए चिंतित रहती थी, इसलिए वह पारिवारिक तनाव में उलझना नहीं चाहती थी. पर उस के दिमाग में पति को ले कर ऐसा शक बैठ गया था, जो निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था.

निशीथ उसे यकीन दिलाता रहता था कि उस के किसी भी लड़की से गलत संबंध नहीं हैं. पर बिदिशा उस की बात मानने को तैयार नहीं थी. घर में रोजरोज कलह न हो, इस के लिए निशीथ ने 5 जुलाई, 2017 को गुड़गांव के सुशांत लोक में एक फ्लैट किराए पर लिया और बिदिशा से कहा कि जब तक उस का मन करे वह यहां रहे और जब मन करे मुंबई आ जाए.

इतना ही नहीं, निशीथ ने यह भी कहा कि वह किसी और हिंदी फिल्म में उस के लिए काम तलाश रहा है. पति की बात मान कर बिदिशा गुड़गांव आ गई. गुड़गांव वाले फ्लैट में बिदिशा अकेली रहती थी. मन होने पर जब वह पति को फोन करती, उस का नंबर अकसर व्यस्त मिलता.

इस पर बिदिशा का शक बढ़ता गया और वह परेशान रहने लगी. जब कभी वह मांबाप को फोन कर के मन की बात बताती तो वे उसे समझाते हुए उस का डिप्रेशन दूर करने की कोशिश करते. धीरेधीरे वह इस तरह हतोत्साहित हो गई कि उसे यह जीवन नीरस लगने लगा.

बिदिशा ने पति को फोन किया तो बातचीत में उसे लगा कि बिदिशा की तबीयत ठीक नहीं है. उस ने उस से अपना खयाल रखने को कहा. उस दिन बिदिशा इतनी हताश हो गई कि गले में फंदा लगा कर पंखे से लटक गई, जिस से उस की मौत हो गई. शाम को निशीथ ने बिदिशा को फोन किया तो उस का फोन नहीं उठा.

गुड़गांव में उस का कोई जानकार तो था नहीं, जिसे वह फ्लैट में जा कर देखने को कहता. तब उसे उस ब्रोकर की याद आई, जिस के माध्यम से उस ने फ्लैट किराए पर लिया था. उसी ब्रोकर से उस ने पत्नी की तबीयत खराब होने की बात कह कर फ्लैट पर जाने को कहा.

जब ब्रोकर उस के फ्लैट पर पहुंचा तो पता चला कि मशहूर गायिका और अभिनेत्री बिदिशा बेजबरुआ की जीवनलीला समाप्त हो चुकी है. पुलिस ने निशीथ से पूछताछ कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया. केस की विवेचना एएसआई अर्जुन कर रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित

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